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                <title>Child safety - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <description>Child safety RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>जापान में हैरान करने वाली घटना, माउंट फ़ूजी पर थकान के बाद 7 साल के बेटे को अकेला छोड़कर आगे बढ़ा पिता</title>
                                    <description><![CDATA[जापान के माउंट फ़ूजी पर 7 वर्षीय बच्चे को स्नैक और कोल्ड ड्रिंक देकर अकेले छोड़ने पर पुलिस ने पिता को फटकार लगाई है। 2,000 मीटर की ऊंचाई पर बारिश और धुंध के बीच मिले बच्चे को हट कर्मचारियों ने सुरक्षित स्थान दिया। पुलिस की चेतावनी के बाद पिता ने अपनी गलती स्वीकार की।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/shocking-incident-in-japan-father-leaves-his-7-year-old/article-163638"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-08/रंचंद.png" alt=""></a><br /><p>टोक्यो। जापान के सबसे ऊँचे पहाड़ पर अपने बेटे को सिर्फ़ एक सॉफ्ट ड्रिंक और स्नैक के साथ कई घंटों तक अकेला छोड़ने के लिए पुलिस ने एक पिता को फटकार लगाई है। सात साल का यह बच्चा माउंट फ़ूजी पर 2,000 मीटर (6,500 फ़ीट) से ज़्यादा ऊँचाई पर, धुंध और बारिश के बीच एक बेंच पर बैठा हुआ मिला। रिपोर्ट के अनुसार, जब बच्चे ने थकान की शिकायत की, तो उसके 48 वर्षीय पिता ने उससे "यहीं इंतज़ार करने" को कहा और अपने बड़े बेटे के साथ चढ़ाई जारी रखी।</p>
<p>पहाड़ पर बने एक हट (झोपड़ी) के कर्मचारियों को यह बच्चा चोटी की ओर जाने वाले हाइकिंग रूट के छठे स्टेशन के पास मिला और उन्होंने पुलिस को सूचना दी। उसके पिता रूट के सातवें और आठवें स्टेशन के बीच मिले, जो वहाँ से तीन घंटे की चढ़ाई की दूरी पर है। बच्चा गुरुवार को स्थानीय समयानुसार सुबह 07:30 बजे अकेला मिला। जब पिता ऊंचे स्टेशन से लौटकर अपने बेटे से मिले तो अधिकारियों ने उन्हें खूब खरी-खोटी सुनाई। बताया जाता है कि आठ घंटे के इंतज़ार के बाद बेटा "थका हुआ और चिड़चिड़ा" हो गया था।</p>
<p>रिपोर्ट के अनुसार, एक अधिकारी ने उनसे कहा, "भले ही इसके लिए आपको साथ मिलकर पहाड़ पर चढ़ना छोड़ना पड़े, लेकिन बच्चे को पीछे छोड़ना मंज़ूर नहीं है।" कहा जाता है कि उन्होंने अपने इस "जल्दबाज़ी भरे" फ़ैसले के लिए माफ़ी मांगी। बताया गया है कि परिवार फ़ुजिनोमिया रूट पर था, जो पहाड़ के पांचवें स्टेशन से शुरू होता है; इस जगह पर पब्लिक ट्रांसपोर्ट से आसानी से पंहुचा जा सकता है। पर्वतारोहण गाइडों का कहना है कि वहां से चोटी तक पहुंचने में लगभग पांच घंटे और नीचे उतरने में तीन घंटे और लगते हैं।</p>
<p>माउंट फ़ुजी, जिसकी ऊंचाई 3,776 मीटर (12,389 फ़ीट) है, हाल के वर्षों में पर्वतारोहण से जुड़ी कई दुर्घटनाओं का गवाह रहा है। जुलाई में 99 साल की एक महिला को इस रास्ते पर चढ़ाई करने की कोशिश के दौरान गिरकर कूल्हे और पीठ में चोट लगने के बाद बचाया गया था। इसी तरह पिछले साल विश्वविद्यालय के एक 27 साल के छात्र को, जो आधिकारिक क्लाइंबिंग सीज़न के बाहर गया था, चार दिनों में दो बार बचाया गया - क्योंकि वह अपना खोया हुआ मोबाइल फ़ोन खोजने वापस गया था।</p>
