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                <title>offline - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <title>विकलांगता आवेदन पत्रों में फजीर्वाड़ा : मचा हड़कम्प,  सभी ऑफलाईन प्रक्रिया की बंद </title>
                                    <description><![CDATA[कई फार्मो में ''घुटने के नीचे एक पैर कटा'' लिखा असेसमेन्ट बना शक का कारण। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/fraud-uncovered-in-disability-applications--uproar-ensues--all-offline-processing-halted/article-147547"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/1200-x-60-px)57.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। जिले में विकलांगता प्रमाण पत्रों को लेकर बड़ा गडबड़ झाला सामने आया है। कोटा एमबीएस में प्राप्त आफलाईन व आनलाईन आवेदनों में गम्भीर प्रकार की गड़बड़ी देखने में आयी है। जहां डॉ. द्वारा जांच पत्र में भरी गयी जानकारी की हूबहू नकल करके अन्य आवेदकों के फार्माे पर लगा कर मिथ्या टिप्पणियां बना दी गयी है। हांलाकि मेडिकल बोर्ड द्वारा समय पर इन गड़बड़ियों को पकड़ लिया गया, जिससे इन आवेदकों के फर्जी विकलांगता प्रमाण पत्र बनने से रह गये । जबकि अस्पताल प्रबंधन द्वारा मामले का परिवाद नयापुरा थाने में भी दिया जा चुका हे।</p>
<p>कोटा के ग्रामीण क्षेत्रों से बड़ी संख्या में विकलांगता प्रमाणपत्र बनवाने के लिये लोग सीधे ही कोटा आते है। ऐसे आवेदनों की संख्या व लोगों को राहत देने के लिये एमबीएस प्रशासन ने अभी भी आॅफलाईन प्रक्रिया जारी की हुई हे। हांलाकि राज्य सरकार ने ऐसे किसी भी आवेदन के लिये वऊकऊ यूनिक डिस एबिलिटि पहचान पत्र पोर्टल पर आवेदन को अनिवार्य रूप से करने का भी निर्देश जारी किया हुआ है। लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों से आये लोगों द्वारा अभी भी सीधे एमबीएस आने के कारण यहां पर कार्य भार बढ़ता जा रहा है । ऐसे में सीधे कार्यालय में किये गये आवेदनों का जांचने में काफी चूक होने की संभावना रहती है।</p>
<p><strong>घुटने के नीचे एक पैर कटा'' से खुला मामला</strong><br />यहां आये आवेदनों में एक बात सभी में कॉमन थी की सभी आवेदकों के चिकित्सकीय प्रमाणीकरण में घुटने के नीचे एक पैर कटा वाली टिप्पणी लिखी हुयी थी। ऐसे में किसी भी चिकित्सक द्वारा एक जैसी लैखनी व टिप्पणी की गयी थी। जिससे इन आवेदकों के बारें में शक हुआ।विकलांगता के लिये भरे गये पत्र में भी चिकित्सीय टिप्पणी में एक टांग के कटे वाली टिप्पणी से पैनल को सारी कहानी समझ में आ गयी।वहीं दो अन्य मामलों मे प्राप्त आवेदन में भूनेश सुमन वार्ड नं 5 पिपल्दा व मनोहरी बाई ख्यावदा निवासी द्वारा दिये गये प्रपत्र में भी ऐसी ही टिप्पणी की गयी हे।</p>
<p><strong>सभी ने एक ही ई मित्र संचालक का नाम लिया</strong><br />बनवारी सुमन मनोहरी बाई सुमन के पति 4 साल पहले मोटर सायकिल से गिरकर एक्सीडेन्ट हो गया था एक पैर ने काम करना बन्द कर दिया कोटा एमबीएस में आॅपरेशन करवाया था,जिसके बाद पैर पतला पड़ गया। पैर से चलने में लाचार है सरकारी पेंशन मिल जायें तो काम आये इसी लिये हमनें आवेदन किया है। हमने पिपल्दा के ई-मित्र से हमने फार्म भरवाया था। मामले में जानकारी जुटाने के दौरान सभी आवेदक एक ही क्षेत्र के निकले वहीं सभी ने आवेदन प्रक्रिया में ई मित्र संचालक का नाम भी लिया। वही ई मित्र संचालक का कहना है कि मैने किसी का कोई आवेदन नहीं किया।</p>
