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                <title>devotion - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <title>शुक्र पुष्य नक्षत्र पर चांदपोल गणेश मंदिर में भव्य अभिषेक सम्पन्न, 101 किलो दूध एवं पंचामृत से पूर्ण हुआ आयोजन</title>
                                    <description><![CDATA[जयपुर के परकोटा गणेश मंदिर में शुक्र पुष्य नक्षत्र पर 101 किलो दूध और पंचामृत से भगवान गणेश का दिव्य अभिषेक किया गया। महंत अमित शर्मा के सानिध्य में गणपति को सिंदूर का चोला और नई पोशाक धारण कराई गई। भक्तों ने अथर्वशीर्ष का पाठ कर सुख-समृद्धि का आशीर्वाद लिया और हल्दी-सुपारी का विशेष प्रसाद प्राप्त किया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/grand-abhishek-completed-in-chandpol-ganesh-temple-on-venus-pushya/article-151573"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/ganesh.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। परकोटा गणेश मंदिर में शुक्रवार को शुभ शुक्र पुष्य नक्षत्र के अवसर पर विशेष अभिषेक का आयोजन किया गया। इस पावन अवसर पर भगवान गणेश का 101 किलो दूध एवं पंचामृत से विधिवत अभिषेक किया गया। कार्यक्रम की शुरुआत महंत पंडित अमित शर्मा के सानिध्य में हुई, जिसमें दूध, दही, शहद, गंगाजल, केवड़ा जल, गुलाब जल और केसर जल से गणेश जी का स्नान कराया गया। अभिषेक के पश्चात गणेश जी को सिंदूर का चोला चढ़ाया गया और नई पोशाक धारण कराई गई। इसके बाद गणपति अथर्वशीर्ष एवं गणपति अष्टोत्तर नामावली के मंत्रोच्चार के साथ मोदक का भोग अर्पित किया गया। श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह देखने को मिला, जिन्होंने सामूहिक रूप से गणपति अथर्वशीर्ष का पाठ कर भगवान को दूर्वा अर्पित की। इस अवसर पर भक्तों को गणेश जी और लक्ष्मी स्वरूप हल्दी की गांठ एवं सुपारी प्रसाद के रूप में वितरित की गई। पूरे मंदिर परिसर में भक्तिमय वातावरण बना रहा और श्रद्धालुओं ने भगवान गणेश का आशीर्वाद प्राप्त किया।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 24 Apr 2026 16:07:56 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>शोभायात्रा : गुलाबी नगरी में गूंजे भगवान परशुराम के जयकारे; पौराणिक झांकियां आकर्षण का केन्द्र रहीं, सबसे आगे प्रथम पूज्य की झांकी </title>
                                    <description><![CDATA[जयपुर के परकोटे में राजस्थान ब्राह्मण महासभा द्वारा भव्य शोभायात्रा निकाली गई। 1100 महिलाओं के मंगल गान और दो दर्जन आकर्षक झांकियों ने श्रद्धालुओं का मन मोह लिया। जलेब चौक से शुरू हुई इस यात्रा का बड़ी चौपड़ पर जनप्रतिनिधियों ने स्वागत किया, जिससे पूरा शहर भक्ति के रंग में रंग गया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/the-procession-echoed-in-the-pink-city-the-praises-of/article-151525"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/shoba-yatra.