<p>टोक्यो के दक्षिण-पश्चिम में स्थित एक सक्रिय ज्वालामुखी, माउंट फ़ूजी को 2013 में विश्व विरासत का दर्जा दिया गया था। यह माउंट टेट और माउंट हाकू के साथ मिलकर तीन पारंपरिक "पवित्र पर्वतों" में से एक है। हर साल लगभग दो लाख लोग इस पर चढ़ाई करते हैं, लेकिन भीड़ से बचने के लिए कुछ रास्तों पर रोज़ाना जाने वाले लोगों की संख्या सीमित रखी जाती है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 23 Aug 2026 11:20:45 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>यौन शोषण मामला: तमिलनाडु पॉक्सो कोर्ट ने पुजारी को सुनाई 178 वर्ष की सजा, लड़कियों को मिठाई खिलाकर देता था वारदात को अंजाम</title>
                                    <description><![CDATA[तमिलनाडु की पॉक्सो कोर्ट ने तीन मासूम बच्चियों के यौन शोषण मामले में 70 वर्षीय मंदिर पुजारी को 178 वर्ष की कठोर कारावास सुनाई है। जज गोकुल मुरुगन ने ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए सभी सजाएं अलग-अलग भुगतने का आदेश दिया। कोर्ट ने पीड़ितों को ₹5 लाख मुआवजा देने का भी निर्देश दिया है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/sexual-exploitation-case-tamil-nadu-pocso-court-sentenced-priest-to/article-148619"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/tamilnadu1.png" alt=""></a><br /><p>चेन्नई। तमिलनाडु की पॉक्सो कोर्ट ने एक ऐतिहासिक फैसले में 70 वर्षीय मंदिर पुजारी को तीन बच्चों को बहकाकर यौन शोषण करने के मामले में कुल 178 वर्ष की जेल की सजा सुनाई है। यह घटना तमिलनाडु के शिवगंगा जिले में हुई थी। घटना 26 सितंबर 2024 को सोझापुरम गांव में हुई, जब 70 वर्षीय पुजारी ए. थिलागर ने मंदिर के बाहर खेल रही तीन लड़कियों को मिठाई देकर लुभाया और उनका यौन शोषण किया। जब एक लड़की ने अपने माता-पिता को इस भयावह घटना के बारे में बताया, तब स्थानीय लोगों ने मंदिर के बाहर प्रदर्शन किया और पुजारी के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। शिकायत पर शिवगंगा अखिल महिला पुलिस स्टेशन ने बच्चों से यौन अपराधों से सुरक्षा अधिनियम (पॉक्सो) के तहत मामला दर्ज कर पुजारी को गिरफ्तार कर लिया।</p>
<p>कल शाम दिए गए ऐतिहासिक फैसले में पॉक्सो कोर्ट के जज गोकुल मुरुगन ने पुजारी को तीन बच्चों को चोट पहुंचाने, उन्हें धमकाने, यौन शोषण करने और मंदिर पुजारी होने के बावजूद पेडोफीलिया (बच्चों के प्रति यौन आकर्षण) के कार्य करने जैसे कई आरोपों पर दोषी ठहराया। न्यायाधीश ने हर अपराध के लिए अलग-अलग सजा सुनाई, जिनका कुल योग 178 वर्ष की जेल होता है। अदालत ने आदेश दिया कि पुजारी को सभी सजाएं अलग-अलग भुगतनी होंगी। न्यायाधीश ने पुजारी पर 8,000 का जुर्माना भी लगाया और राज्य सरकार को निर्देश दिया कि प्रत्येक पीड़ित बच्ची को पांच लाख रुपये का मुआवजा प्रदान किया जाए।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 31 Mar 2026 18:03:06 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>मेटा पर लगा 3000 करोड़ रुपए का जुर्माना बच्चों को सेक्सुअल कंटेंट दिखाने का आरोप, मेटा की दलील क्या है?</title>