<p><strong>अब आवेदन केवल आॅनलाईन ही मान्य</strong><br />एम बी एस अस्पताल द्वारा ऐसे मामले सामने आने के बाद हड़कम्प मच गया था। अधीक्षक डॉ धर्मराज मीणा इस संदर्भ में जानकारी देते हुये बताया कि जिसके बाद से ही आॅफलाईन आवेदनों को पूरी तरह बन्द कर दिया गया है। डॉ मीणा ने बताया की हमारी तरफ से उपरोक्त प्रकरण को नयापुरा थाने में भिजवाया गया है ।</p>
<p><strong>चिकित्सकों की डिजिटल मैपिंग</strong><br />अब वऊकऊ की समस्त कार्यप्रणाली आॅनलाइन होगी। अधिकृत चिकित्सकों की प्रोफाइल पोर्टल पर मैप की जा रही है ताकि आंकलन सीधे आॅनलाइन भरा जा सके।सत्यापन प्रक्रिया आॅनलाइन आवेदकों को अस्पताल द्वारा स्वयं कॉल करके बुलाया जाएगा। जांच और आॅनलाइन एंट्री के बाद ही वऊकऊ कार्ड जारी होगा। निश्चित समय सीमा: इस पूरी प्रक्रिया (जांच से कार्ड जारी होने तक) के लिए एक माह की अवधि निर्धारित की गई है।</p>
<p>आम जन की सुविधा के लिये दोनों प्रकार से काम चलाया हुआ था लेकिन गड़बडी मिलने के बाद अब केवल आॅनलाईन ही काम होंगे। हमने पुलिस को भी जानकारी भिजवा दी है।<br /><strong>-डॉ धर्मराज मीणा,  अधीक्षक एमबीएस कोटा</strong></p>
<p>अभी जानकारी में आया हे यदि ऐसा हे तो मामले में जांच की करवायी जायेगी।<br /><strong>- विनोद कुमार,  थानाधिकारी नयापुरा कोटा</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 23 Mar 2026 15:41:20 +0530</pubDate>
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                <title>सरकार कर रही डिजिटलाइजेशन, जलदाय विभाग अब तक ऑफलाइन </title>
                                    <description><![CDATA[जलदाय विभाग में यह सुविधा लागू नहीं  होने का खामियाजा आमजन को भुगतना पड़ रहा है। सबसे अधिक समस्या समय पर पानी के बिल उपभोक्ताओं तक नहीं पहुंचने से हो रही है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/the-government-is-doing-digitalization--the-water-supply-department-is-still-offline/article-95327"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-11/27rtrer12.png" alt=""></a><br /><p>कोटा । एक तरफ तो सरकार डिजिटलाइजेशन की ओर बढ़ रही है। हर काम ऑनलाइन किया जा रहा है।  यहां तक कि कार्यालयों में ई फाइलिंग तक लागू कर दी गई है। वहीं आमजन से जुड़ा सबसे महत्वपूर्ण जलदाय विभाग अभी भी ऑफलाइन ही है। जहां अधिकतर सरकारी कार्यालय आॅनलाइन व्यवस्था से जुड़ चुके है। वहीं जलदाय विभाग में यह सुविधा लागू नहीं  होने का खामियाजा आमजन को भुगतना पड़ रहा है। सबसे अधिक समस्या समय पर पानी के बिल उपभोक्ताओं तक नहीं पहुंचने से हो रही है। बिजली विभाग में जहां बिजली के बिल जनरेट होने के बाद उपभोक्ताओं को ईमेल के जरिये भेजे जा रहे है। उसके बाद मोबाइल पर एसएमएस के माध्यम से  बिल की राशि और जमा करवाने की तिथि तक की जानकारी  दी जा रही है। साथ ही बिल को आॅनलाइन जमा करने की सुविधा भी दी हुई है। जिससे अब  उपभोक्ताओं को बिलजमा करवाने के लिए न तो बिजली विभाग के कार्यालय में जाना पड़ रहा है और न ही कतार में लगना पड़ रहा है। घर बैठे ही आॅनलाइन बिल का भुगतान किया जा रहा है। जिनके पास यह सुविधा नहीं है तो उनके पास बिल आने से पहले ही मैसेज आने पर वे समय पर बिजली के बिल का भुगतान कर पेनल्टीसे बच रहे है। </p>
