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                <title>sms hospital fire - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <title>एसएमएस अस्पताल आग घटना को लेकर जूली का भाजपा पर निशाना : दोषियों पर चले मुकदमा, कहा- यह हादसा नहीं हत्या</title>
                                    <description><![CDATA[एसएमएस अस्पताल ट्रोमा सेंटर में आगजनी की घटना को लेकर नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने एक बार फिर भाजपा सरकार पर हमला बोला है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/julies-case-against-the-convicts-of-julie-on-bjp-for/article-129038"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-10/capture5.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। एसएमएस अस्पताल ट्रोमा सेंटर में आगजनी की घटना को लेकर नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने एक बार फिर भाजपा सरकार पर हमला बोला है। जूली ने कहा है कि मैंने कल कहा था कि एसएमएस ट्रोमा सेंटर में हुई घटनाएं हादसा नहीं हत्या है। आज सामने आए ट्रोमा सेंटर के इंचार्ज के पत्र स्पष्ट करते हैं कि लगातार करंट आने समेत तमाम खामियों की शिकायत करने के बावजूद कोई कदम नहीं उठाया गया।</p>
<p>यह आपराधिक लापरवाही है। इस लापरवाही के लिए जिम्मेदार लोगों पर मुकदमा होना चाहिए और न्याय सुनिश्चित करने के लिए न्यायिक जांच की जानी चाहिए जिससे जनता का विश्वास बहाल हो सके।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 07 Oct 2025 17:50:57 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur KD]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>फायर फाइटिंग सिस्टम फेल, अलार्म बजता तो बच जाती 8 जिंदगियां : आईसीयू के स्टोर रूम में लगे स्मॉक डिटेक्टर ने नहीं किया काम, छोटी सी चिंगारी ने लिया आग का रूप</title>
                                    <description><![CDATA[एसएमएस हॉस्पिटल के ट्रोमा सेंटर में हुई आगजनी की घटना में आठ लोगों की जान चली गई। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/if-the-fire-fighting-system-fail-alarm-rang-the-smok/article-128939"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-10/copy-of-news-(4)10.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। एसएमएस हॉस्पिटल के ट्रोमा सेंटर में हुई आगजनी की घटना में आठ लोगों की जान चली गई। इस घटना ने अस्पताल के फायर फाइटिंग सिस्टम के ऑपरेशन पर सवाल खड़े कर दिए हैं। अगर फायर फाइटिंग सिस्टम ठीक से मैनेज किया जाता तो आज आठ मरीजों की जान समय रहते बचाई जा सकती थी। घटना स्थल की पड़ताल और प्रत्यक्षदर्शियों से बात करने पर पता चला कि यहां स्टोर रूम में लगे स्मॉक डिटेक्टर ने सही से काम नहीं किया, जिसके कारण अलार्म सिस्टम समय पर एक्टिवेट नहीं हुआ। पुरानी तकनीक का फायर फाइटिंग सिस्टम होने यानी फायर स्प्रिंकलर सिस्टम नहीं होने के कारण आग बढ़ती चली गई और पूरे आईसीयू में फैल गई। अस्पताल सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार यहां जो सिस्टम लगा है, उसमें स्मॉक अलार्म ही काफी देरी से बजा, जिसके कारण स्टोर में लगी आग का किसी को पता नहीं चला। स्टोर रूम में जब आग बढ़ गई और उसका धुंआ निकलकर आईसीयू रूम तक फैला तब स्टाफ  और वहां भर्ती मरीजों के परिजनों को पता चला और अफरा-तफरी मच गई। प्रशासन के अधिकारियों का कहना है स्मॉक अलार्म समय पर बजा तभी स्टाफ  को आग की सूचना मिली।</p>
