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                <title>conocarpus - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <title>असर खबर का - वन विभाग ने राजस्थान में कोनोकार्पस को किया बैन, दूसरे सरकारी विभागों को भी इस प्रजाति के पौधे न लगाने के लिए करेगें पाबंद </title>
                                    <description><![CDATA[मुख्य वन संरक्षक-आयोजना ने प्रदेश के सभी मुख्य वन संरक्षकों को जारी किए निर्देश।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/impact-of-news--the-forest-department-has-banned-conocarpus-in-rajasthan-and-will-also-prohibit-other-government-departments-from-planting-this-species/article-128613"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-10/copy-of-news-(1)9.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। सुप्रीम कोर्ट की सेंट्रल एम्पावर्ड कमेटी की सिफारिश के बाद अब वन विभाग ने राजस्थान में कोनोकार्पस पर पूर्णत: बैन लगा दिया है। विभाग ने अपने महकमे में कोनोकार्पस प्रजाति के पौधों का आयात-निर्यात, पौधारोपण और वन नर्सियों में इसके पौध उत्पादन पर पूरी तरह से प्रतिबंधित कर दिया है। इस संबंध में मुख्य वन संरक्षक एसआर वेंकटश्वर मूर्थी ने प्रदेश के सभी मुख्य वन संरक्षकों को निर्देश जारी किए हैं। इसके बाद से सम्पूर्ण वन महकमें में कोनोकार्पस पूर्णत: प्रतिबंधित हो गया है। इसके बावजूद  यदि वन नर्सियों में कोनोकार्पस का आयात-बेचना या पौध उत्पादन होता है तो संबंधित अधिकारियों व कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। गौरतलब है कि दैनिक नवज्योति ने 30 सितम्बर को जिस पौधे को 4 राज्यों ने बैन किया उसे चंबल रिवर फं्रट और आॅक्सीजोन में जमकर लगाया..., 2 अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट की कमेटी ने माना, कोनोकार्पस स्वास्थ्य व पर्यावरण के लिए खतरनाक..., शीर्षक से समाचार प्रकाशित किया था। इसके बाद वन विभाग ने इस प्रजाति के पौधों का राज्य में आयात-बेचान एवं पौधरोपण पर प्रतिबंध लगाया। </p>
<p><strong>आयात-निर्यात व पौधारोपण पर बैन</strong><br />मुख्य वन संरक्षक-आयोजना जयपुर द्वारा वन अधिकारियों को जारी किए पत्र में सुप्रीम कोर्ट की केंद्रीय सशक्त समिति की सिफारिशों का उल्लेख किया है। पत्र में बताया गया है कि कोनोकार्पस प्रजातियों के पौधों को राज्य में आयात, बेचना एवं पौधारोपण पर रोक लगाने के संबंध में भारत सरकार पर्यावरण वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय द्वारा पत्र जारी किया गया है। केंद्रीय सशक्त समिति (सीईसी) ने सर्वोच्चय न्यायलय को कोनोकार्पस प्रजाति के कारण उत्पन्न पर्यावरणीय और पारिस्थितिक खतरे की रिपोर्ट प्रस्तुत की गई है। ऐसे में इसके आयात-निर्यात एवं पौधारोपण पर पूर्ण रूप से प्रतिबंधित करने के लिए और उनके स्थान पर देसी प्रजातियों के पौधे लगाने को प्रोत्साहन करने के वन अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं। </p>
<p><strong>सरकारी विभागों को पाबंद करेगा वन विभाग</strong><br />वन विभाग अपने महकमे में कोनोकार्पस को पूरी तरह से प्रतिबंधित कर दिया है। अब अन्य सरकारी विभागों को भी इस प्रजाति के पौधे नहीं लगाने के लिए पाबंद करेगा। वहीं, पहले से लगाए गए पेड़-पौधों को स्थानीय प्रजातियों के पौधों से रिप्लेस करवाने के लिए जागरूक करेगा।</p>
