<?xml version="1.0" encoding="utf-8"?>        <rss version="2.0"
            xmlns:content="http://purl.org/rss/1.0/modules/content/"
            xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/"
            xmlns:atom="http://www.w3.org/2005/Atom">
            <channel>
                <atom:link href="https://dainiknavajyoti.com/flowing/tag-5953" rel="self" type="application/rss+xml" />
                <generator>Dainik Navajyoti Rising Rajasthan RSS Feed Generator</generator>
                <title>flowing - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
                <link>https://dainiknavajyoti.com/tag/5953/rss</link>
                <description>flowing RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>बरसात में बाधक बनेगा नाले में पत्थरों का पहाड़, स्थानीय लोगों की बढ़ी चिंता</title>
                                    <description><![CDATA[दादाबाड़ी से जवाहर नगर तक कई इलाकों में भरेगा बरसाती पानी।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/a-mountain-of-stones-in-the-drain-will-become-an-obstacle-during-the-rainy-season/article-154046"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-05/1111200-x-600-px)-(3)35.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। नगर निगम की ओर से बरसात में नाले से पानी की निकासी की समुचित व्यवस्था के लिए बनाई जा रही चैनल ही परेशानी का कारण बन सकती है। चैनल के लिए नाले में खोदे गए पत्थरों का इतना अधिक पहाड़ जमा हो गया है कि वह बरसात में नाले के पानी की निकासी में बाधक बन सकता है। नगर निगम कोटा दक्षिण की ओर से तत्कालीन बोर्ड के समय में ही बसंत विहार से ज्योति मंदिर होते हुए धोकड़े वाले हनुमानजी मंदिर के पीछे दादाबाड़ी तक नाले में ड्राई वैदर चैनल बनाने का काम शुरु किया गया था। हालांकि यह काम काफी लम्बा हो गया है। </p>
<p>बसंत विहार से ज्योति मंदिर तक नाले में चैनल तो बना दी गई है। साथ ही नाले में आरसीसी की बैड भी बनाई जा रही है। यह बैड कुछ ही हिस्से में बन सकी। उसके आगे नाले की खुदाई कर पत्थरों को निकाला जा रहा था। लेकिन पत्थर इतनी अधिक मात्रा में एकत्र हो गए कि उन्हें हटाए बिना न तो काम आगे बढ़ पा रहा है और न ही काम पूरा हो पा रहा ह। अधरझूल में काम अटकने से जिस मकसद से यह काम शुरु किया गया था वह भी पूरा होता नहीं दिख रहा है। वरन् बरसात आने पर जब नाले में पानी का बहाव आएगा तो उसे निकलने की जगह ही नहीं मिलेगी। पत्थरों का पहाड़ इसमें बाधक बनेगा। जिससे वह पानी बसंत विहार,ई दादाबाड़ी, बालाकुंड, केशवपुरा व जवाहर नगर समेत आस-पास के क्षेत्रों में पानी भरने की संभावना है। जिससे स्थानीय लोगों व व्यापारियों को परेशानी का सामना करना पड़ेगा। वहीं केशवपुरा से दादाबाड़ी के बीच के मुख्य मार्ग पर भी भरने की संभावना है। जिससे यातायात भी बाधित हो सकता है।</p>
