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                <title>मोदी सरकार ने आदिवासी समुदाय को दिखाई तरक्की की राह</title>
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                        <![CDATA[ शिक्षा से लेकर स्वास्थ्य सेवा और आर्थिक सशक्तीकरण तक इन समुदायों को अब उस तरह का समर्थन और निवेश देखने को मिल रहा है जो उन्हें कई पीढ़ियों से नहीं मिला था।]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/modi-government-showed-of-progress-to-the-tribal-community/article-95062"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-11/drugs-copy3.jpg" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। भारत का आदिवासी समुदाय 2014 से पहले एक कठिन संघर्ष का सामना कर रहा था, उनका संघर्ष काफी हद तक देश की नजरों से दूर था। दशकों तक, वे हाशिए पर रहे, उन्हें नजरअंदाज किया गया और सम्मानजनक जीवन जीने के लिए आवश्यक सहायता के बिना उन्हें उनके हाल पर छोड़ दिया गया। कई आदिवासी क्षेत्रों में शिक्षा और आर्थिक अवसर, सुविधाएं या तो न्यूनतम थीं या मौजूद ही नहीं थीं। लेकिन 2014 के बाद, एक परिवर्तनकारी बदलाव हुआ। मोदी सरकार की आदिवासी समुदायों पर केन्द्रित पहलों ने ना केवल आदिवासियों की जरूरतों को स्वीकार किया, बल्कि इन मुद्दों को तत्परता से प्राथमिकता भी दी। शिक्षा से लेकर स्वास्थ्य सेवा और आर्थिक सशक्तीकरण तक इन समुदायों को अब उस तरह का समर्थन और निवेश देखने को मिल रहा है जो उन्हें कई पीढ़ियों से नहीं मिला था।</p>
<p><strong>शिक्षा का क्षेत्र</strong><br />उदाहरण के लिए शिक्षा को ही ले लें। आदिवासी बच्चों को एक समय में गुणवत्तापूर्ण स्कूली शिक्षा मिलने की बहुत कम उम्मीद थी। 2014 से पहले जो थोड़े बहुत एकलव्य मॉडल आवासीय विद्यालय (ईएमआरएस) थे, वे संख्यां की दृष्टि से कम थे और उनमें संसाधनों की भी कमी थी। लेकिन इसके बाद, शिक्षा पर मोदी सरकार द्वारा विशेष ध्यान दिए जाने के कारण इन स्कूलों का महत्वपूर्ण विस्तार हुआ है। आज, 715 स्कूलों की मंजूरी दी गई है, और 476 पहले से ही चल रहे हैं, जिनमें 1.33 लाख से अधिक छात्र पढ़ रहे हैं। ये स्कूल आधुनिक सुविधाओं, डिजिटल कक्षाओं और खेल के बुनियादी ढांचे से लैस हैं, जो यह सुनिश्चित करते हैं कि आदिवासी बच्चों को भी उनके शहरी समकक्षों के बराबर शिक्षा मिले। 17,000 करोड़ रुपए की छात्रवृत्ति ने 3 करोड़ से अधिक आदिवासी छात्रों को और सशक्त बनाया है, जिससे उन्हें उच्च शिक्षा और बेहतर करियर के अवसर मिल रहे हैं। आदिवासी युवाओं के लिए जो रास्ता कभी बंद लगता था, वह अब खुला हुआ है और वे संभावनाओं से भरे भविष्य की ओर कदम बढ़ा रहे हैं।</p>
<p><strong>वन अधिकर कानून</strong><br />वन अधिकार कानूनों के कठोर क्रियान्वयन के साथ, आदिवासी भूमि अधिकारों को मान्यता देने और उनकी रक्षा करने में महत्वपूर्ण प्रगति हुई है। 2014 से पहले, आदिवासी समुदायों के पास अपनी भूमि को लेकर सुरक्षा की भावना बहुत कम रहती थी, वे अतिक्रमण और विस्थापन के निरंतर भय में रहते थे। अपनी भूमि पर नियंत्रण नहीं होने के कारण लंबे समय तक इस समुदाय में गरीबी और संस्कृति खोने का सिलसिला बना रहा। लेकिन मोदी सरकार के तहत, एक ऐतिहासिक बदलाव हुआ है। वन अधिकार कानून को सक्रिय रूप से लागू किया गया है, जिसके परिणामस्वरूप आदिवासी परिवारों को 23 लाख से अधिक भूमि के अधिकार दिए गए हैं, जिसमें1.9 करोड़ एकड़ से अधिक क्षेत्र शामिल है। इस ऐतिहासिक कदम ने आदिवासियों को अपनी भूमि पर खेती करने, पारंपरिक आजीविका का अभ्यास करने और विस्थापन के डर के बिना अपनी पैतृक विरासत की रक्षा करने का अधिकार दिया है। आदिवासी भारत के लिए, भूमि केवल एक संसाधन नहीं है, बल्कि सशक्तिकरण के एक नए युग में सुरक्षा और सम्मान का स्रोत है।</p>
