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                <title>court order - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <title>संभल हिंसा मामला: ASP अनुज चौधरी को राहत, FIR के आदेश पर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने लगाई रोक</title>
                                    <description><![CDATA[इलाहाबाद हाईकोर्ट ने संभल हिंसा केस में एएसपी अनुज चौधरी के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने के आदेश पर रोक लगाई, याचिकाकर्ता को अंतरिम राहत मिली।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/allahabad-high-court-stays-order-for-relief-to-asp-anuj/article-142633"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-02/11-(700-x-400-px)-(630-x-400-px)-(7)7.png" alt=""></a><br /><p>उत्तर प्रदेश। उत्तर प्रदेश के इलाहाबाद हाईकोर्ट ने संभल हिंसा मामले में एएसपी अनुज चौघरी को बड़ी राहत देते हुए एफआईआर के आदेशों पर रोक लगा दी है। बता दें कि इस हादसे में आलम को 3 गोलियां मारने पर स्थानिय कोर्ट ने 9 जनवरी को करीब 22 पुलिसकर्मियों पर एफआईआर दर्ज करने के आदेश दिए थे। जिसके बाद एएसपी अनुज चौधरी ने कोर्ट के इस फैसले के खिलाफ हाईकोर्ट का रूख किया था।</p>
<p>जिस पर आज सुनवाई करते हुए इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एफआईआर पर रोक लगा दी हैं। इसके साथ ही बता दें इस मामले में एफआईआर का आदेश जारी करने वाले न्यायधीश पहले ही हट चुके हैं। हाईकोर्ट ने अनुज तोमर की याचिका पर सुनवाई करते हुए 14 दिन की अंतरिम राहत देते हुए शिकायत करने वाले यामीन को कोर्ट में जवाब दाखिल करने के लिए करीब 14 दिन का समय दिया है।</p>
<p>अदालत ने तत्कालीन कोतवाली इंस्पेक्टर अनुज तोमर को भी राहत प्रदान की है। न्यायमूर्ति समित गोपाल की एकलपीठ ने 9 जनवरी को पारित संभल सीजेएम न्यायालय के आदेश पर रोक लगाते हुए शिकायतकर्ता यामीन से दोनों याचिकाओं पर जवाब दाखिल करने को कहा है। मामले की अगली सुनवाई पांच सप्ताह बाद निर्धारित की गई है।</p>
<p>उल्लेखनीय है कि संभल के सीजेएम विभांशु सुधीर ने दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 156(3) के तहत एएसपी अनुज चौधधरी सहित 20 पुलिसकर्मियों के विरुद्ध मुकदमा दर्ज करने का आदेश दिया था। इस आदेश के विरुद्ध अनुज चौधरी और उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से दाखिल याचिका पर सोमवार और मंगलवार को सुनवाई हुई, जिसके बाद हाईकोर्ट ने यह अंतरिम आदेश पारित किया।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 10 Feb 2026 15:52:52 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>आमला एयरफोर्स चंदन चोरी केस: पुलिस की बड़ी लापरवाही, कोर्ट ने गिरफ्तारी अवैधानिक मानकर किया रिहा</title>
                                    <description><![CDATA[आमला एयरफोर्स स्टेशन से चंदन चोरी मामले में गिरफ्तारी प्रक्रिया में लापरवाही पर अदालत ने पुलिस कार्रवाई को अवैध बताते हुए तीनों आरोपियों को रिहा करने के आदेश दिए।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/amla-air-force-sandalwood-theft-case-big-negligence-of-police/article-138024"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-01/mp-news.png" alt=""></a><br /><p>बैतूल। मध्यप्रदेश के बैतूल जिले में आमला एयरफोर्स स्टेशन से चंदन के पेड़ों की चोरी के बहुचर्चित मामले में पुलिस की गंभीर लापरवाही सामने आई है। न्यायालय ने गिरफ्तारी की कानूनी प्रक्रिया का पालन न करने पर पुलिस की कार्रवाई को अवैधानिक करार देते हुए तीनों आरोपियों को रिहा करने के आदेश दिए हैं। इस निर्णय के बाद पुलिस और बचाव पक्ष के दावों में भी विरोधाभास उभरकर सामने आया है।</p>
