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                <title>space - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                            <item>
                <title>साल 2026 में भारत के ऐतिहासिक सोलर मिशन के अलावा अंतरिक्ष में दिखेगी रिंग ऑफ फायर, चंद्रग्रहण और सुपरमून के साथ उल्कापिंडों की बारिश</title>
                                    <description><![CDATA[2026 खगोल विज्ञान के लिए खास रहेगा। साल की शुरुआत सुपरमून से होगी। फरवरी में वलयाकार सूर्यग्रहण का रिंग ऑफ फायर दिखेगा। अगस्त में पूर्ण सूर्यग्रहण, मार्च में ब्लड मून, तीन सुपरमून और आदित्य-एल1 का अहम चरण वैज्ञानिकों की उत्सुकता बढ़ाएगा। दुर्लभ घटनाएं दुनिया भर में देखी जाएंगी। भरपूर]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/apart-from-indias-historic-solar-mission-in-the-year-2026/article-137965"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-01/year--2026.png" alt=""></a><br /><p>वॉशिंगटन। पूरी दुनिया साल 2026 के स्वागत के लिए तैयार है। अलग-अलग देशों में अलग-अलग समय पर लोग नए साल का स्वागत करेंगे। वहीं, दुनियाभर के खगोलविदों के लिए आने वाला साल कुछ खास होगा, जो कई दुर्लभ खगोलीय घटनाओं का दीदार कराने वाला है। साल की शुरूआत सुपरमून से होगी तो दूसरे महीने में सूर्य ग्रहण के दौरान रिंग ऑफ फायर का दुर्लभ नजारा होगा। इसके साथ ही यह साल एस्ट्रोनॉट के लिए बहुत खास होने वाला है और 50 सालों में सबसे ज्यादा अंतरिक्षयात्रियों को अपनी ओर खींचेगा। साल के दूसरे हिस्से में एक पूर्ण सूर्यग्रहण को लेकर खगोल वैज्ञानिकों में उत्सुकता बनी हुई है। साथ ही भारत का आदित्य-एल1 इस वर्ष अपने सबसे अहम चरण में प्रवेश करेगा।</p>
<p><strong>सूर्य ग्रहण और रिंग ऑफ फायर</strong></p>
<p>साल 2026 में 17 फरवरी को एक वलयाकार सूर्यग्रहण होने जा रहा है। इस दौरान सूर्य और पृथ्वी के बीच में चंद्रमा के आने से सूरज एक चमकीली अंगूठी के रूप में दिखाई देता है। इसे रिंग आॅफ फायर के नाम से भी जाना जाता है। हालांकि, इसे अंटार्कटिका में कुछ रिसर्च स्टेशन से ही अच्छी तरह देखा जा सकेगा। 12 अगस्त को एक पूर्ण सूर्यग्रहण होने जा रहा है, जो आर्कटिक में शुरू होगा और ग्रीनलैंड, आइसलैंड और स्पेन से होकर गुजरेगा। इस दौरान चंद्रमा सूर्य को ढक लेगा जिससे 2 मिनट 18 सेकंड तक आसमान में अंधेरा छा जाएगा।</p>
<p><strong>चंद्र ग्रहण और ब्लडमून</strong></p>
<p>साल का पहला चंद्रग्रहण रिंग ऑफ फायर सूर्यग्रहण के दो सप्ताह बाद 3 मार्च को होने जा रहा है। यह एक पूर्ण चंद्रग्रहण होगा जिसे ब्लड मून कहा जा रहा है। इस दौरान चंद्रमा की सतह 58 मिनट तक लाल रंग की चमकेगी। इससे पश्चिमी उत्तरी अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड, पूर्वी एशिया और प्रशांत क्षेत्र से सबसे अच्छे से देखा जा सकेगा। साल का आखिरी ग्रहण एक आंशिक चंद्रग्रहण होगा। 28 अगस्त को चंद्रमा की सतह का 96% हिस्सा लाल हो जाएगा, लेकिन पूरी तरह से ग्रहण नहीं लेगा। इस दौरान पृथ्वी की छाया के किनारे को चंद्रमा की सतह को पार करते हुए देखना शानदार अनुभव होगा।</p>
<p><strong>सुपरमून</strong></p>
<p>साल 2026 में तीन सुपरमून अपनी अद्भुत चमक से आसमान को रोशन करेंगे। यह तब होता है जब पूर्णिमा का चांद अपनी कक्षा में घूमते हुए पृथ्वी के ज्यादा करीब आ जाता है। इन सुपरमून के खास नजारे को देखने के लिए किसी खास उपकरण की जरूरत नहीं होती। इन्हें आप अपनी आंखों से ही देख सकते हैं। साल पहला सुपरमून जनवरी में उल्कापिंडों की बारिश के साथ होगा। दूसरा सुपरमून 24 नवम्बर को होगा, जबकि साल का आखिरी और सबसे करीबी सुपरमून 23 और 24 दिसम्बर की रात में होगा। उम्मीद है कि 2026 में सूरज में ज्यादा विस्फोट होंगे जिससे धरती पर जियोमैग्नेटिक तूफान आ सकते हैं, जिससे शानदार ऑरोरा दिखाई देगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 01 Jan 2026 11:40:39 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>जंतर-मंतर पर राष्ट्रीय अंतरिक्ष दिवस का आयोजन : राजस्थान बना एस्ट्रो टूरिज्म का नया केंद्र, वैज्ञानिकों ने विद्यार्थियों को दी खगोल विज्ञान की जानकारी </title>
                                    <description><![CDATA[कार्यक्रम में इसरो की प्रदर्शनी, टेलीस्कोप से आकाश अवलोकन, वाटर रॉकेट लॉन्च, स्पेस क्विज, विज्ञान व्याख्यान और बच्चों के लिए क्राफ्ट एग्जीबिशन का आयोजन किया गया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/national-space-day-organijed-at-jantar-mantar/article-124561"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-08/6622-copy54.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सुझाव और उपमुख्यमंत्री दिया कुमारी की पहल पर राजस्थान को एस्ट्रो टूरिज्म का अग्रणी प्रदेश बनाने की दिशा में यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल जंतर मंतर पर राष्ट्रीय अंतरिक्ष दिवस आयोजित हुआ। इस अवसर पर मुख्य अतिथि उपमुख्यमंत्री दिया कुमारी ने कहा कि यह ऐतिहासिक क्षण है जब 300 वर्षों बाद जंतर मंतर के यंत्रों का उपयोग लाइव खगोलीय अवलोकन के लिए किया गया। मैं भी अंतरिक्ष वैज्ञानिक बनना चाहती थी, लेकिन राजनीति में आ गई। यह आयोजन केवल विज्ञान नहीं, बल्कि संस्कृति और परंपरा का पुनर्जीवन है। </p>
