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                <title>kalisindh - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <title>कालीसिंध व आहू नदी बारिश में बनी यमदूत </title>
                                    <description><![CDATA[यहां लगातार हादसे होते रहते हैं लेकिन झालावाड़ प्रशासन जरा भी सबक नहीं ले रहा है। 
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jhalawar/kalisindh-and-aahu-rivers-become-messengers-of-death-in-the-rains/article-87108"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-08/4111u1rer-(18).png" alt=""></a><br /><p>झालावाड़। झालावाड़ की कालीसिंध और आहू नदियां ऐसी नदियां हैं, जिनमें झालावाड़ ही नहीं बल्कि मध्यप्रदेश में बारिश होने से भी बाढ़ आती है। पूरी बरसात यहां बाढ़ का क्रम चलता रहता है तथा झालावाड़ के समीप दोनों ही नदी की पुलियाएं अक्सर पानी में डूब रहती हैं। प्रत्येक वर्ष यहां लोग बहते हैं, जिनकी लाशें भी कई कई दिन तक नहीं मिल पाती है। हाल ही में भी तीन लोगों की यहां बह जाने से मौत हो गई है, जिनकी लाशें तीन दिन बाद निकाली जा सकी। उसके बाद भी प्रशासन सजग नहीं हुआ है, लोग आज भी जान जोखिम में डालकर इन उफनती हुई नदियों को पार कर रहे हैं। कई हादसे हो जाने के बाद भी प्रशासन सख्ती नहीं कर पा रहा है, यहां थोड़ी सी सख्ती की जाए तो इन हादसों पर लगाम लगाई जा सकती है।</p>
<p><strong>सिर्फ दो पुलिस कर्मियों की तैनाती की जरूरत</strong><br />लोग कहते हैं कि दोनों नदियों की पुलियाएं जब पानी में डूब जाती है, तब यहां नदी के दोनों तरफ यदि एक-एक पुलिसकर्मी तैनात कर दिया जाए तो लोग उफनती हुई नदियों को पार नहीं कर पाएंगे और हादसे नहीं होंगे, लेकिन लोग यह भी कहते हैं कि प्रशासन को नदी में बहती हुई लाशें पूरा लवाजमा लगाकर ढूंढना तो मंजूर है लेकिन यह गवारा नहीं कि यहां दो पुलिसकर्मी तैनात कर दिये जाएं।</p>
<p><strong>लोग बताते हैं अपनी मजबूरियां</strong><br />झालावाड़ मुख्यालय से गागरोन को जोड़ने वाली इन दोनों नदियों को जोखिम में जान डालकर पार करने वाले लोगों में गागरोन सहित अन्य 12 गांवों के वह लोग शामिल हैं जो अपनी रोजी-रोटी कमाने झालावाड़ आते हैं। इनमें से अधिकांश लोग वह हैं जो दिहाड़ी मजदूरी करते हैं और अपना पेट पालते हैं। लोग कहते हैं की अगर अपनी जान जोखिम में डालकर नदियां पार करके मजदूरी करने नहीं जाए तो उनका परिवार भूखे मरने की कगार पर आ जाता है।</p>
<p><strong>प्रशासन नहीं ले रहा सबक</strong><br />यहां लगातार हादसे होते रहते हैं लेकिन झालावाड़ प्रशासन जरा भी सबक नहीं ले रहा है। अभी 3 दिन पहले जब यहां तीन लोग बह कर मौत के मुंह में जा चुके हैं तब प्रशासनिक अमला भी यहां पहुंचा था। मामला विधानसभा में भी गूंजा था, लेकिन प्रशासन रेस्क्यू मिशन देखने तो आया किंतु उसने घटना से कोई सबक नहीं लिया और आज भी हालात वैसे ही है कि लोग अपनी जान जोखिम में डालकर इस नदी को पार कर रहे हैं।</p>
<p><strong>ये है इनका कहना</strong><br />जिले के लोगों से अपील की है कि वह उफनती हुई नदियों और पानी के स्रोतों से दूर रहे हैं तथा अपने जीवन को खतरे में डालकर नदी नाले पार करने का प्रयास न करें।<br /><strong>- ऋचा तोमर, एसपी झालावाड़</strong></p>