<p><strong>जहां लगी आग वहां था स्टोर रूम, कबाड़ से भड़की :</strong></p>
<p>आईसीयू वार्ड के जिस स्टोर रूम में आग लगी वह वार्ड का ही हिस्सा था, जहां मरीजों को भर्ती करने के लिए बैड लगाए जाने थे। लेकिन बाद में इसे स्टाफ  ने ही स्टोर रूम के रूम में तब्दील कर दिया। इसके बाद यहां दवाइयों के बॉक्स, गत्ते और अन्य कागजात रख दिया। इस कारण जब यहां आग लगी तो इस कबाड़ के कारण बहुत तेजी से बढ़ गई और फैलते-फैलते आईसीयू वार्ड तक आ गई और पूरे आईसीयू को चपेट में ले लिया।</p>
<p><strong>सुरक्षा गार्ड को नहीं पता, कैसे चलेगा फायर फाइटिंग सिस्टम :</strong></p>
<p>आईसीयू में पुरानी तकनीक का फायर फाइटिंग सिस्टम लगा है। ऑटोमेटिक वाटर सप्लाई के लिए फायर स्प्रिंकलर सिस्टम के बजाए मेनुअल सिस्टम लगे होने के कारण यहां आग लगने के तुरंत बाद पानी की सप्लाई नहीं हुई। इसके अलावा यहां तैनात स्टाफ और सुरक्षा गार्ड को भी ये नहीं पता था कि इस मेनुअल सिस्टम को वाटर सप्लाई के लिए कहां से कनेक्टिविटी दी जा सके।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 07 Oct 2025 12:21:15 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>चिंगारी से आग, प्लास्टिक जलने से बनी जहरीली गैस : दम घुटने से मरीजों की हुई मौत, बिजली कट होने से ऑक्सीजन सप्लाई रुकी</title>
                                    <description><![CDATA[एसएमएस अस्पताल के आईसीयू में रविवार रात हुई भीषण अग्निकांड की घटना में जहरीली गैस बनने के कारण मरीजों की मौत हुई थी।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/poisonous-gas-caused-by-spark-fire-patients-died-due-to/article-128938"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-10/copy-of-news-(3)13.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। एसएमएस अस्पताल के आईसीयू में रविवार रात हुई भीषण अग्निकांड की घटना में जहरीली गैस बनने के कारण मरीजों की मौत हुई थी। आग लगने की शुरुआत आईसीयू में बने स्टोर रूम से हुई, जहां पहले चिंगारी उठी। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि स्टोर रूम से आग अंदर ही अंदर फॉल सीलिंग में बिजली की वायरिंग, एक्रेलिक मैटेरियल और प्लास्टिक से बनी वस्तुओं में लगी। चिंगारी ने इन सभी को अपनी चपेट में ले लिया, जिससे धुंआ उठ गया।</p>
<p><strong>जहरीली गैसों का बना घातक मिश्रण : </strong>आग की तीव्रता बढ़ते ही प्लास्टिक और अन्य सिंथेटिक मैटेरियल के जलने से खतरनाक गैसें कार्बन मोनोऑक्साइड, सल्फर डाईऑक्साइड, हाइड्रोजन सल्फाइड बनने लगी। विशेषज्ञों के अनुसार इन गैसों से महज 3 से 5 मिनट में मरीज बेहोशी की स्थिति में आ गए।</p>
