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                <title>Maritime Security - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <description>Maritime Security RSS Feed</description>
                
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                <title>होर्मुज जलडमरूमध्य में फिर बढ़ा तनाव: समुद्री बारूदी सुरंगों से टकराया तेल टैंकर, ईंधन की कीमतें बढ़ने की आशंका</title>
                                    <description><![CDATA[होर्मुज जलडमरूमध्य में एक सुपरटैंकर 'एल गैया' में आग लगने के बाद ईरान और अमेरिका के बीच जुबानी जंग तेज हो गई है। ईरानी सेना (IRGC) के अनुसार टैंकर समुद्री बारूदी सुरंग से टकराया, जबकि अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) का दावा है कि टैंकर पर ईरान ने ड्रोन और मिसाइल से हमला किया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/tension-increases-again-in-the-strait-of-hormuz-oil-tanker/article-165620"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/irani-oil-tanker.png" alt=""></a><br /><p>तेहरान। होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने की कोशिश के दौरान एक तेल टैंकर के समुद्री बारूदी सुरंगों की चपेट में आ जाने से उसमें आग लग लगी। ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) ने यह जानकारी दी है। आईआरजीसी ने सोमवार को एक बयान में कहा, "सुपरटैंकर 'एल गैया' दक्षिणी होर्मुज जलडमरूमध्य में एक प्रतिबंधित क्षेत्र से गुजरने वाला था, समुद्री बारूदी सुरंगों से टकराने के बाद विस्फोट का शिकार हो गया। आग बुझाने की कोशिशें नाकाम रहीं।"</p>
<p>अमेरिकी सेंट्रल कमांड (सेंटकॉम) ने आईआरजीसी के बयान को गलत बताते हुए खारिज कर दिया। उनका दावा है कि पिछले महीने ईरान द्वारा दागी गई मिसाइल से टैंकर को निशाना बनाया गया था और वह बेकार हो गया था। उन्होंने आगे कहा कि इस सप्ताहांत, जब जहाज ओमान के तट के पास था, तो ईरान ने कथित तौर पर ड्रोन से उस पर फिर से हमला किया। सेंटकॉम ने 'एक्स' पर कहा, "फिलहाल एक क्षेत्रीय सहयोगी देश टैंकर को खींचकर ले जा रहा है।"</p>
<p>गौरतलब है कि गत 28 फरवरी को अमेरिका और इज़रायल ने ईरान में ठिकानों पर हमले शुरू किए, जिसके जवाब में ईरान की ओर से भी हमले किए गए। जून के मध्य में ईरान और अमेरिका ने संघर्ष खत्म करने के लिए एक समझौते पर हस्ताक्षर किए थे, हालांकि बाद में उनके बीच फिर से हमले हुए। फिलहाल, यह संघर्ष सुलझा नहीं है। संघर्ष बढ़ने के कारण होर्मुज जलडमरूमध्य से होने वाला जहाजों का आवागमन लगभग ठप हो गया है। यह तेल, पेट्रोलियम उत्पादों और लिक्विफाइड नेचुरल गैस (एलएनजी) के वैश्विक बाजार के लिए एक अहम आपूर्ति मार्ग है। नतीजतन, दुनिया भर के अधिकांश देशों में ईंधन की कीमतें बढ़ गई हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 15 Sep 2026 10:05:44 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>होर्मुज जलडमरूमध्य खोलने को ईरान की अमेरिका के सामने सात शर्तें, शर्तें पूरी होने तक जारी रहेगा बंदी का फैसला</title>
                                    <description><![CDATA[ईरान ने रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण होर्मुज जलडमरूमध्य को खोलने के लिए अमेरिका के समक्ष सात शर्तें रखी हैं। ईरानी मीडिया के अनुसार, ओमान के साथ सुरक्षित समुद्री मार्गों पर सहमति के बावजूद, अमेरिका द्वारा शर्तें पूरी न करने तक यह मार्ग बंद रहेगा, जिससे वैश्विक ईंधन संकट गहरा रहा है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/iran-sets-seven-conditions-for-america-to-open-the-strait/article-165533"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-09/1200-x-60-px)-(youtube-thumbnail)-(15)1.png" alt=""></a><br /><p>तेहरान। ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने के लिए अमेरिका के समक्ष सात शर्तें रखी हैं। ईरानी समाचार एजेंसी तस्नीम ने एक जानकार सूत्र के हवाले से यह जानकारी दी। ईरानी विदेश मंत्रालय ने इससे पहले घोषणा की थी कि तेहरान सोमवार को ओमान में इराक और फारस की खाड़ी के देशों के साथ बैठक करेगा। इसमें होर्मुज जलडमरूमध्य से वाणिज्यिक जहाजों के सुरक्षित आवागमन के लिए मार्गों पर चर्चा की जाएगी।</p>
<p>सूत्र ने तस्नीम को बताया, "जब तक ईरान के शीर्ष अधिकारियों द्वारा मंजूर की गयी इन सात शर्तों को पूरा नहीं किया जाता, तब तक होर्मुज जलडमरूमध्य बंद रहेगा।" तस्नीम ने पहले बताया था कि होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर ईरान और ओमान के बीच हुए समझौते में इस जलमार्ग को खोलने का प्रावधान नहीं था। समझौते के तहत दोनों पक्षों ने होर्मुज जलडमरूमध्य में प्रवेश और निकास के मुख्य मार्गों का समन्वय किया है।</p>
