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                <title>medical - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <title>कोटा मेडिकल कॉलेज अस्पताल में एमआरआई करवाना जंग जीतने जैसा, मरीज हो रहे परेशान</title>
                                    <description><![CDATA[एमबीएस , जेके लोन और रामपुरा जैसे बड़े सरकारी अस्पतालों में भी एमआरआई सुविधा नहीं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/getting-an-mri-at-kota-medical-college-hospital-is-like-winning-a-battle/article-140714"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-01/ेलल्े्.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। संभाग के सबसे बड़े मेडिकल कॉलेज अस्पताल में मरीजों को एमआरआई जांच के लिए एक से 2 महीने तक का लंबा इंतजार करना पड़ रहा है। स्थिति तब और बदतर हो जाती है, जब मरीजों को शहर के प्रमुख एमबीएस अस्पताल से करीब 10 किलोमीटर का सफर तय कर मेडिकल कॉलेज पहुंचना पड़ता है, लेकिन वहां भी तारीख एक महीने बाद की मिल रही है। शहर के सरकारी स्वास्थ्य क्षेत्र में केवल एक एमआरआई मशीन मेडिकल कॉलेज अस्पताल में ही उपलब्ध है, जबकि एमबीएस अस्पताल में यह सुविधा ही नहीं है। नतीजतन, मरीजों को निजी डायग्नोस्टिक केंद्रों पर 2000 से 4,000 रुपये खर्च कर एमआरआई करवानी पड़ रही है। ग्रामीण और गरीब तबके के मरीजों की इस पीड़ा को सुनने वाला कोई नहीं है।</p>
<p><strong>हाड़ौतीभर से आते मरीज, हो रहे परेशान</strong><br />मेडिकल कॉलेज अस्पताल में एमआरआई मशीन की कमी और लंबी प्रतीक्षा सूची ने मरीजों को निजी केंद्रों की ओर धकेल दिया है। लंबी प्रतीक्षा और और अत्यधिक भीड़ के चलते मरीजो को मजबूरन निजी केंद्रो की ओर रुख करना पड़ रहा है, जहां 4 से 5 हजार की चपत लग रही है।</p>
<p><strong>प्रतिदिन 90 से ज्यादा होती है एमआरआई</strong><br />मेडिकल कॉलेज अस्पताल से बाली जानकारी के अनुसार यहां प्रतिदिन 90 से ज्यादा मरी जांच की जाती है गत वर्ष 23 हजार 62 एमआरआई जांचे की गई है। हाडोतीभर से यहां बड़ी संख्या में मरीज आते हैं। निजी केन्द्रों पर महंगे दमों पर यह जांच होने से मरीजों का अत्यधिक भार मेडिकल कॉलेज अस्पताल पर पड़ता है। ऐसे में यहां एमआरआई करवाना चुनौती बना हुआ है।</p>
<p><strong>एक ही मशीन पर सारा भार</strong><br />सरकारी क्षेत्र में एमआरआई की नए अस्पताल में ही मशीन है। यहां कोटा संभागभर से मरीज इलाज के लिए पहुंचते है। सरकार की ओर से नि:शुल्क जांच की सुविधा देने की घोषणा के साथ ही मरीजों की संख्या भी बढ़ गई है। इससे एक ही मशीन पर सारा भार आ गया है।</p>
<p><strong>मरीज को झेलनी पड़ रही दोहरी मार</strong><br />मेडिकल कॉलेज अस्पताल में केवल एक एमआरआई मशीन होने के कारण मरीजों को समय पर जांच नहीं हो पा रही। इधर एमबीएस अस्पताल, जो कोटा का प्रमुख सरकारी अस्पताल होने के बावजूद एमआरआई मशीन की अनुपस्थिति मरीजों के लिए बड़ी समस्या बनी हुई है। इसके अलावा, ग्रामीण क्षेत्रों से आने वाले मरीजों को शहर में आने-जाने और निजी केंद्रों पर खर्च करने की दोहरी मार झेलनी पड़ रही है।<br /><strong>- एड. बीटा स्वामी</strong></p>
<p><strong>लंबी प्रतीक्षा और सीमित सुविधाए बनी चुनौती</strong><br />ग्रामीण व आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के मरीज इस स्थिति से सबसे अधिक प्रभावित हैं। कोटा मेडिकल कॉलेज अस्पताल शहर में ही है, लेकिन लंबी प्रतीक्षा और सीमित सुविधायें मरीजों के लिए चुनौती बन गई है। स्थानीय निवासियों और सामाजिक कार्यकतार्ओं ने सरकार से मांग की है कि एमबीएस अस्पताल में एमआरआई मशीन स्थापित की जाए ।<br /><strong>- कुशाल सेन, समाजसेवी</strong></p>
<p><strong>इनका कहना है</strong><br />मेडिकल कॉलेज अस्पताल में एक ही एमआरआई मशीन है, जो काफी पुरानी है। ऐसे में उच्च गुणवत्तायुक्त मशीन स्थापित होनी चाहिए। हालांकि इसके लिए प्रपोजल दिया हुआ है। अस्पताल में मरीजों को बेहतर चिकित्सा सुविधा देने के लगातार प्रयास किया जा रहे हैं।<br /><strong>- डॉ. आशुतोष शर्मा, अधीक्षक मेडिकल कॉलेज अस्पताल</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 24 Jan 2026 17:22:15 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title> असर खबर का : नैनवां उपजिला चिकित्सालय में मेडिकल उपभोक्ता स्टोर चालू</title>
