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                <title>बसों का ठहराव नहीं होने से आमजन परेशान, लिखित शिकायत के बावजूद नहीं हुई कार्रवाई</title>
                                    <description><![CDATA[ना चाहते हुए भी महिला यात्रियों सहित अन्य को यहा-वहा बैठने पर मजबूर होना पड़ता है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/common-people-are-troubled-due-to-lack-of-bus-halt/article-119106"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-07/rtroer-(4)1.png" alt=""></a><br /><p>मोईकलां। मेगा हाइवे के पास मोईकलां में तत्कालीन कांग्रेस सरकार के समय विधायक कोष से बनवाए गए यात्री प्रतीक्षालय का लाभ पूरी तरह से जनता को नहीं मिल पा रहा है। प्रतीक्षालय के सामने रोड़वेज बसों का ठहराव नहीं होने के कारण यात्री प्रतीक्षालय सूना पड़ा रहता है। जानकारी के अनुसार कस्बे वासियों की मांग पर मेगा हाइवे के पास लोगो की सुविधा के लिए यात्री प्रतीक्षालय बनवाया गया था। यहां यात्रियों के बैठने के लिए कोई भी सार्वजनिक स्थान नही होने के कारण विशेष तौर पर महिला यात्रियों को काफी परेशान होना पड़ता था। प्रतीक्षालय बनकर तैयार होने के बाद से यहां पर शायद ही कभी रोड़वेज बसों का ठहराव हुआ हो। ऐसा भी नहीं है कि यात्री प्रतीक्षालय पर यात्री बसों का इंतजार नहीं करते हों। लेकिन यात्रियों को बैठा देखकर भी रोड़वेज चालक बसों का ठहराव नहीं करते। ऐसे में ना चाहते हुए भी महिला यात्रियों सहित अन्य को यहा-वहा बैठने पर मजबूर होना पड़ता है। </p>
<p><strong>लिखित शिकायत के बावजूद नहीं हुई कार्यवाही</strong><br />पूर्व सरपंच इन्द्रा शर्मा व गिरिजा शर्मा ने बताया कि अगर रोडवेज चालक यात्री प्रतीक्षालय के सामने नियमित बसों का ठहराव करे तो सर्दी, गर्मी व बारिश के समय यह जनता के लिए काफी आरामदायक व सुविधाजनक साबित हो सकता है। कस्बे के लोगों ने बताया कि पूर्व में भी बारां आगार प्रबंधक को बसों के ठहराव को लेकर लिखित रूप से शिकायत की गई थी। जिसके बाद भी आमजन की इस समस्या को गंभीरता से नही लिया गया।</p>
<p><strong>इनका कहना है</strong><br />आज ही समस्या की जानकारी मिली है। यात्री प्रतीक्षालय के सामने बसों के ठहराव को लेकर रूट के सभी चालकों को पाबंद किया जाएगा।<br /><strong>-योगेन्द्र सिंह, प्रबंधक, बारां आगार </strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 01 Jul 2025 16:46:38 +0530</pubDate>
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                <title>68 करोड़ को सवा साल से उपयोग का इंतजार</title>
                                    <description><![CDATA[ अस्पताल में डीलक्स कॉटेज वार्ड चालू नहीं होने से यहां लोग आॅपरेशन कराने से कतराते है। 
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/68-crores-waiting-to-be-used-for-one-and-a-quarter-years/article-95328"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-11/27rtrer-(5)4.png" alt=""></a><br /><p> कोटा । एमबीएस अस्पताल परिसर में डीलक्स कॉटेज वार्ड और नया अस्पताल भवन का लोकार्पण हुए सवा साल  होने आया  लेकिन अभी तक इसके शिफ्टिंग का कार्य शुरू नहीं हुआ। कांग्रेस सरकार ने 27 अप्रेल 2023 को इसका  लोकार्पण तो कर दिया लेकिन उसके बाद भाजपा सरकार आने से इस भवन का शिफ्टिंग कार्य धीमा हो गया। अभी भवन में उपकरण से लेकर अन्य मूलभूत सुविधाएं और स्टाफ लगाना बाकी है। ऐसे में  पिछले एक साथ से तैयार किए भवन पर अभी ताले लगे हुए है। सरकार की ओर से 68 करोड़ रुपए लगाकर भवन तो तैयार कर दिया लेकिन अभी इसको चालू करने में समय लग रहा है।  </p>
<p><strong>68 करोड़ रुपए से तैयार भवन का नहीं हो रहा उपयोग</strong><br />68 करोड रुपए की लागत से तैयार नए अस्पताल भवन और डीलेक्स कॉटेज वार्ड का पिछले सवा साल से कोई उपयोग नहीं हो रहा है। अस्पताल में डीलक्स कॉटेज वार्ड चालू नहीं होने से यहां लोग आॅपरेशन कराने से कतराते है। जबकि एमबीएस अस्पताल में अच्छे डॉक्टर और संसाधन होने के बाद भी लोगों निजी अस्पतालों में इलाज कराना पड़ रहा है।  एमबीएस परिसर में तैयार हुए  नए अस्पताल में 340 बेड  है। अस्पताल का निर्माण कार्य यूआईटी द्वारा कराया गया है। जिसमें करीब 68 करोड़ खर्च किए गए है। एमबीएस अस्पताल प्रशासन ने बताया कि डीलक्स कॉटेज वार्ड व नया अस्पताल भवन का निर्माण कार्य पूरा हो चुका है। अब फर्नीचर और उपकरण लगाना बाकी है। इसमें सभी अत्याधुनिक सुविधाएं होगी। इसके अलावा इसके पीछे प्रशासनिक भवन आकार ले चुका है। नया अस्पताल शुरू हो जाने से जगह की कमी नहीं रहेगी।</p>
<p><strong>मौसमी बीमारियों के सीजन में बेड की कमी से आती है परेशानी</strong><br />मौसमी बीमारियों के सीजन में सबसे ज्यादा बेड की कमी खलती है। नया अस्पताल शुरू हो जाए तो बेड की कमी से राहत मिलेगी।  अभी कई बार बेड की दिक्कत आती है।  खासकर मौसमी बीमारियों के सीजन में बेड का कम होने से मरीजों को भर्ती करने में परेशानी आती है। नया अस्पताल शुरू होने से  नया अस्पताल शुरू होने से परेशानी दूर हो जाएगी। बेड की कमी के कारण अभी मरीजों को अन्य जगह रैफर करना होता था। पिछले साल भी डेंगू के समय  मरीज अधिक आने से  मरीजों को मेडिकल कॉलेज और रामपुरा सैटेलाइट अस्पताल शिफ्ट  करना पड़ा था।  ऐसी परेशानियों से बचने के लिए अस्पताल का शुरू होना जरूरी है। लेकिन अभी तक इसमें कई छोटे बड़े तकनीकी कार्य बाकी होने से यह शुरू नहीं हो पा रहा है। </p>
<p><strong>पीजी हॉस्टल का काम अभी नहीं हुआ पूरा</strong><br />एमबीएस के पीछे पीजी स्टूडेंट्स के लिए हॉस्टल का कार्य भी  धीमी गति से चल रहा है। अभी इसमें फिनिंशिग वर्क बाकी है।  एक दो फ्लॉर का कार्य अंतिम चरण में चल रहा है। इसमें 120 रुम है। जबकि, मेडिकल कॉलेज में 150 रुम है। इस तरह से 270 रुम हो जाएंगे। यानि कि स्टूडेंट्स के लिए पर्याप्त रूम की व्यवस्था हो जाएगी। हॉस्टल का निर्माण कार्य तो पहले ही शुरू हो गया था। हॉस्टल भवन में फिनिशिंग वर्क चल रहा है।</p>
<p><strong>इनका कहना है</strong><br />एमबीएस अस्पताल परिसर में डीलक्स कॉटेज वार्ड व नया अस्पताल  को शीघ्र शुरू करने के प्रयास किए जा रहे है। अभी स्टाफ और उपकरण कुछ कार्य बाकी है उनको पूरा किया जा रहा है। इसमें छोटे छोटे कार्य बाकी उनको एक एक पूरा कराया जा रहा है। उसके बाद इसमें शिफ्टिंग की जाएगी।<br /><strong>-डॉ. संगीता सक्सेना, प्रधानाचार्य मेडिकल कॉलेज </strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 19 Nov 2024 17:01:35 +0530</pubDate>