<p>अमेरिका और इजरायल ने 28 फरवरी को ईरान में ठिकानों पर हमले शुरू किये थे, जिसके जवाब में ईरान ने भी हमले किये। जून के मध्य में ईरान और अमेरिका ने शत्रुता समाप्त करने के लिए एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किये थे, लेकिन बाद में दोनों पक्षों के बीच फिर हमले हुए। फिलहाल संघर्ष का समाधान नहीं हुआ है।</p>
<p>संघर्ष बढ़ने के कारण होर्मुज जलडमरूमध्य से जहाजों का आवागमन लगभग पूरी तरह रुक गया है। यह वैश्विक बाजार में तेल, पेट्रोलियम उत्पादों और तरलीकृत प्राकृतिक गैस की आपूर्ति का प्रमुख मार्ग है। इसके परिणामस्वरूप दुनिया के अधिकांश देशों में ईंधन की कीमतें बढ़ गयी हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 13 Sep 2026 17:20:02 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य पूरी तरह बंद करने का किया दावा, तेल टैंकरों की आवाजाही प्रभावित; वैश्विक ऊर्जा बाजार में बढ़ी चिंता</title>
                                    <description><![CDATA[ईरान ने अमेरिका पर होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों की आवाजाही बाधित करने का आरोप लगाते हुए इस जलमार्ग को समुद्री यातायात के लिए पूरी तरह बंद घोषित कर दिया है। ईरानी विदेश मंत्रालय ने कहा कि अमेरिका-इजरायल हमलों के बाद यह कदम उठाया गया, जिससे वैश्विक तेल आपूर्ति और जहाजों की आवाजाही प्रभावित हुई है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/iran-claims-to-completely-close-the-strait-of-hormuz-movement/article-164923"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-07/hormuz1.png" alt=""></a><br /><p>मॉस्को। ईरान ने अमेरिका पर होर्मुज जलडमरूमध्य में माल ढुलाई और जहाजों की आवाजाही में बाधा डालने का गंभीर आरोप लगाते हुए बताया है कि यह महत्वपूर्ण जलमार्ग समुद्री यातायात के लिए पूरी तरह से बंद कर दिया गया है। गौरतलब है कि ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने आरोप लगाया है, जबकि सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के सचिव मोहसेन रेजाई ने पहले कहा था कि होर्मुज जलडमरूमध्य माल ढुलाई के लिए पूरी तरह से बंद है। बघाई ने सोशल मीडिया पर लिखा, “ होर्मुज जलडमरूमध्य 28 फरवरी तक पूरी तरह खुला था, जब तक कि अमेरिका और इजराइल ने ईरान पर हमला नहीं किया था। वाशिंगटन ने इस क्षेत्र में एक गैर-कानूनी और बर्बर युद्ध शुरू किया और माल ढुलाई की आवाजाही को बाधित किया। टैंकर रोक दिये गये हैं, व्यापार बाधित हो रहा है और ऊर्जा सहित चीजों की कीमतें बढ़ रही हैं। ”</p>
<p>प्रवक्ता के अनुसार अमेरिका अब अपनी ही हरकतों के नतीजों की कीमत दुनिया से वसूलने की कोशिश कर रहा है। रिपोर्ट के अनुसार ईरान की सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के सचिव मोहसेन रेजाई ने कहा था कि इस्लामिक गणराज्य जल्द ही होर्मुज जलडमरूमध्य के बाहर एक प्रतिबंधित क्षेत्र बनाने की घोषणा करेगा। रेजाई के अनुसार ईरानी अधिकारियों की पूर्व अनुमति के बिना इस क्षेत्र में प्रवेश करने वाले किसी भी जहाज को ईरान की प्रतिबंधित सूची में डाल दिया जाएगा। रॉयटर्स ने जहाज ट्रैकिंग डेटा का हवाला देते हुए बताया कि होर्मुज जलडमरूमध्य में माल ढुलाई मई के बाद से अपने सबसे निचले स्तर पर आ गयी है।</p>
<p>एजेंसी ने कहा कि पिछले 10 दिनों में होर्मुज जलडमरूमध्य से कच्चे तेल ले जाने वाले औसतन 10 जहाज प्रतिदिन गुजरे हैं, जो मई के बाद से सबसे कम स्तर पर है। केप्लर डेटा का हवाला देते हुए कहा गया कि शुक्रवार को 15 माल ढोने वाले जहाज, शनिवार को 13 जहाज इस जलडमरूमध्य से गुजरे और रविवार को यातायात घटकर 10 रह गया। अमेरिकी ऊर्जा सचिव क्रिस राइट ने स्वीकार किया कि होर्मुज जलडमरूमध्य से मौजूदा तेल यातायात, ईरान पर अमेरिकी हमलों से पहले की तुलना में कम है।</p>
<p>इससे पहले अमेरिका की ओर से कहा गया था कि अमेरिकी बलों ने खार्ग द्वीप, जास्क क्षेत्र और ओमान की खाड़ी के पास तीन ईरानी तेल टैंकरों पर हमला किया था। ईरानी बलों ने जवाबी कार्रवाई में होर्मुज जलडमरूमध्य में अमेरिका से जुड़े तीन तेल टैंकरों पर हमला किया और बाद में रॉयटर्स ने रिपोर्ट दी कि आईआरजीसी ने एक अमेरिकी विमानवाहक पोत और विध्वंसक पर बैलिस्टिक मिसाइल हमले किये थे।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 07 Sep 2026 16:09:25 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>भारत-बेल्जियम रक्षा सहयोग बढ़ाने पर सहमत, राजनाथ और थियो फ्रांकेन ने की द्विपक्षीय वार्ता</title>
