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                <title>lord - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <title>भगवान चारभुजा नाथ को 11 क्विंटल चूरमे का भोग</title>
                                    <description><![CDATA[उदयपुर। इन्द्रदेव का रिझाने एवं अच्छी वर्षा की कामना के साथ मेनारिया समाज ग्राम सभा ने रविवार को यहां पानेरियों की मादड़ी स्थित होली चौक पर महाप्रसादी का आयोजन किया। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/udaipur/offering-11-quintals-of-churma-to-lord-charbhuja-nath/article-13072"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-06/udi2.jpg" alt=""></a><br /><p>उदयपुर। इन्द्रदेव का रिझाने एवं अच्छी वर्षा की कामना के साथ मेनारिया समाज ग्राम सभा ने रविवार को यहां पानेरियों की मादड़ी स्थित होली चौक पर महाप्रसादी का आयोजन किया। इस अवसर पर भगवान चारभुजा नाथ को 11 क्विंटल चूरमे का भोग लगाया गया जिसके लिए जगरे पर समाज के लोगों ने कतारबद्ध बाटियां सेकी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>उदयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 27 Jun 2022 12:05:02 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[udaipur]]></dc:creator>
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            <item>
                <title> ज्ञान में शिव की छवि व्यापीस: हिन्दू पक्ष का दावा  ज्ञानवापी मस्जिद में शिवलिंग मिला</title>
                                    <description><![CDATA[स्थल को संरक्षित और सुरक्षित रखने की जिम्मेदारी कलेक्टर, पुलिस आयुक्त और सीआरपीएफ कमांडेंट की]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/lord-shiva-s-image-in-knowledge--hindu-side-claims-shivling-found-in-gyanvapi-mosque--the-court-sealed-the-site/article-9916"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-05/gyanvapi.jpg" alt=""></a><br /><p>वाराणसी। उत्तर प्रदेश के वाराणसी में स्थित ज्ञानवापी मस्जिद परिसर के वीडियोग्राफी सर्वे के दौरान मस्जिद परिसर में शिवलिंग मिलने के बाद स्थानीय अदालत ने जिला प्रशासन को उस स्थान को तत्काल प्रभाव से सील करने के आदेश दिए हैं जहां शिवलिंग मिला है।  </p>
<p><br />सिविल जज रवि कुमार दिवाकर की अदालत ने सोमवार को जारी आदेश में वाराणसी के जिला मजिस्ट्रेट को आदेश दिया कि वह उस स्थान को सील कर दें, जहां शिवलिंग मिला है। आदेश में सील किए गए स्थान पर किसी भी व्यक्ति के प्रवेश पर रोक लगा दी गई है। अदालत ने वाराणसी के जिला मजिस्ट्रेट, पुलिस आयुक्त और सीआरपीएफ के वाराणसी स्थित कमांडेंट को आदेश दिया है कि उस स्थान के संरक्षित और सुरक्षित करने की व्यक्तिगत जिम्मेदारी पूर्ण रूप से उनके ऊपर है। न्यायाधीश ने हिंदू पक्ष के वकील के आवेदन पर यह फैसला सुनाया। फैसले में कहा गया है कि प्रशासन द्वारा जो कदम उठाए गए हैं, उनके पर्यपेक्षण (सुपरवीजन) की जिम्मेदारी उप्र के मुख्य सचिव और पुलिस महानिदेशक पर होगी। न्यायालय में वीडियोग्राफी सर्वे की रिपोर्ट पर मंगलवार को सुनवाई होगी। ज्ञानवापी मस्जिद परिसर की वीडियोग्राफी सर्वे का काम सोमवार को पूरा हो गया।  <br /><br /><strong>केवल 20 लोगों को नमाज अदा करने की इजाजत</strong><br />हिंदू पक्ष के आवेदन में यह भी अनुरोध किया गया है कि मस्जिद में केवल 20 मुसलमानों को नमाज अदा करने की इजाजत दी जाए तथा उन्हें वजू करने से तत्काल रोका जाए। न्यायाधीश दिवाकर ने इस आवेदन के संबंध में कहा कि मस्जिद परिसर में अदालत के आदेश से ही वीडियोग्राफी सर्वे का काम हुआ है। परिसर में शिवलिंग मिलने के बाद उसे संरक्षित किया जाना अतिआवश्यक है। न्यायालय ने कहा कि न्याय हित में वादी पक्ष का आवेदन स्वीकार किये जाने योग्य है। <br /><br /><strong>शिवलिंग का मिलना सुखद संदेश : विहिप</strong><br />अयोध्या। विश्व हिन्दू परिषद (विहिप) ने काशी विश्वनाथ के ज्ञानव्यापी ढांचे में शिवलिंग के मिलने को सुखद संदेश बताते हुए कहा कि  सत्य आज सामने दिख रहा है। <br />विहिप के प्रान्तीय मीडिया प्रभारी शरद शर्मा ने कहा कि सत्य को दबाया, छिपाया और नकारा नहीं जा सकता। सत्य तो सफेद रंग की भांति है जिस पर काला रंग धोखे से चढ़ाने के बावजूद भी उतरने पर सफेद ही निकलेगा। तलवार और हत्या के बल पर हिन्दुओं के धार्मिक स्थलों और सम्पत्तियों पर अनाधिकृत कब्जा करने वाले लुटेरे आक्रमणकारियों को यह नहीं मालूम था कि एक न एक दिन इस देश का नागरिक जगेगा और अपनी छीनी गई सम्पत्ति को पुन: वापस लेने के लिये हर तरह का प्रयास करेगा।  <br /><br /><strong>मुस्लिम पक्ष का दावा शिवलिंग नहीं, फव्वारा मिला</strong><br />प्रतिवादी अंजुमन इंतजामिया मसाजिद कमेटी के एडवोकेट रईस अहमद अंसारी ने कहा कि ज्ञानवापी मस्जिद के वजूखाना में एक फव्वारा लगा हुआ है। जिस संरचना को शिवलिंग बताया जा रहा है, वह वही फव्वारा है। बाकी सभी तरह के दावे झूठे हैं। मस्जिद के ऊपरी हिस्से में नमाज पढ़ी जाती है, वहां वजू करने की भी जगह है।</p>
<p><br /><strong>हाईकोर्ट में देंगे चुनौती : अंसारी</strong><br />एडवोकेट रईस अहमद अंसारी ने कहा कि अदालत ने जल्दबाजी में आदेश दिया है। हम इस आदेश से संतुष्ट नहीं हैं और हाईकोर्ट में उसे चुनौती देंगे।</p>
<p><br /><strong>आज सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई</strong><br />मुस्लिम पक्ष की याचिका पर मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई होगी। अंजुमन इंतजामिया मसाजिद कमेटी ने वाराणसी कोर्ट के सर्वे के फैसले को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की थी। इस पर जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ की बेंच मंगलवार को सुनवाई करेगी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 17 May 2022 11:45:54 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>सर्व समाज के आराध्य भगवान श्री देवनारायण की जन्मस्थली का प्रचार प्रसार अभियान शुरू</title>
                                    <description><![CDATA[ देव दर्शन ज्योति यात्रा जारी, भगवान श्री देवनारायण के आगामी 1111वें जन्मोत्सव पर बडा समारोह होगा]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/bhilwara/bhilwara-news--publicity-campaign-started-for-the-birthplace-of-lord-shri-devnarayan--the-beloved-of-all-society/article-7848"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-04/ram2.jpg" alt=""></a><br /><p>मालासेरी डूंगरी, आसीन्द/ भीलवाड़ा। श्री देवनारायण जन्म स्थली विकास समिति मालासेरी डूंगरी, आसींद, भीलवाड़ा, राजस्थान की ओर से सर्व समाज के आराध्य देव और विष्णु भगवान के अवतार श्री देवनारायण भगवान की महिमा का प्रचार प्रसार करने को लेकर अभियान की शुरुआत की। इसके तहत पूरे प्रदेश और देश में भगवान की महिमा के बारे में देव भगत और पुजारी गुणगान करेंगे। जिससे कि आमजन भगवान की