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                <title>Maritime Security - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <description>Maritime Security RSS Feed</description>
                
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                <title>पश्चिम एशिया तनाव : सुरक्षा परिषद में पश्चिमी एशिया पर रूस-चीन के प्रस्ताव पर होगी चर्चा, रूसी विदेश मंत्रालय की रिपोर्ट में खुलासा</title>
                                    <description><![CDATA[पश्चिम एशिया में तनाव घटाने के लिए रूस और चीन ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में एक नया संकल्प प्रस्तावित किया है। इस मसौदे में समुद्री सुरक्षा और बातचीत के जरिए समाधान पर जोर दिया गया है। मतदान की तारीख जमीनी हालात के आधार पर तय होगी। दोनों देशों ने होर्मुज जलडमरूमध्य पर पुराने प्रस्तावों का विरोध किया है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/west-asia-tension-russia-china-proposal-on-west-asia-will-be/article-150203"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/unsc.png" alt=""></a><br /><p>मॉस्को। पश्चिम एशिया में तनाव कम करने के लिए रूस और चीन की ओर से प्रस्तावित संकल्प पर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (यूएनएससी) में मतदान की तारीख वहां की जमीनी स्थिति के आधार पर तय की जाएगी। रूस के विदेश मंत्रालय ने यह जानकारी दी। इससे पहले, रूस और चीन ने प्रस्ताव दिया था कि सुरक्षा परिषद पश्चिमी एशिया की वर्तमान स्थिति पर एक वैकल्पिक मसौदा प्रस्ताव पर विचार करे, जिसमें समुद्री सुरक्षा के पहलुओं को भी शामिल किया जाये।</p>
<p>रूस के विदेश मंत्रालय के अंतरराष्ट्रीय संगठन विभाग के निदेशक किरिल लोग्विनोव ने स्पूतनिक से कहा, “ बैठक में हमने अपने चीन के प्रतिनिधियों के साथ मिलकर तनाव कम करने और बातचीत के जरिए समाधान निकालने के पक्ष में एक वैकल्पिक मसौदा प्रस्ताव की घोषणा की है। इस पर मतदान की तिथि जमीनी हालात को देखते हुए निर्धारित की जाएगी।” रूस के राजनयिक ने उम्मीद जतायी कि सुरक्षा परिषद के अन्य सदस्य भी चीन और रूस की इस पहल का समर्थन करेंगे।</p>
<p>गौरतलब है कि सात अप्रैल को रूस और चीन ने होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर सुरक्षा परिषद के मसौदा प्रस्ताव पर वीटो कर दिया था। संयुक्त राष्ट्र में रूस के स्थायी प्रतिनिधि वासिली नेबेंज़िया ने स्पष्ट किया था कि रूस ऐसे किसी भी मसौदे का समर्थन नहीं कर सकता, जो अंतरराष्ट्रीय कानून के लिए एक खतरनाक मिसाल कायम करता हो।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 13 Apr 2026 18:13:38 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>फ्रांस-ब्रिटेन होर्मुज में सुरक्षित नौवहन सुनिश्चित करने के लिए अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन की मेजबानी करेंगे : राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रॉन</title>
                                    <description><![CDATA[राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रॉन और पीएम कीर स्टार्मर होर्मुज जलडमरूमध्य में सुरक्षित नौवहन के लिए अंतरराष्ट्रीय शिखर सम्मेलन की मेजबानी करेंगे। यह मिशन पूरी तरह रक्षात्मक होगा और अमेरिकी नाकेबंदी से अलग स्वतंत्र रूप से कार्य करेगा। इसका उद्देश्य वैश्विक व्यापार मार्ग को बहाल करना और तनावपूर्ण क्षेत्र में बहुराष्ट्रीय सहयोग सुनिश्चित करना है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/france-uk-president-emmanuel-macron-to-host-international-conference-to-ensure/article-150274"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/france-president-emmanuel-macron.png" alt=""></a><br /><p>पेरिस। फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रॉन ने सोमवार को यह घोषणा की कि फ्रांस और ब्रिटेन आने वाले दिनों में होर्मुज जलडमरूमध्य के माध्यम से सुरक्षित नौवहन सुनिश्चित करने के लिए एक अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन की मेजबानी करेंगे। फ्रांसिसी राष्ट्रपति ने बताया कि इस सम्मेलन में उन देशों को एक साथ लाया जाएगा जो नौवहन की स्वतंत्रता बहाल करने के उद्देश्य से एक शांतिपूर्ण, बहुराष्ट्रीय अभियान में योगदान देने के इच्छुक हैं। उन्होंने सोशल मीडिया मंच 'एक्स' पर लिखा, "यह पूरी तरह से रक्षात्मक मिशन होगा, जो युद्धरत पक्षों से अलग होगा और परिस्थितियों के अनुकूल होते ही इसे तैनात किया जाएगा।"</p>
<p>ब्रिटिश प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर ने भी एक सोशल मीडिया पोस्ट में कहा कि ब्रिटेन ने 40 से अधिक देशों को इस मिशन के लिए आमंत्रित किया है जो नौवहन की स्वतंत्रता बहाल करने के हमारे लक्ष्य को साझा करते हैं। स्टार्मर ने होर्मुज जलडमरूमध्य के बंद होने को 'बेहद हानिकारक' बताते हुए कहा कि ब्रिटेन और फ्रांस इस सप्ताह एक शिखर सम्मेलन की सह-मेजबानी करेंगे। इसका उद्देश्य संघर्ष समाप्त होने पर अंतरराष्ट्रीय शिपिंग की सुरक्षा के लिए एक समन्वित, स्वतंत्र और बहुराष्ट्रीय योजना पर काम करना है। </p>