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                <title>सरकारी जांच प्रक्रिया के इंतजार में दब गई उम्मीद</title>
                                    <description><![CDATA[ खाद्य सुरक्षा योजना में नाम जुड़वाने के लिए जिले के करीब डेढ़ लाख से अधिक लाभार्थी तीन माह से इंतजार कर रहे हैं। नए लाभार्थियों ने ईमित्रों के माध्यम से नाम जुड़वाने के लिए आॅनलाइन आवेदन किया था। अब तक आवेदनों फॉर्मो की जांच नहीं हो पाई है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/waiting-for-government-investigation-process-buried-hope/article-19983"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-08/uit-ki-zameen-par-atikraman..kota-news-22.8.20221.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। खाद्य सुरक्षा योजना में नाम जुड़वाने के लिए जिले के करीब डेढ़ लाख से अधिक लाभार्थी तीन माह से इंतजार कर रहे हैं। नए लाभार्थियों ने ईमित्रों के माध्यम से नाम जुड़वाने के लिए आॅनलाइन आवेदन किया था। अब तक आवेदनों फॉर्मो की जांच नहीं हो पाई है। इस कारण लाभार्थी सरकारी राशन के लिए तरस रहे हैं। कोटा जिले में काफी संख्या में लोग पात्र होने के बावजूद खाद्य सुरक्षा योजना के लाभ वंचित हो रहे थे। ऐसे में लोगों को योजना का लाभ देने के लिए करीब दो साल बाद अप्रेल 2022 में खाद्य सुरक्षा का पोर्टल खोला गया था। इसकी अवधि केवल 12 दिन ही होने से हजारों लोग जानकारी के अभाव में पोर्टल के माध्यम से आवेदन नहीं कर पाए थे। इसके बाद 28 मई तक पोर्टल खोलकर आॅनलाइन आवेदन लिए गए। इस अवधि में कोटा जिले के लगभग डेढ़ लाख लोगों ने आॅनलाइन आवेदन किए थे। आवेदन फार्म जमा हुए तीन माह का समय बीत चुका है, लेकिन अभी तक इनकी जांच नहीं हो पाई है। इस कारण लाभार्थी परिवारों को अभी तक सरकारी राशन नहीं मिल पाया है। रोजाना लगा रहे चक्कर आॅनलाइन आवेदन जमा करवाने के बाद प्राथी ईमित्र केन्द्रों पर रोजाना चक्कर लगा रहे हैं, लेकिन उन्हें कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिल पा रहा है। कई लोग रसद विभाग कार्यालय में जानकारी करने पहुंचते हैं। इसके बावजूद नाम जुड़ने के सम्बंध में कोई जवाब नहीं मिल रहा है। इससे पात्र लोगों को बाजार से महंगी दर पर राशन सामग्री खरीदनी पड़ रही है। इस सम्बंध में ईमित्र संचालकों का कहना है कि उनके पास खाद्य सुरक्षा योजना में नाम जोड़ने की कोई जानकारी रसद विभाग से नहीं मिल रही है। अभी तक आवेदन फॉर्मो की जांच नहीं हो पाई है। तो इनका नहीं बनेगा कार्ड नए आवेदनों में यदि किसी परिवार की वार्षिक आय एक लाख रुपए से ज्यादा है तो वह खाद्य सुरक्षा योजना में चयन के लिए अपात्र होगा। सरकार ने अपात्रता के लिए छह श्रेणियां निर्धारित की है। इसमें आवेदक परिवार का कोई भी सदस्य आयकरदाता होने, परिवार का सदस्य सरकारी, अर्द्धसरकारी, स्वायत्तशासी संस्था में नियमित कर्मचारी होने, एक लाख रुपए से ज्यादा पेंशन, चौपहिया वाहन, नगर परिषद क्षेत्र में एक हजार वर्ग फीट और नगर पालिका क्षेत्र में 1500 वर्ग फीट पक्का आवासीय या व्यावसायिक परिसर और ग्रामीण क्षेत्र में 2000 वर्ग फीट से बड़ा मकान होने पर अपात्र माना जाएगा। यह है अधिनियम राज्य में राष्टÑीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम 2 अक्टूबर 2013 से लागू किया गया था। पात्र परिवारों का चयन राज्य सरकार करती है। राज्य में राष्टÑीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम के तहत अधिसूचित मापदंडों के अनुरूप पात्र परिवारों का चयन 32 समावेशन श्रेणियों और 7 निष्कासन श्रेणियों के मापंदडों के आधार पर अपील प्रक्रिया से किया जाता है। राज्य सरकार के आवेदन फॉर्मो की जांच के सम्बंध में अभी तक कोई आदेश नहीं मिला है। आदेश मिलने के बाद फॉर्मो की जांच का काम शुरू कर दिया जाएगा। - नीलकमल, प्रवर्तन निरीक्षक रसद विभाग</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 22 Aug 2022 16:45:52 +0530</pubDate>
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                <title>उदघाटन के इंतजार में ग्रेडिंग मशीन </title>
                                    <description><![CDATA[एशिया की सबसे बड़ी मंडी भामाशाह मंडी में ग्रेडिंग मशीन खराब होने के कारण किसानों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। करीब 300000 की लागत से यह मशीन तैयार करवाई गई थी। 6 माह बाद भी इसका उद्घाटन नहीं होने से किसानों को इसका लाभ नहीं मिल पा रहा है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/grading-machine-waiting-to-be-inaugurated/article-11811"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-06/132.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। एशिया की सबसे बड़ी मंडी भामाशाह मंडी में ग्रेडिंग मशीन खराब होने के कारण किसानों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। करीब 300000 की लागत से यह मशीन तैयार करवाई गई थी। 6 माह बाद भी इसका उद्घाटन नहीं होने से किसानों को इसका लाभ नहीं मिल पा रहा है। इस कारण किसानों को अपनी फसल की साफ सफाई करवाने में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। <br /><br />किसानों ने बताया कि मंडी में ग्रेडिंग मशीन तैयार है। इसके बावजूद उसे चलाया नहीं जा रहा है। जिससे किसानों को मंडी के बाहर जाकर अपनी फसल की साफ सफाई करवानी पड़ रही है। इसके लिए किसानों को प्रति क्विंटल डेढ़ सौ रुपए का भुगतान करना पड़ता है। यदि मंडी परिसर में स्थित ग्रेडिंग मशीन को चालू कर दिया जाता है तो किसानों को फायदा ही मिलेगा। इस मशीन के माध्यम से 50 रुपए प्रति क्विंटल में ही फसल की साफ सफाई हो जाएगी। अभी किसान को 1 क्विंटल पर 100 का नुकसान उठाना पड़ रहा है। मंडी प्रशासन को इस संबंध में कई बार अवगत करवाया लेकिन किसानों की समस्या पर ध्यान नहीं दिया जा रहा है। इससे किसानों को नुकसान हो रहा है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 10 Jun 2022 14:30:58 +0530</pubDate>
