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                <title>Nuclear weapons - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <description>Nuclear weapons RSS Feed</description>
                
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                <title>पश्चिम एशिया संकट : डोनाल्ड ट्रंप ने की फ्रेडरिक मर्ज़ की तीखी आलोचना, होर्मुज जलडमरूमध्य के घटनाक्रम पर भी जताई चिंता </title>
                                    <description><![CDATA[राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने जर्मन चांसलर फ्रेडरिक मर्ज़ की तीखी आलोचना करते हुए ईरान पर उनके रुख को खतरनाक बताया है। ट्रंप का दावा है कि परमाणु संपन्न ईरान दुनिया को बंधक बना लेगा। वहीं, जर्मनी ने अमेरिका की युद्ध नीति और ऊर्जा बाजारों पर पड़ने वाले प्रतिकूल प्रभावों पर चिंता जताई है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/west-asia-crisis-donald-trump-sharply-criticized-friedrich-merz-also/article-152097"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-01/trump.png" alt=""></a><br /><p>वॉशिंगटन। ईरान के मुद्दे पर अमेरिका और उसके यूरोपीय सहयोगियों के बीच गहराते मतभेद के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बुधवार को जर्मनी के चांसलर फ्रेडरिक मर्ज़ की कड़ी आलोचना करते हुए कहा कि मर्ज़ को लगता है कि ईरान का परमाणु हथियार संपन्न होना ठीक है। ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रूथ सोशल पर कहा कि इसमें कोई आश्चर्य नहीं है कि जर्मनी आर्थिक और अन्य मोर्चों पर इतना खराब प्रदर्शन कर रहा है। उन्होंने कहा कि जर्मन चांसलर को नहीं पता कि वह क्या कह रहे हैं।</p>
<p>अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा कि यदि ईरान के पास परमाणु हथियार होता, तो पूरी दुनिया को बंधक बना लिया जाता। उन्होंने कहा कि वह अभी ईरान के संबंध में वह कदम उठा रहे हैं, जो अन्य देशों या राष्ट्रपतियों को बहुत पहले कर लेने चाहिए थे। यह तीखी प्रतिक्रिया मर्ज़ द्वारा ईरान मुद्दे पर अमेरिकी दृष्टिकोण की आलोचना के बाद आई है। जर्मन चांसलर ने कहा था कि ईरान का नेतृत्व अमेरिका को अपमानित कर रहा है और ऐसा प्रतीत नहीं होता कि अमेरिका के पास इस युद्ध से बाहर निकलने की कोई स्पष्ट योजना है। मर्ज़ ने होर्मुज जलडमरूमध्य के घटनाक्रम पर भी चिंता व्यक्त करते हुए कहा था कि वहां होने वाले व्यवधान के ऊर्जा बाजारों और वैश्विक व्यापार के लिए दूरगामी परिणाम हो सकते हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 29 Apr 2026 16:52:04 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>ईरान को परमाणु हथियार विकसित करने की अनुमति नहीं दिये जाने के पक्षधर हैं सम्राट चार्ल्स-3 : डोनाल्ड ट्रंप</title>
