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                <title>रक्तदान सबसे बड़ा दान: जयपुर में शिविर के दौरान वसुंधरा राजे का संदेश, हर दो सेकंड में पड़ती है खून की जरूरत</title>
                                    <description><![CDATA[पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने जयपुर में स्वास्थ्य कल्याण रक्त केंद्र के 32वें स्थापना दिवस पर आयोजित शिविर में शिरकत की। उन्होंने कहा कि भारत में सालाना 12 लाख यूनिट रक्त की कमी से जानें जाती हैं। राजे ने हर स्वस्थ व्यक्ति से नियमित रक्तदान की अपील करते हुए इसे इंसानियत और निःस्वार्थ सेवा का सर्वोच्च प्रतीक बताया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/blood-donation-is-the-biggest-donation-vasundhara-rajes-message-during/article-154139"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-05/1200-x-60-px)-(youtube-thumbnail)-(1)1.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर । वसुंधरा राजे ने कहा कि वक्त का हर क्षण और रक्त का हर कण अमूल्य होता है। रक्तदान न केवल किसी व्यक्ति को नया जीवन देता है, बल्कि यह समाज में इंसानियत, एकता और सेवा भाव का प्रतीक भी है। पूर्व मुख्यमंत्री रविवार को जयपुर में स्वास्थ्य कल्याण रक्त केंद्र के 32वें स्थापना दिवस पर आयोजित रक्तदान शिविर में संबोधित कर रही थीं। इस अवसर पर उन्होंने संस्था के अध्यक्ष डॉ. आरएस अग्रवाल और उनकी टीम को साधुवाद देते हुए कहा कि वे पिछले 32 वर्षों से इस पुनीत कार्य में निरंतर जुटे हुए हैं और समाज को प्रेरित कर रहे हैं।</p>
<p>स्वास्थ्य कल्याण रक्त केंद्र द्वारा आयोजित शिविर में बड़ी संख्या में लोगों ने रक्तदान किया। कार्यक्रम में राजे ने कहा कि भारत में हर दो सेकंड में किसी न किसी व्यक्ति को रक्त की आवश्यकता पड़ती है, जबकि हर वर्ष लगभग 12 लाख यूनिट रक्त की कमी के कारण कई लोगों की जान चली जाती है। उन्होंने लोगों से नियमित रक्तदान करने की अपील करते हुए कहा कि प्रत्येक स्वस्थ व्यक्ति को आगे आकर रक्तदान करना चाहिए, क्योंकि रक्त की एक-एक बूंद किसी जरूरतमंद के लिए जीवन बन सकती है। उन्होंने कहा कि रक्तदान को सर्वोच्च दान इसलिए माना गया है क्योंकि यह नि:स्वार्थ भाव से किसी की जान बचाने का अवसर प्रदान करता है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 17 May 2026 17:33:14 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>कांगो और युगांडा में इबोला का प्रकोप: डब्ल्यूएचओ ने घोषित किया वैश्विक स्वास्थ्य आपातकाल, महामारी के पूरे क्षेत्र में तेजी से फैलने की आशंका</title>
                                    <description><![CDATA[विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने कांगो और युगांडा में फैले इबोला के 'बुंदीबुग्यो' स्ट्रेन को अंतरराष्ट्रीय आपातकाल घोषित किया है। सीमा पार संक्रमण, संदिग्ध मौतों और स्वीकृत टीकों की कमी के कारण यह कदम उठाया गया। WHO ने देशों को अलर्ट रहने, निगरानी बढ़ाने और बॉर्डर स्क्रीनिंग सख्त करने के निर्देश दिए हैं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/ebola-outbreak-in-congo-and-uganda-who-declared-global-health/article-154151"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-05/ibola.png" alt=""></a><br /><p>जेनेवा। विश्व स्वास्थ्य संगठन ने रविवार को कांगो और युगांडा में फैले 'बुंदीबुग्यो' वायरस स्ट्रेन के कारण इबोला प्रकोप को 'अंतरराष्ट्रीय चिंता का सार्वजनिक स्वास्थ्य आपातकाल' घोषित कर दिया है। डब्ल्यूएचओ ने यह बड़ा फैसला सीमा पार संक्रमण की पुष्टि, संदिग्ध मौतों के बढ़ते आंकड़ों और इस महामारी के पूरे क्षेत्र में तेजी से फैलने की आशंका के मद्देनजर लिया है। यह वैश्विक घोषणा पूर्वी कांगो के इतूरी प्रांत और युगांडा की राजधानी कंपाला में प्रयोगशाला द्वारा पुष्टि किए गए इबोला मामलों के सामने आने के बाद की गई है, जिसमें कम से कम एक मौत भी शामिल है। स्वास्थ्य अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि इस बीमारी का प्रकोप वर्तमान में पाए गए मामलों की तुलना में कहीं अधिक बड़ा हो सकता है। </p>
<p>डब्ल्यूएचओ के अनुसार, 16 मई तक इतूरी प्रांत के कम से कम तीन स्वास्थ्य क्षेत्रों (बुन्या, वर्मपारा और मोंगबवालु) में 8 पुष्ट मामले, 246 संदिग्ध संक्रमण और 80 संदिग्ध मौतें दर्ज की जा चुकी हैं। युगांडा ने पिछले 24 घंटों के भीतर कंपाला में इबोला के दो मामलों की पुष्टि की है, और ये दोनों मरीज कांगो से आए यात्री हैं। इनमें से एक मरीज की मौत हो चुकी है और दोनों को गहन चिकित्सा इकाई में भर्ती कराया गया था। इसके अलावा, इतूरी से लौटे एक यात्री में किन्शासा के भीतर भी एक अलग पुष्ट मामला पाया गया है, जिससे घरेलू और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर संक्रमण फैलने की चिंताएं बहुत बढ़ गई हैं।</p>
<p>डब्ल्यूएचओ ने अपने आपातकालीन निर्धारण में कहा, "यह घटना अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बीमारी के प्रसार के माध्यम से अन्य देशों के लिए एक बड़ा सार्वजनिक स्वास्थ्य जोखिम पैदा करती है।" हालांकि संयुक्त राष्ट्र की इस स्वास्थ्य एजेंसी ने इसे अभी 'महामारी' घोषित नहीं किया है, लेकिन अंतरराष्ट्रीय संचरण के जोखिम, कमजोर स्वास्थ्य बुनियादी ढांचे और 'बुंदीबुग्यो' स्ट्रेन को निशाना बनाने वाले स्वीकृत टीकों या सटीक इलाज की अनुपस्थिति के कारण इसने वैश्विक स्वास्थ्य आपातकाल के पैमाने को पार कर लिया है।</p>
