<?xml version="1.0" encoding="utf-8"?>        <rss version="2.0"
            xmlns:content="http://purl.org/rss/1.0/modules/content/"
            xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/"
            xmlns:atom="http://www.w3.org/2005/Atom">
            <channel>
                <atom:link href="https://dainiknavajyoti.com/water/tag-5951" rel="self" type="application/rss+xml" />
                <generator>Dainik Navajyoti Rising Rajasthan RSS Feed Generator</generator>
                <title>water - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
                <link>https://dainiknavajyoti.com/tag/5951/rss</link>
                <description>water RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>असर खबर का... नहरों में फिर बहा पानी, सूखती फसलों को मिली संजीवनी</title>
                                    <description><![CDATA[बारिश की कमी से सूख रही धान की फसल को राहत, किसानों की बढ़ी उम्मीदें।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/impact-of-the-report----water-flows-in-canals-again--withering-crops-get-a-lifeline/article-165818"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-09/111200-x-600-px)-(4)35.png" alt=""></a><br /><p>कोटा।  बारिश की कमी और लगातार बढ़ते तापमान के कारण खेतों में नमी तेजी से कम होने लगी है। पर्याप्त बारिश नहीं होने से धान सहित अन्य खरीफ फसलों पर संकट के बादल मंडराने लगे थे। कई खेतों में फसलों की बढ़वार थम गई और पौधे मुरझाने लगे थे। ऐसे समय में सीएडी ने कोटा बैराज की दोनों नहरों में एक बार फिर जलप्रवाह शुरू कर किसानों को बड़ी राहत दी है। कोटा बैराज से वर्तमान में दायीं मुख्य नहर में 525 क्यूसेक तथा बायीं मुख्य नहर में 500 क्यूसेक पानी छोड़ा जा रहा है। नहरों में पानी पहुंचने के साथ ही सिंचाई क्षेत्र के किसानों में राहत की उम्मीद जगी है। खेतों में नमी बनाए रखने के लिए यह जलप्रवाह बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।</p>
<p><strong>बारिश की कमी से बढ़ी चिंता</strong><br />इस मानसून सीजन में कई क्षेत्रों में अपेक्षित बारिश नहीं होने से किसानों की चिंता बढ़ गई है। धान जैसी फसलों को लगातार पर्याप्त नमी की जरूरत होती है। बारिश का अंतराल बढ़ने और तापमान में इजाफा होने से खेतों की ऊपरी सतह तेजी से सूखने लगी। इससे फसलों की बढ़वार प्रभावित होने लगी और कई जगह पौधों में मुरझाने के लक्षण दिखाई देने लगे। किसानों के लिए सबसे बड़ी चिंता यह थी कि यदि खेतों में समय पर पानी नहीं पहुंचा तो फसल की उत्पादकता पर इसका सीधा असर पड़ सकता है। ऐसे में नहरों में दोबारा पानी छोड़े जाने से सिंचाई व्यवस्था को सहारा मिला है।</p>
<p><strong>कुछ दिन पहले बंद कर दिया था जलप्रवाह</strong><br />चंबल नदी पर बने बांधों में जलस्तर कम होने का हवाला देते हुए गत दिनों कोटा बैराज की दोनों नहरों में जलप्रवाह बंद कर दिया गया था। इसके बाद नहर कमांड क्षेत्र के किसानों की चिंता बढ़ गई थी। बारिश नहीं होने और नहरों में पानी नहीं आने से खेतों में नमी बनाए रखना मुश्किल हो रहा था। अब परिस्थितियों को देखते हुए दोनों नहरों में फिर से पानी छोड़ा गया है। फिलहाल जवाहर सागर बांध से बिजली उत्पादन के बाद पानी छोड़ा जा रहा है। इस पानी का उपयोग आगे सिंचाई व्यवस्था में किया जा रहा है। नहरों में जलप्रवाह शुरू होने से उन किसानों को विशेष राहत मिली है, जिनकी फसलें बारिश पर निर्भर थीं और लंबे समय से खेतों में पर्याप्त नमी का इंतजार कर रही थीं।</p>
<p><strong>नवज्योति ने प्रमुखता से उठाया था मामला</strong><br />बारिश की कमी से फसलों को हो रहे नुकसान के सम्बंध में दैनिक नवज्योति में 13 सितंबर को प्रमुखता से समाचार प्रकाशित किया गया था। इसमें बताया था कि खेतों में धान की फसल खड़ी है, लेकिन किसानों की नजर आसमान पर टिकी हुई है। जहां कुछ समय पहले तक पानी की पर्याप्त उपलब्धता के भरोसे खेतों में हरियाली नजर आ रही थी, वहीं अब सिंचाई के संकट ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। नहरों में जलप्रवाह बंद होने से सिंचाई के लिए पानी का संकट उत्पन्न हो गया है। ऐसे में धान उत्पादक किसानों को फसल बचाने के लिए नलकूप और डीजल इंजन का सहारा लेना पड़ रहा है। महंगे डीजल से पानी खींचकर खेतों तक पहुंचाने में सिंचाई की लागत लगातार बढ़ रही है। समाचार प्रकाशित होने के बाद सीएडी अधिकारियों ने जयपुर के अधिकारियों को इससे अवगत करवाया था। वहां से अनुमति मिलने के बाद दोनों नहरों में पानी छोड़ दिया गया।</p>
<p>बारिश की कमी को देखते हुए कोटा बैराज की दोनों नहरों में जलप्रवाह फिर से शुरू कर दिया है। वर्तमान में दायीं मुख्य नहर में 525 क्यूसेक तथा बायीं मुख्य नहर में 500 क्यूसेक पानी छोड़ा जा रहा है।<br /><strong>- शोभित गर्ग, प्रभारी, कोटा बैराज नियंत्रण कक्ष</strong></p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/impact-of-the-report----water-flows-in-canals-again--withering-crops-get-a-lifeline/article-165818</link>
                <guid>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/impact-of-the-report----water-flows-in-canals-again--withering-crops-get-a-lifeline/article-165818</guid>
                <pubDate>Thu, 17 Sep 2026 14:06:50 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://dainiknavajyoti.com/media/2026-09/111200-x-600-px%29-%284%2935.png"                         length="1588989"                         type="image/png"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[kota]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>बीसलपुर बांध में पानी की तेज आवक : लगातार बढ़ रहा जलस्तर, 44 सेंटीमीटर की बढ़ोतरी</title>
                                    <description><![CDATA[बांध में लगातार पानी की आवक जारी है। शनिवार सुबह जलस्तर 314 मीटर और जलभराव 28.288 टीएमसी पहुंच गया। करीब 60 घंटे में जलस्तर 44 सेंटीमीटर बढ़ा। अगस्त में अब तक 2.968 टीएमसी पानी आया है। त्रिवेणी का बहाव 2.80 मीटर दर्ज हुआ। बारिश और आवक बनी रही तो जलस्तर और बढ़ सकता है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/water-rising-rapidly-in-bisalpur-dam-water-level-reached-314/article-163028"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-08/bisalpur-dam-02.png" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal"><span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">जयपुर। बीसलपुर</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">बांध</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">के</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">जलग्रहण</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">क्षेत्र</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">में</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">लगातार</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">हो</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">रही</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">बारिश</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">से</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">बांध</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">में</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">पानी</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">की</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">आवक</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">तेज</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">हो</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">गई</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">है।