                                    <description><![CDATA[अमेरिका के न्यू मैक्सिको में जूरी ने मेटा पर $375 मिलियन का जुर्माना लगाया है। व्हिसलब्लोअर ओतुर्रो बेहर के खुलासे के बाद कंपनी पर फेसबुक और इंस्टाग्राम पर नाबालिगों को असुरक्षित कंटेंट परोसने और गुमराह करने का दोष सिद्ध हुआ। हालांकि, मेटा ने इन आरोपों को चुनौती देने की बात कही है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/meta-fined-rs-3000-crore-for-showing-sexual-content-to/article-147907"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/meta.png" alt=""></a><br /><p>न्यूयार्क। अमेरिकी टेक कंपनी मेटा पर अमेरिका के न्यू मैक्सिको में एक जूरी ने 375 मिलियन डॉलर यानी करीब 3,000 करोड़ रुपए का जुर्माना लगाया है। वजह है बच्चों की सुरक्षा में बड़ी लापरवाही और प्लेटफॉर्म पर हुए नुकसान। मामला दरअसल 2023 में शुरू हुआ था, जब न्यू मैक्सिको के अटॉर्नी जनरल ने मेटा के खिलाफ केस दायर किया। आरोप था कि कंपनी ने अपने प्लेटफॉर्म जैसे फेसबुक, इंस्टाग्राम और व्हाट्सएप को सिक्योर बताकर यूजर्स को गुमराह किया, जबकि हकीकत में वहां बच्चों को गंभीर खतरे का सामना करना पड़ा।</p>
<p><strong>गलत कंटेंट दिखाए जाने का आरोप</strong></p>
<p>कोर्ट में पेश सबूतों में यह बात सामने आई कि कई मामलों में नाबालिग यूजर्स को गलत कंटेंट दिखा और उन्हें प्रीडेटर्स तक पहुंच मिल गई। जांच में यह भी सामने आया कि कंपनी को इन खतरों की जानकारी थी, लेकिन समय रहते कदम नहीं उठाए गए।  जूरी ने माना कि मेटा ने कंज्यूमर प्रोटेक्शन कानून का उल्लंघन किया और प्लेटफॉर्म की सुरक्षा को लेकर गलत जानकारी दी। इस केस को खास इसलिए भी माना जा रहा है क्योंकि यह पहली बार है जब किसी जूरी ने सीधे तौर पर मेटा को उसके प्लेटफॉर्म पर होने वाले नुकसान के लिए जिम्मेदार ठहराया है।</p>
<p><strong>मेटा के ही पूर्व कर्मचारी का आरोप</strong></p>
<p>रिपोर्ट्स के मुताबिक मेटा पर मुकदमा करने वाले शख्स का नाम ओतुर्रो बेहर  है। वो पहले मेटा में इंजीनियरिंग लीडर के तौर पर काम कर रहे थे। 2021 में उन्होंने कंपनी छोड़ी और व्हिसिलब्लोअर बन गए। यानी स्कैम्स और गलतियों को उजागर करना शुरू कर दिया। उन्होंने इंस्टाग्राम पर कई सारे एक्स्पेरिमेंट्स करके टेस्टिफाई किया है कि इंस्टाग्राम पर नाबालिगों को भी कंपनी सेक्सुअल कंटेंट दिखा रही है।</p>
<p>फैसले के बाद मेटा ने कहा है कि वह इस फैसले से सहमत नहीं है और कंपनी इसे चैलेंज करेगी। कंपनी का कहना है कि वह अपने प्लेटफॉर्म को सिक्योर बनाने के लिए लगातार काम कर रही है और गलत कंटेंट हटाने के लिए बड़े लेवल पर सिस्टम लगा चुकी है। हालांकि एक्सपर्ट्स कहते हैं कि कंपनी जानबूझ कर ऐसा करती है ताकि यूजर्स प्लेटफॉर्म पर बने रहें। सोशल मीडिया को लेकर पहले से ही यह बहस चल रही थी कि क्या ये प्लेटफॉर्म बच्चों के लिए सुरक्षित हैं। अब कोर्ट के इस फैसले ने इस बहस को और तेज कर दिया है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>बिजनेस</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 26 Mar 2026 09:24:33 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>ग्रेटर नोएडा में दर्दनाक हादसा: बारहवीं मंजिल से गिरकर तीन साल के मासूम की मौत, पुलिस जांच शुरू</title>