<p><strong>आर्थिक सशक्तिकरण</strong><br />आर्थिक सशक्तिकरण एक और ऐसा क्षेत्र है जहां अत्यकधिक परिवर्तन देखने को मिला है। 2014 से पहले, आदिवासी समुदाय अक्सर अपनी आजीविका के लिए वनोपज पर निर्भर रहते थे, लेकिन इन संसाधनों का प्रभावी ढंग से उपयोग करने के लिए उनके पास सहयोग या साधन नहीं थे। आज, राष्ट्रीय बांस मिशन जैसी पहलों ने आदिवासियों के लिए आर्थिक परिदृश्य फिर से परिभाषित किया है। बांस को पेड़ की श्रेणी से हटाकर, सरकार ने आदिवासी परिवारों के लिए बांस की कटाई, प्रसंस्करण और बिक्री के नए रास्ते खोले हैं, जिससे उन्हें आय का एक स्थायी स्रोत मिला है। वन धन विकास केन्द्रों (वीडीवीके) ने भी 45 लाख से अधिक आदिवासी लाभार्थियों का सहयोग किया है, जिससे उन्हें वनोपज के मूल्य संवर्धन और अपनी आय बढ़ाने में मदद मिली है। पीएम-किसानके तहत, लगभग 1.2 करोड़ आदिवासी किसान अब प्रत्यक्ष वित्तीय सहायता प्राप्त करते हैं, जिससे उन्हें कृषि में निवेश करने और अपनी उत्पादकता में सुधार करने का अधिकार मिला है। ये पहले न केवल आदिवासी अर्थव्यवस्थाओं को बदल रही हैं। बल्कि आत्मनिर्भरता और दीर्घकालिक समृद्धि की नींव रख रही हैं।</p>]]>
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                                                            <category>भारत</category>
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                <pubDate>Fri, 15 Nov 2024 11:36:28 +0530</pubDate>
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                <title>MP Election 2023: श्योपुर में आदिवासी मतदाता निभाते हैं निर्णायक भूमिका</title>
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                        <![CDATA[विजयपुर विधानसभा क्षेत्र से कांग्रेस और भाजपा से लगभग 30 साल पुराने दो प्रतिद्वंद्वी ही इस बार भी आमने-सामने हैं। भाजपा उम्मीदवार बाबूलाल मेवरा द्वारा बार-बार दल बदलने के कारण पार्टी ने इस बार उन्हें बमुश्किल उम्मीदवारी प्रदान की है।]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/sheopur-where-tribal-voters-play-a-decisive-role/article-62023"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-11/election-1.jpg" alt=""></a><br /><p>श्योपुर। मध्य प्रदेश के आदिवासी बहुल श्योपुर जिले की दोनों विधानसभा सीटों पर इस बार दोनों ही प्रमुख दलों कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी ने पुराने चेहरों पर ही भरोसा जताया है, वहीं समूचे क्षेत्र के एकमात्र अदिवासी प्रत्याशी मुकेश मल्होत्रा इस बार निर्दलीय के तौर पर चुनावी मैदान में ताल ठोंक कर दोनों दलों के समीकरण बिगाड़ सकते हैं।</p>
<p>विजयपुर विधानसभा क्षेत्र से कांग्रेस और भाजपा से लगभग 30 साल पुराने दो प्रतिद्वंद्वी ही इस बार भी आमने-सामने हैं। भाजपा उम्मीदवार बाबूलाल मेवरा द्वारा बार-बार दल बदलने के कारण पार्टी ने इस बार उन्हें बमुश्किल उम्मीदवारी प्रदान की है। कांग्रेस प्रत्याशी और पूर्व मंत्री रामनिवास रावत पिछले 32 वर्षों से विजयपुर क्षेत्र से ही कांग्रेस के उम्मीदवार रहे हैं। इन दोनों के बीच कई बार चुनावी युद्ध हो चुका है, जिसमें दोनों एक दूसरे को पटखनी भी दे चुके हैं। </p>
<p>मेवरा ने पिछले चुनाव में भाजपा विधायक सीताराम आदिवासी का विरोध किया था। इसके बाद पार्टी ने इस बार फिर उन्हें ही टिकट दे दिया है। सीताराम आदिवासी का टिकट कटने से आदिवासियों में भारी नाराजगी थी। ऐसे में उन्होंने अपना निर्दलीय उम्मीदवार मुकेश मल्होत्रा मैदान में उतार दिया है, जिसका नुकसान भाजपा को उठाना पड़ सकता है। मुकेश मल्होत्रा ने 2018 का चुनाव भी लड़ा था। इस बार इस समूचे आदिवासी अंचल में मुकेश मल्होत्रा एकमात्र आदिवासी प्रत्यशी हैं। क्षेत्र में लगभग 60 हजार आदिवासी मत हैं। </p>
<p>वहीं श्योपुर विधानसभा क्षेत्र में कांग्रेस ने विधायक बाबू जण्डेल पर ही दांव खेला है। भाजपा भी इस बार भी पुराने उम्मीदवार पूर्व विधायक दुर्गालाल विजय के ही भरोसे है। यहां कांग्रेस और भाजपा के बीच कांटे का मुकाबला होने जा रहा है।</p>]]>
