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                <title>chief justice - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <title>सुप्रीम कोर्ट ने खारिज की ''पीरियड्स लीव'' की याचिका: सुनवाई से किया इंकार, कहा-मासिक धर्म अवकाश नीति बनाने के लिए याचिकाकर्ता के प्रतिवेदन पर विचार करें सरकार </title>
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                        <![CDATA[उच्चतम न्यायालय ने महिलाओं के लिए अनिवार्य सवैतनिक मासिक धर्म अवकाश की याचिका खारिज कर दी है। कोर्ट ने चिंता जताई कि ऐसे कानून से महिलाओं के रोजगार पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है और नियोक्ता उन्हें काम पर रखने से कतरा सकते हैं। ]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/supreme-court-rejected-the-petition-for-periods-leave-refused-to/article-146386"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/supreme-court.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। उच्चतम न्यायालय ने सभी संस्थानों में महिलाओं के लिए सवैतनिक मासिक धर्म अवकाश की मांग करने संबंधी रिट याचिका शुक्रवार को खारिज कर दी। मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की पीठ ने केंद्र सरकार से कहा कि वह सभी हितधारकों के साथ परामर्श करके मासिक धर्म अवकाश नीति बनाने के लिए याचिकाकर्ता के प्रतिवेदन पर विचार करे। अदालत ने चिंता व्यक्त की कि कानून के माध्यम से मासिक धर्म अवकाश को अनिवार्य करने से महिलाओं के रोजगार पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।</p>
<p>शीर्ष अदालत ने टिप्पणी की कि यह नियोक्ताओं को महिलाओं को काम पर रखने से हतोत्साहित कर सकता है, जिससे कार्यबल में उनकी भागीदारी पर बुरा असर पड़ेगा। याचिकाकर्ता चाहता था कि शीर्ष न्यायालय यह सुनिश्चित करे कि महिलाओं को, चाहे वे छात्राएं हों या कामकाजी पेशेवर, मासिक धर्म के दौरान छुट्टी दी जाए। पीठ ने याचिकाकर्ता शैलेंद्र मणि त्रिपाठी की स्थिति पर भी सवाल उठाया और इस बात की ओर इशारा किया कि किसी भी महिला ने खुद अदालत का दरवाजा नहीं खटखटाया है।</p>]]>
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                                                            <category>भारत</category>
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                <pubDate>Fri, 13 Mar 2026 15:58:32 +0530</pubDate>
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                        <![CDATA[Jaipur NM]]>
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                <title>तिरुपति लड्डू मामला: सुप्रीम कोर्ट ने आंध्र प्रदेश की एक-सदस्यीय जांच समिति को चुनौती देने वाली याचिका को खारिज किया</title>
                                    <description>
                        <![CDATA[सुप्रीम कोर्ट ने तिरुपति लड्डू घी मिलावट मामले में आंध्र प्रदेश सरकार की एक-सदस्यीय जांच समिति को चुनौती देने वाली याचिका खारिज कर दी। अदालत ने स्पष्ट किया कि प्रशासनिक जांच से आपराधिक जांच प्रभावित नहीं होगी।]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/tirupati-laddu-case-supreme-court-rejects-plea-challenging-andhra-pradeshs/article-144310"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-02/sc1.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। उच्चतम न्यायालय ने तिरुपति मंदिर के लड्डुओं के घी में मिलावट की जांच के लिए एक-सदस्यीय जांच समिति बनाने के आंध्र प्रदेश सरकार के फैसले को चुनौती देने वाली याचिका को सोमवार को खारिज कर दिया। मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की पीठ ने डॉ सुब्रमण्यम स्वामी की ओर से दायर रिट याचिका पर सुनवाई करते हुए यह फैसला सुनाया। याचिका में कहा गया था कि अगर राज्य समानांतर रूप से जांच करता है तो शीर्ष अदालत द्वारा गठित विशेष जांच दल (एसआईटी) की आपराधिक जांच में खलल पड़ेगा। उच्चतम न्यायालय ने कहा कि दोनों ही प्रक्रियाएं कानून के हिसाब से चलती रहनी चाहिए। </p>