महिमा के बारे में जान सकेंगे और उनका लाभ प्राप्त कर सकेंगे। यह जानकारी आज मालासेरी डूंगरी पर स्थित सर्व समाज के आराध्य देव और विष्णु भगवान के अवतार श्री देवनारायण भगवान के मंदिर में आयोजित प्रेस वार्ता के दौरान मालासेरी डूंगरी के पुजारी हेमराज पोसवाल ने संवाददाताओं को दी। पोसवाल ने बताया कि भगवान श्री देवनारायण सभी धर्मों के आराध्य हैं और उनकी महिमा के बारे में प्रदेश के साथ ही देश भर में प्रचार प्रसार करने का फैसला समिति की ओर से लिया गया है, जिसके तहत यह अभियान शुरू किया गया है। इस दौरान प्रदेश के साथ ही देशभर में समिति की ओर से सदस्य बनाए जाएंगे जो भगवान की महिमा के बारे में आमजन को बताएंगे।<br /><br /><strong> विभिन्न कार्यक्रमों का होगा आयोजन</strong><br />श्री देवनारायण अवतार स्थली मालासेरी डूंगरी से देव दर्शन ज्योति यात्रा पूरे प्रदेश में निकाली जा रही है, जो कि श्री देवनारायण भगवान की 1111वें जन्मदिन पर पूरी होगी। मंदिर समिति के प्रेस सलाहकार व जूलॉजिस्ट डॉ. राम भजन कुमावत ने बताया कि इस मौके पर भगवान श्री देवनारायण जी की जन्मस्थली मालासेरी डूंगरी पर ऐतिहासिक एवं भव्य कार्यक्रम होगा, इसमें देश के साथ ही विदेशी देव भगत भी देवनारायण के दर्शनों के लिए आएंगे। साथ ही मालासेरी डूंगरी श्री देवनारायण के मंदिर में रक्तदान शिविर, सर्व समाज का सामूहिक विवाह सम्मेलन, प्रबुद्ध जनों के साथ ही प्रतिभाशाली विद्यार्थियों और सरकारी नौकरी में चयनित युवाओं का सम्मान समारोह सहित अन्य कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। मंदिर समिति के अध्यक्ष जयदेव चाड़ व उपाध्यक्ष महादेव तेडवा ने बताया कि देवदर्शन ज्योति यात्रा पूरे प्रदेश में भ्रमण करने के साथ ही 1110 मंदिरों में जाएगी और उसके बाद 1111वां मंदिर भगवान श्री देवनारायण की जन्म स्थली मालासेरी डूंगरी स्थित मंदिर होगा। अभी देव दर्शन ज्योति यात्रा झालावाड़ जिले के विभिन्न मंदिरों में भ्रमण कर रही है इसके बाद यात्रा अन्य जिलों में जाएगी और वहां पर श्री देवनारायण भगवान के मंदिरों के दर्शन करेगी। इस यात्रा में विशेष सहयोग अखंड भारत गुर्जर महासभा और राजस्थान गुर्जर महासभा का रहा है।<br /><br /><strong> सभी धर्मों के लोग आते हैं दर्शनों के लिए</strong><br />पुजारी हेमराज पोसवाल ने बताया कि भगवान श्री देवनारायण की जन्म स्थली मालासेरी डूंगरी पर सर्व समाज के आराध्य देव भगवान विष्णु के अवतार देवनारायण के हर रोज हजारों की संख्या में दर्शनार्थी दर्शनों के लिए आ रहे हैं। उन्होंने बताया कि आज समय में भगवान देवनारायण की पूजा सभी धर्मों के लोग कर रहे हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भीलवाड़ा</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 13 Apr 2022 14:48:35 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Administrator]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>महाशिवरात्रि विशेष: भगवान शिव और माता पार्वती की विधिवत पूजा के लिए इन बातों का रखें खास ध्यान</title>