                                    <description><![CDATA[राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया कि सम्राट चार्ल्स ईरान के परमाणु कार्यक्रम को रोकने पर सहमत हैं। हालांकि, ब्रिटिश सम्राट की राजनीतिक तटस्थता के कारण यह बयान चर्चा में है। व्हाइट हाउस में आयोजित राजकीय भोज के दौरान दोनों नेताओं के बीच ऐतिहासिक संदर्भों और कूटनीति पर हल्के-फुल्के अंदाज में दिलचस्प संवाद भी हुआ।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/emperor-charles-3-donald-trump-is-in-favor-of-not-allowing/article-152096"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-04/donlad-trump-3.png" alt=""></a><br /><p>वॉशिंगटन। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि ब्रिटेन के सम्राट चार्ल्स-3 भी इस बात से सहमत हैं कि ईरान को परमाणु हथियार विकसित करने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए। डोनाल्ड ट्रंप ने पश्चिम एशिया नीति पर टिप्पणी करते हुए कहा कि ईरान को कभी भी परमाणु हथियार हासिल नहीं करने दिया जाएगा और इस मुद्दे पर सम्राट चार्ल्स भी उनकी सोच से सहमत हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति की यह टिप्पणी ब्रिटेन की संवैधानिक परंपराओं के संदर्भ में असहज मानी जा रही है, क्योंकि ब्रिटिश सम्राट परंपरागत रूप से राजनीतिक रूप से तटस्थ रहते हैं और सरकारी नीति या अंतरराष्ट्रीय संघर्षों पर सार्वजनिक रूप से पक्ष नहीं लेते। ब्रिटेन में संवैधानिक व्यवस्था के तहत सम्राट किसी भी दलगत या प्रत्यक्ष राजनीतिक रुख से दूरी बनाए रखते हैं। ऐसे में ट्रंप का यह दावा राजनीतिक और कूटनीतिक हलकों में चर्चा का विषय बन गया है।</p>
<p>इस बीच ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर पहले ही स्पष्ट कर चुके हैं कि ईरान से जुड़ा युद्ध ब्रिटेन का युद्ध नहीं है और वह इस संघर्ष में प्रत्यक्ष रूप से शामिल होने के पक्ष में नहीं हैं। उन्होंने यह भी दोहराया है कि ईरान को परमाणु हथियार नहीं मिलने चाहिए, जो लंबे समय से ब्रिटिश सरकारों की नीति रही है। हाल के अमेरिकी दौरे के दौरान सम्राट चार्ल्स ने अमेरिकी कांग्रेस की संयुक्त बैठक को संबोधित करते हुए अमेरिका-ब्रिटेन संबंधों, साझा मूल्यों और वैश्विक सहयोग पर जोर दिया था। उनकी यात्रा को दोनों सहयोगी देशों के बीच बढ़ते कूटनीतिक तनाव को कम करने के एक प्रयास के रूप में व्यापक रूप से देखा गया।</p>
<p>ईरान संघर्ष से निपटने के तरीके को लेकर कुछ सहयोगी देशों के साथ मतभेदों के बाद ट्रंप ने अमेरिका को नाटो से अलग करने की संभावना जतायी है। इस कदम के लिए कांग्रेस की मंज़ूरी ज़रूरी होगी और इसका कड़ा विरोध होने की उम्मीद है। व्हाइट हाउस में आयोजित राजकीय भोज के दौरान सम्राट चार्ल्स और ट्रंप के बीच हल्के-फुल्के अंदाज में ऐतिहासिक संदर्भों पर आधारित हास्यपूर्ण टिप्पणियां भी हुईं। सम्राट चार्ल्स ने ट्रंप के एक हालिया बयान का जवाब देते हुए मजाकिया लहजे में कहा कि यदि ब्रिटिश प्रभाव न होता तो शायद अमेरिकी फ्रेंच भाषा बोल रहे होते, जिस पर उपस्थित लोगों ने ठहाके लगाए। उल्लेखनीय है कि ट्रंप ने दावोस शिखर सम्मेलन में कहा था कि विश्व युद्ध-2 में अगर अमेरिका हस्तक्षेप न करता तो ब्रिटेन के लोग जर्मन और जापानी भाषाएं बोल रहे होते।</p>