<p>डब्ल्यूएचओ के अधिकारियों ने बताया कि इतूरी और पड़ोसी उत्तर कीवू प्रांत में सामुदायिक स्तर पर मौतों और संदिग्ध मामलों के असामान्य क्लस्टर देखे गए हैं। वहीं, कम से कम चार स्वास्थ्य कर्मियों की भी ऐसी परिस्थितियों में मौत हुई है जो अस्पतालों के भीतर फैले संक्रमण की ओर इशारा करती हैं। एजेंसी ने चेतावनी दी है कि पूर्वी कांगो में सुरक्षा की कमी (असुरक्षा), आबादी का विस्थापन, खुली सीमाएं और भारी क्षेत्रीय गतिशीलता इस प्रकोप को और तेज कर सकती है। यह स्थिति पूर्वी कांगो में 2018-19 के उस विनाशकारी इबोला संकट की याद दिलाती है जिसमें 2,000 से अधिक लोगों की जान चली गई थी।</p>
<p>डब्ल्यूएचओ के महानिदेशक टेड्रोस अदनोम घेब्रेयेसस ने कहा कि संगठन अंतरराष्ट्रीय स्वास्थ्य विनियमों के तहत एक आपातकालीन समिति की बैठक बुलाएगा ताकि आगे के अस्थायी सुझाव दिए जा सकें। डब्ल्यूएचओ ने कांगो और युगांडा से आपातकालीन प्रतिक्रिया प्रणालियों को सक्रिय करने, निगरानी बढ़ाने, संपर्क ट्रेसिंग तेज करने और अस्पतालों व समुदायों में संक्रमण की रोकथाम के उपायों को मजबूत करने का आग्रह किया है।</p>
<p>एजेंसी ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सीमाओं की स्क्रीनिंग बढ़ाने, पुष्ट मामलों और उनके संपर्क में आए लोगों के अंतरराष्ट्रीय यात्रा पर प्रतिबंध लगाने तथा प्रायोगिक टीकों व दवाओं के क्लीनिकल ट्रायल में तेजी लाने का आह्वान किया है। हालांकि, इसके साथ ही डब्ल्यूएचओ ने पड़ोसी देशों को सीमाएं पूरी तरह बंद करने या व्यापार प्रतिबंध लगाने के खिलाफ सलाह दी है। एजेंसी का कहना है कि ऐसे कदमों का कोई वैज्ञानिक आधार नहीं है और इससे लोग अनौपचारिक (अवैध) रास्तों से आवाजाही शुरू कर देंगे, जिससे संकट और अधिक बिगड़ सकता है। कांगो की सीमा से लगे पड़ोसी देशों से प्रयोगशाला परीक्षणों को मजबूत करने, स्वास्थ्य कर्मियों को प्रशिक्षित करने और त्वरित प्रतिक्रिया टीमों को तैनात करने सहित अपनी तैयारियों के स्तर को तुरंत बढ़ाने का अनुरोध किया गया है। गौरतलब है कि इबोला का 'बुंदीबुग्यो' स्ट्रेन पूर्व के बड़े प्रकोपों के लिए जिम्मेदार 'जायरे' स्ट्रेन की तुलना में कम आम है, लेकिन यह अभी भी उच्च मृत्यु दर के साथ गंभीर रक्तस्रावी बुखार का कारण बन सकता है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 17 May 2026 17:15:34 +0530</pubDate>
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                <title>डब्ल्यूएचओ का दावा: वैश्विक कोरोना मौतों का आंकड़ा आधिकारिक संख्या से तीन गुना अधिक, रिपोर्ट जारी  </title>
                                    <description><![CDATA[विश्व स्वास्थ्य संगठन की 'वर्ल्ड हेल्थ स्टैटिस्टिक्स 2026' रिपोर्ट के अनुसार, महामारी से वास्तविक मौतें 2.2 करोड़ के पार पहुंच गई हैं। यह सरकारी आंकड़ों से तीन गुना ज्यादा है। कम रिपोर्टिंग और स्वास्थ्य सेवाओं में व्यवधान के कारण जीवन प्रत्याशा में हुई एक दशक की प्रगति भी समाप्त हो गई है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/who-claims-global-corona-death-toll-three-times-higher-than/article-153780"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-05/who.png" alt=""></a><br /><p>जिनेवा। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने कहा है कि कोविड-19 महामारी से दुनिया भर में मौतों की वास्तविक संख्या 2.2 करोड़ से अधिक पहुंच गई है, जो आधिकारिक तौर पर दर्ज 70 लाख मौतों से करीब तीन गुना ज्यादा है। डब्ल्यूएचओ की बुधवार को जारी "वर्ल्ड हेल्थ स्टैटिस्टिक्स 2026" रिपोर्ट में कहा गया, "वर्ष 2020 से 2023 के बीच सभी कारणों से वैश्विक अतिरिक्त मौतों (एक्सेस डेथ्स) का अनुमान 2.21 करोड़ लगाया गया, जबकि कोविड-19 से आधिकारिक तौर पर 70 लाख मौतें दर्ज की गईं। </p>
<p>इसका मतलब है कि कोविड से दर्ज हर एक मौत के मुकाबले महामारी से जुड़ी लगभग दो अतिरिक्त मौतें हुईं।"संगठन के अनुसार, इसका मुख्य कारण कई देशों द्वारा मौतों की कम रिपोर्टिंग करना है। इसके अलावा, 2022 के बाद अनेक देशों ने बड़े पैमाने पर कोविड-19 जांच अभियान बंद कर दिये, जिससे वास्तविक आंकड़े सामने नहीं आ सके। रिपोर्ट में कहा गया, "यह निष्कर्ष न केवल वायरस से सीधे हुई मौतों की कम रिपोर्टिंग को दर्शाता है, बल्कि स्वास्थ्य सेवाओं में व्यवधान, आर्थिक चुनौतियों और अन्य सामाजिक कारणों से हुई अप्रत्यक्ष मौतों को भी उजागर करता है।"</p>
<p>डब्ल्यूएचओ ने यह भी कहा कि महामारी ने वैश्विक स्तर पर जीवन प्रत्याशा में एक दशक की प्रगति को खत्म कर दिया और विभिन्न क्षेत्रों में इसकी भरपाई अब भी असमान बनी हुई है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 14 May 2026 14:11:04 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>पीएम मोदी का टिहरी दौरा: 1000 मेगावाट परियोजना का करेंगे लोकार्पण, शासन और प्रशासन स्तर पर तैयारियां तेज</title>