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। गुलाबी नगरी का परकोटा इलाका गुरुवार को भगवान परशुराम के जयकारों से गूंज उठा। अवसर था राजस्थान ब्राह्मण महासभा की जलेब चौक से निकली भगवान परशुराम की शोभायात्रा का। उत्सवी माहौल में बैंडबाजे की स्वर लहरियों के बीच निकली शोभायात्रा में दो दर्जन झांकियां आकर्षण का केन्द्र रहीं। शोभायात्रा को ब्रह्मपीठाधीश्वर काठिया परिवाराचार्य स्वामी रामरतन देवाचार्य महाराज के सान्निध्य में रवाना किया। केसरिया साफे में विप्रगणों के काफि ले के साथ शोभायात्रा बड़ी चौपड़ पहुंचीं। शोभायात्रा संयोजक हनुमान सहाय शर्मा और महासभा महामंत्री शिव कुमार भारद्वाज ने बताया कि शोभायात्रा में 1100 महिलाएं एक समान गणवेश में मंगल गीत गाती चल रही थीं। मार्ग में विभिन्न स्थानों पर पुष्प वर्षा और आरती कर स्वागत किया गया। छोटी चौपड़ पर प्रसाद वितरण के साथ समापन हुआ।</p>
<p><strong>इन झांकियों ने मोहा मन</strong></p>
<p>शोभायात्रा में विविध धार्मिक एवं पौराणिक झांकियां श्रद्धालुओं के आकर्षण का प्रमुख केन्द्र रहीं। सबसे आगे प्रथम पूज्य गणपति की झांकी थी। उसके बाद शिव परिवार, ताण्डव करते भगवान शिव, त्रिमुखी शिव, श्रीराधा गोविन्द, भगवान परशुराम की झांकी सहित शेरावाली मां, हनुमान जी के कंधे पर राम-लक्ष्मण, शिव जी की हथेली पर विराजित गणेशजी की झांकियों सहित भगवान परशुरामजी का मुख्य रथ की झांकी आकर्षक रही।  </p>
<p><strong>जनप्रतिनिधियों व संगठनों ने किया स्वागत</strong></p>
<p>बड़ी चौपड़ पर सामाजिक, व्यापारिक और राजनीतिक दलों के नेताओं ने शोभायात्रा की आरती उतारकर स्वागत किया। इस मौके पर विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी, सांसद मंजू शर्मा, राज्य देवस्थान बोर्ड के पूर्व अध्यक्ष एसडी शर्मा, पूर्व मंत्री बृजकिशोर शर्मा, राज्य महिला आयोग की पूर्व अध्यक्ष सुमन शर्मा सहित बड़ी संख्या में लोग मौजूद थे। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 24 Apr 2026 11:26:42 +0530</pubDate>
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                <title>नहाय-खाय के साथ बिहार में शुरू हुआ लोकआस्था का महापर्व चैती छठ: नवरात्रि की तर्ज पर साल में दो बार जाता मनाया</title>
                                    <description><![CDATA[बिहार और उत्तर भारत में चार दिवसीय चैती छठ महापर्व नहाय-खाय के साथ शुरू हो गया। सूर्य उपासना के इस कठिन व्रत में श्रद्धालु 36 घंटे का निर्जला उपवास रख भगवान भास्कर को अर्घ्य देंगे। आरोग्यता और संतान सुख के लिए किया जाने वाला यह पर्व बिना किसी पंडित या मंत्रोच्चार के, केवल पवित्रता और लोकगीतों के साथ संपन्न होता है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/chaiti-chhath-the-great-festival-of-folk-faith-started-in/article-147417"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/chat-parav.png" alt=""></a><br /><p>पटना। बिहार में लोक आस्था का चार दिवसीय महापर्व चैती छठ आज नहाय-खाय के साथ शुरू हो गया। चैती छठ व्रत पूर्वांचल एवं उत्तर भारत के अलावा पूरे देश में संयम एवं पवित्रता के साथ मनाया जाता है। यह महापर्व नवरात्रि की तर्ज पर साल में दो बार मनाया जाता है। हिन्दू पंचांग के अनुसार चैत्र मास में प्रथम तथा कार्तिक मास में दूसरी बार छठ महापर्व बिहार, झारखंड, उत्तर प्रदेश समेत पूरे भारत में मनाया जाने वाला सबसे लोकप्रिय पर्व है। चैती छठ के पहले दिन व्रती नर-नारियों ने नहाय-खाय के संकल्प के तहत स्नान करने के बाद अरवा भोजन ग्रहण कर इस व्रत को शुरू किया। महापर्व के दूसरे दिन श्रद्धालु पूरे दिन बिना जलग्रहण किये उपवास रखने के बाद सूर्यास्त होने पर पूजा करते हैं और उसके बाद एक बार ही दूध और गुड़ से बनी खीर खाते हैं तथा जब तक चांद नजर आये तब तक पानी पीते हैं। इसके बाद से उनका करीब 36 घंटे का निर्जला व्रत शुरू होता है।</p>