</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">शनिवार</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">सुबह</span> 6 <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">बजे</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">बांध</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">का</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">जलस्तर</span> 314.00 <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">मीटर</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">दर्ज</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">किया</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">गया</span>, <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">जबकि</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">जलभराव</span> 28.288 <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">टीएमसी</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">पहुंच</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">गया।</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">पिछले</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">करीब</span> 60 <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">घंटे</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">में</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">जलस्तर</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">में</span> 44 <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">सेंटीमीटर</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">की</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">बढ़ोतरी</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">हुई</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">है। आंकड़ों</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">के</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">अनुसार</span> 12 <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">अगस्त</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">सुबह</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">बांध</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">में</span> 25.320 <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">टीएमसी</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">पानी</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">था</span>, <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">जो</span> 14 <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">अगस्त</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">शाम</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">तक</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">बढ़कर</span> 28.012 <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">टीएमसी</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">हो</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">गया।</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">इसके</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">बाद</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">शनिवार</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">सुबह</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">तक</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">इसमें</span> 0.276 <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">टीएमसी</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">और</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">पानी</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">जुड़</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">गया।</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">यानी</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">अगस्त</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">में</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">अब</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">तक</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">बांध</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">में</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">करीब</span> 2.968 <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">टीएमसी</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">पानी</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">की</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">आवक</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">हुई</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">है।</span></p>
<p class="MsoNormal"><span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">पानी</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">आने</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">की</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">रफ्तार</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">का</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">अंदाजा</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">इससे</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">लगाया</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">जा</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">सकता</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">है</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">कि</span> 13 <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">अगस्त</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">सुबह</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">से</span> 14 <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">अगस्त</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">सुबह</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">के</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">बीच</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">ही</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">जलभराव</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">में</span> 1.292 <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">टीएमसी</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">की</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">बढ़ोतरी</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">हुई।