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                <title>'नो-वर्क' पॉलिसी - बरसात सिर पर लेकिन अभी तक नहीं हो पाई नालों की सफाई</title>
                                    <description><![CDATA[छावनी क्षेत्र के 4 वार्डो पर मंडराया बाढ़ का खतरा।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/-no-work--policy--monsoon-is-imminent--yet-drain-cleaning-remains-undone/article-158667"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-07/021.gif" alt=""></a><br /><p>कोटा। नगर निगम की घोर लापरवाही और अधिकारियों की उदासीनता के चलते इस मानूसन में छावनी क्षेत्र के कई वार्डों में बाढ़ के हालात बनने तय हैं। छावनी क्षेत्र के मुख्य नालों की सफ़ाई पिछले दो से तीन साल से नहीं हुई है, जिससे वर्तमान में ये नाले पूरी तरह कचरे और सीवरेज की गंदगी से पट चुके हैं। यदि तेज़ बारिश होती है, तो आठ से ज़्यादा वार्डों का निकासी पानी रुक जाएगा और पूरा इलाका जलमग्न हो जाएगा। पूर्व पार्षदों और जनप्रतिनिधियों का आरोप है कि निगम की स्वास्थ्य शाखा केवल कागज़ी खानापूर्ति कर रही है। धरातल पर न तो लेबर लगाई गई है और न ही मशीनों से सफ़ाई सुनिश्चित की गई है। हद तो यह है कि अधिकारी अब जनता की समस्याओं को सुनने के बजाय 'पार्षद पद पर नहीं होने' का बहाना बनाकर ज़िम्मेदारियों से पल्ला झाड़ रहे हैं।</p>
<p><strong>बस्तियों में घुसेगा सीवरेज, व बाढ़ का पानी</strong><br />इस मौखे के मुहाने से नहर के दुसरी और तक बनें नाले में ही सिवरेज लाईन डाल दी गई है। जिससे नाले की गहराई और कम हाे गई है। सफ़ाई न होने से नाला पूरी तरह चोक है। यदि मूसलाधार बारिश होती है,तो यह ढाई फीट का मोखा इतने बड़े क्षेत्र का पानी निकालने में पूरी तरह अक्षम साबित होगा। पानी सीधे छावनी, रामचंद्रपुरा,गोपेश्वर महादेव मंदिर, राजपूत कॉलोनी,शमशान घाट से क्षमा कॉलाेनी छावनी सब्जी मण्डी और पुलिसचौकी के आसपास की घनी बस्तियों में घुस जाएगा, जिससे लाखों की संपत्ति का नुकसान और महामारी फैलने का अंदेशा है। स्थानीय निवासी दिनेश कुमार कहते है कि निगम की यह 'नो-वर्क' पॉलिसी जनता के लिए जानलेवा साबित हो सकती है।</p>
<p><strong>3 साल से अटके टेंडर, 2.5 फीट के मोखे पर टिका 5 वार्डों का भविष्य</strong><br />एक छोटे मोखे पर भारी दबाव: छावनी क्षेत्र के वार्ड नंबर 15, 42 रामचंद्रपुरा, 43 समा कॉलोनी और 44 सहित लगभग 5 वार्डों के बरसाती पानी की निकासी नहर के नीचे बने मात्र ढाई (2.5) फीट के एक आर्च नुमा मोखे से होती है।</p>
<p><strong>2 निकास लेकिन वॉटर लेवल गलत</strong><br />स्थानीय निवासी हरदयाल नागर बताते है कि यहां 60 फीट की दुरी पर ही नहर के नीचे से 2 निकास थे। वर्तमान चालू मोखे के पैरेलल बने हुये दूसरे चैनल का वॉटर लेवल ऊपर कर दिया गया है। जिससे पानी टकराकर वापस रामचंद्रपुरा और छावनी की बस्तियों में बैक मारता है। सबसे निचला इलाका होने के कारण वार्ड 42 रामचंद्रपुरा में नालियां ओवरफ्लो हो रही हैं और गलियों में रिटर्न पानी भर रहा है।</p>
