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                <title>असर खबर का : शिक्षा व्यवस्था पटरी पर, बिजली आपूर्ति सुचारू</title>
                                    <description><![CDATA[प्रशासन और बिजली विभाग की त्वरित कार्रवाई से मिली राहत]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jhalawar/impact-of-the-report--education-system-back-on-track--power-supply-restored/article-159849"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-07/kota.png" alt=""></a><br /><p>खानपुर । उपखंड में बीते दिनों राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय और आसपास के क्षेत्र में ट्रांसफार्मर जलने के कारण ठप हुई बिजली व्यवस्था पर 'दैनिक नवज्योति' टीम ने प्रमुखता से 11 जुलाई 2026 को खबर प्रकाशित की गई थी। खबर प्रकाशित होने के 24 घंटे के व भीतर ही प्रशासन और बिजली विभाग हरकत में आया और तत्परता  दिखाते हुए खराब ट्रांसफार्मर को बदल दिया गया है। अब विद्यालय में और क्षेत्र में बिजली की आपूर्ति सुचारू रूप से बहाल हो गई है। व बिजली आने के बाद से ही विद्यालय  में पेयजल की समस्या का समाधान हो गया है और शैक्षणिक गतिविधियाँ, विशेषकर ऑनलाइन कंप्यूटर कार्य, पुनः सुचारू रूप से शुरू हो गए हैं।</p>
<p>स्थानीय ग्रामीणों और विद्यालय प्रशासन ने त्वरित कार्रवाई के लिए संबंधित विभाग का आभार व्यक्त किया है, जिससे भीषण गर्मी और उमस के बीच बच्चों और क्षेत्रवासियों को बड़ी राहत मिली है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>झालावाड़</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 14 Jul 2026 17:32:13 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>बारिश बनी एमबीएस अस्पताल की सबसे बड़ी परीक्षा : बदहाल ड्रेनेज व्यवस्था बनी मरीजों की मुसीबत</title>
                                    <description><![CDATA[ नई बिल्डिंग, सेंट्रल लैब और अधीक्षक कार्यालय तक जाने वाले रास्तों पर भरता है पानी।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/rain-poses-the-biggest-challenge-for-mbs-hospital--poor-drainage-system-causes-trouble-for-patients/article-159324"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-07/1200-x-600-px)-(1)20.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। संभाग के सबसे बड़े एमबीएस अस्पताल में मानसून की पहली बारिश के साथ ही वर्षों पुरानी जलभराव की समस्या फिर सामने आने लगती है। अस्पताल की नई बिल्डिंग के बाहर, सेंट्रल लैब, अधीक्षक कार्यालय तक जाने वाले मार्ग सहित कई स्थानों पर थोड़ी सी बारिश के बाद ही पानी भर जाता है। मरीजों, उनके परिजनों और अस्पताल स्टाफ को पानी से होकर गुजरना पड़ता है। कई बार स्ट्रेचर और व्हीलचेयर निकालने तक में परेशानी होती है, जिससे गंभीर मरीजों को समय पर उपचार तक पहुंचाने में दिक्कत आती है।</p>
<p>अस्पताल प्रशासन ने पिछले कुछ समय में पुरानी बिल्डिंग से पर्ची काउंटर, जांच काउंटर और इमरजेंसी ओपीडी जैसी महत्वपूर्ण सेवाओं को नई बिल्डिंग में स्थानांतरित कर दिया है। इससे मरीजों को आधुनिक सुविधाओं का लाभ मिला है और एक ही स्थान पर अधिकांश सेवाएं उपलब्ध होने लगी हैं। लेकिन बारिश के दौरान नई बिल्डिंग के बाहर जलभराव होने से मरीजों को इन सुविधाओं तक पहुंचने में परेशानी उठानी पड़ती है। हालांकि पुरानी बिल्डिंग में अब मुख्य रूप से भर्ती मरीजों को रखा जाता है, लेकिन बारिश के मौसम में वहां भी सीलन, पानी टपकने और आसपास जलभराव जैसी समस्याएं सामने आती हैं।</p>
<p><strong>मोर्चरी तक पहुंचने वाला रास्ता बना सबसे बड़ी चिंता</strong><br />एमबीएस अस्पताल से मोर्चरी की ओर जाने वाला मार्ग लंबे समय से जर्जर हालत में है। सड़क जगह-जगह से उखड़ चुकी है और बड़े-बड़े गड्ढे बन चुके हैं। बारिश के दौरान इन गड्ढों में पानी भर जाता है, जिससे उनकी गहराई का अंदाजा लगाना भी मुश्किल हो जाता है। ऐसे में एंबुलेंस, शव वाहन, अस्पताल के अन्य वाहन और पैदल आने-जाने वाले लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है। हालात इतने खराब हो जाते हैं कि कई बार मोर्चरी तक पहुंचना भी चुनौती बन जाता है। शव लेकर आने वाले परिजनों को भी कीचड़ और जलभराव के बीच से गुजरना पड़ता है। अस्पताल परिसर का यह मार्ग वर्षों से मरम्मत का इंतजार कर रहा है, लेकिन अब तक स्थायी समाधान नहीं हो सका है।</p>
<p>डॉक्टरों की सेवाएं और चिकित्सा सुविधाएं बेहतर हैं, लेकिन बारिश के मौसम में अस्पताल परिसर की स्थिति चिंता बढ़ा देती है।<br /><strong>-सुशिला बाई, मरीज</strong></p>
<p>- नई बिल्डिंग बनने से सुविधाएं तो बढ़ी हैं, लेकिन बारिश के समय बाहर पानी भर जाता है। बुजुर्ग और गंभीर मरीजों को अस्पताल तक पहुंचाने में काफी परेशानी होती है।<br /><strong>सुरज सिंह, मरीज</strong></p>
<p>सेंट्रल लैब और जांच काउंटर तक जाने में पानी और कीचड़ से होकर गुजरना पड़ता है। प्रशासन को ड्रेनेज व्यवस्था स्थायी रूप से सुधारनी चाहिए। मोर्चरी की सड़क इतनी खराब है कि बारिश में गड्ढे दिखाई ही नहीं देते। एंबुलेंस तक हिचकोले खाती हुई गुजरती है। अस्पताल परिसर की सड़कें जल्द से जल्द बनाई जानी चाहिए।<br /><strong>- श्वेता गुर्जर, मरीज</strong></p>
<p><strong>इनका कहना है</strong><br />मानसून को देखते हुए अस्पताल परिसर की सभी प्रमुख नालियों की सफाई करवाई जा रही है ताकि पानी की निकासी बाधित न हो। संबंधित विभागों को आवश्यक निर्देश दिए गए हैं और लगातार निगरानी रखी जा रही है। उन्होंने बताया कि स्थायी समाधान के लिए केडीए को ड्रेनेज निर्माण का कार्य सौंप दिया गया है। फिलहाल वर्क ऑर्डर जारी होने की प्रक्रिया चल रही है। जैसे ही कार्यादेश मिलेगा, सबसे पहले अस्पताल परिसर में आधुनिक ड्रेनेज सिस्टम विकसित किया जाएगा। इसके बाद क्षतिग्रस्त और जर्जर सड़कों का पुनर्निर्माण कराया जाएगा, जिससे मरीजों और उनके परिजनों को राहत मिल सके।<br /><strong>- डॉ. आर.के. सिंह, अधीक्षक एमबीएस अस्पताल</strong></p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 09 Jul 2026 14:36:30 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>चारधाम में आस्था का सैलाब: शनिवार को रिकॉर्ड 96 हजार से अधिक तीर्थयात्रियों ने किए दर्शन, कुल आंकड़ा 20 लाख के पार</title>
                                    <description><![CDATA[उत्तराखंड की चारधाम यात्रा में श्रद्धालुओं का रिकॉर्ड आंकड़ा पार हो गया है। मात्र 35 दिनों में 20 लाख 76 हजार से अधिक तीर्थयात्रियों ने दर्शन किए हैं, जबकि शनिवार को रिकॉर्ड 96,116 लोग पहुंचे। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के कुशल प्रबंधन और अलर्ट आपदा तंत्र के कारण यात्रा सुचारु रूप से जारी है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/flood-of-faith-in-chardham-a-record-96-thousand-pilgrims/article-154842"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-05/chardham1.png" alt=""></a><br /><p>देहरादून। देवभूमि उत्तराखंड स्थित गंगोत्री, यमुनोत्री, बदरीनाथ और केदारनाथ यानि चारधाम दर्शन को आस्था का सैलाब उमड़ पड़ा है। चारों धामों में दर्शन को श्रद्धालुओं की लंबी कतारें लग रही हैं, लेकिन व्यवस्थाएं दुरुस्त होने से यात्रा सुचारु रूप से चल रही है। शनिवार को रिकॉर्ड 96 हजार 116 तीर्थयात्रियों ने चारधाम दर्शन किए। कुल दर्शनार्थियों का आंकड़ा 20 लाख 76 हजार को पार कर चुका है, जबकि केदारनाथ में 08 लाख 11 हजार से अधिक तीर्थयात्री दर्शन कर चुके हैं।</p>
