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                <title>hospitals - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <title>चिकित्सा सुविधाओं की कमी नहीं, रेगुलेटरी सिस्टम में खामियां</title>
                                    <description><![CDATA[डॉक्टर व मरीज के मध्य संबंधों को ठीक करने की जरूरत, सरकारी ही नहीं निजी अस्पताल भी काउंसलर और हेल्प डेस्क को मजबूत करें।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/there-is-no-lack-of-medical-facilities--there-are-flaws-in-the-regulatory-system/article-111836"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-04/news47.png" alt=""></a><br /><p>कोटा । दैनिक नवज्योति कार्यालय में होने वाली मासिक परिचर्चा की श्रंखला में बुधवार को चिकित्सा व्यवस्था पर चर्चा की गई। आर क्वालिटी हेल्थकेयर फैसिलिटी इजीली असेसिबल टू एवरी वन इन कोटा विषय पर आयोजित इस परिचर्चा में गुणवत्ता पूर्ण स्वास्थ्य सेवा आसानी से लोगों को उपलब्ध हो रही हैं अथवा नहीं। पर चर्चा की गई। परिचर्चा में हिस्सा लेने वाले प्रतिभागियों ने सुधार के सुझाव और खराब स्थितियों से होने वाली व्यवस्था पर भी प्रकाश डाला। परिचर्चा में सामने आया कि शहर ही नहीं ग्रामीण इलाकों तक चिकित्सकीय सुविधाएं उपलब्ध हैं। लेकिन सिस्टम की कमी है। पीएचसी,सीएचसी होने के बावजूद लोग बड़े अस्पताल की ओर मुंह करते हैं। इससे सारा भार बड़े अस्पतालों पर पड़ता है और सारी व्यवस्था तहस-नहस हो जाती है। इस व्यवस्था को बिगाडने में केवल आम लोग ही नहीं मरीज, चिकित्सा व्यवस्था से जुड़े  सभी लोग शामिल हैं। इसके लिए जागरुकता आनी चाहिए। अस्पतालों में काउंसलर और हेल्प डेस्क के साथ पूछताछ और इमरजेंसी सेवा की खामियों को भी पुखता करने की आवश्यकता है। इस परिचर्चा में मेडिकल कॉलेज के पूर्व प्राचार्य,आईएमए के अध्यक्ष, पूर्व अध्यक्ष, सीएमएचओ के अधिकृत प्रतिनिधि,श्री राम मंदिर चिकित्सालय के सभापति, नर्सिंंग कॉलेज के डायरेक्टर,सहायक कर्मचारियों के अध्यक्ष, कोटा हार्ट अस्पताल,भाजपा चिकित्सा प्रकोेष्ठ के संयोजक,पैथालाजिस्ट, रेडियोलॉजिस्ट,नर्सिंग सहित मरीज और उनके तीमारदारों ने भी हिस्सा लिया। प्रस्तुत हैं परिचर्चा के अंश... </p>
<p><strong>मुख्य बिंदु</strong><br />- पीएचसी, सीएचसी जिला अस्पताल की सेवाओं को मजबूत करने की आवश्यकता। <br />- अस्पतालों में बने हेल्पडेस्क।  ल्ल मरीज को सिंगल विंडो पर ही मिले सारी सुविधा<br />- इमजेंसी सेवाओं को बेहतर बनाने की आवश्यकता। <br />- डॉक्टर व मरीज के बीच का संवाद बेहतर हो। <br />- अस्पताल की वेबसाइट बने जिस अस्पताल का पूरा विवरण, डॉक्टरों ओपीडी डे, सुविधा हो जानकारी<br />- अस्पतालों में लगने वाली कतार व्यवस्था सुधार हो।<br />- डॉक्टर से मिलने के लिए आॅनलाइन रजिस्टेशन हो साथ ही बैक की तर्ज पर टोकन सुविधा हो।<br />- हेल्पडेस्क के साथ अस्पतालों में काउंसलर लगाए जो मरीजों बीमारी के लिए गाइड कर सकें। <br />- अस्पताल की सुविधाओं को ब्रोशर होना चाहिए।<br />- रेफर सिस्टम में सुधार की आश्यकता है। <br />- प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों का उपयोग कम हो रहा है, जिससे बड़े अस्पतालों भीड़ बढ़ रही है।<br />-  मरीज को डॉक्टर के पहुंचने के लिए एक चेनल की आवश्यकता है।<br />- आम आदमी को बीमार पड़ने नहीं है हक<br />- दवा जांच से चल रहे कमीशन के अंकुश लिए कानून बनना चाहिए। <br />- रजिस्टर्ड व एमडी पैथेलॉजिस्ट से ही जांच हो, बिना लाइसेंस के चल रही जांच केंद्र लगें अंकुश<br />- सरकारी योजनाओं को ठीक से क्रियान्वयन हो तभी आम आदमी तक सुलभ व सस्ता इलाज मिलेगा।</p>
<p><strong>प्राथमिक चिकित्सा व्यवस्था में सुधार की आवश्यकता</strong><br />कोटा में सस्ती, सुलभ और गुणवत्ता युक्त चिकित्सा व्यवस्था मौजूद है। आम आदमी इन सुविधाओं को ठीक से उपयोग नहीं कर पा रहा है। इसके लिए उचित माध्यम को ठीक करने की आवश्यकता है। जब तक प्राथमिक स्तर की चिकित्सा व्यवस्था में सुधार नहीं होगा तब तक अस्पतालों में लंबी कतारें लगेंगी। प्राथमिक स्तर पर ही लोगों इलाज मिलेगा तो बड़े अस्पतालों में भीड़ कम होगी तो सुपर स्पेशियलेटी सुविधा लोगों को बेहतर तरीके से मिल सकेंगी। अभी लोग प्राथमिक स्तर की बीमारियों के लिए भी बड़े अस्पतालों में दौड़ लगा रहे हैं। अस्पताल में लोगों को इलाज के लिए लंबा इंतजार करना पड़ रहा है। अस्पताल में मरीज को हेल्प डेस्क और काउंसलर की आवश्यकता है। उसको यह ही पता नहीं उसको जाना किस डॉक्टर के पास है। <br /><strong>-डॉ. के श्रृंगी, एमआईए अध्यक्ष कोटा</strong></p>
<p><strong>इमरजेंसी सुविधाओं को बेहतर बनाने की आवश्यकता</strong><br />वर्तमान में कोटा में आमजन के लिए बेहतर चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध है। यहां मरीज के पास अस्पताल से लेकर स्पेशलिस्ट डॉक्टर चुनने की सुविधा है।  आमजन को बीमारी का इलाज कराने के लिए कई विकल्प उपलब्ध है। सरकार द्वारा चलाई जा रही विभिन्न योजनाओं और खासतौर से मुख्यमंत्री आरोग्य योजना मां योजना में 85 प्रतिशत लोग कवर है। बाकी शेष लोग आरजीएचएस में कवर, मुख्यमंत्री नि:शुल्क निरोगी योजना में सभी लोग कवर है।  चिकित्सा सुविधा पूरी है लेकिन लोगों का अस्पताल में अनुभव कैसा रहा है इसी पर सारा सिस्टम चलता है। डॉक्टर ने मरीज को इलाज के दौरान कैसा फील कराया यह मायने रखता है। लोगों में कम्युनिकेशन और इमजेंसी में मरीज को ठीक से सुविधा युक्त इलाज मिल जाए तो यहां किसी चीज की कमी नहीं है। इमरजेंसी में आने वाले मरीजों के लिए एमडी स्तर के काउंसर हों जो मरीज से ठीक से संप्रेषण कर सकें। <br /><strong>-डॉ. विजय सरदाना, पूर्व प्रधानाचार्य मेडिकल कॉलेज कोटा।</strong></p>
