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                <title> training - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <description> training RSS Feed</description>
                
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                <title>अब डिजिटल वर्ल्ड में इस्लामिक स्टेट दे रहा बम बनाने की ट्रेनिंग, जानें पूरा मामला </title>
                                    <description><![CDATA[ऑस्ट्रेलिया के सिडनी स्थित बॉन्डी बीच नरसंहार को इस्लामिक स्टेट से प्रेरित बताया गया है। रिपोर्ट के अनुसार हमलावरों ने आईएस के प्रति निष्ठा जताई थी। जांच में सामने आया कि आईएस छोटे, एन्क्रिप्टेड मैसेजिंग ऐप्स के जरिए प्रचार, फंडरेजिंग और हिंसक गतिविधियों को बढ़ावा दे रहा है।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/now-islamic-state-is-giving-bomb-making-training-in-digital/article-136336"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-12/etws-(1200-x-600-px)-(1)9.png" alt=""></a><br /><p>सिडनी। ऑस्ट्रेलिया के सिडनी में बॉन्डी बीच पर हुआ नरसंहार, जिसमें 15 लोगों की जान गई, इस्लामिक स्टेट की विचारधारा से प्रेरित प्रतीत होता है। ऑस्ट्रेलियाई ब्रॉडकास्टर एबीसी न्यूज की रिपोर्ट के मुताबिक हमलावरों ने इस्लामिक स्टेट के प्रति निष्ठा की शपथ ली थी। रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि संदिग्धों में से एक, नवीद अकरम से पहले भी आतंकी संगठन से कथित संबंधों को लेकर पूछताछ की जा चुकी थी। यह घटनाक्रम आतंकवाद-रोधी अभियानों के बावजूद इस्लामिक स्टेट के वैश्विक प्रभाव को लेकर चिंताओं को बढ़ाता है।</p>
<p>हालांकि, जमीनी स्तर पर इस्लामिक स्टेट को काफी हद तक कमजोर किया गया है और वैश्विक प्रतिबंधों के चलते मुख्यधारा के सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर उसकी मौजूदगी सीमित हुई है, लेकिन आतंकी संगठन ने कम नियंत्रित डिजिटल स्पेस को अपनाकर अपने अंतरराष्ट्रीय समर्थक आधार तक पहुंचने और उन्हें कट्टरपंथी बनाने के नए तरीके ढूंढ लिए हैं। जांच में सामने आया है कि इस्लामिक स्टेट से जुड़े नेटवर्क मैट्रिक्स इकोसिस्टम के भीतर छोटे मैसेजिंग प्लेटफॉर्म्स का इस्तेमाल कर रहे हैं।</p>
<p><strong>कम प्रसिद्ध प्लेटफॉर्म्स पर फल-फूल रहा इस्लामिक स्टेट :</strong></p>
<p>जांच में यह भी पाया गया कि पहचान से बचने के लिए इस्लामिक स्टेट से जुड़े नेटवर्क कम प्रसिद्ध मैसेजिंग प्लेटफॉर्म्स की ओर शिफ्ट हो रहे हैं। Element, Cinny और Techhaven जैसे ऐप्स, जो खुले और डिसेंट्रलाइज्ड नेटवर्क पर काम करते हैं, मेनस्ट्रीम सोशल मीडिया के सुरक्षित विकल्प के तौर पर इस्तेमाल हो रहे हैं। ये ऐप्स मैट्रिक्स इकोसिस्टम पर आधारित हैं, जो एन्क्रिप्टेड मैसेज के जरिए सुरक्षित मैसेजिंग का जरिया बनते हैं। जांच में दर्जनों सीक्रेट चैनल सामने आए हैं, जो अलग-अलग नामों, जैसे अल बासिर मीडिया, हलुम्मु ऑफिशियल और फुरसान अल-तजुर्मा के तहत सक्रिय हैं और चरमपंथी कंटेंट फैला रहे हैं। यह कंटेंट पीडीएफ, ऑडियो मैसेज और पोस्ट्स सहित कई फॉर्मेट्स में साझा किया जाता है। ये कंटेंट अंग्रेजी, अरबी, फारसी से लेकर बांग्ला तक कई भाषाओं में उपलब्ध है, जो विभिन्न भौगोलिक क्षेत्रों को टार्गेट करने की सोची-समझी रणनीति को दिखाता है। ये चैनल केवल वैचारिक प्रोपेगेंडा तक सीमित नहीं हैं। ये कमांड-एंड-कंट्रोल हब के रूप में भी काम करते हैं, जहां सीनियर ऑपरेटिव्स फंडरेजिंग अपील्स से लेकर आॅपरेशनल आचरण और डिजिटल सुरक्षा तक के निर्देश जारी करते हैं ताकि आतंकी इकोसिस्टम को बनाए रखा जा सके।</p>
<p><strong>जो हिंसा में नहीं शामिल, उनसे मांगी जा रही वित्तीय मदद :</strong></p>
