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                <title>stopping - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <title>कब्जे की नियत से विशालकाय पेड़ों पर चल रही कुल्हाड़ी</title>
                                    <description><![CDATA[वनभूमि पर कब्जे करने की नीयत से सैकड़ों बीघा भूमि को वन विहीन कर दिया है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/baran/axes-are-being-used-on-giant-trees-with-the-intention-of-occupation/article-90146"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-09/2rtrer-(3).png" alt=""></a><br /><p>केलवाड़ा। क्षेत्र में भू-माफियाओं के द्वारा वन विभाग की जमीन पर कब्जे की नियत से विशालकाय पेड़ों को ध्वस्त किया जा रहा है। पेड़ों पर कुल्हाड़ियां क्षेत्र में थमने का नाम नहीं ले रही है। वन विभाग एवं चारागाह में खड़े पेड़ों को भू-माफिया दिनदहाड़े ढेर करने में लगे हुए हैं। ऐसा क्षेत्र में पहली बार नहीं हुआ है और ना ही यह क्रम आज तक बंद हुआ है। लगातार वनों का विनाश का खेल दिनदहाड़े किया जा रहा है। जिम्मेदार इस और कोई ध्यान नहीं दे रहे हैं। केलवाड़ा क्षेत्र में 4 से 5 वन नाकों  की भूमि लगीं हुई है। भू-माफियाओं ने अब तक हजारों बीघा भूमि को अपना शिकार बना लिया है। बुरी तरह से भूमि का स्वरूप बिगाड़ दिया है। जहां पर हजारों की संख्या में पेड़ हुआ करते थे। आज इनकी वजह से गहरे गहरे गड्ढे ही नजर आ रहे हैं। जब भी अवैध खनन को अंजाम दिया जाता है। इसकी सूचना ग्रामीणों स्थानीय वन कर्मियों को देते है परंतु कोई भी अधिकारी मौके पर नहीं पहुंचता।</p>
<p><strong>सैकड़ों बीघा भूमि को कर दिया वन विहीन</strong><br /> एनएच 27 के निकट सिद्ध बाबा चबूतरे के पास भू-माफियों द्वारा विशालकाय  पेड़ों को ढेर किया जा रहा है, आए दिन पेड़ों पर दिनदहाड़े कुल्हाड़ियां चलाई जा रही है। वनभूमि पर कब्जे करने की नीयत से सैकड़ों बीघा भूमि को वन विहीन कर दिया है। दूसरी और सिद्ध बाबा चबूतरे कुछ दूरी पर टपरियां बनाकर लोक निवास कर रहे हैं एवं पास ही में पेड़ों की कटाई की जा रही है।</p>
<p><strong>इनका कहना है </strong><br />अतिक्रर्मियों पर शीघ्र कार्रवाई की जाएगी। पेड़ों की कटाई पर अंकुश लगाया जाएगा हालांकि वन विभाग की टीम लगातार गश्त कर रही है।<br /><strong>- दीनदयाल सहरिया, फॉरेस्टर, भंवरगढ़। </strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>बारां</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 10 Sep 2024 16:03:02 +0530</pubDate>
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                <title>विभाग के पास संसाधनों का अभाव, खतरे में जंगलों की सुरक्षा </title>
                                    <description><![CDATA[शाहाबाद क्षेत्र के जंगलों में खैर की लकड़ी की अवैध तस्करी सहित वन अपराध रोकने में वन विभाग मुस्तैदी से जुटे है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/baran/department-lacks-resources--safety-of-forests-in-danger/article-77951"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-05/photo-size-(8).png" alt=""></a><br /><p>शाहाबाद। शाहाबाद उपखंड मुख्यालय शाहाबाद क्षेत्र में 49 हजार हैक्टेयर भूमि पर जंगल फैला हुआ है और यही जंगल शाहाबाद क्षेत्र की पहचान है। पुराने समय से ही शाहाबाद के जंगल लोगों के लिए घूमने का प्रमुख केंद्र रहे हैं।  