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                <title>Maritime Security - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <description>Maritime Security RSS Feed</description>
                
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                <title>ईरान-पाकिस्तान वार्ता : मॉस्को रवाना हुए Abbas Araghchi ; पुतिन से करेंगे अहम मुलाकात, मध्यस्थता प्रयासों के बीच अमेरिका से वार्ता जारी रखने पर चर्चा </title>
                                    <description><![CDATA[ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने पाकिस्तान, ओमान और रूस के साथ गहन कूटनीतिक चर्चा की है। अमेरिका के साथ संवाद बहाली और होर्मुज जलडमरूमध्य में समुद्री सुरक्षा पर ध्यान केंद्रित करते हुए, वे अब मास्को में राष्ट्रपति पुतिन से मुलाकात करेंगे। इस दौरे का उद्देश्य क्षेत्रीय तनाव कम करना और वैश्विक स्थिरता सुनिश्चित करना है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/iran-pakistan-talks-abbas-araghchi-leaves-for-moscow-will-have-an/article-151885"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/iran7.png" alt=""></a><br /><p>मॉस्को। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने सोमवार को कहा कि उनकी पाकिस्तान यात्रा के दौरान कई मध्यस्थों की भागीदारी वाले क्षेत्रीय राजनयिक प्रयासों के बीच अमेरिका के साथ बातचीत को निरंतर जारी रखे जाने को लेकर पाकिस्तान के साथ चर्चा की गयी है। अराघची ने टेलीग्राम पर लिखा, "पाकिस्तान में मेरे दोस्तों के साथ मेरी अच्छी बातचीत हुई और यह दौरा सफल रहा। हमने इस बात पर चर्चा की कि किन परिस्थितियों में और किस तरह से बातचीत जारी रखी जा सकती है।"</p>
<p>क्षेत्रीय स्तर पर समानांतर परामर्श के दौरान, अराघची ने ओमान में हुई चर्चाओं का भी उल्लेख किया जहां ईरानी और ओमानी अधिकारियों ने होर्मुज जलडमरूमध्य में हो रहे घटनाक्रमों पर बात की। उनका कहना है कि दोनों पक्षों ने समुद्री सुरक्षा पर समान रुख अपनाया और इस मुद्दे पर विशेषज्ञ स्तर का संवाद जारी रखने पर सहमति व्यक्त की। ईरानी विदेश मंत्री आगे की बातचीत के लिए मास्को रवाना हुए हैं। ईरानी अधिकारियों ने संकेत दिया है कि वह सोमवार को रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से मुलाकात करेंगे और वार्ता की वर्तमान स्थिति, युद्धविराम से संबंधित घटनाक्रम और व्यापक क्षेत्रीय स्थितियों पर चर्चा करेंगे।</p>
<p>हाल के वर्षों में रूस और ईरान के राजनीतिक और रणनीतिक संबंध मजबूत हुए हैं खासकर तब जब दोनों देश व्यापक पश्चिम देशों के प्रतिबंधों के साए में हैं। ईरान के विदेश मंत्रालय के सूत्रों ने कहा कि चर्चा में मध्यस्थता प्रयासों और चल रहे क्षेत्रीय संघर्षों पर अद्यतन जानकारी शामिल होगी। इसके अलावा, ओमान के अधिकारियों ने यह भी कहा कि श्री अराघची के साथ हुई चर्चा में क्षेत्रीय स्थिरता, होर्मुज जलडमरूमध्य में समुद्री सुरक्षा और तनाव कम करने के उद्देश्य से चल रहे मध्यस्थता प्रयासों पर ध्यान केंद्रित किया गया। ओमान के प्रतिनिधियों ने क्षेत्र में चल रहे संकटों के लिए संवाद और राजनयिक समाधानों के महत्व पर बल दिया।</p>
<p>ये राजनयिक प्रयास ऐसे समय में किए जा रहे हैं जब अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थ क्षेत्र में पहले के संघर्ष संबंधी तनावों और प्रत्यक्ष वार्ता में लंबे समय तक विराम के बाद ईरान और अमेरिका के बीच अप्रत्यक्ष संपर्क बनाए रखने के प्रयास जारी रखे हुए हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 27 Apr 2026 18:26:05 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>भारत और मिस्र ने द्विपक्षीय रक्षा सहयोग के लिए जताई सहमति : उन्मुख भविष्य के लिए रूपरेखा तैयार, भारतीय प्रतिनिधिमंडल ने हेलियोपोलिस युद्ध स्मारक पर पुष्पांजलि अर्पित की</title>
                                    <description><![CDATA[काहिरा में आयोजित 11वीं संयुक्त रक्षा समिति की बैठक में भारत और मिस्र ने 2026-27 के लिए रक्षा सहयोग योजना पर मुहर लगाई। दोनों देश अब रक्षा विनिर्माण में सह-उत्पादन और समुद्री सुरक्षा को मजबूत करेंगे। भारत ने अपनी $20 अरब की रक्षा निर्माण क्षमता का प्रदर्शन करते हुए रणनीतिक संबंधों को नई ऊंचाइयों पर पहुँचाया है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/india-and-egypt-agree-on-plan-for-bilateral-defense-cooperation/article-151451"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/भारत-और-मिस्र.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। भारत और मिस्र ने द्विपक्षीय रक्षा सहयोग को प्रगाढ बनाने के लिए द्विपक्षीय रक्षा सहयोग योजना पर सहमति व्यक्त की है। भारत–मिस्र संयुक्त रक्षा समिति ने बुधवार को काहिरा में संपन्न् तीन दिन की अपनी 11वीं बैठक के दौरान द्विपक्षीय रक्षा सहयोग को सुदृढ़ करने के लिए सार्थक चर्चा की। भारतीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व संयुक्त सचिव (अंतरराष्ट्रीय सहयोग) अमिताभ प्रसाद ने किया और इसमें रक्षा मंत्रालय तथा सशस्त्र बलों के वरिष्ठ प्रतिनिधि शामिल थे। मिस्र के प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व रक्षा बलों और रक्षा मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों ने किया।</p>