<p><strong>यह था मकसद</strong><br />नगर निगम कोटा दक्षिण के तत्कालीन महापौर राजीव अग्रवाल के समय में इस बरसाती नाले का काम शुरु किया गया था। उस समय प्रयास था कि बरसात के समय तो नाले में पूरे बहाव के साथ पानी निकल सके। साथ ही सालभर इस चैनल के माध्यम से पानी बहता रहे। वहीं बरसात के बाद इस नाले में की गई सीसी बैड का उपयोग पार्किंग, वेंडिग जोन, प्ले जोन व वॉकिंग के रूप में किया जा सके।लेकिन हालत यह है कि बोर्ड का कार्यकाल समाप्त हुए 6 माह का समय हो चुका है। न तो यह काम पूरा हुआ और न ही अभी तक मसकद पूरा होता दिख रहा है।</p>
<p><strong>स्थानीय लोगों की बढ़ी चिंता</strong><br />दादाबाड़ी नाले में करीब 6 माह से लगे पलतथरों के पहाड़ को देखकर दादाबाड़ी व जवाहर नगर समेत कई क्षेत्रों के लोगों को चिंताएं बढ़ गई है। लोगों का कहना है कि नगर निगम इन पत्थरों को हटाने के लिए अभी तक कुछ नहीं कर पाया है। इससे तो पहले वाला नाला ही सही था। जानकारों के अनुसार स्थानीय लोगों ने गत दिनों लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से मुलाकात कर इस पर चिंता जातते हुए इन पत्थरों को हटवाकर नाले की सफाई करवाने की गुहार भी लगाई थी। लोगों को चिंता है कि यदि ये पत्थर नहीं हटे इस क्षेत्र में आने वाला पानी उनके क्षेत्र में भरकर परेशानी पैदा कर सकता है।</p>
<p><strong>अधिकारियों को करना चाहिए प्रयास</strong><br />पूर्व महापौर राजीव अग्रवाल का कहना है कि नाले का काम तो काफी समय से चल रहा था। लेकिन नाले के पत्थर खुदाई का काम नवम्बर में शुरु किया गया था। कुछ समय बाद ही बोर्ड का कार्यकाल समाप्त हो गया। जब तक बोर्ड था तब तक तो इसकी मॉनिटरिंग होती रही। लेकिन उसके बाद अधिकारियों ने ध्यान नहीं दिया। जबकि पत्थर खुदाई के बाद उसे वहां से हटवाना निगम का काम था। उन्होंने बताया कि निगम अधिकारी बरसात से पहले इन पत्थरों को यहां से हटवाकर अन्य स्थान पर डलवाकर वहां से इनकी नीलामी करवा सकते हैं। लेकिन इसी जगह पर पड़े पत्थरों की नीलामी करने में माइनिंग समेत अन्य समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। जिससे बरसात का समय आने तक यदि पत्थरों को नहीं हटाया गया तो सुविधा के लिए किया जा रहा काम लोगों के लिए परेशानी का कारण बन सकता है।</p>
<p><strong>ऑनलाइन नीलामी प्रक्रिया शुरु</strong><br />नगर निगम के अधिशाषी अभियंता ए.क्यू कुरैशी का कहना है कि पत्थरों की नीलामी के प्रयास तो काफी समय से किए जा रहे हैं। लेकिन कई कारणों से नीलामी नहीं हो सकी थी। मॉइनिंग विभाग द्वारा पत्थरों की नालामी से रॉयल्टी की डिमांड को मान लिया गया है। साथ ही ऑनलाइन नीलामी की प्रक्रिया शुरु हो गई है। दो दिन में इसके लिए आवेदन करना है। उसके बाद नीलामी की जाए$गी। अधिक बोली दाता को कार्यादेश देकर शीघ्र ही इन पत्थरों को हटाने के लिए कहा जाएगा। इस माह के अंत तक यह काम पूरा होने की संभावना है। जिससे बरसात से पहले नाले की सफाई की जा सकेगी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/a-mountain-of-stones-in-the-drain-will-become-an-obstacle-during-the-rainy-season/article-154046</link>
                <guid>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/a-mountain-of-stones-in-the-drain-will-become-an-obstacle-during-the-rainy-season/article-154046</guid>
