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                <title>drugs - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <description>drugs RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>एएनटीएफ का बालेसर में ड्रग्स हब पर धावा : तस्करों से मुठभेड़ के बीच 90 करोड़ की एमडी जब्त, सरगना सहित गिरोह के 6 बदमाशों को दबोचा</title>
                                    <description><![CDATA[पुलिस ने बालेसर के खेत में चल रही हाईटेक एमडी ड्रग्स फैक्ट्री का भंडाफोड़ किया। दबिश के दौरान तस्करों ने फायरिंग की, जवाबी कार्रवाई में मुठभेड़ जैसे हालात बने। मुख्य सरगना समेत 6 गिरफ्तार हुए। करीब 176 किलो एमडी बरामद, कीमत 90 करोड़ आंकी गई। फैक्ट्री अंतरराज्यीय नेटवर्क से जुड़ी थी।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/antf-raids-drugs-hub-in-balesar-md-worth-rs-90/article-151787"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/111200-x-600-px)-(6)13.png" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal"><span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">जयपुर। राजस्थान में नशे के नेटवर्र्क पर अब तक का सबसे बड़ा प्रहार करते हुए पुलिस और एएनटीएफ<span>  </span>ने बालेसर के एक खेत में चल रही हाईटेक एमडी ड्रग्स फैक्ट्री का भंडाफोड़ कर मुख्य सरगना समेत हापूराम बाना, नरेश (केमिस्ट), बुधराम, नरेंद्र, श्रवण निवासी बाड़मेर और अजाराम निवासी बालेसर को गिरफ्तार किया है। देर रात इस कार्रवाई में तस्करों ने फायरिंग की, जवाब में पुलिस ने मोर्चा संभाला और मुठभेड़ जैसे हालात के बीच पूरे गिरोह को दबोच लिया।</span></p>
<p class="MsoNormal"><strong><span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">ऐसे हुई कार्रवाई</span></strong></p>
<p class="MsoNormal"><span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">एएनटीएफ आईजी विकास कुमार ने बताया कि बालेसर क्षेत्र के लूणावपुरा गांव में शनिवार देर रात पुलिस और एएनटीएफ टीम ने एक आॅपरेशन को अंजाम दिया। खेत के बीच बने एक मकान में अत्याधुनिक तकनीक से एमडी ड्रग्स तैयार की जा रही थी। जैसे ही टीम ने तड़के करीब 3.30 बजे दबिश दी, अंदर मौजूद तस्करों ने पुलिस पर फायरिंग शुरू कर दी। जवाबी कार्रवाई में पुलिस ने भी गोली चलाई। कार्रवाई के दौरान हापूराम बाना और एक अन्य बदमाश भागने के प्रयास में घायल होकर गिर पड़ा। टीम ने घेराबंदी कर किसी को भागने का मौका नहीं दिया। छापेमारी में करीब 176.62 किलोग्राम एमडी ड्रग्स बरामद हुई। इसकी अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमत करीब 90 करोड़ रुपए आंकी गई है। टीम ट्रैक्टर-ट्रॉली के जरिए खेत तक पहुंची ताकि किसी को भनक न लगे।<span>  </span></span></p>
<p class="MsoNormal"><strong><span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">मांग बढ़ी तो बनाई एमडी</span></strong></p>
<p class="MsoNormal"><span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">पूछताछ में आरोपियों ने स्वीकार किया कि एएनटीएफ<span>  </span>की सख्ती के चलते बाजार में एमडी ड्रग्स की सप्लाई कम हो गई थी, जिससे मांग बढ़ गई। इसको पूरा करने के लिए एक साथ बड़े स्तर पर उत्पादन किया जा रहा था। यह फैक्ट्री लंबे समय से गुप्त रूप से चल रही थी और इसके तार अंतरराज्यीय नेटवर्क से जुड़े हो सकते हैं। </span></p>
<p class="MsoNormal"><strong><span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">कैसे रची गई साइलेंट स्ट्राइक</span></strong></p>
<ul>
<li class="MsoNormal"><span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';"><span>            </span>गुप्त सूचना पर कई घंटों तक निगरानी</span></li>
<li class="MsoNormal"><span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';"><span>            </span>ट्रैक्टर-ट्रॉली से टीम की एंट्री</span></li>
<li class="MsoNormal"><span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';"><span>            </span>तड़के 3.30 बजे एक साथ दबिश</span></li>
<li class="MsoNormal"><span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';"><span>            </span>फायरिंग के बीच जवाबी कार्रवाई</span></li>
<li class="MsoNormal"><span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';"><span>            </span>चारों ओर से इलाके की घेराबंदी</span></li>
<li class="MsoNormal"><span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';"><span>            </span>ड्रग्स फैक्ट्री का पूरा खेल</span></li>
<li class="MsoNormal"><span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';"><span>            </span>खेत के मकान में छिपाकर बनाया गया सेटअप</span></li>
<li class="MsoNormal"><span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';"><span>            </span>आधुनिक उपकरणों से तैयार हो रही थी एमडी</span></li>
<li class="MsoNormal"><span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';"><span>            </span>लंबे समय से गुप्त संचालन</span></li>
<li class="MsoNormal"><span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';"><span>            </span>अंतरराज्यीय नेटवर्क से जुड़े तार</span></li>
<li class="MsoNormal"><span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';"><span>            </span>बढ़ती मांग के चलते बड़े स्तर पर उत्पादन</span></li>
</ul>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 27 Apr 2026 12:54:40 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>इंसुलिन और वजन घटाने वाली दवाएं चोरी, सीडीएससीओ ने जारी की चेतावनी</title>
                                    <description><![CDATA[केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (सीडीएससीओ) ने गुरुवार को एक बड़ी स्वास्थ्य चेतावनी जारी की है]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/insulin-and-weight-loss-drugs-theft-cdsco-released-warning/article-124484"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-08/1ne1ws83.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (सीडीएससीओ) ने गुरुवार को एक बड़ी स्वास्थ्य चेतावनी जारी की है। यह चेतावनी डेनमार्क की दवा कंपनी नोवो नॉर्डिस्क की कई खेपों की चोरी के बाद दी गई है। चोरी हुई दवाओं में इंसुलिन और हाल ही में बाजार में उतारी गई वजन घटाने की लोकप्रिय दवा ही Wegovy  शामिल हैं। जानकारी के अनुसार दवाओं की यह खेप कंपनी के भिवंडी हब से नागपुर, रायपुर, कटक और कोलकाता जैसे शहरों में सप्लाई के लिए भेजी गई थी। ट्रांजिट के दौरान इनकी चोरी हो गई। चोरी हुई खेपों में इंसुलिन ब्रांड Ryzodeg FlexTouch, Fiasp (Penfill और वेगोवी की तीन डोज (0.25एमजी, 0.5 एमजी और 1 एमजी) शामिल हैं। फिलहाल इस मामले की जांच पुलिस कर रही है।</p>