<p>ऐसा ही एक चैनल, दार अल-अरकम Techhaven पर ऑपरेट होता है। यह चैनल खुले तौर पर तथाकथित वित्तीय जिहाद का प्रचार करता पाया गया। इसमें उन समर्थकों से, जो सीधे हिंसा में शामिल नहीं हैं, आर्थिक योगदान देने की अपील की गई। एक संदेश में लिखा था, यही मौका है कि आप अपनी संपत्ति का इस्तेमाल मुजाहिदीन के लिए हथियार खरीदने में करें, ताकि वो काफिरों को मार सकें। इन चैनलों के अंदर हो रही बातचीत से यह भी पता चलता है कि टेलीग्राम पर बार-बार होने वाली कार्रवाई और चैनल हटाए जाने से इस्लामिक स्टेट से जुड़े लोगों में निराशा बढ़ रही है। इससे निपटने के लिए मेंबर्स को सीधे कंटेंट शेयर करने से बचने और तीसरे पक्ष की फाइल-होस्टिंग सेवाओं पर निर्भर रहने के निर्देश दिए जा रहे हैं। इसके अलावा, इस्लामिक स्टेट से जुड़ी एक अन्य यूनिट अल-सकरी फाउंडेशन ने अक्टूबर में एलीमेंट ऐप पर कई नए चैनल लॉन्च किए। ये चैनल मिलिट्री, मेडिकल और फिजीकल तैयारियों जैसे विशेष विषयों पर केंद्रित हैं, साथ ही व्यक्तिगत सवालों के लिए निजी चैट रूम भी उपलब्ध कराते हैं। अधिक चिंता की बात इसलिए भी है क्योंकि इन नेटवर्क्स से जुड़ी हालिया गतिविधियों में विस्फोटक पदार्थ टीएनटी बनाने के मैनुअल को भी शेयर किया जा रहा है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 18 Dec 2025 11:13:00 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur KD]]></dc:creator>
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                <title>रूस दे रहा चीन की सेना को हमले का प्रशिक्षण : 2 वर्ष के भीतर ही हमले की योजना, दस्तावेजों के विश्लेषण के आधार पर किया दावा </title>
                                    <description><![CDATA[ यह विश्लेषण कहता है रूस चीन को सैन्य उपकरण, तकनीक और ट्रेनिंग दे रहा है। इससे बीजिंग ताइवान पर हवाई हमले की तैयारी कर सकता है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/russia-is-providing-training-to-the-chinese-army-with-in-2/article-128122"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-09/russia-flag2.jpg" alt=""></a><br /><p>लंदन। रूस चीनी सेनाओं को ताइवान पर हमले और उस पर कब्जा करने का प्रशिक्षण दे रहा है। चीन की ओर से ताइवान पर अगले 2 साल में हमला किया जा सकता है। इसके लिए रूस की ओर से चीन को खास मदद की जा रही है। ब्रिटेन के लंदन स्थित एक संस्था ने लीक रूसी दस्तावेजों के विश्लेषण के आधार पर यह दावा किया है। यह विश्लेषण कहता है रूस चीन को सैन्य उपकरण, तकनीक और ट्रेनिंग दे रहा है। इससे बीजिंग ताइवान पर हवाई हमले की तैयारी कर सकता है। इस दावे ने ताइवान समेत कई देशों की चिंता को बढ़ा दिया है।</p>
<p><strong>मास्को से चीन को मिलने वाले मदद की सूची काफी लम्बी</strong><br />रॉयल यूनाइटेड सर्विसेज इंस्टीट्यूट ने रूस के 800 पृष्ठों के दस्तावेजों को छाना है। इनमें ब्लैक मून ऐक्टिविस्ट समूह से डील और मॉस्को की ओर से बीजिंग को दिए जाने वाले सैन्य उपकरणों की सूची है। दस्तावेजों में चीनी और रूसी प्रतिनिधिमंडलों के बीच बैठकों का भी उल्लेख है। इसमें विशेष हथियारों के लिए भुगतान और डिलीवरी की समयसीमा पर चर्चा है। एक्सपर्ट का कहना है कि इन उपकरणों का इस्तेमाल ताइवान पर आक्रमण के लिए हो सकता है। </p>
<p>जिनपिंग ने दिया सेना को तैयार रहने <strong>का </strong>आदेश <br />अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि जिनपिंग ने चीनी सेना को 2027 की शुरूआत में ताइवान पर संभावित आक्रमण के लिए तैयार रहने का आदेश दिया है। दस्तावेजों में हालांकि ताइवान का सीधेतौर पर जिक्र नहीं है। संस्थान के विश्लेषण से पता चलता है कि इस चीन को रूस से उन्नत पैराशूटिंग क्षमता मिलेगी, जिनकी उसे आक्रमण में जरूरत होगी। डैनिल्युक ने कहा कि रूसी उपकरणों और चीन में प्रशिक्षण तक पहुंच का मतलब है कि बीजिंग आक्रमण के लिए बेहतर ढंग से सुसज्जित होगा। उनका कहना है कि चीनी हवाई लैंडिंग स्कूल अभी बहुत नया है। ऐसे में रूस की सहायता से चीन के हवाई कार्यक्रम में 10 से 15 साल की तेजी आ सकती है। इस रिपोर्ट पर रूस, चीन या ताइवान ने प्रतिक्रिया नहीं दी है।</p>
<p>ओलेक्सांद्र डैनिल्युक और जैक वाटलिंग लिखते हैं कि चीन के लिए इस समझौते की सबसे ज्यादा अहमियत पैराशूट बलों की ट्रेनिंग और कमांड नियंत्रण में है। रूस के पास इस तरह के युद्ध का अनुभव है जबकि चीन के पास ऐसा तजुर्बा नहीं है। विश्लेषकों का कहना है कि बीजिंग की सैन्य क्षमता मॉस्को से ज्यादा है लेकिन इन क्षेत्रों में उसे रूस से मदद की जरूरत है। विश्लेषण के अनुसार रूसी अधिकारियों की ओर से चीन में प्रशिक्षण और एक हवाई बटालियन के लिए उपकरणों का सेट मिलेगा। इसमें 37 हल्के वाहन, 11 एंटी-टैंक स्वचालित बंदूकें, 11 हवाई बख्तरबंद कार्मिक वाहक, साथ ही कमांड और निगरानी वाहन शामिल हैं। इनकी कुल लागत 210 मिलियन डॉलर से अधिक बताई गई है।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 28 Sep 2025 11:51:32 +0530</pubDate>
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