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                <title>homeless - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <title>मिडिल ईस्ट में युद्ध : परिंदे भी हुए बेघर, दूसरे देशों में ढूंढ रहे बसेरा, सर्दियों में हर साल मध्य एशिया और सेंट्रल यूरोप से कोटा आते हैं पक्षी</title>
                                    <description><![CDATA[इजरायल- ईरान युद्ध के कारण बदलना पड़ रहा पारंपरिक मार्ग।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/war-in-the-middle-east-leaves-birds-homeless--seeking-refuge-in-other-nations%E2%80%94every-winter--birds-arrive-in-kota-from-central-asia-and-central-europe/article-148841"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/1200-x-60-px)-(youtube-thumbnail)-(4)2.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। सर्दियों में कोटा के जलाशयों की रौनक बढ़ाने वाले विदेशी मेहमान परिंदों की घर वापसी का सिलसिला शुरू हो गया है। लेकिन इस बार मिडिल ईस्ट में युद्ध के चलते वह भी अपने मूल निवास पर नहीं पहुंच पा रहे हैं। बमबारी, धुआं और बढ़ते तापमान के कारण कुछ पक्षियों ने अपने पारंपरिक मार्ग बदल दिए हैं। कई पक्षी खाड़ी देशों की ओर जाने के बजाय सेंट्रल यूरोप और एशिया के ठंडे इलाकों की ओर रुख कर रहे हैं। फिर भी हर साल की तरह इस बार भी अप्रैल तक कोटा के जलाशय इन मेहमान परिंदों से खाली हो जाएंगे।दो दर्जन से अधिक प्रजातियों के ये पक्षी हर साल कोटा जिले के जलाशयों में चार से पांच महीने तक प्रवास करते हैं और यहां के मौसम व भोजन के अनुकूल वातावरण में रहते हैं। मार्च के अंत और अप्रैल की शुरुआत से इन पक्षियों की वापसी तेज हो जाती है। इस समय जलाशयों से पक्षियों के बड़े-बड़े झुंड उड़ते हुए दिखाई दे रहे हैं। अप्रैल तक मेहमान व मेजबान पक्षी एक बार फिर बिछुड़ जाएंगे।</p>
<p><strong>इजरायल- ईरान युद्ध के कारण बदलना पड़ रहा बसेरा</strong><br />नेचर प्रोमोटर ए.एच. जैदी ने बताया कि इस बार अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों का असर भी पक्षियों के प्रवास पर देखने को मिल रहा है। कई पक्षी खाड़ी देशों की ओर जाने के बजाय सेंट्रल यूरोप और एशिया के ठंडे इलाकों की ओर रुख कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि मध्य एशिया में युद्ध के कारण कुछ पक्षियों का समूह भारत, चाइना, रूस सहित कई देशों के ठंडे इलाकों की रुख भी कर रहे हैं। युद्ध में हो रही बमबारी के कारण वायुमंडल में धुआं, आगजनी से तापमान की अधिकता के कारण पक्षी खाड़ी देशों की ओर रुख करने के बजाय अपना मार्ग बदल रहे हैं। हाल ही में कई जलाशयों पर इनकी संख्या कम होती दिखाई दे रही है।</p>
<p><strong>इटली से जर्मनी तक इन देशों से आते हैं परिंदे</strong><br />उन्होंने बताया कि कोटा जिले में मध्य यूरोप, फ्रांस, जर्मनी, इटाली, इंग्लैंड, मंगोलिया, ईरान, साइबेरिया, रूस, चाइना, तिब्बत, नेपाल, हिमालय, भारत के लडाख समेत अन्य उंडे प्रदेशों से पक्षी आते हैं। विदेशी पक्षी कोटा के जिन तालाबों में आना पसंद करते हैं, उनमें दरा अभयारणय का किशोर सागर, गोपाल विहार, गिरधरपुरा, उदपुरिया, उम्मेदगंज पक्षी विहार, आलनिया, रानपुर, अभेड़ा बायोलॉजिकल पार्क, जवाहर बाई का तालाब, गैपरनाथ, गरड़िया महादेव, भैंसरोडगढ़ सहित कई वेटलैंड शामिल है।</p>