<p>कार्यक्रम में इसरो की प्रदर्शनी, टेलीस्कोप से आकाश अवलोकन, वाटर रॉकेट लॉन्च, स्पेस क्विज, विज्ञान व्याख्यान और बच्चों के लिए क्राफ्ट एग्जीबिशन का आयोजन किया गया। इसरो में सेवाएं दे चुके वैज्ञानिकों ने भी विद्यार्थियों को खगोल विज्ञान की जानकारी दी। पर्यटन आयुक्त रुक्मणी रियाड़ और स्पेस इंडिया के सीएमडी डॉ. सचिन भाभा ने बताया कि पहली बार जंतर मंतर के प्राचीन यंत्रों से लाइव ऑब्जर्वेशन कराया गया। यह आयोजन राजस्थान को विरासत से लेकर अंतरिक्ष विज्ञान तक नई पहचान देने वाला साबित हुआ।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 24 Aug 2025 11:29:21 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>पहली बार 6 महिलाओं ने की स्पेस की सैर : हॉलीवुड सिंगर कैटी पेरी और जेफ बेजोस की मंगेतर भी टीम में, सैर करने की कीमत लगभग 1.15 करोड़ रुपए </title>
                                    <description><![CDATA[कैटी पेरी और लॉरेन के अलावा टीवी प्रेजेंटर गेल किंग, मानवाधिकार कार्यकर्ता अमांडा गुयेन, फिल्म निर्माता केरियन फ्लिन और पूर्व रॉकेट साइंटिस्ट आइशा बोवे भी अंतरिक्ष की सैर पर गई थीं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/for-the-first-time-6-women-took-a-space-for/article-110822"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-04/257rtrer-(1)46.png" alt=""></a><br /><p>टेक्सास। अमेरिकी उद्योगपति जेफ  बेजोस की ब्लू ओरिजिन कंपनी के रॉकेट से सोमवार को पहली बार 6 महिलाओं ने एक साथ स्पेस की सैर की। ब्लू ओरिजिन रॉकेट से स्पेस में 11 मिनट सैर करने की कीमत लगभग 1.15 करोड़ रुपए है। रॉकेट ने शाम 7 बजे टेक्सास के वेन होर्न लॉन्च पैड से उड़ान भरी। करीब 11 मिनट के बाद मिशन वापस लौटा। यात्रा करने वाली महिलाओं में मशहूर हॉलीवुड सिंगर कैटी पेरी, जेफ बेजोस की मंगेतर लॉरेन सांचेज शामिल हैं।  कैटी पेरी ने धरती पर लौटते ही जमीन को चूमा। कैटी पेरी और लॉरेन के अलावा टीवी प्रेजेंटर गेल किंग, मानवाधिकार कार्यकर्ता अमांडा गुयेन, फिल्म निर्माता केरियन फ्लिन और पूर्व रॉकेट साइंटिस्ट आइशा बोवे भी अंतरिक्ष की सैर पर गई थीं।</p>
<p><strong>कुल 212 किमी की यात्रा </strong><br />इस दौरान रॉकेट ने उड़ान भरने से लेकर वापस आने तक कुल 212 किमी की यात्रा की। 1963 के बाद अंतरिक्ष यात्रा पर जाने वाला ये पहला आॅल विमेन क्रू है। इससे पहले 1963 में रूसी इंजीनियर वेलेंटिना तेरेश्कोवा ने अकेले अंतरिक्ष की यात्रा की थी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 15 Apr 2025 11:43:59 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>अंतरिक्ष में 28 फरवरी को ग्रहों का बन रहा दुर्लभ संयोग : एक सीधी रेखा में दिखेंगे 7 ग्रह, आसमान में दिखेगा असाधारण नजारा; काम से ले लें छुट्टी </title>
                                    <description><![CDATA[ ये सभी ग्रह लाइन लगाकर सूरज की दिशा में खड़ें होंगे। 28 फरवरी 2025 को यही होने वाला है, जब सातों ग्रह एक सीधी रेखा में लाइन लगाकर खड़े होंगे। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/the-rare-coincidence-of-planets-on-february-28-in-space/article-105570"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-02/257rtrer-(5)22.png" alt=""></a><br /><p>वॉशिंगटन। अंतरिक्ष की दुनिया में ऐसी ऐसी दुर्लभ घटनाएं होती रहती हैं, जो इंसानों को आश्चर्य के समंदर में डाल देती हैं। 28 फरवरी 2025 को भी ऐसा ही होने वाला है। इसलिए इस दिन मौका मिले तो अपने काम से छुट्टी ले लें। क्योंकि आसमान में एक असाधारण नजारा दिखने वाला है। एक ऐसी घटना जो शायद ही आपने इससे पहले देखी होगी। और शायद अपने जीवन में एक ही बार देख पाएंगे। अंतरिक्ष में एक दुर्लभ खगोलीय घटना घटने वाली है और इस दौरान हमारे सौर मंडल के सात ग्रह एक लाइन में खड़े हो जाएंगे। अगर आपको लगता है कि आसमान पहले से ही अद्भुत है, तो यह दुर्लभ रात आपके देखने के नजरिए को पूरी तरह से बदल देगा। कल्पना कीजिए कि आप बाहर निकलकर ऊपर देखें और आपकी आंखों के सामने बुध, शुक्र, मंगल, बृहस्पति, शनि, यूरेनस और नेपच्यून, ये सभी ग्रह आकाश में एक साथ इकट्ठे हों। ये सभी ग्रह लाइन लगाकर सूरज की दिशा में खड़ें होंगे। 28 फरवरी 2025 को यही होने वाला है, जब सातों ग्रह एक सीधी रेखा में लाइन लगाकर खड़े होंगे। ये एक अविस्मरणीय क्षण होने वाला है।</p>
<p><strong>अंतरिक्ष में लाइन लगाकर क्यों खड़े होंगे 7 ग्रह?</strong><br />ग्रहों का एक सीधी लाइन में लगना हमारे लिए दुर्लभ नजारा जरूर है, लेकिन प्रकृति के लिए कोई असामान्य घटना नहीं है। पिछली बार सभी सात ग्रह इस तरह एक साथ कई दशक पहले एक लाइन में लगे थे। ऐसा फिर से साल 2040 से पहले नहीं होने वाला है। लिहाजा खगोल विज्ञान प्रेमियों और ब्रह्मांड की सुंदरता को देखने वालों के लिए यह एक जरूरी घटना है। एक साथ इतने सारे ग्रहों को देखना काफी मुश्किल होता है, क्योंकि अगर संयोग बनते भी हैं तो मौसम कैसा होता है, इसपर भी निर्भर करता है कि वो दिखेंगे ये नहीं। भारत में 28 फरवरी की शाम को आप इस दुर्लभ नजारे को देख पाएंगे। यह दुर्लभ घटना सिर्फ हैरान करने वाले नजारे को लेकर नहीं है, बल्कि कई लोगों का मानना है कि ग्रहों के इस लाइन के पीछे एक गहरा अर्थ छिपा है। ज्योतिष में कहा गया है कि प्रत्येक ग्रह को जीवन के विभिन्न पहलुओं को प्रभावित करने वाला माना जाता है, और जब वे एक पंक्ति में होते हैं, तो वे हमारी ऊर्जा और मानसिकता को प्रभावित करते हैं। इसे बदलाव, आत्म-चिंतन और व्यक्तिगत विकास के समय के रूप में देखा जाता है। अलग अलग मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, ज्योतिषियों का मानना है कि ग्रहों का एक लाइन में लगना आत्म-चिंतन, आध्यात्मिक विकास और ब्रह्मांडीय संतुलन की भावना के लिए एकदम सही समय है।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 26 Feb 2025 10:52:40 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