<p><strong>व्यवस्था में सुधार की जरूरत </strong><br />आमजन को कोटा में और शहरों की अपेक्षा बेहतर चिकित्सा सुविधाएं मिल रही है। यहां संसाधन की कोई कमी नहीं है। मरीज के पास इलाज के लिए मल्टीपल चॉइस है। अलग अलग बीमारी के लिए सर्व सुविधाओं से लेस सरकारी व निजी अस्पताल मौजूद है। अन्य शहरों में कोटा में इलाज सस्ता है। उसके बावजूद मरीज संतुष्ट नहीं हो पा रहा है। मरीज  अपने को  जांच, इलाज के नाम पर ठगा ठगा सा महसूस करता है पीएचसी व सीएचसी स्तर पर सुविधाएं बेहतर करने की आवश्यकता है। सरकार की ओर से कई योजनाए चलाई जा रही जिससे आमजन को सस्ता और सुलभ इलाज मिल रहा है। चिकित्सक व मरीज में संप्रेषण अच्छा करने की आवश्यकता है। निजी व सरकारी डॉक्टर को अपने पैसे को इमानदारी से करने की आवश्यकता है। डाक्टरों पर बेवजह तोहमत लगाई जाती है। व्यवस्था की खामियां चिकित्सकों को भुगतनी पड़ती हैं। <br /><strong>-डॉ. सुधीर उपाध्याय सभापति श्रीराम मंदिर चिकित्सालय</strong></p>
<p><strong>कोटा में स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता आसान</strong><br />विदेशों की तुलना में देश और कोटा में स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता काफी आसान है। यहां मरीज अपनी पसंद के डॉक्टर व अस्पताल में कम से कम खर्च में बेहतर उपचार ले सकता है। डॉक्टर भी आसानी से मरीज की एप्रोच में हैं। कई बार मरीज के एनवक्त पर आने से उसे सही उपचार मिलने में देरी हो सकती है। डॉक्टरों व नर्सिंग स्टाफ के पास कार्यभार अधिक होने से परिस्थितिवश विवाद की स्थिति बन सकती है। जो लोग परेशान होते हैं वह अज्ञानता व जागरूकता की कमी के कारण होते है। अस्पतालों में हैल्प डेस्क बनाई जाएं और सरकारी योजनाओं को सही ढंग से लागू कर दिया जाए तो कोटा जैसी स्वास्थ्य सेवाएं कहीं नहीं हैं। कोरोना में कोटा जैसी मेडिकल सुविधाएं कहीं नहीं मिली। <br /><strong>-डॉ. अमित व्यास, संयोजक, भाजपा चिकित्सा प्रकोष्ठ</strong></p>
<p><strong>प्रशिक्षित स्टाफ की कमी, सुविधाओं का लाभ नहीं</strong><br />कोटा संभागीय मुख्यालय है। यहां मेडिकल कॉलेज व सुपर स्पेशलिटी जैसे अस्पताल है। डॉक्टर भी विशेषज्ञ हैं। लेकिन कई बार सरकारी व प्राइवेट अस्पतालों में नर्सिंग स्टाफ के प्रशिक्षित नहीं होने से मरीजों को सही उपचार नहीं मिल पाता है। जिससे मरीजों को उपचार कम और दर्द अधिक  सहना पड़ता है। साथ ही सरकार की योजनाएं भी हैं लेकिन सरकारी अस्पतालों में अधिकतर समय जांच मशीनें खराब होने से मरीजों को सुविधाएं नहीं मिल पाता है। स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने व आम आदमी की पहुंच तक बनाने के लिए व्यवस्थाओं में सुधार करने की जरूरत है। <br /><strong>-मधु ललित बाहेती, अध्यक्ष लॉयंस क्लब कोटा सेंट्रल</strong></p>
<p><strong> गांव से लेकर शहर तक चिकित्सा सुविधाएं बेहतर हुई</strong><br />चिकित्सा एंव स्वास्थ्य विभाग की ओर से प्राथमिक चिकित्सा सुविधाओं को काफी बेहतर किया है। पीएचसी व सीएचसी पर अब सीजेरियन आॅपरेशन होने लगे हैं। साथ ही शहरी व ग्रामीण स्वास्थ्य केंद्रों पर डॉक्टर से लेकर जांचों की सुविधाएं पूरी उपलब्ध है। उपस्वास्थ्य केंद्र,पीएचसी सीएचसी पर जांच इलाज और भर्ती करने सुविधाएं है। लोग बेहतर के चक्कर में शहर के बड़े अस्पतालों की ओर आते है।  प्राथमिक स्तर पर सोनोग्राफी, एक्सरे और सभी प्रकार की जांचे तक उपलब्ध हैं। सरकार ने विशेषज्ञ डॉक्टर भी सीएचसी पीएचसी पर लगा रखे हंै। सरकार की ओर से चलाई जा रही विभिन्न योजनाओं को आमजन तक बेहतर तरीके से पहुंचाया जा रहा है। टीकाकरण से लेकर बच्चों के स्वास्थ्य गर्भवती महिलाओं सोनोग्राफी के लिए वाउचर जैसी सुविधा से काफी लाभ मिल रहा है। <br /><strong>-डॉ. अनिल मीणा, एसएमडी सीएमएचओ आॅफिस</strong></p>
<p><strong>नर्सिंग स्टाफ का समय-समय पर हो प्रशिक्षण</strong><br />सरकारी और निजी अस्पतालों में कार्यरत नर्सिंग स्टाफ कोर्स करने के बाद ही लगते हैं। लेकिन समय-समय पर उनका रिफ्रेशर कोर्स व प्रशिक्षण किया जाना आवश्यक है। जबकि कोर्स में प्रावधान है। लेकिन कई बार किसी कारणवश स्टाफ की गलती के कारण मरीज को परेशानी का सामना करना पड़ता है तो उससे पूरे अस्पताल की छवि पर प्रभाव पड़ता है। यदि ट्रेनिंग में उन्हें उनके काम के साथ-साथ मरीज को हैंडल करना भी सिखाया जाएगा तो जो छोटी-छोटी समस्याएं आती हैं उनका समाधान हो जाएगा। <br /><strong>-डॉ. सुधीश शर्मा, डायरेक्टर नर्सिंग कॉलेज</strong></p>
<p><strong>लोगों में जागरूकता की कमी</strong><br />कोटा में स्वास्थ्य सेवाएं अन्य शहरों की तुलना में काफी बेहतर है। लेकिन लोगों में जागरूकता की कमी है। जिसके कारण कई बार बीमारी में उन्हें परेशान होना पड़ता है। शहर के लोगों को तो डॉक्टर से लेकर मेडिकल स्टोर तक की जानकारी है। लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों से आने वाले मरीजों को सही जानकारी नहीं होने से वे मेडिकल स्टोर  पर जाकर अच्छे डॉक्टरों की जानकारी लेते है।  वहीं जहां तक दवाई का सवाल है दवाईयां अधिकतर जिस डॉक्टर को दिखाया उसके नजदीक मेडिकल स्टोर पर ही मिलती है।  लेकिन जब मरीज को उसकी सुविधा अनुसार जगह पर दवाई नहीं मिलती तो वह परेशान होता है। दवाईयां ऐसी लिखी जाएं जिनकी उपलब्धता आसान होगी तो मरीज की आधी परेशानी दूर हो जाती है। मरीज पैसा खर्च करने को तैयार है लेकिन वह सही उपचार व दवाई चाहता है जिससे वह समय रहते ठीक हो सके। इसके लिए व्यवस्था  में थोड़े सुधार की जरूरत है। <br /><strong>-भजन भगवानी, मेडिकल शॉप आनर,सह संयोजक चिकित्सा प्रकोष्ठ</strong></p>
<p><strong>ओपीडी क्रिएटिव होनी चाहिए</strong><br />अस्पताल में मरीज ओपीडी में आए तो उसको गुड फिल होना चाहिए। अस्पतालों की ओपीडी क्रिएटिव होनी चाहिए। हेल्दी वातावरण मरीज को मिलेगा तो आधी बीमारी वैसे ही ठीक हो जाएगी। डॉक्टर को मरीज की केस हिस्ट्री लेने के दौरान मरीज को सकारात्क करना जरूरी है। जिससे मरीज का डॉक्टर पर विश्वास बढ़ता है। मरीज बेहतर सुविधा और बेहतर इलाज में विश्वास करता है। वो अस्पताल में शत प्रतिशत अटेंशन की अपेक्षा के साथ आता उसकी अपेक्षा में खरा उतरने की जरुरत है। <br /><strong>-डॉ. अभिषेक राठौड़, न्यूरोलोजिस्ट कोटा हार्ट</strong></p>
<p><strong>शुरुआत में सुविधा मिलेगी तो नहीं होंगे मरीज परेशान</strong><br />सरकारी अस्पतालों में आने वाले मरीजों की संख्या तो काफी अधिक रहती है। उनमें अधिकतर गम्भीर व एक्सीडेंट वाले भी होते है। जिन्हें सबसे पहले स्ट्रेचर की जरूरत होती है। लेकिन वही पर्याप्त नहीं होने से मरीजो की परेशानी उसी से बढ़ने लगती है। जबकि स्ट्रेचर चलाने से लेकर संविदा पर कार्यरत अन्य कर्मचारी कम मानदेय मिलने पर भी सेवाएं देता है। लेकिन संवेदक द्वारा समय पर मानदेय तक नहीं देने से उनकी समस्याएं अधिक हो जाती है। जिस कारण से संविदा कर्मियों को मजबूरन हड़ताल करनी पड़ती है। मरीज को यदि शुरुआत में ही सुुविधाएं बेहतर मिलने लगेंगी तो किसी तरह की समस्या ही नहीं होगी। <br /><strong>-दिलीप सिंगोर, जिलाध्यक्ष ठेका संघ, मेडिकल कॉलेज कोटा </strong></p>