<p><strong>बिल आने पर राशि व  तारीख की जानकारी</strong><br />वहीं अभी तक भी जलदाय विभाग के आॅनलाइन नहीं होने के कारण उपभोक्ताओं को बिल आने पर उसकी राशि व बिल जमा करने की तारीख की जानकारी मिल रही है। हालत यह हैकि बिजली का बिल पहले जहां दो महीने का आता  था वह हर महीने आने लगा है जिससे उपभोक्ताओं पर आर्थिक भार कम पड़ रहा है। वहीं पानी का बिल अभी भी दो से तीन महीने का एक साथ दिया जा रहा है। वहीं निर्धारित तिथि तक बिल जमा नहीं करवाने पर पेनल्टी भी काफी अधिक लगाई जा रही है। </p>
<p><strong>अंतिम तिथि पर आ रहे बिल</strong><br />जलदाय  विभाग की हालत इतनी अधिक खराब है कि पानी के बिल भुगतान तिथि से एक दिन पहले या उसी दिन प्राप्त हो रहे है। जिससे कई  उपभोक्ता तो एक दम से बिल की राशि का न तो इंतजाम कर पाते और इंतजाम कर भी ले तो उसे जमा करवाने जाने का समय नहीं होता। जिससे स्थिति यह है कि अधिकतर उपभोक्ताओं को  मजबूरन भारी पेनल्टी भुगतनी पड़ रही है। </p>
<p><strong>जून से अगस्त का बिल</strong><br />जलदाय विभाग की ओर से वर्तमान में उपभोक्ताओं को जून से अगस्त तक कातीन माह का बिल भेजा गया है। उस बिल में नकद भुगतान की तिथि 19 नवम्बर है और चैक से भुगतान की तिथि 18 नवम्बर है। जबकि अधिकतर उपभोक्ताओं को बिल का वितरण ही शनिवार को किया गया है। रविवार को अवकाश होने से बिल जमा नहींहो सका। सोमवार को अंतिम तिथि होनेसे अधिकतर उपभोक्ता परेशान होते रहे।</p>
<p><strong>समय पर कभी नहीं आते बिल</strong><br />पानी के बिल समय पर नहीं आने से अधिकतर उपभोक्ता परेशान है। शॉपिंग सेंटर निवासी रोहित सिंह का कहना है कि पानी के बिल एक तो दो से तीन माह का एक साथ आता है। वह भी बिल की तारीख नजदीक होने पर आता है। जिससे कई बार तो बिल समय पर जमा ही नहीं कर पाते। अधिकतर बार पेनल्टी भुगतनी पड़ती है।जबकि जलदाय विभाग को बिल आॅनलाइन भेजने की व्यवस्था करनी चाहिए। छावनी निवासी गोपाल अग्रवाल ने बताया कि जिस तरह से बिजली का बिल हर महीने व मोबाइल पर मैसेज से जानकारी दी जाती है। जलदाय विभाग को भी ऐसी सुविधा करनी चाहिए।जिससे आॅफलाइन बिल नहीं आने पर भी कम से कम लोग समय पर बिल जमा तो  करवा सके। उन्होंने बताया कि पानी का बिल जमा करवाने की तोआॅनलाइन  सुविधा है लेकिन जमा तो तब करवाएंगे जब समय पर बिल आएगा। </p>
<p><strong>अधिकारियों ने नहीं किया फोन रिसीव</strong><br />शहर के उपभोक्ताओं की इस समस्या के बारे में बात करने के लिए जलदाय विभाग के अधिशाषी अभियंता श्याम माहेश्वरी व अधीक्षण अभियंता भारत भूषण मिगलानी को कई बार मोबाइल पर फोन किए गए लेकिन उन्होंने फोन ही रिसीव नहीं किए। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 19 Nov 2024 16:15:00 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>Rajasthan 5th &amp; 8th Result Update : वेबसाइट क्रेश होने की वजह से ऑफलाइन जारी हुआ परिणाम</title>