<p>सीडीएससीओ ने अपनी चेतावनी में कहा कि ये सभी इंजेक्टेबल दवाएं हैं, जिन्हें 2 से 8 डिग्री सेल्सियस के तापमान पर स्टोर करना अनिवार्य है। यदि इन्हें गलत तरीके से हैंडल किया गया या तापमान नियंत्रित नहीं रहा, तो इनकी गुणवत्ता प्रभावित हो सकती है। ऐसे में मरीजों की सेहत पर गंभीर खतरा पैदा हो सकता है। चेतावनी पत्र में साफ तौर पर कहा गया है, इन दवाओं को निर्धारित तापमान पर ही रखा जाना चाहिए, यदि ऐसा नहीं हुआ तो दवा की गुणवत्ता खराब हो सकती है और इससे मरीजों की सुरक्षा खतरे में पड़ सकती है। नियामक ने राज्य औषधि नियंत्रकों को निर्देश दिया है कि वो इन उत्पादों के वितरण पर कड़ी निगरानी रखें और Drugs and Cosmetics Act, 1940 के तहत कार्रवाई करें. साथ ही, स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े प्रदाताओं को मरीजों को जागरूक करने, किसी भी प्रतिकूल असर की तुरंत रिपोर्ट करने और यह सुनिश्चित करने की सलाह दी गई है कि दवाएं केवल अधिकृत स्रोतों और वैध इनवॉइस के साथ ही खरीदी जाएं। विशेषज्ञों के अनुसार, जहां नोवो नॉर्डिस्क की इंसुलिन भारत में लंबे समय से इस्तेमाल की जा रही है, वहीं वजन घटाने की दवा ही Wegovy को जून 2025 के अंत में ही भारतीय बाजार में लॉन्च किया गया था।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 23 Aug 2025 12:09:48 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>पुलिस ने 4 करोड़ के मादक पदार्थों को किया नष्ट, राशि डोगरा की मौजूदगी में जलाया </title>
                                    <description><![CDATA[प्रकरणों में 11 किलो 520 ग्राम गांजा, 08 प्रकरणों में 117 ग्राम स्मैक, 5 प्रकरणों में नशीली दवाइयों के 263 पत्ते टेबलेट व कैप्सूल जिनकी कुल अनुमानित कीमत 4 करोड़ रुपए है, नष्ट की गई है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/police-burnt-4-crore-drugs-in-the-presence-of-dogra/article-124459"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-08/oer-(5)4.png" alt=""></a><br /><p>जमवारामगढ़। ग्रामीण पुलिस जिले में 4 करोड़ से अधिक कीमत के मादक पदार्थ डोडा पोस्त,गांजा,स्मैक व मादक औषधियां टैबलेट व कैप्सूल जयपुर ग्रामीण पुलिस अधीक्षक राशि डोगरा डूडी की मौजूदगी में जलाकर नष्ट किया गया। </p>
<p>राशि डोगरा  ने बताया कि 9 पुलिस थानों के कुल 42 प्रकरणों में जब्तशुदा मादक पदार्थ डोडा पोस्त, गांजा, स्मैक व नशीली दवाइयों, जिनमें 23 प्रकरणों 848 किलो 789 ग्राम डोडा पोस्त, 6 प्रकरणों में 11 किलो 520 ग्राम गांजा, 08 प्रकरणों में 117 ग्राम स्मैक, 5 प्रकरणों में नशीली दवाइयों के 263 पत्ते टेबलेट व कैप्सूल जिनकी कुल अनुमानित कीमत 4 करोड़ रुपए है, नष्ट की गई है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 23 Aug 2025 11:20:29 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>बेखौफ स्कूल, कॉलेज व गलियों में आसानी से मिल रहा नशा</title>
                                    <description><![CDATA[जिम्मेदार हैंडलरों को पकड़ रहे, बड़े तस्कर पकड़ से बाहर]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/drugs-are-easily-available-in-schools--colleges-and-streets-without-any-fear/article-122719"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-08/1ne551ws.png" alt=""></a><br /><p>कोटा । कोटा शहर में नशे का कारोबार लगातार बढ़ता ही जा रहा है। नारकोटिक्स व पुलिस की कार्रवाई पर नशे के कारोबारी भारी पड़ रहे हैं। नशे की लत को पूरा करने के लिए बड़ी संख्या में युवा शहर में चोरियां तक करने लगे हैं। नशा करने वाले अब घरों तक सीमित न रहकर सार्वजनिक सम्पतियों तक को नुकसान पहुंचाने लगे हैं।  शहर में कोचिंग एरिया के आस-पास ही नहीं स्कूलों के पास और बस्तियों में सरेआम स्मैक, एमडी व गांजा आसानी से बच्चों को मिल रहा है। </p>
<p><strong>पुलिस ने  5719 किलो मादक पदार्थ  जब्त, 825 को भेजा जेल</strong><br />शहर पुलिस की ओर से मादक पदार्थो की तस्करी करने वालों के खिलाफ कार्रवाई करते हुए वर्ष 2021 से 31 मई 2025 तक 595  मुकदमे दर्ज कर 825 आरोपियों को गिरफ्तार कर करीब 5719 किलो मादक पदार्थ जब्त किया है। इसमें 5.324 किलोग्राम अफीम व 14.17 किलो ग्राम चरस, 2.846 किलो ग्राम स्मैक, 1008.03 किलो ग्राम गांजा  व 4688.612 किलोग्राम डोडाचूरा और  0.327 किलोग्राम एमडी है। </p>
<p><strong>नारकोटिक्स ने 184 मुकदमें दर्ज कर 207 आरोपी पकड़े</strong><br />केन्द्रीय नारकोटिक्स ब्यूरो की ओर से पिछले सवा तीन साल में वर्ष 2020 से मार्च 2025 तक मादक पदार्थ तस्करी के 184 मुकदमें दर्ज किए। जिनमें कुल 207 आरोपी तस्करों को गिरफ्तार किया गया। वहीं बड़ी मात्रा में स्मैक, गांजा, डोडा चूरा व एमडी भी जब्त किया है। जिसकी कीमत लाखों-करोड़ों रुपए है। </p>
<p><strong>पुलिस कार्रवाई</strong><br /><strong>वर्ष     अफीम    आरोपी    मुकदमे</strong><br />2022    4.359    142    93 <br />2023    0.129    205    157 <br />2024    0.810    223    156 <br />2025    0.230    124    109 <br /><strong>चरस    स्मैक    गांजा    डोडाचूरा    एमडी</strong><br />14.17    2.846    1008    4688    0.327  </p>
<p><strong>नारकोटिक्स कार्रवाई</strong><br /><strong>वर्ष    मुकदमे    आरोपी</strong><br />2022    26    26 <br />2023    37    42 <br />2024    87    107 <br />2025    34    32 </p>
<p><strong>उप नारकोटिक्स आयुक्त नरेश बुंदेल से सवाल-जवाब</strong><br /><strong>सवाल :</strong> कोटा शहर में नशे का कारोबार नहीं थमने का क्या कारण है।<br />बुंदेल : सीबीएन द्वारा तस्करी करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है। पिछले कुछ समय में बड़ी मात्रा में मादक पदार्थ जब्त कर तस्करों को पकड़ा है। फिर भी चोरी-छिपे आ रहा है। लेकिन कार्रवाई होने से इसमें काफी हद तक कमी आई है। <br /><strong>सवाल :</strong> नशा सबसे अधिक युवाओं को गिरफ्त में ले रहा है। इस पर रोक क्यों नहीं लग रही।<br />बुंदेल : हर व्यक्ति की फितरत  होती है कि वह अच्छाई की तरफ देर से व बुराई की तरफ जल्दी आकर्षित होता है। युवा अपनी मित्रों की संगत में आकर नशे  की लत में पड़ रहे है। इसके लिए सीबीएन ने ऑपरेशन युवा और नशा मुक्त कोटा अभियान चलाया हुआ है। जिसमें युवाओं को नशे की दुष्परिणाम बताकर इससे दूर करने का प्रयास किया जा रहा है।<br /><strong>सवाल :</strong> सीबीएन ने जो भी कार्रवाई की है। उनमें अधिकतर बिचौलिये या हैंडलर ही पकड़े गए हैं। बड़े तस्कर पकड़ में नहीं आने का क्या कारण है।<br />बुंदेल : मादक पदार्थ की तस्करी करने वाले काफी होशियार होते हैं। वे कभी सामने नहीं आते और जिनके माध्यम से वे इस कारोबार को करते हैं उन्हें भी उन तस्करों के बारे में जानकारी नहीं होती। वे चंद रुपयों के लालच में इस काम में फंस जाते है। पकड़े गए लोगों से पूछताछ व विभागीय स्तर पर तस्करों तक भी पहुंचने का प्रयास किया जा रहा है। <br /><strong>सवाल :</strong> पादक पदाथों की तस्करी पर रोक नहीं लगने का कारण कहीं विभागीय मिलीभगत या रिश्वत का खेल तो नहीं है।<br />बुंदेल : ऐसा नहीं है। विभाग के स्तर पर हर संभव प्रयास कर तस्करों के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है। केन्द्र सरकार द्वारा अफीम नीति में बदलाव करने से बाजार में आने वाला मादक पदार्थ सरकार के पास पहुंचा है। जिससे इसमें काफी कमी आई है। <br /><strong>सवाल : </strong>नशा करने वाले शहर में सरकारी सम्पतियों को नुकसान पहुंचा रहे है। इसे कैसे रोका जा सकता है।<br />बुंदेल : वर्तमान में अधिकतर घरों व मौहल्लों में सीसीटीवी कैमरे लगे होने से वहां चोरियां कम हो गई है। जबकि सरकारी सम्पति को टारगेट करना आसान हो रहा है।  इसे रोकने के लिए विभाग द्वारा नशा करने वालों के खिलाफ भी पुलिस व अन्य संगठनों के सहयोग से कार्य करने की जरूरत है।<br /><strong> सवाल :</strong> सीबीएन के द्वारा चलाए गए नशा मुक्त कोटा अभियान का कितना असर हुआ है।<br />बुंदेल : नशा मुक्त कोटा अभियान के तहत युवाओं को स्कूल व कॉलेज में कार्यक्रम व प्रतियोगिताओं के माध्यम से जागरूक करने का प्रयास किया गया है। इसका परिणाम तुरंत नजर नहीं आएगा लेकिन इसके दीर्घकालिक परिणाम देखने को मिलेंगे। </p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 05 Aug 2025 16:53:12 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[kota]]></dc:creator>
