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                <title>रावण पर राम से पहले इन्द्र का कहर : बारिश ने बिगाड़ा दशहरे का रंग, जयपुर में भीगे रावण के पुतले</title>
                                    <description><![CDATA[शहर के खुले मैदानों और मोहल्लों में लगे पुतले बारिश के कारण झुक गए या गीले होकर फटने गए।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/before-rama-on-ravana-indras-havoc-in-jaipur-affects-the/article-128403"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-10/copy-of-news2.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। राजधानी में मंगलवार शाम को हुई अचानक बारिश ने दशहरे की तैयारियों पर पानी फेर दिया। शहर के कई इलाकों में जगह-जगह खड़े किए जा रहे रावण, मेघनाद और कुंभकर्ण के पुतले भीग गए। पुतला बनाने वाले कलाकारों का कहना है कि कई दिनों की मेहनत से तैयार किए गए पुतलों को बारिश से नुकसान पहुंचा है। पुतलों का कागज और रंग फीका पड़ गया, जिससे आयोजकों को अब इन्हें दोबारा दुरुस्त करना पड़ेगा। शहर के खुले मैदानों और मोहल्लों में लगे पुतले बारिश के कारण झुक गए या गीले होकर फटने गए।</p>
<p>हालांकि आयोजकों का कहना है कि वे समय रहते पुतलों को फिर से सजाकर दशहरा उत्सव मनाने की तैयारी करेंगे। बारिश से बच्चों और दर्शकों में मायूसी जरूर छाई, लेकिन आयोजकों का कहना है कि रावण भले भीग गया हो, बुराई पर अच्छाई की जीत का पर्व पूरे उत्साह से मनाया जाएगा। बारिश के बाद पुतले बेचने वाले भी मायूस हैं। मानसरोवर मेट्रो स्टेशन के पास पुतले पानी में बह गए, जिससे उनको बनाने वालों को भारी नुकसान हुआ।  </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 01 Oct 2025 15:41:36 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur PS]]></dc:creator>
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                <title>Durga Puja Festival : शाम ढलते-ढलते जगमगा उठते हैं दुर्गा पूजा के सजे-धजे पंडाल, दुर्गाबाड़ी में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की भीड़</title>
                                    <description><![CDATA[सिंह पर आरूढ़ देवी का महिषासुर वध का दृश्य बिजली और धुएं के विशेष प्रभावों के साथ जीवंत प्रतीत हो रहा था।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/durga-puja-festival-in-the-evening-there-is-a-lot/article-128207"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-09/6390.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। शहर में बंगाली समाज की ओर से आयोजित होने वाली दुर्गा पूजा के भव्य आयोजन धीरे-धीरे परवान चढ़ने लगे हैं। प्रवासी बंगाली कल्चरल सोसायटी के जय क्लब लॉन में दुर्गा पूजा महोत्सव की षष्ठी की शाम श्रद्धा और उल्लास का अद्भुत संगम रही। सूर्यास्त होते ही सजे-धजे पंडाल में दीपों और रंगीन रोशनी की जगमगाहट फैल गई। अधिवास आमंत्रण के बाद संध्या आरती के साथ ही 'जय मां दुर्गा' और 'बोलो दुर्गा मां' की जय के गगनभेदी जयकारों ने पूरा वातावरण भक्तिमय बना दिया। शाम का मुख्य आकर्षण मां दुर्गा की भव्य झांकी रही। सिंह पर आरूढ़ देवी का महिषासुर वध का दृश्य बिजली और धुएं के विशेष प्रभावों के साथ जीवंत प्रतीत हो रहा था।</p>
<p>ढाक की ताल और शंखध्वनि ने वातावरण को और भी दिव्यता प्रदान की। सांस्कृतिक संध्या में पारंपरिक नृत्यों, भक्तिगीतों और बच्चों की नृत्य प्रतियोगिता ने उपस्थित जनसमूह को मंत्रमुग्ध कर दिया। समारोह के अध्यक्ष डॉ. एसके सरकार ने कहा कि जब ढाक बजता है और जय मां दुर्गा के स्वर गूंजते हैं तो लगता है मानो स्वयं शक्ति हमारे बीच अवतरित हो गई हैं। षष्ठी की यह संध्या हमें याद दिलाती है कि मां दुर्गा केवल शक्ति की प्रतीक नहीं, बल्कि आनंद आशा और नई शुरुआत की दूत भी हैं। </p>
<p><strong>दुर्गाबाड़ी में उमड़ पड़े श्रद्धालु</strong><br />बनीपार्क स्थित दुर्गाबाड़ी में दुर्गा पूजा महोत्सव के दूसरे दिन ही बड़ी संख्या में श्रद्धालु उमड़ पड़े। शाम ढलने के साथ ही लोगों के आने का सिलसिला शुरू हुआ,जो देर रात तक चलता रहा। लोगों ने जमकर लुत्फ उठाया।  </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 29 Sep 2025 13:04:20 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>दुर्गा से प्रकट हुई ज्वाला से सातवीं देवी कालरात्रि का आविर्भाव : काला वर्ण, बिखरे केश, चार भुजाओं में लोहे का खड्ग ही इनकी विशेष पहचान </title>
                                    <description><![CDATA[नवरात्र पर्व पर माता कालरात्रि की उपासना न केवल धार्मिक आस्था का विषय है, बल्कि यह मानव जीवन में सत्य, साहस और न्याय की स्थापना का प्रेरणास्रोत भी है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/from-the-flame-appearing-from-durga-the-emergence-of-the/article-128177"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-09/copy-of-news-(7)10.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। असुरों ने जब त्रिलोक में आतंक फैलाया, तब देवी दुर्गा ने अपने शरीर से एक तीव्र ज्वाला प्रकट की। उसी से कालरात्रि का जन्म हुआ। इनका स्वरूप अत्यंत भयंकर बताया गया है। काला वर्ण, बिखरे केश, गर्दन पर माला, चार भुजाओं में लोहे का खड्ग और वज्र धारण करने वाली इनकी विशेष पहचान है। यह उग्रता केवल दुष्टों के लिए है। भक्तों को माता कालरात्रि सदैव शुभ फ ल देती हैं। इसलिए इन्हें शुभंकरी भी कहा जाता है। सप्तमी तिथि पर माता कालरात्रि अपने अत्यंत उग्र और वीर स्वरूप के लिए जानी जाती हैं।</p>
<p>इन्हें विनाशकारी शक्तियों का नाश करने वाली देवी के रूप में स्मरण किया जाता है। माता कालरात्रि को समस्त दानवों, असुरों, भूत-प्रेत और नकारात्मक शक्तियों से रक्षा करने वाली जगज्जननी के रूप में जाना जाता है। धार्मिक ग्रंथों में उल्लेख है कि राक्षस शुंभ-निशुंभ और रक्तबीज के संहार में माता कालरात्रि ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। नवरात्र पर्व पर माता कालरात्रि की उपासना न केवल धार्मिक आस्था का विषय है, बल्कि यह मानव जीवन में सत्य, साहस और न्याय की स्थापना का प्रेरणास्रोत भी है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 29 Sep 2025 10:17:49 +0530</pubDate>
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