                                    <description><![CDATA[राजस्थान राज्य शिक्षा विभाग के पंजीयक शिक्षा विभागीय परीक्षा बीकानेर कार्यालय द्वारा प्रारंभिक शिक्षा पूर्णता परीक्षा (कक्षा 5) 2024 और प्रारंभिक शिक्षा अधिगम स्तर मूल्यांकन (कक्षा 8) परीक्षा 2024 के नतीजे आज घोषित किए गए।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/rajasthan-5th-8th-result-update-result-shala-darpan-website-due-to-website-crash/article-79922"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-05/education.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। राजस्थान राज्य शिक्षा विभाग के पंजीयक शिक्षा विभागीय परीक्षा बीकानेर कार्यालय द्वारा प्रारंभिक शिक्षा पूर्णता परीक्षा (कक्षा 5) 2024 और प्रारंभिक शिक्षा अधिगम स्तर मूल्यांकन (कक्षा 8) परीक्षा 2024 के नतीजे आज घोषित किए गए। लेकिन वेबसाइट क्रेश होने की वजह से रिजल्ट ऑनलाइन के बजाय ऑफलाइन जारी किया जाएगा।</p>
<p><strong>ये रहा है परिणाम</strong><br />आठवीं बोर्ड परीक्षा में 95.72% विद्यार्थी पास हुए तो पांचवी बोर्ड परीक्षा में 97. 06% विद्यार्थी पास हुए हैं।</p>
<p>राजस्थान बोर्ड 5वीं और 8वीं रिजल्ट का इंतजार कर रहे 26 लाख से अधिक स्टूडेंट्स और उनके पैरेंट्स के लिए बड़ी खबर हैं। जयपुर के शिक्षा संकुल में स्कूल शिक्षा विभाग के शासन सचिव कृष्ण कुणाल कुणाल ने कंप्यूटर के माध्यम से ऑनलाइन बटन दबाकर यह परिणाम घोषित किया था।</p>
<p>राजस्थान शिक्षा विभाग द्वारा कक्षा 5 के 14.37 लाख और कक्षा 8 के 12.50 लाख छात्र-छात्राओं के लिए बोर्ड पैटर्न पर आयोजित परीक्षाओं के नतीजों की घोषणा के बाद परिणाम देखने के लिए लिंक को राज्य सरकार के इंटीग्रेटेड शालादर्पण पोर्टल, पर एक्टिव किया था। स्टूडेंट्स या पैरेंट्स को इस लिंक क्लिक करना होगा। फिर नए पेज पर सम्बन्धित कक्षा का चुनाव करते हुए दिए गए ड्राप डाउन से अपने जिले का चुनाव करना होगा और रोल नंबर भरकर सबमिट करना होगा। इसके बाद परिणाम और विषयवार प्राप्तांक को स्क्रीन पर देखा जा सकेगा। इसका प्रिंट लेने के बाद सॉफ्ट कॉपी भी सेव कर लेनी चाहिए। हालांकि, स्टूडेंट्स की मार्कशीट की हार्डकॉपी उनके सम्बन्धित स्कूलों द्वारा आवंटित की जाएगी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 30 May 2024 15:59:07 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur]]></dc:creator>
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            <item>
                <title> दक्षिण निगम चल रहा आॅफ लाइन, उत्तर हाईटेक</title>
                                    <description><![CDATA[इस वेबसाइट पर कोटा निगम से संबंधित जानकारी तो मिल रही है जबकि कोटा दक्षिण के बारे में अलग से जानकारी नहीं मिल पा रही है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/south-corporation-running-offline--north-hitech/article-48379"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-06/dakshin-nigam-chal-raha-hai-off-line,-uttar-hitech...kota-news-10-06-2023.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। स्वायत्त शासन विभाग ने कोटा में नगर निगम को उत्तर व दक्षिण में तो बांट दिया। करीब ढाई साल का समय बीत चुका है। लेकिन हालत यह है कि नगर निगम कोटा दक्षिण अभी तक भी अपनी अल से वेबसाइट तक नहीं बना सका है। जिससे आमजन को कोटा दक्षिण निगम से संबंधित आॅनलाइन जानकारी तक नहीं मिल पा रही है।  देश में वर्तमान में जहां हर काम आॅनलाइन होने लगे हैं। हर व्यक्ति घर बैठे मोबाइल व लैपटॉप पर सभी जानकारी पलभर में जानना चाहता है। ऐसे में लोगों को नगर निगम कोटा दक्षिण के बारे में आॅनलाइन जानकारी नहीं मिल पा रही है। इसका कारण कोटा में दो नगर निगम उत्तर व दक्षिण तो बना दिए। लेकिन कोटा दक्षिण का गठन होने के ढाई साल बाद भी अभी तक इसकी अलग से कोई वेबसाइट तक नहीं बनाई गई है।</p>
