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                <title>कहीं अधूरे कामों पर नाराजगी, कहीं मूलभूत सुविधाओं का इंतजार</title>
                                    <description><![CDATA[जनता का सवाल : वादे फिर होंगे, लेकिन क्या इस बार वे पूरे भी होंगे?
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/resentment-over-incomplete-projects--a-long-wait-for-basic-amenities/article-163732"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-08/111200-x-600-px)-(5)29.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। नगर निगम चुनाव प्रक्रिया चलने के साथ ही शहर के छह वार्डों की ग्राउंड ऑडिट में विकास कार्यों की जमीनी हकीकत सामने आई है। कई क्षेत्रों में सड़क, सफाई, नालियों के निर्माण और मूलभूत सुविधाओं से जुड़ी समस्याएं आज भी जस की तस बनी हुई हैं। लोगों का कहना है कि चुनाव के समय जिन उम्मीदों और विकास के वादों के साथ जनप्रतिनिधि उनके बीच पहुंचे थे, उन वादों को पूरी तरह धरातल पर उतारा नहीं जा सका। कहीं विकास कार्य शुरू होकर अधूरे रह गए, कहीं काम तो हुए लेकिन गुणवत्ता और रखरखाव की कमी सामने आई, जबकि कुछ इलाकों में जरूरी काम अब तक शुरू ही नहीं हो सके। ऐसे में लोगों की नाराजगी चुनावी माहौल से पहले साफ दिखाई देने लगी है। अगले महीने होने वाले वार्ड पार्षद चुनाव से पहले यह ग्राउंड रिपोर्ट नए और पुराने, दोनों तरह के दावेदारों के लिए एक संदेश है। जनता अब केवल आश्वासनों से संतुष्ट होने के बजाय काम का हिसाब और भविष्य की स्पष्ट योजना जानना चाहती है। सड़क, सफाई, नाली, स्ट्रीट लाइट, पार्क और सामुदायिक भवन जैसे मुद्दे सीधे लोगों के दैनिक जीवन से जुड़े हैं। ऐसे में इस बार चुनावी मैदान में उतरने वाले जनप्रतिनिधियों के सामने चुनौती केवल वोट मांगने की नहीं, बल्कि भरोसा जीतने और विकास को जमीन पर साबित करने की होगी।</p>
<p><strong>कोटड़ी से बजरंग नगर तक समस्याओं की अलग तस्वीर</strong><br />वार्डों की पड़ताल में अलग-अलग इलाकों में समस्याओं का स्वरूप भले ही अलग नजर आया, लेकिन मूल चिंता सुविधाओं की कमी ही रही। कोटड़ी क्षेत्र में सफाई व्यवस्था और स्पीड ब्रेकर से जुड़ी समस्याओं को लेकर लोग परेशान हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि नियमित सफाई नहीं होने से कई स्थानों पर गंदगी बनी रहती है, वहीं जरूरत वाले स्थानों पर उचित ब्रेकर नहीं होने से आवागमन और सुरक्षा को लेकर भी चिंता बनी रहती है।<br />उधर, बजरंग नगर क्षेत्र में कई स्थानों पर कचरा सड़कों और खुले स्थानों पर फैला नजर आया। लोगों का कहना है कि सफाई व्यवस्था को नियमित और प्रभावी बनाने की जरूरत है, क्योंकि गंदगी केवल क्षेत्र की सुंदरता ही खराब नहीं करती, बल्कि बारिश के दिनों में नालियों के जाम होने और बीमारियों की आशंका भी बढ़ा देती है। सरस्वती कॉलोनी में सड़क पर बने चैंबरों के क्षतिग्रस्त ढक्कन लोगों के लिए परेशानी और हादसे का कारण बन सकते हैं। स्थानीय निवासियों का कहना है कि इन समस्याओं की जानकारी कई बार संबंधित विभागों और जनप्रतिनिधियों तक पहुंचाई गई, लेकिन स्थायी समाधान की प्रतीक्षा अब भी बनी हुई है।</p>
<p><strong>गार्डन और सामुदायिक भवनों की भी दरकार</strong><br />कई इलाकों में लोगों ने गार्डन और सामुदायिक भवनों की कमी को भी जाहिर किया। जिन क्षेत्रों में ये सुविधाएं नहीं हैं, वहां स्थानीय लोगों को सामाजिक और सामुदायिक आयोजनों के लिए उचित स्थान नहीं मिल पाता। वहीं जहां गार्डन बने हुए हैं, वहां भी पर्याप्त रोशनी की व्यवस्था नहीं होने से शाम के समय लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ता है। बच्चों, महिलाओं और बुजुर्गों के लिए सुरक्षित और सुविधायुक्त सार्वजनिक स्थानों की मांग लगातार उठ रही है। लोगों का कहना है कि वे विकास के विरोध में नहीं, बल्कि अधूरे विकास के खिलाफ सवाल उठा रहे हैं। उनकी सबसे बड़ी अपेक्षा यही है कि चुनावी वादे केवल मंचों और प्रचार तक सीमित न रहें, बल्कि उनकी समयबद्ध समीक्षा हो। ह्लजिस उम्मीद के साथ जनप्रतिनिधि वोट मांगने आए थे और जिस भरोसे के साथ हमने उन्हें वोट दिया, वह उम्मीद पूरी नहीं हो सकी,ह्व यह समस्या कई वार्डों के लोगों की बातचीत में साफ सुनाई दी।</p>
<p><strong>वार्ड नंबर व एरिया</strong><br /><strong>वार्ड नंबर 66</strong> में फकीरों की मस्जिद के पीछे का क्षेत्र, कन्या छात्रावास के पीछे का क्षेत्र, सामुदायिक भवन के आसपास का क्षेत्र, भूतेश्वर मंदिर, हरदौल बेहरमशाला, शमशान के बांये भाग का क्षेत्र शामिल है।</p>
<p><strong>वार्ड नंबर 67</strong> में रेगर मोहल्ला, कोटड़ी बड़ी मस्जिद, छोटी मस्जिद, चित्तौड़ा की दुकान, जनता डेयरी, खंडेलवाल धर्मशाला का समस्त क्षेत्र, पेट्रोल पंप के पीछे का क्षेत्र और दादी शाल्लो का चौक शामिल हैं।</p>
<p><strong>वार्ड नंबर 68</strong> में पंचवटी कॉलोनी, अल्फा कॉम्प्लेक्स, न्यू गोपाल विहार, गणपति कॉलोनी, अटवाल नगर, आदित्य आवास कॉलोनी, वैभव नगर, बजरंग नगर, पुलिस लाइन, नयागांव और केसर बाग आदि क्षेत्र शामिल हैं।</p>
<p><strong>वार्ड नंबर 69 </strong>में ग्रामीण पुलिस लाइन रोड प्रथम, लाजपत नगर, सूर्य नगर, जय अंबे नगर, अटवाल नगर लिंक रोड, आदित्य नगर, फ्रेंड्स कॉलोनी, भारत विहार, सुखधाम कॉलोनी, जय हिंद नगर और गोपाल विहार प्रथम क्षेत्र शामिल हैं।</p>
<p><strong>वार्ड नंबर 70</strong> में प्रगति स्कूल, प्रगति नगर, रेलवे सोसाइटी, 80 बीघा जमीन, आरके नगर, जय हिंद नगर, पुलिस लाइन, शिव नगर, गायत्री विहार प्रथम एवं द्वितीय, एसपी कार्यालय, मन्ना कॉलोनी, शमशान, सुलभ कॉम्प्लेक्स, गणेश नगर, सरकारी स्कूल, अमृत कॉलोनी, खारा कुआं, बालाजी की बगीची, मस्जिदवास और सैन्य क्षेत्र शामिल हैं।</p>
<p><strong>वार्ड नंबर 71</strong> में सरस्वती कॉलोनी, जेडीबी कॉलेज, राजेंद्र विहार, आकाशवाणी कॉलोनी, अमृत कलश, गुलाब बाग और गायत्री विहार शामिल हैं।</p>
<p><strong>वार्डवासी उदयभान सिंह ने बताया</strong><br />वार्ड क्षेत्र में साफ-सफाई की समस्या लगातार बनी हुई है। कई बार लोगों को अपनी समस्याओं का समाधान खुद ही निकालना पड़ता है। चुनाव के बाद जनप्रतिनिधि भी क्षेत्र में कम नजर आते हैं, ऐसे में वार्डवासियों को अपनी समस्याएं किसके सामने रखें, यह सबसे बड़ी परेशानी है। उन्होंने नियमित सफाई व्यवस्था और जनप्रतिनिधियों की सक्रियता की मांग की।</p>
<p><strong>वार्डवासी जुबेर पठान ने बताया</strong><br />वार्ड की स्थिति संतोषजनक नहीं है। कई स्थानों पर नालियां टूटी हुई हैं और स्पीड ब्रेकर भी क्षतिग्रस्त पड़े हैं। क्षेत्र में साफ-सफाई का अभाव बना रहता है, जिससे लोगों को परेशानी उठानी पड़ती है। उन्होंने कहा कि समय पर नालियों और टूटे ब्रेकरों की मरम्मत के साथ नियमित सफाई व्यवस्था सुनिश्चित की जानी चाहिए।</p>