<p>इस महापर्व के तीसरे दिन व्रतधारी अस्ताचलगामी सूर्य को नदी और तालाब में खड़े होकर प्रथम अर्घ्य अर्पित करते हैं। व्रतधारी डूबते हुए सूर्य को फल और पकवान (ठेकुआ) से अर्घ्य अर्पित करते हैं। महापर्व के चौथे और अंतिम दिन फिर से नदियों और तालाबों में व्रतधारी उदीयमान सूर्य को दूसरा अर्घ्य देते हैं । भगवान भाष्कर को दूसरा अर्घ्य अर्पित करने के बाद ही श्रद्धालुओं का 36 घंटे का निर्जला व्रत समाप्त होता है और वे अन्न ग्रहण करते हैं।</p>
<p>परिवार की सुख-समृद्धि तथा कष्टों के निवारण के लिए किये जाने वाले इस व्रत की एक खासियत यह भी है कि इस पर्व को करने के लिए किसी पुरोहित (पंडित) की आवश्यकता नहीं होती है और न ही मंत्रोचारण की कोई जरूरत है। छठ पर्व में साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखा जाता है।</p>
<p>आचार्य राकेश झा ने बताया कि छठ का व्रत आरोग्यता, सौभाग्य व संतान के लिए किया जाता है। स्कंद पुराण के अनुसार राजा प्रियव्रत ने भी यह व्रत रखा था। उन्हें कुष्ठ रोग हो गया था। भगवान भास्कर से इस रोग की मुक्ति के लिए उन्होंने छठ व्रत किया था। स्कंद पुराण में प्रतिहार षष्ठी के तौर पर इस व्रत की चर्चा है। वर्षकृत्यम में भी छठ का वर्णन मिलता है। छठ महापर्व के पूजन एवं प्रसाद सामग्री के रूप में व्रती सिंदूर, चावल, बांस की टोकरी, धूप, शकरकंद, पत्ता लगा हुआ गन्ना, नारियल, कुमकुम, कपूर, सुपारी, हल्दी, अदरक, पान, दीपक, घी, गेहूं, गंगाजल आदि का उपयोग करते हैं। इस महापर्व में प्रसाद के लिये ठेकुआ एवं अन्य पकवान को घरों में पूरी शुद्धता एवं पवित्रता के साथ लोकगीत गाते हुए तैयार किया जाता हैं।अर्घ्य में नए बांस से बनी सूप एवं डाला का इस्तेमाल किया जाता है। सूप से वंश वृद्धि तथा उनकी रक्षा होती है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 22 Mar 2026 15:03:49 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>राष्ट्रपति ने की गिर्राज जी की सप्तकोसी परिक्रमा: पूंछरी का लौठा में भव्य स्वागत, राजस्थान के डेढ़ किलोमीटर एरिया में पैदल ही लगाई परिक्रमा</title>
                                    <description><![CDATA[राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने डीग के पूंछरी पहुँचकर गोवर्धन गिरिराज जी की 21 किमी परिक्रमा की। गृह राज्य मंत्री जवाहर सिंह बेढम ने उनका स्वागत किया। ब्रज के लोक कलाकारों ने राधा-कृष्ण नृत्य से समां बांधा। सुरक्षा के कड़े इंतजामों के बीच राष्ट्रपति ने दानघाटी मंदिर में दर्शन किए और कुछ मार्ग पैदल तय कर श्रद्धा प्रकट की।