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                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 16 Nov 2023 17:20:19 +0530</pubDate>
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                <title>आदिवासी देश के असली मालिक, भाजपा उनके अधिकार छीनने का कर रही है काम : राहुल</title>
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                        <![CDATA[गुजरात में रैली में सूरत के महुवा में आदिवासियों की एक सभा को सम्बोधित करते हुए राहुल गांधी ने कहा कि वह देश के पहले मालिक हैं और दावा किया कि भाजपा उनके अधिकार छीनने के लिए काम कर रही है। ]]>
                    </description>
                
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/tribal-the-owner-of-country--says-rahul/article-30351"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-11/46546546536.jpg" alt=""></a><br /><p>सूरत। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने गुजरात की चुनावी रैली के दौरान भाजपा पर हमला किया। राहुल ने कहा कि भारत जोड़ो यात्रा के दौरान किसानों, युवाओं और आदिवासियों से मिले और उनकी समस्याएं सुनी। गुजरात में रैली में सूरत के महुवा में आदिवासियों की एक सभा को सम्बोधित करते हुए राहुल गांधी ने कहा कि वह देश के पहले मालिक हैं और दावा किया कि भाजपा उनके अधिकार छीनने के लिए काम कर रही है। </p>
<p>राहुल ने कहा कि देश के असली मालिक आप हो। उन्होंने कहा कि वह वनवासी कहते है। वह यह नहीं कहते कि आप देश के पहले मालिक है। वह कहते है कि आप जंगल में रहते है। इसका तात्पर्य है कि उनकी कोशिश है कि आप शहरों में नहीं रहे। उनकी कोशिश है कि बच्चे इंजीनियर, डॉक्टर बनें, विमान उड़ाना सीखें, अंग्रेजी नहीं बोलें। उन्होंने कहा कि यह देश आदिवासियों का है और इस देश में अधिकारी मिलना चाहिए। बच्चों को स्वास्थ्य और शिक्षा मिलनी चाहिए। </p>
<p> </p>]]>
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                                                            <category>भारत</category>
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                <pubDate>Tue, 22 Nov 2022 10:26:42 +0530</pubDate>
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                <title>घुमंतू जनजातियों ने मनाया अपना 71वां आजादी दिवस</title>
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                        <![CDATA[सहायक निदेशक बाल अधिकारिता नवल खान ने घुमंतु व अर्धघुमंतु जनजातियों के लियें चल रही विभागीय योजनाओं के बारे में विस्तार से जानकारी दी।]]>
                    </description>
                
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/tonk/nomadic-tribes-celebrated-their-71st-independence-day/article-21372"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-09/51.jpg" alt=""></a><br /><p>टोंक। विमुक्ति दिवस के अवसर पर घुमंतू सांझा मंच टोंक व एक्शन एड एसोशिऐशन द्वारा कलंदर बस्ती बहीर में बुधवार को घुमन्तु विमुक्ति दिवस समारोह का आयोजन कर विमुक्त घुमंतू जनजातियों ने अपना 71वां आजादी दिवस मनाया। इस आजादी उत्सव समारोह में आस-पास की विमुक्त घुमंतू जनजातियों के लोगों सहित बड़ी संख्या में ब चेऔर महिलाएं भी शामिल रहीं। जयपुर से विमुक्ति दिवस समारोह में शामिल होने आई व लंबे समय से विमुक्त, घुमंतू और अर्ध-घुमंतू जनजातियों के बीच काम कर रही एक्शन एड एसोसिऐशन स्टेट मैनेजर सीओन कांगोरी ने विमुक्त, घुमंतू और अर्ध-घुमंतू जनजातियों का इतिहास बताते हुए कहा, देश में अलग-अलग समय पर अलग-अलग आक्रमणकारियों का शासन रहा लेकिन इन जनजातियों ने कभी किसी के सामने समर्पण नहीं किया। 