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                <title>पीएम मोदी ने दी कर्नाटक को बड़ी सौगात : आदिचुनचनगिरि में नए तीर्थस्थल का किया उद्घाटन, दिवंगत संत श्री बालगंगाधरनाथ स्वामीजी को है समर्पित </title>
                                    <description><![CDATA[प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कर्नाटक के मांड्या में ऐतिहासिक आदिचुनचनगिरि मठ परिसर में नवनिर्मित मंदिर का उद्घाटन किया। यह तीर्थस्थल संत बालगंगाधरनाथ स्वामीजी की विरासत और नाथ परंपरा को समर्पित है। शिक्षा और समाज सेवा के केंद्र के रूप में प्रसिद्ध यह मठ अब दक्षिण भारत में सांस्कृतिक पर्यटन का प्रमुख स्तंभ बनेगा।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/pm-modi-gave-a-big-gift-to-karnataka-inaugurated-a/article-150496"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/modi-ji.png" alt=""></a><br /><p>बेंगलुरु। कर्नाटक के मांड्या जिले के आदिचुनचनगिरि ऐतिहासिक मठ परिसर में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने बुधवार को श्री गुरु भैरवैक्य मंदिर का उद्घाटन किया। यह तीर्थस्थल दिवंगत संत श्री बालगंगाधरनाथ स्वामीजी को समर्पित है जो एक स्मारक होने के साथ-साथ उस विरासत को दर्शाता है जो दशकों से आदिचुनचनगिरि मठ द्वारा शिक्षा, स्वास्थ्य सेवा एवं सामाजिक सेवा के क्षेत्र में चलाई जा रही है। अनेक भक्तों के लिए, यह मात्र पत्थर और अनुष्ठानों से बनी एक संरचना नहीं है बल्कि उस दर्शन की पुष्टि है जिसने संस्था की सीमाओं से परे भी कई लोगों के जीवन को आकार दिया है।</p>
<p>यह उद्घाटन समारोह शैव धर्म की नाथ परंपरा से मठ के सदियों पुराने जुड़ाव की पृष्ठभूमि में आयोजित किया गया जहां गुरु-शिष्य परंपरा पीढ़ियों से चली आ रही आध्यात्मिक साधना को जोड़ने वाला केंद्रीय सूत्र बनी हुई है। इस दृष्टिकोण के साथ नया मंदिर किसी अतिरिक्त निर्माण की तरह नहीं बल्कि एक निरंतर चली आ रही परंपरा का विस्तार लगता है। जैसे-जैसे अनुष्ठान संपन्न होते गए और पहाड़ी परिसर में मंत्रोच्चार गूंजते गए, वातावरण में भक्ति एवं समारोह का एक परिचित मिश्रण झलकने लगा। श्रद्धालु आज सुबह से ही इकट्ठा होने लगे थे और उस स्थान के धार्मिक अनुष्ठानों और गणमान्य व्यक्तियों की उपस्थिति से जीवंत होने का इंतजार कर रहे थे।</p>
<p>आदिचुनचनगिरि मठ न केवल अपने आध्यात्मिक महत्व के लिए बल्कि जैव विविधता से भरपूर पहाड़ी श्रृंखलाओं के बीच स्थित अपने पारिस्थितिक परिवेश के लिए भी जाना जाता है। यह एक अद्वितीय स्थान रखता है जहां आस्था, परंपरा और सार्वजनिक सेवा का संगम होता है। नए तीर्थस्थल के उद्घाटन के साथ, मठ में तीर्थयात्रियों की संख्या में वृद्धि होने की उम्मीद है जिससे दक्षिणी कर्नाटक में एक प्रमुख आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक केंद्र के रूप में इसकी भूमिका और मजबूत होगी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 15 Apr 2026 18:08:15 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>ईद-उल-फितर पर दरगाह का जन्नती दरवाजा दोपहर में बंद, शहरभर में अदा हुई शांतिपूर्ण नमाज</title>