</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">वहीं</span> 21 <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">जुलाई</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">को</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">जलस्तर</span> 313.61 <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">मीटर</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">था</span>, <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">जो</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">अब</span> 314 <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">मीटर</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">हो</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">गया</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">है। बीसलपुर</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">में</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">पानी</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">की</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">आवक</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">के</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">लिए</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">त्रिवेणी</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">का</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">बहाव</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">भी</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">महत्वपूर्ण</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">है।</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">शनिवार</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">सुबह</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">त्रिवेणी</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">का</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">गेज</span> 2.80 <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">मीटर</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">दर्ज</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">किया</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">गया।</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">जलग्रहण</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">क्षेत्र</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">में</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">बारिश</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">और</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">त्रिवेणी</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">में</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">बहाव</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">बना</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">रहा</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">तो</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">आने</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">वाले</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">दिनों</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">में</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">बांध</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">का</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">जलस्तर</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">और</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">बढ़</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">सकता</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">है।</span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/water-rising-rapidly-in-bisalpur-dam-water-level-reached-314/article-163028</link>
                <guid>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/water-rising-rapidly-in-bisalpur-dam-water-level-reached-314/article-163028</guid>
                <pubDate>Sun, 16 Aug 2026 14:03:34 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://dainiknavajyoti.com/media/2026-08/bisalpur-dam-02.png"                         length="1378737"                         type="image/png"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>प्रदेश के गांवों में नहीं मिलेगा मुफ्त में पानी, मंत्री ने दिए शुल्क लगाने के संकेत</title>
                                    <description><![CDATA[राजस्थान मंत्रिमंडल ने ग्रामीण क्षेत्रों में नियमित, स्वच्छ और टिकाऊ नल जल आपूर्ति के लिए संचालन-संधारण नीति मंजूर। नीति में जल जीवन मिशन 2.0 के प्रावधान शामिल। जलदाय मंत्री कन्हैयालाल ने ग्रामीण उपभोक्ताओं से न्यूनतम 50 रुपए मासिक शुल्क लेने के संकेत। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/water-will-not-be-available-for-free-in-the-villages/article-162898"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-08/111200-x-600-px)64.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। राज्य मंत्रिमंडल ने राज्य के ग्रामीण क्षेत्रों में नल से जल की आपूर्ति को नियमित, स्वच्छ और टिकाऊ बनाए रखने के लिए संचालन एवं संधारण नीति को मंजूरी प्रदान की है।</p>
<p>कैबिनेट के बाद प्रेसवार्ता में जलदाय मंत्री कन्हैया लाल ने बताया कि इस नीति में केन्द्र सरकार के जल जीवन मिशन 2.0 के दिशा-निर्देशों तथा इसके सभी 19 प्रमुख घटकों को शामिल किया गया है। ग्रामीण जलापूर्ति योजनाओं के प्रभावी प्रबंधन और निगरानी के लिए ग्राम पंचायत, क्लस्टर समिति, ब्लॉक, जिला और राज्य स्तर पर संस्थागत ढांचा गठित किया जाएगा। मंत्री ने कहा कि जेजेएम में ग्रामीण क्षेत्रों के उपभोक्ताओं को मेरी नजर में फ्री में पानी नहीं मिलना चाहिए, उनसे कम से कम 50 रुपए की हर माह शुल्क वसूली हो ताकि पानी का महत्व समझ सकें। मंत्री के इन संकेतों के बाद कयास लगाए जा रहे है कि ग्रामीण क्षेत्रों में भी अब पानी का शुल्क वसूला जाएगा।</p>
<p><strong>दिव्यांगजनों की वर्षों पुरानी मांग पूरी :</strong></p>
<p>कैबिनेट ने शासकीय सेवा में कार्यरत दिव्यांग कर्मचारियों को पदोन्नति में आरक्षण का नोशनल बेनेफिट 30 जून 2016 से दिए जाने के लिए राजस्थान दिव्यांगजन अधिकार संशोधन नियम-2026 का अनुमोदन किया है। 2026-27 की बजट घोषणा की अनुपालना में किए गए इस फैसले से राज्य के दिव्यांग कार्मिकों की वर्षों पुरानी मांग पूरी हुई है।</p>
<p><strong>ये भी हुए फैसले :</strong></p>
<p>जनजाति क्षेत्रीय विकास में वार्डन की भर्ती का मार्ग प्रशस्त</p>
<p>जनजाति क्षेत्रीय विकास राज्य एवं अधीनस्थ सेवा नियम 2001 में संशोधन का अनुमोदन</p>
<p>राजस्थान वन अधीनस्थ सेवा नियम 2015 में संशोधन</p>
<p>महिला एवं बाल विकास विभाग सेवा नियम संशोधन</p>
<p>एस्केप जलाशय निर्माण से प्रभावित काश्तकारों को भूमि आवंटन</p>
<p>21 गैर-खातेदार काश्तकारों को उसी गांव में भूमि आवंटित करने के प्रस्ताव को स्वीकृति</p>
<p>मानसून के दौरान नहर से मिलने वाले अतिरिक्त पानी का इस जलाशय में संग्रहण हो सकेगा</p>
<p>जोधपुर को नियमित जल आपूर्ति में मदद मिलेगी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/water-will-not-be-available-for-free-in-the-villages/article-162898</link>
                <guid>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/water-will-not-be-available-for-free-in-the-villages/article-162898</guid>
                <pubDate>Fri, 14 Aug 2026 11:32:57 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://dainiknavajyoti.com/media/2026-08/111200-x-600-px%2964.png"                         length="1058183"                         type="image/png"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur KD]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>असर खबर का  :  नहरों में बढ़ाया जलप्रवाह, मुरझाई फसलों को मिलेगी संजीवनी</title>