                                    <description><![CDATA[प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जल्द ही टिहरी का अपना पहला दौरा करेंगे। वे यहाँ 1000 मेगावाट की 'पंप स्टोरेज परियोजना' राष्ट्र को समर्पित करेंगे और टिहरी मेडिकल कॉलेज की आधारशिला रखेंगे। यह यात्रा ऊर्जा भंडारण, स्वास्थ्य और रोजगार के क्षेत्र में उत्तराखंड के लिए एक विकास का नया अध्याय साबित होगी।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/pm-modis-visit-to-tehri-will-inaugurate-1000-mw-project/article-153091"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-05/modi1.png" alt=""></a><br /><p>टिहरी। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पहली बार उत्तराखंड के टिहरी जिले के दौरे पर पहुंच सकते हैं। प्रस्तावित कार्यक्रम के अनुसार मई के अंतिम सप्ताह अथवा जून के प्रथम सप्ताह में प्रधानमंत्री टिहरी पहुंचकर देश की महत्वपूर्ण 1000 मेगावाट क्षमता वाली टिहरी पंप स्टोरेज परियोजना का लोकार्पण करेंगे। इस संभावित दौरे को लेकर शासन और प्रशासन स्तर पर तैयारियां तेज हो गई हैं। सूत्रों के अनुसार प्रधानमंत्री का यह दौरा राजनीतिक से अधिक विकास और ऊर्जा क्षेत्र की उपलब्धियों पर केंद्रित रहेगा। टिहरी पंप स्टोरेज परियोजना को देश की सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा परियोजनाओं में माना जा रहा है। यह परियोजना बिजली उत्पादन के साथ-साथ ऊर्जा भंडारण और राष्ट्रीय ग्रिड संतुलन में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। विशेषज्ञ इसे भविष्य की ऊर्जा जरूरतों के लिहाज से "गेमचेंजर" मान रहे हैं।</p>
<p>इसके अलावा श्री मोदी इस दौरान टिहरी मेडिकल कॉलेज की आधारशिला भी रख सकते हैं तथा क्षेत्र के विकास से जुड़ी कई अन्य योजनाओं की घोषणाएं होने की भी संभावना है। इससे टिहरी सहित आसपास के क्षेत्रों में स्वास्थ्य, शिक्षा और रोजगार के नए अवसर विकसित होने की उम्मीद जताई जा रही है। गौरतलब है कि प्रधानमंत्री मोदी इससे पहले उत्तराखंड के कई महत्वपूर्ण धार्मिक और पर्यटन स्थलों का दौरा कर चुके हैं, हालांकि टिहरी जिला अब तक प्रधानमंत्री के दौरे से अछूता रहा था।</p>
<p>स्थानीय विधायक किशोर उपाध्याय ने शुक्रवार को बताया कि प्रारंभ में यह कार्यक्रम दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे परियोजना के उद्घाटन के साथ प्रस्तावित था लेकिन टिहरी परियोजना के ऐतिहासिक महत्व और स्थानीय लोगों की भावनाओं को देखते हुए प्रधानमंत्री ने स्वयं टिहरी आने की सहमति दी। उन्होंने कहा कि यह दौरा टिहरी के विकास को नई दिशा देने वाला साबित होगा। मुख्य सचिव आनंद बर्धन ने भी संबंधित अधिकारियों को सुरक्षा, यातायात और अन्य व्यवस्थाओं को लेकर आवश्यक निर्देश जारी किए हैं। पीएमओ की ओर से आधिकारिक कार्यक्रम की घोषणा का अब सभी को इंतजार है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 08 May 2026 14:55:58 +0530</pubDate>
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                <title>बांग्लादेश में खसरे से हाहाकार : एक दिन में 17 लोगों की मौत; तेजी से बढ़ रहे केस, सरकार ने जारी किया अलर्ट</title>
                                    <description><![CDATA[बांग्लादेश में खसरे (Measles) ने कोहराम मचा रखा है, जहाँ एक ही दिन में 17 लोगों की जान चली गई। 15 मार्च से अब तक संदिग्ध मामलों की संख्या 41,000 के पार पहुंच चुकी है। स्वास्थ्य विभाग ने ढाका में सर्वाधिक मौतों की पुष्टि की है। टीकाकरण और बेहतर चिकित्सा सुविधाओं के जरिए इस संक्रामक बीमारी को रोकने के प्रयास तेज कर दिए गए हैं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/outcry-due-to-measles-in-bangladesh-17-people-died-in/article-152714"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-05/11.png" alt=""></a><br /><p>ढाका। बांग्लादेश में खसरा और खसरा से संबंधित जटिलताओं के कारण एक ही दिन में 17 लोगों की मौत हो गई। मार्च में इस अत्यधिक संक्रामक लेकिन रोकथाम योग्य बीमारी के प्रकोप की शुरुआत के बाद से एक दिन में दर्ज मौत की यह सबसे अधिक संख्या है। यह जानकारी मीडिया रिपोर्टों से मंगलवार को प्राप्त हुई। स्वास्थ्य सेवा महानिदेशालय (डीजीएचएस) के अनुसार, सोमवार सुबह आठ बजे तक दर्ज की गई 17 मौतों में से दो की पुष्टि खसरा से होने जबकि अन्य 15 को संदिग्ध मामलों के रूप में वर्गीकृत किया गया।</p>
<p>ढाका ट्रिब्यून की रिपोर्ट के अनुसार, संदिग्ध मौतों में से सबसे अधिक 10 मौतें ढाका जिले में दर्ज की गईं। ताजा रिपोर्टों के अनुसार, देश में खसरा से होने वाली पुष्ट मौतों की कुल संख्या बढ़कर 52 हो गई है। इसके अलावा, 15 मार्च से दर्ज किए जा रहे आंकड़ों के अनुसार इस बीमारी से संबंधित संदिग्ध मौतों की संख्या वर्तमान में 259 है। डीजीएचएस के अधिकारियों ने बताया कि इसी अवधि के दौरान खसरे के लगभग 1,302 संदिग्ध मामले दर्ज किए गए, जिससे 15 मार्च से अब तक संदिग्ध मामलों की कुल संख्या 41,793 हो गयी है।</p>
<p>ढाका ट्रिब्यून ने कहा कि इसी अवधि के दौरान, खसरा के 154 नए पुष्ट मामले सामने आए जिससे पुष्ट संक्रमणों की कुल संख्या 5,467 हो गई। प्राप्त रिपाेर्ट के अनुसार 15 मार्च तक खसरा के संदिग्ध मामलों में से 28,832 लोगों को अस्पताल में भर्ती कराया गया है। इनमें से 25,151 मरीज स्वस्थ हो गये और उन्हें अस्पताल से छुट्टी मिल गयी है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>स्वास्थ्य</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 05 May 2026 12:41:41 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>दिल्ली के स्कूलों में तेज गर्मी को लेकर मानवीय पहल : अब बच्चों को पीने की पानी की याद दिलाने के लिए बजेगी घंटी, हर 45-60 मिनट बाद मिलेगा हाइड्रेशन ब्रेक</title>