                                    <description><![CDATA[ईद-उल-फितर के मौके पर आज दरगाह शरीफ का जन्नती दरवाजा दोपहर तक खुला रहा, जिसके बाद इसे बंद कर दिया गया। सुबह से ही बड़ी संख्या में जायरीन दरगाह पहुंचे और जन्नती दरवाजे से होकर जियारत की। इसके बाद लोगों ने ईद की नमाज अदा की।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/ajmer/jannati-darwaza-of-dargah-closed-in-the-afternoon-on-eid-ul-fitr/article-147383"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/scaled_1000682565.jpg" alt=""></a><br /><p>अजमेर। ईद उल फितर होने के कारण आज खुला दरगाह का जन्नती दरवाजा दोपहर में बंद हो गया अधिकांश लोगों ने जन्नती दरवाजे से प्रवेश कर जियारत की और इसके बाद ईद की नमाज अदा की आज दरगाह की शाहजहां ने और संदली मस्जिद सहित ईदगाह और शहर की अनेक मस्जिदों में शांतिपूर्वक ईद की नमाज हुई है लोगों ने एक दूसरे को ईद की मुबारकबाद दी है</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>अजमेर</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 21 Mar 2026 18:45:05 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>आईआरसीटीसी ने पूर्वी भारत के लिए लॉन्च किया दिव्य पूर्वी मंदिर यात्रा रेल आधारित पर्यटन सर्किट: वाराणसी, कोलकाता, गंगासागर, पुरी, भुवनेश्वर, कोणार्क, चिलिका और बैद्यनाथ धाम ज्योतिर्लिग होंगे कवर</title>
                                    <description><![CDATA[आईआरसीटीसी ने श्रद्धालुओं के लिए दिव्य पूर्वी मंदिर यात्रा रेल सर्किट लॉन्च किया। भारत गौरव डीलक्स ट्रेन 9 मार्च को दिल्ली से रवाना होकर प्रमुख तीर्थों के दर्शन कराएगी।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/irctc-launches-divya-purvi-temple-yatra-rail-based-tourism-circuit/article-142305"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-02/11-(700-x-400-px)-(630-x-400-px)-(2)6.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। भारतीय रेलवे खानपान एवं पर्यटन निगम लिमिटेड (आईआरसीटीसी) धार्मिक शृंद्धालुओं की सुविधा के लिए भारत के पूर्वी भाग के लिए दिव्य पूर्वी मंदिर यात्रा नामक एक नया रेल आधारित पर्यटन सर्किट लॉन्च किया है। इसके तहत वाराणसी, कोलकाता, गंगासागर, पुरी, भुवनेश्वर, कोणार्क, चिलिका और बैद्यनाथ धाम ज्योतिर्लिंग  के अलावा प्रमुख धरोहर स्थल, मंदिर और समुद्रतट साथ ही गंगासागर की यात्रा कराई जाएगी। इसके लिए भारत गौरव डीलक्स पर्यटक ट्रेन 9 मार्च को दिल्ली के सफदरजंग रेलवे स्टेशन से रवाना होगी।</p>
<p>नया पर्यटन सर्किट किया शुरू: आईआरसीटीसी ने अपनी भारत गौरव डीलक्स पर्यटक ट्रेन पर दिव्य पूर्वी मंदिर यात्रा नामक एक नया पर्यटन सर्किट शुरू किया है। इसमें 10 दिवसीय रेलयात्रा श्रद्धालुओं और यात्रियों को उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल, ओडिशा और झारखंड के कुछ सबसे तीर्थ स्थलों और सांस्कृतिक रूप से समृद्ध विरासत स्थलों के दर्शन का अनूठा अवसर प्रदान करती है। यह यात्रा दिल्ली के सफदरजंग से शुरू होगी और वाराणसी, कोलकाता, गंगासागर, पुरी, भुवनेश्वर, कोणार्क, चिलिका और बैद्यनाथ धाम होते हुए दिल्ली वापस लौटेगी। यात्रा के प्रमुख स्थलों में वाराणसी में काशी विश्वनाथ मंदिर ज्योतिर्लिंग और गंगा आरती शामिल हैं। </p>
<p>कोलकाता-ओडिशा की यात्रा में कई प्रमुख स्थल शामिल: इसके बाद भारत की सांस्कृतिक राजधानी कोलकाता की यात्रा होगी, जिसमें विक्टोरिया मेमोरियल और अन्य शहर के आकर्षण तथा काली घाट (शक्ति पीठ) और दक्षिणेश्वर काली मंदिर जैसे महत्वपूर्ण मंदिर शामिल हैं। गंगासागर के पवित्र तटों की एक दिवसीय यात्रा, जिसमें संगम में स्नान और कपिल मुनि मंदिर के दर्शन मुख्य आकर्षण है। </p>
<p>यह यात्रा पुरी तक जारी रहेगी, जहां श्री जगन्नाथ मंदिर के दर्शन के साथ-साथ भुवनेश्वर, धौली शांति स्तूप, उदयगिरि और खंडगिरि गुफाएं, कोणार्क सूर्य मंदिर और अन्य दर्शनीय स्थलों सहित ओडिशा के व्यापक पर्यटन स्थलों का भ्रमण करने का अवसर मिलेगा। यात्रा का अंतिम आध्यात्मिक गंतव्य भगवान शिव के बारह ज्योतिर्लिंगों में से एक बैद्यनाथ धाम (देवघर) है, जहां से 18 मार्च को दिल्ली के सफदरजंग लौटकर यात्रा का समापन होगा।</p>