                                    <description><![CDATA[रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने बेल्जियम के रक्षा मंत्री थियो फ्रांकेन के साथ द्विपक्षीय बैठक की। इस दौरान दोनों देशों के बीच रक्षा औद्योगिक सहयोग, प्रशिक्षण, क्षमता निर्माण और हिंद-प्रशांत क्षेत्र में समुद्री सुरक्षा को मजबूत करने पर सहमति बनी। यह बैठक दोनों देशों के प्रधानमंत्रियों के बीच हुई वार्ता के इतर आयोजित हुई।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/rajnath-and-theo-franken-hold-bilateral-talks-agree-to-increase/article-164587"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-09/rajnath-singh1.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने गुरुवार को यहां बेल्जियम के रक्षा एवं विदेश व्यापार मंत्री थियो फ्रांकेन के साथ द्विपक्षीय बैठक की। बैठक में दोनों पक्षों ने रक्षा और औद्योगिक सहयोग से जुड़े पूरे क्षेत्र की समीक्षा की और द्विपक्षीय संबंधों को और विस्तार देने पर सहमति जताई। बैठक के दौरान दोनों मंत्रियों ने रक्षा सहयोग संवाद, उच्चस्तरीय यात्राओं, प्रशिक्षण और क्षमता निर्माण के जरिए भारत-बेल्जियम के द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने पर सहमति व्यक्त की।</p>
<p>उन्होंने क्षेत्रीय शांति और सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर भी चर्चा की। उन्होंने हिंद-प्रशांत क्षेत्र में समुद्री सुरक्षा सहयोग की आवश्यकता को माना। श्री सिंह और श्री फ्रांकेन ने दोहराया कि भारत और बेल्जियम के बीच साझेदारी साझा मूल्यों, आपसी विश्वास और सम्मान पर आधारित है। यह बैठक प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और बेल्जियम के प्रधानमंत्री बार्ट डी वेवर के बीच यहां हुई बैठक के इतर आयोजित की गई।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 03 Sep 2026 17:18:43 +0530</pubDate>
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                <title>लाल सागर में बढ़ा तनाव: हूतियों के मिसाइल हमलों से मोखा बंदरगाह ठप, 7 लोगों की मौत; 1.6 करोड़ डॉलर के नुकसान के बाद बंद हुआ संचालन</title>
                                    <description><![CDATA[यमन के रणनीतिक मोखा बंदरगाह पर हूती विद्रोहियों के 25 से अधिक मिसाइल हमलों के बाद व्यापारिक और समुद्री गतिविधियां रोक दी गई हैं। इन हमलों में 7 लोगों की मौत हुई और करीब 1.6 करोड़ डॉलर का नुकसान हुआ। लाल सागर के महत्वपूर्ण जलमार्ग पर स्थिति तनावपूर्ण बनी हुई है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/tension-increases-in-the-red-sea-mokha-port-stalled-due/article-163064"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-08/lal-sagar.png" alt=""></a><br /><p>ताइज़। यमन के रणनीतिक लाल सागर स्थित मोखा बंदरगाह ने हाल के दिनों में 25 से अधिक मिसाइल हमलों के बाद वाणिज्यिक और समुद्री गतिविधियां निलंबित कर दी हैं। इन हमलों में सात लोगों की मौत हुई है और करीब 1.6 करोड़ डॉलर का नुकसान हुआ है। बंदरगाह निदेशक ने कहा कि मिसाइल हमलों से बड़े पैमाने पर नुकसान हुआ, जिसके कारण परिचालन रोकना पड़ा। मोखा बंदरगाह बाब-अल-मंदेब जलडमरूमध्य के पास स्थित है, जो लाल सागर को अदन की खाड़ी से जोड़ने वाला प्रमुख समुद्री मार्ग है।</p>
<p>यमन की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त सरकार के अनुसार, हूती विद्रोहियों ने शुक्रवार को मोखा पर छह बैलिस्टिक मिसाइलें दागीं। हूती सैन्य प्रवक्ता याह्या सारी ने कहा कि हमलों में सऊदी सैनिकों के ठिकानों और हथियारों के साथ-साथ सऊदी समर्थित यमनी सरकार से जुड़े बलों की सैन्य नौकाओं को निशाना बनाया गया। नौ अगस्त को भी मोखा पर हूती हमले में सात लोगों की मौत और 30 के घायल होने की जानकारी सामने आयी थी। हूतियों ने उस समय भी सऊदी सैनिकों के ठिकानों और हथियार डिपो को निशाना बनाने का दावा किया था।</p>
<p>हालिया हमलों से यमन में लंबे समय से जारी संघर्ष विराम के कमजोर पड़ने और लाल सागर में वाणिज्यिक जहाजों की आवाजाही प्रभावित होने की आशंका बढ़ गयी है। ईरान समर्थित हूती, जिन्हें अंसार अल्लाह के नाम से भी जाना जाता है, उत्तरी यमन के बड़े हिस्से पर नियंत्रण रखते हैं। इनमें राजधानी सना और लाल सागर का विस्तृत तटीय क्षेत्र शामिल है। संगठन ने क्षेत्रीय संघर्षों के दौरान लाल सागर में वाणिज्यिक जहाजों को भी निशाना बनाया है।</p>
