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                <title>सहारनपुर विवाद: मायावती ने की निष्पक्ष कार्रवाई की मांग, बोली- हालात काबू में लाने के लिए प्रशासन को उठाने चाहिए प्रभावी कदम </title>
                                    <description><![CDATA[बसपा प्रमुख मायावती ने सहारनपुर के लालवाला गांव में मूर्ति विवाद को लेकर हुई हिंसक झड़प पर गहरी चिंता जताई । दलितों के घायल होने पर रोष व्यक्त करते हुए प्रशासन से निष्पक्ष कार्रवाई और शांति बहाली की मांग। दोनों पक्षों से कानूनी रास्ता अपनाने और आपसी सौहार्द बनाए रखने की अपील ।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/saharanpur-controversy-mayawati-demands-fair-action-said-administration-should-take/article-153424"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-10/mayawati.jpg" alt=""></a><br /><p>लखनऊ। बहुजन समाज पार्टी (बसपा) अध्यक्ष मायावती ने सहारनपुर जिले के लालवाला गांव में हुई हिंसा पर चिंता जताते हुये निष्पक्ष कार्रवाई की मांग की है। मायावती ने साेमवार को एक्स पर लिखा, “सहारनपुर के एक गांव में एक भूमि पर मूर्ति रखने को लेकर दो पक्षों के बीच विवाद हुआ, जो बाद में संघर्ष में बदल गया।” उन्होंने आरोप लगाया कि इस घटना में दलित समाज के कई लोग घायल हुए हैं। बसपा अध्यक्ष ने पुलिस और प्रशासन से मामले में तत्काल तथा निष्पक्ष कार्रवाई करने की मांग करते हुये कहा, “प्रशासन को हालात पर पूरी तरह नियंत्रण रखते हुए शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए प्रभावी कदम उठाने चाहिए।”</p>
<p>बसपा सुप्रीमो ने दोनों पक्षों से भी संयम बरतने और आपसी सौहार्द बनाए रखने की अपील की। उन्होंने कहा कि मामले को ताकत के बजाय कानूनी तरीके से सुलझाया जाना चाहिए, ताकि क्षेत्र में तनाव न बढ़े और शांति कायम रह सके। गौरतलब है कि सहारनपुर के देवबंद क्षेत्र के लालवाला गांव में 9-10 मई को लगभग दो बीघा जमीन पर कब्जे और कथित तौर पर महाराणा प्रताप की मूर्ति लगाने को लेकर दो समुदायों के बीच हिंसक झड़प हुई। इस दौरान पत्थरबाजी और लाठीचार्ज में तीन महिलाओं समेत आठ लोग घायल हो गए। पुलिस ने घटना के बाद गांव में सुरक्षा बलों को तैनात कर निगरानी बढ़ा दी है। प्रशासनिक अधिकारी स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/bharat/saharanpur-controversy-mayawati-demands-fair-action-said-administration-should-take/article-153424</link>
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                <pubDate>Mon, 11 May 2026 15:29:43 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>जग जाहिर है आरएसएस-भाजपा की दलित विरोधी सोच, जिग्नेश ने कहा- पिछले कुछ वर्षों में दिल्ली की सड़कों पर संविधान की कॉपी को जलाई गई </title>