<p><strong>ट्रेन में ये मिल रही सुविधाएं</strong></p>
<p>भारत गौरव डीलक्स टूरिस्ट ट्रेन में फर्स्ट एसी, सैंकंड एसी व थर्ड एसी श्रेणी के सुसज्जित केबिन, स्वच्छ शाकाहारी भोजन परोसने वाले ऑनबोर्ड रेस्तरां, उन्नत सुरक्षा व्यवस्था और समर्पित टूर मैनेजर सहित आधुनिक सुविधाओं से सुसज्जित है। इस ट्रेन में फर्स्ट एसी का किराया 1,06,940 रुपए प्रति व्यक्ति, सैकंड एसी के लिए 98,925 रुपए और थर्ड एसी श्रेणी के लिए 79,285 रुपए प्रति व्यक्ति लिया जाएगा। पैकेज की कीमत में एसी श्रेणी में ट्रेन यात्रा, एसी होटलों में आवास, सभी भोजन (केवल शाकाहारी), एसी वाहनों में सभी परिवहन और दर्शनीय स्थल यात्रा बीमा और आईआरसीटीसी टूर मैनेजरों की सेवाएं आदि शामिल हैं। डिवाइन ईस्ट टेंपल टूर के लिए बुकिंग आईआरसीटीसी के पर्यटन पोर्टल और देश भर में अधिकृत आईआरसीटीसी पर्यटन कार्यालयों के माध्यम से कराए जा सकेंगे।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 08 Feb 2026 10:02:36 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>बसंत पंचमी पर हुई चारधाम यात्रा को लेकर बड़ी घोषणा, 23 अप्रैल को खुलेंगे बद्रीनाथ धाम के कपाट </title>
                                    <description><![CDATA[वसंत पंचमी पर घोषणा हुई कि बदरीनाथ धाम के कपाट 23 अप्रैल सुबह 6:15 बजे ब्रह्म मुहूर्त में खुलेंगे; गाडू घड़ा यात्रा सात अप्रैल से शुरू होगी।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/big-announcement-regarding-chardham-yatra-on-basant-panchami-doors-of/article-140623"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-01/1200-x-600-px)-(12).png" alt=""></a><br /><p>देहरादून। भगवान विष्णु अर्थात बदरीनाथ धाम के कपाट आगामी ग्रीष्मकालीन यात्रा के लिए 23 अप्रैल को विधि-विधान के साथ श्रद्धालुओं के लिए खोले जाएंगे। शुक्रवार को वसंत पंचमी के अवसर पर धाम के कपाट खुलने की तिथि घोषित की गई। इससे पहले गुरुवार को डिम्मर से डिमरी धार्मिक केंद्रीय पंचायत के सदस्य गाडू घड़ा के साथ ऋषिकेश के लिए रवाना हुए। आज सुबह पुजारी गाडू घड़ा लेकर नरेंद्रनगर राज दरबार पहुंचे। यहां परंपरागत तरीके से भगवान बदरी विशाल धाम कपाटोद्घाटन की तिथि घोषित की गई। </p>
<p>जिसके अनुसार भगवान बदरी विशाल के कपाट आगामी 23 अप्रैल को ब्रह्म मुहूर्त में 6:15 बजे खोले जाएंगे। जबकि गाडू घड़ा यात्रा सात अप्रैल को आरंभ होगी। इसका निर्णय परंपरा अनुसार टिहरी गढ़वाल जनपद के नरेंद्र नगर स्थित राजदरबार में महाराजा मनुजेंद्र शाह ने पंचांग पूजा के बाद भगवान बदरी विशाल के कपाट खुलने, भगवान के महाभिषेक में प्रयुक्त होने वाले तिलों के तेल को पिरोने और गाडू घड़ा तेल कलश यात्रा की तिथि घोषित की।</p>
<p>राजदरबार में आयोजित धार्मिक समारोह के दौरान महाराजा मनु जयेंद्र शाह ने स्वयं कपाट खुलने की तिथि की घोषणा की। राजपुरोहित आचार्य कृष्ण प्रसाद उनियाल ने महाराजा की जन्मकुंडली, ग्रह-नक्षत्र और शुभ योगों का सूक्ष्म अध्ययन कर बदरीनाथ धाम के कपाट 23 अप्रैल को सुबह सवा छह बजे शुभ मुहूर्त में खोलने की तिथि निर्धारित की। परंपरा अनुसार पंचांग पाठ, वैदिक मंत्रोच्चार और विशेष अनुष्ठानों के बाद यह घोषणा की गई।</p>