                                    <description><![CDATA[दैनिक नवज्योति में समाचार प्रकाशित होने के बाद अधिकारियों ने तुरंत कार्रवाई की।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/bundi/impact-of-news---medical-consumer-store-reopens-at-nainwa-sub-district-hospital/article-135728"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-12/1200-x-600-px)-(1)20.png" alt=""></a><br /><p>नैनवां। लंबे समय बाद नैनवां उपजिला चिकित्सालय में मेडिकल उपभोक्ता स्टोर चालू कर दिया गया है। चार माह से बंद पड़े इस स्टोर को पुन: शुरू करने में दैनिक नवज्योति द्वारा प्रकाशित समाचार ह्लनैनवां उपभोक्ता मेडिकल स्टोर चार माह से बंदह्व ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। समाचार के प्रकाशन के तुरंत बाद बूंदी उपभोक्ता भंडार ने त्वरित कार्रवाई करते हुए स्टोर की आईडी को सक्रिय कर दिया।<br />राजस्थान पेंशनर्स मंच नैनवां ब्लॉक अध्यक्ष शंभू सिंह सोलंकी ने बताया कि लंबे समय से उपभोक्ता की दुकान बंद पड़ी थी। उन्होंने उच्च अधिकारियों को ज्ञापन सौंपने और एमडी उपभोक्ता बूंदी से बार-बार संपर्क करने के प्रयासों के बाद स्टोर चालू कराने में सफलता प्राप्त की। इसके चलते सेवा निवृत्त वरिष्ठ नागरिकों में खुशी की लहर दौड़ गई।</p>
<p>अब आरजेएचएस के अंतर्गत उप जिला चिकित्सालय परिसर में उपभोक्ता स्टोर चालू हो गया है। सभी सेवानिवृत्त वरिष्ठ नागरिक दवाइयों का लाभ सीधे स्टोर से ले सकेंगे। पेंशनर्स मंच के पदाधिकारियों ने दैनिक नवज्योति का आभार व्यक्त किया और अधिकारियों की त्वरित कार्रवाई की सराहना की। स्थानीय लोगों का कहना है कि इस कदम से उपजिला चिकित्सालय में आने वाले वरिष्ठ नागरिकों को दवाइयों की आपूर्ति में आसानी हुई है और उनकी सुविधा सुनिश्चित हुई है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>बूंदी</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 12 Dec 2025 15:13:39 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>मेडिकल विभाग का नया फरमान जारी, जो भामाशाहों पर पडेगा भारी : जूली ने कहा- दान या सेवा, प्रदाता की स्वेच्छा से दिए जाते हैं</title>
                                    <description><![CDATA[जूली ने बताया कि भाजपा सरकार आमजन की सुविधा के लिए पूर्ववर्ती सरकार द्वारा चलाई जा रही जनकल्याणकारी योजनाओं को जारी रखने में विफल रही है]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/draft-add-your-title-the-new-decree-of-the-medical/article-117314"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-06/tikaram-jully.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने प्रदेश के सरकारी अस्पतालों में स्वयंसेवी संस्थाओं, दानदाताओं और ‘जनप्रतिनिधियों’ द्वारा दिए जाने वाले मेडिकल उपकरण, एंबुलेंस, फर्नीचर आदि के साथ उनके चालक, ईंधन व रखरखाव पर होने वाले 5 वर्ष तक के वित्तीय भार थोपे जाने वाले आदेश की आलोचना करते हुए इसे समाजसेवी, भामाशाह और जनप्रतिनिधियों को हतोत्साहित करने वाला आदेश बताया है। </p>
<p>जूली ने बताया कि भाजपा सरकार आमजन की सुविधा के लिए पूर्ववर्ती सरकार द्वारा चलाई जा रही जनकल्याणकारी योजनाओं को जारी रखने में विफल रही है। सरकार की गलत नीतियों और कुप्रबंध के कारण आरजीएचएस, चिरंजीवी और अन्य सामाजिक सुरक्षा योजनाएं दम तोड़ रही हैं, ऐसे में मेडिकल विभाग द्वारा जारी नया फरमान स्वयंसेवी संस्थाओं, दानदाताओं, भामाशाहों और जनप्रतिनिधियों को हतोत्साहित करने वाला साबित होगा। उन्होंने कहा कि दान या सेवा, प्रदाता की स्वेच्छा से दिए जाते हैं, उनसे रखरखाव, संचालन आदि के नाम पर जबरन वसूली किया जाना न तो व्यवहारिक है और नहीं नैतिक रूप से सही है। </p>
<p>प्रदेश में 19 हजार से अधिक हैल्थ सेंटर हैं, जहां रोगियों की तुलना में मेडिकल उपकरण, फर्नीचर आदि आवश्यक सुविधाओं का अभाव बना रहता है, ऐसे में स्वयंसेवी संस्थाओं और दानदाताओं द्वारा प्रतिवर्ष 50 से अधिक मशीनें, एंबुलेंस सहित अन्य मेडिकल उपकरण दानस्वरूप अस्पतालों को प्राप्त होते हैं, जिनसे आमजन को राहत मिलती है, लेकिन नए फरमान में दान स्वीकार करने के लिए ‘दान स्वीकार्य समिति’ बनाया जाना और दान के साथ दानदाताओं से मेडिकल उपकरणों को 5 साल तक चलाने के लिये उनके रखरखाव आदि पर होने वाली राशि तथा एंबुलेंस की स्थिति में वाहन चालक का वेतन और ईंधन पर व्यय होने वाले राशि वसूल किया जाना ठीक नहीं है। इससे स्वास्थ्य सेवाओं पर भी विपरीत प्रभाव पडे़गा। जूली ने सरकार से मांग की है कि सरकार आमजन को मिलने वाली राहत में बाधक इस फरमान को तत्काल वापस ले।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 13 Jun 2025 18:27:58 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>जयपुर के युवा इनोवेटर्स ने विकसित किया चेक्सपर्ट एप</title>