<p>यमन में संघर्ष एक दशक से अधिक समय से जारी है और मुख्य रूप से हूतियों तथा सऊदी अरब और अन्य क्षेत्रीय देशों के समर्थन वाली अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त सरकार के बीच है। सऊदी अरब ने 2015 में हूतियों के खिलाफ सैन्य अभियान शुरू किया था। संयुक्त राष्ट्र की मध्यस्थता में 2022 में हुए संघर्ष विराम से लड़ाई की तीव्रता कम हुई थी, लेकिन स्थायी शांति कायम नहीं हो सकी। मोखा बंदरगाह पर ताजा हमलों ने लाल सागर में समुद्री सुरक्षा और क्षेत्रीय व्यापार को लेकर चिंताएं और बढ़ा दी हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 16 Aug 2026 15:06:06 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>मिडिल ईस्ट में बढ़ा तनाव: ईरान बोला- होर्मुज़ पर हमारा पूरा नियंत्रण, बिना अनुमति नहीं होगी समुद्री आवाजाही</title>
                                    <description><![CDATA[ईरान ने होर्मुज़ जलडमरूमध्य की सुरक्षा और नियंत्रण को लेकर अपना रुख दोहराते हुए कहा कि क्षेत्र में किसी भी समुद्री गतिविधि पर उसकी कड़ी निगरानी है। इस बीच अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य तनाव तथा हालिया घटनाओं ने पश्चिम एशिया में सुरक्षा चिंताओं को फिर से गहरा कर दिया है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/tension-increased-in-the-middle-east-iran-said-we/article-161394"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-07/hormuz3.png" alt=""></a><br /><p>तेहरान। ईरानी सेना प्रमुख हबीबुल्लाह सय्यारी ने कहा कि ईरान होर्मुज़ जलडमरूमध्य को नियंत्रित करता है और देश की सेना की अनुमति के बिना वहां से कोई समुद्री आवाजाही संभव नहीं है। रिपोर्ट के अनुसार, सैयारी ने बुधवार को कहा कि ईरानी सेना और इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स की अनुमति के बिना होर्मुज जलडमरूमध्य में कोई भी गतिविधि नहीं होगी। उन्होंने कहा कि देश की ज़मीनी, समुद्री और हवाई सीमाओं पर सुरक्षा स्थिर है।</p>
<p>उल्लेखनीय है कि 18 जून को ईरान और अमेरिका ने एक समझौते पर हस्ताक्षर किए, जिसके तहत 28 फरवरी से शुरू हुए टकराव को खत्म करने का निर्णय लिया गया। हालांकि, आठ जुलाई के बाद से अमेरिकी सेना ने ईरान पर कई बार हमले किए हैं। अमेरिकी मध्य कमान का दावा है कि ये हमले होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले वाणिज्यिक जहाजों के खिलाफ ईरान की कार्रवाई के जवाब में किए गए थे।</p>
<p>ईरानी सेना ने पश्चिम एशिया में अमेरिकी ठिकानों पर हमले करके उसका जवाब दिया। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि अमेरिका और इस्लामिक गणराज्य के बीच हुआ संघर्ष-विराम अब मान्य नहीं रहा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
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                <pubDate>Thu, 30 Jul 2026 14:32:59 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>ईरान-पाकिस्तान वार्ता : मॉस्को रवाना हुए Abbas Araghchi ; पुतिन से करेंगे अहम मुलाकात, मध्यस्थता प्रयासों के बीच अमेरिका से वार्ता जारी रखने पर चर्चा </title>
                                    <description><![CDATA[ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने पाकिस्तान, ओमान और रूस के साथ गहन कूटनीतिक चर्चा की है। अमेरिका के साथ संवाद बहाली और होर्मुज जलडमरूमध्य में समुद्री सुरक्षा पर ध्यान केंद्रित करते हुए, वे अब मास्को में राष्ट्रपति पुतिन से मुलाकात करेंगे। इस दौरे का उद्देश्य क्षेत्रीय तनाव कम करना और वैश्विक स्थिरता सुनिश्चित करना है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/iran-pakistan-talks-abbas-araghchi-leaves-for-moscow-will-have-an/article-151885"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/iran7.png" alt=""></a><br /><p>मॉस्को। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने सोमवार को कहा कि उनकी पाकिस्तान यात्रा के दौरान कई मध्यस्थों की भागीदारी वाले क्षेत्रीय राजनयिक प्रयासों के बीच अमेरिका के साथ बातचीत को निरंतर जारी रखे जाने को लेकर पाकिस्तान के साथ चर्चा की गयी है। अराघची ने टेलीग्राम पर लिखा, "पाकिस्तान में मेरे दोस्तों के साथ मेरी अच्छी बातचीत हुई और यह दौरा सफल रहा। हमने इस बात पर चर्चा की कि किन परिस्थितियों में और किस तरह से बातचीत जारी रखी जा सकती है।"</p>
<p>क्षेत्रीय स्तर पर समानांतर परामर्श के दौरान, अराघची ने ओमान में हुई चर्चाओं का भी उल्लेख किया जहां ईरानी और ओमानी अधिकारियों ने होर्मुज जलडमरूमध्य में हो रहे घटनाक्रमों पर बात की। उनका कहना है कि दोनों पक्षों ने समुद्री सुरक्षा पर समान रुख अपनाया और इस मुद्दे पर विशेषज्ञ स्तर का संवाद जारी रखने पर सहमति व्यक्त की। ईरानी विदेश मंत्री आगे की बातचीत के लिए मास्को रवाना हुए हैं। ईरानी अधिकारियों ने संकेत दिया है कि वह सोमवार को रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से मुलाकात करेंगे और वार्ता की वर्तमान स्थिति, युद्धविराम से संबंधित घटनाक्रम और व्यापक क्षेत्रीय स्थितियों पर चर्चा करेंगे।</p>