<p>इस ऐतिहासिक अवसर पर बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति, तीर्थ पुरोहित, डिमरी समाज के प्रतिनिधि तथा अनेक धार्मिक गणमान्यजन उपस्थित रहे। राजदरबार में जैसे ही तिथि की घोषणा हुई, पूरा वातावरण जय बद्री विशाल के उद्घोष से गूंज उठा । उल्लेखनीय है कि, गंगोत्री और यमुनोत्री मंदिर के कपाट अक्षय तृतीया पर खुलते हैं। आगामी 19 अप्रैल को अक्षय तृतीय है। इसलिए उस दिन गंगोत्री और यमुनोत्री धाम के कपाट खोले जाएंगे। इसका मुहूर्त बाद में तय किया जाएगा। जबकि केदारनाथ मंदिर के कपाट खोलने की तिथि शिवरात्रि के दिन तय होगी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 23 Jan 2026 16:32:39 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>हरिद्धार: कड़ाके की ठंड के बावजूद मौनी अमावस्या पर हर की पैड़ी में उमड़ा श्रद्धालुओं का सैलाब, सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम</title>
                                    <description><![CDATA[हरिद्वार में मौनी अमावस्या पर कड़ाके की ठंड के बीच लाखों श्रद्धालुओं ने हर की पैड़ी पर पावन स्नान किया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/despite-the-harsh-cold-of-haridhar-a-large-number-of/article-139997"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-01/mauni-amavasya-2025-10.webp" alt=""></a><br /><p>हरिद्वार। उत्तराखंड के हरिद्धार में रविवार को मौनी अमावस्या के पावन अवसर पर हर की पैड़ी में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। कड़ाके की ठंड के बावजूद भक्तों की आस्था मौसम पर भारी पड़ती नजर आई। प्रात:काल से ही गंगा स्नान के लिए श्रद्धालुओं का निरंतर आगमन बना रहा।</p>
<p>वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक, हरिद्वार के निर्देशन में हरिद्वार पुलिस द्वारा व्यापक सुरक्षा एवं यातायात प्रबंधन के पुख्ता इंतजाम किए गए। पुलिस बल द्वारा श्रद्धालुओं को सुरक्षित एवं सुव्यवस्थित ढंग से गंगा स्नान कराया गया तथा उन्हें सकुशल उनके गंतव्य स्थान की ओर रवाना किया गया। भीड़ प्रबंधन, यातायात नियंत्रण एवं श्रद्धालुओं की सुरक्षा को लेकर पुलिस बल पूरी मुस्तैदी के साथ तैनात रहा, जिससे किसी भी प्रकार की अव्यवस्था उत्पन्न न हो।</p>
<p>हरिद्वार पुलिस ने श्रद्धालुओं से अपील की है कि वे प्रशासन द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का पालन करें तथा व्यवस्थाओं को सुचारू बनाए रखने में पुलिस प्रशासन का सहयोग करें।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 18 Jan 2026 17:15:33 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>हज यात्रा करने वाले समय से करा लें बुकिंग : निजी ऑपरेटरों के जरिए जाने वालों से किया अनुरोध, रिजिजू ने कहा- आखिरी समय की भागदौड़ से बच सकते है</title>
                                    <description><![CDATA[रिजिजू ने स्पष्ट किया कि बुकिंग पूरी कर ली जाती है, तो आखिरी समय की भागदौड़ और परेशानियों से बचा जा सकता है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/those-going-for-haj-pilgrimage-should-book-on-time/article-135903"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-07/kiren-rijuju.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। केन्द्रीय अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री किरेन रिजिजू ने निजी ऑपरेटरों के माध्यम से हज करने वाले हज यात्रियों से अनुरोध किया है कि वह जल्दी आवेदन करें और केवल अधिकृत हज ग्रुप आयोजकों और प्राइवेट टूर ऑपरेटरों को ही चुनें। </p>