<p><strong>मरीज व डॉक्टर के रिश्ते मधुर होने चाहिए</strong><br />कोटा के सरकारी व निजी अस्पतालों में अन्य जिलों से चिकित्सा व्यवस्थाएं काफी बेहतर है। दिल्ली, मुंबई, अहमदाबाद और जयपुर में होने वाले जटिल आॅपरेशन कोटा में कम खर्च में हो जाते है। जिससे मरीजों की बड़े शहरों की दौड़ कम हुई है। हार्ट, किडनी, कैंसर जैसी बीमारियों का कोटा में मरीजों को बेहतर इलाज मिल रहा है। कोटा में डॉक्टर और मरीज के रिश्ते मधुर होने चाहिए। साथ अस्पतालों काउंसर और नर्सिंग स्टॉफ समय समय पर ट्रेनिंग कराकर चिकित्सा सुविधाओं हुए नवाचार लिए प्रशिक्षत करना चाहिए। <br /><strong>-डॉ. ओमप्रकाश धाकड़, कोटा हार्ट इंस्टीट्यूट</strong></p>
<p><strong>दस साल में स्वास्थ्य सेवाओं में हुआ सुधार</strong><br />देश और विशेष रूप से कोटा में दस साल पहले और वर्तमान की स्वास्थ्य सेवाओं में जमीन आसमान का अंतर है। पहले की तुलना में वर्तमान में स्वास्थ्य सेवाएं कोटा में बेहतर हुई है। केन्द्र व  व राज्य सरकार स्वास्थ्य के क्षेत्र में खूब खर्चा कर रही है। यहां जांच के लिए एक से बढ़कर एक प्रयोगशालाएं हैं। जहां बिना पैथोलोजिस्ट के हस्ताक्षर के जांच रिपोर्ट नहीं दी जाती। यह जरूर है कि लैब अधिक हैं और उनमें प्रशिक्षत टैक् नीशियन की कमी हो सकती है। यह पेशा विश्वास का है। 2014 से पहले जहां देश में 6 करोड़ लोगों की मौत इलाज नहीं मिलने के कारण हो जाती  थी। वैसे स्थिति अभी नहीं है। कोटा में डॉक्टरों की उपलब्धता से लेकर जांच तक की सुविधाएं आसानी से उपलब्ध हो रही हैं।  <br /><strong>-डॉ. गोपाल सिंह भाटी, पैथोलोजिस्ट इंडिपेंडेंट डायरेक्टर सेल इंडिया</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 24 Apr 2025 13:02:56 +0530</pubDate>
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                <title>आज से बदल गया है अस्पतालों का समय, सुबह 8 से दोपहर 2 बजे तक रहेगा ओपीडी का समय </title>
                                    <description><![CDATA[प्रदेश के सरकारी अस्पतालों में आज से ओपीडी का समय बदल गया है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/the-time-of-hospitals-has-changed-from-today-from-8/article-109303"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-04/news1.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। प्रदेश के सरकारी अस्पतालों में आज से ओपीडी का समय बदल गया है। एसएमएस अस्पताल सहित मेडिकल कॉलेज से जुड़े अन्य सरकारी अस्पतालों में आज एक अप्रैल से ग्रीष्मकालीन समय सारिणी के अनुसार सुबह 8 बजे से ओपीडी शुरू हुई और दोपहर 2 बजे तक ओपीडी का समय रहा। </p>
<p>इस बीच मरीजों की सुविधा को देखते हुए एसएमएस अस्पताल में रजिस्ट्रेशन आधे घंटे पहले यानी सुबह 7.30 ही शुरू कर दिया गया। वहीं रविवार और अन्य अवकाश वाले दिन सुबह 9 बजे से लेकर 11 तक अस्पतालों में ओपीडी खुली रहेगी। इसके साथ ही डिस्पेंसरियों में भी ओपीडी समय सुबह 8 से दोपहर 2 बजे तक रहेगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>स्वास्थ्य</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 01 Apr 2025 17:27:40 +0530</pubDate>
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                <title>चीन में रहस्यमयी वायरस की दस्तक, मरीजों से भरे अस्पताल </title>
                                    <description><![CDATA[ चीन में पांच साल पहले एक वायरस की दस्तक ने पुरी दुनिया में तबाही मचा दी थी । उस समय कोरोना वायरस से दुनिया भर में मौत का मंजर देखने को मिला था]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/mysterious-virus-hits-china-hospitals-filled-with-patients/article-99474"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-01/257rtrer-(9)1.png" alt=""></a><br /><p>बीजिंग। चीन में पांच साल पहले एक वायरस की दस्तक ने पुरी दुनिया में तबाही मचा दी थी। उस समय कोरोना वायरस से दुनिया भर में मौत का मंजर देखने को मिला था। चीन के वुहान शहर का वायरस अब भी रहस्य बना हुआ हैं। इसी बीच चीन में एक और रहस्यमयी वायरस ने दस्तक दे दी हैं। इस वायरस ने चीन को अपनी चपेट में ले लिया हैं। चीन में ह्यूमन मेटान्यूमोवायरस का प्रकोप फैलता जा रहा हैं। इस वायरस के कारण अस्पतालों में मरीजों की भीड़ देखने को मिल रही हैं ।</p>
<p>इसकी सूचनाएं सोशल मीडिया पर वायरल हो रही हैं। सोशल मीडिया पर अस्पतालों में मरीजों की भीड़ के वीडियो वायरल हो रहे है। वीडियो में दिखाई दे रहा है कि अस्पताल मरीजों से खचाखच भरे हुए हैं।  वहीं कई रिपोर्ट्स में भी दावा किया जा रहा हैं कि इस नए वायरस एचएमपीवी के कारण अस्पताल और शमशान घाट भर चुके हैं। हालात को देखते हुए चीन पूरी तरह से अलर्ट मोड पर है। चीन के स्वास्थ्य अधिकारी स्थिति पर नजर रखे हुए है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 03 Jan 2025 11:40:57 +0530</pubDate>
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                <title>यूपीएचसी चांदपोल व मदेरणा कॉलोनी नेशनल क्वालिटी सर्टिफाइड अस्पताल बने</title>