<p>हाल के वर्षों में रूस और ईरान के राजनीतिक और रणनीतिक संबंध मजबूत हुए हैं खासकर तब जब दोनों देश व्यापक पश्चिम देशों के प्रतिबंधों के साए में हैं। ईरान के विदेश मंत्रालय के सूत्रों ने कहा कि चर्चा में मध्यस्थता प्रयासों और चल रहे क्षेत्रीय संघर्षों पर अद्यतन जानकारी शामिल होगी। इसके अलावा, ओमान के अधिकारियों ने यह भी कहा कि श्री अराघची के साथ हुई चर्चा में क्षेत्रीय स्थिरता, होर्मुज जलडमरूमध्य में समुद्री सुरक्षा और तनाव कम करने के उद्देश्य से चल रहे मध्यस्थता प्रयासों पर ध्यान केंद्रित किया गया। ओमान के प्रतिनिधियों ने क्षेत्र में चल रहे संकटों के लिए संवाद और राजनयिक समाधानों के महत्व पर बल दिया।</p>
<p>ये राजनयिक प्रयास ऐसे समय में किए जा रहे हैं जब अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थ क्षेत्र में पहले के संघर्ष संबंधी तनावों और प्रत्यक्ष वार्ता में लंबे समय तक विराम के बाद ईरान और अमेरिका के बीच अप्रत्यक्ष संपर्क बनाए रखने के प्रयास जारी रखे हुए हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
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                <pubDate>Mon, 27 Apr 2026 18:26:05 +0530</pubDate>
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                <title>भारत और मिस्र ने द्विपक्षीय रक्षा सहयोग के लिए जताई सहमति : उन्मुख भविष्य के लिए रूपरेखा तैयार, भारतीय प्रतिनिधिमंडल ने हेलियोपोलिस युद्ध स्मारक पर पुष्पांजलि अर्पित की</title>
                                    <description><![CDATA[काहिरा में आयोजित 11वीं संयुक्त रक्षा समिति की बैठक में भारत और मिस्र ने 2026-27 के लिए रक्षा सहयोग योजना पर मुहर लगाई। दोनों देश अब रक्षा विनिर्माण में सह-उत्पादन और समुद्री सुरक्षा को मजबूत करेंगे। भारत ने अपनी $20 अरब की रक्षा निर्माण क्षमता का प्रदर्शन करते हुए रणनीतिक संबंधों को नई ऊंचाइयों पर पहुँचाया है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/india-and-egypt-agree-on-plan-for-bilateral-defense-cooperation/article-151451"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/भारत-और-मिस्र.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। भारत और मिस्र ने द्विपक्षीय रक्षा सहयोग को प्रगाढ बनाने के लिए द्विपक्षीय रक्षा सहयोग योजना पर सहमति व्यक्त की है। भारत–मिस्र संयुक्त रक्षा समिति ने बुधवार को काहिरा में संपन्न् तीन दिन की अपनी 11वीं बैठक के दौरान द्विपक्षीय रक्षा सहयोग को सुदृढ़ करने के लिए सार्थक चर्चा की। भारतीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व संयुक्त सचिव (अंतरराष्ट्रीय सहयोग) अमिताभ प्रसाद ने किया और इसमें रक्षा मंत्रालय तथा सशस्त्र बलों के वरिष्ठ प्रतिनिधि शामिल थे। मिस्र के प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व रक्षा बलों और रक्षा मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों ने किया।</p>
<p>रक्षा मंत्रालय ने गुरुवार को बताया कि दोनों पक्षों ने पिछली संयुक्त रक्षा समिति बैठक के बाद हुई प्रगति की व्यापक समीक्षा की और रक्षा सहभागिता के लिए एक भविष्य उन्मुख रूपरेखा तैयार की। उन्होंने 2026-27 के लिए द्विपक्षीय रक्षा सहयोग योजना पर सहमति व्यक्त की, जिसमें संरचित सैन्य संपर्क तंत्र का विस्तार, संयुक्त प्रशिक्षण आदान-प्रदान को मजबूत करना, समुद्री सुरक्षा सहयोग को बढ़ाना, सैन्य अभ्यासों के दायरे और जटिलता को बढ़ाना तथा रक्षा उत्पादन और प्रौद्योगिकी में सहयोग को प्रोत्साहित करना शामिल है।</p>
<p>भारतीय प्रतिनिधिमंडल ने भारतीय रक्षा उद्योग की तेजी से बढ़ती विनिर्माण क्षमताओं पर प्रस्तुति दी। इसमें बताया गया कि भारत का रक्षा उत्पादन 20 अरब डॉलर से अधिक हो चुका है और भारत 100 से अधिक देशों को लगभग 4 अरब डॉलर के उत्पाद निर्यात कर रहा है। दोनों पक्षों ने रक्षा उद्योग सहयोग योजना विकसित करने के लिए साथ मिलकर काम करने पर सहमति व्यक्त की। रक्षा उद्योग सहयोग भारत–मिस्र रक्षा संबंधों का एक प्रमुख स्तंभ बनकर उभर रहा है, जिसमें दोनों पक्ष रक्षा विनिर्माण के क्षेत्र में सह-विकास और सह-उत्पादन के अवसरों की तलाश कर रहे हैं।</p>
<p>बैठक के दौरान पहली बार नौसेना-से-नौसेना स्टाफ वार्ता भी आयोजित की गई। भारतीय नौसेना द्वारा हिंद महासागर क्षेत्र में नौवहन की स्वतंत्रता को बढ़ावा देने में निभाई गई महत्वपूर्ण भूमिका की जानकारी दी गई और समुद्री सुरक्षा को प्रोत्साहित करने में भारत के सूचना संलयन केंद्र की प्रमुख भूमिका को रेखांकित किया गया। भारतीय प्रतिनिधिमंडल ने मिस्र वायु सेना के कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल अम्र अब्देल रहमान सक्र से भी मुलाकात की। प्रतिनिधिमंडल ने दोनों देशों की वायु सेनाओं के बीच घनिष्ठ सहयोग के लिए आभार व्यक्त किया।</p>
