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                <title>बांसी जीएसएस : छह माह से फीडर ब्रेकर खराब, बिजली आपूर्ति पर संकट, उपभोक्ता परेशान</title>
                                    <description><![CDATA[बांसी सबग्रेड स्टेशन पर 6 में से 4 ब्रेकर उपलब्ध, डोडी और बीजन्ता फीडर पर ब्रेकर ही नहीं लगे।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/bansi-gss--feeder-breakers-malfunctioning-for-six-months--power-supply-in-crisis--consumers-distressed/article-146361"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/1200-x-60-px)-(1)13.png" alt=""></a><br /><p>भण्डेड़ा। क्षेत्र के बांसी स्थित 33/11 केवी विद्युत सबग्रेड स्टेशन पर ब्रेकरों की कमी और तकनीकी खामियों के कारण बिजली आपूर्ति व्यवस्था प्रभावित हो रही है। पिछले करीब छह माह से यहां छह फीडरों के लिए पर्याप्त ब्रेकर उपलब्ध नहीं हैं,  जिससे उपभोक्ताओं को बार-बार बिजली कटौती का सामना करना पड़रहा है। जानकारी के अनुसार अनुसार बांसी जीएसएस पर डोडी, बीजन्ता, भण्डेड़ा, मोलास, बांसी और दुगारी सहित छह फीडर संचालित हैं। विभागीय नियमों के अनुसार छह फीडरों के लिए छह ब्रेकर होनाअनिवार्य है, लेकिन वर्तमान में केवल चार ब्रेकर ही उपलब्ध हैं और वे भी लंबे समय से खराब स्थिति में चल रहे हैं। डोडी और बीजन्ता फीडर पर तो ब्रेकर ही नहीं लगे हुए हैं।  स्थिति यह है कि किसी एक फीडर में तकनीकी खराबी आने पर मुख्य ब्रेकर बंद करना पड़ता है, जिससे एक साथ तीन-तीन फीडरों की बिजली आपूर्ति बाधित हो जाती है। इसके कारण बिना खराबी वाले क्षेत्रों के उपभोक्ताओं को भी लंबे समय तक बिजली से वंचित रहना पड़ता है। शिकायत करने पर उपभोक्ताओं को अक्सर यही जवाब मिलता है कि फाल्ट ढूंढा जा रहा है। </p>
<p><strong>आगजनी का भी बना खतरा</strong><br />गर्मी की शुरूआत के साथ खेतों में पक रही गेहूं और जौ की फसल के बीच से गुजर रही 11 केवी लाइनें भी चिंता का कारण बन रही हैं। यदि किसी कारण तार टूटकर खेतों में गिर जाए तो आगजनी की घटनाएं हो सकती हैं। विशेषज्ञों के अनुसार यदि सभी फीडरों पर सही स्थिति में ब्रेकर लगे हों तो ऐसी स्थिति में फ्यूज उड़कर बड़ा नुकसान होने से बचाया जा सकता है। क्षेत्रीय उपभोक्ताओं और किसानों ने मांग की है कि विभाग समय रहते खराब ब्रेकरों को ठीक कर पर्याप्त संख्या में नए ब्रेकर लगाए, ताकि गर्मी के मौसम में बिजली संकट और संभावित आगजनी की घटनाओं से राहत मिल सके।</p>
<p><strong>इनका कहना है</strong><br />बांसी जीएसएस पर खराब हों रहे ब्रेकर को जल्द ही दुरूस्त करवाया जा रहा है। उपभोक्ताओं को ब्रेकर की वजह से आनेवाली समस्या का जल्द समाधान करवा दिया जाएगा। क्षेत्रीय उपभोक्ताओं की परेशानी का निवारण ही प्राथमिकता रहेगी।<br /><strong>- सौरभ गौत्तम, जेईएन, जयपुर विद्युत वितरण निगम ग्रामीण, देई</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 13 Mar 2026 14:41:07 +0530</pubDate>
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                <title>पैंथरों की हरकत पर नजर रखेगा जीएसएस रेडियो कॉलर</title>
                                    <description><![CDATA[मुकुंदरा हिल्स टाइगर रिजर्व में  पैंथरों की संख्या करीब 100 तक  है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/gss-radio-collars-will-monitor-the-panthers--movements/article-139908"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-01/1200-x-600-px)-(1200-x-600-px)37.