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                <title>असर खबर का... नहरों में फिर बहा पानी, सूखती फसलों को मिली संजीवनी</title>
                                    <description><![CDATA[बारिश की कमी से सूख रही धान की फसल को राहत, किसानों की बढ़ी उम्मीदें।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/impact-of-the-report----water-flows-in-canals-again--withering-crops-get-a-lifeline/article-165818"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-09/111200-x-600-px)-(4)35.png" alt=""></a><br /><p>कोटा।  बारिश की कमी और लगातार बढ़ते तापमान के कारण खेतों में नमी तेजी से कम होने लगी है। पर्याप्त बारिश नहीं होने से धान सहित अन्य खरीफ फसलों पर संकट के बादल मंडराने लगे थे। कई खेतों में फसलों की बढ़वार थम गई और पौधे मुरझाने लगे थे। ऐसे समय में सीएडी ने कोटा बैराज की दोनों नहरों में एक बार फिर जलप्रवाह शुरू कर किसानों को बड़ी राहत दी है। कोटा बैराज से वर्तमान में दायीं मुख्य नहर में 525 क्यूसेक तथा बायीं मुख्य नहर में 500 क्यूसेक पानी छोड़ा जा रहा है। नहरों में पानी पहुंचने के साथ ही सिंचाई क्षेत्र के किसानों में राहत की उम्मीद जगी है। खेतों में नमी बनाए रखने के लिए यह जलप्रवाह बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।</p>
<p><strong>बारिश की कमी से बढ़ी चिंता</strong><br />इस मानसून सीजन में कई क्षेत्रों में अपेक्षित बारिश नहीं होने से किसानों की चिंता बढ़ गई है। धान जैसी फसलों को लगातार पर्याप्त नमी की जरूरत होती है। बारिश का अंतराल बढ़ने और तापमान में इजाफा होने से खेतों की ऊपरी सतह तेजी से सूखने लगी। इससे फसलों की बढ़वार प्रभावित होने लगी और कई जगह पौधों में मुरझाने के लक्षण दिखाई देने लगे। किसानों के लिए सबसे बड़ी चिंता यह थी कि यदि खेतों में समय पर पानी नहीं पहुंचा तो फसल की उत्पादकता पर इसका सीधा असर पड़ सकता है। ऐसे में नहरों में दोबारा पानी छोड़े जाने से सिंचाई व्यवस्था को सहारा मिला है।</p>
<p><strong>कुछ दिन पहले बंद कर दिया था जलप्रवाह</strong><br />चंबल नदी पर बने बांधों में जलस्तर कम होने का हवाला देते हुए गत दिनों कोटा बैराज की दोनों नहरों में जलप्रवाह बंद कर दिया गया था। इसके बाद नहर कमांड क्षेत्र के किसानों की चिंता बढ़ गई थी। बारिश नहीं होने और नहरों में पानी नहीं आने से खेतों में नमी बनाए रखना मुश्किल हो रहा था। अब परिस्थितियों को देखते हुए दोनों नहरों में फिर से पानी छोड़ा गया है। फिलहाल जवाहर सागर बांध से बिजली उत्पादन के बाद पानी छोड़ा जा रहा है। इस पानी का उपयोग आगे सिंचाई व्यवस्था में किया जा रहा है। नहरों में जलप्रवाह शुरू होने से उन किसानों को विशेष राहत मिली है, जिनकी फसलें बारिश पर निर्भर थीं और लंबे समय से खेतों में पर्याप्त नमी का इंतजार कर रही थीं।</p>
<p><strong>नवज्योति ने प्रमुखता से उठाया था मामला</strong><br />बारिश की कमी से फसलों को हो रहे नुकसान के सम्बंध में दैनिक नवज्योति में 13 सितंबर को प्रमुखता से समाचार प्रकाशित किया गया था। इसमें बताया था कि खेतों में धान की फसल खड़ी है, लेकिन किसानों की नजर आसमान पर टिकी हुई है। जहां कुछ समय पहले तक पानी की पर्याप्त उपलब्धता के भरोसे खेतों में हरियाली नजर आ रही थी, वहीं अब सिंचाई के संकट ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। नहरों में जलप्रवाह बंद होने से सिंचाई के लिए पानी का संकट उत्पन्न हो गया है। ऐसे में धान उत्पादक किसानों को फसल बचाने के लिए नलकूप और डीजल इंजन का सहारा लेना पड़ रहा है। महंगे डीजल से पानी खींचकर खेतों तक पहुंचाने में सिंचाई की लागत लगातार बढ़ रही है। समाचार प्रकाशित होने के बाद सीएडी अधिकारियों ने जयपुर के अधिकारियों को इससे अवगत करवाया था। वहां से अनुमति मिलने के बाद दोनों नहरों में पानी छोड़ दिया गया।</p>