                                    <description><![CDATA[चिकित्सा एवं स्वास्थ्य मंत्रालय की ओर से समस्त नागरिकों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध हो इसके लिए विभिन्न प्रकार की जन कल्याणकारी योजनाएं चलाई जा रही है]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jodhpur/uphc-chandpol-and-maderna-colony-become-national-quality-certified-hospitals/article-98490"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-12/5554-(8)14.png" alt=""></a><br /><p>जोधपुर। चिकित्सा एवं स्वास्थ्य मंत्रालय की ओर से समस्त नागरिकों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध हो इसके लिए विभिन्न प्रकार की जन कल्याणकारी योजनाएं चलाई जा रही है। इसमें महत्वपूर्ण है राजकीय चिकित्सा संस्थानों में दी जाने वाली चिकित्सा एवं स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ करने के लिए राष्ट्रीय गुणवत्ता कार्यक्रम चलाया जा रहा है। अतिरिक्त मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (पक) डॉ. रामनिवास सेंवर ने बताया कि स्वास्थ्य मंत्रालय की ओर से जोधपुर अर्बन के चिंहित स्वास्थ्य केंद्रों का जिला, राज्य एवं राष्ट्रीय टीमों द्वारा राष्ट्रीय गुणवत्ता कार्यक्रम के अंतर्गत असेसमेंट किया गया। उन्होंने बताया कि इसी के तहत जोधपुर शहर के आयुष्मान आरोग्य मंदिर (यूपीएचसी) चांदपोल व मदेरणा कॉलोनी नेशनल सर्टिफाइड बनी है। </p>
<p>नेशनल क्वालिटी असेसमेंट प्रोग्राम के जिला नोडल एवं अतिरिक्त सीएमएचओ (पक) डॉ. रामनिवास सेंवर ने बताया कि शहरी क्षेत्र के स्वास्थ्य केंद्रों पर हुए राष्ट्रीय गुणवत्ता कार्यक्रम असेसमेंट जोधपुर के शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र चांदपोल व मदेरणा कॉलोनी का राष्ट्रीय दल द्वारा गुणवत्ता कार्यक्रम के अंतर्गत असेसमेंट किया गया। इन अस्पताल में राष्ट्रीय गुणवत्ता मापदंडों के अनुरूप एक्सट्रेनल असेसमेंट के प्रत्येक पहलू का बारीकी से निरीक्षण कर जायजा लिया गया। डॉ. सेंवर ने बताया कि चांदपोल का ओवर ऑल 93.05 व मदेरणा कॉलोनी का 91.82 प्रतिशत स्कोर के साथ जोधपुर को राष्ट्रीय क्वालिटी सर्टिफिकेशन के लिए योग्य माना गया। डॉ. सेंवर ने बताया कि नेशनल सर्टिफाइड होने से इन अस्पतालो को प्रतिवर्ष दो लाख रुपए का अतिरिक्त बजट आगामी तीन साल तक मिलेगा, जिसमे से 25 फीसदी अस्पताल स्टाफ को प्रोत्साहन के रूप में मिलेगा। </p>
<p>उन्होंने बताया कि जोधपुर के अन्य स्वास्थ्य केंद्रों को नेशनल सर्टिफाइड करवाने की कवायद की जा रही है। इस दौरान यूएनएफपीए कोऑर्डिनेटर डॉ गिरीश माथुर, डॉ नरेश दायमा, डॉ अशोक बिश्नोई सहित क्वालिटी सेल मेंबर की मुख्य भूमिका रही।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जोधपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 23 Dec 2024 18:56:32 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>उपचार करवाने को घंटों करना पड़ रहा इंतजार, अस्पताल फुल </title>
                                    <description><![CDATA[मरीजों की भीड़ अधिक होने के कारण लोगों को रजिस्ट्रेशन काउंटर पर पर्ची बनवानें से लेकर ओपीडी में डाक्टर को दिखाने तक घंटो लाइनों में इंतजार करना पड़ा।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/people-have-to-wait-for-hours-to-get-treatment--hospitals-are-full/article-95472"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-11/257rtrer3.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। शहर में मौसम बदलने के साथ ही अस्पतालों में मरीजों की संख्या में लगातार इजाफा हो रहा है।  मंगलवार व बुधवार को दो दिन  को संभाग के सबसे बड़े एमबीएस अस्पताल में मौसमी बीमारियों के मरीजों की खासी भीड़ रही। अस्पताल की ओपीडी 3200 के करीब रही। अस्पताल में ज्यादातर मरीज सर्दी खांसी व बुखार के पहुंचे। मरीजों की भीड़ अधिक होने के कारण लोगों को रजिस्ट्रेशन काउंटर पर पर्ची बनवानें से लेकर ओपीडी में डाक्टर को दिखाने तक घंटो लाइनों में इंतजार करना पड़ा सबसे अधिक भीड़ न्यूरोलोजी विभाग के बाहर रही। डॉक्टर को दिखाने के लिए कक्ष के बाहर इतनी लंबी कतार थी की लोगों को घंटो इंतजार करना पड़ा।   </p>
<p><strong>न्यूरोलोजी विभाग की ओपीडी डे होने से रही भीड़</strong><br />एमबीएस अस्पताल में हर मंगलवार को गंभीर बीमारियों के लिए लिए डॉक्टरों की टीम ओपीडी में बैठती है। इसलिए मंगलवार और गुरुवार को ओपीडी में मरीजों की संख्या ज्यादा रहती है। मंगलवार को न्यूरोलोजी विभाग की ओपीडी होने से बड़ी संख्या में मरीज न्यूरो संबंधी परेशानियों को दिखाने अस्पताल पहुंचे। अस्पताल में मरीजों की काभी बडीÞ संख्या में भीड़ रही सबसे ज्यादा मरीज न्यॉरोलोजी संबधित बिमारी के रहें।  मरीजों को कई घंटे इंतजार के बाद जाकर उनका नंबर आया।</p>
<p><strong>पर्ची बनाने में आधा घंटा लग गया</strong><br />तबीयत खराब चल रही है। मंगलवार को अस्पताल में दवा लेने आया था। भीड़ अधिक होने के कारण पहले पर्र्ची बनवानें में भीर चिकित्सक के कक्ष के बाहर और आखिर में दवा लेने के लिए लाईनों में लगकर घंटो इंतजार करना पड़ा।<br /><strong>- विष्णु कुमार, निवासी नयापुरा</strong></p>
<p><strong>मौसम बदलने से सर्दी ने जकड़ा</strong><br />दो दिन से अचानक सर्दी बढ़ने से सर्दी लग गई और खांसी, जुकाम से शरीर में दर्द होने लगा था। अस्पताल में डॉक्टर को दिखाने आई हूं। अस्पताल में भीड़ होने के कारण कतार में आधा घंटे तक खड़ा रहना पड़ा तब नंबर आया। उसके बाद जांच और दवा के लिए भी लाइन में घंटो इंतजार करना पड़ा। <br /><strong>- सपना गुर्जर, बोरखेड़ा निवासी</strong></p>
<p><strong>इनका कहना है</strong><br />मंगलवार और शुक्रवार को सीनियर डाक्टर अस्पताल की ओपीडी में बैठतें है इस कारण इन दो दिनों में मरीजों कि काफी भीड़ रहती है। और दिनों में अस्पताल में मरीजों कि कम भीड़ रहती है।<br /><strong>- डॉ. धर्मराज मीणा, अधीक्षक एमबीएस अस्पताल कोटा</strong></p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 21 Nov 2024 15:37:25 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[kota]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>अस्पतालों में अचानक मरीजों की संख्या में हो रही बढ़ोतरी</title>
                                    <description><![CDATA[डॉक्टर्स की मानें तो अगले दो महीनों में यह संख्या और बढ़ेगी।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/sudden-increase-in-the-number-of-patients-in-hospitals/article-93963"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-10/630400-sizee-(7)7.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। राजधानी जयपुर में मौसम अब रंग बदलने लगा है। दिन में जहां तेज धूप सता रही है वहीं सुबह शाम गुलाबी ठंड ने दस्तक दे दी है। ऐसे में सर्द-गर्म के माहौल के बीच आमजन को बीमारियों ने जकड़ लिया है। साथ ही इन दिनों शहर में त्योहारी माहौल में वाहनों की आवाजाही भी काफी बढ़ गई है और ऐसे में वायु प्रदूषण भी काफी बढ़ गया है।</p>