                                    <description><![CDATA[ कांग्रेस ने कहा है पिछले 10 साल से भारतीय जनता पार्टी-राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (भाजपा आरएसएस) के लोगों ने कमजोर लोगों पर अत्याचार किया है, ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/it-is-obvious-that-jignesh-the-anti-dalit-thinking-of-the/article-116682"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-06/news-(1)16.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। कांग्रेस ने कहा है पिछले 10 साल से भारतीय जनता पार्टी-राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (भाजपा आरएसएस) के लोगों ने कमजोर लोगों पर अत्याचार किया है, इसलिए संविधान मानने वाले लोग जानते हैं कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह और उनके संगठन बाबा साहेब अंबेडकर के संविधान में यक़ीन नहीं करते हैं।</p>
<p>गुजरात विधानसभा में कांग्रेस के विधायक जिग्नेश मेवानी ने शनिवार को पार्टी के नए मुख्यालय इंदिरा भवन में संवाददाता सम्मेलन में कहा कि इसी सोच के कारण पिछले कुछ वर्षों में दिल्ली की सड़कों पर संविधान की कॉपी को जलाई गई। रोहित वेमुला को आत्महत्या के लिए मजबूर किया किया गया, हाथरस की बेटी का शव उसके परिवार को अंतिम दर्शन के लिए नसीब नहीं हुआ, गुजरात के ऊना में दलित युवकों को बेरहमी से पीटा गया, भीमा कोरेगांव के मामले में लोगों को वर्षों तक जेल में डाला गया और शाह ने सदन में घृणा भाव से कहा कि अंबेडकर- अंबेडकर करना आजकल फैशन बन गया है।</p>
<p>उन्होंने कहा कि इसी सोच का परिणाम है कि बिहार में 11 साल की दलित बेटी के साथ दुष्कर्म कर उसके शरीर पर गहरे घाव के निशान देखे गए। वह जीवन-मरण के बीच जूझती है, लेकिन वह 5 घंटे अस्पताल में बेड के लिए एंबुलेंस में इंतजार करती है। गुजरात के अमरेली में 19 साल के दलित युवक की सरेआम हत्या कर दी जाती है और पाटन में दलित बुजुर्ग को जिंदा जला दिया जाता है। ऊना की घटना को छोड़कर पिछले 20 साल में गुजरात के किसी भी मुख्यमंत्री, गृह मंत्री, बड़े नेता को दलित, आदिवासी पीड़ितों के साथ खड़े नहीं देखा गया। यहां तक कि वे संवेदना का ट्वीट करने को भी तैयार नहीं हैं।</p>
<p>कांग्रेस नेता ने प्रधानमंत्री को याद दिलाते हुए कहा कि “जब कई साल पहले ऊना में घटना हुई थी तो मोदी ने कहा था- 'मारना है तो मुझे मारो, मेरे दलित भाइयों को मत मारो' आज 8 साल हो गए हैं, लेकिन देश के अलग-अलग कोने में दलितों, आदिवासियों के साथ हिंसा और अन्याय हो रहा है। ऐसे में मोदी से सवाल है कि आखिर देश में यह अत्याचार रुक क्यों नहीं रहा है।”</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 07 Jun 2025 16:37:13 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>तमिलनाडु: दलित और कुलीन ईसाइयों में बढ़ता टकराव</title>
                                    <description><![CDATA[कई ईसाई कब्रगाहों में दलितों को दफनाने नहीं दिया जाता। अगर कहीं दफना भी दिया जाता है तो मृत व्यक्ति की कब्र पर उसकी नाम की पट्टी नहीं लगाने नहीं दी जाती।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/opinion/tamil-nadu-increasing-conflict-between-dalits-and-elite-christians/article-68840"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-02/photo-(4).png" alt=""></a><br /><p>यह आम धारणा है कि जातिवाद केवल हिन्दु धर्म में ही है और किसी धर्म में नहीं। विश्व में सबसे बड़े धार्मिक समुदाय ईसाई धर्म में तो एकदम भी नहीं। लेकिन सच्चाई यही है कि हमारे देश के ईसाई समुदाय में हिन्दू धर्म की तरह वर्ण  व्यवस्था में यह