                                    <description><![CDATA[ग्रेटर नोएडा की गौर सिटी में 12वीं मंजिल की बालकनी से गिरकर तीन वर्षीय बच्चे की दर्दनाक मौत हो गई। बिसरख पुलिस मामले की जांच कर रही है। इस हृदयविदारक घटना ने हाईराइज सोसायटियों में बालकनी सुरक्षा और ग्रिल मानकों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अभिभावकों से बच्चों की सुरक्षा हेतु अतिरिक्त सतर्कता बरतने की अपील की गई है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/tragic-accident-in-greater-noida-three-year-old-innocent-dies/article-147326"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/noida-child-death.png" alt=""></a><br /><p>ग्रेटर नोएडा। उत्तर प्रदेश में गौतमबुद्धनगर जिला परिक्षेत्र के ग्रेटर नोएडा पश्चिम में शनिवार को एक बेहद दर्दनाक हादसा हुआ, जिसने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया। यहां गौर सिटी एक की सातवें एवेन्यू सोसाइटी में बारहवीं मंजिल से गिरने के कारण तीन वर्षीय मासूम बच्चे की मौत हो गई। पुलिस ने आज जानकारी देते हुए बताया कि बिसरख थाना क्षेत्र में स्थित एक निजी अस्पताल से सूचना मिली कि तीन वर्षीय बच्चे को मृत अवस्था में लाया गया है। जांच में सामने आया कि बच्चा फ्लैट की बारहवीं मंजिल की बालकनी में खेल रहा था। इसी दौरान अचानक उसका संतुलन बिगड़ गया और वह नीचे गिर गया।</p>
<p>गिरने की तेज आवाज सुनकर आसपास के लोग तुरंत मौके पर पहुंचे और बच्चे को गंभीर हालत में अस्पताल पहुंचाया गया लेकिन डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। बिसरख थाना पुलिस ने मौके पर पहुंचकर जांच शुरू कर दी है। प्रारंभिक जांच में मामला हादसा प्रतीत हो रहा है हालांकि, पुलिस सभी पहलुओं को ध्यान में रखते हुए जांच कर रही है। शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है और आवश्यक विधिक कार्रवाई जारी है। एवं मौके पर कानून-व्यवस्था की स्थिति सामान्य है।</p>
<p>इस हादसे के बाद परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। मासूम की असमय मौत से पूरे सोसाइटी परिसर में गहरा शोक व्याप्त है। स्थानीय लोग भी इस घटना से स्तब्ध हैं। इस दर्दनाक घटना ने एक बार फिर हाईराइज इमारतों में सुरक्षा मानकों पर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय निवासियों का कहना है कि, बालकनी की रेलिंग की ऊंचाई और मजबूती की नियमित जांच होनी चाहिए, बच्चों की सुरक्षा के लिए अतिरिक्त ग्रिल या नेट लगाए जाने चाहिए, छोटे बच्चों को बालकनी में अकेला न छोड़ा जाए। लोगों का मानना है कि जरा सी लापरवाही भी ऐसे हादसों का कारण बन सकती है।</p>
<p>यह घटना एक बार फिर यह सोचने पर मजबूर करती है कि आधुनिक हाईराइज जीवनशैली में सुरक्षा उपायों को नजरअंदाज करना कितना खतरनाक हो सकता है। प्रशासन और सोसाइटी प्रबंधन के साथ-साथ अभिभावकों को भी बच्चों की सुरक्षा को लेकर अतिरिक्त सतर्कता बरतने की आवश्यकता है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 21 Mar 2026 15:29:26 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
