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                <title>डोनाल्ड ट्रंप का चीन दौरा: शी जिनपिंग से होगी खास मुलाकात; व्यापार, ईरान और ताइवान मुद्दों पर चर्चा संभव</title>
                                    <description><![CDATA[राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग से मिलने बीजिंग पहुंच चुके हैं। इस शिखर सम्मेलन में ईरान युद्ध, होर्मुज जलडमरूमध्य की नाकेबंदी और ताइवान जैसे गंभीर मुद्दों पर चर्चा होगी। वैश्विक तेल संकट और आर्थिक मंदी के खतरों के बीच दुनिया की नजरें इन दोनों दिग्गजों के बीच होने वाले रणनीतिक समझौतों पर टिकी हैं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/donald-trump-visits-china-special-meeting-with-xi-jinping-possible/article-153555"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-05/1111200-x-600-px)-(5)17.png" alt=""></a><br /><p>वॉशिंगटन। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग से मुलाकात के लिए बीजिंग रवाना हो गए हैं, जहां दोनों वैश्विक नेता व्यापार, युद्ध कूटनीति और ताइवान पर गंभीर चर्चा करेंगे। ट्रंप का 2017 के बाद यह पूर्वी एशियाई देश का पहला दौरा है। इस दौरान दशकों में सबसे अहम अमेरिका-चीन सम्मेलन होने की संभावना है। गुरुवार से शुरू होने वाला दो दिनों का यह सम्मेलन दुनिया की दो बड़ी ताकतों के बीच संबंधों को नया आकार दे सकता है। है। ट्रंप 14 मई को ग्रेट हॉल ऑफ द पीपल में चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग से मिलेंगे, जहां दोनों औपचारिक द्विपक्षीय बातचीत करेंगे और उसके बाद शाम को एक राजकीय दावत का आयोजन किया जाएगा। ट्रंप की 15 मई को वाशिंगटन लौटने से पहले दोपहर के भोजन कार्यक्रम और 'ऐतिहासिक स्वर्ग का मंदिर' जाने की भी योजना है।</p>
<p>जब फरवरी में व्हाइट हाउस ने इस दौरे की पुष्टि की, तो चीनी सामान पर वाशिंगटन के आसमान छूते शुल्क एजेंडे पर छाए हुए थे। लेकिन 28 फरवरी के बाद दुनिया के राजनीतिक हालात बदल गए जब ट्रंप ने इजराइल के साथ मिलकर ईरान पर हमला किया, जिससे एक युद्ध शुरू हो गया और जिसके कारण ईरान को होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद करना पड़ा और इस स्थिति ने तेहरान को इस रणनीतिक जलमार्ग को नियंत्रित करने के लिए एक बोर्ड बनाने पर मजबूर कर दिया। गौरतलब है कि अमेरिका और ईरान एक तनावपूर्ण परमाणु गतिरोध में फंसे हुए हैं क्योंकि वाशिंगटन का तर्क है कि परमाणु मुद्दे पर कोई बातचीत नहीं हो सकती और तेहरान प्रतिबंधों में राहत, युद्ध खत्म करने, जब्त की गई संपत्ति को छोड़ने और अमेरिकी नौसैनिक नाकाबंदी को रोकने की मांग कर रहा है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के जवाबी प्रस्ताव को 'पूरी तरह से नामंजूर' कर दिया है क्योंकि दोनों पक्ष किसी भी संभावित समझौते के लिए जरूरी शर्तों से बहुत दूर हैं।</p>
<p>इसलिए दोनों नेताओं को होर्मुज जलडमरूमध्य के आसपास के तनाव पर चर्चा करनी अनिवार्य है। चीन अपना लगभग आधा कच्चा तेल जलमार्ग से आयात करता है। उसने बड़े स्टॉक और अलग-अलग तरह के ऊर्जा मिश्रण से खुद को सुरक्षित रखा है लेकिन इसका आर्थिक असर बहुत बड़ा है। तेल की कीमतों में उछाल ने पेट्रोकेमिकल पर निर्भर निर्माताओं के लिए लागत 20 प्रतिशत तक बढ़ा दी है। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) ने चेतावनी दी है कि वैश्विक मंदी की संभावना बनी हुई है क्योंकि चीन के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) का लगभग पांचवां हिस्सा निर्यात पर निर्भर करता है, इसलिए दुनिया जो आर्थिक रूप से इतनी परेशान है कि चीनी सामान नहीं खरीद सकती, उसके लिए अकेले आयात शुल्क युद्ध से भी बड़ा खतरा है।</p>
<p>बैठक में ताइवान का मुद्दा भी मुख्य रहेगा क्योंकि ट्रंप प्रशासन ने पिछले दिसंबर में ताइपे को 11 बिलियन डॉलर के हथियारों की बिक्री को मंजूरी दी थी, जिससे चीन नाराज हो गया था। फिर भी ट्रंप ने सार्वजनिक रूप से यह भी सवाल उठाया है कि क्या अमेरिका ताइवान की रक्षा करने के लिए बाध्य है और कहा है कि अमेरिका को उसकी सुरक्षा गारंटी के लिए पैसे देना काफी नहीं है। इस सप्ताह किसी बडे व्यापारिक समझौते की उम्मीदें कम हैं लेकिन अधिक उम्मीद अक्टूबर के संघर्ष विराम को बढ़ाने की है। इसके साथ ही एक संयुक्त बयान भी जारी किया जाएगा। दुनिया इस सम्मेलन को बड़ी दिलचस्पी से देख रही है और उम्मीद कर रही है कि यह सम्मेलन सफल हो।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
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                <pubDate>Tue, 12 May 2026 16:43:53 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>ट्रंप के सहयोगियों के हवाले से खबर, पश्चिमी एशिया में सैन्य कार्रवाई फिर शुरू करने पर विचार कर रहे राष्ट्रपति</title>