<p>प्रकरण 16 नवंबर की रात का है, जब आमला एयरफोर्स स्टेशन की सुरक्षा बाउंड्री की ग्रिल काटकर चोरों ने चार कीमती चंदन के पेड़ों की चोरी कर ली थी। चोरी गए चंदन की कीमत 60 से 70 हजार रुपये आंकी गई थी। घटना के बाद थाना आमला पुलिस ने संदीप शेंडे, पिंंटू नागले और संजय कवरेती को आरोपी बनाकर गिरफ्तार किया था।</p>
<p>पुलिस के अनुसार, विशेष टीम ने घटनास्थल का निरीक्षण कर आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों और तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर आरोपियों की पहचान की। इसके बाद ग्राम पावल और वरुड क्षेत्र से तीनों को हिरासत में लिया गया। पूछताछ के दौरान ग्राम कन्हडगांव के पास से चंदन की लकड़ी के पांच लठ्ठे और कटे हुए टुकड़े बरामद किए जाने का दावा किया गया। यह कार्रवाई थाना प्रभारी मुकेश ठाकुर के नेतृत्व में की गई थी।</p>
<p>मामले की सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष के अधिवक्ता राजेंद्र उपाध्याय ने अदालत में दलील दी कि पुलिस ने आरोपियों को उनकी भाषा में गिरफ्तारी का कारण नहीं बताया और न ही लिखित रूप में इसकी सूचना दी गई। न्यायालय ने सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों का हवाला देते हुए कहा कि गिरफ्तारी की सूचना समय पर नहीं दी गई और विवेचक गिरफ्तारी के ठोस आधार प्रस्तुत करने में असफल रहा। अदालत ने यह भी माना कि संबंधित अपराध सात वर्ष से कम सजा की श्रेणी में आता है, ऐसे में ज्यूडिशियल रिमांड आवश्यक नहीं थी। इसी आधार पर न्यायालय ने गिरफ्तारी को अवैधानिक ठहराते हुए तीनों आरोपियों को रिहा करने का आदेश दिया।</p>
<p>हालांकि, इस आदेश के बाद भी विवाद बना हुआ है। बचाव पक्ष का कहना है कि अदालत ने सीधे रिहाई के आदेश दिए हैं, जबकि पुलिस का दावा है कि आरोपियों को जमानत पर छोड़ा गया है। न्यायालय ने यह भी स्पष्ट किया है कि यदि पुलिस भविष्य में सभी कानूनी औपचारिकताओं का पालन करती है, तो आरोपियों की दोबारा गिरफ्तारी की जा सकती है। इस पूरे मामले ने पुलिस की कार्यप्रणाली और गिरफ्तारी प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं, जो जांच एजेंसियों के लिए एक अहम सबक माने जा रहे हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 01 Jan 2026 15:29:53 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>कोर्ट के आदेश के बावजूद नहीं रोकी जा रही अग्रवाल समाज समिति चुनाव की मतगणना </title>
                                    <description><![CDATA[महावीर स्कूल में चल रही अग्रवाल समाज समिति चुनाव की मतगणना किसी भी कीमत पर नहीं रोकी जाएगी। यह जानकारी मतदान केंद्र पर चल रही मतगणना के दौरान मुख्य निर्वाचन अधिकारी राजू मंगोड़ीवाला ने मीडिया को दी।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/counting-of-votes-for-agarwal-samaj-samiti-elections-is-not/article-78812"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-05/photo-size15.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। महावीर स्कूल में चल रही अग्रवाल समाज समिति चुनाव की मतगणना किसी भी कीमत पर नहीं रोकी जाएगी। यह जानकारी मतदान केंद्र पर चल रही मतगणना के दौरान मुख्य निर्वाचन अधिकारी राजू मंगोड़ीवाला ने मीडिया को दी।</p>
<p>मंगोड़ीवाला ने कहा कि कोर्ट ने मतगणना और चुनाव परिणाम पर रोक लगाई है इसकी हमारे पास कोई जानकारी नहीं आई है। इसलिए मतगणना जारी रहेगी। वहीं मतगणना व चुनाव परिणाम को लेकर एक ग्रुप कोर्ट से स्टे लेकर आया है। जिसके तहत कोर्ट ने मतगणना और चुनाव परिणाम पर रोक लगाई है। कोर्ट के स्टे आर्डर की कॉपी लेकर अपील पक्ष का वकील आया था।</p>