<p><strong>तीन साल से सफ़ाई ठप</strong><br />वार्ड 42 के निवर्तमान पार्षद ऐश्वर्य श्रृंगी ने बताया कि मेरे वार्ड में नहर के सहारे बने नाले की लम्बाई 600 मीटर के लगाभग है। जिसमें आकर पुरे क्षेत्र का पानी आकर गिरता है। इसी नाले के बीच में पानी के निकास के लिये बने मौखे स्थित है। पिछले साल भी हमनें 30 अप्रेल को तीनों वार्डो 15, 43 व 49 के पार्षदाें ने सामुहिक लेटर नगर निगम को लिखा था। बावजूद इसके 2-3 सालों से कोई टेंडर नहीं हुआ है। पिछले साल पार्षदों ने अपने स्तर पर जमादारों से हाथ की लेबर लगवाकर जैसे-तैसे कचरा साफ करवाया था।</p>
<p><strong>अधिकारियों का रवैया उदासीन</strong><br />स्वास्थ्य निरीक्षक  को लगातार फोटो और शिकायतें भेजने के बाद भी कोई कार्रवाई नहीं हो रही है। वार्ड 43 के पार्षद इसरार अहमद ने निगम अधिकारीयों पर उदासीनता का आरोप लगाते हुये बताया कि अधिकारी फोन उठाना बंद कर चुके हैं। और शिकायत करने पर तंज कसते हैं कि अब आप पार्षद ही नहीं रहे हो। यहाँ तक कि पेड़ छंटाई जैसे आपातकालीन कामों में भी कांग्रेस-बीजेपी की राजनीति देखकर काम किया जा रहा है।</p>
<p>दो साल पहले भी सफाई न होने के कारण यह मौखे चौक हो गये थे जिसके कारण लोगों के घरों मेें 5 फीट तक पानी भर गया था। यह आम लोगों के जान माल के नुकसान का कारण बनें उससे पहले ही प्रशासन को समय रहते सफाई करवानी चाहिये।<br /><strong>-बृजेश महावर स्थानीय निवासी</strong></p>
<p>नाले की सफाई नहीं होने के कारण थोड़ी सी बारिश में पानी ओवरफ्लो होकर गलियों में भर जाता है। सामान्य दिनाें में भी निचली बस्तियों में नालिया उफान पर रहती है। यहां स्थित देवनारायण मंदिर में तक नालियों का गंदा पानी भर जाता है। निगम प्रशासन का कोई ध्यान नहीं है।<br /><strong>-नवीश गोचर स्थानीय निवासी रामचन्द्रपुरा</strong></p>
<p><strong>मानव श्रम के लिये टेण्डर पर होगी सफाई</strong><br />निगम अधिकारियों ने बताया कि ऐसी जगहों पर मशीनों का पहुंचना संभव नहीं हाेता है। ऐसे मे अलग से मानव श्रम लगवाना पड़ता है। इसके लिये टैण्ड़र की प्रक्रिया पुरी की जा चुकी है। मानसून पूर्व जल्द ही नालों सफाई करवाने की रूपरेखा बना ली गई है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 02 Jul 2026 15:10:01 +0530</pubDate>
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                <title>असर खबर का :  दो घन्टे में ही हुआ चकाचक, लोग बोले अब भी तो हुई सफाई</title>
                                    <description><![CDATA[पांच दिन के 'नर्क' के बाद मरीजों को मिली सीवरेज की गंदगी से मुक्ति।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/impact-of-news---area-cleaned-up-in-just-two-hours--people-remark--%22so--cleaning--was--possible-after-all-%22/article-157240"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-06/111200-x-600-px)32.