                                    <description><![CDATA[ईरान के अड़ियल रुख और होर्मुज जलडमरूमध्य की नाकेबंदी से राष्ट्रपति ट्रंप का धैर्य जवाब दे गया है। कूटनीति विफल होने पर अमेरिका अब लक्षित बमबारी और बड़े सैन्य अभियान पर विचार कर रहा है। ट्रंप की चीन यात्रा से पहले पश्चिमी एशिया में तनाव चरम पर है, जिससे क्षेत्र में युद्ध के बादल फिर मंडराने लगे हैं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/news-quoting-trumps-aides-president-considering-resuming-military-action-in/article-153541"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/trump.png" alt=""></a><br /><p>वॉशिंगटन। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प पश्चिमी एशिया में फिर से सैन्य कार्रवाई शुरू करने पर गंभीरता से विचार कर रहे हैं। ट्रम्प के सहयोगियों के हवाले से यह जानकारी दी। ट्रम्प ने कहा कि संघर्ष को सुलझाने के लिए हो रही बातचीत में ईरान के रुख से लगातार निराशा हाथ लगी है और अब वह बड़े पैमाने पर सैन्य अभियान फिर से शुरू करने पर गंभीरता से विचार कर रहे हैं। सूत्रों ने बताया कि होर्मुज जलडमरूमध्य के बंद रहने से अमेरिकी राष्ट्रपति का धैर्य जवाब दे रहा है और उनका यह भी मानना है कि ईरानी नेतृत्व के भीतर मतभेद हैं।</p>
<p>सूत्रों के अनुसार, अमेरिकी प्रशासन के भीतर अब कई समूह बन गए हैं, जिनमें से कुछ बल प्रयोग के पक्ष में हैं और ईरान की स्थिति को कमजोर करने के लिए उस पर लक्षित बमबारी जारी रखने का प्रस्ताव दे रहे हैं, जबकि अन्य समूह संघर्ष को सुलझाने के लिए कूटनीतिक साधनों पर जोर दे रहे हैं।</p>
<p>अमेरिका-ईरान वार्ता में मध्यस्थ के रूप में पाकिस्तान की भूमिका अमेरिका के लिए एक अलग मुद्दा बनी हुई है। अमेरिकी सरकार को यह स्पष्ट नहीं है कि पाकिस्तान कितनी स्पष्टता से अमेरिका का पक्ष ईरान तक पहुँचा रहा है और वह ईरान के दृष्टिकोण को कितनी निष्पक्षता से बता रहा है। पश्चिमी एशिया संघर्ष में अमेरिका क्या रुख अपनाएगा, यह अभी स्पष्ट नहीं है और राष्ट्रपति ट्रम्प की 13 से 15 मई तक प्रस्तावित चीन यात्रा से पहले किसी फैसले की संभावना कम है।</p>
<p>गौरतलब है कि 28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल ने ईरान में ठिकानों पर हमले शुरू किए थे, जिसमें 3,000 से अधिक लोग मारे गए थे। अमेरिका और ईरान ने सात अप्रैल को युद्धविराम की घोषणा की थी। इसके बाद इस्लामाबाद में हुई वार्ता बिना किसी नतीजे के समाप्त हो गई और अमेरिका ने ईरानी बंदरगाहों की नाकेबंदी शुरू कर दी थी।</p>]]></content:encoded>
                
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                <pubDate>Tue, 12 May 2026 15:28:18 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>क्या फिर होने वाली हैं जंग? अमेरिका-ईरान संघर्ष के बीच यूएई ने किए ईरान पर हवाई हमले, ट्रंप ने ठुकराया ईरान का शांति प्रस्ताव</title>
                                    <description><![CDATA[एक हालिया रिपोर्ट के अनुसार, संयुक्त अरब अमीरात (UAE) की वायु सेना ने अप्रैल में ईरान के लावान द्वीप पर स्थित तेल रिफाइनरी पर हमले किए थे। यह कार्रवाई अमेरिकी संघर्ष विराम के दौरान हुई। हालांकि यूएई ने चुप्पी साधी है, लेकिन उसने सैन्य बल के इस्तेमाल का अधिकार सुरक्षित रखा है, जिससे क्षेत्रीय तनाव बढ़ गया है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/is-war-going-to-happen-again-amid-us-iran-conflict-uae/article-153522"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-05/iran1.png" alt=""></a><br /><p>वॉशिंगटन। ईरान और अमेरिका-इजराइल के बीच जारी युद्ध के सक्रिय चरण के अंत तक संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) ने ईरान पर हवाई हमले किए थे। यह दावा सोमवार को एक रिपोर्ट में किया गया। रिपोर्ट के अनुसार, यूएई की वायु सेना ने अप्रैल की शुरुआत में हवाई हमलों की एक श्रृंखला को अंजाम दिया। यह ठीक उसी समय हुआ जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ संघर्ष विराम की घोषणा की थी। इन हमलों का निशाना फारस की खाड़ी में स्थित लावान द्वीप पर मौजूद एक रिफाइनरी थी।</p>
<p>उस समय, हालांकि न तो ईरान ने इन हवाई हमलों के पीछे किसका हाथ था, इसका खुलासा किया और न ही यूएई ने इसकी जिम्मेदारी ली लेकिन राष्ट्रीय ईरानी तेल शोधन और वितरण कंपनी ने आठ अप्रैल को कहा कि द्वीप पर मौजूद तेल रिफाइनिंग सुविधाओं पर "दुश्मन" द्वारा हमला हुआ था। रिपोर्ट में बताया गया है कि खाड़ी देश के विदेश मंत्रालय ने इन कथित हमलों पर टिप्पणी करने से इनकार कर दिया। मंत्रालय ने केवल इतना याद दिलाया कि यूएई के पास किसी भी शत्रुतापूर्ण कार्रवाई का जवाब देने का अधिकार सुरक्षित है, जिसमें सैन्य बल का उपयोग भी शामिल है।</p>
<p>अमेरिकी रक्षा विभाग ने भी इस पर टिप्पणी करने से मना कर दिया, जबकि व्हाइट हाउस ने कहा कि ट्रंप के पास सभी विकल्प खुले हुए हैं। उल्लेखनीय है कि गत 28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल ने ईरान के भीतर स्थित ठिकानों पर हमले किए, जिससे काफी जान माल का नुकसान हुआ। सात अप्रैल को अमेरिका और ईरान ने दो सप्ताह के संघर्ष विराम की घोषणा की। इसके बाद इस्लामाबाद में हुई बातचीत का कोई नतीजा नहीं निकला और अमेरिका ने ईरानी बंदरगाहों की नाकेबंदी शुरू कर दी। बाद में, राष्ट्रपति ट्रंप ने संघर्ष विराम की अवधि को और बढ़ा दिया, ताकि ईरान को शांति प्रस्ताव लाने के लिए पर्याप्त समय मिल सके। यह नाकेबंदी अभी भी जारी है।</p>]]></content:encoded>
                
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                <pubDate>Tue, 12 May 2026 14:02:08 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>अगर होर्मुज में गतिरोध लगातार जारी रहा, तो वैश्विक तेल बाजार में संकट 2027 तक जारी रहेगा: अमीन नासिर</title>