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                <title>अजमेर के JLN अस्पताल में बच्चा गुम! संदिग्ध मानसिक बीमार महिला ने ले जाने का शक, गुरुवार को हुई वारदात</title>
                                    <description><![CDATA[अजमेर के जेएलएन अस्पताल में गुरुवार सुबह एक मानसिक विक्षिप्त महिला ने पार्किंग में खेल रहे दो मासूमों को अगवा करने का प्रयास किया। सतर्क सुरक्षाकर्मियों और भीड़ के शोर के कारण बच्चों को सकुशल बचा लिया गया। बदहवास पिता ने पुलिस चौकी पहुँचकर बच्चों को सुरक्षित पाकर राहत की सांस ली। पुलिस जांच शुरू। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/ajmer/child-missing-in-ajmers-jln-hospital-suspected-to-have-been/article-144723"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-02/ajmer-news-2.png" alt=""></a><br /><p>अजमेर। राजकीय जवाहरलाल नेहरू चिकित्सालय अजमेर के शिशु वार्ड परिसर के पास पार्किंग में खेल रहे दो बच्चों को मानसिक रूप से बीमार एक महिला अपने साथ लेकर चल पड़ी घटना गुरुवार की सुबह की है इस महिला के साथ दो मासूम बच्चों को देखने के बाद वहां मौजूद अन्य लोगों ने शोर मचा दिया। </p>
<p>चिकित्सालय परिसर में मौजूद महिला सुरक्षा कर्मियों ने उसे महिला को पड़कर दोनों बच्चों सहित चिकित्सालय की पुलिस चौकी में पहुंचा दिया जहां चौकी प्रभारी विजय सिंह ने बच्चों के परिजनों का पता करने के लिए पुलिस कर्मियों को चिकित्सालय परिसर में भेजा इसी बीच बच्चों का पिता उन्हें खोजते हुए पुलिस चौकी में पहुंचा जहा बच्चों को देखने के बाद उसने राहत की सांस ली बच्चों के पिता ने बताया कि उसकी पत्नी पिछले आठ दिनों से घर से लापता है उसी की खोज में वह अजमेर आया था।</p>
<p>यहां ठहरने की जगह नहीं होने के कारण वह चिकित्सालय परिसर में ही रहने वाले अपने एक मित्र के पास पहुंच गया उसे मित्र ने उसे अपने साथ चिकित्सालय की पार्किंग में रात्रि गुजरने के लिए बच्चों सहित सुला दिया गुरुवार को सुबह वह अपने मित्र को बच्चे सौंप कर शौचालय गया और जब वापस लौटा तो मित्र सोता हुआ मिला लेकिन बच्चे वहां नहीं थे। लेकिन बाद में वह पुलिस चौकी में मिल गए।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>अजमेर</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 26 Feb 2026 18:43:53 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>स्विमिंग कोच करता था नाबालिग छात्रा से छेड़छाड़, रिपोर्ट दर्ज </title>
                                    <description><![CDATA[जयपुर के बजाज नगर में 11वीं की छात्रा से दो साल तक छेड़छाड़ करने वाले स्विमिंग कोच पर पोक्सो एक्ट लगा।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/swimming-coach-used-to-molest-minor-girl-report-filed/article-139972"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-01/girl.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर।  बजाज नगर इलाके में एक दिल दहला देने वाला मामला सामने आया है। आरोप है कि प्राइवेट स्कूल की 11वीं कक्षा पढ़ने वाली 16 वर्षीय नाबालिग छात्रा से स्विमिंग कोच पिछले दो साल से लगातार छेड़छाड़ और अश्लील हरकतें करता है। पुलिस ने बताया कि पीड़िता की मां ने बजाज नगर थाने में शिकायत दर्ज कराई है, जिसके आधार पर पुलिस ने पोक्सो एक्ट के तहत मामला दर्ज किया है।</p>
