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                <title>हॉर्मुज जलडमरूमध्य में बढ़ा तनाव : ट्रंप का ऐलान-ईरानी नौकाएं दिखते ही तुरंत नष्ट करें, अमेरिकी नौसेना प्रमुख ने त्यागपत्र दिया </title>
                                    <description><![CDATA[राष्ट्रपति ट्रंप ने हॉर्मुज जलडमरूमध्य में बारूदी सुरंगें बिछाने वाली ईरानी नावों को नष्ट करने का सख्त आदेश दिया है। अमेरिकी घेराबंदी के तहत 31 जहाजों को वापस लौटा दिया गया। तनाव के बीच अमेरिकी नौसेना प्रमुख जॉन फेलन ने इस्तीफा दे दिया है, जबकि ईरान ने बातचीत की शर्त 'हार की स्वीकारोक्ति' रखी है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/tension-increases-in-the-strait-of-hormuz-trump-announces/article-151521"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-01/trump.png" alt=""></a><br /><p>वॉशिंगटन। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हॉर्मुज जलडमरूमध्य में तनाव को और बढ़ाते हुए अपनी नौसेना को कड़े आदेश दिए हैं तथा कहा है कि यदि ईरान से जुड़ी कोई भी नाव इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग में बारूदी सुरंगें बिछाती हुई पाई जाए, तो उसे तुरंत ‘नष्ट’ कर दिया जाए। ट्रंप ने अपने ‘ट्रुथ सोशल’ पर लिखा कि इस तरह की हरकतों को रोकने में किसी भी तरह की झिझक नहीं होनी चाहिए। उन्होंने बताया कि अमेरिकी नौसेना की टीमें इस रास्ते को साफ करने के काम में जुटी हुई हैं और सुरक्षा के लिहाज से यह कदम उठाना जरूरी है।</p>
<p><strong>ईरान की घेराबंदी : 31 जहाजों को वापस लौटने का निर्देश</strong></p>
<p>ईरान के खिलाफ अपनी समुद्री घेराबंदी को और सख्त करते हुए अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने गुरुवार को पुष्टि की कि उसने ‘ईरान के विरुद्ध अमेरिकी घेराबंदी के हिस्से के रूप में 31 जहाजों को वापस मुड़ने या बंदरगाह पर लौटने का निर्देश दिया है।’वापस लौटाए गए जहाजों में अधिकांश तेल टैंकर बताये जा रहे हैं।</p>
<p><strong>अमेरिका पहले हार माने, तभी होगी बातचीत: ईरान </strong></p>
<p>ईरान के सांसद हामिदरज़ा हाजी बाबाई ने कहा है कि जब तक अमेरिका अपनी हार स्वीकार नहीं करता, तब तक उससे किसी भी प्रकार की वार्ता संभव नहीं है। ईरानी संसद के उपाध्यक्ष हाजी बाबाई ने कहा, अमेरिका के हार स्वीकार किए बिना कोई भी बातचीत निषिद्ध है। </p>
<p>अमेरिकी नौसेना प्रमुख जॉन फेलन ने त्यागपत्र दे दिया है। इसकी जानकारी अमेरिका के युद्ध विभाग ने दी। विभाग ने बुधवार को एक बयान में कहा, नौसेना प्रमुख जॉन सी. फेलन तत्काल प्रभाव से पद छोड़ रहे हैं। बयान में कहा गया है कि उप प्रमुख हंग काओ नौसेना के कार्यवाहक प्रमुख के रूप में सेवा देंगे।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 24 Apr 2026 09:48:20 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>ईरान ने ट्रंप के युद्धविराम विस्तार को 'चाल' बताकर किया खारिज: कहा-हमने कभी इसकी मांग नहीं की, नौसैनिक नाकेबंदी की निंदा की </title>
                                    <description><![CDATA[ईरान ने डोनाल्ड ट्रंप के एकतरफा युद्धविराम विस्तार को 'धोखा' करार देते हुए खारिज कर दिया है। विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने अमेरिकी नौसैनिक नाकेबंदी को 'युद्ध की कार्रवाई' बताया। ईरान का स्पष्ट रुख है कि जब तक नाकेबंदी खत्म नहीं होती, कोई वार्ता संभव नहीं है और हॉर्मुज जलडमरूमध्य पूरी तरह बंद रहेगा।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/iran-rejected-trumps-ceasefire-extension-as-a-ploy-said/article-151300"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/iran6.png" alt=""></a><br /><p>तेहरान। ईरान ने अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के युद्धविराम को एकतरफा बढ़ाने की घोषणा पर शक जाहिर करते हुए कहा है कि यह एक 'चाल' है और उसने कभी इसके लिए दरख्वास्त नहीं की थी। विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा कि ईरान ने 'धमकियों के साये' में युद्धविराम विस्तार या नयी बातचीत की कोई गुजारिश नहीं की है। श्री अराघची ने ईरानी बंदरगाहों की जारी अमेरिकी नौसैनिक नाकेबंदी की निंदा करते हुए इसे 'युद्ध की कार्रवाई' और मौजूदा युद्धविराम सिद्धांतों का उल्लंघन करार दिया। उन्होंने कहा, “ईरान जानता है कि दबंगई का मुकाबला कैसे करना है।”</p>
<p>ईरानी संसद के अध्यक्ष बगर गालिबाफ के वरिष्ठ सलाहकार महदी मोहम्मदी ने युद्धविराम विस्तार को खारिज करते हुए कहा कि ईरान के नजरिये से इसका 'कोई मतलब नहीं' है और इसकी 'कोई वास्तविक अहमियत' नहीं है। उन्होंने इस कदम को 'अचानक हमले' के लिए वक्त हासिल करने की रणनीति बताया और दलील दी कि जो पक्ष इस तरह के दबाव का सामना कर रहा हो, वह शर्तें तय नहीं कर सकता।</p>
<p>संयुक्त राष्ट्र में ईरान के राजदूत आमिर सईद इरावानी ने इस बात पर जोर दिया कि इस्लामाबाद में किसी भी औपचारिक शांति वार्ता में शामिल होने के लिए नौसैनिक नाकेबंदी को खत्म करना ईरान की अनिवार्य शर्त है।इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर (आईआरजीसी) से जुड़ी ईरान की अर्ध-सरकारी समाचार एजेंसी मेहर (एमएनए) ने कहा कि ईरान ने युद्धविराम बढ़ाने की मांग नहीं की है। एजेंसी ने ताकत के दम पर अमेरिकी नाकेबंदी को तोड़ने की धमकियों को फिर दोहराया।</p>
