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                <title>किसान की मौत पर यूपी में सियासत तेज, प्रियंका ने कहा- कालाबाजारी से गहराया खाद संकट ले रहा है किसानो की जान</title>
                                    <description><![CDATA[कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी ने पीतांबरा पीठ, दतिया में मां पीतांबरा की पूजा अर्चना की।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/%E0%A4%95%E0%A4%BF%E0%A4%B8%E0%A4%BE%E0%A4%A8-%E0%A4%95%E0%A5%80-%E0%A4%AE%E0%A5%8C%E0%A4%A4-%E0%A4%AA%E0%A4%B0-%E0%A4%AF%E0%A5%82%E0%A4%AA%E0%A5%80-%E0%A4%AE%E0%A5%87%E0%A4%82-%E0%A4%B8%E0%A4%BF%E0%A4%AF%E0%A4%BE%E0%A4%B8%E0%A4%A4-%E0%A4%A4%E0%A5%87%E0%A4%9C--%E0%A4%AA%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A4%BF%E0%A4%AF%E0%A4%82%E0%A4%95%E0%A4%BE-%E0%A4%A8%E0%A5%87-%E0%A4%95%E0%A4%B9%E0%A4%BE--%E0%A4%95%E0%A4%BE%E0%A4%B2%E0%A4%BE%E0%A4%AC%E0%A4%BE%E0%A4%9C%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A5%80-%E0%A4%B8%E0%A5%87-%E0%A4%97%E0%A4%B9%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%AF%E0%A4%BE-%E0%A4%96%E0%A4%BE%E0%A4%A6-%E0%A4%B8%E0%A4%82%E0%A4%95%E0%A4%9F-%E0%A4%B2%E0%A5%87-%E0%A4%B0%E0%A4%B9%E0%A4%BE-%E0%A4%B9%E0%A5%88-%E0%A4%95%E0%A4%BF%E0%A4%B8%E0%A4%BE%E0%A4%A8%E0%A5%8B-%E0%A4%95%E0%A5%80-%E0%A4%9C%E0%A4%BE%E0%A4%A8/article-2001"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2021-10/whatsapp-image-2021-10-29-at-12.44.44.jpeg" alt=""></a><br /><p>ललितपुर।  कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा ने कहा कि भाजपा सरकार की उदासीनता और गैर जिम्मेदाराना रवैये के चलते खाद की कालाबाजारी चरम पर है और इससे उपजा संकट कर्ज में डूबे किसानो की जान ले रहा है। खाद के कारण जान गंवाने वाले किसानो के परिजनों से मिलने ललितपुर पहुंची प्रियंका ने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि सरकार को किसानो की पीड़ा से कोई मतलब नहीं है। लखीमपुर से ललितपुर तक किसान परेशान है। सरकार की नीतियों के चलते किसान कर्ज में डूबा हुआ है। खाद के लिये लाइन में खड़े किसान जान गंवा रहे है। खाद की कालाबाजारी चरम पर है। एक एक बोरी के लिये किसानो को दो दो दिनो तक लाइन में खड़ा होना पड़ रहा है। एक बोरी दो हजार रूपये की मिल रही है जिसमें 50 किलो की जगह सिर्फ 45 किलो खाद दी जा रही है। यह कालाबाजारी नहीं तो और क्या है। खाद की कालाबाजारी में अधिकारियों और नेताओं की भूमिका की जांच होनी चाहिये। </p>
<p>उन्होने कहा कि सिर्फ ललितपुर में अब तक दो किसानो की लाइन में लगे लगे मौत हो चुकी है वहीं कर्ज के मकडज़ाल में फंसे दो किसान आत्महत्या कर चुके हैं। किसानो का दर्द है कि अबकी बरसात ठीक हुयी थी मगर खाद की कमी उनकी फसल चौपट कर रही है। अब सूदखोरों का पैसा कहां से चुकायेंगे।प्रियंका ने कहा कि बुंदेलखंड में अन्ना पशुओं की समस्या विकराल है। किसानो को अपनी फसल बचाने के लिये रतजगा करना पड़ता है। देश के किसान महीनो से सड़क पर है मगर उनकी आवाज को या तो दबाया जाता है और या फिर टायरों से कुचला जाता है। <br />  </p>
<p>उन्होने कहा कि लखीमपुर में मंत्री के बेटे ने किसानो की टायर से कुचल कर हत्या कर दी मगर भाजपा सरकार ने अपने मंत्री को नहीं हटाया। मंत्री के रहते क्या मामले की निष्पक्ष जांच हो सकेगा और क्या मृतक किसान के परिजनो को न्याय मिल पायेगा। कांग्रेस किसानो के हक की लड़ाई जारी रखेगी। उनकी सरकार सत्ता में आती है तो काले कानूनों की वापसी के अलावा किसानो का पूरा कर्जा माफ किया जायेगा और उनकी उपज का उचित मूल्य दिया जायेगा।