<p><strong>ऑक्सीजन सप्लाई हुई बाधित : </strong>अग्निकांड के दौरान बिजली आपूर्ति ठप हो गई, जिससे आईसीयू में मौजूद वेंटिलेटर और ऑक्सीजन सप्लाई सिस्टम ने काम करना बंद कर दिया। पहले से ही गंभीर स्थिति में भर्ती मरीजों के लिए यह दोहरी मार साबित हुई। एक ओर ऑक्सीजन की आपूर्ति बंद हुई और दूसरी ओर जहरीली गैसों से दम घुटना शुरू हो गया।</p>
<p><strong>जल्द सौंपेंगे रिपोर्ट : </strong>फॉरेंसिक साइंस लैबोरेट्री के निदेशक डॉ. अजय शर्मा ने बताया कि घटनास्थल का दौरा कर साक्ष्य एकत्र किए। इन सभी तथ्यों के आधार पर एक-दो दिन में रिपोर्ट सरकार को सौंप दी जाएगी। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 07 Oct 2025 11:41:25 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>एसएमएस दुखांतिका : कांपते होठों ने बताई अपनों के दर्द की दास्तां, बेटे को बचाने बिलखती रही मां, कोई नहीं आया बचाने, आखिरकार खुद की कोशिश ने भी धुएं में दम तोड़ा</title>
                                    <description><![CDATA[रविवार रात जब पूरा शहर चैन की नींद सो रहा था, तब प्रदेश के सबसे बड़े जयपुर के एसएमएस अस्पताल के ट्रोमा सेंटर की दूसरी मंजिल पर मौत ने दस्तक दी।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/sms-dukhtika-trembling-lips-told-that-no-one-came-to/article-128934"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-10/copy-of-news-(2)14.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। रविवार रात जब पूरा शहर चैन की नींद सो रहा था, तब प्रदेश के सबसे बड़े जयपुर के एसएमएस अस्पताल के ट्रोमा सेंटर की दूसरी मंजिल पर मौत ने दस्तक दी वो भी इतनी खामोशी से कि मरीजों को चीखने का और अपनों को बचाने का भी वक्त नहीं मिला। आईसीयू में भर्ती मरीजों के शरीर मशीनों से जुड़े थे, लेकिन उनकी सांसें अब भी जिंदा थीं। अचानक शॉर्ट सर्किट से आग लगी, धुआं भरता गया और एक-एक कर आठ जिंदगियां बुझती चली गईं। बाहर खड़े परिजन दरवाजे पीटते रहे कोई मां को आवाज देता रहा, कोई भाई ड्रिप निकालने की जद्दोजहद करता रहा। अस्पताल का स्टाफ, जो उस वक्त फरिश्ता बन सकता था, पीछे हट गया। और वो लोग जिनका इलाज चल रहा था वो जिंदा जलते आईसीयू में मौत से हार गए। अस्पताल के ट्रोमा सेंटर के आईसीयू में भर्ती मरीजों के परिजन इस उम्मीद के साथ आए थे, कि उनका यहां बेहत्तर इलाज होगा, लेकिन उनको पता नहीं था कि अस्पताल के जिम्मेदारों की अनदेखी और लापरवाही से वे उनकी लाश लेकर जाएंगे। सेंटर के आईसीयू में रविवार की देर रात लगी आग से आठ मरीजों की मौत हो गई। मृतकों के परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। उनकी मानें तो शॉर्ट सर्किट के तुरंत बाद आग पर काबू पा लिया जाता, तो इतना बड़ा हादसा नहीं होता, लेकिन जिम्मेदार लोग करीब आधा घंटे तक केवल तमाशा देखते रहे, जब तक आग ने विकराल रूप धारण कर लिया।</p>
<p>मां की छुट्टी होने वाली थी। सब खुश थे। लेकिन आग लगने पर स्टाफ  ने हमें कहा कुछ नहीं होगा, खिड़की खोल दो। जब धुआं फैला तो सब भाग गए। भाई शेरू मां को बचाने दौड़ा पर उसे समझ नहीं आया कि ड्रिप कैसे हटाएं, नलकी कैसे निकालें, अस्पताल वाले अगर भागने के बजाय हमारे साथ खड़े होते, तो शायद मां आज जिंदा होती।</p>
<p><strong>-जोगेंद्र, मृतका रुकमणी का बेटा</strong></p>