<p>भारतीय प्रतिनिधिमंडल ने हेलियोपोलिस युद्ध स्मारक पर पुष्पांजलि अर्पित की और प्रथम तथा द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान सर्वोच्च बलिदान देने वाले भारतीय वीरों को श्रद्धांजलि दी। भारत–मिस्र रक्षा साझेदारी में सितंबर 2022 में रक्षा मंत्री की मिस्र यात्रा के दौरान रक्षा क्षेत्र में सहयोग पर समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर करना एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर था। वर्ष 2023 में द्विपक्षीय संबंधों को रणनीतिक साझेदारी के स्तर तक उन्नत किया गया। 11वीं बैठक ने दोनों देशों के बीच घनिष्ठ संबंधों की पुष्टि की और क्षेत्रीय सुरक्षा तथा स्थिरता के प्रति उनकी पारस्परिक प्रतिबद्धता को सुदृढ़ किया।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 23 Apr 2026 15:02:22 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>होर्मुज में भड़का तनाव: अमेरिकी सेना द्वारा जहाज को रोके जाने के बाद ईरान ने दी जवाबी कार्रवाई की चेतावनी, नाकाबंदी का उल्लंघन करने का प्रयास</title>
                                    <description><![CDATA[अमेरिकी सेंटकॉम ने ओमान की खाड़ी में नाकाबंदी का उल्लंघन करने पर ईरानी मालवाहक जहाज 'तौस्का' को गोले दागकर निष्क्रिय कर दिया। राष्ट्रपति ट्रंप की घोषणा के बाद अमेरिकी नौसेना ने जहाज पर नियंत्रण कर लिया है। ईरान ने इस कार्रवाई को 'सशस्त्र डकैती' करार देते हुए जवाबी सैन्य कार्रवाई की कड़ी चेतावनी दी है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/iran-warns-of-retaliation-after-us-military-intercepts-ship-attempt/article-151044"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/hormuz2.png" alt=""></a><br /><p>वॉशिंगटन। ईरानी सशस्त्र बलों ने अमेरिकी केंद्रीय कमान (सेंटकॉम) ने द्वारा इस बात की पुष्टि किये जाने के बाद की उसने ओमान की खाड़ी में एक ईरानी व्यापारिक जहाज को रोका है, त्वरित प्रतिक्रिया देने का वादा किया है। यह जहाज कथित तौर पर क्षेत्र में अमेरिकी नाकाबंदी का उल्लंघन करने का प्रयास कर रहा था। इससे पहले, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने घोषणा की थी कि अमेरिकी बलों ने ओमान की खाड़ी में एक ईरानी ध्वज वाले मालवाहक जहाज को रोका है , जिससे उसके इंजन कक्ष को नुकसान पहुंचा है।</p>
<p>कमान ने एक बयान में कहा, "अरब सागर में तैनात अमेरिकी बलों ने 19 अप्रैल को एक ईरानी बंदरगाह की ओर जाने का प्रयास कर रहे एक ईरानी ध्वज वाले मालवाहक जहाज के खिलाफ नौसैनिक नाकाबंदी लागू की।" सेंटकॉम के अनुसार, ईरानी पोत को नाकाबंदी उल्लंघन के बारे में कई चेतावनियाँ दी गई थीं। बयान में कहा गया है, "छह घंटे की अवधि में बार-बार दी गई चेतावनियों के बावजूद, जब तौस्का के चालक दल ने पालन नहीं किया, तो स्पूरांस ने पोत को अपने इंजन कक्ष को खाली करने का निर्देश दिया। स्पूरांस ने विध्वंसक पोत की 5-इंच एमके 45 तोप से तौस्का के इंजन कक्ष में कई गोले दागकर तौस्का के प्रणोदन तंत्र को निष्क्रिय कर दिया।"</p>
<p>इसके बाद, अमेरिकी मरीन मालवाहक पोत पर सवार हो गए। कमांड के अनुसार, पोत वर्तमान में अमेरिकी नियंत्रण में है। कमान ने कहा, "नाकाबंदी शुरू होने के बाद से, अमेरिकी सेना ने 25 वाणिज्यिक पोतों को वापस मुड़ने या किसी ईरानी बंदरगाह पर लौटने का निर्देश दिया है।" अमेरिकी कार्रवाई पर प्रतिक्रिया देते हुए, ईरान के खातम अल-अनबिया सैन्य कमान के एक प्रवक्ता ने कहा कि ओमान की खाड़ी में अमेरिकी सेना द्वारा एक ईरानी पोत को जब्त करने पर ईरान तुरंत जवाब देगा।</p>
<p>एक समाचार एजेन्सी के अनुसार, ईरानी सैन्य कमान के एक प्रवक्ता ने कहा, “हम चेतावनी देते हैं कि अमेरिकी सेना द्वारा की जा रही इस सशस्त्र डकैती का जवाब ईरान के सशस्त्र बल जल्द ही देंगे।” 13 अप्रैल को, अमेरिकी नौसेना ने होर्मुज जलडमरूमध्य के दोनों ओर स्थित ईरानी बंदरगाहों से आने-जाने वाले सभी समुद्री यातायात की नाकाबंदी शुरू कर दी। यह जलडमरूमध्य विश्व के लगभग 20 प्रतिशत तेल, पेट्रोलियम उत्पादों और एलएनजी आपूर्ति का स्रोत है। वाशिंगटन का कहना है कि गैर-ईरानी जहाज होर्मुज जलडमरूमध्य से तब तक स्वतंत्र रूप से गुजर सकते हैं जब तक वे तेहरान को कोई शुल्क नहीं देते। ईरानी अधिकारियों ने शुल्क लगाने की घोषणा नहीं की है, लेकिन ऐसी योजनाओं पर चर्चा की है।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 20 Apr 2026 12:27:31 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>अंतरराष्ट्रीय कानून के अनुपालन के लिए ईरानी विदेश मंत्रालय ने यूरोपीय संघ की अपील को किया खारिज, होर्मुज़ जलड़मरूमध्य से ज़हाजों के आवागमन की स्थिति को देखते हुए पाखंड बताया</title>