<p><strong>इनका कहना है </strong><br />आहू नदी की पुलिया के टेंडर हो गए है। बरसात और नदी में बाढ़ आ जाने की वजह से काम शुरू नहीं हो पाया। जब बारिश के बाद काम शुरू करवाएंगे। काली सिंध नदी की पुलिया का निर्माण कार्य शुरु हो चुका है। <br /><strong>- हुकुमचंद मीणा, अधीक्षण अभियंता , सार्वजनिक निर्माण विभाग</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>झालावाड़</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 07 Aug 2024 16:41:16 +0530</pubDate>
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                <title>कालीसिंध नदी पर बना पुल 3 साल से क्षतिग्रस्त </title>
                                    <description><![CDATA[गंगधार चौमहला मार्ग पर छोटी कालीसिंध नदी पर बना हाई लेवल पुल की सेफ्टी दीवारें क्षतिग्रस्त हो रही है। साथ ही पुल के ऊपर सीसी सड़क नीचे बैठ जाने से कंस्ट्रक्शन जॉइंट सस्पेंशन बहार निकल आए है ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jhalawar/bridge-over-kalisindh-river-damaged-for-3-years/article-10313"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-05/kaali-sindh-river-bridge-chaumahla-jhalawar.jpg" alt=""></a><br /><p> चौमहला। गंगधार चौमहला मार्ग पर छोटी कालीसिंध नदी पर बना हाई लेवल पुल विभाग की अनदेखी के कारण अपनी दुर्दशा पर आंसू बहा रहा है, यदि समय रहते इसकी सम्भाल नहीं की तो कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है। क्षेत्र के वाशिन्दों जनप्रतिनिधियों ने कई बार अधिकारियों को अवगत कराया, लेकिन विभाग ने अभी तक हाइलेवल पुल की सूध नहीं ली।   गंगधार चौमहला मार्ग पर गंगधार के समीप छोटी काली सिंध नदी पर बने इस पुल की सेफ्टी दीवारें क्षतिग्रस्त हो रही है। साथ ही पुल के ऊपर सीसी सड़क नीचे बैठ जाने से कंस्ट्रक्शन जॉइंट सस्पेंशन बहार निकल आए है तथा ऊपर नीचे जगह होने से पुल के ऊपर टेपर बन गए, जिससे वाहन चालकों को परेशानी हो रही है। गंगधार चौमहला के मार्ग पर छोटी कालीसिंध नदी पर उच्च स्तरीय पुल की एप्रोच सड़क की सेफ्टी दीवार 2019 में आई बाढ़ के बाद से क्षतिग्रस्त है, जो सेफ्टी दीवार थी, वह पूरी तरीके से टूट चुकी है। वहीं पूल के दूसरे हिस्से गंगधार की ओर बड़ी-बड़ी झाड़ियां व कांटेदार बबूल के पेड़ भी खड़े हैं। सेफ्टी दीवार से मिट्टी निकल रही है।    गौरतलब है कि अगस्त सितंबर 2019 में भयंकर रूप से बाढ़ आई थी, जिसमें कई छोटे-बड़े पुलों को काफी नुकसान हुआ था, इसी दौरान गंगधार कस्बे के समीप बने पुल की सेफ्टी वॉल का एक हिस्सा धंस गया था, उसके सहारे लगाए पत्थर गिर गए थे। इस सेफ्टी वॉल  से लगातार मिट्टी का बहाव हो रहा है और कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है। इस मामले में आरएसआरडीसी पीडब्ल्यूडी सहित संबंधित विभागों व उपखंड अधिकारी से शिकायत की, लेकिन अभी तक इस समस्या का समाधान नहीं हुआ है।  