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                <title>ट्रंप का बड़ा दावा: ईरान ने अमेरिकी मांगों पर जताई सहमति, पश्चिम एशिया में युद्ध खत्म होने की ओर</title>
                                    <description><![CDATA[अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि सैन्य संघर्ष समाप्त करने की वार्ता के दौरान ईरान ने अमेरिका की लगभग सभी प्रमुख मांगों पर सहमति जता दी है। जून 2026 में हुए एक अहम समझौते के तहत हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में नौवहन बहाल करने और अमेरिकी नौसैनिक नाकेबंदी हटाने की समय सीमा तय की गई है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/trumps-big-claim-that-iran-agreed-to-american-demands-towards/article-158749"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-07/trump-(2).png" alt=""></a><br /><p>वॉशिंगटन। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि पश्चिम एशिया में युद्ध समाप्त करने को लेकर हुई वार्ता के दौरान ईरान ने अमेरिका के लगभग सभी प्रमुख मुद्दों पर सहमति जतायी थी। ट्रंप ने कहा, "हमने उन्हें सैन्य रूप से पूरी तरह पराजित कर दिया है। उनके पास कुछ मिसाइलें बची हैं, जिन्हें भी हम नष्ट कर सकते हैं। उन्होंने हमारी लगभग सभी प्रमुख मांगों पर सहमति दे दी है।"</p>
<p>रिपोर्ट के अनुसार, 18 जून की रात ईरान और अमेरिका के बीच एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर हुए, जिसमें 28 फरवरी से जारी सैन्य संघर्ष समाप्त करने का प्रावधान किया गया है। समझौते में अमेरिकी नौसैनिक नाकेबंदी हटाने और ईरान द्वारा हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य में नौवहन बहाल करने की समय सीमा भी निर्धारित की गयी है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
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                <pubDate>Fri, 03 Jul 2026 14:30:57 +0530</pubDate>
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                <title>कतर की मध्यस्थता रंग लाई: दोहा में अमेरिका-ईरान की अप्रत्यक्ष बातचीत बढ़ी आगे, जल्द होगी अगली बैठक</title>
                                    <description><![CDATA[कतर ने कहा कि अमेरिका और ईरान के प्रतिनिधिमंडलों के बीच अप्रत्यक्ष वार्ता में समझौता ज्ञापन से जुड़े मुद्दों पर सकारात्मक प्रगति हुई है। दोनों पक्ष निकट भविष्य में वार्ता जारी रखने पर सहमत हुए हैं। अगली बैठक आयतुल्ला अली खामेनेई के अंतिम जनाज़े के बाद आयोजित की जाएगी।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/qatars-mediation-bears-fruit-us-iran-indirect-talks-progress-in-doha/article-158641"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-07/12200-x-600-px)-(4)2.png" alt=""></a><br /><p>दोहा। कतर ने कहा है कि दोहा में अमेरिका और ईरान के प्रतिनिधिमंडलों के बीच हुई अप्रत्यक्ष वार्ता में हाल में हुए समझौता ज्ञापन (एमओयू) से जुड़े मुद्दों पर "सकारात्मक प्रगति" हुई है। कतर के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता माजिद अल-अंसारी ने बुधवार को सोशल मीडिया मंच 'एक्स' पर कहा, "कतर और पाकिस्तान के मध्यस्थों ने दोहा में अमेरिकी और ईरानी वार्ताकारों के साथ अलग-अलग बैठकें कीं। इन बैठकों में इस्लामाबाद समझौता ज्ञापन से जुड़े मुद्दों पर सकारात्मक प्रगति हुई और यह लेक लुसर्न शिखर सम्मेलन के परिणामों को आगे बढ़ाने की दिशा में एक कदम है।"</p>
<p>उन्होंने बताया कि दोनों पक्षों ने निकट भविष्य में वार्ता जारी रखने पर सहमति व्यक्त की है। अगली बैठक ईरान के पूर्व सर्वोच्च नेता आयतुल्ला अली खामेनेई की अंतिम यात्रा और रियासती जनाज़े के बाद यथाशीघ्र आयोजित की जायेगी। उल्लेखनीय है कि अली खामेनेई की 28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल के हमले में मृत्यु हुई थी। उनके जनाज़े की अंतिम यात्रा शुक्रवार से शुरू होगी।</p>]]></content:encoded>
                
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                <pubDate>Thu, 02 Jul 2026 14:14:50 +0530</pubDate>
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                <title>ट्रंप का बड़ा दावा: आज दोहा में होगी अमेरिका-ईरान शांति वार्ता, तेहरान ने तुरंत किया खंडन</title>
                                    <description><![CDATA[अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दोहा में अमेरिका-ईरान वार्ता का दावा किया, लेकिन ईरान ने ऐसी किसी निर्धारित बातचीत से इनकार कर दिया। दोनों देशों के विरोधाभासी बयानों से कूटनीतिक तनाव और अविश्वास उजागर हुआ। इस बीच युद्धविराम, होर्मुज जलडमरूमध्य की सुरक्षा और क्षेत्रीय स्थिरता को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर गतिविधियां तेज हो गई हैं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/trumps-big-claim-that-america-iran-peace-talks-will-be-held/article-158494"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/donald-trump.jpg" alt=""></a><br /><p>दोहा। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि अमेरिका और ईरान के बीच मंगलवार को कतर की राजधानी दोहा में वार्ता होगी, जबकि ईरान ने स्पष्ट किया है कि आने वाले दिनों में वाशिंगटन के साथ किसी भी स्तर की वार्ता निर्धारित नहीं है। ट्रंप ने कहा कि उनके विशेष दूत स्टीव विटकॉफ और पूर्व वरिष्ठ सलाहकार जैरेड कुशनर दोहा जा रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि उच्चस्तरीय बैठकों के साथ-साथ तकनीकी स्तर की वार्ता भी जारी रहेगी।</p>