<p><strong>पूर्व पार्षद राजेंद्र सुवालका का कहना</strong><br />कार्यकाल में वार्ड क्षेत्र की हर कॉलोनी तक सीसी रोड का निर्माण करवाने का प्रयास किया गया। गायत्री विहार में ठेकेदार अधूरा काम छोड़कर चला गया, जिससे कुछ विकास कार्य पूरे नहीं हो सके। इसके बाद सरकार बदलने के कारण भी शेष कार्य आगे नहीं बढ़ पाए और कई योजनाएं अधूरी रह गईं।</p>
<p><strong>पूर्व पार्षद विजय लक्ष्मी का कहना</strong><br />वार्ड क्षेत्र में नियमित रूप से कचरा संग्रहण के लिए वाहन चार-पांच बार आते हैं, लेकिन स्वच्छता के लिए जनता की भागीदारी भी जरूरी है। उन्होंने लोगों से वार्ड में गंदगी नहीं फैलाने की अपील की। वार्ड क्षेत्र में सुलभ शौचालय का निर्माण भी करवाया गया और पांच साल के कार्यकाल में विकास कार्यों के लिए लगातार प्रयास किए गए।</p>
<p><strong>पूर्व पार्षद जियाउद्दीन का कहना</strong><br />उनके कार्यकाल में वार्ड क्षेत्र में पानी की पाइपलाइन डलवाने के साथ आवश्यक विकास कार्य करवाए गए। गणपति लाइन के अंदर सीसी रोड का निर्माण भी कराया गया, जिससे क्षेत्रवासियों को बेहतर आवागमन की सुविधा मिली। पूरे कार्यकाल के दौरान साफ-सफाई व्यवस्था पर विशेष ध्यान रखा गया और वार्ड की मूलभूत समस्याओं के समाधान के प्रयास किए गए।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 24 Aug 2026 15:20:42 +0530</pubDate>
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                <title>बुनियादी सुविधाओं का अभाव : टूटी सड़कें, अंधेरा और कचरे के ढेर की कड़वी सच्चाई</title>
                                    <description><![CDATA[कोटा ग्राउंड रिपोर्ट: वार्ड 60 से 65 में विकास के दावों की खुली पोल।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/lack-of-basic-amenities--the-harsh-reality-of-broken-roads--darkness--and-garbage-heaps/article-163730"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-08/111200-x-600-px)-(3)51.png" alt=""></a><br /><p>कोटा।शहर के प्रमुख इलाकों में शामिल वार्ड 60 से 65 की ग्राउंड रिपोर्ट में विकास के दावों की अलग तस्वीर सामने आई। कहीं टूटी सड़कें परेशानी बढ़ा रही हैं तो कहीं रोड लाइट और सफाई व्यवस्था लोगों के लिए बड़ी समस्या बनी हुई है। कई जगह सड़क और नालियों का निर्माण तक नहीं हुआ है। वार्ड 63 के छावनी क्षेत्र में टूटी सड़कों और जगह-जगह बने कचरा पॉइंट की समस्या सामने आई। सफाई व्यवस्था कमजोर होने से कचरा पॉइंट भी परेशानी का कारण बने हुए हैं। लोगों ने कहा कि सड़क, सफाई और रोड लाइट जैसी सुविधाएं हर वार्ड की पहली जरूरत हैं, लेकिन इन पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया जा रहा। वार्ड 60, 61 और 62 में भी सड़क, रोड लाइट और सफाई को लेकर लोगों की शिकायतें सामने आईं। कई जगह सड़कें खराब हैं। पर्याप्त रोशनी नहीं होने से शाम के बाद परेशानी बढ़ जाती है। सफाई व्यवस्था को लेकर भी लोगों में नाराजगी है।</p>
<p><strong>वार्ड में सड़क-नाली का इंतजार</strong><br />वार्ड नंबर 64 में स्थानीय लोगों का आरोप है कि पार्षद समस्या दूर करवाना तो दूर, उनकी समस्या पूछने तक नहीं आते। वार्डवासियों ने कहा कि चुनाव से पहले उनसे कई बड़े-बड़े वादे किए गए थे। विकास कार्य करवाने और समस्याओं का समाधान करने की बात कही गई थी, लेकिन चुनाव जीतने के बाद कई वादे अधूरे रह गए। लोगों का कहना है कि अब जब वे अपनी समस्याएं बताते हैं तो सरकार के बीच में चले जाने का तर्क दिया जाता है।</p>
<p><strong>पूर्व पार्षद लेखराज योगी ने बताया</strong><br />वार्ड का एक बड़ा हिस्सा पहले कच्ची बस्ती और डूबत क्षेत्र में आता था। मेरे कार्यकाल में इन क्षेत्रों को व्यवस्थित और विकसित करने की दिशा में काम किया गया। वार्ड की सबसे बड़ी समस्या नाले को लेकर थी, जिसके कारण जलभराव और अन्य परेशानियां बनी रहती थीं।</p>
<p><strong>पूर्व पार्षद शिवांगी सोनी ने बताया</strong><br />वार्ड क्षेत्र में आने वाले विशाल मार्केट में बना नाला लंबे समय से हादसों का कारण बना हुआ था। नाले को व्यवस्थित कराया गया। वार्ड में सीवरेज लाइन डलवाने के साथ बंगाली कॉलोनी के गार्डन का जीर्णोद्धार भी करवाया गया। अधिकारियों ने वार्ड के साथ भेदभाव किया, जिसके चलते कई जरूरी कार्य आज भी अधूरे पड़े हैं।</p>
<p><strong>पूर्व पार्षद इसरार मोहम्मद ने बताया</strong><br />वार्ड में वर्षों पुरानी सीवरेज व्यवस्था लोगों के लिए परेशानी का कारण बनी हुई थी। कार्यकाल में पुरानी सीवरेज लाइन को हटाकर नई लाइन डलवाई गई। वार्ड में बने नालों का सीसी निर्माण करवाने के साथ पेयजल व्यवस्था को मजबूत करने के लिए नई पानी की लाइन भी डलवाई गई।</p>
<p><strong>पूर्व पार्षद ऐश्वर्य श्रृंगी ने बताया</strong><br />वार्ड में लंबे समय से चली आ रही पेयजल समस्या का स्थायी समाधान करवाया गया। पूरे वार्ड क्षेत्र में रोड लाइट लगवाकर अंधेरे की समस्या को भी दूर किया गया। शिकायत मिलते ही संबंधित अधिकारियों से संपर्क कर उसका समाधान उसी दिन करवाया जाए। जनप्रतिनिधि की सबसे बड़ी जिम्मेदारी जनता के बीच रहकर समस्याओं का समाधान करना है।</p>
<p><strong>वार्डवासी आकाश कश्यप ने कहा</strong><br />वार्ड की मौजूदा स्थिति पर नाराजगी जताते हुए कहा कि क्षेत्र में व्यवस्थाएं लगातार बिगड़ती जा रही हैं। कई जगह सड़कें क्षतिग्रस्त हैं और सफाई व्यवस्था भी पूरी तरह चरमराई हुई है। वर्षों से बने कचरा पॉइंट अब तक नहीं हटाए गए, जिससे गंदगी और बदबू की समस्या बनी रहती है।</p>
<p><strong>वार्डवासी विवेक प्रजापति ने कहा</strong><br />कम से कम दिन में एक बार पूरे वार्ड का भ्रमण करने से क्षेत्र की वास्तविक स्थिति का पता लगाया जा सकता है। कई समस्याएं ऐसी होती हैं, जिनकी जानकारी शिकायत मिलने के बाद नहीं बल्कि मौके पर जाकर ही होती है। इसलिए जनप्रतिनिधि को सक्रिय रहकर जनता से सीधा संवाद करना चाहिए और समस्याओं के समाधान के लिए अधिकारियों से लगातार समन्वय रखना चाहिए।</p>
<p><strong>वार्ड नंबर व क्षेत्र</strong><br /><strong>वार्ड नंबर 60: </strong>न्यू पब्लिक सीनियर सेकेंडरी स्कूल, सर्वोदय कॉलेज ऑफ पैरामेडिकल, शिवाजी पार्क, गुलमोहर पार्क, गवर्नमेंट संस्कृत स्कूल, नूरी जामा मस्जिद आदि क्षेत्र शामिल हैं।</p>
<p><strong>वार्ड नंबर 61</strong>: ईएसआई हॉस्पिटल, आईटीआई कॉलेज, आयशा मस्जिद, न्यू मोटर मार्केट, मंशापूर्ण हनुमान मंदिर, मीणा छात्रावास, महिला पॉलिटेक्निक कॉलेज, चमत्कारेश्वर हनुमान मंदिर, अपना घर आश्रम, कलाल सामुदायिक भवन तथा संजय नगर का आंशिक क्षेत्र शामिल है।</p>
<p><strong>वार्ड नंबर 62:</strong> गोविंद नगर, एसएसएफ चौराहा, सूर्य नगर तथा जेके फैक्ट्री का क्षेत्र शामिल है।</p>