<p>उच्च हिमालयी क्षेत्र की यात्रा होने से आपदा प्रबंधन को अलर्ट मोड पर रखा गया है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने शीर्ष अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि मौसम प्रतिकूल होने पर हर एक श्रद्धालु की सुरक्षा और सुविधा का पूरा ध्यान रखा जाए। पुष्कर सिंह धामी के मुख्यमंत्रित्व वाली सरकार के कुशल यात्रा प्रबंधन के चलते चारधाम यात्रियों की संख्या लगातार बढ़ रही है। यात्रा का बीते 19 अप्रैल को श्रीगणेश हुआ और आज 23 मई तक यानी 35 दिनों में 20 लाख 76 हजार 553 श्रद्धालु चारधाम दर्शन कर चुके हैं। इनमें केदारनाथ में 8,11,923, बद्रीनाथ में 5,56,437, गंगोत्री में 3,52,162 और यमुनोत्री धाम में 3,56,031तीर्थयात्री पहुंचे हैं। मात्र आज एक दिन में ही चारों धामों में 96 हजार 116 श्रद्धालुओं ने दर्शन किए। श्री बदरीनाथ में सर्वाधिक 32,219 तीर्थयात्री पहुंचे। जबकि केदारनाथ में 29,787, यमुनोत्री में 16,213 और गंगोत्री धाम में 17,897 श्रद्धालुओं ने दर्शन किए।</p>
<p>इतना ही नहीं, सिक्खों के विश्व प्रसिद्ध तीर्थस्थल श्री हेमकुंड साहिब के कपाट भी आज श्रद्धालुओं के दर्शनार्थ खोल दिए गए हैं। जहां पहले दिन 06 हजार 605 श्रद्धालुओं ने दर्शन किए। पंच प्यारों की अगुवाई में सिख श्रद्धालुओं का पहला जत्था शनिवार सुबह रवाना होकर हेमकुंट साहिब पहुंचा. 'बोले सो निहाल, सत श्री अकाल' के जयकारों से पूरी लोकपाल घाटी गूंज उठी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 24 May 2026 13:01:08 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>बार-बार पेपर लीक पर जवाब दें केंद्र सरकार, शिक्षा मंत्री को तुरंत करें बर्खास्त : राहुल गांधी</title>
                                    <description><![CDATA[लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने बार-बार हो रहे नीट पेपर लीक मामलों पर गहरी चिंता जताई है। उन्होंने प्रधानमंत्री से 'परीक्षा पे चर्चा' पर चुप्पी तोड़ने का आग्रह करते हुए शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को तत्काल बर्खास्त करने की मांग की। उन्होंने आरोप लगाया कि लगातार हो रही इन विफलताओं से देश के छात्रों का भरोसा टूट रहा है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/central-government-should-respond-to-repeated-paper-leaks-rahul-gandhi/article-154148"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/rahul-gandhi2.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष तथा लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने बार-बार हो रही पेपर लीक की घटनाओं पर केंद्र सरकार की चुप्पी पर हैरानी जताई और कहा कि इसके लिए उन्हें तत्काल शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को बर्खास्त करना चाहिए। राहुल गांधी ने रविवार को सोशल मीडिया एक्स पर अपनी मांग दोहराते हुए कहा कि मेडिकल प्रवेश परीक्षा नीट के पेपर बार-बार लीक होने की घटना से शिक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। </p>
<p>उन्होंने इस पर आगे लिखा कहा "2024 में नीट परीक्षा का पेपर लीक हुआ था लेकिन परीक्षा रद्द नहीं की गई, मंत्री ने इस्तीफा नहीं दिया, केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) से जांच कराई गई और एक समिति बनाई गई। अब 2026 का भी पेपर लीक हुआ, परीक्षा रद्द करनी पड़ी, मंत्री ने फिर भी इस्तीफा नहीं दिया, सीबीआई जांच कर रही है और एक अन्य समिति बनाए जाने की बात हो रही है।"</p>
<p>राहुल गांधी ने केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए कहा, "देश कुछ सवाल पूछ रहा है, जवाब दो। बार-बार पेपर लीक क्यों हो रहे हैं। इस 'परीक्षा पे चर्चा' पर आप चुप क्यों हैं। बार-बार विफल हो रहे शिक्षा मंत्री को आप बर्खास्त क्यों नहीं कर रहे हैं।" कांग्रेस नेता ने आरोप लगाया कि परीक्षा प्रणाली में लगातार हो रही गड़बड़ियों से छात्रों और अभिभावकों का भरोसा कमजोर हो रहा है तथा केंद्र सरकार को इसकी जवाबदेही तय करनी चाहिए।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 17 May 2026 16:39:22 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>हरियाणा में शहरी परिवहन व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में सरकार का बड़ा कदम : 10 शहरों में दौड़ेंगी नई इलेक्ट्रिक बसें, प्रदूषण में कमी के साथ ईंधन की लागत में होगी बचत</title>
                                    <description><![CDATA[शहरी परिवहन को मजबूती देने के लिए सरकार बड़ा कदम उठा रही है। मई अंत तक 10 शहरों में 90 नई इलेक्ट्रिक बसें शुरू होंगी, जिससे कुल संख्या 155 हो जाएगी। यह पहल यात्रियों को बेहतर सुविधा, समयबद्ध सेवा और प्रदूषण में कमी देगी। बसों को संचालन से पहले सुरक्षा व गुणवत्ता जांच से गुजरना होगा।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/governments-big-step-towards-strengthening-the-urban-transport-system-in/article-151743"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-12/electric-bus.png" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal"><span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">चंडीगढ़। हरियाणा में शहरी परिवहन व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। मई माह के अंत तक प्रदेश के 10 शहरों में 90 नयी इलेक्ट्रिक सिटी बसें शुरू की जाएंगी। इस पहल का उद्देश्य शहरों में सार्वजनिक परिवहन को बेहतर, सुरक्षित और पर्यावरण के अनुकूल बनाना है। वर्तमान में प्रदेश में 65 सिटी बसों का संचालन हो रहा है। नयी बसों के शामिल होने के बाद जून के पहले सप्ताह तक यह संख्या बढ़कर 155 तक पहुंचने की उम्मीद है। इससे यात्रियों को अधिक मार्गों पर सुविधाजनक और समयबद्ध यात्रा का विकल्प मिलेगा। खासकर रोजाना सफर करने वाले लोगों को इससे काफी राहत मिलने की संभावना है।</span></p>
<p class="MsoNormal"><span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">सरकार का मानना है कि इलेक्ट्रिक बसों के संचालन से न केवल प्रदूषण में कमी आएगी, बल्कि ईंधन की लागत में भी बचत होगी। साथ ही, शहरी क्षेत्रों में ट्रैफिक प्रबंधन को भी बेहतर किया जा सकेगा। नयी बसों को सेवा में शामिल करने से पहले एक विभागीय कमेटी द्वारा उनका विस्तृत निरीक्षण किया जाएगा। इस दौरान तकनीकी गुणवत्ता, सुरक्षा मानकों और अन्य जरूरी पहलुओं की जांच सुनिश्चित की जाएगी। सभी मानकों पर खरा उतरने के बाद ही इन बसों को विभिन्न शहरों के मार्गों पर उतारा जाएगा। इसके अलावा, संबंधित जिलों में बस निर्माण कंपनियों द्वारा अतिरिक्त बसें भी भेजी जाएंगी, ताकि भविष्य में बढ़ती मांग के अनुसार सेवा का विस्तार किया जा सके।</span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 26 Apr 2026 14:22:13 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>भाजपा शासन में पीडि़त को प्रताड़ित करने की बनी नई व्यवस्था : महिलाओं को लेकर सरकार की बातें सिर्फ दिखावा, प्रियंका ने कहा- देश की महिलाएं देख रही ये अंधेरगर्दी</title>
