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                <title>student movement - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <title>युवा कांग्रेस का दावा: 'छात्र की गूंज' हेल्पलाइन पर 1,080 कॉल, 80 मामलों में तुरंत कानूनी सहायता पहुंचाई</title>
                                    <description><![CDATA[युवा कांग्रेस द्वारा संचालित 'छात्र की गूंज' आपातकालीन हेल्पलाइन पर 1,080 से अधिक सहायता कॉल दर्ज की गईं। संस्था ने भोजन, आवास और परिवहन संबंधी मदद के साथ-साथ कानूनी मामलों में भी त्वरित राहत पहुंचाई। विधि प्रकोष्ठ के सहयोग से पुलिस हिरासत और उत्पीड़न का सामना कर रहे अनेक युवाओं की रिहाई सुनिश्चित कराई गई।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/youth-congress-claims-that-1080-calls-on-students-goonj-helpline/article-161345"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-07/youth-congress.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। युवा कांग्रेस ने दावा किया है कि छात्रों और प्रदर्शनकारियों की सहायता के लिए शुरू की गयी आपातकालीन सहायता 'छात्र की गूंज' हेल्पलाइन पर अब तक कुल 1,080 कॉल प्राप्त हुई हैं। संगठन के अनुसार, इनमें भोजन, आश्रय, परिवहन और कानूनी सहायता से जुड़े अनुरोध शामिल थे, जबकि 80 मामलों को तत्काल कानूनी हस्तक्षेप के लिए युवा कांग्रेस के विधि प्रकोष्ठ को भेजा गया। युवा कांग्रेस ने बयान जारी कर कहा कि कानूनी टीम ने हिरासत, गिरफ्तारी, पुलिस कार्रवाई, लाठीचार्ज, पुलिस थानों में सहायता, परिवारों को जानकारी उपलब्ध कराने और वकीलों तक पहुंच सुनिश्चित कराने जैसे मामलों में सक्रिय भूमिका निभायी। राजेंद्र नगर, कमला मार्केट और रंजीत नगर से जुड़े मामलों में कानूनी हस्तक्षेप के बाद हिरासत में लिये गये कई लोगों की रिहाई सुनिश्चित करायी गयी। इसके अलावा कोलकाता में भी चार लोगों को कानूनी सहायता के बाद जमानत मिलने का दावा किया गया।</p>
<p>युवा कांग्रेस ने यह भी कहा कि हेल्पलाइन पर छात्राओं की ऑनलाइन ट्रोलिंग, घर जाकर कथित उत्पीड़न और डराने-धमकाने जैसी शिकायतें भी मिलीं, जिन पर तत्काल कार्रवाई की गयी। युवा कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष उदय भानु चिब ने कहा कि संगठन ने केवल एकजुटता नहीं दिखायी, बल्कि जरूरतमंद छात्रों और उनके परिवारों को हर संभव सहायता उपलब्ध करायी। युवा कांग्रेस के लीगल डिपार्टमेंट के राष्ट्रीय चेयरमैन रूपेश सिंह भदौरिया ने कहा कि संविधान नागरिकों को अपनी आवाज उठाने का अधिकार देता है और संगठन आगे भी कानूनी सहायता उपलब्ध कराता रहेगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 29 Jul 2026 18:45:28 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>बांग्लादेश की सबसे प्रभावशाली नेता की त्रासद राजनीतिक कथा</title>
                                    <description><![CDATA[कभी आयरन लेडी कही जाने वाली बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना को मानवता के खिलाफ अपराधों में ट्रिब्यूनल ने मौत की सजा सुनाई। 2024 के छात्र आंदोलन में हिंसा के आरोपों के बाद यह फैसला आया। विशेषज्ञ इसे देश की सत्ता संरचना में बड़े बदलाव का संकेत मानते हैं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/the-tragic-political-story-of-bangladeshs-most-influential-leader/article-132793"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-11/11-(9).png" alt=""></a><br /><p>जयपुर ।  कभी बांग्लादेश की आयरन लेडी कही जाने वाली शेख हसीना का राजनीतिक सफर एक नाटकीय मोड़ पर समाप्त हुआ है। जिनके नाम पर दशकों तक विकास, स्थिरता और शक्ति केंद्रित राजनीति की कहानी लिखी गई, अब वही नेता 2025 में क्राइम्स अगेंस्ट ह्यूमनिटी के दोष में मौत की सजा की पात्र बन गई हैं। यह फैसला सिर्फ एक नेता का राजनीतिक अंत नहीं, बल्कि बांग्लादेश की सत्ता संरचना में गहरे बदलाव का संकेत है।</p>