<p>मेरी पत्नी की हड्डी टूट गई थी। इसका इलाज ट्रॉमा आईसीयू में करवा रहे थे। चिकित्सक ने उन्हें सुबह ही छुट्टी देने को कहा था, लेकिन कुदरत को कुछ और ही मंजूर था। घटना के तत्काल बाद कुछ मरीज और परिजनों ने वार्ड ब्वॉय को बताया था, लेकिन उन्होंने इस तरफ  ध्यान नहीं दिया। वे रात से अस्पताल के बाहर बैठकर पत्नी का शव मिलने का इंतजार कर रहे हैं लेकिन उन्हें शव नहीं मिला।</p>
<p><strong>-पूरन सिंह, मृतका कुसुमा देवी के पति</strong></p>
<p>खेत से लौटने के दौरान श्रीनाथ हादसे में घायल हो गए थे। भरतपुर में चार दिन उपचार के बाद उन्हें जयपुर रैफर किया गया था। वे घटना के समय आईसीयू के बाहर ही थे। अफरातफरी के बीच आईसीयू में पहुंचे तो धुंए के कारण उनकी खुद की हालत खराब हो गई। उन्होंने श्रीनाथ को बैड सहित ही बाहर खींचा, लेकिन बैड भी बीच में फंस गया।</p>
<p><strong>-अशोक गुर्जर, </strong><br /><strong>मृतक श्रीनाथ गुर्जर के भाई   </strong></p>
<p><strong>वार्डों में राख हो चुके बेड और उपकरण :</strong></p>
<p>सुबह आईसीयू के जले बेड और उपकरणों हादसे की भयावहता को दर्शा रहे थे। टूटी खिडकियों के बिखरे कांच, छत पर आग के कारण गलकर लटकी फॉल्स सीलिंग, धुंए और आग के कारण गला हुए प्लास्टिक के आइटम, जलकर काले हुए और पानी के कारण गीले पडे बैड, काली दीवारें रात की कहानी कहती नजर आई। इस दौरान सुरक्षा कारणों से किसी को आईसीयू में जाने की परमिशन नहीं दी गई। ऐसे में कई बार मीडियाकर्मियों को भी कवरेज में परेशानी का सामना करना पडा। वहीं आग का असर आईसीयू ही नहीं बल्कि पूरे फ्लोर पर दिखाई दिया। इसके कारण सामने की ओर बने ऑपरेशन थिएटर को भी बंद कर दिया गया और जिन मरीजों को आॅपरेशन होना था उन्हें सात दिन बाद के लिए कह दिया गया। इसमें भी कई मरीज जिनका एक दिन पहले ही ऑपरेशन हुआ था वे बिना छुट्टी लिए ही अस्पताल से चले गए। रात में भी आईसीयू से निकाले गए मरीजों को अन्य वार्डों में शिफ्ट किया गया था।</p>
<p><strong>फायरकर्मी बोले : खिड़की के कांच उतारकर पानी की बौछारें मारी</strong></p>
<p> फायर विभाग के कर्मचारियों ने बताया कि सूचना मिलते ही टीम मौके पर पहुंची। पूरे वार्ड में धुआं भर चुका था। अंदर जाने का कोई रास्ता नहीं था। ऐसे में बिल्डिंग की दूसरी ओर से खिड़की के कांच उतारकर पानी की बौछार की गई। आग पर काबू पाने में एक से डेढ़ घंटे का समय लगा। सभी मरीजों को बेड समेत बाहर सड़क पर शिफ्ट किया गया।</p>
<p><strong>आक्रोशित लोगों ने इन्हें ठहराया जिम्मेदार :</strong></p>
<p>इस घटना को लेकर मृतकों के परिजनों में काफी आक्रोश था। उन्होंने वहां पहुंचे मंत्रियों के सामने भी इसे व्यक्त किया। परिजनों ने लापरवाही और अव्यव्स्थाओं को लेकर चिकित्सा मंत्री गजेन्द्र सिंह खींवसर, प्रमुख चिकित्सा सचिव गायत्री राठौड़, चिकित्सा शिक्षा सचिव अंबरीश कुमार,अस्पताल के प्राचार्य डॉ. दीपक माहेश्वरी, अस्पताल के अधीक्षक डॉ. सुशील भाटी, अतिरिक्त अधीक्षक डॉ. प्रदीप शर्मा, न्यूरो सर्जरी विभाग के अध्यक्ष डॉ. मनीष अग्रवाल, ट्रोमा सेंटर के नोडल अधिकारी डॉ. अनुराग धाकड़, बिजली कंपनी के एक्सईएन मुकेश सिंघल को जिम्मेदार ठहराया है।</p>
<p><strong>जहरीली गैस तेजी से फैली तो बचा नहीं पाए :</strong></p>