पुल के ऊपर टेपर बन जाने से वाहन चालकों को आने-जाने में बड़ी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है, यहां पर बड़े-बड़े गड्ढे होने के कारण वाहन चालकों को जान माल का खतरा बना रहता है। पुल के दोनों ओर बने फुटपाट के किनारे काफी मिट्टी जमा हो रही है तथा बरसात के पानी निकासी के लिए लगी जालियां मिट्टी में दब रही है। बरसात के दिनों में पुल के दोनों ओर हरी घास उग जाती है।<br /><br />सरकारी धरोहर है प्रोजेक्ट की अनदेखी की जा रही है, शीघ्र पुल की मरम्मत की जानी चाहिए। <br /><strong>- सलामत अली फौजदार चौमहला निवासी</strong><br /><br />पुल के ऊपर टेपर बन जाने से वाहन चालकों को परेशानी होती है, कई बार दो पहिया वाहन से महिलाए गिर चुकी है। एप्रोच क्षतिग्रस्त हो रही है तथा पुल के ऊपर दोनों तरफ झाड़ियां उग रही है , जिससे मोड़ अंधा हो रहा है।<br /><strong>- राजेश नीमा पूर्व सरपंच गंगधार</strong><br /><br />पुल पर गड्ढे हो रहे है साथ ही टेपर से चालक को परेशानी होती है, वाहनों को नुकसान भी हो रहा है।<br /><strong>- सैय्यद अली ट्रक आॅनर</strong> <br /><br />दोनों ओर से एप्रोच टूट चुकी है, पुल पर बड़े बड़े गड्ढे हो रहे है तथा पुल 6-6 इंच झूल चुका है कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है। कई बार अधिकारियों को अवगत कराया, सीएलजी की बैठक में भी यह मुद्दा उठाया, लेकिन कोई अधिकारी ध्यान नही दे रहे है। <br /><strong>- दिलीप मोरी गंगधार निवासी</strong><br /><br />शीघ्र ही जिला मुख्यालय पर आरएसआरडीसी के अधिकारियों की बैठक लेकर समस्या का समाधान करवाया जावेगा। <br /><strong> - भारती दीक्षित, जिला कलक्टर झालावाड</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>झालावाड़</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 23 May 2022 17:26:08 +0530</pubDate>
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                <title>दस दिन में 300 लाख यूनिट की बढ़ी डिमांड</title>
                                    <description><![CDATA[कालीसिंध और सूरतगढ़ थर्मल में एक-दो दिन का ही कोयला बचा]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/%E0%A4%A6%E0%A4%B8-%E0%A4%A6%E0%A4%BF%E0%A4%A8-%E0%A4%AE%E0%A5%87%E0%A4%82-300-%E0%A4%B2%E0%A4%BE%E0%A4%96-%E0%A4%AF%E0%A5%82%E0%A4%A8%E0%A4%BF%E0%A4%9F-%E0%A4%95%E0%A5%80-%E0%A4%AC%E0%A5%9D%E0%A5%80-%E0%A4%A1%E0%A4%BF%E0%A4%AE%E0%A4%BE%E0%A4%82%E0%A4%A1/article-1622"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2021-10/bijli-transfer.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>जयपुर</strong>। कोयले की कमी से बढ़ता बिजली संकट प्रदेश में गहराता जा रहा है। बिजली कटौती के बावजूद बढ़ती डिमांड की तुलना में सप्लाई के आंकड़ों ने ऊर्जा विभाग की चिंता बढ़ा दी है। हालात यह हैं कि प्रदेश में जहां दस दिन में करीब 300 लाख यूनिट बिजली की डिमांड बढ़ गई है, वहीं बिजली उत्पादन इकाइयों में भी कोयला संकट बढ़ता जा रहा है। कालीसिंध थर्मल पावर प्रोजेक्ट और सूरतगढ़ थर्मल में तो महज एक या दो दिन का कोयला ही बचा है। राजस्थान राज्य विद्युत उत्पादन निगम के आंकड़ों के अनुसार प्रदेश मे एक अक्टूबर को 2153 लाख यूनिट खपत रही तो दस अक्टूबर तक यह आंकड़ा 2478 लाख यूनिट तक पहुंच गया। हालांकि 11 अक्टूबर को डिमांड में कुछ कमी आते हुए यह आंकडा 2395 