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                <title>स्पेस पर भी छिड़ सकती है कब्जे की लड़ाई, क्या यूएन अंतरिक्ष नीति बनाएगा</title>
                                    <description><![CDATA[कई संस्थान चांद पर जमीन बेचने का दावा करता है यह कानूनी रूप से मान्य नहीं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/a-battle-for-possession-can-also-break-out-in-space--will-the-un-make-a-space-policy/article-103339"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-02/news-(4).png" alt=""></a><br /><p>कोटा । जब हम आसमान में ऊपर देखते हैं, तो एक सवाल उठता है कि अंतरिक्ष का मालिक कौन है? विभिन्न मिशन और लोग बाहरी अंतरिक्ष में गए हैं, केवल ग्रहों, तारों का पता लगाने और भविष्य के अंतरिक्ष अन्वेषण की संभावनाओं को देखने के लिए। लेकिन फिर भी, कुछ लोगों ने अंतरिक्ष में अपनी संपत्ति होने का दावा किया है। जब चांद पर बेस बनाने की बात आती है तो चीजें अस्पष्ट हो जाती हैं। क्या किसी भी व्यक्ति के पास अंतरिक्ष में संपत्ति रखने का मौलिक अधिकार है? कोई भी व्यक्ति चंद्रमा पर घर बना सकता है, या जमीन खरीद कर अपना दावा कर सकता है?  क्या कोई स्पेस पॉलिसी बनी है? चांद या किसी भी ग्रह पर जीवन बसता है तो वह उस देश  के नाम से या पृथ्वीवासी के नाम से जाना जाएगा? ऐसे ढेरों सवाल मस्तिष्क में कौंधते हैं। चीन 2028 से 2035 तक अंतरराष्ट्रीय चंद्र अनुसंधान स्टेशन का निर्माण करेगा। चीन अगले कुछ दशकों में अपने अंतरिक्ष कार्यक्रम का विस्तार करने के लिए मानवयुक्त चंद्र मिशन शुरू करने, चंद्र अंतरिक्ष स्टेशन  का निर्माण करने और रहने योग्य ग्रहों तथा पृथ्वी के अतिरिक्त अन्य जगहों पर जीवन का पता लगाने की योजना की घोषणा की है। भारत साल 2035 तक अपना खुद का अंतरिक्ष स्टेशन स्थापित करने की योजना बना रहा है। अमेरिका की भी मार्स पर स्पेस स्टेशन बनाने की योजना है।  इंटरनेशनल लूनर  लैंड्स रजिस्ट्री और लूना सोसायटी इंटरनेशनल जैसी कंपनियां चांद पर प्लॉट बेचने का दावा करती हैं। क्या ये सच में संभव है?  स्पेस से जुड़े ऐसे कई सवालों के जवाब टटोलने के लिए नवज्योति ने विशेषज्ञों से बातचीत की। प्रस्तुत हैं उसके अंश</p>
<p><strong>इसरो के पूर्व चेयरमैन ए. एस. किरण कुमार</strong><br /> <strong>सवाल -</strong> क्या कोई स्पेस पॉलिसी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बनी है?<br /><strong>जवाब -</strong> संयुक्त राष्ट्र स्पेस के शांतिपूर्वक इस्तेमाल की इजाजत देती है। साथ ही स्पेस में मिलीट्री के बनाए हुए हथियार के इस्तेमाल पर रोक लगाती है। जिसके पास कैपेसिटी है वो स्पेस में डोमिनेट करेगा। पॉलिसी तो पहले से भी बनी हुई है और आगे भी बनने की कोशिश चल रही है लेकिन उसको सख्ती से लागू करने वाला कोई नहीं है।   <br /><strong>सवाल -</strong> अंतरिक्ष का मालिक कौन है। चांद या किसी भी ग्रह पर भविष्य में जीवन बसता है तो वह उस देश के नाम से जाना जाएगा या किसी और नाम से जाना जाएगा।<br /><strong>जवाब - </strong>अंतरिक्ष का मालिक कोई नहीं है। स्पेस एक कॉमन हेरिटेज है। स्पेस पर किसी ने पहली बार जाकर पैर रख दिया। इसका ये मतलब नहीं है कि वह ग्रह उसका हो गया। ये बात जरूर है कि जो देश पहले पहुंचेगा, उसका दबदबा ज्यादा रहेगा। वह देश आगे रहेगा। अगर चांद पर रहने वालों की बात करें तो उन्हें चांदवासी कहा जाएगा।<br /><strong>सवाल -</strong> यदि किसी ग्रह पर कोई डेवलपमेंट होता है या कोई कॉलोनी बनती है तो क्या कोई भी देश उसका उपयोग कर सकेगा या सिर्फ वहीं देश उपयोग करेगा जिसने रिसर्च और डेवलपमेंट किया है?<br /><strong>जवाब -</strong> जो देश डेवलपमेंट करेगा, वहीं उसका फायदा उठाएगा। पहले के समय में पृथ्वी पर भी ऐसा ही होता था। जहां पर भी सोना या खजाना मिलता था, उस खजाने पर इलाके के राजा का कब्जा होता था। संयुक्त राष्ट्र के नियम के अनुसार ऐसा नहीं होना चाहिए। कई देश ने ग्रहों और क्षुद्रग्रहों पर माइनिंग करने के लिए लाइसेंस जारी कर रही है। अगर माइनिंग में कुछ मिलता है तो उस देश और संस्थान का पहला हक होगा। <br /><strong> सवाल -</strong> अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष कानून के आधार पर किसी भी ग्रह पर जमीन खरीदना क्या कानूनी तौर पर मान्य है?<br /><strong>जवाब -</strong> कई संस्थान चांद पर जमीन बेचने का दावा करती है। लेकिन इसका कोई मतलब नहीं है। यह कानूनी रूप से मान्य नहीं।<br /> <strong>सवाल -</strong> यदि चांद पर जमीन खरीदना संभव नहीं है। चांद का कोई मालिक नहीं है तो जमीन बेची कैसी जा सकती है? चांद पर जमीन की बिक्री कैसे जायज है।<br /><strong>जवाब -</strong> जमीन बेचना और खरीदना दो लोगों के आपस की बात है। कानूनी रूप से पूरा स्पेस कॉमन हेरिटेज है। इस पर किसी एक इंसान या देश का स्वामित्व नहीं है। कोई भी इंसान, संस्था या देश चांद पर कानूनी रूप से जमीन नहीं बेच सकती है। चांद पर जमीन खरीदने और बेचने का जो खेल चल रहा है यह एक स्कैम है।<br /><strong>सवाल -</strong> भारत ही नहीं बल्कि दूसरे कई देशों के लोग चांद पर जमीन खरीद चुके हैं। मीडिया रिपोटर््स के मुताबिक दुनिया में दो संस्थाएं लूना सोसाइटी इंटरनेशनल और इंटरनेशनल लूनर लैंड्स चांद पर जमीन बेचने का दावा करती है। उनका दावा है कि कई देशों ने चांद पर जमीन बेचने के लिए आॅथराइज किया है। क्या कोई देश मान्यता दे सकता है? <br /><strong>जवाब - </strong> चांद का जमीन कोई नहीं बेच सकता है। कुछ संस्थाएं 25 डॉलर की रकम लेकर चांद पर जमीन बेचने का दावा करती है। साथ ही प्रतीकात्मक प्रमाण पत्र जारी करती है। यह कानूनी रूप से वैध नहीं है। यह मनोरंजन के लिए किया जा रहा है।