<p>रिजिजू ने स्पष्ट किया कि बुकिंग पूरी कर ली जाती है, तो आखिरी समय की भागदौड़ और परेशानियों से बचा जा सकता है। इससे हज की पवित्र यात्रा के लिए रहने, आने-जाने और अन्य जरूरी व्यवस्थाएं समय पर और बेहतर तरीके से सुनिश्चित हो सकेंगी। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 14 Dec 2025 14:25:46 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>वैश्विक तीर्थस्थल बनेगा सबरीमाला : बन रहे एयरपोर्ट और रोपवे, विकास के लिए अन्य परियोजनाएं भी होंगी शुरू</title>
                                    <description><![CDATA[ मुख्यमंत्री ने कहा कि सन्निधानम, पंबा और अयप्पा मंदिर तक जाने वाले पैदल मार्ग के विकास पर विभिन्न चरणों में कुल 1033.62 करोड़ रुपए खर्च किए जायेंगे, ये सभी परियोजनाएं 2039 तक पूरी होने की उम्मीद है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/global-pilgrimage-will-become-the-sabarimala-other-projects-for-ropeway/article-127478"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-09/6622-copy32.jpg" alt=""></a><br /><p>पम्बा। सबरीमाला देवस्थानम के विकास पर त्रावणकोर देवस्वोम बोर्ड (टीडीबी) एक हजार करोड़ रुपए खर्च करेगी। ग्लोबल अयप्पा संगम के 75वीं वर्षगांठ के उपलक्ष्य में आयोजित कार्यक्रम में केरल के मुख्यमंत्री पिनरायी विजयन ने घोषणा की कि सबरीमाला के विकास के लिए अधिक की परियोजनाएं लागू की जाएगी, ताकि श्रद्धालुओं को सुरक्षित और सुगम तीर्थयात्रा का अनुभव मिल सके। मुख्यमंत्री ने कहा कि सन्निधानम, पंबा और अयप्पा मंदिर तक जाने वाले पैदल मार्ग के विकास पर विभिन्न चरणों में कुल 1033.62 करोड़ रुपए खर्च किए जायेंगे, ये सभी परियोजनाएं 2039 तक पूरी होने की उम्मीद है।</p>
<p>विजयन ने बताया कि सबरीमाला को वैश्विक तीर्थस्थल के रूप में स्थापित करने के लिए वैज्ञानिक मास्टर प्लान तैयार किया गया है, जिसमें सबरी रेलवे, सबरीमला हवाईअड्डा, रोपवे और अन्य परियोजनाएं शामिल हैं। विजयन ने कहा कि श्रद्धालुओं के लिए बुनियादी सुविधाओं में सुधार के वास्ते 2025 से 2030 के बीच 300 करोड़ रुपए से अधिक खर्च किए जाएंगे। त्रावणकोर देवस्वोम बोर्ड (टीडीबी) के अध्यक्ष पी.एस. प्रशांत ने बताया कि इस कार्यक्रम में 15 देशों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया, साथ ही भारत के विभिन्न राज्यों से श्रद्धालु भी इसमें शामिल हुए जिनमें तमिलनाडु से लगभग 1,000 श्रद्धालुओं का सबसे बड़ा दल आया।  </p>
<p><br />विजयन ने कहा कि तीर्थयात्रा को भक्तों के लिए सहज बनाने और जरूरी हस्तक्षेपों की पहचान करने के लिए यह संगम आयोजित किया गया है। सीएम ने कहा कि सबरिमला जाति और धर्म से परे है, हरिवरासनम जैसे भजन का उदाहरण देते हुए उन्होंने बताया कि इसे नास्तिक देवराजन मास्टर ने लिखा और ईसाई गायक यसुदास ने गाया। </p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 21 Sep 2025 11:57:10 +0530</pubDate>
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                <title> दंपती गया तीर्थयात्रा पर, घर से लाखों के जेवर पार</title>
                                    <description><![CDATA[खेरवाड़ा। उपखंड क्षेत्र के फुटाला गांव का दम्पती तीर्थयात्रा पर गया हुआ था, पीछे उनके घर से गुरुवार रात चोर करीब 3,65,000 नकद एवं 45 लाख रुपए के जेवर पार कर ले गए।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/udaipur/udaipur-khrwara-couple-on-pilgrimage-to-gaya--jewelery-worth-lakhs-passed-from-home/article-15772"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-07/22-udi-kherwada.jpg" alt=""></a><br /><p>खेरवाड़ा। उपखंड क्षेत्र के फुटाला गांव का दम्पती तीर्थयात्रा पर गया हुआ था, पीछे उनके घर से गुरुवार रात चोर करीब 3,65,000 नकद एवं 45 लाख रुपए के जेवर पार कर ले गए।</p>