                <pubDate>Sat, 16 May 2026 15:02:14 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://dainiknavajyoti.com/media/2026-05/1111200-x-600-px%29-%283%2935.png"                         length="2048388"                         type="image/png"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[kota]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>कोटा दक्षिण वार्ड 79: सीवरेज लीकेज से सड़कों पर बह रहा गंदा पानी </title>
                                    <description><![CDATA[शहर के कोटा दक्षिण वार्ड 79 में सीवरेज लीकेज होने से सड़कों पर सीवरेज का गंदा पानी बह रहा हैं। पाइप लीकेज से सुबह से शाम तक यह पानी बहता ही रहता हैं। पानी की बदबू के चलते यहां से गुजरने वाले लोग परेशान हैं। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/kota-south-ward-79--dirty-water-flowing-on-the-roads-due-to-sewerage-leakage/article-16368"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-07/ward-79,-sewage-leakage-rods-par-ganda-pani..kota-news-27.7.2022.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। शहर के कोटा दक्षिण वार्ड 79 में सीवरेज लीकेज होने से सड़कों पर सीवरेज का गंदा पानी बह रहा हैं। पाइप लीकेज से सुबह से शाम तक यह पानी बहता ही रहता हैं। पानी की गंदी बदबू के चलते यहां से गुजरने वाले लोग परेशान हैं। लोगों को खुले में बहते गंदे पानी से बीमारिंया फैलने का खतरा बना रहता हैं। स्थानीय लोगों का कहना हैं की सीवरेज लीकेज से गंदा पानी कई वर्षों से बह रहा हैं। लेकिन आज तक इसकी और किसी ने कोई ध्यान नहीं दिया। स्थानीय लोगों का कहना ही सीवरेज के लिए जो नए चैंबर बनाए गए हैं, उनके उपर से यह पानी आ रहा हैं। जबकि अभी तक कनेक्शन अधिक नहीं हुए हैं। इससे पहले जो सीवरेज के चैंबर बनाएं गए थे, वह बढ़िया थे और वह लीकेज भी नहीं होते थे। इस बार जो चैंबर बनाएं गए हैं, उनमें गड़बड़ी की गई हैं। <br /><br /><strong>सफाई कर्मचारियों की कमी</strong><br />स्थानीय लोगों का कहना हैं वार्ड क्षेत्र में सफाई कर्मचारियों की कमी हैं। जिसके कारण वार्ड में नियमित रुप से साफ-सफाई नहीं हो रही। सफाई नहीं होने से वार्ड क्षेत्र में गदंगी व कचरा पसरा रहता हैं। इसके साथ ही चौराहे पर बनाए गए कचरा प्वांइट में दूसरे वार्डों के लोग भी कचरा डाल जाते हैं। जिसकी वजह से कचरा प्वांइट रोजाना कचरे से भर जाता हैं और कचरा सड़कों पर फैलता हैं। वार्ड की नालियां कचरे से अवरुद्ध हो चुकी हैं। नालियों का पानी भी सड़को पर बह रहा हैं।<br /><br /><strong>यह है वार्ड क्षेत्र</strong><br />इस वार्ड में तलवण्डी से 04 से 05, तलवण्डी सेक्टर बी, सम्पूर्ण अम्बेडकर बस्ती का क्षेत्र आता हैं।<br /><br /><strong>सड़कों पर पसरी गंदगी</strong><br />सीवरेज लीकेज होने से सड़को पर गंदगी व कीचड़ पसरा रहता हैं। जिसके कारण यहां से आने-जाने वाले लोगों व स्थानीय लोगों को  परेशानी होती हैं। <br />कीचड़ पर मच्छर पनप रहा हैं। जिसे मौसमी बीमारियां फैल रही हैं। इसके साथ ही लोगों को दुर्गंध का सामना भी करना पड़ता हैं।