1871 में अग्रेजों ने घुमंतू जनजातियों पर क्रिमिनल ट्राइब एक्ट लगाकर कमजोर करने का काम किया उसके बाद भी ये जनजतियां अपनी कला और संस्कृति से जुड़े रहे। ये जनजातियां आज भी अपने पहनावे अपनी भाषा को जीवित रखे हुए हैं। किसी भी समाज के बदलाव और उन्नति के लियें संघर्ष और निर्माण महत्वपूर्ण है और इसके लियें अपने इतिहास को जानना आवश्यक है आज का दिन इसी इतिहास को जानने का दिन है कि हमारे साथ कैसा भेदभाव हुआ है आज हम इस स्थिति में क्यों हैं इन बातों पर समय समय पर विश्लेशण होना चाहिए। घुमंतु समाज को तरक्कÞी के लियें न केवल शिक्षित होना होगा बल्कि संगठित होकर सरकार से अपने अधिकारों की मांग करनी होगी। इस अवसर पर सहायक निदेशक बाल अधिकारिता नवल खान ने घुमंतु व अर्धघुमंतु जनजातियों के लियें चल रही विभागीय योजनाओं के बारे में विस्तार से जानकारी दी। एक्शनएड जÞोनल कोर्डिनेटर जÞहीर आलम ने विमुक्ति दिवस पर जानकारी देते हुए बताया कि 1947 को भारत तो आजाद हो गया, लेकिन इसकी 190 जनजातियों के करोड़ों नागरिकों को पांच साल बाद 31 अगस्त, 1952 को असली आजादी मिली। इसे ये लोग इस तारीख को विमुक्ति दिवस के तौर पर भी मनाते हैं। अंग्रेजों ने इन करोड़ों लोगों को एक खास अधिनियम के तहत 180 साल तक उनके घरों में ही कैद कर दिया था। अब ये आजादी से घूम सकते हैं। लेकिन अब भी अंग्रेजों द्वारा इन पर लगाया गया दाग, समाज में इन्हें वो स्थान और सम्मान नहीं देता जो इनका हक है और आजाद भारत का नागरिक होने के नाते मिलना चाहिए। ये घुमंतु जनजातियां थीं, जो एक शहर से दूसरे शहर में ठिकाना बदलती रहती थीं। ऐसी जनजातियों को नियंत्रित करने के लिए अंग्रेजों ने उन्हें सूचीबद्ध कर 1871 में उन पर आपराधिक जनजाति अधिनियम लागू कर दिया। इस अधिनियम के तहत इन जनजातियों के सभी सदस्यों को अपराधी घोषित कर दिया गया। ‘आपराधिक जनजाति अधिनियम’ में शामिल जनजातियों के यहां ब चा पैदा होते ही उस पर अपराधी का ठप्पा लग जाता था। करीब 180 सालों तक देश ने इन जनजातियों को कानूनी तौर पर जन्मजात अपराधी माना। इसके चलते धीरे-धीरे हमारे भारतीय समाज ने भी इन जनजातियों को अपराधी मान लिया। इसका नतीजा यह हुआ कि इन जनजातियों के लोगों को हर जगह अपराधियों के तौर पर देखा जाने लगा। साथ ही पुलिस को उनका शोषण करने करने के लिए अपार शक्तियां दे दी गर्इं। देशभर में लगभग 50 ऐसी बस्तियां भी बनाई गर्इं जिनमें इन जनजातियों को जेल की तरह कैद कर दिया गया। इन बस्तियों की चारदीवारी के बाहर हर वक्त पुलिस का पहरा लगता था। बस्ती के बालकों से लेकर हर सदस्य को बाहर आते-जाते वक्त पुलिस को अनिवार्य रूप से सूचना देनी होती थी या उपस्थिति दर्ज करानी पड़ती थी। समारोह में पारम्पारिक सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन भी किया गया जिसमें 70 वर्षीय जÞुबेदा ने जुए के दुष्परिणमो को लोक गीत के माध्यम से मार्मिक रूप से समझाया जबकि जमील और फिरोज ने भालू का, हबीब मियां ने बकरे का और रफÞीकÞ ने जादू का खेल (हाथ की सफाई) दिखाकर आजÞादी दिवस मनाया और सब का मनोरंजन किया। समारोह के अंत में कलंदर बस्ती में रहने वाली रिजवाना, फिरदोस, कौसर, अनम को स्टेट ओपन से 10वीं और 12वीं परीक्षा में प्रथम श्रेडी से उत्तीर्ण होने पर बेटी जिंदाबाद ट्रॉफी देकर सम्मानित किया गया और बस्ती के सभी बच्चों को पढाई हेतु स्टेशनरी वितरित की गई। समारोह में अशरफ कलंदर, मौलवी वसीम, पंडित पवन सागर, मौलवी हनीफ, मुहिन आदि ने भी अपने विचार रखे। इस अवसर पर ईद मोहम्मद, आमिर फारूक, मोहम्मद शाहिद, मोहम्मद जÞहूर खांन आदि उपस्थित रहे। अंत में अलीना, माही और सादिया द्वारा राष्ट्रगान गाकर समारोह का समापन किया गया और उपस्थित लोगों को मिठाई वितरित की गई।</p>]]>
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                <pubDate>Fri, 02 Sep 2022 14:32:45 +0530</pubDate>
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                <title>शराब पीने से मना करने पर आदिवासी युवक को बेरहमी से पीटा</title>
