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                <title>बांसी का रावजी मोहल्ला : नाममात्र जलापूर्ति से मोहल्लेवासियों में बढ़ा आक्रोश</title>
                                    <description><![CDATA[ऑनलाइन शिकायत दर्ज करवाने के बाद विभागीय अधिकारी मौके पर पहुंचे।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/bundi/bansi-s-raoji-mohalla--growing-outrage-among-residents-due-to-meager-water-supply/article-154550"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-05/1111200-x-600-px)-1111.png" alt=""></a><br /><p>भण्डेड़ा। क्षेत्र के बांसी कस्बे स्थित रावजी मोहल्ले में पिछले दो माह से पेयजल संकट गहराने से मोहल्लेवासियों में भारी नाराजगी है। जलदाय विभाग की ओर से पर्याप्त जलापूर्ति नहीं होने के कारण लोगों को भीषण गर्मी में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। समस्या के समाधान नहीं होने पर उपभोक्ताओं ने ऑनलाइन शिकायत दर्ज करवाई, जिसके बाद विभागीय अधिकारी मौके पर पहुंचे।</p>
<p>जानकारी के अनुसार जलदाय विभाग द्वारा बांसी कस्बे के विभिन्न मोहल्लों में घर-घर नल कनेक्शन दिए गए हैं, लेकिन रावजी मोहल्ले में पिछले लंबे समय से नलों में नाममात्र का पानी ही पहुंच रहा है। कई मकानों की दूसरी मंजिल तक पानी नहीं पहुंच पाने से लोगों की परेशानी और बढ़ गई है। ऑनलाइन शिकायत के बाद नैनवां के कनिष्ठ अभियंता विभागीय टीम के साथ मौके पर पहुंचे और जलापूर्ति शुरू करवाई। हालांकि उस समय भी उपभोक्ताओं के नलों में बहुत कम मात्रा में पानी पहुंचता दिखाई दिया। इसके बाद अधिकारियों ने कर्मचारियों को निर्धारित समय से 20 मिनट अतिरिक्त जलापूर्ति करने के निर्देश दिए।</p>
<p>मोहल्लेवासियों हुकमचंद शर्मा, मुकेश कुमार जैन, अंकित जैन, लोकेश शर्मा, सत्यनारायण सोनी, नीरूशंकर शर्मा, सीमा जैन, ममता जैन एवं अवधेश कुमार जैन सहित अन्य लोगों ने बताया कि कई बार विभागीय कर्मचारियों को समस्या से अवगत कराया गया, लेकिन समाधान नहीं हुआ। बिजली कटौती के दौरान मोटर बंद रहने से जलापूर्ति पूरी तरह प्रभावित हो जाती है, जिससे लोगों को निजी नलकूपों से पानी लाने को मजबूर होना पड़ रहा है। ग्रामीणों ने चेतावनी दी कि यदि शीघ्र स्थायी समाधान नहीं किया गया तो वे जलदाय विभाग कार्यालय पहुंचकर विरोध प्रदर्शन करेंगे। मौके पर पहुंचे अधिकारियों को भी लोगों के आक्रोश का सामना करना पड़ा। बाद में अधिकारियों ने समझाइश कर लोगों को शांत किया।</p>
<p>बांसी के जिस मोहल्ले में जलापूर्ति समस्या है। वह लाइन के टेल क्षेत्र के है। इस समस्या के समाधान के लिए निर्धारित समय से 20 मिनट अधिक समय तक जलापूर्ति करने के लिए कर्मचारी को निर्देशित किया गया है। मोहल्ले में समय से जलापूर्ति हो जाएगी।<br /><strong>- योगिता जांगिड़, जेईएन,जलदाय विभाग, नैनवां </strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
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                <pubDate>Thu, 21 May 2026 14:55:12 +0530</pubDate>