<p>शाम होते होते शहर में धुंध सी दिखाई देती है जो कि वास्तव में धुंध ना होकर प्रदूषण है। वायु प्रदूषण और मौसम में बदलाव के कारण अस्पतालों में अस्थमा, एलर्जी और सीओपीडी के केस 20 प्रतिशत तक बढ़ गए हैं। न केवल एसएमएस बल्कि गणगौरी, जयपुरिया सहित निजी अस्पतालों में भी तेजी से केस बढ़े हैं। डॉक्टर्स की मानें तो अगले दो महीनों में यह संख्या और बढ़ेगी।</p>
<p>इसका प्रमुख कारण प्रदूषण, मौसम में बदलाव और सावधानी नहीं रखना है। अकेले एसएमएस अस्पताल में ही अस्थमा और एलर्जी की ओपीडी इन दिनों एक हजार मरीज प्रतिदिन को पार गई है। वहीं श्वांस रोग संस्थान में भी इन दिनों ओपीडी बढ़कर 1500 तक पहुंच गई है। साथ ही इनमें से पांच से सात प्रतिशत मरीजों को अस्पतालों में भर्ती भी किया जा रहा है।</p>
<p><strong>ऐसे करें बचाव</strong><br /> </p>
<ul>
<li>अल सुबह और सूरज ढलने के बाद पार्क में वॉक पर या घूमने ना जाए। ज्यादा जरूरी हो तो मास्क लगाकर जाएं।</li>
<li>विशेषकर बुजुर्ग और सांस सबंधी बीमारियों के मरीज ज्यादा सतर्क रहें। </li>
<li>घर से बाहर निकलते समय मास्क का प्रयोग करें या मुंह पर कपड़ा बांधें। </li>
<li>अस्थमा रोगी इनहेलर या दवाइयों का समय से प्रयोग करें।</li>
<li>इन दिनों त्योहार के दौरान साफ सफाई हो रही है ऐसे में धूल मिट्टी से बचें।</li>
<li>डॉक्टर्स की सलाह के मुताबिक रहकर खुद का बचाव किया जा सकता है।</li>
<li>बड़ों के साथ बच्चे भी चपेट मे</li>
</ul>
<p>शहर के जेकेलोन अस्पताल में भी इन दिनों बच्चों में सांस, अस्थमा और एलर्जी के मरीजों की संख्या बढ़ी है। यहां ओपीडी में रोजाना 100 से ज्यादा बच्चे अकेले श्वास संबंधी बीमारियों के आ रहे हैं और इनमें से कई बच्चों को तो भर्ती तक करने की नौबत आ रही है। यही हाल बच्चों के अन्य निजी अस्तपालों और प्राइवेट क्लिनिक्स का भी है। </p>
<p><strong>इस मौसम में बचाव ही सबसे बेहतर इलाज</strong><br />इन दिनों मौसम बदलने और प्रदूषण के कारण अस्थमा, सीओपीडी और आईएलडी के मरीज तेजी से बढ़ रहे हैं। इसलिए अपना बचाव रखें, समय पर इनहेलर और दवाईयां लें। मास्क लगाकर बाहर निकलें और पहनने ओढ़ने का विशेष तौर पर ध्यान रखें। तकलीफ बढ़ने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।</p>
<p><strong>-डॉ. वीरेन्द्र सिंह, वरिष्ठ अस्थमा </strong><br /><strong>एवं श्वांस रोग विशेषज्ञ</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 27 Oct 2024 11:48:45 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>मौसम की मार से बड़े अस्पतालों के ब्लड बैंकों में चल रही रक्त की कमी </title>
                                    <description><![CDATA[एमबीएस अस्पताल स्थित ब्लड बैंक में 564 यूनिट और मेडिकल कॉलेज अस्पताल स्थित ब्लड बैंक में 340 यूनिट रक्त संग्रतिह है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/there-is-a-shortage-of-blood-in-the-blood-banks-of-big-hospitals-due-to-weather/article-90144"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-09/2rtrer-(1)2.png" alt=""></a><br /><p>कोटा । मानसून सीजन के चलते कोटा शहर के दोनों बड़े अस्पतालों के ब्लड बैंकों में रक्त की कमी चल रही है। इस सीजन में डेंगू, मलेरिया, स्क्रबटायफस और अन्य मौसमी बीमारियों के मरीज बढ़ने से अस्पतालों में रक्त की खपत भी बढ़ गई है। दोनों ही अस्पतालों में हर रोजाना 200 से 250 यूनिट रक्त की आवश्यकता पड़ रही है। मेडिकल कॉलेज अस्पताल और एमबीएस अस्पताल स्थिति दोनों ब्लड बैंकों की क्षमता करीब 2500 हजार यूनिट है जिसमें से ब्लड बैंकों के पास अभी करीब 900 यूनिट ब्लड मौजूद है। एमबीएस अस्पताल स्थित ब्लड बैंक में 564 यूनिट और मेडिकल कॉलेज अस्पताल स्थित ब्लड बैंक में 340 यूनिट रक्त संग्रतिह है।</p>
<p><strong> बारिश के कारण हो रही रक्त की कमी</strong><br />संभा के दोनों सबसे बड़े अस्पतालों में मौसमी बीमारियों के मरीजों की संख्या काफी बढ़ गई है। वर्तमान में मेडिसिन विभाग की ओपीडी में हर रोज 300 से 400 मरीज आ रहे हैं। साथ ही दोनों अस्पतालों की ओपीडी हर दिन 4 हजार से ज्यादा हो रही है। ऐसे में मरीजों की संख्या ज्यादा होने से भर्ती भी ज्यादा संख्या में करना पड़ रहा है। मेडिसिन विभाग की ओपीडी में ज्यादा संख्या डेंगू और स्क्रबटायफस के मरीजों की आ रही है। गौरतलब है कि डेंगू के दौरान मरीज को रक्त और एसडीपी की आवश्यकता अधिक होती है। ऐसे में रक्त की खपत बढ़ गई है, वहीं बारिश के मौसम के चलते बड़े रक्तदान शिविर नहीं लग पा रहे हैं। जिससे ब्लड डोनेशन की प्रक्रिया भी धीमी हो गई है। हालांकि अस्पताल प्रशासन की ओर से शिविर लगाकर रक्त की कमी को पूरा किया जा रहा है।</p>
<p><strong>थैलिसीमिया में रोज 20 से 30 यूनिट आवश्यकता </strong><br />अस्पतालों में रक्त की सबसे ज्यादा खपत प्रसव, आॅपरेशन, एक्सीडेंट केस और थैलिसीमिया के मरीजों के लिए होती है। मेडिकल कॉलेज अस्पताल और एमबीएस अस्पताल दोनों के आपातकालीन में हर दिन करीब 30 से 40 छोटी बड़ी सर्जरी होती हैं। ऐसे में यहां भी एक आॅपरेशन के लिए कम से कम एक यूनिट रक्त की आवश्यकता होती है। वहीं दोनों अस्पतालों में करीब 30 से 40 यूनिट रक्त थैलिसीमिया के मरीजों के लिए आवश्यक होता है। </p>
<p><strong>नेगेटिव ब्लड डोनर मिलने पर ही उपलब्ध</strong><br />अस्पतालों ब्लड बैंकों में पॉजिटिव ग्रुप के ब्लड फिर भी आसानी से मिल जा रहे हैं। लेकिन नेगेटिव ब्लड के लिए लोगों को इधर उधर भटकना पड़ रहा है। दरअसल ब्लड बैंक में पॉजिटिव ब्लड का डोनेशन पर्याप्त मात्र में मिल जाता है लेकिन नेगेटिव ब्लड ग्रुप के डोनर उपलब्ध नहीं होने के कारण रिप्लेसमेंट में ही ब्लड दिया जा रहा है। मेडिकल कॉलेज अस्पताल स्थित ब्लड बैंक में ओ नेगेटिव की 2-3 यूनिट और एबी नेगेटिव की 2 यूनिट हैं वहीं एमबीएस ब्लड बैंक में ओ नेगेटिव की 3-4 यूनिट और एबी नेगेटिव की भी इतनी ही यूनिट बची हुई हैं। </p>