<p>ट्रंप ने सोमवार को सोशल मीडिया पर दावा किया कि ईरान ने बैठक का अनुरोध किया था और यह बैठक दोहा में होगी, हालांकि उन्होंने इसके बारे में कोई अन्य विवरण नहीं दिया। अमेरिका के दो अधिकारियों ने भी पुष्टि की कि विटकॉफ और कुशनर दोहा जा रहे हैं। उनके अनुसार वाशिंगटन युद्धविराम को व्यापक समझौते में बदलने के उद्देश्य से वार्ता को आगे बढ़ाना चाहता है। व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलिन लेविट ने कहा,"विशेष दूत विटकॉफ और जारेड कुशनर इस सप्ताह उच्चस्तरीय बैठकों के लिए दोहा जाएंगे। इन बैठकों के समानांतर तकनीकी स्तर की वार्ता भी होगी।"</p>
<p>उन्होंने कहा, "हमारी ओर से युद्धविराम का पूरी तरह पालन किया जा रहा है। यदि हिंसा हुई तो उसका जवाब भी उसी प्रकार दिया जाएगा।" अमेरिका और ईरान ने 17 जून को 14 सूत्रीय समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए थे, जिसका उद्देश्य चार महीने से जारी संघर्ष समाप्त करना था। इस समझौते के तहत दोनों पक्षों ने शत्रुता समाप्त करने और होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने पर सहमति व्यक्त की थी, जहां से दुनिया के लगभग पांचवें हिस्से का तेल और तरलीकृत प्राकृतिक गैस का समुद्री परिवहन होता है।</p>
<p>ट्रंप के बयान से संकेत मिलता है कि ईरान की ओर से औपचारिक वार्ता से इनकार किये जाने के बावजूद अमेरिका कूटनीतिक प्रयास जारी रखना चाहता है। ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने किसी भी आसन्न वार्ता की खबरों को खारिज करते हुए कहा कि आने वाले दिनों में अमेरिका के साथ किसी भी स्तर पर बातचीत निर्धारित नहीं है। उन्होंने ईरान में संवाददाताओं से कहा, "अमेरिकी प्रतिनिधियों के कतर जाने का ईरानी प्रतिनिधिमंडल की यात्रा से कोई संबंध नहीं है।"</p>
<p>दोनों पक्षों के विरोधाभासी बयानों से उनके बीच गहरे अविश्वास का संकेत मिलता है। साथ ही हालिया सैन्य टकरावों के बाद 60 दिनों के भीतर व्यापक समझौते तक पहुंचने की संभावना पर भी सवाल खड़े हो गये हैं। बघाई ने कहा कि ईरान और अमेरिका अभी अंतिम समझौते पर बातचीत के चरण में नहीं पहुंचे हैं। उन्होंने कहा कि फिलहाल तेहरान की प्राथमिकता हालिया मध्यस्थता के बाद हुए समझौता ज्ञापन में किए गए वादों को लागू कराना है।</p>
<p>उन्होंने कहा, "समझौता ज्ञापन की धारा 13 के अनुसार अंतिम समझौते पर वार्ता तभी शुरू हो सकती है, जब धारा 1, 4, 5, 10 और 11 का क्रियान्वयन शुरू हो जाए।" बघाई के अनुसार अमेरिका ने धारा 10 के तहत ईरानी तेल की बिक्री से संबंधित लाइसेंस जारी किए हैं, जबकि तेहरान धारा 11 के तहत ईरान की जब्त संपत्तियों को मुक्त कराने की प्रक्रिया आगे बढ़ा रहा है। उन्होंने कहा कि इसी सिलसिले में इस सप्ताह के अंत में ईरान का एक विशेषज्ञ प्रतिनिधिमंडल दोहा जाएगा, लेकिन इसका अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल की यात्रा से कोई संबंध नहीं है।</p>
<p>इस बीच ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने कहा कि यदि अमेरिका अपनी प्रतिबद्धताओं का पालन करेगा तो ईरान भी समझौते का सम्मान करेगा, हालांकि उन्होंने चेतावनी दी कि किसी भी प्रकार की धमकी का ईरान दृढ़ता से जवाब देगा। उन्होंने कहा, "यदि अमेरिका अपनी जिम्मेदारियां निभाता है तो ईरान भी समझौते के प्रति प्रतिबद्ध रहेगा," लेकिन साथ ही स्पष्ट किया कि देश अपने हितों की रक्षा करने में कोई हिचकिचाहट नहीं करेगा।</p>
<p>ईरानी राष्ट्रपति ने यह भी कहा कि कतर में जमी ईरान की लगभग 12 अरब डॉलर की संपत्ति में से आधी राशि तेहरान को वापस मिलेगी। यह मुद्दा वर्तमान कूटनीतिक प्रयासों का महत्वपूर्ण हिस्सा बन गया है। होर्मुज जलडमरूमध्य की सुरक्षा को लेकर जारी अंतरराष्ट्रीय चिंताओं के बीच ईरान ने इस सुझाव को भी खारिज कर दिया कि अन्य देश वहां बारूदी सुरंग हटाने के अभियान में भाग लें। ईरान के उप विदेश मंत्री काजेम ग़रीबाबादी ने कहा कि जलडमरूमध्य में बारूदी सुरंग हटाने का कार्य केवल ईरान करेगा। उन्होंने फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के उस बयान को अस्वीकार किया, जिसमें फ्रांस, ओमान और अन्य देशों की संभावित भूमिका का उल्लेख किया गया था।</p>
<p>ग़रीबाबादी ने सोशल मीडिया मंच 'एक्स' पर लिखा, "समझौता ज्ञापन के अनुसार होर्मुज जलडमरूमध्य में सुरंग हटाने का कार्य केवल ईरान करेगा। किसी अन्य देश को इसकी अनुमति नहीं दी जाएगी।" उन्होंने कहा कि स्थिति अब भी संवेदनशील और जटिल बनी हुई है तथा फ्रांस को भड़काऊ बयान देकर इसे और जटिल नहीं बनाना चाहिए। उधर इजरायल के रक्षा मंत्री इजरायल काट्ज ने कहा कि राष्ट्रपति ट्रंप ने ईरान और लेबनान दोनों से जुड़े युद्धविराम समझौतों को एक-दूसरे से जोड़ने पर जोर दिया, जबकि इजरायल दोनों मामलों को अलग-अलग रखना चाहता था। </p>
