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                <title> Medical Education Department - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <description> Medical Education Department RSS Feed</description>
                
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                <title>ब्रेन ट्यूमर को लेकर फैली भ्रांतियों पर डॉक्टर्स और मरीजों ने साझा किए अनुभव, जानें लक्षण और उपचार </title>
                                    <description><![CDATA[ब्रेन ट्यूमर को लेकर समाज में फैली भांतियों और डर को दूर करने के उ‌द्देश्य से नारायणा हॉस्पिटल, जयपुर द्वारा एक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में 20 से 25 ऐसे मरीज शामिल हुए जिनकी ब्रेन ट्यूमर की सर्जरी लगभग 4 से 5 वर्ष पूर्व की गई थी। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/doctors-and-patients-shared-their-experiences-on-the-misconceptions-spread/article-142906"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-02/(12200-x-600-px)-(2)10.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। ब्रेन ट्यूमर को लेकर समाज में फैली भांतियों और डर को दूर करने के उ‌द्देश्य से नारायणा हॉस्पिटल, जयपुर द्वारा एक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में 20 से 25 ऐसे मरीज शामिल हुए जिनकी ब्रेन ट्यूमर की सर्जरी लगभग 4 से 5 वर्ष पूर्व की गई थी। इन सभी मरीजों ने अपनी पोस्ट-सर्जरी यात्रा, चुनौतियों और सामान्य जीवन में वापसी के अनुभव साझा किए। कार्यक्रम का मुख्य उद्‌देश्य यह संदेश देना रहा कि समय पर पहचान, विशेषज्ञ उपचार और सही पुनर्वास से ब्रेन ट्यूमर के मरीज पूर्ण और सक्रिय जीवन जी सकते हैं।</p>
<p>इस अवसर पर वरिष्ठ न्यूरोसर्जन डॉ. के. के. बंसल, सीनियर कंसल्टेंट न्यूरोसर्जरी, ने कहा, ब्रेन ट्यूमर का नाम सुनते ही मरीज और उनके परिजन भयभीत हो जाते हैं, जबकि आधुनिक न्यूरोसर्जरी, एडवांस इमेजिंग और सटीक सर्जिकल तकनीकों के कारण आज उपचार के परिणाम पहले से कहीं बेहतर हैं। अधिकांश मामलों में समय पर सर्जरी से मरीज सामान्य जीवन में लौट सकते हैं। हमें डर नहीं, बल्कि जागरूकता बढ़ाने की आवश्यकता है। डॉ. के. के. बंसल ने खुद पिछले 15 सालों में लगभग 15 हज़ार सफल ब्रेन ट्यूमर सर्जरी को अंजाम दिया है। कार्यक्रम में उपस्थित मरीजों ने बताया कि सर्जरी के बाद शुरुआती दिनों में शारीरिक और मानसिक चुनौतिया सामने आई, लेकिन डॉक्टरों की टीम, परिवार के सहयोग और नियमित फॉलोअप के कारण वे धीरे-धीरे पूरी तरह स्वस्थ जीवन की ओर लौटे। कई मरीज आज अपने पेशेवर और पारिवारिक दायित्वों को सामान्य रूप से निभा रहे। </p>
<p>नारायणा हॉस्पिटल, जयपुर के फैसिलिटी डायरेक्टर बलविंदर वालिया ने कहा, स्वास्थ्य से जुड़ी गंभीर बीमारियों के प्रति समाज में संवाद की कमी अक्सर मरीजों को समय पर उपचार लेने से रोकती है। हमारा उ‌द्देश्य केवल इलाज प्रदान करना नहीं, बल्कि जागरुकता और विश्वास का वातावरण तैयार करना है। ब्रेन ट्यूमर के सफल उपचार के उदाहरण यह सिद्ध करते हैं कि सही समय पर विशेषज्ञ देखभाल से दीर्घकालिक स्वास्थ्य जोखिमों को कम किया जा सकता है। क्लिनिकल डायरेक्टर डॉ. प्रदीप गोयल ने कहा, 'मल्टीडिसिप्लिनरी अप्रोच, एडवांस टेक्नोलॉजी और अनुभवी टीम के समन्वय से ब्रेन ट्यूमर के उपचार में उल्लेखनीय सफलता प्राप्त की गई है। मरीजों की सर्जरी के बाद नियमित मॉनिटरिंग, रिहैबिलिटेशन और काउंसलिंग भी उतनी ही महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है जितनी सर्जरी स्वयं। कार्यक्रम के दौरान डॉक्टरों ने यह भी बताया कि ब्रेन ट्यूमर के लक्षणों में लगातार सिरदर्द, उल्टी, दृष्टि में बदलाव, दौरे पडना या व्यवहार में असामान्य परिवर्तन शामिल हो सकते हैं। ऐसे लक्षणों को नजरअंदाज न करने और समय पर न्यूरोलॉजिकल जांच कराने की सलाह दी गई।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>स्वास्थ्य</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 12 Feb 2026 16:42:56 +0530</pubDate>