<p><strong>5 महीने परिंदों चहचहाट से गुलजार रहते हैं वेटलैंड</strong><br />उन्होंने बताया कि देश-प्रदेश से विभिन्न प्रजातियों के पक्षी हाड़ौती के जंगलों की ओर रुख करते हैं। इनमें से नॉर्दन शावलर, नॉर्दन पिनटेल, इरोशियन विजन, गेडवेल, कॉमन टिल, कॉटन टिल, कॉमन पोचाई, रेड करस्टेड पोचाई, टफ टेड वाइट आई पोचार्ड, बार हैडेड मूज, रूडी शेल्डक, कॉमन फूट, कॉम डक समेत कई प्रजातियों के पक्षी शामिल हैं। इनकी चहचहाट ये शिक्षा नगरी की फिजा गुलजार रहती है। इन्हें देखने के लिए बर्ड्स वॉचर की भीड़ लगी रहती है।</p>
<p><strong>मिस्त्र का राष्ट्रीय पक्षी भी पहुंचा अपने मुल्क</strong><br />पक्षी प्रेमी शेख जुनैद ने बताया कि कजाकिस्तान, रूस, मंगोलिया, चीन से हजारों किमी का सफर तय शिक्षा नगरी में आए मिस्त्र के राष्ट्रीय पक्षी स्टेपी ईगल भी अपने मुल्क की ओर कुच कर गए। हालांकि, कई जगहों पर इनकी संख्या बहुत कम नजर आ रही है। यह भी अप्रैल के अंत तक लौट जाएंगे। स्टेपी ईगल बाज प्रजाति का शिकारी पक्षी है, जो हवा में काफी उंगाई पर उड़ते हुए खरगोश, चूहे का शिकार करता है। स्टेपी ईगल मिस्त्र का राष्ट्रीय पक्षी है और कजाकिस्तान के राष्ट्रीय ध्वज में इसका चित्र है। नवम्बर से इनका आना शुरू हो जाता है और मार्च-अप्रैल तक राहते हैं। यह मुख्य रूप से घास के मैदानों व खुले जंगलों में रहना पसंद करते हैं।</p>
<p><strong>अब फिर से अक्टूबर में होगी मुलाकात</strong><br />पक्षी प्रेमी देवेंद्र नागर ने बताया नील कंठी पक्षियों का सितम्बर से आना शुरू हो जाता है। मार्च-अप्रैल तक वापस लौटने लगते हैं। यह नदी, तालाब, खेतों व दलदली जगहों पर अपना ठिकाना बनाते हैं। वर्तमान में अभेड़ा, आलनिया डेम, उम्मेदगंज, उदपुरिया व बरधा बांध के आसपास इनकी आवाजाही रहती है। यह कीड़े-मकोड़ों को भोजन बनाते हैं। ये पक्षी एक दिन में 80 से 100 किमी की उड़ान भरते हैं। अब फिर से सितम्बर में इनसे मुलाकात होगी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 02 Apr 2026 15:23:19 +0530</pubDate>
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                <title>न्यूयॉर्क शहर में ठंड का कहर, 14 लोगों की मौत, बर्फबारी से सड़कें और फुटपाथ मलबे में तब्दील </title>
                                    <description><![CDATA[न्यूयॉर्क में कड़ाके की ठंड से 14 लोगों की मौत हुई। महापौर ने पुष्टि की। बेघर लोगों के लिए वार्मिंग शेल्टर और बसें तैनात की गईं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/cold-havoc-in-new-york-city-14-people-died-roads/article-141710"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-02/11-(700-x-400-px)-(630-x-400-px)-(13)1.png" alt=""></a><br /><p>न्यूयॉर्क। न्यूयार्क में पिछले हफ्ते खुले में रहने के कारण ठंड की वजह से 14 लोगों की मौत हो गयी है। महापौर जोहरान ममदानी ने रविवार को इस बात की पुष्टि की।</p>