<p>मैक्रॉन का यह बयान श्री स्टार्मर के उस रुख के बाद आया है, जिसमें उन्होंने स्पष्ट किया था कि ब्रिटेन ईरानी बंदरगाहों की अमेरिकी सैन्य नाकेबंदी में शामिल नहीं होगा। गौरतलब है कि कि अमेरिकी सेंट्रल कमांड (सेंटकॉम) ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की उद्घोषणा के अनुरूप सोमवार सुबह 10 बजे (भारतीय समयानुसार रात 8:30 बजे) से ईरानी बंदरगाहों के सभी समुद्री यातायात को रोकने की घोषणा की है। ब्रिटेन ने स्पष्ट किया है कि उसके 'माइनस्वीपर्स' (समुद्री बारूदी सुरंग हटाने वाले जहाज) और एंटी-ड्रोन इकाइयां क्षेत्र में अपना संचालन जारी रखेंगी, लेकिन ब्रिटिश नौसैनिक जहाजों और सैनिकों का उपयोग अमेरिकी नाकेबंदी लागू करने के लिए नहीं किया जाएगा।</p>
<p>इस बीच, अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने कहा कि ईरान द्वारा परमाणु हथियारों को त्यागने से इनकार करना 'इस्लामाबाद वार्ता' की विफलता का मुख्य कारण रहा। वहीं, ईरान के संसदीय अध्यक्ष मोहम्मद बागेर गालिबाफ ने कहा कि तेहरान ने 'भविष्योन्मुखी पहल' का प्रस्ताव रखा था, लेकिन वह अभी तक अमेरिकी विश्वास हासिल नहीं कर सका है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 13 Apr 2026 18:02:20 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>ईरान-अमेरिका वार्ता विफल होने के बाद ट्रंप का बड़ा फैसला : अमेरिकी केंद्रीय कमान सोमवार से शुरू करेगी ईरान की नौसैनिक नाकाबंदी, होर्मुज़ जलडमरूमध्य को पूरी तरह खोलने की मांग</title>
                                    <description><![CDATA[इस्लामाबाद वार्ता विफल होने के बाद, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के आदेश पर सेंटकॉम ने ईरानी बंदरगाहों की पूर्ण समुद्री नाकाबंदी शुरू कर दी है। हॉर्मुज जलडमरूमध्य में ईरानी व्यापार को रोकने के लिए नौसेना तैनात की गई है। हालांकि, गैर-ईरानी बंदरगाहों के लिए 'नौवहन की स्वतंत्रता' बरकरार रहेगी, जिससे वैश्विक तनाव चरम पर है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/after-the-failure-of-iran-us-talks-trumps-big-decision-us/article-150166"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-01/trump3.png" alt=""></a><br /><p>न्यूयॉर्क। अमेरिकी केंद्रीय कमान ने सोमवार को भारतीय समयानुसार शाम 7:30 बजे से "ईरानी बंदरगाहों में आने-जाने वाले सभी समुद्री यातायात" की नाकाबंदी शुरू करने का निश्चय किया है। कमान ने एक बयान में कहा, "अमेरिकी केंद्रीय कमान (सेंटकॉम) के बल राष्ट्रपति की घोषणा के अनुसार, 13 अप्रैल को सुबह 10 बजे पूर्वी समय (शाम 7:30 बजे भारतीय समय) से ईरानी बंदरगाहों में आने-जाने वाले सभी समुद्री यातायात की नाकाबंदी शुरू करेंगे।" कमांड का कहना है कि यह नाकाबंदी "ईरानी बंदरगाहों और तटीय क्षेत्रों में आने-जाने वाले सभी देशों के जहाजों के खिलाफ निष्पक्ष रूप से लागू की जाएगी, जिसमें अरब खाड़ी और ओमान की खाड़ी के सभी ईरानी बंदरगाह शामिल हैं।"</p>
<p>इसमें आगे कहा गया है, "सेंटकॉम बल होर्मुज जलडमरूमध्य से गैर-ईरानी बंदरगाहों से आने-जाने वाले जहाजों के लिए नौवहन की स्वतंत्रता में बाधा नहीं डालेंगे।" इस्लामाबाद में ईरान-अमेरिका वार्ता विफल होने के बाद ट्रंप ने रविवार को घोषणा की कि अमेरिका होर्मुज जलडमरूमध्य में प्रवेश करने और बाहर निकलने का प्रयास करने वाले सभी जहाजों की नाकाबंदी शुरू करेगा। उन्होंने अमेरिकी नौसेना को उन सभी जहाजों पर नज़र रखने और उन्हें रोकने का भी निर्देश दिया जो जलडमरूमध्य से गुजरने के लिए ईरान को रिश्वत देते हैं।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 13 Apr 2026 14:07:36 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>नौसेना के बेड़े में शामिल हुआ तारागिरी युद्धपोत : राजनाथ सिंह ने कहा-मजबूत और सक्षम नौसेना समय की आवश्यकता, ऊर्जा सुरक्षा होगी मजबूत</title>
                                    <description><![CDATA[रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने विशाखापत्तनम में स्वदेशी स्टील्थ फ्रिगेट INS तारागिरी को नौसेना को समर्पित किया। ब्रह्मोस मिसाइल और उन्नत रडार से लैस यह युद्धपोत 75% स्वदेशी सामग्री से बना है। राजनाथ सिंह ने इसे आत्मनिर्भर भारत का प्रतीक बताते हुए समुद्री मार्गों और डिजिटल केबलों की सुरक्षा के लिए नौसेना को अनिवार्य बताया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/taragiri-warship-joins-naval-fleet-rajnath-singh-said-strong/article-149027"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/rajnatha.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने मजबूत और सक्षम नौसेना को समय की जरूरत बताते हुए कहा है कि भारतीय नौसेना महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों, 'चोक पॉइंट्स' और राष्ट्रीय हितों से से जुड़े डिजिटल ढांचों की सुरक्षा कर रही है जिससे भारत जिम्मेदार समुद्री शक्ति के रूप में पहचान बना रहा है। प्रोजेक्ट 17 ए श्रेणी के चौथे अत्याधुनिक स्वदेशी युद्धपोत आईएनएस तारागिरी को शुक्रवार को आंध्र प्रदेश के विशाखापत्तनम में श्री सिंह की उपस्थिति में भारतीय नौसेना में शामिल किया गया। आधुनिक नौसैनिक जहाज निर्माण का उत्कृष्ट उदाहरण यह नवीनतम स्टील्थ फ्रिगेट, लगभग 6,670 टन के वजन के साथ, युद्धपोत डिजाइन ब्यूरो द्वारा डिजाइन किया गया है और मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड द्वारा सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों के सहयोग से बहु-भूमिका अभियानों के लिए निर्मित किया गया है। यह उन्नत स्टील्थ तकनीक का उपयोग करता है, जिससे इसकी रडार पहचान क्षमता काफी कम हो जाती है और इसे चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में घातक बढ़त मिलती है। पचहत्तर प्रतिशत से अधिक स्वदेशी सामग्री और कम समय में निर्मित आईएनएस तारागिरी भारत की जहाज निर्माण क्षमता और मजबूत सार्वजनिक-निजी सहयोग का उदाहरण है।</p>