<br /> <br /> इससे पहले उन्होने पीड़ति किसान परिवारों से मिलकर उनकी पीड़ा साझा की और सभी किसान परिवारों का कर्ज चुकाने का वादा किया। पार्टी सूत्रों ने बताया कि किसान भोगी पाल और महेश कुमार बुनकर की खाद की लाइन में लगे थे। कई दिनों तक लाइन में लगे रहने के कारण उनकी हालत खराब हो गयी और उनकी मृत्यु हो गयी। किसान सोनी अहिरवार और बब्लू पाल खाद न मिलने के कारण परेशान थ। उन्होने आत्महत्या कर ली। वाड्रा गुरूवार रात लखनऊ से ट्रेन के जरिये चल कर शुक्रवार को सुबह ललितपुर पहुंची थी जहां कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने उनका भव्य स्वागत किया। <br /> <strong><br /> झांसी में रानीलक्ष्मीबाई व झलकारी बाई को किया नमन</strong><br />  कांग्रेस की राष्ट्रीय महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा शुक्रवार को अपने व्यस्त ललितपुर दौरे से कुछ समय निकालकर महारानी लक्ष्मीबाई की कर्मभूमि झांसी पहुंची और यहां उन्होंने महारानी तथा उनकी वीर सखी झलकारी बाई की प्रतिमाओं पर माल्यार्पण किया। अपने काफिले के साथ आयी प्रियंका ने पहले वीरांगना झलकारी बाई की प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित की और इसके बाद उन्होंने लक्ष्मीबाई पार्क स्थित महारानी की प्रतिमा पर पुष्प अर्पित कर उनकी वीरता को नमन किया। यहां बुंदेलखंड विकलांग संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष ने  कांग्रेस की राष्ट्रीय महासचिव के समक्ष दिव्यांगजनों की समस्याएं रखीं और  मांग की कि आप अपनी प्रतिज्ञाओं में एक प्रतिज्ञा यह शामिल कर लें कि विकलांग पेंशन तीन हजार रूपये प्रतिमाह कर दी जाएं। प्रियंका ने ध्यान से उसकी बात तो सुनी लेकिन बिना कोई आश्वासन दिये केवल सिर हिलाते हुए निकल गयीं। इसके बाद उनका काफिला किले की ओर निकल गया जहां उन्होंने महारानी की सेना के मुख्य तोपची गुलाम गौस खां की प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित की।  इसके बाद वह दतिया के लिए रवाना हो गयीं। कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी ने पीतांबरा पीठ, दतिया में मां पीतांबरा की पूजा अर्चना की।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 29 Oct 2021 18:01:25 +0530</pubDate>
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                <title>बिजली संकट के बीच कुछ राहत</title>
                                    <description><![CDATA[कालीसिंध तापीय विद्युतगृह में उत्पादन शुरू]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/%E0%A4%AC%E0%A4%BF%E0%A4%9C%E0%A4%B2%E0%A5%80-%E0%A4%B8%E0%A4%82%E0%A4%95%E0%A4%9F-%E0%A4%95%E0%A5%87-%E0%A4%AC%E0%A5%80%E0%A4%9A-%E0%A4%95%E0%A5%81%E0%A4%9B-%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%B9%E0%A4%A4/article-1555"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2021-10/kota-tharmal.jpg-mks.jpg" alt=""></a><br /><p><strong> जयपुर</strong>। राज्य की कालीसिंध तापीय विद्युतगृह की 600 मेगावाट उत्पादन क्षमता की बंद इकाई में शनिवार से उत्पादन शुरु हो गया है। ऐसे में प्रदेश में गहराए बिजली संकट से कुछ राहत मिलने की उम्मीद है। इसके साथ ही राज्य के कोल ब्लॉक्स से पिछले दिन की तुलना में कोयले की करीब ढाई रेक अधिक डिस्पेच हुई है जो रविवार तक पहुंचने की संभावना है। यह जानकारी देते हुए अतिरिक्त मुख्य सचिव एनर्जी डॉ. सुबोध अग्रवाल ने बताया कि कोल ब्लॉक से इससे पहले सात से साढ़े सात रेक कोयला आ रहा था। कोल इंडिया से भी कोयले की आपूर्ति बढ़वाने के उच्च स्तर पर प्रयास जारी है। डॉ. अग्रवाल ने शनिवार को विद्युत भवन में बिजली निगमों के उच्च अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक की। उन्होंने बताया कि केन्द्र सरकार के कोयला सचिव अनिल जैन से दूरभाष पर चर्चा कर विद्युत उत्पादन निगम और अडानी के संयुक्त उपक्रम परसा ईस्ट एवं कांता बासन कोल ब्लॉक से कोयले की अधिक आपूर्ति के लिए सहमति हो गई है जिससे आने वाले दिनों में इन ब्लाकों से अधिक कोयला मिलने लगेगा। उन्होंने बताया कि शटडाउन या अन्य कारणों से बंद इकाइयों में भी शीघ्र ही उत्पादन शुरु करवाया जा रहा है।</p>