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। संभाग के सबसे बड़े एमबीएस अस्पताल परिसर में आखिरकार पांच दिनों बाद प्रशासनिक सुस्ती टूटी। दरअसल यहां स्थित सेन्ट्रल लैब के बाहर सीवरेज चैम्बरर्स ओवर फ्लो होकर सड़क पर उफन रहे थे। यह हालात पिछले पांच दिनों से बने हुये थे । जिसे मंगलवार को नगर निगम की टीम ने उफन रहा सीवरेज और सेप्टिक टैंक का मलबा साफ कर दिया। जिससे पिछले कई दिनों से नर्क भुगत रहे मरीजों और तीमारदारों ने बड़ी राहत की सांस ली। सवाल यह उठता है कि जब नगर निगम और सुपर सकर मशीन के जरिए यह काम मात्र दो घंटे में मुमकिन था, तो इसके लिए पांच दिनों तक मरीजों को परेशान क्यों किया गया? प्रशासन को अपनी इस 'लेट-लतीफी' की कार्यप्रणाली को बदलना होगा ताकि भविष्य में किसी भी संवेदनशील वार्ड या लैब के बाहर ऐसे हालात दोबारा पैदा न हों।</p>
<p><strong>खबर पर तत्काल हुआ असर</strong><br />'दैनिक नवज्योति' द्वारा मामले को प्रमुखता से उठाते हुये मंगलवार को ''सेन्ट्रल लैब के मेन एन्ट्री के बाहर फैली सीवरेज की गन्दगी'' शीर्षक से प्रकाशित की थी जिसके बाद हरकत में आये एमबीएस प्रशासन ने सफाई के लिये आनन फानन में नगर निगम की टीम को मौके पर बुलवाकर परिसर में दुर्गंध व बीमारी के कारण बन रही सीवरेज के पानी को साफ करवाया गया करीब 2 घन्टे की मशक्कत के बाद पुरा पानी साफ हो गया। जिसके बाद यहां इलाज कराने आये लोगों ने भी राहत की सांस ली।</p>
<p><strong>'सुपर सकर' से दो घंटे में चोक चेंबर किए दुरुस्त</strong><br />गत शुक्रवार से ही मुख्य सड़क और वहां लगे सीमेंटेड ब्लॉक पूरी तरह बदबूदार पानी में डूबे हुए थे। मंगलवार सुबह जब नगर निगम का सफाई निरीक्षक दस्ता और अस्पताल का अमला हरकत में आया, तो हालात तेजी से बदले। सफाई कर्मियों ने सुपर सकर मशीन की मदद से चोक हो चुके मुख्य चेंबरों की सफाई शुरू की। कड़ी मशक्कत के बाद सड़क पर जमा गंदा पानी और कीचड़ पूरी तरह साफ हो सका।</p>
<p><strong>गंदगी बढ़ा रही थी बीमारी, वहां अब मिली राहत</strong><br />अस्पताल का यह वही मुख्य मार्ग है जहां रोजाना हजारों मरीज और उनके परिजन गंभीर बीमारियों की जांच के लिए सैंपल देने आते हैं। पिछले पांच दिनों से यहां फैली गंदगी न केवल अस्पताल की सुंदरता पर बदनुमा दाग थी, बल्कि वहां उठ रही तीव्र दुर्गंध से मरीजों का दम घुट रहा था। स्वास्थ्य के मंदिर में ही संक्रमण फैलने का खतरा बना हुआ था, लेकिन मंगलवार दोपहर बाद यहां के हालात पूरी तरह बदले नजर आए।</p>
<p><strong>भुक्तभोगियों ने कहा- 'देर आए, दुरुस्त आए'</strong><br />गंदगी साफ होने के बाद अस्पताल आने वाले लोगों के चेहरों पर सुकून दिखाई दिया मरीज मकसूद (60 वर्ष) ने बताया, कल जब मैं यहां सैंपल देने आया था, तो पैर रखने तक की जगह नहीं थी, इसी दूषित पानी के बीच से मजबूरन गुजरना पड़ा था। आज प्रशासन चेता है और सफाई हुई है, यह काम पहले दिन ही हो जाना चाहिए था। तीमारदार राहुल शर्मा ने कहा, यहां फैली गंदगी को देखकर मन खराब हो जाता था। आज जब दोबारा यहां आया तो सफाई देखकर बड़ी राहत मिली कि अब लोगों को इस नर्क से होकर नहीं गुजरना पड़ेगा। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