<br /><strong> सवाल -</strong> क्या भविष्य में चांद पर बस्ती बसने वाली है? अगर कॉलोनी बनती है तो क्या जिसने प्लॉट खरीदा है वह चांद पर मकान बनवा सकता है? <br /><strong>जवाब -</strong>  चांद पर कॉलोनी बसने वाली है। इसमें कोई संदेह नहीं है। चांद के बाद मंगल ग्रह पर भी कॉलोनी बसना संभव है। लेकिन  जिसने प्लॉट खरीद लिया है वह चांद पर मकान नहीं बनवा सकते है। यह तो स्कैम है। यहां जमीन की खरीद कानूनी रूप से मान्य नहीं है। <br /><strong>सवाल -</strong> क्या चाइना या अमेरिका अगर कोई पर ग्रही स्पेस कॉलोनी बनाते हैं तो क्या उसपर उनका हक माना जायेगा?<br /><strong>जवाब -</strong> अंतरिक्ष क्षेत्र और ग्रहों की संपत्ति किसी देश की नहीं हो सकती कोई भी देश किसी ग्रह, उपग्रह, या अन्य खगोलीय पिंड पर अपनी सम्पत्ति का दावा नहीं कर सकता। कोई भी देश या व्यक्ति निजी संपत्ति का दावा नहीं कर सकता यदि कोई देश या उसकी कंपनी किसी ग्रह पर कॉलोनी बनाती है, तो उस गतिविधि की जिम्मेदारी उस देश की होगी। हालांकि, कॉलोनी का उपयोग सार्वजनिक भलाई के लिए किया जाना चाहिए, न कि केवल निजी या राष्ट्रीय लाभ के लिए।</p>
<p><strong>गोविन्द यादव सीईओ (व्योमिका स्पेस एजेन्सी)</strong><br /><strong>सवाल - </strong>क्या कोई स्पेस पॉलिसी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बनी है?<br /><strong>जवाब - </strong>हां, संयुक्त राष्ट्र ने अंतरिक्ष के उपयोग और उससे संबंधित मुद्दों पर कुछ स्पेस पॉलिसी बनाई है, जिनमें सबसे महत्वपूर्ण है आउटर स्पेस ट्रीटी (अंतरिक्ष समझौता) जो 1967 में लागू हुआ था। इसके अतिरिक्त और भी कई अंतरराष्ट्रीय समझौतों का उद्देश्य अंतरिक्ष का शांतिपूर्ण और सहयोगात्मक उपयोग सुनिश्चित करना है। <br /> <strong>सवाल -</strong> अंतरिक्ष का मालिक कौन है। चांद या किसी भी ग्रह पर भविष्य में जीवन बसता है तो वह उस देश के नाम से जाना जाएगा या किसी और नाम से जाना जाएगा।<br /><strong>जवाब -</strong> अंतरराष्ट्रीय कानून के अनुसार, स्पेस का कोई मालिक नहीं है। यह पूरी मानवता के लिए है और इसकाउपयोग शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए किया जाना चाहिए। अभी के नियमों के अनुसार, कोई भी देश या व्यक्ति चंद्रमा का मालिक नहीं बन सकता। अगर चंद्रमा पर संसाधनों का उपयोग बड़े पैमाने पर होता है, तो संयुक्त राष्ट्र या अन्य अंतरराष्ट्रीय संस्थाएं नए कानून बना सकती हैं।अगर चांद या किसी अन्य ग्रह पर जीवन बसता है, तो उस जीवन का नामकरण बहुत से कारकों पर निर्भर करेगा। यदि वहां के निवासी पृथ्वी से आए लोग होंगे, तो हो सकता है कि उन्हें पृथ्वीवासी कहा जाए। लेकिन यदि उस ग्रह पर स्वदेशी जीवन विकसित होता है, तो वे वहां के ग्रह या उपग्रह के नाम पर आधारित किसी नाम से जाने जा सकते हैं। वास्तव में, यह पूरी तरह से इस बात पर निर्भर करेगा कि कौन सा समाज या सभ्यता वहां बस रही होगी और वह किस तरह से अपने पहचान का निर्धारण करेगी।<br /><strong> सवाल -</strong> यदि किसी ग्रह पर कोई डेवलपमेंट होता है या कोई कॉलोनी बनती है तो क्या कोई भी देश उसका उपयोग कर सकेगा या सिर्फ वहीं देश उपयोग करेगा जिसने रिसर्च और डेवलपमेंट किया है?<br /><strong>जवाब -</strong> साझा उपयोग और सहयोग बाह्य अंतरिक्ष संधि में इस बात पर जोर दिया गया है कि अंतरिक्ष का अन्वेषण और उपयोग सभी देशों के लिए खुला है। यदि कोई देश किसी ग्रह पर रिसर्च या डवेलपमेंट करता है, तो उसकी जिम्मेदारी है कि वह अन्य देशों के साथ सहयोग और जानकारी साझा करे।<br /> <strong>सवाल - </strong>अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष कानून के आधार पर किसी भी ग्रह पर जमीन खरीदना क्या कानूनी तौर पर मान्य है?<br /><strong>जवाब -</strong> चंद्रमा पर जमीन खरीदना संभव नहीं है, कानूनी रूप से यह अवैध है। हालांकि, चांद पर जमीन बेचने के दावे कुछ निजी कंपनियों द्वारा किए गए हैं, लेकिन यह पूरी तरह से धोखाधड़ी है।<br /><strong>सवाल -</strong> यदि चांद पर जमीन खरीदना संभव नहीं है। चांद का कोई मालिक नहीं है तो जमीन बेची कैसी जा सकती है? चांद पर जमीन की बिक्री कैसे जायज है।<br /><strong>जवाब -</strong> चंद्रमा पर जमीन खरीदना संभव नहीं है, और कानूनी रूप से यह अवैध है।  जो कंपनियां चंद्रमा की जमीन बेचने का दावा करती हैं, वे अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन करते हुए अपनी कल्पना के आधार पर लोगों को नकली प्रमाणपत्र बेचती हैं। चंद्रमा और अंतरिक्ष से जुड़े सभी मामलों में संयुक्त राष्ट्र की बाहरी अंतरिक्ष संधि लागू होती है, जो स्पष्ट रूप से किसी भी निजी स्वामित्व पर रोक लगाती है।<br /><strong>सवाल -</strong> भारत ही नहीं बल्कि दूसरे कई देशों के लोग चांद पर जमीन खरीद चुके हैं। मीडिया रिपोटर््स के मुताबिक दुनिया में दो संस्थाएं लूना सोसाइटी इंटरनेशनल और इंटरनेशनल लूनर लैंड्स चांद पर जमीन बेचने का दावा करती है। उनका दावा है कि कई देशों ने चांद पर जमीन बेचने के लिए आॅथराइज किया है। क्या कोई देश मान्यता दे सकता है? <br /><strong>जवाब - </strong> लूना सोसाइटी इंटरनेशनल और इंटरनेशनल लूनर लैंड्स रजिस्ट्री के पास चंद्रमा की जमीन बेचने का कोई कानूनी अधिकार या मान्यता नहीं है। इनके दावे पूरी तरह से अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन करते हैं। कोई भी देश, संयुक्त राष्ट्र (वठडडरअ), या अंतरराष्ट्रीय संस्था ने इन्हें चंद्रमा की जमीन बेचने की अनुमति या मान्यता नहीं दी है।