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                        <![CDATA[ उदयपुर। शहर के समीप ब्राह्मणों का गुढ़ा क्षेत्र में गत दिनों शराब पीने से इनकार करने पर एक आदिवासी युवक पीटने का वीडियो वायरल होने पर पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया।]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/udaipur/tribal-youth-brutally-beaten-up-for-refusing-to-drink-alcohol/article-11973"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-06/ww5.jpg" alt=""></a><br /><p> उदयपुर। शहर के समीप ब्राह्मणों का गुढ़ा क्षेत्र में गत दिनों शराब पीने से इनकार करने पर एक आदिवासी युवक पीटने का वीडियो वायरल होने पर पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया।</p>
<p><br />पुलिस के अनुसार ब्राह्मणों का गुढ़ा निवासी प्रकाश लोगर (30) और तारु गमेती गत तीन जून को सापेटिया में मजदूरी कर घर लौट रहे थे। रास्ते में सड़क किनारे स्थित जितेंद्रसिंह झाला की दुकान पर बैठे विजय सिंह (26) उर्फ विजेंद्रसिंह झाला और रघुनाथसिंह चौहान (25) ने उन्हें रोका और दुकान में बुलाया। दुकान में जितेंद्रसिंह झाला और यशपालसिंह (25) भी बैठे थे। सभी ने प्रकाश को शराब पीने के लिए कहा तो उसने मना कर दिया। इस पर गुस्साए युवकों ने प्रकाश के साथ लात-घूंसों एवं डंडे से मारपीट की। बाद में शराब की ट्यूब चोरी करने का आरोप लगाते हुए जातिगत गालियां दी। आरोपियों ने उसे इस संबंध में पुलिस को बताने पर जान से मारने की धमकी भी दी। आरोपियों में से एक ने मारपीट का वीडियो भी बनाया जो 11 जून को सोशल मीडिया पर वायरल कर दिया। वीडियो वायरल होने पर परिजनों ने पीड़ित प्रकाश को हिम्मत बंधाई। इसके बाद प्रकाश ने सुखेर थाने पहुंच कर पुलिस को सूचना दी। रिपोर्ट दर्ज करने के साथ ही सुखेर थाना पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए दो घंटे में मारपीट के तीनों आरोपियों विजयसिंह, रघुनाथसिंह और यशपालसिंह को गिरफ्तार कर लिया।</p>
<p> </p>]]>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>उदयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 13 Jun 2022 10:44:25 +0530</pubDate>
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                <title>आदिवासी युवकों को अर्द्धनग्न कर पीटा, पुलिस पर पथराव</title>
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                        <![CDATA[ प्रतापनगर थाना क्षेत्र में पिछले दिनों आदिवासी युवकों के साथ हुई मारपीट मामले ने शुक्रवार को बड़ा रूप ले लिया। ]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/udaipur/udaipur-news--tribal-youths-beaten-up-half-naked--stone-pelted-at-police/article-10132"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-05/udi-1.jpg" alt=""></a><br /><p>उदयपुर। प्रतापनगर थाना क्षेत्र में पिछले दिनों आदिवासी युवकों के साथ हुई मारपीट मामले ने शुक्रवार को बड़ा रूप ले लिया। मछली ठेकेदार द्वारा तीन युवकों को अर्द्धनग्न कर पिटाई करने का मामला सामने आने के बाद आदिवासी समाज उग्र हो गया और झील के किनारे जाकर मछली ठेकेदारों की नावों में आग लगा दी। साथ ही मछली ठेकेदारों के टेंट भी जला दिए। आदिवासी समाज के लोगों के एकत्रित होने से पुलिस भी मौके पर पहुंची, जिन पर भी आदिवासियों ने पथराव कर दिया। इससे कई पुलिसकर्मी घायल हो गए। इस दौरान वहां मौजूद राफेल्स होटल के बैक ऑफिस में रखा कुछ सामान भी जल गया।</p>
<p><br />सुबह करीब नौ बजे आदिवासियों का हुजूम धीरे-धीरे उदयसागर के आसपास लगना शुरू हो गया। कुछ ही देर में उनका विरोध प्रदर्शन और भी ज्यादा उग्र हो गया। इस दौरान मारपीट और तोड़फोड़ की सूचनाएं भी सामने आई। इसके चलते संभागीय आयुक्त राजेंद्र भट्ट, एसपी मनोज चौधरी सहित आलाधिकारी भी मौके पर पहुंचे। वहीं भारी पुलिस जाब्ता भी तैनात किया गया। मौके पर हुई आगजनी को कंट्रोल करने के लिए 5 सरकारी और 1 हिंदुस्तान जिंक की फायर ब्रिगेड सहित 6 गाड़ियों को बुलवाया गया। मौके से कुछ लोगों को हिरासत में भी लिया गया। फिलहाल पुलिस का कहना है कि स्थिति नियंत्रण में है।</p>