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                <pubDate>Wed, 17 Jun 2026 14:16:53 +0530</pubDate>
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                <title>एमबीएस अस्पताल में जलभराव बना खतरा, मरीजों को मुख्य रास्ते पर  फैले गंदे पानी से होकर गुजरना पड़ रहा</title>
                                    <description><![CDATA[पुराने निकासी मार्गों की मरम्मत नहीं होने से बारिश या सीवरेज का पानी जमा हो जाता है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/waterlogging-at-mbs-hospital-poses-a-threat--patients-have-to-wade-through-dirty-water-on-the-main-pathway/article-142047"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-02/(1200-x-600-px)-(1)10.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। हाडौती के सबसे बडे एमबीएस परिसर में सीवरेज का गंदा पानी जमा होने से मरीजों और तीमारदारों को काफी परेशानी हो रही है। जानकारी के अनुसार, यह समस्या खराब जल निकासी व्यवस्था, अवरुद्ध नालियों और सीवरेज चैम्बर के ओवर फ्लो के कारण उत्पन्न हुई है। दूषित सीवरेज के पानी में हानिकारक कीटाणु,बैक्टीरिया और औषधीय अवशेष मौजूद होते हैं, जो संक्रमण फैलने का बड़ा कारण बन सकते हैं। अस्पताल में भर्ती कमजोर रोगियों के लिए यह स्थिति और भी खतरनाक मानी जा रही है। लोगों और मरीजों के परिजनों का कहना है कि ओपीडी के बाहर और वार्डों के रास्तों में पानी भरे रहने से स्ट्रेचर और व्हीलचेयर ले जाना मुश्किल हो गया है। मुख्य रास्ते पर ही फैले गंदे पानी से होकर गुजरना पड़ता है, जिससे अस्पताल की स्वच्छता व्यवस्था पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।</p>
<p><strong>50 से अधिक बैड संख्या वाले अस्पतालों में प्लांट की जरूरत</strong><br />स्वास्थ्य नियमों के तहत अस्पतालों में सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट होना अनिवार्य है, ताकि गंदे पानी को शुद्ध किए बिना खुले में न छोड़ा जाए। फिलहाल अस्पताल प्रशासन की ओर से इस समस्या के स्थायी समाधान को लेकर कोई स्पष्ट बयान सामने नहीं आया है। हालांकि मरीजों और नागरिकों ने मांग की है कि जल्द से जल्द जल निकासी की व्यवस्था दुरुस्त की जाए और सीवरेज के पानी से होने वाले संक्रमण के खतरे को रोका जाए।वर्तमान में कोटा एमबीबीएस के नई बिल्डिंग में संचालित लीफटो की क्या स्थिति है अस्पतालों में एसटीपी की अनिवार्यता मुख्य रूप से जल (प्रदूषण निवारण एवं नियंत्रण) अधिनियम, 1974 और पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986 के अंतर्गत आती है। उढउइ (केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के दिशानिदेर्शों के अनुसार, सभी अस्पतालों को उनके अपशिष्ट जल (सीवरेज) को बाहर छोड़ने से पहले उपचारित करना अनिवार्य है। इसमें बायो-मेडिकल वेस्ट मैनेजमेंट रूल्स का पालन करना भी शामिल है।</p>