<p><strong>वार्ड नंबर 63:</strong> अहलूवालिया मॉल, पुलिस चौकी, छावनी पुलिस चौकी के पीछे का क्षेत्र, दुर्गा बस्ती, भेरू बस्ती, छावनी रामचंद्रपुरा की गली नंबर 1, 2, 3, 4 व 5, इंडस्ट्रियल एरिया, घेरवाले बाबा के पीछे का क्षेत्र, शीतला माता मंदिर के आसपास का क्षेत्र, बंगाली कॉलोनी, तिलक नगर, पालीवाल कंपाउंड तथा विशाल मार्केट का क्षेत्र आदि शामिल हैं।</p>
<p><strong>वार्ड नंबर 64:</strong> शिव आश्रम के पीछे का क्षेत्र, जेपी कॉलोनी, चमड़ा फैक्ट्री के आसपास का क्षेत्र, राजपूत कॉलोनी, राधा-कृष्ण मंदिर के आसपास का क्षेत्र, शीतला माता मंदिर तथा मंगलेश्वर व्यायामशाला के आसपास का क्षेत्र आदि शामिल हैं।</p>
<p><strong>वार्ड नंबर 65:</strong> गोपेश्वर महादेव मंदिर, तेलियों का मंदिर, तिलक स्कूल, सुलभ कॉम्प्लेक्स, नेशनल टेलर्स के पीछे का क्षेत्र, दुर्गा ड्राईक्लीनर्स के पीछे का क्षेत्र, गोपेश्वर महादेव मंदिर के पीछे का क्षेत्र, जमुना पान भंडार के पीछे का क्षेत्र, जगदीश माईल पूर्व पार्षद के पीछे का क्षेत्र, एक मीनार मस्जिद के पीछे का क्षेत्र, एस पी कॉलोनी का आंशिक भाग तथा शमा कॉलोनी का क्षेत्र शामिल है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 24 Aug 2026 15:18:05 +0530</pubDate>
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                <title>असर खबर का : नयागांव गुजरान में श्मशान निर्माण कार्य के लिए स्वीकृति जारी</title>
                                    <description><![CDATA[दैनिक नवज्योति में प्रमुखता से खबर छपने के महज 24 घंटे में ग्राम पंचायत ने लिया एक्शन। 
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jhalawar/impact-of-news---approval-granted-for-cremation-ground-construction-in-nayagaon-gujran/article-162945"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-08/111200-x-600-px)-(1)59.png" alt=""></a><br /><p>खानपुर। खानपुर उपखंड क्षेत्र के बेसार ग्राम पंचायत के नयागांव गुजरान में मूलभूत सुविधाओं के अभाव और श्मशान घाट की बदहाल स्थिति को लेकर दैनिक नवज्योति टीम ने 12 अगस्त 2026 को प्रमुखता से मुद्दा उठाया था । जिसके बाद महज 24 घंटे में इसका त्वरित असर देखने को मिला है। खबर के माध्यम से ग्रामीणों की समस्याएं सामने आने के बाद ग्राम पंचायत ने श्मशान घाट के विकास की दिशा में पहल की है।</p>
<p>बेसार ग्राम पंचायत के सरपंच मदन लाल वर्मा ने मामले में तत्काल पहल करते हुए श्मशान घाट के लिए प्रशासनिक स्वीकृति प्राप्त करवाई है। इसके तहत राज्य वित्त आयोग षष्ठम् योजना के अंतर्गत कार्य करवाया जाएगा। प्राप्त स्वीकृति के अनुसार कार्य की अनुमानित लागत 1 लाख 20 हजार रुपये निर्धारित की गई है। कार्य को 3 माह की अवधि में पूरा किया जाना प्रस्तावित है।<br />इस संबंध में प्रशासनिक स्वीकृति जारी की गई है। ग्रामीणों की समस्याओं को लेकर प्रकाशित खबर के बाद हुई इस त्वरित कार्रवाई से क्षेत्रवासियों में उम्मीद जगी है। ग्रामीणों ने श्मशान घाट के विकास की प्रशासनिक स्वीकृति मिलने पर खुशी जताते हुए उम्मीद व्यक्त की कि स्वीकृत कार्य जल्द शुरू होकर निर्धारित समय में पूरा होगा। साथ ही ग्रामीणों ने गांव की सड़क और अन्य मूलभूत समस्याओं के समाधान की भी मांग की है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>झालावाड़</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 14 Aug 2026 15:14:49 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>नाहरगढ़ बस स्टैंड पर बदहाल शौचालय, गंदगी-दुर्गंध से यात्री परेशान</title>
                                    <description><![CDATA[अजमेर, पुष्कर और गुना तक बसों का संचालन, लेकिन मूलभूत सुविधाओं का अभाव
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/baran/dilapidated-toilets-at-nahargarh-bus-stand--passengers-distressed-by-filth-and-foul-odor/article-161099"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-07/111200-x-600-px)-(3)4.png" alt=""></a><br /><p>नाहरगढ़। नाहरगढ़ स्थानीय बस स्टैंड पर व्याप्त अव्यवस्थाएं और मूलभूत सुविधाओं का अभाव यात्रियों के लिए बड़ी समस्या बन गया है। बस स्टैंड स्थित सार्वजनिक शौचालय लंबे समय से बदहाल स्थिति में है। नियमित सफाई के बावजूद जल निकासी की समुचित व्यवस्था नहीं होने से परिसर में पानी भराव रहता है, जिससे गंदगी और दुर्गंध फैल रही है। हालात ऐसे हैं कि यात्रियों का बस स्टैंड पर ठहरना भी मुश्किल हो गया है, लेकिन जिम्मेदार विभाग अब तक प्रभावी कदम नहीं उठा पाया है। नाहरगढ़ बस स्टैंड क्षेत्र का प्रमुख परिवहन केंद्र है। यहां से प्रतिदिन अजमेर, पुष्कर सहित प्रदेश के विभिन्न शहरों तथा पड़ोसी राज्य मध्य प्रदेश के गुना के लिए रोडवेज और निजी बसों का संचालन होता है।<br /> दिनभर यात्रियों की आवाजाही के साथ आरोग्य सेवकों की भी आवाजाही आवाजाही बनी रहती है। इसके बावजूद शौचालय की दुर्दशा लगातार बनी हुई है। रात्रि विश्राम करने वाले बस चालक-परिचालकों कहना है कि रात में रुकने की व्यवस्था तो किसी तरह हो जाती है, लेकिन शौचालय की बदहाल स्थिति के कारण उन्हें काफी परेशानी उठानी पड़ती है।</p>
<p><strong>महिला, बच्चे और बुर्जग सबसे अधिक परेशान</strong><br />सबसे अधिक परेशानी महिला यात्रियों, बच्चों और बुजुर्गों को झेलनी पड़ रही है। लंबी दूरी की यात्रा करने वाली महिलाओं को स्वच्छ प्रसाधन सुविधा नहीं मिलने से मानसिक और शारीरिक असुविधा का सामना करना पड़ता है। स्थानीय ग्रामीणों और नियमित यात्रियों का कहना है कि समस्या को लेकर कई बार संबंधित अधिकारियों को अवगत कराया गया, लेकिन अब तक कोई ठोस समाधान नहीं निकला।</p>
<p>जल्द ही सफाई एवं मरम्मत कार्य पूर्ण करवाकर यात्रियों को राहत प्रदान की जाएगी। <br /><strong>-गौरव चौधरी, ग्राम विकास अधिकारी, नाहरगढ़</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>बारां</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 27 Jul 2026 14:28:26 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[kota]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>पिंक टॉयलेट के नाम पर पुरानी सुविधा खत्म : सुविधा के लिए दर-दर भटक रहे ग्रामीण, 15 दिन से काम ठप</title>