<p>चुनाव समिति का बयान है कि कोर्ट का अधिकृत कर्मचारी लेकर आता है अधिकृत स्टे बाद में कोर्ट के एक वकील मतदान केंद्र पर स्टे की कॉपी लेकर भी पहुंचे लेकिन केन्द्र पर मौजूद समाज के प्रतिनिधियों ने हंगामा कर उन्हें भी बाहर करवा दिया। मौके पर पहुंची पुलिस ने भी समझाइश की मगर चुनाव समिति ने स्टे की कॉपी नहीं ली और उन्हें वापस लौटा दिया।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 21 May 2024 17:24:54 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>हाईकोर्ट ने बांध में अतिक्रमण को लेकर समन्वय कमेटी की गठित </title>
                                    <description><![CDATA[हाईकोर्ट ने रामगढ़ बांध क्षेत्र में अतिक्रमण को लेकर 5 सदस्यीय समन्वय कमेटी गठित की है। अदालत ने कमेटी को कहा कि वह चार्ट पेश कर बताए कि रामगढ़ बांध को लेकर अब तक कोर्ट ने क्या-क्या आदेश दिए हैं और उनकी पालना में क्या कार्रवाई की गई।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/jaipur-high-court-constituted-committee-about-encroachment-in-dam/article-13621"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-07/46546546517.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। हाईकोर्ट ने रामगढ़ बांध क्षेत्र में अतिक्रमण को लेकर 5 सदस्यीय समन्वय कमेटी गठित की है। अदालत ने कमेटी को कहा कि वह चार्ट पेश कर बताए कि रामगढ़ बांध को लेकर अब तक कोर्ट ने क्या-क्या आदेश दिए हैं और उनकी पालना में क्या कार्रवाई की गई। चार्ट में यह भी बताने को कहा है कि अब तक किन आदेशों की पालना नहीं हो पाई है। अदालत ने कमेटी को इस संबंध में एक माह में बैठक करने के बाद अगले 45 दिनों में यह रिपोर्ट तैयार कर पेश करने को कहा है। सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने अदालती आदेश की पालना में समन्वय कमेटी गठित करने के लिए सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग के आईएएस समित शर्मा को नोडल अधिकारी बनाते हुए हैड ऑफ फॉरेस्ट डीएन पांडे, राजस्व विभाग के आरएएस श्याम सिंह शेखावत और जल संसाधन विभाग के सचिव सहित एक अधिवक्ता का नाम सुझाया। इस पर अदालत ने अधिवक्ता की जगह वाटर प्लानिंग के चीफ इंजीनियर रवि सोलंकी को कमेटी में शामिल कर कमेटी गठित की है।</p>
<p>न्याय मित्र वीरेन्द्र डांगी और अशोक भार्गव की ओर से रिपोर्ट पेश की गई। जिसमें बताया कि जमवारामगढ़ के केलाकाबास ग्राम पंचायत के टोडालडी गांव के पास से गुजर रही बाण गंगा नदी में सार्वजनिक निर्माण विभाग सड़क निर्माण करा रहा है और सड़क की सुरक्षा के लिए ऊंची दीवार बनाई है, जो भविष्य में पानी के बहाव में बाधा बन सकती है। मुख्य सचिव को भी पत्र लिखा है। रामगढ़ बांध तक पानी पहुंचाने वाली बाण गंगा, माधो बेणी और ताला नदी के कुल 111 किमी के बहाव क्षेत्र में तीन से चार मीटर मिट्टी है। हाईकोर्ट ने पानी निकास के लिए नाली बनाने को कहा था, लेकिन अभी तक सिर्फ 17 किमी से ही नाली निकाली गई है। सभी पक्षों को सुनने के बाद अदालत ने मामले में कमेटी गठित कर उसे रिपोर्ट पेश करने को कहा है।  <br /><br /></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 05 Jul 2022 10:34:14 +0530</pubDate>
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                <title>सुप्रीम कोर्ट ने गुजरात दंगे में मोदी को एसआईटी की क्लीन चिट को बरकरार रखने का सुनाया फैसला</title>