<p><strong>बेसमेन्ट में सीवरेज का पानी</strong><br />अभी हाल ही में बने आईपीडी भवन के बेसमेंट पार्किंग के लिफ्ट एरिया में भरा हुआ पानी सडा़ंध मार रहा था। सवाल यह है कि हाल ही में तैयार हुए भवनों में यह हाल है तो जब यह इमारतें पुरानी होगीं तब क्या होगा।जानकारों के अनुसार, एमबीएस में सीवरेज से जुड़ा बुनियादी ढांचा पुराना हो चुका है। ऐसे में परिसर में नये भवन भी बन गये है जिससे इन की क्षमता कम  पड़ती जा रही है । वहीं पुराने निकासी मार्गों की पूरी मरम्मत नहीं की जाती, जिससे बारिश या सीवरेज का पानी जमा हो जाता है।</p>
<p><strong>अटी पडी गंदगी</strong><br />करीब महीने भर से जयपुर फुट और आक्सीजन स्टोर रूम वाली सड़क पर भी सीवरेज का पाईप  टूटा हुआ है जिससे यहां सड़क पर  गंदगी फैल गयी है। बडी बात यह है कि यह रास्ता रेजीडेन्ट हॉस्टल के साथ एएनएम जीएनएम सेन्टर के साथ मॉर्चरी की और जाने वाले एक मात्र रास्ता है ।</p>
<p>ओपीडी और नयी इमरजेन्सी के बाहर बरसात का पानी भरा हुआ है। यह मार्ग जेके लोन व एमबीएस के बीच मुख्य सडक पर होने से समस्या का कारण बना हुआ है। यहां एक और लेबोरेट?री के कारण दिनभर लोगों की भीड़ रहती है ऐसे में वहीं दूसरी और गाड़ियां खड़ी रहने के कारण रास्ता संकरा रहता है उपर से यहां जमा पानी के कारण पैदल चलना भी दुश्वार हो गया है।<br /><strong>- दुष्यंत कुमार सुमन, तीमारदार</strong></p>
<p>आज ही हमने जहां पर भी पानी और गंदगी की जानकारी मिली वहां पर स्टाफ को काम पर लगाया है। बडी़ समस्या पुरानी लाईनोें से है एसटीपी प्लांट लगने तक व्यवस्था निगम को कहकर करवा रहे है।<br /><strong>- डॉ. कर्नेश गोयल, उपअध्यक्ष एमबीएस हॉस्पिटल कोटा</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 05 Feb 2026 15:34:10 +0530</pubDate>
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                <title>कोटा उत्तर वार्ड 45 -गंदगी, जलभराव और आधारभूत सुविधाओं की कमी से जूझ रहे हरिजन बस्ती के निवासी </title>
                                    <description><![CDATA[वार्ड में सामुदायिक भवन का अभाव, पार्क केवल औपचारिकता के लिए।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/kota-north-ward-45---residents-of-harijan-basti-struggling-with-filth--waterlogging--and-lack-of-basic-amenities/article-130492"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-10/y-of-news-(1)18.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। नगर निगम क्षेत्र के वार्ड नंबर 45 की स्थिति शहर की मूलभूत सुविधाओं की हकीकत बयां करती है। वार्ड के कई इलाकों में नागरिकों को अब भी गंदगी, जलभराव और आधारभूत सुविधाओं की कमी से दो-चार होना पड़ रहा है। प्रशासनिक दावे और योजनाएं कागजों पर तो नजर आती हैं, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और कहानी बयां करती है। वार्ड क्षेत्र में बने पार्क में झूले व अन्य सुविधाएं जोड़ी जाएं ताकि बच्चों और बुजुर्गों दोनों के लिए यह क्षेत्र उपयोगी बन सके। शहर की तरक्की का आईना उसके वार्ड होते हैं, लेकिन वार्ड 45 की यह तस्वीर सवाल खड़े करती है कि क्या विकास केवल शहरी केंद्रों तक सीमित रह गया है?</p>