<p>पुलिस के अनुसार, पीड़िता एक निजी स्कूल में कक्षा 11वीं में पढ़ाई कर रही है और स्विमिंग ट्रेनिंग लेने के लिए नियमित रूप से जाती थी। आरोप है कि ट्रेनिंग के दौरान कोच पिछले दो वर्षों से उससे गलत हरकतें करता आ रहा था। परेशान होकर छात्रा ने अपनी मां को पूरी आपबीती सुनाई, जिसके बाद मां ने तुरंत थाने पहुंचकर आरोपी स्विमिंग कोच के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई।आरोपी फरार, मोबाइल स्विच ऑफ शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने पीड़िता के बयान दर्ज किए और पोक्सो एक्ट के अंतर्गत प्रकरण दर्ज किया।</p>
<p>हालांकि, FIR दर्ज होने के बाद से ही आरोपी कोच मोबाइल फोन बंद करके घर से फरार हो गया है। पुलिस अब उसकी तलाश में छापेमारी कर रही है और जल्द गिरफ्तारी की उम्मीद जता रही है।मामले की जांच बजाज नगर थाना प्रभारी पूनम चौधरी कर रही हैं। पुलिस ने बताया कि जांच पूरी तरह गोपनीय रखी जा रही है और पीड़िता के साथ संवेदनशीलता से पेश आया जा रहा है।यह घटना समाज में नाबालिगों की सुरक्षा को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े कर रही है।</p>
<p>अभिभावकों को सलाह दी जा रही है कि बच्चों की गतिविधियों पर नजर रखें और किसी भी संदिग्ध व्यवहार की तुरंत सूचना दें। पुलिस ने आश्वासन दिया है कि आरोपी को जल्द ही कानून के दायरे में लाया जाएगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 18 Jan 2026 18:04:40 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
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                <title>शिशु सुरक्षा के लिए उठाने होंगे ठोस कदम</title>
                                    <description><![CDATA[हर साल 07 नवम्बर को शिशुओं के स्वास्थ्य और सुरक्षा की जागरूकता बढ़ाने के लिए शिशु सुरक्षा दिवस मनाया जाता है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/opinion/concrete-steps-will-have-to-be-taken-for-child-safety/article-131675"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-11/111-(1)2.png" alt=""></a><br /><p>हर साल 07 नवम्बर को शिशुओं के स्वास्थ्य और सुरक्षा की जागरूकता बढ़ाने के लिए शिशु सुरक्षा दिवस मनाया जाता है। यह दिवस प्रारंभिक स्वास्थ्य देखभाल, पोषण, टीकाकरण और माता-पिता की शिक्षा को बढ़ावा देकर शिशु मृत्यु दर को कम करने पर केंद्रित है। दुनिया भर में लाखों शिशु अभी भी संक्रमण, कुपोषण और चिकित्सा सुविधा की कमी जैसे रोकथाम योग्य कारणों से मर जाते हैं। यह दिवस समाज और सरकारों को यह याद दिलाता है कि वे हर बच्चे के जीवन में एक स्वस्थ शुरुआत के अधिकार को सुनिश्चित करने के लिए और अधिक ठोस कदम उठाएं। भारत और कई अन्य देशों में शिशु संरक्षण दिवस मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य से जुड़ी पहलों को बढ़ावा देने के लिए एक मंच के रूप में कार्य करता है। जननी सुरक्षा योजना और पोषण अभियान जैसे कार्यक्रम शिशुओं की प्रारंभिक देखभाल में सुधार के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाते हैं। यह दिवस माता-पिता को स्वस्थ विकास सुनिश्चित करने के लिए उचित आहार, स्वच्छता और टीकाकरण के नियमों का पालन करने के लिए प्रोत्साहित करता है। नवजात शिशुओं की उचित सुरक्षा ना हो पाने के कारण दुनिया में बहुत सारे बच्चे मौत के आगोश में चले जाते है।</p>