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                <title> कांग्रेस विधायकों का उदयपुर कैम्प में पहुंचना जारी, तीन निर्दलीय विधायक देर रात को पहुंचे, बाकी का इंतजार</title>
                                    <description><![CDATA[उदयपुर। राज्यसभा चुनाव को लेकर कांग्रेस विधायकों की बाड़ाबंदी शुरू हो चुकी है। इसके लिए उदयपुर को सबसे सुरक्षित स्थान माना गया है। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की सूचना पर तीन निर्दलीय विधायक बुधवार देर रात को उदयपुर पहुंच चुके हैं जबकि शेष विधायकों के आने का क्रम भी शुरू हो चुका है]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/udaipur/---congress-mlas-continue-to-reach-udaipur-camp-three-independent-mlas-arrived-late-at-night--waiting-for-the-rest/article-11118"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-06/111.jpg" alt=""></a><br /><p> उदयपुर। राज्यसभा चुनाव को लेकर कांग्रेस विधायकों की बाड़ाबंदी शुरू हो चुकी है। इसके लिए उदयपुर को सबसे सुरक्षित स्थान माना गया है। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की सूचना पर तीन निर्दलीय विधायक बुधवार देर रात को उदयपुर पहुंच चुके हैं जबकि शेष विधायकों के आने का क्रम भी शुरू हो चुका है। जयपुर में मुख्यमंत्री आवास से वाहनों में सवार होकर विधायकों की टीम शाम को रवाना हो चुकी है जिसके देर रात तक उदयपुर पहुंची।</p>
<p> देर रात पहुंचे तीनों विधायक किशनगढ़ से सुरेश टांक, मारवाड़ जंक्शन के खुशवीर सिंह, दूदू से विधायक बाबूलाल नागर शहर के बाहर ताज अरावली होटल में ठहरे हैं। सिरोही से निर्दलीय विधायक व मुख्यमंत्री के राजनीतिक सलाहकार संयम लोढ़ा 5 जून के बाद उदयपुर आएंगे। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के करीबी रशीद खान राजस्थान विधानसभा अध्यक्ष डॉ सीपी जोशी के साथ पहले ही उदयपुर पहुंच चुके हैं और वे यहां सारा प्रबंध संभाले हुए हैं। शुक्रवार को शिक्षा मंत्री बीडी कल्ला भी पहुंचेंगे। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के आवास पर लंच के बाद विधायकों का दल वाहनों में सवार होकर शाम को जयपुर से उदयपुर से रवाना हुआ। इनका रास्ते में भीलवाड़ा में ठहराव होगा, जहां राजस्व मंत्री रामलाल जाट की ओर से डीनर की व्यवस्था की गई है।</p>
<p><br />कांग्रेस वर्किंग कमेटी के सदस्य रघुवीरसिंह मीणा ने बताया कि वे खुद शाम को जयपुर से रवाना हुए हैं। मुख्यमंत्री आवास पर सभी विधायक थे और उन्हें लाने के लिए वाहन लगे हुए थे। वे अन्य विधायकों के साथ नहीं आकर अलग आ रहे हैं और देर रात को उदयपुर पहुंचेंगे। उदयपुर में विधायकों को राज्यसभा चुनाव होने से पहले तक ठहराने की सारी व्यवस्था महेश जोशी और महेंद्र चौधरी देख रहे है। मीणा ने बताया कि सारी व्यवस्थाएं मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के निर्देश में हो रही है और वे स्वयं इनकी मॉनिटरिंग कर रहे हैं। यदि पार्टी को जरुरत होगी तो उन्हें जिम्मेदारी सौंपेगी तो वे बखूबी निभाएंगे। राज्यसभा चुनावों को लेकर भाजपा और कांग्रेस दोनों ही पार्टियों ने अपने बाड़े तैयार कर रहे हैं। अब राज्यसभा की चार सीटों के लिए होने वाले मतदान तक ये विधायक इन्हीं बाड़ों में रहेंगे।</p>
<p><br /><strong>कड़ी सुरक्षा में घेरा बाड़ास्थल को</strong><br />शहर से बाहर जिस सितारा होटल में ठहराए गए विधायकों को लेकर कड़ी सुरक्षा व्यवस्था की गई है। होटल में किसी भी बाहरी के प्रवेश पर पूरी तरह से रोक है। सिर्फ होटल के मेहमानों और कांग्रेस विधायकों को ही होटल में पूरी जांच पड़ताल के बाद प्रवेश दिया है। यहां ठहरने वाले विधायकों से यदि कोई मिलने आएगा भी तो विधायक और मिलने आने वाले पर पार्टी की ओर से पूरी निगरानी रखी जाएगी। मीडिया को यहां प्रवेश की अनुमति बिलकुल भी नहीं दी जा रही है। यहां तक कि होटल के बाहर लगे पीने के पानी के आरओ प्लांट से पानी भी पीने नहीं दिया जा रहा।</p>
<p><br /><strong>होटल में बुक कराए 142 कमरे</strong><br />राज्यसभा चुनाव में भाजपा समर्थित निर्दलीय प्रत्याशी सुभाष चंद्रा की सेंध के डर से उदयपुर लाए जा रहे कांग्रेस विधायकों के लिए यहां होटल में 142 कमरे बुक करवाए गए हैं। पार्टी सूत्रों के अनुसार इन विधायकों को आगामी 10 जून को होटल से सीधे जयपुर स्थित विधानसभा भवन में मतदान के लिए ले जाया जाएगा। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा मतदान तक विधायकों के साथ रहेंगे। कांग्रेस को गहलोत सरकार का समर्थन कर रहे 13 निर्दलीय विधायकों में टूट की आशंका है।</p>
<p><br /><strong>प्रत्याशी बाहरी होने से नाराजगी</strong><br />इस बीच, कांग्रेस विधायकों में भी राज्यसभा चुनाव में तीनों प्रत्याशी बाहरी होने से नाराजगी झलक रही है। कांग्रेस वर्किंग कमेटी के सदस्य रघुवीर सिंह मीणा दो दिन पूर्व  दिल्ली में सोनिया गांधी से भेंट कर बाहरी प्रत्याशियों के कारण उपजी जमीनी हकीकत से वाकिफ करवा चुके हैं। पूर्व प्रदेश सचिव नवीन यादव भी पार्टी को घेरते हुए कह चुके हैं कि कांग्रेस राजस्थान के मतदाताओं के साथ ठगी कर रही है। कांग्रेस ने सभी दस राज्यसभा प्रत्याशी बाहर के उतारे हैं और अगर ये जीत जाते हैं तो आगामी विधानसभा चुनाव में मतदाता कांग्रेस को राजस्थान की सत्ता से बाहर का रास्ता दिखाएगी। इधर, बसपा के प्रदेश अध्यक्ष भगवानसिंह बाबा भी राज्यपाल व विधानसभा अध्यक्ष को पत्र लिखकर उन छह विधायकों को राज्यसभा चुनाव में मतदान से रोकने का आग्रह कर चुके हैं जिन्होंने नियम विरुद्ध बसपा विधायक दल का कांग्रेस में विलय किया था। इससे जुड़ा मामला सुप्रीम कोर्ट में लंबित है। सूत्रों की मानेंतो बाहरी प्रत्याशी होने से नाराज भारतीय ट्राइबल पार्टी (बीटीपी) के दोनों विधायक भी मतदान में हिस्सा नहीं लेंगे। हालांकि कांग्रेस राज्यसभा चुनाव के लिए 126 विधायकों के समर्थन का दावा कर रही है। तीनों उम्मीदवारों के लए 123 विधायकों के वोट जरूरी हैं। कांग्रेस के खुद के 109 वोट हैं लेकिन माकपा और बीटीपी के दो-दो विधायकों के रूख ने कांग्रेस की चिंता बढ़ा रखी है।</p>
<p> </p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>उदयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 03 Jun 2022 13:29:43 +0530</pubDate>
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                <title>बरसों से रास्ते की बाट जोह रहा विरमानी गांव </title>