<p>काट्ज ने कहा कि अमेरिका ने इजरायल को तब तक लेबनान के कुछ हिस्सों में अपनी सैन्य उपस्थिति बनाए रखने का समर्थन दिया है, जब तक हिजबुल्ला पूरी तरह निरस्त्र नहीं हो जाता। इजरायल और लेबनान के बीच समझौता हो चुका है, फिर भी लेबनान की संसद के अध्यक्ष और हिजबुल्ला के प्रमुख सहयोगी नबीह बेरी ने अमेरिका की मध्यस्थता में हुए समझौते की आलोचना करते हुए कहा कि "इसका क्रियान्वयन नहीं होगा।"</p>]]></content:encoded>
                
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                <pubDate>Tue, 30 Jun 2026 16:12:36 +0530</pubDate>
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                <title>क्या टल गया तीसरे विश्व युद्ध का खतरा? अमेरिका-ईरान ने तनाव घटाने पर जताई सहमति, तकनीकी वार्ता जारी</title>
                                    <description><![CDATA[अमेरिका और ईरान के बीच सैन्य टकराव के बाद फिलहाल दोनों पक्ष पीछे हटने पर सहमत हुए हैं। ट्रंप प्रशासन के अनुसार, होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) से वाणिज्यिक जहाजों का आवागमन जारी रखने के लिए अंतरिम व्यवस्था लागू की गई है। हालांकि, क्षेत्र में सुरक्षा को लेकर अनिश्चितता और तनाव अभी भी बना हुआ है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/has-the-threat-of-third-world-war-been-averted-america-iran/article-158362"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-06/12200-x-600-px)9.png" alt=""></a><br /><p>वॉशिंगटन। अमेरिका और ईरान के बीच हालिया सैन्य हमलों के बाद दोनों पक्षों ने फिलहाल तनाव कम करने पर सहमति जतायी है। ट्रंप प्रशासन के एक वरिष्ठ अधिकारी ने रविवार को कहा कि दोनों पक्ष "फिलहाल पीछे हटेंगे" और होर्मुज जलडमरूमध्य से जहाजों की आवाजाही जारी रहेगी। इस संबंध में ईरान की ओर से अब तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गयी है। रिपोर्ट के अनुसार, अधिकारी ने कहा कि दोनों पक्षों के बीच एक अंतरिम व्यवस्था लागू है और जहाजों की आवाजाही में बाधा नहीं आएगी। </p>
<p>होर्मुज में वास्तविक स्थिति अभी भी सामान्य नहीं दिख रही है, जिससे वाणिज्यिक जहाजों के संचालकों और चालक दल के बीच अनिश्चितता और सुरक्षा संबंधी चिंताएं बनी हुई हैं। उल्लेखनीय है कि ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर (आईआरजीसी) ने दावा किया कि अमेरिका द्वारा ईरानी ठिकानों पर हमले किये जाने के बाद उसने कुवैत और बहरीन सहित पड़ोसी देशों में स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया। इससे पहले होर्मुज में आवाजाही के कारण अमेरिका-ईरान के बीच हमलों का आदान-प्रदान हुआ था।</p>
<p>एक वरिष्ठ अमेरिकी अधिकारी ने कहा कि ईरान के साथ तकनीकी स्तर की वार्ता निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार जारी है। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पहले चेतावनी दे चुके हैं कि यदि ईरान की ओर से हमले जारी रहे तो अमेरिका और सैन्य कार्रवाई करेगा। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने रविवार को कहा कि क्षेत्र के देशों को अपनी भूमि अथवा सुविधाओं का इस्तेमाल ईरान के खिलाफ हमलों के लिए नहीं होने देना चाहिये।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
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                <pubDate>Mon, 29 Jun 2026 13:04:28 +0530</pubDate>
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                <title>अमेरिकी विशेष दूत ईरान के साथ बातचीत के लिए स्विट्जरलैंड रवाना, संभावित परमाणु समझौते पर होगी बातचीत!</title>
                                    <description><![CDATA[अमेरिका-ईरान परमाणु समझौते की दिशा में कूटनीतिक हलचल तेज हो गई है। अमेरिकी विशेष दूत स्टीव विटकॉफ संभावित वार्ता के लिए स्विट्जरलैंड पहुंच रहे हैं, जहां दोनों देशों के बीच बातचीत का पहला दौर हो सकता है। हाल ही में हस्ताक्षरित एमओयू ने सैन्य तनाव खत्म करने की राह खोली है। 60 दिनों में परमाणु मुद्दे, प्रतिबंधों और समुद्री आवाजाही पर अंतिम समझौते की कोशिश होगी।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/us-special-envoy-leaves-for-switzerland-for-talks-with-iran/article-157587"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-06/6622-copy40.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal"><span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">वाशिंगटन। अमेरिका के विशेष दूत स्टीव विटकॉफ ईरान के साथ संभावित परमाणु समझौते पर बातचीत के लिए स्विट्जरलैंड रवाना हो गये हैं। ऐसी उम्मीद जतायी जा रही है कि अमेरिका और ईरान के बीच इस बातचीत का पहला दौर वहीं आयोजित होगा। एक अज्ञात अमेरिकी अधिकारी के हवाले से रिपोर्ट में यह जानकारी दी है। अधिकारी ने बताया कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दामाद जेरेड कुशनर पहले से ही स्विट्जरलैंड में मौजूद हैं। </span></p>
