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                <title>self-reliance - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <title>खाद्य तेल की खपत कम करने की पीएम मोदी की अपील का स्वागत, आत्मनिर्भर भारत की दिशा में बड़ा कदम</title>
                                    <description><![CDATA[प्रधानमंत्री की खाद्य तेल उपभोग कम करने की अपील का व्यापारिक संगठनों ने स्वागत किया है। भारत अपनी खपत का 60% आयात करता है। राजस्थान, जहाँ सरसों उत्पादन 60 लाख टन तक पहुँच चुका है, अब 120 लाख टन का लक्ष्य रखकर देश को आयात मुक्त और खाद्य तेल में आत्मनिर्भर बनाने की ओर अग्रसर है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/pm-modis-appeal-to-reduce-consumption-of-edible-oil-welcomed/article-153459"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-05/raja.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा खाद्य तेल के उपभोग को कम करने की अपील का व्यापारिक और औद्योगिक संगठनों ने स्वागत किया है। भारतीय उद्योग व्यापार मंडल के राष्ट्रीय अध्यक्ष बाबू लाल गुप्ता ने कहा कि वैश्विक संकट और बढ़ती आयात निर्भरता के दौर में देश को आत्मनिर्भर बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ना होगा। देश में प्रतिवर्ष लगभग 255 लाख टन खाद्य तेल की खपत होती है, जिसमें से करीब 145 लाख टन तेल आयात किया जाता है। भारत में पॉम ऑयल मुख्य रूप से इंडोनेशिया और मलेशिया से, सोयाबीन ऑयल अमेरिका और ब्राजील से तथा सनफ्लावर ऑयल रूस और यूक्रेन से आयात होता है। </p>
<p>ऐसे में वैश्विक परिस्थितियों का सीधा असर भारतीय बाजार और उपभोक्ताओं पर पड़ता है। बाबू लाल गुप्ता ने कहा कि राजस्थान ने सरसों उत्पादन के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति की है। राज्य में सरसों का उत्पादन पहले 30 लाख टन था, जो बढ़कर 60 लाख टन तक पहुंच चुका है और भविष्य में इसे 120 लाख टन तक ले जाने की क्षमता है। उन्होंने केंद्र सरकार से मांग की कि राजस्थान को “सरसों उत्पादक राज्य” के रूप में विशेष पहचान दी जाए, ताकि किसानों को प्रोत्साहन मिल सके और देश खाद्य तेल के मामले में आत्मनिर्भरता की ओर तेजी से बढ़ सके। उन्होंने कहा कि यदि देश में घरेलू उत्पादन को बढ़ावा दिया जाए और खाद्य तेल के अनावश्यक उपभोग को नियंत्रित किया जाए तो विदेशी आयात पर निर्भरता कम होगी तथा देश की अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>बिजनेस</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 11 May 2026 18:29:15 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>प्रतिभा और मेहनत के दम पर प्रेरणा का स्त्रोत बनी बालिकाएं</title>
                                    <description><![CDATA[प्रशिक्षण देने वाली संस्थान की निदेशक ने बताया कि बच्चियां बेहद जिज्ञासु और मेहनती हैं।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/the-girls-have-become-a-source-of-inspiration-on-the-basis-of-talent-and-hard-work/article-126442"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-09/copy-of-news-(1)9.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। संघर्ष भले कठिन हो, लेकिन संकल्प और मेहनत से हर सपना पूरा किया जा सकता है इन पंक्तियों को चरितार्थ कर रही नारी निकेतन संस्थान अधीक्षक अंशुल मेहंदीरत्ता जो कि सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग द्वारा संचालित नांता स्थित नारी निकेतन में रह रही बालिकाएं अपनी प्रतिभा और मेहनत के दम पर समाज के लिए प्रेरणा का स्त्रोत बनी हुई है। निकेतन की बच्चियां अनुशासन और नियमित प्रशिक्षण से न केवल आत्मनिर्भर बन रही हैं बल्कि वेस्ट मटेरियल को उपयोगी वस्तुओं में बदलकर पर्यावरण संरक्षण का संदेश भी दे रही हैं। अधीक्षक ने बताया कि नारी निकेतन में रहने वाली बालिकाओं को विभिन्न संस्थाओं और प्रशिक्षण केंद्रों की मदद से सिलाई, कढ़ाई, पेंटिंग व हस्ताकला जैसे अन्य प्रशिक्षण दिया जाता है। इन प्रशिक्षणों के दौरान बच्चियां अपनी रुचि व स्टॉफ की मदद से हुनर सीखकर आत्मनिर्भरता की ओर कदम बढ़ा रही हैं।</p>
<p><strong>वेस्ट मटेरियल से ये बना रहे आइटम </strong><br />कांच की बोतल पर पेंटिंग करके उसको घर पर सजावट के काम में लाना, वेस्ट कपड़े से मांगलिक कार्यों में दिए जाने वाले लिफाफे बनाया, कपड़े से विभिन्न प्रकार के दीवार हैंगिंग, साइट बैग, टोकरियां, शो-पीस, दीवार हैंगिंग, बैग और सजावटी सामान सहित आकर्षक व उपयोगी वस्तुएं तैयार कर रही हैं।</p>
<p><strong>इन प्लेटफॉर्म पर बेचा जाता है </strong><br />अधीक्षक ने बताया कि इन वस्तुओं की प्रदर्शनी समय-समय पर शहर में आयोजित होने वाले विभिन्न त्यौहार जिनमे रक्षाबंधन, दीपावली और दशहरे सहित अन्य विभिन्न स्थानों पर प्रदर्शनी के दौरान बेचे जाते है। बनाए सामान प्रदर्शनी में खरीददारी करने आने वाले देखकर आश्चर्यचकित हो जाते है और जमकर सराहना करते है। प्रशिक्षण देने वाली संस्थान की निदेशक भारतीय कौल ने बताया कि बच्चियां बेहद जिज्ञासु और मेहनती हैं। उन्हें थोड़ी सी दिशा मिलते ही वे नए-नए डिजाइन और आइडिया पर काम करने लगती हैं। कुछ बच्चियां तो मोबाइल पर विभिन्न प्रकार की डिज्ञाइन देखकर भी सामान बनाती है। प्रशिक्षण पूरा करने के बाद बालिकाएं शादी होने के बाद भी सामान बनाकर आत्मनिर्भर बन रही हैं।</p>
<p><strong>इनका कहना</strong><br />नारी निकेतन की बालिकाएं किसी भी रूप से सामान्य बच्चियों से कम नहीं हैं। बस उन्हें अवसर और मार्गदर्शन की जरूरत होती है। <br /><strong>- अंशुल मेहंदीरत्ता, नारी निकेतन संस्थान अधीक्षक </strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 10 Sep 2025 16:24:41 +0530</pubDate>
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