                                    <description><![CDATA[उपखंड मुख्यालय शाहाबाद ग्राम पंचायत के विरमानी गांव जिसमें लगभग 300 से अधिक लोग निवास करते हैं और यहां संपूर्ण सहरिया समाज के लोग निवास करते हैं। विरमानी गांव के आसपास लगभग 1000 बीघा से अधिक कृषि भूमि है और मुख्यालय ग्राम पंचायत से जुड़ा होने के बाद भी इस गांव में रहने वाले लोग बरसात के 4 महीने परेशानियों में गुजारते हैं। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/baran/virmani-village-waiting-for-the-way-for-years/article-10164"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-05/barso-se-raste-ki-baat-virmani-gaon-shahabaad-baran.jpg" alt=""></a><br /><p>शाहाबाद। उपखंड मुख्यालय शाहाबाद ग्राम पंचायत के विरमानी गांव जिसमें लगभग 300 से अधिक लोग निवास करते हैं और यहां संपूर्ण सहरिया समाज के लोग निवास करते हैं। विरमानी गांव के आसपास लगभग 1000 बीघा से अधिक कृषि भूमि है और  मुख्यालय ग्राम पंचायत से जुड़ा होने के बाद भी इस गांव में रहने वाले लोग बरसात के 4 महीने परेशानियों में गुजारते हैं क्योंकि इस गांव के लिए रास्ता नेशनल हाईवे 27 से लगभग 3 किलोमीटर अंदर है। जिसमें लोग सिरसा नदी को पार करके लोग अपने गांव तक पहुंचते हैं, क्योंकि इस गांव के आसपास की भूमि अत्यधिक उपजाऊ है और शहडोल तालाब से लगी होने के कारण सिंचाई की भी पर्याप्त व्यवस्था है। ऐसे में बरसों से इस गांव तक पहुंचने के लिए रास्ता सही नहीं है। नदी पर पुलिया बनी हुई नहीं है। जिससे बरसात के समय में लोगों को परेशानियों का सामना करना पड़ता है। कई दिनों के लिए यह गांव टापू बन कर रह जाता है क्योंकि एक तरफ  से नदी और दूसरी तरफ  से तालाब इस गांव का रास्ता रोक लेता है। जिसके चलते मजबूरी में गांव के लोगों को जंगल के रास्ते से आना पड़ता है। <br /><br /><strong> मंत्री विधायक तक लगा चुके हैं गुहार</strong><br /> विरमानी गांव के निवासी बारेलाल, बादामी बाबू, पप्पू आदि ने बताया कि हम बरसों से इस गांव में निवास कर रहे हैं परंतु अभी तक हमें आने जाने के लिए रास्ता नहीं बना है। बरसात के समय में आवश्यक वस्तुएं समाप्त हो जाने पर परेशानियों का सामना करना पड़ता है। जब तक नदी आती है कोई भी गांव से बाहर नहीं जा पाता। जब नदी में पानी कम होता है। जब ही शाहाबाद का से पहुंचकर खाने पीने का सामान ला पाते हैं क्योंकि हमारे द्वारा विधायक, मंत्री, सरपंच, अधिकारीगण आदि को कई बार हमारी समस्याओं के बारे में अवगत करा दिया परंतु किसी के द्वारा कोई ध्यान नहीं दिया जाता। <br /><br /><strong>कई लोग इस गांव से भी बने है सरकारी कर्मचारी</strong><br /> यह गांव छोटा सा सहरिया जाति के लोगों का गांव है परंतु इस गांव से कई लोग पुलिसकर्मी, शिक्षक, पटवारी आदि बन चुके हैं लेकिन इस गांव के हालात जस के तस बने हुए हैं। इस गांव में कक्षा पांचवी तक स्कूल भी संचालित है। जिसमें शिक्षक को भी बरसात के समय में परेशानियों का सामना करना पड़ता है। <br /><br /><strong>नदी को पार करके गांव पहुंचते है ग्रामीण</strong><br />सबसे अधिक परेशानी बरसात में आती है। इस गांव तक पहुंचने के लिए सिरसा नदी को पार करके जाना पड़ता है। <br />यह गांव आज भी विकास की मुख्यधारा से जुड़ नहीं पाया है जबकि यह गांव खेती की दृष्टि से सबसे अधिक महत्वपूर्ण स्थान रखता है क्योंकि इस गांव के आसपास की भूमि सबसे अधिक उपजाऊ भूमि मानी जाती है। <br /><br /><strong> चिकित्सा सुविधा के लिए भी तरस जाते हैं लोग</strong><br />जब अधिक बरसात होती है और नदी नाले उफ ान पर होते हैं। ऐसी स्थिति में गांव के लोग चिकित्सा सुविधा के लिए भी तरस जाते हैं, क्योंकि बरसात के समय में यह गांव टापू का रूप ले लेता है। चारों तरफ  पहाड़ों के पानी की निकासी होती है। जिसके चलते नदी नाले आदि आने पर इस गांव के लोग अपना इलाज कराने के लिए भी शाहाबाद मुख्यालय तक नहीं आ पाते। जिससे कई परेशानियों का सामना करना पड़ता है। <br /><br />पुलिया नहीं होने के कारण परेशानियों का सामना करना पड़ता है। बरसात के समय में आने जाने का रास्ता लगभग बंद हो जाता है। नदी पर पुलिया होना आवश्यक है। जब इतने विकास कार्य कराए जा रहे हैं तो इस नदी पर पुलिया का निर्माण कार्य कराया जाए। <br /><strong>- करण सहरिया, समाजसेवी, विरमानी</strong><br /><br />बरसात के समय में हम चिकित्सा सुविधा से वंचित रह जाते हैं गर्भवती महिलाओं को परेशानियों का सामना करना पड़ता है। हम खनन गोपाल मंत्री एवं विधायक से मांग करते हैं कि हमारे गांव के रास्ते को ठीक कराया जाए। <br /><strong>- तुलसा बाई, ग्रामीण महिला, विरमानी </strong><br /><br />बरसों से हमारे द्वारा रास्ते ठीक कराने की मांग की जा रही है। नदी पर पुलिया बनाने की मांग की जा रही है। अभी हालात ऐसे हैं कि 3 किलोमीटर का सफ र पैदल चलना भी मुश्किल हो जाता है। <br /><strong>- बादामी सहरिया, निवासी, विरमानी</strong><br /> <br />पुलिया निर्माण के लिए प्रस्ताव बनाकर भेज रखा है। अभी कोई स्वीकृति नहीं मिली है। जब स्वीकृति मिलेगी तो काम शुरू किया जाएगा। <br /><strong>- हरिप्रसाद मीणा, एक्सईएन, सार्वजनिक निर्माण विभाग, शाहाबाद</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>बारां</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 21 May 2022 15:17:31 +0530</pubDate>
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                <title>पांच साल से आशियाने का इंतजार कर रहे 300 परिवार </title>
