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                <title>Breaking News. Treading News - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <title>बिहार के सीएम नीतीश कुमार: दो दशक में दसवीं बार शपथ, पढ़ेें 'सुशासन बाबू' का छात्र आंदोलन से लेकर 10वीं बार बिहार सीएम बनने तक का पूरा सफर</title>
                                    <description><![CDATA[नीतीश कुमार ने गुरुवार को दसवीं बार मुख्यमंत्री पद की शपथ लेकर भारतीय राजनीति में नया कीर्तिमान बनाया। उम्र, स्वास्थ्य और लोकप्रियता को लेकर उठे सवालों के बावजूद जनता ने उन्हें ऐतिहासिक समर्थन दिया। महिला मतदाताओं, सुशासन की छवि और भाजपा–जदयू की मजबूत जुगलबंदी ने उनकी जीत को निर्णायक बनाया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/bihar-cm-nitish-kumar-takes-oath-for-the-tenth-time/article-133065"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-11/11-(1200-x-600-px)-(2)5.png" alt=""></a><br /><p>पटना। श्री नीतीश कुमार ने लोकतंत्र की जननी कहीं जाने वाली भूमि बिहार के मुख्यमंत्री के रूप में गुरुवार को लगभग दो दशक में दसवीं बार शपथ लेकर देश की राजनीति में एक नया कीर्तिमान बनाया है। ढ़लती उम्र, थकान और स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों के साथ-साथ लंबे समय तक शासन में रहने से लोकप्रियता में कमी की अटकलों को दरकिनार करते हुए हाल में संपन्न विधानसभा चुनाव में श्री कुमार ने राज्य की राजनीति में अपने निरंतर प्रभाव और जनता के भरोसे की एक बार फिर पुष्टि की।</p>
<p>लगभग दो दशकों तक सत्ता में रहने के बाद इस चुनाव में वह अपनी सबसे कठिन राजनीतिक परीक्षा का सामना कर रहे थे। जातीय खानाजंगी और राजनीति के अपराधीकरण के लिए अक्सर चर्चा में रहने वाले बिहार प्रांत में'सुशासन बाबू'के रूप में पहचान बनाने वाले और बिहार में अपनी स्वच्छ एवं ईमानदार छवि के कारण वह गठबंधन की राजनीति में एक मुख्य धुरी बने हुए हैं।</p>
<p>हाल के समय में, मीडिया से नीतीश से दूरी, नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव द्वारा अचेत मुख्यमंत्री कहे जाने और प्रशासन पर नौकरशाही के हावी होने के आरोपों के बावजूद बिहार के मतदाताओं ने उनके नेतृत्व में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन को इस बार एक ऐतिहासिक जनादेश दिया है। </p>
<p><strong>बिहार में जनादेश की बहार में नीतीश कुमार पर जनता ने एक बार फिर ऐतबार जताया</strong></p>
<p>छह महीने पहले तक जहां नीतीश कुमार की विश्वसनीयता पर सवाल उठ रहे थे और विपक्षी दल महागठबंधन मजबूत दिख रहा था, चुनाव नतीजों ने उनके खिलाफ तमाम अटकलें को हवा-हवाई साबित कर दिया। नीतीश कुमार ने एक बार फिर साबित कर दिया कि वह अब भी बिहार के राजनीतिक रंगमंच के सबसे दमदार और सरदार अदाकार हैं। राजग की इस बार की जीत सिर्फ सरकार बनाने के लिए नहीं, बल्कि बिहार की जनता की निरंतरता और स्थिरता की चाहत का प्रमाण है। जनता ने फिर से कहा है ,बिहार में बहार है, नीतीश कुमार हैं...</p>
<p><strong>नीतीश कहते रहे कि'सब हम लोग कितना काम किए जी...</strong></p>
<p>श्री नीतीश कुमार का लगातार पांचवां विधानसभा चुनाव जीतना और 10वीं बार मुख्यमंत्री बनना, भारतीय राजनीति में एक दुर्लभ उपलब्धि है, खासकर  हिंदी भाषी राज्यों में, जहां भारतीय लोकतंत्र में बदलाव की उम्मीद की जाती है, वहीं बिहार ने बार-बार दोहराये जाने वाले चेहरे पर अपना विश्वास दिखाया है। इस बार राजग में भाजपा और जदयू ने बराबर-बराबर 101-101 सीटों पर चुनाव लड़ा और राजग ने उन्हें फिर से मुख्यमंत्री के चेहरे के रूप में आगे रख कर चुनाव लड़ा। </p>
<p>इस चुनाव में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और श्री नीतीश कुमार की छवि का फायदा मिला। राजग ने 2010 के 200 से अधिक सीटों को जीतने के प्रदर्शन को दोहराया। कभी बिहार में भाजपा के बड़े भाई की भूमिका में रहे जदयू को इस बार छोटे भाई की भूमिका में देखा जा रहा था। चुनाव से पहले यह व्यापक रूप से माना जा रहा था कि श्री मोदी की स्थायी लोकप्रियता और भाजपा का राष्ट्रीय प्रभुत्व ही राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) की सबसे बड़ी ताकत होगी, जो श्री नीतीश कुमार की घटती लोकप्रियता की भरपाई कर सकती है। इस बार चुनाव परिणाम ने भाजपा-जदयू को बराबर का सहभागी साबित किया है। </p>
<p>इस चुनाव में श्री नीतीश कुमार ने महिला मतदाताओं के बीच एक मजबूत सछ्वावना अर्जित की है। बिहार की 'दीदियों' ने मजबूती से उनका हाथ थामे रखा। यह बात लंबे समय से मानी जाती रही है कि बिहार की महिलाएं 2005 से चली आ रही श्री नीतीश कुमार नेतृत्व वाली राजग सरकार की महिला-केंद्रित योजनाओं की वजह से उनसे खूब जुड़ी हुई हैं, लेकिन इस बार गेम-चेंजर बना चुनावी सीजन के दौरान 1.4 करोड़ से ज्यादा महिलाओं को दिया गया, 10 हजार रुपये का नकद भुगतान। 'दस-हजारिया लाभार्थी और जीविका दीदियां राजग की बड़ी जीत का असली इंजन बन गयीं। </p>
<p>सरकारी योजनाओं से लाभ पाने वाली महिलाएं बड़ी संख्या में हैं और वे हर जाति, समुदाय और वर्ग से आती हैं। इस बार 71.6 प्रतिशत महिलाओं ने वोट डाला, जो पुरुषों (62.8 प्रतिशत) से करीब नौ प्रतिशत ज्यादा है। मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना जैसी कल्याणकारी पहलों के माध्यम से महिला मतदाताओं ने उनके नेतृत्व के लिए एक स्थिर बल के रूप में काम किया है, जिससे उन्हें अन्य वर्गों के झटकों से बचाव मिला है। वर्ष 2020 के विपरीत, जहां जदयू के कैडर में भ्रम दिखा था, इस बार पार्टी की संगठनात्मक शक्ति अधिक प्रभावी ढंग से सक्रिय हुई। </p>