मौजूद है। यह अलग बात है कि इस किस्म  का जाति भेदभाव किसी राज्य में कम है तो किसी राज्य में यह कुछ अधिक है। लेकिन अगर तमिलनाडु और इसके सटते केंद्र शासित प्रदेश पुदुचेरी में    यह बहुत अधिक है। इस राज्य में ईसाई समुदाय में दलित ईसाइयों का बाहुल्य है तथा कुलीन अथवा स्वर्ण ईसाई कम संख्या में  है। लेकिन  चर्चों के प्रबंधन में दलित ईसाइयों का स्थान नगण्य है। राज्य में कार्यरत 18 बिशपों में केवल एक ही दलित समुदाय से आता है। कई ईसाई कब्रगाहों में दलितों को दफनाने नहीं दिया जाता। अगर कहीं दफना भी दिया जाता है तो मृत व्यक्ति की कब्र पर उसकी नाम की पट्टी नहीं लगाने नहीं दी जाती। चूंकि  कुछ चर्चों में उनके प्रवेश पर अघोषित प्रतिबंध है जिसके चलते इस समुदाय ने अपने चर्च बना लिए हैं।<br /><br />राज्य में दलित ईसाई समुदाय ने अपनी संस्थाएं बना  रखी हैं, जो इस भेदभाव को दूर करने के लिए संघर्ष कर रही हैं। लेकिन फिलहाल उन्हें इस काम में कोई सफलता मिलती नजर नहीं आती है। देश में ईसाई समुदाय के चर्च तथा अन्य संस्थाओं के शीर्ष स्थानों पर बैठे लोगों ने इस भेदभाव को पूरी तरह अवगत कराया। लेकिन इस दिशा में कोई ठोस कदम उठाते नजर नहीं आते। अगर कहीं ऐसे कदम उठाए भी गए हो तो इसका कोई प्रभाव नजर नहीं आ रहा। 2016 में हुई कैथोलिक बिशप कांफ्रेंस में इस मुद्दे पर लम्बा विचार-विमर्श हुआ था। इस बैठक में इस सच को मान  लिया गया कि चर्च में मध्य क्रम की संस्थाओं शायद ही कोई इक्का-दुक्का दलित हो, लेकन शीर्ष पर तो एक भी नहीं। लगभग एक दशक पूर्व तमिलनाडु राज्य  अल्पसंख्यक आयोग के तत्कालीन अध्यक्ष एम. प्रकाश ने सार्वजनिक रूप से कहा था कि राज्य के ईसाइयों में जातिवादी मतभेद उतना ही है जितना हिन्दू समुदाय में है। लेकिन उन्होंने साथ में यह भी कहा था कि राज्य सरकार इस मामले में कुछ नहीं कर सकती। यह ईसाई समुदाय की आन्तरिक समस्या है तथा इसका हल समुदाय के नेतृत्व को ही निकलना पड़ेगा। तमिलनाडु और पुद्दुचेरी में ईसाई जनसंख्या लगभग 45 लाख है। इनमें दलित ईसाई लगभग 80 प्रतिशत दलित समुदाय से आते हैं। इसी प्रकार मद्रास हाई की मदुरै बेंच में इस भेदभाव को लेकर एक याचिका भी दाखिल की गई थी। कोर्ट ने राज्य सरकार और तमिलनाडु बिशप कौसिल को एक नोटिस भी जारी किया था, पर  इस मामले में आगे क्या हुआ, इसकी कोई खबर सुनने में नहीं आई।<br /><br />2019 में  जब पॉप जॉन पॉल  द्वितीय भारत की यात्रा पर आए थे तो तमिलनाडु और पुदुचेरी के दलित ईसाई नेताओं, जो क्रिश्चियन लिबरेशन मूवमेंट से जुड़े हैं, उनसे मिलने का प्रयास किया था। लेकिन कुछ कारणों के चलते  नहीं उनकी मुलाकात नहीं हो पाई। राज्य के एक संगठन तमिलनाडु अछूत उन्मूलन फ्रंट ने भी समुदाय में दलित  ईसाइयों के साथ हो रहे भेदभाव पर विस्तृत रिपोर्ट राज्य सरकार को सौंपी थी।<br />दलित ईसाई लेखक, पत्रकार और  साहित्यकार अपनी  लेखनी के जरिए अनवरत रूप समुदाय के साथ हो रहे भेदभाव को उजागर करते रहते हैं। कई वर्ष पहले एक दलित ईसाई और जाने-माने लेखक ने करुकू शीर्षक  पुस्तक, जो उनकी आत्मकथा है। इस भेदभाव का मार्मिक उल्लेख किया है। कुछ समय पूर्व इसी समुदाय के फादर मार्क स्टीफेन ने अपनी चर्चित पुस्तक में भेदभाव के बारे में विस्तार से लिखा है। एक पुस्तक जो हाल ही  में प्रकाशित हुई है, इन दिनो बहुत चर्चा में है इसकी लेखिका निवेदिता  लुईस ने क्रिस्तुनुवती जाति, ईसाई धर्म में जातिवाद पर विस्तार से लिखा है।