<p>रक्षा मंत्रालय ने गुरुवार को बताया कि दोनों पक्षों ने पिछली संयुक्त रक्षा समिति बैठक के बाद हुई प्रगति की व्यापक समीक्षा की और रक्षा सहभागिता के लिए एक भविष्य उन्मुख रूपरेखा तैयार की। उन्होंने 2026-27 के लिए द्विपक्षीय रक्षा सहयोग योजना पर सहमति व्यक्त की, जिसमें संरचित सैन्य संपर्क तंत्र का विस्तार, संयुक्त प्रशिक्षण आदान-प्रदान को मजबूत करना, समुद्री सुरक्षा सहयोग को बढ़ाना, सैन्य अभ्यासों के दायरे और जटिलता को बढ़ाना तथा रक्षा उत्पादन और प्रौद्योगिकी में सहयोग को प्रोत्साहित करना शामिल है।</p>
<p>भारतीय प्रतिनिधिमंडल ने भारतीय रक्षा उद्योग की तेजी से बढ़ती विनिर्माण क्षमताओं पर प्रस्तुति दी। इसमें बताया गया कि भारत का रक्षा उत्पादन 20 अरब डॉलर से अधिक हो चुका है और भारत 100 से अधिक देशों को लगभग 4 अरब डॉलर के उत्पाद निर्यात कर रहा है। दोनों पक्षों ने रक्षा उद्योग सहयोग योजना विकसित करने के लिए साथ मिलकर काम करने पर सहमति व्यक्त की। रक्षा उद्योग सहयोग भारत–मिस्र रक्षा संबंधों का एक प्रमुख स्तंभ बनकर उभर रहा है, जिसमें दोनों पक्ष रक्षा विनिर्माण के क्षेत्र में सह-विकास और सह-उत्पादन के अवसरों की तलाश कर रहे हैं।</p>
<p>बैठक के दौरान पहली बार नौसेना-से-नौसेना स्टाफ वार्ता भी आयोजित की गई। भारतीय नौसेना द्वारा हिंद महासागर क्षेत्र में नौवहन की स्वतंत्रता को बढ़ावा देने में निभाई गई महत्वपूर्ण भूमिका की जानकारी दी गई और समुद्री सुरक्षा को प्रोत्साहित करने में भारत के सूचना संलयन केंद्र की प्रमुख भूमिका को रेखांकित किया गया। भारतीय प्रतिनिधिमंडल ने मिस्र वायु सेना के कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल अम्र अब्देल रहमान सक्र से भी मुलाकात की। प्रतिनिधिमंडल ने दोनों देशों की वायु सेनाओं के बीच घनिष्ठ सहयोग के लिए आभार व्यक्त किया।</p>
<p>भारतीय प्रतिनिधिमंडल ने हेलियोपोलिस युद्ध स्मारक पर पुष्पांजलि अर्पित की और प्रथम तथा द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान सर्वोच्च बलिदान देने वाले भारतीय वीरों को श्रद्धांजलि दी। भारत–मिस्र रक्षा साझेदारी में सितंबर 2022 में रक्षा मंत्री की मिस्र यात्रा के दौरान रक्षा क्षेत्र में सहयोग पर समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर करना एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर था। वर्ष 2023 में द्विपक्षीय संबंधों को रणनीतिक साझेदारी के स्तर तक उन्नत किया गया। 11वीं बैठक ने दोनों देशों के बीच घनिष्ठ संबंधों की पुष्टि की और क्षेत्रीय सुरक्षा तथा स्थिरता के प्रति उनकी पारस्परिक प्रतिबद्धता को सुदृढ़ किया।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 23 Apr 2026 15:02:22 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>होर्मुज में भड़का तनाव: अमेरिकी सेना द्वारा जहाज को रोके जाने के बाद ईरान ने दी जवाबी कार्रवाई की चेतावनी, नाकाबंदी का उल्लंघन करने का प्रयास</title>
                                    <description><![CDATA[अमेरिकी सेंटकॉम ने ओमान की खाड़ी में नाकाबंदी का उल्लंघन करने पर ईरानी मालवाहक जहाज 'तौस्का' को गोले दागकर निष्क्रिय कर दिया। राष्ट्रपति ट्रंप की घोषणा के बाद अमेरिकी नौसेना ने जहाज पर नियंत्रण कर लिया है। ईरान ने इस कार्रवाई को 'सशस्त्र डकैती' करार देते हुए जवाबी सैन्य कार्रवाई की कड़ी चेतावनी दी है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/iran-warns-of-retaliation-after-us-military-intercepts-ship-attempt/article-151044"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/hormuz2.png" alt=""></a><br /><p>वॉशिंगटन। ईरानी सशस्त्र बलों ने अमेरिकी केंद्रीय कमान (सेंटकॉम) ने द्वारा इस बात की पुष्टि किये जाने के बाद की उसने ओमान की खाड़ी में एक ईरानी व्यापारिक जहाज को रोका है, त्वरित प्रतिक्रिया देने का वादा किया है। यह जहाज कथित तौर पर क्षेत्र में अमेरिकी नाकाबंदी का उल्लंघन करने का प्रयास कर रहा था। इससे पहले, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने घोषणा की थी कि अमेरिकी बलों ने ओमान की खाड़ी में एक ईरानी ध्वज वाले मालवाहक जहाज को रोका है , जिससे उसके इंजन कक्ष को नुकसान पहुंचा है।</p>
<p>कमान ने एक बयान में कहा, "अरब सागर में तैनात अमेरिकी बलों ने 19 अप्रैल को एक ईरानी बंदरगाह की ओर जाने का प्रयास कर रहे एक ईरानी ध्वज वाले मालवाहक जहाज के खिलाफ नौसैनिक नाकाबंदी लागू की।" सेंटकॉम के अनुसार, ईरानी पोत को नाकाबंदी उल्लंघन के बारे में कई चेतावनियाँ दी गई थीं। बयान में कहा गया है, "छह घंटे की अवधि में बार-बार दी गई चेतावनियों के बावजूद, जब तौस्का के चालक दल ने पालन नहीं किया, तो स्पूरांस ने पोत को अपने इंजन कक्ष को खाली करने का निर्देश दिया। स्पूरांस ने विध्वंसक पोत की 5-इंच एमके 45 तोप से तौस्का के इंजन कक्ष में कई गोले दागकर तौस्का के प्रणोदन तंत्र को निष्क्रिय कर दिया।"</p>