<p>ग्रामीण नेताओं और स्थानीय प्रभावशाली लोगों पर आधारित उसके पारंपरिक कैडर ढांचे ने निर्वाचन क्षेत्र स्तर पर भाजपा के साथ बेहतर समन्वय के साथ काम किया। नेतीजों ने श्री नीतीश कुमार की उस क्षमता को भी दिखाया, जिसमें वे गठबंधन को अपना वोट ट्रांसफर कर सकते हैं। चाहे वह किसी भी गठबंधन में हों। उनके कई उलटफेरों के बावजूद, उनके निर्वाचन क्षेत्रों से संदेश साफ था, आप जहां जाएंगे, हम भी वहीं जाएंगे। विरोधियों की ओर से उनके स्वास्थ्य और शासन क्षमता पर लगातार हमलों ने उनके समर्थकों को पहले से कहीं ज्यादा मतदान केंद्रों तक पहुंचाया। 'सुशासन बाबू होने के अलावा, नीतीश' मिस्टर क्लीन भी हैं। उनके मंत्रियों पर आरोप लगते हैं, लेकिन किसी ने भी नीतीश पर भ्रष्टाचार का आरोप नहीं लगाया है। </p>
<p><strong>'टाइगर अभी जिंदा हैं' का नारा</strong></p>
<p>इस चुनाव में श्री नीतीश कुमार के लिए,'टाइगर अभी जिंदा हैं' का नारा सिर्फ एक राजनीतिक उद्घोष नहीं, बल्कि उनकी राजनीतिक वजूद और विश्वसनीयता का प्रमाण भी साबित हुआ। बिहार में पटना जिले के बख्तिायारपुर में एक मार्च 1951 को एक साधारण परिवार में जन्मे नीतीश कुमार के पिता दिवंगत कविराज राम लखन सिंह स्वतंत्रता सेनानी और वैद्य थे। श्री कुमार बिहार इंजीनियरिंग कॉलेज पटना में पढ़ायी के दौरान ही लोक नायक जयप्रकाश नारायण से प्रभावित होकर वर्ष 1974 के छात्र आंदोलन में कूद पड़े थे। श्री कुमार पहली बार सियासत में 1977 में उतरे, जब पूरे देश में कांग्रेस के खिलाफ माहौल बन चुका था। इस दौर में जनता पार्टी मजबूती से उभरी और लगभग पूरे देश में वर्चस्व बनाया। श्री नीतीश कुमार हालांकि चुनावी राजनीति में बेहतर शुरुआत नहीं कर पाये। वर्ष 1977 का चुनाव हुआ तब वह जनता पार्टी के टिकट पर नालंदा जिले के हरनौत विधानसभा क्षेत्र से चुनाव लड़े लेकिन उन्हें हार का सामना करना पड़ा । इसके बाद 1980 के विधानसभा चुनाव में भी उन्हें हार का मुंह देखना पड़ा, तब उनके परिवार वालों ने उन पर राजनीति छोड़कर नौकरी के लिए दबाव बनाना शुरु कर दिया, लेकिन श्री कुमार नहीं माने और राजनीति में डटे रहे।</p>
<p>इसके बाद श्री कुमार को पहली बार 1985 के विधानसभा चुनाव में हरनौत सीट से ही सफलता मिली और उसके बाद 1989 के लोकसभा चुनाव में वह बाढ़ संसदीय क्षेत्र से चुनकर लोकसभा पहुंचे। श्री कुमार 1990 में विश्वनाथ प्रताप सिंह सरकार में केन्द्रीय कृषि राज्य मंत्री बने। वर्ष 1991 के मध्यावधि चुनाव में वह फिर से लोकसभा के सदस्य चुने गये।</p>
<p>यही वह दौर था, जब इंजीनियर से नेता बने श्री नीतीश कुमार उभार पर आये। कभी पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव के 'छोटे भाई' के  तौर पर उनके विश्वासपात्र माने जाने वाले श्री नीतीश कुमार ने धीरे-धीरे पिछड़ी जातियों, खासकर कुर्मी-कुशवाहा समाज को अपनी तरफ खींचना शुरू कर दिया। इसके अलावा उन्होंने अति-पिछड़ा समाज (ईबीसी) के बीच भी पैठ बनायी। इस जातीय समीकरण को बिठाकर उन्होंने लालू यादव के समर्थन में खड़े यादव समुदाय की एकजुटता की काट खोजी। </p>
<p>श्री लालू प्रसाद यादव से राजनीतिक मतभेद के कारण वर्ष 1994 में जनता दल से अलग होकर श्री कुमार ने जार्ज फर्नांडीस के नेतृत्व में समता पार्टी बनाकर 1995 का विधानसभा चुनाव लड़ा तब उनकी पार्टी मात्र सात सीट पर ही जीत हासिल कर सकी। श्री कुमार ने इस हार से सबक लेते हुए लालू विरोधी मतों के विभाजन को रोकने के इरादे से वर्ष 1996 में भाजपा के साथ गठजोड़ कर लिया। उनका यह फार्मूला कामयाब रहा और उसका फायदा उन्हें आज तक मिल रहा है।</p>
<p>श्री कुमार वर्ष 1996 ,1998 और 1999 के लोकसभा चुनाव में विजयी हुए। श्री कुमार ने अटल बिहारी वाजपेयी सरकार में वर्ष 1998 में रेल मंत्री और भूतल परिवहन मंत्री का कार्य भार संभाला। 1999 में फिर बनी वाजपेयी सरकार में वह भूतल परिवहन और कृषि मंत्री बनाये गये। वर्ष 2000 के विधानसभा चुनाव में त्रिशंकु विधानसभा में उन्होंने राजग विधायक दल के नेता के रूप में मुख्यमंत्री पद की पहली बार शपथ ली, लेकिन बहुमत नहीं जुटा पाने के कारण विधानसभा में शक्ति परीक्षण से पहले ही सात दिनों के बाद उन्होंने इस्तीफा दे दिया था। </p>
<p>श्री कुमार के लिए यह बड़ा राजनीतिक झटका था।उसके बाद वह फिर से केन्द्र की राजनीति में लौट गये और वर्ष 2000 से लेकर 2004 तक वाजपेयी सरकार में मंत्री और रेल मंत्री रहे। 2004 के लोकसभा चुनाव में श्री कुमार ने दो सीटों से चुनाव लड़ा जिसमें वह बाढ़ से चुनाव हार गये लेकिन नालंदा सीट से विजयी हुए। उस साल केन्द्र में संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (संप्रग) की सरकार बनने के बाद श्री कुमार ने अपने आप को पूरी तरह बिहार की राजनीति पर केन्द्रित कर लिया। </p>
<p>फरवरी 2005 में जब विधानसभा का चुनाव हुआ तब किसी भी दल को बहुमत नहीं मिला और कोई भी दल सरकार बनाने में सफल नहीं रहा। नवम्बर 2005 में दुबारा हुए चुनाव में श्री कुमार के नेतृत्व वाले राजग को स्पष्ट बहुमत मिल गया और वह दूसरी बार मुख्यमंत्री बने। सीएम के रूप में विकास पुरुष की छवि बना चुके श्री कुमार के नेतृत्व में जब राजग ने 2010 का विधानसभा चुनाव लड़ा तो उसे दो-तिहाई बहुमत हासिल हुआ। श्री कुमार ने तीसरी बार मुख्यमंत्री पद की जिम्मेवारी संभाली। उन्होंने 2014 के लोकसभा चुनाव के लिए श्री नरेन्द्र मोदी को प्रधानमंत्री के उम्मीदवार के तौर पर पेश किये जाने की कोशिशों के विरोध में भाजपा से 17 साल पुराना अपना नाता तोड़कर एक बड़ा राजनीतिक जोखिम उठाया। </p>
<p>भाजपा से नाता टूटने के बाद अल्पमत में आयी अपनी सरकार को उन्होंने निर्दलीय और अन्य दलों के बाहर से समर्थन के बल पर किसी तरह से बचा कर रखा। इसके बाद जब वर्ष 2014 का लोकसभा चुनाव हुआ तो श्री कुमार की पार्टी जदयू को करारी हार का सामना करना पड़ा। इस हार की नैतिक जिम्मेवारी लेते हुए उन्होंने 17 मई 2014 को मुख्यमंत्री के पद से इस्तीफा दे दिया और अपने भरोसेमंद नेता जीतन राम मांझी को मुख्यमंत्री बनवा दिया, लेकिन छह माह के अंदर ही श्री कुमार को लगने लगा कि उन्होंने श्री मांझी को मुख्यमंत्री बनाकर एक बड़ी राजनीतिक भूल कर दी। करीब 15 दिनों के राजनीतिक ड्रामे के बाद श्री मांझी ने इस्तीफा दिया और 22 फरवरी 2015 को श्री कुमार ने चौथी बार मुख्यमंत्री का पद संभाला।</p>