<p>बारिश की कमी को देखते हुए कोटा बैराज की दोनों नहरों में जलप्रवाह फिर से शुरू कर दिया है। वर्तमान में दायीं मुख्य नहर में 525 क्यूसेक तथा बायीं मुख्य नहर में 500 क्यूसेक पानी छोड़ा जा रहा है।<br /><strong>- शोभित गर्ग, प्रभारी, कोटा बैराज नियंत्रण कक्ष</strong></p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 17 Sep 2026 14:06:50 +0530</pubDate>
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                <title>कोटा दक्षिण वार्ड 70- नालियों का ढकान व चैंबर बने परेशानी, बारिश का पानी भरा रहता है रोड पर </title>
                                    <description><![CDATA[वार्ड में कुछ खाली प्लॉट हैं जिन्हें वार्डवासियों ने कचरा स्थल बना रखा है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/kota-south-ward-70---drain-covers-and-chambers-pose-a-problem--with-rainwater-accumulating-on-the-road/article-128954"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-10/copy-of-news23.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। शहर के नगर निगम दक्षिण के वार्ड 70 में पार्षद द्वारा बोर्ड की बैठकों में वार्ड में विकास करने के लिए समय-समय पर आवाज मुखर की गई। वार्ड में पिछले दिनों पार्षद द्वारा सीसी नालियों का निर्माण करवाना, रोड बनवाना सहित अन्य विकास के कार्य करवाए गए। वार्डवासियों ने बताया कि पिछले दिनों सीसी रोड निर्माण के दौरान वार्ड की नालियों पर जो ढकान किया गया है, वह बारिश के समय हमारे लिए मुसीबत बन गया है क्योंकि इनमें कहीं से नालियों में पानी जाने की व्यवस्था नहीं की गई। जिससे बारिश का पानी रोड पर ही बहता है व घरों के सामने ही इकट्ठा हो जाता है, जिससे दिक्कत आती है। वार्ड के पार्कों में बच्चों के खेलने के लगे झूले-चकरी व ओपन जिम के आइटम भी टूटे हुए हैं, जिससे बच्चों को मायूस होकर मजबूरन अन्य पार्कों में जाना पड़ता है।</p>
<p><strong>ऊंचे नीचे  चैंबर </strong><br />पिछले दिनों जब वार्ड में सीवरेज लाइन डाली गई उस दौरान ठेकेदार ने रोड की खुदाई करके सीवरेज लाइन तो डाल दी, उसके बाद सीवरेज के चैंबर रोड से कहीं नीचे तो कहीं ऊँचे हो गए, जिससे राहगीरों को अब परेशानी का सामना करना पड़ता है।</p>
<p><strong>खाली प्लॉट बने परेशानी</strong><br />वार्ड में आबादी क्षेत्र के बीच में कुछ खाली प्लॉट पड़े हुए हैं, जिनमें वार्डवासियों द्वारा कचरा डाला जाता है, जो आसपास रहने वालों के लिए अब परेशानी का कारण बने हुए हैं। वार्डवासी दिलीप व नितेश ने बताया कि खाली प्लॉट में कचरा डालने से दिनभर इनमें पशु मुँह मारते हैं व कई बार इनमें से जीव-जंतु भी निकलते हैं, जिससे डर का माहौल बना रहता है।</p>
<p><strong>ढकान बना मुसीबत</strong><br />वार्ड में पिछले दिनों किया गया नालियों का ढकान अब वार्डवासियों के लिए मुसीबत का कारण बना हुआ है। वार्डवासी दिनेश व अभय कुमार ने बताया कि बीती रात को हुई बारिश का पानी नालियों पर ढकान होने के कारण अब नालियों में नहीं जा रहा है। पानी सड़क पर ही बहता है, जब बाइक सवार निकलता है तो आसपास खड़े रहने वालों को परेशानी का सामना करना पड़ता है।</p>
<p><strong>वार्ड का एरिया</strong><br />महावीर नगर तृतीय सेक्टर 01 व 04, पराजित सेक्टर 10 व 11 का क्षेत्र। </p>
<p>नालियों का ढकान किया गया जब नाली के गंदे पानी को पास के ही नाले में मिलाया गया, पर अधिकतर बार नाला ओवरफ्लो होने से नाले का पानी ऊपर आ जाता है, जिससे परेशानी आती है।<br /><strong>- भानू कुमार</strong></p>
<p>गली की रोड लाइट बंद होने से अंधेरा रहता है, जिससे दिक्कत आती है। रात को कुत्ते राहगीरों व बाइक सवारों के पीछे दौड़ते हैं, जिससे हादसा होने का अंदेशा बना रहता है।      <br /><strong>-   लोकेश</strong></p>
<p>पिछले दिनों नालियों का ढकान किया गया, उसमें कभी भी खुले चैंबर नहीं बनाए गए, जिससे गत रात्रि को हुई बारिश का पानी ऊपर ही बहता है, जो अब परेशानी का सबब बनी हुई है।             <br /><strong>- सोनू</strong></p>