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/the-president-gave-a-grand-welcome-to-girraj-jis-saptakosi/article-147399"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/dropdi-murmu.png" alt=""></a><br /><p>डीग। राष्ट्रपति द्रोपदी मुर्मू डीग के पूंछरी के लौठा पहुंचीं, जहां राजस्थान सीमा के प्रवेश द्वार पर बनाए गए स्वागत कक्ष में उनका गर्मजोशी से अभिनंदन किया गया। इस मौके पर राजस्थान के गृह राज्य मंत्री जवाहर सिंह बेढम और जल संसाधन एवं डीग-भरतपुर प्रभारी मंत्री सुरेश सिंह रावत ने उन्हें गुलदस्ता भेंट कर अगुवाई की। राष्ट्रपति मुर्मू ने गोवर्धन गिरिराज जी की 21 किलोमीटर की परिक्रमा की शुरूआत की, जिसमें उन्होंने गोल्फ कार्ट का उपयोग किया, वहीं राजस्थान सीमा के अंतर्गत लगभग डेढ़ किलोमीटर का रास्ता पैदल तय किया। इस दौरान पूंछरी क्षेत्र में विशेष उत्साह देखने को मिला। राजस्थान पर्यटन विभाग द्वारा लोक कलाकारों ने ब्रज संस्कृति, राधा-कृष्ण के युगल नृत्य और पारंपरिक राजस्थानी प्रस्तुतियां दीं।</p>
<p><strong>गिरिराज धरण के दर्शन भी किए</strong></p>
<p>इससे पहले राष्ट्रपति महोदया ने गोवर्धन स्थित दानघाटी मंदिर में श्री गिरिराज धरण के दर्शन भी किए। उनके आगमन को लेकर पूरे परिक्रमा मार्ग को आकर्षक रंगों से सजाया गया और सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए।</p>
<p><strong>क्षेत्र में कड़ी सुरक्षा</strong></p>
<p>राष्ट्रपति की सुरक्षा व्यवस्था पुलिसकर्मी तैनात रहे, वहीं राजस्थान और उत्तर प्रदेश पुलिस ने मिलकर चप्पे-चप्पे पर निगरानी रखी। इस दौरान संभागीय आयुक्त नलिनी कठोतिया, जिला कलेक्टर उत्सव कौशल, आईजी भरतपुर रेंज कैलाश विश्नोई और डीग जिला पुलिस अधीक्षक कांबले शरण गोपीनाथ सहित कई प्रशासनिक अधिकारी और जनप्रतिनिधि मौके पर मौजूद रहे।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 22 Mar 2026 10:59:42 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>आज होगी मां कुष्मांडा की पूजा: जानें क्या है शुभ मुहूर्त और पूजा विधि</title>
                                    <description><![CDATA[नवरात्रि के चौथे दिन माँ कूष्मांड की पूजा का विधान है, जो अपनी मंद मुस्कान से ब्रह्मांड की रचना करती हैं। नारंगी (Orange) रंग के वस्त्र धारण कर माँ की आराधना करने से भविष्य की सभी विपत्तियां दूर होती हैं। देवी कूष्मांड सूर्य देव का प्रतिनिधित्व करती हैं, जो भक्तों को तेज और सौभाग्य प्रदान करती हैं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/maa-kushmanda-will-be-worshiped-today-know-what-is-the/article-147392"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/navratri1.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। नवरात्र के चौथे दिन मां कुष्मांडा की पूजा का विधान है, जो सूर्य देव को प्रदर्शित करती हैं। चतुर्थी तिथि पर संतरे रंग का कपड़ा पहनना शुभ माना जाता है। मां कुष्मांडा की पूजा करने से भविष्य में आने वाली सभी विपत्तियां दूर होती हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 22 Mar 2026 10:30:35 +0530</pubDate>
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                <title>राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने प्रेमानंद महाराज के दर्शन कर लिया आशीर्वाद: आध्यात्मिक उपदेशों से हुईं अभिभूत, सुरक्षा के कड़े इंतजाम</title>