<p>ट्रॉमा सेंटर के नोडल ऑफिसर और सीनियर डॉक्टर अनुराग धाकड़ ने बताया कि आईसीयू में 11 मरीज थे। इनमें से 5 को ग्राउंड स्टाफ  ने बचा लिया। आईसीयू में धुआं और जहरीली गैस भर गई थी। हमारे पास खुद के अग्निशमन उपकरण थे। उनका इस्तेमाल किया। 5 मरीजों को जब तक निकालते, तब तक जहरीली गैस फैल गई तो अन्य मरीजों को बचा नहीं पाए।</p>
<p><strong>धुएं से भरे आईसीयू में घुटनों के बल घुसे पुलिसकर्मी :</strong></p>
<p>इस नरक के अंधेरे में कुछ लोग उम्मीद की लौ बनकर उतरे। हैड कांस्टेबल हरिमोहन मीणा बताते हैं धुआं इतना था कि मोबाइल की लाइट भी बेअसर थी। ड्रेनेज लाइट लेकर घुटनों के बल घुसा और एक मरीज को बेड समेत खींचकर बाहर लाया।</p>
<p><strong>सामान्य नागरिकों ने भी दिखाई बहादुरी :</strong></p>
<p>गेट के बाहर दुकान चलाने वाली संतोष बताती हैं, अंदर चीख-पुकार थी। मैं दौड़कर ट्रोमा सेंटर पहुंची। मरीजों को नीचे लाने में मदद की। सोचा मेरी कोशिश से अगर किसी की जान बच जाए तो शायद किसी मां की गोद सूनी होने से बच जाए।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 07 Oct 2025 11:01:46 +0530</pubDate>
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                <title>SMS Hospital Fire : राजस्थान के सबसे ख्याति प्राप्त अस्पताल में इस तरह का हादसा होना गंभीर मामला, जांच कराकर तह तक जाए सरकार- पायलट</title>
                                    <description><![CDATA[कोई भी आदमी बीमार होने की स्थिति में अस्पताल में इलाज कराने पहुंचता है और वहां भी उसके साथ ऐसा हादसा हो जाए तो यह ध्यान देने लायक बात है प्रदेश में कहीं कफ सिरप पीने से बच्चों की मौतें हो रही है तो अस्पताल में आग लगने से ऐसे हाथ से हो रहे हैं। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/sms-hospital-fire-such-an-accident-in-the-most-famous/article-128827"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-12/sachin-pilot.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। एसएमएस अस्पताल के ट्रोमा सेंटर में आग लगने से आठ लोगों की मृत्यु पर कांग्रेस महासचिव सचिन पायलट ने दुख जताया है।<br />पायलट ने अपने आवास पर मीडिया से बातचीत में कहा कि एसएमएस हॉस्पिटल में जो हादसा हुआ है वो बहुत दुःखद है। जिनकी मृत्यु हुई है उनके लिए संवेदना व्यक्त करता हु प्रदेश के सबसे प्रसिद्ध हॉस्पिटल में ऐसा हादसा निश्चित रूप से लापरवाही की वजह से हुआ है। राजस्थान के सबसे ख्याति प्राप्त अस्पताल में इस तरह की घटना होना गंभीर मामला है।</p>
<p>सरकार को इसकी जांच कर कर तह तक जाना चाहिए। कोई भी आदमी बीमार होने की स्थिति में अस्पताल में इलाज कराने पहुंचता है और वहां भी उसके साथ ऐसा हादसा हो जाए तो यह ध्यान देने लायक बात है प्रदेश में कहीं कफ सिरप पीने से बच्चों की मौतें हो रही है तो अस्पताल में आग लगने से ऐसे हाथ से हो रहे हैं। सरकार को तुरंत इस मामले में जांच कर कर लोगों की जान बचाने के लिए कड़े कदम उठाने चाहिए।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 06 Oct 2025 12:40:25 +0530</pubDate>
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