                                    <description><![CDATA[भीषण गर्मी को देखते हुए दिल्ली शिक्षा निदेशालय ने सख्त निर्देश जारी किए हैं। अब स्कूलों में प्रार्थना सभा और आउटडोर गतिविधियों पर रोक रहेगी। बच्चों को हाइड्रेटेड रखने के लिए हर घंटे "वॉटर बेल" बजेगी। सभी स्कूलों को सुरक्षा मानकों का पालन कर 2 मई 2026 तक रिपोर्ट सौंपनी होगी।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/humanitarian-initiative-regarding-extreme-heat-in-delhi-schools-now-bell/article-151805"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/delhi-school.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। राजधानी में तेज़ होती गर्मी और लू के बढ़ते खतरे को देखते हुए शिक्षा निदेशालय ने सभी सरकारी, निजी और सहायता प्राप्त स्कूलों के लिए नई गाइडलाइन जारी की हैं। इन निर्देशों का मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है, जिसके तहत स्कूलों को अतिरिक्त सावधानी बरतने को कहा गया है।</p>
<p>नए आदेश के अनुसार, खुले मैदान में होने वाली प्रार्थना सभाओं और कक्षाओं पर पूरी तरह रोक लगा दी गई है। यदि सभा आयोजित करना जरूरी हो, तो उसे कम समय के लिए और छायादार या भवन के भीतर ही किया जाएगा। विद्यार्थियों को डिहाइड्रेशन से बचाने के लिए “पानी की घंटी” व्यवस्था लागू करने के निर्देश दिए गए हैं। इसके तहत हर 45 से 60 मिनट में घंटी बजाकर बच्चों को पानी पीने की याद दिलाई जाएगी। साथ ही स्कूलों में पर्याप्त मात्रा में स्वच्छ और ठंडा पेयजल उपलब्ध कराना अनिवार्य होगा।</p>
<p>भीषण गर्मी को देखते हुए सभी आउटडोर खेल और शारीरिक गतिविधियां फिलहाल बंद रहेंगी। बच्चों को हल्के सूती कपड़े पहनने और साफ-सफाई बनाए रखने के लिए भी जागरूक किया जाएगा। स्कूलों में हीटवेव और हीट स्ट्रोक के लक्षणों पर विशेष जागरूकता सत्र आयोजित होंगे। जरूरत पड़ने पर तुरंत प्राथमिक उपचार की व्यवस्था भी अनिवार्य होगी। हर स्कूल में एक नोडल शिक्षक नियुक्त किया जाएगा और 2 मई 2026 तक अनुपालन रिपोर्ट जमा करनी होगी।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 27 Apr 2026 12:59:48 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>स्वास्थ्य कल्याण होम्योपैथिक मेडिकल कॉलेज में विश्व होम्योपैथी दिवस कार्यक्रम : विशेषज्ञों ने सिद्धांत, महत्व और आधुनिक चिकित्सा में बढ़ती भूमिका को किया रेखांकित</title>
                                    <description><![CDATA[स्वास्थ्य कल्याण होम्योपैथिक मेडिकल कॉलेज एवं रिसर्च सेंटर में विश्व होम्योपैथी दिवस पर कार्यक्रम आयोजित। मुख्य अतिथि डॉ. कैलाश शर्मा और विशिष्ट अतिथि डॉ. मनीषा सक्सेना उपस्थित। वक्ताओं ने होम्योपैथी के सिद्धांतों, उपयोगिता और आधुनिक चिकित्सा में इसकी बढ़ती प्रासंगिकता व महत्वपूर्ण भूमिका पर विस्तार से प्रकाश।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/world-homeopathy-day-event-at-jaipur-homoeopathic-college-experts-underlined/article-149789"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/1200-x-600-px)9.png" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal"><span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">जयपुर।</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">स्वास्थ्य</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">कल्याण</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">होम्योपैथिक</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">मेडिकल</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">कॉलेज</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">एवं</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">रिसर्च</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">सेंटर</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">जयपुर</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">में</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">विश्व</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">होम्योपैथी</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">दिवस</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">के</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">अवसर</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">पर</span><span> </span><span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">कार्यक्रम</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">में</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">होम्योपैथी</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">चिकित्सा</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">पद्धति</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">के</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