<p class="MsoNormal"><span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">रिपोर्ट में कहा गया है कि अभी यह साफ नहीं है कि बातचीत के लिए कोई नया समय तय किया गया है या नहीं। बातचीत शुक्रवार को शुरू होने वाली थी, लेकिन लेबनान में इजरायल और लेबनान के शिया संगठन हिज्बुल्लाह के बीच लड़ाई के कारण इसे टाल दिया गया था। रिपोर्ट में कहा गया है कि अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व उपराष्ट्रपति जेडी वेंस करने वाले थे और यह साफ नहीं है कि वह इस सप्ताह के अंत तक वहां जाएंगे या नहीं। </span></p>
<p class="MsoNormal"><span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">गौरतलब है कि 14 जून को ईरान और अमेरिका ने पुष्टि की थी कि एक समझौता ज्ञापन (एमओयू ) पर काम पूरा हो गया है।<span>  </span>दोनों देशों ने 18 जून की रात को उस दस्तावेज पर हस्ताक्षर किए, जिसमें 28 फरवरी को शुरू हुए सैन्य संघर्ष को समाप्त करने का प्रावधान है। इस समझौते के साथ दोनों पक्षों के बीच कई महीनों से चल रहे संघर्ष को समाप्त करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है।</span></p>
<p class="MsoNormal"><span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">यह समझौता ज्ञापन दोनों देशों को ईरानी परमाणु मुद्दे और अमेरिकी प्रतिबंधों पर अंतिम समझौते के लिए बातचीत करने के लिए 60 दिन का समय देता है। इसके अलावा, यह अमेरिका के लिए अपनी नौसैनिक नाकेबंदी हटाने और ईरान के लिए होर्मुज जलडमरूमध्य से वाणिज्यिक जहाजों की आवाजाही बहाल करने की एक निर्धारित समय-सीमा तय की गयी है।</span></p>
<p class="MsoNormal"><span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';"> </span></p>
<p class="MsoNormal"><span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';"> </span></p>
<p class="MsoNormal"><span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';"> </span></p>
<p class="MsoNormal"> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
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                <pubDate>Sat, 20 Jun 2026 15:20:30 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>ट्रंप का दावा: खाड़ी देशों की अपील के बाद ईरान पर हमला रूका, बहुत जल्द होगा समझौता</title>
                                    <description><![CDATA[अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सऊदी अरब, कतर और यूएई के अनुरोध पर ईरान पर मंगलवार को होने वाले सैन्य हमले को टाल दिया है। ट्रंप ने कहा कि खाड़ी देशों को उम्मीद है कि गंभीर बातचीत के जरिए जल्द ही एक ऐसा समझौता हो जाएगा जो अमेरिका को पूरी तरह स्वीकार्य होगा।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/trump-claims-attack-on-iran-stopped-after-appeal-from-gulf/article-154316"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/donald-trump.jpg" alt=""></a><br /><p>वॉशिंगटन। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि खाड़ी देशों के अपील के बाद ईरान पर हमला रोक दिया गया है और उम्मीद जतायी है कि यह घोषणा अंततः स्थायी हो जाएगी। ट्रंप ने सोमवार को कहा कि कतर, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) के अनुरोध के बाद उन्होंने मंगलवार के लिए निर्धारित ईरान पर सैन्य हमला रद्द कर दिया था। उन्होंने बताया कि यह अनुरोध चल रही "गंभीर बातचीत" के कारण किया गया था, जिसके बारे में पश्चिम एशिया के नेताओं का मानना है कि इसका परिणाम एक ऐसे समझौते के रूप में निकल सकता है जो अमेरिका को स्वीकार्य हो।</p>
<p>उन्होंने पत्रकारों से कहा, "मैंने इसे थोड़े समय के लिए टाल दिया है-उम्मीद है कि शायद हमेशा के लिए, लेकिन संभवतः थोड़े समय के लिए- क्योंकि हमारी ईरान के साथ बहुत बड़ी चर्चाएँ हुई हैं।" ट्रंप ने यह भी दावा किया कि ईरान के साथ एक समझौता होने ही वाला है। उनके अनुसार, पश्चिम एशिया के देश जिन्होंने उनसे ईरान पर हमले टालने का अनुरोध किया था-भी मानते हैं कि यह समझौता बहुत जल्द होने वाला है।</p>
<p>अमरीकी राष्ट्रपति ने कहा, "सऊदी अरब, कतर, यूएई और कुछ अन्य देशों ने मुझसे पूछा कि क्या हम इसे दो या तीन दिनों के लिए - यानी थोड़े समय के लिए टाल सकते हैं, क्योंकि उन्हें लगता है कि वे किसी समझौते तक पहुँचने के बहुत करीब हैं।" उल्लेखनीय है कि गत 28 फरवरी को अमेरिका और इज़रायल ने ईरान में कुछ ठिकानों पर हमले किए थे, जिससे काफी जान माल का नुकसान हुआ था। सात अप्रैल को अमेरिका और ईरान ने दो सप्ताह के युद्धविराम की घोषणा की थी। इसके बाद इस्लामाबाद में हुई बातचीत का कोई नतीजा नहीं निकला, और ट्रंप ने ईरान को एक "एकजुट प्रस्ताव" तैयार करने का समय देने के लिए संघर्ष समाप्त करने की अवधि बढ़ा दी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 19 May 2026 18:38:00 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>डोनाल्ड ट्रंप का चीन दौरा: शी जिनपिंग से होगी खास मुलाकात; व्यापार, ईरान और ताइवान मुद्दों पर चर्चा संभव</title>