<br /><strong>सवाल -</strong> क्या भविष्य में चांद पर बस्ती बसने वाली है? अगर कॉलोनी बनती है तो क्या जिसने प्लॉट खरीदा है वह चांद पर मकान बनवा सकता है? <br /><strong>जवाब -</strong>  चांद पर मकान बनवाना वर्तमान में न केवल कानूनी रूप से, बल्कि वैज्ञानिक और तकनीकी दृष्टिकोण से भी एक जटिल और चुनौतीपूर्ण कार्य है।  निजी कंपनियां, जैसे कि स्पेस एक्स और ब्लू ओरिजिन, भी भविष्य में चंद्रमा पर मानव बस्ती बनाने की योजना बना रही हैं।<br /><strong>सवाल - </strong>क्या चाइना या अमेरिका अगर कोई पर ग्रही स्पेस कॉलोनी बनाते हैं तो क्या उसपर उनका हक माना जायेगा ?<br /><strong>जवाब -</strong> अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नए नियम और समझौते बनाए जा सकते हैं। अभी के नियमों के अनुसार, कोई भी देश या व्यक्ति चंद्रमा का मालिक नहीं बन सकता।अगर चंद्रमा पर संसाधनों का उपयोग बड़े पैमाने पर होता है, तो संयुक्त राष्ट्र या अन्य अंतरराष्ट्रीय संस्थाएं नए कानून बना सकती हैं।<strong> सवाल -</strong> क्या संयुक्त राष्ट्र को वर्त्तमान में ऐसी अंतरिक्ष निति बनानी चाहिए की अर्थ की तरह लड़ाई झगड़े नहीं हो सके ? <br /><strong>जवाब - </strong>सभी देशों को अंतरिक्ष के शांतिपूर्ण उपयोग का समान अधिकार है।इससे यह सुनिश्चित होता है कि किसी विशेष देश को अंतरिक्ष के उपयोग में कोई विशेष अधिकार नहीं मिलेगा।अंतरिक्ष मिशनों को लेकर देशों को एक-दूसरे के साथ पारदर्शिता बनाए रखनी होती है, ताकि किसी भी प्रकार की संप्रभुता या सुरक्षा का उल्लंघन न हो।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 06 Feb 2025 14:44:05 +0530</pubDate>
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                <title> सुनीता विलियम्स, स्पेस स्टेशन को रूस ने बचाया, टकराने वाला था कचरा</title>
                                    <description><![CDATA[ये करीब साढ़े तीन मिनट ऑन रहे। स्पेस स्टेशन की पोजिशन बदली गई ताकि कचरे से स्टेशन और इस पर मौजूद एस्ट्रोनॉट्स को बचाया जा सके।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/russia-saved-sunita-williams--space-station-from-debris-that-was/article-96072"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-11/257rtrer-(13)1.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन को 2 बार अपनी पोजिशन बदलनी पड़ी। अगर ऐसा न करते तो स्पेस स्टेशन पर मौजूद 6 एस्ट्रोनॉट्स खतरे में आ जाते। इस बार चार अमेरिकी और तीन रूसी एस्ट्रोनॉट्स को बचाने के लिए रूस आगे आया। रूस के रोबोटिक कार्गो शिप प्रोग्रेस 89 फ्राइटर जो इस समय स्पेस स्टेशन से जुड़ा हुआ है, उसने स्टेशन को बचाने के लिए अपने इंजन 3.5 मिनट के लिए ऑन किए। ताकि स्पेस स्टेशन को अंतरिक्ष में तेजी से आ रहे कचरे से बचाया जा सके। स्पेस स्टेशन की पोजिशन बदली जा सके। नासा ने अपने बयान में कहा है कि स्पेस स्टेशन जिस रास्ते पर जा रहा था, उस पर अंतरिक्ष का कचरा आता दिखाई दिया। तब रूस के कार्गो शिप प्रोग्रेस 89 के थ्रस्टर्स ऑन किए गए। ये करीब साढ़े तीन मिनट ऑन रहे। स्पेस स्टेशन की पोजिशन बदली गई ताकि कचरे से स्टेशन और इस पर मौजूद एस्ट्रोनॉट्स को बचाया जा सके। </p>
<p><strong>1650 फीट ऊपर ले जाया गया स्पेस स्टेशन</strong><br />रूसी स्पेस एजेंसी रॉसकॉसमॉस ने कहा कि स्पेस स्टेशन की ऊंचाई को 1650 फीट यानी करीब 500 मीटर बढ़ाया गया था। ऐसा ही काम प्रोग्रेस 89 ने 19 नवंबर को भी किया था। तब इसके इंजन 5.5 मिनट के लिए ऑन किए गए थे, क्योंकि उस समय स्पेस स्टेशन से साल 2015 में बेकार हो चुका अमेरिकी डिफेंस और मौसम की जानकारी देने वाला सैटेलाइट टकराने वाला था। </p>
<p><strong>अंतरिक्ष का कचरा कई गुना ज्यादा</strong><br />यूरोपियन स्पेस एजेंसी के मुताबिक सैटेलाइट तो कम हैं। इनसे कई गुना ज्यादा कचरा धरती के चारों तरफ घूम रहा है। इसमें 40,500 पदार्थ तो करीब 4 इंच चौड़े हैं। 11 लाख टुकड़े 0.4 इंच से 4 इंच के बीच हैं। यानी 1 से 10 सेंटीमीटर के बीच. 13 करोड़ टुकड़े एक मिलिमीटर चौड़े हैं। ये छोटे-छोटे टुकड़े भी स्पेस स्टेशन और एस्ट्रोनॉट्स की जान ले सकते हैं, क्योंकि ये अत्यधिक स्पीड में उड़ते हैं। आमतौर पर स्पेस स्टेशन को धरती की सतह से 400 किलोमीटर की ऊंचाई पर रखा जाता है। यह धरती के चारों तरफ 28,160 किमी/घंटा की स्पीड से घूमता है। स्पेस स्टेशन लगभग ये काम हर साल करता है। 1999 के बाद से अब तक करीब 32 बार स्पेस स्टेशन की पोजिशन बदली गई है, ताकि वह सुरक्षित रहे। </p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 28 Nov 2024 10:55:33 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
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                <title>स्पेस स्टेशन पर लीक हो रहा रूसी मॉड्यूल, सुनीता विलियम्स के लिए बन सकता है खतरा</title>
                                    <description><![CDATA[लीकेज की जगह को सील करने की भी कोशिश की गई। लेकिन इसका कोई फायदा नहीं हुआ। अभी रूस और अमेरिका इस लीक की गंभीरता को लेकर विवाद कर रहे हैं। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/russia-module-leaking-on-space-station--could-be-a-threat-for-sunita-williams/article-95714"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-11/6633-copy148.jpg" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन (आईएसएस) लीक हो रहा है। दिक्कत ये है कि इसे ठीक करने के बजाय अमेरिकी स्पेस एजेंसी नासा और रूसी स्पेस एजेंसी रॉसकॉसमॉस आपस में मनमुटाव करके बैठे हैं। ये लीकेज स्पेस स्टेशन के रूसी मॉड्यूल पीआरके में हो रही है। जो सर्विस मॉड्यूल को स्पेस स्टेशन से जोड़ता है। नासा और रूसी स्पेस एजेंसी इस लीक के बारे में 2019 से जान रहे हैं, लेकिन इस लीक के पीछे की वजह अब तक नहीं खोजी जा सकी है। कई बार इस लीकेज की वजह से स्पेस स्टेशन को खतरा आया है। लीकेज की जगह को सील करने की भी कोशिश की गई। लेकिन इसका कोई फायदा नहीं हुआ। अभी रूस और अमेरिका इस लीक की गंभीरता को लेकर विवाद कर रहे हैं। </p>