<p><br /><strong>पिछले दिनों हुई मारपीट से विवाद</strong><br />यह विवाद पिछले दिनों आदिवासी युवकों के साथ मारपीट से शुरू हुआ था। यहां के आदिवासियों का कहना है कि उदयसागर झील में मछली पालन करने वाले ठेकेदार किसी को भी झील किनारे नहीं जाने देते। साथ ही मारपीट करते हैं। कुछ महीनों पहले भी ऐसा वाकया हुआ था। वहीं पिछले दिनों भी एक आदिवासी युवकों के कपड़े फाड़कर उसके साथ मारपीट की गई थी। इसी के विरोध में आदिवासी समाज ने शुक्रवार को प्रदर्शन किया।<br />मामले को लेकर एसपी मनोज चौधरी ने बताया कि मारपीट का वीडियो सामने आने के बाद एफआईआर कराई गई। उसी आधार पर तलाश जारी थी। आदिवासियों की मांगों पर हम बात कर रहे थे और उन्हें आश्वासन दिया गया था। मगर उनमें से कुछ लोगों ने उग्र होकर टेंट वगैरह में आग लगाई और पुलिस पर पथराव भी किया। वहां होटल के एक दो कमरों में रखा सामान और डीजी सेट जल गया।</p>
<p> </p>]]>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>उदयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 21 May 2022 15:12:27 +0530</pubDate>
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                <title>कांग्रेस ने 36 सालों में एक भी आदिवासी को नहीं भेजा राज्यसभा </title>
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                        <![CDATA[राजस्थान में पिछले 36 सालों में कांग्रेस ने एक भी आदिवासी को राज्यसभा में नहीं भेजा। इस बार राज्यसभा चुनाव से पहले कांग्रेस के आदिवासी क्षेत्रों के कांग्रेसी विधायक और कार्यकर्ता इसकी मांग भी करने लगे हैं और अब तक उपेक्षा के आरोप लगाते हुए विरोध भी दर्ज करा रहे हैं। ]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/jaipur-congress-not-send-tribal-in-rajyasabha/article-10148"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-05/congress4.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। राजस्थान में पिछले 36 सालों में कांग्रेस ने एक भी आदिवासी को राज्यसभा में नहीं भेजा। इस बार राज्यसभा चुनाव से पहले कांग्रेस के आदिवासी क्षेत्रों के कांग्रेसी विधायक और कार्यकर्ता इसकी मांग भी करने लगे हैं और अब तक उपेक्षा के आरोप लगाते हुए विरोध भी दर्ज करा रहे हैं। पिछले दिनों हुए कांग्रेस के नव संकल्प शिविर के बाद आदिवासी जिलों में सोशल मीडिया पर इस मांग को लेकर अभियान चल रहा है। कांग्रेस के दो विधायक गणेश घोगरा डूंगरपुर और रामलाल मीणा प्रतापगढ़ भी इसकी पुरजोर मांग कर रहे हैं।  </p>
<p>आदिवासी जिलों में डूंगरपुर, बांसवाड़ा, प्रतापगढ़, सिरोही, राजसमंद और चित्तौड़गढ़ जिला शामिल है। नब्बे के दशक तक इन जिलों के कांग्रेस बड़ा प्रभाव था, लेकिन धीरे-धीरे उपेक्षा का शिकार होने की वजह से आदिवासी मतदाता पार्टी से दूर होता चला गया। नतीजन दूसरे दलों ने अपना प्रभाव जमा लिया। पिछले विधानसभा चुनावों में बीटीपी ने दो सीटों पर जीत दर्ज कराई थी। इसको लेकर कांग्रेस के नेताओं के चेहरों पर चिन्ता की लकीरें भी दिखाई दी थी। गत 16 मई को बेणेश्वरधाम के नजदीक हुई राहुल गांधी की सभा में भी बीटीपी के बढ़ते प्रभाव को लेकर मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने चिन्ता जताई थी। <br /><br /></p>]]>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 21 May 2022 11:41:03 +0530</pubDate>
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                <title>अवैध खनन से वन भूमि बदहाल, माफिया के हौसले बुलंद </title>