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                <title>ड्रग्स के खिलाफ सरकार का बड़ा कदम : राष्ट्रीय नारकोटिक्स हेल्पलाइन MANAS-1933 शुरू, गुप्त सूचना देने और नशा मुक्ति में मिलेगी मदद </title>
                                    <description><![CDATA[देश को नशामुक्त भारत-2047 के लक्ष्य की ओर ले जाने के लिए केंद्र सरकार ने राष्ट्रीय नारकोटिक्स हेल्पलाइन MANAS-1933 का शुभारंभ किया है]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/governments-big-step-against-drugs-will-help-in-giving-secret/article-116892"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-06/441.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। देश को नशामुक्त भारत-2047 के लक्ष्य की ओर ले जाने के लिए केंद्र सरकार ने राष्ट्रीय नारकोटिक्स हेल्पलाइन MANAS-1933 का शुभारंभ किया है। इस हेल्पलाइन के माध्यम से आमजन ड्रग्स तस्करी संबंधी सूचना गुप्त रूप से साझा कर सकते हैं और नशे के आदी व्यक्तियों के पुनर्वास एवं काउंसलिंग के लिए मार्गदर्शन भी प्राप्त कर सकते हैं।<br />      <br />केंद्र सरकार की "जीरो टॉलरेंस" नीति के तहत शुरू किए गए इस प्लेटफॉर्म को देशभर की एंटी-नारकोटिक्स टास्क फोर्स (ANTFs) से जोड़ा गया है, ताकि ड्रग्स तस्करी पर त्वरित और प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित हो सके। यह हेल्पलाइन 24x7 सक्रिय रहेगी और सूचना देने वाले व्यक्ति की पहचान पूर्णतः गोपनीय रखी जाएगी।<br />      <br />गृह विभाग के संयुक्त शासन सचिव महेन्द्र कुमार खींची द्वारा जारी निर्देशों के अनुसार सभी राज्य स्तरीय विभागों को कहा गया है कि MANAS-1933 हेल्पलाइन का व्यापक प्रचार-प्रसार सुनिश्चित करें। इसके तहत स्कूल, कॉलेज, पंचायत स्तर तक इस हेल्पलाइन की जानकारी पहुंचाई जाएगी, जिससे ज्यादा से ज्यादा लोग इस प्लेटफॉर्म का लाभ उठा सकें।<br />       <br />हेल्पलाइन के अतिरिक्त https://www.ncbmanas.gov.in/awareness पोर्टल पर जनजागरूकता बढ़ाने के लिए पोस्टर, वीडियो, ब्रोशर आदि भी उपलब्ध कराए गए हैं, जिन्हें आमजन देख सकते हैं, डाउनलोड कर सकते हैं और साझा कर सकते हैं। गृह विभाग ने सभी विभागों से प्रचार-प्रसार की प्रगति रिपोर्ट समय-समय पर विभाग को भेजने के निर्देश भी दिए हैं। सरकार को उम्मीद है कि MANAS-1933 के जरिए ड्रग्स तस्करी की रोकथाम के साथ-साथ ड्रग एडिक्ट व्यक्तियों के सामाजिक पुनर्वास को भी एक नई दिशा मिलेगी। ड्रग्स के खिलाफ लड़ाई में समाज के हर नागरिक की भागीदारी जरूरी है। MANAS-1933 इस दिशा में एक सशक्त माध्यम बनेगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 09 Jun 2025 18:59:50 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>शहर में आसानी से मिल रहे मादक पदार्थ, बढ़ रही नशेड़ियों की संख्या</title>
                                    <description><![CDATA[पुलिस और नारकोटिक्स विभाग की नशे के खिलाफ कार्रवाई नाकाफी।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/drugs-are-easily-available-in-the-city--number-of-drug-addicts-is-increasing/article-114433"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-05/rtrer-(1)79.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। शहर में नशे का कारोबार इतनी तेजी से फेल रहा है कि अब यह नशा करने वालों को आसानी से मिलने लगा है। जिससे नशेड़ियों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। वहीं नशेड़ी पहले जहां घरों से पानी के मीटर व छोटी-छोटी चोरियां कर रहे थे। वहीं अब ये सरकारी सम्पत्तियों की चोरी कर उन्हें नुकसान पहुंचा रहे हैं। नशे का कारोबार करने वालों और नशा करने वालों पर पुलिस व नारकोटिक्स विभाग की कार्रवाई नाकाफी साबित हो रही है। शहर में सुनसान इलाका हो या अंधेरी जगह। पार्क का कोना हो या खाली पड़े मकान। झाड़ झंकार हो या थोड़ी से भी आड़ वाली जगह। इन सभी जगह पर नशा करने वालों को देखा जा सकता है। कागज की छोटी सी पुड़िया को हाथों से  रगड़ते हुए और उसे जलाकर उसका सुट्टा लगाकर स्मैक का नशा करते हुए नशेड़ी। कोई सिगरेट में नशीला पदार्थ मिलाकर तो कोई पुड़िया में लेकर। कोई इंजक् शन लगाकर तो कोई अन्य तरीके से नशे का सेवन कर रहा है।  शहर में इस तरह से नशा करते युवा व बुजुर्ग नशेड़ियों को देखा जा सकता है। इनकी संख्या दिनों दिन बढ़ती ही जा रही है। नशे के लिए कर रहे चोरियां: शहर में स्मैक व गांजे के अलावा इंजेक् शन से नशा करने वालों की संख्या लगातार बढ़ती ही जा रही है। शुरुआत में एक से दो और दो से चार की तरह से इनकी संख्या इतनी अधिक हो गई कि शुरुआत में इन्हें नि:शुल्क नशा उपलब्ध कराया जाता है। बाद में आदत पड़ने पर उनसे उसकी कीमत वसूल की जा रही है। नशा करने के कारण वे कोई काम तो कर नहीं पाते। ऐसे में नशे की पुड़िया या इंजेक् शन का इंतजाम करने के लिए  पहले जहां नशेड़ी अपने घर में चोरी कर रहे थे। उसके बाद दूसरों के घरों से पानी के मीटर, लोहे का सामान, साइकिल या अन्य सामान चोरी कर रहे थे। वहीं अब ये बड़ी-बड़ी और सरकारी सम्पत्तियों तक की चोरी करने लगे हैं। उन सामानों को चोरी कर कबाड़ियों को सस्ते दाम में बेचकर पुड़िया का इंतजाम कर रहे हैं। </p>
<p><strong>केबल से लेकर रैलिंग तक की चोरी</strong><br />शहर में नशेड़ियों का इतना अधिक आतंक हो गया है कि अब ये कोई भी चीज नहीं छोड़ रहे हैं। सुनसान व अंधेरे इलाकों से ही नहीं अब तो मुख्य मार्गों से दिन दहाड़े चोरियां करने लगे हैं।  सीएडी रोड पर अभय कमांड सेंटर के सामने डिवाइडर की रैलिंग हो या  घोड़ा चौराहे पर हरितिमा पट्टी की रैलिंग। एरोड्राम चौराहे पर  लाइट का पैनल बॉक्स व बिजली की  केबल  हो या सड़क किनारे लगी डेकोरेटिव लाइटें। तालाब किनारे लगी लोहे की रैलिंग हो या नयापुरा और अदालत चौराहे पर लगी बेश कीमती व मोटी रैलिंग। स्टील के हो या लोहे और अब तो प्लास्टिक तक के डस्टबीन भी नशेड़ी नहीं छोड़ रहे हैं। नशेड़ियों का जहां दांव लग रहा है उसे ही निशाना बना रहे हैं और 50 से 100 रुपए गें मिलने वाली नशे की एक पुड़िया के लिए लाखों की सरकारी सम्पत्ति को नुकसान पहुंचा रहे हैं। इंसानी चूहों के रूप में ये शहर को इस तरह से कुतर कर खोखला कर रहे हैं जिसकी भनक न तो पुलिस को लग रही है और न ही संबंधित विभागों को जिनकी सम्पत्तियों को नुकसान पहुंचाया जा रहा है।  </p>
<p><strong>लाखों का नुकसान कर चुके नशेड़ी</strong><br />नशा करने वाले जिस तरह से शहर में सरकारी सम्मितियों की चोरी कर रहे हैं। उससे ऐसा लग रहा है मानो यह एक दो लोगों का नहीं वरन् पूरे गिरोह के रूप में काम किया जा रहा है। शहर के मुख्य मार्ग, व्जस्त रोड और दिन दहाड़े की गई इन चोरियों से नशेड़ी अब तक शहर में लाखों रुपए का नुकसान कर चुके हैं।  विभागीय अधिकारियों को भी चोरी का काफी समय बाद पता चलता है जब या तो केबल चोरी होने से लाइटें बंद हो या  किसी अधिकारी की उन पर निगाह पड़ जाए।  हालांकि केडीए अधिकारी उनकी सम्पत्तियों को नुकसान पहुंचाने पर पुलिस में कई बार शिकायत भी कर चुके हैं। पुलिस ने कुछ नशेड़ियों पर कार्रवाई की भी है लेकिन फिर से जमानत पर छूटते ही वे यही काम करने लग जाते हैं।</p>