                                    <description><![CDATA[राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग से मिलने बीजिंग पहुंच चुके हैं। इस शिखर सम्मेलन में ईरान युद्ध, होर्मुज जलडमरूमध्य की नाकेबंदी और ताइवान जैसे गंभीर मुद्दों पर चर्चा होगी। वैश्विक तेल संकट और आर्थिक मंदी के खतरों के बीच दुनिया की नजरें इन दोनों दिग्गजों के बीच होने वाले रणनीतिक समझौतों पर टिकी हैं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/donald-trump-visits-china-special-meeting-with-xi-jinping-possible/article-153555"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-05/1111200-x-600-px)-(5)17.png" alt=""></a><br /><p>वॉशिंगटन। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग से मुलाकात के लिए बीजिंग रवाना हो गए हैं, जहां दोनों वैश्विक नेता व्यापार, युद्ध कूटनीति और ताइवान पर गंभीर चर्चा करेंगे। ट्रंप का 2017 के बाद यह पूर्वी एशियाई देश का पहला दौरा है। इस दौरान दशकों में सबसे अहम अमेरिका-चीन सम्मेलन होने की संभावना है। गुरुवार से शुरू होने वाला दो दिनों का यह सम्मेलन दुनिया की दो बड़ी ताकतों के बीच संबंधों को नया आकार दे सकता है। है। ट्रंप 14 मई को ग्रेट हॉल ऑफ द पीपल में चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग से मिलेंगे, जहां दोनों औपचारिक द्विपक्षीय बातचीत करेंगे और उसके बाद शाम को एक राजकीय दावत का आयोजन किया जाएगा। ट्रंप की 15 मई को वाशिंगटन लौटने से पहले दोपहर के भोजन कार्यक्रम और 'ऐतिहासिक स्वर्ग का मंदिर' जाने की भी योजना है।</p>
<p>जब फरवरी में व्हाइट हाउस ने इस दौरे की पुष्टि की, तो चीनी सामान पर वाशिंगटन के आसमान छूते शुल्क एजेंडे पर छाए हुए थे। लेकिन 28 फरवरी के बाद दुनिया के राजनीतिक हालात बदल गए जब ट्रंप ने इजराइल के साथ मिलकर ईरान पर हमला किया, जिससे एक युद्ध शुरू हो गया और जिसके कारण ईरान को होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद करना पड़ा और इस स्थिति ने तेहरान को इस रणनीतिक जलमार्ग को नियंत्रित करने के लिए एक बोर्ड बनाने पर मजबूर कर दिया। गौरतलब है कि अमेरिका और ईरान एक तनावपूर्ण परमाणु गतिरोध में फंसे हुए हैं क्योंकि वाशिंगटन का तर्क है कि परमाणु मुद्दे पर कोई बातचीत नहीं हो सकती और तेहरान प्रतिबंधों में राहत, युद्ध खत्म करने, जब्त की गई संपत्ति को छोड़ने और अमेरिकी नौसैनिक नाकाबंदी को रोकने की मांग कर रहा है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के जवाबी प्रस्ताव को 'पूरी तरह से नामंजूर' कर दिया है क्योंकि दोनों पक्ष किसी भी संभावित समझौते के लिए जरूरी शर्तों से बहुत दूर हैं।</p>
<p>इसलिए दोनों नेताओं को होर्मुज जलडमरूमध्य के आसपास के तनाव पर चर्चा करनी अनिवार्य है। चीन अपना लगभग आधा कच्चा तेल जलमार्ग से आयात करता है। उसने बड़े स्टॉक और अलग-अलग तरह के ऊर्जा मिश्रण से खुद को सुरक्षित रखा है लेकिन इसका आर्थिक असर बहुत बड़ा है। तेल की कीमतों में उछाल ने पेट्रोकेमिकल पर निर्भर निर्माताओं के लिए लागत 20 प्रतिशत तक बढ़ा दी है। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) ने चेतावनी दी है कि वैश्विक मंदी की संभावना बनी हुई है क्योंकि चीन के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) का लगभग पांचवां हिस्सा निर्यात पर निर्भर करता है, इसलिए दुनिया जो आर्थिक रूप से इतनी परेशान है कि चीनी सामान नहीं खरीद सकती, उसके लिए अकेले आयात शुल्क युद्ध से भी बड़ा खतरा है।</p>
<p>बैठक में ताइवान का मुद्दा भी मुख्य रहेगा क्योंकि ट्रंप प्रशासन ने पिछले दिसंबर में ताइपे को 11 बिलियन डॉलर के हथियारों की बिक्री को मंजूरी दी थी, जिससे चीन नाराज हो गया था। फिर भी ट्रंप ने सार्वजनिक रूप से यह भी सवाल उठाया है कि क्या अमेरिका ताइवान की रक्षा करने के लिए बाध्य है और कहा है कि अमेरिका को उसकी सुरक्षा गारंटी के लिए पैसे देना काफी नहीं है। इस सप्ताह किसी बडे व्यापारिक समझौते की उम्मीदें कम हैं लेकिन अधिक उम्मीद अक्टूबर के संघर्ष विराम को बढ़ाने की है। इसके साथ ही एक संयुक्त बयान भी जारी किया जाएगा। दुनिया इस सम्मेलन को बड़ी दिलचस्पी से देख रही है और उम्मीद कर रही है कि यह सम्मेलन सफल हो।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 12 May 2026 16:43:53 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>ट्रंप के सहयोगियों के हवाले से खबर, पश्चिमी एशिया में सैन्य कार्रवाई फिर शुरू करने पर विचार कर रहे राष्ट्रपति</title>