लाख यूनिट रहा,जबकि उपलब्धता का आंकडा करीब 2232 लाख यूनिट रहा। मांग और आपूर्ति के बीच अभी भी मैनेजमेंट गडबडाया हुआ है, इसलिए प्रदेशभर में बिजली कटौती जारी है। कोयला संकट अगर जल्दी दूर नहीं हुआ तो आगामी दिनों में भी बिजली कटौती जारी रहेगी। बिजली उत्पादन इकाइयों में कोयला स्टॉक की बात करें तो कोटा थर्मल में महज तीन से चार दिन, सूरतगढ़ थर्मल में एक या दो दिन, छबड़ा थर्मल में छह दिन, छबड़ा सुपर क्रिटिकल में तीन से चार दिन, कालीसिंध थर्मल पावर प्रोजेक्ट में एक या दो दिन तथा सूरतगढ़ सुपर क्रिटिकल में तीन से चार दिन का कोयला ही बचा है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 13 Oct 2021 10:44:20 +0530</pubDate>
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                <title>बिजली संकट के बीच कुछ राहत</title>
                                    <description><![CDATA[कालीसिंध तापीय विद्युतगृह में उत्पादन शुरू]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/%E0%A4%AC%E0%A4%BF%E0%A4%9C%E0%A4%B2%E0%A5%80-%E0%A4%B8%E0%A4%82%E0%A4%95%E0%A4%9F-%E0%A4%95%E0%A5%87-%E0%A4%AC%E0%A5%80%E0%A4%9A-%E0%A4%95%E0%A5%81%E0%A4%9B-%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%B9%E0%A4%A4/article-1555"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2021-10/kota-tharmal.jpg-mks.jpg" alt=""></a><br /><p><strong> जयपुर</strong>। राज्य की कालीसिंध तापीय विद्युतगृह की 600 मेगावाट उत्पादन क्षमता की बंद इकाई में शनिवार से उत्पादन शुरु हो गया है। ऐसे में प्रदेश में गहराए बिजली संकट से कुछ राहत मिलने की उम्मीद है। इसके साथ ही राज्य के कोल ब्लॉक्स से पिछले दिन की तुलना में कोयले की करीब ढाई रेक अधिक डिस्पेच हुई है जो रविवार तक पहुंचने की संभावना है। यह जानकारी देते हुए अतिरिक्त मुख्य सचिव एनर्जी डॉ. सुबोध अग्रवाल ने बताया कि कोल ब्लॉक से इससे पहले सात से साढ़े सात रेक कोयला आ रहा था। कोल इंडिया से भी कोयले की आपूर्ति बढ़वाने के उच्च स्तर पर प्रयास जारी है। डॉ. अग्रवाल ने शनिवार को विद्युत भवन में बिजली निगमों के उच्च अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक की। उन्होंने बताया कि केन्द्र सरकार के कोयला सचिव अनिल जैन से दूरभाष पर चर्चा कर विद्युत उत्पादन निगम और अडानी के संयुक्त उपक्रम परसा ईस्ट एवं कांता बासन कोल ब्लॉक से कोयले की अधिक आपूर्ति के लिए सहमति हो गई है जिससे आने वाले दिनों में इन ब्लाकों से अधिक कोयला मिलने लगेगा। उन्होंने बताया कि शटडाउन या अन्य कारणों से बंद इकाइयों में भी शीघ्र ही उत्पादन शुरु करवाया जा रहा है।</p>
<p><strong><br /> एक अधिकारी को भेजा बिलासपुर</strong><br /> डॉ. अग्रवाल ने बताया कि सरकार ने एक अधिकारी एसपी अग्रवाल को बिलासपुर भेजा गया है। इससे पहले कई अधिकारियों को बिलासपुर भेजा गया है ताकि वहां से कोयले की आपूर्ति के लिए समन्वय बनाकर कोयले की रेक रवानगी करा सके। अग्रवाल ने बताया कि विभाग द्वारा रोस्टर के आधार पर ग्रामीण व शहरी क्षेत्रों में विद्युत कटौती की जा रही है और इसकी पूर्व सूचना दी जा रही है।</p>