<p><strong>चोरियां रोकनी हैं तो नशेड़ियों पर कार्रवाई हो </strong><br />लोगों का कहना है कि शहर में बढ़ती चोरियों पर रोक लगाने के लिए  नशा करने वालों पर  कार्रवाई होना आवश्यक है।  भीमगंजमंडी निवासी महेश योगी का कहना है कि पहले तो नशा करने वाले घरों से सीवरेज के चैम्बर के  ढक्कन, साइकिल व पानी के मीटर चोरी कर रहे थे। ऐसे में अब लोगों ने सीसीटीवी लगाने से वह तो कम हो गई। लेकिन अब सरकारी सम्पत्तियों की चोरी अधिक होने लगी है। शहर को खोखला किया जा रहा है। इन्हें रोकने के लिए पुलिस को चोरों पर व नारकोटिक्स विभाग को नशा बेचने वालों पर कार्रवाई करनी चाहिए।  जवाहर नगर निवासी अनिल गोयल का कहना है कि पिछले कुछ समय से सरकारी सम्पत्तियों की चोरी व उनके नुकसान के मामले अधिक हो रहे हैं। यह काम अधिकतर नशेड़ी कर रहे हैं। पुलिस भी नशेड़ियों पर ठोस कार्रवाई नहीं करती। इनकी आसानी से जमानत होने से इनकी संख्या बढ़ रही है। जबकि इन पर रोक लगाना जरूरी है। </p>
<p><strong>नारकोटिक्स विभाग ने नहीं की कार्रवाई</strong><br />मादक पदाथों की तस्करी रोकने व तस्करों पर कार्रवाई करने की जिम्मेदारी निभाने वाले नारकोटिक्स विभाग की ओर से अभी तक शहर में नशा करने वालों व नशे का कारोबार करने वालों पर कोई कार्रवाई नहीं की गई है। विभाग द्वारा जो कार्रवाई की भी जा रही है तो वह नाम मात्र की हो रही हैं। उनकी आड़ में बड़ी मात्रा में नशे की खैप शहर में छोटी-छोटी जगह पर पहुंच रही है। जिससे यह आसानी से लोगों तक  पहुंच रहा है। उससे नशा आसानी से उपलब्ध होने पर नशा करने वालों की संख्या बढ़ रही है और चोरी की घटनाएं भी अधिक होने लगी हैं। </p>
<p>नारकोटिक्स विभाग की ओर से पिछले काफी समय से लगातार कार्रवाई की जा रही है। जिनमें बड़ी मात्रा में मादक पदार्थ जब्त करने के साथ ही आरोपियों को भी गिरफ्तार किया गया है। शहर में नशे का कारोबार करने वालों पर विभाग एनडीपीएस एक्ट में कार्रवाई तो कर सकता है लेकिन अभी तक ऐसी कार्रवाई नहीं की है।  चोरियों पर तो पुलिस कार्रवाई करती है। जबकि नशे का कारोबार व उसका उपयोग करने वालों पर विभाग कार्रवाई कर सकता है। विभाग का प्रयास है कि नशे का कारोबार करने वालों का नेटवर्क ही ध्वस्त किया जाए। जिससे कोटा शहर में नशा नहीं आए और शहर को नशा मुक्त बनाया जा सके। इस दिशा में लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। नशा करने वालों को पकड़ने  पर उनकी आसानी से जमानत होने पर वे फिर से इसी काम में लग जाते हैं। इस पर रोक लगाने के लिए उनका पुनर्वास करना और नशा मुक्ति केन्द्रों में उनका नशा छुड़ाने का काम करना आवश्यक है। <br /><strong>- नरेश बुंदेल, उप नारकोटिक्स आयुक्त केन्द्रीय नारकोटिक्स ब्यूरो, कोटा </strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 17 May 2025 16:51:53 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>आरजीएचएस के तहत दवाओं की आपूर्ति के लिए संशोधित दिशा-निर्देश जारी, संशोधित आदेश तत्काल प्रभाव से होगा लागू</title>
                                    <description><![CDATA[हालांकि कुछ मामलों में इस शर्त को लागू नहीं किया जाएगा। जैसे: यदि पहले से पैनल में शामिल अस्पताल परिसर में नया स्टोर शुरू किया गया हो। RGHS के तहत मान्यता प्राप्त फार्मा स्टोर्स की चेन का नया ब्रांच। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/revised-guidelines-issued-for-supply-of-drugs-under-rghs/article-110545"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-04/2574rtrer.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। राजस्थान सरकारी स्वास्थ्य योजना के तहत दवाओं और चिकित्सा सामग्री की आपूर्ति और वितरण से जुड़े दिशा-निर्देशों में संशोधन किया है। संशोधित दिशा-निर्देशों के अनुसार फार्मा स्टोर्स की पात्रता सुनिश्चित करने के लिए उन्हें राजस्थान में शॉप्स एंड एस्टैब्लिशमेंट एक्ट, इंडियन पार्टनरशिप एक्ट 1932, कंपनीज एक्ट 1956, या लिमिटेड लाइबिलिटी एक्ट 2008 के तहत पंजीकृत होना चाहिए। यह भी अनिवार्य किया गया है कि फार्मा स्टोर का कम से कम एक वित्तीय वर्ष से अस्तित्व होना चाहिए।</p>
<p>हालांकि कुछ मामलों में इस शर्त को लागू नहीं किया जाएगा। जैसे: यदि पहले से पैनल में शामिल अस्पताल परिसर में नया स्टोर शुरू किया गया हो। RGHS के तहत मान्यता प्राप्त फार्मा स्टोर्स का नया ब्रांच। पैनल में शामिल अस्पताल के नए अस्पताल परिसर में स्टोर का खुलना। यह संशोधित आदेश तत्काल प्रभाव से लागू होगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 12 Apr 2025 14:30:28 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>नशे के खिलाफ महत्वाकांक्षी युद्ध कारगर साबित हो</title>
                                    <description><![CDATA[पंजाब में आतंकवाद की ही तरह नशे एवं ड्रग्स के धंधे ने व्यापक स्तर पर अपनी पहुंच बनाई है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/opinion/ambitious-war-against-drugs-proves-effective/article-106577"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-03/257rtrer-(2).png5.png" alt=""></a><br /><p>पंजाब में आतंकवाद की ही तरह नशे एवं ड्रग्स के धंधे ने व्यापक स्तर पर अपनी पहुंच बनाई है, जिसके दुष्परिणाम पंजाब के साथ-साथ समूचे देश को भोगने को विवश होना पड़ रहा है। पंजाब नशे की अंधी गलियों में धंसता जा रहा है। देर आए दुरस्त आए की भांति लगातार चुनौती बने नशीली दवाओं एवं ड्रग्स के धंधे के खिलाफ  आप सरकार ने एक महत्वाकांक्षी युद्ध एवं अभियान शुरू किया है। तीन महीने के भीतर इस समस्या का खात्मा करने का सरकार दावा खोखला साबित न होकर सकारात्मक एवं प्रभावी परिणाम लाए, यह अपेक्षित है। इसी क्रम में विभिन्न सरकारी विभागों ने सैकड़ों छापे डाले, तीन सौ के करीब गिरफ्तारियां और बड़े पैमाने पर नशीले पदार्थों की बरामदगी हुई। निस्संदेह, यह कार्रवाई अभियान उग्र, आक्रामक व तेज है, लेकिन ऐसे अभियान चलाने के दावे विगत की भांति कोरा दिखावा न साबित हो, यह देखना जरूरी है। दरअसल, सबसे बड़ा संकट यह है कि पाकिस्तान, अफगानिस्तान और ईरान में हेरोइन उत्पादन के केंद्र- गोल्डन क्रिसेंट के निकट होने के कारण पंजाब लंबे समय से मादक पदार्थों की तस्करी से जूझ रहा है। जरूरत है मान सरकार का नशा एवं नशे के कारोबार के खिलाफ  जारी अभियान कामयाबी की नई इबारत लिखे। ताकि नशे के जाल में फंसे युवाओं एवं आमजन को बचाया जा सके। ड्रग्स उपभोग के मामले में पंजाब की स्थिति अत्यंत चिंताजनक बन गई है। पंजाब के 26 प्रतिशत युवा चरस, अफीम तथा कोकीन व हेरोइन जैसे सिंथेटिक ड्रग्स लेने में लिप्त हैं। इसमें शराब आदि का डाटा शामिल नहीं है। पंजाब देश में ड्रग्स में सर्वाधिक संलिप्त राज्यों में आता है। पंजाब के बॉर्डर एरिया के गांवों व कस्बों में ही ड्रग्स की मार देखने को मिलती थी। </p>
<p>सरकार नशे को खत्म करने के बड़े-बड़े दावे कर रही है, जबकि जमीनी हकीकत कुछ और देखने को मिलती है। युवाओं की रगों में नशे का जहर घोला जा रहा है। बड़े शहर नशे के हॉट-स्पॉट बनते जा रहे हैं। बठिंडा, पटियाला, होशियारपुर, अमृतसर और लुधियाना जैसे बड़े शहरों में हालात चिंताजनक हैं। इसका असर प्रदेश की मौजूदा पीढ़ी पर ही नहीं, बल्कि आने वाली पुश्तों पर भी पड़ने लगा है। इस अभियान की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि क्या हम इस समस्या की जड़ पर प्रहार करने का कोई प्रभावी उपक्रम कर रहे हैं? दरअसल, इस संकट के मूल में जहां राजनीतिक जटिलताएं, सीमा से जुड़ी समस्याएं, पाकिस्तान के षड़यंत्र हैं, वहीं युवाओं के लिए रोजगार से जुड़े विकल्पों की भी कमी है। पंजाब में नशे की समस्या पर सुप्रीम कोर्ट भी चिन्ता व्यक्त करता रहा है, अपनी नाराजगी व्यक्त करते हुए उसने पंजाब सरकार को फटकार भी समय-समय पर लगाई है। अगर कोई पड़ोसी देश चाहे तो नशे के आतंक से देश को खत्म कर सकता है। अगर बॉर्डर क्षेत्र सुरक्षित नहीं है तो कैसे सीमाओं की सुरक्षा होगी? नशा माफिया के आगे बेबस क्यों है पंजाब सरकार? सुप्रीम कोर्ट की चिन्ता पंजाब में नशे की गंभीर चुनौती को देखते हुए वाजिब है। </p>