<p><strong>वार्ड का एरिया</strong><br />आर.ई.टाईप-3 रेलवे कॉलोनी, पुरानी रेल्वे कॉलोनी वर्कशॉप, जे.पी. कॉलोनी, उड़िया बस्ती, हरिजन बस्ती, रेलवे प्लेट फार्म नं. 4 के सामने का क्षेत्र शामिल है।</p>
<p><strong>हरिजन बस्ती में गंदे पानी का साम्राज्य</strong><br />वार्ड में आने वाली हरिजन बस्ती में खाली पड़ी जगहों पर सीवरेज का गंदा पानी लंबे समय से जमा है। यह पानी सड़कों पर फैलकर बदबू और मच्छरों का अड्डा बन चुका है। बरसात के दिनों में स्थिति और भयावह हो जाती है। कई बार शिकायतें करने के बावजूद न तो सीवरेज की सफाई होती है और न ही निकासी की स्थायी व्यवस्था की गई है।<br /><strong>- जितेन्द्र पटोना</strong></p>
<p><strong>जेपी कॉलोनी में टूटी नालियों के पानी की समस्या</strong><br />वार्ड के दूसरे हिस्से में आने वाली जेपी कॉलोनी भी वर्षों पुरानी नालियों के जर्जर होने से जूझ रही है। जगह-जगह नालियां टूट चुकी हैं, जिनसे गंदा पानी सड़कों पर बहता रहता है। इससे स्थानीय लोगों को बदबू और बीमारी का खतरा बना रहता है। इसके अलावा कॉलोनी में जलापूर्ति भी बड़ी समस्या है। यहां पानी बेहद कम दबाव से आता है, जिससे कई घरों तक पर्याप्त पानी नहीं पहुंच पाता।<br /><strong>- बाबू लाल</strong></p>
<p><strong>सामुदायिक भवन का अभाव</strong><br />वार्ड में नगर निगम द्वारा पार्क तो बना दिया गया, लेकिन उसमें झूले और अन्य बच्चों के खेल उपकरण नहीं लगाए गए। इससे पार्क केवल औपचारिकता बनकर रह गया है। वहीं वार्ड में सामुदायिक भवन का भी अभाव है, जिससे सामाजिक कार्यक्रमों, बैठकों और आयोजनों के लिए लोगों को निजी स्थलों का सहारा लेना पड़ता है।<br /><strong>- लक्ष्मण</strong></p>
<p><strong>स्थानीयों की उम्मीदें प्रशासन से जुड़ी</strong><br />वार्डवासियों ने प्रशासन से मांग की है कि जल्द से जल्द सीवरेज व्यवस्था सुधारी जाए, टूटी नालियों का नवीनीकरण किया जाए और जलापूर्ति को सुचारू बनाया जाए। ताकि वार्डवासियों को मूलभूत सुविधाओं का लाभ मिल सके।<br /><strong>- सुरेश कुमार</strong></p>
<p><strong>इनका कहना है</strong><br />वार्ड क्षेत्र में हरिजन बस्ती के निवासियों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध करवाने के उद्देश्य से उन्हें रहने के लिए नई जगह आवंटित की गई है, लेकिन अधिकांश परिवार वहां जाने के लिए तैयार नहीं हैं। ऐसे में स्थिति हमारे नियंत्रण से बाहर है। वहीं, जेपी कॉलोनी में नियमित रूप से सुबह-शाम सफाई व्यवस्था सुचारू रूप से की जाती है। पानी की बात करें तो सुबह के समय अधिकांश लोग मोटर लगाकर पानी भरते हैं, जिससे निचले क्षेत्रों में जल आपूर्ति धीमी हो जाती है। इस दिशा में नागरिकों को भी थोड़ी जागरूकता और सहयोग दिखाने की आवश्यकता है।<br /><strong>- हिना बानो, पार्षद</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 25 Oct 2025 15:00:07 +0530</pubDate>
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