<p>बिहार में 2015 का विधानभा चुनाव कई मायनों में थोड़ा अलग और दिलचस्प था। वर्षों के सहयोगी भाजपा और जदयू इस बार फिर जुदा हो गये थे और 20 साल बाद दो पुराने दोस्त लालू प्रसाद यादव और श्री नीतीश कुमार साथ आ गये थे। श्री लालू प्रसाद और श्री नीतीश कुमार के इस महागठबंधन में कांग्रेस भी शामिल थी। वर्ष 2015 के विधानसभा चुनाव चुनाव के नतीजे आने पर राष्ट्रीय जनता दल ( राजद) 80 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी थी। </p>
<p>इसके बाद जदयू को 71 और कांग्रेस को 27 सीटें मिली थीं। इस चुनाव में महागठबंधन की सरकार बनी और श्री नीतीश कुमार पांचवी बार मुख्यमंत्री बने। इस बार श्री कुमार की सरकार करीब 20 महीने ही चल पाई। दरअसल सरकार के कार्यों में राजद अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव का बढ़ते हस्तक्षेप की वजह से पहले से ही असहज महसूस कर रहे श्री कुमार को राजद से नाता तोडऩे का तब बहाना मिल गया जब लालू परिवार के खिलाफ मंत्री पद और सरकारी नौकरी के बदले जमीन-फ्लैट लिखवाने का मामला भाजपा नेता सुशील कुमार मोदी ने उजागर किया तथा रेलवे टेंडर घोटाला की जांच शुरू हुई। </p>
<p>इस पर श्री कुमार ने उप मुख्यमंत्री तेजस्वी प्रसाद यादव से जनता के समक्ष स्थिति स्पष्ट करने को कहा, लेकिन जब उन्होंने ऐसा नहीं किया तो श्री कुमार ने 26 जुलाई 2017 को महागठबंधन से नाता तोड़ते हुए मुख्यमंत्री के पद से इस्तीफा भी दे दिया। इसके बाद तुरंत भाजपा ने श्री कुमार को समर्थन देने की घोषणा कर दी और 24 घंटे के अंदर ही श्री कुमार ने छठी बार बिहार के मुख्यमंत्री पद की शपथ ली। इसके साथ ही फिर से बिहार में राजग सरकार की वापसी हो गयी।</p>
<p>वर्ष 2020 में एक बार फिर श्री नीतीश कुमार के नेतृत्व में राजग की सरकार बनी। श्री नीतीश सातवीं बार मुख्यमंत्री बने। अगस्त 2022 में हालांकि घटनाक्रम तेजी से बदले और श्री नीतीश कुमार ने राजग से अलग होने का फैसला कर लिया। श्री कुमार एक बार फिर महागठबंधन में शामिल हो गये और उनके नेतृत्व में नयी सरकार बनी। श्री कुमार आठवीं बार मुख्ममंत्री बने। श्री नीतीश कुमार महागठबंधन में गये लेकिन 17 माह में ही असहज महसूस करने लगे। जनवरी 2024 के आते-आते स्थितियां फिर से बदलने लगीं और नीतीश फिर से राजग में वापस लौट आये। श्री कुमार नवीं बार मुख्यमंत्री बने।</p>
<p>चौहत्तर साल के श्री नीतीश कुमार अपनी राजनीति का उफान देख चुके हैं। मुख्यमंत्री पद की दसवीं बार जिम्मेवारी संभालने जा रहे श्री कुमार ने अपने संघर्षपूर्ण जीवन में अब तक अपनी शर्तों पर ही राजनीति की है।   </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 20 Nov 2025 15:00:33 +0530</pubDate>
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                <title>दिल्ली विस्फोट को लेकर एससीओ बैठक में बोले एस जयशंकर, दिया कड़ा संदेश</title>
                                    <description><![CDATA[रूस में एससीओ शिखर सम्मेलन के दौरान विदेश मंत्री एस जयशंकर ने वैश्विक समुदाय को आतंकवाद पर शून्य सहनशीलता अपनाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि आतंकवाद न उचित ठहराया जा सकता है, न छुपाया जा सकता है। भारत अपने नागरिकों की सुरक्षा के लिए आवश्यक कदम उठाता रहेगा।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/s-jaishankar-gave-a-strong-message-in-sco-meeting-regarding/article-132906"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-11/11-(700-x-400-px)-(4).png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। विदेश मंत्री एस जयशंकर ने मंगलवार को रूस में शंघाई सहयोग संगठन शिखर सम्मेलन में आतंकवाद पर दुनिया को कड़ा संदेश दिया। उन्होंने कहा कि दुनिया को इस खतरे के सभी रूपों और अभिव्यक्तियों के प्रति शून्य सहनशीलता दिखानी चाहिए। उन्होंने कहा आतंकवाद के मामले में न कोई लीपापोती न कोई बहाना होना चाहिए। उन्होंने कहा कि आतंकवाद को कोई औचित्य नहीं दिया जा सकता, उसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता, और न ही उसे छुपाया जा सकता है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि भारत को आतंकवाद के खिलाफ अपने लोगों की रक्षा करने का अधिकार है और वह इसका प्रयोग करेगा।</p>
<p><strong>आतंकवाद को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता</strong></p>
<p>भारत की सामूहिक और बिना किसी समझौते वाली कार्रवाई की मांग दोहराते हुए, उन्होंने एससीओ नेताओं से कहा कि आतंकवाद का मुकाबला साझा प्राथमिकता बनी रहनी चाहिए और इसमें सहिष्णुता के लिए कोई जगह नहीं होनी चाहिए। यह जरूरी है कि दुनिया आतंकवाद के सभी रूपों और अभिव्यक्तियों के प्रति शून्य सहिष्णुता दिखाए।  आतंकवाद को न तो उचित ठहराया जा सकता है, न ही नजरअंदाज किया जा सकता है, न ही उसे छुपाया जा सकता है।</p>
<p><strong>भारत को आतंकवाद के खिलाफ अपने लोगों की रक्षा का अधिकार</strong></p>
<p>उन्होंने कहा कि आतंकवाद को कोई औचित्य नहीं दिया जा सकता, इससे मुंह नहीं मोड़ा जा सकता, इसपर लीपापोती नहीं की जा सकती है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि भारत को आतंकवाद के खिलाफ अपने लोगों की रक्षा करने का अधिकार है और वह इसका प्रयोग करेगा।</p>
<p><strong>तीन दिवसीय यात्रा पर रूस गए हैं एस जयशंकर</strong></p>
<p>बता दें कि विदेश मंत्री एस जयशंकर अपनी तीन दिवसीय यात्रा पर एससीओ समिट में रूस की राजधानी मॉस्को पहुंचे हैं। एससीओ राष्ट्राध्यक्ष परिषद की बैठक में भाग ले रहे हैं और अगले महीने राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की नई दिल्ली की संभावित यात्रा से पहले कई उच्च-स्तरीय बैठकें कर रहे हैं। इस बैठक में आतंकवाद को भारत ने बड़ा मुद्दा बनाया है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 19 Nov 2025 12:04:29 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>दिल्ली धमाके के बाद 2 कोर्ट और स्कूलों को आया थ्रेट कॉल, पुलिस प्रशासन में हड़कंप, तलाशी जारी</title>