                                    <description><![CDATA[ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य पर यूरोपीय संघ की 'टोल-फ्री' आवागमन की मांग को "पाखंड" बताते हुए खारिज कर दिया है। ईरानी प्रवक्ता इस्माइल बगाई ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय कानून ईरान को सैन्य आक्रामकता रोकने से नहीं रोकता। अमेरिकी नाकाबंदी के विरोध में आईआरजीसी ने शनिवार से होर्मुज जलडमरूमध्य को पूरी तरह बंद करने की घोषणा की है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/iranian-foreign-ministry-rejects-eus-appeal-to-comply-with-international/article-150997"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/hormuz1.png" alt=""></a><br /><p>मॉस्को। ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बगाई ने होर्मुज जलडमरूमध्य से जहाजों के आवागमन की स्थिति को देखते हुए अंतरराष्ट्रीय कानून के अनुपालन के लिए यूरोपीय संघ की अपील को खारिज करते हुए इसे "चरम पाखंड" बताया। बगाई यूरोपीय संघ की विदेश नीति प्रमुख काजा कल्लास के 17 अप्रैल के पोस्ट पर टिप्पणी कर रहे थे, जिसमें उन्होंने ईरान से होर्मुज जलडमरूमध्य से जहाजों के लिए बिना शुल्क और टोल मुक्त आवागमन सुनिश्चित करने का आह्वान किया था। कल्लास ने अपने पोस्ट में कहा था कि "अंतरराष्ट्रीय कानून के अनुसार," होर्मुज जलडमरूमध्य से आवागमन बिना शुल्क और टोल मुक्त होना चाहिए।</p>
<p>बगाई ने कल्लास की पोस्ट के जवाब में ‘एक्स’ पर कहा, “अरे, वो ‘अंतर्राष्ट्रीय कानून’?! वही कानून जिसका हवाला देकर यूरोपीय संघ दूसरों को उपदेश देता है, जबकि चुपचाप अमेरिका-इजरायल के आक्रामक युद्ध को हरी झंडी देता है और ईरानियों पर हो रहे अत्याचारों को अनदेखा करता है?! उपदेश देना बंद करो; यूरोप की अपने उपदेशों पर अमल न करने की आदत ने उसके ‘अंतर्राष्ट्रीय कानून’ के वादों को पाखंड की पराकाष्ठा में बदल दिया है।” राजनयिक ने इस बात पर जोर दिया कि अंतर्राष्ट्रीय कानून का कोई भी प्रावधान ईरान को, एक तटीय राज्य होने के नाते, “होर्मुज जलडमरूमध्य का इस्तेमाल ईरान के खिलाफ सैन्य आक्रमण के लिए होने से रोकने के लिए आवश्यक कदम उठाने” से नहीं रोकता है।</p>
<p>ईरानी आईआरजीसी नौसेना ने घोषणा की कि उसने शनिवार शाम से होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद कर दिया है, और यह तब तक लागू रहेगा जब तक अमेरिकी नौसैनिक नाकाबंदी पूरी तरह से हटा नहीं ली जाती। अमेरिकी नौसेना ने 13 अप्रैल को होर्मुज जलडमरूमध्य के दोनों ओर स्थित ईरानी बंदरगाहों से आने-जाने वाले सभी समुद्री यातायात की नाकाबंदी शुरू कर दी। यह जलडमरूमध्य विश्व के लगभग 20 प्रतिशत तेल, पेट्रोलियम उत्पाद और एलएनजी आपूर्ति का स्रोत है।</p>
<p>वाशिंगटन का कहना है कि गैर-ईरानी जहाज होर्मुज जलडमरूमध्य से तब तक स्वतंत्र रूप से गुजर सकते हैं जब तक वे तेहरान को कोई शुल्क नहीं देते। ईरानी अधिकारियों ने शुल्क लगाने की घोषणा नहीं की है, लेकिन ऐसी योजनाओं पर चर्चा की है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 19 Apr 2026 16:34:25 +0530</pubDate>
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                <title>पश्चिम एशिया तनाव : सुरक्षा परिषद में पश्चिमी एशिया पर रूस-चीन के प्रस्ताव पर होगी चर्चा, रूसी विदेश मंत्रालय की रिपोर्ट में खुलासा</title>
                                    <description><![CDATA[पश्चिम एशिया में तनाव घटाने के लिए रूस और चीन ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में एक नया संकल्प प्रस्तावित किया है। इस मसौदे में समुद्री सुरक्षा और बातचीत के जरिए समाधान पर जोर दिया गया है। मतदान की तारीख जमीनी हालात के आधार पर तय होगी। दोनों देशों ने होर्मुज जलडमरूमध्य पर पुराने प्रस्तावों का विरोध किया है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/west-asia-tension-russia-china-proposal-on-west-asia-will-be/article-150203"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/unsc.png" alt=""></a><br /><p>मॉस्को। पश्चिम एशिया में तनाव कम करने के लिए रूस और चीन की ओर से प्रस्तावित संकल्प पर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (यूएनएससी) में मतदान की तारीख वहां की जमीनी स्थिति के आधार पर तय की जाएगी। रूस के विदेश मंत्रालय ने यह जानकारी दी। इससे पहले, रूस और चीन ने प्रस्ताव दिया था कि सुरक्षा परिषद पश्चिमी एशिया की वर्तमान स्थिति पर एक वैकल्पिक मसौदा प्रस्ताव पर विचार करे, जिसमें समुद्री सुरक्षा के पहलुओं को भी शामिल किया जाये।</p>