<p>इसके बाद, अमेरिकी मरीन मालवाहक पोत पर सवार हो गए। कमांड के अनुसार, पोत वर्तमान में अमेरिकी नियंत्रण में है। कमान ने कहा, "नाकाबंदी शुरू होने के बाद से, अमेरिकी सेना ने 25 वाणिज्यिक पोतों को वापस मुड़ने या किसी ईरानी बंदरगाह पर लौटने का निर्देश दिया है।" अमेरिकी कार्रवाई पर प्रतिक्रिया देते हुए, ईरान के खातम अल-अनबिया सैन्य कमान के एक प्रवक्ता ने कहा कि ओमान की खाड़ी में अमेरिकी सेना द्वारा एक ईरानी पोत को जब्त करने पर ईरान तुरंत जवाब देगा।</p>
<p>एक समाचार एजेन्सी के अनुसार, ईरानी सैन्य कमान के एक प्रवक्ता ने कहा, “हम चेतावनी देते हैं कि अमेरिकी सेना द्वारा की जा रही इस सशस्त्र डकैती का जवाब ईरान के सशस्त्र बल जल्द ही देंगे।” 13 अप्रैल को, अमेरिकी नौसेना ने होर्मुज जलडमरूमध्य के दोनों ओर स्थित ईरानी बंदरगाहों से आने-जाने वाले सभी समुद्री यातायात की नाकाबंदी शुरू कर दी। यह जलडमरूमध्य विश्व के लगभग 20 प्रतिशत तेल, पेट्रोलियम उत्पादों और एलएनजी आपूर्ति का स्रोत है। वाशिंगटन का कहना है कि गैर-ईरानी जहाज होर्मुज जलडमरूमध्य से तब तक स्वतंत्र रूप से गुजर सकते हैं जब तक वे तेहरान को कोई शुल्क नहीं देते। ईरानी अधिकारियों ने शुल्क लगाने की घोषणा नहीं की है, लेकिन ऐसी योजनाओं पर चर्चा की है।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 20 Apr 2026 12:27:31 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>अंतरराष्ट्रीय कानून के अनुपालन के लिए ईरानी विदेश मंत्रालय ने यूरोपीय संघ की अपील को किया खारिज, होर्मुज़ जलड़मरूमध्य से ज़हाजों के आवागमन की स्थिति को देखते हुए पाखंड बताया</title>
                                    <description><![CDATA[ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य पर यूरोपीय संघ की 'टोल-फ्री' आवागमन की मांग को "पाखंड" बताते हुए खारिज कर दिया है। ईरानी प्रवक्ता इस्माइल बगाई ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय कानून ईरान को सैन्य आक्रामकता रोकने से नहीं रोकता। अमेरिकी नाकाबंदी के विरोध में आईआरजीसी ने शनिवार से होर्मुज जलडमरूमध्य को पूरी तरह बंद करने की घोषणा की है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/iranian-foreign-ministry-rejects-eus-appeal-to-comply-with-international/article-150997"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/hormuz1.png" alt=""></a><br /><p>मॉस्को। ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बगाई ने होर्मुज जलडमरूमध्य से जहाजों के आवागमन की स्थिति को देखते हुए अंतरराष्ट्रीय कानून के अनुपालन के लिए यूरोपीय संघ की अपील को खारिज करते हुए इसे "चरम पाखंड" बताया। बगाई यूरोपीय संघ की विदेश नीति प्रमुख काजा कल्लास के 17 अप्रैल के पोस्ट पर टिप्पणी कर रहे थे, जिसमें उन्होंने ईरान से होर्मुज जलडमरूमध्य से जहाजों के लिए बिना शुल्क और टोल मुक्त आवागमन सुनिश्चित करने का आह्वान किया था। कल्लास ने अपने पोस्ट में कहा था कि "अंतरराष्ट्रीय कानून के अनुसार," होर्मुज जलडमरूमध्य से आवागमन बिना शुल्क और टोल मुक्त होना चाहिए।</p>
<p>बगाई ने कल्लास की पोस्ट के जवाब में ‘एक्स’ पर कहा, “अरे, वो ‘अंतर्राष्ट्रीय कानून’?! वही कानून जिसका हवाला देकर यूरोपीय संघ दूसरों को उपदेश देता है, जबकि चुपचाप अमेरिका-इजरायल के आक्रामक युद्ध को हरी झंडी देता है और ईरानियों पर हो रहे अत्याचारों को अनदेखा करता है?! उपदेश देना बंद करो; यूरोप की अपने उपदेशों पर अमल न करने की आदत ने उसके ‘अंतर्राष्ट्रीय कानून’ के वादों को पाखंड की पराकाष्ठा में बदल दिया है।” राजनयिक ने इस बात पर जोर दिया कि अंतर्राष्ट्रीय कानून का कोई भी प्रावधान ईरान को, एक तटीय राज्य होने के नाते, “होर्मुज जलडमरूमध्य का इस्तेमाल ईरान के खिलाफ सैन्य आक्रमण के लिए होने से रोकने के लिए आवश्यक कदम उठाने” से नहीं रोकता है।</p>
<p>ईरानी आईआरजीसी नौसेना ने घोषणा की कि उसने शनिवार शाम से होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद कर दिया है, और यह तब तक लागू रहेगा जब तक अमेरिकी नौसैनिक नाकाबंदी पूरी तरह से हटा नहीं ली जाती। अमेरिकी नौसेना ने 13 अप्रैल को होर्मुज जलडमरूमध्य के दोनों ओर स्थित ईरानी बंदरगाहों से आने-जाने वाले सभी समुद्री यातायात की नाकाबंदी शुरू कर दी। यह जलडमरूमध्य विश्व के लगभग 20 प्रतिशत तेल, पेट्रोलियम उत्पाद और एलएनजी आपूर्ति का स्रोत है।</p>
<p>वाशिंगटन का कहना है कि गैर-ईरानी जहाज होर्मुज जलडमरूमध्य से तब तक स्वतंत्र रूप से गुजर सकते हैं जब तक वे तेहरान को कोई शुल्क नहीं देते। ईरानी अधिकारियों ने शुल्क लगाने की घोषणा नहीं की है, लेकिन ऐसी योजनाओं पर चर्चा की है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 19 Apr 2026 16:34:25 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>पश्चिम एशिया तनाव : सुरक्षा परिषद में पश्चिमी एशिया पर रूस-चीन के प्रस्ताव पर होगी चर्चा, रूसी विदेश मंत्रालय की रिपोर्ट में खुलासा</title>