                                    <description><![CDATA[लाल किला कार ब्लास्ट के बाद दिल्ली में फिर दहशत फैल गई है। आज तीस हजारी कोर्ट, साकेत कोर्ट, प्रह्लादपुर विहार स्थित सीआरपीएफ स्कूल और कई निजी स्कूलों को बम से उड़ाने की धमकी मिली। जैश-ए-मोहम्मद के नाम से आए मेल के बाद पुलिस और CRPF ने हाई अलर्ट जारी कर सर्च ऑपरेशन शुरू किया, हालांकि अब तक कोई संदिग्ध वस्तु नहीं मिली है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/after-delhi-blast-threat-call-received-to-2-courts-and/article-132810"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-11/delhi-bomb.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। दिल्ली में लाल किला कार ब्लास्ट के बाद आज फिर से दिल्ली के तीस हजारी कोर्ट और साकेत कोर्ट को बम से उड़ाने की धमकी मिली हैं, इसके साथ ही, दिल्ली के प्रशात विहार के सीआरपीएफ स्कूल और अन्य प्राइवेट स्कूल ​को भी बम से उड़ाने की धमकी मिली है, जिसके बाद पुलिस महकमें हड़कंम मच गया है। दिल्ली पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार, धमकी भरा मेल जैश-ए- मोहम्मद के नाम से भेजा गया है। बम की सूचना मिलने के बाद पुलिस प्रशासन आनन फानन में सभी मौकों पर पहुंची ओर सर्च अभियान शुरू किया लेकिन अभी तक जांच में कुछ संदिग्ध वस्तु मिलने की खबर सामने नहीं आ रही है। </p>
<p><strong>सुबह मिले थे धमकी भरे ईमेल</strong></p>
<p>दिल्ली पुलिस ने जानकारी देते हुए बताया कि, आज सुबह धमकी भरे मेल मिले थे जिसके बाद हमने सभी मौकों पर सर्च अभियान शुरू कर दिया है लेकिन अभी तक कोई भी संदिग्ध वस्तु मिलने की पुष्टि नहीं हुई है। इसके साथ पुलिस ने ये भी बताया है कि, आज सुबह जिस स्कूल को धमकी भरा मेल आया है उसे इससे पहले भी धमकी भरा मेल आ चुका है।</p>
<p><strong>पुलिस-CRPF ने बढ़ाया जांच का दायरा</strong></p>
<p>आपकी जानकारी के बता दें कि, दिल्ली लाल किला में कार ब्लास्ट के बाद दिल्ली हाई अलर्ट मोड़ पर है और जगह जगह सीआरपीएफ की टीम जांच कर रही है और इतना ही नहीं, हर आने जाने वाली गाड़ियों की चेकिंग भी की जा रही है। साथ ही बता दें कि, हाल ही में 10 नवंबर को लाल किला के पास में कार ब्लास्ट हुआ था जिसमें करीब 10 गाड़ियां चपेट में आ गई थी और करीब 15 लोगों की मौत हो गई थी इसके अलावा करीब 25 से ज्यादा लोग घायल हो गए थे, जिसका अस्पताल में इलाज चल रहा है। फिलहाल, इस मामले में एनआईए की टीम जांच कर रही है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 18 Nov 2025 12:52:04 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>आखिर कौन है ये ​शख्स, जिसने आरजेडी को दिया था 25 सीटों का श्राप? सच साबित हुई बात</title>
                                    <description><![CDATA[RJD नेता मदन शाह ने कहा कि टिकट न मिलने के आघात ने उन्हें टूटने पर मजबूर किया और ग़ुस्से में उन्होंने पार्टी को 25 सीटों पर सिमटने का श्राप दिया, जो सच साबित हुआ। शाह ने आरोप लगाया कि टिकट वितरण में लालू यादव की सलाह नहीं ली गई और आंतरिक गुटबाज़ी ने पार्टी को कमजोर किया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/after-all-who-is-this-person-who-gave-the-curse/article-132681"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-11/madan.png" alt=""></a><br /><p>पटना। राष्ट्रीय जनता दल के नेता मदन शाह, जो पिछले महीने टिकट न मिलने पर अपने कपड़े फाड़कर और जमीन पर गिरकर रोते नजर आए थे, उन्होंने बिहार विधानसभा चुनाव में महागठबंधन के बुरे प्रदर्शन पर प्रतिक्रिया दी है। मदन शाह ने कहा, टिकट नहीं मिलने के दर्द ने उन्हें पागल बना दिया था। मैं पटना में लालू यादव से मिलने गया था, लेकिन कोई मिला नहीं। मैं इतना आहत था कि कपड़े फाड़ दिए। जमीन पर गिर पड़ा और श्राप दे दिया कि उनकी पार्टी 25 सीटों पर सिमट जाएगी, और वाकई ऐसा हो गया।</p>
<p>मदन शाह ने कहा, मैं अब भी पार्टी के लिए दुखी हूं। पार्टी की हार से मुझे दर्द है, लेकिन जो भगवान करता है, अच्छा करता है। पार्टी में जो चाणक्य कहलाते हैं, वे पार्टी को बर्बाद करने पर तुले हैं। जब तक उन्हें पार्टी से नहीं निकाला जाएगा, कुछ सुधार नहीं होगा। इस बार टिकट वितरण में लालू यादव से सलाह नहीं ली गई। इसलिए पार्टी को यह मुकाम मिला। टिकट के लिए पैसे मांगे जाने के सवाल पर मदन शाह ने कहा कि उनसे सीधे किसी ने ऐसी कोई डिमांड नहीं की थी।</p>
<p><strong>पार्टी के लिए काम करता हूं तो पैसे क्यों दूंगा?</strong></p>
<p>उन्होंने कहा, मुझसे पैसे सीधे नहीं मांगे गए (टिकट के बदले); यह मीडिया के जरिए किया गया। तो मैं पैसे कहां देता? सड़क पर तो फेंक नहीं सकता था। मैं 1990 से पार्टी के साथ जुड़ा हूं, कार्यकर्ता हूं, पार्टी के लिए काम करता हूं। टिकट के लिए क्यों पैसे दूंगा और कहां से दूंगा? मधुबन से ऐसे व्यक्ति को टिकट दिया गया जो पार्टी का प्राथमिक सदस्य तक नहीं था। सरकारी डॉक्टर है, उसने इस्तीफा तक नहीं दिया था. अपनी पत्नी संध्या रानी के नाम पर फिर टिकट लिया।</p>
<p>मदन शाह ने कहा कि मुझे लालू यादव ने आश्वासन दिया था कि मदन तैयारी करो तुमको टिकट देंगे। तेजस्वी यादव ने भी कहा था। <br />मैं क्षेत्र में पूरे दमखम से लगा था, टिकट की जिस दिन घोषणा होनी थी 2 बजे तक मुझसे कहा गया कि टिकट आपको मिलेगा, लेकिन जब लिस्ट आई तो मेरा नाम नहीं था। मुझे इतना दुख हुआ, मैं पटना में लालू यादव के आवास के बाहर जमीन पर लोटता रहा, लेकिन मुझे किसी से मिलने नहीं दिया गया। उन्होंने संजय यादव पर निशाना साधते हुए कहा कि उनकी वजह से ही राजद की चुनाव में ये दुर्गती हुई है। शाह ने कहा कि जब तक संजय यादव को पार्टी से बाहर नहीं निकाला जाता, हालात नहीं सुधरेंगे।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 17 Nov 2025 12:04:23 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>बवाल करा कमाई कर रहे ट्रंप, अगस्त से अब तक 8.2 करोड़ डॉलर के बॉन्ड खरीदे</title>