<p>वार्ड के पराजित सेक्टर 10 व 11 के क्षेत्र में पानी नालियों में जाने के लिए व्यवस्था कर दी जाएगी। रोड को बनाने के लिए हमने फाइल केडीए में लगा रखी है। सीवरेज के चैंबर भी ठीक कर दिए जाएंगे।   <br /><strong>  - रीता सलूजा, पार्षद 70 </strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 07 Oct 2025 15:41:50 +0530</pubDate>
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                <title>मां आसावरी के दरबार में सालभर बहता है झरना</title>
                                    <description><![CDATA[मीणा राजाओं के साथ सात जातियों की है कुलदेवी : जयपुर में है यह तीर्थ स्थान]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/%E0%A4%AE%E0%A4%BE%E0%A4%82-%E0%A4%86%E0%A4%B8%E0%A4%BE%E0%A4%B5%E0%A4%B0%E0%A5%80-%E0%A4%95%E0%A5%87-%E0%A4%A6%E0%A4%B0%E0%A4%AC%E0%A4%BE%E0%A4%B0-%E0%A4%AE%E0%A5%87%E0%A4%82-%E0%A4%B8%E0%A4%BE%E0%A4%B2%E0%A4%AD%E0%A4%B0-%E0%A4%AC%E0%A4%B9%E0%A4%A4%E0%A4%BE-%E0%A4%B9%E0%A5%88-%E0%A4%9D%E0%A4%B0%E0%A4%A8%E0%A4%BE/article-1561"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2021-10/3.jpg" alt=""></a><br /><p><strong> जयपुर</strong>। आगरा रोड से सटी अरावली पर्वत श्रृंखला में विराजमान हैं मां आसावरी का प्राचीन मंदिर। कभी मीणा राजाओं की आराध्य देवी रहीं माता वर्तमान में सात जातियों की कुलदेवी के रूप में पूजी जाती है। इस मंदिर की सबसे बड़ी विशेषता है यहां अनवरत बहने वाला झरना। कई सालों से लगातार बहुत कम बारिश होने से जयपुर और इसके आसपास के सभी जलाशय सूखे पड़े हैं, लेकिन माता आसावरी के दरबार में आज भी सालभर अनवरत रूप से झरना बहता है। मंदिर में मां आसावरी की आदमकद मूर्ति के साथ ब्रह्मणी, शक्ति और शिवजी की प्रतिमाएं हैं। इनके ठीक सामने मंदिर में प्राचीन धूणा भी है। मंदिर गर्भगृह को चारों तरफ से दीवार से कवर किया हुआ है। मंदिर से सटकर दक्षिण दिशा में आकर्षक गार्डन भी है। <br /> <br /> <span style="background-color:#ffff99;"><span style="color:#ff0000;"><strong>जयपुर में है यह तीर्थ स्थान</strong></span></span><br /> यह मंदिर जयपुर में खो नागोरियान में स्थित है। यहां पहुंचने के लिए इस गांव के बीच से मंदिर तक सड़क जाती है। मंदिर के पुजारी रामनारायण मीणा बताते हैं कि इस मंदिर की स्थापना राजा चन्द्रसेन ने संवत 221 में की थी। इसके बाद अंतिम मीणा राजा आलम सिंह ने भी यहां किला और बावड़ियां बनवाई। पहले यह स्थान प्राकृतिक झरना बहने के कारण खो गंग के नाम से जाना जाता था, जिसे बाद में खो नागोरियान कहा जाने लगा। यह खो गंग आज भी अनवरत बह रही है। खो गंग यहां की पहाड़ियों पर स्थित प्रचीन काला गोरा भैरव मंदिर के पास से एक चट्टान मेंं निकलती है। इसके बाद यह एक कुई में समा जाती है। सर्दी हो या गर्मी यह झरना हमेशा बहता रहता है। इस कुई में मोटर लगा रखी है। इसी का पानी मंदिर में पीने के काम आता है। चट्टान से जलधारा फूटने के बाद यह गुप्त गंगा का रूप लेकर कुई में समा जाती है। यह कुई हमेशा जल से भरी रहती है। माता के मंदिर में दर्शन करने आने वाले श्रद्धालु इस झरने में स्नान करने को पवित्र मानते हैं, लेकिन झरने तक दुर्गम रास्ता होने के कारण बहुत कम लोग ही इस तक पहुंच पाते हैं। भीषण गर्मी से जब बड़े-बड़े जलाशय सूख जाते हैं, तब भी यहां का प्राकृतिक झरना बहता रहता है। वैसे तो मंदिर में मीणा समाज के कुलदेवी के रूप में जात जडूले लगते हैं, लेकिन यहां सभी जाति समाजों के लोग दर्शनार्थ आते हैं। मंदिर में रोज सैकड़ों भक्तजन आते हैं पर नवरात्र में काफी भीड़ देखने को मिलती है। यहां सवामणी और गोठ के आयोजन खूब होते हैं। माता को लक्ष्मी का रूप मानते हैं। इसलिए प्रसाद भी सात्विक ही चढ़ता है। यह स्थान चारों ओर जंगल से घिरा है, जिसमें बघेरों के अलावा नीलगाय, सियार, लोमड़ी, भेड़िए जैसे वन्य जीव भी स्वछंद विचरण करते हैं, लेकिन आज तक किसी भक्त को कोई हानि नहीं पहुंचाई।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 10 Oct 2021 12:01:57 +0530</pubDate>
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