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। मुकुंदरा हिल्स टाइगर रिजर्व में तेंदुआ यानि पैंथर की तादात लगातार बढ़ती जा रही है। ऐसे में कोटा के शहरी क्षेत्र में भी अब इनकी आवाजाही होने लगी है। इस कारण वन विभाग की ओर शहर में इनके मूवमेंट पर नजर रखने के लिए पैंथरों के गले में स्वदेशी जीएसएस रेडियो कॉलर लगाया जाएगा। पैंथर एक चालाक और ताकतवर शिकारी है, जो दिन के उजाले और रात के अंधेरे में भी शिकार करने में माहिर है। मुकुंदरा हिल्स टाइगर रिजर्व में अब इनकी संख्या करीब 100 तक पहुंच चुकी है, जो अच्छे जंगल और भरपूर शिकार की वजह से तेजी से बढ़ रही है, लेकिन ये तेंदुए अब जंगल की सीमा पार कर कोटा शहर की ओर कदम बढ़ा रहे हैं। तेंदुए (पैंथर) अक्सर शहर के थर्मल प्लांट, राजस्थान टेक्निकल यूनिवर्सिटी और श्रीनाथपुरम जैसे इलाकों में नजर आ जाते हैं।</p>
<p><strong>इन पैंथरों पर ही लगेगा रेडियो कॉलर</strong><br />तेंदुओं के बढ़ते मूवमेंट से इंसानों और पैंथरों के बीच टकराव का खतरा बढ़ रहा है, इसलिए वन विभाग ने एक सरल लेकिन प्रभावी कदम उठाया है। कुछ चुनिंदा पैंथरों के गले में भारत में ही बना हल्का जीएसएम रेडियो कॉलर लगाया जाएगा। यह छोटा-सा कॉलर मोबाइल नेटवर्क से काम करता है और पैंथर की हर हरकत को ट्रैक कर बताता है कि वो शहर की तरफ क्यों और कब जा रहे हैं, अगर यह योजना सफल हुई, तो इससे न सिर्फ पैंथरों की सुरक्षा होगी, बल्कि लोगों को भी खतरे से बचाया जा सकेगा। उपवन संरक्षक (डीसीएफ) मुथु सोमासुंदरम ने बताया कि सभी पैंथरों पर कॉलर लगाना संभव नहीं है, इसलिए केवल उन पैंथरों को कॉलर लगाया जाएगा जो बार-बार शहरी या आबादी वाले क्षेत्रों में घूमते हैं या मनुष्यों से टकराव का कारण बनते हैं। उन्होंने कहा कि हमारा मुख्य उद्देश्य शहरी सीमा में विचरण करने वाले पैंथरों की निगरानी करना है। इससे उनके मूवमेंट रूट का पता चलेगा और यह भी समझ आएगा कि वे शहर की ओर क्यों आ रहे हैं।</p>
<p><strong>पैंथर की लोकेशन होगी रीयल-टाइम में ट्रैक</strong><br />विभागीय अधिकारियों के अनुसार इसके लिए बेंगलुरु की कंपनी आर्कटुरस द्वारा विकसित स्वदेशी जीएसएम बेस्ड रेडियो कॉलर का परीक्षण शुरू किया गया है। कंपनी ने ट्रायल के लिए एक कॉलर मुकुंदरा हिल्स टाइगर रिजर्व को उपलब्ध कराया है। इस कॉलर की कीमत 40 से 50 हजार रुपये है, जो विदेशी कॉलरों की तुलना में बहुत किफायती है। यह रेडियो कॉलर पूरी तरह मोबाइल नेटवर्क यानी जीएसएम पर आधारित है। इसमें एक सिम कार्ड लगा होता है, जो पैंथर की लोकेशन को रीयल-टाइम में ट्रैक करने में मदद करता है। यदि मोबाइल नेटवर्क उपलब्ध नहीं होता, तो यह काम नहीं करता, लेकिन शहरी इलाकों के आसपास नेटवर्क अच्छा होने से यह काफी प्रभावी साबित होगा। इस कॉलर का वजन केवल 500 ग्राम के आसपास है, जो पैंथर के गले के आकार के अनुरूप है। वहीं, टाइगरों के लिए इस्तेमाल होने वाला रेडियो कॉलर जीपीएस बेस्ड होता है, जिसका वजन 1 किलो से अधिक है और कीमत 7 से 8 लाख रुपए तक पहुंच जाती है। जीपीएस कॉलर सैटेलाइट के जरिए काम करता है और मोबाइल नेटवर्क पर निर्भर नहीं होता है। पैंथर छोटे आकार के होते हैं, इसलिए उनके लिए हल्का और सस्ता कॉलर ज्यादा उपयुक्त है।</p>
<p><strong>शहर में इन क्षेत्रों में पैंथरों का मूवमेंट</strong><br />कोटा शहर में पैंथरों का मूवमेंट कई जगहों पर नियमित रूप से देखा जा रहा है। इनमें थर्मल पावर प्लांट के आसपास, राजस्थान टेक्निकल यूनिवर्सिटी के नजदीक, श्रीनाथपुरम इलाका और आर्मी एरिया प्रमुख हैं। अभी तक पैंथरों से कोई बड़ा कॉन्फ्लिक्ट नहीं हुआ है, लेकिन सतर्कता जरूरी है। यदि कोई घटना होती है, तो पैंथर को ट्रैंक्विलाइज (बेहोश) करके इस रेडियो कॉलर को उसके गले में पहना दिया जाएगा। इससे उसकी आगे की गतिविधियों पर नजर रखी जा सकेगी। विभागीय अधिकारियों के अनुसार फिलहाल यह योजना परीक्षण चरण में है। यदि ट्रायल सफल रहा तो और अधिक जीएसएम बेस्ड स्वदेशी कॉलर मंगाए जाएंगे। यह पूरी तरह भारतीय तकनीक है. यदि सफल हुई तो प्रदेश के अन्य क्षेत्रों में भी इसका इस्तेमाल किया जा सकेगा। पुरानी गणना के अनुसार मुकुंदरा हिल्स टाइगर रिजर्व में 95 से 100 पैंथर थे, लेकिन यह आंकड़ा कुछ साल पुराना है। वर्तमान में पैंथर सेंसस चल रहा है और मई तक नई रिपोर्ट आने की उम्मीद है। संभावना है कि संख्या में इजाफा हुआ होगा।पहले भैंसरोडगढ़ सेंचुरी को रिजर्व में शामिल नहीं किया गया था, अब इसे जोड़कर गणना हो रही है।</p>