                                    <description><![CDATA[गांधी वाड्रा ने गाजीपुर में युवती हत्या मामले पर यूपी सरकार को घेरा। उन्होंने आरोप लगाया कि FIR में देरी, पीड़ित परिवार को धमकियां और दबंगों की दबंगई से महिलाओं पर अत्याचार चरम पर है। प्रियंका ने कहा, भाजपा राज में पीड़िता ही प्रताड़ित होती है और महिला सुरक्षा सिर्फ दिखावा बनकर रह गई है।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/a-new-system-has-been-created-to-harass-the-victims/article-151654"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-10/priyanka-gandhi.png-22.png" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal"><span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">नई</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">दिल्ली। कांग्रेस</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">महासचिव</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">प्रियंका</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">गांधी</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">वाड्रा</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">ने</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">उत्तर</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">प्रदेश</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">में</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">एक</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">युवती</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">की</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">हत्या</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">से</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">पहले</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">उसकी</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">शिकायत</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">दर्ज</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">करने</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">में</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">आनाकानी</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">करने</span>, <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">फिर</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">दबंगों</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">के</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">पीड़ति</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">परिवार</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">पर</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">दबाव</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">बनाने</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">को</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">लेकर</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">प्रदेश</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">सरकार</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">पर</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">निशाना</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">साधा</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">है</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">और</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">कहा</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">है</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">कि</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">भाजपा</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">शासन</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">में</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">अब</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">यह</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">नयी</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">व्यवस्था</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">बन</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">गयी</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">है। वाड्रा</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">ने</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">शनिवार</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">को</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">सोशल</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">मीडिया</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">एक्स</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">पर</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">लिखा</span>, <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">उत्तर</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">प्रदेश</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">के</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">गाजीपुर</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">में</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">एक</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">लड़की</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">की</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">हत्या</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">के</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">मामले</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">में</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">पहले</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">प्राथमिकी</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">दर्ज</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">करने</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">में</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">आनाकानी</span>, <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">फिर</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">पीड़ति</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">परिवार</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">को</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">धमकियां</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">मिलना</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">और</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">दबंगों</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">द्वारा</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">अराजकता</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">फैलाना</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">यह</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">दिखाता</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">कि</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">प्रदेश</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">में</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">महिलाओं</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">के</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">खिलाफ</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">अत्याचार</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">चरम</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">पर</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">है। उन्होंने</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">कहा</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">कि