                                    <description><![CDATA['पिंक टॉयलेट' का निर्माण तो कागजों में शुरू हो गया, लेकिन धरातल पर प्रशासन ने 15 दिन पूर्व एकमात्र चालू शौचालय को भी ध्वस्त कर दिया। नतीजा यह है कि आज भीषण गर्मी के बीच व्यापारी, राहगीर और विशेषकर ग्रामीण महिलाएं बुनियादी सुविधा के लिए दर-दर भटकने को मजबूर हैं। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/baran/existing-facility-scrapped-in-the-name-of--pink-toilets---work-stalled-for-15-days/article-152869"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-05/pink-toilet-ke-naam-par-purani-suvidha-khatm,-15-din-se-kaam-tap...atru.-dist.-baran.-06may2026.jpg.jpeg" alt=""></a><br /><p>अटरू। अटरू कस्बे के हृदय स्थल और मुख्य व्यापारिक केंद्र हाट चौक में विकास की योजना आमजन के लिए परेशानी का सबब बन गई है। महिलाओं को सुविधा देने के उद्देश्य से 'पिंक टॉयलेट' का निर्माण तो कागजों में शुरू हो गया, लेकिन धरातल पर प्रशासन ने 15 दिन पूर्व एकमात्र चालू शौचालय को भी ध्वस्त कर दिया। नतीजा यह है कि आज भीषण गर्मी के बीच व्यापारी, राहगीर और विशेषकर ग्रामीण महिलाएं बुनियादी सुविधा के लिए दर-दर भटकने को मजबूर हैं। </p>
<p><strong>विकास की अधूरी तैयारी, ढहाया पुराना, 'अधर' में नया.....</strong><br />प्रशासन द्वारा 24 अप्रैल को हाट चौक स्थित पुराने शौचालय को इस वादे के साथ तोड़ा गया था कि यहां जल्द ही आधुनिक पिंक टॉयलेट बनेगा लेकिन विडंबना देखिए कि 15 दिन बीत जाने के बाद भी मौके पर निर्माण कार्य गति नहीं पकड़ सका है। बिना किसी वैकल्पिक व्यवस्था के पुराने ढांचे को जमींदोज करने के फैसले ने प्रशासनिक दूरदर्शिता पर सवाल खड़े कर दिए हैं।</p>
<p><strong>प्रशासनिक पक्ष और आश्वासन</strong><br />प्रशासन का कहना है कि फिलहाल वैकल्पिक व्यवस्था के रूप में महिला पार्क के पास स्थित सुलभ शौचालय का उपयोग किया जा सकता है। अधिकारियों के अनुसार नए पिंक टॉयलेट के निर्माण कार्य को शीघ्र शुरू करने की तैयारी की जा रही है।</p>
<p><strong>मुख्य चुनौतियां और मांग</strong><br />हाट चौक से सुलभ शौचालय की दूरी अधिक होने के कारण विशेषकर महिलाओं, बुजुर्गों और ग्रामीणों को भारी असुविधा का सामना करना पड़ रहा है। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि जब तक निर्माण कार्य पूरा नहीं होता, तब तक चौक के आसपास अस्थायी या मोबाइल शौचालय की व्यवस्था की जानी चाहिए। साथ ही लोगों ने यह भी कहा कि पिंक टॉयलेट जैसी योजना महिलाओं की सुविधा और सम्मान से जुड़ी है, लेकिन निर्माण में हो रही देरी उनकी गरिमा पर प्रतिकूल प्रभाव डाल रही है। ऐसे में प्रशासन को प्राथमिकता के आधार पर कार्य शुरू कर जल्द पूरा करना चाहिए।</p>
<p><strong>साप्ताहिक हाट में महिलाओं के लिए मुश्किल बढ़ीं</strong><br />हाट चौक कस्बे का वह केंद्र है, जहां साप्ताहिक बाजार के दौरान अटरू सहित दर्जनों गांवों की भीड़ उमड़ती है। खरीदारी के लिए आने वाली महिलाओं को शौचालय नहीं होने के कारण कठिनाई झेलनी पड़ रही है। स्थानीय दुकानदारों का कहना है कि प्रशासन ने मलबा डालने और सुविधा छीनने में तो तत्परता दिखाई, लेकिन निर्माण शुरू करने में सुस्ती बरत रहे हैं।</p>
<p>निशान, रंगत करवाकर नींव की खुदाई का कार्य प्रारंभ कर दिया जाएगा।<br /><strong>-मनोज कुमार सिंह, ठेकेदार</strong></p>
<p>एक-दो दिन के भीतर निर्माण कार्य सुचारू रूप से चालू करवा दिया जाएगा।<br /><strong>- योगेन्द्र प्रसाद त्रिवेदी, ईओ, नगरपालिका</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>बारां</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 06 May 2026 15:30:52 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[kota]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>राहुल गांधी का केंद्र पर बड़ा हमला: बोले-स्मार्ट सिटी योजना आम नागरिकों के साथ धोखा, ज़मीनी स्तर पर बुनियादी सुविधाओं में अपेक्षित सुधार नहीं   </title>
                                    <description><![CDATA[विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने केंद्र की स्मार्ट सिटी परियोजना पर तीखा हमला करते हुए इसे विफल करार दिया। उन्होंने कहा कि ₹48,000 करोड़ खर्च होने के बावजूद नागरिकों को स्वच्छ पानी और सुरक्षा जैसी बुनियादी सुविधाएं नहीं मिलीं। राहुल ने धंसती सड़कों और दूषित पानी का हवाला देते हुए योजना को जमीनी हकीकत से दूर बताया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/rahul-gandhis-big-attack-on-the-center-said-smart/article-148518"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-02/rahul-gandhi1.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष एवं लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने स्मार्ट सिटी परियोजना को लेकर केंद्र सरकार पर हमला करते हुए मंगलवार को इसे 'धोखा' करार दिया और कहा कि यह योजना अपने उद्देश्य से भटक गई और आम नागरिकों को इससे कोई फायदा नहीं पहुंचा। राहुल गांधी ने एक बयान में आरोप लगाया कि परियोजना के तहत शहरों के समग्र विकास के बजाय सीमित क्षेत्रों में काम कर उसे बड़ी उपलब्धि के रूप में पेश किया गया, जबकि ज़मीनी स्तर पर बुनियादी सुविधाओं में अपेक्षित सुधार नहीं हुआ।</p>
<p>उन्होंने कहा "कोई भी शहर तब तक ‘स्मार्ट’ नहीं हो सकता, जब तक वह अपने नागरिकों को साफ पानी, स्वच्छ हवा और सुरक्षा जैसी बुनियादी गरिमा उपलब्ध नहीं कराता। स्मार्ट सिटी मिशन के तहत करीब 48 हजार करोड़ रुपये खर्च होने और 97 प्रतिशत परियोजनाओं के पूरे होने का दावा किया गया, लेकिन वास्तविक स्थिति इससे अलग है।" कांग्रेस नेता ने सवाल उठाया कि कितने शहरों में वास्तव में ठोस बदलाव आया और लोगों के जीवन में क्या सुधार हुआ। उन्होंने कहा कि दूषित पानी, खुले सीवर, गिरते पुल और धंसती सड़कें इस योजना की विफलता को उजागर करती हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 31 Mar 2026 14:26:49 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>चम्बल के तीर बिना नीर- सूखे कण्ठ से यात्रा की मजबूरी </title>
                                    <description><![CDATA[संजय नगर रोडवेज बस स्टैण्ड यात्री सुविधाओं के नाम पर फिसड्डी।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/without-water-on-the-banks-of-the-chambal-river--the-compulsion-to-travel-through-a-dry-gorge/article-143928"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-02/12200-x-600-px)-(11)2.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। संजय नगर स्थित रोडवेज बस स्टैण्ड जिसे शहर का आधुनिक बस अड्डा कहा जाता है, आज यात्री सुविधाओं के नाम पर बदहाली की मिसाल बन चुका है। 22.76 लाख लीज किराया देने वाला यह परिसर सुविधाओं के नाम पर धेला तक खर्च नहीं करता । वर्ष 2013 से संचालित यह बस स्टैण्ड अब मूलभूत सुविधाओं के अभाव से जूझ रहा है। यात्रियों का कहना है कि आधुनिक और भव्य भवन होने के बावजूद यदि मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध नहीं हों, तो ऐसी व्यवस्था का कोई औचित्य नहीं रह जाता। सबसे चिंताजनक स्थिति पेयजल व्यवस्था की है, जो पूरी तरह ध्वस्त हो चुकी है। कोटा शहर जिसे देशभर में 24 घन्टे पेयजल की आपूर्ति के लिये जाना जाता है उस शहर में रोडवेज के उपयोगकतार्ओं को यहां के दयनीय हालात पर गुस्सा आना लाजमी है।</p>