<p>मुकुंदरा रिजर्व में अच्छा हैबिटेट और पर्याप्त शिकार की उपलब्धता पैंथरों की संख्या बढ़ाने में मदद कर रही है। यह नई पहल स्वदेशी तकनीक को बढ़ावा देने के साथ-साथ वन्यजीव संरक्षण की दिशा में एक मजबूत कदम है। इससे पैंथर और मनुष्य के बीच सामंजस्य बढ़ेगा और दोनों की सुरक्षा सुनिश्चित होगी।<br /><strong>- मुथु सोमासुंदरम, उपवन संरक्षक</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 17 Jan 2026 15:21:12 +0530</pubDate>
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                <title>बांसी जीएसएस झाड़-झंखाड़ से घिरा, कर्मचारियों की सुरक्षा व जीएसएस पर संकट</title>
                                    <description><![CDATA[परिसर में चारदीवारी और सुरक्षा जालियों  के बावजूद भारी मात्रा में झाड़ियां  हैं। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/bundi/bansi-gss-is-surrounded-by-bushes--posing-a-threat-to-the-safety-of-employees-and-the-gss/article-129375"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-10/025.png" alt=""></a><br /><p>भण्डेड़ा। बांसी जीएसएस (ग्रिड सब स्टेशन) लंबे समय से रखरखाव के अभाव में बदहाल हालत में है। परिसर में झाड़-झंखाड़ और बबूल के पेड़ों ने पूरे विद्युत तंत्र को अपनी चपेट में ले लिया है, जिससे किसी बड़े हादसे की आशंका बनी हुई है। बिजली गुल रहना अब आम बात हो गई है, जबकि कर्मचारियों को बिना आवश्यक सुरक्षा सामग्री के ही काम करना पड़ रहा है। जानकारी के अनुसार जीएसएस परिसर में चारदीवारी और सुरक्षा जालियां होने के बावजूद भारी मात्रा में झाड़ियां उग चुकी हैं। हवा के तेज वेग से बबूल की टहनियां अक्सर तारों से टकराती हैं, जिससे परिसर में आग लगने और विद्युत आपूर्ति बाधित होने का खतरा बना रहता है। तीन ब्रेकरों पर संचालित बीजंता, भण्डेड़ा और डोडी फीडर लंबे समय से डायरेक्ट चल रहे हैं। इनमें से किसी एक फीडर में तकनीकी खराबी आने पर तीनों को बंद करना पड़ता है, जिससे हजारों उपभोक्ता प्रभावित होते हैं। मुख्य 33 केवी स्विच भी काफी समय से खराब है, जिसके कारण कई बार आगजनी की घटनाएं हो चुकी हैं।</p>
<p>यहां कार्यरत निजी कर्मचारियों के पास पेचकस, पिलायर, इस्पैनर सेट जैसी आवश्यक सामग्री तक नहीं है। रात्रि के समय इन्हीं हालात में उन्हें बिजली चालू-बंद करनी पड़ती है। परिसर में लगा नलकूप तीन माह से खराब है, जिससे पीने के पानी और अर्थिंग दोनों की समस्या बनी हुई है। अर्थिंग में पानी की कमी से ट्रांसफार्मर विस्फोट और 11 केवी करंट के ओवरफ्लो का भी खतरा मंडरा रहा है। किसान अब कृषि सीजन में थ्री फेज बिजली की आस लगाए हैं, लेकिन जीएसएस की मौजूदा स्थिति देख आशंका है कि निर्धारित समय पर बिजली आपूर्ति मुश्किल होगी। क्षेत्रवासियों ने विभाग से तत्काल रखरखाव कर सुरक्षा इंतजाम सुधारने की मांग की है।</p>
<p><strong>इनका कहना है</strong><br />बांसी जीएसएस के बंद नलकूप को चालू करने के लिए हमारे सिविल डिपार्टमेंट को अवगत कराया जा चुका है। वह आकर चालू करेंगे। बंबूलो को हटाने के लिए भी विद्युत जीएसएस पर रहने वाले लडकों से बोलता हूं। <br /><strong>-सुनिल सामरिया, जेईएन,जयपुर विद्युत विभाग ग्रामीण, देई। </strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>बूंदी</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 11 Oct 2025 16:06:16 +0530</pubDate>
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