">महत्व</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">एवं</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">उसकी</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">वर्तमान</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">समय</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">में</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">बढ़ती</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">प्रासंगिकता</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">को</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">विशेष</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">रूप</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">से</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">रेखांकित</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">किया।</span></p>
<p class="MsoNormal"><span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">कार्यक्रम</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">में</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">मुख्य</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">अतिथि</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">के</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">रूप</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">में</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">आयुष</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">विभाग</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">के</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">प्रोजेक्ट</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">डायरेक्टर</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">डॉ</span>. <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">कैलाश</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">शर्मा</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">उपस्थित</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">रहे।</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">विशिष्ट</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">अतिथि</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">के</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">रूप</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">में</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">होम्योपैथी</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">विभाग</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">की</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">निदेशक</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">डॉ</span>. <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">मनीषा</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">सक्सेना</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">उपस्थिति</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">रहीं।</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">वक्ताओं</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">ने</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">होम्योपैथी</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">के</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">सिद्धांतों</span>, <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">इसकी</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">उपयोगिता</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">और</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">आधुनिक</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">चिकित्सा</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">प्रणाली</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">में</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">इसकी</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">महत्वपूर्ण</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">भूमिका</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">पर</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">विस्तार</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">से</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">प्रकाश</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">डाला।</span></p>
<p class="MsoNormal"><span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';"> </span></p>
<p class="MsoNormal"><span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';"> </span></p>
<p class="MsoNormal"> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>शिक्षा जगत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 10 Apr 2026 10:00:32 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur KD]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>पीएम मोदी ने ईद और नवरोज की देशवासियों को दी शुभकामनाएं, शांति, समृद्धि और अच्छे स्वास्थ्य की कामना की, सछ्वाव और खुशहाली पर दिया जोर</title>