भाजपा</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">राज</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">में</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">अब</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">यही</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">अघोषित</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">कानून</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">बन</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">गया</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">है</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">कि</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">जब</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">भी</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">किसी</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">महिला</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">पर</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">अत्याचार</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">होता</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">है,</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">तो</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">पीड़ित</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">को</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">ही</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">और</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">प्रताड़ित</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">किया</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">जाता</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">है।</span></p>
<p class="MsoNormal"><span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">उन्होंने</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">केन्द्र सरकार पर</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">महिलाओं</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">की</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">सुरक्षा</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">को</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">लेकर</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">गंभीर</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">नहीं</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">होने</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">का</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">आरोप</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">लगाते</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">हुए</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">कहा</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">कि महिलाओं</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">को</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">लेकर</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">सरकार की</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">बड़ी</span>-<span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">बड़ी</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">बातें</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">सिर्फ</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">दिखावा</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">हैं।</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">उन्नाव</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">हो</span>, <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">हाथरस</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">हो</span>, <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">प्रयागराज</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">हो</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">या</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">गाजीपुर</span>, <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">जहां</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">भी</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">महिलाओं</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">के</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">साथ</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">अन्याय</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">हुआ</span>, <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">भाजपा</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">अपनी</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">पूरी</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">सत्ता</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">के</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">साथ</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">पीड़िता के</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">खिलाफ</span>, <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">अत्याचारी</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">के</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">साथ</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">खड़ी</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">हो</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">गई।</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">देश</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">भर</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">की</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">महिलाएं</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">ये</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">अंधेरगर्दी</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">देख</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">रही</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">हैं।</span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 25 Apr 2026 11:58:24 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>पिता की बूढ़ी आखों में आई चमक आंसुओं में बह गई</title>