शाहाबाद क्षेत्र के जंगलों में खैर की लकड़ी की अवैध तस्करी सहित वन अपराध रोकने में वन विभाग मुस्तैदी से जुटे है। शाहाबाद क्षेत्रीय वन अधिकारी ने बताया कि पिछले दिनों की गई कार्रवाई में तीन ट्रक, दो मेटाडोर, तीन पिकअप व उनकी रैकी करते हुए एक लग्जरी कार तथा बाइक को जब्त किया गया। खैर की तस्करी के विरुद्ध शनिवार को वन विभाग ने 10 वाहनों को जब्त किया। डीसीएफ बारां अनिल यादव के निर्देशन में शाहाबाद क्षेत्र में लकड़ी, वन्य जीव से लेकर अवैध खनन तक की कार्रवाई को वन विभाग अंजाम दे रहा है। उन्होंने बताया कि  वन विभाग ने तस्करों के पूरे तंत्र का पदार्फाश करते हुए उनके नेटवर्क को तोड़ दिया है। इन वाहनों को राजसात करवाने की प्रक्रिया अमल में लाई जा रही है। वहीं तस्करों के विरुद्ध पुख्ता कार्रवाई करते हुए विभाग द्वारा उनको जेल भिजवाया जाता है।</p>
<p><strong>नेशनल हाईवे पर खुले सुरक्षा वन चौकी</strong><br /> क्षेत्र मथुरा लाल सहरिया, रामचरण माली रामनिवास सुरजन आदि ने सरकार से मांग की है की नेशनल हाईवे 27 पर वन चौकी खोली जाए। जिससे अवैध तस्करी लकड़ी की करने वालों पर लगाम लग सकेगी। साथ ही जंगल की सुरक्षा हो सकेगी। पहले भी बालचर पर एक चौकी बनी हुई थी। जिस पर वन विभाग के कर्मचारी रहते थे लोगों लोगों को वन उपज से जोड़ने का काम किया जाए तथा जंगल में प्लांटेशन में ऐसे पौधे लगे जिसे भविष्य में रोजगार के अवसर भी क्षेत्र के लोगों को मिल सकें।  </p>
<p><strong>स्टाफ की कमी</strong><br />वन विभाग संसाधन और कर्मचारियों की कमी से लगातार जूझ रहा है, इसके बावजूद कार्रवाई जारी है। क्षेत्रीय वन अधिकारी मोहम्मद हफीज ने कहा कि तस्कर वाहनों से आते हैं और उनके पास रैकी करने वाले लोग होते हैं। संभवत: वह हथियार भी रखते होंगे। पीछा करने अथवा घेराबंदी करने पर वनकर्मियों को वाहन से टक्कर भी मारने का प्रयास करते हैं। वनकर्मी केवल अपने डंडे के सहारे ही जंगलों में गश्त करते हैं। कार्रवाई को अंजाम देते हैं। उन्होंने कहा कि क्षेत्र में स्टाफ की कमी होने के बावजूद लगातार अवैध गतिविधियों के खिलाफ कार्रवाई जारी है। उन्होंने आमजन से अपील की है कि वन क्षेत्र में अवैध गतिविधि की सूचना वन विभाग, पुलिस को देकर वन संरक्षण में सहयोग करें।</p>
<p><strong>इनका कहना है</strong><br /> सीमित संसाधनों के बावजूद वन विभाग पूरी मुस्तैदी से वन क्षेत्र की सुरक्षा में लगा है। लगातार लकड़ी तस्करों पर कार्रवाई की जा रही है। वनकर्मी केवल अपने डंडे के सहारे ही जंगलों में गश्त करते हैं। <br /><strong>- मोहम्मद हफीज,  क्षेत्रीय वन अधिकारी। </strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>बारां</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 14 May 2024 16:58:03 +0530</pubDate>
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                <title>श्रीलंका: नहीं थम रहा राष्ट्रपति भवन की झलक चाहने वालों का कारवाँ </title>