<p><strong>लोगों का कहना है</strong><br /> मुझे ब्लड कैंसर है ऐसे में शनिवार को ओ नेगेटिव ब्लड की आवश्यकता थी। जिसके लिए मैं मेडिकल कॉलेज अस्पताल गया तो वहां रिप्लेसमेंट में ही ब्लड मिल रहा था। डोनर नहीं मिलने से एमबीएस स्थित ब्लड बैंक आए तो यहां भी वही स्थिति थी। जिसके बाद जैसे तैसे डोनर मिलने के बाद शाम को 8 बजे करीब डोनेशन होने के बाद ब्लड मिल पाया।<br /><strong>- हीरालाल जांगिड़, खटकड़, बूंदी</strong></p>
<p>हमारे एक रिश्तदार अस्थि रोग विभाग में भर्ती थे। उनकी सर्जरी के लिए 2 यूनिट रक्त की आवश्यकता थी। ऐसे में रक्त के लिए इधर उधर भटकते रहे। जिसके बाद बड़ी मुश्किल से डोनर मिलने पर रक्तदान हुआ और ब्लड मिला।<br /><strong>- परवानी बानो, विज्ञान नगर</strong></p>
<p><strong>इनका कहना है</strong><br />ब्लड बैंक में स्थिति कंट्रोल में नेगेटिव ब्लड के लिए डोनर नहीं होने से जरूर समस्या आ जाती है। एसडीपी भी मरीजों को तुरंत उपलब्ध करा दी जाती है और आरडीपी की भी ब्लड बैंक में 76 यूनिट मौजूद हैं। संग्रहण बढ़ाने के लिए लगातार शिविर लगाने का कार्य कर रहे हैं।<br /><strong>- डॉ. धर्मराज मीणा, अधीक्षक, एमबीएस अस्पताल</strong></p>
<p>मौसम के चलते ब्लड बैंक में रक्त की थोड़ी कमी चल रही है, हालांकि अभी स्थिति को काबू में हैं। रक्त का संग्रहण बढ़ाने के लिए लगातार लोगों को प्रोत्सहित कर रहे हैं और शिविर लगा रहे हैं। साथ ही नेगेटिव ब्लड ग्रुप वाले रक्तदाताओं को लगातार संपर्क में रखा जा रहा है।<br /><strong>- डॉ. अशुतोष शर्मा, अधीक्षक, मेडिकल कॉलेज अस्पताल</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 10 Sep 2024 16:47:37 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[kota]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>Health Infrastructure Mission: 15 हजार करोड़ रुपए खर्च होंगे, प्रदेश के अस्पतालों का होगा कायाकल्प</title>
                                    <description><![CDATA[आगामी दो साल में 150 करोड़ रुपए तो केवल जिला, उपजिला अस्पताल, सीएचसी में रिपेयरिंग-मेंटनेंस पर ही खर्च होंगे। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/health-infrastructure-mission-rs-15-thousand-crores-will-be-spent/article-88956"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-08/1rer-(11)4.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। राजस्थान में मेडिकल कॉलेज से जुड़े अस्पतालों और चिकित्सा विभाग के अस्पतालों में मरीजों-परिजनों की सुविधाओं को बेहतर बनाने के लिए सरकार आगामी तीन साल में 15 हजार करोड़ रुपए खर्च करेगी। इसके लिए सरकार मेडिकल शिक्षा और चिकित्सा विभाग के कोर्डिनेशन से मुख्यमंत्री आयुष्मान आरोग्य इन्फ्रास्ट्रक्चर मिशन चलाएगी। इसके जरिये अस्पतालों में सुपर स्पेशयलिटी यूनिट्स, भवन निर्माण, उनकी रिपेयरिंग-मेंटनेंस, चिकित्सा सेवा उपकरण-मशीनें, अस्पतालों के क्रमोन्नयन को सुविधाएं विकसित करने के काम होंगे। आगामी दो साल में 150 करोड़ रुपए तो केवल जिला, उपजिला अस्पताल, सीएचसी में रिपेयरिंग-मेंटनेंस पर ही खर्च होंगे। </p>
<p><strong>अस्पतालों को क्रमोन्नत कर सुविधाएं देंगे</strong><br />चौहटन, नदबई, बाली, सोजत, लोहावट में जिला अस्पताल होंगे। जयपुर के सांगानेर, झालावाड़ के झालारापाटन के सैटेलाइट अस्पताल जिला अस्पताल बनेंगे। उदयपुर के भिंडर सीएचसी को जिला अस्पताल में बदला जाएगा। चूरू के गढ, जोधपुर के सूरसागर में शहरी पीएचसी को सैटेलाइट अस्पताल में बदला जाएगा। एक दर्जन जिलों में सीएचसी को सैटेलाइट अस्पताल में विकसित करेंगे। इसी तरह 300 करोड़ की लागत से 7 जिलों के जिला अस्पतालों, 10 उप जिला अस्पतालों, 9 सीएचसी के भवन निर्माण होंगे। </p>
<p><strong>एसएमएस में आईपीडी टॉवर में 200 करोड़</strong><br />एसएमएस अस्पताल में आईपीडी आयुष्मान टॉवर में सुविधाओं पर 200 करोड़ खर्च होंगे। राशि से उपकरण, सुविधाएं, वाहन पार्किंग सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी।</p>
<p><strong>RUHS सहित अन्य में सुपर स्पेशयलिटी सेवाओं पर 200 करोड़</strong><br />यहां सुपर स्पेशयलिटी सेवाएं विकसित होंगी। इस पर 200 करोड़ खर्च होंगे। इसके अलावा विभिन्न मेडिकल कॉलेज में भी यह सेवाएं विकसित होंगी।</p>
<p><strong>अस्पतालों में सभी जांचों को ओएसएम मॉडल लागू होगा</strong><br />मेडिकल कॉलेजों और जिला अस्पतालों में अभी भी कई जांचों की सुविधाएं नहीं है। इनके लिए मरीजों को अन्यत्र पैसे खर्च करने पड़ते हैं। यहां प्राइवेट प्लेयर्स के जरिये आउट सोर्स मॉडल यानी ओएसएम पर जांच लैबें चालू की जाएगी।</p>
<p><strong>पांच मेडिकल कॉलेज में स्पाइनल इंजरी सेंटर बनेंगे</strong><br />पांच मेडिकल कॉलेजों बीकानेर, जोधपुर, उदयपुर, भरतपुर, कोटा में स्पाइनल इंजरी सेंटर स्थापित किए जाएंगे। इससे स्पाइनल इंजरी का इलाज वहीं उपलब्ध हो सकेगा। इसपर 10 करोड़ रुपए खर्च होंगे।</p>
<p><strong>अजमेर में सुपर स्पेशयलिटी ब्लॉक बनेगा</strong><br />जयपुर में एसएमएस मेडिकल कॉलेज की तर्ज पर अजमेर के जेएलएन मेडिकल कॉलेज अस्पताल में आधुनिक सुपर स्पेशयलिटी ब्लॉक बनेगा। इससे संभाग के मरीजों को जयपुर रैफर करने की जरुरत नहीं पड़ेगी।</p>
<p><strong>दुर्लभ बीमारी इलाज को जेके लोन में सेंटर</strong><br />बच्चों में कई दुर्लभ बीमारियों के इलाज के लिए अभी मरीजों को दिल्ली, मुंबई जाना पड़ता है। जयपुर के जेके लोन अस्पताल में सेंटर ऑफ एक्सीलेंस फॉर मेडिकल जेनेटिक्स बनेगा। इसके लिए 22 करोड़ खर्च होंगे।</p>
<p><strong>SMS में रूमेटोलॉजी लैब, जोधपुर में सुविधाएं</strong><br />एसएमएस मेडिकल में गठिया सहित जोड़ दर्द यानी रूमेटोलॉजी इलाज जांच को लैब व पैलियेटिव लैब बनेगी। ईएनटी विंग एडवांस होगी। जोधपुर के मथुरादास अस्पताल में मरीजों की बेसिक सुविधाओं को विकसित किया जाएगा।</p>
<p><strong>गंगानगर में कैंसर विंग, कुचामन में कार्डियक यूनिट</strong><br />बीकानेर संभाग में कैंसर की बीमारी बड़ी तदाद में है। श्रीगंगानगर में इलाज को कैंसर विंग खोली जाएगी। बीकानेर में प्रसव वार्ड, अलवर में शिशु विभाग, कुचामन में कार्डियक यूनिट खुलेगी।</p>