<p><strong>नर्सियों में 100 से 150 में बिक रहा कोनोकार्पस</strong><br />शहर की कई निजी नर्सियों में कोनोकार्पस जमकर बिक रहा है। 3 से 4 फीट के पौधे 100 से 150 रुपए में बिक रहा है। वहीं, 2 फीट के पौधे 70 से 100 रुपए में बेचा जा रहा है। इसके अलावा 6 फीट के पौधे को 300 से 350  रुपए में बिक रहा है। नाम न छापने की शर्त पर नर्सरी संचालक ने बताया कि राजस्थान में इस पौधे की डिमांड ज्यादा है। यह अन्य पौधों की तुलना में बहुत तेजी से ग्रोथ करता है। इसको ज्यादा पानी देने की जरूरत भी नहीं होती है और दिखने में अच्छा होता है। लोग फार्म हाउस पर ज्यादा लगा  रहे हैं।</p>
<p><strong>हरियाली के नाम पर लगा दिए खतरनाक पौधे</strong><br />सौंदर्यीकरण व हरियाली के नाम पर कोटा विकास प्राधिकरण ने शहर की प्रमुख सड़कों के डिवाइडरों व सार्वजनिक स्थानों पर कोनोकार्पस जैसे खतरनाक पौधे लगाए दिए, जो वर्तमान में वृक्ष बन गए। यहां से गुजरने के दौरान इसके फूलों के परागण हवा के साथ उड़ते हुए सांस के जरिए शरीर में पहुंचते हैं और लोगों को अस्थमा का मरीज बना रहे हैं। कोटा में गत वर्षों में हरियाली के नाम पर इन पौधों को खूब लगाया गया।</p>
<p>सुप्रीम कोर्ट की सेंट्रल एम्पावर्ड कमेटी की सिफारिश के बाद वन विभाग ने गाइड लाइन जारी कर कोनोकार्पस को अपने महकमे में पूरी तरह से बैन कर दिया। इसके आयात-निर्यात, पौधारोपण और नर्सियों में पौध उत्पादन पर भी पूर्णत: प्रतिबंधित कर दिया है। हम अन्य सरकारी विभागों को इस प्रजाति के पौधे नहीं लगाने को पत्र लिखकर पाबंद व जागरूक कर रहे हैं। इस संबंध में जिला कलक्टर और केडीए सचिव को पत्र लिखा है। <br /><strong>-अनुराग भटनागर, डीएफओ वन्यजीव विभाग कोटा </strong></p>
<p><strong>पर्यावरणविद् बोले- जो पहले से लगे उसे तुरंत हटाएं</strong><br />कोनोकार्पस बहुत ही खतरनाक है। आॅक्सीजोन पार्क के निर्माण के दौरान लगाए जाने पर भी विरोध किया था। सीवी गार्डन को सेहत का खजाना माना जाता है। बड़ी संख्या में लोग सुबह-शाम वॉक पर आते हैं, जो सेहत के साथ बीमारियां भी साथ लेकर जा रहे हैं। यहां बड़ी संख्या में कोनोकार्पस लगाए हुए हैं, जो लोगों को सांस संबंधित बीमारियों की ओर धकेल रहा है। वहीं, चंबल रिवर फ्रंट के भी यही हालात है।  अब सुप्रीम कोर्ट की कमेटी ने भी इसे बैन करने की सिफारिश कर दी है। ऐसे में पहले से लगे कोनोकार्पस को तुरंत हटाकर उनकी जगह स्थानीय पौधे लगाए जाना चाहिए।<br /><strong>- डॉ. सुधीर गुप्ता, पर्यावरणविद् एवं वन्यजीव प्रेमी</strong></p>
<p>कोनोकार्पस के अलावा और भी बाहरी पौधे हैं, जो स्वास्थ्य के साथ पर्यावरण के लिए भी हानिकारक हैं। प्राइवेट नर्सियों में विदेशी पौधे जमकर बेचे जा रहे हैं, जबकि ईको सिस्टम के अनुकूल पेड-पौधों से हमारा देश समृद्ध है। उन्हें प्रोत्साहन  देकर लगाया जाना चाहिए। इसमें फोरेस्ट की नर्सरी बड़ी भूमिका निभा सकती है। वन विभाग ने इस साल अकेचा टोटलिस्ट नामक पौधे को बैन किया है। वहीं, विभाग ने 135 प्रजातियों के स्थानीय पौधों को बढ़ावा देने पर जोर दिया है।   इस तरह के प्रयास सराहनीय प्रयास है।<br /><strong>- डॉ. धर्मेंद्र खांडाल, बायोलॉजिस्ट टाइगर वॉच संस्था, सवाईमाधोपुर </strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 03 Oct 2025 13:28:40 +0530</pubDate>