                                    <description><![CDATA[हेल्थकेयर वर्ल्ड में बदलाव लाने के साझा जुनून से प्रेरित होकर, जयपुर के जयश्री पेरीवाल इंटरनेशनल स्कूल के छात्र दर्श, कन्हव, नक्षत्र और ऋषभ ने स्वास्थ्य से जुड़ी चुनौतियों  से निपटने के लिए एक क्रान्तिकारी निदान मेडिकल चेक्सपर्ट विकसित किया है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/young-innovators-of-jaipur-developed-checkpert-app/article-77030"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-05/t21rer-(3)8.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। हेल्थकेयर वर्ल्ड में बदलाव लाने के साझा जुनून से प्रेरित होकर, जयपुर के जयश्री पेरीवाल इंटरनेशनल स्कूल के छात्र दर्श, कन्हव, नक्षत्र और ऋषभ ने स्वास्थ्य से जुड़ी चुनौतियों  से निपटने के लिए एक क्रान्तिकारी निदान मेडिकल चेक्सपर्ट विकसित किया है। यह पेशकश मरीजों और डॉक्टर्स के संवाद को एक क्रांतिकारी कदम के रूप में आगे ले जाएगा। इस चेक्सपर्ट एप से मरीजों और मेडिकल प्रोफेशनल्स को त्वरित मदद मिल सकेगी। सरलता और दृढ़ संकल्प के उल्लेखनीय प्रदर्शन में, जयपुर के जयश्री पेरीवाल इंटरनेशनल स्कूल के 12वीं कक्षा के छात्रों के एक समूह ने हेल्थ केयर चैलेन्जेस का सामना करने के लिए यह गेम चेंजिंग सॉल्यूशन लॉन्च किया है। मेडिकल चेक्सपर्ट एक ऐसा अभूतपूर्व एप है, जो मरीजों और डॉक्टरों के बीच बातचीत के तरीके में क्रांतिकारी बदलाव लाने के लिए तैयार किया गया है।</p>
<p><strong>एप के बारे में</strong><br />एप के बारे में जानकारी देते हुए इन युवा इनोवेटर्स ने बताया कि यह यूजर फ्रेण्डली इंटरफेस और मजबूत सुविधाओं के साथ, ऐप मेडिकल रिकॉर्ड के मैनेजमेंट और मरीजों और डॉक्टरों के बीच स्पष्ट संचार की सुविधा के लिए एक केंद्रीकृत मंच प्रदान करता है। गहन शोध, हेल्थ केयर एक्सपर्ट्स के साथ साक्षात्कार और संस्थानों के साथ परामर्श एवं साझेदारी के माध्यम से, इन प्रतिभाशाली किशोरों ने हेल्थ केयर में वास्तविक दुनिया की जरूरतों को समझने और संबोधित करने के प्रति प्रतिबद्धता प्रदर्शित की है।</p>
<p><strong>स्वास्थ्य सेवा के भविष्य को आकार दे रहे</strong> <br />उनका यह एप प्रोसेज को सुव्यवस्थित करने, चिकित्सा जानकारी तक पहुंच में सुधार करने और अंतत: ओवरऑल पेशेन्ट एक्सपीरिएंस को बढ़ाने का वादा करता है। ये युवा इनोवेटर्स सिर्फ एक एप नहीं बना रहे, अपितु वे स्वास्थ्य सेवा के भविष्य को भी आकार दे रहे हैं। सकारात्मक परिवर्तन लाने के लिए इनोवेशन महत्वाकांक्षा और युवाओं की शक्ति सेलिब्रेट करने के लिए उनके साथ शामिल हों और आज ही मेडिकल चेक्सपर्ट डाउनलोड करें और इस अविश्वसनीय सफर का हिस्सा बनें। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 07 May 2024 10:53:54 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
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                <title>दो चिकित्सकों के भरोसे सवा लाख मरीजों का स्वास्थ्य</title>
                                    <description><![CDATA[एक चिकित्सक के सरकारी काम से इधर-उधर जाने से एक ही चिकित्सक पर मरीजों का भार रहता है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jhalawar/health-of-1-25-lakh-patients-depends-on-two-doctors/article-70747"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-02/transfer-(10)4.jpg" alt=""></a><br /><p>चौमहला। चौमहला क्षेत्र के 116 गांवों के करीब सवा लाख लोगों को चिकित्सा सुविधा मुहैया करवाने वाला चौमहला सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र मात्र दो चिकित्सकों के भरोसे चल रहा है। चिकित्सालय में स्वास्थ सेवाओं सहित मूलभूत सुविधाओं का अभाव है। यहां सोनोग्राफी, ईसीजी की जांच मशीनें खराब पड़ी हुई हंै। मजबूरन लोगों को जांच बाहर करवानी पड़ रही है। प्राइवेट लैब वाले मरीजों से मनमाने दाम वसूल कर रहे हैं।चिकित्सालय में महिला चिकित्सक सहित विशेषज्ञ चिकित्सक सहित अन्य सुविधाओं का अभाव बना हुआ है। कस्बे के बाशिन्दों द्वारा चिकित्सालय को 30 बेड की बजाय 50 बेड का करने की मांग भी की जा रही है। 30 बेड की क्षमता वाले इस चिकित्सालय में महिला चिकित्सक सहित कनिष्ठ विशेषज्ञ सर्जरी, कनिष्ठ विशेषज्ञ मेडिसिन, सोनोग्राफी चिकित्सक, डेंटल चिकित्सक का पद रिक्त है। महिला चिकित्सक का पद रिक्त होने से महिलाओं को छोटी-छोटी बीमारियों के लिए भी निकटवर्ती मध्यप्रदेश के चिकित्सालय में जाना पड़ रहा है। महिला चिकित्सक के अभाव में प्रसव के दौरान स्थिति बिगड़ने पर प्रसूताओं को मजबूरन जिला चिकित्सालय झालावाड़ या भवानीमंडी, मध्यप्रदेश के नागदा, मन्दसौर, उज्जैन की ओर रुख करना पड़ता है। यहां डेंटल चिकित्सक का पद भी रिक्त है। जबकि अस्पताल में डेंटल की आधुनिक मशीन भी लगी हुई है। चिकित्सालय में चार मेल नर्स, चार वार्ड बॉय के पद रिक्त हैं।</p>
