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                <title>sewage - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <title>एमबीएस अस्पताल में जलभराव बना खतरा, मरीजों को मुख्य रास्ते पर  फैले गंदे पानी से होकर गुजरना पड़ रहा</title>
                                    <description><![CDATA[पुराने निकासी मार्गों की मरम्मत नहीं होने से बारिश या सीवरेज का पानी जमा हो जाता है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/waterlogging-at-mbs-hospital-poses-a-threat--patients-have-to-wade-through-dirty-water-on-the-main-pathway/article-142047"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-02/(1200-x-600-px)-(1)10.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। हाडौती के सबसे बडे एमबीएस परिसर में सीवरेज का गंदा पानी जमा होने से मरीजों और तीमारदारों को काफी परेशानी हो रही है। जानकारी के अनुसार, यह समस्या खराब जल निकासी व्यवस्था, अवरुद्ध नालियों और सीवरेज चैम्बर के ओवर फ्लो के कारण उत्पन्न हुई है। दूषित सीवरेज के पानी में हानिकारक कीटाणु,बैक्टीरिया और औषधीय अवशेष मौजूद होते हैं, जो संक्रमण फैलने का बड़ा कारण बन सकते हैं। अस्पताल में भर्ती कमजोर रोगियों के लिए यह स्थिति और भी खतरनाक मानी जा रही है। लोगों और मरीजों के परिजनों का कहना है कि ओपीडी के बाहर और वार्डों के रास्तों में पानी भरे रहने से स्ट्रेचर और व्हीलचेयर ले जाना मुश्किल हो गया है। मुख्य रास्ते पर ही फैले गंदे पानी से होकर गुजरना पड़ता है, जिससे अस्पताल की स्वच्छता व्यवस्था पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।</p>
<p><strong>50 से अधिक बैड संख्या वाले अस्पतालों में प्लांट की जरूरत</strong><br />स्वास्थ्य नियमों के तहत अस्पतालों में सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट होना अनिवार्य है, ताकि गंदे पानी को शुद्ध किए बिना खुले में न छोड़ा जाए। फिलहाल अस्पताल प्रशासन की ओर से इस समस्या के स्थायी समाधान को लेकर कोई स्पष्ट बयान सामने नहीं आया है। हालांकि मरीजों और नागरिकों ने मांग की है कि जल्द से जल्द जल निकासी की व्यवस्था दुरुस्त की जाए और सीवरेज के पानी से होने वाले संक्रमण के खतरे को रोका जाए।वर्तमान में कोटा एमबीबीएस के नई बिल्डिंग में संचालित लीफटो की क्या स्थिति है अस्पतालों में एसटीपी की अनिवार्यता मुख्य रूप से जल (प्रदूषण निवारण एवं नियंत्रण) अधिनियम, 1974 और पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986 के अंतर्गत आती है। उढउइ (केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के दिशानिदेर्शों के अनुसार, सभी अस्पतालों को उनके अपशिष्ट जल (सीवरेज) को बाहर छोड़ने से पहले उपचारित करना अनिवार्य है। इसमें बायो-मेडिकल वेस्ट मैनेजमेंट रूल्स का पालन करना भी शामिल है।</p>
<p><strong>बेसमेन्ट में सीवरेज का पानी</strong><br />अभी हाल ही में बने आईपीडी भवन के बेसमेंट पार्किंग के लिफ्ट एरिया में भरा हुआ पानी सडा़ंध मार रहा था। सवाल यह है कि हाल ही में तैयार हुए भवनों में यह हाल है तो जब यह इमारतें पुरानी होगीं तब क्या होगा।जानकारों के अनुसार, एमबीएस में सीवरेज से जुड़ा बुनियादी ढांचा पुराना हो चुका है। ऐसे में परिसर में नये भवन भी बन गये है जिससे इन की क्षमता कम  पड़ती जा रही है । वहीं पुराने निकासी मार्गों की पूरी मरम्मत नहीं की जाती, जिससे बारिश या सीवरेज का पानी जमा हो जाता है।</p>
<p><strong>अटी पडी गंदगी</strong><br />करीब महीने भर से जयपुर फुट और आक्सीजन स्टोर रूम वाली सड़क पर भी सीवरेज का पाईप  टूटा हुआ है जिससे यहां सड़क पर  गंदगी फैल गयी है। बडी बात यह है कि यह रास्ता रेजीडेन्ट हॉस्टल के साथ एएनएम जीएनएम सेन्टर के साथ मॉर्चरी की और जाने वाले एक मात्र रास्ता है ।</p>
<p>ओपीडी और नयी इमरजेन्सी के बाहर बरसात का पानी भरा हुआ है। यह मार्ग जेके लोन व एमबीएस के बीच मुख्य सडक पर होने से समस्या का कारण बना हुआ है। यहां एक और लेबोरेट?री के कारण दिनभर लोगों की भीड़ रहती है ऐसे में वहीं दूसरी और गाड़ियां खड़ी रहने के कारण रास्ता संकरा रहता है उपर से यहां जमा पानी के कारण पैदल चलना भी दुश्वार हो गया है।<br /><strong>- दुष्यंत कुमार सुमन, तीमारदार</strong></p>
<p>आज ही हमने जहां पर भी पानी और गंदगी की जानकारी मिली वहां पर स्टाफ को काम पर लगाया है। बडी़ समस्या पुरानी लाईनोें से है एसटीपी प्लांट लगने तक व्यवस्था निगम को कहकर करवा रहे है।<br /><strong>- डॉ. कर्नेश गोयल, उपअध्यक्ष एमबीएस हॉस्पिटल कोटा</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 05 Feb 2026 15:34:10 +0530</pubDate>