<p>रूस के विदेश मंत्रालय के अंतरराष्ट्रीय संगठन विभाग के निदेशक किरिल लोग्विनोव ने स्पूतनिक से कहा, “ बैठक में हमने अपने चीन के प्रतिनिधियों के साथ मिलकर तनाव कम करने और बातचीत के जरिए समाधान निकालने के पक्ष में एक वैकल्पिक मसौदा प्रस्ताव की घोषणा की है। इस पर मतदान की तिथि जमीनी हालात को देखते हुए निर्धारित की जाएगी।” रूस के राजनयिक ने उम्मीद जतायी कि सुरक्षा परिषद के अन्य सदस्य भी चीन और रूस की इस पहल का समर्थन करेंगे।</p>
<p>गौरतलब है कि सात अप्रैल को रूस और चीन ने होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर सुरक्षा परिषद के मसौदा प्रस्ताव पर वीटो कर दिया था। संयुक्त राष्ट्र में रूस के स्थायी प्रतिनिधि वासिली नेबेंज़िया ने स्पष्ट किया था कि रूस ऐसे किसी भी मसौदे का समर्थन नहीं कर सकता, जो अंतरराष्ट्रीय कानून के लिए एक खतरनाक मिसाल कायम करता हो।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 13 Apr 2026 18:13:38 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>फ्रांस-ब्रिटेन होर्मुज में सुरक्षित नौवहन सुनिश्चित करने के लिए अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन की मेजबानी करेंगे : राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रॉन</title>
                                    <description><![CDATA[राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रॉन और पीएम कीर स्टार्मर होर्मुज जलडमरूमध्य में सुरक्षित नौवहन के लिए अंतरराष्ट्रीय शिखर सम्मेलन की मेजबानी करेंगे। यह मिशन पूरी तरह रक्षात्मक होगा और अमेरिकी नाकेबंदी से अलग स्वतंत्र रूप से कार्य करेगा। इसका उद्देश्य वैश्विक व्यापार मार्ग को बहाल करना और तनावपूर्ण क्षेत्र में बहुराष्ट्रीय सहयोग सुनिश्चित करना है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/france-uk-president-emmanuel-macron-to-host-international-conference-to-ensure/article-150274"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/france-president-emmanuel-macron.png" alt=""></a><br /><p>पेरिस। फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रॉन ने सोमवार को यह घोषणा की कि फ्रांस और ब्रिटेन आने वाले दिनों में होर्मुज जलडमरूमध्य के माध्यम से सुरक्षित नौवहन सुनिश्चित करने के लिए एक अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन की मेजबानी करेंगे। फ्रांसिसी राष्ट्रपति ने बताया कि इस सम्मेलन में उन देशों को एक साथ लाया जाएगा जो नौवहन की स्वतंत्रता बहाल करने के उद्देश्य से एक शांतिपूर्ण, बहुराष्ट्रीय अभियान में योगदान देने के इच्छुक हैं। उन्होंने सोशल मीडिया मंच 'एक्स' पर लिखा, "यह पूरी तरह से रक्षात्मक मिशन होगा, जो युद्धरत पक्षों से अलग होगा और परिस्थितियों के अनुकूल होते ही इसे तैनात किया जाएगा।"</p>
<p>ब्रिटिश प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर ने भी एक सोशल मीडिया पोस्ट में कहा कि ब्रिटेन ने 40 से अधिक देशों को इस मिशन के लिए आमंत्रित किया है जो नौवहन की स्वतंत्रता बहाल करने के हमारे लक्ष्य को साझा करते हैं। स्टार्मर ने होर्मुज जलडमरूमध्य के बंद होने को 'बेहद हानिकारक' बताते हुए कहा कि ब्रिटेन और फ्रांस इस सप्ताह एक शिखर सम्मेलन की सह-मेजबानी करेंगे। इसका उद्देश्य संघर्ष समाप्त होने पर अंतरराष्ट्रीय शिपिंग की सुरक्षा के लिए एक समन्वित, स्वतंत्र और बहुराष्ट्रीय योजना पर काम करना है। </p>
<p>मैक्रॉन का यह बयान श्री स्टार्मर के उस रुख के बाद आया है, जिसमें उन्होंने स्पष्ट किया था कि ब्रिटेन ईरानी बंदरगाहों की अमेरिकी सैन्य नाकेबंदी में शामिल नहीं होगा। गौरतलब है कि कि अमेरिकी सेंट्रल कमांड (सेंटकॉम) ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की उद्घोषणा के अनुरूप सोमवार सुबह 10 बजे (भारतीय समयानुसार रात 8:30 बजे) से ईरानी बंदरगाहों के सभी समुद्री यातायात को रोकने की घोषणा की है। ब्रिटेन ने स्पष्ट किया है कि उसके 'माइनस्वीपर्स' (समुद्री बारूदी सुरंग हटाने वाले जहाज) और एंटी-ड्रोन इकाइयां क्षेत्र में अपना संचालन जारी रखेंगी, लेकिन ब्रिटिश नौसैनिक जहाजों और सैनिकों का उपयोग अमेरिकी नाकेबंदी लागू करने के लिए नहीं किया जाएगा।</p>
<p>इस बीच, अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने कहा कि ईरान द्वारा परमाणु हथियारों को त्यागने से इनकार करना 'इस्लामाबाद वार्ता' की विफलता का मुख्य कारण रहा। वहीं, ईरान के संसदीय अध्यक्ष मोहम्मद बागेर गालिबाफ ने कहा कि तेहरान ने 'भविष्योन्मुखी पहल' का प्रस्ताव रखा था, लेकिन वह अभी तक अमेरिकी विश्वास हासिल नहीं कर सका है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 13 Apr 2026 18:02:20 +0530</pubDate>
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