<p><strong><br /> एक अधिकारी को भेजा बिलासपुर</strong><br /> डॉ. अग्रवाल ने बताया कि सरकार ने एक अधिकारी एसपी अग्रवाल को बिलासपुर भेजा गया है। इससे पहले कई अधिकारियों को बिलासपुर भेजा गया है ताकि वहां से कोयले की आपूर्ति के लिए समन्वय बनाकर कोयले की रेक रवानगी करा सके। अग्रवाल ने बताया कि विभाग द्वारा रोस्टर के आधार पर ग्रामीण व शहरी क्षेत्रों में विद्युत कटौती की जा रही है और इसकी पूर्व सूचना दी जा रही है।</p>
<p><strong><br /> 12650 मेगावाट बिजली की रही मांग</strong><br /> डॉ. अग्रवाल ने बताया कि शनिवार को प्रदेश में ओसत 10267 मेगावाट व अधिकतम 12650 मेगावाट बिजली की मांग रही। राज्य में 8657 मेगावाट की उपलब्धता रही। <br /> <br /> <strong>लगातार कोयले की रैक मिलने से जारी है बिजली उत्पादन : कोटा थर्मल भी बना प्रदेश का संकट मोचक</strong><br /> राजस्थान में कोयले की कमी के चलते कई बिजली घरों में यूनिटें बंद हो रही हैं। बिजली उत्पादन पर असर पड़ा है लेकिन कोटा थर्मल पावर स्टेशन में 6 यूनिटों में लगातार उत्पादन हो रहा है। कोटा थर्मल में अभी  1000 मेगावाट उत्पादन हो रहा है, जो प्रदेश को ग्रिड से करीब एक तिहाई बिजली उपलब्ध करवा रहा है।  अधिकारियों के अनुसार वर्तमान में आ रही रैक और स्टॉक को मिलाकर बात की जाए तो कोटा थर्मल के पास चार दिन का स्टॉक पड़ा हुआ है। रोज रैक आ रही है। हालांकि यहां पर भी कब कोयले की कमी का असर दिखने लग जाए कहा नहीं जा सकता। खुद थर्मल के अधिकारी मानते हैं कि अभी तो काम चल रहा है आगे का कुछ नहीं कहा जा सकता है। लेकिन वर्तमान में बिजली घरों में संकटमोचक की भूमिका कोटा थर्मल निभा रहा है। कोयले की उपलब्धता, स्टॉक और डिमांड व उत्पादन को देखते हुए कोटा थर्मल भी सुपर क्रिटिकल स्थिति में है।  लेकिन अभी मात्र 4 दिन का कोयला यहां पर बाकी है।  रोज कोयले की चार से पांच रैक यहां पहुंच रही हैं। रोज रैक मिलने के चलते स्टॉक बचा हुआ है। जिससे लगातार बिजली की जितनी खपत हो रही उतनी ही मात्रा में यहां कोयला उपलब्ध हो रहा है।<br /> <br /> <strong>130 गाड़ियों का एलॉटमेंट</strong><br /> कोटा थर्मल में इस महीने कोयले की 130 माल गाड़ियों का एलॉटमेंट है। ऐसे में कोटा थर्मल पावर प्लांट के पास 47 हजार मैट्रिक टन से ज्यादा कोयला उपलब्ध है। कोटा थर्मल सुपरक्रिटिकल स्थिति में होने के बाद भी लगातार उत्पादन कर रहा है और कोयले का संकट फिलहाल यहां नजर नहीं आ रहा है।</p>
<p><br /> <strong>एक यूनिट है बंद</strong><br /> थर्मल की 6 नंबर यूनिट सालाना रखरखाव के लिए बंद है। 195 मेगावाट की यूनिट 15 दिनों से बंद है। अधिकारियों के अनुसार राज्य सरकार ने 3 दिन में इस यूनिट को भी चालू करने के निर्देश दिए हैं। ऐसे में इसे भी जल्द लाइटप कर उत्पादन शुरू किया जाएगा।<br /> <br /> <strong>स्टॉक हो रहा है सरप्लस</strong><br /> अधिकारियों के अनुसार थर्मल में जैसे ही कोयले की रैक आ रही है अधिकतर को बंकरों में ही खाली करवाया जा रहा है। रोज 17 हजार मैट्रिक टन कोयले की खपत हो रही है लेकिन करीब 28 हजार मैट्रिक टन कोयला रोज मिल रहा है। ऐसे में स्टॉक मेटेंन रहने के साथ साथ बढ़ भी रहा है।</p>
<p><br /> <strong>इनका कहना है</strong><br /> हमे रोज रैक मिल रही है इसलिए दिक्कत नहीं आई। स्टॉक हमारे पास है, पूरी क्षमता से उत्पादन भी कर रहे हैं। एक यूनिट वार्षिक शटडाउन पर है । उसे भी जल्द लाइटअप कर चालू कर दिया जाएगा। आगे के बारे में तो कह नहीं सकते, लेकिन अभी हमारे पास उत्पादन के अनुरूप कोयला आ रहा है।<br /> -वीके गोलानी, चीफ इंजीनियर, थर्मल <br />  </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 10 Oct 2021 11:11:59 +0530</pubDate>
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