<br /><br />तमिलनाडु और देश के अन्य भागों में रह रहे ईसाइयों में जातिवाद को लेकर  जो भी पुस्तकें लिखी गई हैं, उनका कुल मिलाकर सार यही है कि जब ईस्ट इंडिया कंपनी के शासनकाल में ईसाई पादरी धर्म प्रचार के लिए भारत आए, तो उन्होंने तमिलनाडु में जिन लोगों को पहले ईसाई धर्म अपनाने के लिए प्रेरित किया, उनमें अधिकतर दलित थे। वे या तो लालच में ईसाई बने या फिर किसी तरह के दवाब में। वे  ईसाई तो बन गए, लेकिन हिन्दू जातिवाद के ताने- बाने से बहार नहीं आए। मिशनरियों का लक्ष्य उनको  ईसाई बनाना था और उन्होंने इन नए ईसाई वर्ग को हिन्दू धर्मं के जातिवादी से निकालने के लिए कोई विशेष ध्यान नहीं दिया गया।<br /><br /> -लोकपाल सेठी<br />(ये लेखक के अपने विचार हैं)</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>ओपिनियन</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 01 Feb 2024 10:42:45 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>तमिलनाडु में दो दलित युवकों को निर्वस्त्र कर पेशाब करने का आरोप, छह लोग गिरफ्तार</title>
                                    <description><![CDATA[अस्पृश्यता और जातिगत भेदभाव के खिलाफ काम करने वाले एक फोरम के सदस्य ने घटना की निंदा करते हुए तमिलनाडु सरकार से ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए कठोर कदम उठाने की मांग की है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/six-people-arrested-for-stripping-and-urinating-on-two-dalit/article-61139"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-11/arrest-.jpg" alt=""></a><br /><p>चेन्नई। तमिलनाडु के तिरूनेलवेली जिले के एक स्कूल में हाल ही में कथित रूप से दलित भाई-बहनों पर हमला करने के बाद ऐसी ही अन्य घटना बुधवार को सामने आई, जिसमें नशे में धुत्त कुछ लोगों ने दो दलित युवकों के साथ मारपीट की और उन्हें निर्वस्त्र कर दिया तथा उनके साथ जातिसूचक व्यवहार करते हुए उन पर पेशाब कर दिया।</p>
<p>पुलिस सूत्रों ने बताया कि मनोज कुमार (21) और  उसका दोस्त मरियप्पन (19) थमीराबारानी नदी में स्नान करने के बाद जब घर लौट  रहे थे, तभी नदी के पास कथित रूप से शराब पी रहे आरोपियों ने उन्हें रोका  और उनसे उनका घर और उनकी जाति के बारे में पूछा। जब आरोपियों को पता चला कि वे एक दलित बस्ती से हैं, तो नशे में धुत  लोगों ने उनसे मारपीट की और उनके कपड़े उतार दिए और उन पर पेशाब कर दिया।  पीड़तिों ने कहा कि उन्हें उन बदमाशों ने देर रात तक बंधक बनाए रखा और उन  पर लाठी और छड़ों से हमला किया। उन्होंने उनसे घटनास्थल से भगाने से पहले  5,000 रुपये और दो मोबाइल फोन भी छिन लिया। दोनों पीड़ति पास में एक  रिश्तेदार के घर गए, अपने माता-पिता से संपर्क किया और अपनी आपबीती सुनाई,  जिसके बाद उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया।</p>