                                    <description><![CDATA[चार अप्रैल को कोर्ट के फैसले ने छीनी नौकरी, 5 अप्रैल की परीक्षा में बैठने लायक भी नहीं छोड़ा सिस्टम ने।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/the-sparkle-that-had-lit-up-his-father-s-aging-eyes-washed-away-in-tears/article-150186"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/1200-x-600-px)-(1)22.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। बहन पायल गोयल जूनियर असिस्टेंट और निकिता अपने भाई के इस हालात पर निःशब्द हैं। पिता की बूढ़ी आंखों में आई चमक आंसुओं में बह गयी माँ ने तो अपने लाडले को गले से लगा बस इतना ही कहा बैटा शरीर कमजोर कर लिया। छुटकी ने तो कह ही दिया दादा आप तो बोलते थे पढ़ो नौकरी मिलेगी । एसआई भर्ती परीक्षा 2021 का पुल पार कर नौकरी पर चढे. राहुल अपने अतीत के दिनों में खुद का वजूद ढूंढने लगते है। राहुल को एसआई के रूप में बून्दी जिले में नियुक्ित मिली थी। 6 जनवरी 2025 में पद लिया लेकिन सिस्टम ने सालों पीछे धकेल दिया है। राहुल कहते हैं क्या मेरे जीवन के ये गुजरे साल और मंजिल पाने के बाद बदनामी के अंधेरों में से मैं अपने को लौटा पाऊंगा।<br />बोरखेड़ा निवासी राहुल गोयल के लिए अप्रैल का यह हफ्ता किसी बुरे सपने सा साबित हुआ। राहुल बताते है कि नयी भर्ती के पेपर से एक दिन पहले 4 अप्रैल को आए हाई कोर्ट के फैसले ने न केवल उनके कंधे से 'सब-इंस्पेक्टर' के सितारे छीन लिए, बल्कि भर्ती परीक्षा के एक दिन पहले तक असमंजस के चलते इसकी तैयारी के दरवाजे भी उनके लिए बंद कर दिए।</p>
<p><strong>स्टेनो की नौकरी और 14 किलो वजन का त्याग</strong><br />पिता निरंजन गोयल और माता अनीता देवी के लाडले राहुल ने 2018 से किताबों को अपना संसार बनाया था। 2021 में स्टेनोग्राफर की पक्की नौकरी मिली, 200 में से 174 नम्बर लाने के बाद टाईपिंग टेस्ट की परीक्षा के बाद नौकरी पक्की थी। लेकिन वर्दी का जुनून ऐसा था कि उसे ठुकरा दिया।<br />एसआई की परीक्षा में कुल 315 नम्बर के बाद से ही 86 किलो वजन के साथ फिजिकल की तैयारी में जुट गया। लोग ताने मारते थे लेकिन नयापुरा स्टेडियम की तपस्या ने 4 महीने में 14 किलो वजन कमकर राहुल को एक फौलादी एथलीट बना दिया। 100 में से 65 नंबर फिजिकल में लाकर राहुल ने अपनी काबिलियत का लोहा मनवाया था।</p>
<p><strong>साथी की आत्महत्या ने झकझोर दिया</strong><br />5 अक्टूबर 2023 को जॉइनिंग के बाद राहुल ट्रेनिंग के कड़े अनुशासन में ढल चुके थे। सुबह 5 से रात 8 बजे तक की ट्रेनिंग ने उन्हें बाहरी दुनिया और नई पढ़ाई से पूरी तरह काट दिया था। बून्दी 6 जनवरी 2025 में पद लिया । राहुल बताते हैं,आरपीऐ में ट्रेनिंग के साथी राजेन्द्र की आत्महत्या ने झकझोर के रख दिया था, लेकिन हमें नेचुरल जस्टिस पर यकीन था। हमें क्या पता था कि जिस सिस्टम के लिए हम पसीना बहा रहे हैं, वही हमें एक दिन अनाथ छोड़ देगा।</p>
<p><strong>4 अप्रैल के फैसले से अगली परीक्षा का मौका भी छिन गया</strong><br />राहुल बताते है कि जीवन में सबसे बड़ा वज्रपात 4 अप्रैल को हुआ। हाई कोर्ट के फैसले से नौकरी गई,लेकिन अगले ही दिन पेपर तो था पर हम उसमें कही नहीं थे। हम तो नौकरी पा चुके थे तो फार्म भी क्यू भरते। ट्रेनिंग ने उन्हें 2 साल तक किताबों से दूर रखा,उन्हें इस स्थिति में भी नहीं छोड़ा कि वे फैसले के 24 घंटे के भीतर होने वाली नई परीक्षा भी दे सकें। 8 साल खपाने के बाद आज हमारे पास न भविष्य की उम्मीद है, न अतीत की कमाई। न शरीर में वह फुर्ती है कि नए युवाओं से दौड़ सकें, न मन में वह हौसला कि फिर से शून्य से शुरुआत करें।<br />राहुल आज एक चलते-फिरते सवाल बन गए हैं। वे पूछते हैं कि उनकी क्या गलती थी? मैने पूरी ईमानदारी से परीक्षा दी, फिजिकल पास किया, इंटरव्यू की बाधा पार की और ट्रेनिंग की। आज जब वे सिस्टम से बाहर हैं, तो उनके पास न भविष्य की उम्मीद है, न अतीत की कमाई। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/the-sparkle-that-had-lit-up-his-father-s-aging-eyes-washed-away-in-tears/article-150186</link>
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                <pubDate>Mon, 13 Apr 2026 14:34:38 +0530</pubDate>
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                <title>बिना गुजरे कट रहा टोल, धड़कनें बढ़ा रहा फास्टैग,  शिकायत के बावजूद समाधान नहीं </title>
                                    <description><![CDATA[आए दिन हो रही घटनाएं, एनएचएआई के सिस्टम पर उठे सवाल।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/toll-deducted-without-crossing-the-plaza--fastag-causing-anxiety--no-solution-despite-complaints/article-141442"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-01/(1200-x-600-px)11.png" alt=""></a><br /><p> कोटा । शहर में इन दिनों फास्टैग से जुड़े ऐसे चौंकाने वाले मामले सामने आ रहे हैं, जो वाहन मालिकों की सुरक्षा और सिस्टम की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े कर रहे हैं। घर की पार्किंग में खड़ी गाड़ियों के फास्टैग से हजारों किलोमीटर दूर स्थित टोल प्लाजा पर टैक्स कटने के मैसेज लोगों के होश उड़ा रहे हैं। यह समस्या अब इक्का-दुक्का मामलों तक सीमित नहीं रही, बल्कि लगातार बढ़ती जा रही है। मामला, सिर्फ 50झ्र60 रुपए के टैक्स का नहीं, बल्कि उस रिकॉर्ड का है, जो गाड़ी के बिना चले ही एनएचएआई सिस्टम में उसकी मौजूदगी दर्ज कर देता है। ऐसे संदेश वाहन मालिकों को डर, उलझन और मानसिक तनाव में डाल रहे हैं। जहन में एक ही सवाल हैं, जब गाड़ी घर से बाहर निकली ही नहीं, तो टोल प्लाजा के रिकॉर्ड में वह कैसे गुजर गई?हालांकि लोग इसकी शिकायत एनएचएआई के टोल फ्री व वेबसाइट पर दिए गए नम्बरों पर कर रहे हैं लेकिन वहां से संतोषजनक जवाब नहीं मिल रहा और न ही बिना गुजरे टैक्स कटने का संतोषजनक कारण बता रहे।</p>
<p><strong>केस : 1 एक माह से घर में कार खड़ी और कट गया टोल</strong><br />10 जुलाई 2024: स्टेशन निवासी आसिफ बैग ने बताया कि टोल प्लाजा से 55 रुपए टैक्स कटने का मैसेज आया। जबकि, कॉलोनी में सीवरेज पाइप लाइन डलने का काम चलने से सड़क पूरी खुदी पड़ी थी। ऐसे में कार एक माह से घर में ही खड़ी थी। इसके बावजूद टोल कट गया।</p>
<p><strong>केस  : 2 गाड़ी गैराज में और कट गया टोल</strong><br />संजय नगर निवासी व्यवसायी पुष्पेंद्र सिंह ने बताया कि गत 17 अक्टूबर को कार सर्विस के लिए मैकेनिक के गैराज में खड़ी की थी। इसके अगले दिन रात को गजनपुरा टोल प्लाजा से टोल कटने का मैसेज आया। जिसे देखते ही कार चोरी का डर सताया। इस पर तुरंत मैकेनिक को फोन कर मामले की जानकारी दी तो वह भी सकते में आ गया और रात को ही वह गैराज पहुंचा तो ताला लगा मिला तो सांस आई। घटना को लेकर एनएचएआई के टोल फ्री नम्बर 1033 पर सम्पर्क कर कारण तलाशने का प्रयास किया लेकिन उन्होंने संतोषजनक जवाब नहीं मिलता।</p>
<p><strong>केस : 3 सात दिन में दो बार कटा</strong><br />रायपुरा निवासी ईरशाद अली ने बताया कि घर में खड़ी कार के दो बार टोल टैक्स कट गया। पहली बार 27 नवम्बर 2024 को सुबह 8.40 मिनट पर लिंगलापुर टोल प्लाजा से 50 रुपए टैक्स कटने का मोबाइल पर मैसेज आया। इसके बाद 4 दिसम्बर को सुबह 8.4 मिनट पर जहूर टोल प्लाजा से 35 रुपए टैक्स कटने का फिर से मैसेज आया। इस तरह घर में खड़ी गाड़ी का 7 दिन में दो बार टोल टैक्स कट गया। जब इसकी शिकायत एनएचएआई के हेल्पलाइन नम्बर 1033 पर की तो उन्होंने बैंक से सम्पर्क करने की बात कहकर फोन काट दिया।</p>
<p><strong> केस : 4 घर पर खड़ी गाड़ी का कटा टोल</strong></p>
<p>30 नवंबर 2025 को दादाबाड़ी निवासी एडवोकेट संजय पाटोदी की घर पर खड़ी आल्टो कार का 80 किमी दूर इंदरगढ़ टोल प्लाजा पर चालान कट गया था। जबकि गाड़ी घर से बाहर निकली ही नहीं, इसके बावजूद फास्टैग अकाउंट से 75 रुपए टोल टैक्स कट गया। इसकी शिकायत टोल फ्री नंबर 1033 पर की लेकिन समाधान नहीं हुआ।</p>