<p>युद्धविराम विस्तार की यह घोषणा युद्ध में हुए कई बड़े घटनाक्रमों के बाद हुई है। हमलों पर रोक के बावजूद ट्रंप ने अमेरिकी सेना को नौसैनिक नाकेबंदी जारी रखने का निर्देश दिया है, जो ईरान के लिए विवाद का मुख्य मुद्दा बना हुआ है। ट्रंप ने दावा किया कि यह विस्तार आंशिक रूप से ईरानी सरकार में 'गहरी दरार' होने के कारण किया गया है। ईरानी अधिकारियों ने इस आख्यान को खारिज कर दिया है और स्थायी शांति के लिए खुद की '10-सूत्रीय योजना' पर कायम हैं।</p>
<p>मेहर समाचार एजेंसी ने कहा कि राष्ट्रपति ट्रंप, जो पिछले कुछ दिनों से बार-बार दावा कर रहे थे कि वह ईरान के साथ युद्धविराम नहीं बढ़ायेंगे, उन्होंने एकतरफा रूप से युद्धविराम विस्तार की घोषणा कर दी। एजेंसी के मुताबिक, ट्रंप को एकतरफा युद्धविराम की घोषणा करने के लिए मजबूर होना पड़ा, जबकि उन्होंने पहले खुले तौर पर जोर दिया था कि वह किसी भी हाल में युद्धविराम नहीं बढ़ायेंगे और ईरान को इस्लामाबाद वार्ता में हिस्सा लेना ही होगा।</p>
<p>डोनाल्ड ट्रंप ने मंगलवार को घोषणा की थी कि अमेरिकी प्रतिनिधि बातचीत के लिए पाकिस्तान जा रहे हैं और अगर ईरान सहमत नहीं हुआ तो युद्ध फिर से शुरू हो जायेगा। ईरानी अधिकारियों ने हालांकि चुप्पी साधे रखी है और बातचीत में शामिल होने या न होने के संबंध में किसी आधिकारिक रुख की घोषणा नहीं की है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि अमेरिका ने युद्धविराम का उल्लंघन किया है। एक अन्य अर्ध-सरकारी समाचार एजेंसी, तस्नीम ने अज्ञात अधिकारियों के हवाले से यह भी कहा कि ईरान ने युद्धविराम के विस्तार का अनुरोध नहीं किया था, और ट्रंप की घोषणा के कई मायने हो सकते हैं।</p>
<p>"पहला मतलब यह है कि ट्रंप युद्ध हार चुके हैं। उन्होंने युद्ध के दौरान सभी संभावित परिदृश्यों का परीक्षण और कार्यान्वयन कर लिया है।" इसमें कहा गया है कि श्री ट्रंप जानते हैं कि युद्ध के जरिये उन्हें कुछ हासिल नहीं होगा, इसलिए वह युद्ध से बाहर निकलने को ही अपने लिए सबसे अच्छा रास्ता मानते हैं। अगर वह युद्ध जारी भी रखते हैं, तब भी उन्हें कुछ हासिल नहीं होगा। तस्नीम ने कहा कि हालांकि इस युद्ध में अमेरिका के लिए कोई उपलब्धि नहीं है, लेकिन ट्रंप हर मुमकिन हथकंडे से धोखा देने सहित कुछ भी कर सकते हैं, जिनमें युद्धविराम का विस्तार भी शामिल है। इसमें कहा गया है कि ट्रंप युद्धविराम बढ़ाने का दावा कर सकते हैं, लेकिन फिर वही अमेरिकी प्रशासन या इजरायल 'आतंकवादी कदम' उठा सकते हैं। एजेंसी ने कहा कि ईरान ऐसे परिदृश्य को कम कर नहीं आंकता और इस तरह की संभावना पर करीब से नजर रख रहा है।</p>
<p>इसमें कहा गया है कि अमेरिका युद्ध से पीछे हट जायेगा और इजरायल लेबनान में युद्धविराम के उल्लंघन के बहाने इस जंग में बना रहेगा।अमेरिकी अधिकारियों को हालांकि पहले ही चेतावनी दी जा चुकी है कि अमेरिका एकतरफा रूप से युद्ध से भाग नहीं सकता और इजरायल को लड़ाई में बनाये नहीं रख सकता। नौसैनिक नाकेबंदी जारी रहने का मतलब है कि शत्रुता जारी है। जब तक नौसैनिक नाकेबंदी लागू रहेगी, तब तक ईरान कम से कम होर्मुज जलडमरूमध्य को नहीं खोलेगा और अगर जरूरी हुआ तो ताकत के बल पर इस नाकेबंदी को तोड़ देगा।</p>
<p>इसमें कहा गया है कि अमेरिका ईरान पर युद्ध का साया बनाये रखना चाहता है और ईरान की अर्थव्यवस्था और राजनीति को अधर में रखना चाहता है। तस्नीम ने अज्ञात अधिकारियों के हवाले से कहा, "अमेरिका का मानना है कि ईरान की स्थिति वैसी ही है, जैसी 12 दिवसीय युद्ध के बाद थी। वर्तमान काल में हालांकि एक मौलिक अंतर है और वह है होर्मुज जलडमरूमध्य पर ईरान का नियंत्रण। अगर अमेरिका युद्ध का साया बनाये रखना चाहता है, तो उसे यह जान लेना चाहिए कि होर्मुज जलडमरूमध्य पूरी तरह से बंद रहेगा।"</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
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                <pubDate>Wed, 22 Apr 2026 18:01:12 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>ट्रंप ने की 8 ईरानी महिलाओं की रिहाई की अपील : विरोध-प्रदर्शनों में हिस्सा लेने के लिए मिली थी फांसी की सजा, बोले- उन्हें नहीं पहुंचाएं कोई नुकसान</title>
                                    <description><![CDATA[राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान में मृत्युदंड का सामना कर रही आठ महिलाओं को छोड़ने का आह्वान करते हुए इसे शांति वार्ता की 'शानदार शुरुआत' बताया। वहीं, ईरान ने जासूसी के आरोप में एक वरिष्ठ अधिकारी को फांसी दे दी है। बढ़ते तनाव के बीच ट्रंप की यह अपील कूटनीतिक समाधान की दिशा में एक बड़ा कदम मानी जा रही है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/trump-appeals-for-the-release-of-eight-iranian-women-who/article-151298"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/trump.png" alt=""></a><br /><p>वाशिंगटन। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने जनवरी 2026 के विरोध प्रदर्शनों में भाग लेने के लिए ईरान में मृत्युदंड की सजा का सामना कर रही आठ महिलाओं को रिहा करने का आह्वान किया है और कहा है कि उनकी रिहाई शांति वार्ताओं की एक 'शानदार शुरुआत' होगी। ट्रंप की यह अपील ईरान के साथ एकतरफा युद्धविराम के विस्तार की घोषणा करने से एक दिन पहले आई है। उन्होंने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रूथ सोशल पर कहा, "मैं इन महिलाओं की रिहाई की बहुत सराहना करूँगा। कृपया उन्हें कोई नुकसान न पहुँचाएँ! यह हमारी बातचीत की एक शानदार शुरुआत होगी।"</p>