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                <title>राजस्थान के अंतिम गांव के हालात : 78 साल बाद भी बिस्लाई गांव में नहीं पहुंचा नल का पानी, ग्रामीण दूषित पानी पीने को मजबूर</title>
                                    <description><![CDATA[जहां मवेशी स्नान करते हैं वहीं मृत जानवरों को किनारे फेंक देते है।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/baran/the-situation-in-rajasthan-s-last-village--even-after-78-years--bislai-village-has-not-received-tap-water/article-127339"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-09/_4500-px)-(31).png" alt=""></a><br /><p>छीपाबड़ौद। छीपाबड़ौद तहसील क्षेत्र की सहजनपुर ग्राम पंचायत का बिस्लाई गांव आज भी बदहाली की दास्तां कह रहा है। आजादी के 78 साल बाद भी यहां पेयजल की सुविधा नहीं है। ग्रामीणों को अब भी नदी से पानी ढोकर लाना पड़ता है। महिलाएं हर रोज कई किलोमीटर दूर नदी तक जाती हैं और सिर पर मटकी रखकर परिवार के लिए पानी लाती हैं। वही नदी, जहां मवेशी स्नान करते हैं और मृत जानवरों को किनारे फेंक दिया जाता है। मजबूरी में ग्रामीण दूषित पानी पीने को विवश हैं। ग्रामीणों का कहना है कि नल-जल योजना, ट्यूबवेल और टैंकर की घोषणाएं केवल कागजों में सिमट गईं। सरपंच से लेकर विधायक-सांसद तक गुहार लगाने के बावजूद हालात जस के तस हैं। गांव के बुजुर्ग बताते हैं कि हर चुनाव में नेताओं ने वादे किए, लेकिन चुनाव जीतने के बाद कोई इस गांव की सुध लेने तक नहीं आया। ग्रामीणों का कहना है कि यदि जल्द ही ठोस कदम नहीं उठाए गए तो आंदोलन का सहारा लेना पड़ेगा।</p>
<p><strong>नेता व प्रशासन की प्रतिक्रिया</strong><br />बिस्लाई गांव की तस्वीरें साफ दिखा रही हैं कि सरकार और प्रशासन ने यहां की समस्याओं की अनदेखी की है। 78 साल बाद भी अगर ग्रामीणों को नदी से पानी ढोना पड़ रहा है तो यह सरकार की नाकामी है।<br /><strong>-  प्रेम सिंह मीणा, कांग्रेस नेता</strong></p>
<p>इस मामले का जल्द संज्ञान लिया जाएगा। <br /><strong>- अभिमन्यु सिंह कुंतल, उपखंड अधिकारी छीपाबड़ौद।</strong></p>
<p><strong>ग्रामीणों का दर्द उनके ही शब्दों में</strong></p>
<p>आजादी को 78 साल हो गए, लेकिन हमारे गांव में आज तक नल का पानी नहीं आया। जानवर जिस नदी में नहाते हैं, उसी से हमें पीने का पानी भरना पड़ता है। .<br /><strong>- घनश्याम बैरवा, ग्रामीण</strong></p>
<p>जनप्रतिनिधियों से लेकर अधिकारियों तक सबको कहा, लेकिन किसी ने नहीं सुना। गंदा पानी पीने से बच्चों और बुजुर्गों में बीमारियां फैल रही हैं। <br /><strong>- राम भरोस, ग्रामीण</strong></p>
<p>सुबह से दोपहर तक नदी से पानी लाना हमारी मजबूरी है। बारिश में स्थिति और भी विकट हो जाती है। <br /><strong>- नीलू बाई, महिला ग्रामीण </strong></p>
<p>बरसों से सुन रहे हैं कि नल-जल योजना आएगी, पाइप लाइन डलेगी, लेकिन आज तक कुछ नहीं हुआ।<br /><strong>- सूखना बाई, महिला ग्रामीण</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>बारां</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 19 Sep 2025 17:48:34 +0530</pubDate>
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