                                    <description><![CDATA[अरामको के सीईओ अमीन नासिर ने चेतावनी दी है कि यदि होर्मुज जलडमरूमध्य एक महीने में नहीं खुला, तो तेल बाजार 2027 तक सामान्य नहीं होगा। दुनिया पहले ही 1 अरब बैरल तेल खो चुकी है। अमेरिका-ईरान तनाव के बीच यह मार्ग बंद होने से वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा पर गंभीर खतरा मंडरा रहा है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/if-the-standoff-in-hormuz-continues-the-crisis-in-the/article-153501"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-05/अमीन-नासिर.png" alt=""></a><br /><p>दोहा। सऊदी अरब की कंपनी अरामको के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) अमीन नासिर ने कहा है कि यदि एक महीने के भीतर होर्मुज जलडमरुमध्य में जहाजों की आवाजाही फिर से शुरू नहीं होती, तो अगले साल तक वैश्विक तेल बाजार सामान्य स्थिति में नहीं लौटेगी। अरामको के पहली तिमाही के परिणामों पर चर्चा करने के लिए आयोजित एक वीडियो कॉन्फ्रेंस के दौरान श्री नासिर ने कहा कि आपूर्ति में व्यवधान जितने लंबे समय तक जारी रहेगा, तेल बाजार को स्थिर होने में उतना ही अधिक समय लगेगा। उन्होंने कहा कि यदि जलडमरुमध्य में गतिरोध जून के मध्य तक बना रहता है, तो यह संकट 2027 तक जारी रह सकता है।</p>
<p>दुनिया की सबसे बड़ी ऊर्जा कंपनी के प्रमुख के अनुसार, उत्पादन या परिवहन की कमी के कारण बाजार पहले ही एक अरब बैरल तेल गंवा चुका है और जब तक यह मार्ग बंद रहेगा, बाजार को हर हफ्ते लगभग 10 करोड़ बैरल तेल का नुकसान होता रहेगा। उन्होंने याद दिलाया कि पहले होर्मुज से प्रतिदिन लगभग 70 जहाज गुजरते थे। फारस की खाड़ी में तेल उत्पादक देशों पर हमलों और ईरान द्वारा होर्मुज को प्रभावी ढंग से बंद करने से उत्पादन और निर्यात पर नकारात्मक प्रभाव पड़ा है। 28 फरवरी को संघर्ष शुरू होने से पहले, इस जलमार्ग के माध्यम से प्रतिदिन लगभग दो करोड बैरल तेल बाजार में आता था।</p>
<p>गौरतलब है कि सात अप्रैल को अमेरिका और ईरान ने दो सप्ताह के युद्धविराम की घोषणा की थी। इसके बाद इस्लामाबाद में हुई वार्ता बेनतीजा रही थी, लेकिन फिर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को एक 'एकीकृत प्रस्ताव' के साथ आने का समय देने के लिए युद्धविराम को आगे बढ़ा दिया था। तीन मई को ट्रंप ने होर्मुज में फंसे जहाजों की सहायता के लिए 'प्रोजेक्ट फ्रीडम' की घोषणा की थी। फिर ट्रंप ने पांच मई को कहा कि उन्होंने यह देखने के लिए थोड़े समय के लिए ऑपरेशन को रोकने का फैसला किया है कि क्या ईरान के साथ शांति समझौता हो सकता है। हालांकि सोमवार को उन्होंने अमेरिकी शांति प्रस्तावों पर ईरान की प्रतिक्रिया को पूरी तरह से 'अस्वीकार्य' बताया।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 12 May 2026 11:55:30 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>ईरान के साथ युद्ध तब तक खत्म नहीं होगा जब तक परमाणु मुद्दों का समाधान नहीं हो जाता : पीएम नेतन्याहू</title>
                                    <description><![CDATA[इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने स्पष्ट किया है कि ईरान के साथ युद्ध तब तक समाप्त नहीं होगा, जब तक उसके परमाणु केंद्रों को नष्ट और यूरेनियम भंडार को बाहर नहीं किया जाता। उन्होंने कूटनीति विफल होने पर सैन्य विकल्प के संकेत दिए हैं। ट्रंप द्वारा ईरानी प्रस्ताव ठुकराने के बाद क्षेत्रीय तनाव चरम पर है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/war-with-iran-will-not-end-until-nuclear-issues-are/article-153456"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-05/benjamin-netanyahu.png" alt=""></a><br /><p>तेल अवीव। इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने दोहराया है कि ईरान के साथ युद्ध तब तक 'खत्म नहीं होगा', जब तक कि प्रमुख रणनीतिक मुद्दों का समाधान नहीं हो जाता जिनमें ईरान के संवर्धित यूरेनियम के भंडार को हटाना, परमाणु केंद्रों को नष्ट करना और ईरान के क्षेत्रीय प्रभाव पर अंकुश लगाना शामिल है। मीडिया से रूबरू होते हुए नेतन्याहू ने कहा, "यह अभी खत्म नहीं हुआ है, क्योंकि अब भी वहां परमाणु सामग्री और संवर्धित यूरेनियम मौजूद है। इसे ईरान से बाहर निकालना होगा। अब भी वहां संवर्धन केंद्र हैं, जिन्हें नष्ट करना बाकी है।" उन्होंने कहा कि ईरान क्षेत्रीय प्रॉक्सी समूहों का समर्थन करना जारी रख रहा है और अपनी बैलिस्टिक मिसाइल क्षमताओं को बढ़ा रहा है।</p>
<p>अमेरिका-इजरायल के ईरान पर किये गये हमलों के बाद हुई प्रगति को स्वीकार करते हुए नेतन्याहू ने इस बात पर जोर दिया कि अब भी बड़ी चुनौतियां बनी हुई हैं, विशेष रूप से ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर। उन्होंने सुझाव दिया कि किसी भी व्यावहारिक व्यवस्था के तहत संवर्धित यूरेनियम को वहां से से हटाना होगा। उन्होंने कहा, "अगर आपके पास कोई समझौता है और आप अंदर जाकर उसे बाहर निकाल लेते हैं, तो क्यों नहीं? यही सबसे अच्छा तरीका है।"</p>