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                <title>चिकित्सा शिक्षा विभाग की बैठक : मेडिकल कॉलेजों व अस्पतालों की कार्यप्रणाली पर कड़ी नजर, लापरवाही पर होगी कार्रवाई</title>
                                    <description><![CDATA[प्रदेश के सभी मेडिकल कॉलेजों और उनसे जुड़े अस्पतालों में अब स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता पर सख्त निगरानी रखी जाएगी। चिकित्सा एवं स्वास्थ्य मंत्री गजेन्द्र सिंह खींवसर ने गुरुवार को स्वास्थ्य भवन में विभागीय समीक्षा बैठक कर स्पष्ट निर्देश दिए कि अस्पतालों में किसी भी स्तर पर खामी पाई गई तो संबंधित प्रधानाचार्य और अधीक्षक को जिम्मेदार माना जाएगा। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/medical-education-department-meeting-strict-vigil-on-functioning-of-medical/article-134743"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-12/1200-x-600-px)-(4)6.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। प्रदेश के सभी मेडिकल कॉलेजों और उनसे जुड़े अस्पतालों में अब स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता पर सख्त निगरानी रखी जाएगी। चिकित्सा एवं स्वास्थ्य मंत्री गजेन्द्र सिंह खींवसर ने गुरुवार को स्वास्थ्य भवन में विभागीय समीक्षा बैठक कर स्पष्ट निर्देश दिए कि अस्पतालों में किसी भी स्तर पर खामी पाई गई तो संबंधित प्रधानाचार्य और अधीक्षक को जिम्मेदार माना जाएगा। मंत्री खींवसर ने कहा कि जनस्वास्थ्य एक अत्यंत संवेदनशील विषय है, इसलिए प्रत्येक अधिकारी और कर्मचारी पूरी संवेदनशीलता के साथ अपना दायित्व निभाए। उन्होंने यह भी कहा कि चिकित्सक, नर्सिंग और पैरामेडिकल स्टाफ की कमी के कारण स्वास्थ्य सेवाएं बाधित नहीं होनी चाहिए। जहां कमी है, उसकी तुरंत सूचना देकर वैकल्पिक व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। अस्पतालों में साफ-सफाई, सुरक्षा और पार्किंग की उत्तम व्यवस्था पर भी मंत्री ने विशेष बल दिया। उन्होंने निर्देश दिए कि उच्च स्तर की हाउसकीपिंग सुनिश्चित की जाए और सुरक्षा के लिए जरूरत पड़ने पर एजेंसियों की सेवाएं ली जाएं। मंत्री ने बड़े अस्पतालों में आने वाले दूर-दराज के रोगियों और परिजनों के लिए फूड कोर्ट जैसी सुविधाएं विकसित करने पर भी जोर दिया, ताकि उन्हें गुणवत्तापूर्ण भोजन व ठहरने की व्यवस्थाएं उचित दरों पर मिल सकें।</p>
<p>आने वाले समय में अस्पतालों का निरीक्षण मिशन मोड में किया जाएगा। चिकित्सा शिक्षा सचिव गायत्री राठौड़ ने अनावश्यक रेफरल पर सख्त नाराजगी जताते हुए कहा कि अस्पतालों में उपलब्ध सुविधाओं का अधिकतम उपयोग हो, ताकि बड़े अस्पतालों पर अनावश्यक मरीज भार न बढ़े। उन्होंने चिकित्सा विशेषज्ञों को इलाज के साथ अनुसंधान व शोध कार्यों पर भी ध्यान देने की सलाह दी। चिकित्सा शिक्षा आयुक्त नरेश गोयल ने वर्ष 2030 और 2047 के लक्ष्यों को ध्यान में रखते हुए स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार और सुधार के साथ प्रतिबद्धता से कार्य करने पर जोर दिया। बैठक में संयुक्त शासन सचिव ललित कुमार सहित सभी मेडिकल कॉलेजों के प्रधानाचार्य, अधीक्षक और अन्य अधिकारी उपस्थित रहे।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 04 Dec 2025 18:55:43 +0530</pubDate>