<p>इस विवाद की वजह से स्पेस स्टेशन पर मौजूद एस्ट्रोनॉट सुनीता विलियम्स समेत अन्य अंतरिक्षयात्रियों को दिक्कत हो सकती है। हाल में नासा ने इस लीक को लेकर जो रिपोर्ट दी है उसके मुताबिक इस लीक की वजह से स्टेशन साल 2030 तक काम करने लायक नहीं बचेगा। आईएसएस एडवाइजरी कमेटी के प्रमुख बॉब कबाना ने कहा कि इस लीक की वजह से स्पेस स्टेशन पर बड़ी आपदा आ सकती है। हर दिन निकल रही है 1.1 किलो हवा, हो सकता है विस्फोट: नासा ने बताया कि स्पेस स्टेशन पर जो रूसी मॉड्यूल में लीकेज है, उससे हर दिन 0.9 से 1.1 किलोग्राम हवा निकल रही है। जिसकी वजह से स्पेस स्टेशन का संतुलन बिगड़ रहा है। इस साल अप्रैल में यह लीकेज 1.7 किलोग्राम प्रति दिन में बदल गया था।</p>
<p>अगर इसे ठीक नहीं किया गया तो हवा निकलने की गति बढ़ सकती है। नासा इस प्लान में भी है कि वह क्रू ड्रैगन कैप्सूल में एक्स्ट्रा पैलेट सीट लगाए और अपने एस्ट्रोनॉट्स को बचाकर धरती पर वापस ले आए। नासा एस्ट्रोनॉट माइकल बैरेट कहते हैं कि स्टेशन अब युवा नहीं रहा। जल्द ही स्टेशन के अलग-अलग स्थानों पर दरारें भी आ सकती हैं। वो फट सकता है। वैसे भी स्पेस स्टेशन को काम करने लायक रखने की कोशिश हो रही है। फिर वह धरती के वायुमंडल में जलते हुए नीचे गिर जाएगा।</p>
<p><strong>लीकेज की वजह से आ सकती है स्टेशन पर बड़ी दिक्कत</strong><br />सीएनएन की माने तो रूसी स्पेस एजेंसी के लोगों ने इस लीकेज के खतरे को हल्के में लिया है। जिसकी वजह से भविष्य में स्पेस स्टेशन की वर्किंग में बड़ी समस्या आ सकती है। स्पेस स्टेशन नवंबर 2000 से लगातार एस्ट्रोनॉट्स से भरा हुआ है। यह करीब 25 साल पुरानी अंतरिक्ष में तैरती हुई प्रयोगशाला है। अगर लीकेज की वजह से यहां पर विस्फोट होता है। तो यह कई हजार टुकड़ों में बंटकर खत्म हो जाएगा। टूटे हुए सैटेलाइट्स के टुकड़े, रॉकेट के हिस्सों से भी रिस्क रहता है। ऐसे में लीकेज की समस्या इस स्पेस स्टेशन का खतरा बढ़ा रहे हैं। </p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 24 Nov 2024 10:47:00 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>चीन ने अंतरिक्ष स्टेशन मिशन के लिए शेनझोउ -19 चालक दल का किया खुलासा, ये लोग होंगे शामिल</title>
                                    <description><![CDATA[एयरोस्पेस साइंस एंड टेक्नोलॉजी कॉरपोरेशन के अंतर्गत एकेडमी ऑफ एयरोस्पेस प्रोपल्शन टेक्नोलॉजी में एक वरिष्ठ इंजीनियर के रूप में कार्य किया है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/china-reveals-shenjhou-19-crew-for-space-station-mission-these-people-is-included/article-94100"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-03/china-flag.png" alt=""></a><br /><p>जिउक्वान। चीनी अंतरिक्ष यात्री काई शुजे, सोंग लिंगडोंग और वांग हाओजो शेनझोउ-19 चालक दल वाले अंतरिक्ष उड़ान मिशन में शामिल होंगे और काई शुजे इस टीम के कमांडर होंगे। लिन शिकियांग ने बताया कि शेनझोउ-19 चालक दल वाले इस अंतरिक्ष यान का तड़के चार बजकर 27 मिनट (बीजिंग समयानुसार) पर उत्तर पश्चिमी चीन के जिउक्वान उपग्रह प्रक्षेपण केंद्र से प्रक्षेपण किया गया। शुजे ने 2022 में शेनझोउ-14 अंतरिक्ष मिशन पूरा किया था। चीनी अंतरिक्ष यात्रियों के तीसरे बैच में से सोंग और वांग अंतरिक्ष के लिए नये हैं। सोंग अंतरिक्ष यात्री के रूप में चुने जाने से पहले वायु सेना के एक पूर्व पायलट थे और वांग ने पहले चीन एयरोस्पेस साइंस एंड टेक्नोलॉजी कॉरपोरेशन के अंतर्गत एकेडमी ऑफ एयरोस्पेस प्रोपल्शन टेक्नोलॉजी में एक वरिष्ठ इंजीनियर के रूप में कार्य किया है।</p>
<p>वांग वर्तमान में चीन की एकमात्र महिला अंतरिक्ष उड़ान इंजीनियर हैं और चालक दल के अंतरिक्ष यान मिशन पर जाने वाली तीसरी चीनी महिला बनेंगी। शेनझोउ-19 अंतरिक्ष यात्री शेनझोउ-18 तिकड़ी के साथ कक्षा में चक्कर पूरा करेंगे और लगभग छह महीने तक अंतरिक्ष स्टेशन पर रहेंगें। वह  मिशन के दौरान तियानझोउ-8 कार्गो क्राफ्ट और शेनझोउ-20 चालक दल वाले अंतरिक्ष यान के आगमन का गवाह बनेंगे।</p>
<p>नये दल को कई कार्य पूरे करने हैं जिनमें अंतरिक्ष विज्ञान एवं अनुप्रयोग परीक्षणों का संचालन, वाहन संबंधी अतिरिक्त गतिविधियां, अंतरिक्ष मलबे के खिलाफ सुरक्षात्मक उपकरण की स्थापना, अतिरिक्त वाहन पेलोड एवं उपकरणों को स्थापित करना और उनका पुनर्चक्रण करना शामिल है। वे विज्ञान शिक्षा, जन कल्याण गतिविधियों और अन्य पेलोड परीक्षणों में भी शामिल होंगे। </p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 29 Oct 2024 13:23:05 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>चीन ने अंतरिक्ष में प्रक्षेपित किया एक उपग्रह, रॉकेटों का 522वां मिशन</title>
                                    <description><![CDATA[उपग्रह का उपयोग मुख्य रूप से अंतरिक्ष पर्यावरण देखरेख के लिए किया जाएगा। यह लॉन्ग मार्च श्रृंखला के रॉकेटों का 522वां उड़ान मिशन था।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/china-launches-522nd-mission-of-a-satellite-rocket-into-space/article-77683"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-05/66-copy7.jpg" alt=""></a><br /><p>जिउ क्वान। चीन ने एक उपग्रह को अंतरिक्ष में स्थापित करने के लिए लॉन्ग मार्च-4सी रॉकेट को प्रक्षेपित किया। रॉकेट को उत्तर पश्चिम चीन में जिउ क्वान सैटेलाइट लॉन्च सेंटर से बीजिंग समयानुसार सुबह 7:43 बजे लॉन्च किया गया। </p>