<p>पीएम नेतन्याहू इस बात से सहमत हैं कि समझौता होना चाहिए, लेकिन परमाणु मुद्दा समझौता-योग्य नहीं है । उनकी यह टिप्पणी ऐसे समय में आयी है, जब अमेरिका का रुख है कि किसी भी व्यापक शांति ढांचे के तहत ईरान को यूरेनियम संवर्धन पूरी तरह से रोकना होगा। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में शांति प्रस्ताव पर ईरान की नवीनतम प्रतिक्रिया को 'पूरी तरह से अस्वीकार्य' बताया था। वहीं ईरान ने संवर्धन को पूरी तरह से रोकने की मांगों को खारिज कर दिया है। खबरों के अनुसार, ईरानी अधिकारियों ने अत्यधिक संवर्धित यूरेनियम के भंडार को कम करने और अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था के तहत कुछ सामग्री को किसी तीसरे देश में स्थानांतरित करने का सुझाव दिया है।</p>
<p>पीएम नेतन्याहू ने एक संभावित दृष्टिकोण की रूपरेखा भी पेश की है। इसमें कूटनीति अगर विफल रहती है तो संवर्धित यूरेनियम को भौतिक रूप से हटाया जा सकता है, लेकिन उन्होंने 'सैन्य विकल्पों' का खुलासा करने से इनकार कर दिया। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, ईरान ने सीमित अवधि के लिए संवर्धन स्थगित करने की इच्छा जतायी है, हालांकि यह अमेरिका के प्रस्तावित 20 साल के प्रतिबंध की तुलना में कम अवधि के लिए है। साथ ही ईरान ने अपने परमाणु बुनियादी ढांचे को नष्ट करने की बात को खारिज कर दिया है। खबर है कि दोनों पक्षों के बीच मध्यस्थों के जरिये बातचीत जारी है, लेकिन यूरेनियम संवर्धन और सत्यापन तंत्र पर गहरे मतभेदों के बीच एक व्यापक समझौता फिलहाल दूर नजर आ रहा है।</p>
<p>ईरानी नेताओं का कहना है कि उनके प्रस्ताव जायज हैं और उनका उद्देश्य एक संतुलित समझौता सुनिश्चित करना है। पीएम नेतन्याहू की ये टिप्पणियां इस सप्ताह के अंत में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की संभावित चीन यात्रा से पहले आयी हैं, जहां उनके चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग से मिलने की उम्मीद है। युद्ध और उसके बाद ईरान के होर्मुज जलडमरूमध्य बंद किये जाने से वैश्विक ऊर्जा लागत में उछाल आया है और अमेरिका में गैस की कीमतों में भारी वृद्धि हुई है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 11 May 2026 18:44:44 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>'अवास्तविक मांगों' पर अड़े इजरायल की सोच से प्रभावित अमेरिका: बघाई ने कहा- क्या पूरे क्षेत्र में शांति और सुरक्षा स्थापित करना गैर-जिम्मेदाराना  </title>
                                    <description><![CDATA[ईरान ने अपने शांति प्रस्ताव को "तार्किक" बताते हुए अमेरिकी रुख की आलोचना की है। विदेश मंत्रालय ने कहा कि वे केवल संपत्ति की मुक्ति और समुद्री सुरक्षा जैसे वैध अधिकार मांग रहे हैं। राष्ट्रपति ट्रंप द्वारा प्रस्ताव को "अस्वीकार्य" बताने के बाद ईरान ने आरोप लगाया कि अमेरिका अब भी इजरायली दबाव में काम कर रहा है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/america-is-adamant-on-unrealistic-demands-impressed-by-israels-thinking/article-153426"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/hormuz.png" alt=""></a><br /><p>तेहरान। पश्चिम एशिया में युद्ध समाप्त करने के लिए  ईरान ने कहा है कि उसका प्रस्ताव "उदार और तार्किक" था, जबकि अमेरिका अब भी इजरायल की सोच से प्रभावित "अवास्तविक मांगों" पर अड़ा हुआ है। ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने सोमवार को अपने साप्ताहिक संवाददाता सम्मेलन में कहा कि ईरान की ओर से अमेरिकी प्रस्ताव के जवाब में जो योजना भेजी गयी, वह "हद से ज्यादा" नहीं थी और उसका उद्देश्य पूरे क्षेत्र में शांति एवं स्थिरता स्थापित करना था।</p>
<p>उन्होंने कहा, "हमने किसी प्रकार की रियायत की मांग नहीं की। हमने केवल ईरान के वैध अधिकारों की बात की है।" बघाई ने सवाल किया कि क्या क्षेत्र में युद्ध समाप्त करने, ईरानी जहाजों के खिलाफ "समुद्री डकैती" रोकने तथा वर्षों से अवरुद्ध ईरानी संपत्तियों को मुक्त करने की मांग अनुचित कही जा सकती है। उन्होंने कहा, "क्या होर्मुज जलडमरूमध्य से सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करने का हमारा प्रस्ताव अवास्तविक है? क्या पूरे क्षेत्र में शांति और सुरक्षा स्थापित करना गैर-जिम्मेदाराना है?"</p>
<p>इससे पूर्व, अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि उन्होंने ईरान के प्रतिनिधियों का जवाब पढ़ा और उसे "पूरी तरह अस्वीकार्य" पाया। राष्ट्रपति ट्रंप ने समाचार पोर्टल एक्सियोस को दिए साक्षात्कार में कहा था कि उन्होंने ईरान के जवाब पर बेंजमिन नेतन्याहू से भी चर्चा की है। ईरान ने रविवार को अमेरिकी प्रस्ताव के जवाब में अपना औपचारिक प्रस्ताव भेजा था। ईरान पहले भी स्पष्ट कर चुका है कि मौजूदा चरण में वार्ता का केंद्र केवल क्षेत्रीय युद्ध समाप्त करना होगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 11 May 2026 15:48:50 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>क्या फिर शुरू होगा युद्व! ईरान ने खारिज किया अमेरिकी शांति प्रस्ताव, तेहरान ने पेश किया अपना 10-सूत्रीय प्लान, जानें क्या रखी शर्ते?</title>