<p>पीड़ितों का बयान दर्ज करने के बाद दक्षिणी तिरुनेलवेली जिले की थचनल्लूर पुलिस ने पीड़ितों को तिरुनेलवेली मेडिकल कॉलेज अस्पताल में भर्ती कराया और दो दलित युवकों पर हमला करने, उन्हें निर्वस्त्र करने और पेशाब करने के आरोप में छह लोगों को गिरफ्तार किया। आरोपियों की पहचान पलयमकोट्टई निवासी पोन्नुमणि (25), नल्लामुथु (21), आयराम (19), रमार (22), शिवा (22) और लक्ष्मणन (22) के रूप में की गई है। सभी छह आरोपियों को बाद में एक अदालत में पेश किया गया और न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया।</p>
<p>अस्पृश्यता और जातिगत भेदभाव के खिलाफ काम करने वाले एक फोरम के सदस्य ने घटना की निंदा करते हुए तमिलनाडु सरकार से ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए कठोर कदम उठाने की मांग की है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 02 Nov 2023 15:01:05 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>दलों के दलित विरोधी, हथकंडों से बचे बहुजन समाज : मायावती</title>
                                    <description><![CDATA[पार्टी संस्थापक कांशीराम की जयंती के मौके पर मायावती ने कहा कि कांशीराम ने ‘चमचा युग’ के विश्वासघाती तत्वों के सम्बंध में जो बातें कही थीं, उन बातों से भी सबक सीख कर आगे बढ़ने का प्रयास लगातार जारी रखना है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/other-parties-save-bsp-bahujan-samaj-mayawati-saved-from-anti-dalit/article-39902"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-03/mayawati.jpg" alt=""></a><br /><p>लखनऊ। समाजवादी पार्टी (सपा) और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) पर अंदरूनी मिलीभगत और दलित, मुस्लिम और पिछड़ों की उपेक्षा का आरोप लगाते हुये बहुजन समाज पार्टी (बसपा) सुप्रीमो मायावती ने कहा कि आने वाले चुनावों में समाज के इन वर्गो को वोट बांटने वाले स्वार्थी लोगों और फर्जी संगठनों के हथकंडों से खुद को बचाये रखने की जरूरत है। पार्टी संस्थापक कांशीराम की जयंती के मौके पर मायावती ने कहा कि कांशीराम ने ‘चमचा युग’ के विश्वासघाती तत्वों के सम्बंध में जो बातें कही थीं, उन बातों से भी सबक सीख कर आगे बढ़ने का प्रयास लगातार जारी रखना है और याद रखना है कि भाजपा, सपा व कांग्रेस घोर जातिवादी व बहुजन विरोधी पार्टियां हैं, कोई कम तो कोई ज्यादा, तभी आगे बढ़ने का रास्ता प्रशस्त होता रहेगा।</p>
<p>बसपा के प्रदेश दफ्तर में कांशीराम को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित करने के बाद उन्होने कहा कि देश पहले की तरह ही आज भी जातिवादी सरकार व उन जैसे तत्वों से जकड़ा हुआ है तथा इसके अभिशाप से छुटकारा तभी मिल सकता है जब इसके सताये हुए लोग अपने वोट के जबरदस्त संवैधानिक हक के जरिए राज्य व देश की सत्ता पर काबिज होंगे। यूपी की जनता ने भाजपा, कांग्रेस व सपा के घोर जातिवादी व आरक्षण विरोधी रवैये के साथ-साथ एससी, एसटी, ओबीसी, मुस्लिम व धार्मिक अल्पसंख्यकों को उनके कानूनी हक व इंसाफ से वंचित रखने के खेल तथा इन पार्टियों की कथनी और करनी में अन्तर को भी देख लिया है। इससे साबित है कि ये सभी पार्टियाँ एक ही थैली के चट्ट-बट्टे हैं और इनसे एससी, एसटी, ओबीसी व मुस्लिम समाज को अपने वास्तविक भले की उम्मीद करके रेगिस्तान में पानी तलाशने जैसी ही गलती कतई नहीं करनी चाहिए।</p>