<p><strong>शिशु मृत्यु दर में गिरावट :</strong></p>
<p>भारत में नवजात बच्चों की मौतों के मामलों में सरकार के लिए बीते 77 साल बड़ी चुनौती भरे रहे हैं। हालांकि इसमें लगातार कमी आ रही है। देश में शिशु मृत्यु दर और शिशु जन्म दर में उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की गई है। 2023 की नमूना पंजीकरण प्रणाली रिपोर्ट के मुताबिक देश में शिशु मृत्यु दर न्यूनतम 25 पर आ गई है। 2013 में 40 के मुकाबले इसमें 37.5 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है। वहीं शिशु जन्म दर में पिछले 10 साल में 14 प्रतिशत की भारी गिरावट दर्ज की गई है। 2013 में ये दर 21.4 प्रतिशत थी अभी ये 18.4 प्रतिशत है। आइएमआर एक प्रमुख सार्वजनिक स्वास्थ्य संकेतक है, जिसे एक वर्ष से कम आयु के पैदा होनेवाले प्रति 1,000 शिशुओं पर होनेवाली मौतों की संख्या के रूप में परिभाषित किया जाता है। यह संख्या जितनी कम होगी स्वास्थ्य सेवा की पहुंच उतनी ही बेहतर मानी जाएगी। एसआरएस रिपोर्ट के मुताबिक 1971 में शिशु मृत्यु दर के मुकाबले 2023 में 80 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है। मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और उत्तर प्रदेश में सबसे ज्यादा बाल मृत्यु दर प्रति हजार पर 37 दर्ज की गई है।</p>
<p><strong>रिपोर्ट में बताया गया :</strong></p>
<p>वहीं मणिपुर में ये आंकड़ा तीन का है। 21 राज्यों में केरल ही एकमात्र ऐसा प्रदेश है, जहां शिशु मृत्यु दर इकाई में दर्ज की गई है। राज्य में ये आंकड़ा 5 का है और मणिपुर के बाद ये दूसरे नंबर पर है। रिपोर्ट में ग्रामीण क्षेत्रों में ये आईएमआर 44 से घटकर 28 पर आ गई है। वहीं शहरी इलाकों में 27 से घटकर 18 पर आंकी गई है। इस तरह 10 साल में इस दर में 36 प्रतिशत और 33 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है। शिशु जन्म दर में भी गिरावट का रुख रिपोर्ट में शिशु जन्म दर में भी गिरावट का रुख दर्ज किया गया है। ये दर जनसंख्या वृद्धि का एक महत्वपूर्ण निर्धारक है। इसके तहत सालभर में प्रति हजार जनसंख्या पर जीवित शिशुओं की संख्या बताई जाती है। रिपोर्ट के मुताबिक पिछले पांच दशकों में जन्म दर में भारी गिरावट दर्ज की गई है। ये दर 1971 के 36.9 प्रतिशत से गिरकर 2023 में 18.4 प्रतिशत पर आ गई है। इस दौरान ग्रामीण और शहरी क्षेत्र में शिशु जन्म दर करीब-करीब बराबर हो गई है। पिछले 10 वर्ष में जन्म दर 21.4 प्रतिशत से गिरकर 2023 में 18.4 प्रतिशत पर आ गई है।</p>
<p><strong>सुधार देखा गया :</strong></p>