                                    <description><![CDATA[ईरान ने अमेरिकी प्रस्ताव को अत्यधिक मांगें बताकर खारिज कर दिया है। तेहरान ने बदले में युद्ध क्षतिपूर्ति, संपत्तियों को मुक्त करने और होर्मुज जलडमरूमध्य पर पूर्ण नियंत्रण की मांग रखी है। राष्ट्रपति ट्रंप द्वारा इसे "अस्वीकार्य" बताने के बाद, खाड़ी में तनाव और बंदरगाहों की नाकाबंदी ने शांति की उम्मीदों को मुश्किल बना दिया है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/will-war-start-again-iran-rejected-american-peace-proposal-tehran/article-153382"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/mojtaba.png" alt=""></a><br /><p>मॉस्को। ईरान ने अमेरिका को दिए अपने जवाब में अमेरिकी शांति प्रस्ताव को यह कहते हुए खारिज कर दिया कि इसका मतलब अमेरिकी सरकार की अत्यधिक मांगों के आगे झुकना होगा। ईरानी समाचार एजेंसी ने पहले बताया था कि अमेरिकी संदेश पर ईरान की प्रतिक्रिया युद्ध समाप्त करने और फारस की खाड़ी और होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों की सुरक्षा सुनिश्चित करने पर केंद्रित थी। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने संघर्ष समाधान के लिए अमेरिकी प्रस्ताव पर ईरान की प्रतिक्रिया को पूरी तरह अस्वीकार्य बताया।</p>
<p>प्रेस टीवी के अनुसार, ईरान की प्रतिक्रिया योजना में इस बात पर जोर दिया गया है कि अमेरिका को इस्लामिक गणराज्य को युद्ध क्षतिपूर्ति का भुगतान करना होगा। मई की शुरुआत में ईरानी विदेश मंत्रालय के एक प्रवक्ता ने कहा कि तेहरान को इस्लामिक गणराज्य के नए 14 सूत्री प्रस्ताव के संबंध में पाकिस्तान के माध्यम से अमेरिका से जवाब मिला है। समाचार एजेंसी ने रविवार को बताया कि अमेरिका के साथ बातचीत के लिए ईरान के प्रस्तावों का पाठ, जिसे तेहरान ने वाशिंगटन को भेजकर जवाब दिया था, में प्रतिबंध हटाने, होर्मुज जलडमरूमध्य पर ईरान का पूर्ण नियंत्रण और विदेशों में ईरानी संपत्तियों को मुक्त करने के प्रावधान शामिल हैं।</p>
<p>28 फरवरी को, अमेरिका और इज़रायल ने ईरान में लक्ष्यों पर हमले शुरू किए, जिसमें 3,000 से अधिक लोग मारे गए। वाशिंगटन और तेहरान ने 8 अप्रैल को दो सप्ताह के युद्धविराम की घोषणा की। इस्लामाबाद में बाद की बातचीत बेनतीजा रही, शत्रुता के फिर से शुरू होने की कोई खबर नहीं मिली, लेकिन अमेरिका ने ईरानी बंदरगाहों की नाकाबंदी शुरू कर दी। मध्यस्थ बातचीत के एक नए दौर का आयोजन करने का प्रयास कर रहे हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 11 May 2026 14:05:00 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>क्या फिर बढ़ेगा टकराव! अमेरिका के शांति प्रस्ताव पर ईरान के जवाब को राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने किया खारिज, बोले- हम दुश्मन के सामने कभी सिर नहीं झुकाएंगे</title>
                                    <description><![CDATA[अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के युद्ध समाप्ति प्रस्ताव को "पूरी तरह अस्वीकार्य" बताया है। तेहरान ने नाकाबंदी हटाने और हमलों पर गारंटी मांगी थी, जिसे ट्रंप ने खारिज कर दिया। वहीं, बेंजामिन नेतन्याहू ने स्पष्ट किया कि जब तक ईरान के यूरेनियम भंडार नष्ट नहीं होते, युद्ध समाप्त नहीं माना जाएगा।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/will-the-conflict-increase-again-president-donald-trump-rejected-irans/article-153377"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/iran9.png" alt=""></a><br /><p>वॉशिंगटन। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने युद्ध समाप्त करने के अमेरिकी प्रस्तावों पर ईरान की प्रतिक्रिया को "पूरी तरह अस्वीकार्य" करार दिया है। मीडिया रिपोर्ट में यह जानकारी दी गयी। ईरान की अर्ध-सरकारी समाचार एजेंसी तसनीम ने बताया कि पाकिस्तान के माध्यम से भेजे गए तेहरान के प्रस्ताव में सभी मोर्चों पर युद्ध की तत्काल समाप्ति, अमेरिकी नौसैनिक नाकाबंदी को रोकना और ईरान पर आगे कोई हमला न करने की गारंटी शामिल है।</p>
<p>अमेरिका और इज़रायल द्वारा फरवरी में शुरू किए गए युद्ध को समाप्त करने के लिए वार्ता को सुविधाजनक बनाने के उद्देश्य से किए गए युद्धविराम का, छिटपुट गोलीबारी के बावजूद, काफी हद तक पालन किया गया है। इस सप्ताह की शुरुआत में, ट्रम्प ने दोहराया कि ईरान में युद्ध "जल्द ही समाप्त हो जाएगा"। लेकिन इज़रायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने कहा कि ईरान के खिलाफ युद्ध को समाप्त मानने से पहले ईरान के समृद्ध यूरेनियम भंडार को "नष्ट" किया जाना चाहिए।</p>
<p>सीबीएस के '60 मिनट्स' कार्यक्रम में दिए एक साक्षात्कार में नेतन्याहू ने कहा, "अभी भी ऐसे संवर्धन स्थल हैं जिन्हें नष्ट करना बाकी है।"<br />रविवार को ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेज़ेश्कियन ने तेहरान के प्रस्ताव का सीधा जिक्र तो नहीं किया, लेकिन कहा, "हम दुश्मन के सामने कभी सिर नहीं झुकाएंगे, और अगर बातचीत या समझौता करने की बात उठती है, तो इसका मतलब आत्मसमर्पण या पीछे हटना नहीं है।" ट्रम्प ने 'ट्रुथ सोशल' पर पोस्ट किया: "मैंने अभी-अभी ईरान के तथाकथित 'प्रतिनिधियों' का जवाब पढ़ा है। मुझे यह पसंद नहीं आया - बिल्कुल अस्वीकार्य।"</p>