                                    <description><![CDATA[मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से चर्चा के बाद हुआ निर्णय।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/impact-of-the-report--canal-water-flow-increased--withered-crops-to-get-a-lifeline/article-160441"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-07/1200-x-600-px)-(2)54.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के प्रयासों से कोटा, बून्दी और बारां के किसानों को बड़ी राहत मिली है। खरीफ फसलों के लिए नहरी पानी की कमी को देखते हुए बिरला ने एक बार फिर मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से चर्चा की। इसके बाद गांधी सागर बांध से अतिरिक्त 2000 क्यूसेक तथा राणा प्रताप सागर बांध से 1000 क्यूसेक अतिरिक्त पानी नहरों में छोड़ने का निर्णय लिया गया। वर्तमान में नहरों में 2000 क्यूसेक पानी प्रवाहित हो रहा है, जो इस निर्णय के बाद बढ़कर 5000 क्यूसेक हो जाएगा। महज दस दिनों में यह दूसरी बार है, जब बिरला की पहल पर मध्यप्रदेश सरकार ने गांधी सागर बांध से सीधे कोटा-बून्दी क्षेत्र के किसानों के लिए अतिरिक्त सिंचाई जल उपलब्ध कराने का निर्णय लिया है। इस वर्ष कमजोर मानसून के कारण राणा प्रताप सागर बांध का जलस्तर सामान्य से कम रहने से नहरों में पर्याप्त पानी की आपूर्ति प्रभावित हो रही थी। इस निर्णय के बाद क्षेत्र की नहरों में सिंचाई के लिए पर्याप्त पानी उपलब्ध हो सकेगा, जिससे खरीफ फसलों को समय पर सिंचाई मिल पाएगी।</p>
<p><strong>दायीं में 1500 व बायीं नहर में 1300 क्यूसेक जलप्रवाह</strong><br />जिला प्रशासन के निर्देश पर सीएडी विभाग ने सोमवार देर शाम को बायीं नहर में 1300 क्यूसेक और दायीं नहर में 1500 क्यूसेक पानी छोड़ दिया है। तात्कालिक राहत के रूप में राणा प्रताप सागर बांध से सोमवार को 1000 क्यूसेक अतिरिक्त पानी भी छोड़ा गया है। आगामी दिनों में अच्छी वर्षा होने और राणा प्रताप सागर का जलस्तर बढ़ने पर नहरों में और अधिक पानी उपलब्ध कराया जा सकेगा। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के निर्देश पर मध्यप्रदेश के जल संसाधन विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव ने भी सोमवार को क्षेत्रीय विकास आयुक्त सीएडी अनिल कुमार अग्रवाल को शीघ्र गांधी सागर बांध से अतिरिक्त 2000 क्यूसेक पानी उपलब्ध कराने का आश्वासन दिया। उल्लेखनीय है कि 10 जुलाई को किसानों ने बिरला से मुलाकात कर नहरों में पानी की कमी से खरीफ फसलों के प्रभावित होने की चिंता जताई थी। इसके बाद बिरला ने तत्काल संबंधित अधिकारियों और मध्यप्रदेश सरकार से चर्चा कर गांधी सागर बांध से अतिरिक्त पानी उपलब्ध कराने का आग्रह किया था। उनकी पहल पर उसी समय 1800 क्यूसेक अतिरिक्त पानी नहरों में छोड़ा गया था।</p>
<p><strong>किसानों की सीएडी अधिकारियों से हुई वार्ता</strong><br />इधर किसानों के प्रतिनिधिमंडल और संभागीय आयुक्त, अतिरिक्त संभागीय आयुक्त सहित सीएडी के अधिकारियों से सोमवार को वार्ता हुई थी। वार्ता के बाद दोनों नहरों में जलप्रवाह बढ़ाने का निर्णय किया गया। युवा किसान नेता गिर्राज गौतम ने कहा कि इस समय नहरों में पानी बढ़ाया जाना अत्यंत आवश्यक था क्योंकि नहरें पूरी क्षमता से नहीं चलने के कारण किसानों की फसलें सूखने के कगार पर आ गई थी। भूमि का जल स्तर काफी गिरने के कारण ट्यूबवेल हवा फेंक रहे थे। किसान अपनी फसल बचाने के लिए अतिरिक्त खर्चा करने पर विवश था। अब जब नहरें पूरी क्षमता से चलेंगी तो उम्मीद है कि हर किसान को पानी मिलेगा। उन्होंने किसानों से भी आग्रह किया की पानी का सदुपयोग कर सभी किसानों तक पानी पहुंचाने में सहयोग करे। प्रतिनिधिमंडल में वरिष्ठ किसान नेता दशरथ कुमार, किसान नेता बुधराम चौधरी, हरजिंदर सिंह, सूरजमल नागर, रमेश मीणा, गुरबेज सिंह, सुखविंदर सिंह, रमेश मीणा हिंगोनिया, रामगोपाल मीणा, विरक सिंह आदि मौजूद थे।</p>
<p><strong>नवज्योति ने प्रमुखता से उठाई थी किसानों की पीड़ा</strong><br />बारिश के अभाव में खेतों में बीज खराब होने के सम्बंध में दैनिक नवज्योति में 7 जुलाई को प्रमुखता से समाचार प्रकाशित किया गया था। इसमें बताया था कि मानसून की बेरुखी अब किसानों के लिए बड़ी आर्थिक चुनौती बनती जा रही है। जून के आखिरी सप्ताह और जुलाई के पहले सप्ताह तक अच्छी बारिश की उम्मीद में किसानों ने महंगे दामों पर सोयाबीन का बीज खरीदकर खेतों में बुवाई तो कर दी, लेकिन बादलों की बेरुखी ने उनकी उम्मीदों पर पानी फेर दिया। खेतों में पर्याप्त नमी नहीं होने से कई जगह बीज अंकुरित ही नहीं हो रहा, जबकि जहां अंकुरण हुआ है वहां तेज धूप के कारण नन्हे पौधे सूखने लगे हैं। लगातार बारिश नहीं होने से खेतों की नमी खत्म हो गई।इससे किसानों को काफी नुकसान हो रहा है।</p>
<p>प्रशासन के निर्देश पर दोनों नहरों में पानी का प्रवाह बढ़ाया गया है। मध्यप्रदेश प्रशासन ने गांधी सागर और राणाप्रताप सागर बांध से अतिरिक्त पानी छोड़ने की मांग स्वीकार कर ली है।<br /><strong>-हरेतलाल मीणा, अधीक्षण अभियंता, सीएडी</strong></p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/impact-of-the-report--canal-water-flow-increased--withered-crops-to-get-a-lifeline/article-160441</link>
                <guid>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/impact-of-the-report--canal-water-flow-increased--withered-crops-to-get-a-lifeline/article-160441</guid>
                <pubDate>Tue, 21 Jul 2026 11:57:28 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://dainiknavajyoti.com/media/2026-07/1200-x-600-px%29-%282%2954.png"                         length="1957497"                         type="image/png"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[kota]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>असर खबर का : शिक्षा व्यवस्था पटरी पर, बिजली आपूर्ति सुचारू</title>
                                    <description><![CDATA[प्रशासन और बिजली विभाग की त्वरित कार्रवाई से मिली राहत]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jhalawar/impact-of-the-report--education-system-back-on-track--power-supply-restored/article-159849"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-07/kota.png" alt=""></a><br /><p>खानपुर । उपखंड में बीते दिनों राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय और आसपास के क्षेत्र में ट्रांसफार्मर जलने के कारण ठप हुई बिजली व्यवस्था पर 'दैनिक नवज्योति' टीम ने प्रमुखता से 11 जुलाई 2026 को खबर प्रकाशित की गई थी। खबर प्रकाशित होने के 24 घंटे के व भीतर ही प्रशासन और बिजली विभाग हरकत में आया और तत्परता  दिखाते हुए खराब ट्रांसफार्मर को बदल दिया गया है। अब विद्यालय में और क्षेत्र में बिजली की आपूर्ति सुचारू रूप से बहाल हो गई है। व बिजली आने के बाद से ही विद्यालय  में पेयजल की समस्या का समाधान हो गया है और शैक्षणिक गतिविधियाँ, विशेषकर ऑनलाइन कंप्यूटर कार्य, पुनः सुचारू रूप से शुरू हो गए हैं।</p>
<p>स्थानीय ग्रामीणों और विद्यालय प्रशासन ने त्वरित कार्रवाई के लिए संबंधित विभाग का आभार व्यक्त किया है, जिससे भीषण गर्मी और उमस के बीच बच्चों और क्षेत्रवासियों को बड़ी राहत मिली है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>झालावाड़</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jhalawar/impact-of-the-report--education-system-back-on-track--power-supply-restored/article-159849</link>