<p>रक्षा मंत्री ने अपने संबोधन में आईएनएस तारागिरी को केवल एक युद्धपोत नहीं, बल्कि भारत की बढ़ती तकनीकी क्षमता, आत्मनिर्भरता और सशक्त नौसैनिक शक्ति का प्रतीक बताया। उन्होंने कहा, " यह जहाज उच्च गति से संचालित हो सकता है और लंबे समय तक समुद्र में तैनात रह सकता है। इसमें ऐसे तंत्र लगे हैं जो दुश्मन की गतिविधियों पर नजर रखते हैं, अपनी सुरक्षा सुनिश्चित करते हैं और आवश्यकता पड़ने पर तुरंत जवाब दे सकते हैं। इसमें आधुनिक रडार, सोनार और ब्रह्मोस जैसी मिसाइल प्रणालियाँ तथा सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइलें लगी हैं, जो इसकी क्षमता को और बढ़ाती हैं। उच्च तीव्रता वाले युद्ध से लेकर समुद्री सुरक्षा, समुद्री डकैती रोधी अभियान, तटीय निगरानी और मानवीय मिशनों तक, यह हर भूमिका में पूरी तरह सक्षम है।"</p>
<p>रक्षा मंत्री ने कहा कि भारत की समुद्री तटरेखा 11,000 किलोमीटर से अधिक है और जो तीन ओर से समुद्र से घिरा है, वह अपने विकास को समुद्र से अलग नहीं देख सकता। उन्होंने कहा कि देश का लगभग 95 प्रतिशत व्यापार समुद्री मार्गों से होता है और ऊर्जा सुरक्षा भी समुद्र पर निर्भर है, इसलिए एक मजबूत और सक्षम नौसेना का निर्माण विकल्प नहीं, बल्कि अनिवार्यता है। समुद्री क्षेत्र के बढ़ते महत्व पर प्रकाश डालते हुए श्री सिंह ने कहा कि वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच भारतीय नौसेना हिंद महासागर क्षेत्र में चौबीसों घंटे अपनी उपस्थिति बनाए रखती है। उन्होंने कहा, " "समुद्र के विशाल क्षेत्र में कई संवेदनशील बिंदु हैं, जहाँ हमारी नौसेना वस्तुओं के निर्बाध प्रवाह को सुनिश्चित करने के लिए लगातार सक्रिय रहती है। जब भी तनाव बढ़ता है, भारतीय नौसेना व्यापारिक जहाजों और तेल टैंकरों की सुरक्षा सुनिश्चित करती है। यह न केवल भारत के राष्ट्रीय हितों की रक्षा कर रही है, बल्कि दुनिया भर में अपने नागरिकों और व्यापार मार्गों की सुरक्षा के लिए हर आवश्यक कदम उठाने के लिए तैयार है। यही क्षमता भारत को एक जिम्मेदार और सशक्त समुद्री शक्ति बनाती है।"</p>
<p>रक्षा मंत्री ने कहा कि आधुनिक डिजिटल युग में विश्व का अधिकांश डेटा समुद्र के नीचे बिछी इंटरनेट केबलों से गुजरता है और इनमें किसी भी प्रकार की क्षति वैश्विक व्यवस्था को प्रभावित कर सकती है। उन्होंने समुद्री सुरक्षा को पारंपरिक दृष्टिकोण से आगे बढ़कर व्यापक और भविष्य उन्मुख ढांचे में देखने का आह्वान किया। उन्होंने कहा, "हमें केवल अपनी तटरेखा की सुरक्षा तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों, संकरे मार्गों और डिजिटल अवसंरचना की सुरक्षा भी सुनिश्चित करनी चाहिए, जो हमारे राष्ट्रीय हितों से जुड़ी हैं। भारतीय नौसेना इन सभी प्रयासों में सक्रिय है। आईएनएस तारागिरी जैसे उन्नत जहाजों का निर्माण और तैनाती पूरे क्षेत्र में शांति और समृद्धि की गारंटी है।"</p>
<p>राजनाथ सिंह ने कहा कि जब भी कोई संकट आता है, चाहे वह निकासी अभियान हो या मानवीय सहायता, भारतीय नौसेना हमेशा अग्रिम पंक्ति में खड़ी रहती है और "आईएनएस तारागिरी हमारी नौसेना की शक्ति, मूल्यों और प्रतिबद्धता को और मजबूत करेगा।" सरकार की प्रतिबद्धता दोहराते हुए कि भारतीय नौसेना को दुनिया की सबसे मजबूत नौसेनाओं में शामिल किया जाएगा, रक्षा मंत्री ने कहा , "आज हम केवल अपनी जरूरतों को पूरा करने तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में भी अपनी जगह बना रहे हैं। डिजाइन से लेकर अंतिम तैनाती तक हर चरण में भारत की भागीदारी है। आईएनएस तारागिरी इसी दृष्टि का प्रतीक है।"</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 03 Apr 2026 18:42:02 +0530</pubDate>
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                <title>होर्मुज़ जलडमरूमध्य से भारत को बड़ी राहत: ईरान ने दी जहाजों को आवाजाही की अनुमति, जानिए और किन देशों के लिए खोला गया रास्ता</title>
                                    <description><![CDATA[ईरान ने भारत, चीन और रूस जैसे मित्र देशों के लिए सामरिक रूप से महत्वपूर्ण होर्मुज़ जलडमरूमध्य मार्ग खोल दिया है। विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने पुष्टि की कि गैर-आक्रामक देशों के जहाजों को समन्वय के साथ अनुमति मिलेगी। संयुक्त राष्ट्र की अपील के बाद लिया गया यह फैसला वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और तेल संकट को कम करने में मील का पत्थर साबित होगा।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/big-relief-to-india-from-the-strait-of-hormuz-iran/article-147917"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/strait-of-hormuz.png" alt=""></a><br /><p>ईरान। होर्मुज़ जलडमरूमध्य से जुड़ी बड़ी खबर सामने आई है। ईरान ने भारत समेत कई मित्र देशों के जहाजों को इस अहम समुद्री मार्ग से गुजरने की अनुमति दे दी है। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने गुरुवार को कहा कि भारत, चीन, रूस, इराक और पाकिस्तान जैसे देशों के लिए मार्ग खोला गया है। मुंबई स्थित ईरान के वाणिज्य दूतावास ने भी इसकी पुष्टि करते हुए बताया कि यह फैसला उन देशों के लिए है जो ईरान के खिलाफ किसी भी तरह की आक्रामक गतिविधियों में शामिल नहीं हैं। हालांकि, जहाजों को इस रास्ते से गुजरने के लिए ईरानी अधिकारियों के साथ समन्वय करना अनिवार्य होगा।</p>