                                    <description><![CDATA[अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अगस्त से अक्टूबर की शुरुआत तक 8.2 करोड़ डॉलर के कॉर्पोरेट और म्यूनिसिपल बॉन्ड खरीदे। वित्तीय दस्तावेजों में खुलासा हुआ कि इनमें वे निवेश भी शामिल हैं जो उनकी नीतियों से लाभान्वित हुए। 175 से अधिक खरीदारियों की जानकारी सामने आई।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/trump-who-is-making-money-by-creating-chaos-has-bought/article-132676"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-02/donald-trump.png" alt=""></a><br /><p>वॉशिंगटन। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अगस्त के अंत से अक्टूबर की शुरूआत तक कम से कम 8.2 करोड़ डॉलर के कॉपोर्रेट और म्यूनिसिपल बॉन्ड खरीदे हैं। इनमें उनकी कथित नीतियों से लाभान्वित होकर पैसे कमाने वाले निवेश भी शामिल हैं। इसका खुलासा शनिवार को सार्वजनिक किए गए फाइनेंशियल डिटेल से हुई है।</p>
<p>यह खुलासा इसलिए भी अहम है, क्योंकि ट्रंप ने राष्ट्रपति बनने के बाद पूरी दुनिया में व्यापार युद्ध छेड़ा हुआ है। ऐसे आरोप हैं कि इसका फायदा उनके परिवार को हुआ है, जिनकी संपत्ति इस दौरान कई गुना बढ़ गई है। अमेरिकी सरकारी नैतिकता कार्यालय से जारी किए गए कागजातों के अनुसार, ट्रंप ने 28 अगस्त से 2 अक्टूबर तक 175 से ज्यादा वित्तीय खरीदारियां कीं। 1978 के पारदर्शिता कानून को सरकारी नैतिकता अधिनियम भी कहा जाता है।  इसके तहत किए गए ये खुलासे प्रत्येक खरीद के लिए सटीक राशि का उल्लेख नहीं करते हैं, केवल एक विस्तृत सीमा तक जानकारी प्रदान करते हैं। दस्तावेजों के अनुसार, बॉन्ड खरीद का अधिकतम कुल मूल्य 33.7 करोड़ डॉलर से अधिक था।</p>
<p><strong>ट्रंप ने उन बॉन्डों को खरीदा, जिनको उनकी नीतियों से फायदा हुआ</strong></p>
<p>शनिवार के खुलासे में सूचीबद्ध अधिकांश संपत्तियां नगरपालिकाओं, राज्यों, काउंटियों, स्कूल जिलों और सार्वजनिक एजेंसियों से जुड़ी अन्य संस्थाओं द्वारा जारी किए गए बॉन्ड हैं। ट्रंप के नए बॉन्ड निवेश कई उद्योगों में फैले हुए हैं, जिनमें वे क्षेत्र भी शामिल हैं जो पहले ही उनके प्रशासन के नीतिगत बदलावों, जैसे वित्तीय विनियमन में ढील, से लाभान्वित हो चुके हैं या लाभान्वित हो रहे हैं।</p>
<p><strong>ट्रंप ने ये कॉपोर्रेट बॉन्ड खरीदे</strong></p>
<p>ट्रंप के खरीदे गए कॉपोर्रेट बॉन्ड में ब्रॉडकॉम और क्वालकॉम, जैसी चिप निमार्ता कंपनियों के बॉन्ड शामिल हैं। इसके अलावा मेटा प्लेटफॉर्म्स, जैसी तकनीकी कंपनियां; होम डिपो, और उश्र हेल्थ, जैसी रिटेल कंपनियां; और गोल्डमैन सैक्स, और मॉर्गन स्टेनली, जैसे वॉल स्ट्रीट बैंक शामिल हैं।</p>
<p><strong>जेपी मॉर्गन और इंटेल के विवादित बॉन्ड भी शामिल</strong></p>
<p>अगस्त के अंत में निवेश बैंकों के ऋण की खरीद में जेपी मॉर्गन के बॉन्ड शामिल थे। शुक्रवार को, ट्रंप ने अमेरिकी न्याय विभाग से दिवंगत फाइनेंसर और दोषी यौन अपराधी जेफरी एपस्टीन के साथ जेपी मॉर्गन के संबंधों की जांच करने को कहा। बैंक ने कहा है कि उसे एपस्टीन के साथ अपने पिछले संबंधों पर पछतावा है और उसने उसे घृणित कृत्य करने में मदद नहीं की। ट्रंप ने अपने खुद के फैसले से अमेरिकी सरकार द्वारा इंटेल कंपनी में हिस्सेदारी खरीदने के बाद उसके बॉन्ड भी खरीदे हैं।</p>
<p><strong>ट्रंप प्रशासन ने सफाई में क्या कहा</strong></p>
<p>व्हाइट हाउस ने शनिवार को टिप्पणी के अनुरोध का तुरंत जवाब नहीं दिया। प्रशासन ने पहले कहा था कि ट्रंप अपने निवेशों के बारे में अनिवार्य खुलासे जारी कर रहे हैं, लेकिन न तो उनकी और न ही उनके परिवार की इस पोर्टफोलियो को चलाने में कोई भूमिका है, जिसका प्रबंधन एक तीसरे-पक्ष वित्तीय संस्थान द्वारा किया जाता है। राजनीति में आने से पहले रियल एस्टेट क्षेत्र के टाइकून ट्रंप ने पहले कहा था कि उन्होंने अपनी कंपनियों को अपने बच्चों की देखरेख वाले एक ट्रस्ट में रखा है।</p>
<p><strong>बॉन्ड से ट्रंप को हो रही कमाई</strong></p>
<p>अगस्त में दायर एक खुलासे से संकेत मिलता है कि 20 जनवरी को राष्ट्रपति बनने के बाद से ट्रंप ने 10 करोड़ डॉलर से अधिक के बॉन्ड खरीदे हैं। ट्रंप ने जून में अपना वार्षिक प्रकटीकरण फॉर्म भी जमा किया था, जिसमें संकेत दिया गया था कि उनके विभिन्न उपक्रमों से होने वाली आय अंत में उन्हें ही मिलती है, जिससे संभावित हितों के टकराव की चिंताएं बढ़ गई हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 17 Nov 2025 11:46:50 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>छत्तीसगढ़ में पहाड़ी इलाके में सुरक्षाबलों की नक्सलियों से मुठभेड़ : 3 माओवादी ढेर, मिलिशिया कमांडर माड़वी देवा भी ढ़ेर</title>
                                    <description><![CDATA[भेज्जी–चिंतागुफा सीमा के तुमालपाड़ जंगल में सुरक्षा बलों और माओवादियों के बीच मुठभेड़ में तीन नक्सली, जिनमें दो महिलाएं शामिल हैं, मारे गए। पुलिस ने हथियार और गोला-बारूद बरामद किया। मारे गए सभी पर पाँच लाख का इनाम था। क्षेत्र में तलाशी अभियान जारी है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/encounter-between-security-forces-and-naxalites-in-the-hilly-area/article-132630"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-11/sukma.png" alt=""></a><br /><p>सुकमा। छत्तीसगढ़ के सुकमा जिले के भेज्जी और चिंतागुफा थाना क्षेत्रों की सीमा पर स्थित तुमालपाड़ के जंगल और पहाड़ी इलाके में  मुठभेड़ में तीन माओवादी मारे गए हैं। पुलिस अधीक्षक कार्यालय से मिली जानकारी के मुताबिक मारे गए माओवादियों में दो महिलाएं भी शामिल हैं। मौके से पुलिस को थ्री नॉट थ्री रायफल, बीजीएल लांचर और भारी मात्रा में गोला-बारूद सहित अन्य सामग्री भी मिली है।</p>