                                    <description><![CDATA[इस दिन व्रत-उपवास रखकर बेलपत्र-जल से शिव की पूजा-अर्चना करके जौ, तिल, खीर और बेलपत्र का हवन करने से समस्त मनोकामना पूर्ण हो जाती हैं। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/mahashivratri-special--for-the-due-worship-of-lord-shiva-and-mother-parvati--keep-these-things-in-mind/article-5222"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-03/jharkhand-mahadev-mandir8.jpg" alt=""></a><br /><p>महाशिवरात्रि के दिन भगवान शिव और माता पार्वती की विधिवत पूजा की जाती है। भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए उनकी प्रिय चीजें पूजा के समय उन्हें भेंट करनी चाहिए। वहीं कुछ ऐसी भी चीजें हैं जिसे भगवान भोलेनाथ की पूजा करते भूलकर भी अर्पित नहीं करना चाहिए। महाशिवरात्रि पर किसी बड़े पात्र में धातु से बने शिवलिंग या मिट्टी से बने शिवलिंग की स्थापना करें। ध्यान रखें, महाशिवरात्रि के दिन चार पहर की शिव पूजा करनी चाहिए। शिव पूजा में सबसे पहले मिट्टी के पात्र में पानी भरकर, ऊपर से बेलपत्र, धतूरे के पुष्प, चावल आदि एक साथ डालकर शिवलिंग पर चढ़ायें।महाशिवरात्रि के दिन व रात में शिवपुराण का पाठ करना या सुनना चाहिए।सूर्योदय से पहले ही उत्तर-पूर्व दिशा में पूजन-आरती की तैयारी कर लें। <br />कोई सामग्री उपलब्ध न होने पर केवल शुद्ध ताजा जल शिवजी को अर्पित करने पर प्रसन्न हो जाते हैं। इस दिन व्रत-उपवास रखकर बेलपत्र-जल से शिव की पूजा-अर्चना करके जौ, तिल, खीर और बेलपत्र का हवन करने से समस्त मनोकामना पूर्ण हो जाती हैं। <br /><br />व्रत नियम<br />.    महाशिवरात्रि के दिन चावल, गेहूं आदि से बनी चीजों का सेवन नहीं करना चाहिए।<br />.    इस दिन मांस-मदिरा से दूर रहना चाहिए।<br />.    महाशिवरात्रि के दिन बेसन, मैदा आदि से बनी चीजों का सेवन नहीं करना चाहिए।<br />.    महाशिवरात्रि का व्रत रखने वाले व्रती को दिन में नहीं सोना चाहिए। मान्यता है कि दिन में सोने से व्रत का फल नहीं मिलता है।<br />.    वाद-विवाद से बचना चाहिए।<br />.    कटु शब्दों का प्रयोग नहीं करना चाहिए।<br />.    चाय, फल और दूध आदि का सेवन किया जा सकता है।<br />.    साबुदाने की खिचड़ी का सेवन किया जा सकता है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 01 Mar 2022 12:59:12 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>2023 तक अपने आसन पर आ जाएंगे भगवान राम : चंपत राय</title>
                                    <description><![CDATA[अगले 1000 साल तक कैसी भी बाढ़ और तूफान आए इसकी नींव पर उसका काई असर नहीं होगा।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/2023-%E0%A4%A4%E0%A4%95-%E0%A4%85%E0%A4%AA%E0%A4%A8%E0%A5%87-%E0%A4%86%E0%A4%B8%E0%A4%A8-%E0%A4%AA%E0%A4%B0-%E0%A4%86-%E0%A4%9C%E0%A4%BE%E0%A4%8F%E0%A4%82%E0%A4%97%E0%A5%87-%E0%A4%AD%E0%A4%97%E0%A4%B5%E0%A4%BE%E0%A4%A8-%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%AE---%E0%A4%9A%E0%A4%82%E0%A4%AA%E0%A4%A4-%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%AF/article-3653"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2021-12/champat-ray.jpg" alt=""></a><br /><p>अयोध्या। राम मंदिर निर्माण ट्रस्ट के न्यासी चंपत राय ने कहा है कि दिसंबर 2023 तक भगवान श्रीराम अपने स्थाई आसन पर विराजमान हो जाएंगे।  राय ने बुधवार को यहां राम मंदिर निर्माण स्थल पर कहा कि भगवान राम अभी अस्थाई निवास पर हैं और भव्य मंदिर का निर्माण कार्य तेजी से चल रहा है। वर्ष 2023 के अंत तक रामलला को स्थाई रूप से मंदिर में विराजमान कर दिया जाएगा।