                                    <description><![CDATA[पश्चिम एशिया में तनाव घटाने के लिए रूस और चीन ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में एक नया संकल्प प्रस्तावित किया है। इस मसौदे में समुद्री सुरक्षा और बातचीत के जरिए समाधान पर जोर दिया गया है। मतदान की तारीख जमीनी हालात के आधार पर तय होगी। दोनों देशों ने होर्मुज जलडमरूमध्य पर पुराने प्रस्तावों का विरोध किया है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/west-asia-tension-russia-china-proposal-on-west-asia-will-be/article-150203"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/unsc.png" alt=""></a><br /><p>मॉस्को। पश्चिम एशिया में तनाव कम करने के लिए रूस और चीन की ओर से प्रस्तावित संकल्प पर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (यूएनएससी) में मतदान की तारीख वहां की जमीनी स्थिति के आधार पर तय की जाएगी। रूस के विदेश मंत्रालय ने यह जानकारी दी। इससे पहले, रूस और चीन ने प्रस्ताव दिया था कि सुरक्षा परिषद पश्चिमी एशिया की वर्तमान स्थिति पर एक वैकल्पिक मसौदा प्रस्ताव पर विचार करे, जिसमें समुद्री सुरक्षा के पहलुओं को भी शामिल किया जाये।</p>
<p>रूस के विदेश मंत्रालय के अंतरराष्ट्रीय संगठन विभाग के निदेशक किरिल लोग्विनोव ने स्पूतनिक से कहा, “ बैठक में हमने अपने चीन के प्रतिनिधियों के साथ मिलकर तनाव कम करने और बातचीत के जरिए समाधान निकालने के पक्ष में एक वैकल्पिक मसौदा प्रस्ताव की घोषणा की है। इस पर मतदान की तिथि जमीनी हालात को देखते हुए निर्धारित की जाएगी।” रूस के राजनयिक ने उम्मीद जतायी कि सुरक्षा परिषद के अन्य सदस्य भी चीन और रूस की इस पहल का समर्थन करेंगे।</p>
<p>गौरतलब है कि सात अप्रैल को रूस और चीन ने होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर सुरक्षा परिषद के मसौदा प्रस्ताव पर वीटो कर दिया था। संयुक्त राष्ट्र में रूस के स्थायी प्रतिनिधि वासिली नेबेंज़िया ने स्पष्ट किया था कि रूस ऐसे किसी भी मसौदे का समर्थन नहीं कर सकता, जो अंतरराष्ट्रीय कानून के लिए एक खतरनाक मिसाल कायम करता हो।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 13 Apr 2026 18:13:38 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>फ्रांस-ब्रिटेन होर्मुज में सुरक्षित नौवहन सुनिश्चित करने के लिए अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन की मेजबानी करेंगे : राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रॉन</title>
                                    <description><![CDATA[राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रॉन और पीएम कीर स्टार्मर होर्मुज जलडमरूमध्य में सुरक्षित नौवहन के लिए अंतरराष्ट्रीय शिखर सम्मेलन की मेजबानी करेंगे। यह मिशन पूरी तरह रक्षात्मक होगा और अमेरिकी नाकेबंदी से अलग स्वतंत्र रूप से कार्य करेगा। इसका उद्देश्य वैश्विक व्यापार मार्ग को बहाल करना और तनावपूर्ण क्षेत्र में बहुराष्ट्रीय सहयोग सुनिश्चित करना है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/france-uk-president-emmanuel-macron-to-host-international-conference-to-ensure/article-150274"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/france-president-emmanuel-macron.png" alt=""></a><br /><p>पेरिस। फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रॉन ने सोमवार को यह घोषणा की कि फ्रांस और ब्रिटेन आने वाले दिनों में होर्मुज जलडमरूमध्य के माध्यम से सुरक्षित नौवहन सुनिश्चित करने के लिए एक अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन की मेजबानी करेंगे। फ्रांसिसी राष्ट्रपति ने बताया कि इस सम्मेलन में उन देशों को एक साथ लाया जाएगा जो नौवहन की स्वतंत्रता बहाल करने के उद्देश्य से एक शांतिपूर्ण, बहुराष्ट्रीय अभियान में योगदान देने के इच्छुक हैं। उन्होंने सोशल मीडिया मंच 'एक्स' पर लिखा, "यह पूरी तरह से रक्षात्मक मिशन होगा, जो युद्धरत पक्षों से अलग होगा और परिस्थितियों के अनुकूल होते ही इसे तैनात किया जाएगा।"</p>
<p>ब्रिटिश प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर ने भी एक सोशल मीडिया पोस्ट में कहा कि ब्रिटेन ने 40 से अधिक देशों को इस मिशन के लिए आमंत्रित किया है जो नौवहन की स्वतंत्रता बहाल करने के हमारे लक्ष्य को साझा करते हैं। स्टार्मर ने होर्मुज जलडमरूमध्य के बंद होने को 'बेहद हानिकारक' बताते हुए कहा कि ब्रिटेन और फ्रांस इस सप्ताह एक शिखर सम्मेलन की सह-मेजबानी करेंगे। इसका उद्देश्य संघर्ष समाप्त होने पर अंतरराष्ट्रीय शिपिंग की सुरक्षा के लिए एक समन्वित, स्वतंत्र और बहुराष्ट्रीय योजना पर काम करना है। </p>
<p>मैक्रॉन का यह बयान श्री स्टार्मर के उस रुख के बाद आया है, जिसमें उन्होंने स्पष्ट किया था कि ब्रिटेन ईरानी बंदरगाहों की अमेरिकी सैन्य नाकेबंदी में शामिल नहीं होगा। गौरतलब है कि कि अमेरिकी सेंट्रल कमांड (सेंटकॉम) ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की उद्घोषणा के अनुरूप सोमवार सुबह 10 बजे (भारतीय समयानुसार रात 8:30 बजे) से ईरानी बंदरगाहों के सभी समुद्री यातायात को रोकने की घोषणा की है। ब्रिटेन ने स्पष्ट किया है कि उसके 'माइनस्वीपर्स' (समुद्री बारूदी सुरंग हटाने वाले जहाज) और एंटी-ड्रोन इकाइयां क्षेत्र में अपना संचालन जारी रखेंगी, लेकिन ब्रिटिश नौसैनिक जहाजों और सैनिकों का उपयोग अमेरिकी नाकेबंदी लागू करने के लिए नहीं किया जाएगा।</p>