                <guid>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jhalawar/impact-of-the-report--education-system-back-on-track--power-supply-restored/article-159849</guid>
                <pubDate>Tue, 14 Jul 2026 17:32:13 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://dainiknavajyoti.com/media/2026-07/kota.png"                         length="1077067"                         type="image/png"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[kota]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>मुंबई में भारी बारिश के बाद छलकी झील : जल भंडार 41.43 प्रतिशत, पानी के स्तर में बढ़ोतरी  </title>
                                    <description><![CDATA[मुंबई के लिए राहतभरी खबर है। लगातार बारिश के बाद तुलसी झील बुधवार देर रात और विहार झील मंगलवार शाम लबालब भर गईं। मानसून में पूरी क्षमता तक पहुंचने वाली ये पहली दो झीलें हैं। हालांकि सातों जलाशयों में कुल जल भंडार अभी 41.43% है, लेकिन जलस्तर में लगातार बढ़ोतरी से शहर की पेयजल आपूर्ति को लेकर चिंता काफी कम हुई है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/lake-water-reservoir-overflows-after-heavy-rain-in-mumbai-water/article-159219"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-07/1200-x-600-px)19.png" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal"><span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">मुंबई। महाराष्ट्र की राजधानी मुंबई में पेयजल आपूर्ति की प्रमुख स्रोत 7 झीलों में से एक, तुलसी झील के जलग्रहण क्षेत्र में लगातार भारी बारिश के बाद बुधवार को शहर में पानी की स्थिति में पर्याप्त सुधार दर्ज किया गया। बृहन्मुंबई नगर निगम के जलविद्युत इंजीनियरिंग विभाग के अनुसार, तुलसी झील मंगलवार रात 11:43 बजे ही छलकने लगी। इससे पहले उसी शाम लगभग 9 बजे विहार झील भी भर गयी थी, जिससे यह इस मानसून में पूरी क्षमता तक पहुंचने वाला दूसरा जलाशय बन गया। दोनों झीलों का भरना जलग्रहण क्षेत्रों में कई दिनों की भारी बारिश के बाद हुआ है, जिससे शहर के जलाशयों में पानी का स्तर काफी बढ़ गया है।</span></p>
<p class="MsoNormal"><span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">अधिकारियों ने कहा कि तुलसी और विहार झीलों के भरने के बावजूद, मुंबई को पानी देने वाली सभी सात झीलों में कुल जल भंडार बुधवार सुबह उनकी कुल क्षमता का 41.43 प्रतिशत था। झीलों के जलग्रहण क्षेत्रों में व्यापक बारिश के कारण पिछले कुछ दिनों से जल स्तर लगातार बढ़ रहा है। तुलसी झील मुंबई की सात जलापूर्ति झीलों में सबसे छोटी है और यह नगर निगम की सीमा के भीतर स्थित दो जलाशयों में से एक है, जबकि दूसरा जलाशय विहार झील है। <span> </span></span></p>
<p class="MsoNormal"><span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">इस झील का जलग्रहण क्षेत्र 6.76 वर्ग किलोमीटर है और पूरी तरह भरने पर यह लगभग 1.35 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र को कवर करती है। यह मुंबई के कुछ हिस्सों में हर दिन औसतन एक करोड़ 80 लाख लीटर यानी 1.8 करोड़ लीटर पीने के पानी की आपूर्ति करती है। नगर निगम मुख्यालय से लगभग 35 किलोमीटर दूर स्थित तुलसी झील, विहार झील से जुड़ी हुई है। एक बार जब तुलसी झील अपनी पूरी क्षमता तक पहुंच जाती है, तो इसका अतिरिक्त पानी बहकर विहार झील में चला जाता है। इस वर्ष तुलसी झील का समय से पहले भरना मानसून की शुरुआत के बाद से जलग्रहण क्षेत्रों में हुई अच्छी बारिश को दर्शाता है। पिछले वर्ष यह झील 16 अगस्त को भर गयी थी, जबकि 2024 में यह अगस्त में भरी थी। नगर निगम मानसून के आगे बढऩे के साथ सभी सात झीलों में पानी के स्तर की निगरानी कर रहा है। मानसून के आगमन से पहले पानी के भंडार में आयी भारी गिरावट के बाद, इस बढ़ते जल स्तर ने नागरिक अधिकारियों को बड़ी राहत दी है।<span>  </span><span> </span></span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/bharat/lake-water-reservoir-overflows-after-heavy-rain-in-mumbai-water/article-159219</link>
                <guid>https://dainiknavajyoti.com/bharat/lake-water-reservoir-overflows-after-heavy-rain-in-mumbai-water/article-159219</guid>
                <pubDate>Wed, 08 Jul 2026 15:15:29 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://dainiknavajyoti.com/media/2026-07/1200-x-600-px%2919.png"                         length="1569424"                         type="image/png"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>ग्राउंड रिपोर्ट: क्या हादसाें के बाद ही जागने की रीत कभी तोड़ी जाएगी</title>
                                    <description><![CDATA[ बिना जांच 'अवैध टैंकरों' से सप्लाई हो रहा हजारों लीटर पानी,नई कॉलोनियों में मंडराया संकट।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/ground-report--will-the-pattern-of-waking-up-only-after-a-tragedy-occurs-ever-be-broken/article-156433"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-06/1111200-x-600-px)33.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। सरकारी स्तर पर संकट से निपटने के लिए कोटा शहर में 12 हाइड्रेंट/बोरिंग पॉइंट्स अनुबंधित (पूरी तरह टेस्टेड) किए गए हैं। इसी तरह रामगंजमंडी में 16 कुएं और सांगोद में 3 से 4 ट्यूबवेल रिजर्व रखे गए हैं, जहां से पूरी तरह जांचा हुआ पानी ही टैंकरों में भरा जाता है।<br />शिक्षा नगरी कोटा में भीषण गर्मी के बीच एक बड़ा जल-संकट और छात्र-छात्राओं के स्वास्थ्य पर गंभीर खतरा मंडरा रहा है। एक तरफ जहां जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग (PHED) की कोटा लैब सरकारी स्तर पर लक्ष्य से आगे बढ़कर पानी की जांच कर रही है, वहीं दूसरी तरफ शहर के पॉश और घने कोचिंग इलाकों सहित बाहरी कॉलोनियों में अवैध और बिना जांचे पानी के टैंकरों का धंधा धड़ल्ले से फल-फूल रहा है। रोजाना हजारों छात्र और स्थानीय नागरिक इस अनियंत्रित पानी को पीने और इस्तेमाल करने को मजबूर हैं, जिससे किसी बड़ी महामारी के फैलने का अंदेशा पैदा हो गया है।</p>
<p><strong>जवाहर नगर हादसे' की याद हुई ताजा</strong><br />शहर में पानी की मॉनिटरिंग को लेकर बरती जा रही यह लापरवाही सीधे तौर पर मासूमों की जान से खिलवाड़ है। विज्ञान नगर इलाके में दुषित पानी की सप्लाई के बाद वर्तमान स्थिति को देखकर कुछ साल पहले जवाहर नगर क्षेत्र में एक साथ फैली उस महामारी की याद ताजा हो जाती है, जब दूषित पानी की समस्या के चलते 70 से अधिक कोचिंग छात्रों को गंभीर हालत में अस्पतालों में भर्ती करवाना पड़ा था।<br /><strong>-मनू सोलंकी निवासी जवाहर नगर</strong></p>
<p><strong>निजी वाटर सप्लाई पर नहीं है कोई निगरानी</strong><br />उस बड़े हादसे के बाद भी प्रशासन की नींद नहीं टूटी है। आज भी स्थिति यह है कि केवल कच्ची बस्तियां ही नहीं, बल्कि बड़े-बड़े कोचिंग इलाकों और हॉस्टल्स में भी पानी की मॉनिटरिंग या उसकी नियमित जांच करवाने की कोई कानूनी बाध्यता तय नहीं की गई है। आखिर पानी जैसी बेहद बुनियादी लेकिन सबसे जरूरी चीज के लिए कोटा में एक 'प्रोपर और जिम्मेदार' सिस्टम आज तक क्यों नहीं बन पाया?<br /><strong>-सीता प्रजापित निवासी कोरल पार्क</strong></p>
<p><strong>बिना जांच सीधे पेट तक पहुंच रहा पानी</strong><br />आवासीय और कोचिंग जैसे बेहद संवेदनशील इलाकों में बिना किसी केमिकल या बैक्टीरियोलॉजिकल टेस्ट के पानी की लगातार सप्लाई हो रही है, लेकिन इन टैंकरों पर विभाग की कोई मॉनिटरिंग नहीं है। यह पानी बस्ती वासियों के रोजमर्रा के काम से लेकर उनके पेट तक पहुंच रहा है। सबसे बड़ी लापरवाही यह है कि न तो चिकित्सा विभाग (CMHO) के पास और न ही जलदाय विभाग के पास इन हॉस्टल्स और निजी स्रोतों की पूरी स्क्रीनिंग का कोई डेटा उपलब्ध है।</p>