<p>सुकमा पुलिस अधीक्षक किरण चव्हाण ने कि यह मुठभेड़ सुबह शुरु हुयी थी और रविवार सुबह सूचना के आधार पर तलाशी अभियान शुरू किया। उन्होंने बताया कि मुठभेड़ स्थल से अब तक माओवादी कैडरों के तीन शव बरामद किए गए हैं। क्षेत्र में अभी भी सुरक्षा बलों की तलाशी जारी है। मारे गए माओवादियों की पहचान माड़वी देवा, पोड़यिम गंगी और सोड़ी गंगी के रूप में हुई है। माड़वी देवा जनमिलिशिया कमांडर, स्नाइपर स्पेशलिस्ट और कोंटा एरिया कमेटी सदस्य था और उस पर पांच लाख रुपये का इनाम घोषित था। पोड़यिम गंगी कोंटा एरिया कमेटी की कमांडर थी, जबकि सोड़ी गंगी किस्टाराम एरिया कमेटी की सदस्य थी। दोनों महिला माओवादियों पर भी पांच - पांच लाख रुपये का इनाम था।</p>
<p>बस्तर रेंज के पुलिस महानिरीक्षक सुन्दरराज पट्टङ्क्षलगम ने कहा कि हाल की लगातार कार्रवाइयों ने माओवाद की कमर तोड़ी है। उन्होंने कहा कि माओवादी संगठन अब अपने अंतिम चरण में है। हिंसा छोड़ पुनर्वास नीति अपनाने के अलावा उनके पास कोई विकल्प नहीं बचा है। उन्होंने बताया कि वर्ष 2025 में अब तक बस्तर रेंज में विभिन्न स्तरों के 233 माओवादी मारे जा चुके हैं, जो माओवादी ढांचे की निर्णायक कमजोरी को दर्शाता है। सुरक्षा बलों द्वारा व्यापक तलाशी अभियान जारी है। अधिकारियों ने बताया कि ऑपरेशन पूर्ण होने के बाद विस्तृत रिपोर्ट पृथक जारी की जाएगी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 16 Nov 2025 16:37:56 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>अमेरिका में महंगाई ने तोड़ें रिकॉर्ड! ट्रंप ने जरूरी सामानों पर घटाया टैरिफ, भारतीय निर्यातकों के लिए खुश खबरी</title>
                                    <description><![CDATA[अमेरिका में बढ़ती महंगाई और जनता के बढ़ते विरोध के बीच राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कई आवश्यक वस्तुओं पर टैरिफ हटाने का निर्णय लिया। मांस, कॉफी, चाय, मसाले और अन्य कृषि उत्पाद अब सस्ते होंगे। फैसले से अमेरिकी उपभोक्ताओं को राहत और भारतीय निर्यातकों को नए व्यापारिक अवसर मिलने की उम्मीद है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/inflation-breaks-records-in-america-trump-reduces-tariffs-on-essential/article-132622"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-10/220922-donald-trump-mjf-1544-99e118.jpg" alt=""></a><br /><p>अमेरिका। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का टैरिफ दांव अब उल्टा पड़ता नजर आ रहा है, क्योंकि अमेरिका में महंगाई ने सभी रिकॉर्ड तोड़ दिए है, जिससे आम जनता को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है और अब आलम ये है कि ट्रंप के फैसले को लेकर अमेरिकी जनता भारी विरोध कर सकती है। इसी बीच अब खबर सामने आ रही है कि, ट्रंप प्रशासन ने कई जरूरी सामानों पर टैरिफ घटाने का ऐलान किया है जिसके तहत अब मांस, कॉफी, टमाटर, केले, चाय, फलों के रस, कोको, मसालों, संतरे और कुछ उर्वरकों पर भी शुल्क हटा दिया गया है। इसके अलावा ट्रंप प्रशासन ने कई अन्य कृषि आयातित वस्तुओं पर भी शुल्क हटाने का फैसला किया है। डोनाल्ड ट्रंप के इस फैसले के पीछे वर्जीनिया, न्यू जर्सी और अन्य प्रमुख चुनावों में डेमोक्रेटिक पार्टी की जीत में योगदान देना बताया जा रहा है। </p>
<p><strong>अमेरिकियों का घर खर्च का बजट बढ़ा</strong></p>
<p>बता दें कि, अप्रैल में ट्रंप प्रशासन की तरफ से पूरी दुनिया भर में टैरिफ लगाने की घोषणा के बाद से आलोचना हो रही है क्योंकि इसके कारण अमेरिका में जो जरूरत की वस्तुएं है उनकी कीमतें बढ़ गई है और इसका खामियाजा अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को उठाना पड़ रहा है। </p>
<p><strong>भारतीय आम, चाय और मसालों के लिए अच्छी खबर</strong></p>
<p>डोनाल्ड ट्रंप का ये फैसला भारतीय निर्याताकों के लिए भी एक अच्छी खबर साबित होगा क्यों इस फैसले के बाद कृषि व्यापार में नए नए अवसर खुलेंगे। इतना ही नहीं, अमेरिका में भारतीय आम, चाय और मसालों के निर्यात में भी भारी बढ़ोतरी हो सकती है। फिलहाल, अमेरिकी परिवारों के लिए बढ़ती खाद्य कीमतें परेशानी का सबब बनी हुई है। बताया जा रहा है कि, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के द्वारा टैरिफ छूट का मुख्य उद्देश्य रोजमर्रा की वस्तुओं की कीमत में कमी करने में मदद करेगा। हालांकि, विशेषज्ञों के अनुसार आपूर्ति की कमी होने पर कॉफी और बीफ की कीमतों में काफी असर पड़ेगा।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 16 Nov 2025 15:57:51 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>मेक्सिको सिटी में भड़का Gen Z आंदोलन! भ्रष्टाचार, हिंसा और मेयर की हत्या पर हजारों युवाओं का उग्र प्रदर्शन</title>
                                    <description><![CDATA[मेक्सिको सिटी में Gen Z ने राष्ट्रपति क्लाउडिया शीनबाम की नीतियों, बढ़ते भ्रष्टाचार और अपराध के विरोध में massive प्रदर्शन किया। मेयर कार्लोस मंजों की हत्या से आक्रोश बढ़ा। विपक्षी दल भी आंदोलन में शामिल हुए। युवाओं का कहना है—अब अन्याय और सरकारी नाकामी के खिलाफ आवाज तेज होगी।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/gen-z-movement-flares-up-in-mexico-city-thousands-of/article-132596"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-11/us.png" alt=""></a><br /><p>मेक्सिको। हाल ही में, नेपाल की सड़कों पर Gen Z ने जबरदस्त प्रदर्शन किया था और पूरा का पूरा नेपाल जल उठा था, लेकिन अब अमेरिका के पड़ोसी देश मेक्सिको सिटी में हजारों लोग सरकार ​के खिलाफ प्रदर्शन पर उतरे हुए हैं। दरअसल, Gen Z राष्ट्रपति क्लाउडिया शीनबाम की नीतियों, बढ़ते भ्रष्टाचार और अपराध तथा सरकारी नाकामी से काफी निराश है, जिसके चलते उन्होंने इस प्रकार का कदम उठाया है। इस दौरान युवा कार्यकर्ताओं ने अपने साथ कई विपक्षी दलों को भी शामिल कर लिया है जिससे ये प्रदर्शन काफी उग्र हो गया है। </p>