<p><strong>केस : 5 फ्लैट पर खड़ी गाड़ी का कटा टोल</strong><br />2 दिसंबर 2025 को कोटा निवासी रिटायर्ड टीचर हुकम चंद की कार बेटे के फ्लैट पर खड़ी थी। इसके बाद भी दो अलग-अलग जगहों पर टोल कट गया।</p>
<p><strong>केस 6 : 421 किमी दूर भिवाड़ी में कटा टोल</strong><br />26 जनवरी 2026 को नयापुरा स्थित दोस्तपुरा निवासी विष्णु की घर में खड़ी कार का टोल 421 किमी दूर भिवाडी टोल प्लाजा पर टोल कट गया। पीड़ित कार मालिक ने बताया कि मेरी कर घर पर खड़ी थी। शाम को मोबाइल पर फास्ट टैग अकाउंट से 60 रुपए कट गए। मैसेज आते ही गाड़ी चोरी होने का डर सताया। आॅनलाइन शिकायत दर्ज करवाई है।</p>
<p><strong>डर, उलझन और मानसिक तनाव में डाल रहा मैसेज</strong><br />डीसीएम निवासी शिक्षक जमना शंकर प्रजापति कहते हैं, फास्टेग लगा वाहन घर में खड़ा होने के बावजूद टोल काटने का मैसेज इस और इशारा करता है कि वाहन टोल प्लाजा से गुजरा है, ऐसे में वाहन मालिक के जहन में सबसे पहले वाहन के चोरी होने का ख्याल आता है। जिससे वह डर, उलझन और मानसिक तनाव से धिर जाता है। ऐसी स्थिति में वह वाहन घर में है या नहीं, यह पता करने को हड़बड़ी में मार्केट से भरे ट्रैफिक के बीच घर की और दौड़ता है। ऐसे में हादसे का खतरा बना रहता है।</p>
<p><strong>2021 में फास्टैग किया था अनिवार्य</strong><br />केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने गत 16 फरवरी 2021 से देशभर में टोल से गुजरने वाले वाहनों पर फास्टैग लगाना अनिवार्य कर दिया था। इसके पीछे कैशलेस लेन-देन के अलावा तय रकम से ज्यादा वसूली को रोकना था। वहीं, टोल प्लाजा पर टैक्स चुकाने में लगने वाले लंबे जाम से मुक्ति दिलाने के लिए भी यह व्यवस्था शुरू की थी। ऐसे में वाहन चालकों ने बैंकों और निजी कंपनियों से फास्टैग बनवाकर अपने चार पहिया वाहनों पर चस्पा करा लिए, लेकिन तकनीकी दिक्कतों के चलते वाहन चालकों के साथ समस्या शुरू हो गई।</p>
<p><strong>क्राइम हो जाए तो निर्दोष साबित करना चूनौतिपूर्ण</strong><br />मुस्लिम राष्ट्रीय मंच के क्षेत्रिय सह संयोजक ईरशाद अली का कहना है, बात टोल टैक्स के 50-60 रुपए की नहीं है। यदि, संबंधित टोल प्लाजा क्षेत्र में कोई क्राइम हो जाए और उसी दरमियान घर में खड़ी कार का टैक्स कट जाए।यानी टैक्स कटने का मैसेज आने का मतलब टोल रिकॉर्ड में गाड़ी संबंधित टोल प्लाजा से गुजरना दर्शा दिया जाएगा। ऐसे में वारदात में खुद को निर्दोष साबित करना ही पीड़ित के लिए चुनौति व संघर्षपूर्ण हो जाएगा। एनएचएआई को इस तरह के मामलों की रोकथाम के लिए सख्त कदम उठाने चाहिए।</p>
<p><strong>ऐसे वापस पा सकते हैं फास्टैग से कटा पैसा</strong><br />एनएचएआई के अधिकारियों के अनुसार, गलत तरीके से फास्टैग से कटी राशि वापस पाने के लिए वाहन चालकों के पास कई विकल्प मौजूद हैं।<br />- जिस बैंक या कंपनी से फास्टैग जारी हुआ है, वहां सबसे पहले शिकायत दर्ज कराएं।<br />- फास्टैग पोर्टल के हेल्प डेस्क पर आॅनलाइन शिकायत की जा सकती है।<br />- फास्टैग के पीछे कस्टमर केयर का नंबर होता है जिस पर तत्काल मामले की शिकायत दर्ज करनी चाहिए।<br />- एनएचएआई के टोल फ्री नंबर 1033 पर कॉल कर भी समस्या दर्ज कराई जा सकती है।<br />- यदि यहां से समाधान नहीं मिले, तो एनएचएआई की आधिकारिक वेबसाइट पर संबंधित मैनेजर के मोबाइल नंबर या ई-मेल आईडी पर शिकायत भेजी जा सकती है।<br />- इसके बाद भी मामला हल न होने पर संबंधित क्षेत्र के प्रोजेक्ट डायरेक्टर से सीधे शिकायत की जा सकती है।</p>
<p>इस तरह के मामलों में कोई एक कारण नहीं होता, इसके कई कारण हो सकते हैं। कई बार स्कैनर फास्टेग को रीड नहीं कर पाता। ऐसी स्थिति में टोल प्लाजा पर कार्यरत कर्मचारी मैन्युअल नंबर टाइप करते हैं, इस दौरान कोई नंबर ऊपर नीचे होने पर गलती हो सकती है। ऐसी घटना होने पर वाहन मालिक एनएचएआई के टोल फ्री नंबर 1033 व आॅफिशली वेबसाइट पर कंप्लेन कर सकते हैं।<br /><strong>- संदीप अग्रवाल, प्रोजेक्ट डायरेक्टर एनएचएआई कोटा डिवीजन</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 31 Jan 2026 16:03:28 +0530</pubDate>
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                <title>चाहे दवा का रैपर कट फट जाए, मरीज की सुरक्षा के लिए हर हाल में एक्सपायरी डेट मिले</title>
                                    <description><![CDATA[दवाओं की एक्सपायरी डेट सुनिश्चित करने के लिए क्या कोड नंबर सिस्टम होना चाहिए?]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/even-if-the-medicine-wrapper-is-cut-or-torn--the-expiry-date-should-always-be-provided-for-patient-safety/article-134006"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-11/1200-x-600-px)-(14).png" alt=""></a><br /><p>कोटा । आजकल हर घर में हल्की-फुल्की बीमारी या समस्या के लिए दवाइयां लेना सामान्य बात हो गई है। बहुत से लोग सिर दर्द या शरीर में दर्द के लिए पेन किलर हमेशा अपने पास रखते हैं। लेकिन कई बार ऐसा होता है कि  दवाओं की एक्सपायरी डेट निकल चुकी होती है, जिससे व्यक्ति यह तय नहीं कर पाता कि उसे दवा लेनी चाहिए या नहीं। यह स्थिति अक्सर भ्रम और चिंता का कारण बनती है।</p>
<p><strong>रैपर पर एक्सपायरी डेट का मिटना या कटना</strong><br />दवा कंपनियां आमतौर पर दवाओं पर एक्सपायरी डेट अंकित करती हैं, लेकिन अक्सर रैपर या पैकिंग पर छपी डेट कट जाती है या मिट जाती है, जिससे यह जानना मुश्किल हो जाता है कि दवा सुरक्षित है या नहीं। इस समस्या से बचने के लिए एक सुझाव है कि दवाओं पर एक न्यूमेरिक कोड नंबर लगाया जाए, जिससे उपभोक्ता आसानी से दवा की एक्सपायरी डेट इंटरनेट पर सर्च कर के जान सकें।</p>
<p><strong>न्यूमेरिक कोड नंबर सिस्टम</strong><br />अगर दवाओं के रैपर पर यूनिफॉर्म तरीके से पूरी स्ट्रिप पर न्यूमेरिक कोड नंबर दिया जाए, तो यह उपभोक्ताओं के लिए बहुत फायदेमंद होगा। अगर रैपर फट जाए या कुछ गोलियां या एक गोली भी बच जाएं, तो भी कोड नंबर से दवा की पूरी जानकारी प्राप्त की जा सकेगी। इस कोड को इंटरनेट पर सर्च करने से दवा की मैन्युफैक्चरिंग डेट, एक्सपायरी डेट, बैच नंबर, कंपनी का नाम और यह भी पता चल सकेगा कि दवा असली है या नकली।</p>
<p><strong> इस प्रणाली के लागू होने से होंगे ये लाभ </strong><br />1. एक्सपायरी डेट की जानकारी तुरंत प्राप्त हो सकेगी, जिससे उपभोक्ता पुरानी दवाएं सेवन करने से बचेंगे।<br />2. नकली दवाओं की पहचान में मदद मिलेगी, और असली दवाओं का चुनाव करना आसान होगा।<br />3. दवाओं की सुरक्षा बढ़ेगी, और उनके उपयोग से होने वाले स्वास्थ्य जोखिम कम होंगे।<br />4. दवा संबंधी जानकारी की पारदर्शिता बढ़ेगी, जिससे उपभोक्ताओं को दवा के बारे में पूरी जानकारी मिल सकेगी।</p>
<p>इस तरह की व्यवस्था से उपभोक्ता दवाओं का सुरक्षित और सही तरीके से उपयोग कर पाएंगे और दवाओं से जुड़ी समस्याएं कम होंगी। इस विषय पर दैनिक नवज्योति ने शहर के लोगों की राय ली और उनसे जानने की कोशिश की कि उनका इस बारे में क्या कहना है।ं </p>
<p>मैं आपके सुझाव से सहमत हूं। अगर दवाइयों पर एक्सपायरी डेट के अलावा एक कोड भी होगा, तो इसका फायदा यह होगा कि यदि पुराना स्टाक रखा होता है तो दवा कम्पनियां  पुराने पैकेट को छेड़कर नई डेट चिपकाती है, तो उसे आसानी से ट्रैक किया जा सकेगा। कोड के जरिए हम यह जान सकते हैं कि दवा कब बनी थी और उसकी एक्सपायरी डेट क्या है, जिससे आम लोगों को राहत मिलेगी।<br /><strong>- महावीर प्रसाद नायक, डायरेक्टर धनलक्ष्मी प्रॉपर्टीज</strong></p>