<p>इस बीच, अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने कहा कि ईरान द्वारा परमाणु हथियारों को त्यागने से इनकार करना 'इस्लामाबाद वार्ता' की विफलता का मुख्य कारण रहा। वहीं, ईरान के संसदीय अध्यक्ष मोहम्मद बागेर गालिबाफ ने कहा कि तेहरान ने 'भविष्योन्मुखी पहल' का प्रस्ताव रखा था, लेकिन वह अभी तक अमेरिकी विश्वास हासिल नहीं कर सका है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 13 Apr 2026 18:02:20 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>ईरान-अमेरिका वार्ता विफल होने के बाद ट्रंप का बड़ा फैसला : अमेरिकी केंद्रीय कमान सोमवार से शुरू करेगी ईरान की नौसैनिक नाकाबंदी, होर्मुज़ जलडमरूमध्य को पूरी तरह खोलने की मांग</title>
                                    <description><![CDATA[इस्लामाबाद वार्ता विफल होने के बाद, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के आदेश पर सेंटकॉम ने ईरानी बंदरगाहों की पूर्ण समुद्री नाकाबंदी शुरू कर दी है। हॉर्मुज जलडमरूमध्य में ईरानी व्यापार को रोकने के लिए नौसेना तैनात की गई है। हालांकि, गैर-ईरानी बंदरगाहों के लिए 'नौवहन की स्वतंत्रता' बरकरार रहेगी, जिससे वैश्विक तनाव चरम पर है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/after-the-failure-of-iran-us-talks-trumps-big-decision-us/article-150166"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-01/trump3.png" alt=""></a><br /><p>न्यूयॉर्क। अमेरिकी केंद्रीय कमान ने सोमवार को भारतीय समयानुसार शाम 7:30 बजे से "ईरानी बंदरगाहों में आने-जाने वाले सभी समुद्री यातायात" की नाकाबंदी शुरू करने का निश्चय किया है। कमान ने एक बयान में कहा, "अमेरिकी केंद्रीय कमान (सेंटकॉम) के बल राष्ट्रपति की घोषणा के अनुसार, 13 अप्रैल को सुबह 10 बजे पूर्वी समय (शाम 7:30 बजे भारतीय समय) से ईरानी बंदरगाहों में आने-जाने वाले सभी समुद्री यातायात की नाकाबंदी शुरू करेंगे।" कमांड का कहना है कि यह नाकाबंदी "ईरानी बंदरगाहों और तटीय क्षेत्रों में आने-जाने वाले सभी देशों के जहाजों के खिलाफ निष्पक्ष रूप से लागू की जाएगी, जिसमें अरब खाड़ी और ओमान की खाड़ी के सभी ईरानी बंदरगाह शामिल हैं।"</p>
<p>इसमें आगे कहा गया है, "सेंटकॉम बल होर्मुज जलडमरूमध्य से गैर-ईरानी बंदरगाहों से आने-जाने वाले जहाजों के लिए नौवहन की स्वतंत्रता में बाधा नहीं डालेंगे।" इस्लामाबाद में ईरान-अमेरिका वार्ता विफल होने के बाद ट्रंप ने रविवार को घोषणा की कि अमेरिका होर्मुज जलडमरूमध्य में प्रवेश करने और बाहर निकलने का प्रयास करने वाले सभी जहाजों की नाकाबंदी शुरू करेगा। उन्होंने अमेरिकी नौसेना को उन सभी जहाजों पर नज़र रखने और उन्हें रोकने का भी निर्देश दिया जो जलडमरूमध्य से गुजरने के लिए ईरान को रिश्वत देते हैं।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 13 Apr 2026 14:07:36 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>नौसेना के बेड़े में शामिल हुआ तारागिरी युद्धपोत : राजनाथ सिंह ने कहा-मजबूत और सक्षम नौसेना समय की आवश्यकता, ऊर्जा सुरक्षा होगी मजबूत</title>
                                    <description><![CDATA[रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने विशाखापत्तनम में स्वदेशी स्टील्थ फ्रिगेट INS तारागिरी को नौसेना को समर्पित किया। ब्रह्मोस मिसाइल और उन्नत रडार से लैस यह युद्धपोत 75% स्वदेशी सामग्री से बना है। राजनाथ सिंह ने इसे आत्मनिर्भर भारत का प्रतीक बताते हुए समुद्री मार्गों और डिजिटल केबलों की सुरक्षा के लिए नौसेना को अनिवार्य बताया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/taragiri-warship-joins-naval-fleet-rajnath-singh-said-strong/article-149027"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/rajnatha.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने मजबूत और सक्षम नौसेना को समय की जरूरत बताते हुए कहा है कि भारतीय नौसेना महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों, 'चोक पॉइंट्स' और राष्ट्रीय हितों से से जुड़े डिजिटल ढांचों की सुरक्षा कर रही है जिससे भारत जिम्मेदार समुद्री शक्ति के रूप में पहचान बना रहा है। प्रोजेक्ट 17 ए श्रेणी के चौथे अत्याधुनिक स्वदेशी युद्धपोत आईएनएस तारागिरी को शुक्रवार को आंध्र प्रदेश के विशाखापत्तनम में श्री सिंह की उपस्थिति में भारतीय नौसेना में शामिल किया गया। आधुनिक नौसैनिक जहाज निर्माण का उत्कृष्ट उदाहरण यह नवीनतम स्टील्थ फ्रिगेट, लगभग 6,670 टन के वजन के साथ, युद्धपोत डिजाइन ब्यूरो द्वारा डिजाइन किया गया है और मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड द्वारा सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों के सहयोग से बहु-भूमिका अभियानों के लिए निर्मित किया गया है। यह उन्नत स्टील्थ तकनीक का उपयोग करता है, जिससे इसकी रडार पहचान क्षमता काफी कम हो जाती है और इसे चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में घातक बढ़त मिलती है। पचहत्तर प्रतिशत से अधिक स्वदेशी सामग्री और कम समय में निर्मित आईएनएस तारागिरी भारत की जहाज निर्माण क्षमता और मजबूत सार्वजनिक-निजी सहयोग का उदाहरण है।</p>