<p><strong>नवम्बर 2020  में हुआ बोर्ड का गठन </strong><br /> नवम्बर 2020 में निगम के चुनाव हुए। जिनमें कोटा उत्तर व कोटा दक्षिण दोनों निगमों क बोर्ड गठित हुए। दोनों में कांग्रेस के बोर्ड बने। बोर्ड बने करीब ढाई साल का समय हो गया है। लेकिन निगम के किसी भी अधिकारी या जनप्रतिनिधि से इस पर ध्यान ही नहीं दिया कि कोटा दक्षिण निगम की अलग से कोई वेबसाइट बनाई जाए। जिससे लोगों को सुविधा हो। कोटा में पहले जब एक नगर निगम थी। उस समय निगम की वेबसाइट कोटा एमसी. ओआरजी थी। वह दो निगम उत्तर व दक्षिण बनने के बाद कोटा उत्तर निगम के अधिकार क्षेत्र में चली गई है। इस वेबसाइट पर कोटा निगम से संबंधित जानकारी तो मिल रही है जबकि कोटा दक्षिण के बारे में अलग से जानकारी नहीं मिल पा रही है। जिससे अधिकतर लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। शिकायत सम्पर्क पोर्टल पर या ईमेल पर: नगर निगम से संबंधित कोई शिकायत होने पर लोग सम्पर्क पोर्टल पर डाल रहे हैं। या फिर ईमेल पर ही शिकायत भेज रहे हैं। ईमेल विभाग के संबंधित कर्मचारी या अधिकारी ही खोल सकते हैं। सम्पर्क पोर्टल पर सभी विभागों की शिकायतें आने पर निगम को ट्रांसफर की जा रही है। जबकि कोटा दक्षिण निगम  में क्या कुछ हो रहा है इसकी आॅनलाइन जानकारी आमजन को नहीं मिल पा रही है। जानकारी चाहे पट्टों से संबंधित हो या जन्म मृत्यु व विवाह प्रमाण पत्र या अन्य किसी आवेदन की। इनके संबंध में चलने वाली प्रक्रिया लोग आॅनलाइन जानना तो चाहते हैं लेकिन उन्हें इसकी सुविधा नहीं मिल पा रही है। </p>
<p><strong>आवेदन संबंधी जानकारी नहीं </strong><br />निगम की वेबसाइट व एप नहीं होने से यदि किसी व्यक्ति ने कोई आवेदन किया। उसके बाद वह आवेदन किस अधिकारी के पास है। किस कारण से और कहां अटका हुआ है। उस आवेदन पत्र का वर्तमान स्टेटस क्या है। या नगर निगम कोटा दक्षिण में क्या गतिविधि हो रही है। इसकी जानकारी आॅनलाइन नहीं मिल पा रही है। जिससे लोगों को अपने आवेदन संबंधी जानकारी के लिए निगम कार्यालय के चक्कर काटने पड़ रहे हैं। वहां संबंधित कर्मचारी या अधिकारी के नहीं मिलने पर लोग इधर से उधर परेशान होते हुए घूमने को मजबूर हैं। </p>
<p><strong>लोगों की पीड़ा</strong><br />छावनी निवासी राकेश यादव का कहना है कि कोटा दक्षिण निगम का गठन नवम्बर 2020 में हो गया है। अलग से निगम बनने के बाद भी अभी तक उसकी अलग से कोई वेबसाइट नहीं होने से लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। ऐसे में कोटा दक्षिण निगम से संबंधित कोई आॅनलाइन जानकारी ही नहीं मिल पा रही है।  दादाबाड़ी निवासी रितिक शर्मा का कहना है कि युवा पीढ़ी तकनीकी रूप से काफी सुदृढ़ है। ऐसे में रह हर जानकारी आॅनलाइन करना चाहता है। लेकिन कोटा दक्षिण निगम के बारे में आॅनलाइन जानकारी ही नहीं मिल पा रही है। उसकी अलग से कोई वेबसाइट ही नहीं है। जबकि छोटे-छोटे विभाग वेबसाइट पर उपलब्ध हैं। </p>