                                    <description><![CDATA[ईरान के अड़ियल रुख और होर्मुज जलडमरूमध्य की नाकेबंदी से राष्ट्रपति ट्रंप का धैर्य जवाब दे गया है। कूटनीति विफल होने पर अमेरिका अब लक्षित बमबारी और बड़े सैन्य अभियान पर विचार कर रहा है। ट्रंप की चीन यात्रा से पहले पश्चिमी एशिया में तनाव चरम पर है, जिससे क्षेत्र में युद्ध के बादल फिर मंडराने लगे हैं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/news-quoting-trumps-aides-president-considering-resuming-military-action-in/article-153541"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/trump.png" alt=""></a><br /><p>वॉशिंगटन। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प पश्चिमी एशिया में फिर से सैन्य कार्रवाई शुरू करने पर गंभीरता से विचार कर रहे हैं। ट्रम्प के सहयोगियों के हवाले से यह जानकारी दी। ट्रम्प ने कहा कि संघर्ष को सुलझाने के लिए हो रही बातचीत में ईरान के रुख से लगातार निराशा हाथ लगी है और अब वह बड़े पैमाने पर सैन्य अभियान फिर से शुरू करने पर गंभीरता से विचार कर रहे हैं। सूत्रों ने बताया कि होर्मुज जलडमरूमध्य के बंद रहने से अमेरिकी राष्ट्रपति का धैर्य जवाब दे रहा है और उनका यह भी मानना है कि ईरानी नेतृत्व के भीतर मतभेद हैं।</p>
<p>सूत्रों के अनुसार, अमेरिकी प्रशासन के भीतर अब कई समूह बन गए हैं, जिनमें से कुछ बल प्रयोग के पक्ष में हैं और ईरान की स्थिति को कमजोर करने के लिए उस पर लक्षित बमबारी जारी रखने का प्रस्ताव दे रहे हैं, जबकि अन्य समूह संघर्ष को सुलझाने के लिए कूटनीतिक साधनों पर जोर दे रहे हैं।</p>
<p>अमेरिका-ईरान वार्ता में मध्यस्थ के रूप में पाकिस्तान की भूमिका अमेरिका के लिए एक अलग मुद्दा बनी हुई है। अमेरिकी सरकार को यह स्पष्ट नहीं है कि पाकिस्तान कितनी स्पष्टता से अमेरिका का पक्ष ईरान तक पहुँचा रहा है और वह ईरान के दृष्टिकोण को कितनी निष्पक्षता से बता रहा है। पश्चिमी एशिया संघर्ष में अमेरिका क्या रुख अपनाएगा, यह अभी स्पष्ट नहीं है और राष्ट्रपति ट्रम्प की 13 से 15 मई तक प्रस्तावित चीन यात्रा से पहले किसी फैसले की संभावना कम है।</p>
<p>गौरतलब है कि 28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल ने ईरान में ठिकानों पर हमले शुरू किए थे, जिसमें 3,000 से अधिक लोग मारे गए थे। अमेरिका और ईरान ने सात अप्रैल को युद्धविराम की घोषणा की थी। इसके बाद इस्लामाबाद में हुई वार्ता बिना किसी नतीजे के समाप्त हो गई और अमेरिका ने ईरानी बंदरगाहों की नाकेबंदी शुरू कर दी थी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
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                <pubDate>Tue, 12 May 2026 15:28:18 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>क्या फिर होने वाली हैं जंग? अमेरिका-ईरान संघर्ष के बीच यूएई ने किए ईरान पर हवाई हमले, ट्रंप ने ठुकराया ईरान का शांति प्रस्ताव</title>
                                    <description><![CDATA[एक हालिया रिपोर्ट के अनुसार, संयुक्त अरब अमीरात (UAE) की वायु सेना ने अप्रैल में ईरान के लावान द्वीप पर स्थित तेल रिफाइनरी पर हमले किए थे। यह कार्रवाई अमेरिकी संघर्ष विराम के दौरान हुई। हालांकि यूएई ने चुप्पी साधी है, लेकिन उसने सैन्य बल के इस्तेमाल का अधिकार सुरक्षित रखा है, जिससे क्षेत्रीय तनाव बढ़ गया है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/is-war-going-to-happen-again-amid-us-iran-conflict-uae/article-153522"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-05/iran1.png" alt=""></a><br /><p>वॉशिंगटन। ईरान और अमेरिका-इजराइल के बीच जारी युद्ध के सक्रिय चरण के अंत तक संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) ने ईरान पर हवाई हमले किए थे। यह दावा सोमवार को एक रिपोर्ट में किया गया। रिपोर्ट के अनुसार, यूएई की वायु सेना ने अप्रैल की शुरुआत में हवाई हमलों की एक श्रृंखला को अंजाम दिया। यह ठीक उसी समय हुआ जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ संघर्ष विराम की घोषणा की थी। इन हमलों का निशाना फारस की खाड़ी में स्थित लावान द्वीप पर मौजूद एक रिफाइनरी थी।</p>
<p>उस समय, हालांकि न तो ईरान ने इन हवाई हमलों के पीछे किसका हाथ था, इसका खुलासा किया और न ही यूएई ने इसकी जिम्मेदारी ली लेकिन राष्ट्रीय ईरानी तेल शोधन और वितरण कंपनी ने आठ अप्रैल को कहा कि द्वीप पर मौजूद तेल रिफाइनिंग सुविधाओं पर "दुश्मन" द्वारा हमला हुआ था। रिपोर्ट में बताया गया है कि खाड़ी देश के विदेश मंत्रालय ने इन कथित हमलों पर टिप्पणी करने से इनकार कर दिया। मंत्रालय ने केवल इतना याद दिलाया कि यूएई के पास किसी भी शत्रुतापूर्ण कार्रवाई का जवाब देने का अधिकार सुरक्षित है, जिसमें सैन्य बल का उपयोग भी शामिल है।</p>
<p>अमेरिकी रक्षा विभाग ने भी इस पर टिप्पणी करने से मना कर दिया, जबकि व्हाइट हाउस ने कहा कि ट्रंप के पास सभी विकल्प खुले हुए हैं। उल्लेखनीय है कि गत 28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल ने ईरान के भीतर स्थित ठिकानों पर हमले किए, जिससे काफी जान माल का नुकसान हुआ। सात अप्रैल को अमेरिका और ईरान ने दो सप्ताह के संघर्ष विराम की घोषणा की। इसके बाद इस्लामाबाद में हुई बातचीत का कोई नतीजा नहीं निकला और अमेरिका ने ईरानी बंदरगाहों की नाकेबंदी शुरू कर दी। बाद में, राष्ट्रपति ट्रंप ने संघर्ष विराम की अवधि को और बढ़ा दिया, ताकि ईरान को शांति प्रस्ताव लाने के लिए पर्याप्त समय मिल सके। यह नाकेबंदी अभी भी जारी है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 12 May 2026 14:02:08 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>अगर होर्मुज में गतिरोध लगातार जारी रहा, तो वैश्विक तेल बाजार में संकट 2027 तक जारी रहेगा: अमीन नासिर</title>