                                    <description><![CDATA[कोलंबो। श्रीलंका की सबसे सुरक्षित इमारतों में शामिल राष्ट्रपति भवन परिसर में भारी भीड़ के घुस जाने के दो दिन बाद भी हजारों लोग राष्ट्रपति भवन देखने के लिए उमड़ रहे हैं। शनिवार की हुई नाटकीय घटनाओं के कारण राष्ट्रपति गोटबाया राजपक्षे को यहां से भागने को मजबूर होना पड़ा है। इस घटना के बाद से राष्ट्रपति भवन में हर दिन हजारों की संख्या में लोग यहां आ रहे हैं। कोई सोफों पर आराम फरमा रहा है तो कोई पियानो बजाकर लोगों का मनोरंजन कर रहा है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/sri-lanka-the-caravan-of-those-who-want-a-glimpse/article-14116"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-07/d-22.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>कोलंबो।</strong> श्रीलंका की सबसे सुरक्षित इमारतों में शामिल राष्ट्रपति भवन परिसर में भारी भीड़ के घुस जाने के दो दिन बाद भी हजारों लोग राष्ट्रपति भवन देखने के लिए उमड़ रहे हैं। शनिवार की हुई नाटकीय घटनाओं के कारण राष्ट्रपति गोटबाया राजपक्षे को यहां से भागने को मजबूर होना पड़ा है। इस घटना के बाद से राष्ट्रपति भवन में हर दिन हजारों की संख्या में लोग यहां आ रहे हैं। कोई सोफों पर आराम फरमा रहा है तो कोई पियानो बजाकर लोगों का मनोरंजन कर रहा है। वहीं कुछ लोग अपने परिवार के साथ पिकनिक मनाते नजर आ रहे हैं।  राष्ट्रपति भवन में सोमवार को भी हजारों मर्द, औरतें और बच्चे प्रवेश कर रहे थे। उपनिवेश काल की वास्तुकला वाली इस इमारत में कई बरामदे, मीटिंग रूम, रिहायशी जगह के साथ एक स्विमिंग पूल और एक विशाल लॉन भी हैं। विरोध प्रदर्शन करने वाले कुछ लोग वहां आ रही भीड़ को नियंत्रित कर रहे थे, जबकि पुलिस और खास सैनिक दस्ते के लोग कोने में केवल खड़े होकर चुपचाप यह सब होता देख रहे थे।</p>
<p><strong>राष्ट्रपति भवन में सेल्फी लेने की होड़</strong><br />वहां लोग एक कमरे से दूसरे कमरे में घूम रहे थे। वे सागवान से बने फर्नीचरों और वहां लगी तस्वीरों के सामने और रिहायशी कमरों में  घूम घूमकर सेल्फी लेकर इस पल को कैद कर रहे थे। देश में विरोध प्रदर्शन करने वाले नेता पहले ही कह चुके हैं कि राष्ट्रपति और  प्रधानमंत्री के सरकारी आवासों को वे तब तक नहीं छोड़ेंगे, जब तक वे दोनों अपने अपने पद नहीं छोड़ देते।</p>
<p><strong>स्वीमिंग पूल पर अटकी लोगों की निगाहें</strong><br />राष्ट्रपति भवन पहुंची भीड़ को सबसे ज्यादा वहां के स्वीमिंग पूल ध्यान खींच रहे हैं। लोग वहां खड़े होकर पानी से भरे इस पूल को निहार रहे हैं। शनिवार को स्वीमिंग पूल में नहाते प्रदर्शनकारियों के वीडियो हर जगह वायरल हुए थे। इस बीच जब एक युवक ने इस पूल में तैरने के लिए छलांग लगाई, तो वहां खड़े लोगों ने ताली बजाकर शोर मचाया। वहीं इस परिसर में चार बड़े बिस्तरों पर युवकों के झुंडों को आराम फरमाते देखा गया। श्रीलंका में सबसे ज्यादा बोली जाने वाली तीनों भाषाओं- सिंहल, तमिल और अंग्रेजी, को वहां के गलियारों में आसानी से सुना जा रहा था। वहां पहुंचने वाले लोगों में मौजूद उत्साह साफ तौर पर झलक रहा था। राष्ट्रपति भवन में करीने से तैयार विशाल लॉन में बौद्ध, हिंदू और ईसाई धर्मों के सैकड़ों लोग एक-दूसरे से मिल रहे थे। वहीं वहां पहुंचा एक परिवार लॉन की घास पर लापरवाही से पिकनिक मना रहा था। हालांकि केवल 24 घंटे पहले उन्हें वहां घुसने तक की इजाजत नहीं मिलती थी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 12 Jul 2022 13:23:17 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>ऑस्ट्रेलिया ने महामारी को रोकने के नाम पर मार दी करोड़ों मधुमक्खियां</title>