<p>उपग्रह शियान -23 को पूर्व निर्धारित कक्षा में भेजा गया। उपग्रह का उपयोग मुख्य रूप से अंतरिक्ष पर्यावरण देखरेख के लिए किया जाएगा। यह लॉन्ग मार्च श्रृंखला के रॉकेटों का 522वां उड़ान मिशन था।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 12 May 2024 16:20:56 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>भारत-फ्रांस: रक्षा और अंतरिक्ष में सहयोग करेंगे</title>
                                    <description><![CDATA[फ्रांस, रूस के बाद भारत का दूसरा बड़ा रक्षा आपूर्तिकर्ता देश है। रफाल लड़ाकू विमान और स्कॉर्पियन पनडुब्बी के अलावा वह भारत के एक बड़े रणनीतिक साझेदार के रूप में उभरा है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/opinion/india-france-will-cooperate-in-defense-and-space/article-68495"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-01/modi-macron1.png" alt=""></a><br /><p>हाल ही फ्रांस के राष्ट्रपति इमेनुएल मैक्रों का दो दिवसीय भारत दौरा हुआ। वे देश के 75वें गणतंत्र दिवस समारोह के मुख्य अतिथि थे। ऐसे में उनका यह दौरा कई मायनों में उम्मीदों भरा रहा। जो आने वाले समय में दोनों देशों के पुराने संबंधों को नई ऊंचाइयों पर ले जाने में मददगार साबित होगा। भारत प्रवास दौरान उनकी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से बातचीत हुई। इसमें दोनों देशों के बीच अहम मुद्दों पर सहमति बनी।   खासकर रक्षा और अंतरिक्ष के क्षेत्र में भावी सहयोग को लेकर। रक्षा उत्पादन के क्षेत्र में तो बाकायदा एक रोड मैड तैयार किया जाएगा। इसकी जानकारी विदेश सचिव विनय क्वात्रा ने दी। रोडमैप के अंतर्गत ऑर्टिफिशल इंटेलिजेंस प्लेटफॉर्म और साइबर डिफेंस के क्षेत्र में तकनीकी सहयोग का दोनों देशों के बीच आदान-प्रदान होगा। इसमें समुद्र, जमीन, अंतरिक्ष और हवाई क्षेत्र शामिल हैं। कई दशकों पुरानी करीबी को दोनों पक्षों ने आगे बढ़ाने के क्रम में न्यू स्पेस इंडिया लिमिटेड और फ्रांस के एरियनस्पेस और सेटेलाइट लांच को लेकर एक एमओयू पर हस्ताक्षर किए। अंतरिक्ष में धरती की मॉनिटरिंग और कम्यूनिकेशन्स पर सहयोग को लेकर भी सहमति बनी। इसके अलावा दक्षिणी फ्रांस के मर्सेल में भारतीय कांसुलेट और हैदराबाद में फ्रेंच ब्यूरो अब काम करने के लिए तैयार हैं। दोनों देशों में स्टार सी के प्रोग्राम के तहत एक सोलर अकेडमी स्थापित करने का फैसला किया है।  साल 2026 को इंडिया फ्रांस ईयर ऑफ इनोवेशन की तरह मनाए जाने का दोनों देशों ने फैसला लिया है। दोनों देशों के बीच यंग प्रोफेशनल स्कीम की भी शुरुआत की गई है। जिसके तहत 18-35 साल के युवाओं के बीच एक्सचेंज प्रोग्राम शुरू किए जाएंगे।  दोनों नेताओं के बीच कई वैश्विक मुद्दों-गाजा में जारी संघर्ष, आतंकवाद और मानवता से जुड़े पहलुओं पर गंभीर चर्चा भी हुई। इसके अलावा आर्थिक साझेदारी से जुड़े कई मुद्दों पर बातचीत हुई। बाद में मैक्रों ने अपने ट्वीट के जरिए बताया कि वे साल 2030 तक करीब तीस हजार भारतीय छात्रों को फ्रांस में पढ़ते देखने के लक्ष्य की ओर देख रहे हैं। जो यंग प्रोफेशनल योजना का हिस्सा हैं।  यहां बता दें कि पिछले वर्ष दोनों देशों में परस्पर सहयोग के पच्चीस वर्ष पूरे होने पर एक समारोह भी मनाया गया था। इसमें कोई दोराय नहीं कि फ्रांस के साथ भारत के संबंध हमेशा बेहतर रहे हैं। लेकिन विश्व में आज जिस तरह के हालात बन रहे हैं, इस क्रम में बड़ी तेजी के साथ देशों में राजनीतिक और सामरिक समीकरण भी बदल रहे हैं। ऐसे में मजबूत होते भारत-फ्रांस के रिश्ते कई चुनौतियों का सामने करने में मददगार साबित होंगे। <br />गणतंत्र दिवस से एक दिन पहले प्रधानमंत्री मोदी ने मैक्रों का जयपुर में स्वागत किया था। दोनों ने एक साथ रैली में भाग लेकर जनसमूह का अभिवादन स्वीकार किया। यहीं चाय पर दोनों के बीच लंबी बातचीत भी हुई थी। इससे राजस्थान में पर्यटन, हैंडीक्रॉफ्ट और जेम्स-जूलरी क्षेत्र में पिछले कुछ अर्से से छाई मंदी के बादलों के छंटने की आशा अब बलवती हो गई है। यहां बता दें कि राजस्थान में हर साल आने वाले पर्यटकों में फ्रांस के पर्यटकों की संख्या सबसे अधिक होती है। <br /><br />फ्रांस, रूस के बाद भारत का दूसरा बड़ा रक्षा आपूर्तिकर्ता देश है। रफाल लड़ाकू विमान और स्कॉर्पियन पनडुब्बी के अलावा वह भारत के एक बड़े रणनीतिक साझेदार के रूप में उभरा है। खासकर हिंदमहासागर में दोनों देशों के बीच संयुक्त सामरिक समझौते हुए हैं। अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भी फ्रांस हमेशा भारत का समर्थन करता रहा है। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में भारत की स्थायी सदस्यता और परमाणु आपूर्तिकर्ता समूह में उसके प्रवेश का वह समर्थक रहा है।