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                <title>सुप्रीम कोर्ट की कमेटी ने माना, कोनोकार्पस स्वास्थ्य व पर्यावरण के लिए खतरनाक </title>
                                    <description><![CDATA[कमेटी ने की देश के सभी राज्यों में कोनोकार्पस को बैन करने की सिफारिश ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/the-supreme-court-committee-acknowledged-that-conocarpus-is-dangerous-to-health-and-the-environment/article-128517"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-10/1116.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। सुप्रीम कोर्ट की सेंट्रल एम्पावर्ड कमेटी-सीएसी ने कोनोकार्पस इरेक्ट्स पेड़-पौधे को मानव स्वास्थ्य, जैव विविधता व पर्यावरण के लिए खतरनाक माना है।  कमेटी ने हाल ही में सुप्रीम कोर्ट में सौंपी 40 पेजों की रिपोर्ट में इसके गंभीर दुष्प्रभावों का उल्लेख किया है। वहीं, देशभर में कोनोकार्पस  के आयात, नर्सरी में उत्पादन पर बैन लगाने की सिफारिश की है। साथ ही जहां यह पेड़ लगे हुए हैं, उनको हटाकर स्थानीय प्रजातियों के पौधों लगवाए जाने का सुझाव दिया है।  गौरतलब है कि दैनिक नवज्योति ने सोमवार के अंक में जिस पौधे को 4 राज्यों ने बैन किया उसे चंबल रिवर फ्रंट और आॅक्सीजोन में जमकर लगाया....शीर्षक से समाचार प्रकाशित कर इसके दुष्प्रभावों पर प्रशासन का ध्यान आकर्षित किया था।  पढ़िए, सुप्रीम कोर्ट की कमेटी की रिपोर्ट के प्रमुख अंश...</p>
<p><strong>बच्चों व बुजुर्गों सांस और हड्डियों से संबंधित बीमारियां मिली</strong><br />वन्यजीव विभाग के डीएफओ अनुराग भटनागर ने कहा कि  सेंट्रल एम्पावर्ड कमेटी ने अपनी रिपोर्ट में बताया कि कोनोकार्पस के परागकणों से बच्चों व बुजुर्गों  में कई तरह की श्वांस से जुड़ी बीमारियां हो जाती है। जिसमें अस्थमा, एलर्जी , दमा, सांस लेने में दिक्कत सहित हड्डियों से संबंधित बीमारियां पाई गई है। जब रिपोर्ट में सामने आया कि इस पेड़ के परागकणों से बहुत एलर्जी होती है तो वर्ष 2025 में तमिलनाडू  सरकार ने इस वृक्ष पर पूरी तरह से बैन लगा दिया। </p>
<p><strong>पत्तों में रसायन, मिट्टी की बदल जाती संरचना</strong><br />कमेटी में रिपोर्ट में बताया कि कोनोकार्पस के एलोपैथिक इम्पैक्ट भी है। इसके पत्तों में रसायन होता है, जो टूटकर  जमीन पर गिरते हैं तो वह मिट्टी की संचरना को बदल देता है, जिससे हमारे स्थानीय पेड़-पौधों की वृद्धि रुक जाती है। जिससे पूरा ईको सिस्टम गड़बड़ा जाता है। </p>
<p><strong>जड़ें खतरनाक, इमारतों की नींव तक हिला डाली</strong><br />कमेटी ने कहा कि इसकी जड़ें काफी खतरनाक होती है। वह जमीन के नीचे काफी गहराई तक जाती है। अहमदाबाद एवं हैदराबाद जैसे शहरों में इसकी जड़ों ने फुटपाथ, अंडरग्राउंड पाइप लाइन, आॅप्टीकल फायबर कैबलें और इमारतों की नींव पर बहुत बुरा प्रभाव डाला है। वहीं, भू-जल को खींच लेती है, जिससे स्थानीय प्रजाती के पेड़-पौधे पानी के अभाव में विलुप्त होने लगते हैं।</p>