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                <title>कोटा उत्तर वार्ड 45 -गंदगी, जलभराव और आधारभूत सुविधाओं की कमी से जूझ रहे हरिजन बस्ती के निवासी </title>
                                    <description><![CDATA[वार्ड में सामुदायिक भवन का अभाव, पार्क केवल औपचारिकता के लिए।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/kota-north-ward-45---residents-of-harijan-basti-struggling-with-filth--waterlogging--and-lack-of-basic-amenities/article-130492"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-10/y-of-news-(1)18.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। नगर निगम क्षेत्र के वार्ड नंबर 45 की स्थिति शहर की मूलभूत सुविधाओं की हकीकत बयां करती है। वार्ड के कई इलाकों में नागरिकों को अब भी गंदगी, जलभराव और आधारभूत सुविधाओं की कमी से दो-चार होना पड़ रहा है। प्रशासनिक दावे और योजनाएं कागजों पर तो नजर आती हैं, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और कहानी बयां करती है। वार्ड क्षेत्र में बने पार्क में झूले व अन्य सुविधाएं जोड़ी जाएं ताकि बच्चों और बुजुर्गों दोनों के लिए यह क्षेत्र उपयोगी बन सके। शहर की तरक्की का आईना उसके वार्ड होते हैं, लेकिन वार्ड 45 की यह तस्वीर सवाल खड़े करती है कि क्या विकास केवल शहरी केंद्रों तक सीमित रह गया है?</p>
<p><strong>वार्ड का एरिया</strong><br />आर.ई.टाईप-3 रेलवे कॉलोनी, पुरानी रेल्वे कॉलोनी वर्कशॉप, जे.पी. कॉलोनी, उड़िया बस्ती, हरिजन बस्ती, रेलवे प्लेट फार्म नं. 4 के सामने का क्षेत्र शामिल है।</p>
<p><strong>हरिजन बस्ती में गंदे पानी का साम्राज्य</strong><br />वार्ड में आने वाली हरिजन बस्ती में खाली पड़ी जगहों पर सीवरेज का गंदा पानी लंबे समय से जमा है। यह पानी सड़कों पर फैलकर बदबू और मच्छरों का अड्डा बन चुका है। बरसात के दिनों में स्थिति और भयावह हो जाती है। कई बार शिकायतें करने के बावजूद न तो सीवरेज की सफाई होती है और न ही निकासी की स्थायी व्यवस्था की गई है।<br /><strong>- जितेन्द्र पटोना</strong></p>
<p><strong>जेपी कॉलोनी में टूटी नालियों के पानी की समस्या</strong><br />वार्ड के दूसरे हिस्से में आने वाली जेपी कॉलोनी भी वर्षों पुरानी नालियों के जर्जर होने से जूझ रही है। जगह-जगह नालियां टूट चुकी हैं, जिनसे गंदा पानी सड़कों पर बहता रहता है। इससे स्थानीय लोगों को बदबू और बीमारी का खतरा बना रहता है। इसके अलावा कॉलोनी में जलापूर्ति भी बड़ी समस्या है। यहां पानी बेहद कम दबाव से आता है, जिससे कई घरों तक पर्याप्त पानी नहीं पहुंच पाता।<br /><strong>- बाबू लाल</strong></p>
<p><strong>सामुदायिक भवन का अभाव</strong><br />वार्ड में नगर निगम द्वारा पार्क तो बना दिया गया, लेकिन उसमें झूले और अन्य बच्चों के खेल उपकरण नहीं लगाए गए। इससे पार्क केवल औपचारिकता बनकर रह गया है। वहीं वार्ड में सामुदायिक भवन का भी अभाव है, जिससे सामाजिक कार्यक्रमों, बैठकों और आयोजनों के लिए लोगों को निजी स्थलों का सहारा लेना पड़ता है।<br /><strong>- लक्ष्मण</strong></p>
<p><strong>स्थानीयों की उम्मीदें प्रशासन से जुड़ी</strong><br />वार्डवासियों ने प्रशासन से मांग की है कि जल्द से जल्द सीवरेज व्यवस्था सुधारी जाए, टूटी नालियों का नवीनीकरण किया जाए और जलापूर्ति को सुचारू बनाया जाए। ताकि वार्डवासियों को मूलभूत सुविधाओं का लाभ मिल सके।<br /><strong>- सुरेश कुमार</strong></p>
<p><strong>इनका कहना है</strong><br />वार्ड क्षेत्र में हरिजन बस्ती के निवासियों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध करवाने के उद्देश्य से उन्हें रहने के लिए नई जगह आवंटित की गई है, लेकिन अधिकांश परिवार वहां जाने के लिए तैयार नहीं हैं। ऐसे में स्थिति हमारे नियंत्रण से बाहर है। वहीं, जेपी कॉलोनी में नियमित रूप से सुबह-शाम सफाई व्यवस्था सुचारू रूप से की जाती है। पानी की बात करें तो सुबह के समय अधिकांश लोग मोटर लगाकर पानी भरते हैं, जिससे निचले क्षेत्रों में जल आपूर्ति धीमी हो जाती है। इस दिशा में नागरिकों को भी थोड़ी जागरूकता और सहयोग दिखाने की आवश्यकता है।<br /><strong>- हिना बानो, पार्षद</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 25 Oct 2025 15:00:07 +0530</pubDate>
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