                                    <description><![CDATA[कैनबरा। ऑस्ट्रेलिया दुनिया का वो देश, जहां पर सबसे ज्यादा शहद का उत्पादन होता है। जहां से दुनिया के दूसरे देशों को शहद निर्यात होता है। अब यहां पर शहद बनाने वाली मधुमक्खियों पर आफत आ गई है। यहां पर इंडस्ट्री को बचाने के लिए मधुमक्खियों को मारा जा रहा है। अब आप सोच रहे होंगे कि मधुमक्खियों को मार कर इंडस्ट्री कैसे बचेगी?]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/australia-killed-millions-of-bees-in-the-name-of-stopping-the-epidemic/article-13726"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-07/bees.jpg" alt=""></a><br /><p>कैनबरा। ऑस्ट्रेलिया दुनिया का वो देश, जहां पर सबसे ज्यादा शहद का उत्पादन होता है। जहां से दुनिया के दूसरे देशों को शहद निर्यात होता है। अब यहां पर शहद बनाने वाली मधुमक्खियों पर आफत आ गई है। यहां पर इंडस्ट्री को बचाने के लिए मधुमक्खियों को मारा जा रहा है। अब आप सोच रहे होंगे कि मधुमक्खियों को मार कर इंडस्ट्री कैसे बचेगी? दरअसल इसकी वजह है एक खतरनाक बीमारी और अगर इसे नहीं रोका गया तो फिर पूरी इंडस्ट्री चौपट हो जाएगी। ऑस्ट्रेलिया की शहद इंडस्ट्री पर इस समय वारोआ मिटे प्लेग का साया मंडरा रहा है और इसलिए ही रोजाना मधुमक्खियां मारी जा रही हैं।<br /><br /><strong>नहीं था कोई और विकल्प</strong><br />अब तक 600 छत्तों में मौजूद कई मधुमक्खियों को मारा जा चुका है। वहीं कई लाखों मधुमक्खियों को मारे जाने का प्लान तैयार किया जा चुका है। आॅस्ट्रेलिया में अथॉरिटीज का मानना है कि अगर बीमारी को आगे बढ़ने से रोकना है तो फिर मधुमक्खियों को मारना ही पड़ेगा। इसके अलावा कोई और आॅप्शन फिलहाल नहीं है। छह मील के दायरे में इन मधुमक्खियों को मारने के लिए इरैडिकेशन जोन बनाया गया है। अथॉरिटीज का मकसद है कि दुनिया को इस खतरनाक प्लेग से किसी तरह बचाया जा सके।</p>
<p><br /><strong>18 मिलियन मधुमक्खियों की मौत</strong><br />न्यू साउथ वेल्स के चीफ प्लांट प्रोटेक्शन ऑफिसर सतेंद्र कुमार ने बताया कि ऑस्ट्रेलिया वो अकेला सबसे बड़ा शहद उत्पादक देश है जो इस समय वारोआ मिटे प्लेग से मुक्त हो चुका है। उन्होंने जानकारी दी कि ये प्लेग ऑस्ट्रेलिया की शहद इंडस्ट्री को 70 मिलियन डॉलर का चूना लगा सकता है। डैनी ले फ्यूवेरे जो ऑस्ट्रेलिया की शहद इंडस्ट्री काउंसिल के कार्यवाहक मुखिया हैं, उन्होंने बताया कि उनकी टीम ने पहले ही 600 छत्तों को खत्म कर दिया है और हर छत्ते में 30,000 मधुमक्खियां थीं। कम से कम इन छत्तों में कुल 18 मिलियन मधुमक्खियां मौजूद थीं। जो प्लेग ऑस्ट्रेलिया में मधुमक्खियों को शिकार बना रहा है, उसकी वजह से उनकी उड़ने, भोजन जुटाने और शहद का उत्पादन करने की क्षमता पर खासा असर पड़ता है। इस प्लेग की वजह से ऑस्ट्रेलिया में मधुमक्खियों की संख्या खासी प्रभावित हुई है।