                                    <description><![CDATA[प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को देशवासियों को ईद-उल-फितर और नवरोज की हार्दिक शुभकामनाएं दीं। उन्होंने सभी के लिए सुख, शांति और समृद्धि की कामना करते हुए आपसी भाईचारे और सद्भाव को मजबूत करने का संदेश दिया। पीएम ने इन त्योहारों को खुशहाली और नई आशाओं का प्रतीक बताया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/pm-modi-wished-the-countrymen-on-eid-and-navroz-wished/article-147299"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/pm-modi1.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को ईद-उल-फितर और नवरोज के अवसर पर नागरिकों को शुभकामनाएं देते हुए शांति, समृद्धि और अच्छे स्वास्थ्य की कामना की। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक संदेश में प्रधानमंत्री ने ईद-उल-फितर की हार्दिक शुभकामनाएं देते हुए आशा व्यक्त की कि यह त्योहार सभी के बीच भाईचारा और सछ्वाव को बढ़ावा देगा। उन्होंने सभी की खुशी और अच्छे स्वास्थ्य के लिए प्रार्थना की और संदेश का समापन ईद मुबारक के साथ किया।</p>
<p>पारसी समुदाय द्वारा नव वर्ष के रूप में मनाए जाने वाले नवरोज के अवसर पर एक अलग संदेश में पीएम मोदी ने इसे एक विशेष अवसर बताया और समृद्धि और आनंद से भरे वर्षÞ की कामना की। उन्होंने लोगों के स्वस्थ रहने और उनकी आकांक्षाओं की पूर्ति की भी कामना व्यक्त की और अपने संदेश का समापन नवरोज मुबारक के साथ किया।</p>
<p>प्रधानमंत्री मोदी की ये शुभकामनाएं ऐसे समय में आई हैं जब भारत और दुनिया भर के समुदाय इन त्योहारों को मना रहे हैं, जो नवीनीकरण, कृतज्ञता और सामाजिक सछ्वाव का प्रतीक हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 21 Mar 2026 12:42:29 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>राज्यपाल हरिभाऊ बागडे ने कहा,  हर मास-एक उपवास आत्मसंयम और स्वास्थ्य की जीवन साधना, आचार्य प्रसन्न सागर के सान्निध्य में मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा भी हुए शामिल</title>
                                    <description><![CDATA[राज्यपाल हरिभाऊ बागडे और मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने आचार्य प्रसन्न सागर जी से आशीर्वाद लिया। ‘हर माह-एक उपवास’ अभियान को आध्यात्मिक, स्वास्थ्यवर्धक और लोकमंगलकारी बताया गया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/governor-haribhau-bagde-said-every-month-one-fast-a/article-142306"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-02/11-(700-x-400-px)-(630-x-400-px)-(3)7.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। राज्यपाल हरिभाऊ बागडे ने शनिवार को अंतर्मना आचार्य श्री प्रसन्न सागर जी महाराज के सानिध्य में पहुंचकर उनका आशीर्वाद लिया। इस अवसर पर उन्होंने आचार्य श्री की प्रेरणा से चलाए जा रहे श्हर मास-एक उपवास जैसे लोकमंगलकारी प्रकल्प को जीवन साधना बताते हुए इसकी सराहना की। राज्यपाल ने कहा कि उपवास न केवल आध्यात्मिक उन्नति का मार्ग है, बल्कि स्वास्थ्य के लिए भी अत्यंत लाभकारी है। राज्यपाल बागडे ने भारत की प्राचीन संयम परंपरा का उल्लेख करते हुए कहा कि आत्मसंयम, नागरिक स्वास्थ्य और अध्यात्म से जुड़ा यह अभियान समाज के लिए एक महत्वपूर्ण संदेश देता है।</p>
<p><strong>मुख्यमंत्री ने लिया आशीर्वाद</strong></p>
<p>इसी क्रम में मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा भी आचार्य श्री प्रसन्न सागर जी के सानिध्य में आयोजित हर माह-एक उपवास कार्यक्रम में शामिल हुए। मुख्यमंत्री ने आचार्य श्री से आत्मीय भेंट कर आशीर्वाद प्राप्त किया। उन्होंने कहा कि संतों और मुनियों का समाज को आध्यात्मिक दिशा देने में अहम योगदान है </p>
<p><strong>कविओं ने बांधा समां</strong></p>
<p>इस मौके पर हुए कवि सम्मेलन में विनीत चौहान सहित अन्य कविओं ने अपनी कविताओं से लोगों का जमकर मनोरंजन किया। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 08 Feb 2026 10:36:59 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>एमवे इंडिया ने लांच किया न्यूट्रिलाइट बायोटिन सी प्लस, बालों और नाखूनों के स्वास्थ्य को देता है भीतर से सहारा</title>
                                    <description><![CDATA[एमवे इंडिया ने न्यूट्रिलाइट बायोटिन सी प्लस (जिंक व बीटा कैरोटीन के साथ) लॉन्च किया। यह न्यूट्रास्युटिकल बालों, त्वचा और नाखूनों के स्वास्थ्य को सहारा देता है। विज्ञान-समर्थित और पादप-आधारित यह उत्पाद 18 वर्ष से ऊपर के वयस्कों के लिए है। एमवे के अनुसार यह ‘भीतर से सुंदरता’ पोषण पोर्टफोलियो को मजबूत करता है।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/amway-india-launches-nutrilite-biotin-c-plus-supports-hair-and/article-140971"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-01/1200-x-600-px)-(1200-x-600-px)75.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। एमवे इंडिया ने न्यूट्रिलाइट बायोटिन सी प्लस (जिंक एवं बीटा कैरोटीन के साथ) लॉन्च किया है एक न्यूट्रास्युटिकल। इसमें स्वस्थ बालों, त्वचा और नाखूनों को सहारा देने वाले तत्व शामिल है। इसे 'बायोटिन से परे' फ़ॉर्मूलेशन के रूप में प्रस्तुत किया गया है। यह एमवे के विज्ञान-समर्थित पोषण और पादप-आधारित वेलनेस पर निरंतर फोकस को दर्शाता है। न्यूट्रिलाइट की 90+ वर्षों की पोषण विशेषज्ञता के साथ विकसित, यह उत्पाद अनुशंसित आहार भत्तों (आरडीए) के अनुरूप आवश्यक पोषक तत्वों को प्रदान करता है, जो एमवे के रोजमर्रा के पोषण पर फोकस को मजबूत करता है।</p>