<p><strong>कमेटी की रिपोर्ट के प्रमुख अंश </strong><br />- सीएसी कमेटी ने सुप्रीम कोर्ट से निवेदन किया है कि कोनोकार्पस वृक्ष को देश के सभी राज्यों में इनवेसिव घोषित किया जाए। <br />- सभी राज्यों में कोनोकार्पस के आयात व नर्सरियों में पौध तैयार करने पर बैन लगाए जाए ।<br />- मिशन मोड अप्रोच पर जहां कहीं भी कोनोकार्पस पेड़ लगे हैं उसे हटाकर स्थानीय पेड़-पौधे लगाए जाए। <br />- गुजरात सरकार ने वर्ष 2023 में कोनाकार्पस को नर्सरी में तैयार करने पर पूर्णत: प्रतिबंध लगा दिया। <br />- तमिलनाडू सरकार ने जनवरी 2025 में वन भूमि व गैर वन भूमि पर लगे कोनोकार्पस को हटाने के आदेश जारी किए हैं। <br />- आंध्र प्रदेश गवर्नमेंट ने काकीनाड़ा में 35000 से ज्यादा कोनोकार्पस पेड़ों को कटवाया है। <br />- तेलंगाना ने वर्ष 2022 में एक सरकुर्लर जारी यह पौधे नहीं लगाने और हैदराबाद में पहले से लगे इन वृक्षों को हटाने के निर्देश दिए हैं। <br />-असम की गुवाहाटी हाईकोर्ट ने असम सरकार को कोनोकार्पस नहीं लगाने निर्देश दिए हैं। इसी तरह कर्नाटक में वर्ष 2024 में वन विभाग ने यह पौधे नहीं लगाए जाने के आदेश हुए। <br />- वाइल्ड लाइफ प्रोटेक्शन एक्ट 1972 की धारा 62-ए केंद्र को इनवेसिव (अतिक्रमी प्रजाति के वृक्षों) के लिए नियम बनाने की शक्ति देती है। <br />-  नेशनल बायोडायवसिटी स्टेÑटजी एंड एक्शन प्लान (2024-23) भी इनवेसिव प्रजातियों के पौधें जैसे-कोनोकार्पस, लेंटाना, सूबबूल, विलायती बबूल को जैव विविधता की हानि के लिए मुख्य कारण माना है। लेकिन इस प्लान की आज भी क्रियांविती नहीं हो पा रही है। <br />- वर्तमान में आज भी राष्टÑीय स्तर पर इनवेसिव प्रजातियों के लिए कोई मॉनिटरिंग या रेगुलेटरी गाइड लाइन नहीं है। <br />- राजस्थान में कोनोकार्पस खूब मात्रा में लगाया जा रहा है। </p>
<p><strong>कमेटी की प्रमुख सिफारिशें :</strong> भारत में प्रसार, आयात और नर्सियों में बिक्री पर प्रतिबंध लगाया जाए<br />बायोडायवर्सिटी रिसर्च एंड डवलपमेंट सोसायटी के जिला कोर्डिनेटर बॉटनिस्ट सोनू कुमार ने बताया कि कमेटी की प्रमुख सिफारिशें इस प्रकार है। <br />- कोनोकार्पस के रोपण को तुरंत रोका जाए और इसे आक्रामक प्रजाति के रूप में अधिसूचित किया जाए।<br />- पूरे भारत में इसके प्रसार, आयात और पौधों की बिक्री पर प्रतिबंध लगाया जाए।<br />-पहले से लगाए गए पौधों को हटाकर उनकी जगह देशज (स्थानीय) प्रजातियों का रोपण मिशन मोड कार्यक्रम के तहत किया जाए।<br />-आक्रामक विदेशी प्रजातियों से निपटने के लिए और अधिक मजबूत नियामक एवं कानूनी ढांचे तैयार किए जाएं।<br />- आक्रामक पौधों, जीव-जंतुओं और सूक्ष्मजीवों के साक्ष्य-आधारित प्रबंधन के लिए अनुसंधान प्रणाली स्थापित की जाए।<br />- वन, उद्यानिकी और शहरी हरियाली विभागों को सक्रिय कर देशज विकल्पों के साथ प्रतिस्थापन कार्य प्रारंभ करें।</p>
<p>सुप्रीम कोर्ट की सेंट्रल एम्पावर्ड कमेटी ने कोनोकार्पस को स्वास्थ्य व पर्यावरण के लिए खतरनाक माना है। कमेटी ने कोर्ट में सौंपी 40 पेजों की रिपोर्ट में इसके गंभीर दुष्प्रभाव का उल्लेख किया है। हमारी ओर से जिला प्रशासन व संबंधित विभागों के अधिकारियों को पत्र लिख इसके प्रति जागरूक किया जाएगा। वहीं, शहर में इसके रोपण पर रोक लगाने व प्रभावी कदम उठाने का आग्रह करेंगे। वन विभाग इस तरह के पौधे नहीं लगाता है।<br /><strong>-अनुराग भटनागर, डीएफओ वन्यजीव विभाग कोटा</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 02 Oct 2025 15:07:30 +0530</pubDate>
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