<p>बावलवाड़ा थाना क्षेत्र के फुटाला गांव के साकर चंद पुत्र मेघा पटेल एवं उसकी पत्नी फूली देवी एक सप्ताह पूर्व अमरनाथ यात्रा पर गए। दम्पती का पुत्र कल्पेश कुवैत में नौकरी करता है। घर पर साकर चंद की पुत्री, बहू अनीता एवं उसके पुत्र-पुत्री एवं सारोली निवासी एक नौकर मौजूद थे।  रात करीब डेढ़ बजे जब अनिता की नींद जागी, तब तक चोर लाखों रुपए का माल लेकर चंपत हो गए। परिजनों ने बताया कि करीब 3,65,000 नकद तथा 85 तोला सोने के जेवर व करीब दो किलो चांदी के जेवर चोरी हो गए। सोने-चांदी के जेवर की कीमत करीब 45 लाख रुपए। पुलिस के अनुसार वारदात में किसी जानकार के शामिल होने की संभावना से भी इनकार नहीं किया जा सकता है।</p>
<p>सूचना पर बावलवाड़ा थाना के सहायक उपनिरीक्षक हाजूराम, हेड कांस्टेबल शंभूसिंह मय जाप्ता के घटनास्थल पर पहुंचे एवं ग्रामीणों की उपस्थिति में मौका पंचनामा बनाया। ऋषभदेव के पुलिस उप अधीक्षक विक्रम सिंह ने भी मौका ए वारदात का निरीक्षण किया। साथ में बावलवाड़ा एसएचओ हेमंत अहारी तथा एसएचओ पहाड़ा नागेंद्र सिंह भी उपस्थित रहे। मौके पर डॉग स्क्वायड को भी बुलाया गया। एफएसएल की टीम ने भी जांच की गई एवं घर में चल रहे निर्माण कार्य पर लगे मजदूरों से भी पूछताछ कर उनकी कॉल डिटेल खंगाली गई। थानाधिकारी हेमंत अहारी ने बताया कि परिजनों की रिपोर्ट पर जांच प्रारंभ कर दी गई है।</p>
<p> </p>
<p><br /><br /></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>उदयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 23 Jul 2022 12:46:05 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>तेल का खेल भूल अब तीर्थयात्रा से नगदी कमाने में जुटा सऊदी</title>
                                    <description><![CDATA[रियाद। सऊदी अरब तेल ने तेल के जरिए अपने खजाने में खरबों डॉलर जोड़े हैं। इसके बावजूद सऊदी सरकार को यह आशंका है कि यह एक ऐसा संसाधन है जो किसी दिन समाप्त हो जाएगा। यही कारण है कि यह अमीर देश अब कमाई के वैकल्पिक साधनों की तरफ ध्यान केंद्रित कर रहा है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/forgetting-the-game-of-oil--now-saudi-is-busy-earning-cash-from-pilgrimage/article-13889"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-07/d-12.jpg" alt=""></a><br /><p>रियाद। सऊदी अरब तेल ने तेल के जरिए अपने खजाने में खरबों डॉलर जोड़े हैं। इसके बावजूद सऊदी सरकार को यह आशंका है कि यह एक ऐसा संसाधन है जो किसी दिन समाप्त हो जाएगा। यही कारण है कि यह अमीर देश अब कमाई के वैकल्पिक साधनों की तरफ ध्यान केंद्रित कर रहा है। मौजूदा समय में तेल की उच्च कीमतों के बावजूद सऊदी अरब यह जानता है कि दुनिया वैकल्पिक ऊर्जा की ओर तेजी से मुड़ रही है। ऐसे में सऊदी प्रशासन ने भविष्य के लिए राजस्व के अपने स्रोतों में विविधता लाने के लिए एक महत्वाकांक्षी परियोजना शुरू की है। उन स्रोतों में से एक तीर्थयात्रा है, जिस पर पूरी तरह से सऊदी अरब का एकाधिकार है। इस्लाम के दो सबसे महत्वपूर्ण तीर्थस्थल मक्का और मदीना सऊदी अरब में हैं और दुनियाभर के करी दो अरब मुसलमान अपनी पूरी जिंदगी में एक न एक बार इन दोनों जगहों की यात्रा जरूर करना चाहते हैं।