<p>उन्होने कहा कि इस विशाल राज्य में सरकार की गलत नीतियों एवं द्वेष व पक्षपात पूर्ण कार्यकलापों के कारण वैसे तो सर्वसमाज के लोग ही बढ़ती महंगाई, अपार गरीबी, बेरोजगारी व जानमाल की असुरक्षा के कारण दुःखी व त्रस्त हैं, खासकर दलित एवं पिछड़े वर्ग के लोग अपने हक व इंसाफ को लेकर इस सरकार में कुछ ज्यादा ही पीड़ित व परेशान हैं, जो किसी से भी छिपा हुआ नहीं है। इन वर्गों के आरक्षण को निष्क्रिय व निष्प्रभावी बना देने से करोड़ों युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है। इसीलिए कदम-कदम पर सजगता तथा यहाँ होने वाले स्थानीय निकाय चुनाव में खासकर पूरी सावधानी बहुत जरूरी है।</p>
<p>बसपा अध्यक्ष ने कहा कि केन्द्र और यूपी सरकार की गरीब विरोधी व धन्नासेठों की अंध समर्थक नीतियों का भुक्तभोगी गरीब वर्ग व पिछड़ा बहुजन समाज रहा है, लेकिन अब मिडिल क्लास व अपर मिडिल क्लास वर्ग भी इनकी अदूरदर्शी आर्थिक नीतियों व गलत फैसलों से प्रभावित हो रहा है, जिससे देश का माहौल हताशा में बदल रहा है। दिल्ली में संसद के समक्ष सरकार द्वारा उनसे किये गये वादों को पूरा नहीं करने के विरोध में प्रदर्शन कर रहे किसानों का समर्थन करते हुए मायावती ने केन्द्र सरकार से किसानों से किए गए अपने वादों को पूरा करके वादाखिलाफी के आरोप से बचने की माँग की। उन्होने कहा किसरकार किसानों की आय दोगुना करने का अपना जरूरी वादा अभी तक नहीं निभा पाई है लेकिन सम्मान निधि के नाम पर बहुत मामूली सी रकम देने का ढिंढोरा पीटती है हालाँकि इससे कहीं बेहतर होता कि सरकार देश भर के छोटे व मझोले किसानों के कर्ज बारी-बारी से हर साल माफ कर देती तो यह बड़े अच्छे राहत की बात होती।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 15 Mar 2023 13:08:10 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
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                <title>दलित छात्र ने परीक्षा में बस ये गलती की, टीचर ने इतना पीटा कि हो गई मौत</title>
                                    <description><![CDATA[इससे गुस्साये अछल्दा गांव के लोगों ने छात्र का शव स्कूल के सामने रखकर नारेबाजी की। इस दौरान भीम आर्मी के कार्यकर्ताओं के भी पहुंचने के बाद गांव में उपद्रव एवं आगजनी की स्थिति उत्पन्न हो गयी।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/dalit-student-just-made-this-mistake-in-the-exam--the-teacher-beat-him-so-much-that-he-died/article-24545"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-09/pic.jpg" alt=""></a><br /><p>लखनऊ/औरैया। उत्तर प्रदेश के औरैया जिले में शिक्षक की जबरदस्त पिटाई से दलित समुदाय के एक छात्र की सोमवार को मौत के मामले में हुए उपद्रव और आगजनी का मामला अब राजनीतिक रंग भी लेने लगा है। मुख्य विपक्षी दल समाजवादी पार्टी ने 15 साल के दलित छात्र की मौत को जातिगत भेदभाव का परिणाम बताते हुए इसके लिये योगी सरकार को जिम्मेदार ठहराया है। </p>
<p>गौरतलब है कि औरैया के अछल्दा थाना क्षेत्र में आदर्श इंटर कॉलेज के 10वीं कक्षा के छात्र निखित कुमार पुत्र राजू दोहरे को सामाजिक विज्ञान के शिक्षक अश्विनी सिंह ने 7 सितंबर को परीक्षा में एक शब्द गलत लिखने पर जमकर पीट दिया। इससे घायल हुए छात्र को सैफई मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराना पड़ा। लंबे इलाज के बाद सोमवार सुबह उसकी मौत हो गयी।</p>