<p><strong>हॉस्टल्स और घनी आबादी 'टैंकर माफिया' के भरोसे</strong><br />जिन क्षेत्रों में जलदाय विभाग की सीधी पाइपलाइन नहीं है, वहां निजी स्रोतों के नाम पर टैंकर माफियाओं का राज चल रहा है। शहर के सबसे संवेदनशील और वीआईपी माने जाने वाले कोचिंग हब इस समय पूरी तरह निजी टैंकरों के जाल में हैं। कोरल पार्क और लैंडमार्क सिटी जैसे अत्यधिक घनी आबादी वाले हॉस्टल क्षेत्रों में हजारों कोचिंग छात्र रह रहे हैं। यहां रोजाना बिना किसी शुद्धता जांच के धड़ल्ले से टैंकरों से पानी की सप्लाई की जा रही है।</p>
<p><strong>आवासीय बस्तियों व निजी कॉलोनियों मेेें बडा खेल</strong><br />नयागांव, आंवली, रोजड़ी, नांता के करणी नगर,बरड़ा, अनन्तपुरा के भीतरी इलाके,क्रेशर बस्ती, बृज धाम, मान सरोवर, प्रताप नगर पुनम कॉलोनी, श्री विहार, रायपुर की कॉलोनियां, रेलवे स्टेशन क्षेत्र, बूंदी रोड और बालिता की कॉलोनियां पूरी तरह इन निजी टैंकरों के भरोसे चल रही हैं। यहां निजी काॅलोनियां ताे विकसीत हो गयी लेकिन पानी जैसी बुनियादि जरूरत के लिये या तो घर के भीतर बने बोरिंग या फिर महंगे बोरिग सप्लाई के साथ टेन्करों की सप्लाई पर निर्भर है। यही नही इनके बदले पानी के इन सौदागरों की मोटी कमाई भी बडी है।</p>
<p><strong>पीएचईडी लाचार, गेंद सीएमएचओ के पाले में</strong><br />पीएचईडी के सीनियर केमिस्ट तरुण कुमार जैन ने बताया कि विभाग निजी स्रोतों और टैंकरों के पानी की जांच के लिए मात्र 297:रूपये की नॉमिनल फीस लेता है, जिसमें 48 घंटे में बैक्टीरियोलॉजिकल और केमिकल टेस्ट की रिपोर्ट आ जाती है। लेकिन सबसे बड़ा पेंच नियमों का है PHED लैब के पास प्राइवेट ट्यूबवेल या अवैध रूप से चल रहे टैंकर्स पर सीधे कानूनी कार्रवाई या जब्ती का अधिकार नहीं है। यदि पानी दूषित भी पाया जाता है, तो उस पर सीधे कार्रवाई करने का अधिकार केवल मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) के पास होता है। ऐसे में दोनों विभागों के बीच तालमेल की कमी का फायदा टैंकर संचालक उठा रहे हैं।</p>
<p><strong>हर 6 महीने में जांच है जरूरी</strong><br />जलदाय विभाग के जानकारों के अनुसार, आमतौर पर लोग एक बार पानी की जांच करवाकर निश्चिंत हो जाते हैं, लेकिन पानी की शुद्धता बनाए रखने के लिए हर 6 महीने में दोबारा जांच करवानी चाहिए। विशेषकर प्री-मानसून (बारिश से पहले) और पोस्ट-मानसून (बारिश के बाद) जांच अनिवार्य है, क्योंकि बारिश के दिनों में भूजल में खतरनाक बैक्टीरिया पनपने की संभावना सबसे ज्यादा होती है।</p>
<p><strong>यह है कोटा में पानी की कहानी</strong><br />कोटा शहर में चंबल नदी से पानी लिफ्ट कर सकतपुर (130 व 70 MLD), अकेलगढ़ (64 MLD की 3 और 75 MLD की 1 यूनिट) तथा श्रीनाथपुरम (50 MLD) प्लांट्स से शुद्ध पानी सप्लाई किया जा रहा है। हमारे पास पानी की पयार्प्त व्यवस्था है। जहां कमी हो वहां टैंकर भेजते हैं।<br /><strong>-दीपक झा, अतिरिक्त मुख्य अभियन्ता पीएचईडी</strong></p>
<p>यदि आपके क्षेत्र में नल से बदबूदार या गंदा पानी आ रहा है, तो बीमारी फैलने का इंतजार न करे। तुरंत संबंधित अधिकारीयों को सूचित करें। निजी स्रोतों का उपयोग करने वाले नागरिक बीमारी को न्योता न दें और नजदीकी पीएचईडी लैब में अपने पानी के सैंपल की जांच अवश्य करवाएं।<br /><strong>-तरूण कुमार जैन ,सीनीयर केमिस्ट पीएचईडी</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/ground-report--will-the-pattern-of-waking-up-only-after-a-tragedy-occurs-ever-be-broken/article-156433</link>
                <guid>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/ground-report--will-the-pattern-of-waking-up-only-after-a-tragedy-occurs-ever-be-broken/article-156433</guid>
                <pubDate>Tue, 09 Jun 2026 14:14:20 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://dainiknavajyoti.com/media/2026-06/1111200-x-600-px%2933.png"                         length="1557819"                         type="image/png"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[kota]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>जल संरक्षण को जन आंदोलन बनाएगी राज्य सरकार, 25 मई से शुरू होगा ‘वंदे गंगा जल संरक्षण जन अभियान’</title>
                                    <description><![CDATA[राजस्थान में 25 मई से 5 जून 2026 तक ‘वंदे गंगा जल संरक्षण जन अभियान’ चलाया जाएगा। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा बीसलपुर बांध पर जल पूजन कर इस जन आंदोलन का शुभारंभ करेंगे। इसके तहत प्रदेशभर में पारंपरिक जल स्रोतों की सफाई, श्रमदान, पौधारोपण और जल योद्धाओं को 'जल गौरव सम्मान' देने जैसे कार्यक्रम होंगे।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/state-government-will-make-water-conservation-a-mass-movement-vande/article-154869"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-04/bhajan-lal-sharma.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर । मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में राज्य सरकार 25 मई से प्रदेशभर में ‘वंदे गंगा जल संरक्षण जन अभियान’ की शुरुआत करने जा रही है। गंगा दशमी के अवसर पर शुरू होने वाला यह अभियान 5 जून विश्व पर्यावरण दिवस तक चलेगा। अभियान का उद्देश्य जल संरक्षण को केवल सरकारी कार्यक्रम न रखकर जन आंदोलन का स्वरूप देना है, जिसमें पंचायतों, स्वयंसेवी संस्थाओं, धार्मिक संगठनों, उद्योगपतियों, महिलाओं, युवाओं और आमजन की भागीदारी सुनिश्चित की जाएगी।</p>
<p>मुख्यमंत्री 25 मई को टोंक स्थित बीसलपुर बांध पर जल पूजन और शिव मंदिर में अभिषेक के साथ अभियान का शुभारंभ करेंगे। इसके साथ ही वे ईसरदा, बंध बरेठा और गालवा बांध का हवाई सर्वेक्षण भी करेंगे। वहीं भरतपुर में गंगा माता मंदिर में आरती और सुजानगंगा नहर में दीपदान कार्यक्रम आयोजित होगा।</p>
<p>अभियान के तहत प्रदेशभर में कुओं, बावड़ियों, तालाबों, नहरों और अन्य पारंपरिक जल स्रोतों की साफ-सफाई, श्रमदान, दीप प्रज्वलन और जनजागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। साथ ही नए जल संरक्षण कार्यों का शिलान्यास, भूमि पूजन और पूर्ण परियोजनाओं का लोकार्पण भी किया जाएगा। विद्यार्थियों के लिए प्रभात फेरियां, लेखन प्रतियोगिताएं और जागरूकता कार्यक्रम होंगे, जबकि राजीविका से जुड़ी महिलाओं द्वारा कलश यात्राएं निकाली जाएंगी।</p>
<p>26 मई को जल संरक्षण को लेकर नुक्कड़ नाटक, शपथ कार्यक्रम और अमृत सरोवर सहित विभिन्न परियोजनाओं का शुभारंभ किया जाएगा। 27 मई को गोशालाओं, पशु चिकित्सालयों और दुग्ध संघों में स्वच्छता अभियान चलाया जाएगा तथा धार्मिक एवं सामाजिक संगठनों के साथ संवाद कार्यक्रम होंगे।</p>
<p>28 मई को रेलवे स्टेशन, बस स्टैंड और मंडियों सहित सार्वजनिक स्थलों पर ‘वंदे गंगा जल सेवा’ कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। इस दौरान वर्षा जल संचयन तकनीकों की जानकारी, जल परीक्षण और जनजागरूकता गतिविधियां होंगी। उद्योग विभाग द्वारा ग्रीन ऑफिस, एनर्जी ऑडिट और ग्रीन बजट को बढ़ावा देने के लिए कार्यशालाएं भी आयोजित की जाएंगी।</p>
<p>29 और 30 मई को ग्रामीण क्षेत्रों में तालाबों, जोहड़ों और अन्य जल स्रोतों की मैपिंग, सफाई और मरम्मत के कार्य होंगे। मुख्यमंत्री जल स्वावलम्बन अभियान के तहत पूर्ण कार्यों का लोकार्पण और नए कार्यों का शुभारंभ किया जाएगा। ग्राम पंचायत स्तर पर जल चौपाल भी आयोजित होंगी।</p>
