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                <title>Bihar Deputy CM Samrat Chaudhary - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <description>Bihar Deputy CM Samrat Chaudhary RSS Feed</description>
                
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                <title>''हम से का भूल हुई जो ये सजा हम को मिली'' एनडीए की जीत के बाद एक्शन मोड में BJP, केंद्रीय मंत्री आर के सिंह समेत 3 बड़े नेता सस्पेंड </title>
                                    <description><![CDATA[बिहार में एनडीए की प्रचंड जीत के बाद भाजपा एक्शन मोड में आ गई है। पार्टी ने पूर्व केंद्रीय मंत्री आर.के. सिंह को छह साल के लिए निष्कासित कर दिया। चुनाव से पहले उन्होंने नीतीश कुमार और उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी पर गंभीर आरोप लगाए थे, जिसे पार्टी ने विरोधी गतिविधि मानते हुए कार्रवाई की।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/it-was-our-mistake-that-we-got-this-punishment-bjp/article-132500"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-11/r-k-singh.png" alt=""></a><br /><p>पटना। बिहार में एनडीए की प्रचंड जीत के बाद पार्टी अब एक्शन मोड़ नजर आ रही है और पार्टी विरोधियों पर कार्रवाई शुरू हो गई है। <br />जानकारी के अनुसार बता दें कि, एनडीए की प्रचंड जीत के बाद बीजेपी ने संगठनात्मक सख्ती दिखाते हुए पूर्व केंद्रीय मंत्री आर.के. सिंह सहित तीन वरिष्ठ नेताओं को छह साल के लिए पार्टी से सस्पेंड कर दिया। पार्टी ने आदेश जारी करते हुए कहा कि, ये कार्रवाई अनुशासनहीनता और लगातार पार्टी विरोधी गतिविधियों के कारण की गई है। </p>
<p>जानकारी के अनुसार, पूर्व केंद्रीय मंत्री और नौकरशाह आर के सिंह बिहार चुनाव से पहले अपने बयानों को लेकर काफी चर्चा थे और उन्होंने अपने एक बयान में नीतीश कुमार और सरकार के खिलाफ काफी गंभीर आरोप लगाए थे। इतना ही नहीं, आर के सिंह ने बिहार के डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी को भी हत्यारा बताया था।</p>
<p>आर के सिंह के इस कृत्य के कारण पार्टी की छवि को काफी गहरा धक्का लगा था जिससे आम जनता के बीच पार्टी की छवि भी खराब हुई थी, साथ ही आपको बता दें कि, आर के सिंह साल 2013 में पार्टी में शामिल हुए थे।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
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                <pubDate>Sat, 15 Nov 2025 13:00:07 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>बिहार विधानसभा चुनाव: क्या प्रशांत किशोर पूरा करेंगे संन्साय लेने का अपना वादा? जानें क्या होगा उनका अलग कदम</title>
                                    <description><![CDATA[बिहार विधानसभा चुनाव में प्रशांत किशोर की जन सुराज पार्टी पूरी तरह फ्लॉप रही और एक भी सीट नहीं जीत सकी। जेडीयू के 25 से अधिक सीटें लाने से किशोर के संन्यास वाले वादे पर सवाल उठ रहे हैं। तेजस्वी को चुनौती से पीछे हटना, शराबबंदी विरोध और अस्पष्ट रणनीति हार की बड़ी वजहें रहीं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/prashant-kishore-had-promised-to-retire-if-jdu-got-more/article-132480"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-05/prashant-kumar-2.png" alt=""></a><br /><p>पटना। बिहार विधानसभा चुनाव परिणामों ने प्रशांत किशोर की जन सुराज पार्टी (जेएसपी) की पूरी उम्मीदों पर पानी फेर दिया। एग्जिट पोल्स ने 0-5 सीटों का अनुमान लगाया था, पर पार्टी एक भी सीट नहीं जीत सकी। जिन उम्मीदवारों को मजबूत माना जा रहा था, वे भी कहीं टक्कर नहीं दे पाए। रैलियों में उमड़ने वाली भीड़ भी वोट में तब्दील नहीं हो पाई, और वोटकटवा बनने की उम्मीदें भी धराशायी हो गईं।</p>
<p><strong>संन्यास का वादा और दबाव</strong></p>
<p>चुनाव प्रचार के दौरान प्रशांत किशोर ने दावा किया था कि जेडीयू 25 से ज्यादा सीटें नहीं ला पाएगी। उन्होंने सार्वजनिक रूप से कहा था कि अगर ऐसा हुआ तो वे राजनीति से संन्यास ले लेंगे। अब जब जेडीयू ने 25 से अधिक सीटें हासिल कर ली हैं, तो सवाल उठ रहा है-क्या किशोर अपना वादा निभाएँगे? पहले भी बिहार के डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी ऐसा वादा निभा चुके हैं, जिससे किशोर पर दबाव और बढ़ गया है।</p>
<p><strong>जेएसपी की हार के प्रमुख कारण: तेजस्वी को चुनौती देकर पीछे हटना</strong></p>
<p>किशोर ने पहले तेजस्वी यादव के खिलाफ राघोपुर से चुनाव लड़ने की बात कही, पर बाद में पीछे हट गए। इससे उनकी विश्वसनीयता और वैकल्पिक नेतृत्व की छवि कमजोर हुई। तेजस्वी के गढ़ में उतरने का मौका गंवाकर किशोर ने अपने राजनीतिक संदेश को भी कमजोर कर दिया।</p>
<p><strong>मोदी-शाह पर सीधा हमला न करना</strong></p>
<p>नरेंद्र मोदी और अमित शाह पर सीधा निशाना साधने से किशोर बचते रहे। इससे जनता के बीच यह धारणा बनी कि जेएसपी बीजेपी की बी टीम की तरह काम कर रही है। जब पूरा विपक्ष मोदी-शाह को सीधे चुनौती दे रहा था, तब किशोर का बचाव की मुद्रा में रहना उन्हें नुकसान दे गया।</p>
<p><strong>बड़े नेताओं पर आरोप</strong></p>
<p>किशोर ने सम्राट चौधरी और अशोक चौधरी पर गंभीर भ्रष्टाचार के आरोप लगाए, लेकिन इन आरोपों को जमीनी लड़ाई में बदलने में असफल रहे। मुद्दे केवल प्रेस कॉन्फ्रेंस तक सीमित रह गए, जिससे उनकी आक्रामक राजनीति का प्रभाव कमजोर रहा।</p>
<p><strong>जाति-धर्म आधारित टिकट वितरण</strong></p>
<p>हालाँकि किशोर ने राजनीति में जातिवाद खत्म करने का दावा किया था, लेकिन टिकट वितरण में वही परंपरागत जाति-धर्म समीकरण दिखे। इससे नई राजनीति का उनका दावा खोखला साबित हुआ और जनता का भरोसा कमजोर पड़ा।</p>
<p><strong>शराबबंदी का खुलकर विरोध</strong></p>
<p>महिलाओं में व्यापक समर्थन पाने वाली शराबबंदी नीति का किशोर ने खुलकर विरोध किया। उन्होंने सत्ता में आते ही 24 घंटे में शराबबंदी हटाने का वादा किया। यह कदम राजनीतिक रूप से घातक साबित हुआ, क्योंकि महिलाएं इसे पारिवारिक शांति और सुरक्षा से जोड़कर देखती हैं।</p>
<p><strong>अगले 5 साल जनता के बीच संघर्ष </strong></p>
<p>प्रशांत किशोर ने अभी कुछ दिन पहले अपने एक वक्तव्य में यह भी कहा कि वो अगले 5 साल और जनता के बीच संघर्ष करेंगे, लेकिन इसके पहले यह किशोर को यह देखना जरूर चाहिए कि उन्हें इतनी बुरी हार का क्यों सामना करना पड़ा?</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 15 Nov 2025 11:15:33 +0530</pubDate>
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