<p>प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने भी पूर्व में  ड्रग्स-फ्री इंडिया अभियान चलाने की बात कहकर इस घातक बुराई की ओर जागृति का शंखनाद किया है। विशेषत: पंजाब के युवा नशे की अंधी गलियों में धंसते जा रहे हैं, वे अपनी अमूल्य देह में बीमार फेफड़े और जिगर सहित अनेक जानलेवा बीमारियां लिए एक जिन्दा लाश बने जी रहे हैं। ड्रग्स के सेवन से महिलाएं बांझपन का शिकार हो रही हैं। पुरुषों पर भी इसका प्रभाव पड़ रहा है। पाकिस्तान नशे के आतंक से अपने मनसूंबों को पूरा कर रहा है। चिकित्सकीय आधार पर देखें तो अफीम, हेरोइन, चरस, कोकीन, तथा स्मैक जैसे मादक पदार्थों से व्यक्ति वास्तव में अपना मानसिक संतुलन खो बैठता है एवं पागल तथा सुप्तावस्था में हो जाता है। ये ऐसे उत्तेजना लाने वाले पदार्थ हैं, जिनकी लत के प्रभाव में व्यक्ति अपराध तक कर बैठता है। मामला सिर्फ स्वास्थ्य से नहीं अपितु अपराध से भी जुड़ा हुआ है। कहा भी गया है कि जीवन अनमोल है। नशे के सेवन से यह अनमोल जीवन समय से पहले ही मौत का शिकार हो जाता है या अपराध की अंधी गलियों में धंसता चला जाता है, पाकिस्तान युवाओं को निस्तेज करके एक नए तरीके के आतंकवाद को अंजाम दे रहा है।</p>
<p>पंजाब सरकार की ताजा सख्त कार्रवाई का संदेश नशा माफिया को जाना जरूरी है कि इस काले कारोबार से जुड़े लोगों की दंडमुक्ति संभव नहीं है। इसके अलावा सीमा पार से चलाए जा रहे नशे के कारोबार के लिये पड़ोसी देश को भी कड़ा संदेश जाना चाहिए। नशे की तस्करी में तमाम आधुनिक साधनों का उपयोग किया जा रहा है। हालांकि, बीएसएफ ने पहल करते हुए एंटी-ड्रोन सिस्टम लगाए हैं। जिसके सार्थक परिणाम भी मिल रहे हैं। पंजाब में नशे की गंभीर चुनौती को देखते हुए सीमा सुरक्षा की दिशा में कदम उठाए जाने चाहिए। जिसमें उच्च तकनीक व विभिन्न एजेंसियों में बेहतर तालमेल की जरूरत है। सीमा पर सख्त नियंत्रण करने, न्यायिक दक्षता और समाज को जागरूक करने की जरूरत है।  </p>
<p><strong>-ललित गर्ग</strong><br /><strong>यह लेखक के अपने विचार हैं।</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>ओपिनियन</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 06 Mar 2025 11:39:14 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
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                <title>परिचर्चा : नशा मुक्ति के लिए जरूरी है सामूहिक प्रयासों की चोट, नशे की हो रही होम डिलिवरी </title>
                                    <description><![CDATA[ समाज के विभिन्न मुद्दों पर आयोजित परिचर्चा की श्रंखला में शुक्रवार को ड्रग्स के समाज पर पड़ रहे दुष्प्रभाव को लेकर दैनिक नवज्योति कार्यालय में मासिक परिचर्चा का आयोजन किया गया
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/discussion--collective-efforts-are-necessary-for-de-addiction/article-105137"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-02/257rtrer90.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। समाज के विभिन्न मुद्दों पर आयोजित परिचर्चा की श्रंखला में शुक्रवार को ड्रग्स के समाज पर पड़ रहे दुष्प्रभाव को लेकर दैनिक नवज्योति कार्यालय में मासिक परिचर्चा का आयोजन किया गया। परिचर्चा में ड्रग्स के उत्पादन, सप्लाई, डिमांड, तस्करी, मादक पदार्थों की अवेलिबिलिटी, रोकने के इंतजाम के साथ समाज पर पड़ रहे प्रभाव पर चर्चा की गई। परिचर्चा का विषय था ड्रग्स आर लाइक टरमाइट्स विच ईट्स द बॉडी था। इस परिचर्चा में सेन्ट्र ब्यूरो आॅफ नारकोटिक्स के डिप्टी कमिश्नर, एडिश्नल एपपी, विभिन्न एनजीओ के सदस्य,साइकेटिस्ट, समाज शास्त्री, प्रोफेसर ,ब्रह्मा कुमारी की बहनें, किसान नेता सहित कुछ ऐसे लोगों को भी आमंत्रित किया गया था जो स्वयं ड्रग्स के दलदल में फंस चुके थे। परिचर्चा के दौरान सभी विषय विशेषज्ञों ने अपनी बात रखी । प्रस्तुत हैं उसके अंश </p>
<p><strong>नशे की हो रही होम डिलिवरी </strong><br />कोटा शहर को यदि नशे से मुक्त कराना है तो रुट्स को पहचानना और उसे तोड़ना होगा, जो प्रतिबंधित नशा सामग्री है, वह ब्लैक से बिक रही है। ऐसे में सप्लाई चैन को खत्म करना जरूरी है। हालात यह है, नाबालिगों से न केवल नशा बिकवाया जा रहा है बल्कि होम डिलिवरी भी करवाई जा रही है। ऐसे में जनजागरण को साथ लेकर जागरूकता अभियान चलाया जाना चाहिए। <br /><strong>- कुलदीप अडसेला,सचिव परिवर्तन सेवा संस्थान नशा मुक्ति केंद्र कुन्हाड़ी</strong></p>
<p><strong>5 साल के अथक प्रयास से छूटा नशा</strong><br />सन 1984-85 में तिनका-तिनका जोड़कर मकान बनाया था।  वर्ष 1986  में बाढ़ आई तो मकान ढह गया। जिससे मैं तनाव में रहने लगा। काम-घंधे भी छूट गए। इसी दौरान साथियों के साथ पहली बार स्मैक पी तो कुछ समय के लिए अपने गम भूल गया। फिर स्मैक की लत लग गई। फिर इंजेक्शन लगाने लगा। लेकिन यह नशा महंगा होने के कारण इंजेक्शन वाला नशा करने लगा। बाद में कुछ लोगों की मदद से नशा मुक्ति केंद्र पहुंचा, जहां पांच साल इलाज चला और अथक प्रयासों से आज नशे की गिरफ्त से आजाद हो सका।<br /><strong>- सत्यनारायण, नशा पीड़ित</strong></p>
<p><strong>नशे का कारोबार जड़ से खत्म करने की जरूरत</strong><br />गांजा कॉमन हो चुका है, कोई कॉलेज ऐसा नहीं बचा, जहां गांजे का सेवन नहीं होता हो। अफीम के बाद स्मैक का नशा तेजी से बढ़ रहा है। हालात यह है कि कोई स्मैक के नशे में पड़ जाता है तो फिर उसे छोड़ नहीं पाता। इस समय सबसे ज्यादा नशे का रेशो स्मैक का आ रहा है। घर-परिवार बर्बाद हो जाता है। नशे की ग्रोथ तेजी से बढ़ रही है, जिसे खासकर किशोरावस्था से युवाअवस्था तक नशे की गिरफ्त में हैं, जिन्हें बचाने के लिए नशे के कारोबार को जड़ से खत्म करने की जरूरत है।  <br /><strong>- रजनीश मेहरा, ड्रग्स डिएडिक्शन साइक्लोजिस्ट</strong></p>
<p><strong>नशा मुक्त  कोटा अगला लक्ष्य</strong><br />चित्तौड़ व नीमच के अलावा अब कोटा में नॉर्थ ईस्ट से भी  बड़ी मात्रा में नशा कोटा में आ रहा है। इसमें सभी अधिक घातक एमडी अर्थात सिंथेटिक नशा है। नारकोटिक्स विभाग ने आॅपरेशन युवा रक्षा नशा मुक्त नाम से अभियान शुरु किया है। इस अभियान के तहत विभाग का लक्ष्य है कि कोटा को नशा मुक्त बनाया जाए। विभाग द्वारा नशा उत्पादन से सप्लायर व उपभोग करने वालों तक की चैन को तोड़ने की दिशा में कार्रवाई की जा रही है। कुछ संस्थाएं नशा छुड़ाने के नाम पर अवैध रूप से दवाओं का सेवन करवा रहे हैं। जबकि वह दवा भी बिना अधिकृत डॉक्टर की सलाह से ही दी जा सकती है। सप्लाई के साथ ही नशे की डिमांड को भी कम करने की जरूरत है। <br /><strong>- नरेश बुंदेल, उप नारकोटिक्स आयुक्त केन्द्रीय नारकोटिक्स ब्यूरो </strong></p>