<p>स्थानीय मीडिया ने बताया कि शुरुआती जांच में पता चला है कि आठ लोगों की मौत बहुत अधिक ठंड लगने से हुई  थी। 25 जनवरी को आये भीषण बर्फीले तूफान में रिकॉर्ड तोड़ बर्फबारी से सड़कें और फुटपाथ कीचड़ भरे मलबे में तब्दील हो गये। महापौर ममदानी ने कहा कि अब तक 670 लाख पाउंड बर्फ पिघल चुका है और इसे हटाने के लिए 1880 लाख पाउंड नमक का इस्तेमाल किया गया है।</p>
<p>बेघर लोगों को ठंड से बचाने के लिये नये उपाय भी अपनाये गये हैं। बेघर लोगों के लिए नये एक कमरे वाले आश्रय गृह खोले जायेंगे। न्यूयॉर्क शहर के पांचों नगरों में लोगों के लिए वार्मिंग आश्रय गृह भी खुले हुए हैं। इसके साथ ही पूरे शहर में 20 वार्मिंग बसें भी खड़ी की गयी हैं। ये ऐसी बसें हैं, जिनमें ठंड से बचने के लिए लोग शरण ले सकते हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 02 Feb 2026 16:18:05 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>अपना घर आश्रम : जहां बेघर को मिलता है सुकून का ठिकाना, मानसिक विक्षिप्त, असहाय और लावारिसों के जीवन में उम्मीद की किरण</title>
                                    <description><![CDATA[कोटा द्वारा शहर व हाड़ौती भर के विभिन्न स्थानों से लावारिस व मानसिक विक्षिप्त लोगों को रेस्क्यू कर आश्रम लाया जाता है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/apna-ghar-ashram--where-the-homeless-find-solace--a-ray-of-hope-in-the-lives-of-the-mentally-ill--the-helpless--and-the-abandoned/article-132270"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-11/_4500-px)-(25).png" alt=""></a><br /><p>कोटा। <strong>केस- 1</strong>  28 अक्टूबर 2025 को महिला सुमित्रा (परिवर्तित नाम) को कैथून से एंबुलेंस द्वारा लाया गया उसके बाद आश्रम में उस महिला की देखभाल  करके उसका उपचार किया। जिसके बाद धीरे-धीरे उसकी  याददशत आने पर घर का पता परिजनों के बारे में बताने पर  संबंधित थाने में सूचना देकर उस महिला के परिजनों से संपर्क  करके उसका पुनर्वास  6 नवंबर 2025 को पुनर्वास किया गया। </p>
<p><strong>केस-2</strong> 27 अक्टूबर 2025 को महिला अल्का (परिवर्तित नाम) को लेकर आएं उसके बाद देखभाल की गई। जिनके द्वारा परिजनों का  पता  बताने  पर संबंधित थाने में सूचना देकर महिला का पुर्नवास  31 अक्टूबर को किया गया। </p>
<p><strong>केस- 3</strong> 10 फरवरी 2024 को पुरूष दिनेश कुमार (परिवर्तित नाम)जो कि झालावाड़ से लेकर आएं जो नाम भी सही से नहीं बता पा रही थे। उसके बाद उसका उपचार करके 25 नवंबर 2025 को उनका पुर्नवास किया। जिसको उसके परिजन घर पर ले गए।  </p>