<p><strong>मौसमी बीमारियों का प्रकोप, बढ़े मरीज</strong><br />इन दिनों मौसमी बीमारियों के चलते अस्पताल में मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ी है। मंगलवार को अस्पताल में मरीजों की खासी भीड़ रही। अस्पताल में दो चिकित्सकों की नियुक्ति है। लेकिन एक चिकित्सक के सरकारी काम से इधर-उधर जाने से एक ही चिकित्सक पर मरीजों का भार रहता है।</p>
<p><strong>पांच साल से सोनोग्राफी मशीन बन्द</strong><br />सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र चौमहला में विगत पांच साल से सोनोग्राफी नहीं हो रही है। यह मशीन पांच साल से खराब पड़ी हुई है। मशीन खराब होने के कारण गर्भवती महिलाओं को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। सरकारी अस्पताल में 200 रुपए में सोनाग्राफी हो जाती है। जबकि निजी चिकित्सक मनमाने दाम वसूल कर रहे हैं।</p>
<p>चिकित्सालय में महिला चिकित्सक के नहीं होने से छोटी-छोटी बीमारियों के लिए महिलाओं को बाहर जाना पड़ता है। जिस कारण काफी समय व धन बरबाद होता है। यहां महिला चिकित्सक की शीघ्र नियुक्ति हो।<br /><strong>- गुणमाला पिछोलिया, समाजसेवी</strong></p>
<p>चिकित्सालय में महिला चिकित्सक नही होंने से महिलाओं को परेशानी होती है। पुरुष चिकित्सक को महिला शर्म के कारण अपनी बीमारी ठीक से नहीं बता पाती। अस्पताल में महिला डॉक्टर होना चाहिए। सोनाग्राफी आदि जांचें शुरू होनी चाहिएं। <br /><strong>- प्रेमलता अशोक भंडारी, सरपंच, चौमहला</strong></p>
<p>चौमहला प्रमुख व्यापारिक मंडी है। बढ़ती जनसंख्या के हिसाब से यह अस्पताल 50 बेड क्षमता का होना चाहिए। सभी जांच सुविधाएं अस्पताल में होनी चाहिएं। रिक्त पदों पर चिकित्सकों की नियुक्ति की जाए।<br /><strong>- पवन पिछोलिया, अध्यक्ष, खाद्य एवं किराना व्यापार संघ, चौमहला</strong></p>
<p>क्षेत्र का यह बड़ा चिकित्सालय है। यहां महिला चिकित्सक सहित विशेषज्ञ चिकित्सक भी होना चाहिए। अस्पताल को क्रमोन्नत कर 50 बेड क्षमता का करना चाहिए।<br /><strong>- सुरेन्द्र कालरा, अध्यक्ष, रेडीमेड कपड़ा व्यापार संघ</strong></p>
<p>चौमहला चिकित्सालय में महिला चिकित्सक सहित विशेषज्ञ चिकित्सकों के लिए उच्चाधिकारियों को अवगत कराया जा चुका है। सोनाग्राफी चिकित्सक की उपलब्धता होते ही सोनोग्राफी शुरू करवा दी जाएगी। <br /><strong>- डॉ. विकास जैन, ब्लॉक चिकित्सा एवं स्वास्थ अधिकारी ,चौमहला</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>झालावाड़</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 21 Feb 2024 19:01:50 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[kota]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>CM Ashok Gehlot ने दी चिकित्सा क्षेत्र को 438 करोड़ की सौगात</title>
                                    <description><![CDATA[20 नई 104 जननी एक्सप्रेस एंबुलेंस व 50 नई 108 एंबुलेंसों को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने प्रदेश की 29 ग्राम पंचायतों को टीबी मुक्त होने के प्रमाण पत्र भी वितरित किए। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/cm-ashok-gehlot-gave-a-gift-of-438-crores-to-the-medical-sector-hindi-news/article-55345"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-08/s-33.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने गुरुवार को वीसी के जरिए सीएमआर से प्रदेशवासियों 438 करोड़ की परियोजनाओं को सौगातें दी। इसमें 315 करोड़ रुपये लागत के 117 नए चिकित्सा भवनों का शिलान्यास एवं 123 करोड़ के 109 चिकित्सा भवनों का लोकार्पण किया। इसके साथ ही 20 नई 104 जननी एक्सप्रेस एंबुलेंस व 50 नई 108 एंबुलेंसों को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने प्रदेश की 29 ग्राम पंचायतों को टीबी मुक्त होने के प्रमाण पत्र भी वितरित किए। </p>
<p><strong>टीबी उन्मूलन में बेहतर कार्य करने वाले आठ जिला कलेक्टर सम्मानित<br /></strong>मुख्यमंत्री ने कार्यक्रम में जिला कलेक्टर बारां नरेंद्र गुप्ता,  भीलवाड़ा के जिला कलेक्टर आशीष मोदी, जैसलमेर के जिला कलेक्टर आशीष गुप्ता, जालौर के जिला कलेक्टर निशांत जैन, बांसवाड़ा के जिला कलेक्टर प्रकाश चंद शर्मा, चित्तौड़गढ़ के जिला कलेक्टर पियूष सांवरिया, राजसमंद की जिला कलेक्टर नीलाभ सक्सेना, उदयपुर के जिला कलेक्टर अरविंद पोसवाल को टीवी उन्मूलन में बेहतर कार्य करने के लिए सिल्वर और कांस्य पदक से सम्मानित किया।</p>
<p><strong>अंगदान शपथ में राजस्थान ने बनाया रिकॉर्ड</strong><br />मुख्यमंत्री गहलोत तीन अगस्त को कार्यक्रम में लोगों को शपथ दिलाई थी। गहलोत को रिकॉर्ड का प्रमाण पत्र सौंपा गया। कार्यक्रम में एक करोड़ से अधिक लोगो ने शपथ ली थी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 24 Aug 2023 14:18:12 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>शिक्षा और चिकित्सा के क्षेत्र में राजस्थान में हुए अनोखे काम, पूरे देश में राजस्थान की चर्चा: गहलोत</title>