<p>बता दें कि, युवा कार्यकर्ताओं का मुख्य उद्देश्य मेयर कार्लोस मंजों की हत्या और सरकार की नाकामी के खिलाफ आवाज उठाना था। मेक्सिको का ये प्रदर्शन ये संदेश देना चाहता है कि, अब युवा वर्ग अपनी आवाज को मजबूती से बुलंद कर रहा है और अन्याय के खिलाफ बिल्कुल भी सिर झुका कर नहीं रहेगा।</p>
<p><strong>रैली का मकसद</strong></p>
<p>दरअसल, युवा कार्यकर्ताओं का कहना है कि, रैली का मकसद भ्रष्टाचार और हिंसा के खिलाफ आवाज उठाना है ना सिर्फ मेयर की हत्या पर भी विरोध जताना। Gen Z के इस प्रदर्शन पर राष्ट्रपति शीनबाम ने अपनी प्रति​क्रिया देते हुए कहा है कि, दक्षिणपंथी पार्टियां इसे अपनी राजनीतिक साजिश के तहत भड़का रही हैं ताकि सरकार का नाम और काम दोनों खराब हो सके। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 16 Nov 2025 13:27:36 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>रोहिणी आचार्य का बड़ा ऐलान, ‘मैं राजनीति छोड़ रही हूं…’ पारिवारिक कलह हुई उजागर!</title>
                                    <description><![CDATA[बिहार चुनाव में एनडीए की करारी हार के बाद राजनीति में हलचल बढ़ गई है। चुनाव परिणाम के अगले दिन लालू प्रसाद यादव की बेटी रोहिणी आचार्य ने हार की जिम्मेदारी लेते हुए राजनीति से संन्यास की घोषणा कर दी। उन्होंने संजय यादव और रमीज के दबाव का आरोप भी लगाया। आरजेडी ने इसे पारिवारिक मामला बताया, जबकि बीजेपी ने इसे लालू परिवार की कलह का खुला सच करार दिया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/lalu-yadavs-daughter-rohini-acharyas-big-announcement-i-am-leaving/article-132547"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-11/rohini.png" alt=""></a><br /><p>पटना। बिहार विधानसभा चुनाव में एनडीए से करारी शिकस्त के बाद बिहार की राजनीति एक बार फिर गर्म हो गई है। चुनाव परिणाम के ठीक अगले ही दिन लालू प्रसाद यादव की बेटी रोहिणी आचार्य ने चुनाव में हार की पूरी जिम्मेदारी लेते हुए राजनीति से संन्यास लेने का ऐलान कर दिया। इस बात की पुष्टि रोहिणी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट के माध्यम से की। इतना ही नहीं, रोहिणी ने ये दावा भी किया है कि, उन्होंने ये कदम संजय यादव और रमीज के दबाव में आकर उठाया है। अब आरजेडी के खेमे में उनके इस बयान ने हलचल मचा दी है। रोहिणी के इस कदम से पारिवारिक कलह की बात उजागर हो रही है जिससे पार्टी की मुश्किलें और भी बढ़ सकती है।</p>
<p>रोहिणी आचार्य के इस बयान के बाद आरजेडी ने अपना बयान जारी करते हुए कहा कि, ये हमारा पारिवारिक मामला है और इसमें किसी को दखल देने की आवश्यकता नहीं है। रोहिणी आचार्य के इस फैसले के बाद भाजपा नेता प्रदीप भंडारी ने आरजेडी पर हमला बोलते हुए कहा कि, ऐसा लग रहा है शायद पीएम मोदी की ''परिवार बनाम परिवार'' वाली भविष्यवाणी अब सच साबित हो रही है और आरजेडी का आंतरिक कलह अब सबके सामने आ चुका है। </p>
<p>हालांकि, लालू परिवार में काफी समय से जिस तरह की राजनीतिक घटनाएं हो रही है उससे तो ये बात बिल्कुल साफ हो गई है कि आरजेडी में कुछ भी सही नहीं है। क्योंकि इससे पहले लालू यादव के बेटे ने परिवार से नाता तोड़ते हुए अपनी खुद की नई पार्टी जनशक्ति जनता दल बनाई थी और महुआ सीट से चुनाव लड़ा था लेकिन उनको इस सीट पर हार का सामना करना पड़ा था। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 15 Nov 2025 16:57:03 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>बिहार चुनाव 2025: आखिर कैसे चिराग पासवान बने एनडीए की ऐतिहासिक जीत में सबसे बड़े गेमचेंजर? जानें</title>
                                    <description><![CDATA[बिहार चुनाव 2025 में एनडीए की बड़ी जीत में चिराग पासवान की लोजपा (आर) महत्वपूर्ण कारक बनी। 19 सीटें जीतकर उन्होंने पासवान वोटरों का व्यापक ट्रांसफर गठबंधन के पक्ष में कराया। मोदी के चिराग भाई संबोधन, नीतीश-चिराग मेल-मिलाप और डिजिटल कैंपेन ने एनडीए को निर्णायक बढ़त दिलाई।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/chirag-paswan-is-the-architect-of-ndas-victory-in-bihar/article-132484"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-09/chirag-paswan.png" alt=""></a><br /><p>पटना। बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में एनडीए की ऐतिहासिक जीत में चिराग पासवान एक प्रमुख कारक बनकर उभरे। लोजपा (आर) को करीब 19 सीटें मिली हैं, जबकि उन्हें 29 सीटों पर टिकट मिला था। 2020 की तुलना में यह बड़ा सुधार था, जब लोजपा केवल एक सीट जीत सकी थी। इस बार चिराग ने अपने कोर पासवान वोटरों को एनडीए के पक्ष में बड़े पैमाने पर ट्रांसफर कराया, जिससे बीजेपी और विशेषकर जेडीयू को निर्णायक लाभ मिला।</p>
<p><strong>2025 में रणनीतिक वापसी</strong></p>
<p>2020 में चिराग के बगावती रुख ने जेडीयू को भारी नुकसान पहुंचाया था और पार्टी 43 सीटों पर सिमट गई थी। पर 2025 में तस्वीर अलग थी-चिराग और नीतीश कुमार दोनों ने मेल-मिलाप कर लिया था। जिन सीटों पर 2020 में लोजपा प्रत्याशियों की वजह से जेडीयू हारी थी, उनमें इस बार जेडीयू को बढ़त दिखी। इससे साबित हुआ कि चिराग ने इस बार वोट ट्रांसफर में पूरी भूमिका निभाई।</p>
<p><strong>सीएम/डिप्टी सीएम की चर्चा</strong></p>