<p>मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, एक पृष्ठ के 14 सूत्रीय अमेरिकी ज्ञापन में ईरानी परमाणु संवर्धन पर रोक, प्रतिबंधों को हटाना और होर्मुज जलडमरूमध्य से निर्बाध आवागमन बहाल करने जैसे प्रावधान शामिल हैं। इसमें दो अमेरिकी अधिकारियों और दो अन्य सूत्रों का हवाला दिया गया है - सभी के नाम गुप्त रखे गए हैं - जिन्हें मुद्दों की जानकारी दी गई थी। इन सूत्रों के हवाले से कहा गया है कि ज्ञापन में बताई गई कई शर्तें अंतिम समझौते पर पहुंचने पर ही लागू होंगी। ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य को अवरुद्ध करना जारी रखा है, जिससे विश्व स्तर पर तेल की कीमतों में वृद्धि हुई है।</p>
<p>अमेरिका ने तेहरान पर दबाव बनाने के लिए ईरानी बंदरगाहों की नाकाबंदी लागू कर दी है, जिससे ईरान बेहद नाराज है। इजरायली और अमेरिकी सेनाओं ने 28 फरवरी को ईरान पर बड़े पैमाने पर हवाई हमले शुरू किए। ईरान युद्ध में पिछले महीने युद्धविराम लागू हुआ। अपने साक्षात्कार में नेतन्याहू ने कहा, "मैं इजरायल की सेना के लिए अमेरिकी वित्तीय सहायता को शून्य तक कम करना चाहता हूं।" उन्होंने कहा, "हमें प्रति वर्ष 3.8 अरब डॉलर मिलते हैं। और मुझे लगता है कि अब समय आ गया है कि हम शेष सैन्य सहायता से भी खुद को अलग कर लें।" उन्होंने आगे कहा, "आइए अभी से शुरुआत करें और इसे अगले दशक में पूरा करें।"</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 11 May 2026 11:36:10 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>अमेरिकी राजनयिकों का दावा: प्रमुख ताकत बनकर उभरे मुजतबा खामेनेई, जंग की रणनीति और राजनयिक वार्ता दोनों का कर रहे नेतृत्व</title>
                                    <description><![CDATA[हमले में घायल होने के बावजूद मुजतबा खामेनेई ईरान की युद्ध रणनीति और राजनयिक वार्ताओं का गुप्त रूप से नेतृत्व कर रहे हैं। इलेक्ट्रॉनिक संचार से बचते हुए, वह हस्तलिखित नोटों के जरिए सरकार को निर्देशित कर रहे हैं। अमेरिकी खुफिया रिपोर्टों के अनुसार, सैन्य दबाव के बावजूद ईरान अब भी अपनी मिसाइल क्षमताओं को पुनः संगठित करने में जुटा है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/iranian-president-pejeshkyan-claims-that-mujtaba-khamenei-has-emerged-as/article-153244"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/mojtaba-khamenei-iran-new-supreme-leader.png" alt=""></a><br /><p>वॉशिंगटन। ईरान के सर्वोच्च नेता मुजतबा खामेनेई संघर्ष के दौरान देश की युद्ध रणनीति को आकार देने और युद्ध समाप्त करने के लिए अमेरिका के साथ राजनयिक बातचीत में शामिल अधिकारियों को निर्देशित करने वाले प्रमुख चेहरे के रूप में उभरे हैं। ईरान पर अमेरिका-इजरायल के हमले के पहले ही दिन उनके पिता और ईरान के तत्कालीन सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई और कई वरिष्ठ ईरानी सैन्य कमांडर मारे गये थे। अमेरिकी खुफिया अधिकारियों के आकलन के अनुसार, उसी हमले में गंभीर रूप से घायल होने के बावजूद मुजतबा कथित तौर पर ईरान की युद्धकालीन रणनीति बनाने, सैन्य अभियानों का निर्देशन करने और अमेरिका से समझौते के राजनयिक प्रयासों का मार्गदर्शन करने में गहराई से लगे हुए हैं।</p>
<p>रिपोर्ट के अनुसार, मुजतबा के चेहरे, हाथ, धड़ और पैर काफी ज्यादा झुलस गये थे। अमेरिकी खुफिया एजेंसी का मानना है कि वह सार्वजनिक नजरों से दूर रहकर स्वस्थ होने के साथ-साथ अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। वह किसी भी प्रकार के इलेक्ट्रॉनिक संचार से जानबूझकर बच रहे हैं और केवल व्यक्तिगत मुलाकातों या संदेशवाहकों के जरिये हस्तलिखित नोटों से ही संवाद कर रहे हैं। ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेशक्यान ने इस सप्ताह पुष्टि की कि उन्होंने मुजतबा के साथ ढाई घंटे तक आमने-सामने बैठक की। हमले के बाद नये सर्वोच्च नेता और ईरान के किसी वरिष्ठ अधिकारी के बीच यह पहली सार्वजनिक रूप से पुष्ट मुलाकात थी।</p>
<p>ईरान के सर्वोच्च नेता के कार्यालय में प्रोटोकॉल प्रमुख मजाहिर हुसैनी ने शुक्रवार को कहा, "खामेनेई अपनी चोटों से उबर रहे हैं और अब पूरी तरह स्वस्थ हैं।" रिपोर्ट के अनुसार, हुसैनी ने सर्वोच्च नेता की स्थिति को लेकर चिंताओं को कम करने की कोशिश की और कहा कि खामेनेई के पैर और पीठ के निचले हिस्से में मामूली चोटें आयी थीं। उन्होंने यह भी बताया, "छर्रे का एक छोटा-सा टुकड़ा उनके कान के पीछे लगा था, लेकिन घाव अब भर रहे हैं।"</p>
<p>ईरान में एक जनसमूह को संबोधित करते हुए हुसैनी ने कहा, "खुदा का शुक्र है कि वह स्वस्थ हैं। दुश्मन हर तरह की अफवाहें फैला रहा है और झूठे दावे कर रहा है। वे उन्हें देखना और ढूंढ़ना चाहते हैं, लेकिन लोगों को धैर्य रखना चाहिए और जल्दबाजी नहीं करनी चाहिए। सही समय आने पर वह आपसे बात करेंगे।" अमेरिकी विश्लेषक स्वीकार करते हैं कि वे मुजतबा की मौजूदगी की पुष्टि प्रत्यक्ष तौर पर नहीं कर सकते। कुछ विशेषज्ञों का यह भी मानना है कि ईरान के सत्ता ढांचे के भीतर मौजूद अधिकारी अपने निजी एजेंडे को आगे बढ़ाने के लिए उन तक अपनी पहुंच को बढ़ा-चढ़ाकर पेश कर रहे हैं।</p>
<p>आईआरजीसी के वरिष्ठ अधिकारियों और संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बाघेर गालिबाफ के सहयोग से चलता प्रतीत होता है। गालिबाफ ने ही अमेरिका के साथ परमाणु और युद्धविराम वार्ता के पहले दौर का नेतृत्व किया था। पिछले महीने इस्लामाबाद में हुई वह वार्ता बिना किसी समझौते के समाप्त हो गयी थी और दूसरे दौर की प्रस्तावित बैठक कभी नहीं हो पायी। बाद में ट्रंप ने इस विफलता का कारण ईरान के नेतृत्व के भीतर गहरे आंतरिक मतभेदों को बताया।</p>