<p><strong>नल टूटे, कनेक्शन कटे, प्याऊ अलमारी बन गये</strong><br />बस स्टैण्ड भवन पोर्च एरिया में बनी प्याऊ में एक भी नल नहीं है। इस प्याऊ के तो कनेक्शन तक हटा दिए गए हैं। जिस स्थान पर यात्रियों को पानी पीना चाहिए, वहां सफाई कर्मचारियों ने झाड़ू और अन्य सामान रख दिया है।प्रबंधन का तर्क है कि इस प्याऊ में पानी चालू करने पर सेनेटरी लाइन चौक हो जाती है, जिससे बरामदे में पानी भर जाता है। हालांकि प्रबंधन मरम्मत का आश्वासन दे रहा है, लेकिन फिलहाल यात्रियों को तत्काल राहत का कोई रास्ता नहीं निकाला जा रहा है।</p>
<p><strong>दो अन्य प्याऊ भी लेकिन पानी सिर्फ एक नल से</strong><br />मंदिर के पास स्थित एक अन्य प्याऊ पर 80 लीटर का वाटर कूलर रखा हुआ है, लेकिन उसका बिजली व पानी का कनेक्शन कटा हुआ है। दूसरा,  बस स्टैण्ड के प्रवेश द्वार के पास एक संस्था द्वारा संचालित प्याऊ ही किसी तरह चालू है। यहां भी दो में से एक नल टूटा हुआ है, जबकि दूसरे में भी टंकियां चोक होने से पानी का प्रेशर नहीं है । पूरे बस स्टैण्ड की जलापूर्ति इसी एक नल पर निर्भर है। गर्मी के मौसम में जब यात्रियों की संख्या और पानी की जरूरत बढ़ जाती है, तब यह व्यवस्था नाकाफी साबित होगी ।</p>
<p><strong>पीना तो दूर हाथ धोने तक के लिए खरीदना पड़ रहा पानी</strong><br />प्रतिदिन कईं यात्री इस बस स्टैण्ड से आवागमन करते हैं। पानी की सुविधा न होने के कारण उन्हें मजबूरन बोतलबंद पानी खरीदना पड़ता है ।निगम की तरफ से हाथ धोने तक का पानी नहीं मुहैय्या नहीं कराया जा रहा। आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के यात्रियों के लिए यह अतिरिक्त बोझ बन गया है। कई यात्रियों ने बताया कि बस का इंतजार करते समय प्यास लगने पर उन्हें इधर-उधर भटकना पड़ता है।</p>
<p><strong>सबसे बड़े अधिकारी का कार्यालय फिर भी यह हाल</strong><br />सबसे हैरानी की बात यह है कि इसी बस स्टैण्ड परिसर में रोडवेज के वरिष्ठ अधिकारी का कार्यालय भी स्थित है। इसके बावजूद यात्री सुविधाओं की यह स्थिति प्रशासनिक उदासीनता को दशार्ती है। यही नहीं कोटा आगार का पूरा मेनेजमेंन्ट स्टाफ इसी परिसर में ड्यूटी बजाता है। ऐसे में भी यहां रोड़वेज की छवि को खराब करने वाली यह दुर्दशा पर किसी का ध्यान ना जाना प्रशासनिक अधिकारियों की असंवेदनशीलता का प्रत्यक्ष प्रमाण है</p>
<p><strong>राजस्व और छवि पर भी असर</strong><br />सुविधाओं की लगातार कमी के कारण बस स्टैण्ड का राजस्व भी प्रभावित हो रहा है। खराब अनुभव के चलते कई यात्री निजी वाहनों या अन्य साधनों को प्राथमिकता देने लगे हैं। इसी कारण यहां से यात्री भार लगातार कम होता जा रहा है। वर्तमान में ड़िपो की कुल आय का मात्र 2 प्रतिशत से भी कम यहां से प्राप्त होती है।</p>
<p>मै स्वयं संजय नगर रहता हूँ लेकिन इस बस स्टैण्ड़ पर सुविधाओं के नाम कोई जिम्मेदार नहीं इसलिये कोई यात्री परिवार के साथ आना  पसन्द नहीं करता, टेक्सी लेकर नयापुरा जाना बेहतर है।<br /><strong>- गोविन्द सिंह गौड़, निवासी संजय नगर</strong></p>
<p>हमारी संस्था द्वारा एक पक्की प्याऊ लगायी गयी है, जिसे जन सुविधा की दृष्टि से हम देख्रेख भी करवा रहे है, इसे 2 दिनों साफ सफाई करवाकर चालू करवा देंगे ।<br /><strong>- महावीर नागर , कोषाघ्यक्ष श्री धरणीधर जनसेवा संस्थान</strong></p>
<p>मेरी जानकारी में आया है इसके लिये एक टीम बनवाकर शीघ्र ही निस्तारण करवा दिया जायेगा।<br /><strong>- अजय कुमार मीणा मुख्य प्रबंधक कोटा आगार</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 20 Feb 2026 15:01:44 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>यात्रीगण कृपया ध्यान दें, बस स्टैंड पर आने से पूर्व निवृत्त होकर आएं</title>
                                    <description><![CDATA[पेयजल और शौचालयों जैसी बुनियादी सुविधाओं के अभाव के कारण कई यात्री बस स्टैंड आने से बच रहे।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/passengers--please-note--please-relieve-yourself-before-coming-to-the-bus-stand/article-143651"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-02/12200-x-600-px)-(5)1.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। संजय नगर स्थित रोडवेज बस स्टैंड पर यात्रियों को मूलभूत सुविधाएं तक नसीब नहीं हो रहीं। पेयजल का संकट, जर्जर और बंद पड़े शौचालय साफ-सफाई की कमी के कारण यहां आने वाले यात्रियों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। हालात ऐसे हैं कि लोग व्यंग्य में कहते नजर आते हैं— यात्रीगण कृपया ध्यान दें,आने से पूर्व घर से ही निवृत्त होकर आएं राजस्थान रोडवेज के मुख्य बस स्टैंड की बिगड़ती व्यवस्थाओं का असर अब यात्रियों की संख्या पर भी दिखने लगा है। पेयजल और शौचालयों जैसी बुनियादी सुविधाओं के अभाव के कारण कई यात्री बस स्टैंड आने से बच रहे हैं। या सीधे नयापुरा बस स्टैण्ड़ जा रहे है। स्थानीय लोगों का कहना है कि सुविधाएं सुधरें तो इस परिसर में रोडवेज के यात्रियों की वापसी संभव है।</p>
<p><strong>जिम्मेदार बोले 3 लाख का खर्च ,बजट नहीं </strong><br />परिसर में ही बन्द पड़े सुलभ शौचालय पर किसी यात्री द्वारा लिखी गयी टिप्पणी प्रशासनिक बेपरवाही की पोल खोलकर रख रही है। वहीं जिम्मेदारों का कहना है कि दो ढ़ाई वर्ष पूर्व एक बिहारी परिवार यहां पर रहता था जब यह शौचालय बनाये गये तब से ही इसमे पानी जमा होने की समस्या थी ऐसे में इसका एस्टीमेंट बनाकर कॉम्पलैक्स के मैनेजर को बताया गया है यहा करीब 3 लाख का खर्चा है जिसके बाद ही यह चालू किया जा सकता है। ऐसे में सवाल उठता है कि निगम द्वारा इस परिसर के उपयोग लीज के 22 लाख किराया रकम के सामने यात्रियों की सुविधाओं के नाम पर 3 लाख रुपए तक का बजट नहीं ।</p>
<p><strong>महिला कार्मिकों को संक्रामक बिमारियों खतरा</strong><br />निगम कार्मिकों में आॅफिस स्टाफ के रूप में भी महिलाओं की संख्या काफी है यहां पर 24 महिलाएं अपनी सेवायें दे रही है, ऐसे में महिला कार्मिकों की जरूरी मूलभूत सुविधाओं का इतना बड़ा टंटा होना यहाँ के प्रशासनिक अधिकारी संवेदनशीलता पर भी सवाल है। महिला स्वास्थ्य विशेषज्ञ के अनुसार इस तरह के टायलेट के उपयोग से महिलाओं में संक्रामक बिमारियां तक फैलने का खतरा होता है।</p>
<p><strong>सुविधाएं केवल स्टाफ के लिए वो भी बिना पानी</strong><br />रोड़वेज परिसर में कुल तीन सुविधाघर बनें हुये हे जिनमें से एक प्रथम तल पर है जिसे स्टाफ के द्वारा प्रयोग में लिया जा रहा है। दुसरा ग्राउण्ड़ फ्लोर आईटीसी के पास बना हे जिस पर केवल स्टाफ के लिये लिखा है। हांलाकि इसकी हालात देखकर इसका प्रयोग कोई कर ही नहीं सकता । कमोड़ के चारों तरफ भरा कीचड़ पानी का कनेक्शन तक नहीं, र्दुगन्ध से महिलाओं द्वारा तो इसे कदापि यूज नहीं लिया जा सकता। वहीं तीसरा टॉयलेट सुलभ कॉम्पलेक्स का हे जिस पर पे एण्ड़ यूज तो लिखा है पर इस पर भी कई वर्षो से ताला जडा हुआ है जिसकी गवाही जंग लगा ताला दे रहा है।</p>