                                    <description><![CDATA[अरामको के सीईओ अमीन नासिर ने चेतावनी दी है कि यदि होर्मुज जलडमरूमध्य एक महीने में नहीं खुला, तो तेल बाजार 2027 तक सामान्य नहीं होगा। दुनिया पहले ही 1 अरब बैरल तेल खो चुकी है। अमेरिका-ईरान तनाव के बीच यह मार्ग बंद होने से वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा पर गंभीर खतरा मंडरा रहा है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/if-the-standoff-in-hormuz-continues-the-crisis-in-the/article-153501"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-05/अमीन-नासिर.png" alt=""></a><br /><p>दोहा। सऊदी अरब की कंपनी अरामको के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) अमीन नासिर ने कहा है कि यदि एक महीने के भीतर होर्मुज जलडमरुमध्य में जहाजों की आवाजाही फिर से शुरू नहीं होती, तो अगले साल तक वैश्विक तेल बाजार सामान्य स्थिति में नहीं लौटेगी। अरामको के पहली तिमाही के परिणामों पर चर्चा करने के लिए आयोजित एक वीडियो कॉन्फ्रेंस के दौरान श्री नासिर ने कहा कि आपूर्ति में व्यवधान जितने लंबे समय तक जारी रहेगा, तेल बाजार को स्थिर होने में उतना ही अधिक समय लगेगा। उन्होंने कहा कि यदि जलडमरुमध्य में गतिरोध जून के मध्य तक बना रहता है, तो यह संकट 2027 तक जारी रह सकता है।</p>
<p>दुनिया की सबसे बड़ी ऊर्जा कंपनी के प्रमुख के अनुसार, उत्पादन या परिवहन की कमी के कारण बाजार पहले ही एक अरब बैरल तेल गंवा चुका है और जब तक यह मार्ग बंद रहेगा, बाजार को हर हफ्ते लगभग 10 करोड़ बैरल तेल का नुकसान होता रहेगा। उन्होंने याद दिलाया कि पहले होर्मुज से प्रतिदिन लगभग 70 जहाज गुजरते थे। फारस की खाड़ी में तेल उत्पादक देशों पर हमलों और ईरान द्वारा होर्मुज को प्रभावी ढंग से बंद करने से उत्पादन और निर्यात पर नकारात्मक प्रभाव पड़ा है। 28 फरवरी को संघर्ष शुरू होने से पहले, इस जलमार्ग के माध्यम से प्रतिदिन लगभग दो करोड बैरल तेल बाजार में आता था।</p>
<p>गौरतलब है कि सात अप्रैल को अमेरिका और ईरान ने दो सप्ताह के युद्धविराम की घोषणा की थी। इसके बाद इस्लामाबाद में हुई वार्ता बेनतीजा रही थी, लेकिन फिर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को एक 'एकीकृत प्रस्ताव' के साथ आने का समय देने के लिए युद्धविराम को आगे बढ़ा दिया था। तीन मई को ट्रंप ने होर्मुज में फंसे जहाजों की सहायता के लिए 'प्रोजेक्ट फ्रीडम' की घोषणा की थी। फिर ट्रंप ने पांच मई को कहा कि उन्होंने यह देखने के लिए थोड़े समय के लिए ऑपरेशन को रोकने का फैसला किया है कि क्या ईरान के साथ शांति समझौता हो सकता है। हालांकि सोमवार को उन्होंने अमेरिकी शांति प्रस्तावों पर ईरान की प्रतिक्रिया को पूरी तरह से 'अस्वीकार्य' बताया।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 12 May 2026 11:55:30 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>ईरान के साथ युद्ध तब तक खत्म नहीं होगा जब तक परमाणु मुद्दों का समाधान नहीं हो जाता : पीएम नेतन्याहू</title>
                                    <description><![CDATA[इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने स्पष्ट किया है कि ईरान के साथ युद्ध तब तक समाप्त नहीं होगा, जब तक उसके परमाणु केंद्रों को नष्ट और यूरेनियम भंडार को बाहर नहीं किया जाता। उन्होंने कूटनीति विफल होने पर सैन्य विकल्प के संकेत दिए हैं। ट्रंप द्वारा ईरानी प्रस्ताव ठुकराने के बाद क्षेत्रीय तनाव चरम पर है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/war-with-iran-will-not-end-until-nuclear-issues-are/article-153456"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-05/benjamin-netanyahu.png" alt=""></a><br /><p>तेल अवीव। इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने दोहराया है कि ईरान के साथ युद्ध तब तक 'खत्म नहीं होगा', जब तक कि प्रमुख रणनीतिक मुद्दों का समाधान नहीं हो जाता जिनमें ईरान के संवर्धित यूरेनियम के भंडार को हटाना, परमाणु केंद्रों को नष्ट करना और ईरान के क्षेत्रीय प्रभाव पर अंकुश लगाना शामिल है। मीडिया से रूबरू होते हुए नेतन्याहू ने कहा, "यह अभी खत्म नहीं हुआ है, क्योंकि अब भी वहां परमाणु सामग्री और संवर्धित यूरेनियम मौजूद है। इसे ईरान से बाहर निकालना होगा। अब भी वहां संवर्धन केंद्र हैं, जिन्हें नष्ट करना बाकी है।" उन्होंने कहा कि ईरान क्षेत्रीय प्रॉक्सी समूहों का समर्थन करना जारी रख रहा है और अपनी बैलिस्टिक मिसाइल क्षमताओं को बढ़ा रहा है।</p>
<p>अमेरिका-इजरायल के ईरान पर किये गये हमलों के बाद हुई प्रगति को स्वीकार करते हुए नेतन्याहू ने इस बात पर जोर दिया कि अब भी बड़ी चुनौतियां बनी हुई हैं, विशेष रूप से ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर। उन्होंने सुझाव दिया कि किसी भी व्यावहारिक व्यवस्था के तहत संवर्धित यूरेनियम को वहां से से हटाना होगा। उन्होंने कहा, "अगर आपके पास कोई समझौता है और आप अंदर जाकर उसे बाहर निकाल लेते हैं, तो क्यों नहीं? यही सबसे अच्छा तरीका है।"</p>