<p>उदय: त्रासदी से शुरू हुई नेतृत्व की कहानी</p>
<p>28 सितंबर 1947 को तुंगीपाड़ा में जन्मी हसीना के राजनीतिक सफर की नींव उनके पिता शेख मुजीबुर रहमान ने रखी, जो बांग्लादेश के संस्थापक नेता थे। अगस्त 1975 में हुए सैन्य तख्तापलट में उनके पिता, माता, तीन भाइयों और कई रिश्तेदारों की हत्या कर दी गई। हसीना और उनकी बहन रिहाना विदेश में होने के कारण बच गईं। यही घटना उन्हें राजनीति की मुख्य धारा में ले आई। </p>
<p><strong>1981-2008: निर्वासन से  वापसी और बैटलिंग बेगम्स</strong></p>
<p>भारत में छह साल बिताने के बाद 1981 में जब वे स्वदेश लौटीं तो अवामी लीग ने उन्हें अध्यक्ष चुना। इसी समय एक नई राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता जन्म ले चुकी थी-खालिदा जिया के साथ बैटलिंग बेगम्स की लड़ाई। 1996 में वे पहली बार प्रधानमंत्री बनीं, 2001 में हार गईं, और 2008 में भारी बहुमत के साथ सत्ता में वापस लौटीं।  फिर 2014 तथा 2018 के चुनाव जीतकर लगभग 15 वर्षों तक लगातार सत्ता में रहीं। यह वापसी निर्णायक साबित हुई-इसके बाद लगभग डेढ़ दशक तक उन्होंने बांग्लादेश की राजनीति पर पूर्ण नियंत्रण बनाए रखा। उनके नेतृत्व में बांग्लादेश ने आर्थिक विकास, विदेशी निवेश, पद्मा ब्रिज जैसे बड़े प्रोजेक्ट और गरीबी में कमी जैसे सकारात्मक बदलाव देखे। लेकिन दूसरी ओर विपक्ष के दमन, मीडिया की स्वतंत्रता पर सीमाएं और राजनीतिक गिरफ्तारियों ने उनकी छवि को विवादास्पद बनाया। उन पर सत्ता केंद्रीकरण और एक-पार्टी शासन की ओर बढ़ने के आरोप भी लगे।</p>
<p><strong>2024: आरक्षण आंदोलन से हुई शुरूआत, देशव्यापी विद्रोह में बदला संघर्ष</strong></p>
<p>जुलाई 2024 में आरक्षण नीति के खिलाफ छात्रों का आंदोलन शुरू हुआ। कुछ ही दिनों में यह विरोध सरकारी नीतियों के खिलाफ बड़े जनआंदोलन में बदल गया।  ढाका और अन्य शहरों में हिंसा बढ़ती गई, और सरकार ने कड़ा दमनात्मक रुख अपनाया। संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट के अनुसार जुलाई-अगस्त 2024 के बीच 1,400 से अधिक लोगों की मौत हुई। हालात बेकाबू होते गए और 5 अगस्त 2024 को शेख हसीना को सत्ता छोड़नी पड़ी। वे हेलीकॉप्टर से बांग्लादेश छोड़कर भारत पहुँचीं। सेना तटस्थ रही और अंतरिम सरकार ने सत्ता संभाल ली।</p>
<p><strong>ट्रायल: हसीना के खिलाफ उन्हीं का बनाया ट्रिब्यूनल</strong></p>
<p>नोबेल पुरस्कार विजेता मुहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार ने आईसीटी को पुनर्गठित किया और हसीना पर मानवता के खिलाफ अपराधों का मामला दर्ज किया। अभियोजन पक्ष ने दावा किया कि हसीना ने 2024 के आंदोलन को कुचलने के लिए सुरक्षा बलों को पूरी छूट दी, कई जगह सीधे आदेश दिए और नागरिकों पर सिस्टमेटिक अटैक करवाया। अदालत में वीडियो, कॉल रिकॉर्डिंग और अधिकारियों की गवाही पेश की गई। महीनों लंबी सुनवाई के बाद 17 नवंबर 2025 को ट्रिब्यूनल ने उन्हें दोषी करार देते हुए फांसी की सजा सुनाई। पूर्व गृह मंत्री असदुज्जमान खान को भी मृत्युदंड मिला।</p>
<p><strong>बांग्लादेश का भविष्य: स्थिरता या नई उथल-पुथल?</strong></p>
<p>2026 के चुनाव निकट हैं। अवामी लीग पर प्रतिबंध लगाया जा चुका है। देश एक नए राजनीतिक युग की ओर बढ़ रहा है। लेकिन हसीना की सजा ने समाज को दो हिस्सों में बाँट दिया है। एक वर्ग उन्हें तानाशाह मानता है वहीं दूसरा उन्हें राष्ट्रीय नायिका के साथ हुआ अन्याय समझता है। बांग्लादेश का आने वाला दौर इस विभाजन के बीच की खाई को पाट पाएगा या और चौड़ा करेगा-यह अभी अनिश्चित है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
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                <pubDate>Tue, 18 Nov 2025 12:03:46 +0530</pubDate>
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