<p>इससे पहले संयुक्त राष्ट्र के महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने होर्मुज़ जलडमरूमध्य को खोलने की अपील की थी। उन्होंने कहा था कि इस मार्ग के लंबे समय तक बंद रहने से तेल, गैस और उर्वरक की आपूर्ति पर गंभीर असर पड़ रहा है, जिससे वैश्विक अर्थव्यवस्था और आम नागरिकों पर दबाव बढ़ रहा है।गुटेरेस ने अमेरिका और  इज़राइल से पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष को समाप्त करने की भी अपील की, वहीं ईरान से पड़ोसी देशों पर हमले रोकने का आग्रह किया।</p>
<p>गौरतलब है कि होर्मुज़ जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे व्यस्त तेल परिवहन मार्गों में से एक है। ऐसे में भारत के लिए इस रास्ते का खुलना ऊर्जा आपूर्ति के लिहाज से बड़ी राहत माना जा रहा है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 26 Mar 2026 09:53:10 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान का ऐलान: अमेरिका-इजरायल के अलावा अन्य देशों के जहाजों को निकलने का दिया जाएगा रास्ता, पाकिस्तान से क्या हुई बात ?</title>
                                    <description><![CDATA[ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान ने स्पष्ट किया है कि अमेरिका और इजरायल को छोड़कर अन्य देशों के जहाजों को सुरक्षित रास्ता दिया जाएगा। होर्मुज जलडमरूमध्य से वैश्विक तेल का 20% व्यापार होता है, जिसे तनाव के कारण बंद किया गया था। अब सुरक्षा पुख्ता कर मित्र देशों के तेल एवं एलएनजी निर्यात में सहयोग का आश्वासन दिया गया है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/iranian-president-masood-pezeshkian-announced-that-ships-from-countries-other/article-147659"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/irani-p.png" alt=""></a><br /><p>तेहरान। ईरान ने अमेरिका और इजरायल को छोड़कर अन्य देशों के जहाजों को होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने की अनुमति देने के लिए कई कदम उठाए हैं। ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान के कार्यालय ने यह जानकारी दी है। </p>
<p>राष्ट्रपति पेजेशकियान ने सोमवार को पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ़ के साथ हुई फोन (एजेंसी) में कहा, किसी भी सूरत में, ईरान ने इस जलमार्ग से ज़हाज़ों के पार होने के लिए सुरक्षा एवं रक्षा के इंतजाम किये गये हैं। शत्रु देशों को छोड़कर अन्य देशों के जहाजों को  इस रास्ते से गुजरने के लिए आवश्यक सहयोग दिया जाएगा।</p>
<p>उल्लेखनीय है कि, अमेरिका और इजरायल ने 28 फरवरी को ईरान में कई ठिकानों पर हमले किए। इन हमलों में ईरान के सर्वोच्च नेता आयतुल्ला अली खामेनेई सहित कई लोगों की मौत हुई। इसके जवाब में, ईरान ने इजरायली क्षेत्र और पश्चिम एशिया में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर हमले किए। </p>
<p>अमेरिका-इजरायल के साथ संघर्ष के कारण ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद कर दिया है, जहां से पूरी दुनिया का करीब 20 प्रतिशत तेल एवं तरलीकृत प्राकृतिक गैस (एलएनजी) होकर गुजरती है। इससे पूरी दुनिया में कच्चे तेल का निर्यात प्रभावित हुआ है। </p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 24 Mar 2026 12:47:48 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>राहत की खबर: ईरानी नौसेना ने भारतीय एलपीजी टैंकर को पार कराया होर्मुज, वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति में भारत की रणनीतिक साख का चला पता </title>
                                    <description><![CDATA[स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में जारी नाकेबंदी के बीच ईरानी नौसेना ने एक भारतीय एलपीजी टैंकर को सुरक्षित रास्ता दिया। तनावपूर्ण युद्ध की स्थिति में भी भारतीय क्रू और ध्वज की पहचान के बाद जहाज को सुरक्षित निकाला गया। तेल टैंकर पूरे सफर के दौरान ईरानी नौसेना के संपर्क में रहा, जिससे वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति में भारत की रणनीतिक साख का पता चलता है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/news-of-relief-iranian-navy-helps-indian-lpg-tanker-cross/article-147401"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/iran-1.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। अमेरिका-ईजरायल से जंग के बीच ईरान ने दुनिया के महत्वपूर्ण जलमार्गों में शामिल स्ट्रेट ऑफ  होर्मुज की भी नाकेबंदी कर रखी है। इस बीच ईरानी नौसेना ने पिछले सप्ताह एक भारतीय एलपीजी टैंकर को सुरक्षित रूप से स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पार कराया। जहाज पर मौजूद एक वरिष्ठ अधिकारी ने नाम नहीं छापने की शर्त पर बताया कि यह टैंकर उन दो भारतीय जहाजों में शामिल था जिन्हें इस संवेदनशील मार्ग से गुजरने की अनुमति दी गई।</p>