<p>कोड नम्बर लिखने से एक्सट्रा सेफ्टी हो जाएगी। अन्यथा दवा लेने वाले को ही ध्यान रखना पड़ेगा कि रैपर शुरू करते है उसी समय देख लें एक्सपायरी डेट जिससे ध्यान रहे। दवा के रैपर पर एक-दो स्थानों पर एक्सपायरी डेट लिखी जानी चाहिए, जिससे यह सुनिश्चित हो सके कि यदि एक स्थान से हट जाए तो दूसरी जगह से आसानी से पता चल सके। <br /><strong>- डॉ. अरूणा अग्रवाल, वरिष्ठ स्त्री रोग विशेषज्ञ</strong></p>
<p>दवा पर एक कोड नंबर या बारकोड डालना चाहिए, जिससे उसकी एक्सपायरी डेट आसानी से पता चल सके। कोड को थोड़ा बोल्ड और स्पष्ट रूप से लिखा जाए ताकि विशेषकर बुजुर्ग लोग भी उसे पढ़ सकें। इसके साथ ही, एक्सपायर होने वाली तारीख भी लिखी जाए, ताकि मरीज आसानी से जान सकें कि दवा कब एक्सपायर होगी। यह कोड आॅनलाइन सर्च करने के लिए उपयोगी होगा, जिससे सारी जानकारी प्राप्त की जा सके।<br /><strong>- प्रियंका गुप्ता, संस्थापक, अभिलाषा क्लब</strong></p>
<p>दवाइयों के पैकेट पर क्यूआर कोड दिया जाए, जिससे वह स्कैन करके सारी जानकारी प्राप्त कर सकें। यदि दस गोलियों की स्ट्रिप है, तो दो जगह क्यूआर कोड होना चाहिए ताकि यदि कोई आधी स्ट्रिप लेता है तो भी उसे जानकारी मिल सके। कोड नंबर फिजिबल नहीं है पब्लिक पोर्टल इस तरह का है नहीं ऐसे में डीकोड कौन करेगा। क्यूआर कोड के जरिए मोबाइल फोन से घर बैठे ही स्कैन करने से एक्सपायरी डेट और बाकी की जानकारी प्राप्त की जा सकती है। यह आम जन ता के लिए बेहद सुविधाजनक होगा।<br /><strong>- डॉ. विजय सरदाना, पूर्व प्रधानाचार्य, मेडिकल कॉलेज</strong></p>
<p>दवा के पैकेट पर एक्सपायरी डेट एक ही स्थान पर लिखी जाती है। हालांकि कई बार हम दवा गलती से उसी स्थान से निकाल लेते हैं। इसलिए, कम से कम दो-तीन स्थानों पर एक्सपायरी डेट लिखी जानी चाहिए, ताकि अगर एक स्थान से हट जाए तो दूसरी जगह से पता चल सके। इसके अलावा, कोड नंबर या बारकोड भी लिखा जा सकता है, जिससे हम स्कैन करके डेट की जानकारी प्राप्त कर सकें।<br /><strong>- महेश गुप्ता, डायरेक्टर, शिव ज्योति एज्यूकेशनल ग्रुप, कोटा</strong></p>
<p>यह एक बहुत सही मुद्दा है और सभी फार्मा कंपनियों को इसे फॉलो करना चाहिए। कई बार दवाइयां बर्बाद हो जाती हैं, या मरीज अंजाने में गलत दवाइयां ले लेते हैं। कंपनियां क्यूआर कोड या यूनिक कोड डाल सकती हैं, जिससे पूरी जानकारी स्कैन करके मिल सके। अगर ऐसा न हो सके, तो कम से कम हर गोली के पैकेट पर एक्सपायरी डेट प्रिंट की जानी चाहिए। ग्रामीण क्षेत्रों के मरीज के लिए यह आवश्यक है, क्योंकि वह क्यूआर कोड को स्कैन करना नहीं जानता। सबसे अच्छा तो यहीं रहेगा कि सभी फार्मा कंपनी रैपर पर ही एक्सपायरी डेट मेंशन करें या दोनों विकल्प रखें कंपनी को जो यूज करना हो कर सकें।<br /><strong>- डॉ. गौरव मेहता, स्पाइन सर्जन, ईथॉस हॉस्पिटल</strong></p>
<p>कई बार जब हम दवा का रैपर खोलते हैं, तो एक्सपायरी डेट बहुत छोटे अक्षरों में लिखी होती है और स्पष्ट नहीं दिखाई देती। इस स्थिति में, एक कोड नंबर, बैच नंबर, या रैपर के फ्रंट पर एक्सपायरी डेट लिखी जानी चाहिए। इससे यह सुनिश्चित होगा कि दवा एक्सपायर होने से पहले हम उसकी जानकारी प्राप्त कर सकें, और किसी भी परेशानी से बच सकेंगे।<br /><strong>- रितु बोहरा, सीए</strong></p>
<p>ड्रग एंड कॉस्मेटिक एक्ट 1940 और रूल 1945 के तहत ऐसा कोई प्रावधान नहीं है कि एक्सपायरी डेट दो स्थानों पर लिखी जाए। एक्सपायरी डेट एक ही स्थान पर लिखी जाती है। दवा के पैकेट पर जो जानकारी दी जाती है, जैसे कंपनी का नाम, कंपोजीशन, लाइसेंस नंबर आदि, वह सभी नियमों के तहत होती है। यदि एक्सपायरी डेट दूसरी जगह भी लिखी जाए, तो बाकी की जानकारी समायोजित नहीं हो सकेगी। एक्ट के अनुसार लेबलिंग नहीं लिखते है  तो दवा मिसब्रांडेड मानी जाती है। लेबल नहीं पाया जाएगा तो फिर वो नकली मानी जाएगी। इसलिए, यह सुनिश्चित किया जाता है कि एक ही स्थान पर सभी आवश्यक जानकारी हो।<br /><strong>- आसाराम मीना, ड्रग कंट्रोलर कोटा</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>स्वास्थ्य</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 29 Nov 2025 13:00:31 +0530</pubDate>
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                <title>राजकीय कन्या महाविद्यालय में शास्त्रीय गायन व सितार वादन की दी जाती है शिक्षा</title>
                                    <description><![CDATA[महाविद्यालय में छह पद स्वीकृत जिनमें गायन व वादन में एक-एक पद खाली हैं। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/where-music-sparks-employment-opportunities/article-132513"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-11/500-px)-(1)3.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। राजकीय कन्या कला महाविद्यालय में संचालित संगीत विभाग के नजदीक से आप गुजर रहे है तो वहां गुरूजनों के पैर छूती और सरस्वती वंदना करती हुई छात्राओं को देखकर आप चौकियें मत ये सभी संगीत  विभाग की छात्राएं हैं। एचओडी प्रेरणा शर्मा ने बताया कि अभी महाविद्यालय में करीब शास्त्रीय गायन व सितार वादन में करीब 100 छात्राएं अध्ययनरत हैं। जो कि हाड़ौती सहित अन्य स्थानों से यहां पर छात्राएं प्रवेश लेती है। वहीं कॉलेज में बरर्सों से छात्राओं को संगीत की  शिक्षा दे रही हूं। अभी तक महाविद्यालय की छात्राओं ने देश सहित विदेश में शहर व कॉलेज का नाम रोशन किया। एचओडी ने बताया कि संगीत में  प्रवेश लेने के लिए उम्र की कोई बाध्यता नहीं होती है। यदि कोई छात्रा बीए करने बाद भी संगीत की शिक्षा लेना चाहते है तो उनका सरकारी प्रक्रिया के तहत एडमिशन होता है। पहले वर्ष में एक बार एग्जाम होता था। अब सेमेस्टर प्रणाली के तहत एग्जाम  का आयोजन होता हैं। वहीं अभी महाविद्यालय में शास्त्रीय गायन व सितार वादन की शिक्षा दी जाती है। शास्त्रीय गायन में तीन अध्यापक जिसमें डॉ. राजेंद्र माहेश्वरी, पुनीता श्रीवास्तव, संतोष कुमार मीणा व सितार वादन में एक अध्यापिका है जिनमें एचओडी प्रेरणा शर्मा, ताबला वादन में देवेंद्र कुमार सक्सेना व महूराज राव द्वारा ताबले की कमान संभाली जाती हैं। महाविद्यालय में छह पद स्वीकृत जिनमें गायन व वादन में एक-एक पद खाली हैं। </p>
<p><strong>इतने है रोजगार के अवसर </strong><br />ऐसी छात्राएं जो कि पढ़ाई-लिखाई से हटकर अन्य किसी फील्ड़ में कामयाब होना चाहते हैं, तो वह संगीत  के क्षेत्र में कामयाब हो सकते है। संगीत के क्षेत्र में  शिक्षा लेने के बाद विद्यार्थी के सामने अपार रोजगार की संभावना है। जिसमें डिग्री पूरी करने के बाद छात्राएं सभी सरकारी नौकरी की तैयारी कर सकती हैं। साथ ही कुछ छात्राएं तो अभी रेल्वे,आकाशवाणी, लेखक, साहित्यकार, विभिन्न शादी- पार्टियों में प्रस्तुति, संगीत स्टूडियों सहित अन्य जगह पर रोजगार प्राप्त कर सकते हैं </p>
<p><strong>अभी तक इतने प्रसिद्ध सितारे दिए है </strong><br /> एचओडी ने बताया कि कॉलेज द्वारा अभी तक प्रतिभावन छात्राओं को शिक्षा दी। जिनमें से नेहा पांचाल, बरखा राव, आस्था सक्सेना, दर्पण राव, शिवांगी भट्ट, भव्या छाबड़ा, संगीता सक्सेना, ज्योति ठाकुर सहित दर्जनों छात्राओं ने यहां से शिक्षा प्राप्त की जो कि आज भारत के प्रत्येक कोने में संगीत की शिक्षा दे रहे है। और कुछ ने तो टीवी पर संचालित रियलटी शो में प्रस्तुति देकर कॉलेज सहित शहर का नाम रोशन किया। </p>
<p>मैं छाबड़ा की रहने वाली हूं। यहां पर संगीत की शिक्षा ग्रहण करने आई हूं। मेरे को संगीत बचपन से ही पसंद था। जिसके चलते मेने संगीत विषय को चुना। इसमें रोजगार की अपार संभावना है। <br /><strong>- प्रियांशी शर्मा</strong></p>