                                    <description><![CDATA[गहलोत ने कहा कि किसी समय में राजस्थान में केवल 6 विश्वविद्यालय थे लेकिन आज 60 विश्वविद्यालय हो चुके हैं। शिक्षा और चिकित्सा के क्षेत्र में राज्य में जिस तरह से कम हुए हैं उनके पूरे देश में आज चर्चा हो रही है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/rajasthans-unique-work-in-the-field-of-education-and-medicine/article-55343"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-08/ashok-gehlot-2-620x4002.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने सीएमआर पर आयोजित कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि शिक्षा के क्षेत्र में हम पहले ही आगे बढ़ चुके हैं किसी समय में राजस्थान में केवल 6 विश्वविद्यालय थे लेकिन आज 60 विश्वविद्यालय हो चुके हैं। शिक्षा और चिकित्सा के क्षेत्र में राज्य में जिस तरह से कम हुए हैं उनके पूरे देश में आज चर्चा हो रही है। हमने राइट टू हेल्थ कानून बनाया है ताकि हर आदमी को स्वास्थ्य का अधिकार मिले। यूपीए की मनमोहन सरकार ने संसद में चार कानून बनाकर जनता को अधिकार दिए थे। कोरोना के बाद अब पोस्ट कॉविड की बड़ी समस्या आ गई है युवाओं को हार्ट अटैक की समस्या हो रही है इसे लेकर पूरे मुल्क में चिंता का विषय है हालांकि इस पर अध्ययन भी हो रहे हैं। मेडिकल से जुड़ी कोई भी फाइल हमारे यहां पर रुकती नहीं है, जैसे आती है तुरंत वित्त की स्वीकृति प्रदान कर दी जाती है। केंद्र के स्वास्थ्य मंत्रालय को एक टीम भेज कर यहां अध्ययन करवाना चाहिए कि राजस्थान सरकार ने चिकित्सा के क्षेत्र में क्या-क्या कार्य किए हैं। महंगाई रात शिव रूम में एक करोड़ 90 लाख लोगों को चिकित्सा की गारंटी दी गई है। टीबी सालों से चली आ रही बीमारी है, जिसका पहलें  इलाज भी बहुत महंगा होता था, कई लोगों की इलाज के अभाव में ही मौत हो जाती थी। लेकिन अब हम स्वास्थ्य बीमा योजना में हर बीमारी का इलाज कर रहे हैं, हमारी मंशा है कि गांव-गांव में हेल्थ सेंटर हो ताकि आदमी बीमार होने पर तुरंत इलाज करवा सके हम इसी दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। मिशन 2030 पर हम राजस्थान में करीब एक करोड़ लोगों से राय ले रहे हैं, इसमें सब की भागीदारी होनी चाहिए की 2030 में राजस्थान में क्या होना चाहिए? देश में कुल जितने टीबी के रोगी हैं, उनमें 6% रोगी अकेले राजस्थान में है, हम सबको मिलकर इन लोगों को टारगेट बनाकर आगे कार्यक्रम चलाना चाहिए।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 24 Aug 2023 14:12:07 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>मेडिकल टूरिज्म की संभावनाओं के दोहन की जरूरत</title>
                                    <description><![CDATA[भारत की आज इस क्षेत्र में शीर्ष 6 देशों में गिनती होने लगी है। दरअसल चिकित्सा क्षेत्र में भाारत ने विश्वस्तरीय चिकित्सा सेवा को लेकर अपनी विशिष्ठ  पहचान बनाई है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/opinion/need-to-harness-the-possibilities-of-medical-tourism/article-49422"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-06/630-400-size-(7)8.png" alt=""></a><br /><p>मेडिकल टूरिज्म के क्षेत्र में आज भारत दुनिया के देशों की पसंदीदा डेस्टिनेशन बनता जा रहा है। भारत की आज इस क्षेत्र में शीर्ष 6 देशों में गिनती होने लगी है। दरअसल चिकित्सा क्षेत्र में भाारत ने विश्वस्तरीय चिकित्सा सेवा को लेकर अपनी विशिष्ठ  पहचान बनाई है। हमारे देश के 38 चिकित्सा संस्थानों को जेसीआई द्वारा मान्यता प्राप्त है तो चैन्नई, मुंबई, बैंगलोर, अहमदाबाद और दिल्ली मेडिकल टूरिज्म के क्षेत्र में अपनी इंटरनेशनल पहचान बना चुके हैं। आज बैंगलोर आईटी राजधानी के साथ ही वैलनेस सेंटर के रुप में अपनी पहचान बना चुका है। एक मोटे अनुमान के अनुसार चिकित्सा, तंदुरुस्ती और आईवीएफ  चिकित्सा के लिए दुनिया के 78 देशों से 2 मिलियन लोग उपचार के लिए हर साल आने लगे हैं। 2020 में भारत में चिकित्सा पर्यटन क्षेत्र से करीब 9 बिलियन अमेरिकी डॉलर की आय हुई है तोे इस क्षेत्र के विशेषज्ञों के अनुसार 2026 तक मेडिकल टूरिज्म के क्षेत्र से लगभग डेढ़ गुणी 13 बिलियन अमेरिकी डॉलर तक पहुंचने का अनुमान लगाया जा रहा है। देखा जाए तो मेडिकल टूरिज्म के क्षेत्र में भारत के आकर्षण का केन्द्र बनने के कई प्रमुख कारण हैं। एक तो भारत में चिकित्सा सेवाएं जिसमें मेडिकल और पेरामेडिकल दोनों सेवाएं सस्ती होने के साथ ही इंटरनेशनल लेवल की है। दूसरी यह कि भाषा को लेकर भी कोई समस्या नहीं हैं, क्योंकि भारत के चिकित्सा क्षेत्र से जुड़े लोग धाराप्रवाह अंग्रेजी बोल भी लेते हैं तो समझ भी जाते हैं। इसके साथ ही चिकित्सा के क्षेत्र में भारत की परंपरागत छवि का भी सकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है। अब आवश्यकता इस इमेज को बनाए रखते हुए इस क्षेत्र का दोहन करते हुए अधिक से अधिक लोगों को आकर्षित कर विदेशी आय भी प्राप्त करना है।</p>