<br /><strong>-अनीता अग्रवाल, स्थानीय निवासी </strong><br /><br />आरयूआईडीपी ने पाइपलाइन डालने के नाम पर जगह-जगह से सड़के खोदकर छोड़ रखी हैं। बरसात के समय इन गड्ढों में पानी भर जाता हैं। जिसके कारण सड़क हादसे होते रहते हैं। वार्ड के लोगों को रास्ता बंद होने की वजह से आने जाने में परेशानी होती हैं। सड़के भी क्षतिग्रस्त हो चुकी हैं। <br /><strong>-अशोक शर्मा, स्थानीय निवासी</strong><br /><br /> वार्ड क्षेत्र में पानी की गंभीर समस्या बनी हुई हैं। इसके लिए विधायक संदीप शर्मा के साथ आंदोलन भी किया गया था। पानी सप्लाई का कोई समय नहीं हैं। सुबह 10 से 15 मिनट पानी आता हैं। वार्ड क्षेत्र में 14 हजार के करीब जनसंख्या हैं। जिसमें अधिकतर स्टूडेÞट्स हैं। पानी नहीं मिलने से इन बच्चों को परेशानी का सामना करना पड़ता हैं। समस्या को लेकर कई बार जलदाय विभाग के अधिकारियों को भी चेताया गया हैं, लेकिन इसके बावजूद भी इसकी और कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा।<br /><strong>-संजीव विजय, पार्षद</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/kota-south-ward-79--dirty-water-flowing-on-the-roads-due-to-sewerage-leakage/article-16368</link>
                <guid>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/kota-south-ward-79--dirty-water-flowing-on-the-roads-due-to-sewerage-leakage/article-16368</guid>
                <pubDate>Wed, 27 Jul 2022 13:32:14 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://dainiknavajyoti.com/media/2022-07/ward-79%2C-sewage-leakage-rods-par-ganda-pani..kota-news-27.7.2022.jpg"                         length="54117"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[kota]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>मुख्य पाइप लाइन में लीकेज से बहा सैकड़ों क्यूसेक पानी</title>
                                    <description><![CDATA[ सुल्तानपुर नगर पालिका द्वारा मुख्य बाजार में  करवाए जा रहे इंटरलॉकिंग कार्य के दौरान सोमवार रात्रि में सड़क के साइड में जेसीबी मशीन  से खुदाई के दौरान कस्बे के मुख्य बाजार में मंगलवार को मुख्य पेयजल पाइप लाइन करीब 4 जगह फूट गई। जिससे सैकड़ों क्यूसेक पानी व्यर्थ बह गया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/hundreds-of-cusecs-of-water-flowing-through-leakage-in-the-main-pipeline/article-11645"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-06/main-pipeline-leakage-sultanpur.jpg" alt=""></a><br /><p>सुल्तानपुर।  सुल्तानपुर नगर पालिका द्वारा मुख्य बाजार में  करवाए जा रहे इंटरलॉकिंग कार्य के दौरान सोमवार रात्रि में सड़क के साइड में जेसीबी मशीन  से खुदाई के दौरान कस्बे के मुख्य बाजार में मंगलवार को मुख्य पेयजल पाइप लाइन करीब 4 जगह फूट गई। जिससे संैकड़ों क्यूसेक पानी व्यर्थ बह गया।