<br /><br /><strong>2015 में सऊदी ने लॉन्च किया मिशन तीर्थयात्रा</strong><br />2015 में किंग सलमान बिन अब्दुलअजीज के सत्ता में आने के तुरंत बाद सऊदी अरब ने मक्का में ग्रैंड मस्जिद का विस्तार करने के लिए 21 बिलियन डॉलर की परियोजना शुरू की थी। इसके जरिए मस्जिद में 300000 अतिरिक्त श्रद्धालुओं को समायोजित किया जाना था। इसके एक साल बाद तत्कालीन डिप्टी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान ने तीर्थयात्रा को 2030 तक सऊदी अर्थव्यवस्था में विविधता लाने की योजना के एक प्रमुख घटक के रूप में पहचान दी। बहरीन के डेरासैट थिंक टैंक के डॉयरेक्टर आॅफ रिसर्च उमर अल-उबैदली ने कहा कि ऊर्जा क्षेत्र के विपरीत हज और उमराह के क्षेत्र में सऊदी अरब को एकाधिकार प्राप्त है।<br /><br /><strong>10 लाख मुसलमानों की अगवानी करेगा सऊदी</strong><br />कोविड -19 प्रतिबंधों के कारण दो साल के अंतराल के बाद वार्षिक हज यात्रा करने के लिए दुनिया भर के मुसलमान इस सऊदी अरब पहुंचना शुरू हो गए हैं। यह मुसलमानों के लिए जीवन भर के धार्मिक दायित्व को पूरा करने का अवसर है, लेकिन साथ ही सऊदी अरब के पवित्र शहरों की अर्थव्यवस्था को हैवी बूस्ट मिलने का मौका भी है। कोरोना महामारी के कारण 2020 में सिर्फ सऊदी अरब के 1000 तीर्थ यात्रियों ने ही हज किया था, लेकिन 2021 में यह बढ़कर लगभग 60,000 हो गई थी। लेकिन, इस साल सऊदी ने हज के लिए अपने दरवाजे पूरी तरह से खोल दिए हैं। ऐसा अनुमान है कि इस साल 10 लाख मुसलमान अलग-अलग देशों से सऊदी अरब पहुंचेंगे।<br /><br /><strong>सऊदी के खजाने की चाबी बनेंगे मक्का-मदीना</strong><br />विशेषज्ञों का कहना है कि कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल के आसपास हैं। सऊदी अरब हर दिन अरबों डॉलर का तेल बेचता है। वहीं, तीर्थयात्रा से होने वाला आर्थिक लाभ तेल की तुलना में बहुत कम है। लेकिन, यह ऐसा क्षेत्र है, जो आने वाले दिनों में सऊदी अरब के खजाने को भरने की चाबी बन सकता है। वॉशिंगटन में अरब गल्फ स्टेट्स इंस्टीट्यूट के सीनियर स्कॉलर रॉबर्ट मोगिएलनिकी ने कहा कि सऊदी अरब में धार्मिक पर्यटन आने वाले कई दशकों तक तेल और गैस से होने वाली कमाई का मुकाबला नहीं कर सकता है। लेकिन, मक्का और मदीना का धार्मिक महत्व कभी भी खत्म नहीं होगा। ऐसे में ये दोनों शहर सऊदी पर्यटन क्षेत्र के निर्माण और स्थानीय, क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय श्रद्धालुओं को खींचने में महत्वपूर्ण भूमिका अदा कर सकते हैं।<br /><br /><br /><strong>तीर्थयात्रा से हर साल अरबों डॉलर कमा रहा सऊदी</strong><br />लंदन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स में एसोसिएट प्रोफेसर स्टीफन हर्टोग ने बताया कि हज के जरिए सऊदी अरब के पर्यटन के क्षेत्र में विकास की अनगिनत संभावनाएं हैं। तीर्थयात्रियों को अन्य धार्मिक स्थलों की यात्रा करने या मनोरंजन के लिए आकर्षित किया जा सकता है। उमराह के दौरान भी तीर्थयात्रियों को आकर्षित कर पर्यटन के बाजार को और मजबूत और साल भर प्रॉफिट देने वाला बनाया जा सकता है।  2018 में मक्का ने पर्यटकों के जरिए 20 बिलियन डॉलर का ट्रांजेक्शन किया था। यहां आंकड़ा दुबई के बाद दूसरे नंबर पर है। सऊदी अरब का तीर्थयात्रा राजस्व औसतन लगभग 30 बिलियन डॉलर प्रति वर्ष था। तब 2022 तक सउदी के लिए 100,000 रोजगार पैदा करने का अनुमान लगाया गया था। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, महामारी से पहले हर साल 10-दिवसीय हज और उमराह तीर्थयात्रा के दौरान सऊदी अरब में 2 करोड़ 10 लाख तीर्थयात्री हर साल पहुंचते थे। महामारी के दौरान तीर्थयात्रियों की संख्या में काफी कमी आई है, लेकिन सरकार 2030 तक हर साल 3 करोड़ तीर्थयात्रियों को आकर्षित करने की प्लानिंग कर रही है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 08 Jul 2022 13:29:11 +0530</pubDate>
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                <title>मां आसावरी के दरबार में सालभर बहता है झरना</title>