<p>एक संबंधित घटनाक्रम में, ईरानी न्यायपालिका के आधिकारिक मीडिया संस्थान मिजान न्यूज ने बुधवार को बताया कि इजराइल की खुफिया एजेंसी मोसाद के लिए जासूसी करने के आरोप में दोषी ठहराए जाने के बाद ईरान के नागरिक सुरक्षा प्राधिकरण के एक वरिष्ठ अधिकारी को फांसी दे दी गई है। मिजान के अनुसार, ईरान के सर्वोच्च न्यायालय द्वारा सजा बरकरार रखे जाने के बाद अधिकारी मेहदी फरीद को फांसी पर लटका दिया गया। इस अधिकारी ने रक्षा से संबंधित संवेदनशील जानकारी इजराइली खुफिया विभाग को देने की कोशिश करने की बात कबूल की थी।</p>
<p>डोनाल्ड ट्रंप ने मृत्युदंड की सजा पाने वाली इन आठ महिलाओं की तस्वीरों का एक स्क्रीनशॉट साझा किया। हालांकि, इन महिलाओं के नाम और पहचान का खुलासा नहीं किया गया है। इस तरह की रिपोर्टें हैं कि इन महिलाओं को जनवरी 2026 के विरोध प्रदर्शनों में शामिल होने या चल रहे संघर्ष के दौरान दुश्मन की मदद करने के संदेह में फांसी का सामना करना पड़ रहा है। ईरानी अधिकारियों ने आधिकारिक तौर पर इन आठ महिलाओं के लिए विशिष्ट फांसी की योजनाओं की पुष्टि नहीं की है। सोमवार को तेहरान के बाहर एक जेल में मोहम्मद मासूम शाही (38) और हामिद वालिदी (45) को सुबह फांसी दे दी गई। अधिकारियों ने कहा कि इनके साथ 19 मार्च से अब तक कम से कम 15 राजनीतिक कैदियों को फांसी दी जा चुकी है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 22 Apr 2026 16:29:23 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>एनपीटी समीक्षा बैठक में पश्चिमी एशिया को परमाणु हथियार मुक्त क्षेत्र बनाने के पुराने वादे को प्राथमिकता मिलेः ईरान</title>
                                    <description><![CDATA[वियना में ईरानी मिशन ने मांग की है कि आगामी एनपीटी समीक्षा सम्मेलन में पश्चिमी एशिया को परमाणु मुक्त बनाने के वादों को प्राथमिकता दी जाए। ईरान ने चेतावनी दी कि इजरायल को संधि के दायरे में लाने में 30 साल की देरी ने एनपीटी की विश्वसनीयता को कम किया है। कार्रवाई न होने पर सम्मेलन विफल हो सकता है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/the-old-promise-of-making-western-asia-a-nuclear-weapon/article-151230"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/iran5.png" alt=""></a><br /><p>वियना। संयुक्त राष्ट्र के लिए ईरानी मिशन ने मंगलवार को वियना में कहा कि 2026 में होने वाले परमाणु अप्रसार संधि (एनपीटी) समीक्षा सम्मेलन में पश्चिमी एशिया को परमाणु हथियारों से मुक्त बनाने के पुराने वादों को प्राथमिकता मिलनी चाहिए। एनपीटी के 191 हस्ताक्षरकर्ता देशों में से अधिकांश के प्रतिनिधि 27 अप्रैल से 22 मई तक अमेरिका के न्यूयॉर्क में बैठक के लिए एकत्र होंगे। इस सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य परमाणु हथियारों के फैलाव को रोकना और परमाणु ऊर्जा के सुरक्षित इस्तेमाल को बढ़ावा देना है।</p>
<p>ईरानी मिशन ने सोशल मीडिया पर कहा कि 1995 में पश्चिमी एशिया को लेकर जो प्रस्ताव पास हुआ था, उसे अब पूरी तरह लागू करने का समय आ गया है। इस प्रस्ताव का मकसद इस पूरे क्षेत्र को परमाणु और सामूहिक विनाश के हथियारों से मुक्त करना था। ईरान का कहना है कि इसी वादे पर इस संधि को आगे बढ़ाया गया था, इसलिए जब तक यह लक्ष्य पूरा नहीं होता, यह प्रस्ताव प्रभावी रहना चाहिए। बयान में 2000 के एनपीटी समीक्षा सम्मेलन के परिणामों का भी उल्लेख किया गया, जिसमें इजरायल से संधि में शामिल होने और अपने सभी परमाणु केंद्रों को अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (आईएईए) के सुरक्षा घेरे में रखने का आग्रह किया गया था।</p>
<p>ईरान ने कहा कि पश्चिमी एशिया पर एनपीटी प्रतिबद्धताओं को लागू करने में '30 से अधिक वर्षों की अनुचित देरी' ने संधि की विश्वसनीयता को कम किया है और इसकी समीक्षा प्रक्रिया की प्रभावशीलता पर सवाल खड़े किए हैं। मिशन ने चेतावनी देते हुए कहा, "यह अनुचित देरी रुकनी चाहिए।" मिशन ने यह भी कहा कि कार्रवाई करने में विफलता आगामी समीक्षा सम्मेलन को एक 'विफल सम्मेलन' बना देगी।<br />उल्लेखनीय है कि इजरायल परमाणु अस्पष्टता की नीति बनाए रखता है, न तो वह परमाणु हथियार होने की पुष्टि करता है और न ही इससे इनकार करता है। वह एनपीटी का सदस्य भी नहीं है।</p>
<p>हर पांच साल में आयोजित होने वाला एनपीटी समीक्षा सम्मेलन, परमाणु हथियारों के प्रसार को रोकने के साथ-साथ परमाणु ऊर्जा के शांतिपूर्ण उपयोग और निशस्त्रीकरण को बढ़ावा देने वाली संधि के कार्यान्वयन का आकलन करने के लिए सदस्य देशों को एक साथ लाता है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 21 Apr 2026 18:25:46 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>ईरानी स्पीकर ग़ालिबाफ़ का बड़ा बयान : अगर उन्होंने जरा सी गलती की तो हम करारा...', नाकेबंदी और संघर्ष-विराम का उल्लंघन करके  भ्रम में जी रहे ट्रंप</title>