<br /> <strong><br /> मजबूत है मंदिर की बुनियाद</strong><br /> उन्होंने कहा कि मंदिर के निर्माण स्थल की भूमि पर मंदिर निर्माण की बुनियाद को बड़े-बड़े इंजीनियरों और विशेषज्ञों की देखरेख में तैयार किया गया है और जनवरी के आखिर से इस पर आगे का निर्माण कार्य शुरू कर दिया जाएगा। उनका कहना था कि इसकी बुनियाद को इस तरह से मजबूती प्रदान की जा रही है कि अगले 1000 साल तक कैसी भी बाढ़ और तूफान आए इसकी नींव पर उसका काई असर नहीं होगा।<br /> <br /> ग्रेनाइट पत्थर बेंगलुरु से मंगाए <br /> राम मंदिर ट्रस्ट के न्यासी ने कहा कि मंदिर निर्माण के लिए ग्रेनाइट पत्थर बेंगलुरु से मंगाए गए हैं और सफेद पत्थर राजस्थान से आए हैं। ग्रेनाइट पत्थर करीब 17 से 18 हजार के आसपास हैं और उनके निर्माण स्थल पर लगने के बाद कह सकते हैं कि मंदिर का कार्य पूरा हो चुका है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 30 Dec 2021 13:11:11 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Administrator]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>कैटरीना-विक्की: जहां रिसीव किया जाएगा, वहां लगाई राधा-कृष्ण और भगवान धन्वंतरि की मूर्तियां</title>
                                    <description><![CDATA[कैटरीना कैफ और विक्की कौशल की शादी की तैयारियां जोरो-शोरों से चल रही है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/%E0%A4%95%E0%A5%88%E0%A4%9F%E0%A4%B0%E0%A5%80%E0%A4%A8%E0%A4%BE-%E0%A4%B5%E0%A4%BF%E0%A4%95%E0%A5%8D%E0%A4%95%E0%A5%80--%E0%A4%9C%E0%A4%B9%E0%A4%BE%E0%A4%82-%E0%A4%B0%E0%A4%BF%E0%A4%B8%E0%A5%80%E0%A4%B5-%E0%A4%95%E0%A4%BF%E0%A4%AF%E0%A4%BE-%E0%A4%9C%E0%A4%BE%E0%A4%8F%E0%A4%97%E0%A4%BE--%E0%A4%B5%E0%A4%B9%E0%A4%BE%E0%A4%82-%E0%A4%B2%E0%A4%97%E0%A4%BE%E0%A4%88-%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%A7%E0%A4%BE-%E0%A4%95%E0%A5%83%E0%A4%B7%E0%A5%8D%E0%A4%A3-%E0%A4%94%E0%A4%B0-%E0%A4%AD%E0%A4%97%E0%A4%B5%E0%A4%BE%E0%A4%A8-%E0%A4%A7%E0%A4%A8%E0%A5%8D%E0%A4%B5%E0%A4%82%E0%A4%A4%E0%A4%B0%E0%A4%BF-%E0%A4%95%E0%A5%80-%E0%A4%AE%E0%A5%82%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%A4%E0%A4%BF%E0%A4%AF%E0%A4%BE%E0%A4%82/article-2924"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2021-12/katrina_kaif_vicky_kaushal_wedding.jpg" alt=""></a><br /><p> जयपुर। कैटरीना कैफ और विक्की कौशल की शादी की तैयारियां जोरो-शोरों से चल रही है। शादी में विशेष तौर पर कैट और विक्की सहित अन्य मेहमानों के सूइट्स में विदेशी फल, कन्फेक्शनरी और सुविधाएं आइरिस के कांसाफिनिश सेंटर पीसबाउल्स और थालियां रखी जाएंगी। ये थालियां अखरोट की लकड़ी के संयोजन से बनाई गई है। शादी में मेहमानों के स्वागत के लिए तैयार की गई ट्रे और थालियों का इस्तेमाल होगा। प्रवेश द्वार, स्पा और अन्य स्थानों पर कैटरीना-विक्की और मेहमानों को रिसीव किया जाएगा, वहां राधा-कृष्ण और भगवान धन्वंतरि की मूर्तियां स्थापित की गई हैं। ये मूर्तियां मकराना मार्बल में तराशी गई हैं, जो सिक्ससेंस फोर्ट बरवाड़ा की प्राचीनता और भव्यता से मेल खाते हुए हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                            <category>सवाई माधोपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 04 Dec 2021 14:07:46 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Administrator]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>धनतेरस भगवान धन्वंतरि की आराधना का पर्व</title>