<p><strong><br /> 12650 मेगावाट बिजली की रही मांग</strong><br /> डॉ. अग्रवाल ने बताया कि शनिवार को प्रदेश में ओसत 10267 मेगावाट व अधिकतम 12650 मेगावाट बिजली की मांग रही। राज्य में 8657 मेगावाट की उपलब्धता रही। <br /> <br /> <strong>लगातार कोयले की रैक मिलने से जारी है बिजली उत्पादन : कोटा थर्मल भी बना प्रदेश का संकट मोचक</strong><br /> राजस्थान में कोयले की कमी के चलते कई बिजली घरों में यूनिटें बंद हो रही हैं। बिजली उत्पादन पर असर पड़ा है लेकिन कोटा थर्मल पावर स्टेशन में 6 यूनिटों में लगातार उत्पादन हो रहा है। कोटा थर्मल में अभी  1000 मेगावाट उत्पादन हो रहा है, जो प्रदेश को ग्रिड से करीब एक तिहाई बिजली उपलब्ध करवा रहा है।  अधिकारियों के अनुसार वर्तमान में आ रही रैक और स्टॉक को मिलाकर बात की जाए तो कोटा थर्मल के पास चार दिन का स्टॉक पड़ा हुआ है। रोज रैक आ रही है। हालांकि यहां पर भी कब कोयले की कमी का असर दिखने लग जाए कहा नहीं जा सकता। खुद थर्मल के अधिकारी मानते हैं कि अभी तो काम चल रहा है आगे का कुछ नहीं कहा जा सकता है। लेकिन वर्तमान में बिजली घरों में संकटमोचक की भूमिका कोटा थर्मल निभा रहा है। कोयले की उपलब्धता, स्टॉक और डिमांड व उत्पादन को देखते हुए कोटा थर्मल भी सुपर क्रिटिकल स्थिति में है।  लेकिन अभी मात्र 4 दिन का कोयला यहां पर बाकी है।  रोज कोयले की चार से पांच रैक यहां पहुंच रही हैं। रोज रैक मिलने के चलते स्टॉक बचा हुआ है। जिससे लगातार बिजली की जितनी खपत हो रही उतनी ही मात्रा में यहां कोयला उपलब्ध हो रहा है।<br /> <br /> <strong>130 गाड़ियों का एलॉटमेंट</strong><br /> कोटा थर्मल में इस महीने कोयले की 130 माल गाड़ियों का एलॉटमेंट है। ऐसे में कोटा थर्मल पावर प्लांट के पास 47 हजार मैट्रिक टन से ज्यादा कोयला उपलब्ध है। कोटा थर्मल सुपरक्रिटिकल स्थिति में होने के बाद भी लगातार उत्पादन कर रहा है और कोयले का संकट फिलहाल यहां नजर नहीं आ रहा है।</p>
<p><br /> <strong>एक यूनिट है बंद</strong><br /> थर्मल की 6 नंबर यूनिट सालाना रखरखाव के लिए बंद है। 195 मेगावाट की यूनिट 15 दिनों से बंद है। अधिकारियों के अनुसार राज्य सरकार ने 3 दिन में इस यूनिट को भी चालू करने के निर्देश दिए हैं। ऐसे में इसे भी जल्द लाइटप कर उत्पादन शुरू किया जाएगा।<br /> <br /> <strong>स्टॉक हो रहा है सरप्लस</strong><br /> अधिकारियों के अनुसार थर्मल में जैसे ही कोयले की रैक आ रही है अधिकतर को बंकरों में ही खाली करवाया जा रहा है। रोज 17 हजार मैट्रिक टन कोयले की खपत हो रही है लेकिन करीब 28 हजार मैट्रिक टन कोयला रोज मिल रहा है। ऐसे में स्टॉक मेटेंन रहने के साथ साथ बढ़ भी रहा है।</p>
<p><br /> <strong>इनका कहना है</strong><br /> हमे रोज रैक मिल रही है इसलिए दिक्कत नहीं आई। स्टॉक हमारे पास है, पूरी क्षमता से उत्पादन भी कर रहे हैं। एक यूनिट वार्षिक शटडाउन पर है । उसे भी जल्द लाइटअप कर चालू कर दिया जाएगा। आगे के बारे में तो कह नहीं सकते, लेकिन अभी हमारे पास उत्पादन के अनुरूप कोयला आ रहा है।<br /> -वीके गोलानी, चीफ इंजीनियर, थर्मल <br />  </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 10 Oct 2021 11:11:59 +0530</pubDate>
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