<br /><br />जानकारी के अनुसार कस्बे के मुख्य बाजार में पेयजल पाइप लाइन में मंगलवार को 4 जगह लीकेज हो गया। जिससे सैंकड़ों क्यूसेक पानी व्यर्थ बहने के साथ ही कई दुकानों में पानी भर गया। दुकानदारों का सामान खराब हो गया। साथ ही कस्बे के कई मोहल्लों में 6 घंटे तक पेयजल सप्लाई बाधित रहने से समय पर नलों में पानी नहीं आ सका। जिससे लोगों को परेशानियों का सामना भी करना पड़ा। कस्बे के मुख्य बाजार में नगर पालिका द्वारा कराए जा रहे इंटरलॉकिंग कार्य के दौरान सोमवार रात्रि में सड़क के साइड में जेसीबी मशीन द्वारा खुदाई की गई थी जिससे पाइप लाइन लीकेज हो गई। जिसके चलते कस्बे में पेयजल सप्लाई भी करीब 6 घंटे तक बाधित रही। दोपहर के समय जैसे ही कोटा रोड की पेयजल सप्लाई छोड़ी गई वैसे ही मुख्य लाइन में से करीब चार-पांच जगह से फव्वारे निकलने लगे। बौछार की रफ्तार इतनी तेज थी कि आसपास की दुकानों में पानी भर गया। <br /><br /><strong>दुकानों के शटर लगाकर किया बचाव</strong><br />जानकारी के अनुसार कुछ दुकानदारों ने तो पानी की बौछार से बचने के लिए दुकानों के शटर तक लगा लिए। पाइप लाइन लीकेज होने से करीब 6 घंटे तक पेयजल सप्लाई बाधित रही। जिससे लोगों को परेशानियों का सामना करना पड़ा। <br /><br />पाइपलाइन लीकेज होने से उससे निकलने वाला पानी दुकान में भर गया। जिससे दुकान में रखा सामान खराब हो गया। कपड़े की दुकान होने से कपड़े गीले हो गए। शीघ्र ही दुकान का शटर लगा कर ज्यादा पानी अंदर आने से रोका। <br /><strong>-रमेश नामा, व्यापारी</strong><br /><br />दोपहर के समय अचानक ही पाइपलाइन लीकेज हो जाने से एकदम से ही पानी दुकानों में आना शुरू हो गया। पानी से बचाव के लिए लिकेज पर कुछ पत्थर डालकर रोकने का प्रयास किया। लेकिन वह प्रयास विफल हुआ और दुकानों में पानी ही पानी हो गया।<br /><strong>-गोलू शर्मा एवं भवानी शंकर शर्मा, व्यापारी</strong> <br /><br />दोपहर के समय जैसे ही कोटा रोड की सप्लाई को चालू किया गया तो रात्रि में इंटरलॉकिंग कार्य के दौरान क्षतिग्रस्त हुई पाइप लाइनों से तेजी से पानी की बौछार निकलने लगी। जिससे दुकानों में पानी भर गया।<br /><strong>-पूरन मेहरा, फोटो दुकान मालिक </strong> <br /><br />नगर में सौंदर्यीकरण का कार्य चल रहा है। इसी दौरान पाइप लाइन लीकेज हो गई। जिसे संबंधित विभाग द्वारा शीघ्र ही दुरुस्त करा कर कस्बे वासियों के लिए पेयजल सप्लाई शुरू करा दी गई है।<br /><strong>-हेमलता शर्मा, चेयरमैन, नगर पालिका,</strong><br /><strong> सुल्तानपुर</strong><br /><br />इंटरलॉकिंग कार्य के दौरान मुख्य पाइप लाइन क्षतिग्रस्त हो गई थी। जिसे दुरुस्त करवा दिया गया है। कस्बे के जिन वार्डों में पेयजल सप्लाई बाधित हुई थी, उनकी सप्लाई देर शाम तक चालू करवा दी है। <br /><strong>-दिनेश गोचर, जेईएन, पीएचईडी</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/hundreds-of-cusecs-of-water-flowing-through-leakage-in-the-main-pipeline/article-11645</link>
                <guid>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/hundreds-of-cusecs-of-water-flowing-through-leakage-in-the-main-pipeline/article-11645</guid>