                                    <description><![CDATA[धन्वंतरि को आयुर्वेद का जन्मदाता और देवताओं का चिकित्सक माना जाता है। भगवान विष्णु के 24 अवतारों में 12वां अवतार धन्वंतरि का था।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/6180e3dd201ba/article-2059"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2021-11/dhanters_dhanvantri.jpg" alt=""></a><br /><div style="color:#000000;font-family:Arial, Verdana, sans-serif;font-size:20px;"><strong>कार्तिक मास</strong> की त्रयोदशी तिथि के दिन धनतेरस का त्योहार मनाया जाता है। इस बार 2 नवंबर 2021 मंगलवार को है धन तेरस का त्योहार। इस दिन भगवान धन्वंतरि की पूजा होती है।  </div>
<div style="color:#000000;font-family:Arial, Verdana, sans-serif;font-size:20px;"> </div>
<div style="color:#000000;font-family:Arial, Verdana, sans-serif;font-size:20px;">  <strong>समुद्र मन्थन से उत्पन्न </strong></div>
<div style="color:#000000;font-family:Arial, Verdana, sans-serif;font-size:20px;">कहते हैं कि भगवान धन्वंतरि की उत्पत्ति समुद्र मंथन से हुए थी। वे समुद्र में से अमृत का कलश लेकर निकले थे जिसके लिए देवों और असुरों में संग्राम हुआ था। समुद्र मंथन की कथा श्रीमद्भागवत पुराण, महाभारत, विष्णु पुराण, अग्नि पुराण आदि पुराणों में मिलती है।</div>
<div style="color:#000000;font-family:Arial, Verdana, sans-serif;font-size:20px;"> </div>
<div style="color:#000000;font-family:Arial, Verdana, sans-serif;font-size:20px;"><strong> धन्व के पुत्र धन्वंतरि </strong></div>
<div style="color:#000000;font-family:Arial, Verdana, sans-serif;font-size:20px;"> काशी के राजवंश में धन्व नाम के एक राजा ने उपासना करके अज्ज देव को प्रसन्न किया और उन्हें वरदान स्वरूप धन्वंतरि नामक पुत्र मिला। इसका उल्लेख ब्रह्म पुराण और विष्णु पुराण में मिलता है। यह समुद्र मंथन से उत्पन्न धन्वंतरि का दूसरा जन्म था। धन्व काशी नगरी के संस्थापक काश के पुत्र थे।   </div>
<div style="color:#000000;font-family:Arial, Verdana, sans-serif;font-size:20px;">हालांकि धन्वंतरि वैद्य को आयुर्वेद का जन्मदाता माना जाता है। उन्होंने विश्वभर की वनस्पतियों पर अध्ययन कर उसके अच्छे और बुरे प्रभाव.गुण को प्रकट किया। धन्वंतरि के हजारों ग्रंथों में से अब केवल धन्वंतरि संहिता ही पाई जाती है, जो आयुर्वेद का मूल ग्रंथ है। आयुर्वेद के आदि आचार्य सुश्रुत मुनि ने धन्वंतरिजी से ही इस शास्त्र का उपदेश प्राप्त किया था। बाद में चरक आदि ने इस परंपरा को आगे बढ़ाया।</div>
<div style="color:#000000;font-family:Arial, Verdana, sans-serif;font-size:20px;"> </div>
<div style="color:#000000;font-family:Arial, Verdana, sans-serif;font-size:20px;"><strong>वैज्ञानिक प्रयोग है अमृत</strong></div>
<div style="color:#000000;font-family:Arial, Verdana, sans-serif;font-size:20px;">कहते हैं कि धन्वंतरि लगभग 7 हजार ईसापूर्व हुए थे। उन्होंने शल्य शास्त्र पर महत्वपूर्ण गवेषणाएं की थीं। उनके प्रपौत्र दिवोदास ने उन्हें परिमार्जित कर सुश्रुत आदि शिष्यों को उपदेश दिए। दिवोदास के काल में ही दशराज्ञ का युद्ध हुआ था। धन्वंतरि के जीवन का सबसे बड़ा वैज्ञानिक प्रयोग अमृत का है। उनके जीवन के साथ अमृत का स्वर्ण कलश जुड़ा है। अमृत निर्माण करने का प्रयोग धन्वंतरि ने स्वर्ण पात्र में ही बताया था। </div>
<div style="color:#000000;font-family:Arial, Verdana, sans-serif;font-size:20px;"> </div>