<p>इससे गुस्साये अछल्दा गांव के लोगों ने छात्र का शव स्कूल के सामने रखकर नारेबाजी की। इस दौरान भीम आर्मी के कार्यकर्ताओं के भी पहुंचने के बाद गांव में उपद्रव एवं आगजनी की स्थिति उत्पन्न हो गयी। ये लोग अब तक आरोपी शिक्षक की गिरफ्तारी नहीं होने के कारण नाराज हैं और शव का अंतिम संस्कार नहीं करने दे रहे हैं। गुस्सायी भीड़ ने कल देर रात पुलिस के वाहनों को आग भी लगा दी। इलाके में रात भर पुलिस की गश्ती के बाद मंगलवार को सुबह जिला प्रशासन ने एहतियातन अछल्दा में बाजार बंद रखने का आदेश दिया है।</p>
<p>इस बीच सपा ने इस मुद्दे को उठाते हुए इस घटना को जातिगत भेदभाव का नतीजा बताया। सपा ने इस मामले में मीडिया रिपोर्टों के हवाले से ट्वीट कर कहा, ''औरैया में एक दलित छात्र को योगी जी के स्वजातीय व भाजपा संरक्षित शिक्षक ने जातीय भेदभाव की भावना के तहत पीट पीट कर मार डाला। 18 दिन हो गए भाजपाइयों ने शिक्षक को फरार करवा दिया। इस मामले में शिक्षक की तत्काल गिरफ्तारी हो और मृतक छात्र के परिजनों को तत्काल सरकार 50 लाख का मुआवजा दे।"</p>
<p>सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने भी पार्टी की मांग से सहमति जताते हुए छात्र की मौत पर दुख व्यक्त किया है।अखिलेश ने ट्वीट कर कहा, ''औरैया में एक छात्र की शिक्षक द्वारा पीटे जाने से हुई मृत्यु का समाचार दुखद ही नहीं, बेहद संवेदनशील है। सरकार यथोचित कार्रवाई करे और पीड़ति परिवार को मुआवजा भी दे। शिक्षा जीवन देती है, लेती नहीं।"</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 27 Sep 2022 12:24:35 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>राजस्थान में दलित जातियों और महिलाओं पर हो रहे अत्याचार को रोकने के लिए राज्यपाल से गुहार</title>
                                    <description><![CDATA[राजस्थान में दलित जातियों और महिलाओं पर हो रहे अत्याचार के विरोध में बहुजन समाज पार्टी के प्रतिनिधिमंडल ने राज्यपाल कलराज मिश्र को ज्ञापन देकर दखल देने की मांग की है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%9C%E0%A4%B8%E0%A5%8D%E0%A4%A5%E0%A4%BE%E0%A4%A8-%E0%A4%AE%E0%A5%87%E0%A4%82-%E0%A4%A6%E0%A4%B2%E0%A4%BF%E0%A4%A4-%E0%A4%9C%E0%A4%BE%E0%A4%A4%E0%A4%BF%E0%A4%AF%E0%A5%8B%E0%A4%82-%E0%A4%94%E0%A4%B0-%E0%A4%AE%E0%A4%B9%E0%A4%BF%E0%A4%B2%E0%A4%BE%E0%A4%93%E0%A4%82-%E0%A4%AA%E0%A4%B0-%E0%A4%B9%E0%A5%8B-%E0%A4%B0%E0%A4%B9%E0%A5%87-%E0%A4%85%E0%A4%A4%E0%A5%8D%E0%A4%AF%E0%A4%BE%E0%A4%9A%E0%A4%BE%E0%A4%B0-%E0%A4%95%E0%A5%8B-%E0%A4%B0%E0%A5%8B%E0%A4%95%E0%A4%A8%E0%A5%87-%E0%A4%95%E0%A5%87-%E0%A4%B2%E0%A4%BF%E0%A4%8F-%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%9C%E0%A5%8D%E0%A4%AF%E0%A4%AA%E0%A4%BE%E0%A4%B2-%E0%A4%B8%E0%A5%87-%E0%A4%97%E0%A5%81%E0%A4%B9%E0%A4%BE%E0%A4%B0/article-1833"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2021-10/whatsapp-image-2021-10-22-at-15.16.24.jpeg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। राजस्थान में दलित जातियों और महिलाओं पर हो रहे अत्याचार के विरोध में बहुजन समाज पार्टी