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                <title>New Orders - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                            <item>
                <title>मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर को झटका, विनिर्माण क्षेत्र की उत्पादन वृद्धि दर 38 महीने के निचले स्तर पर</title>
                                    <description><![CDATA[एचएसबीसी पीएमआई रिपोर्ट के अनुसार, नए ऑर्डरों में सुस्ती के कारण दिसंबर में भारत का विनिर्माण सूचकांक गिरकर 55 रह गया। यह पिछले 38 महीनों में उत्पादन की सबसे धीमी वृद्धि है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/business/manufacturing-sector-output-growth-rate-at-38-month-low/article-138164"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-01/india&#039;s-manufacturing-pmi.png" alt=""></a><br /><p>मुंबई। नये ऑर्डरों में सुस्ती से विनिर्माण क्षेत्र की उत्पादन वृद्धि दर माह-दर-माह आधार पर दिसंबर में घटकर 38 महीने के निचले स्तर पर आ गयी। एसएंडपी ग्लोबल द्वारा शुक्रवार को जारी एचएसबीसी भारतीय विनिर्माण खरीद प्रबंधक सूचकांक (पीएमआई) रिपोर्ट में यह बात कही गयी है। भारतीय विनिर्माण क्षेत्र का पीएमआई दिसंबर में घटकर 55 रह गया। यह दो साल से ज्यादा समय में विनिर्माण क्षेत्र की गतिविधियों में सबसे सुस्त वृद्धि को दर्शाता है। नवंबर में पीएमआई 56.6 रहा था। पीएमआई का 50 से ऊपर रहना गतिविधियों में वृद्धि को और इससे कम रहना गिरावट को दर्शाता है। इसका 50 का स्तर स्थिरता का द्योतक है।</p>
<p>एसएंडपी ग्लोबल मार्केट इंटेलिजेंस में इकोनॉमिक्स एसोसिएट डायरेक्टर पॉलियाना डी लीमा ने रिपोर्ट पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा, वृद्धि की रफ्तार कम पडऩे के बावजूद भारतीय विनिर्माण उद्योग का प्रदर्शन 2025 में अच्छा रहा। हम वित्त वर्ष की अंतिम तिमाही में प्रवेश कर रहे हैं और ऐसे में नये कारोबार में तेज वृद्धि के कारण कंपनियों के व्यस्त रहने की उम्मीद है। मुद्रास्फीति का दबाव कम रहने से मांग ऊंची बनी रहेगी।</p>
<p>रिपोर्ट में कहा गया है कि दिसंबर में उत्पादन में 38 महीने की सबसे सुस्त बढ़ोतरी दर्ज की गयी। रोजगार लगातार 22वें महीने बढ़ा है, लेकिन रोजगार सृजन की दर 22 महीने के निचले स्तर पर रही। नये ऑर्डरों की वृद्धि दर दिसंबर 2023 के बाद सबसे कम दर्ज की गयी। ऑर्डरों में सुस्त वृद्धि का असर कंपनियों के कच्चे माल की पर भी दिखा और इसमें वृद्धि दो साल के निचले स्तर पर रही। खरीद प्रबंधकों ने साल 2026 में 2025 की तुलना में उत्पादन में वृद्धि की उम्मीद जतायी है। हालांकि कुल मिलाकर उनकी उम्मीद का स्तर साढ़े तीन साल के निचले स्तर पर दर्ज किया गया।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>बिजनेस</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 02 Jan 2026 17:33:07 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>उपापन संस्थाओं में न्यूनतम बोलीदाता चयन पर वित्त विभाग ने जारी किए नए निर्देश, एल-2 बोलीदाता को भी मौका मिलेगा</title>
                                    <description><![CDATA[राजस्थान वित्त विभाग ने उपापन संस्थाओं के लिए नई मार्गदर्शिका जारी की है। इसमें कहा गया है कि यदि केवल एक न्यूनतम बोलीदाता (एल-1) हो, तो संस्थाएं कार्य की प्रकृति, समयसीमा और संसाधन देखते हुए उसी को आदेश दे सकती हैं। नियम 74 के तहत एल-2 को काउंटर ऑफर देने का प्रावधान भी है, जिससे कार्य का हिस्सा एल-2 को भी मिल सकेगा।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/finance-department-has-issued-new-instructions-on-minimum-bidder-selection/article-132723"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-10/secretariat.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। वित्त विभाग ने उपापन संस्थाओं द्वारा न्यूनतम बोलीदाता के चयन में आ रही दिक्कतों को देखते हुए नई मार्गदर्शन व्यवस्था जारी की है। विभाग ने स्पष्ट किया है कि जहां केवल एक ही न्यूनतम बोलीदाता (एल-1) आता है, वहां उपापन प्रक्रिया में देरी और तकनीकी जटिलताओं से बचने के लिए संस्थाएं किस आधार पर आदेश जारी कर सकती हैं।</p>
<p>परिपत्र के अनुसार यदि केवल एक सफल बोलीदाता हो, तो उपापन संस्था कार्य की प्रकृति, उपलब्ध मानव संसाधन और समय-सीमा को ध्यान में रखते हुए उचित कारणों के आधार पर उसी एक बोलीदाता को कार्यादेश जारी कर सकती है। यह भी कहा गया है कि नियमों के अनुसार ऐसी स्थिति में बोलीदाता से आवश्यक दस्तावेज और उसकी क्षमता की पुष्टि करना अनिवार्य होगा।</p>
<p>इसके साथ ही राजस्थान लोक उपापन पारदर्शिता नियम 2013 के नियम 74 के तहत एक से अधिक बोली प्राप्त होने पर एल-1 और द्वितीय न्यूनतम बोलीदाता (एल-2) की भूमिका स्पष्ट की गई है। यदि एल-1 एक से अधिक हों, तो कार्यादेश उनके बीच विभाजित किया जाएगा, जबकि यदि केवल एक एल-1 हो तो एल-2 को काउंटर ऑफर दिया जाएगा। काउंटर ऑफर स्वीकारने की स्थिति में एल-2 को भी कार्य का हिस्सा मिल सकेगा।</p>
<p> </p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 17 Nov 2025 17:39:53 +0530</pubDate>
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