<br /><br />पोकरण परमाणु परीक्षण के बाद जब भारत विश्व में अलग-थलग पड़ गया था, तब फ्रांस ने ही उसका साथ दिया था। भारत में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश करने वाले देशों की श्रेणी में फ्रांस तेजी से आगे बढ़ता देखा गया है। उसने कई महत्वपूर्ण उपक्रम यहां लगाए। दोनों के बीच करीब बारह अरब डॉलर से अधिक का वार्षिक कारोबार होता है। फ्रांस पहला देश है जिसके साथ मिलकर भारत ने अंतरराष्टÑीय सौर गठबंधन की शुरुआत की थी। दोनों देशों का जोर नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में साथ काम करने का भी है। सबसे महत्वपूर्ण तो यह है कि दोनों देशों के बीच रक्षा क्षेत्र में रिश्ते लगातार मजबूत हुए हैं। ऐसे समय में जब हिंद-प्रशांत क्षेत्र में चीन का प्रभुत्व बढ़ रहा है और यह दोनों देशों के लिए चिंता का विषय है। भारत और फ्रांस ने दो वर्ष पहले हिंद-प्रशांत त्रिपक्षीय विकास सहयोग कोष की स्थापना की। इसका उद्देष्य संयुक्त अरब अमीरात के साथ मिलकर अफ्रीका के पूर्वी तट से सुदूर प्रशांत तक समुद्री क्षेत्र में जागरूकता और सुरक्षा सुनिश्चित करना है। इससे क्षेत्रीय संतुलन कायम करने में काफी मदद मिलेगी। ऐसे दौर में जब रूस-यूक्रेन, इजराइल-हमास संघर्ष चल रहा है और इसके चलते विश्व की आपूर्ति श्रृंखला प्रभावित हुई है। दुनिया के तमाम देश मंदी की मार झेल रहे हैं। तब नए वैश्विक समीकरण के लिए शांति और सहयोग की दिशा में इन दोनों देशों की दोस्ती से काफी उम्मीद बनी हुई है।        <br /><br />-महेश चन्द्र शर्मा<br />(ये लेखक के अपने विचार हैं)</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>ओपिनियन</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 29 Jan 2024 09:52:03 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>जापान में परीक्षण के दौरान फटा रॉकेट इंजन</title>
                                    <description><![CDATA[जापान एयरोस्पेस एक्सप्लोरेशन एजेंसी ने बताया कि अकिता प्रान्त में नोशिरो परीक्षण केंद्र में छोटे एप्सिलॉन एस रॉकेट इंजन में हुए विस्फोट में किसी के घायल नहीं हुआ है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/rocket-engine-explodes-during-test-in-japan/article-51771"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-07/333-(2).png" alt=""></a><br /><p>टोक्यो। जापान के अकिता प्रान्त में नोशिरो परीक्षण केंद्र में परीक्षण के दौरान एक रॉकेट इंजन में विस्फोट की घटना सामने आयी है। जापान की अंतरिक्ष एजेंसी ने शुक्रवार को यह जानकारी दी है।</p>
<p>जापान एयरोस्पेस एक्सप्लोरेशन एजेंसी ने बताया कि अकिता प्रान्त में नोशिरो परीक्षण केंद्र में छोटे एप्सिलॉन एस रॉकेट इंजन में हुए विस्फोट में किसी के घायल नहीं हुआ है। अंतरिक्ष एजेंसी के अनुसार परीक्षण शुरू होने के करीब एक मिनट बाद रॉकेट के इंजन में विस्फोट हुआ।</p>
<p>टेलीविजन फुटेज में परीक्षण केन्द्र के बाहर आग की लपटें निकलती देखी गई है। इससे पूरी इमारत आग की चपेट में आ गई। उल्लेखनीय है कि जापान के अंतरिक्ष कार्यक्रम को हाल ही में कई असफलताओं का सामना करना पड़ा है इसमें मार्च में उसके नए प्रमुख एच 3 रॉकेट की लॉन्च विफलता भी शामिल है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 14 Jul 2023 14:56:47 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>किम जोंग उन ने अब अंतरिक्ष पर गड़ाई नजर, बेटी के साथ किया टोही उपग्रह का निरीक्षण</title>
                                    <description><![CDATA[किम ने जोर देकर कहा कि उपग्रह का सफल प्रक्षेपण मौजूदा सुरक्षा वातावरण के तहत तत्काल आवश्यकता और सर्वोच्च प्राथमिकता के आधार पर रक्षा क्षमताओं को मजबूत करने की प्रक्रिया है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/kim-jong-un-now-gazes-at-space-inspects-reconnaissance-satellite/article-45866"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-05/v-13.png" alt=""></a><br /><p>सियोल। उत्तर कोरिया के तानाशाह किम जोंग-उन ने देश के पहले सैन्य टोही उपग्रह का निरीक्षण किया और इसकी अगली कार्य योजना को हरी झंडी दे दी। प्योंगयांग के राज्य मीडिया ने बुधवार को कहा कि उपग्रह रॉकेट प्रक्षेपित करने को तैयार है। उत्तर कोरिया की आधिकारिक कोरियन सेंट्रल न्यूज एजेंसी (केसीएनए) ने कहा कि किम ने जासूसी उपग्रह की समग्र स्थिति की जांच करने के लिए एक दिन पहले गैर-स्थायी उपग्रह प्रक्षेपण तैयारी समिति का निरीक्षण किया और इसकी भविष्य की कार्य योजना को मंजूरी दी। इससे संकेत मिलता हे कि जल्द ही प्रक्षेपण हो सकता है। योनहाप न्यूज एजेंसी ने केसीएनए के हवाले से कहा, समिति के काम से खुद को विस्तार से परिचित करने के बाद, उन्होंने सैन्य टोही उपग्रह नंबर 1 का निरीक्षण किया, जो अंतिम आम सभा की जांच और अंतरिक्ष पर्यावरण परीक्षण के बाद लोड होने के लिए तैयार है। किम ने जोर देकर कहा कि उपग्रह का सफल प्रक्षेपण मौजूदा सुरक्षा वातावरण के तहत तत्काल आवश्यकता और सर्वोच्च प्राथमिकता के आधार पर रक्षा क्षमताओं को मजबूत करने की प्रक्रिया है।</p>
<p><strong>किम की बेटी जू-ए को लैब गाउन में देखा गया</strong><br />विशेषज्ञों ने कहा कि उत्तर कोरिया जलवायु परिस्थितियों और प्रमुख राजनीतिक घटनाओं को देखते हुए उपग्रह प्रक्षेपण के आदर्श समय की जांच-पड़ताल कर सकता है। केसीएनए द्वारा जारी की गई तस्वीरों में किम की बेटी जू-ए को लैब गाउन और हेड कैप में निरीक्षण के साथ दिखाया गया है। नवीनतम निरीक्षण 18 अप्रैल को उत्तर कोरिया की अंतरिक्ष विकास एजेंसी की अपनी आॅन-साइट यात्रा के बाद से किम की पहली सार्वजनिक गतिविधि को चिन्हित करता है, जब उन्होंने घोषणा की कि उत्तर कोरिया ने अपना पहला सैन्य जासूसी उपग्रह बनाने का काम पूरा कर लिया है। पिछले साल दिसंबर में, प्योंगयांग ने कहा कि उसने अपने पहले टोही उपग्रह के विकास के लिए अपने रॉकेट लॉन्चिंग सुविधा में एक महत्वपूर्ण अंतिम चरण परीक्षण किया था। जासूसी उपग्रहों का विकास किम द्वारा जनवरी 2021 में सत्तारूढ़ पार्टी की बैठक के दौरान घोषित प्रमुख हथियार परियोजनाओं में से एक था।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 18 May 2023 11:03:34 +0530</pubDate>
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