<p>एमवे इंडिया के प्रबंध निदेशक रजनीश चोपड़ा ने कहा कि समग्र स्वास्थ्य और बाहरी रूप-रंग एक-दूसरे से गहराई से जुड़े हुए हैं। एमवे में हमारा प्रयास विज्ञान-समर्थित, प्रकृति-प्रेरित पोषण के माध्यम से लोगों को अधिक संतुष्ट जीवन जीने में सक्षम बनाना है। बायोटिन सी प्लस (जिंक एवं बीटा कैरोटीन के साथ) का लॉन्च हमारे 'भीतर से सुंदरता' पोषण पोर्टफोलियो को मजबूत करता है और बायोटिन से परे व्यापक पोषक तत्वों वाला फॉर्मूलेशन वाला प्रस्तुत करके रोजमर्रा की स्वास्थ्य आवश्यकताओं को पूरा करता है। यह हमारी उस प्रतिबद्धता को भी दर्शाता है जिसके तहत हम नवोन्मेषी उत्पादों के माध्यम से लोगों को भीतर से अपने स्वास्थ्य की ज़िम्मेदारी लेने के लिए सशक्त बना रहे हैं।</p>
<p>न्यूट्रिलाइट बायोटिन सी प्लस (जिंक एवं बीटा कैरोटीन के साथ) आवश्यक पोषक तत्वों के चुने गए संयोजन के साथ तैयार किया गया है। बायोटिन बालों की वृद्धि और फॉलिकल स्वास्थ्य को सहारा देता है। जिंक नाखूनों को मज़बूत बनाए रखने के साथ-साथ त्वचा के स्वास्थ्य में भी मदद करता है। यह 18 वर्ष और उससे अधिक आयु के वयस्कों के लिए डिजाइन किया गया है। यह एक न्यूट्रास्युटिकल है और इसका उपयोग औषधीय प्रयोजन के लिए नहीं है, न ही इसे विविध आहार के विकल्प के रूप में लिया जाना चाहिए।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वास्थ्य</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 27 Jan 2026 16:19:32 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur KD]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>शहर के कई आंगनबाड़ी केंद्रों में उपस्थिति कम, एक केंद्र मिला बंद </title>
                                    <description><![CDATA[विभिन्न केंद्रों पर किए गए निरीक्षण में कई अव्यवस्थाएँ सामने आईं। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/low-attendance-at-several-anganwadi-centers-in-the-city--with-one-center-found-closed/article-134666"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-12/1200-x-600-px)-(1)12.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। राज्य सरकार व केंद्र सरकार द्वारा आंगनबाड़ी केंद्रों में पंजीकृत बच्चों के पोषण व स्वास्थ्य सुधार के लिए कई योजनाएं संचालित की जा रही हैं, लेकिन कोटा शहर के कुछ आंगनबाड़ी केंद्रों की वास्तविक स्थिति इन दावों के विपरीत दिखाई दी। बुधवार को विभिन्न केंद्रों पर किए गए निरीक्षण में कई कमियां और अव्यवस्थाएँ सामने आईं। वहीं केंद्रों पर बच्चों के खेलने की सामग्री कुछ जगहों पर गोदरेज में रखी हुई है तो कुछ में अलमारी में रखी हुई।</p>
<p><strong>दुर्गा बस्ती स्थित आंगनबाड़ी द्वितीय केंद्र : एक ही कमरे में पूरी व्यवस्था</strong><br />बुधवार सुबह करीब 11:40 बजे दुर्गा बस्ती में स्थित आंगनबाड़ी द्वितीय केंद्र का स्कैन किया गया। यह केंद्र केवल एक कमरे में संचालित हो रहा है। केंद्र में 7 पंजीकृत बच्चों में से मौके पर सिर्फ 1 बच्चा ही मौजूद था। जब रिपोर्टर ने बाकी बच्चों के बारे में पूछा तो कार्यकर्ता सायरा मंसूरी और सहायिका जयंती राठौर ने बताया कि सर्दी के कारण बच्चे कम आ रहे हैं। दोनों ने यह भी जानकारी दी कि सुपरवाइजर किसी मीटिंग में गई हुई हैं।इस केंद्र में बच्चों के खेलने की सामग्री कमरे में बनी अलमारियों और टांड पर रखी हुई मिली। वहीं, उसी एक कमरे में बच्चों के लिए दूध गर्म करने के साथ-साथ दलिया और अन्य खाद्य सामग्री भी तैयार की जाती हैं, जिससे साफ-सफाई और जगह की कमी जैसी समस्याएँ साफ नजर आती हैं।</p>
<p><strong>सिंधी कॉलोनी द्वितीय केंद्र: व्यवस्थित लेकिन उपस्थिति फिर भी कम</strong><br />सरकारी स्कूल में संचालित सिंधी कॉलोनी द्वितीय आंगनबाड़ी केंद्र का निरीक्षण बुधवार दोपहर 12 बजे किया गया। यहां भवन की दीवारों पर ज्ञानवर्धक पेंटिंग बनी हुई थीं, जो बच्चों के लिए शिक्षाप्रद वातावरण बनाती हैं।केंद्र में 10 पंजीकृत बच्चों में से 7 बच्चे ही उपस्थित थे। कार्यकर्ता सीमा कुमारी ने बताया कि सोमवार से शनिवार तक बच्चों को 10 ग्राम दूध और 5 ग्राम चीनी गर्म करके दी जाती है। इसके अलावा सरकार द्वारा निर्धारित मेन्यू चार्ट के अनुसार बच्चों को खिचड़ी, दलिया, उपमा सहित अन्य पोषक आहार भी दिया जाता है।</p>
<p><strong>साजीहेड़ा केंद: निरीक्षण के दौरान केंद्र बंद मिला</strong><br />साजीहेड़ा में एक निजी स्कूल के पास संचालित आंगनबाड़ी केंद्र पर जब संवाददाता बुधवार दोपहर 12:30 बजे पहुंचे, तो केंद्र बिल्कुल खाली और बंद मिला। आसपास के लोगों ने बताया कि केंद्र पर उस समय कोई मौजूद नहीं था। मकान मालिक व अन्य ने जानकारी दी कि सहायिका कुछ देर के लिए केंद्र खोलकर आई थी और थोड़ी देर बाद ही चली गई, जिससे यह स्पष्ट होता है कि केंद्र नियमित समय पर संचालित नहीं हो रहा है।</p>