                                    <description><![CDATA[  नगर विकास न्यास एक तरफ तो बिल्डरों व धनाढ्य लोगों को लाभ पहुंचाने के लिए बड़ी-बड़ी योजनाएं बना रहा है। उन्हें डेढ़ साल में पूरा करने के दावे किए जा रहे हैं। वहीं दूसरी तरफ आर्थिक रूप से कमजोर व अल्प आय वर्ग के लोगों के लिए अपनी ही एक आवासीय योजना को पांच साल में भी अमली जामा नहीं पहना सका है। न्यास की पार्थ अपार्टमेंट योजना में करीब 300 परिवार आशियाने का पांच साल से इंतजार कर रहे हैं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/300-families-waiting-for-shelter-for-five-years/article-9869"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-05/46546545465.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा । नगर विकास न्यास एक तरफ तो बिल्डरों व धनाढ्य लोगों को लाभ पहुंचाने के लिए बड़ी-बड़ी योजनाएं बना रहा है। उन्हें डेढ़ साल में पूरा करने के दावे किए जा रहे हैं। वहीं दूसरी तरफ आर्थिक रूप से कमजोर व अल्प आय वर्ग के लोगों के लिए अपनी ही एक आवासीय योजना को पांच साल में भी अमली जामा नहीं पहना सका है। न्यास की पार्थ अपार्टमेंट योजना में करीब 300 परिवार आशियाने का पांच साल से इंतजार कर रहे हैं। तत्कालीन भाजपा सरकार के समय में नगर विकास  न्यास द्वारा देवली अरब रोड़ पर पार्थ अपार्टमेंट नाम से आवासीय योजना लांच की गई थी।  मुख्यमंत्री जन आवास योजना के तहत  वर्ष 2015 में बनी इस योजना में आर्थिक रूप से कमजोर आय वर्ग व अल्प आय वर्ग के परिवारों को आवास उपलब्ध करवाने थे। न्यास की इस योजना में बड़ी संख्या में लोगों ने आवेदन भी किए। न्यास ने लॉटरी भी निकाल दी। लेकिन उसके बाद न्यास के अधिकारियों ने उस योजना की तरफ देखा तक नहीं। जबकि जिन लोगों के नाम लॉटरी में निकले थे वे न्यास कार्यालय व अधिकारियों के चक्कर काट-काट कर थक गए। लेकिन न्यास अधिकारी उन्हें सिर्फ आश्वासन ही देते रहे, मकान नहीं दे सके। <br /><br /><strong>296 आवास बनने हैं योजना में</strong><br />न्यास की पार्थ अपार्टमेंट योेजना में 296 मकान बनने हैं। इनमें से आर्थिक दृष्टि से कमजोर आय वर्ग के लिए 216 और अल्प आय वर्ग के लिए 80 मकान शामिल हैं। इस योजना में जी प्लस 3 योजना के तहत मकान बनने हैं। <br /><br /><strong>वर्ष 2017 में लांच की थी योजना</strong><br />नगर विकास न्यास के तत्कालीन चैयरमेन राम कुमार मेहता व सचिव मोहनलाल यादव के समय में वर्ष 2017 में यह योजना लांच की गई थी। 17 जनवरी 2017 को योजना में आवेदन जमा करना शुरू किया गया था। जिसमें आवेदन जमा करवाने की अंतिम तिथि 18 फरवरी थी। बड़ी संख्या में लोगों ने 300 रुपए में आवेदन पुस्तिका खरीदी थी। दो तरह के आवासों में से छोटे आवासों के लिए दो हजार रुपए व बड़े आवासों के लिए साढ़े तीन हजार रुपए प्रशासनिक शुल्क के रूप में भी जमा किए थे। साथ ही छोटे आवासों के 10 हजार व बड़े आवासों के 20 हजार रुपए  भी जमा कराए थे। गरीबों की लाखों रुपए की राशि से यूआईटी ने कमाई कर ली।  लेकिन मकानों का इन्तजार बढ़ता ही गया। <br /><br /><strong>जमीन के विवाद ने अटकायी योजना</strong><br />सूत्रों के द्वारा नगर विकास न्यास ने जिस जमीन पर यह योजना लांच की थी। उस जमीन पर किसी एक समाज व पंथ विशेष की आपत्ति होने से विवाद चल रहा था। जिससे यह योजना अटकी हुई थी। न्यास की गलती की सजा जनता को भुगतनी पड़ रही है। सूत्रों का तो यह भी कहना है कि जिस समय योजना लांच की गई थी उस समय भाजपा की सरकार थी। लेकिन वर्ष 2018 में सरकार बदल कर कांग्रेस की आ गई। न्यास अध्यक्ष भी बदल गए। इस कारण से वर्तमन सरकार व न्यास अधिकारियों ने भी उस योजना में रूचि नहीं दिखाई। लेकिन मकानों का इंतजार करने वालों ने जब बार-बार न्यास अधिकारियों पर दबाव बनाया तब जाकर अब न्यास अधिकारी जागे। उन्होंने कुछ समय पहले ही आवंटन पत्र जारी किए हैं। साथ ही राशि जमा करवाना शुरू किया है। <br /><br /><strong>अभी भी खाली जमीन, निर्माण तक शुरू नहीं</strong><br />न्यास की यह योजना देवली अरब रोड पर मेन रोड के पास है। लेकिन पांच साल बीतने के बाद अभी तक भी वहां सिर्फ खाली जमीन ही है। उस जगह पर झाड़ झंखाडं उगे हुए हैं। सिर्फ चार दीवारी बनी हुई है। कुछ नींव खुदी हुई है व योजना का बोर्ड लगा हुआ है। साथ ही उस जमीन पर गोबर के छाने थापे जा रहे हैं। न्यास द्वारा जिस बिल्डर को आवास बनाने का कांट्रेक्ट दिया है। उसने वहां अभी तक भी काम शुरू नहीं किया है। ऐसे में यदि अब भी काम शुरू होगा तो जी प्लस 3 के 296 मकान बनने में करीब दो साल से अधिक का समय लगेगा। ऐसे में आवंटियों को अभी करीब दो साल और इंतजार करना पड़ सकता है। <br /><br /><strong>पीड़ितों की जुबानी</strong><br />पार्थ अपार्टमेंट योजना में आवेदन करने वाले बालाजी नगर निवासी अमित जैन ने बताया कि उन्हें मकान की जरूरत है। न्यास की योजना में सस्ते मकान के लालच में 15 फरवरी 2017 को आवेदन के साथ 23 हजार 500 रुपए जमा करवाए थे। इसमें से 3500 रुपए प्रशासनिक शुल्क के हैं जो वापस नहीं मिलेंगे। जबकि 20 हजार रुपए मकान की लागत में शामिल हो जाएंगे। न्यास ने 5 साल से मकान नहीं दिया। न्यास कार्यालय और अधिकारियों के चक्कर  काट-काट कर थक गए । कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिलता। कुछ समय पहले ही योजना के आवंटन पत्र जारी किए। दो किश्तों में 75-75 हजार रुपए के हिसाब से 1.50 लाख रुपए भी जमा करवा चुके हैं। बाकी रकम भी किश्तों में देनी है। जैन ने बताया कि अभी भी मकान की जगह खाली जमीन  है। स्वयं के मकान के इंतजार में 6 हजार रुपए महीना किराए के मकान में परिवार के साथ रह रहा हूं। नयापुरा निवासी सुरेश अग्रवाल व महावीर नगर निवासी राजेश सोनी ने बताया कि वे कई बार देवली अरब रोड पर जगह देखकर आ चुके हैं। वहां अभी तक तो काम भी शुरू नहीं हुआ है। मकान बनने में न जाने कितने साल लगेंगे।<br /><br /><strong>नहीं दिया जवाब</strong><br />योजना के बारे में जानने के लिए न्यास के विशेषाधिकारी आर.डी मीना व न्यास सचिव राजेश जोशी को दो से तीन बार फोन किए लेकिन उन्होंने मोबाइल रिसीव नहीं किए। वाट्सअप पर मैसेज किए तो उनका भी जवाब नहीं दिया। <br /><br /><strong>इनका कहना है</strong> <br />लैंड डिस्प्यूट के कारण योजना में मकान बनाने में देरी हुई है। अब कुछ समय पहले ही वह मामला सुलझा है। बिल्डर को मकान बनाने का कार्यादेश जारी कर दिया है। साथ ही लॉटरी में निकले आवंटियों को आवंटन पत्र भी कुछ समय पहले ही जारी किए हैं। आवंटन पत्र मिलने के बाद लोगों ने राशि जमा करवाना शुरू कर दिया है। योजना में मकान बनने में करीब दो साल का समय लगेगा। <br /><strong>- आर.के. राठौर, अधीक्षण अभियंता, नगर विकास न्यास आवासीय योजना</strong><br /><br /><strong>यह थी आवासों की लागत</strong><br />न्यास द्वारा उस समय लांच की गई पार्थ अपार्टमेंट योजना में आर्थिक दृष्टि से कमजोर आय वर्ग के लिए 4.20 लाख रुपए में और अल्प आय वर्ग के लिए 6.30 लाख रुपए आवास की लागत निर्धारित की गई थी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 16 May 2022 15:38:37 +0530</pubDate>
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                <title>जयपुर बम ब्लास्ट का फैसला हुआ, लेकिन पीड़ितों को न्याय का अभी तक इंतजार</title>