<p><strong>प्रोडक्शन व सप्लाई चैन तोड़ने की जरूरत </strong><br />नशे का कारोबार को जड़ से उखाड़ने फैंकने के लिए प्रोडक्शन, सप्लाई चैन और इनकम सोर्स को खत्म करने की जरूरत है। नशा प्रोडक्शन केंद्र  झालावाड़, चित्तौड़ व मध्यप्रदेश के कुछ जगहों पर है। गांजा हिमाचल व उड़िसा से आ रहा है। ऐसे में हमें नशे का प्रोडक्शन खत्म करना होगा। इसी तरह नशा जिन रुट्स से आता है, वहां बड़ा सिंडिकेट काम करता है। माल स्टोर करने वाला, सप्लाई करने वाला, बेचने वाला सब अलग-अलग होते हैं, यही सप्लाई चैन है, जिसे नष्ट करने की जरूरत है। साथ ही पैसे से संबंधित जो क्राइम है, यदि उसे अन इकोनोमिक बना दिया जाए तो नशे का कारोबार खत्म किया जा सकता है।  हमने पिछले साल वर्ष 2024 में 156 मुकदमें दर्ज किए हैं, जबकि वर्ष 2025 की जनवरी-फरवरी के डेढ़ माह में ही 66 केस दर्ज किए हैं। वहीं, पहले 223 लोगों को गिरफ्तार किया और अब 74 लोगों को पकड़ चुके हैं। इसके अलावा गाड़ियां भी जब्त की है।  <br /><strong>- दिलीप कुमार सैनी, एडिशन एसपी कोटा शहर</strong></p>
<p><strong>नशा करना स्टेटस सिम्बल बन गया</strong><br />नशा करने के कई कारण हो सकते है। सबसे बडणा कारण अकेलापन होता है। शुरुआत में नशा अच्छा लग सकता है लेकिन यह खतरनाक होता है। नशा कराने वाले पहले इसे फ्री में देते हैं बाद में इसकी लत पड़ जाने पर व्यक्ति खुद उसे तलाशता हुआ चला जाता है। कई लोगों के लिए नशा स्टेटस सिम्बल बन गया है। जबकि नशे के कारोबार को रोकने के लिए सभी को सामूहिक प्रयास करने की आवश्यकता है।  <br /><strong>- डॉ. अशोक कुमार गुप्ता, सेवानिवृत्त प्राचार्य राजकीय कला कन्या महाविद्यालय</strong></p>
<p><strong> कॉलेज-विवि में बच्चों के ऊपर नियुक्त हो मेंटर</strong></p>
<p>नशे की दुनिया में प्रवेश करने वाले को उचित मार्गदर्शन एवं उनके प्रति सहानुभूति पूर्ण व्यवहार का अभाव मुख्य रूप से जिम्मेदार है। इसके लिए परिवार का खुशनुमा माहौल के साथ विद्यालयों, महाविद्यालयों  एवं विश्वविद्यालय में विद्यार्थियों के समूह बनाकर उनके लिए शिक्षकों को मेंटर नियुक्त किया जाए ताकि निरंतर संवाद द्वारा उचित मार्गदर्शन से उन्हें सही रास्ता दिखाया जा सके। ड्रग्स की तस्करी और अवैध व्यापार पर कड़ी नजर रखी जानी चाहिए। नशीली दवाओं की बिक्री और सेवन के खिलाफ सख्त कानूनी कार्यवाही की जाए ।<br /><strong>- डॉ.मीनू माहेश्वरी, विभागाध्यक्ष कोटा यूनिवर्सिटी </strong></p>
<p><strong>नशे की जरूरत क्यों, समाधान खोजने की जरूरत</strong><br />युवाओं को नशे की जरूरत क्यों पड़ रही है, वह नशे की हालत में क्यों आया है,इसके कारणों को खोज समाधान निकालने की जरूरत है। व्यक्ति जन्म से नशे में नहीं आता, उसे हालात व परिस्थितियां उसे नशे में लाते हैं। जब हमने नशे में गिरफ्त लोगों से बात की तो सामने आया कि अपने गम भुलाने को वह नशे में खुशी ढूंढ रहे हैं। ऐसे में अपने आसपास का माहौल खुशनुमा बनाए। कोई व्यक्ति नशा करे तो उसे अपने बच्चों की तरफ देखना चाहिए, उनका ख्याल आएगा तो वह नशे से दूर होगा। <br /><strong>- बीके आरती, बह्माकुमारी </strong></p>
<p><strong>घर के पुरूष सदस्यों से डरने लगी महिलाएं</strong><br />कोटा की 97 कच्ची बस्तियों में 1.68 लाख परिवार रहते हैं, जब इन बस्तियों में महिलाओं के बीच जाती हूं तो पहले तो वह अपनी बात नहीं बताती थी लेकिन अब नशे के बढ़ते प्रभाव के कारण इतना चैंजेज आया कि जिन घरों में दो या तीन बेटियां हैं, उन्हें महिलाएं अकेली छोड़कर नहीं जाती। काम पर जाती हैं तो बेटियों को साथ लेकर जाती है। हालात यह हो गए कि घर में रहने वाले पिता, भाई, पति सहित अन्य पुरूष सदस्यों से महिलाओं को डर लगने लगा है, जो बड़ा चिंता का विषय है। पहले पुरूष नशा करते थे, अब महिलाएं भी सीख गई, यह क्यों हुआ, इसकी तह में जाकर समाधान खोजने की जरूरत है।  <br /><strong>- हेमलता गांधी,सोशल डवलपमेंट मैनेजर  नगर निगम कोटा</strong></p>
<p><strong>देखादेखी से नशे की चंगुल में फंस रहे किशोर</strong><br />नशे की समस्या किशोरावस्था से शुरू होती है। किशोर जब अपने घर-परिवार में पिता या अन्य सदस्य को सिगरेट, शराब पीते देखते हैं तो उनमें जिज्ञासा जाग उठती है कि इसे पीने से क्या होता है। जब वह घर से बाहर दोस्तों के बीच पहुंचता है तो वह सिगरेट, शराब या अन्य नशा करता है और शोक पूरा करते करते कब नशे की गिरफ्त में आ जाते हैं, उन्हें भी पता नहीं चल पाता। शिक्षण संस्थाओं में गांजा, सिगरेट पीना आम बात हो गई। क्योंकि, यह आसानी से मिल जाता है। <br /><strong>- दीपक सिंह, सचिव, सुशीला देवी चेरिटेबल सोसायटी</strong></p>
<p><strong>बचपन में ही नशे की नुकसान बताने की जरूरत</strong><br />जन्म लेने से दस साल तक के बच्चे के दिमाग में जो बात डाली जाएगी उसका उसके पूरे जीवन पर असर पड़ता है। यदि इसी उम्र में  उसकी मां यदि समझाएगी तो बच्चा जिंदगी में कभीउस तरफ नहीं जाएगा। जबकि नशा करने वालों को सुधारना बहुत मुश्किल है। बरसों से प्रयास करने के बाद भी उतनी सफलता नहीं मिली जितनी अपेक्षा की जा रही थी। जितनों का नशा छुड़ाया जाता है उससे अधिक नए लोग नशे की गिरफ्त में आ रहे हैं। <br /><strong>- डॉ. आर.सी. साहनी चेयरमेन संवेदना सेवा रिसर्च समिति</strong></p>
<p><strong>अफीम की अनाधिकृत सप्लाई को रोकना होगा</strong><br />अफीम की खेती सरकार द्वारा अधिकृत पट्टे जारी करने पर किसान ही करते हैं। लेकिन किसानों से ही अफीम सरकार के अलावा अनाधिकृत रूप से बाजार में बेची जा रही है। जिससे उत्पादन केन्द्रों पर उसका उपयोग नशा बनाकर बाजार में सप्लाई करने के रूप में किया जा रहा है। सबसे अधिक भवानीमंडी में अनाधिकृत उतपदन केन्द्र संचालित हो रहे है। नारकोटिक्स विभाग को किसानों से समंवय स्थापित करके किसानों को अचछे दाम दिलाने का प्रयास करना चाहिए जिससे इसे बाजार में अनाधिकृत रूप से जाने से रोका जा सके। <br /><strong>- दुलीचंद बोरदा, जिला अध्यक्ष भारतीय किसान सभा</strong></p>
<p><strong>गायत्री परिवार नशा मुक्ति  को प्रतिबद्ध</strong><br />ड्रग्स की तस्करी और अवैध व्यापार पर कड़ी नजर रखी जानी चाहिए। नशीली दवाओं की बिक्री और सेवन के खिलाफ सख्त कानूनी कार्यवाही की जाए। नशे की समस्या किशोरावस्था से शुरू होती है।  किशोर जब अपने घर-परिवार में पिता या अन्य सदस्य को सिगरेट, शराब पीते देखते हैं तो उनमें जिज्ञासा जाग उठती है कि इसे पीने से क्या होता है। गायत्री परिवार नशा छुड़ाने को लगातार कायर्च करता रहता है। अधिकतर युवा इसमें ही खुशी तलाशने लगते है। डॉक्टर हमेशा नशे के खिलाफ जंग में सहयोग करने को तैयार है। कई लोगों को नशा मुक्त कराया है। -हेमराज पांचाल गायत्री परिवार<br /><strong>- तनाव कम करने के लिए नशे का सेवन</strong></p>
<p>नशा कुछ पल के लिए व्यक्ति को सुकून दे सकता है। लेकिन यह बाद में जीवन बर्बाद कर देता है। विशेष रूप से युवा पढ़ाई के तनाव को कम करने के  लिए घर वालों से छिपकर नशा करने लगते है। शुरुआत में नशा करने से खुशी मिलती है तो अधिकतर युवा इसमें ही खुशी तलाशने लगते है। डॉक्टर हमेशा नशे के खिलाफ जंग में सहयोग करने को तैयार है। कई लोगों को नशा मुक्त कराया है। नशा मुक्ति केन्द्रों में जो दवाईयां दी जाती है। वह बिना डॉक्टर की सलाह से और निर्धारित मात्रा में दी जाती है। जिसे बाद में कम कर दिया जाता है। <br /><strong>- डॉ. मिथलेश खींची, असि. प्रोफेसर मेडिकल कॉलेज कोटा </strong></p>
<p><strong>आमजन को निभानी होगी जिम्मेदारी</strong><br />नारकोटिक्स विभाग तो अपने स्तर पर नशे की सप्लाई करने वालों पर कार्रवाई कर रहा है। बड़ी मात्रा में दूसरे प्रदेशों से आने वाली नशे की खैप को कोटा में भी पकड़ा है। लेकिन यदि आमजन भी अपनी जिम्मेदारी निभाए और विभाग को नशे से संबंधित सूचना दे तो उनकी सूचना को गुप्त रखकर कार्रवाई की जा सकती है। सामूहिक प्रयासों से इसे काफी हद तक कम किया जा सकता है। <br /><strong>- अरविंद सक्सेना, अधीक्षक केन्द्रीय नारकोटिक्स ब्यूरो</strong></p>