<p>पीठ ने कहा कि एसआईटी की जांच पूरी हो गयी है और राज्य की प्रशासनिक जांच से उसपर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा। एसआईटी ने अपनी अंतिम रिपोर्ट जनवरी में प्रस्तुत कर दी थी। रिपोर्ट के अनुसार, लड्डू में जानवरों की चर्बी नहीं थी लेकिन खरीद प्रक्रिया में अन्य अनियमितताएं थीं जिससे मंदिर तक नकली घी पहुंच रहा था। </p>
<p>आंध्र सरकार ने हाल ही में सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी दिनेश कुमार की अगुवाई में एक-सदस्यीय समिति गठित की थी। इस समिति का काम एसआईटी के नोट की जांच करना और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ जरूरी कार्रवाई की सलाह देना था। </p>]]>
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                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 23 Feb 2026 18:27:31 +0530</pubDate>
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                <title>ममता बनर्जी बनीं वकील: दीं SIR पर दलीलें; चुनाव आयोग को बताया व्हाट्सएप आयोग, SC ने मांगा चुनाव आयोग से जवाब </title>
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                        <![CDATA[मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने सुप्रीम कोर्ट में आरोप लगाया कि एसआईआर के जरिए पश्चिम बंगाल को निशाना बनाया जा रहा है, जिससे मतदाताओं के अधिकार छीने जाएंगे।]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/mamta-banerjee-became-lawyer-in-sc-gave-arguments-on-sir/article-141949"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-02/11-(700-x-400-px)-(630-x-400-px)-(11)3.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने बुधवार को उच्चतम न्यायालय में खुद पेश होकर आरोप लगाया कि चुनाव से पहले मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के जरिये उनके राज्य को चयनात्मक रूप से निशाना बनाया जा रहा है। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अगुवाई वाली पीठ ने ईसीआई के खिलाफ सीएम बनर्जी की याचिका पर सुनवाई की। इसमें आरोप लगाया गया है कि मौजूदा एसआईआर कवायद से बड़े पैमाने पर मतदाताओं का हक छीना जायेगा। उन्होंने इसे एक अपारदर्शी, जल्दबाजी वाली, असंवैधानिक और गैरकानूनी प्रक्रिया बताया।</p>
<p>इसके बाद उच्चतम न्यायालय ने पश्चिम बंगाल में एसआईआर प्रक्रिया को चुनौती देने वाली उनकी रिट याचिका पर चुनाव आयोग (ईसीआई) को नोटिस जारी कर उससे सोमवार तक जवाब देने को कहा। मामले की जैसे ही सुनवाई शुरू हुई तो वरिष्ठ अधिवक्ता गोपाल शंकरनारायणन ने याचिका की गंभीरता का उल्लेख करते हुए बताया कि यह मामला आइटम संख्या 36 और 37 के रूप में सूचीबद्ध नये विषयों से संबंधित है।</p>
<p>जब न्यायालय ने संकेत दिया कि वह जल्द ही इस मामले की सुनवाई करेगा तो मुख्यमंत्री ममता बनर्जी स्वयं पोडियम तक गयीं और पीठ को सीधे संबोधित करने का आग्रह किया। सीएम ममता बनर्जी ने तर्क दिया, यह एसआईआर प्रक्रिया केवल नाम हटाने के लिए है। उन्होंने दावा किया कि विवाह के बाद उपनाम बदलने वाली महिलाओं या निवास बदलने वाले गरीब प्रवासियों जैसी सामाजिक वास्तविकताओं के कारण होने वाली मामूली विसंगतियों के आधार पर वास्तविक मतदाताओं के नाम हटाए जा रहे हैं।</p>