                                    <description><![CDATA[सुप्रीम कोर्ट ने 2002 के गुजरात दंगा मामले में प्रधानमंत्री (गुजरात के तत्कालीन मुख्यमंत्री) नरेंद्र मोदी को विशेष जांच दल (एसआईटी) की ओर से दी गई क्लीन चिट को सही बताया। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/supreme-court-order-modi-to-uphold-clean-chit-of-sit-in-gujarat-riots/article-12928"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-06/46546546531.jpg" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने 2002 के गुजरात दंगा मामले में प्रधानमंत्री (गुजरात के तत्कालीन मुख्यमंत्री) नरेंद्र मोदी को विशेष जांच दल (एसआईटी) की ओर से दी गई क्लीन चिट को सही बताया। कोर्ट ने क्लीन चिट बरकरार रखने का फैसला फैसला सुनाया। अदालत ने दंगे में गुलबर्ग सोसायटी में मारे गए कांग्रेस के पूर्व सांसद ईशान जाफरी की पत्नी जाकिया जाफरी की उस याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें एसआईटी द्वारा क्लीन चिट दिए जाने को चुनौती दी गई थी।</p>
<p>शीर्ष अदालत ने सुनवाई के बाद सुनवाई पूरी होने के बाद अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था। जाकिया ने गुजरात उच्च न्यायालय के उस फैसले को चुनौती दी थी, जिसमें एसआईटी की क्लोजर रिपोर्ट को संबंधित मजिस्ट्रेट द्वारा स्वीकार करने के फैसले पर मुहर लगाई गई थी। उच्च न्यायालय ने भी तत्कालीन मुख्यमंत्री मोदी को क्लीन चिट को चुनौती देने वाली जाकिया की याचिका खारिज कर दी थी।  इसके बाद याचिकाकर्ता ने शीर्ष अदालत में याचिका दायर की थी। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
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                <pubDate>Fri, 24 Jun 2022 13:08:29 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>हाईकोर्ट ने सहारा प्रमुख को गिरफ्तार करने के लिए पुलिस को दिया आदेश</title>
                                    <description><![CDATA[पटना उच्च न्यायालय ने निवेशकों का पैसा नहीं लौटाने के मामले में सहारा इंडिया के प्रमुख सुब्रत राय को गिरफ्तार करने के लिए 3 प्रदेशों की पुलिस को आदेश दिया है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/high-court-give-order-of-police-to-arrested-chief-of-sahara/article-9701"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-05/46546546465.jpg" alt=""></a><br /><p>पटना। पटना उच्च न्यायालय ने निवेशकों का पैसा नहीं लौटाने के मामले में सहारा इंडिया के प्रमुख सुब्रत राय को गिरफ्तार करने के लिए 3 प्रदेशों की पुलिस को आदेश दिया है। उच्च न्यायालय के न्यायाधीश संदीप कुमार ने अदालत में उपस्थित होने के अल्टीमेटम के बावजूद उपस्थित नहीं होने पर सहारा प्रमुख सुब्रत राय को गिरफ्तार करने का बिहार, दिल्ली और उत्तर प्रदेश के पुलिस महानिदेशक को आदेश जारी किया। इससे पहले राय के अधिवक्ता ने अदालत में मेडिकल रिपोर्ट पेश करते हुए कहा कि राय बीमार हैं और इस वजह से वह अदालत में उपस्थित होने में असमर्थ हैं। इस पर न्यायाधीश ने मेडिकल रिपोर्ट देखने के बाद कहा कि राय को ऐसी कोई बीमारी नहीं है। इसके कारण वह अदालत में उपस्थित नहीं हो सकते है। न्यायाधीश संदीप कुमार की एकल पीठ ने सहारा इंडिया के विभिन्न स्कीमों में आम लोगों के जमा किए गए पैसे के भुगतान को लेकर दायर की गई याचिकाओं पर सुनवाई करते सहारा प्रमुख सुब्रत राय को 13 मई को हाईकोर्ट में उपस्थित होने का अंतिम मौका दिया था। न्यायाधीश ने चेतावनी दी थी कि राय सशरीर उच्च न्यायालय में उपस्थित नहीं होते है, तो फिर अदालत उनकी गिरफ्तारी का आदेश जारी करेगा।</p>