<p>अमेरिकी मीडिया रिपोर्टों के अनुसार सम्राट चार्ल्स ने कुछ समकालीन विषयों पर भी बात की और व्हाइट हाउस के 'ईस्ट विंग' में हुए "पुनर्समायोजनों" का ज़िक्र किया। बताया जाता है कि ट्रंप ने एक नयी बॉलरूम परियोजना के हिस्से के तौर पर इस विंग को फिर से विकसित करवाया है। इसके बाद उन्होंने 1812 के युद्ध का एक ऐतिहासिक संदर्भ दिया, जब ब्रिटिश सेनाओं ने व्हाइट हाउस को जला दिया था। सम्राट चार्ल्स ने कहा, "मुझे यह कहते हुए अफ़सोस है कि हम ब्रिटिश लोगों ने 1814 में व्हाइट हाउस के रियल एस्टेट पुनर्विकास का प्रयास किया था।" उन्होंने 'बॉस्टन टी पार्टी' का भी ज़िक्र किया और मज़ाकिया लहजे में कहा कि यह 'स्टेट डिनर' 1773 के उस विरोध प्रदर्शन से 'काफ़ी बेहतर' है, जिसमें अमेरिकी उपनिवेशवादियों ने ब्रिटिश चाय को बंदरगाह में फेंक दिया था।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 29 Apr 2026 15:43:46 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>एन.पी.टी. के आसपास की स्थिति चिंताजनक, पश्चिमी देश इस संधि का कर रहा राजनीतिकरण : रूसी दूत</title>
                                    <description><![CDATA[जिनेवा में रूसी राजदूत गेनेडी गैतिलोव ने परमाणु अप्रसार संधि (NPT) के राजनीतिकरण पर चिंता जताई है। उन्होंने फ्रांस द्वारा "रूसी खतरे" के बहाने परमाणु हथियारों के संचय को वैश्विक स्थिरता के लिए जोखिम बताया। रूस ने स्पष्ट किया कि नाटो की शत्रुतापूर्ण योजनाओं का जवाब देने के लिए उनके पास पर्याप्त सुरक्षा उपाय मौजूद हैं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/the-situation-around-npt-is-worrying-western-countries-are-politicizing/article-151953"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/russia2.png" alt=""></a><br /><p>जिनेवा। जिनेवा में संयुक्त राष्ट्र के लिये रूस के स्थायी प्रतिनिधि गेनेडी गैतिलोव ने 'आर.आई.ए. नोवोस्ती' को दिए एक साक्षात्कार में कहा कि परमाणु अप्रसार संधि (एन.पी.टी.) के आसपास की स्थिति चिंताजनक है, क्योंकि पश्चिमी देश "संधि के मंच पर" कार्यों का राजनीतिकरण करना चाहते हैं। परमाणु अप्रसार संधि का 11वां समीक्षा सम्मेलन सोमवार को न्यूयॉर्क में शुरू हुआ। रूसी राजनयिक ने कहा, "सच कहूं तो, संधि के आसपास की स्थिति चिंताजनक है। पश्चिमी देश एन.पी.टी. मंच पर कार्यों का राजनीतिकरण करना जारी रखे हुए हैं, और संधि से असंबद्ध राष्ट्रीय मुद्दों को चर्चा के केंद्र में ला रहे हैं।"</p>
<p>गैतिलोव ने कहा कि "रूसी खतरे" के बहाने पेरिस परमाणु हथियारों का संचय कर रहा है, जो रूस की सुरक्षा के लिये तत्काल जोखिम पैदा करता है। राजनयिक ने कहा, "फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों की 'परमाणु' आकांक्षाओं का हमारे लिये एक महत्वपूर्ण पहलू यह है कि उन्हें एक काल्पनिक रूसी खतरे के माध्यम से उचित ठहराया जा रहा है। हमारा मानना है कि ऐसा घटनाक्रम न केवल रूस की सुरक्षा के लिये तत्काल जोखिम पैदा करता है, बल्कि रणनीतिक स्थिरता पर भी बहुत नकारात्मक प्रभाव डालता है।"</p>
<p>उन्होंने यह भी कहा कि यह "हमारे देश के प्रति फ्रांस और पूरे नाटो सैन्य-राजनीतिक गुट के शत्रुतापूर्ण इरादों की भी पुष्टि करता है।" रूसी राजदूत ने दावा किया कि रूस ने पेरिस द्वारा परमाणु हथियारों के संचय का जवाब देने के लिये पर्याप्त उपाय तैयार किये हैं। राजनयिक ने कहा, "रूसी संघ स्थिति की बारीकी से निगरानी कर रहा है। हम एक जिम्मेदार और संयमित दृष्टिकोण के प्रति प्रतिबद्ध हैं। साथ ही, यदि फ्रांस और अन्य नाटो देशों की उपरोक्त योजनाओं को पूरी तरह से लागू किया जाता है, तो निस्संदेह हमारे पास रूस और उसके नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिये पर्याप्त उपाय मौजूद हैं।"</p>