<p>अमेरिकी खुफिया रिपोर्टों के अनुसार, अनिश्चितता के बावजूद युद्ध ने ईरान की सैन्य क्षमताओं को कम जरूर किया है, लेकिन उन्हें पूरी तरह नष्ट नहीं किया है। सूत्रों के मुताबिक, ईरान के लगभग दो-तिहाई मिसाइल लॉन्चर अब भी चालू माने जा रहे हैं। यह आंकड़ा पिछले अनुमानों से कहीं अधिक है। इसका आंशिक कारण वर्तमान में जारी युद्धविराम है, जिसने ईरान को संभलने और उन लॉन्चरों को बाहर निकालने का समय दे दिया है, जो पिछले हमलों के दौरान दब गये थे।</p>
<p>रिपोर्ट के अनुसार, सीआईए के एक आकलन में यह निष्कर्ष भी निकाला गया है कि ईरान भारी आर्थिक संकट का सामना करने से पहले अमेरिका के नेतृत्व वाली वर्तमान नाकेबंदी को अगले चार महीनों तक और झेल सकता है। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने ईरान के शासन ढांचे को 'पूरी तरह से बिखरा' बताया है। वहीं ह्वाइट हाउस ने इस बात पर जोर दिया है कि सैन्य दबाव, आर्थिक अलगाव और आंतरिक कलह ने ईरानी शासन को काफी कमजोर कर दिया है। राष्ट्रपति ट्रंप ने इससे भी आगे बढ़कर तर्क दिया है कि ईरान में प्रभावी रूप से सत्ता परिवर्तन हो चुका है और वर्तमान वार्ताकार पहले वालों की तुलना में अधिक 'समझदार' हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 09 May 2026 18:30:25 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>रूस-सऊदी अरब ने ईरान तथा अरब देशों के बीच संबंधों को सामान्य बनाने का किया समर्थन, होर्मुज में जहाजों का आवागमन किया जाए बहाल : लावरोव</title>
                                    <description><![CDATA[रूस के विदेश मंत्री लावरोव और सऊदी समकक्ष फैसल बिन फरहान ने फोन पर वार्ता कर ईरान और अरब देशों के बीच संबंध सुधारने का समर्थन किया। दोनों नेताओं ने होर्मुज जलडमरूमध्य में व्यापारिक जहाजों की सुरक्षित आवाजाही बहाल करने और क्षेत्रीय संकट के स्थायी राजनयिक समाधान पर जोर दिया, ताकि खाड़ी में शांति बनी रहे।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/russia-saudi-arabia-support-normalization-of-relations-between-iran-and-arab/article-153245"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-06/sergey.png" alt=""></a><br /><p>मॉस्को। रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव और उनके सऊदी समकक्ष फैसल बिन फरहान अल सऊद के बीच फोन पर बातचीत में दोनों पक्षों ने ईरान और अरब राजतंत्रों के बीच संबंधों को सामान्य बनाने के प्रयासों का समर्थन किया। रूसी विदेश मंत्रालय ने शुक्रवार को यह जानकारी दी। विदेश मंत्रालय ने एक बयान में कहा, "ईरान और अरब देशों के बीच लंबे समय के लिए रिश्ते सुधारने और सामान्य बनाने की कोशिशें दोबारा शुरू करना सही माना गया है। "मंत्रियों ने इस बात पर जोर दिया कि होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों का आवागमन संघर्ष-पूर्व की स्थितियों में बहाल किया जाना चाहिये। उन्होंने यह भी कहा कि इस क्षेत्र के संकट के सभी पहलुओं के स्थायी और दीर्घकालिक समाधान निकालने के लिए जारी राजनयिक संपर्कों को बनाए रखा जाना चाहिये।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 09 May 2026 17:58:33 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>अगले हफ्ते इस्लामाबाद में बातचीत शुरू कर सकते हैं अमेरिका और ईरान : रिपोर्ट</title>
                                    <description><![CDATA[अमेरिका और ईरान के बीच 14 सूत्रीय शांति समझौते पर अगले सप्ताह इस्लामाबाद में वार्ता फिर शुरू हो सकती है। मसौदे में परमाणु कार्यक्रम, यूरिनियम स्थानांतरण और होर्मुज जलडमरूमध्य में तनाव कम करने जैसे अहम मुद्दे शामिल हैं। राष्ट्रपति ट्रंप अब ईरान के औपचारिक जवाब का इंतजार कर रहे हैं, जो क्षेत्र में शांति का भविष्य तय करेगा।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/america-and-iran-may-start-talks-in-islamabad-next-week/article-153264"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/iran-casefire.png" alt=""></a><br /><p>तेहरान। व्हाइट हाउस द्वारा ईरान से संघर्ष समाप्ति संबंधी प्रस्ताव पर जवाब की प्रतीक्षा के बीच खबरें सामने आई हैं कि अमेरिका और ईरान के बीच वार्ता अगले सप्ताह पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में फिर शुरू हो सकती है। वॉल स्ट्रीट जर्नल ने मामले से परिचित सूत्रों के हवाले से बताया कि दोनों पक्ष मध्यस्थों के साथ मिलकर एक पृष्ठ के 14 सूत्रीय समझौता ज्ञापन का मसौदा तैयार कर रहे हैं। प्रस्तावित रूपरेखा के तहत एक महीने की वार्ता प्रक्रिया शुरू की जाएगी, जिसका उद्देश्य जारी संघर्ष को समाप्त करना है।</p>
<p>रिपोर्ट के अनुसार मसौदे में ईरान के परमाणु कार्यक्रम, होर्मुज जलडमरूमध्य में तनाव कम करने और ईरान के उच्च संवर्धित यूरेनियम भंडार को किसी तीसरे देश में स्थानांतरित करने जैसे मुद्दे शामिल हैं। कई अहम मुद्दों पर अब भी सहमति नहीं बन सकी है। ईरान पर लगे प्रतिबंधों में राहत का मुद्दा सबसे बड़ी अड़चन बना हुआ है और माना जा रहा है कि यही वार्ता में देरी या विफलता का कारण बन सकता है। ये घटनाक्रम ऐसे समय सामने आए हैं जब 28 फरवरी को अमेरिका और इज़रायल द्वारा ईरान पर किये गये हमलों के बाद क्षेत्रीय तनाव बढ़ गया था। ईरान ने जवाबी हमले किए थे और वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए अहम होर्मुज जलडमरूमध्य में नौवहन प्रभावित हुआ था।</p>