<p><strong>दृड़Þ इच्छा शक्ति से छोड़ा नशा</strong><br />प्रकाश कुमार,मोहित दाधीच व मनोज गौतम ने बताया कि वे पहले नशे की गिरफ्त में जकड़ चुके थे। लेकिन अब उन्होंने इसे छोड़ दिया है। नशा छोड़ चुके इन लोगों ने बताया कि किसी को जेल में तो किसी को दोस्तों से नशे की लत लगी थी। नशा करने से उन्हें अच्छा महसूस होता था। पहले नशे के बिना नींद नहीं आती थी। शरीर के साथ-साथ पैसे का भी नुकसान हुआ। कई बार नशा मुक्ति केन्द्र में गए वहां दवाई भी ली लेकिन फिर भी फर्क नहीं पड़ा। बाद में नशा मुक्ति केन्द्र में जाकर वहां नशा छोड़ने की दृढ़ इच्छा शक्ति की।  पहले जहां दवाई अधिक लेते थे और नीनद कम आती थी। उसके बाद धीरे-धीरे दवाई भी कम कर दी। अब बिना दवाई के नींद भी अच्छी आती है और जीवन खुशहाल है। नशा छोड़ने वालों ने बताया कि अब वे नौकरी कर खुशहाल जीवन जी रहे है। साथ ही अन्य लोगों को भी इससे दूर रहने की सलाह दे रहे है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 22 Feb 2025 16:30:38 +0530</pubDate>
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                <title>पुलिस ने नाकाबंदी के दौरान ट्रक को रोका, 15 लाख रुपए की अवैध शराब बरामद</title>
                                    <description><![CDATA[डूंगरपुर जिले के धम्बोला थाना क्षेत्र में पुलिस ने एक से करीब 350 कार्टून बरामद कर एक व्यक्ति को गिरफ्तार किया है]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/police-stopped-the-truck-during-the-blockade-and-recovered-illegal/article-97720"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-12/19.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। डूंगरपुर जिले के धम्बोला थाना क्षेत्र में पुलिस ने एक से करीब 350 कार्टून बरामद कर एक व्यक्ति को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने बताया कि धम्बोला थाना के बाहर गत रात्रि नाकाबंदी के दौरान आए ट्रक को रुकवा कर तलाशी ली, तो उसमें 354 कार्टून बरामद किए। </p>
<p>बरामद शराब की बाजार कीमत करीब 15 लाख रुपए बताई गई है। पुलिस ने इस मामले में ट्रक चालक को गिरफ्तार किया है। पुलिस मामले की जांच कर रही है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 15 Dec 2024 17:10:23 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur]]></dc:creator>
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                <title>1600 किलोमीटर दूर से 1.14 करोड मादक पदार्थ लेकर आया तस्कर, सीबीएन ने ओछडी टोल पर दबोचा</title>
                                    <description><![CDATA[एंटी गैंगस्टर टास्क फोर्स पुलिस मुख्यालय की टीम ने नशे के विरुद्ध एक बार फिर बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया है]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/cbn-caught-the-smuggler-who-brought-114-crore-drugs-from/article-97149"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-12/9930400-sizee-(4)1.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। एंटी गैंगस्टर टास्क फोर्स पुलिस मुख्यालय की टीम ने नशे के विरुद्ध एक बार फिर बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया है। टीम की सूचना पर रविवार देर रात केंद्रीय नारकोटिक्स ब्यूरो की टीम द्वारा मध्य प्रदेश-राजस्थान के चित्तौड़गढ़ जिले की सीमा पर स्थित ओछडी टोल नाका पर एक आयशर ट्रक को रुकवा कर तलाशी में 1.14 करोड रुपए से अधिक कीमत का 227 किलो 220 ग्राम अवैध गांजा जब्त किया है। एक महीने से पीछा कर रही थी एजीटीएफ, सूचना पुख्ता होते ही कार्रवाई की। नर्सरी के पौधे एवं सरसों के कट्टों की आड़ में ट्रक में छुपा रखा था 227 किलो से अधिक गांजा। भीलवाड़ा, चित्तौड़गढ़, पुष्कर में होना था सप्लाई ।<br />      <br />अतिरिक्त महानिदेशक पुलिस एंटी गैंगस्टर टास्क फोर्स  दिनेश एमएन बताया कि गिरफ्तार तस्कर चित्तौड़गढ़ जिले में थाना गंगरार अंतर्गत सोनियाणा गांव निवासी श्यामलाल शर्मा पुत्र नानूराम (48) है। आरोपी करीब 10 से 15 दिन पहले अवैध मादक पदार्थ की खेप लाने विशाखापट्टनम के जगदलपुर क्षेत्र में गया था। लौटते समय करीब 1600 किलोमीटर की दूरी तय कर बिना किसी रूकावट के राजस्थान बॉर्डर पहुंच गया। सतर्कता दिखाते हुए एजीटीएफ ने राजस्थान में प्रवेश से पहले ही आरोपी को पकड़वा दिया। आरोपी को यह माल राजस्थान में चित्तौड़गढ़, भीलवाड़ा और पुष्कर में सप्लाई करना था।<br />     <br />एडीजी एमएन ने बताया कि गैंगस्टर्स, वांछित अपराधियों, आपराधिक गिरोह एवं मादक पदार्थ, हथियार व शराब तस्करी में लिप्त बदमाशों की जानकारी प्राप्त करने एवं धर पकड़ के लिए उप महानिरीक्षक पुलिस  योगेश यादव एवं अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक सिद्धांत शर्मा के सुपरविजन में एजीटीएफ की विभिन्न टीमों को प्रदेश के अलग-अलग शहरों में भेजा गया है जो इनके बारे में गुप्त रूप से आसूचना संकलन कर लगातार आवश्यक कार्रवाई कर रही है।<br />एमएन ने बताया कि पुलिस निरीक्षक राम सिंह नाथावत के नेतृत्व में गठित की गई टीम सब इंस्पेक्टर प्रताप सिंह, एएसआई बनवारी लाल, हेड कांस्टेबल हेमंत शर्मा व महेश सोमरा, कांस्टेबल गोपाल धाबाई, विजय सिंह, देवेंद्र, गंगाराम, जितेंद्र व ड्राइवर दिनेश शर्मा पश्चिमी राजस्थान में ऐसे ही आपराधिक गिरोह एवं वांछित बदमाशों के बारे में आसूचना संकलन कर रहे है।</p>
<p>1 महीने से पीछे लगी थी एजीटीएफ <br />आसूचना संकलन के दौरान टीम के सदस्य कांस्टेबल गोपाल धाबाई व विजय सिंह को सूचना मिली कि सोनियाणा गांव निवासी ट्रक ड्राइवर श्याम लाल थोड़े-थोड़े समय पर दक्षिण भारत जाकर नर्सरी के पौधों एवं अन्य खाद्य पदार्थों की आड़ में भारी मात्रा में नशे की खेप लेकर आता है। करीब एक महीने से एजीटीएफ की टीम आरोपी पर निगाह रख रही थी। सूचना डवलप करने के दौरान टीम को जानकारी हासिल हुई की 10-15 दिन पहले आरोपी भारी मात्रा में नशे की खेप लाने विशाखापट्टनम के लिए निकला है।</p>
<p>रतलाम से किया टीम ने पीछा <br />सूचना मिलते ही टीम मध्य प्रदेश पहुंची। तकनीकी सहायता से टीम ने रतलाम से आरोपी के ट्रक का पीछा किया। भनक लगते ही शातिर आरोपी ने मध्य प्रदेश में राजस्थान बॉर्डर के पास अपना ट्रक वहीं खड़ा कर लिया। रात का अंधेरा होने एवं अन्य राज्य मध्य प्रदेश होने की वजह से टीम प्रभारी द्वारा तुरंत चित्तौड़गढ़ स्थित केंद्रीय नारकोटिक्स ब्यूरो के अधिकारियों से बातचीत कर ट्रक के बारे में संपूर्ण जानकारी दी।</p>
<p>ओछडी टोल नाके पर पकड़ा, 5 किलो व 500 ग्राम के बना रखे थे पैकेट <br />ब्यूरो की कमिश्नर दिनेश बौध एवं डिप्टी कमिश्नर नरेश बुंदेला के निर्देशन में नारकोटिक्स टीम द्वारा बॉर्डर पर स्थित ओछडी टोल नाके पर सन्दिग्ध ट्रक को रुकवाया गया। ट्रक पर लगे तिरपाल को हटाकर देखा गया, उसमें सरसों की बोरियों एवं नर्सरी के पौधे रखे हुए थे। इन सबके नीचे छोटे-छोटे पैकिंग में बहुत से पैकेट थे, जिनमे अवैध मादक पदार्थ गांजा भरा हुआ था। टीम ने ट्रक से 5 किलो के 38 पैकेट व 500 से 900 ग्राम के 48 पैकेट बरामद किए, जिनमें कुल 227 किलो 230 ग्राम गांजा भरा हुआ था।</p>
<p>शातिर किस्म का है आरोपी, पहली बार ही पकड़ा गया<br />गिरफ्तार तस्कर श्यामलाल शर्मा काफी शातिर किस्म का है, पहली बार यह मादक पदार्थ की तस्करी करते पकड़ा गया है, जबकि प्रारंभिक पूछताछ में इसने 10 से 15 बार मादक पदार्थ की तस्करी करना स्वीकार किया है। मामले का अग्रिम अनुसंधान सीबीएन टीम चित्तौड़गढ़ द्वारा किया जा रहा है। जिसमें आरोपी द्वारा अब तक की गई तस्करी की घटनाओं, इसके गिरोह के नेटवर्क एवं मादक पदार्थ की खरीद फरोख्त के संबंध में पूछताछ की जा रही है। राजस्थान के भीलवाड़ा, चित्तौड़गढ़ और पुष्कर में किस व्यक्ति को माल सप्लाई करना था, इसके संबंध में भी पूछताछ की जा रही है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 09 Dec 2024 18:54:18 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur]]></dc:creator>