                <pubDate>Wed, 08 Jun 2022 16:15:35 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://dainiknavajyoti.com/media/2022-06/main-pipeline-leakage-sultanpur.jpg"                         length="58624"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[kota]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>बारिश के पानी को रोकने से बचेंगी ‘बरसाती नदियां’</title>
                                    <description><![CDATA[अनेक जिलों में बहने वाली बरसाती नदियां सूख गई]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/%E0%A4%AC%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A4%BF%E0%A4%B6-%E0%A4%95%E0%A5%87-%E0%A4%AA%E0%A4%BE%E0%A4%A8%E0%A5%80-%E0%A4%95%E0%A5%8B-%E0%A4%B0%E0%A5%8B%E0%A4%95%E0%A4%A8%E0%A5%87-%E0%A4%B8%E0%A5%87-%E0%A4%AC%E0%A4%9A%E0%A5%87%E0%A4%82%E0%A4%97%E0%A5%80-%E2%80%98%E0%A4%AC%E0%A4%B0%E0%A4%B8%E0%A4%BE%E0%A4%A4%E0%A5%80-%E0%A4%A8%E0%A4%A6%E0%A4%BF%E0%A4%AF%E0%A4%BE%E0%A4%82%E2%80%99/article-1565"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2021-10/4.jpg" alt=""></a><br /><p><strong> जयपुर</strong>। प्रदेश के चारों तरफ अनेक छोटी-बड़ी नदियां रही हैं, जो बरसात के दिनों में ही बहती थी। बीते कुछ सालों में बरसात के कम होने, बहाव क्षेत्र में जगह-जगह अतिक्रमण और बरसाती पानी का संरक्षण नहीं होने से नदियां वक्त के साथ काल-कवलित हो गई हैं। अब तो कई नदियां ऐसी हैं, जो सिर्फ कागजों में ही जिंदा हैं। आलम है कि भूगोल के विद्यार्थी भी बड़ी मुश्किल से नदियों के नाम जानते हैं, जबकि एक दौर ऐसा भी रहा है, जब सभी नदियां बरसात के दिनों में बहा करती थी।</p>
<p><br /> <strong>क्यों दम तोड़ गई नदियां</strong><br /> आज बरसात का पानी मिट्टी काटता हुआ बह जाता है। उसे रोकने के लिए सभी लोगों को सामूहिक रूप से प्लानिंग बनाकर पानी के बहाव को रोकना पड़ेगा। ताकि ज्यादा से ज्यादा बरसाती पानी का उपयोग हो सके। यह कहना है-मैग्सेसे पुरस्कार विजेता राजेन्द्र सिंह का। वे कहते हैं कि बरसात के पानी के तेज फ्लो को स्लो किया जाना चाहिए। आज देशभर के 72 प्रतिशत जलस्त्रोत और करीब 70 प्रतिशत नदियां सूख गई हैं। <br /> <br /> <strong>क्या हैं सुझाव</strong><br />      निजी क्षेत्र के ट्यूबवेल पर रोक। <br />     पौधरोपण के साथ सामुदायिक विके्रन्दीकरण जल प्रबंधन की आवश्यकता।<br />     राज्य सरकार नदियों के संरक्षण के लिए नए सिरे से करे विचार। <br />     नदी के बहाव क्षेत्र में अतिक्रमण को हटाना बेहद जरूरी है। <br /> <strong><br /> संकल्प लिया और बहने लगी अरवली नदी</strong><br /> एक समय में पूरी तरह सूख गई अरवली नदी में बरसात के पानी को रोकने के लिए जब संकल्प लिया गया तो सभी ने बरसात की एक-एक बूंद बचाई थी। गांव के हजारों लोगों ने प्रकृति से कम से कम लेने और अधिक से अधिक देने का ही संकल्प किया और आज अरवली नदी बह रही है।</p>