<p>देखा जाए तो भारतीय डॉक्टरों की इंटरनेशनल स्तर पर अपनी पहचान है। आज दुनिया के देशों में खासतौर आईपीडी देशों में 75 हजार भारतीय डॉक्टर अपनी सेवाएं दे रहे हैं। इनमें से 15 हजार से अधिक डॉक्टर्स तो अमेरिका में ही अपनी सेवाएं दे रहे हैं। इसी तरह से भारतीय पेरामेडिकल कार्मिक खासतौर से नर्सिंग क्षेत्र में अपनी अलग ही पहचान है। एक समय था जब केरल की नर्सों की दुनिया के अधिकांश देशों में मांग देखी जाती थी। आज भी भारतीय मेडिकल और पेरामेडिकल क्षेत्र से जुड़े लोगों के व्यवहार, कार्यशैली, काम के प्रति प्रतिबद्धता और उच्च नैनिक मानदंडों की पालना के कारण सम्मान की दृष्टि से देखा जाता है। जब विदेशों में ही भारत के मेडिकल क्षेत्र से जुड़े लोगों की अलग पहचान है तो दूसरी और देश के प्रमुख चिकित्सा संस्थानों ने अपनी सेवाओं के बदौलत पहचान बनाई है।</p>
<p>विदेशियों के भारत में मेडिकल टूरिज्म के प्रति आकर्षण के अन्य कारणों के साथ ही भारत की समग्र चिकित्सा पद्धति भी एक कारण है। आयुर्वेद, योग, प्राकृतिक चिकित्सा, हौम्योपैथी, यूनानी, तिब्बती और सिद्ध पद्धति की चिकित्सा सुविधा में विशेषज्ञता हासिल होने से लोग भारत को प्राथमिकता देने लगे हैं। अन्य देशों की तुलना में हमारे यहां चिकित्सा सुविधाएं सस्ती है तो सेवाएं भी इंटरनेशनल स्तर की होने से लोग आकर्षित होने लगे हैं। एक ही स्थान पर बहुआयामी चिकित्सा सुविधा प्राप्त हो जाती है। देखा जाए तो आज दुनिया के देशों में मानसिक बीमारियों की अधिकता है और भारतीय परंपरागत चिकित्सा पद्धति और योग ध्यान आदि के माध्यम से मानसिक विकारों का आसानी से ईलाज हो सकता है। योग के महत्व को तो अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर स्वीकारा जा चुका है। इसके साथ ही आधुनिकतम चिकित्सा पद्धति में भी भारतीय चिकित्सकों को महारत हासिल होती जा रही है। अभी हाल ही में कोविड के दौरान भारत ने जिस तरह से दवा और टीके उपलब्ध कराकर दुनिया के देशों में अपना लोहा मनवाया है, उससे लोगों का और अधिक विश्वास बढ़ा है। जहां तक रोग निरोधक टीकों का प्रश्न है उनकी उपलब्धता और वितरण में भारत दुनिया के देशों में शीर्ष पर है।</p>
<p>मेडिकल टूरिज्म का सीधा-सीधा अर्थ यह है कि जब कोई अपने इलाज के लिए किसी दूसरे देश में जाते हैं तो यह मेडिकल टूरिज्म कहलाता है। वैसे यह माना जाता रहा है कि मेडिकल टूरिज्म के रुप में फ्रांस सबसे अग्रणी देश है तो सिंगापुर और थाईलैंड भी दुनिया के देशों के पंसदीदा स्थान है। अब मेडिकल टूरिज्म के क्षेत्र में हमारे देश की और लोगों का झुकाव होता जा रहा है। ऐसे में सरकार को भी मेडिकल टूरिज्म को बढ़ावा देने की दिशा में ठोस प्रयास करने होंगे। इसके लिए सबसे पहले तो मेडिकल वीजा व्यवस्था को सरल और सुगम बनाना होगा। इसके साथ ही इंश्योरेंस सुविधाओं को बेहतर बनाना होगा। दरअसल विदेशों से मेडिकल टूरिज्म पर आने वाले लोगोें के सामने विदेशी इंश्योरेंस कंपनियों द्वारा केशलेस या इंश्योरेंस सुविधा प्राप्त करना परेशानी का कारण है। ऐसे में मेडिकल क्षेत्र में इंश्योरेंस करने वाले संस्थानों से समन्वय व संवाद कायम कर सुविधाएं प्राप्त करनी होगी। इसके साथ ही सरकार को भारतीय मेडिकल सुविधाओं की विदेशों में योजनाबद्ध तरीके से मार्केटिंग करनी होगी ताकि भारत को दुनिया का प्रमुख मेडिकल डेस्टिनेशन बनाया जा सके। इसके लिए सरकार के साथ ही विदेशों में कार्यरत गैर सरकारी संस्थाओं को आगे आना होगा।    </p>
<p>-डॉ. राजेन्द्र प्रसाद शर्मा<br /><br /></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>ओपिनियन</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 20 Jun 2023 10:32:31 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>हाथों में कम्पन, शरीर में जकड़न, धीमापन या टेढ़ापन, हो सकता है मूवमेंट डिसऑर्डर्स </title>