                                    <description><![CDATA[शहर में 13 मई 2008 को हुई इस घटना के मामले में विशेष न्यायालय ने भले ही चार गुनहगारों को मृत्यु दंड़ की सजा सुना दी हो, लेकिन अभियुक्तों को फांसी नहीं मिलने के चलते शहरवासियों को सही मायने में अब तक न्याय नहीं मिल पाया है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/decision-of-the-jaipur-bomb-blast-was-taken--but-the-victims-are-still-waiting-for-justice/article-9689"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-05/bomb-blast.gif" alt=""></a><br /><p>जयपुर। शहर में आठ जगह हुए सिलसिलेवार बम ब्लास्ट की घटना को आज पूरे 14 साल हो चुके हैं। चंद मिनटों के अंतराल हुए शहर को स्तब्ध करने वाली घटना के घाव आज भी शहरवाासियों के सीने में ताजा हैं। शहर में 13 मई 2008 को हुई इस घटना के मामले में विशेष न्यायालय ने भले ही चार गुनहगारों को मृत्यु दंड़ की सजा सुना दी हो, लेकिन अभियुक्तों को फांसी नहीं मिलने के चलते शहरवासियों को सही मायने में अब तक न्याय नहीं मिल पाया है।</p>
<p><br />मामले में पुलिस ने पांच आरोपियों शाहबाज हुसैन, मोहम्मद सैफ, सरवर आजमी, सैफुर्रहमान और सलमान को गिरफ्तार किया था। जबकि कुछ अन्य आरोपियों को अब तक गिरफ्त में नहीं ले पाई है। इस मामले में पुलिस ने आठ मुकदमे दर्ज किए थे और इन सभी में आरोपियों पर चार्ज तय होने के बाद ट्रायल हुई। मामलों में एक हजार से ज्यादा गवाहों के बयान दर्ज होने के बाद विशेष अदालत ने 18 दिसंबर 2019 को शाहबाज हुसैन को बरी करते हुए अन्य चारों अभियुक्तों को फांसी की सजा सुनाई थी। शाहबाज हुसैन पर आरोप लगाया गया था कि उसने घटना की जिम्मेदारी लेते हुए ईमेल भेजा था।</p>
<p><br /><strong>अभियोजन पक्ष की गलती से फांसी में देरी</strong><br />कानून के जानकारों का कहना है कि मामले में अभियोजन पक्ष ने शुरू से ही तकनीकी गलती की। जिसके चलते अभियुक्तों को अभी तक फांसी नहीं हो पाई है। एक ही दिन एक समान घटना होने के बाद भी पुलिस ने आठ ब्लास्ट के मामले में आठ अलग-अलग मामले दर्ज किए। वहीं अदालत में अलग-अलग आठ आरोप पत्र पेश किए। जिसके चलते अदालत ने भी आठों मामलों में अलग-अलग सुनवाई कर अपने फैसले दिए। जिसके चलते राज्य सरकार के डेथ रेफरेंस और अभियुक्तों की कुल अपीलों की संख्या मिलाकर करीब 44 हो गई हैं। ऐसे में हाईकोर्ट में सुनवाई में देरी होना लाजमी है।</p>
<p><br /><strong>फैसले के बाद जिंदा बम को लेकर फिर पेश किया आरोप पत्र</strong><br />विशेष न्यायालय की ओर से फैसला सुनाने के करीब आठ माह बाद अभियोजन पक्ष ने चांदपोल हनुमान मंदिर के बाहर जिंदा मिले बम को लेकर शाहबाज हुसैन सहित बाकी चारों अभियुक्तों के खिलाफ फिर से आरोप पत्र पेश कर दिया। आरोप पत्र में मूल मामले के तथ्यों को दोहराते हुए समान धाराएं रखी गई हैं। इस मामले में अदालत में अभियोजन पक्ष के बयान दर्ज किए जा रहे हैं। वहीं हाईकोर्ट आरोपी शाहबाज हुसैन को गत 25 फरवरी को जमानत पर रिहा कर चुकी है।</p>
<p><br /><strong>ये हैं आरोपी</strong><br />पहला आरोपी शाहबाज हुसैन उर्फ शानू निवासी मौलवीगंज, उत्तरप्रदेश। जयपुर में 13 मई 2008 को हुए बम ब्लास्ट के बाद सबसे पहले 8 सितंबर 2008 को शाहबाज हुसैन को गिरफ्तार किया गया। हालांकि विशेष न्यायालय ने बरी कर दिया। दूसरा आरोपी मोहम्मद सैफ, निवासी सरायमीर, आजमगढ़ उत्तरप्रदेश है। इसे 23 दिसंबर 2008 को गिरफ्तार किया गया। तीसरा आरोपी मोहम्मद सरवर आजमी, निवासी चांदपट्टी, आजमगढ़ उत्तरप्रदेश है। इसे 29 जनवरी 2009 को गिरफ्तार किया गया। चौथा आरोपी सैफ उर्फ सैफुर्रहमान, निवासी आजमगढ़ उत्तरप्रदेश है। इसको 23 अप्रेल 2009 को गिरफ्तार किया गया। पांचवा आरोपी सलमान, निवासी निजामाबाद, उत्तर प्रदेश है। इसे 3 दिसंबर 2010 को गिरफ्तार किया था। इसके अलावा कई अन्य आरोपी फरार चल रहे हैं।<br /><br /><strong>16 मिनट के अंतराल में इन जगहों पर हुए बम धमाके</strong><br />1. 13 मई 2008 की शाम करीब 7.20 बजे पहला बम ब्लास्ट खंदा माणक चौक, हवा महल के सामने हुआ। इसमें 1 महिला की मौत हुई जबकि 18 लोग घायल।<br />2. दूसरा बम धमाका बड़ी चौपड़ के पास मनिहारों के खंदे में ताला चाबी वालों की दुकानों के पास शाम करीब 7.25 बजे हुआ। जिसमें 6 लोगों की मौत हुई साथ ही 27 लोग घायल हुए।<br />3. तीसरा बम ब्लास्ट शाम करीब 7.30 बजे छोटी चौपड़ पर कोतवाली थाने के बाहर पार्किंग में हुआ। इनमें 2 पुलिसकर्मियों सहित 7 लोगों की मौत हुई। जबकि 17 लोग घायल हुए थे।<br />4. चौथा बम धमाका भी इसी समय दुकान नंबर 346 के सामने, त्रिपोलिया बाजार के पास हुआ। इसमें 5 लोगों की मौत और 4 लोग घायल हुए।<br />5. पांचवां बम धमाका चांदपोल बाजार स्थित हनुमान मंदिर के बाहर पार्किंग स्टैंड पर शाम 7.30 बजे हुआ। इनमें सबसे ज्यादा 25 लोगों की मौत हुई, जबकि 49 लोग घायल हुए।<br />6. छठा बम ब्लास्ट जौहरी बाजार में पीतलियों के रास्ते की कार्नर पर नेशनल हैंडलूम के सामने शाम करीब 7.30 बजे हुआ। इनमें 8 लोगों की मौत और 19 लोग घायल हुए।<br />7. सातवां बम धमाका शाम 7.35 बजे छोटी चौपड़ पर फूलों के खंदे में हुआ। इसमें 2 लोगों की मौत और 15 लोग घायल हुए।<br />8. आठवां बम धमाका जौहरी बाजार में सांगानेरी गेट हनुमान मंदिर के बाहर शाम 7.36 बजे हुआ। इसमें 17 लोगों की मौत हुई जबकि 36 लोग घायल हुए।<br />9. नौवे ब्लास्ट की कोशिश दुकान नंबर 17 के सामने चांदपोल बाजार में एक गेस्ट हाउस के बाहर करने की थी। बम में रात 9 बजे का टाइमर सेट था, लेकिन 15 मिनट पहले बम स्कॉड टीम ने इसे डिफ्यूज कर दिया।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 13 May 2022 15:20:02 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>'खुदा हाफिज 2' का इंतजार मई के बाद होगा खत्म, 17 जून को रिलीज होगी विद्युत जामवाल की फिल्म</title>