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                <title>चिकित्सा शिक्षा विभाग के ताजा फरमान से नाराज चिकित्सक, एसएमएस मेडिकल कॉलेज से जुड़े अस्पतालों के अधीक्षकों ने दिया सामूहिक इस्तीफा</title>
                                    <description><![CDATA[चिकित्सा शिक्षा विभाग के हालिया आदेशों के विरोध में एसएमएस मेडिकल कॉलेज और जुड़े अस्पतालों के अधीक्षकों ने सामूहिक इस्तीफा दे दिया। आदेश में प्रिंसिपल और अधीक्षक की प्राइवेट प्रैक्टिस पर रोक, क्लीनिकल काम 25% तक सीमित और वरिष्ठता संबंधी नए नियम लागू किए गए हैं। राजस्थान मेडिकल कॉलेज टीचर्स एसोसिएशन ने इसे असंवैधानिक और शिक्षकों के अधिकारों पर हमला बताया।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/angered-by-the-latest-order-of-the-medical-education-department/article-132718"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-11/111-(3)17.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। चिकित्सा शिक्षा विभाग की ओर से हाल ही में मेडिकल कॉलेज और उनसे जुड़े अस्पतालों में प्रिंसिपल और अधीक्षक के पदों पर लगे चिकित्सकों की प्राइवेट प्रैक्टिस पर रोक के आदेश का अब खुलकर विरोध शुरू हो गया है। इसके विरोध में आज सुबह एसएमएस मेडिकल कॉलेज और उनसे जुड़े अस्पतालों के अधीक्षकों ने सामूहिक रूप से इस्तीफा दे दिया है। इन अधीक्षकों ने एसएमएस मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल डॉ. दीपक माहेश्वरी को एक साथ इस्तीफे सौंपे। इससे पहले सरकार के हालिया आदेश का राजस्थान मेडिकल कॉलेज टीचर्स एसोसिएशन ने विरोध किया था। एसोसिएशन के अध्यक्ष डॉ. धीरज जैफ ने बताया कि चिकित्सा विभाग ने जो आदेश जारी किया है वो पूरी तरह से गैर वाजिब है। इसके पीछे की मंशा किसी को पता नहीं है। यह आदेश वरिष्ठ चिकित्सकों के अधिकारों पर हमला है। हम इन आदेशों को गंभीर आपत्ति के साथ अस्वीकार करते हैं। किसी भी पद पर रहने की अधिकतम आयु 57 वर्ष तय करना असंवैधानिक है, जबकि रिटायरमेंट 65 वर्ष है। इन आदेशों से लगता है कि सरकार राज्य से बाहर के डॉक्टरों को लाने की तैयारी कर रही है। यह राजस्थान के शिक्षकों के हितों पर सीधा प्रहार है। इस आदेश से सीनियर प्रोफेसरों की वरिष्ठता और योग्यताएं प्रभावित होंगी। प्रिंसिपल और अधीक्षक को क्लिनिकल व यूनिट हेड की भूमिका से हटाना शैक्षणिक गुणवत्ता को नुकसान पहुंचाएगा। गौरतलब है कि राजस्थान टीचर्स मेडिकल एसोसिएशन ने दो दिन पहले चेताया था कि सरकार आदेश वापस लें, वरना अधीक्षक पद पर बैठे सभी चिकित्सा सामूहिक इस्तीफा दे देंगे। इसके बाद आज कांवटिया, जे के लोन, गणगौरी समेत तमाम अस्पतालों के अधीक्षकों ने इस्तीफा सौंप दिया।</p>
<p><strong>क्या है विवादित आदेश ?</strong></p>
<p>11 नवंबर को जारी आदेशों में चिकित्सा शिक्षा विभाग ने कई बड़े बदलाव किए हैं। प्रिंसिपल और अधीक्षक निजी प्रैक्टिस नहीं कर सकेंगे। डॉक्टर सीधे प्रिंसिपल पद पर नियुक्त नहीं हो सकेंगे। प्रिंसिपल पद के लिए 3 वर्ष अधीक्षक/अतिरिक्त प्रिंसिपल और 2 वर्ष विभागाध्यक्ष का अनुभव अनिवार्य है। प्रिंसिपल चयन के लिए 4 सदस्यीय उच्चस्तरीय कमेटी बनाई गई है। प्रिंसिपल और अधीक्षक को क्लीनिकल कार्य केवल 25% तक सीमित किया गया है. दोनों पदों पर नियुक्त व्यक्ति को यूनिट हेड या एच ओ डी नहीं बनाया जाएगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 17 Nov 2025 17:08:08 +0530</pubDate>
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