<p>31 मई को प्रभात फेरियां, साइकिल रैलियां और जागरूकता अभियान निकाले जाएंगे। पुलिस, सेना और अर्द्धसैनिक बल चिन्हित स्थानों पर श्रमदान करेंगे। इसके अलावा पक्षियों के लिए परिंडे बांधने और पशुओं के लिए पेयजल व्यवस्था जैसे कार्यक्रम भी होंगे।</p>
<p>1 जून को कृषि एवं उद्यानिकी विभाग सूक्ष्म सिंचाई पद्धतियों पर कार्यशालाएं और प्रदर्शनी आयोजित करेगा। कृषि विज्ञान केंद्रों पर प्राकृतिक खेती, जैविक खेती और प्रिसीजन फार्मिंग को लेकर किसान चौपालें आयोजित होंगी। 2 जून को नदियों, बांधों और नहरों पर पूजन कार्यक्रम तथा नहरों की सफाई और गाद निकालने के कार्य किए जाएंगे।</p>
<p>3 और 4 जून को जिला स्तर पर नवाचार कार्यक्रम, निबंध, चित्रकला, खेलकूद प्रतियोगिताएं और नुक्कड़ नाटक आयोजित किए जाएंगे। वहीं ग्राम पंचायत मुख्यालयों पर जल चौपाल लगाकर जल संरक्षण पर चर्चा की जाएगी।</p>
<p>5 जून को विश्व पर्यावरण दिवस पर हरियालो राजस्थान अभियान के तहत पौधारोपण, जल संरचनाओं की सफाई और ईको फ्रेंडली गतिविधियां आयोजित होंगी। इसी दिन जिला स्तरीय समापन समारोह में उत्कृष्ट कार्य करने वाले भामाशाहों, संस्थाओं, पंचायतों, नगर निकायों और जल योद्धाओं को “जल गौरव सम्मान” से सम्मानित किया जाएगा।</p>
<p>उल्लेखनीय है कि पिछले वर्ष इस अभियान के दौरान प्रदेश की लगभग 11 हजार ग्राम पंचायतों में 3 लाख 70 हजार से अधिक कार्यक्रम आयोजित हुए थे, जिनमें करीब 2 करोड़ 53 लाख लोगों ने भागीदारी निभाई थी। राज्य सरकार इस वर्ष भी व्यापक जनभागीदारी के जरिए जल संरक्षण को जन आंदोलन का स्वरूप देने की तैयारी में है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/state-government-will-make-water-conservation-a-mass-movement-vande/article-154869</link>
                <guid>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/state-government-will-make-water-conservation-a-mass-movement-vande/article-154869</guid>
                <pubDate>Sun, 24 May 2026 17:15:45 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://dainiknavajyoti.com/media/2025-04/bhajan-lal-sharma.png"                         length="408207"                         type="image/png"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>संशोधित PKC-ERCP परियोजना में तेजी, चंबल जलसेतु के 3000 पाइलों का कार्य पूरा </title>
                                    <description><![CDATA[वाटर ग्रिड कॉर्पोरेशन की बैठक में संशोधित PKC-ERCP परियोजना की प्रगति रिपोर्ट पेश की गई। नौनेरा पंप हाउस की खुदाई जारी है और चंबल जलसेतु के लिए 5,000 में से 3,000 पाइलों का निर्माण पूरा हो चुका है। मेज से गलवा तक सुरंग खुदाई और फीडर निर्माण कार्य भी तेजी से जारी है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/revised-pkc-ercp-project-expedited-work-of-3000-piles-of-chambal/article-154698"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/secratrait11.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। राजस्थान वाटर ग्रिड कॉर्पोरेशन लिमिटेड की 12वीं बैठक में संशोधित पीकेसी-ईआरसीपी (PKC-ERCP) परियोजना के तहत अब तक हुए कार्यों की विस्तृत प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत की गई। बैठक में अधिकारियों ने बताया कि परियोजना के विभिन्न पैकेजों में निर्माण कार्य तेजी से आगे बढ़ रहा है। जानकारी के अनुसार, नौनेरा पंप हाउस के लिए नींव की खुदाई का कार्य जारी है। वहीं चंबल जलसेतु पर लगाए जाने वाले कुल 5060 पाइलों में से 3000 पाइलों का निर्माण कार्य पूरा किया जा चुका है। इसके अलावा 8 पाइल कैप का कांक्रीटीकरण कार्य पूर्ण हो गया है, जबकि 4 पाइल कैप का सुदृढ़ीकरण कार्य भी संपन्न कर लिया गया है।</p>
<p>बैठक में बताया गया कि नौनेरा बैराज से मेज तक फीडर निर्माण के लिए लगभग 20 प्रतिशत मिट्टी कार्य पूरा हो चुका है। वर्तमान में मेज से गलवा तक दो स्थानों पर सुरंग की खुदाई का कार्य प्रगति पर है। इस पैकेज के अंतर्गत 12 किलोमीटर लंबाई में 4 संरचनाओं और फीडर निर्माण का कार्य भी लगातार जारी है। अधिकारियों ने परियोजना कार्यों की गुणवत्ता और समयबद्ध प्रगति सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/revised-pkc-ercp-project-expedited-work-of-3000-piles-of-chambal/article-154698</link>
                <guid>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/revised-pkc-ercp-project-expedited-work-of-3000-piles-of-chambal/article-154698</guid>
                <pubDate>Fri, 22 May 2026 16:20:27 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://dainiknavajyoti.com/media/2026-03/secratrait11.jpg"                         length="1048544"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>बांसी का रावजी मोहल्ला : नाममात्र जलापूर्ति से मोहल्लेवासियों में बढ़ा आक्रोश</title>
                                    <description><![CDATA[ऑनलाइन शिकायत दर्ज करवाने के बाद विभागीय अधिकारी मौके पर पहुंचे।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/bundi/bansi-s-raoji-mohalla--growing-outrage-among-residents-due-to-meager-water-supply/article-154550"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-05/1111200-x-600-px)-1111.png" alt=""></a><br /><p>भण्डेड़ा। क्षेत्र के बांसी कस्बे स्थित रावजी मोहल्ले में पिछले दो माह से पेयजल संकट गहराने से मोहल्लेवासियों में भारी नाराजगी है। जलदाय विभाग की ओर से पर्याप्त जलापूर्ति नहीं होने के कारण लोगों को भीषण गर्मी में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। समस्या के समाधान नहीं होने पर उपभोक्ताओं ने ऑनलाइन शिकायत दर्ज करवाई, जिसके बाद विभागीय अधिकारी मौके पर पहुंचे।</p>
<p>जानकारी के अनुसार जलदाय विभाग द्वारा बांसी कस्बे के विभिन्न मोहल्लों में घर-घर नल कनेक्शन दिए गए हैं, लेकिन रावजी मोहल्ले में पिछले लंबे समय से नलों में नाममात्र का पानी ही पहुंच रहा है। कई मकानों की दूसरी मंजिल तक पानी नहीं पहुंच पाने से लोगों की परेशानी और बढ़ गई है। ऑनलाइन शिकायत के बाद नैनवां के कनिष्ठ अभियंता विभागीय टीम के साथ मौके पर पहुंचे और जलापूर्ति शुरू करवाई। हालांकि उस समय भी उपभोक्ताओं के नलों में बहुत कम मात्रा में पानी पहुंचता दिखाई दिया। इसके बाद अधिकारियों ने कर्मचारियों को निर्धारित समय से 20 मिनट अतिरिक्त जलापूर्ति करने के निर्देश दिए।</p>
<p>मोहल्लेवासियों हुकमचंद शर्मा, मुकेश कुमार जैन, अंकित जैन, लोकेश शर्मा, सत्यनारायण सोनी, नीरूशंकर शर्मा, सीमा जैन, ममता जैन एवं अवधेश कुमार जैन सहित अन्य लोगों ने बताया कि कई बार विभागीय कर्मचारियों को समस्या से अवगत कराया गया, लेकिन समाधान नहीं हुआ। बिजली कटौती के दौरान मोटर बंद रहने से जलापूर्ति पूरी तरह प्रभावित हो जाती है, जिससे लोगों को निजी नलकूपों से पानी लाने को मजबूर होना पड़ रहा है। ग्रामीणों ने चेतावनी दी कि यदि शीघ्र स्थायी समाधान नहीं किया गया तो वे जलदाय विभाग कार्यालय पहुंचकर विरोध प्रदर्शन करेंगे। मौके पर पहुंचे अधिकारियों को भी लोगों के आक्रोश का सामना करना पड़ा। बाद में अधिकारियों ने समझाइश कर लोगों को शांत किया।</p>
<p>बांसी के जिस मोहल्ले में जलापूर्ति समस्या है। वह लाइन के टेल क्षेत्र के है। इस समस्या के समाधान के लिए निर्धारित समय से 20 मिनट अधिक समय तक जलापूर्ति करने के लिए कर्मचारी को निर्देशित किया गया है। मोहल्ले में समय से जलापूर्ति हो जाएगी।<br /><strong>- योगिता जांगिड़, जेईएन,जलदाय विभाग, नैनवां </strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>बूंदी</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/bundi/bansi-s-raoji-mohalla--growing-outrage-among-residents-due-to-meager-water-supply/article-154550</link>