                                    <description><![CDATA[ईरानी संसद अध्यक्ष मोहम्मद बाकर गालिबाफ ने अमेरिका की नौसैनिक नाकेबंदी को खारिज करते हुए इसे ट्रंप का 'भ्रम' बताया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि ईरान आत्मसमर्पण नहीं करेगा और युद्ध के मैदान में अपने नये पत्ते खोलने को तैयार है। वार्ता तभी संभव है जब अमेरिका दबाव के हथकंडे छोड़े और नाकेबंदी हटाए।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/big-statement-by-iranian-speaker-ghalibaf-if-he-makes-a/article-151165"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/iran4.png" alt=""></a><br /><p>तेहरान। ईरान ने धमकी के दबाव में अमेरिका के साथ बातचीत करने से इनकार किया है। ईरान की संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बगर ग़ालिबाफ़ ने ईरान को समझौता करने के लिए मजबूर करने के मकसद से अमेरिका की ओर से अपनाये जा रहे हथकंडों (जिसमें नौसैनिक नाकेबंदी भी शामिल है) की कड़ी निंदा की है। उन्होंने चेतावनी दी है कि ईरान युद्ध के मैदान में अपने नये पत्ते खोलने के लिए पूरी तरह तैयार है।</p>
<p>ग़ालिबाफ़ ने मंगलवार को सोशल मीडिया ‘एक्स’ पर लिखा कि अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप नाकेबंदी करके और संघर्ष-विराम का उल्लंघन करके एक तरह के भ्रम में जी रहे हैं। उन्होंने कहा, "ट्रंप नाकेबंदी करके और संघर्ष-विराम का उल्लंघन करके बातचीत की मेज को आत्मसमर्पण की मेज में बदलना चाहते हैं, या फिर से युद्ध भड़काने की अपनी मंशा को सही ठहराना चाहते हैं।" उन्होंने कहा कि दबाव बनाने के इन हथकंडों से बातचीत की मेज पर कोई नतीजा नहीं निकलने वाला है।</p>
<p>ग़ालिबफ़ ने कहा, “ हम धमकियों के साये में बातचीत स्वीकार नहीं करेंगे... पिछले दो हफ़्तों के दौरान हमने खुद को युद्ध के मैदान में अपने नये पत्ते खोलने के लिए तैयार कर लिया है।” ईरानी नेता की ये टिप्पणियां ऐसे समय में आयी हैं, जब ईरान और अमेरिका के बीच होने वाली शांति वार्ता का दूसरा दौर अभी भी अनिश्चितता के घेरे में है। ईरान ने अब तक इन वार्ताओं में शामिल होने से इनकार कर दिया है, और उसने बातचीत शुरू करने से पहले नाकेबंदी हटाने की शर्त रखी है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 21 Apr 2026 13:51:18 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>ईरान ने अमेरिका के साथ बातचीत से इनकार किया, तो उसे 'अभूतपूर्व समस्याओं' का करना पड़ेगा सामना : डोनाल्ड ट्रंप</title>
                                    <description><![CDATA[अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को सख्त चेतावनी देते हुए कहा है कि यदि वह शांति वार्ता से इनकार करता है, तो उसे अभूतपूर्व समस्याओं का सामना करना पड़ेगा। नाकेबंदी और तनाव के बीच ट्रंप ने समझौते की उम्मीद जताई है, जबकि ईरान ने धमकियों के दबाव में झुकने से साफ मना कर दिया है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/if-iran-refuses-to-negotiate-with-america-it-will-face/article-151149"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-01/trump.png" alt=""></a><br /><p>मॉस्को। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि अगर ईरान अमेरिका के साथ बातचीत करने से इनकार करता है, तो उसे अभूतपूर्व समस्याओं का सामना करना पड़ेगा। राष्ट्रपति ट्रंप ने सोमवार को पत्रकार जॉन फ्रेडरिक्स के साथ साक्षात्कार में कहा, “ वे बातचीत करेंगे, और अगर वे ऐसा नहीं करते हैं, तो उन्हें ऐसी समस्याओं का सामना करना पड़ेगा, जैसी उन्होंने पहले कभी नहीं देखी होंगी।” अमेरिका के राष्ट्रपति ने यह उम्मीद भी जतायी कि अमेरिका और ईरान के बीच कोई समझौता हो जाएगा। उधर, ईरानी संसद के स्पीकर मोहम्मद बगर ग़ालिबाफ़ ने इससे पहले कहा था कि ईरान धमकियों के दबाव में अमेरिका के साथ बातचीत नहीं करेगा।</p>
<p>गौरतलब है कि अमेरिका और इज़रायल ने 28 फरवरी को ईरान में कुछ ठिकानों पर हमले करके युद्ध की शुरुआत की थी, जिससे काफी नुकसान हुआ और आम नागरिकों की भी जानें गयी। सात अप्रैल को अमेरिका और ईरान ने दो हफ़्ते के लिए संघर्ष-विराम की घोषणा की। इसके बाद पाकिस्तान के इस्लामाबाद में दोनों देशों के बीच हुई बातचीत का कोई नतीजा नहीं निकला। फिर युद्ध शुरू होने की कोई घोषणा नहीं की गयी, लेकिन अमेरिका ने ईरान के बंदरगाहों की घेराबंदी शुरू कर दी। मध्यस्थ अब बातचीत का एक नया दौर शुरू करवाने की कोशिश कर रहे हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/leads/if-iran-refuses-to-negotiate-with-america-it-will-face/article-151149</link>
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                <pubDate>Tue, 21 Apr 2026 12:41:07 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>ईरान ने किया दूसरी दौर की वार्ता से इनकार : अमेरिकी बलों ने ईरानी ज़हाज जब्त किया, जवाबी कार्रवाई की चेतावनी</title>