<br /><br /> जून के अंत में सबसे पहले ऑस्ट्रेलिया में इस प्लेग का पता चला था और तब से ही शहद उत्पादकों ने पूरी तरह से लॉकडाउन लगा दिया है। ऑस्ट्रेलिया में सन 1822 में सबसे पहली मधुमक्खी एपिस मेलीफेरा लाई गई थी। अब ऑस्ट्रेलिया में बड़े पैमाने पर मधुमक्खी पालक मौजूद हैं और गांवों के हर घर में मधुमक्खियों को पाला जाता है। आज मधुमक्खियां और शहद यहां की अर्थव्यवस्था का मुख्य सोर्स है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 06 Jul 2022 14:20:40 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>पेयजल पाइप लाइन के कार्य को रूकवाकर कालोनीवासियों ने किया प्रदर्शन </title>
                                    <description><![CDATA[ शहर की सुभाष कॉलोनी में पीछे की लाईन में भी पेयजल पाइपलाइन बिछाने की मांग को लेकर कॉलोनीवासियों ने प्रदर्शन किया और  आगे की ओर डाली गई लाइन का काम रूकवा दिया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/sawai-madhopur/colonists-demonstrated-by-stopping-the-work-of-drinking-water-pipeline/article-12421"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-06/ton-3.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>निवाई।</strong> शहर की सुभाष कॉलोनी में पीछे की लाईन में भी पेयजल पाइपलाइन बिछाने की मांग को लेकर कॉलोनीवासियों ने प्रदर्शन किया और  आगे की ओर डाली गई लाइन का काम रूकवा दिया। प्रदर्शन की सूचना जलदाय विभाग के कनिष्ठ अभियंता ने उच्च अधिकारियों और पुलिस को दी। सूचना पर तहसीलदार प्रांजल कंवर, नायब तहसीलदार रामजीलाल मीणा, जलदाय विभाग के सहायक अभियंता नितिन जैन एवं पुलिस जाप्ता प्रदर्शन स्थल पर  पहुंचा। तहसीलदार ने प्रदर्शन कर रही कालोनी की महिलाओं से मामले की जानकारी ली।   कालोनीवासी  नारंगी,राधा, छोटा, सीता, प्रेम देवी, मनभर,गलोल देवी, मनोहर देवी, नंदू देवी, टिक्की देवी, आशा, गीता, कमला, मनीषा,दिनेश, मोहित, शंकर, हनुमान सहित अन्य ने बताया कि विभाग द्वारा कालोनी में आगे की लाइन में बीसलपुर पेयजल योजना की पेयजल लाईन डाली गई है। </p>
<p>जबकि कालोनी में पीछे की तरफ भी आबादी निवास करती है जिसमें पाइन लाइन डालने का काम नहीं किया गया है। उन्होंने बताया कि प्रतिदिन तीन किलोमीटर दूर से पीने का पानी लाना पड रहा है। हैड पंपों में फ्लोराइड युक्त पानी है जिससे कॉलोनी के लोगों के स्वास्थ्य पर दुष्प्रभाव पड रहा है। कालोनीवासियों ने तहसीलदार को बताया कि जब तक पीछे की लाइन में पाइन लाइन नहीं डाली जाती है तब तक आगे डाली गई लाइन का कार्य नहीं करने दिया जाएगा। इसके बाद तहसीलदार कंवर ने जलदाय विभाग के सहायक अभियंता को कॉलोनी के पीछे भी पाइपलाइन बिछाने  के निर्देश दिए। तहसीलदार ने एक दिन बाद पाइपलाइन बिछवाने का प्रदर्शनकारी लोगों को लिखित आश्वासन दिया। इसके बाद महिलाओं ने अपना प्रदर्शन समाप्त कर दिया। इसके बाद  कॉलोनीवासी राजीव गांधी सेवा केन्द्र पहुंचकर जन सुनवाई के दौरान एसडीएम त्रिलोकचंद मीणा से भी बीसलपुर पेयजल योजना से जोडने की मांग की। <br />16 निवाई02-  <br /> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>सवाई माधोपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 17 Jun 2022 13:50:33 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>परीक्षाओं में नकल रोकने की जिम्मेदारी अब पुलिस को मिलेगी</title>