                                    <description><![CDATA[मीणा राजाओं के साथ सात जातियों की है कुलदेवी : जयपुर में है यह तीर्थ स्थान]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/%E0%A4%AE%E0%A4%BE%E0%A4%82-%E0%A4%86%E0%A4%B8%E0%A4%BE%E0%A4%B5%E0%A4%B0%E0%A5%80-%E0%A4%95%E0%A5%87-%E0%A4%A6%E0%A4%B0%E0%A4%AC%E0%A4%BE%E0%A4%B0-%E0%A4%AE%E0%A5%87%E0%A4%82-%E0%A4%B8%E0%A4%BE%E0%A4%B2%E0%A4%AD%E0%A4%B0-%E0%A4%AC%E0%A4%B9%E0%A4%A4%E0%A4%BE-%E0%A4%B9%E0%A5%88-%E0%A4%9D%E0%A4%B0%E0%A4%A8%E0%A4%BE/article-1561"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2021-10/3.jpg" alt=""></a><br /><p><strong> जयपुर</strong>। आगरा रोड से सटी अरावली पर्वत श्रृंखला में विराजमान हैं मां आसावरी का प्राचीन मंदिर। कभी मीणा राजाओं की आराध्य देवी रहीं माता वर्तमान में सात जातियों की कुलदेवी के रूप में पूजी जाती है। इस मंदिर की सबसे बड़ी विशेषता है यहां अनवरत बहने वाला झरना। कई सालों से लगातार बहुत कम बारिश होने से जयपुर और इसके आसपास के सभी जलाशय सूखे पड़े हैं, लेकिन माता आसावरी के दरबार में आज भी सालभर अनवरत रूप से झरना बहता है। मंदिर में मां आसावरी की आदमकद मूर्ति के साथ ब्रह्मणी, शक्ति और शिवजी की प्रतिमाएं हैं। इनके ठीक सामने मंदिर में प्राचीन धूणा भी है। मंदिर गर्भगृह को चारों तरफ से दीवार से कवर किया हुआ है। मंदिर से सटकर दक्षिण दिशा में आकर्षक गार्डन भी है। <br /> <br /> <span style="background-color:#ffff99;"><span style="color:#ff0000;"><strong>जयपुर में है यह तीर्थ स्थान</strong></span></span><br /> यह मंदिर जयपुर में खो नागोरियान में स्थित है। यहां पहुंचने के लिए इस गांव के बीच से मंदिर तक सड़क जाती है। मंदिर के पुजारी रामनारायण मीणा बताते हैं कि इस मंदिर की स्थापना राजा चन्द्रसेन ने संवत 221 में की थी। इसके बाद अंतिम मीणा राजा आलम सिंह ने भी यहां किला और बावड़ियां बनवाई। पहले यह स्थान प्राकृतिक झरना बहने के कारण खो गंग के नाम से जाना जाता था, जिसे बाद में खो नागोरियान कहा जाने लगा। यह खो गंग आज भी अनवरत बह रही है। खो गंग यहां की पहाड़ियों पर स्थित प्रचीन काला गोरा भैरव मंदिर के पास से एक चट्टान मेंं निकलती है। इसके बाद यह एक कुई में समा जाती है। सर्दी हो या गर्मी यह झरना हमेशा बहता रहता है। इस कुई में मोटर लगा रखी है। इसी का पानी मंदिर में पीने के काम आता है। चट्टान से जलधारा फूटने के बाद यह गुप्त गंगा का रूप लेकर कुई में समा जाती है। यह कुई हमेशा जल से भरी रहती है। माता के मंदिर में दर्शन करने आने वाले श्रद्धालु इस झरने में स्नान करने को पवित्र मानते हैं, लेकिन झरने तक दुर्गम रास्ता होने के कारण बहुत कम लोग ही इस तक पहुंच पाते हैं। भीषण गर्मी से जब बड़े-बड़े जलाशय सूख जाते हैं, तब भी यहां का प्राकृतिक झरना बहता रहता है। वैसे तो मंदिर में मीणा समाज के कुलदेवी के रूप में जात जडूले लगते हैं, लेकिन यहां सभी जाति समाजों के लोग दर्शनार्थ आते हैं। मंदिर में रोज सैकड़ों भक्तजन आते हैं पर नवरात्र में काफी भीड़ देखने को मिलती है। यहां सवामणी और गोठ के आयोजन खूब होते हैं। माता को लक्ष्मी का रूप मानते हैं। इसलिए प्रसाद भी सात्विक ही चढ़ता है। यह स्थान चारों ओर जंगल से घिरा है, जिसमें बघेरों के अलावा नीलगाय, सियार, लोमड़ी, भेड़िए जैसे वन्य जीव भी स्वछंद विचरण करते हैं, लेकिन आज तक किसी भक्त को कोई हानि नहीं पहुंचाई।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 10 Oct 2021 12:01:57 +0530</pubDate>
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