<p>मैक्रों ने मार्च में घोषणा की थी कि फ्रांस अपनी परमाणु निवारण नीति को मजबूत कर रहा है और उन्होंने परमाणु हथियारों की संख्या बढ़ाने का आदेश दिया था। उन्होंने यह भी कहा था कि फ्रांस को पूरे यूरोप को कवर करने के लिये अपनी परमाणु रणनीति का विस्तार करने पर विचार करना चाहिए। डेनमार्क ने पहले ही फ्रांस के साथ एक रणनीतिक परमाणु निवारण समझौता कर लिया है, जिसका उद्देश्य नाटो के निवारण तंत्र को पूरक बनाना है। पोलैंड भी इस पहल में शामिल होने के लिये पेरिस के साथ बातचीत कर रहा है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 28 Apr 2026 16:02:23 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>एनपीटी समीक्षा बैठक में पश्चिमी एशिया को परमाणु हथियार मुक्त क्षेत्र बनाने के पुराने वादे को प्राथमिकता मिलेः ईरान</title>
                                    <description><![CDATA[वियना में ईरानी मिशन ने मांग की है कि आगामी एनपीटी समीक्षा सम्मेलन में पश्चिमी एशिया को परमाणु मुक्त बनाने के वादों को प्राथमिकता दी जाए। ईरान ने चेतावनी दी कि इजरायल को संधि के दायरे में लाने में 30 साल की देरी ने एनपीटी की विश्वसनीयता को कम किया है। कार्रवाई न होने पर सम्मेलन विफल हो सकता है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/the-old-promise-of-making-western-asia-a-nuclear-weapon/article-151230"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/iran5.png" alt=""></a><br /><p>वियना। संयुक्त राष्ट्र के लिए ईरानी मिशन ने मंगलवार को वियना में कहा कि 2026 में होने वाले परमाणु अप्रसार संधि (एनपीटी) समीक्षा सम्मेलन में पश्चिमी एशिया को परमाणु हथियारों से मुक्त बनाने के पुराने वादों को प्राथमिकता मिलनी चाहिए। एनपीटी के 191 हस्ताक्षरकर्ता देशों में से अधिकांश के प्रतिनिधि 27 अप्रैल से 22 मई तक अमेरिका के न्यूयॉर्क में बैठक के लिए एकत्र होंगे। इस सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य परमाणु हथियारों के फैलाव को रोकना और परमाणु ऊर्जा के सुरक्षित इस्तेमाल को बढ़ावा देना है।</p>
<p>ईरानी मिशन ने सोशल मीडिया पर कहा कि 1995 में पश्चिमी एशिया को लेकर जो प्रस्ताव पास हुआ था, उसे अब पूरी तरह लागू करने का समय आ गया है। इस प्रस्ताव का मकसद इस पूरे क्षेत्र को परमाणु और सामूहिक विनाश के हथियारों से मुक्त करना था। ईरान का कहना है कि इसी वादे पर इस संधि को आगे बढ़ाया गया था, इसलिए जब तक यह लक्ष्य पूरा नहीं होता, यह प्रस्ताव प्रभावी रहना चाहिए। बयान में 2000 के एनपीटी समीक्षा सम्मेलन के परिणामों का भी उल्लेख किया गया, जिसमें इजरायल से संधि में शामिल होने और अपने सभी परमाणु केंद्रों को अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (आईएईए) के सुरक्षा घेरे में रखने का आग्रह किया गया था।</p>
<p>ईरान ने कहा कि पश्चिमी एशिया पर एनपीटी प्रतिबद्धताओं को लागू करने में '30 से अधिक वर्षों की अनुचित देरी' ने संधि की विश्वसनीयता को कम किया है और इसकी समीक्षा प्रक्रिया की प्रभावशीलता पर सवाल खड़े किए हैं। मिशन ने चेतावनी देते हुए कहा, "यह अनुचित देरी रुकनी चाहिए।" मिशन ने यह भी कहा कि कार्रवाई करने में विफलता आगामी समीक्षा सम्मेलन को एक 'विफल सम्मेलन' बना देगी।<br />उल्लेखनीय है कि इजरायल परमाणु अस्पष्टता की नीति बनाए रखता है, न तो वह परमाणु हथियार होने की पुष्टि करता है और न ही इससे इनकार करता है। वह एनपीटी का सदस्य भी नहीं है।</p>