<p>न्यायाधीश ने सुनवाई के दौरान यह भी टिप्पणी की थी कि राय न्यायालय से बड़े नहीं हो सकते है। उन्होंने अदालत में नहीं आ कर बड़ी गलती की है। दरअसल न्यायाधीश ने गुरुवार से पहले हुई सुनवाई के दौरान सहारा प्रमुख सुब्रत राय को 12 मई को उच्च न्यायालय में उपस्थित होने का निर्देश दिया था। सुब्रत राय के पेश होने को लेकर हाईकोर्ट में भारी संख्या में पुलिस बल को भी तैनात किया गया था, लेकिन इसके बावजूद राय कोर्ट में उपस्थित नहीं हुए। उनकी तरफ से हाईकोर्ट में उपस्थित नहीं होने की छूट देने संबंधी दो याचिकाएं दायर की गई थी, जिसे न्यायालय ने खारिज कर दिया। <br /><br /></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 13 May 2022 16:42:20 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली पुलिस को धर्म संसद मामले में नया हलफनामा दायर करने का दिया आदेश</title>
                                    <description><![CDATA[सुप्रीम कोर्ट ने कथित धर्म संसद मामले में दिल्ली पुलिस को नया हलफनामा दायर करने का आदेश दिया है। कोर्ट ने कहा कि हलफनामा दाखिल करने वाले संबंधित अधिकारी ने इस मामले में संबंधित अन्य पहलुओं पर विचार किया या फिर बिना सोचे विचारे जांच रिपोर्ट पेश कर दी। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/supreme-court-give-order-to-file-affidavit-of-police/article-8365"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-04/6546464645.jpg" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने कथित धर्म संसद मामले में दिल्ली पुलिस को नया हलफनामा दायर करने का आदेश दिया है। कोर्ट ने कहा कि हलफनामा दाखिल करने वाले संबंधित अधिकारी ने इस मामले में संबंधित अन्य पहलुओं पर विचार किया या फिर बिना सोचे विचारे जांच रिपोर्ट पेश कर दी। शीर्ष अदालत द्वारा यह पूछे जाने पर कि क्या आप इस पर फिर से विचार करना चाहते है। पुलिस की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर केएम नटराज ने जवाब दिया। हमें फिर से देखना होगा और एक नया हलफनामा दायर करना होगा। इस पर न्यायालय ने दिल्ली पुलिस को सोच विचार कर एक नया हलफनामा 4 मई तक दायर करने का आदेश पारित  किया।दक्षिण-पूर्वी दिल्ली पुलिस उपायुक्त ईशा पांडे ने अदालत में एक हलफनामा दायर कर के दिल्ली पुलिस का पक्ष रखा था। हलफनामे में कहा गया था कि शिकायत के आधार पर संबंधित सामग्रियों की जांच की गई।</p>
<p>पुलिस ने दावा किया कि जांच में आरोप के मुताबिक कोई भी तथ्य ऐसा नहीं मिला, जिसके आधार पर यह अर्थ निकाला जा सके कि किसी विशेष समुदाय के प्रति नफरत फैलाने की कोशिश की गई। हलफनामे में कहा गया कि कार्यक्रम में किसी धर्म विशेष के खिलाफ नफरत फैलाने वाले शब्दों का इस्तेमाल नहीं किया गया था। पुलिस के हलफनामे में कहा गया कि कार्यक्रम में किसी भी समूह, समुदाय, धर्म या विश्वास के खिलाफ नफरत वाले वक्तव्य नहीं दिए गए थे। हलफनामे में दिल्ली पुलिस ने कहा था कि भाषण में उन शब्दों के इस्तेमाल नहीं किए गए, जिससे माना जाए कि किसी भी धर्म, जाति या पंथ के बीच माहौल बिगाड़ने कि कोई कोशिश की गई।  <br /><br /><br /></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 22 Apr 2022 14:54:06 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>सुप्रीम कोर्ट ने जहांगीरपुरी अतिक्रमण अभियान पर 2 सप्ताह के लिए रोक जारी रखने का दिया आदेश </title>