<p><strong>इनका कहना है</strong><br />नगर निगम कोटा दक्षिण की अलग से कोई वेबसाइट नहीं होने की जानकारी मुझे भी कुछ समय पहले ही पता चली है। लोगों ने जानकारी दी तो आश्चर्य भी हुआ कि इस हाईटैक समय में कोटा दक्षिण निगम की अपनी कोई वेबसाइट नहीं है।  जबकि कोटा दक्षिण निगम की अपनी वेबसाइट होनी चाहिए। इस संबंध में हाल ही में आयुक्त को एक यू.ओ. नोट लिखा है। जिसमें कोटा दक्षिण निगम की अलग से वेबसाइट व एप्लीकेशन एप शीघ्र बनाने को कहा गया है। <br /><strong>- पवन मीणा, उप महापौर नगर निगम कोटा दक्षिण </strong></p>
<p>नगर निम कोटा दक्षिण की अलग से कोई वेबसाइट नहीं होने की जानकारी नहीं है। ईमेल व सम्पर्क पोर्टल पर तो शिकायतें भी मिल रही है। जिनका समाधान भी किया जा रहा है। यदि ऐसा है तो इस संबंध में महापौर व उप महापौर और संबंधित अधिकारियों से चर्चा कर कोटा दक्षिण निगम की अलग से वेबसाइट बनवाई जाएगी। <br /><strong>- राजेश डागा, कार्यवाहक आयुक्त नगर निगम कोटा दक्षिण </strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 10 Jun 2023 15:38:50 +0530</pubDate>
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                <title>कांग्रेस का मेंबरशिप कैंपेन : डिजिटल मेंबरशिप का नहीं है रिस्पांस ऑफलाइन सदस्य ज्यादा बन रहे</title>
                                    <description><![CDATA[पहली बार ऑफलाइन के साथ ऑनलाइन अभियान]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/%E0%A4%95%E0%A4%BE%E0%A4%82%E0%A4%97%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A5%87%E0%A4%B8-%E0%A4%95%E0%A4%BE-%E0%A4%AE%E0%A5%87%E0%A4%82%E0%A4%AC%E0%A4%B0%E0%A4%B6%E0%A4%BF%E0%A4%AA-%E0%A4%95%E0%A5%88%E0%A4%82%E0%A4%AA%E0%A5%87%E0%A4%A8---%E0%A4%A1%E0%A4%BF%E0%A4%9C%E0%A4%BF%E0%A4%9F%E0%A4%B2-%E0%A4%AE%E0%A5%87%E0%A4%82%E0%A4%AC%E0%A4%B0%E0%A4%B6%E0%A4%BF%E0%A4%AA-%E0%A4%95%E0%A4%BE-%E0%A4%A8%E0%A4%B9%E0%A5%80%E0%A4%82-%E0%A4%B9%E0%A5%88-%E0%A4%B0%E0%A4%BF%E0%A4%B8%E0%A5%8D%E0%A4%AA%E0%A4%BE%E0%A4%82%E0%A4%B8-%E0%A4%91%E0%A4%AB%E0%A4%B2%E0%A4%BE%E0%A4%87%E0%A4%A8-%E0%A4%B8%E0%A4%A6%E0%A4%B8%E0%A5%8D%E0%A4%AF-%E0%A4%9C%E0%A5%8D%E0%A4%AF%E0%A4%BE%E0%A4%A6%E0%A4%BE-%E0%A4%AC%E0%A4%A8-%E0%A4%B0%E0%A4%B9%E0%A5%87/article-2548"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2021-11/congress_logo1.jpg" alt=""></a><br /><p> जयपुर। कांग्रेस के एक नवंबर से शुरू हुए सदस्यता अभियान में डिजिटल और ऑफलाइन मेम्बरशिप के प्रावधानों में डिजिटल मेम्बरशिप का ज्यादा रिस्पांस नहीं मिल रहा है। अधिकांश विधानसभा में कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं की आॅफलाइन मेम्बरशिप में ही ज्यादा रुचि दिखाई दे रही है। यही कारण है कि पीसीसी ने भी कांग्रेसजनों को डिजिटल फॉर्मेट लांचिग की जानकारी नहीं दी। डिजिटल फार्मेट में आवेदन को लेकर जानकारी नहीं देने से कांग्रेस कार्यकर्ता अभी असमजंस में हैं। अधिकांश कांग्रेस कार्यकर्ता, मंत्री-विधायक पीसीसी से सदस्य बनाने की डायरियां लेकर जा रहे हैं। कांग्रेस पार्टी में पहली बार सदस्यता के लिए आॅफलाइन के साथ आॅनलाइन अभियान की शुरूआत की गई है। राजस्थान में आॅनलाइन अभियान के बारे में ज्यादातर लोगों को जानकारी नहीं है। गौरतलब है कि एक नवंबर से शुरू हुआ कांग्रेस का मेम्बरशिप अभियान 31 मार्च 2022 तक चलेगा। सभी 200 विधानसभा क्षेत्र में करीब 50 लाख सदस्य बनाने का लक्ष्य रखा गया है, जिसमें हर विधानसभा क्षेत्र में कम से कम पांच हजार सदस्य बनाने का टारगेट रहेगा। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 19 Nov 2021 15:35:57 +0530</pubDate>