<p>हर पांच साल में आयोजित होने वाला एनपीटी समीक्षा सम्मेलन, परमाणु हथियारों के प्रसार को रोकने के साथ-साथ परमाणु ऊर्जा के शांतिपूर्ण उपयोग और निशस्त्रीकरण को बढ़ावा देने वाली संधि के कार्यान्वयन का आकलन करने के लिए सदस्य देशों को एक साथ लाता है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 21 Apr 2026 18:25:46 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>ईरान नीति की आलोचना : चार पत्रकारों पर डोनाल्ड ट्रंप ने किए तीखे हमले, 'पागल' और 'मूर्ख' दिया करार</title>
                                    <description><![CDATA[राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान नीति की आलोचना करने वाले टकर कार्लसन और मेगिन केली जैसे पत्रकारों को 'कम आईक्यू' वाला और 'पागल' करार दिया है। उन्होंने 'मागा' (MAGA) का अर्थ मजबूती और ईरान को परमाणु मुक्त रखना बताया। ट्रंप ने आरोप लगाया कि ये पत्रकार सस्ती लोकप्रियता के लिए देश के हितों के खिलाफ बोल रहे हैं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/donald-trump-launches-sharp-attacks-on-four-journalists-who-criticized/article-149813"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/trump1.png" alt=""></a><br /><p>वाशिंगटन। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपनी ईरान नीति की आलोचना करने वाले चार दिग्गज पत्रकारों पर तीखा हमला बोलते हुए उन्हें 'पागल' और 'मूर्ख' करार दिया है। ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रूथ पर साझा किए गए एक पोस्ट में इन पत्रकारों को 'मुसीबत पैदा करने वाला' बताया और कहा कि वे सस्ती लोकप्रियता के लिए कुछ भी कह सकते हैं। उन्होंने मुख्य रूप से पत्रकार टकर कार्लसन, मेगिन केली, कैंडिस ओवेन्स और एलेक्स जोन्स पर निशाना साधते हुए कहा कि ये लोग वर्षों से उनके खिलाफ लिख रहे हैं तथा उन्हें (पत्रकारों) लगता है कि ईरान के पास परमाणु हथियार होना बहुत अच्छी बात है।</p>
<p>ईरान को 'आतंकवाद का नंबर एक प्रायोजक देश' बताते हुए अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा कि इन तथाकथित जानकारों में एक बात समान है और वह है इनका 'कम आईक्यू'। उन्होंने कहा, "ये मूर्ख लोग हैं, वे खुद यह जानते हैं, उनके परिवार वाले जानते हैं और बाकी दुनिया भी यह जानती है।" ट्रंप ने जोर देकर कहा कि 'मेक अमेरिका ग्रेट अगेन' (मागा) का मतलब जीत, मजबूती और ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने से रोकना है। उन्होंने दावा किया कि 'मागा' समर्थक उनके साथ हैं और उन्होंने टकर कार्लसन या मेगिन केली जैसे 'मूर्खों' के बजाय ट्रंप को शत-प्रतिशत 'अप्रूवल रेटिंग' दी है।</p>