                                    <description><![CDATA[फिल्म के पोस्टर में विद्युत एक कैदी की वर्दी में बढ़े हुए बाल और दाढ़ी में नजर आ रहे है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/movie-fun/bollywood-news--waiting-for-khuda-hafiz-2-will-end-after-may--vidyut-jammwal-s-film-to-release-on-june-17/article-8322"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-04/khuda-hafiz-.jpg" alt=""></a><br /><p>मुंबई। बॉलीवुड के एक्शन हीरो विद्युत जामवाल की फिल्म 'खुदा हाफिज' 2Ó22 जून को रिलीज होगी।  विद्युत जामवाल और शिवालिका ओबेरॉय स्टारर थ्रिलर फिल्म 'खुदा हाफिज' दर्शकों को काफी पसंद आई थी। विद्युत जामवाल ने पिछले साल जुलाई में शिवलीका ओबेरॉय के साथ खुदा हाफिज चैप्टर 2 की शूटिंग शुरू की थी। अब उन्होंने फिल्म की रिलीज डेट का भी एलान कर दिया है। फिल्म के पोस्टर में विद्युत एक कैदी की वर्दी में बढ़े हुए बाल और दाढ़ी में नजर आ रहे है। इस बारे में अभिनेता विद्युत जामवाल ने सोशल मीडिया के जरिए जानकारी दी। <br /><br />अपने आधिकारिक इंस्टाग्राम पर फिल्म का एक पोस्टर शेयर करते हुए विद्युत ने फिल्म की तारीख का एलान किया। इस पोस्टर को शेयर करते हुए उन्होंने लिखा कि खुदा हाफिज चैप्टर 2 में समीर और नरगिस की अग्निपरीक्षा के साक्षी बनें। फिल्म 17 जून, 2022 को सिनेमाघरों में रिलीज होगी।<br /><br /></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>मूवी-मस्ती</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 21 Apr 2022 18:09:30 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Administrator]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>खेल रत्नों को भी इन्तजार है महाराणा प्रताप अवार्ड का</title>
                                    <description><![CDATA[राजस्थान की पैरा निशानेबाज अवनी लेखरा और बैडमिंटन खिलाड़ी कृष्णा नागर को देश के सबसे बड़े खेल सम्मान मेजर ध्यान चन्द खेल रत्न से नावाजा लेकिन राजस्थान का खेल विभाग अपने स्वर्ण पदक विजेता खिलाड़ियों को सम्मान देने में अब भी पीछे है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/khel/khel-ratna-is-also-waiting-for-maharana-pratap-award--sports-department-of-rajasthan-is-not-giving-awards-to-players-for-four-years/article-7071"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-03/khel-ratna-.jpg" alt=""></a><br /><p> जयपुर। टोक्यो ओलंपिक खेलों को बीते एक साल पूरा होने को है। भारत सरकार ने इन खेलों में उल्लेखनीय प्रदर्शन के लिए राजस्थान की पैरा निशानेबाज अवनी लेखरा और बैडमिंटन खिलाड़ी कृष्णा नागर को देश के सबसे बड़े खेल सम्मान मेजर ध्यान चन्द खेल रत्न से नावाजा लेकिन राजस्थान का खेल विभाग अपने स्वर्ण पदक विजेता खिलाड़ियों को सम्मान देने में अब भी पीछे है।</p>
<p> </p>
<p>राजस्थान खेल परिषद द्वारा प्रदेश के सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ियों को महाराणा प्रताप और सर्वश्रेष्ठ प्रशिक्षकों को गुरु वशिष्ठ अवार्ड से नवाजा जाता है लेकिन दुर्भाग्य से ये पुरस्कार पिछले चार वर्ष से नहीं दिए जा रहे हैं। आखिरी बार ये पुरस्कार वर्ष 2018 में दिए गए थे। हालांकि इससे पहले भी 2008 से 2016 तक के पुरस्कार भी एक साथ दिए गए। खेल परिषद सूत्रों के अनुसार चार साल के दौरान 205 खिलाड़ियों ने महाराणा प्रताप पुरस्कार के लिए आवेदन किया है, वहीं वशिष्ठ पुरस्कार के लिए 77 प्रशिक्षक अपनी दावेदारी जता चुके हैं। इस वर्ष पुरस्कारों के लिए आवेदन अब मांगे जाएंगे। आवेदन करने वालों में पैरालंपिक स्वर्ण पदक विजेता अवनी लेखरा और कृष्णा नागर भी शामिल हैं। <br /><br /><strong>1983 में हुई थी पुरस्कारों की शुरुआत</strong><br />राजस्थान खेल परिषद द्वारा महाराणा प्रताप पुरस्कारों की शुरुआत 1983 में की गई। 1982 के दिल्ली एशियाई खेलों में पदक जीतने वाले प्रदेश के 11 खिलाड़ियों को इस पुरस्कार से नवाजा गया। पहली बार यह पुरस्कार हासिल करने वाले खिलाड़ियों में एथलीट गोपाल सैनी, राजकुमार, हमीदा बानो, हॉकी खिलाड़ी गंगोत्री भंडारी, वर्षा सोनी, गोल्फर लक्ष्मण सिंह, घुड़सवार रघुवीर सिंह, जीएम खान, प्रहलाद सिंह और निशानेबाज कर्णी सिंह शामिल थे। <br /><br /><strong>अब तक 170 खिलाड़ी सम्मानित</strong><br />राजस्थान खेल परिषद द्वारा विभिन्न खेलों के करीब 170 खिलाड़ियों को महाराणा प्रताप पुरस्कार से सम्मानित किया जा चुका है। इनमें सबसे ज्यादा संख्या एथलीट और साइक्लिस्टों की है। एथलेटिक्स के 25 और साइक्गिंल के 18 खिलाड़ियों को यह पुरस्कार दिया गया है। वहीं प्रशिक्षकों को दिए जाने वाले गुरु वशिष्ठ पुरस्कार से 40 प्रशिक्षकों को नवाजा गया है।</p>
<p><br /><strong>जयपुर के पोकरमल बने थे पहले गुरु वशिष्ठ</strong><br />गोपाल सैनी और राजकुमार सरीखे अंतरराष्ट्रीय एथलीट तैयार करने वाले राजस्थान खेल परिषद के एथलेटिक्स कोच पोकरमल को पहला गुरु वशिष्ठ अवार्ड दिया गया था। उनके साथ ही बीकानेर के साइक्लिंग कोच रामदेव को भी इस पुरस्कार से नवाजा गया। बीकानेर शुरू से ही राजस्थान में साइक्लिस्टों का गढ़ रहा है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>खेल</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 31 Mar 2022 13:55:30 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Administrator]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>अंग्रेजी हुक्मरानों के यूनिवर्सिटी में लागू कानून बदलेंगे, कॉमन एक्ट ड्राफ्ट सालभर से तैयार, बिल का इंतजार</title>
                                    <description><![CDATA[सभी यूनिवर्सिटीज में एक जैसे होंगे नियम-कायदे, समितियां और शक्तियां,प्रोफेशनल यूनिवर्सिटीज में कुलपति उसी फील्ड के एक्सपर्ट होंगे]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/%E0%A4%85%E0%A4%82%E0%A4%97%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A5%87%E0%A4%9C%E0%A5%80-%E0%A4%B9%E0%A5%81%E0%A4%95%E0%A5%8D%E0%A4%AE%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%A8%E0%A5%8B%E0%A4%82-%E0%A4%95%E0%A5%87-%E0%A4%AF%E0%A5%82%E0%A4%A8%E0%A4%BF%E0%A4%B5%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%B8%E0%A4%BF%E0%A4%9F%E0%A5%80-%E0%A4%AE%E0%A5%87%E0%A4%82-%E0%A4%B2%E0%A4%BE%E0%A4%97%E0%A5%82-%E0%A4%95%E0%A4%BE%E0%A4%A8%E0%A5%82%E0%A4%A8-%E0%A4%AC%E0%A4%A6%E0%A4%B2%E0%A5%87%E0%A4%82%E0%A4%97%E0%A5%87--%E0%A4%95%E0%A5%89%E0%A4%AE%E0%A4%A8-%E0%A4%8F%E0%A4%95%E0%A5%8D%E0%A4%9F-%E0%A4%A1%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%AB%E0%A5%8D%E0%A4%9F-%E0%A4%B8%E0%A4%BE%E0%A4%B2%E0%A4%AD%E0%A4%B0-%E0%A4%B8%E0%A5%87-%E0%A4%A4%E0%A5%88%E0%A4%AF%E0%A4%BE%E0%A4%B0--%E0%A4%AC%E0%A4%BF%E0%A4%B2-%E0%A4%95%E0%A4%BE-%E0%A4%87%E0%A4%82%E0%A4%A4%E0%A4%9C%E0%A4%BE%E0%A4%B0/article-4410"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-02/ru_new.