<p>एनडीए ने चुनाव से पहले यह माहौल बनाया कि चिराग पासवान मुख्यमंत्री या उपमुख्यमंत्री के दावेदार हो सकते हैं। इससे पासवान समुदाय में उत्साह बढ़ा और वे बड़े पैमाने पर एनडीए के साथ जुड़े। सोशल मीडिया पर चिराग के समर्थकों ने डिप्टी सीएम चिराग अभियान को वायरल कर दिया, जिसने दलित मतदाताओं को आकर्षित किया।</p>
<p><strong>मोदी का चिराग भाई संबोधन</strong></p>
<p>प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा चिराग को चिराग भाई कहना पासवान समुदाय के लिए भावनात्मक संदेश साबित हुआ। यह बयान उनके वोटरों के बीच तेजी से फैला और दलित समुदाय में यह धारणा बनी कि चिराग मोदी के भरोसेमंद साथी हैं। इससे एनडीए को 5-6% पासवान वोटों का मजबूत लाभ मिला।</p>
<p><strong>नीतीश-चिराग का मिलन</strong></p>
<p>2020 की तल्खियों के विपरीत 2025 में नीतीश कुमार और चिराग पासवान के रिश्ते बेहद सौहार्दपूर्ण थे। दोनों के सार्वजनिक मेल-मिलाप ने एनडीए के भीतर स्थिरता और एकजुटता का संदेश दिया। यह गठजोड़ महागठबंधन के लिए सबसे डेडलिएस्ट कॉम्बिनेशन साबित हुआ। केवल 29 सीटों पर लड़ने के बावजूद चिराग ने 100 से अधिक रैलियां कीं।  उनके वीडियो लगातार वायरल होते रहे। </p>
<p><strong>एनडीए की  विजय में निर्णायक भूमिका</strong></p>
<p>चिराग  ने 2025 में न सिर्फ अपनी पार्टी को मजबूत किया, बल्कि एनडीए की लैंडस्लाइड विजय में निर्णायक भूमिका निभाई। रणनीतिक गठजोड़, भावनात्मक जुड़ाव, और डिजिटल कैंपेन-इन तीनों की सफलता ने उन्हें एनडीए का गेमचेंजर बना दिया।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 15 Nov 2025 11:22:41 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>बिहार विधानसभा चुनाव :'एनडीए बड़ी बढ़त के साथ आगे', नतीजों पर शशि थरूर और अखिलेश का बयान, कहा-SIR ने किया खेल</title>
                                    <description><![CDATA[बिहार विधानसभा 2025 के शुरुआती रुझानों में NDA 200 सीटों पर आगे है, जबकि महागठबंधन 38 सीटों पर बढ़त बनाए हुए है। शशि थरूर और अखिलेश यादव ने अपील की है कि आधिकारिक नतीजों का इंतजार किया जाए और किसी भी झूठी खबर पर भरोसा न किया जाए।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/nda-with-big-lead-shashi-tharoor-and-akhilesh-yadavs-shocking/article-132410"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-11/.fggggg.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। बिहार विधानसभा 2025 के वोटों की आज सुबह 8 बजे से गिनती जारी है और रूझानों में NDA 200 सीटों पर आगे चल रही है। वहीं, महागठबंधन केवल 38 सीटों पर आगे चल रही है। बिहार विधानसभा चुनावों के रूझानों को लेकर कांग्रेस के शशि थरूर और अखिलेश ने एक्स पर पोस्ट करते हुए कहा है कि, हम सभी को चुनाव आयोग की ओर से परिणामों की घोषणा का इंतजार करना चाहिए और किसी भी झठी बातों पर भरोसा नहीं करना चाहिए। इसके आगे कांग्रेस नेता ने कहा कि, चुनाव में हार जीत कई कारणों पर निर्भर करती है।</p>
<p><strong>हार के कारणों की करनी चाहिए समीक्षा: शशि थरूर</strong></p>
<p>कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने कहा कि, हम सबको हार के कारणों की समीक्षा करनी चाहिए और उन कारणों का विस्तार से अध्ययन करना चाहिए जिससे की हमें हार मिली है। इसके आगे सांसद ने कहा कि, हम सबको अपने प्रदर्शन पर ध्यान देना होगा ताकि आने वाले समय में हम अपनी क्षमता में सुधार कर सके। कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने पार्टी को नसीदत देते हुए कहा कि, चुनावी हार जीत कई मामलों पर निर्भर करती है और हमें अपने प्रदर्शन की समग्रता पर गौर करना चाहिए।</p>
<p><strong>भाजपा दल नहीं छल :अखिलेश यादव</strong></p>
<p>बिहार विधानसभा चुनाव को लेकर अखिलेश यादव ने कहा, बिहार में जो खेल SIR ने किया है वो पश्चिम बंगाल, तमिलनाडू, यूपी और बाक़ी जगह पर अब नहीं हो पायेगा, क्योंकि इस चुनावी साज़िश का अब भंडाफोड़ हो चुका है। अब आगे हम ये खेल, इनको नहीं खेलने देंगे। CCTV की तरह हमारा ‘PPTV’ मतलब ‘पीडीए प्रहरी’ चौकन्ना रहकर भाजपाई मंसूबों को नाकाम करेगा।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 14 Nov 2025 14:37:56 +0530</pubDate>
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                <title>इंडोनेशिया में बारिश के कारण भूस्खलन : 2 लोगों की मौत, 21 लापता</title>
                                    <description><![CDATA[इंडोनेशिया में भारी बारिश के कारण सिलाकैप रीजेंसी के सिब्यूनयिंग गांव में बड़ा भूस्खलन हुआ, जिसमें 2 लोगों की मौत हो गई, 3 घायल हो गए और 21 लोग अब भी लापता हैं। यह जानकारी प्रांतीय आपदा प्रबंधन एजेंसी के आपातकालीन इकाई प्रमुख मुहम्मद चोमसुल ने दी।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/rain-causes-landslide-in-indonesia-2-dead-21-missing/article-132391"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-11/11-(1).png" alt=""></a><br /><p>जकार्ता। इंडोनेशिया के भारी बारिश के कारण हुए भूस्खलन में 2 लोगों की मौत हो गई, जबकि तीन अन्य घायल हो गए और 21 अन्य लापता हैं। एक अधिकारी ने यह जानकारी दी। प्रांतीय आपदा प्रबंधन एवं न्यूनीकरण एजेंसी की आपातकालीन इकाई के प्रमुख मुहम्मद चोमसुल के अनुसार सिलाकैप रीजेंसी के सिब्यूनयिंग गाँव में हुई भारी बारिश के कारण यह भूस्खलन हुआ। उन्होंने बताया कि भूस्खलन रिहायशी इलाकों में हुआ। दो लोगों की मौत हो गई। तीन घायल हो गए और 21 अन्य लापता हो गए हैं।</p>
<p>चोमसुल ने बताया कि लापता लोगों की तलाश और बचाव अभियान जारी है, जिसमें स्थानीय आपदा एजेंसी, स्थानीय खोज और बचाव कार्यालय, सेना और अन्य सरकारी संस्थान एवं स्वयंसेवक शामिल हैं। उन्होंने बताया कि अभियान में सहायता के लिए भारी मशीनरी तैनात की गई है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 14 Nov 2025 12:28:52 +0530</pubDate>
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