<p>अमेरिकी राष्ट्रपति ने व्यक्तिगत हमला करते हुए मेगिन केली के पुराने सवालों, कैंडिस ओवेन्स द्वारा फ्रांस की प्रथम महिला पर की गई टिप्पणियों और एलेक्स जोन्स की बातों को मूर्खतापूर्ण बताया। उन्होंने केबल न्यूज नेटवर्क (सीएनएन) और न्यूयॉर्क टाइम्स जैसे मीडिया संस्थानों की भी आलोचना की और कहा कि ये संस्थान पहली बार इन लोगों को कवरेज दे रहे हैं क्योंकि वे ट्रंप के खिलाफ बोल रहे हैं। गौरतलब है कि यह विवाद तब शुरू हुआ जब इन पत्रकारों ने ईरान पर सैन्य हमलों के ट्रंप प्रशासन के फैसले की सार्वजनिक आलोचना की। टकर कार्लसन ने ईरान ऑपरेशन को 'घृणित' बताया था, जबकि कैंडिस ओवेन्स ने राष्ट्रपति ट्रंप को हटाने तक की मांग कर दी थी। एलेक्स जोन्स, जो लंबे समय तक श्री ट्रंप के समर्थक रहे, उन्होंने भी इस संघर्ष को लेकर अपना रुख बदल लिया है। यह टकराव 'मागा' आंदोलन के भीतर एक बड़ी दरार को दर्शाता है। अमेरिका फर्स्ट की विदेश नीति, विशेष रूप से ईरान युद्ध और इजरायल के साथ संबंधों को लेकर उपजे मतभेदों ने राष्ट्रपति ट्रंप को अपने पुराने सहयोगियों से अलग कर दिया है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 10 Apr 2026 14:04:00 +0530</pubDate>
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                <title>ट्रंप ने की पुष्टि : अंतिम समझौता होने तक ईरान के आसपास तैनात रहेंगे अमेरिकी जहाज़ और विमान, परमाणु हथियार विकसित करने पर लगाई रोक</title>
                                    <description><![CDATA[राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने स्पष्ट किया है कि ईरान के साथ पूर्ण समझौता लागू होने तक अमेरिकी युद्धपोत और सैन्य बल वहां तैनात रहेंगे। उन्होंने चेतावनी दी कि समझौते का उल्लंघन होने पर "बड़ा और घातक" पलटवार किया जाएगा। ट्रंप ने परमाणु हथियारों पर रोक और होर्मुज जलडमरूमध्य की सुरक्षा को अमेरिका की सर्वोच्च प्राथमिकता बताया है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/american-ships-and-aircraft-will-be-deployed-nearby-until-the/article-149716"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-01/trump3.png" alt=""></a><br /><p>वॉशिंगटन। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि ईरान के साथ अंतिम समझौते के पूरी तरह लागू होने तक उनके युद्धपोत, विमान और सैन्य बल ईरान के आसपास तैनात रहेंगे। ट्रंप ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ पर कहा, "अमेरिका के सभी जहाज, विमान और सैन्य कर्मी, अतिरिक्त गोला-बारूद, हथियार और अन्य सभी चीजें ईरान में और उसके आसपास तब तक तैनात रहेंगे, जब तक कि वास्तविक समझौते का पूरी तरह से पालन नहीं हो जाता।"</p>
<p>उन्होंने चेतावनी दी कि यदि समझौता लागू नहीं हुआ, तो संघर्ष पहले से कहीं अधिक "बड़ा, बेहतर और अधिक ताकतवर" रूप ले सकता है।अमेरिकी राष्ट्रपति ने यह भी कहा कि अमेरिका लंबे समय से इस बात पर कायम है कि ईरान परमाणु हथियार विकसित नहीं करेगा और होर्मुज जलडमरूमध्य खुला तथा सुरक्षित रहेगा। उन्होंने संकेत दिया कि अमेरिकी सेना हर स्थिति से निपटने के लिए तैयार है और आगे की कार्रवाई के लिए पूरी तरह से सतर्क है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 09 Apr 2026 15:30:56 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>चीन का बड़ा दावा, जापान के पास इतना प्लूटोनियम कि रातो-रात बना ले परमाणु बम </title>