<p>मेरे पापा बचपन से ही गाना गाते थे। जिसके चलते पापा ने ही मुझे संगीत विषय दिलाया है। संगीत सुने के बाद दिमाग क्रिएटिव रहता है और शांति मिलती हैं।<br /><strong>- हंसिका दुबे</strong></p>
<p>मैेंने जब संगीत विषय लिया तब जाकर थोड़ा पापा ने नाराजगी जाहिर की। पर मैंने उनको राजी किया। इसी के साथ ही संगीत को सुनकर मन को शांति मिलती हैं। वहीं संगीत में रोजगार की अपार संभावनाएं हैं। <br /><strong>- पार्थिवी गौड़</strong></p>
<p>मेरे को बचपन से ही संगीत पसंद था। इस वजह से मेने संगीत की शिक्षा प्राप्त कर रही हूं। इसी के साथ में अभी विभिन्न सरकारी प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी कर रही हूं। <br /><strong>- किस्मत सैनी</strong></p>
<p>मैं छाबड़ा की रहने वाली हूं मेरे पापा दुकानदार है। वे डेली मेडिटेशन करते हैं जिससे उनको समझाया कि संगीत कितना जरूरी हैं। इसी के साथ इसमें बीए,एमए, पीएचडी, नेट सहित विभिन्न डिग्रियों की पढ़ाई की जा सकती हैं। <br /><strong>- पूनम साहू </strong></p>
<p><strong>इनका कहना है </strong><br />संगीत विषय में शहर सहित दूरदराज की छात्राएं अब संगीत की शिक्षा प्राप्त करने के लिए कॉलेज आती हैं। साथ ही इसमें अब कोई उम्र की बाधा नहीं होने की वजह से  अब अच्छी -खासी संख्या में प्रवेश हो रहे हैं। इसकी शिक्षा प्राप्त करने के बाद विद्यार्थियो के सामने अपार रोजगार की अपार संभावनाएं है। <br /><strong>- प्रेरणा शर्मा, एचओडी संगीत विभाग</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 15 Nov 2025 14:57:19 +0530</pubDate>
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                <title>असर खबर का - भगवानपुर गांव में नालियों और मुख्य मार्ग की सफाई शुरू, पूरे गांव को स्वच्छ बनाने की तैयारी</title>
                                    <description><![CDATA[दैनिक नवज्योति में खबर प्रकाशित होने के बाद हरकत में आया ग्राम पंचायत प्रशासन।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/impact-of-the-news---cleaning-of-drains-and-main-road-begins-in-bhagwanpur-village--preparations-underway-to-make-the-entire-village-clean/article-130927"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-10/11135.png" alt=""></a><br /><p>सुल्तानपुर। दीगोद उपखंड के भगवानपुर गांव में बुधवार को सफाई व्यवस्था सुचारू करने का कार्य शुरू किया गया। यह कार्रवाई दैनिक नवज्योति के 29 अक्टूबर के अंक में प्रकाशित खबर के बाद हुई। जिसमें ग्रामीणों ने गांव में फैली गंदगी और लचर सफाई व्यवस्था की समस्या उठाई थी। बुधवार को ग्राम पंचायत प्रशासन ने गांव के मुख्य मार्ग की नालियों की सफाई कराई। साथ ही खुरंजों में अवरुद्ध नालियां भी साफ की गर्इं। ग्राम विकास अधिकारी अरुण शर्मा ने बताया कि पूर्व में भी पंचायत द्वारा समय-समय पर सफाई कराई जाती थी। लेकिन कुछ परिवारों में आपसी रंजिश के कारण सफाई कर्मचारियों को काम नहीं करने दिया जाता था। उन्होंने बताया कि अब सफाई कार्य नियमित रूप से शुरू कर दिया गया है और शीघ्र ही पूरे गांव को स्वच्छ बना दिया जाएगा। </p>
<p><strong>यह थी मुख्य समस्या </strong><br />भगवानपुर गांव कोटसुवां ग्राम पंचायत के अंतर्गत आने वाला लगभग 600 की आबादी वाला  क्षेत्र है। यहां लंबे समय से सफाई व्यवस्था चरमराई हुई थी। गांव के मुख्य मार्ग पर कीचड़ और गंदगी जमी थी। नालियों पर मिट्टी-पत्थर डालकर अतिक्रमण कर दिया गया था। ग्रामीणों ने बताया था कि गंदगी के कारण बच्चों और बुजुर्गों का निकलना दूभर हो गया था और बीमारियों का खतरा बढ़ गया था। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 30 Oct 2025 12:41:55 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>दिया तले ही अंधेरा....जे.के. लोन अस्पताल में फिर मिली अग्निशमन संबंधित अनियमितताएं , न फायर अलार्म सिस्टम काम कर रहा और न ही प्रशिक्षित कर्मचारी हैं</title>
                                    <description><![CDATA[कोटा के जे.के. लोन अस्पताल में फायर टीम निरीक्षण के दौरान आग से सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम नहीं पाए गए। फायर अलार्म, स्मोक डिटेक्टर और प्रशिक्षित स्टाफ की कमी उजागर हुई। जिला प्रशासन ने 7 दिन में सुधार के निर्देश दिए हैं। जयपुर की ट्रोमा सेंटर आग की घटना के बाद जांच की गई थी।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/darkness-under-the-lamp----fire-related-irregularities-were-again-found-at-j-k--lon-hospital--the-fire-alarm-system-is-not-working--nor-are-there-trained-personnel/article-129849"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-10/63987.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। दिया तले ही अंधेरा...यह कहावत तो सभी ने सुनी है लेकिन इसका साक्षात उदाहरण है शहर का प्रमुख जे.के. लोन अस्पताल। सरकारी अस्पताल होने के बावजूद वहां ही आग से सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम नहीं है। इसका खुलासा निगम की फायर टीम द्वारा पिछले दिनों किए गए निरीक्षण में हुआ। जयपुर के एसएमएस अस्पताल स्थित ट्रोमा सेंटर में गत दिनों हुई आग लगने की घटना के बाद कोटा में भी जिला प्रशासन व निगम का फायर अनुभाग सक्रिय हुआ है। घटना के अगले ही दिन की गई अस्पतालों की जांच में मिली कमियां अभी तक नहीं सुधरी है। </p>
<p>निगम की फायर टीम ने अस्पताल की पुरानी व नई ओपीडी बिल्डिंग में आग से सुरक्षा के इंतजामों को देखा तो वहां अनियमितताएं पाई गई। नगर निगम कोटा उत्तर दक्षिण के सीएफओ राकेश व्यास के नेतृत्व में अग्निशमन अधिकारी अमजद  खान, अजहर मोहम्मद व सहायक अग्निशमन अधिकारी सीता चौपदार व अन्य कर्मचारियों ने जे.के. लोन अस्पताल की पुरानी बिल्डिंग की जांच की। सीएफओ व्यास ने बताया कि अस्पताल में फायर अलार्म सिस्टम कार्यशील अवस्था में नहीं पाया गया।  हॉज बॉक्स के सामने कर्मचारी के बैठने की सीट लगा रखी है लेकिन वहां प्रशिक्षित कर्मचारी उपलब्ध नहीं है। निकास द्वार पर अनावश्यक सामान एकत्र किया हुआ है। वहीं स्मॉक डिटेक्टर भी सही ढंग से काम नहीं कर रहा है।</p>
<p><strong>7 दिन में सुधार के लिए सुझाव</strong><br />सीएफओ व्यास ने बताया कि तीनों अस्पतालों में निरीक्षण के दौरान अग् िनशमन से संबंधित अनियमितताएं पाई गई। इस संबंध में अस्पताल प्रशासन को 7 दिन में फायर उपकरण कार्यशील अवस्था में रखने के सुझाव दिए गए। गौरतलब है कि जयपुर की घटना के बाद गत दिनों जिला कलक्टर ने शहर के सभी सरकारी व निजी अस्पतालों के प्रतिनिधियों की बैठक ली थी। जिसमें उन्हें अपने यहां अग्निशमन सुरक्षा संबंधी पुख्ता इंतजार रखने और फायर टीम को निरीक्षण के निर्देश दिए थे। निर्देशों की पालना नहीं करने वालों पर सख्त कार्रवाई को भी कहा था। उसी के तहत यह कार्रवाई की गई।     </p>
<p><strong>नई बिल्डिंग में भी कमियां</strong><br />सीएफओ व्यास ने बताया कि वहीं जे.के. लोन न्यू आईपीडी हॉस्टिपल में अग्ेिनशमन उपकरण तो स्थापित हैं लेकिन यहां भी प्रशिक्षित अग्ेिनशमन कर्मचारी नहीं लगाए गए हैं। साथ ही स्मॉकडिटेक्टर भी सही ढंग से काम नहीं कर रहा है।  हाईडेंट सिस्टम में पानी का प्रेशर कमजोर है। इसी तरह डीलक्स, न्यू कॉटेज वार्ड  व फीमेल मेडिकल वार्ड कुछ उपकरण कार्यशील अवस्था में नहीं पाए गए। लिफ्ट के अंदर रोशनी अपर्याप्त है।  एक जगह पर फायर हाईडेंट सिस्टम को रस्सी से बांधा हुआ है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 16 Oct 2025 16:12:49 +0530</pubDate>
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