                                    <description><![CDATA[अमेरिका द्वारा ईरानी जहाज 'तौस्का' को जब्त किए जाने के बाद ईरान ने दूसरे दौर की शांति वार्ता ठुकरा दी है। तेहरान ने इसे 'समुद्री डकैती' और युद्धविराम का उल्लंघन बताया। ओमान की खाड़ी में बढ़ते तनाव और ड्रोन हमलों की खबरों के बीच, 22 अप्रैल को समाप्त हो रहा युद्धविराम अब खतरे में है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/iran-refuses-second-round-of-talks-us-forces-seize-iranian/article-151049"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/mojtaba.png" alt=""></a><br /><p>वॉशिंगटन। ईरान ने अमेरिका के साथ प्रस्तावित दूसरे दौर की शांति वार्ता में भाग लेने से इनकार कर दिया है, जिसका मुख्य कारण ईरानी बंदरगाहों पर जारी अमेरिकी नाकेबंदी बताया गया है।इस बीच, अमेरिकी सेना ने एक ईरानी मालवाहक जहाज को जब्त कर लिया, जिससे पश्चिम एशिया में नाजुक दौर से गुजर रही शांति पर और अनिश्चितता व्याप्त हो गयी है। ईरान ने पुष्टि की कि अमेरिकी नौसेना ने ओमान की खाड़ी में ईरानी जहाज ‘टौस्का’ को ‘हमला कर जब्त’ किया, जिसे उसने युद्धविराम का उल्लंघन बताया और जवाबी कार्रवाई की चेतावनी दी।</p>
<p>ईरान के खत्म उल-अंबिया मुख्यालय ने कहा कि अमेरिकी कार्रवाई ईरानी वाणिज्यिक जहाजों पर हमला है और इसे ‘सशस्त्र समुद्री डकैती’ करार दिया। ईरान की अर्ध-सरकारी तस्नीम समाचार एजेंसी के अनुसार, इस घटना के बाद ईरान ने अमेरिकी युद्धपोतों पर ड्रोन हमले भी किये, हालांकि इसकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। ईरानी अधिकारियों ने कहा कि अमेरिकी शर्तें ‘अवास्तविक और अनुचित" हैं और जब तक नाकेबंदी नहीं हटायी जाती, वार्ता संभव नहीं है। उन्होंने अमेरिका पर शर्तें बदलने का आरोप भी लगाया।</p>
<p>ईरानी मीडिया के अनुसार, मौजूदा परिस्थितियों में वार्ता के सफल होने की ‘कोई स्पष्ट संभावना नहीं’ है। यह निर्णय ऐसे समय में आया है, जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पाकिस्तान में फिर वार्ता की घोषणा की है।दोनों देशों के बीच जारी दो सप्ताह का युद्धविराम 22 अप्रैल को समाप्त होने वाला है। इस बीच, अमेरिकी केन्द्रीय कमान (सेंटकॉम) ने पुष्टि की कि अमेरिकी बलों ने रविवार को अरब सागर में ईरानी झंडे वाले मालवाहक जहाज को रोका।</p>
<p>सेंटकॉम के अनुसार, निर्देशित मिसाइल विध्वंसक यूएसएस स्प्रूअन्स ने ‘टौस्का’ को रोका, जो ईरान के बंदर अब्बास की ओर जा रहा था। कई चेतावनियों के बावजूद जहाज के चालक दल ने निर्देशों का पालन नहीं किया।इसके बाद अमेरिकी जहाज ने अपनी पांच इंच की तोप से इंजन कक्ष को निशाना बनाकर उसकी गति निष्क्रिय कर दी, जिसके बाद अमेरिकी मरीन बलों ने जहाज पर चढ़कर उसे अपने नियंत्रण में ले लिया। सेंटकॉम ने कहा कि कार्रवाई ‘संतुलित और पेशेवर तरीके’ से की गयी। उसने यह भी बताया कि नाकेबंदी लागू होने के बाद से 25 वाणिज्यिक जहाजों को वापस लौटने या दिशा बदलने के निर्देश दिये गये हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 20 Apr 2026 14:02:33 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>होर्मुज में भड़का तनाव: अमेरिकी सेना द्वारा जहाज को रोके जाने के बाद ईरान ने दी जवाबी कार्रवाई की चेतावनी, नाकाबंदी का उल्लंघन करने का प्रयास</title>
                                    <description><![CDATA[अमेरिकी सेंटकॉम ने ओमान की खाड़ी में नाकाबंदी का उल्लंघन करने पर ईरानी मालवाहक जहाज 'तौस्का' को गोले दागकर निष्क्रिय कर दिया। राष्ट्रपति ट्रंप की घोषणा के बाद अमेरिकी नौसेना ने जहाज पर नियंत्रण कर लिया है। ईरान ने इस कार्रवाई को 'सशस्त्र डकैती' करार देते हुए जवाबी सैन्य कार्रवाई की कड़ी चेतावनी दी है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/iran-warns-of-retaliation-after-us-military-intercepts-ship-attempt/article-151044"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/hormuz2.png" alt=""></a><br /><p>वॉशिंगटन। ईरानी सशस्त्र बलों ने अमेरिकी केंद्रीय कमान (सेंटकॉम) ने द्वारा इस बात की पुष्टि किये जाने के बाद की उसने ओमान की खाड़ी में एक ईरानी व्यापारिक जहाज को रोका है, त्वरित प्रतिक्रिया देने का वादा किया है। यह जहाज कथित तौर पर क्षेत्र में अमेरिकी नाकाबंदी का उल्लंघन करने का प्रयास कर रहा था। इससे पहले, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने घोषणा की थी कि अमेरिकी बलों ने ओमान की खाड़ी में एक ईरानी ध्वज वाले मालवाहक जहाज को रोका है , जिससे उसके इंजन कक्ष को नुकसान पहुंचा है।</p>
<p>कमान ने एक बयान में कहा, "अरब सागर में तैनात अमेरिकी बलों ने 19 अप्रैल को एक ईरानी बंदरगाह की ओर जाने का प्रयास कर रहे एक ईरानी ध्वज वाले मालवाहक जहाज के खिलाफ नौसैनिक नाकाबंदी लागू की।" सेंटकॉम के अनुसार, ईरानी पोत को नाकाबंदी उल्लंघन के बारे में कई चेतावनियाँ दी गई थीं। बयान में कहा गया है, "छह घंटे की अवधि में बार-बार दी गई चेतावनियों के बावजूद, जब तौस्का के चालक दल ने पालन नहीं किया, तो स्पूरांस ने पोत को अपने इंजन कक्ष को खाली करने का निर्देश दिया। स्पूरांस ने विध्वंसक पोत की 5-इंच एमके 45 तोप से तौस्का के इंजन कक्ष में कई गोले दागकर तौस्का के प्रणोदन तंत्र को निष्क्रिय कर दिया।"</p>