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                <title>नशा जब्त नहीं होता तो क्या होता!</title>
                                    <description><![CDATA[करोड़ों का नशा जब्त नहीं होता तो यह युवाओं का शरीर खोखला कर देता ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/what-would-have-happened-if-the-drugs-were-not-confiscated/article-96770"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-12/9930400-sizee-(4)3.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। नशा नाश का कारण होता है। यह सभी जानते हैं। उसके बाद भी कई लोग नशे का सेवन कर रहे है। हाड़ौती में सबसे अधिक नशा युवाओं की नसों में घुल रहा है। नारकोटिक्ट व पुलिस विभाग द्वारा कार्रवाई कर यदि करोड़ों रुपए का नशा जब्त नहीं किया जाता तो यह युवाओं के शरीर को और अधिक खोखला कर देता। कोटा शिक्षा नगरी के साथ ही पर्यटन नगरी के रूप में भी विकसित हो रहा है।यहां स्थानीय लोगों के अलावा बड़ी संख्या में युवा बाहर से आकर भी रह रहे है। कई नौकरी पेशा हैं तो कई विद्यार्थी के रूप में रह रहे है। हालत यह है कि कोटा में राजस्थान के कई जिलों के अलावा मध्य प्रदेश तक से नशा पहुंच रहा है। स्मैक, अफीम, गांजा, डोडा पोस्त के रूप में नशा युवाओं के शरीर में पहुंचाया जा रहा है। स्मैक की छोटी-छोटी पुड़ियाएं, नशे की सिगरेट और अन्य तरह से नशा युवाओं को अपनी गिरफ्त में जकड़ रहा है। जिस तरह से पुलिस और नारकोटिक्स विभाग द्वारा पिछले सालों में मादक पदार्थों के खिलाफ कार्रवाई की गई है। उससे अंदाजा लगाया जा सकता है। जिस बड़ी मात्रा में नशा जब्त किया गया है वह तो बहुत कम है। उससे कहीं अधिक नशा समाज में पहुंच चुका होगा। यदि यह मादक पदार्थ भी जब्त नहीं होता तो यह उस मात्रा को बढ़ाने में काफी अधिक सहायक होता। कोटा शहर में वैसे तो हर क्षेत्र में नशे का कारोबार हो रहा है। लेकिन सबसे अधिक कोचिंग क्षेत्र में  युवा नशे की गिरफ्त में आ रहे है। एनर्जी ड्रिंक्स व स्मरण शक्ति बढ़ाने समेत कई तरह से युवाओं को नशा प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष रूप से दिया जा रहा है। पुलिस और नारकोटिक्स विभाग द्वारा की गई यह कार्रवाई तो नाम मात्र की है। इसके अलावा न जाने कितना नशा युवाओं की नसों में पहुंच चुका होगा। </p>
<p><strong>मध्य प्रदेश की टीम ने किया था 900 किलो डोडा चूरा जब्त</strong><br />हाल ही में मध्य प्रदेश की नारकोटिक्स टीम करीब 900 किलो से अधिक मादक पदार्थ डोडा चूरा जब्त कर आरोपियों को गिरफ्तार कर ले जा रही थी। जिसे कोटा के आस-पास तस्करों ने छुड़ाने का प्रयास किया था। हालांकि तस्कर इसमें सफल नहीं हो सके। इस तरह की घटना पूर्व में भी कई बार हो चुकी है। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि नशे को समाज में पहुंचाने का किस हद तक साजिश रची जा रही है। इससे पहले बांसवाड़ा में भी कोचिंग क्षेत्र में बड़ी मात्रा में मादक पदार्थ जब्त किया गया था। कोटा में भी शहर पुलिस की ओर से समय-समय पर नशा करने वालों व मादक पदार्थ बेचने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जाती रही है। जिसमें स्मैक, चरस व गांजा जब्त कर आरोपियों को भी गिरफ्तार किया गया। वहीं नारकोटिक्स विभाग द्वारा भी लगातार कार्रवाई की जा रही है। जिसमें पिछले सालकी तुलना में अधिक कार्रवाई की गई है। साथ ही करोड़ों  रुपए का मादक पदार्थ जब्त किया गया है। </p>
<p><strong>करीब तीन गुना अधिक डोडा चूरा जब्त</strong><br />नारकोटिक्स विभाग द्वारा मादक पदार्थ तस्करों के खिलाफ लगातार और बड़ी कार्रवाई की जा रही है। जिसमें गत वर्ष की तुलना में इस वर्ष करीब तीन गुना अधिक डोडा चूरा जब्त किया गया है।  विभाग से प्राप्त जानकारी के अनुसार वर्ष 2023 में7855.37 किलो डोडा चृूरा जब्त किया गया था। वह इस साल नवम्बर तक ही 20341.12 किलो जब्त किया गया। इसी तरह से गत वर्ष 218.31किलो अफीम, 1 किलो हेरोइन,145.56 किलो गांजा समेत अन्य मादक पदार्थ जब्त किया था। वहीं इस साल 86.761किलो अफीम,1.354 किलो हेरोइन और 37.51 किलो गांजा समेत अन्य मादक पदार्थ जब्त किया गया था। विभाग से प्राप्त जानकारी के अनुसार जब्त किए गए मादक पदार्थ की बाजार कीमत करोड़ों रुपए है। </p>
<p><strong>गत वर्ष से दोगुनी कार्रवाई</strong><br />नारकोटिक्स विभाग कोटा ने वर्ष 2023 में मादक पदार्थ जब्त करने के खिलाफ जितनी कार्रवाई की थी उससे दो गुनी से अधिक कार्रवाई इस साल के 11 महीने में ही की जा चुकी है। विभाग से प्राप्त जानकारी के अनुसार गत वर्ष कुल 35 मामले दर्ज हुए थे। वहीं इस साल अभी तक 80 मामले दर्ज हो चुके हैं। गत वर्ष कुल 45 आरोपी गिरफ्तार किए गए थे। वहीं इस बार आरोपियों की संख्या भी दो गुनी से अधिक 101 रही है। यदि ये आरोपी गिरफ्तार नहीं होते तो ये समाज में युवाओं को नशा पहुंचाने में  अधिक भागीदार बनते। लेकिन तस्करों के खिलाफ की गई कार्रवाई से उसे किसी हद तक कम किया गया है। </p>
<p><strong>जेल में आधे स्मैक ची</strong><br />इधर जानकारी के अनुसार कोटा की जेल में वर्तमान में जितने आरोपी व बंदी है। उनमें से करीब आधे बंदी स्मैकची व नशे के आदी वाले हैं। पुलिस भी नशा करने वालों को पकड़ने से कतराने लगी है। इसका कारण नशा करने वालों को पकड़कवर उन्हें संभालना व उनके लिए नशे की व्यवस्था कर पाना उनके लिए किसी सिर दर्द से कम नहीं है। </p>
<p><strong>शरीर को खोखला कर शहर की बिगाड़ रहे सूरत</strong><br />नशा युवाओं के शरीर को खोखला तो कर ही रहा है। साथ ही नशा करने वाले अपराधी बन रहे हैं। नशेड़ी शहर में आए दिन चोरियां करके शहर की सृूरत बिगाड़ रहे हैं। कहीं लोहे की रैलिंग चोरी कर रहे हैं तो कहीं घरों से साइकिल, बाइक, पानी व बिजली के मीटर और मेन रोड से डेकोरेटिव लाइटें तक चोरी कर रहे हैं। </p>
<p><strong>युवा पीढ़ी को नशे से बचाना आवश्यक</strong><br />युवा वर्ग देश का भविष्य है। उसमें देश के लिए बहुत कुछ करने की क्षमता है। उसका सही जगह पर उपयोग होना चाहिए। लेकिन वर्तमान में जिस तरह से युवा नशे की गिरफ्त में जकड़ रहा है उसे इससे बचाने की आवश्यकता है। नशा ही युवा पीढ़ी को उसकी दिशा से भटकाने के साथ ही परिवारों के टृटने का कारण भी बन रहा है।नशे के खिलाफ संबंधित विभागों को लगातार कार्रवाई करते रहना होगा। यदि करोड़ों का नशा जब्त नहीं होता तो यह युवाओं की नसों में ही पहुंचता।  <br /><strong>-बल्लभ पोरवाल, छावनी</strong></p>
<p>मादक पदार्थ तस्करों के खिलाफ विभाग द्वारा समय-समय पर कार्रवाई की जाती है। पिछले दो साल में ही कार्रवाई करते हुए सवा सौ से अधिक मामले दर्ज हुए। डेढ़ सौ से अधिक आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। विभाग का प्रयास है कि अधिक से अधिक कार्रवाई कर मादक पदार्थ व नशे की सामग्री को समाज में पहुंचने से रोका जा सके। विभाग का प्रयास है कि कोटा को नशा मुक्त बनाया जाए। इसके लिए छोटे-छोटे तस्करों की जगह बड़े सप्लायरों को पकड़ने की कार्ययोजना बनाई जाएगी। <br /><strong>-नरेश बुंदेल, आयुक्त, नारकोटिक्स विभाग कोटा </strong></p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 05 Dec 2024 14:15:47 +0530</pubDate>
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