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                        <![CDATA[केलवाड़ा वन रेंज क्षेत्र के आदिवासी अंचल क्षेत्र में वन भूमि पर अवैध खनन कार्य को भू माफिया जेसीबी और ट्रैक्टर ट्रॉलिओं से अंजाम देने में लगे हुए हैं। इनके खिलाफ कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं होने के कारण अवैध खनन कर्ताओं के हौसले बुलंद हो रहे हैं और अवैध खनन कार्य का धंधा जोरों पर फल फूल रहा है। वन विभाग के कर्मचारी और आला अधिकारी को इस मामले की जानकारी होने पर भी मूकदर्शक बने हुए हैं। ]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/baran/forest-land-in-bad-shape-due-to-illegal-mining--mafia-s-spirits-raised/article-6937"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-03/atikraman.jpg" alt=""></a><br /><p>केलवाड़ा।  केलवाड़ा वन रेंज क्षेत्र के आदिवासी अंचल क्षेत्र में वन भूमि पर अवैध खनन कार्य को भू माफिया जेसीबी और ट्रैक्टर ट्रॉलिओं से अंजाम देने में लगे हुए हैं। इनके खिलाफ कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं होने के कारण अवैध खनन कर्ताओं के हौसले बुलंद हो रहे हैं और अवैध खनन कार्य का धंधा जोरों पर फल फूल रहा है। वन विभाग के कर्मचारी और आला अधिकारी को इस मामले की जानकारी होने पर भी मूकदर्शक बने हुए हैं। इसके चलते सैकड़ों बीघा सघन वन क्षेत्र में  हरे पेड़ो की संख्या में कमी दर्ज की जा रही है। वही अवैध खनन के चलते वन भूमि क्षेत्र का स्वरूप भी बदसूरत होता जा रहा है। इसके चलते जंगली क्षेत्र मैदानी क्षेत्र में तब्दील होकर गहरी खाईयों में तब्दील नजर आ रहा है। इसके चलते जंगली जानवरों के जीवन पर भी संकट के बादल छाए हुए हैं। जंगली क्षेत्र का घनत्व कम होने के कारण जंगली जानवर गांवों की ओर रुख कर रहे हैं और अकाल मौत के शिकार हो रहे हैं। आखिरकार वन विभाग के जिम्मेदार आला अफसर इस मामले को लेकर क्यों कार्रवाई नहीं कर रहे हैं। पर्यावरण का संतुलन बिगड़ता जा रहा है, जो मानव जाति के लिए विनाश का कारण बन सकता है। अवैध खनन हरे पेड़ों की कटाई को लेकर पर्यावरण प्रेमियों में वन विभाग के प्रति रोष बना हुआ है। इस संबंध में क्षेत्रीय वन अधिकारी तरुण रावत को कई बार मोबाइल के जरिए संपर्क किया लेकिन उन्होंने फोन अटेंड नहीं किया। जिला वन मंडल अधिकारी चेतन को भी फोन पर संपर्क इस मामले को लेकर कई बार किया, लेकिन उन्होंने भी फोन अटेंड नहीं किया, इसलिए संपर्क नहीं हो सका।<br /><br /><strong>वन भूमि का बिगाड़ रहे स्वरूप</strong><br /> केलवाड़ा क्षेत्रीय वन कार्यालय से महज 500 से 1000 मीटर की दूरी पर वन भूमि क्षेत्र में जेसीबी और ट्रैक्टर ट्रॉली की सहायता से अवैध खननकर्ता खनन कार्य को अंजाम देने में लगे ना अवैध खनन कर्ताओं को वन विभाग के आला अधिकारियों को खूब है और ना ही वन भूमि को नुकसान पहुंचाने का फॉरेस्ट विभाग के नियम कानूनों को ताक पर रखकर अवैध तरीके से अवैध खनन कर हरे पेड़ों और वनभूमि का स्वरूप बिगाड़ने में लगे हुए हैं। इनके खिलाफ कोई कार्यवाही नहीं हो रही है। <br /><br /><strong>क्षेत्रीय वन अधिकारी कार्यालय पर किया जाएगा प्रदर्शन</strong><br />केलवाड़ा वन रेंज क्षेत्र के जंगलों में भू माफिया अवैध खनन करने से बाज नहीं आ रहे हैं। इसकी शिकायत पर्यावरण प्रेमियों और समाजसेवियों द्वारा कई बार जिम्मेदारों से की गई है। अवैध खनन कार्य को नहीं रोका गया तो पर्यावरण प्रेमी और समाजसेवी क्षेत्रीय वन अधिकारी कार्यालय पर पहुंचकर धरना और प्रदर्शन करेंगे। जिसकी जिम्मेदारी प्रशासन की होगी। <br /><br /><strong>इनका कहना है</strong> <br />केलवाड़ा वन क्षेत्र में जेसीबी और ट्रैक्टर ट्रॉली ओं की सहायता से अवैध खनन कार्य को दिन-रात भूमाफिया अंजाम दे रहे हैं। इससे धरती का स्वरूप बिगड़ता जा रहा है। <br /><strong>- पंकज कुशवाहा, वन्यप्रेमी।     </strong><br /><br />अवैध खनन केलवाड़ा वन क्षेत्र में जोरो जोरो से फल फूल रहा है। इसकी कई बार शिकायत भी की गई है लेकिन कार्रवाई नहीं होने के कारण अभी खनन कार्य नासूर बनता जा रहा है आखिर क्यों जिम्मेदार इस मामले से अनजान बने हुए हैं।<br /><strong>- राहुल जोधा, पर्यावरण प्रेमी।