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                <title>सीबीएसई की दसवीं-बारहवीं की परीक्षा नवम्बर-दिसम्बर में</title>
                                    <description><![CDATA[डेढ़ घंटे की होगी वस्तुपरक परीक्षा]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world-of-education/%E0%A4%B8%E0%A5%80%E0%A4%AC%E0%A5%80%E0%A4%8F%E0%A4%B8%E0%A4%88-%E0%A4%95%E0%A5%80-%E0%A4%A6%E0%A4%B8%E0%A4%B5%E0%A5%80%E0%A4%82-%E0%A4%AC%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A4%B9%E0%A4%B5%E0%A5%80%E0%A4%82-%E0%A4%95%E0%A5%80-%E0%A4%AA%E0%A4%B0%E0%A5%80%E0%A4%95%E0%A5%8D%E0%A4%B7%E0%A4%BE-%E0%A4%A8%E0%A4%B5%E0%A4%AE%E0%A5%8D%E0%A4%AC%E0%A4%B0-%E0%A4%A6%E0%A4%BF%E0%A4%B8%E0%A4%AE%E0%A5%8D%E0%A4%AC%E0%A4%B0-%E0%A4%AE%E0%A5%87%E0%A4%82/article-1722"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2021-10/cbse.jpeg" alt=""></a><br /><p><strong>जयपुर</strong>। केन्द्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड दसवीं और बारहवीं कक्षाओं की टर्म 1 परीक्षा ऑफ लाइन मोड में नवम्बर दिसम्हर में आयोजित करेगा। सूत्रो से मिली जानकारी के अनुसार सर्दी के मौसम के मद्देनजर यह परीक्षा दोपहर 11.30 बडे से शुरू होकर डेढ़ घंटे चलेगी। परीक्षा वस्तुपरक शैली में होगी। उल्लेखनीय है कि इस परीक्षा की ओएमआर शीट कलम से भरी जचाएगी। इसमें पेंसिल का उपयोग वर्जित है। परीक्षा के बाद अंत दे दिए जाएंगे, लेकिन उसमें उत्तीर्ण, कम्पार्टमेंटल या फिर से परीक्षा देने की अनिवार्यता जैसी श्रेणियां नहीं होंगी।</p>
<p><br /> शिक्षा प्राप्त करने में  कोरोना के कारण आए व्यवधान के मद्देनजर सभी विषयों को माइनर और मेजर नामक दो समूहों में बांटा जाएगा। साथ ही सभी स्कूलों को निर्देश दे दिया गया है कि वे प्रायोगिक परीक्षा, आंतरिक मूल्यांकन आदि काम टर्म 1 की परीक्षा के पहले ही पूरा कर लें। परीक्षा के फाइनल परिणाम टर्म 1 और टर्म2 की परीक्षा के बाद ही घोषित होंगे। दोनों परीक्षाओं की प्रतिशत 50-50 प्रतिशत होगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>शिक्षा जगत</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 16 Oct 2021 12:16:03 +0530</pubDate>
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                <title>IMPS से राशि ट्रांसफर की सीमा बढ़कर पांच लाख</title>