<p><strong>महिलाओं की बढ़ी दिक्कत</strong><br />हम बस पकड़ने के लिए समय से पांच मिनट पहले ही आते हैं। यहां सुविधाएं तो दूर, हाथ धोने तक का पानी नहीं मिलता। बच्चों के साथ आने में ज्यादा परेशानी होती है। अगर अचानक कोई जरूरी बात हो जाए तो बस छोड़कर वापस घर भागना पड़ सकता है।<br /><strong>-कमला बाई (55 वर्ष), कोटा-माधोपुर बस यात्री </strong></p>
<p>पे एण्ड़ यूज काफी समय से बन्द पड़ा है, नीचे वाले टायलेट को पिछले साल की ठीक करवाया था। यह गंदगी कबसे है और पानी की कमी की मेरे पास कोई शिकायत नहीं आयी अभी ठीक करवायेंगे।<br /><strong>- अजय मीणा प्रबंधक रोड़वेज कोटा आगार</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 18 Feb 2026 15:42:54 +0530</pubDate>
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                <title>रेलवे अंडरपास में टपकता पानी, उधड़ी सड़कों से राहगीर बेहाल, बारिश में आवागमन हो जाता है ठप </title>
                                    <description><![CDATA[करीब पचास हजार से ज्यादा की आबादी होने के बावजूद प्रशासन नहीं दे रहा ध्यान
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/water-leaks-in-the-railway-underpass--damaged-roads-cause-distress-to-commuters--and-traffic-comes-to-a-standstill-during-the-rains/article-131310"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-11/ews-(12).png" alt=""></a><br /><p>कोटा। रेलवे कॉलोनी क्षेत्र का अंडरपास इन दिनों शहरवासियों के लिए मुसीबत का दूसरा नाम बन गया है। बरसात के मौसम में यहां से गुजरने वाले राहगीरों के सिर पर लगातार पानी टपकता रहता है। वहीं दूसरी ओर, अंडरपास से सटे मार्गों की हालत पिछले एक साल से भी अधिक समय से बदहाल बनी हुई है। क्षेत्र के लोगों का कहना है कि करीब पचास हजार से अधिक आबादी इस इलाके में निवास करती है, लेकिन फिर भी उन्हें मूलभूत सुविधाओं के लिए तरसना पड़ रहा है। रेलवे कॉलोनी अंडरपास की समस्या कोई नई नहीं है। करीब दस सालों से यहां के लोग इस परेशानी के साथ जी रहे हैं। अब सवाल यह है कि कब तक जिम्मेदार विभाग एक-दूसरे पर जिम्मेदारी टालते रहेंगे। स्थानीय निवासी मिर्जा खलील बेग बताते हैं कि यह अंडरपास दस-ग्यारह साल पहले का बना हुआ है जब से बना है, तभी से पानी टपकने की समस्या बनी हुई है। हर साल बरसात में यही हाल होता है। रेलवे प्रशासन से कई बार शिकायत की गई, लेकिन कोई सुनवाई नहीं होती। उन्होंने बताया कि  बारिश ज्यादा होती है तो यह अंडरपास लबालब भर गया था। आवागमन पूरी तरह से ठप हो गया था। स्कूली विद्यार्थी और दफ्तर जाने वाले लोगों को लंबा चक्कर लगाकर दूसरे रास्ते से जाना पड़ता है।</p>
<p><strong>क्षतिग्रस्त सड़कें बनीं लोगों की मुसीबत</strong><br />अंडरपास से जुड़े मार्गों की स्थिति भी किसी मुसीबत से कम नहीं है। क्षेत्र की सड़कों पर बड़े-बड़े गड्ढे हैं, जिनमें हल्की बारिश के बाद ही पानी भर जाता है। कृष्णा नगर, सुंदर नगर, रंग तालाब, काला तालाब, न्यू रेलवे कॉलोनी और लोको कॉलोनी जैसे इलाकों में रहने वाले लोग रोजाना इस समस्या से जूझ रहे हैं। इन इलाकों से होकर गुजरने वाले लगभग एक हजार से अधिक लोग हर दिन आवाजाही करते हैं। टूटी सड़कों और जलभराव के कारण यहां चलना भी दूभर हो गया है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि कई बार दोपहिया वाहन चालक गड्ढों में फंसकर गिर चुके हैं, जिससे चोटें भी लगी हैं।</p>
<p><strong>यहां से गुजरने वाले राहगीरों को लगता है डर</strong><br />अंडरपास के ऊपर से रेलवे प्लेटफार्म नंबर 1 और 4 का कुछ हिस्सा गुजरता है। इन प्लेटफार्मों से लंबी दूरी की गाड़ियां लगातार आती-जाती रहती हैं। ऐसे में अंडरपास से गुजरने वालों के ऊपर पानी टपकने के साथ हादसे का खतरा भी बना रहता है। रात के समय स्थिति और भी भयावह हो जाती है। रेलवे लोको कॉलोनी में सड़क के दोनों तरफ रोड़ लाइटे 5-6 माह से बंद है, वहॉं से गुजरने वाले राहगीरों को हादसे का अंदेशा बना रहता है। गश्त की कमी के कारण असामाजिक तत्वों की गतिविधियां बढ़ जाती हैं। कई वाहन चालक अंधेरे और उबड़-खाबड़ सड़कों के कारण गिर चुके हैं। आसपास के लोग बताते हैं कि पिछले एक वर्ष में यहां कई छोटे-बड़े हादसे हो चुके हैं। रेलवे के खाली मैदानों में हमेशा पानी भरा रहता है।</p>
<p><strong>रेलवे को लेना होगा जिम्मा</strong><br />अगर यह क्षेत्र रेलवे के अधीन है तो रेलवे को ही इसकी देखरेख करनी चाहिए। अंडरपास और सड़कों की मरम्मत तत्काल की जाए ताकि लोगों को राहत मिले।  हमने कई बार शिकायत दर्ज करवाई, लेकिन हर बार यही जवाब मिला कि रेलवे क्षेत्र में कार्य नहीं हो सकता। क्या हम रेलवे क्षेत्र के नागरिक नहीं हैं.. टैक्स हम देते हैं, लेकिन सुविधाएं नहीं मिलतीं।<br /><strong>- सुनीता शर्मा, रहवासी</strong></p>
<p><strong>प्रशासनिक उदासीनता पर उठे सवाल</strong><br />रेलवे कॉलोनी क्षेत्र में सफाई, सड़क और जल निकासी जैसी मूलभूत सुविधाओं का अभाव प्रशासनिक उदासीनता को उजागर करता है। एक ओर कोटा स्मार्ट सिटी के रूप में आगे बढ़ने का दावा किया जा रहा है, वहीं दूसरी ओर शहर के बीचोंबीच स्थित यह कॉलोनी बदहाली का प्रतीक बन चुकी है। स्थानीय लोगों ने चेतावनी दी है कि अगर शीघ्र समाधान नहीं निकाला गया, तो वे रेलवे कार्यालय के बाहर धरना प्रदर्शन करेंगे। </p>
<p><strong>रेलवे और निगम दोनों संयुक्त कार्य करें</strong><br />इस समस्या का स्थायी समाधान तभी संभव है जब रेलवे और नगर निगम मिलकर संयुक्त कार्य योजना बनाएं। अंडरपास की मरम्मत, जल निकासी और सड़क पुनर्निर्माण जैसे कार्यों के लिए संयुक्त बजट आवंटन जरूरी है। क्षेत्रवासियों की सुविधा के लिए दोनों को मिलजुलकर कार्य करना होगा।<br /><strong>- मिर्जा खलील बेग, रहवासी, कृष्णा नगर</strong></p>
<p><strong>लोगों ने खुद जुटाए पैसे, मिट्टी डाल बनाया मार्ग</strong><br />क्षेत्रवासियों ने अपने स्तर पर समाधान की कोशिश भी की। उन्होंने कॉलोनी के लोगों से पैसे एकत्रित कर मिट्टी डलवाकर एक मार्ग में जमा पानी में मिट्टी डलवाकर तैयार किया है, ताकि आने-जाने वालों को कुछ राहत मिल सके। हालांकि यह रास्ता भी अस्थायी है और बारिश होने पर वह भी दलदल में बदल जाता है। निवासियों का कहना है कि प्रशासन और पार्षद को कई बार लिखित व मौखिक रूप से समस्या से अवगत करवाया गया, लेकिन जवाब हमेशा यही मिला कि रेलवे का क्षेत्र है, हमारी सीमाएं नहीं हैं।<br /><strong>- अनिल माथुर, रहवासी</strong></p>
<p><strong>इनका कहना है</strong><br />रेलवे कॉलोनी का क्षेत्र मेरे वार्ड के अधीन है। रेलवे अंडरपास की छत में सीलन व पानी टपकने की समस्या रेलवे को अवगत करवा देंगे। <br /><strong>- बशीर मोहम्मद, वार्ड पार्षद</strong></p>