<p>उन्होंने न्यायालय को बताया कि मतदाताओं के नाम तार्किक विसंगति के आधार पर हटा दिये गये, भले ही वह विसंगति केवल उपनाम या वर्तनी की भिन्नता मात्र थी। गरीब लोगों जो बाहर जाते हैं, उनके नाम हटा दिये गये हैं। यह निष्कासन का आधार क्यों होना चाहिए।सीएम बनर्जी ने एसआईआर प्रक्रिया के समय और इसके चयनात्मक होने पर सवाल भी उठाया।</p>]]>
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                <pubDate>Wed, 04 Feb 2026 18:43:44 +0530</pubDate>
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                <title>बंगाल एसआईआर मामला: सीएम ममता उच्चतम न्यायालय के सामने आज होंगी पेश, मानवीय हितों की अनदेखी का लगाया आरोप</title>
                                    <description>
                        <![CDATA[पश्चिम बंगाल में एसआईआर विवाद पर मुख्यमंत्री ममता बनर्जी आज सुप्रीम कोर्ट में व्यक्तिगत रूप से पेश होंगी। याचिकाओं पर मुख्य न्यायाधीश की पीठ सुनवाई करेगी।]]>
                    </description>
                
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/bengal-sir-case-cm-mamata-to-appear-before-supreme-court/article-141876"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-07/mamta-banraji.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी बुधवार को उच्चतम न्यायालय के कोर्ट रूम नंबर 1 में मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली बेंच के समक्ष व्यक्तिगत रूप से पेश होंगी। यह पेशी पश्चिम बंगाल में मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को चुनौती देने वाली याचिका के संबंध में होगी।</p>
<p>सीएम बनर्जी ने उच्चतम न्यायालय के समक्ष व्यक्तिगत रूप से पेश होने की अनुमति मांगने के लिए एक आवेदन दायर किया है। चूंकि उन्हें राष्ट्रीय राजधानी में जेड श्रेणी की सुरक्षा प्राप्त है इसलिए उनकी उपस्थिति के लिए सुरक्षा मंजूरी मांगी गई है। जानकारी के अनुसार, मुख्यमंत्री के पास कोलकाता के जोगेश चंद्र चौधरी विधि महाविद्यालय से कानून की डिग्री है और उन्होंने संक्षिप्त रूप से वकील के रूप में काम किया है। रिपोर्टों से संकेत मिलता है कि उन्होंने अंतिम बार कानूनी प्रैक्टिस 2003 में की थी। </p>
<p>पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची से मतदाताओं को बड़े पैमाने पर बाहर किए जाने के आरोपों और एसआईआर प्रक्रिया की संवैधानिकता को चुनौती देने वाली याचिकाओं के एक समूह को आज उच्चतम न्यायालय में सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया गया है। ये याचिकाएं राज्य में चल रही एसआईआर प्रक्रिया से संबंधित हैं।</p>
<p>सीएम बनर्जी एसआईआर प्रक्रिया को रोकने की मांग कर रही हैं और वर्तमान में पश्चिम बंगाल के उन परिवारों के साथ नयी दिल्ली में हैं जो इस प्रक्रिया से प्रभावित होने का दावा कर रहे हैं। यह मामला सीएम बनर्जी की अनुच्छेद 32 याचिका से जुड़ा है जिसमें उन्होंने पश्चिम बंगाल में चुनाव से पहले चुनाव आयोग (ईसीआई) द्वारा संचालित एसआईआर प्रक्रिया को चुनौती दी है। अपनी याचिका में उन्होंने आरोप लगाया है कि एसआईआर प्रक्रिया से लोगों को अत्यधिक असुविधा हुई है और याचिका में इसके कार्यान्वयन से संबंधित प्रक्रियात्मक एवं कानूनी चिंताओं को उठाया है।</p>
<p>तृणमूल कांग्रेस के सांसदों डेरेक ओ'ब्रायन और डोला सेन द्वारा दायर एक याचिका भी मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली पीठ के समक्ष सुनवाई के लिए सूचीबद्ध है, साथ ही सीएम बनर्जी द्वारा स्वयं दायर एक अन्य याचिका भी सुनवाई के लिए सूचीबद्ध है। मुख्यमंत्री ने चुनाव आयोग और राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी के खिलाफ शीर्ष अदालत में एक मामला भी दायर किया है।</p>