<p>रक्षा मंत्री ने अपने संबोधन में आईएनएस तारागिरी को केवल एक युद्धपोत नहीं, बल्कि भारत की बढ़ती तकनीकी क्षमता, आत्मनिर्भरता और सशक्त नौसैनिक शक्ति का प्रतीक बताया। उन्होंने कहा, " यह जहाज उच्च गति से संचालित हो सकता है और लंबे समय तक समुद्र में तैनात रह सकता है। इसमें ऐसे तंत्र लगे हैं जो दुश्मन की गतिविधियों पर नजर रखते हैं, अपनी सुरक्षा सुनिश्चित करते हैं और आवश्यकता पड़ने पर तुरंत जवाब दे सकते हैं। इसमें आधुनिक रडार, सोनार और ब्रह्मोस जैसी मिसाइल प्रणालियाँ तथा सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइलें लगी हैं, जो इसकी क्षमता को और बढ़ाती हैं। उच्च तीव्रता वाले युद्ध से लेकर समुद्री सुरक्षा, समुद्री डकैती रोधी अभियान, तटीय निगरानी और मानवीय मिशनों तक, यह हर भूमिका में पूरी तरह सक्षम है।"</p>
<p>रक्षा मंत्री ने कहा कि भारत की समुद्री तटरेखा 11,000 किलोमीटर से अधिक है और जो तीन ओर से समुद्र से घिरा है, वह अपने विकास को समुद्र से अलग नहीं देख सकता। उन्होंने कहा कि देश का लगभग 95 प्रतिशत व्यापार समुद्री मार्गों से होता है और ऊर्जा सुरक्षा भी समुद्र पर निर्भर है, इसलिए एक मजबूत और सक्षम नौसेना का निर्माण विकल्प नहीं, बल्कि अनिवार्यता है। समुद्री क्षेत्र के बढ़ते महत्व पर प्रकाश डालते हुए श्री सिंह ने कहा कि वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच भारतीय नौसेना हिंद महासागर क्षेत्र में चौबीसों घंटे अपनी उपस्थिति बनाए रखती है। उन्होंने कहा, " "समुद्र के विशाल क्षेत्र में कई संवेदनशील बिंदु हैं, जहाँ हमारी नौसेना वस्तुओं के निर्बाध प्रवाह को सुनिश्चित करने के लिए लगातार सक्रिय रहती है। जब भी तनाव बढ़ता है, भारतीय नौसेना व्यापारिक जहाजों और तेल टैंकरों की सुरक्षा सुनिश्चित करती है। यह न केवल भारत के राष्ट्रीय हितों की रक्षा कर रही है, बल्कि दुनिया भर में अपने नागरिकों और व्यापार मार्गों की सुरक्षा के लिए हर आवश्यक कदम उठाने के लिए तैयार है। यही क्षमता भारत को एक जिम्मेदार और सशक्त समुद्री शक्ति बनाती है।"</p>
<p>रक्षा मंत्री ने कहा कि आधुनिक डिजिटल युग में विश्व का अधिकांश डेटा समुद्र के नीचे बिछी इंटरनेट केबलों से गुजरता है और इनमें किसी भी प्रकार की क्षति वैश्विक व्यवस्था को प्रभावित कर सकती है। उन्होंने समुद्री सुरक्षा को पारंपरिक दृष्टिकोण से आगे बढ़कर व्यापक और भविष्य उन्मुख ढांचे में देखने का आह्वान किया। उन्होंने कहा, "हमें केवल अपनी तटरेखा की सुरक्षा तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों, संकरे मार्गों और डिजिटल अवसंरचना की सुरक्षा भी सुनिश्चित करनी चाहिए, जो हमारे राष्ट्रीय हितों से जुड़ी हैं। भारतीय नौसेना इन सभी प्रयासों में सक्रिय है। आईएनएस तारागिरी जैसे उन्नत जहाजों का निर्माण और तैनाती पूरे क्षेत्र में शांति और समृद्धि की गारंटी है।"</p>
<p>राजनाथ सिंह ने कहा कि जब भी कोई संकट आता है, चाहे वह निकासी अभियान हो या मानवीय सहायता, भारतीय नौसेना हमेशा अग्रिम पंक्ति में खड़ी रहती है और "आईएनएस तारागिरी हमारी नौसेना की शक्ति, मूल्यों और प्रतिबद्धता को और मजबूत करेगा।" सरकार की प्रतिबद्धता दोहराते हुए कि भारतीय नौसेना को दुनिया की सबसे मजबूत नौसेनाओं में शामिल किया जाएगा, रक्षा मंत्री ने कहा , "आज हम केवल अपनी जरूरतों को पूरा करने तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में भी अपनी जगह बना रहे हैं। डिजाइन से लेकर अंतिम तैनाती तक हर चरण में भारत की भागीदारी है। आईएनएस तारागिरी इसी दृष्टि का प्रतीक है।"</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 03 Apr 2026 18:42:02 +0530</pubDate>
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                <title>होर्मुज़ जलडमरूमध्य से भारत को बड़ी राहत: ईरान ने दी जहाजों को आवाजाही की अनुमति, जानिए और किन देशों के लिए खोला गया रास्ता</title>
                                    <description><![CDATA[ईरान ने भारत, चीन और रूस जैसे मित्र देशों के लिए सामरिक रूप से महत्वपूर्ण होर्मुज़ जलडमरूमध्य मार्ग खोल दिया है। विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने पुष्टि की कि गैर-आक्रामक देशों के जहाजों को समन्वय के साथ अनुमति मिलेगी। संयुक्त राष्ट्र की अपील के बाद लिया गया यह फैसला वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और तेल संकट को कम करने में मील का पत्थर साबित होगा।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/big-relief-to-india-from-the-strait-of-hormuz-iran/article-147917"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/strait-of-hormuz.png" alt=""></a><br /><p>ईरान। होर्मुज़ जलडमरूमध्य से जुड़ी बड़ी खबर सामने आई है। ईरान ने भारत समेत कई मित्र देशों के जहाजों को इस अहम समुद्री मार्ग से गुजरने की अनुमति दे दी है। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने गुरुवार को कहा कि भारत, चीन, रूस, इराक और पाकिस्तान जैसे देशों के लिए मार्ग खोला गया है। मुंबई स्थित ईरान के वाणिज्य दूतावास ने भी इसकी पुष्टि करते हुए बताया कि यह फैसला उन देशों के लिए है जो ईरान के खिलाफ किसी भी तरह की आक्रामक गतिविधियों में शामिल नहीं हैं। हालांकि, जहाजों को इस रास्ते से गुजरने के लिए ईरानी अधिकारियों के साथ समन्वय करना अनिवार्य होगा।</p>