<p>शहर के झालावाड़ रोड के पीछे स्थित अपना घर आश्रम, कोटा द्वारा शहर व हाड़ौती भर के विभिन्न स्थानों से लावारिस व मानसिक विक्षिप्त लोगों को रेस्क्यू कर आश्रम लाया जाता है। कार्यालय प्रभारी अंजली शर्मा ने बताया कि जब भी हमें हाड़ौती के विभिन्न स्थानों से कॉल आती है तो एंबुलेंस उस स्थान पर जाकर व्यक्ति को एंबुलेंस में बैठाकर थाने में सूचना देती है। उसके बाद उन्हें आश्रम कोटा लाया जाता है। वहीं आश्रम में 100 व्यक्तियों का खर्चा सरकार द्वारा वहन किया जाता है। उसके बाद भामाशाह हमारी मदद करते हैं। अभी आश्रम में करीब 314 प्रभुजी रहते हैं, जिनमें 125 पुरुषव 189 महिलाएं शामिल हैं। आश्रम की भारत में करीब 64 शाखाएं हैं और एक शाखा नेपाल में स्थित है। आश्रम द्वारा साल में एक बार ‘प्रभु मुक्त अभियान’ चलाया जाता है, जिसमें टीम एंबुलेंस के साथ पूरे संभाग में घूमती है और जो व्यक्ति लावारिस या मानसिक विक्षिप्त अवस्था में मिलता है, उसकी सूचना थाने में देकर उसे आश्रम लाया जाता है। इससे पहले आश्रम नांता स्थित नारी निकेतन में 2012 से 2016 तक संचालित होता था। बाद में शहर में इसकी स्थापना वर्ष 2017 में हुई। वर्तमान में यहां राजस्थान, मध्यप्रदेश सहित अन्य राज्यों के प्रभुजी निवास कर रहे हैं।</p>
<p><strong>प्रवेश से पहले संपूर्ण जांच</strong><br />मानसिक विक्षिप्त लोगों को अपना घर आश्रम कोटा में प्रवेश दिया जाता है, तब उनकी मेडिकल जांच की जाती है। उसके बाद ही उन्हें प्रवेश दिया जाता है। यदि कोई व्यक्ति कैंसर से ग्रसित है तो उसे बीकानेर तथा टी.बी. से ग्रसित को भरतपुर शिफ्ट किया जाता है। अन्य बीमारियों से पीड़ित व्यक्तियों को संबंधित आश्रम में भेजा जाता है। प्रवेश के बाद लावारिस व मानसिक विक्षिप्त लोगों को ‘प्रभुजी’ नाम दिया जाता है। वहीं महीने में दो बार इन्हें विशेष भोजन दिया जाता है। वर्षगांठ, जन्मदिन सहित विशेष अवसरों पर भी ‘प्रभुजी’ के लिए खास भोजन दिया जाता है।</p>
<p><strong>जरूरत की सामग्री के लिए ‘प्रभुजी को चिट्ठी’ लिखी जाती </strong><br />आश्रम में प्रतिदिन जरूरत की सामग्री किसी से नहीं मांगी जाती। आश्रम में बने बोर्ड पर ‘प्रभुजी को चिट्ठी’ लिखी जाती है। कार्यालय प्रभारी अंजली शर्मा ने बताया कि हम आश्रम के लिए आवश्यक सामग्री बोर्ड पर लिख देते हैं। जिसकी भी इच्छा होती है, वह आश्रम आकर सामग्री दान में देकर चला जाता है। आज तक कभी भी ऐसा नहीं हुआ कि बोर्ड पर लिखी सामग्री हमें प्राप्त न हुई हो।</p>
<p><strong>इन समस्याओं का करना पड़ता है सामना</strong><br />आश्रम में लाने से पहले व्यक्ति जो मानसिक संतुलन खो देते वे आश्रम में कार्यरत स्टॉफ को कई बार चोटिल कर देते है। वहीं कई बार हमारे सामने भाषा की चुनौतियों रहती है। जिसके समाधान के लिए हम थर्मल में कार्यरत स्टॉफ, यूटयूब व गूगल की मदद लेते हैं।</p>
<p><strong>ऐसे लाया जाता है</strong><br />कार्यालय प्रभारी ने बताया कि हमारे आश्रम में जब भी कोई कॉल करता उसके द्वारा बताई गई जगह पर हम एंबुलेंस से पहुंचाते है। उसके बाद थाने में सूचना देकर हम व्यक्ति को आश्रम में लेकर आते हैं।</p>
<p><strong>फैक्ट फाईल </strong><br /><strong>वर्ष     पुनर्वास किया </strong><br />2022    109 <br />2023     114<br />2024    149    <br />2025    76</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 13 Nov 2025 15:50:50 +0530</pubDate>
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