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                <title>वाइल्ड लाइफ इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया खोज रहा मुकुंदरा में बीमारियां : टाइगर रिजर्व मैनेजमेंट में मिलेगी मदद, बीमारियों व इंफेक्शन से बचाना उद्देश्य</title>
                                    <description><![CDATA[गत वर्षों में लगातार बाघों की मौत के बाद उठाया कदम। 
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/wild-life-institute-of-india-is-looking-for-diseases-in-mukundra/article-126650"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-09/_400-px)-(4)3.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। मुकुंदरा हिल्स टाइगर रिजर्व में मध्यप्रदेश व छत्तीसगढ़ से टाइगर-टाइग्रेस लाने से पहले वन विभाग एमएचटीआर में डिजीज सर्विलांस सर्वे करवा रहा है। वाइल्ड लाइफ इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया (डब्ल्यूआईआई) ने मुकुंदरा हिल्स टाइगर रिजर्व में बाघों की आबादी को संरक्षित व सुरक्षित करने के लिए सर्वे शुरू किया है। ताकि, जंगल और आसपास के इलाकों के जानवरों में कोई बीमारी है तो उसका पता लग सके। यह डिजीज सर्विलांस सर्वे को दरा रेंज में बने 82 वर्ग किमी के घने जंगल में किया जा रहा है। गौरतलब है कि वर्ष 2020 से 2023 के बीच अचानक बाघ व बाघिनों की मौत के मामले सामने आए थे। जिसमें बीमारियों का भी अंदेशा जताया गया। ऐसे में वन विभाग द्वारा बाहरी प्रदेशों से बाघ लाने से पहले यह सर्वे करवाया जा रहा है। </p>
<p><strong>वाइल्ड एनीमल को बीमारियों व इंफेक्शन से बचाना उद्देश्य</strong><br />मुकुंदरा के वन्यजीव चिकित्सक तेजेंद्र सिंह रियाड़ ने कहा कि रिजर्व के आसपास बसे गांवों में पालतू पशु चराई के लिए जंगल में आ जाते हैं, ऐसे में उनमें यदि कोई बीमारी हो और वह जंगल में किसी वाइल्ड एनिमल का शिकार हो जाता है तो उसे वह बीमारी लग सकती है। ऐसी संभावनाओं को देखते हुए यह सर्वे किया जा रहा है, ताकि पिकोशन रखा जा सके।  </p>
<p><strong>टाइगर रिजर्व मैनेजमेंट में मिलेगी मदद</strong><br />संभागीय मुख्य वन संरक्षक एवं क्षेत्र निदेशक सुगनाराम जाट ने बताया कि यह सर्वे गत वर्ष से शुरू हुआ था। पहले फेज के सैंपल एकत्रित हुए हैं, जिनका विशलेषण डब्ल्यूएआई द्वारा किया जा रहा है।  फिलहाल, हमें रिपोर्ट नहीं मिली है, लेकिन इसकी रिपोर्ट के आधार पर रिजर्व मैनेजमेंट में काफी मदद मिलेगी।  </p>
<p><strong>प्रथम फेज के सैंपल कलेक्ट, विशलेषण जारी </strong><br />उन्होंने बताया कि सर्वें में यह भी देखा जाता है कि पालतू पशु से फैलने वाली बीमारियों के संबंध में भी जानकारी ली जाती है। जिसका विशलेषण कर प्रीवेंटली डिसीजन लिए जा सके। इस रिपोर्ट के आधार पर टाइगर रिजर्व में बीमारियों से बाघों को बचाने के लिए क्या-क्या कदम उठाए जा सकते हैं, उनकी भी जानकारी मिल जाएगी। अभी पहले फेज में सर्वे सैंपल हो गए हैं, जिनका विशलेषण किया जा रहा है। रिजर्व मैनेजमेंट में यह काफी मददगार हो सकता है। अगर पता चलता है की मवेशियों में कोई बीमारी है या फिर कोई उन बीमारियों को कैसे रोका जा सकता है? उसको लेकर एक पूरी एसओपी भी बनाई जा सकती है।</p>
<p><strong>प्रे-बेस व डोमेस्टिक एनिमल के इंटरेक्शन से बीमारियों का खतरा </strong><br />सर्वे के दौरान रिजर्व के शाकाहारी वन्यजीवों के स्केट के नमूने लिए जाते हैं। इसके अलावा रिजर्व के आसपास बसे गांवों के पालतु पशु भी रिजर्व क्षेत्र में पहुंच जाते हैं। ऐसे में डिजीज सर्विलांस सर्वे में उन पर भी स्टडी होती है।  ज्यादातर शाकाहारी जानवरों के ही नमूने लिए जाते हैं। क्योंकि, यह जंगल में प्रे बेस के साथ विचरण करते हैं और घास भी खाते हैं। ऐसे में हार्बिवोर्स और डोमेस्टिक एनिमल का इंटरेक्शन होता है।  इससे बीमारियां भी इधर से उधर चले जाने का खतरा बना रहता है। </p>
<p><strong>वर्तमान में चार टाइगर व एक शावक रिजर्व में </strong><br />मुकुंदरा में वर्तमान में चार टाइगर हैं। जिसमें एक बाघ व तीन बाघिन हैं। वहीं, एक शावक है।  बाघ एमटी-5 को साल 2022 में रणथंभौर से यहां शिफ्ट किया गया। इसके बाद मई 2023 में बाघिन एमटी-4 की मौत हो गई थी। वह गर्भवती थी  उसके गर्भ से तीन बच्चे थे, जो मृत मिले थे। इसके बाद एमटी 6 बाघिन को रणथम्भौर से यहां शिफ्ट किया गया। वहीं, अभेड़ा बायोलॉजिकल पार्क से रिवाइल्डिंग के लिए 11 दिसम्बर 2024 को फीमेल शावक को मुकुंदरा रिलीज किया गया,जो अभी एनक्लोजर में है। इसके बाद इसी वर्ष में रणथम्भौर से एक और बाघिन कनकटी को मुकुंदरा में शिफ्ट किया गया।    </p>
<p>मुकुंदरा टाइगर रिजर्व में डिजीज सर्विलांस सर्वे करवाया जा रहा है। यह सर्वे गत वर्ष से शुरू हुआ है। प्रथम फेज के सैंपल एकत्रित हो गए हैं, जिनका विशलेषण किया जा रहा है।  फिलहाल, हमें रिपोर्ट नहीं मिली है। इसकी रिपोर्ट के आधार पर रिजर्व मैनेजमेंट में काफी मदद मिलेगी। हालांकि, हमने डब्ल्यूएआई को रिपोर्ट देने को पत्र भी लिखा है। <br /><strong>- सुगनाराम जाट, संभागीय मुख्य वन संरक्षक एवं क्षेत्र निदेशक मुकुंदरा </strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 12 Sep 2025 15:56:03 +0530</pubDate>
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