                                    <description><![CDATA[राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने मथुरा प्रवास के दौरान वृंदावन में विख्यात संत प्रेमानंद महाराज से भेंट की। उन्होंने 'राधा केली कुंज' आश्रम में सत्संग सुना और राष्ट्र की प्रगति के लिए आशीर्वाद लिया। इस मुलाकात ने भारतीय संस्कृति में सत्ता और संत के अटूट जुड़ाव तथा भक्ति मार्ग की महिमा को रेखांकित किया है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/president-draupadi-murmu-had-darshan-of-premanand-maharaj-and-took/article-147184"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/dropdi.png" alt=""></a><br /><p>मथुरा। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु अपने मथुरा दौरे के दूसरे दिन शुक्रवार को वृंदावन के परिक्रमा मार्ग स्थित श्री हित राधा केली कुंज आश्रम पहुँचीं। यहाँ उन्होंने प्रख्यात संत श्री प्रेमानंद महाराज जी से शिष्टाचार भेंट की और उनका आशीर्वाद प्राप्त किया। आश्रम पहुंचने पर राष्ट्रपति का भव्य स्वागत किया गया। इसके उपरांत, उन्होंने पूज्य महाराज जी के साथ एकांत में बातचीत किया। राष्ट्रपति मुर्मु ने महाराज जी के द्वारा दिए जा रहे सत्संग और मानवता के कल्याण के लिए उनके द्वारा किए जा रहे प्रयासों की सराहना की। सूत्रों के अनुसार, राष्ट्रपति ने महाराज जी के उपदेशों और प्रवचनों को अत्यंत ध्यानपूर्वक सुना। उन्होंने महाराज जी से भक्ति मार्ग, मानसिक शांति और सेवा भाव जैसे विषयों पर चर्चा की।</p>
<p>भेंट के दौरान राष्ट्रपति की सादगी और महाराज जी के प्रति उनकी अटूट श्रद्धा स्पष्ट दिखाई दी। महाराज जी ने राष्ट्रपति को राधा नाम की महिमा और निस्वार्थ कर्म के महत्व के बारे में बताया। पूज्य प्रेमानंद महाराज, जो अपने प्रखर विचारों और राधा वल्लभ संप्रदाय की भक्ति परंपरा के लिए विश्वभर में जाने जाते हैं, ने राष्ट्रपति जी को मंगलमय जीवन और राष्ट्र की प्रगति के लिए अपना आशीर्वाद प्रदान किया।</p>
<p>राष्ट्रपति द्रोपदी के आगमन को देखते हुए स्थानीय प्रशासन और पुलिस द्वारा सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे। परिक्रमा मार्ग पर यातायात को कुछ समय के लिए डाइवर्ट किया गया था। इस भेंट के दौरान उत्तर प्रदेश सरकार के वरिष्ठ प्रतिनिधि और प्रशासनिक अधिकारी भी उपस्थित रहे। यह मुलाकात न केवल आध्यात्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण रही, बल्कि इसने भारतीय संस्कृति में सत्ता और संत के बीच के गहरे जुड़ाव को भी रेखांकित किया।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 20 Mar 2026 13:28:24 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने की चैत्र नवरात्र स्थापना पर पूजा-अर्चना: प्रदेशवासियों के स्वस्थ, सुखी एवं समृ़द्ध जीवन की प्रार्थना की; वृक्षों पर पक्षियों के लिए परिंडे भी बांधें</title>
                                    <description><![CDATA[मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने चैत्र नवरात्रि के पावन अवसर पर सपरिवार राज राजेश्वरी मंदिर में विधि-विधान से पूजा-अर्चना और घट स्थापना की। उन्होंने प्रदेश की सुख-समृद्धि की कामना करते हुए जीव-जंतुओं के प्रति करुणा का संदेश दिया और बढ़ती गर्मी को देखते हुए पक्षियों के लिए परिंडे बांधे।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/chief-minister-bhajan-lal-sharma-performed-puja-on-the-occasion/article-147021"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/cm-bhajanlal1.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने गुरूवार को चैत्र नवरात्र के प्रथम दिन मुख्यमंत्री निवास स्थित राज राजेश्वरी मंदिर में सपत्नीक विधिवत पूजा-अर्चना कर घट स्थापना की तथा मां दुर्गा की आराधना की। </p>