<p>इसके बाद, अमेरिकी मरीन मालवाहक पोत पर सवार हो गए। कमांड के अनुसार, पोत वर्तमान में अमेरिकी नियंत्रण में है। कमान ने कहा, "नाकाबंदी शुरू होने के बाद से, अमेरिकी सेना ने 25 वाणिज्यिक पोतों को वापस मुड़ने या किसी ईरानी बंदरगाह पर लौटने का निर्देश दिया है।" अमेरिकी कार्रवाई पर प्रतिक्रिया देते हुए, ईरान के खातम अल-अनबिया सैन्य कमान के एक प्रवक्ता ने कहा कि ओमान की खाड़ी में अमेरिकी सेना द्वारा एक ईरानी पोत को जब्त करने पर ईरान तुरंत जवाब देगा।</p>
<p>एक समाचार एजेन्सी के अनुसार, ईरानी सैन्य कमान के एक प्रवक्ता ने कहा, “हम चेतावनी देते हैं कि अमेरिकी सेना द्वारा की जा रही इस सशस्त्र डकैती का जवाब ईरान के सशस्त्र बल जल्द ही देंगे।” 13 अप्रैल को, अमेरिकी नौसेना ने होर्मुज जलडमरूमध्य के दोनों ओर स्थित ईरानी बंदरगाहों से आने-जाने वाले सभी समुद्री यातायात की नाकाबंदी शुरू कर दी। यह जलडमरूमध्य विश्व के लगभग 20 प्रतिशत तेल, पेट्रोलियम उत्पादों और एलएनजी आपूर्ति का स्रोत है। वाशिंगटन का कहना है कि गैर-ईरानी जहाज होर्मुज जलडमरूमध्य से तब तक स्वतंत्र रूप से गुजर सकते हैं जब तक वे तेहरान को कोई शुल्क नहीं देते। ईरानी अधिकारियों ने शुल्क लगाने की घोषणा नहीं की है, लेकिन ऐसी योजनाओं पर चर्चा की है।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/world/iran-warns-of-retaliation-after-us-military-intercepts-ship-attempt/article-151044</link>
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                <pubDate>Mon, 20 Apr 2026 12:27:31 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>अंतरराष्ट्रीय कानून के अनुपालन के लिए ईरानी विदेश मंत्रालय ने यूरोपीय संघ की अपील को किया खारिज, होर्मुज़ जलड़मरूमध्य से ज़हाजों के आवागमन की स्थिति को देखते हुए पाखंड बताया</title>
                                    <description><![CDATA[ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य पर यूरोपीय संघ की 'टोल-फ्री' आवागमन की मांग को "पाखंड" बताते हुए खारिज कर दिया है। ईरानी प्रवक्ता इस्माइल बगाई ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय कानून ईरान को सैन्य आक्रामकता रोकने से नहीं रोकता। अमेरिकी नाकाबंदी के विरोध में आईआरजीसी ने शनिवार से होर्मुज जलडमरूमध्य को पूरी तरह बंद करने की घोषणा की है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/iranian-foreign-ministry-rejects-eus-appeal-to-comply-with-international/article-150997"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/hormuz1.png" alt=""></a><br /><p>मॉस्को। ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बगाई ने होर्मुज जलडमरूमध्य से जहाजों के आवागमन की स्थिति को देखते हुए अंतरराष्ट्रीय कानून के अनुपालन के लिए यूरोपीय संघ की अपील को खारिज करते हुए इसे "चरम पाखंड" बताया। बगाई यूरोपीय संघ की विदेश नीति प्रमुख काजा कल्लास के 17 अप्रैल के पोस्ट पर टिप्पणी कर रहे थे, जिसमें उन्होंने ईरान से होर्मुज जलडमरूमध्य से जहाजों के लिए बिना शुल्क और टोल मुक्त आवागमन सुनिश्चित करने का आह्वान किया था। कल्लास ने अपने पोस्ट में कहा था कि "अंतरराष्ट्रीय कानून के अनुसार," होर्मुज जलडमरूमध्य से आवागमन बिना शुल्क और टोल मुक्त होना चाहिए।</p>
<p>बगाई ने कल्लास की पोस्ट के जवाब में ‘एक्स’ पर कहा, “अरे, वो ‘अंतर्राष्ट्रीय कानून’?! वही कानून जिसका हवाला देकर यूरोपीय संघ दूसरों को उपदेश देता है, जबकि चुपचाप अमेरिका-इजरायल के आक्रामक युद्ध को हरी झंडी देता है और ईरानियों पर हो रहे अत्याचारों को अनदेखा करता है?! उपदेश देना बंद करो; यूरोप की अपने उपदेशों पर अमल न करने की आदत ने उसके ‘अंतर्राष्ट्रीय कानून’ के वादों को पाखंड की पराकाष्ठा में बदल दिया है।” राजनयिक ने इस बात पर जोर दिया कि अंतर्राष्ट्रीय कानून का कोई भी प्रावधान ईरान को, एक तटीय राज्य होने के नाते, “होर्मुज जलडमरूमध्य का इस्तेमाल ईरान के खिलाफ सैन्य आक्रमण के लिए होने से रोकने के लिए आवश्यक कदम उठाने” से नहीं रोकता है।</p>
<p>ईरानी आईआरजीसी नौसेना ने घोषणा की कि उसने शनिवार शाम से होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद कर दिया है, और यह तब तक लागू रहेगा जब तक अमेरिकी नौसैनिक नाकाबंदी पूरी तरह से हटा नहीं ली जाती। अमेरिकी नौसेना ने 13 अप्रैल को होर्मुज जलडमरूमध्य के दोनों ओर स्थित ईरानी बंदरगाहों से आने-जाने वाले सभी समुद्री यातायात की नाकाबंदी शुरू कर दी। यह जलडमरूमध्य विश्व के लगभग 20 प्रतिशत तेल, पेट्रोलियम उत्पाद और एलएनजी आपूर्ति का स्रोत है।</p>
<p>वाशिंगटन का कहना है कि गैर-ईरानी जहाज होर्मुज जलडमरूमध्य से तब तक स्वतंत्र रूप से गुजर सकते हैं जब तक वे तेहरान को कोई शुल्क नहीं देते। ईरानी अधिकारियों ने शुल्क लगाने की घोषणा नहीं की है, लेकिन ऐसी योजनाओं पर चर्चा की है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/world/iranian-foreign-ministry-rejects-eus-appeal-to-comply-with-international/article-150997</link>
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                <pubDate>Sun, 19 Apr 2026 16:34:25 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>बातचीत के बावजूद ईरानी सशस्त्र बल पूरी तरह से युद्ध के लिए तैयार : संसद अध्यक्ष मोहम्मद बगेर ग़ालिबफ़</title>