<p><strong>29 अस्पतालों में मां के दूध की यूनिट्स बनेगी</strong><br />जेके लोन अस्पताल में नवजात बच्चों को मां का दूध मिल सके, इसके लिए प्रसव के बाद गर्भवती से मां का दूध बैंक संचालित है। ऐसे ही लक्टेशन मैनजमेंट यूनिट्स प्रदेश के 29 अस्पतालों में खोले जाएंगे।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 29 Aug 2024 12:45:08 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
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                <title>बारां शहर में स्कूल, अस्पताल सहित 20 संस्थानों को सीज नोटिस जारी किए</title>
                                    <description><![CDATA[आवासीय और व्यावसायिक संस्थानों में मिली सुरक्षा में खामियांं।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/baran/seal-notices-issued-to-20-institutions-including-schools-and-hospitals-in-baran-city/article-87743"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-08/1rer-(3)1.png" alt=""></a><br /><p>बारां। बारां शहर में संचालित कई आवासीय और वाणिज्यिक संस्थानों ने अग्निशमन सुरक्षा और जीवन रक्षा के लिए उपाय नहीं कर रखे है। ऐसे में नगर परिषद ने 20 स्कूल, होटल, अस्पताल,रिसोर्ट, मैरिज गार्डन को नोटिस जारी किया है। इन स्थानों में नियमानुसार फायर फाइटिंग सिस्टम और फायर एनओसी नहीं ले रखी है। नोटिस की तीन दिन में पालना नहीं करने पर इन संस्थानों को सीज करने की कार्रवाई की जाएगी। नगर परिषद बारां के आयुक्त सौरभ जिन्दल ने बताया कि बारां शहर में संचालित सेन्ट्रल ऐकेडमी, आशीर्वाद मैरिज गार्डन, जानकी फोर्ट मैरिज गार्डन, आरके गार्डन, जोनल हॉस्पिटल, बरदानिया हॉस्पिटल, नटराज गार्डन, कलश वाटिका मैरिज हॉल, अंजुमन इस्लामिया मैरिज हॉल, अंकुर बाल विद्या निकेतन सीनियर सैकंडरी स्कूल, सौरभ सीनियर सैकंडरी स्कूल, औसम स्कूल, मां पदमावती मैरिज हॉल, गोयल हॉस्पिटल,  प्रीत गार्डन, ओझा मेटल, उर्वशी हॉटल, मां शारदा सीनियर सैकण्डरी स्कूल को सीज नोटिस दिए गए है। अग्निशमन केन्द्र प्रभारी अधिकारी उवेश शेख ने बताया कि इन आवासीय व व्यावसायिक संस्थानों के भवन में नियमानुसार फायर फाईटिंग सिस्टम और फायर एनओसी नहीं लेने पर सीज नोटिस जारी किए गए है। नोटिस की 3 दिवस पालना में नहीं करने पर बाद मियाद गुजरने के इन संस्थानों के भवन के उपयोग पर सीज की कार्यवाही की जाएगी । </p>
<p><strong>सीज कार्रवाई के लिए टीम का किया गठन</strong><br />सीज कार्रवाई  प्रभारी अधिशाषी अभियन्ता भुवनेश मीणा, सप्रभारी सहायक अभियंता  राजेन्द्र दाधीच, वरिष्ठ प्रारूपकार सुरेश कुमार चौधरी, अग्निशमन केन्द्र प्रभारी उवेश शेख, फायरमैन दिनेश पोटर, महेन्द्र प्रताप, जितेन्द्र नामा, नौशीन आरा, प्रभा शर्मा आदि नगर परिषद बारां के अधिकारी और कर्मचारियों को नियुक्त कर टीम का गठन किया गया है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>बारां</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 14 Aug 2024 16:50:56 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[kota]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>Hospitals में लागू होगा दिल्ली के एम्स की तर्ज पर Queue Management System</title>
                                    <description><![CDATA[ प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं को नवाचारों एवं आर्टिशिफियल इंटेलीजेंस आधारित तकनीकों से और सुदृढ़ एवं पेशेंट फ्रेंडली बनाया जाएगा। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/queue-management-system-will-be-implemented-in-hospitals-on-the/article-80551"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-06/health-department.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं को नवाचारों एवं आर्टिशिफियल इंटेलीजेंस आधारित तकनीकों से और सुदृढ़ एवं पेशेंट फ्रेंडली बनाया जाएगा। इसके लिए चिकित्सा शिक्षा विभाग के अधिकारियों का एक दल चिकित्सा के क्षेत्र में हो रहे आधुनिकतम कार्यों, नवाचारों एवं तकनीकों का अध्ययन करने हेतु नई दिल्ली स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) जाएगा।</p>
<p>चिकित्सा शिक्षा विभाग की अतिरिक्त मुख्य सचिव शुभ्रा सिंह ने इस संबंध में एम्स के निदेशक को पत्र लिखा है। प्रदेश में विभिन्न नवाचारों के माध्यम से चिकित्सा सेवाओं का सुदृढ़ीकरण किया जा रहा है, ताकि रोगियों को चिकित्सा संस्थानों में गुणवत्तापूर्ण इलाज उपलब्ध हो तथा परिजनों को भी किसी तरह की परेशानी का सामना नहीं करना पड़े। हमारा प्रयास है कि चिकित्सा संस्थानों में पंजीयन, परामर्श, जांच एवं दवा प्राप्त करने के लिए रोगियों एवं परिजनों को कतारों में खड़ा होकर इंतजार नहीं करना पड़े। इसके लिए एआई एवं आईटी आधारित क्यू मैनेजमेंट सिस्टम विकसित किया जाएगा। दिल्ली एम्स आधुनिकतम चिकित्सा सेवाएं उपलब्ध कराने की दिशा में एक अग्रणी चिकित्सा संस्थान है। वहां मरीजों एवं परिजनों की सुविधा के लिए क्यू मैनेजमेंट सिस्टम विकसित किया गया है। प्रदेश के चिकित्सा संस्थानों में भी यह सुविधा विकसित करने की दृष्टि से चिकित्सा शिक्षा विभाग से अधिकारियों का एक दल 6 एवं 7 जून को दो दिवसीय दौरे पर दिल्ली एम्स जाएगा। यह दल एम्स में चिकित्सा सेवाओं को सुदृढ़ करने के लिए किए गए नवाचारों का अध्ययन कर उन्हें प्रदेश के चिकित्सा संस्थानों में लागू करने का एक्शन प्लान तैयार करेगा। </p>
<p>अधिकारियों के दल में अतिरिक्त निदेशक अस्पताल प्रशासन, राजमेस संजू शर्मा, उप निदेशक राजमेस डॉ. वंदना शर्मा, एसएसएमस हॉस्पिटल के उप अधीक्षक एवं सहायक नोडल अधिकारी आईटी डॉ. अनिल दुबे, अतिरिक्त अधीक्षक डॉ. प्रदीप शर्मा एवं एसीपी-आईटी अशोक कुमावत शामिल हैं। यह दल एम्स के क्यू मैनेजमेंट सिस्टम एवं अन्य नवाचारों का अध्ययन कर वस्तुस्थिति से अतिरिक्त मुख्य सचिव एवं चिकित्सा शिक्षा आयुक्त को अवगत कराएगा। इसके बाद एक्शन प्लान तैयार कर प्रदेश के चिकित्सा संस्थानों में क्यू मैनेजमेंट सिस्टम एवं अन्य नवाचारों को लागू किया जाएगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 05 Jun 2024 20:41:11 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