<p>स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से सुरक्षित निकलने तक भारतीय तेल टैंकर लगातार ईरानी नौसेना के संपर्क में रहा। ईरान की नौसेना ने जहाज पर लगे झंडे, वह कहां से निकला है और कहां जा रहा है, उसके चालक दल में किस देश के लोग शामिल हैं, ये सब जानकारियां मांगी। जहाज के सभी क्रू मेंबर्स भारतीय थे। इसके बाद जहाज को एक तय मार्ग पर आगे बढ़ाया गया।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 22 Mar 2026 11:01:20 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>जी-7 के छह सदस्यों सहित 7 देशों ने होर्मुज जलडमरूमध्य से सुरक्षित आवागमन सुनिश्चित करने में दिखाई तत्परता, ईरानी हमलों की निंदा की</title>
                                    <description><![CDATA[जापान और ब्रिटेन सहित G7 के सात देशों ने होर्मुज जलडमरूमध्य में वाणिज्यिक जहाजों पर ईरानी हमलों की कड़ी निंदा की है। उन्होंने वैश्विक तेल और गैस आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए नौवहन की स्वतंत्रता का समर्थन किया। इन देशों ने ऊर्जा बाजारों को स्थिर करने और संयुक्त राष्ट्र के नियमों का पालन करने का संकल्प लिया है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/seven-countries-including-six-g-7-members-showed-readiness-to-ensure/article-147215"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/harmoz.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। जी7 के छह सदस्य देशों जापान, कनाडा, ब्रिटेन, फ्रांस, जर्मनी तथा इटली और नीदरलैंड ने वाणिज्यिक जहाजों पर ईरानी हमलों की निंदा की है और कहा है कि वह होर्मुज जलडमरूमध्य से जहाजों का सुरक्षित आवागमन सुनिश्चित करने में योगदान देने के लिए तैयार हैं। </p>
<p>सात देशों के नेताओं ने गुरुवार रात जारी एक संयुक्त बयान में कहा, हम खाड़ी में वाणिज्यिक जहाजों पर ईरान द्वारा किए गए हालिया हमलों, तेल एवं गैस प्रतिष्ठानों सहित नागरिक अवसंरचना पर हमलों और ईरानी बलों द्वारा होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद करने की कड़ी निंदा करते हैं। इन देशों ने बढ़ते संघर्ष पर गहरी चिंता व्यक्त की और ईरान से जलडमरूमध्य को वाणिज्यिक जहाजों के लिए अवरुद्ध करने के प्रयासों, धमकियों, बारूदी सुरंगों को बिछाने, ड्रोन एवं मिसाइल हमलों को तुरंत रोकने का आह्वान किया। उन्होंने ईरान से संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव 2817 का पालन करने का भी आग्रह किया।</p>
<p>उन्होंने तेल एवं गैस प्रतिष्ठानों सहित नागरिक अवसंरचना पर हमलों पर तत्काल व्यापक रोक लगाने की मांग की। बयान में कहा गया कि नौवहन की स्वतंत्रता अंतरराष्ट्रीय कानून का एक मूलभूत सिद्धांत है जिसमें संयुक्त राष्ट्र समुद्री कानून समझौता भी शामिल है। इसमें कहा गया कि ईरान की कार्रवाइयों का असर दुनिया के सभी हिस्सों के लोगों पर पड़ेगा, खासकर सबसे कमजोर वर्गों पर। उन्होंने कहा कि हम होर्मुज जलडमरूमध्य से सुरक्षित आवागमन सुनिश्चित करने के लिए उचित प्रयासों में योगदान देने के लिए तत्पर हैं और हम उन देशों की प्रतिबद्धता का स्वागत करते हैं जो तैयारी संबंधी योजना बना रहे हैं।</p>
<p>अंतर्राष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी द्वारा रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार की समन्वित निकासी को अधिकृत करने के निर्णय का स्वागत करते हुए उन्होंने ऊर्जा बाजारों को स्थिर करने के लिए अन्य कदम उठाने का संकल्प लिया जिसमें कुछ तेल एवं गैस उत्पादक देशों के साथ मिलकर उत्पादन बढ़ाने पर काम करना शामिल है। उन्होंने आश्वासन दिया कि वे संयुक्त राष्ट्र और अंतर्राष्ट्रीय वित्तीय संस्थानों के माध्यम से सबसे अधिक प्रभावित देशों को सहायता करने के लिए भी काम करेंगे।</p>
<p>बयान में कहा गया, समुद्री सुरक्षा एवं नौवहन की स्वतंत्रता सभी देशों के लिए लाभकारी है। हम सभी देशों से अंतरराष्ट्रीय कानून का सम्मान करने और अंतरराष्ट्रीय समृद्धि एवं सुरक्षा के मूलभूत सिद्धांतों का पालन करने का आह्वान करते हैं। इस संयुक्त बयान के लिए हालांकि किसी विशिष्ट भौतिक बैठक की जानकारी नहीं है लेकिन यह 11 मार्च को हुई, जी7 नेताओं की वर्चुआल बैठक में पश्चिम एशिया की बिगड़ती स्थिति पर चर्चा की गयी और नागरिक अवसंरचना पर हमलों की निंदा की।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 20 Mar 2026 17:19:09 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>हॉर्मुज जलडमरूमध्य क्षेत्र में गश्त की योजनाओं से पीछे हटने पर ट्रंप ने सहयोगी देशों पर जताई नाराजगी, बोले-ईरान के साथ जल्द हो सकता है खत्म संघर्ष </title>