                                    <description><![CDATA[सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर-पश्चिम दिल्ली के दंगा प्रभावित जहांगीरपुरी में नगर निगम के अतिक्रमण विरोधी अभियान पर 2 सप्ताह के लिए रोक जारी रखने का आदेश दिया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/supreme-court-give-order-to-ban-on-encroachment-campagin/article-8291"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-04/46546546546530.jpg" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर-पश्चिम दिल्ली के दंगा प्रभावित जहांगीरपुरी में नगर निगम के अतिक्रमण विरोधी अभियान पर 2 सप्ताह के लिए रोक जारी रखने का आदेश दिया। कोर्ट ने अतिक्रमण विरोधी अभियान पर लगाई गई रोक पर यथास्थिति बनाएं रखने का आदेश पारित किया। इसके साथ ही जमीयत उलमा-ए-हिंद की याचिका पर जहांगीरपुरी अतिक्रमण विरोधी अभियान की तरह कई अन्य प्रदेशें की कार्रवाईयों के मामले में केंद्र सरकार और अन्य को नोटिस जारी किया। याचिकाकर्ताओं का आरोप है कि अदालती रोक के बावजूद अतिक्रमण हटाने का काम चलता रहा। सुनवाई के दौरान सिब्बल ने कहा कि अतिक्रमण की समस्या देश में है, लेकिन इस मामले को केवल मुस्लिम समुदाय से जोड़कर कार्रवाई की जा रही है।</p>
<p>दवे ने कहा कि बिना नोटिस के अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई करके कानून की धज्जियां उड़ाई गई। जहांगीरपुरी क्षेत्र में हनुमान जयंती पर आयोजित शोभायात्रा के दौरान दो गुटों के बीच हिंसक झड़पें हुई थी। इसके मद्देनजर इलाके में तनाव को देखते हुए बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात है। तनाव के बीच भारतीय जनता पार्टी शासित उत्तरी दिल्ली नगर निगम ने इलाके में अतिक्रमण विरोधी अभियान शुरू कर दिया था। इसके बाद में अदालत के आदेश पर अमल करते हुए अतिक्रमण हटाने के अभियान पर रोक लगाई।<br /><br /></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 21 Apr 2022 14:24:27 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>अदालत ने आशीष को पुलिस रिमांड पर भेजने का दिया आदेश</title>
                                    <description><![CDATA[लखीमपुर हिंसा मामले के मुख्य आरोपी आशीष मिश्रा को अदालत ने पुलिस रिमांड पर भेजने का आदेश दिया है। मंत्री अजय मिश्र के पुत्र आशीष पर लखीमपुर के तिकुनिया में अपने वाहन से किसानों को कुचलने का आरोप है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/%E0%A4%85%E0%A4%A6%E0%A4%BE%E0%A4%B2%E0%A4%A4-%E0%A4%A8%E0%A5%87-%E0%A4%86%E0%A4%B6%E0%A5%80%E0%A4%B7-%E0%A4%95%E0%A5%8B-%E0%A4%AA%E0%A5%81%E0%A4%B2%E0%A4%BF%E0%A4%B8-%E0%A4%B0%E0%A4%BF%E0%A4%AE%E0%A4%BE%E0%A4%82%E0%A4%A1-%E0%A4%AA%E0%A4%B0-%E0%A4%AD%E0%A5%87%E0%A4%9C%E0%A4%A8%E0%A5%87-%E0%A4%95%E0%A4%BE-%E0%A4%A6%E0%A4%BF%E0%A4%AF%E0%A4%BE-%E0%A4%86%E0%A4%A6%E0%A5%87%E0%A4%B6/article-1588"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2021-10/46546546546528.jpg" alt=""></a><br /><p>लखीमपुर। लखीमपुर हिंसा मामले के मुख्य आरोपी आशीष मिश्रा को अदालत ने पुलिस रिमांड पर भेजने का आदेश दिया है। मंत्री अजय मिश्र के पुत्र आशीष पर लखीमपुर के तिकुनिया में अपने वाहन से किसानों को कुचलने का आरोप है। आशीष के अधिवक्ता अवधेश सिंह ने बताया कि पुलिस ने आशीष से पूछताछ के लिये रिमांड की अपील की थी, अपर न्यायालय ने आशीष को रिमांड पर भेजने का आदेश दिया है।</p>
<p>अदालत के अनुसार पुलिस को रिमांड में लेने से पहले आशीष का मेडिकल कराना होगा, उसके साथ मारपीट नहीं की जायेगी। अभियोजन पक्ष की दलील थी कि आशीष ने पूछताछ में सहयोग नहीं किया। <br />  </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 11 Oct 2021 17:28:21 +0530</pubDate>
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