<p>तृणमूल कांग्रेस प्रमुख और चुनाव आयोग के बीच विवाद सोमवार को उस समय और बढ़ गया जब उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के साथ बैठक से यह आरोप लगाते हुए बाहर वॉकआउट कर दिया कि उन्होंने उनके साथ दुव्र्यवहार किया है। सीएम बनर्जी के साथ-साथ तृणमूल नेता अभिषेक बनर्जी और कल्याण बनर्जी भी बैठक में मौजूद थे, साथ ही एसआईआर प्रक्रिया से कथित रूप से प्रभावित परिवारों के 12 सदस्य भी उपस्थित थे।</p>
<p>मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया है कि मानवीय हितों की अनदेखी करते हुए तथआ कानूनों एवं नियमों का उल्लंघन करते हुए एसआईआर लागू किया गया है। सूत्रों के अनुसार, वह बुधवार को होने वाली सुनवाई के दौरान उच्चतम न्यायालय के समक्ष इस मामले पर बहस करेंगी।</p>]]>
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                                                            <category>भारत</category>
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                <pubDate>Wed, 04 Feb 2026 12:05:41 +0530</pubDate>
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                <title>शराब घोटाला मामला: पूर्व मंत्री कवासी लखमा को बड़ी राहत, कोर्ट ने दी अंतरिम जमानत</title>
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                        <![CDATA[सुप्रीम कोर्ट ने छत्तीसगढ़ के पूर्व मंत्री कवासी लखमा और अन्य आरोपियों को शराब घोटाला मामले में अंतरिम जमानत दे दी है। अदालत अब मुख्य याचिकाओं के साथ इस मामले की विस्तृत सुनवाई करेगी।]]>
                    </description>
                
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/liquor-scam-case-big-relief-for-former-minister-kawasi-lakhma/article-139697"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-01/kawadi-lakma.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। उच्चतम न्यायालय ने छत्तीसगढ़ के पूर्व मंत्री कवासी लखमा और करोड़ों रुपये के शराब घोटाले से जुड़े अन्य आरोपियों को सोमवार को अंतरिम जमानत देते हुए निर्देश दिया कि उनकी याचिकाओं को विस्तृत विचार के लिये मुख्य मामलों के साथ सूचीबद्ध किया जाये।</p>
<p>मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने जमानत याचिकाओं पर सुनवाई की और याचिकाकर्ताओं को अंतरिम जमानत पर रिहा करने का आदेश दिया। उच्चतम न्यायालय ने संकेत दिया कि उठाए गए मुद्दों की अंतिम सुनवाई के समय व्यापक रूप से जांच की जाएगी। राज्य की ओर से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता महेश जेठमलानी ने जल्द सुनवाई का विरोध किया और कहा कि जांच अभी भी जारी है। </p>
<p>उन्होंने तर्क दिया कि इस मामले में मंत्रियों, राजनीतिक कार्यकर्ताओं और वरिष्ठ सरकारी कर्मचारियों की मिलीभगत से सार्वजनिक धन के कथित दुरुपयोग का आरोप है। महेश जेठमलानी ने दावा किया कि आरोपियों ने सरकारी खजाने को गंभीर नुकसान पहुंचाया है। </p>
<p>मुख्य न्यायाधीश ने रिकॉर्ड पर रखे गये हलफनामे का जिक्र करते हुए इस आरोप पर ध्यान दिया कि याचिकाकर्ता को कमीशन के तौर पर 64 करोड़ रुपये मिले थे, जिसमें से 4.6 करोड़ रुपये कथित तौर पर पार्टी से संबंधित गतिविधियों के लिये और लगभग 10 करोड़ रुपये व्यक्तिगत संपत्ति के लिए इस्तेमाल किये गये थे। इसमें उनके और उनके बेटे के घर शामिल हैं। पीठ ने यह भी कहा कि सुश्री साहू सहित कुछ अधिकारियों के खिलाफ आरोप अधिक गंभीर बताये गये हैं। </p>
<p>याचिकाकर्ता की ओर से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता मुकुल रोहतगी ने कहा कि कई आरोपी पहले से ही जमानत पर हैं। उन्होंने बताया कि 1,100 से अधिक गवाहों से पूछताछ की जा चुकी है और छह आरोप पत्र दायर किये गये हैं। उन्होंने कार्यवाही के इस चरण में लगातार हिरासत में रखने के औचित्य पर सवाल उठाया। पीठ ने अंतरिम जमानत देते हुए आरोपों की गंभीरता पर जोर दिया और कहा कि इस मामले में उच्चतम स्तर पर कथित संलिप्तता शामिल है। पीठ ने स्पष्ट किया कि मुख्य मामलों पर उचित समय पर पूरी सुनवाई की जाएगी। </p>