<div style="color:#000000;font-family:Arial, Verdana, sans-serif;font-size:20px;"><strong> निदान और चिकित्सा</strong></div>
<div style="color:#000000;font-family:Arial, Verdana, sans-serif;font-size:20px;">जरा.मृत्यु के विनाश के लिए ब्रह्मा आदि देवताओं ने सोम नामक अमृत का आविष्कार किया था। धन्वंतरि आदि आयुर्वेदाचार्यों अनुसार 100 प्रकार की मृत्यु है। उनमें एक ही काल मृत्यु है, शेष अकाल मृत्यु रोकने के प्रयास ही आयुर्वेद निदान और चिकित्सा हैं। आयु के न्यूनाधिक्य की एक.एक माप धन्वंतरि ने बताई है।</div>
<div style="color:#000000;font-family:Arial, Verdana, sans-serif;font-size:20px;"> </div>
<div style="color:#000000;font-family:Arial, Verdana, sans-serif;font-size:20px;"> <strong>आरोग्य-आयु के देवता </strong></div>
<div style="color:#000000;font-family:Arial, Verdana, sans-serif;font-size:20px;">धनतेरस के दिन उनका जन्म हुआ था। धन्वंतरि आरोग्य, सेहत, आयु और तेज के आराध्य देवता हैं। रामायण, महाभारत, सुश्रुत संहिता, चरक संहिता, काश्यप संहिता तथा अष्टांग हृदय, भाव प्रकाश, शार्गधर, श्रीमद्भावत पुराण आदि में उनका उल्लेख मिलता है।</div>
<div style="color:#000000;font-family:Arial, Verdana, sans-serif;font-size:20px;"> </div>
<div style="color:#000000;font-family:Arial, Verdana, sans-serif;font-size:20px;"><strong>ईशान में करें स्थापना</strong></div>
<div style="color:#000000;font-family:Arial, Verdana, sans-serif;font-size:20px;">इस दिन प्रात उठकर नित्यकर्म से निवृत्त होकर पूजा की तैयारी करें।</div>
<div style="color:#000000;font-family:Arial, Verdana, sans-serif;font-size:20px;">घर के ईशान कोण में ही पूजा करें। पूजा के समय हमारा मुंह ईशान, पूर्व या उत्तर में होना चाहिए।</div>
<div style="color:#000000;font-family:Arial, Verdana, sans-serif;font-size:20px;">पूजन के समय पंचदेव की स्थापना जरूर करें। सूर्यदेव, श्रीगणेश, दुर्गा, शिव और विष्णु को पंचदेव कहा गया है। पूजा के समय सभी एकत्रित होकर पूजा करें। पूजा के दौरान किसी भी प्रकार शोर न करें।</div>
<div style="color:#000000;font-family:Arial, Verdana, sans-serif;font-size:20px;">इस दिन धन्वंतरि देव की षोडशोपचार पूजा करना चाहिए। अर्थात 16 क्रियाओं से पूजा करें। पाद्य, अर्घ्य, आचमन, स्रान, वस्त्र, आभूषण, गंध, पुष्प, धूप, दीप, नेवैद्य, स्तवपाठ, तर्पण और नमस्कार। पूजन के अंत में सांगता सिद्धि के लिए दक्षिणा भी चढ़ाना चाहिए।</div>
<div style="color:#000000;font-family:Arial, Verdana, sans-serif;font-size:20px;">इसके बाद धन्वंतरि देव के सामने धूपए दीप जलाएं। फिर उनके के मस्तक पर हलदी कुंकूए चंदन और चावल लगाएं। उन्हें हार और फूल चढ़ाएं। </div>
<div style="color:#000000;font-family:Arial, Verdana, sans-serif;font-size:20px;"> पूजा करने के बाद प्रसाद या नैवेद्य चढ़ाएं।  अंत में उनकी आरती करके नैवेद्य चढ़ाकर पूजा का समापन किया जाता है।</div>
<div style="color:#000000;font-family:Arial, Verdana, sans-serif;font-size:20px;"> </div>
<div style="color:#000000;font-family:Arial, Verdana, sans-serif;font-size:20px;"><span style="background-color:#ffff99;"><span style="color:#ff0000;"><strong>इन देवों की  होती है पूजा </strong></span></span></div>