<p>इससे पहले संयुक्त राष्ट्र के महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने होर्मुज़ जलडमरूमध्य को खोलने की अपील की थी। उन्होंने कहा था कि इस मार्ग के लंबे समय तक बंद रहने से तेल, गैस और उर्वरक की आपूर्ति पर गंभीर असर पड़ रहा है, जिससे वैश्विक अर्थव्यवस्था और आम नागरिकों पर दबाव बढ़ रहा है।गुटेरेस ने अमेरिका और  इज़राइल से पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष को समाप्त करने की भी अपील की, वहीं ईरान से पड़ोसी देशों पर हमले रोकने का आग्रह किया।</p>
<p>गौरतलब है कि होर्मुज़ जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे व्यस्त तेल परिवहन मार्गों में से एक है। ऐसे में भारत के लिए इस रास्ते का खुलना ऊर्जा आपूर्ति के लिहाज से बड़ी राहत माना जा रहा है।</p>]]></content:encoded>
                
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                <pubDate>Thu, 26 Mar 2026 09:53:10 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान का ऐलान: अमेरिका-इजरायल के अलावा अन्य देशों के जहाजों को निकलने का दिया जाएगा रास्ता, पाकिस्तान से क्या हुई बात ?</title>
                                    <description><![CDATA[ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान ने स्पष्ट किया है कि अमेरिका और इजरायल को छोड़कर अन्य देशों के जहाजों को सुरक्षित रास्ता दिया जाएगा। होर्मुज जलडमरूमध्य से वैश्विक तेल का 20% व्यापार होता है, जिसे तनाव के कारण बंद किया गया था। अब सुरक्षा पुख्ता कर मित्र देशों के तेल एवं एलएनजी निर्यात में सहयोग का आश्वासन दिया गया है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/iranian-president-masood-pezeshkian-announced-that-ships-from-countries-other/article-147659"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/irani-p.png" alt=""></a><br /><p>तेहरान। ईरान ने अमेरिका और इजरायल को छोड़कर अन्य देशों के जहाजों को होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने की अनुमति देने के लिए कई कदम उठाए हैं। ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान के कार्यालय ने यह जानकारी दी है। </p>
<p>राष्ट्रपति पेजेशकियान ने सोमवार को पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ़ के साथ हुई फोन (एजेंसी) में कहा, किसी भी सूरत में, ईरान ने इस जलमार्ग से ज़हाज़ों के पार होने के लिए सुरक्षा एवं रक्षा के इंतजाम किये गये हैं। शत्रु देशों को छोड़कर अन्य देशों के जहाजों को  इस रास्ते से गुजरने के लिए आवश्यक सहयोग दिया जाएगा।</p>
<p>उल्लेखनीय है कि, अमेरिका और इजरायल ने 28 फरवरी को ईरान में कई ठिकानों पर हमले किए। इन हमलों में ईरान के सर्वोच्च नेता आयतुल्ला अली खामेनेई सहित कई लोगों की मौत हुई। इसके जवाब में, ईरान ने इजरायली क्षेत्र और पश्चिम एशिया में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर हमले किए। </p>
<p>अमेरिका-इजरायल के साथ संघर्ष के कारण ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद कर दिया है, जहां से पूरी दुनिया का करीब 20 प्रतिशत तेल एवं तरलीकृत प्राकृतिक गैस (एलएनजी) होकर गुजरती है। इससे पूरी दुनिया में कच्चे तेल का निर्यात प्रभावित हुआ है। </p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 24 Mar 2026 12:47:48 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>राहत की खबर: ईरानी नौसेना ने भारतीय एलपीजी टैंकर को पार कराया होर्मुज, वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति में भारत की रणनीतिक साख का चला पता </title>
                                    <description><![CDATA[स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में जारी नाकेबंदी के बीच ईरानी नौसेना ने एक भारतीय एलपीजी टैंकर को सुरक्षित रास्ता दिया। तनावपूर्ण युद्ध की स्थिति में भी भारतीय क्रू और ध्वज की पहचान के बाद जहाज को सुरक्षित निकाला गया। तेल टैंकर पूरे सफर के दौरान ईरानी नौसेना के संपर्क में रहा, जिससे वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति में भारत की रणनीतिक साख का पता चलता है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/news-of-relief-iranian-navy-helps-indian-lpg-tanker-cross/article-147401"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/iran-1.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। अमेरिका-ईजरायल से जंग के बीच ईरान ने दुनिया के महत्वपूर्ण जलमार्गों में शामिल स्ट्रेट ऑफ  होर्मुज की भी नाकेबंदी कर रखी है। इस बीच ईरानी नौसेना ने पिछले सप्ताह एक भारतीय एलपीजी टैंकर को सुरक्षित रूप से स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पार कराया। जहाज पर मौजूद एक वरिष्ठ अधिकारी ने नाम नहीं छापने की शर्त पर बताया कि यह टैंकर उन दो भारतीय जहाजों में शामिल था जिन्हें इस संवेदनशील मार्ग से गुजरने की अनुमति दी गई।</p>