<p> </p>]]>
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                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 15 Jan 2026 16:42:08 +0530</pubDate>
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                <title>हरिभाऊ बागडे ने श्रीराम कलपाती राजेन्द्रन को राजस्थान उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधिपति पद की दिलाई शपथ </title>
                                    <description>
                        <![CDATA[राज्यपाल हरिभाऊ बागडे ने राजभवन में श्रीराम कलपाती राजेन्द्रन को राजस्थान उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधिपति पद की शपथ दिलाई। ]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/shri-ram-kalpati-became-the-chief-justice-of-rajasthan-high/article-121232"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-07/news50.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। राज्यपाल हरिभाऊ बागडे ने राजभवन में श्रीराम कलपाती राजेन्द्रन को राजस्थान उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधिपति पद की शपथ दिलाई। जस्टिस श्रीराम कलपाती राजेन्द्रन ने अंग्रेजी में शपथ ली।</p>
<p>समारोह के प्रारम्भ में मुख्य सचिव सुधांश पंत ने राज्यपाल से श्रीराम कलपाती राजेन्द्रन को शपथ दिलवाने का आग्रह किया। इससे पहले उन्होंने राष्ट्रपति द्रोपदी मुर्मु द्वारा जारी मुख्य न्यायाधिपति की नियुक्ति अधिसूचना एवं वारंट पढ़कर सुनाया। समारोह में मुख्यमंत्री  भजनलाल शर्मा, विधानसभा अध्यक्ष  वासुदेव देवनानी, उपमुख्यमंत्री दिया कुमारी, डॉ. प्रेमचंद बैरवा और मंत्रिमण्डल के सदस्य, जनप्रतिनिधि, राजस्थान उच्च न्यायालय के न्यायाधीशगण, अधिकारी, अधिवक्ता एवं मुख्य न्यायाधीश श्रीराम कलपाती राजेन्द्रन के परिजन उपस्थित रहे।</p>
<p> </p>]]>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 21 Jul 2025 16:42:53 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>न्यायमूर्ति गवई ने ली सुप्रीम कोर्ट के 52वें मुख्य न्यायाधीश पद की शपथ, मां के छुए पैर </title>
                                    <description>
                        <![CDATA[न्यायमूर्ति बीआर गवई ने सुप्रीम कोर्ट के 52वें मुख्य न्यायाधीश के तौर पर शपथ ली। ]]>
                    </description>
                
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/justice-gavai-took-the-oath-of-the-52nd-chief-justice/article-114110"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-05/rtrer-(5)11.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। न्यायमूर्ति बीआर गवई ने सुप्रीम कोर्ट के 52वें मुख्य न्यायाधीश के तौर पर शपथ ली। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने उन्हें एक समारोह में पद और गोपनीयता की शपथ दिलवाई। राष्ट्रपति भवन में आयोजित शपथ ग्रहण समारोह में उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, केंद्रीय विधि एवं न्याय मंत्री अर्जुन राम मेघवाल, निवर्तमान न्यायाधीश संजीव खन्ना, अनेक केंद्रीय मंत्री, शीर्ष अदालत के न्यायाधीश और उच्च न्यायालय के कई पूर्व न्यायाधीश समेत अन्य लोग शामिल हुए।</p>
<p>इस अवसर पर न्यायमूर्ति गवई के परिवार के सदस्य भी मौजूद थे। मुख्य न्यायाधीश पद की शपथ लेने के बाद उन्होंने अपनी मां के पैर छुए। न्यायमूर्ति खन्ना 13 मई को 51वें मुख्य न्यायाधीश के पद से सेवानिवृत्त हो गए। उन्होंने अपने उत्तराधिकारी के तौर पर न्यायमूर्ति गवई को मुख्य न्यायाधीश बनाने की सिफारिश की थी।</p>