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                <title>राज्य के अस्पतालों में  पर्यावरण जागरूकता पर दिखाई जा रही लघु फिल्म</title>
                                    <description><![CDATA[लघु फिल्म चलाने का उद्देश्य आने वाले लोग पर्यावरण का महत्व को समझे और जागरूक हो सकें एवं पर्यावरण संरक्षण की ओर कदम बढ़ाते हुए स्वस्थ राजस्थान की संकल्पना को साकार करने की पहल कर सकें।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/short-film-on-environmental-awareness-being-shown-in-hospitals-of/article-80520"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-06/yy211rer-(5).png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर पर्यावरण संरक्षण एवं संवर्धन की चेतना को आमजन तक पहुंचाने के लिए प्रदूषण मंडल द्वारा विशेष पहल करते हुए राज्य के लगभग सभी अस्पतालों में लघु फिल्म लगातार दिखाई जा रही है।  </p>
<p>लघु फिल्म चलाने का उद्देश्य आने वाले लोग पर्यावरण का महत्व को समझे और जागरूक हो सकें एवं पर्यावरण संरक्षण की ओर कदम बढ़ाते हुए स्वस्थ राजस्थान की संकल्पना को साकार करने की पहल कर सकें। ऐसे में वीडियो के माध्यम से  पर्यावरण संरक्षण का सन्देश आम आदमी  तक पहुंचाने एवं जागरूक करने का मंडल का यह सार्थक प्रयास यदि कामयाब रहा तो वो दिन दूर नहीं जब राज्य को स्वच्छ पर्यावरण राज्यों की श्रेणी  में शामिल होगा और राज्य का प्रत्येक व्यक्ति पर्यावरण संरक्षण कर अपना दायित्व निर्वाह करेगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/short-film-on-environmental-awareness-being-shown-in-hospitals-of/article-80520</link>
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                <pubDate>Wed, 05 Jun 2024 15:15:00 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>पब्लिक के पैसे से बने ऑक्सीजन प्लांटों में से अधिकतर पड़े बंद </title>
                                    <description><![CDATA[कोटा के बड़े अस्पतालों में लगाए गए आॅक्सीजन प्लांटों में अधिकतर के बंद रहने से आपातकालीन स्थिति में गंभीर परिणाम हो सकते हैं। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/most-of-the-oxygen-plants-built-with-public-money-are-closed/article-79312"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-05/public-k-pese-s-bne-oxygen-planto-me-s-adhiktar-bnd-pde...kota-news-25-05-2024.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। कोटा के बड़े अस्पतालों में कोरोना महामारी के दौरान नए ऑक्सीजन प्लांट लगाए गए थे। लेकिन अस्पतालों के रखरखाव में कमी के चलते उनमें से अधिकतर प्लांट बंद पड़े हैं। कोटा के लगभग सभी बड़े अस्पतालों में एक से दो प्लांट ही चल रहे हैं। बाकी प्लांट या तो खराब हैं या अस्पतालों के पास उन्हें चलाने की अनुमति नहीं है। ऐसे में आपातकालीन स्थिति में आॅक्सीजन की जरूरत पड़ने पर मरीजों को गंभीर हालातों से गुजरना पड़ सकता है। </p>
<p><strong>एनएमसीएच में दो एसएसच में एक प्लांट चालू</strong><br />कोरोना महामारी के दौरान सबसे ज्यादा कोरोना से पीड़ित मरीजों को नवीन चिकित्सालय और सुपर स्पेशियलिस्ट हॉस्पिटल में भर्ती किया गया था। जिसके चलते इन दोनों अस्पतालों में आॅक्सीजन प्लांटों का निर्माण किया गया था। उस दौरान एनएमसीएच में तीन आॅक्सीजन प्लांट और सुपर स्पेशियलिस्ट हॉस्पिटल में चार आॅक्सीजन प्लांट का निर्माण किया गया था। जहां एनएमसीएच के मौजूदा चार आॅक्सीजन प्लांटों में से दो और सुपर स्पेशियलिस्ट के छ: प्लांटों में से केवल एक प्लांट संचालित हैं। एनएमसीएच प्रशासन के अनुसार मौजूदा चार प्लांटों में से दो की अनुमति प्रशासन के पास है, वहीं बाकि दोनों प्लांट को चलाने की अनुमति के लिए पत्र लिखा हुआ है। वहीं एसएसएच के छ: में से बचे हुए पांच प्लांटों में से एक प्लांट खराब है वहीं बाकि को आवश्यकता पड़ने पर ही चलाने की योजना है।</p>
<p><strong>आपातकालीन स्थिति में हालात हो सकते हैं गंभीर</strong><br />कोटा के बड़े अस्पतालों में लगाए गए आॅक्सीजन प्लांटों में अधिकतर के बंद रहने से आपातकालीन स्थिति में गंभीर परिणाम हो सकते हैं। क्योंकि कोरोना महामारी के दौरान भी आॅक्सीजन की कमी के चलते सैंकड़ों लोग गंभीर स्थिति में पहुंच गए थे और कई लोगों को जान तक गंवानी पड़ गई थी। जिसे देखते हुए ही सरकार ओर भामाशाहों की मदद से इन प्लांटों का निर्माण किया गया था। लेकिन देखरेख की कमी और अस्पताल प्रशासनों की लापरवाही के चलते कई प्लांट या तो चल नहीं रहे या उन्हें चलाने की अनुमति नहीं है।</p>
<p><strong>एमबीएस व जेके लोन में दो-दो प्लांट संचालित</strong><br />संभाग के सबसे बड़े अस्पताल में आॅक्सीजन के सात प्लांट मौजूद हैं जिनमें से केवल दो प्लांट ही चालू अवस्था में हैं। वहीं एक प्लांट का कंप्रेसर खराब होने के चलते उसे बंद किया हुआ है। वहीं अन्य दो प्लांटों भी तकनीकी खामियों के चलते बंद पड़े हुए हैं जिनमें प्रत्येक की क्षमता 150-150 सिलेंडर की है। वहीं 150-150 सिलेंडर की क्षमता के दो प्लांटों को चलाने की अनुमति नहीं है। इसी तरह जेके लोन हॉस्पिटल में भी चार प्लांट मौजूद हैं जिनमें से केवल दो प्लांट ही संचालित हैं। बाकि दोनों प्लांटों को प्रशासन की ओर से बंद किया हुआ है। </p>
<p><strong>इनका कहना है</strong><br />जितनी आवश्यकता है उसके अनुसार प्लांट चलाए हुए हैं, आवश्यकता पड़ने पर अन्य प्लांटों को भी चलाया जाएगा। बाकि दो प्लांट में से एक यूआईटी द्वारा और एक भामाशाह द्वारा दिया गया है। जिसके लिए कागजी कारवाई बाकि उसके लिए पत्र लिखा हुआ है।<br /><strong>- आरपी मीणा, अधीक्षक, नवीन चिकित्सालय, </strong></p>
<p>अस्पताल के अभी दो प्लांट चलाए हुए हैं साथ ही हमेशा तीन प्लांट रनिंग में रहते हैं, एक प्लांट का कंप्रेसर खराब है और बाकि में कुछ तकनीकी खामियां हैं जिन्हें आचार संहिता हटते ही ठीक करा लिया जाएगा। वहीं दो प्लांटों का अभी संचालन के लिए कागजी कारवाई बाकि है।<br /><strong>- धर्मराज मीणा, अधीक्षक, एमबीएस अस्पताल, कोटा</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 25 May 2024 17:36:39 +0530</pubDate>
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