<p>पीएम नेतन्याहू इस बात से सहमत हैं कि समझौता होना चाहिए, लेकिन परमाणु मुद्दा समझौता-योग्य नहीं है । उनकी यह टिप्पणी ऐसे समय में आयी है, जब अमेरिका का रुख है कि किसी भी व्यापक शांति ढांचे के तहत ईरान को यूरेनियम संवर्धन पूरी तरह से रोकना होगा। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में शांति प्रस्ताव पर ईरान की नवीनतम प्रतिक्रिया को 'पूरी तरह से अस्वीकार्य' बताया था। वहीं ईरान ने संवर्धन को पूरी तरह से रोकने की मांगों को खारिज कर दिया है। खबरों के अनुसार, ईरानी अधिकारियों ने अत्यधिक संवर्धित यूरेनियम के भंडार को कम करने और अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था के तहत कुछ सामग्री को किसी तीसरे देश में स्थानांतरित करने का सुझाव दिया है।</p>
<p>पीएम नेतन्याहू ने एक संभावित दृष्टिकोण की रूपरेखा भी पेश की है। इसमें कूटनीति अगर विफल रहती है तो संवर्धित यूरेनियम को भौतिक रूप से हटाया जा सकता है, लेकिन उन्होंने 'सैन्य विकल्पों' का खुलासा करने से इनकार कर दिया। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, ईरान ने सीमित अवधि के लिए संवर्धन स्थगित करने की इच्छा जतायी है, हालांकि यह अमेरिका के प्रस्तावित 20 साल के प्रतिबंध की तुलना में कम अवधि के लिए है। साथ ही ईरान ने अपने परमाणु बुनियादी ढांचे को नष्ट करने की बात को खारिज कर दिया है। खबर है कि दोनों पक्षों के बीच मध्यस्थों के जरिये बातचीत जारी है, लेकिन यूरेनियम संवर्धन और सत्यापन तंत्र पर गहरे मतभेदों के बीच एक व्यापक समझौता फिलहाल दूर नजर आ रहा है।</p>
<p>ईरानी नेताओं का कहना है कि उनके प्रस्ताव जायज हैं और उनका उद्देश्य एक संतुलित समझौता सुनिश्चित करना है। पीएम नेतन्याहू की ये टिप्पणियां इस सप्ताह के अंत में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की संभावित चीन यात्रा से पहले आयी हैं, जहां उनके चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग से मिलने की उम्मीद है। युद्ध और उसके बाद ईरान के होर्मुज जलडमरूमध्य बंद किये जाने से वैश्विक ऊर्जा लागत में उछाल आया है और अमेरिका में गैस की कीमतों में भारी वृद्धि हुई है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 11 May 2026 18:44:44 +0530</pubDate>
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                <title>'अवास्तविक मांगों' पर अड़े इजरायल की सोच से प्रभावित अमेरिका: बघाई ने कहा- क्या पूरे क्षेत्र में शांति और सुरक्षा स्थापित करना गैर-जिम्मेदाराना  </title>
                                    <description><![CDATA[ईरान ने अपने शांति प्रस्ताव को "तार्किक" बताते हुए अमेरिकी रुख की आलोचना की है। विदेश मंत्रालय ने कहा कि वे केवल संपत्ति की मुक्ति और समुद्री सुरक्षा जैसे वैध अधिकार मांग रहे हैं। राष्ट्रपति ट्रंप द्वारा प्रस्ताव को "अस्वीकार्य" बताने के बाद ईरान ने आरोप लगाया कि अमेरिका अब भी इजरायली दबाव में काम कर रहा है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/america-is-adamant-on-unrealistic-demands-impressed-by-israels-thinking/article-153426"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/hormuz.png" alt=""></a><br /><p>तेहरान। पश्चिम एशिया में युद्ध समाप्त करने के लिए  ईरान ने कहा है कि उसका प्रस्ताव "उदार और तार्किक" था, जबकि अमेरिका अब भी इजरायल की सोच से प्रभावित "अवास्तविक मांगों" पर अड़ा हुआ है। ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने सोमवार को अपने साप्ताहिक संवाददाता सम्मेलन में कहा कि ईरान की ओर से अमेरिकी प्रस्ताव के जवाब में जो योजना भेजी गयी, वह "हद से ज्यादा" नहीं थी और उसका उद्देश्य पूरे क्षेत्र में शांति एवं स्थिरता स्थापित करना था।</p>
<p>उन्होंने कहा, "हमने किसी प्रकार की रियायत की मांग नहीं की। हमने केवल ईरान के वैध अधिकारों की बात की है।" बघाई ने सवाल किया कि क्या क्षेत्र में युद्ध समाप्त करने, ईरानी जहाजों के खिलाफ "समुद्री डकैती" रोकने तथा वर्षों से अवरुद्ध ईरानी संपत्तियों को मुक्त करने की मांग अनुचित कही जा सकती है। उन्होंने कहा, "क्या होर्मुज जलडमरूमध्य से सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करने का हमारा प्रस्ताव अवास्तविक है? क्या पूरे क्षेत्र में शांति और सुरक्षा स्थापित करना गैर-जिम्मेदाराना है?"</p>
<p>इससे पूर्व, अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि उन्होंने ईरान के प्रतिनिधियों का जवाब पढ़ा और उसे "पूरी तरह अस्वीकार्य" पाया। राष्ट्रपति ट्रंप ने समाचार पोर्टल एक्सियोस को दिए साक्षात्कार में कहा था कि उन्होंने ईरान के जवाब पर बेंजमिन नेतन्याहू से भी चर्चा की है। ईरान ने रविवार को अमेरिकी प्रस्ताव के जवाब में अपना औपचारिक प्रस्ताव भेजा था। ईरान पहले भी स्पष्ट कर चुका है कि मौजूदा चरण में वार्ता का केंद्र केवल क्षेत्रीय युद्ध समाप्त करना होगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 11 May 2026 15:48:50 +0530</pubDate>
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