                                    <description><![CDATA[चीन ने एक रिपोर्ट जारी कर दावा किया कि जापान ने सैन्य महत्वाकांक्षाओं के चलते गुपचुप तरीके से परमाणु हथियार विकसित किए हैं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/chinas-big-claim-is-that-japan-has-enough-plutonium-to/article-139751"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-01/cbina.png" alt=""></a><br /><p>टोक्यो। दूसरे विश्वयुद्ध के दौरान अमेरिका ने जापान के हिरोशिमा और नागासाकी शहरों पर परमाणु बम गिराए थे। उसके बाद जापान ने प्रण लिया था कि वो अपनी सेना नहीं रखेगा। कई दशक बीतने के बाद अब जापान ना सिर्फ अपनी सेना बना रहा है, बल्कि चीन ने दावा किया है कि जापान, गुप्त तरीके से परमाणु बम का निर्माण कर रहा है।</p>
<p>हालांकि, परमाणु हथियारों को लेकर जापान का हमेशा से सख्त रूख रहा है और उसने फरवरी 1970 में क्लियर नॉन-प्रोलिफरेशन ट्रीटी पर साइन कर दिए थे। इसके अलावा जापान तीन नॉन-न्यूक्लियर सिद्धांतों का भी पालन करता है। ये तीन सिद्धांत हैं 1- न्यूक्लियर हथियार न रखना, 2- न्यूक्लियर हथियार ना बनाना, 3- जापानी इलाके में न्यूक्लियर हथियारों को आने की इजाजत न देना। जापान का ये सिद्धांत ऐतिहासिक था, लेकिन नये जियो-पॉलिटिकल हालातों और चीन के बढ़ते खतरों ने जापान को परमाणु हथियार बनाने के लिए मजबूर कर दिया है।</p>
<p>जापान की नई प्रधानमंत्री सनाए ताकाइची ने पिछले दिनों कहा था कि चीन अगर ताइवान पर सशस्त्र हमला करता है, तो इससे जापान के लिए अस्तित्व का खतरा पैदा हो सकता है, जिससे ऐसे हालात में जापानी सेना की जवाबी कार्रवाई की संभावना खुल जाती है। चीन के अलावा जापान को उत्तर कोरिया के हमले की भी आशंका रहती है, जिसके पास पहले से ही परमाणु हथियार हैं। रिपोर्ट है कि जापान ने चीन, रूस और उत्तर कोरिया जैसे देशों के खतरों को देखते हुए दूसरे देशों को जानलेवा हथियार एक्सपोर्ट करने पर खुद लगाई गई पाबंदियों में ढील दी है। </p>
<p>क्या जापान चोरी से बना रहा परमाणु बम?</p>
<p>चीन ने इस हफ्ते की शुरूआत में 30 पन्नों की एक रिपोर्ट जारी की है। इसमें उसने इंटरनेशनल कम्युनिटी से जापान की न्यूक्लियर महत्वाकांक्षाओं के खिलाफ ठोस और कड़े कदम उठाने की अपील की है। चीन के रिपोर्ट में कहा गया है कि जापान ने शायद पहले ही गुपचुप तरीके से हथियार बनाने लायक प्लूटोनियम बना लिया है और उसके पास कम समय में न्यूक्लियर हथियार हासिल करने की टेक्नोलॉजिकल और आर्थिक क्षमताएं हैं। इसमें अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति जो बाइडेन की एक टिप्पणी का भी जिक्र किया गया है कि जापान के पास लगभग रातों-रात न्यूक्लियर हथियार बनाने की क्षमता है। बाइडेन ने यह जानकारी सबसे पहले जून 2016 में दिए एक इंटरव्यू में दी थी।</p>
<p>शी जिनपिंग के साथ हुई बातचीत को याद करते हुए बाइडेन ने कहा था कि क्या होगा अगर जापान, जो कल न्यूक्लियर पावर बन सकता है, कल ही न्यूक्लियर हथियार बना ले? उनके पास लगभग रातों-रात ऐसा करने की क्षमता है। चीन ने जो रिपोर्ट जारी की है, उसका शीर्षक जापान के दक्षिणपंथी ताकतों की न्यूक्लियर महत्वाकांक्षाएं: विश्व शांति के लिए एक गंभीर खतरा नाम से है, जो करीब 30 पन्नों का है।</p>
<p>यह रिपोर्ट चाइना आर्म्स कंट्रोल एंड डिसआमार्मेंट एसोसिएशन और न्यूक्लियर स्ट्रेटेजिक प्लानिंग रिसर्च इंस्टीट्यूट, जो चाइना नेशनल न्यूक्लियर कॉपोर्रेशन से जुड़ा एक थिंक टैंक है, उसने मिलकर तैयार किया है। इस डील में कहा गया है कि एनपीटी संधि के तहत जापान की अंतरराष्ट्रीय प्रतिबद्धताएं हैं, कि वो परमाणु हथियारों का निर्माण नहीं करेगा, लेकिन उसने गुपचुप तरीके से न्यूक्लियर हथियारों पर रिसर्च और डवलपमेंट किया है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 16 Jan 2026 11:39:44 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>ट्रंप के परमाणु हथियारों के परीक्षण संबंधी बयान की हो रही आलोचना : अमेरिका दुनिया में परमाणु प्रसार का सबसे बड़ा खतरा, ईरान ने कहा- यह अंतराष्ट्रीय कानूनों का उल्लंघन </title>