                                    <description><![CDATA[ जयपुर। प्रदेश में परीक्षाओं में नकल रोकने का जिम्मा अब पुलिस को सौंपा जाएगा। इसके लिए एसओजी में नकल निरोधक इकाई गठित की जाएगी। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/police-will-now-get-the-responsibility-of-stopping-cheating-in-examinations--anti-copying-unit-will-be-formed-in-sog/article-4809"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-02/kalam-kaimuri.jpg" alt=""></a><br /><p> जयपुर। प्रदेश में परीक्षाओं में नकल रोकने का जिम्मा अब पुलिस को सौंपा जाएगा। इसके लिए एसओजी में नकल निरोधक इकाई गठित की जाएगी। रीट परीक्षा प्रकरण को लेकर मचे बवाल के बाद राज्य सरकार नकल रोकने को लेकर काफी गंभीर है। इसके लिए विधानसभा के चालू सत्र में कठोर कानून भी बनाया जा रहा है। एसओजी में इकाई गठित करने के लिए पुलिस मुख्यालय ने गृह विभाग को प्रस्ताव भेजा है। इस पर मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के स्तर पर विचार किया जा रहा है। संभवत: विधानसभा के इसी सत्र में इसकी भी घोषणा की जाएगी। यह इकाई प्रदेश में परीक्षाओं के दौरान पेपर लीक रोकने और नकल माफिया के खिलाफ  जांच करेगी। <br /><br /><strong>ऐसे करते हैं नकल माफिया काम</strong><br />गृह विभाग को मिली रिपोर्ट के अनुसार नकल माफिया से जुड़े लोग परीक्षा से पूर्व पेपर आउट कर परीक्षार्थियों को पेपर उपलब्ध करवाते हैं। अभ्यर्थी की जगह पर डमी अभ्यर्थी बिठानाने के साथ ही परीक्षा केन्द्र पर उत्तर कुंजी उपलब्ध करवाते हैं।परीक्षार्थी से ओएमआर शीट खाली रखवा कर परीक्षा केन्द्र के अन्दर ही परीक्षा के बाद वीक्षकों द्वारा ओएमआर शीट भरवाई जाती है। नकल माफियाओं द्वारा परीक्षा केन्द्र पर फर्जी वीक्षक की ड्यूटी लगवाना एवं उससे पेपर में नकल करवाते हैं। ब्लूटूथ द्वारा नकल करवाते हैं। <br /><br /><strong>हर साल तीन करोड़ 36 लाख होंगे खर्च</strong><br />राज्य सरकार को भेजे गए प्रस्ताव के अनुसार नकल निरोधक ईकाई के लिए एक अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक, एक उप अधीक्षक पुलिस, तीन पुलिस निरीक्षक तथा पांच एसआईए दो एएसआई, एक हैडकांस्टेबल तथा 14 कांस्टेबल और सात दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों सहित 27 पद मांगे गए हैं। इन पदों पर तीन करोड़ 36 लाख रुपए का सालना खर्च होगा।  नकल निरोधक यूनिट के लिए तीन चौपहिया वाहन, तीन मोटरसाइकिल के साथ फर्नीचरए, वायरलेस सेट सहित अन्य संसाधनों की मांग की गई है। इनमें वाहनों करीब 30 लाख रुपए तथा संसाधनों पर 35 लाख रुपए खर्च होने का अनुमान है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 22 Feb 2022 11:58:03 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Administrator]]></dc:creator>
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                <title>गाड़ी रुकवाकर प्रियंका वाड्रा ने पूछा, मैं कहां पर हूं...</title>