के प्रतिनिधिमंडल ने राज्यपाल कलराज मिश्र को ज्ञापन देकर दखल देने की मांग की है। बसपा के प्रदेश अध्यक्ष भगवान सिंह बाबा ने बताया कि प्रदेश में जब से कांग्रेस की सरकार बनी है, तब से दलितों और महिलाओं पर अत्याचार की घटनाओं में तेजी से इजाफा हुआ है। आलम  है कि भरतपुर, अलवर, हनुमानगढ़ सहित प्रदेश के तकरीबन हर जिले में दलित उत्पीड़न की घटनाएं आम हो गई है। बहुजन समाज पार्टी के 7 सदस्य  शिष्टमंडल में प्रदेश अध्यक्ष भगवान सिंह बाबा, प्रदेश प्रभारी शेरसिंह तेंगुरिया,  सीताराम चेला, अमर सिंह बंशीवाल, प्रदेश महासचिव  प्रेम बारूपाल, महासचिव भोला सिंह बाजीगर पूर्व विधायक पूरनमल सैनी मौजूद थे।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 22 Oct 2021 15:38:54 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>पीलीबंगा में दलित युवक की हत्या मामला : प्रियंका और राहुल गांधी को दलित व वंचितों की सुध लेने राजस्थान आना चाहिए : पूनिया</title>
                                    <description><![CDATA[कानून-व्यवस्था नियंत्रण से बाहर: राठौड़]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/61627fec6e49c/article-1559"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2021-10/satish-puniya-rajndra-rathor.jpg" alt=""></a><br /><p><strong> जयपुर</strong>। प्रदेश के पीलीबंगा में दलित युवक की हत्या के मामले में भाजपा प्रदेश अध्यक्ष डॉ. सतीश पूनिया ने बयान जारी कर कहा कि देश और दुनियां में राजस्थान की छवि एक शांतिप्रिय प्रदेश की थी, लेकिन अशोक गहलोत सरकार के शासन में सारे मापदंड तोड़ दिए गए हैं। राजस्थान सर्वाधिक अपराधग्रस्त राज्यों में शुमार हो गया। यहां बहन-बेटियां, दलित-आदिवासी कोई भी सुरक्षित नहीं है। पूनिया ने कहा कि कांग्रेस सरकार के शासनकाल में हत्या, दुष्कर्म, डकैती, लूट आदि के 6 लाख से अधिक मुकदमें दर्ज हुए है। अफसोस है कि दलितों और वंचितों के हितैषी होने का दावा करने वाली गहलोत सरकार के राज में बीते वर्ष में 21 प्रतिशत से अधिक दलित अपराधों में बढ़ोतरी हुई है। अब नया मामला पीलीबंगा के प्रेमपुरा का है, जहां एक दलित युवक की पीट-पीटकर हत्या कर दी गई। राजस्थान में दलित अत्याचार का यह पहला मामला नहीं है। इससे पहले झालावाड़, अलवर सहित कई जिलों में भी दलित युवकों की हत्याएं हो चुकी हैं। इससे मुझे लगता है कि प्रियंका गांधी और राहुल गांधी के लिए सबक है, जो दूसरे प्रदेशों में राजनीतिक पर्यटन करते हैं, उन्हें राजस्थान के पीड़ित दलित व वंचितों की सुध लेने आना चाहिए।</p>
<p><strong><br /> कानून-व्यवस्था नियंत्रण से बाहर: राठौड़</strong><br /> उपनेता प्रतिपक्ष राजेन्द्र राठौड़ ने पीलीबंगा में दलित युवक की हत्या पर दोषियों को तुरंत गिरफ्तार करने की मांग की है। सोशल मीडिया के जरिए राठौड़ ने कहा कि इस घटना से गहलोत सरकार की लचर कानून-व्यवस्था का एक और निर्मम चेहरा सामने आया है। दलित युवक की हत्या से स्पष्ट है कि राजस्थान में कानून-व्यवस्था की स्थिति दिन प्रतिदिन भयावह और सरकार के नियंत्रण से बाहर हो रही है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 10 Oct 2021 11:51:26 +0530</pubDate>
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