                                    <description><![CDATA[अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा परमाणु परीक्षण फिर शुरू करने की घोषणा पर वैश्विक आलोचना हुई है। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने इसे अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन और विश्व शांति के लिए खतरा बताया। ट्रंप ने रक्षा विभाग को परीक्षण का आदेश दिया है। रूस ने चेतावनी दी कि अमेरिका ऐसा करता है तो वह भी जवाबी परीक्षण करेगा।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/trumps-statement-regarding-testing-of-nuclear-weapons-is-being-criticized/article-131107"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-10/6622-copy.jpg1112.jpg" alt=""></a><br /><p>वॉशिंगटन। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की फिर से परमाणु परीक्षण शुरू करने की घोषणा पर दुनिया से तीखी प्रतिक्रिया आ रही है। इसे एक भड़काऊ और दुनिया को फिर से परमाणु की दौड़ में धकेल देने वाले बयान के रूप में देखा जा रहा है। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने एक्स पर एक पोस्ट लिखकर ट्रंप के बयान की तीखी आलोचना की। उन्होंने कहा कि अपने रक्षा विभाग का नाम बदलकर युद्ध विभाग रखने वाला परमाणु हथियारों से लैस दबंग देश खुद परमाणु हथियारों का परीक्षण करने जा रहा है। यही दबंग देश ईरान के शांतिपूर्ण परमाणु कार्यक्रम को बदनाम कर रहा है और हमारे सुरक्षित परमाणु प्रतिष्ठानों पर हमले की धमकी दे रहा है। अराघची ने कहा कि यह अंतराष्ट्रीय कानूनों का घोर उल्लंघन है।</p>
<p>ईरान के विदेश मंत्री ने साफ तौर पर कहा कि अमेरिका दुनिया में परमाणु प्रसार का सबसे बड़ा खतरा है। ट्रंप ने दक्षिण कोरिया में एशिया-प्रशांत आर्थिक सहयोग (एपेक) शिखर सम्मेलन से इतर चीन के प्रधानमंत्री शी जिनपिंग से मुलाकात से ठीक पहले अपने ट्रूथ सोशल प्लेटफॉर्म पर लिखा था कि उन्होंने अमेरिका के रक्षा विभाग को परमाणु हथियारों के परीक्षण का आदेश दिया है। देशों के परीक्षण कार्यक्रमों के कारण, मैंने युद्ध विभाग को निर्देश दिया है कि वे हमारे परमाणु हथियारों का समान परीक्षण शुरू करें।</p>
<p>रूस ने अमेरिकी राष्ट्रपति के इस बयान पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि रूस ने हाल में कोई परीक्षण नहीं किया है, लेकिन अगर अमेरिका ऐसा करता है तो रूस भी परमाणु हथियारों का परीक्षण शुरू कर देगा। क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेसकोव ने संवाददाताओं से कहा कि मैं राष्ट्रपति पुतिन के उस बयान को याद दिलाना चाहता हूँ, जो कई बार दोहराया गया है, अगर कोई प्रतिबंध का उल्लंघन करता है, तो रूस उसके अनुसार कार्रवाई करेगा। </p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 31 Oct 2025 17:11:00 +0530</pubDate>
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