                                    <description><![CDATA[राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हॉर्मुज जलडमरूमध्य की सुरक्षा के लिए सहयोगियों की "सुस्ती" पर नाराजगी जताई है। उन्होंने ब्रिटेन और जर्मनी के हिचकिचाते रवैये की आलोचना करते हुए कहा कि ऊर्जा सुरक्षा के लिए इन देशों को खुद आगे आना चाहिए। ट्रंप ने ईरान के साथ युद्ध जल्द खत्म होने का दावा किया, लेकिन त्वरित समाधान की संभावना से इनकार किया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/trump-expressed-displeasure-at-allies-for-withdrawing-from-patrolling-plans/article-146795"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/trump2.png" alt=""></a><br /><p>वॉशिंगटन। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने सहयोगी देशों की आलोचना करते हुए कहा है कि हॉर्मुज जलडमरूमध्य मार्ग को सुरक्षित करने के लिए उन्होंने जिस गठबंधन का प्रस्ताव रखा है, उसके प्रति सहयोगियों में उत्साह की कमी है। हॉर्मुज जलडमरूमध्य से ही दुनिया के ऊर्जा संसाधनों के पाँचवें हिस्से की ज़हाज़ों से जरिये आपूर्ति की जाती है।</p>
<p>ट्रंप ने सोमवार देर रात ओवल ऑफिस में पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि ईरान के साथ संघर्ष जल्द ही खत्म हो सकता है। उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि इस हफ़्ते किसी समाधान की संभावना कम है। उन्होंने इस सैन्य अभियान का बचाव करते हुए कहा कि ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने से रोकने के लिए यह जरूरी था।</p>
<p>ट्रंप ने कहा, यह अभियान जल्द ही खत्म हो जाएगा। हमारी दुनिया कहीं ज्यादा सुरक्षित होगी। गौरतलब है कि ईरान ने 28 फऱवरी को अमेरिका और इजरायल द्वारा किए गए हमलों के जवाब में इस क्षेत्र से होकर गुजरने वाले जहाजों को निशाना बनाने की धमकी दी थी जिसके बाद फ़ारस की खाड़ी से होने वाली ज़हाज़ों की आवाजाही काफ़ी हद तक कम हो गई है। </p>
<p>ट्रंप ने ब्रिटेन की प्रतिक्रिया पर असंतोष ज़ाहिर करते हुए कहा, ब्रिटिश प्रधानमंत्री कीर स्टारमर द्वारा इस संघर्ष में नाटो को शामिल करने में दिखाई गई हिचकिचाहट से मैं खुश नहीं हैं और बहुत हैरान हूँ। मैं ब्रिटेन के रवैये से खुश नहीं था। मुझे लगता है कि शायद वे इसमें शामिल होंगे, लेकिन उन्हें पूरे उत्साह के साथ शामिल होना चाहिए।</p>
<p>कई सहयोगियों ने पहले ही हॉर्मुज जलडमरूमध्य में गश्त करने के लिए राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के आह्वान पर अपनी नाराजगी ज़ाहिर कर दी है। जर्मन चांसलर फ्रेडरिक मर्ज उन नेताओं में शामिल थे जिन्होंने सोमवार देर रात संकेत दिया कि उनका देश फ़ारस की खाड़ी में स्थित इस महत्वपूर्ण जलमार्ग पर गश्त करने में शामिल नहीं हो सकता है। बर्लिन में जर्मन चांसलर फ्रेडरिक मर्ज ने कहा, हमारे पास संयुक्त राष्ट्र, यूरोपीय संघ या नाटो से जरूरी जनादेश नहीं है, जो हमारे मूल कानून के तहत आवश्यक है। उन्होंने यह भी कहा कि युद्ध शुरू करने से पहले अमेरिका और इजरायल ने जर्मनी से कोई सलाह-मशविरा नहीं किया था।</p>
<p>इससे पहले, ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टारमर ने कहा था कि ब्रिटेन हॉर्मुज जलडमरूमध्य को साफ़ करने के लिए बारूदी सुरंगों का पता लगाने वाले ड्रोन के इस्तेमाल की संभावना पर चर्चा कर रहा है। साथ ही उन्होंने यह भी संकेत दिया कि ब्रिटेन  के युद्ध क्षेत्र में अपने युद्धपोत भेजने की संभावना कम ही है। अमेरिका के दो और अहम सहयोगी, जापान और ऑस्ट्रेलिया, ने भी सोमवार को संकेत दिया कि वे विवादित होर्मुज जलडमरूमध्य में गश्त के लिए नौसैनिक ज़हाज़ भेजने को शायद तैयार न हों। यह बात तब सामने आई जब अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा था कि अमेरिका खाड़ी के तेल पर निर्भर सात देशों से बात कर रहा है ताकि इस संकरे लेकिन रणनीतिक समुद्री गलियारे में ज़हाज़ों की सुरक्षा में मदद मिल सके।</p>
<p>ट्रंप ने रविवार को एयर फ़ोर्स वन में पत्रकारों से बात करते हुए कहा था कि इस संकरे जलमार्ग से गुजरने वाले व्यापारिक ज़हाज़ों की सुरक्षा में मदद के लिए कई सरकारों से संपर्क किया गया है। हालांकि, ट्रंप ने उन देशों के नाम नहीं बताए, लेकिन शनिवार को एक सोशल मीडिया पोस्ट में उन्होंने कहा था कि उन्हें उम्मीद है कि चीन, जापान, दक्षिण कोरिया, ब्रिटेन और अन्य देश, जो इस कृत्रिम बाधा से प्रभावित हैं, इस अहम जलडमरूमध्य में गश्त के लिए ज़हाज़ भेजेंगे।</p>
<p>ट्रंप ने पत्रकारों से कहा था, मैं मांग कर रहा हूं कि ये देश आगे आएं और अपने ही क्षेत्र की रक्षा करें, क्योंकि यह उनका ही क्षेत्र है उन्हें मिलकर काम करना चाहिए, क्योंकि उन्हें अपनी ऊर्जा इसी क्षेत्र से मिलती है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 17 Mar 2026 13:26:13 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>नाटो के भविष्य पर मंडराया संकट: अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने होर्मुज़ जलडमरूमध्य खोलने के लिए मांगी सहयोगी देशों से मदद  </title>
                                    <description><![CDATA[राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने वैश्विक तेल आपूर्ति बहाल करने हेतु चीन, जापान और ब्रिटेन से होर्मुज जलडमरूमध्य में युद्धपोत भेजने की मांग की है। उन्होंने सहयोग न करने पर नाटो के भविष्य को लेकर चेतावनी दी। ईरान ने वार्ता की पेशकश की है, लेकिन 20 जहाजों पर हमलों के बाद ऊर्जा संकट का खतरा गंभीर बना हुआ है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/crisis-looms-over-natos-future-us-president-trump-seeks-help/article-146711"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-01/trump2.png" alt=""></a><br /><p>वाशिंगटन। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने होर्मुज जलडमरूमध्य के बंद होने की आशंकाओं के बीच कहा है कि चीन, फ्रांस, जापान, दक्षिण कोरिया, ब्रिटेन और अन्य देश इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग की सुरक्षा के लिए युद्धपोत भेजें। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि सहयोगी देश मदद नहीं करते हैं तो नाटो के लिए भविष्य "बहुत खराब" हो सकता है।</p>