<p>दुर्गा बस्ती स्थित आंगनबाड़ी द्वितीय की सुपरवाईजर ट्रेनिंग में हैं। साथ हीआंगनबाड़ी कार्यकतार्ओं की डयूटी एसआईआर में लगी हुई। जिसकी वजह से कुछ व्यवस्थाएं प्रभावित हो रही है। और अन्य समस्याओं को दिखावाता हूं।<br /><strong>- आलोक शर्मा, सीडीपीओं कोटा शहर</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 04 Dec 2025 14:40:52 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[kota]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>वर्ल्ड डायबिटीज डे : डायबिटीज के मरीजों के लिए बड़ी राहत, इंजेक्शन के दर्द से मिलेगी निजात, अब नेजल स्प्रे से हो सकेगी इंसुलिन मैनेज</title>
                                    <description><![CDATA[जयपुर में डायबिटीज के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। विशेषज्ञों के अनुसार देश में 42% लोगों को अपनी बीमारी का पता नहीं होता। इंसुलिन लेवल और सी-पेप्टाइड होमा-IR टेस्ट से प्री-डायबिटीज की पहचान संभव है। इंजेक्शन के दर्द से राहत देने वाली नेजल स्प्रे इंसुलिन तकनीक नया विकल्प बनेगी। एसएमएस अस्पताल में गंभीर जटिलताओं वाले मरीज बढ़ रहे हैं।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/world-diabetes-day-big-relief-for-diabetic-patients-they-will/article-132357"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-11/11-(5).png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। देश में हर 100 में से 42 लोगों को नहीं पता कि उन्हे डायबिटीज है। राजस्थान में भी डायबिटीज के केस काफी तेजी से बढ़ रहे हैं। डायबिटीज की स्क्रीनिंग पहले से बढ़ गई है और मरीजों में डायग्नोज हो रही है। लेकिन ऐसे मरीज जो डायबिटीज होने के मुहाने पर हैं, सिर्फ दो टेस्ट से इस बीमारी से बच सकते हैं। इंसुलिन लेवल और सी पैप्टाइड होमा आईआर टेस्ट से व्यक्ति डायबिटीज के खतरे को पहचानकर इससे बच सकता है। वहीं डायबिटीज के मरीजों को जल्द ही बड़ी राहत मिलने वाली है। अब इंसुलिन इंजेक्शन की सुई के होने वाले दर्द से डायबिटीज के मरीजों को निजात मिल सकेगी।</p>
<p><strong>एसएमएस में पहुंच रहे गंभीर लक्षणों के मरीज :</strong></p>
<p>एसएमएस मेडिकल कॉलेज के सीनियर प्रोफेसर मेडिसिन और डायबिटीज रोग विशेषज्ञ डॉ. पुनीत सक्सैना ने बताया कि एसएमएस में डायबिटीज के मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। यहां बड़ी संख्या में डायबिटीज के ऐसे मरीज आ रहे हैं जिन्हें इंफेक्शन, किडनी फेलियर, हार्ट अटैक, गैंगरीन, पैरालाइटिक अटैक, दृष्टि दोष जैसी समस्या भी डायबिटीज की वजह से हो रही है। उन्होंने बताया कि डायबिटीज एक गंभीर और जानलेवा बीमारी है। इसे हल्के में ना लेकर समय रहते समुचित इलाज जरूरी है।</p>
<p><strong>नेजल स्प्रे इंसुलिन तकनीक बनेगी वरदान :</strong></p>
<p>सीनियर एंडोक्राइनोलॉजिट डॉ. शैलेश लोढ़ा ने बताया कि डायबिटीज में इंसुलिन को मैनेज करने के लिए नेजल स्प्रे इंसुलिन तकनीक आ गई है। इस नई पद्धति में इंसुलिन को नाक के माध्यम से शरीर में पहुंचाया जाता है, जहां से वह ब्लडस्ट्रीम में तेजी से अवशोषित हो जाती है। यह तकनीक खास तौर पर उन मरीजों के लिए उपयोगी साबित हो सकती है जिन्हें बार-बार इंजेक्शन लगाने में असुविधा होती है। नाक के रास्ते दी गई इंसुलिन ब्रेन-लिवर पाथवे को भी सक्रिय करती है। जिससे ब्लड-शुगर का नियंत्रण अधिक संतुलित रहता है।</p>
<p><strong>डायबिटीज के हैं दो प्रकार :</strong></p>
<p><strong>टाइप-1</strong> डायबिटीज आमतौर पर बच्चों या किशोरों में देखी जाती है। इसमें शरीर की रोग प्रतिरोधक प्रणाली गलती से अग्न्याशय की उन बीटा कोशिकाओं पर हमला कर देती है, जो इंसुलिन बनाती हैं।</p>
<p><strong>टाइप-2 </strong>डायबिटीज मुख्य रूप से वयस्कों में होती है लेकिन बदलती जीवनशैली और मोटापे के कारण अब यह युवाओं और किशोरों में भी बढ़ रही है। इस स्थिति में शरीर इंसुलिन तो बनाता है लेकिन उसका प्रभाव कम हो जाता है।</p>
<p><strong>इंसुलिन रिजर्व खत्म होने पर बढ़ता है खतरा :</strong></p>
<p>सीनियर एंडोक्राइनोलॉजिस्ट डॉ. पीपी पाटीदार ने बताया कि हमारे शरीर में शुगर को पचाने के लिए पैनक्रियाज के बीटा सेल्स इंसुलिन का निर्माण करते हैं। इसमें सिर्फ 10 से 20 प्रतिशत इंसुलिन ही काम आता है बाकि 89 से 90 प्रतिशत रिजर्व में रहता है। जिन मरीजों में यह रिजर्व खत्म हो जाता है उन्हें डायबिटीज का खतरा सबसे ज्यादा है। इस स्थिति को ही प्री-डायबिटीज कहते हैं।</p>
<p><strong>गर्दन पर काली पट्टी मैल नहीं डायबिटीज का सूचक :</strong></p>
<p>डॉ. पाटीदार ने बताया कि मोटापे से ग्रस्त कई बच्चों या व्यस्कों की गर्दन के पीछे काली पट्टी होती है जिसे लोग मैल समझते हैं। जबकि यह शरीर में शुगर को पचाने के लिए पैनक्रियाज द्वारा बनाई गई अधिक इंसुलिन के जमाव के कारण बनती है। ऐसे में अगर आप अपनी गर्दन पर मैल जैसी काली पट्टी देखते हैं तो यह डायबिटीज का सूचक है। व्यायाम, संयमित दिनचर्या से यह पट्टी खत्म होगी तो आपकी डायबिटीज भी खत्म हो जाएगी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>स्वास्थ्य</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 14 Nov 2025 12:20:51 +0530</pubDate>
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