<p>भारत ने पिछले सात दशकों में भले ही चिकित्सा क्षेत्र में प्रगति करते हुए शिशु मृत्यु दर पर काबू पाया है। लेकिन आज भी शिशुओं की मौत बड़ा सवाल है। भारत के रजिस्ट्रार जनरल द्वारा जारी सैंपल रजिस्ट्रेशन सिस्टम रिपोर्ट 2023 के अनुसार देश में शिशु मृत्यु दर में काफी सुधार देखा गया है। ये साल 2013 में हर 1000 जन्मे बच्चों में से 40 से घटकर अब 25 के रिकॉर्ड निचले स्तर पर आ गई है। यानी कि मृत्युदर में 37.5 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है। देश में स्वास्थ्य सम्बन्धी चीजों की कमी के कारण यह समस्या और बढ़ जाती है। सरकारों ने इस समस्या से निपटने के लिए बहुत सी योजनायें लागू की है। मगर बुनियादी स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी तथा जागरूकता की कमी के कारण शिशुओं की मृत्यु दर में पूर्णतया कमी नहीं आई है। उचित पोषण के भाव में अब भी कई बच्चे दम तोड़ देते है। ग्रामीण इलाकों में शिक्षा की कमी एवं प्रशिक्षित नर्सों व दाइयों की कमी के कारण भी विभिन्न प्रकार की समस्यायें उत्पन्न होती है। शिशु सुरक्षा सिर्फ सरकार की ही नहीं वरन सभी की जिम्मेदारी है। सभी को एकजुट होकर इसके लिए आगे आना होगा, तब जाकर हम अपने देश के शिशुओं की सुरक्षा के मामले में अन्य देशों की तुलना में ऊपरी पायदान पर आ पाएंगे।</p>
<p><strong>विश्व स्वास्थ्य संगठन :</strong></p>
<p>शिशु मृत्यु दर में कमी लाने के लिए विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार शिशु जन्म के एक घंटे के भीतर मां का दूध पिलाना चाहिए। मां के गाढ़े पीले दूध में सर्वाधिक मात्रा में संक्रमण रोधी तत्व मौजूद होता है। जिसे कोलोस्ट्रम कहा जाता है। इसमें बड़ी मात्रा में विटामिन ए के साथ 10 प्रतिशत तक प्रोटीन होता है। जो शरीर की प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने का सर्वश्रेष्ठ माध्यम होता है। 6 माह तक शिशुओं को केवल स्तनपान कराया जाना चाहिए। जिसमें मां के दूध के अलावा कोई अन्य दूध, खाद्य पदार्थ,पेय पदार्थ और यहां तक पानी भी नहीं पिलाना चाहिए। इससे शिशु डायरिया, निमोनिया,अस्थमा एवं एलर्जी से बचा रहता है। जीडीपी के प्रतिशत के रूप में भारत के स्वास्थ्य खर्च को दुनिया के औसत और अन्य विकासशील और विकसित देशों से काफी नीचे छोड़ देता है। भारत का खर्च नेपाल, बांग्लादेश और पाकिस्तान जैसे देशों से तो ज्यादा है। मगर यूनाइटेड किंगडम, न्यूजीलैंड, फिनलैंड, नीदरलैंड और ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों की तुलना में जो अपने कुल सकल घरेलू उत्पाद का 9 प्रतिशत से अधिक स्वास्थ्य पर खर्च करते हैं उनसे भारत बहुत पीछे है। इसी तरह, जापान, कनाडा, स्विट्जरलैंड,जर्मनी स्वास्थ्य सेवाओं पर अपनी कुल जीडीपी का कम से कम 10 प्रतिशत खर्च करते हैं। वहीं अमेरिका अपनी जीडीपी का करीब 16 फीसदी स्वास्थ्य पर खर्च करता है। बजट में स्वास्थ्य आवंटन में सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणाली और प्रौद्योगिकी में सुधार पर जोर देना चाहिए। स्वास्थ्य देखभाल के बुनियादी ढांचे विशेष रूप से ग्रामीण क्षेत्रों में अधिक ध्यान देने की आवश्यकता है।</p>
<p><strong>-रमेश सर्राफ धमोरा</strong><br /><strong>यह लेखक के अपने विचार हैं।</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>ओपिनियन</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 07 Nov 2025 13:02:28 +0530</pubDate>
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