                <guid>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/bundi/bansi-s-raoji-mohalla--growing-outrage-among-residents-due-to-meager-water-supply/article-154550</guid>
                <pubDate>Thu, 21 May 2026 14:55:12 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://dainiknavajyoti.com/media/2026-05/1111200-x-600-px%29-1111.png"                         length="1614340"                         type="image/png"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[kota]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>विपक्ष भ्रम फैलाकर कर रहा नाटकबाजी, जनता के हित में काम कर रही सरकार : मदन राठौड़ </title>
                                    <description><![CDATA[भाजपा प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ ने विपक्ष पर पेट्रोल-डीजल और गैस को लेकर भ्रम फैलाने का आरोप लगाया है। उन्होंने पूर्व सीएम अशोक गहलोत को घेरते हुए कहा कि वे लंबे शासन के बाद भी स्थायी जल व्यवस्था नहीं कर पाए। राठौड़ ने कहा कि खाड़ी देशों में तनाव के बावजूद पीएम मोदी आपूर्ति बनाए रखे हुए हैं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/opposition-is-creating-drama-by-spreading-confusion-government-is-working/article-154385"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/madan-rathore.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ ने विपक्ष पर गैस और पेट्रोल को लेकर अनावश्यक भ्रम फैलाने और नाटकबाजी करने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि वर्तमान भाजपा सरकार जल संकट सहित आमजन से जुड़े मुद्दों के समाधान के लिए गंभीरता से कार्य कर रही है, जबकि विपक्ष केवल राजनीति कर रहा है। राठौड़ ने पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत पर निशाना साधते हुए कहा कि तीन बार मुख्यमंत्री रहने के बावजूद वे प्रदेश में स्थायी जल व्यवस्था सुनिश्चित नहीं कर पाए। उन्होंने कहा कि जोधपुर सहित कई क्षेत्रों में लंबे समय तक सत्ता में रहने के बाद भी समुचित व्यवस्थाएं विकसित नहीं की गईं। </p>
<p>हालांकि, वर्तमान सरकार घर-घर जल पहुंचाने के लिए लगातार प्रयास कर रही है। उन्होंने बताया कि भाखड़ा बांध से क्लोजर आने के कारण कुछ समय के लिए परेशानी हुई थी, लेकिन अब हालात धीरे-धीरे सामान्य हो रहे हैं। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ने कांग्रेस नेता गोविंद सिंह डोटासरा पर भी हमला बोलते हुए कहा कि भाजपा कार्यालय का घेराव करने से पहले कांग्रेस नेताओं को आत्ममंथन करना चाहिए। जिन घटनाओं को लेकर भाजपा पर आरोप लगाए जा रहे हैं, उनका भाजपा से कोई संबंध नहीं है और यह कांग्रेस से जुड़े लोगों का ही कारनामा है। गैस और तेल संकट के मुद्दे पर राठौड़ ने कहा कि विपक्ष केवल राजनीतिक लाभ लेने की कोशिश कर रहा है। उन्होंने कहा कि गल्फ देशों में तनावपूर्ण स्थिति और युद्ध जैसे हालात के बावजूद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार आवश्यक आपूर्ति बनाए रखने के लिए लगातार सक्रिय है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/opposition-is-creating-drama-by-spreading-confusion-government-is-working/article-154385</link>
                <guid>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/opposition-is-creating-drama-by-spreading-confusion-government-is-working/article-154385</guid>
                <pubDate>Tue, 19 May 2026 18:15:53 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://dainiknavajyoti.com/media/2026-03/madan-rathore.png"                         length="525709"                         type="image/png"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>अतिक्रमण और अव्यवस्थाओं  का शिकार हो रहा सुकेत बस स्टैंड, जानें पूरा मामला </title>
                                    <description><![CDATA[बैठने और छाया की व्यवस्था नहीं होने से यात्री परेशान।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/suket-bus-stand-plagued-by-encroachments-and-disorganization/article-154338"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-05/1111200-x-600-px)-(3)40.png" alt=""></a><br /><p>सुकेत। कस्बे का मुख्य बस स्टैंड इन दिनों बदहाली का शिकार बना हुआ है। यहां यात्रियों के लिए न तो पर्याप्त बैठने की व्यवस्था है और न ही गर्मी से बचाव के लिए उचित छाया उपलब्ध है। अतिक्रमण और अव्यवस्थाओं के चलते बस स्टैंड दुर्घटना संभावित क्षेत्र बन गया है, जिससे रोजाना सैकड़ों यात्रियों को परेशानी उठानी पड़ रही है।</p>
<p>यात्रियों ने बताया कि बस स्टैंड पर केवल कुछ टूटी-फूटी सीमेंट की बेंच ही मौजूद हैं। बुजुर्ग, महिलाएं और बच्चे घंटों धूप में खड़े होकर बसों का इंतजार करने को मजबूर हैं। वहीं बस स्टैंड का टीन शेड भी जर्जर हालत में है। कई जगह से टूटे शेड के नीचे व्यापारियों ने अस्थायी दुकानें लगा रखी हैं, जिससे यात्रियों को धूप में खड़ा रहना पड़ता है। बारिश के दौरान शेड से पानी टपकता है और रात के समय पर्याप्त रोशनी की व्यवस्था भी नहीं है।</p>
<p><strong>सवारियां सड़क पर ही उतारना-चढ़ाना पड़ रहा</strong><br />यात्री बस स्टैंड परिसर में ठेले और ऑटो खड़े रहने से जगह सिकुड़ गई है। ऐसे में बसों को सड़क पर ही सवारियां चढ़ानी-उतारनी पड़ती हैं, जिससे ज़ाम और दुर्घटनाओं का खतरा बना रहता है। पिछले माह एक बुजुर्ग महिला गड्ढे में गिरकर घायल हो गई थी, जबकि आए दिन स्कूली बच्चे भी चोटिल हो रहे हैं।</p>
<p><strong>ग्रामीणों ने जिला कलक्टर से लगाई गुहार</strong><br />ग्रामीणों ने जिला कलक्टर से बस स्टैंड का निरीक्षण कर यात्रियों के लिए शेड, पेयजल, शौचालय और पर्याप्त बैठने की व्यवस्था कराने की साथ हटाकर परिसर को समतल करने की भी मांग उठाई गई है।</p>
<p>कोटा जाने के लिए कई बार एक घंटे तक बस का इंतजार करना पड़ता है। लेकिन बैठने की व्यवस्था नहीं होने से छोटे बच्चों को गोद में लेकर खड़ा रहना पड़ता है।<br /><strong>- सीमा बाई, नियमित यात्री, सुकेत</strong></p>
<p>बरसात के दिनों में हालात और अधिक खराब हो जाते हैं। बस स्टैंड का रखरखाव नगर पालिका सुकेत के अधीन है। फिलहाल अस्थायी तौर पर चार बेंच लगाई गई हैं, लेकिन यह पर्याप्त नहीं हैं।<br /><strong>- रवि, कॉलेज छात्र, सुकेत </strong></p>
<p>यात्रियों के लिए बेहतर व्यवस्थाएं सुनिश्चित की जाएंगी। यदि किसी ने अतिक्रमण किया है तो उसे हटाया जाएगा। बस स्टैंड पर शौचालय, पेयजल और बैठने की समुचित सुविधा उपलब्ध करवाई जाएगी।<br /><strong>- चारु वर्मा, उपखंड अधिकारी, रामगंजमंडी </strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/suket-bus-stand-plagued-by-encroachments-and-disorganization/article-154338</link>
                <guid>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/suket-bus-stand-plagued-by-encroachments-and-disorganization/article-154338</guid>
                <pubDate>Tue, 19 May 2026 14:26:25 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://dainiknavajyoti.com/media/2026-05/1111200-x-600-px%29-%283%2940.png"                         length="1019393"                         type="image/png"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[kota]]></dc:creator>
                            </item>

            </channel>
        </rss>
        