<p>स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से सुरक्षित निकलने तक भारतीय तेल टैंकर लगातार ईरानी नौसेना के संपर्क में रहा। ईरान की नौसेना ने जहाज पर लगे झंडे, वह कहां से निकला है और कहां जा रहा है, उसके चालक दल में किस देश के लोग शामिल हैं, ये सब जानकारियां मांगी। जहाज के सभी क्रू मेंबर्स भारतीय थे। इसके बाद जहाज को एक तय मार्ग पर आगे बढ़ाया गया।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 22 Mar 2026 11:01:20 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>जी-7 के छह सदस्यों सहित 7 देशों ने होर्मुज जलडमरूमध्य से सुरक्षित आवागमन सुनिश्चित करने में दिखाई तत्परता, ईरानी हमलों की निंदा की</title>
                                    <description><![CDATA[जापान और ब्रिटेन सहित G7 के सात देशों ने होर्मुज जलडमरूमध्य में वाणिज्यिक जहाजों पर ईरानी हमलों की कड़ी निंदा की है। उन्होंने वैश्विक तेल और गैस आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए नौवहन की स्वतंत्रता का समर्थन किया। इन देशों ने ऊर्जा बाजारों को स्थिर करने और संयुक्त राष्ट्र के नियमों का पालन करने का संकल्प लिया है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/seven-countries-including-six-g-7-members-showed-readiness-to-ensure/article-147215"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/harmoz.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। जी7 के छह सदस्य देशों जापान, कनाडा, ब्रिटेन, फ्रांस, जर्मनी तथा इटली और नीदरलैंड ने वाणिज्यिक जहाजों पर ईरानी हमलों की निंदा की है और कहा है कि वह होर्मुज जलडमरूमध्य से जहाजों का सुरक्षित आवागमन सुनिश्चित करने में योगदान देने के लिए तैयार हैं। </p>
<p>सात देशों के नेताओं ने गुरुवार रात जारी एक संयुक्त बयान में कहा, हम खाड़ी में वाणिज्यिक जहाजों पर ईरान द्वारा किए गए हालिया हमलों, तेल एवं गैस प्रतिष्ठानों सहित नागरिक अवसंरचना पर हमलों और ईरानी बलों द्वारा होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद करने की कड़ी निंदा करते हैं। इन देशों ने बढ़ते संघर्ष पर गहरी चिंता व्यक्त की और ईरान से जलडमरूमध्य को वाणिज्यिक जहाजों के लिए अवरुद्ध करने के प्रयासों, धमकियों, बारूदी सुरंगों को बिछाने, ड्रोन एवं मिसाइल हमलों को तुरंत रोकने का आह्वान किया। उन्होंने ईरान से संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव 2817 का पालन करने का भी आग्रह किया।</p>
<p>उन्होंने तेल एवं गैस प्रतिष्ठानों सहित नागरिक अवसंरचना पर हमलों पर तत्काल व्यापक रोक लगाने की मांग की। बयान में कहा गया कि नौवहन की स्वतंत्रता अंतरराष्ट्रीय कानून का एक मूलभूत सिद्धांत है जिसमें संयुक्त राष्ट्र समुद्री कानून समझौता भी शामिल है। इसमें कहा गया कि ईरान की कार्रवाइयों का असर दुनिया के सभी हिस्सों के लोगों पर पड़ेगा, खासकर सबसे कमजोर वर्गों पर। उन्होंने कहा कि हम होर्मुज जलडमरूमध्य से सुरक्षित आवागमन सुनिश्चित करने के लिए उचित प्रयासों में योगदान देने के लिए तत्पर हैं और हम उन देशों की प्रतिबद्धता का स्वागत करते हैं जो तैयारी संबंधी योजना बना रहे हैं।</p>
<p>अंतर्राष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी द्वारा रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार की समन्वित निकासी को अधिकृत करने के निर्णय का स्वागत करते हुए उन्होंने ऊर्जा बाजारों को स्थिर करने के लिए अन्य कदम उठाने का संकल्प लिया जिसमें कुछ तेल एवं गैस उत्पादक देशों के साथ मिलकर उत्पादन बढ़ाने पर काम करना शामिल है। उन्होंने आश्वासन दिया कि वे संयुक्त राष्ट्र और अंतर्राष्ट्रीय वित्तीय संस्थानों के माध्यम से सबसे अधिक प्रभावित देशों को सहायता करने के लिए भी काम करेंगे।</p>
<p>बयान में कहा गया, समुद्री सुरक्षा एवं नौवहन की स्वतंत्रता सभी देशों के लिए लाभकारी है। हम सभी देशों से अंतरराष्ट्रीय कानून का सम्मान करने और अंतरराष्ट्रीय समृद्धि एवं सुरक्षा के मूलभूत सिद्धांतों का पालन करने का आह्वान करते हैं। इस संयुक्त बयान के लिए हालांकि किसी विशिष्ट भौतिक बैठक की जानकारी नहीं है लेकिन यह 11 मार्च को हुई, जी7 नेताओं की वर्चुआल बैठक में पश्चिम एशिया की बिगड़ती स्थिति पर चर्चा की गयी और नागरिक अवसंरचना पर हमलों की निंदा की।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 20 Mar 2026 17:19:09 +0530</pubDate>
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