<p>मीडिया रिपोर्टों के अनुसार अब तक ऑस्ट्रेलिया और जापान ने स्पष्ट किया है कि वे फिलहाल अपने जहाज भेजने की योजना नहीं बना रहे हैं। ब्रिटेन ने कहा है कि वह विकल्पों पर विचार कर रहा है, जबकि चीन ने संघर्ष को तत्काल समाप्त करने का आह्वान किया है। इस बीच ईरान के विदेश मंत्री ने कहा है कि जो देश जलडमरूमध्य के सुरक्षित उपयोग को लेकर बातचीत करना चाहते हैं, उनके साथ तेहरान चर्चा के लिए तैयार है।</p>
<p>ब्रिटेन की समुद्री एजेंसी के अनुसार पिछले तीन दिनों में कोई नई घटना सामने नहीं आई है, लेकिन जलडमरूमध्य पर खतरा अभी भी "गंभीर" बना हुआ है। युद्ध शुरू होने के बाद से फारस की खाड़ी, होर्मुज जलडमरूमध्य और ओमान की खाड़ी के आसपास कम से कम 20 जहाजों पर हमले हो चुके हैं।</p>
<p>रिपोर्टों के अनुसार, ईरान द्वारा इस प्रमुख समुद्री मार्ग को बंद किए जाने से विश्व के लगभग पांचवें हिस्से की तेल आपूर्ति प्रभावित हुई है, जिससे वैश्विक बाजार में तेल की कीमतों में तेज वृद्धि और ऊर्जा संकट की आशंका बढ़ गयी है। इसी बीच, ट्रंप ने कहा है कि इस मुद्दे पर चीन की भूमिका भी महत्वपूर्ण है। उन्होंने संकेत दिया कि महीने के अंत में चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ प्रस्तावित बैठक से पहले वह यह जानना चाहते हैं कि चीन जलडमरूमध्य को फिर से खोलने में सहयोग करेगा या नहीं।</p>
<p>उधर जापान की प्रधानमंत्री साने ताकाइची ने कहा कि जापान ने फिलहाल नौसैनिक जहाज भेजने का कोई निर्णय नहीं लिया है और देश अपने कानूनी ढांचे के भीतर संभावित विकल्पों पर विचार कर रहा है। ऑस्ट्रेलिया ने भी स्पष्ट किया है कि उसने इस मिशन में जहाज भेजने का कोई निर्णय नहीं लिया है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 16 Mar 2026 18:43:49 +0530</pubDate>
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                <title>होर्मुज संकट: अमेरिका की अपील के बावजूद जापान और ऑस्ट्रेलिया में होर्मुज़ जलडमरूमध्य में गश्त को लेकर असमंजस बरकार </title>
                                    <description><![CDATA[राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने होर्मुज जलडमरूमध्य की सुरक्षा हेतु सहयोगियों से युद्धपोत भेजने की अपील की है। हालांकि, जापान और ऑस्ट्रेलिया ने फिलहाल नौसैनिक बेड़े भेजने से इनकार कर दिया है। जापान अपने कानूनी दायरे की समीक्षा कर रहा है, जबकि ऑस्ट्रेलिया केवल सैन्य विमान तैनात करेगा। वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा के लिए यह समुद्री मार्ग अत्यंत महत्वपूर्ण बना हुआ है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/despite-americas-appeal-confusion-persists-in-japan-and-australia-regarding/article-146714"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-01/trump3.png" alt=""></a><br /><p>वाशिंगटन। अमेरिका के दो प्रमुख सहयोगी देशों जापान और ऑस्ट्रेलिया ने सोमवार को संकेत दिया कि वे विवादित होर्मुज जलडमरूमध्य मार्ग में गश्त के लिए अपने नौसैनिक जहाज़ तैनात करने को शायद तैयार न हों। यह संकेत तब आया है जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा था कि अमेरिका खाड़ी क्षेत्र के तेल पर निर्भर सात देशों से बातचीत कर रहा है और यह बातचीत इस संकरे लेकिन रणनीतिक समुद्री मार्ग में जहाज़ों की सुरक्षा में मदद पहुंचाने को लेकर हो रही है।</p>
<p>'एयर फ़ोर्स वन' में सवार होकर पत्रकारों से बात करते हुए ट्रंप ने रविवार को कहा कि इस संकरे जलमार्ग से गुज़रने वाले व्यापारिक जहाज़ों की सुरक्षा में मदद के लिए कई सरकारों से संपर्क किया गया है। हालांकि, उन्होंने उन देशों के नाम नहीं बताये। इससे पहले उन्होंने शनिवार को एक सोशल मीडिया पोस्ट में कहा था कि उन्हें उम्मीद है कि चीन, जापान, दक्षिण कोरिया, ब्रिटेन और अन्य ऐसे देश जो इस कृत्रिम बाधा से प्रभावित हैं, वे इस महत्वपूर्ण जलडमरूमध्य में गश्त के लिए अपने जहाज़ भेजेंगे।</p>
<p>ट्रंप ने कहा, "मैं अपील कर रहा हूं कि ये देश आगे आएं और अपने क्षेत्र की सुरक्षा करें, क्योंकि यह उनका ही क्षेत्र है।" उन्होंने कहा कि उन्हें आपस में सहयोग करना चाहिए, क्योंकि उन्हें ऊर्जा इसी क्षेत्र से मिलती है। अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा कि उन्हें उम्मीद है कि जिन देशों से संपर्क किया गया है, उनमें से कई देश जलडमरूमध्य से जहाजों के सुरक्षित गुज़रने की सुविधा प्रदान करने के लिए नौसैनिक जहाज़ तैनात करेंगे। यह जलडमरूमध्य एक अहम समुद्री मार्ग है, जिससे दुनिया की लगभग 20 प्रतिशत तेल आपूर्ति गुज़रती है।</p>