<p>न्यायमूर्ति गवई को सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश के रूप में पदोन्नत किया गया था। 2025 में सेवानिवृत्त होंगे। उच्चतम न्यायालय में न्यायाधीशों की सेवानिवृत्ति की आयु 65 साल है। न्यायमूर्ति गवई पूर्व मुख्य न्यायाधीश के जी बालकृष्णन के बाद अनुसूचित जाति समुदाय से न्यायपालिका में शीर्ष पद पर पहुँचने वाले दूसरे शख्स हैं। न्यायमूर्ति गवाई एक प्रसिद्ध राजनीतिज्ञ, प्रमुख अंबेडकरवादी, पूर्व सांसद और कई राज्यों के राज्यपाल रह चुके आर एस गवई के पुत्र हैं।</p>
<p>उन्होंने नागपुर विश्वविद्यालय से बीए, एलएलबी की डिग्री पूरी करने के बाद 16 मार्च, 1985 को वकालत शुरू किया था। उन्होंने 1987 से 1990 तक बॉम्बे उच्च न्यायालय में स्वतंत्र रूप से अधिवक्ता रहे। वर्ष 1990 के बाद मुख्य रूप से संवैधानिक कानून और प्रशासनिक कानून में बॉम्बे उच्च न्यायालय की नागपुर पीठ के समक्ष भी अधिवक्ता के तौर पर काम किया।  </p>
<p>न्यायमूर्ति गवई उच्च न्यायालय के न्यायाधीश के रूप में अपने कार्यकाल के दौरान मुंबई में मुख्य पीठ के साथ-साथ नागपुर, औरंगाबाद और पणजी में सभी प्रकार के कार्यभार वाली पीठों की अध्यक्षता की। महाराष्ट्र के पूर्व महाधिवक्ता और बॉम्बे उच्च न्यायालय के न्यायाधीश स्वर्गीय बैरिस्टर राजा एस भोंसले के साथ 1987 तक (संक्षिप्त कार्यकाल) कानूनी करियर की नींव रखी। न्यायमूर्ति गवई शीर्ष अदालत में कई संवैधानिक पीठ के निर्णयों का हिस्सा रहे हैं, जिनमें विमुद्रीकरण, अनुच्छेद 370, चुनावी बॉन्ड योजना और एससी/एसटी श्रेणियों के भीतर उप वर्गीकरण शामिल हैं। उन्होंने एससी/एसटी के बीच क्रीमी लेयर शुरू करने की पुरजोर वकालत की थी।</p>
<p> </p>]]>
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                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 14 May 2025 12:21:28 +0530</pubDate>
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                <title>इमरान को रिहा करने वाले चीफ जस्टिस को हटाने की तैयारी</title>
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                        <![CDATA[पीडीएम समर्थकों ने सुप्रीम कोर्ट को भी घेर लिया है। वे पाकिस्तान के चीफ जस्टिस उमर अता बांदियाल को हटाने की तैयारी कर रहे हैं। इसके लिए संसद में निंदा प्रस्ताव लाया जाएगा।]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/preparing-to-remove-the-chief-justice-who-released-imran/article-45664"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-05/size.photo-13-(1).jpg" alt=""></a><br /><p>इस्लामाबाद। पाकिस्तान में राजनीतिक हालात बिगड़ते जा रहे हैं। पूर्व प्रधानमंत्री और पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ पार्टी के अध्यक्ष इमरान खान को सुप्रीम कोर्ट से जमानत मिलने के बाद पीडीएम ने विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया है। पीडीएम समर्थकों ने सुप्रीम कोर्ट को भी घेर लिया है। वे पाकिस्तान के चीफ जस्टिस उमर अता बांदियाल को हटाने की तैयारी कर रहे हैं। इसके लिए संसद में निंदा प्रस्ताव लाया जाएगा।</p>
<p>डीएम में पाकिस्तान ड्रेमोक्रेटिक मूवमेंट पाकिस्तान मुस्लिम लीग नवाज, पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी और जमीयत उलेमा-ए-इस्लाम-फजल समेत कई पार्टियां शामिल हैं।</p>
<p><strong>बुशरा बीबी को मिली जमानत </strong>: इमरान खान की बीवी बुशरा बीबी को जमानत मिल गई है। लाहौर हाईकोर्ट ने 23 मई तक उन्हें जमानत दे दी है। बुशरा बीबी के साथ इमरान खान भी हाईकोर्ट पहुंचे थे। </p>