</strong> <br /><br />अवैध खनन कार्य पर अंकुश नहीं लगने के कारण पर्यावरण को खतरा पहुंच रहा है। साथ ही वन क्षेत्र का स्वरूप भी बिगड़ता जा रहा है। वन विभाग के आला अधिकारी इस मामले को लेकर मूकदर्शक बने हुए हैं। <br /><strong>- अभिषेक चौहान, छात्रसंघ अध्यक्ष, केलवाड़ा।</strong><br /><br />केलवाड़ा वन क्षेत्र में अवैध खनन से हरियाली भी नष्ट होती जा रही है। जंगलों का घनत्व कम हो रहा है। भू-माफियाओं के खिलाफ कार्रवाई नहीं होने के कारण लोगों में रोष बना हुआ है। अगर 8 दिन में कार्रवाई को अंजाम नहीं दिया गया तो क्षेत्रीय वन अधिकारी कार्यालय पर धरना प्रदर्शन किया जाएगा।<br /><strong>- भूमनेश गोस्वामी, सामाजिक कार्यकर्ता, ग्रामीण।</strong><br /><br />केलवाड़ा वन क्षेत्र में अवैध खनन चल रहा है, तो मामले की जांच कर कारवाई करेंगे।<br /><strong>- रामनारायण शाक्यवाल, फॉरेस्टर, केलवाड़ा।</strong></p>]]>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>बारां</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 29 Mar 2022 14:05:23 +0530</pubDate>
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                <title>महुए के फूलों से चुआएंगे शराब</title>
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                        <![CDATA[श्रीगंगानगर शुगर मिल्स की पहल मिलेगा]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/%E0%A4%AE%E0%A4%B9%E0%A5%81%E0%A4%8F-%E0%A4%95%E0%A5%87-%E0%A4%AB%E0%A5%82%E0%A4%B2%E0%A5%8B%E0%A4%82-%E0%A4%B8%E0%A5%87-%E0%A4%9A%E0%A5%81%E0%A4%86%E0%A4%8F%E0%A4%82%E0%A4%97%E0%A5%87-%E0%A4%B6%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%AC/article-1566"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2021-10/daru.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>जयपुर</strong>। आदिवासी महिलाओं की आजीविका बढ़ाने और आर्थिक संबल देने के लिए श्रीगंगानगर शुगर मिल्स लिमिटेड महुए के फूल खरीदकर शराब बनाएगा। इससे अवैध शराब पर काफी हद तक कंट्रोल होने की उम्मीद है। राजस्थान अनुसूचित जनजाति परामर्शदात्री परिषद की बैठक में इस पर चर्चा भी हो चुकी है। चर्चा के बाद पारंपरिक रूप से सेवन की जा रही मदिरा की मांग और खपत का परीक्षण करवाया गया। परीक्षण में सामने आया की महुआ की शराब का करोड़ों रुपए का अवैध कारोबार होता है।</p>
<p><strong><br /> इन जिलों में ज्यादा प्रचलित</strong><br /> श्रीगंगानगर शुगर मिल्स के अधिकारियों का मानना हैं कि महुआ शराब प्रदेश में उदयपुर, चित्तौड़गढ़, राजसमंद, बांसवाड़ा, डूंगरपुर, प्रतापगढ़ सिरोही और बारां जिले में सबसे ज्यादा प्रचलित है। आदिवासी क्षेत्र में सबसे ज्यादा इसी शराब का सेवन किया जाता है। वैध बनने से यहां का करोड़ों रुपए का कारोबार आबकारी के खाते में जाएगा और अवैध पर लगाम लगेगा।</p>
<p><strong><br /> अवैध शराब से होने वाली मौतों में आएगी कमी</strong><br /> अवैध हथकढ़ शराब से होने वाली मौतों में भी कमी आएगी। वहीं अब तक स्थानीय आदिवासी लोग महुए के फूलों को कम दामों में बेचते थे उनको विभाग 80 रुपए किलो में खरीदकर उनकी आय बढ़ेगी। राजस्थान श्रीगंगानगर शुगर मिल्स महुआ की मदिरा के लिए महुए के फूलों की खरीद वन-धन समितियों से राजीविका उदयपुर के माध्यम से करेगा। फूलों को एकत्रित करने से आदिवासियों को रोजगार मिलेगा। फिलहाल आदिवासी इलाकों में अवैध शराब पर नियंत्रण करने और आदिवासियों को रोजगार देने के लिए पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर इसकी शुरुआत की जा रही हैं। जयपुर में जीएसएम की यूनिट पर इसको तैयार किया जाएगा। बाजार में आने के बाद इसका अच्छा रिस्पांस मिलता हैं तो इसे उदयपुर जीएसएम यूनिट में शिफ्ट किया जाएगा।<br />  </p>]]>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 10 Oct 2021 13:22:50 +0530</pubDate>
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