                                    <description><![CDATA[कार्यकर्ता बोले : चिकित्सा मंत्री परसादीलाल के विधानसभा क्षेत्र लालसोट में]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/dausa/%E0%A4%97%E0%A4%BE%E0%A5%9C%E0%A5%80-%E0%A4%B0%E0%A5%81%E0%A4%95%E0%A4%B5%E0%A4%BE%E0%A4%95%E0%A4%B0-%E0%A4%AA%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A4%BF%E0%A4%AF%E0%A4%82%E0%A4%95%E0%A4%BE-%E0%A4%B5%E0%A4%BE%E0%A4%A1%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A4%BE-%E0%A4%A8%E0%A5%87-%E0%A4%AA%E0%A5%82%E0%A4%9B%E0%A4%BE--%E0%A4%AE%E0%A5%88%E0%A4%82-%E0%A4%95%E0%A4%B9%E0%A4%BE%E0%A4%82-%E0%A4%AA%E0%A4%B0-%E0%A4%B9%E0%A5%82%E0%A4%82-/article-2814"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2021-11/priyanka-gandhi-vadra.jpg" alt=""></a><br /><p> लालसोट। दिल्ली से सवाईमाधोपुर जाते समय कांग्रेस महासचिव प्रियंका वाड्रा रविवार सुबह कुछ देर के लिए दौसा जिले के लालसोट में एक शोरूम के सामने रुकीं। जहां कार्यकर्ताओं ने उनका स्वागत किया।  प्रियंका वाड्रा ने स्वागत के लिए मौजूद भीड़ में से वरिष्ठ कांग्रेस कार्यकर्ता व पूर्व चेयरमैन दिनेश मिश्र से पूछा कि वह कहां पर हैं। तब उन्होंने जवाब दिया कि वे ‘राजस्थान के चिकित्सा मंत्री परसादी लाल मीणा के निर्वाचन क्षेत्र लालसोट’ में हैं। यहां पर कार्यकर्ता उनका स्वागत कर रहे हैं। <br /> <br /> किए टाइगर के दीदार<br /> दोपहर 11:40 बजे पर प्रियंका गांधी अपने काफिले के साथ निजी यात्रा पर रणथंभौर पहुंचीं। प्रियंका गांधी वाड्रा करीब 12 बजे होटल शेर बाघ पहुंची जिसके बाद वह होटल से आमा घाटी होते हुए सिंहद्वार पहुंची और जोन नम्बर-2 से टाइगर सफारी के लिए एंट्री ली। इस दौरान प्रियंका गांधी ने टाइगर के दीदार किए। उन्होंने जोन नम्बर-2 में बाघिन एरोहेड और बाघ टी-101 देखे। प्रियंका रणथंभौर के होटल शेर बाघ में तीन दिन तक रहेंगी। प्रियंका के यहां ठहरने के कारण होटल के अंदर और बाहर कड़ी सुरक्षा की गई है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>दौसा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 29 Nov 2021 12:16:20 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Administrator]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>बारिश के पानी को रोकने से बचेंगी ‘बरसाती नदियां’</title>
                                    <description><![CDATA[अनेक जिलों में बहने वाली बरसाती नदियां सूख गई]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/%E0%A4%AC%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A4%BF%E0%A4%B6-%E0%A4%95%E0%A5%87-%E0%A4%AA%E0%A4%BE%E0%A4%A8%E0%A5%80-%E0%A4%95%E0%A5%8B-%E0%A4%B0%E0%A5%8B%E0%A4%95%E0%A4%A8%E0%A5%87-%E0%A4%B8%E0%A5%87-%E0%A4%AC%E0%A4%9A%E0%A5%87%E0%A4%82%E0%A4%97%E0%A5%80-%E2%80%98%E0%A4%AC%E0%A4%B0%E0%A4%B8%E0%A4%BE%E0%A4%A4%E0%A5%80-%E0%A4%A8%E0%A4%A6%E0%A4%BF%E0%A4%AF%E0%A4%BE%E0%A4%82%E2%80%99/article-1565"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2021-10/4.jpg" alt=""></a><br /><p><strong> जयपुर</strong>। प्रदेश के चारों तरफ अनेक छोटी-बड़ी नदियां रही हैं, जो बरसात के दिनों में ही बहती थी। बीते कुछ सालों में बरसात के कम होने, बहाव क्षेत्र में जगह-जगह अतिक्रमण और बरसाती पानी का संरक्षण नहीं होने से नदियां वक्त के साथ काल-कवलित हो गई हैं। अब तो कई नदियां ऐसी हैं, जो सिर्फ कागजों में ही जिंदा हैं। आलम है कि भूगोल के विद्यार्थी भी बड़ी मुश्किल से नदियों के नाम जानते हैं, जबकि एक दौर ऐसा भी रहा है, जब सभी नदियां बरसात के दिनों में बहा करती थी।</p>