<p>पाकिस्तान की मध्यस्थता में आठ अप्रैल को युद्धविराम हुआ था। इसके बाद 11 अप्रैल को इस्लामाबाद में हुई वार्ता का पहला दौर किसी स्थायी समझौते तक नहीं पहुंच सका था। बाद में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने युद्धविराम को बिना किसी समय सीमा के आगे बढ़ा दिया था। ट्रंप ने अमेरिकी मीडिया से कहा कि प्रशासन को संघर्ष समाप्ति के प्रस्ताव पर ईरान के जवाब का इंतजार है। उन्होंने सीएनएन से कहा, "हमें आज रात तक जवाब मिलने की उम्मीद है", हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि यह स्पष्ट नहीं है कि तेहरान जानबूझकर जवाब में देरी कर रहा है या नहीं। अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने भी कहा कि वॉशिंगटन को शुक्रवार तक ईरान के जवाब की उम्मीद है, हालांकि शनिवार सुबह तक यह स्पष्ट नहीं हो सका था कि ईरान ने औपचारिक रूप से कोई जवाब दिया है या नहीं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 09 May 2026 17:32:36 +0530</pubDate>
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                <title>ट्रंप सरकार का बड़ा ऐलान: ईरान के विदेशी सैन्य खरीद नेटवर्क पर लगाया प्रतिबंध, ईरानी हमलों में मदद करने के लिए सैटेलाइट इमेजरी प्रदान करने का आरोप, प्रतिबंधित संस्थाओं में चीनी कंपनियां शामिल</title>
                                    <description><![CDATA[अमेरिका ने ईरान के सैन्य नेटवर्क और ड्रोन कार्यक्रमों को कुचलने के लिए नए प्रतिबंधों की घोषणा की है। इनमें सैटेलाइट इमेजरी प्रदान करने वाली चीनी कंपनियां भी शामिल हैं, जो अमेरिकी सेना के लिए खतरा बनी थीं। 'ऑपरेशन एपिक फ्यूरी' के तहत ईरान की आपूर्ति शृंखला को वैश्विक स्तर पर बाधित करने का यह सख्त कदम है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/trump-governments-big-announcement-ban-on-irans-foreign-military-procurement/article-153241"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-05/1111200-x-600-px)-(3)17.png" alt=""></a><br /><p>वॉशिंगटन। अमेरिका ने ईरान के सैन्य खरीद नेटवर्क की सहायता करने के आरोप में कई संस्थानों पर नये प्रतिबंध लगाये हैं। इनमें वे कंपनियां भी शामिल हैं जिन पर कथित तौर पर पश्चिम एशिया में अमेरिकी और सहयोगी देशों की सेनाओं के खिलाफ ईरानी हमलों में मदद करने के लिए उपग्रह चित्र (सैटेलाइट इमेजरी) प्रदान करने का आरोप है। अमेरिकी विदेश विभाग की ओर से जारी फैक्ट शीट के अनुसार, मिसाइल  और ड्रोन संचालन सहित ईरानी सैन्य गतिविधियों को सक्षम बनाने वाली उपग्रह चित्र और संबंधित तकनीकी सहायता प्रदान करने के लिए चार संस्थाओं को प्रतिबंधित किया गया है।</p>
<p>अमेरिका ने कहा कि इस तरह की सहायता क्षेत्र में अमेरिकी और भागीदार सेनाओं के लिए सीधा खतरा पैदा करती है। अमेरिकी वित्त विभाग ने भी 10 व्यक्तियों और संस्थाओं को नामित किया है, जिन पर ईरान को उसके मानवरहित विमान (यूएवी) और बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रमों से संबंधित हथियार और कच्चा माल प्राप्त करने में मदद करने का आरोप है। अमेरिकी अधिकारियों ने कहा कि ये उपाय 'नेशनल सिक्योरिटी प्रेसिडेंशियल मेमोरेंडम 2' के तहत ईरान की सैन्य आपूर्ति शृंखलाओं को बाधित करने और 'ऑपरेशन एपिक फ्यूरी' के बाद उसके प्रसार-संवेदनशील कार्यक्रमों को फिर से खड़ा करने के किसी भी प्रयास को रोकने के व्यापक अभियान का हिस्सा हैं।</p>
<p>अधिकारियों ने बताया कि यह कार्रवाई परमाणु प्रतिबद्धताओं के प्रति ईरान की 'बेहद लापरवाही' दिखाने के बाद सितंबर 2025 में संयुक्त राष्ट्र (यूएन) के प्रतिबंधों को फिर से लागू किये जाने के बाद की गयी है। इन उपायों में संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव 1929 के तहत ईरान को पारंपरिक हथियारों के हस्तांतरण, तकनीकी सहायता और संबंधित सेवाओं पर प्रतिबंध शामिल हैं। प्रतिबंधित संस्थाओं में चीन स्थित कंपनियां जैसे मीनट्रॉपी टेक्नोलॉजी (मिज़ारविज़न) और द अर्थ आई (टीईई) शामिल हैं, जिन पर ईरानी सैन्य उपयोग से जुड़ी उपग्रह चित्र प्रदान करने का आरोप है।</p>
<p>एक अन्य चीनी कंपनी, चांग गुआंग सैटेलाइट टेक्नोलॉजी कंपनी लिमिटेड पर अमेरिकी और सहयोगी सैन्य स्थलों की तस्वीरें एकत्र करने और उनकी आपूर्ति करने तथा पहले अमेरिका के प्रतिबंधित हूतियों को डाटा प्रदान करने का आरोप लगाया गया है। ईरान के रक्षा मंत्रालय के निर्यात केंद्र (माइंडेक्स), जिसे पहले मॉडलेक्स के नाम से जाना जाता था, को भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ईरानी रक्षा उपकरणों को बढ़ावा देने में उसकी भूमिका के लिए नामित किया गया है। अमेरिकी सरकार ने दोहराया कि अंतरराष्ट्रीय प्रस्तावों के उल्लंघन में ईरान के सैन्य कार्यक्रमों को मिलने वाले किसी भी समर्थन के गंभीर परिणाम होंगे और ऐसी कार्रवाइयों का करारा जवाब दिया जायेगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 09 May 2026 16:10:20 +0530</pubDate>
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