<p>राष्ट्रपति ट्रंप ने 'ऑपरेशन एपिक फ्यूरी' के बारे में बातचीत करते हुए संकेत दिया कि ईरान के साथ बातचीत अभी भी अनिश्चित बनी हुई है। उन्होंने कहा, "वे बातचीत करने के लिए बहुत ज़्यादा उत्सुक हैं जैसा कि उन्हें होना भी चाहिए लेकिन मुझे नहीं लगता कि वे वह करने के लिए तैयार हैं जो उन्हें करना चाहिए।" उन्होंने कहा, "हम इस काम को पूरा करेंगे।"</p>
<p>उल्लेखनीय है कि, फरवरी के अंत में शुरू हुई अमेरिका और इज़रायल तथा ईरान के बीच की जंग अब तक काफ़ी बढ़ गई है। इसके कारण इस संघर्ष ने टैंकरों की आवाजाही को बाधित किया है और वैश्विक ऊर्जा बाज़ारों में अस्थिरता पैदा कर दी है। ईरान ने ड्रोन, बारूदी सुरंगों आदि का इस्तेमाल करके इस मार्ग से होने वाली तेल की खेपों को रोकने का सहारा लिया है।</p>
<p>जापान की प्रधानमंत्री सनाए ताकाइची ने सोमवार को कहा कि जापान ने इस क्षेत्र में बढ़ते तनाव के बीच पश्चिम एशिया में जहाजों की सुरक्षा के लिए नौसैनिक जहाज़ भेजने का कोई फ़ैसला नहीं किया है। संसद में उन्होंने कहा कि सरकार अभी भी इस बात की जाँच कर रही है कि जापान के कानूनी दायरे के भीतर कौन से कदम उठाए जा सकते हैं और वह स्वतंत्र रूप से कौन सी कार्रवाई कर सकती है। उन्होंने कहा, "हमने सुरक्षा के लिए जहाज़ भेजने के बारे में अभी तक कोई फ़ैसला नहीं किया है। हम लगातार इस बात की जाँच कर रहे हैं कि जापान स्वतंत्र रूप से क्या कर सकता है और कानूनी दायरे के भीतर क्या किया जा सकता है।"</p>
<p>जापानी प्रधानमंत्री ने बताया कि अमेरिका ने इस क्षेत्र में जहाजों की सुरक्षा में मदद के लिए जापान से कोई औपचारिक अनुरोध नहीं किया है। जापान पश्चिमी एशिया से होने वाले ऊर्जा आयात पर बहुत ज़्यादा निर्भर है। उसके लगभग 70 प्रतिशत आयातित ऊर्जा संसाधन इसी क्षेत्र से आते हैं। इस वजह से, वहाँ के समुद्री मार्गों में स्थिरता बनाए रखना देश की ऊर्जा सुरक्षा के लिए बेहद ज़रूरी है।</p>
<p>इस बीच, भारत-प्रशांत क्षेत्र में अमेरिका के एक और अहम सहयोगी ऑस्ट्रेलिया ने संकेत दिया है कि इस क्षेत्र में उसकी भूमिका सीमित ही रहेगी। एक रेडियो इंटरव्यू में अवसंचना एवं परिवहन मंत्री कैथरीन किंग ने बताया कि देश रक्षा से जुड़ी गतिविधियों में मदद के लिए संयुक्त अरब अमीरात में एक सैन्य विमान तैनात करने की योजना बना रहा है।</p>
<p>हालांकि, उन्होंने यह साफ किया कि ऑस्ट्रेलिया होर्मुज जलडमरूमध्य में नौसेना के जहाज़ नहीं भेजेगा। उनके मुताबिक, ऑस्ट्रेलिया को जहाज़ भेजने के लिए कोई अनुरोध नहीं मिला है और वह इस जलडमरूमध्य से समुद्री आवाजाही बहाल करने के मकसद से चलाए जा रहे अभियान में शामिल नहीं है। उन्होंने आगे कहा कि सरकार की फिलहाल इस इलाके में नौसेना बल भेजने की कोई योजना नहीं है।</p>
<p>इससे पहले, ऑस्ट्रेलिया के विदेश मामले और व्यापार विभाग ने अपने 'स्मार्टट्रैवलर' प्लेटफॉर्म के ज़रिए इस क्षेत्र के कई देशों के लिए यात्रा संबंधी सलाह पहले ही जारी कर दी थी। विभाग ने शनिवार को अपनी सलाह का दायरा बढ़ाते हुए ऑस्ट्रेलियाई नागरिकों से आग्रह किया कि वे उन देशों से गुज़रने से भी बचें जिसमें देश में प्रवेश किए बिना सिर्फ़ एयरपोर्ट टर्मिनल के अंदर रुकना भी शामिल है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 16 Mar 2026 16:58:03 +0530</pubDate>
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                <title>मिडिल ईस्ट में तनाव बीच सईद इरावानी का बड़ा बयान: होर्मुज में शांति एवं सुरक्षा बनाए रखना ईरान का निहित अधिकार</title>
                                    <description><![CDATA[संयुक्त राष्ट्र में ईरान के प्रतिनिधि अमीर सईद इरावानी ने होर्मुज जलडमरूमध्य में सुरक्षा बनाए रखना अपना अधिकार बताया है। उन्होंने मौजूदा तनाव के लिए अमेरिकी कार्रवाइयों को जिम्मेदार ठहराया। वहीं, नए सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई ने इस रणनीतिक मार्ग को अवरुद्ध करने के हथियार को जारी रखने का आह्वान कर वैश्विक चिंता बढ़ा दी है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/saeed-iravanis-big-statement-amid-tension-in-the-middle-east/article-146400"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/said.png" alt=""></a><br /><p>न्यूयॉर्क। संयुक्त राष्ट्र में ईरान के स्थायी प्रतिनिधि अमीर सईद इरावानी ने कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य क्षेत्र में शांति और सुरक्षा बनाए रखना उनके देश का निहित अधिकार है। इरावानी ने गुरुवार को संवाददाताओं से कहा कि ईरान अंतरराष्ट्रीय समुद्र कानून के तहत नौवहन की स्वतंत्रता के सिद्धांत का पूरी तरह से सम्मान करता है और इसके प्रति प्रतिबद्ध है।</p>
<p>प्रतिनिधि ने कहा, होर्मुज जलडमरूमध्य सहित क्षेत्र की वर्तमान स्थिति ईरान की आत्मरक्षा का परिणाम नहीं है, बल्कि यह ईरान पर हमला करने और क्षेत्रीय सुरक्षा को कमजोर करने की अमेरिका की कार्रवाइयों का प्रत्यक्ष परिणाम है।</p>
<p>ईरान के नए सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई ने गुरुवार को होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद रखने का आह्वान करते हुए कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य को अवरुद्ध करने के हथियार का उपयोग निश्चित रूप से जारी रहना चाहिए।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 13 Mar 2026 18:42:33 +0530</pubDate>
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