<?xml version="1.0" encoding="utf-8"?>        <rss version="2.0"
            xmlns:content="http://purl.org/rss/1.0/modules/content/"
            xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/"
            xmlns:atom="http://www.w3.org/2005/Atom">
            <channel>
                <atom:link href="https://dainiknavajyoti.com/ashapura-mata/tag-58591" rel="self" type="application/rss+xml" />
                <generator>Dainik Navajyoti Rising Rajasthan RSS Feed Generator</generator>
                <title>ashapura mata - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
                <link>https://dainiknavajyoti.com/tag/58591/rss</link>
                <description>ashapura mata RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>800 साल से भी अधिक पुराना है कोटा का आशापुरा माता मंदिर, दशहरा मेले की शुरूआत होती है मंदिर की पूजा से</title>
                                    <description>
                        <![CDATA[कोटा के दशहरा मैदान के पास स्थित यह मंदिर केवल एक धार्मिक स्थल ही नहीं, बल्कि इतिहास, परंपरा और लोकमान्यताओं का संगम है।]]>
                    </description>
                
                                    <content:encoded>
                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/the-ashapura-mata-temple-in-kota-is-over-800-years-old/article-127651"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-09/11-(1)20.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। नवरात्रि का पर्व शुरू होते ही कोटा शहर भक्ति और आस्था में सराबोर हो उठता है। हर गली-मोहल्ले में देवी के जयकारे गूंजने लगते हैं, माता की चौकियां सजती हैं और भक्तजन व्रत-उपवास रखते हुए माता की साधना में लीन हो जाते हैं। ऐसे पावन अवसर पर कोटा का आशापुरा माता मंदिर श्रद्धालुओं की आस्था का सबसे बड़ा केंद्र बन जाता है। कोटा के दशहरा मैदान के पास स्थित यह मंदिर केवल एक धार्मिक स्थल ही नहीं, बल्कि इतिहास, परंपरा और लोकमान्यताओं का संगम है। माना जाता है कि यह मंदिर करीब 800 साल से भी अधिक पुराना है। इसकी स्थापना रियासतकाल में हुई है। आज यह मंदिर केवल स्थानीय ही नहीं, बल्कि राजस्थान भर के श्रद्धालुओं के लिए आकर्षण का केंद्र बन चुका है। दशहरा और नवरात्र के दिनों में यहां देशभर से भक्त पहुंचते हैं। वर्तमान में भी मंदिर का रख-रखाव और पूजा-पाठ परंपरागत रीति-रिवाजों के अनुसार ही किया जाता है। यह आशापुरा माता हाड़ौती व चौहानों की कुलदेवी है। इसके लिए अन्य समाज में भी माता की आस्था है तथा कई जने कुलदेवी मानते है।</p>
<p><strong>आशापुरा मंदिर के दर्शन से होती हैं दशहरा मेले की शुरूआत</strong><br />कोटा का दशहरा मेला आज विश्व प्रसिद्ध है, लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि इसकी शुरूआत भी इसी मंदिर से होती है। परंपरा के अनुसार, दशहरे के शुभारंभ से पूर्व राजपरिवार के सदस्य यहां विशेष पूजा-अर्चना करते हैं। जब तक माता की आराधना पूरी नहीं हो जाती, तब तक मेले के कार्यक्रमों की शुरूआत नहीं होती। नगर निगम के अधिकारी, जनप्रतिनिधि और बड़ी संख्या में श्रद्धालु इस पूजा में शामिल होते हैं। इसके बाद ही दशहरा मैदान का विशाल आयोजन प्रारंभ होता है। कोटा का यह मंदिर एक ऐसा स्थल है, जहां राजपरिवार और आमजन दोनों समान रूप से श्रद्धा अर्पित करते हैं। दशहरा मेला हो या नवरात्र, दोनों अवसरों पर यहां की भव्यता देखते ही बनती है। यहां पूजा-अर्चना के बाद प्रसाद वितरण की परंपरा है, जिसे ग्रहण करने के लिए भक्त उत्सुक रहते हैं।</p>
<p><strong>समाधि और चमत्कारी किंवदंतियां</strong><br />मंदिर परिसर में स्थित सिद्धयोगी महाराज की समाधि स्थित है यह भी श्रद्धालुओं के लिए आस्था का केंद्र है। भक्त मानते हैं कि यहां समाधि से निकलने वाली ऊर्जा हर व्यक्ति का कल्याण करती है। कहा जाता है कि जो भी यहां सच्चे मन से मनोकामना मांगता है, माता उसकी हर इच्छा पूर्ण करती हैं। यही कारण है कि मंदिर का नाम आशापुरा पड़ा  जो सबकी आशा पूरी करती हैं।</p>
<p><strong>आशापुरा से बनीं आशापाला</strong><br />मंदिर के पुजारी सिद्धनाथ योगी बताते हैं कि यहां आने वाले भक्त खाली हाथ नहीं लौटते। माता हर मनोकामना को पूर्ण करती हैं। यही कारण है कि माता का नाम आशापुरा पड़ा। लाखों लोगों की आस्था से जुड़ा यह मंदिर आज भी उसी महिमा और चमत्कार से परिपूर्ण है, जैसे सदियों पहले हुआ करता था। मंदिर में आने वाले श्रद्धालुओं ने बताया कि  माता आशापुरा का प्राकट्य एक अशोक वृक्ष से हुआ था। इसी कारण इस मंदिर को लंबे समय तक आशापाला मंदिर के नाम से भी जाना जाता रहा। समय के साथ जब भक्तों ने महसूस किया कि माता उनकी हर मनोकामना पूरी करती हैं, तब यह मंदिर आशापुरा माता मंदिर कहलाने लगा। </p>
<p><strong>नवरात्र के दिन होते हैं विशेष कार्यक्रम</strong><br />- भजन संध्या और जागरण आयोजित होते हैं।<br />- भक्तों द्वारा सुंदरकांड पाठ और माता की चौकी सजाई जाती है।<br />- बड़ी संख्या में महिलाएं गरबा और डांडिया खेलकर माता का आह्वान करती हैं।</p>
<p><strong>नवरात्र में उमड़ती है आस्था की गंगा</strong><br />- नवरात्रि आते ही इस मंदिर की रौनक देखते ही बनती है। सुबह से ही श्रद्धालुओं की लंबी कतारें लग जाती हैं।<br />- सुबह 5 बजे मंदिर खुलता है और दोपहर 12.30 बजे तक दर्शन होते हैं।<br />- शाम को 4 बजे मंदिर पुन: खुलता है और रात 10 बजे तक दर्शनार्थियों की भीड़ रहती है।<br />- नवरात्रि में मंदिर पूरे दिन खुला रहता है ताकि कोई भी भक्त दर्शन से वंचित न रह जाए। अष्टमी के दिन यहां श्रद्धालुओं की संख्या बड़ी संख्या में पहुंचते है। अष्टमी के दिन मंदिर में खड़े होने के लिए भी जगह नहीं मिलती।</p>]]>
                    </content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/the-ashapura-mata-temple-in-kota-is-over-800-years-old/article-127651</link>
                <guid>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/the-ashapura-mata-temple-in-kota-is-over-800-years-old/article-127651</guid>
                <pubDate>Tue, 23 Sep 2025 14:26:05 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://dainiknavajyoti.com/media/2025-09/11-%281%2920.png"                         length="716363"                         type="image/png"  />
                
                                    <dc:creator>
                        <![CDATA[kota]]>
                    </dc:creator>
                            </item>

            </channel>
        </rss>
        