                                    <description><![CDATA[मूवमेंट डिसऑर्डर्स शरीर के किसी भी हिस्से में जरूरत से अधिक या कम हरकत कि विभिन्न बीमारियां है। इसमें विभिन्न प्रकार के रोग शामिल है जैसे- पार्किंसंस रोग कम्पन, अटैक्सिआ, डिस्टोनिआ, ट्रेमर। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/tremors-in-the-hands-stiffness-in-the-body-slowness-or/article-49354"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-06/t-11.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। मूवमेंट डिसऑर्डर्स या गतिविधि विकार शरीर के किसी भी हिस्से में जरूरत से अधिक या कम हरकत की विभिन्न बीमारियां है। यदि आपके शरीर का कोई भी अंग पहले से ज्यादा तेज चलने, हिलने, कांपने या फड़कने लगता है, या फिर अचानक से टेढ़ा या शिथिल होने लगता है तो आप भी ‘मूवमेंट डिसआर्डर’ बीमारी के शिकार हो सकते हैं। भारत में इन बिमारियों कि जागरूकता बहुत कम है और पार्किंसंस रोग इस श्रेणी का सबसे व्यापक रोग है। आंकड़ों के अनुसार दुनियाभर में 1 करोड़ से ज्यादा लोग इससे प्रभावित हैं। इस बीमारी से बचने के लिए इसकी जानकारी होना और लक्षणों के बारे में समझना अत्यंत आवश्यक है इन्हीं सब मुद्दों पर जानकारी देते हुए नारायणा मल्टीस्पेशियलिटी हॉस्पिटल, जयपुर के न्यूरोलॉजिस्ट डॉ. वैभव माथुर कई प्रकार की सावधानियों के बारे में बताते हैं। डॉ. वैभव माथुर राजस्थान के पहले फॉर्मली ट्रेनेड मूवमेंट डिसऑर्डर स्पेशलिस्ट है, और अपनी सेवाएं जयपुर के साथ-साथ प्रदेश के नागरिकों को प्रदान कर रहे हैं।</p>
<p><strong>क्या हैं मूवमेंट डिसऑर्डर्स? </strong><br />मूवमेंट डिसऑर्डर्स शरीर के किसी भी हिस्से में जरूरत से अधिक या कम हरकत कि विभिन्न बीमारियां है। इसमें विभिन्न प्रकार के रोग शामिल है जैसे- पार्किंसंस रोग कम्पन, अटैक्सिआ, डिस्टोनिआ, ट्रेमर। </p>
<p><strong> इन रोगों के लक्षण विभिन्न प्रकार के होते हैं- </strong><br />• पार्किंसंस रोग- कम्पन, धीमापन, जकड़न एवं बैलेंस कि दिक्कतें। <br />• अटैक्सिआ - चलने में लड़खड़ाहट या असंतुलन, हाथ पैरों को चलाने में नियंत्रण की कमी। <br />• डिस्टोनिआ- चेहरे, हाथों या पैरों में अनैच्छिक मुड़ाव या जकड़न बोलने या चबाने में दिक्कत, लिखने में परेशानी. या गर्दन में मुड़ाव एवं झटके। डी बी एस डिस्टोनिआ के भी कुछ मरीजों में कारगर है। <br />• ट्रेमर-  हाथों, पैरों, सर, गर्दन, या होंठों का लगातार कम्पन। <br />• कोरिया-  शरीर का अत्यधिक एवं अनैच्छिक हिलना। </p>
<p>ये बीमारियाँ जेनेटिक और पर्यावरणीय कारणों से युवा एवं बुजुर्गों दोनों में हो सकती हैं। भारत में इन बीमारियों कि जागरूकता अभी भी बहुत कम है, जिसके कारण इनका समय पर और उचित उपचार नहीं हो पाता है। न्यूरो की बीमारियां 3-7% मूवमेंट डिसऑर्डर्स से संबंधित होती है। </p>
<p><strong>उपचार व सावधानियां-  </strong><br />पार्किंसंस रोग के उपचार में पिछले कुछ दशकों से काफी प्रगति हुई हैं, और मूवमेंट डिसऑर्डर्स (गतिविधि विकार) को मेडिकल साइंस में अब एक विशेष दर्जा दिया जा रहा है। डोपामाइन की गोलियां अलग-अलग प्रारूप में दी जा सकती हैं, इसके अलावा एपोमोर्फिन नामक इंजेक्शन भी चुनिंदा रोगियों में लाभकारी होता है। पार्किंसंस रोग में सबसे नवीन उपचार हैं डीप ब्रेन स्टिमुलेशन ( डी बी एस ) सर्जरी, जो भारत में कुछ अस्पतालों में 20 वर्षों से हो रही है।  </p>
<p><strong>क्या है नवीनतम उपचार- डीप ब्रेन स्टिमुलेशन (डी बी एस)?</strong> <br />"डीप ब्रेन स्टिमुलेशन " या "डी बी एस" एक आधुनिक तकनीक है जिसमें सर्जरी द्वारा मस्तिष्क में संवेदनशील तार (इलेक्ट्रोड) लगाए जाते हैं और इन्हें छाती में एक पेसमेकर जैसे यन्त्र (आई पी जी) से जोड़ दिया जाता है। इसके पश्च्यात यह आई पी जी बाहर से नियंत्रित (प्रोग्राम) किया जा सकता है और रोगियों के लक्षणों में आश्चर्यजनक रूप से 70-80% तक सुधार हो जाता है।  </p>
<p>डॉ माथुर ने बताया कि ऐसी बिमारियों को आम तौर पर बुढ़ापे या कमजोरी के कारण मन के नजरंदाज कर दिया जाता है, जिसकी वजह से मरीज समय पे इलाज से वंचित रह जाते हैं। इसलिए मूवमेंट डिसऑर्डर के लक्षणों को पहचानना और तुरंत इलाज कराना अत्यंत आवश्यक है, लक्षणों को पहचानने में देरी होने पर इलाज में भी परेशानी होती है। जैसे ही आपको इसके लक्षण दिखाई दे तुरंत नजदीकी डॉक्टर की अस्पताल में संपर्क करें।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>स्वास्थ्य</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 19 Jun 2023 15:34:29 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur]]></dc:creator>
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                <title> चार दिन के नवजात की ब्लड एक्सचेंज कर बचाई जान</title>