<p>क्षेत्र में जो भी समस्या हैं हम इंजीनियर से दिखवा लेंगे। क्षेत्रवासी वाट््सएप पर भी समस्या भेजते है तो उनको जरूर प्राथमिकता देंगे।<br /><strong>- अनिल कालरा, डीआरएम, कोटा</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 03 Nov 2025 16:35:54 +0530</pubDate>
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                <title>बालिकाओं के विकास में बाधा : हॉस्टल परिसर में बुनियादी सुविधाओं का अभाव, परिसर में उगी कंटीली झाड़ियां, हॉस्टल के सामने फैला कचरा</title>
                                    <description><![CDATA[कोटा की गर्ल्स फुटबॉल एकेडमी का हॉस्टल परिसर साफ-सफाई और सुरक्षा के अभाव में बदहाल है। छात्राओं ने ग्राउंड और बेहतर सुविधाओं की मांग की है। हॉस्टल तक सड़क भी खराब है। सुधार के लिए प्रस्ताव भेजा गया है, जिसमें हॉस्टल की ऊपरी मंजिल और अलग फुटबॉल ग्राउंड बनाने की योजना शामिल है।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/obstacles-to-girls--development--lack-of-basic-amenities-in-the-hostel-premises--thorny-bushes-growing-in-the-premises--garbage-spread-in-front-of-the-hostel/article-129762"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-10/y-of-4news.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। शहर में एकमात्र गर्ल्स फुटबॉल एकेडमी के लिए ना तो अलग से ग्राउण्ड है और ना ही हॉस्टल परिसर साफ-सफाई की व्यवस्था है। शहर की गर्ल्स फुटबॉल एकेडमी का हॉस्टल लंबे समय से बदहाली का आलम छाया हुआ है। हॉस्टल परिसर की अनदेखी के चलते खेल और बालिकाओं के सर्वांगीण विकास के लिए बनाई गई इस सुविधा का समुचित उपयोग नहीं हो पा रहा है। जानकारी के अनुसार हॉस्टल के मुख्य प्रवेश गेट के पास बड़ी-बड़ी घास और फैला कचरा पर्यावरण और सुरक्षा के लिहाज से खतरा बना हुआ है। वहीं हॉस्टल के दाएं और बाएं ओर विशाल खाली परिसर में उगी मोटी घास में जहरीले जीवों का भी खतरा बना हुआ है। छात्राओं ने बताया कि बड़े परिसर होने के बावजूद यहां सफाई नहीं की जाती, और इसे एक गार्डन या व्यायाम स्थल के रूप में विकसित नहीं किया गया है। इसी कारण उन्हें योगा या अन्य गतिविधियों के लिए स्टेडियम तक जाना पड़ता है।  छात्राओं का मानना है कि यदि परिसर की सफाई और सजावट पर ध्यान दिया जाए, तो इसे रहने योग्य बनाने के साथ-साथ बहुपयोगी क्षेत्र के रूप में गार्डन, योगा, खेल या अन्य गतिविधियों के लिए भी विकसित किया जा सकता है।</p>
<p><strong>हॉस्टल परिसर की सफाई जरूरी</strong><br />हॉस्टल परिसर को तुरंत साफ-सुथरा और सुरक्षित बनाया जाना चाहिए। घास और कचरे की सफाई के साथ-साथ परिसर में उचित रोशनी और सुरक्षा उपकरणों की व्यवस्था की जानी चाहिए। इसके अलावा, परिसर में खेल और शारीरिक गतिविधियों के लिए आवश्यक संसाधन उपलब्ध हो तो प्रैक्टिस करने में आसानी रहेगी।<br /><strong>- अन्नू, छात्रा</strong></p>
<p><strong>सड़क की खराब हालत भी बनी परेशानी</strong><br />हॉस्टल तक जाने वाली सड़क भी काफी समय से क्षतिग्रस्त है। पक्की सड़क न होने के कारण बालिकाओं और स्टाफ के लिए आने-जाने में परेशानी हो रही है। बरसात के मौसम में तो यह और भी खतरनाक साबित हो जाती है।<br /><strong>- अंजली, छात्रा</strong></p>
<p><strong>सुरक्षित और स्वच्छ वातावरण जरूरी</strong><br />बालिकाओं के मानसिक और शारीरिक विकास के लिए सुरक्षित और स्वच्छ वातावरण बहुत महत्वपूर्ण है। खेल एकेडमी का उद्देश्य न केवल खेल प्रतिभाओं को विकसित करना है, बल्कि बच्चों को अनुशासन, टीम वर्क और नेतृत्व की क्षमताओं से भी लैस करना है। जल्द हॉस्टल में विकास कार्य तथा परिसर को स्वच्छ किया जाएगा।<br /><strong>- बीबी सेन, छात्रा</strong></p>
<p><strong>गल्स ऐकेडमी की सुविधाओं के लिए भेजा प्रस्ताव</strong><br />गर्ल्स हॉस्टल की ऊपरी मंजिल बनाने की योजना, बालिकाओं के लिए अलग से फुटबॉल ग्राउंड उपलब्ध करवाने तथा हॉस्टल परिसर का समुचित विकास करवाने को लेकर एक प्रस्ताव भेजा गया है। प्रस्ताव अगर मंजूर हो जाता है तो  हॉस्टल की सुविधाओं में वृद्धि होगी और ज्यादा बालिकाओं के रहने की सुविधा उपलब्ध कराई जा सकेगी। साथ ही, एकेडमी की बालिकाओं के लिए आधुनिक फुटबॉल मैदान बनाने की भी योजना है। इससे बालिकाओं को प्रशिक्षण के दौरान उच्च स्तर का अनुभव मिलेगा और उनकी खेल प्रतिभा को निखारने में मदद मिलेगी।<br /><strong>- वाईबी सिंह, खेल विकास अधिकारी, कोटा</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 15 Oct 2025 16:30:41 +0530</pubDate>
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                <title>कोटा उत्तर वार्ड 22 - टूटे नालों और नहरों की नहीं हो रही सफाई, पुराना भदाना क्षेत्र में नालियां जाम, नहीं मिल रही मूलभूत सुविधाएं</title>
                                    <description><![CDATA[नगर निगम उत्तर क्षेत्र के वार्ड 22 में मूलभूत सुविधाओं की भारी कमी है। नालों की सफाई नहीं, ढक्कन टूटे, पेयजल आपूर्ति कम दबाव में और विद्युत पैनल खुले पड़े हैं। सामुदायिक भवन और पार्क का अभाव भी चिंता का विषय है। स्थानीय पार्षद ने भेदभाव का आरोप लगाया और जल्द सुधार की मांग की है।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/kota-north-ward-22---broken-drains-and-canals-are-not-being-cleaned--drains-are-clogged-in-the-purana-bhadana-area--and-basic-amenities-are-not-available/article-129732"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-10/y-of-news-(2)5.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। नगर निगम के उत्तर क्षेत्र के वार्ड 22 में मूलभूत सुविधाओं की कमी ने स्थानीय निवासियों की परेशानियों को बढ़ा दिया है।  रंगपुर रोड पर स्थित नहर और नालों की नियमित सफाई नहीं हो रही है। वहीं  भूत बाबा मंदिर के पास बने नाले के ढकान लंबे समय से टूटे हुए हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि इन टूटे ढकानों के कारण बारिश या पानी भर जाने की स्थिति में सड़क और घरों में पानी का जमाव हो जाता है, जिससे संक्रमण और अन्य समस्याएं बढ़ती हैं। रंगपुर की मुख्य सड़क पर डीपी के स्विच पैनल बॉक्स में भी समस्या है। एक पैनल खुला पड़ा है जबकि दूसरे का ढक्कन टूटा हुआ है। इससे विद्युत सुरक्षा के लिहाज से खतरा उत्पन्न हो रहा है और बिजली दुर्घटना का भी जोखिम बना हुआ है</p>