<p><strong>हो रहा विरोध प्रदर्शन</strong><br />पीटीआई समर्थकों ने भी विरोध प्रदर्शन करना शुरू कर दिया है। उनका कहना है कि वे शांतिपूर्ण तरीके से प्रदर्शन कर रहे हैं। पीटीआई ने इस दौरान गिरफ्तार अपने नेताओं की लिस्ट भी जारी की है। इमरान खान ने कहा कि उनकी पार्टी पीटीआई के करीब सात हजार कार्यकतार्ओं और नेताओं को जेल में डाल दिया गया है, जिसमें महिलाएं भी शामिल हैं। इमरान ने कहा कि सुरक्षा एजेंसियां सुप्रीम कोर्ट पर कब्जा करने और संविधान को खत्म करने के लिए गुंडों की मदद कर रही हैं। अगर सुप्रीम कोर्ट और संविधान नष्ट हुआ तो पाकिस्तान के सपनों का अंत हो जाएगा।</p>
<p><strong>पार्टी खत्म करना चाहती है सेना</strong><br />इमरान खान ने अपनी रिहाई के बाद देश को संबोधित करते हुए आरोप लगाया था कि सेना उनकी पार्टी को कुचलना चाहती है, खत्म करना चाहती है। उन्होंने सेना को राजनीति में आने के लिए अपनी खुद की पार्टी बनाने की भी सलाह दी थी।</p>]]>
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                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 16 May 2023 10:34:19 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>हिलाली ने पीएचसी की पहली महिला मुख्य न्यायाधीश के रूप में शपथ ली</title>
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                        <![CDATA[खैबर पख्तूनख्वा के गवर्नर हाजी गुलाम अली ने नए मुख्य न्यायाधीश को शपथ दिलाई । यह पद मुख्य न्यायाधीश कैसर रशीद की सेवानिवृत्ति के बाद खाली हो गया था। ]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/hilali-sworn-in-as-first-woman-chief-justice-of-phc/article-41494"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-04/pakk.jpg" alt=""></a><br /><p>पेशावर। न्यायाधीश मुसर्रत हिलाली ने पेशावर उच्च न्यायालय (पीएचसी) की पहली महिला मुख्य न्यायाधीश के रूप में शपथ ली। जियो न्यूज के मुताबिक न्यायाधीश हिलाली ने शनिवार को पेशावर उच्च न्यायालय (पीएचसी) की पहली महिला मुख्य न्यायाधीश के रूप में शपथ ली।</p>
<p>खैबर पख्तूनख्वा के गवर्नर हाजी गुलाम अली ने नए मुख्य न्यायाधीश को शपथ दिलाई । यह पद मुख्य न्यायाधीश कैसर रशीद की सेवानिवृत्ति के बाद खाली हो गया था। समारोह में उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों, बार काउंसिल के पदाधिकारियों, वकीलों और कार्यवाहक सरकार के मंत्रियों ने भी भाग लिया।</p>
<p>न्यायमूर्ति हिलाली को यदि नियमित मुख्य न्यायाधीश के रूप में नियुक्त किया जाता है, तो वह देश की दूसरी महिला होंगी जिन्हें उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश के पद पर पदोन्नत किया गया है। पहली न्यायमूर्ति सैयदा ताहिर सफदर हैं, जो बलूचिस्तान उच्च न्यायालय की मुख्य न्यायाधीश हैं।</p>]]>
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                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 02 Apr 2023 14:22:49 +0530</pubDate>
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                <title> उदय ललित बने भारत के 49वें मुख्य न्यायाधीश</title>
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                        <![CDATA[ राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने न्यायाधीश को राष्ट्रपति भवन में शपथ दिलाई। सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश बने मुख्य न्यायाधीश ललित का कार्यकाल 73 दिनों का होगा। ]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/uu-lalit-appointed-as-49th-chief-justice-of-india/article-20638"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-08/uu-copy.jpg" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। न्यायमूर्ति न्यायाधीश उदय उमेश ललित ने 49 वें मुख्य न्यायाधीश बने है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने न्यायाधीश को राष्ट्रपति भवन में शपथ दिलाई। सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश बने मुख्य न्यायाधीश ललित का कार्यकाल 73 दिनों का होगा। न्यायमूर्ति ललित शीर्ष अदालत के दूसरे मुख्य न्यायाधीश है। इससे पहले न्यायमूर्ति सीकरी को 13वां मुख्य न्यायाधीश बनने का मौका मिला था। </p>