                                    <description><![CDATA[अमेरिका के साथ शांति वार्ता के बावजूद, ईरान ने अपने सशस्त्र बलों को युद्ध के लिए पूरी तरह तैयार रहने का आदेश दिया है। संसद अध्यक्ष मोहम्मद ग़ालिबफ़ ने 'दुश्मन' पर अविश्वास जताते हुए राष्ट्रीय सुरक्षा को प्राथमिकता दी है। इस्लामाबाद में अगले दौर की बातचीत प्रस्तावित है, लेकिन बंदरगाहों की नाकाबंदी से संघर्ष का खतरा बना हुआ है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/despite-talks-iranian-armed-forces-are-fully-prepared-for-war/article-150996"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/मोहम्मद-बगेर-ग़ालिबफ़.png" alt=""></a><br /><p>मॉस्को। ईरानी संसद अध्यक्ष मोहम्मद बगेर ग़ालिबफ़ ने कहा कि मध्य पूर्व में संघर्ष के समाधान के लिए वाशिंगटन और तेहरान के बीच जारी बातचीत के बावजूद, ईरान के सशस्त्र बल पूरी तरह से युद्ध के लिए तैयार हैं। प्रेस टीवी ने ग़ालिबफ़ के हवाले से कहा, "हमें दुश्मन पर भरोसा नहीं है। अभी भी, जब हम यहां बैठे हैं, युद्ध छिड़ सकता है। सशस्त्र बल ज़मीन पर पूरी तरह से युद्ध के लिए तैयार हैं।"</p>
<p>प्रसारक के अनुसार, संसद अध्यक्ष ने इस बात से इनकार किया कि जारी बातचीत से राष्ट्रीय सुरक्षा के प्रति लापरवाही हो सकती है।  ग़ालिबफ़ ने कहा, "हमारा मानना है कि बातचीत के कारण सशस्त्र बल तैयार नहीं हैं। इसके विपरीत, सड़कों पर आम लोगों की तरह, हमारे सशस्त्र बल भी तैयार हैं।"</p>
<p>इससे पहले, पाकिस्तानी प्रसारक जियो टीवी ने बताया कि अमेरिका-ईरान वार्ता का दूसरा दौर इस्लामाबाद में अगले सप्ताह के अंत में होने की संभावना है। 28 फरवरी को अमेरिका और इज़रायल ने ईरान में ठिकानों पर हमले शुरू किए, जिनमें 3,000 से अधिक लोग मारे गए। 8 अप्रैल को वाशिंगटन और तेहरान ने दो सप्ताह के लिए युद्धविराम की घोषणा की। इस्लामाबाद में हुई बाद की बातचीत बेनतीजा रही। हालांकि शत्रुता फिर से शुरू करने की कोई घोषणा नहीं की गई, लेकिन अमेरिका ने ईरानी बंदरगाहों की नाकाबंदी शुरू कर दी है। मध्यस्थ बातचीत का एक नया दौर आयोजित करने का प्रयास कर रहे हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 19 Apr 2026 15:39:59 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>होर्मुज़ जलड़मरूमध्य को खोलना अंतरराष्ट्रीय समुदाय की सर्वसम्मत मांग : चीनी विदेश मंत्री ने दिया ईरान की संप्रभुता, सुरक्षा और अधिकारों पर ज़ोर</title>
                                    <description><![CDATA[चीनी विदेश मंत्री वांग यी ने ईरान से होर्मुज जलडमरूमध्य में नौवहन की स्वतंत्रता बहाल करने का आग्रह किया है। अमेरिकी नाकेबंदी और ऊर्जा संकट के बीच चीन ने इसे अंतरराष्ट्रीय मांग बताया। तेहरान इस जलमार्ग को 'विशेष संपत्ति' मान रहा है, जबकि तनाव के कारण वैश्विक तेल आपूर्ति और कीमतें बुरी तरह प्रभावित हुई हैं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/opening-of-the-strait-of-hormuz-is-unanimous-demand-of/article-150713"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/china.png" alt=""></a><br /><p>बीजिंग। चीन के विदेश मंत्री वांग यी ने अपने ईरानी समकक्ष अब्बास अराघची से कहा है कि होर्मुज जलडमरूमध्य को खोलना अंतरराष्ट्रीय समुदाय की सर्वसम्मत मांग है। वांग ने ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची से फोन पर बात करते हुए इस बात पर जोर दिया कि एक ओर जहां ईरान की संप्रभुता, सुरक्षा और एक तटीय राज्य के रूप में उसके वैध अधिकारों के सम्मान की आवश्यकता है, वहीं दूसरी ओर इस जलडमरूमध्य से नौवहन की स्वतंत्रता और समुद्री सुरक्षा की गारंटी भी दी जानी चाहिए वांग ने कहा, "इस जलडमरूमध्य से सामान्य आवागमन फिर से बहाल करने के प्रयास अंतरराष्ट्रीय समुदाय की ओर से एक सर्वसम्मत आह्वान का प्रतिनिधित्व करते हैं।"</p>
<p>वांग ने कहा कि वर्तमान स्थिति युद्ध और शांति के बीच एक नाजुक मोड़ पर खड़ी है लेकिन इसके साथ उन्होंने यह भी कहा कि कूटनीतिक समाधान के लिए अवसर का एक दरवाजा भी खुल रहा है। ईरानी सरकार ने होर्मुज जलडमरूमध्य के लिए एक 'विशेष व्यवस्था' परिभाषित करने का आह्वान करते हुए यह तर्क दिया कि यह जलमार्ग तेहरान के लिए एक 'विशेष संपत्ति' है। गौरतलब है कि यह जानकारी राज्य समाचार एजेंसी आईआरएनए ने दी।</p>
<p>सरकारी प्रवक्ता फातिमा मोहजेरानी ने रूस की आरआईए नोवोस्ती को बताया, "उन सभी संपत्तियों की तरह जो अन्य देशों के साथ बातचीत के प्रकार और उसके नियमन के लिए एक साधन के रूप में काम करती हैं, उसी तरह से इस जलमार्ग के लिए भी एक विशेष व्यवस्था परिभाषित की जानी चाहिए।" गौरतलब है कि इस सप्ताह के अंत में पाकिस्तान में अमेरिका-ईरान वार्ता विफल होने के बाद वाशिंगटन द्वारा ईरानी बंदरगाहों पर नाकेबंदी लगाए जाने के कारण होर्मुज के रास्ते होने वाला नौवहन बाधित है।</p>