<p><br /> <strong>इनका कहना है</strong><br /> जगह-जगह ट्यूबवेल लगने और नदी के बहाव क्षेत्र में अतिक्रमण होने से नदियां सूख गई हैं। बरसात के पानी के संरक्षण की भी उचित व्यवस्था होनी चाहिए। पानी को बचाने की मानसिकता बनानी होगी।<br /> <strong>डॉ. एमएस राठौड़, निदेशक, पर्यावरण एवं विकास अध्ययन संस्थान, जयपुर </strong></p>
<p><br /> <strong>ऐसी नदियां जो कुछ जिंदा और कुछ सूख गई</strong><br /> अजमेर में साबरमती, सरस्वती,  खारी, डाई, बनास। अलवर में साबी, रूपाढेल, काली, गौरी, सोटा। बांसवाड़ा में माही, अन्नास, चैणी। बाड़मेर में लूनी, संूकड़ी। भरतपुर में चम्बल, बराह, बाणगंगा, गंभीरी, पार्वती। भीलवाड़ा में बनास, कोठारी, बेडच, मेनाली, मानसी, खारी। बूंदी में कुराल। धौलपुर में चम्बल। डूंगरपुर में सोम, माही, सोनी। श्रीगंगानगर में घग्घर। जयपुर में बाणगंगा, बांड़ी, डूंढ, मोरेल, साबी, सोटा, डाई, सखा, मासी। जैसलमेर में काकनेय, चांघण, लाठी, घऊआ, घोगड़ी। जालौर में लूनी, बांड़ी, जवाई, सूकड़ी। झालावाड़ में कालीसिंध, पर्वती, छोटी काली सिंध,  निवाज। झुंझनूं में काटली। जोधपुर में लूनी, माठड़ी, जोजरी। कोटा में चम्बल, कालीसिंध, पार्वती, आऊ निवाज, परवन। नागौर में लूनी। पाली में लीलड़ी, बांड़ी, सूकड़ी जवाई। सवाईमाधोपुर में चम्बल, बनास, मोरेल। सीकर में काटली, मंथा, पावटा, कावंट। सिरोही में पश्चिमी बनास, सूकड़ी, पोसालिया,खाती, किशनावती, झूला, सुरवटा। टोंक में बनास,मासी, बांड़ी। उदयपुर में बनास, बेडच, बाकल, सोम,जाखम, साबरमती। चित्तौड़गढ़ में बनास, बेडच, बामणी, बागली, बागन, औराई, गंभीरी, सीवान, जाखम, माही।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/%E0%A4%AC%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A4%BF%E0%A4%B6-%E0%A4%95%E0%A5%87-%E0%A4%AA%E0%A4%BE%E0%A4%A8%E0%A5%80-%E0%A4%95%E0%A5%8B-%E0%A4%B0%E0%A5%8B%E0%A4%95%E0%A4%A8%E0%A5%87-%E0%A4%B8%E0%A5%87-%E0%A4%AC%E0%A4%9A%E0%A5%87%E0%A4%82%E0%A4%97%E0%A5%80-%E2%80%98%E0%A4%AC%E0%A4%B0%E0%A4%B8%E0%A4%BE%E0%A4%A4%E0%A5%80-%E0%A4%A8%E0%A4%A6%E0%A4%BF%E0%A4%AF%E0%A4%BE%E0%A4%82%E2%80%99/article-1565</link>
                <guid>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/%E0%A4%AC%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A4%BF%E0%A4%B6-%E0%A4%95%E0%A5%87-%E0%A4%AA%E0%A4%BE%E0%A4%A8%E0%A5%80-%E0%A4%95%E0%A5%8B-%E0%A4%B0%E0%A5%8B%E0%A4%95%E0%A4%A8%E0%A5%87-%E0%A4%B8%E0%A5%87-%E0%A4%AC%E0%A4%9A%E0%A5%87%E0%A4%82%E0%A4%97%E0%A5%80-%E2%80%98%E0%A4%AC%E0%A4%B0%E0%A4%B8%E0%A4%BE%E0%A4%A4%E0%A5%80-%E0%A4%A8%E0%A4%A6%E0%A4%BF%E0%A4%AF%E0%A4%BE%E0%A4%82%E2%80%99/article-1565</guid>
                <pubDate>Sun, 10 Oct 2021 13:02:41 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://dainiknavajyoti.com/media/2021-10/4.jpg"                         length="191671"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Administrator]]></dc:creator>
                            </item>

            </channel>
        </rss>
        