<p>उन्हें उच्चतम न्यायालय के आदेश के तहत सभी 2जी मामलों में सुनवाई करने के लिए केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) के लिए विशेष लोक अभियोजक नियुक्त किया गया था। दो कार्यकालों के लिए भारत के सर्वोच्च न्यायालय कानून सेवा समिति के सदस्य रहे और 13 अगस्त 2014 को भारत के सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश नियुक्त हुए।</p>]]>
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                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 27 Aug 2022 12:45:37 +0530</pubDate>
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                <title>हिजाब मामले में फैसला देने वाले न्यायाधीशों को वाई श्रेणी सुरक्षा</title>
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                        <![CDATA[बोम्मई ने कहा कि एक विशेष समुदाय की आक्रामकता का समर्थन करना धर्म-निरपेक्षता नहीं बल्कि साम्प्रदायिकता है। ]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/karnataka-chief-minister-basavaraj-bommai--said-the-state-government-has-decided-to-provide-y-category-security-to-three-judges--including-chief-justice-ritu-raj-awasthi--who-dismissed-the-petitions-in-the-hijab-case/article-6451"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-03/high-court.jpg" alt=""></a><br /><p>बेंगलुरु। कर्नाटक के मुख्यमंत्री बसवराज बोम्मई ने रविवार को कहा कि राज्य सरकार हिजाब मामले में याचिकाएं खारिज करने वाले मुख्य न्यायाधीश रितु राज अवस्थी सहित तीन न्यायाधीशों को वाई श्रेणी की सुरक्षा देने का फैसला किया है। उल्लेखनीय है कि तमिलनाडु तौहीद जमात के नेता कोवई रहमतुल्लाह ने गुरुवार को मदुरई में एक सभा को संबोधित करते हुए न्यायाधीशोंं को मौत की धमकी दी थी। रहमतुल्लाह का एक वीडियो वायरल हुआ था, जिसमें तौहीद जमात के नेता को यह कहते हुए सुना जा सकता है कि जैसे झारखंड के एक न्यायाधीश की हत्या हुई थी, वैसे ही कर्नाटक के न्यायाधीशों को हिजाब के फैसले पर गंभीर परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि विधानसभा पुलिस के पास शिकायत दर्ज कराई गई है और पुलिस महानिदेशक को फौरन मामले की जांच कर आरोपी को हिरासत में लेने के लिए कहा गया है। उन्होंने कहा, हम राष्ट्र-विरोधी लोगों के ऐसे राष्ट्र-विरोधी कामों को सहन नहीं कर सकते। हमें इस कृत्य को रोकना होगा। बोम्मई ने कहा कि एक विशेष समुदाय की आक्रामकता का समर्थन करना धर्म-निरपेक्षता नहीं बल्कि साम्प्रदायिकता है।</p>]]>
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                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 21 Mar 2022 12:33:14 +0530</pubDate>
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                <title>हाईकोर्ट को मिले पांच नए न्यायाधीश : चीफ जस्टिस कुरैशी आज लेंगे शपथ</title>
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                        <![CDATA[पांच नए न्यायाधीश जल्द ही शपथ लेकर कार्यभार ग्रहण करेंगे।]]>
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                <pubDate>Tue, 12 Oct 2021 10:58:22 +0530</pubDate>
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