<p>होर्मुज जलडमरूमध्य सामान्यतः वैश्विक समुद्री तेल प्रवाह का एक बड़ा हिस्सा संभालता है लेकिन 28 फरवरी को शुरू हुए ईरान के खिलाफ अमेरिका-इजरायल युद्ध से उत्पन्न नवीनतम ऊर्जा संकट के केंद्र में वह बना हुआ है। तेहरान ने इसके जवाबी कार्रवाई में इजरायल और उन अन्य क्षेत्रीय देशों को निशाना बनाते हुए मिसाइल और ड्रोन हमले किए, जहां अमेरिकी सैन्य ठिकाने या संपत्तियां मौजूद हैं। अमेरिकी सेंट्रल कमांड के प्रमुख एडमिरल ब्रैड कूपर ने जैसा कि कहा कि अमेरिकी सेनाओं ने ईरान से और ईरान को होने वाले समुद्री व्यापार को पूरी तरह से रोक दिया है। नाकेबंदी के पहले 48 घंटों के दौरान इस क्षेत्र से कोई भी जहाज नहीं गुजरा है।</p>
<p>कमांड ने बताया कि 10 जहाजों ने ईरानी बंदरगाहों या तटीय जलक्षेत्रों की ओर वापस लौटने के आदेशों का पालन किया है। यह नाकेबंदी ईरान के तटीय क्षेत्रों में प्रवेश करने या वहां से बाहर निकलने वाले सभी देशों के जहाजों पर समान रूप से लागू होती है, जबकि ईरानी बंदरगाहों से दूर रहने वाले जहाजों पर इसका कोई असर नहीं पड़ता है। यह उम्मीद की जा रही है कि इस नाकेबंदी से ईरान की अर्थव्यवस्था पर काफी दबाव पड़ेगा। इस बीच इस महत्वपूर्ण जलमार्ग पर तेहरान द्वारा पहले से लगाई गई पाबंदियों के कारण वैश्विक ऊर्जा कीमतों में अभूतपूर्व बढ़ोतरी हुई है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 16 Apr 2026 18:39:41 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>अमेरिकी नाकेबंदी पर ईरान का पलटवार : राष्ट्रीय हितों की रक्षा के लिए आवश्यक कदम उठाने का अधिकार ; इरावानी ने इसे संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का &quot;घोर उल्लंघन&quot; बताया </title>
                                    <description><![CDATA[संयुक्त राष्ट्र में ईरान ने अमेरिकी नौसैनिक नाकेबंदी की कड़ी निंदा करते हुए इसे संप्रभुता का उल्लंघन करार दिया है। राजदूत अमीर सईद इरावानी ने इसे अंतरराष्ट्रीय शांति के लिए खतरा बताते हुए सुरक्षा परिषद से हस्तक्षेप की मांग की है। तेहरान ने जवाबी कार्रवाई की चेतावनी दी है और पड़ोसी देशों से भारी हर्जाने की मांग की है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/irans-counterattack-on-us-blockade-is-a-gross-violation-of/article-150373"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/iran-war.png" alt=""></a><br /><p>न्यूयॉर्क। ईरान ने अमेरिका द्वारा उसके बंदरगाहों की कथित नौसैनिक नाकेबंदी की कड़ी निंदा करते हुए इसे उसकी संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का "घोर उल्लंघन" बताया है। संयुक्त राष्ट्र में ईरान के स्थायी प्रतिनिधि अमीर सईद इरावानी ने संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस और संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के अध्यक्ष को लिखे पत्र में इस कदम को "अवैध आक्रामक कार्रवाई" करार दिया, जो क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय शांति के लिए खतरा है।</p>
<p>इरावानी ने कहा कि 12 अप्रैल को यूएस सेंट्रल कमांड द्वारा घोषित यह नाकेबंदी संयुक्त राष्ट्र चार्टर के अनुच्छेद 2(4) का उल्लंघन है और अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत "आक्रामकता का स्पष्ट उदाहरण" है। उन्होंने आरोप लगाया कि यह कदम ईरान के बंदरगाहों से आने-जाने वाले समुद्री यातायात को रोकने का प्रयास है, जिससे न केवल ईरान के संप्रभु अधिकारों में हस्तक्षेप हो रहा है, बल्कि तीसरे देशों और वैध समुद्री व्यापार के अधिकारों का भी उल्लंघन हो रहा है। ईरानी दूत ने चेतावनी दी कि तेहरान अपनी संप्रभुता और राष्ट्रीय हितों की रक्षा के लिए "सभी आवश्यक और उचित कदम" उठाने का अधिकार सुरक्षित रखता है।</p>
<p>ईरान ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद से इस मुद्दे पर तत्काल हस्तक्षेप कर नाकेबंदी की निंदा करने और क्षेत्र में बढ़ते तनाव को रोकने की अपील की है। इस बीच, अमेरिकी नौसेना ने पश्चिम एशिया में अपनी सैन्य मौजूदगी बढ़ा दी है, जिसमें यूएसएस अब्राहम लिंकन सहित कई युद्धपोत और 11 विध्वंसक तैनात हैं। हालांकि, ऑपरेशन में शामिल जहाजों की सटीक जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई है। रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तान में सप्ताहांत में हुई वार्ता विफल रहने के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरानी बंदरगाहों की नाकेबंदी को मंजूरी दी।</p>
<p>इसके अलावा, ईरान ने बहरीन, सऊदी अरब, कतर, संयुक्त अरब अमीरात और जॉर्डन से भी मुआवजे की मांग की है। ईरान का आरोप है कि इन देशों ने अमेरिका-इज़राइल अभियान में भूमिका निभाई और कुछ मामलों में ईरान के भीतर नागरिक ठिकानों पर "अवैध हमलों" में भी शामिल रहे। इरावानी ने पत्र में श्री एंटोनियो गुटेरेस और बहरीन (जो अप्रैल में संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की अध्यक्षता संभाल रहा है) को संबोधित करते हुए कहा कि बहरीन, सऊदी अरब, कतर, संयुक्त अरब अमीरात और जॉर्डन को ईरान को "पूर्ण क्षतिपूर्ति" देनी चाहिए। उन्होंने जोर देकर कहा कि इन देशों को अपने "अंतरराष्ट्रीय रूप से अवैध कृत्यों" के कारण हुए सभी भौतिक और नैतिक नुकसान की भरपाई करनी होगी। ईरान के अनुसार, इन कार्रवाइयों से उसे भौतिक और नैतिक दोनों प्रकार का नुकसान हुआ है, जिसकी भरपाई संबंधित देशों को करनी चाहिए।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 14 Apr 2026 15:34:26 +0530</pubDate>
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