<p><strong>वार्ड का एरिया</strong><br />पुराना भदाना, भदाना की टापरिया, आर के कॉलोनी, शहीद भगत सिंह कच्ची बस्ती व सरस्वती कॉलोनी का आंशिक भाग शामिल है।<br /> <br /><strong>सामुदायिक भवन और पार्क का अभाव</strong><br />वार्ड में सामाजिक कार्यक्रमों के लिए कोई सामुदायिक भवन नहीं है। इसके अलावा बच्चों के खेलने के लिए पार्क या गार्डन की कोई सुविधा भी उपलब्ध नहीं है। स्थानीय निवासियों ने नगर निगम से अपील की है कि बच्चों और युवाओं के लिए पार्क बनाना और सामाजिक कार्यक्रमों के आयोजन हेतु सामुदायिक भवन की व्यवस्था की जाए।<br /><strong>-मोहनलाल वर्मा, रहवासी</strong></p>
<p><strong>सड़क के दोनों तरफ की नालियां जाम</strong><br />पुराना बदाणा क्षेत्र में सड़क किनारे नालियों में सफाई का अभाव है और कई नालियां टूटी हुई हैं। यहां कोई स्थायी सफाई कर्मचारी नहीं है, जिससे स्थानीय लोग स्वयं ही अपने घरों और सड़क के सामने की सफाई करने को मजबूर हैं। वार्डवासियों का कहना है कि नियमित सफाई और टूटे नालों की मरम्मत की तत्काल आवश्यकता है।<br /><strong>- मथुरालाल मेघवाल, रहवासी</strong></p>
<p><strong>कम दबाव में हो रही पेयजल आपूर्ति</strong><br />पानी की सप्लाई भी वार्डवासियों के लिए बड़ी चुनौती बनी हुई है। पानी कम दबाव से आता है, जिससे कई बार लोगों को मोटरें चलाकर पानी खींचना पड़ता है। वार्ड में जल आपूर्ति की नियमित व्यवस्था न होने के कारण ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों दोनों के निवासी परेशान हैं।<br /><strong>- चौखतिया मेघवाल, रहवासी</strong></p>
<p><strong>मूलभूत सुविधाएं जरूरी</strong><br />डिपर तो रोजाना आ रहा है लेकिन साफ कर्मचारी नहीं आ रहे है। यहां पुराना बदाणा में रहवासियों को ही साफ-सफाई करनी पड़ रही है। लाइटें भी आती जाती रहती है। बच्चों के खेलने के पार्क नहीं है। सामाजिक कार्यक्रमों के लिए सामुदायिक भवन भी नहीं है। वार्ड क्षेत्र में सरकार द्वारा नई पानी की टंकी का निर्माण तो कर दिया गया, लेकिन लोगों को राहत नहीं मिल सकी है। टंकी से जलापूर्ति होने के बावजूद पानी बेहद धीमी गति से आता है। <br /><strong>- परमानंद चौधरी, रहवासी</strong></p>
<p><strong>इनका कहना है</strong><br />वार्ड कि समस्या को लेकर निगम के अधिकारियों को अवगत करवाया गया है। लेकिन सरकार बदलते ही काग्रेंस पार्षदो के साथ अधिकारियों द्वारा भेदभाव किया जा रहा है। जिसका नूकसान वार्डवासीयों को भूगतना पड़ रहा है। <br /><strong>- गुंजन कुमार, पार्षद </strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 15 Oct 2025 15:45:39 +0530</pubDate>
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                <title>कोटा उत्तर वार्ड 19 - सड़कें और नालियां बदहाल, प्लॉटों में जलभराव, आ रहे मगरमच्छ</title>
                                    <description><![CDATA[सद्गुरुधाम कॉलोनी में वर्षों से मूलभूत सुविधाओं का अभाव।
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/kota-north-ward-19---roads-and-drains-in-poor-condition--plots-flooded--crocodiles-appearing/article-128382"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-10/copy-of-news4.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। शहर के कोटा उत्तर वार्ड 19 के मानपुरा, अर्जुनपुरा और झालीपुरा क्षेत्रों में मुख्य मार्गों की स्थिति गंभीर बनी हुई है। यहां की सड़कें कहीं सीसी तो कहीं डामर से बनी हैं, लेकिन कई स्थानों पर ये पूरी तरह क्षतिग्रस्त हैं और बड़े-बड़े गड्ढे वाहन चालकों की परेशानी का कारण बन रहे हैं। मुख्य मार्ग पर बने डिवाइडर ऊंचे होने के कारण वाहन चालकों को निकलने में कठिनाई हो रही है। साथ ही, इन क्षेत्रों की नालियां कचरे से भरी पड़ी हैं, जिससे गंदगी और जलभराव की समस्या बनी हुई है। स्थानीय ग्रामीणों ने बताया कि सड़क किनारे लगे पेड़-पौधों की देखभाल और सुरक्षा के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाए गए हैं। कई स्थानों पर जाली टूटी हुई है, तो कहीं पौधे पूरी तरह गायब हो चुके हैं।</p>
<p><strong>मूलभूत सुविधाओं को तरस रहे लोग</strong><br />सद्गुरुधाम कॉलोनी में, जो अर्जुनपुरा में स्थित है, मूलभूत सुविधाओं के अभाव से जूझ रही है। कॉलोनी में कुल 177 प्लॉट हैं। 2012 में कॉलोनी में सड़क निर्माण हुआ था, लेकिन अब तक इसे ठीक नहीं कराया गया। कॉलोनी के निवासियों कमलेश कुमार, रामस्वरूप और फुलमति ने बताया कि यहां नलों के कनेक्शन नहीं हैं। लोग बोरिंग या पास के अन्य स्रोतों से पीने का पानी लाने को मजबूर हैं।</p>
<p><strong>वार्ड एरिया</strong><br />मानपुरा, अर्जुनपुरा, दसलाना, झालीपुरा, जगन्नाथपुरा, बोरखण्डी छोटी व बडी, मण्डानिया का क्षेत्र शामिल है। </p>
<p>बरसात के दिनों में प्लॉटों में पानी भर जाता है और यह निवासियों ने बताया कि खाली प्लॉटों में जलभराव हो रखा है। यहां मगरमच्छ भी देखे गए हैं, जो रात में बाहर निकलने की संभावना रखते हैं। यह कॉलोनी न केवल पानी और कचरे की समस्या से जूझ रही है, बल्कि यहां मंदिर, पार्क और अन्य सामाजिक सुविधाओं का भी अभाव है। 2012 से कॉलोनी में सीवरेज लाइन तक नहीं डाली जा सकी है। इसके चलते न केवल गंदगी फैल रही है, बल्कि स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं का खतरा भी बढ़ गया है। कॉलोनी के निवासी प्रशासन से बार-बार शिकायत कर चुके हैं, लेकिन अब तक किसी भी तरह की ठोस कार्रवाई नहीं हुई है।<br /><strong>- कमलेश कुमार, वार्डवासी</strong></p>
<p><strong>इनका कहना है</strong><br />यह वार्ड अन्य वार्डों की तुलना में काफी बड़ा है, लेकिन अधिकारियों द्वारा अभी तक आवश्यक संसाधन उसी अनुपात में उपलब्ध नहीं करवाए गए हैं।  इसके बावजूद मेरे द्वारा वार्ड में अनेक विकास कार्य करवाए गए हैं और शेष कार्य भी शीघ्र ही पूरे करवा दिए जाएंगे। वार्डवासियों की समस्याओं के समाधान के लिए निरंतर प्रयासरत रहता हू।<br /><strong>- देवेन्द्र शर्मा, वार्ड 19 पार्षद</strong></p>
<p>वार्ड 19 के क्षेत्र में कचरा प्रबंधन की स्थिति भी चिंताजनक है। मुख्य सड़क से कचरा गाड़ी निकलती है, लेकिन कॉलोनी के भीतर जाकर कचरा उठाने की सुविधा नहीं है। इसके कारण गंदगी और कचरे का अंबार लगा रहता है।<br /><strong>- फुलमति, वार्डवासी</strong></p>
<p>कचरा गाड़ी का आने का समय निर्धारित नहीं है। अर्जुनपुरा में प्रवेश करते ही कचरे का अंबार लगा हुआ है। मुख्य रोड के घुमाव पर नहर कचरे से अटी पड़ी है तथा टूटी हुई है। रात्रि में अंधेरा रहता है जिसके कारण हादसे की संभावना बनी हुई है।<br /><strong>- नरेन्द्र सोलंकी, वार्डवासी</strong></p>
<p>लाइटों की समस्या है। बार-बार बिजली आती-जाती रहती है। इस क्षेत्र में सीवरेज लाइन भी नहीं है। पानी कम दबाव से आता है। जगह-जगह कचरे के ढ़ेर लग जाते है। यहां मुख्य सड़क पर डिवाइडर भी परेशानी का सबब बने हुए है। <br /><strong>- रिंकू प्रजापति, वार्डवासी</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 01 Oct 2025 15:01:45 +0530</pubDate>
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