<p><br /> <strong>क्यों दम तोड़ गई नदियां</strong><br /> आज बरसात का पानी मिट्टी काटता हुआ बह जाता है। उसे रोकने के लिए सभी लोगों को सामूहिक रूप से प्लानिंग बनाकर पानी के बहाव को रोकना पड़ेगा। ताकि ज्यादा से ज्यादा बरसाती पानी का उपयोग हो सके। यह कहना है-मैग्सेसे पुरस्कार विजेता राजेन्द्र सिंह का। वे कहते हैं कि बरसात के पानी के तेज फ्लो को स्लो किया जाना चाहिए। आज देशभर के 72 प्रतिशत जलस्त्रोत और करीब 70 प्रतिशत नदियां सूख गई हैं। <br /> <br /> <strong>क्या हैं सुझाव</strong><br />      निजी क्षेत्र के ट्यूबवेल पर रोक। <br />     पौधरोपण के साथ सामुदायिक विके्रन्दीकरण जल प्रबंधन की आवश्यकता।<br />     राज्य सरकार नदियों के संरक्षण के लिए नए सिरे से करे विचार। <br />     नदी के बहाव क्षेत्र में अतिक्रमण को हटाना बेहद जरूरी है। <br /> <strong><br /> संकल्प लिया और बहने लगी अरवली नदी</strong><br /> एक समय में पूरी तरह सूख गई अरवली नदी में बरसात के पानी को रोकने के लिए जब संकल्प लिया गया तो सभी ने बरसात की एक-एक बूंद बचाई थी। गांव के हजारों लोगों ने प्रकृति से कम से कम लेने और अधिक से अधिक देने का ही संकल्प किया और आज अरवली नदी बह रही है।</p>
<p><br /> <strong>इनका कहना है</strong><br /> जगह-जगह ट्यूबवेल लगने और नदी के बहाव क्षेत्र में अतिक्रमण होने से नदियां सूख गई हैं। बरसात के पानी के संरक्षण की भी उचित व्यवस्था होनी चाहिए। पानी को बचाने की मानसिकता बनानी होगी।<br /> <strong>डॉ. एमएस राठौड़, निदेशक, पर्यावरण एवं विकास अध्ययन संस्थान, जयपुर </strong></p>
<p><br /> <strong>ऐसी नदियां जो कुछ जिंदा और कुछ सूख गई</strong><br /> अजमेर में साबरमती, सरस्वती,  खारी, डाई, बनास। अलवर में साबी, रूपाढेल, काली, गौरी, सोटा। बांसवाड़ा में माही, अन्नास, चैणी। बाड़मेर में लूनी, संूकड़ी। भरतपुर में चम्बल, बराह, बाणगंगा, गंभीरी, पार्वती। भीलवाड़ा में बनास, कोठारी, बेडच, मेनाली, मानसी, खारी। बूंदी में कुराल। धौलपुर में चम्बल। डूंगरपुर में सोम, माही, सोनी। श्रीगंगानगर में घग्घर। जयपुर में बाणगंगा, बांड़ी, डूंढ, मोरेल, साबी, सोटा, डाई, सखा, मासी। जैसलमेर में काकनेय, चांघण, लाठी, घऊआ, घोगड़ी। जालौर में लूनी, बांड़ी, जवाई, सूकड़ी। झालावाड़ में कालीसिंध, पर्वती, छोटी काली सिंध,  निवाज। झुंझनूं में काटली। जोधपुर में लूनी, माठड़ी, जोजरी। कोटा में चम्बल, कालीसिंध, पार्वती, आऊ निवाज, परवन। नागौर में लूनी। पाली में लीलड़ी, बांड़ी, सूकड़ी जवाई। सवाईमाधोपुर में चम्बल, बनास, मोरेल। सीकर में काटली, मंथा, पावटा, कावंट। सिरोही में पश्चिमी बनास, सूकड़ी, पोसालिया,खाती, किशनावती, झूला, सुरवटा। टोंक में बनास,मासी, बांड़ी। उदयपुर में बनास, बेडच, बाकल, सोम,जाखम, साबरमती। चित्तौड़गढ़ में बनास, बेडच, बामणी, बागली, बागन, औराई, गंभीरी, सीवान, जाखम, माही।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
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                <pubDate>Sun, 10 Oct 2021 13:02:41 +0530</pubDate>
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