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। राजस्थान में अब सभी यूनिवर्सिटीज में एक जैसे नियम-कायदों से संचालन के लिए कॉमन एक्ट की कवायद को जल्द अमलीजामा पहनाए जाने की उम्मीद है। अभी सभी यूनिवर्सिटीज एक्ट में कई अलग-अलग नियम-कायदे हैं।<br />इनमें से ज्यादातर एक्ट राजस्थान यूनिवर्सिटीज के स्थापना के वक्त अंग्रेजी हुक्मरानों के जनवरी 1947 में बनाएं कानून ही शामिल हैं। यूनिवर्सिटीज में चल रहे कानूनों को बदलने की कवायद गहलोत सरकार ने दो साल पहले शुरू की थी। सभी यूनिवर्सिटीज में एक जैसा कानून, शक्तियां, सरकारी हस्तक्षेप इत्यादि स्पष्टत: तय करने के लिए कॉमन एक्ट तैयार करने के लिए जोधपुर की जयनारायण व्यास यूनिवर्सिटी के कुलपति पीसी त्रिवेद्वी की अध्यक्षता में कमेटी का गठन किया था। कमेठी ने एक साल पहले ही एक्ट का ड्राफ्ट तैयार कर उच्च शिक्षा विभाग को सौंप दिया है। लेकिन इसे कानूनी अमलीजामा पहनाकर बिल का रुप दिया जाना बाकी है। विधानसभा का सत्र शुरू हो चुका है। उच्च शिक्षा विभाग ने इसे अभी बिल में तब्दील नहीं किया है। ऐसे में इस सत्र में इसके आने की गुजाइंश कम ही है। इसे वैधानिक मंजूरी मिले तो सभी यूनिवर्सिटीज के वर्तमान में लागू आदिम कानून विलोपित हो जाएंगे और समान कानून संहिता का तय फाूर्मला लागू हो जाएगा। प्रोफेशनल यूनिवर्सिटीज में यूजीसी की गाइडलान के साथ ही उसी फील्ड से जुड़े शिक्षक या व्यक्ति को कुलपति बनाए जाने का बड़ा फैसला भी ड्राफ्ट में शामिल है। ऐसा हुआ तो प्रदेश की मेडिकल, पत्रकारिता, कृषि, विधि इत्यादि विषयों की यूनिवर्सिटीज में उसी फील्ड के एक्सपर्ट ही कुलपति बन सकेंगे। <br /><br /><strong>महाराष्ट्र-केरल में पहले से लागू है कॉमन एक्ट</strong><br />महाराष्ट्र और केरल राज्य में यूनिवर्सिटीज के लिए पहले से कॉमन एक्ट बनाकर लागू कर चुके हैं। इसी की तर्ज पर राजस्थान में ड्राफ्ट तैयार किया गया है। जिसमें वर्तमान परिदृश्य के मुताबिक यूनिवर्सिटीज के एक्ट में रिफॉर्म करने, उसमें फेरबदल करने, शैक्षणिक गुणवत्ता को बेहतर बनाने, प्रबन्धन ढांचे में बदलाव को फोकस कर तैयार किया गया है। <br /><br />ड्राफ्ट पर अधिकारियों से चर्चा हुई है। जल्द इसे बिल में तब्दील करने के लिए फिर से बैठक करूंगा। प्रयास रहेगा कि इसी सत्र में इस पारित कराके लागू किया जाए। - <strong>राजेन्द्र यादव, उच्च शिक्षा राज्यमंत्री</strong><br /><br /><strong>ड्राफ्ट में ये सिफारिशें</strong><br /> प्रो वाइस चांसलर का पद सृजित हो, कुलपति की यूजीसी की तय गाइडलाइन के  अनुरूप यूनिवर्सिटी के ही सीनियर प्रोफेसर की नियुक्ति इस पद पर की जाए। <br /> सभी यूनिवर्सिटी में एक जैसी प्रबन्धन बॉडी और उनकी शक्तियां-कार्यप्रणाली हो। अभी यूनिवर्सिटीज में बोर्ड आॅफ मैनजमेंट, सिंडीकेट, सीनेट, एक्ज्यूक्टिव कमेटी, एकडेमिक काउंसिल इत्यादि अपने-अपने एक्ट के मुताबिक है। <br /> यूनिवर्सिटीज में न्यूनतम तय शैक्षणिक विभाग होना अनिवार्य होगा , टीचर्स की संख्या भी तय होगी। <br /> टीचर्स के पद तय करने और भर्ती के लिए सरकार की अनुमति लेने की जरुरत ना पड़े।  <br /> प्रबन्धन बॉडी में सरकारी अफसरों का हस्तक्षेप घटे, कहीं दो तो कहीं पांच सचिव स्तर के अफसर सदस्य। एक ही सचिव को शामिल करने का प्रस्ताव। <br /> हर विभाग में स्थाई फैकल्टी जरुरी होगी। अभी कई यूनिवर्सिटीज में ऐसे विभाग, जिन्हें खुले दो दशक से ज्यादा लेकिन स्थाई टीचर्स भी नहीं। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>शिक्षा जगत</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 12 Feb 2022 17:36:48 +0530</pubDate>
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                <title>नागपुर से लाई जा सकती हैं दो मादा बाघिनें</title>
                                    <description><![CDATA[सीजेडए की अपू्रवल का इंतजार]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/%E0%A4%A8%E0%A4%BE%E0%A4%97%E0%A4%AA%E0%A5%81%E0%A4%B0-%E0%A4%B8%E0%A5%87-%E0%A4%B2%E0%A4%BE%E0%A4%88-%E0%A4%9C%E0%A4%BE-%E0%A4%B8%E0%A4%95%E0%A4%A4%E0%A5%80-%E0%A4%B9%E0%A5%88%E0%A4%82-%E0%A4%A6%E0%A5%8B-%E0%A4%AE%E0%A4%BE%E0%A4%A6%E0%A4%BE-%E0%A4%AC%E0%A4%BE%E0%A4%98%E0%A4%BF%E0%A4%A8%E0%A5%87%E0%A4%82/article-3004"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2021-12/tigerss-file-photo.jpg" alt=""></a><br /><p> जयपुर। नाहरगढ़ बायोलॉजिकल पार्क में जल्द ही दो नए मेहमानों की एंट्री हो सकती है। इसके लिए बायोलॉजिकल पार्क और नागपुर जूलोजिकल पार्क के बीच एनिमल एक्सचेंज कार्यक्रम हो सकता है। वन विभाग के सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार बायोलॉजिकल पार्क से 4 सांभर और एक वुल्फ के पेयर के बदले नागपुर से दो मादा बाघिनें जयपुर लाई जा सकती है। इसके लिए बायोलॉजिकल पार्क एवं नागपुर जूलोजिकल पार्क की ओर से एनिमल एक्सचेंज का प्रपोजल बनाकर नई दिल्ली स्थित सीजेडए को भेजा गया है। जहां से अपू्रवल मिलने के बाद ये एनिमल एक्सचेंज कार्यक्रम पूरा किया जाएगा। <br /> <strong><br /> बायोलॉजिकल पार्क में हैं 4 टाइगर </strong><br /> नाहरगढ़ बायोलॉजिकल पार्क से मिली जानकारी के अनुसार यहां अभी 4 टाइगर रहवास कर रहे हैं। इनमें दो नर और दो मादा बाघिनें शामिल हैं। इनमें नर बाघ नाहर की उम्र करीब 17, बाघिन रंभा की उम्र 17, नर बाघ चीनू की उम्र 4 और बाघिन रानी की उम्र 3 साल है।</p>
<p><strong><br /> अन्य राज्यों में वुल्फ की डिमांड</strong><br /> वन विभाग से मिली जानकारी के अनुसार इससे पहले देश के अन्य राज्यों के चिड़ियाघरों और जूलोजिकल पार्कों में जयपुर स्थित नाहरगढ़ बायोलॉजिकल पार्क से एक्सचेंज कार्यक्रम के तहत वुल्फ भेजे गए हैं। ऐसे में एनिमल एक्सचेंज कार्यक्रम में जयपुर  के बायोलॉजिकल पार्क के लिए वुल्फ किसी गोल्ड से कम नहीं है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 08 Dec 2021 11:59:38 +0530</pubDate>
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