                                    <description><![CDATA[पहली बार उप जिला अस्पताल पर इस प्रक्रिया से 4 दिन के शिशु का उपचार  किया गया है। शिशु अब स्वस्थ्य है, उसे अस्पताल से डिस्चार्ज कर दिया गया है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/alwar/blood-exchange-of-a-four-day-old-newborn-saved-his-life/article-47054"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-05/p-4.png" alt=""></a><br /><p>बानसूर। अलवर जिले के बानसूर कस्बा स्थित उप जिला अस्पताल में पहली बार एक 4 दिन के नवजात का डॉक्टरों की टीम ने ब्लड एक्सचेंज कर नया जीवनदान दिया है। शिशु को पीलिया बढ जानें से डॉक्टरों की टीम ने खून बदलकर शिशु को नया जीवनदान दिया। अस्पताल के शिशु रोग विशेषज्ञ डा. अनिल कुमार ने बताया कि यह प्रक्रिया पहले मेडिकल कॉलेज में होती थीं। पहली बार उप जिला अस्पताल पर इस प्रक्रिया से 4 दिन के शिशु का उपचार  किया गया है। शिशु अब स्वस्थ्य है, उसे अस्पताल से डिस्चार्ज कर दिया गया है। उन्होंने बताया कि शिशु को पीलिया ज्यादा मात्रा में होने पर उसे फोटोथैरपी में रखा गया, लेकिन शिशु का बिल्कबीन लेवल काफी बढ़ गया था। शिशु के माता का बल्ड ग्रुप 0 नेगेटिव और बच्चे का ए पॉजिटिव  था। अत: लगातार हिमोलाइसिस होने के से बच्चे का बिल्कबीन कम नहीं हुआ, बच्चे का खून बदलना पड़ा। इस प्रक्रिया को एक्सचेंज ट्रांसफ्यूजन कहते हैं। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>अलवर</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 29 May 2023 11:38:36 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>प्रदेश में खोले जाएंगे 70 उप-स्वास्थ्य केन्द्र</title>
                                    <description><![CDATA[ मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने इस आशय के प्रस्ताव को मंजूरी दी है। इनके संचालन के लिए प्रत्येक उप-स्वास्थ्य केन्द्र में एक महिला स्वास्थ्य कार्यकर्ता का पद सृजित किया जाएगा। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/70-sub-health-centers-will-be-opened-in-the-state/article-46536"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-05/3.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं के आधारभूत ढांचे को मजबूत करने के लिए 70 नवीन उप-स्वास्थ्य केन्द्र खोले जाएंगे। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने इस आशय के प्रस्ताव को मंजूरी दी है। इनके संचालन के लिए प्रत्येक उप-स्वास्थ्य केन्द्र में एक महिला स्वास्थ्य कार्यकर्ता का पद सृजित किया जाएगा। </p>
<p>इनमें सीकर में 11, नागौर में 9, अलवर एवं करौली में 6-6, सवाई माधोपुर में पांच, भीलवाड़ा एवं टोंक में चार-चार, जयपुर, चूरू एवं राजसमन्द में तीन-तीन, चित्तौड़गढ़, दौसा, जालोर, झुंझुनूं, कोटा एवं उदयपुर में दो-दो तथा अजमेर, बारां, भरतपुर एवं पाली में एक-एक उप-स्वास्थ्य केन्द्र खुलेंगे।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 24 May 2023 13:24:41 +0530</pubDate>
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                <title>श्वशन रोग अस्पताल में नर्सेज ने किया कार्य बहिष्कार, मरीज हुए परेशान</title>
                                    <description><![CDATA[ 18 मई से कांवटिया चिकित्सालय जयपुर से शुरू हुए कार्य बहिष्कार के क्रम में आज श्वशन रोग चिकित्सालय के नर्सिंग कर्मियों ने सुबह आठ बजे से दस बजे तक 2 घंटे कार्य बहिष्कार किया। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/nurses-boycott-work-in-respiratory-disease-hospital--patients-upset/article-46420"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-05/capture11.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। राजस्थान राज्य नर्सेज एसोसिएशन एकीकृत के राज्य व्यापी आह्वान पर नर्सेज की वेतन भत्तों की विसंगति, केडर रिव्यु, संविदा नर्सेज का नियमितीकरण, एवम नर्सिंग ट्यूटर वर्ग का पदनाम परिवर्तन, नर्सिंग छात्रों के स्टायीफड में वृद्धि समेत ग्यारह  सूत्री मांगों को लेकर 18 मई से कांवटिया चिकित्सालय जयपुर से शुरू हुए कार्य बहिष्कार के क्रम में आज श्वशन रोग चिकित्सालय के नर्सिंग कर्मियों ने सुबह आठ बजे से दस बजे तक 2 घंटे कार्य बहिष्कार किया। चिकित्सालय संघर्ष संयोजक पवन सेन, चिकित्सालय अध्यक्ष सुभाष जांगिड़ एवं महेंद्र पाल के नेतृत्व में कार्य बहिष्कार कर सामुहिक अवकाश पर जाने की चेतावनी देते हुए नारेबाजी कर प्रदर्शन करते हुए चिकित्सालय अधीक्षक को मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा और धरना प्रदर्शन करके सभा की। <br /><br />आयोजित सभा में महासंघ एकीकृत के प्रदेश अध्यक्ष राजेंद्र राना, नर्सेज एसोसिएशन एकीकृत के कार्यवाहक प्रदेश अध्यक्ष भूदेव धाकड़ , एनटीए आई के प्रदेश अध्यक्ष पुरुषोत्तम कुम्भज, महामंत्री जावेद अख्तर नकवी, कोषाध्यक्ष ओमप्रकाश मेघवाल, नर्सेज एसोसिएशन एकीकृत के प्रदेश महामंत्री कैलाश शर्मा,यजुवेंद्र यादव हनुमान गर्ग, इंद्रा डांगी,रामरतन जांगिड़ इत्यादि ने सभा को संबोधित किया। इसी क्रम में 25 मई गुरूवार को जेके लोन चिकत्सालय जयपुर  के नर्सिंग कर्मचारी कार्य बहिष्कार कर प्रदर्शन करेंगे।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 23 May 2023 14:48:30 +0530</pubDate>
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