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/imps-%E0%A4%B8%E0%A5%87-%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%B6%E0%A4%BF-%E0%A4%9F%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%82%E0%A4%B8%E0%A4%AB%E0%A4%B0-%E0%A4%95%E0%A5%80-%E0%A4%B8%E0%A5%80%E0%A4%AE%E0%A4%BE-%E0%A4%AC%E0%A4%A2%E0%A4%BC%E0%A4%95%E0%A4%B0-%E0%A4%AA%E0%A4%BE%E0%A4%82%E0%A4%9A-%E0%A4%B2%E0%A4%BE%E0%A4%96/article-1533"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2021-10/risrv-bank.jpg" alt=""></a><br /><p>मुंबई।  रिजर्व बैंक (आरबीआई) डिजिटल लेनदेन को अधिक सुविधाजनक बनाने की दिशा में एक कदम और बढ़ाते हुए तत्काल भुगतान सेवा (आईएमपीएस) के माध्यम से प्रतिदिन राशि ट्रांसफर करने की सीमा दो लाख रुपये से बढ़ाकर पांच लाख रुपये करने तथा अब इंटरनेट कनेक्टिविटी नहीं रहने (ऑफलाइन) पर भी भुगतान किये जाने की सुविधा शुरू करने की तैयारी कर रहा है।</p>
<p><br /> आरबीआई गवर्नर शक्तिकांता दास ने उनकी अध्यक्षता में केंद्रीय बैंक की मौद्रिक नीति समिति की समाप्त तीन दिवसीय द्विमासिक समीक्षा बैठक के बाद बताया कि भारतीय राष्ट्रीय भुगतान निगम (एनपीसीआई) की आईएमपीएस एक महत्वपूर्ण भुगतान प्रणाली है जो 24 घंटे सातो दिन घरेलू स्तर पर इंटरनेट बैंकिंग, मोबाइल बैंकिंग ऐप, बैंक शाखाओं, एटीएम, एसएमएस और आईवीआरएस जैसे विभिन्न चैनलों के माध्यम से राशि हस्तांतरण सुविधा प्रदान करती है। आईएमपीएस में प्रति लेन-देन की सीमा, जनवरी 2014 से प्रभावी, वर्तमान में एसएमएस और आईवीआरएस के अलावा अन्य चैनलों के लिए दो लाख रुपये तक सीमित है। एसएमएस और आईवीआरएस चैनलों के लिए प्रति लेनदेन की सीमा 5000 रुपये है।</p>
<p><br /> उन्होंने बताया कि आरटीजीएस (वास्तविक समय में सकल निपटान सेवा) के अब चौबीसों घंटे कार्यरत रहने के साथ आईएमपीएस के माध्यम से निपटान में समान वृद्धि हुई है, जिससे ऋण और निपटान का जोखिम कम हो गया है। घरेलू स्तर पर भुगतान एवं लेनदेन में आईएमपीएस प्रणाली के महत्व को देखते हुए एसएमएस और आईवीआरएस के अलावा अन्य चैनलों के लिए प्रति लेनदेन की सीमा दो लाख रुपये से बढ़ाकर पांच लाख करने का प्रस्ताव है। इससे डिजिटल भुगतान में और वृद्धि होगी और ग्राहकों को दो लाख रुपये से अधिक के डिजिटल भुगतान के लिए अतिरिक्त सुविधा प्रदान की जाएगी। इस संबंध में आवश्यक निर्देश अलग से जारी किए जाएंगे।</p>
<p><br /> दास ने बताया कि 06 अगस्त 2020 की मौद्रिक नीति समीक्षा बैठक में नई प्रौद्योगिकी के पायलट परीक्षण करने के लिए एक योजना की घोषणा की गई थी। यह प्रौद्योगिकी इंटरनेट कनेक्टिविटी की गति धीमी होने या उपलब्ध नहीं होने (ऑफलाइन मोड) की स्थिति में भी खुदरा डिजिटल भुगतान को संभव बनाता है। सितंबर 2020 से जून 2021 के दौरान देश के विभिन्न क्षेत्रों में इस योजना के तहत सफलतापूर्वक तीन पायलट परीक्षण किये गये।</p>
<p><br /> उन्होंने बताया कि इस परीक्षण के दौरान 1.16 करोड़ रुपये मूल्य के 2.41 लाख लेनदेन किये गये। इस परियोजना से प्राप्त अनुभव ने स्पष्ट किया कि खासकर दूरदराज के इलाकों में इस तरह के समाधान पेश करने की गुंजाइश है। इस परीक्षण से प्राप्त अनुभव और उत्साहजनक प्रतिक्रिया को देखते हुए देश भर में ऑफलाइन मोड में खुदरा डिजिटल भुगतान करने के लिए एक रूपरेखा पेश करने का प्रस्ताव है। विस्तृत दिशा-निर्देश यथासमय जारी किए जाएंगे।</p>]]></content:encoded>
                
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                <pubDate>Fri, 08 Oct 2021 18:25:06 +0530</pubDate>
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