<p>शर्मा ने मां दुर्गा से प्रदेशवासियों के स्वस्थ, सुखी एवं समृ़द्ध जीवन की प्रार्थना की। मुख्यमंत्री ने इस दौरान आगामी गर्मी के मौसम को देखते हुए वृक्षों पर पक्षियों के लिए परिंडे भी बांधें।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 19 Mar 2026 12:39:34 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title> आलनिया माता मंदिर : माता की कृपा से मिलता है संतान सुख और समृद्धि, श्रद्धालुओं की आस्था और श्रद्धा का केंद्र </title>
                                    <description><![CDATA[यहां यात्रियों को रात में रुकने और विश्राम करने की सुविधा उपलब्ध है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/alaniya-mata-temple--the-blessings-of-the-mother-goddess-bring-happiness-and-prosperity-through-her-children/article-128042"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-09/copy-of-news43.png" alt=""></a><br /><p>कसार। कोटा झालावाड़ नेशनल हाईवे 52 के समीप स्थित नाहर सिंही माता का विशाल मंदिर, जिसे आलनिया माताजी के नाम से भी जाना जाता है, क्षेत्र में श्रद्धालुओं के लिए आस्था का प्रमुख केंद्र है। मान्यता है कि नि:संतान दंपतियों को संतान सहजता से प्राप्त हो जाती है। मंदिर में कालका माता व नाहर सिंही माता की प्राचीन प्रतिमाएं लगभग 500 साल पुरानी हैं। ग्रामीणों के अनुसार, इन्हें बूंदी जिले के मेनाल से दो साधु लेकर आए थे और जंगल में एक पेड़ के नीचे स्थापित किया। धीरे-धीरे आसपास का क्षेत्र बसा और श्रद्धालु दर्शन के लिए आने लगे।</p>
<p><strong>विशाल सिंह द्वार बनाया जाने की मांग: </strong> हाइवे किनारे स्थित आलनिया माता मंदिर पर माता के दर्शन मात्र से ही मानव के दुख दूर हो जाते हैं। नवरात्रि के दौरान दूर-दराज से श्रद्धालुओं का ताता लगता है। रविवार व सोमवार को भी काफी संख्या में भक्त दर्शन के लिए पहुंचते हैं। मंदिर समिति ने बताया कि यदि सर्विस रोड के समीप विशाल सिंहद्वार बनाया जाए तो हाईवे से गुजरने वाले यात्रियों की नजरें मंदिर पर पड़ेगी और दर्शनार्थियों की संख्या बढ़ेगी।</p>
<p><strong>परिसर में विशाल भोजनशाला, 10 कमरे, दो वाटर कूलर </strong><br />मंदिर अब ट्रस्ट द्वारा संचालित है। परिसर में विशाल भोजनशाला, 10 कमरे, दो वाटर कूलर और राहगीरों के लिए पेयजल टंकी व शौचालय बनाए गए हैं। यात्रियों को रात में रुकने और विश्राम करने की सुविधा उपलब्ध है।</p>
<p><strong>नौ दिनों तक माता का होता है आकर्षक श्रृंगार </strong><br />श्रद्धालुओं का विश्वास है कि दुनिया की कठिनाइयों से थककर माता के दरबार में आने से मनोकामना पूर्ण होती है। नवरात्रि के दौरान नौ दिनों तक माता का आकर्षक श्रृंगार किया जाता है और दुर्गा शतचंडी पाठ व पालकी नगर भ्रमण आयोजित होता है। मंदिर पुजारी रामनिवास सुमन ने बताया कि उनकी चार पीढ़ियां वर्षों से माता की पूजा अर्चना करती आ रही हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 27 Sep 2025 14:50:44 +0530</pubDate>
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