<div style="color:#000000;font-family:Arial, Verdana, sans-serif;font-size:20px;">हिन्दू कैलेंडर के अनुसार कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी को धनतेरस का त्योहार मनाया जाता है। यह 5 दिन चलने वाले दीपावली उत्सव का पहला दिन होता है। धनतेरस से ही तीन दिन तक चलने वाला गोत्रिरात्र व्रत भी शुरू होता है। इस दिन पांच देवों की पूजा होती है।</div>
<div style="color:#000000;font-family:Arial, Verdana, sans-serif;font-size:20px;"><span style="color:#ff0000;"><strong>धन्वंतरि पूजा</strong></span> :  हिन्दू मान्यता अनुसार धन तेरस के दिन समुद्र मंथन से आयुर्वेद के जनक भगवान धन्वंतरि अमृत कलश लेकर प्रकट हुए थे। अमृत कलश के अमृत का पान करके देवता अमर हो गए थे। इसीलिए आयु और स्वस्थता की कामना हेतु धनतेरस पर भगवान धन्वंतरि का पूजन किया जाता है।</div>
<div style="color:#000000;font-family:Arial, Verdana, sans-serif;font-size:20px;"><span style="color:#ff0000;"><strong>यम पूजा :</strong></span>  धनतेरस के दिन यम पूजा का भी महत्व है। कहते हैं कि धनतेरस के दिन यमराज के निमित्त जहां दीपदान किया जाता है, वहां अकाल मृत्यु नहीं होती है।</div>
<div style="color:#000000;font-family:Arial, Verdana, sans-serif;font-size:20px;"><span style="color:#ff0000;"><strong>कुबेर पूजा :</strong></span>  धन के देवता कुबेर की इस दिन विशेष पूजा होती है। कुबेर भी आसुरी प्रवृत्तियों का हरण करने वाले देव हैं इसीलिए उनकी भी पूजा का प्रचलन है।</div>
<div style="color:#000000;font-family:Arial, Verdana, sans-serif;font-size:20px;"><span style="color:#ff0000;"><strong>लक्ष्मी पूजा :</strong></span>  इस दिन लक्ष्मी पूजा का भी महत्व है। श्रीसूक्त में वर्णन है कि लक्ष्मीजी भय और शोक से मुक्ति दिलाती हैं तथा धन-धान्य और अन्य सुविधाओं से युक्त करके मनुष्य को निरोगी काया और लंबी आयु देती हैं।</div>
<div style="color:#000000;font-family:Arial, Verdana, sans-serif;font-size:20px;"><span style="color:#ff0000;"><strong>गणेश पूजा :</strong></span>  गणेशजी की पूजा प्रत्येक मांगलिक कार्य और त्योहार में की जाती है क्योंकि वे प्रथम पूज्य हैं। सभी के साथ गणेश पूजा की जाना जरूरी होती है।</div>
<div style="color:#000000;font-family:Arial, Verdana, sans-serif;font-size:20px;"><span style="color:#ff0000;"><strong>पशु पूजा :</strong></span> धनतेरस के दिन ग्रामीण क्षेत्र में मवेशियों को अच्छे से सजाकर उनकी पूजा करते हैं, क्योंकि ग्रामीणों के लिए पशु धन का सबसे ज्यादा महत्व होता है। दक्षिण भारत में लोग गायों को देवी लक्ष्मी के अवतार के रूप में मानते हैं इसलिए वहां के लोग गाय का विशेष सम्मान और आदर करते हैं।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 02 Nov 2021 13:12:06 +0530</pubDate>
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                <title>रावण से भी भारी कोरोना : प्रभु राम की बाट जोह रहे हैं अब रामलीला मंच</title>
                                    <description><![CDATA[सूने मंच बिना यशगान, कौनसी दिशा में गए मेरे भगवान]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%B5%E0%A4%A3-%E0%A4%B8%E0%A5%87-%E0%A4%AD%E0%A5%80-%E0%A4%AD%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A5%80-%E0%A4%95%E0%A5%8B%E0%A4%B0%E0%A5%8B%E0%A4%A8%E0%A4%BE---%E0%A4%AA%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A4%AD%E0%A5%81-%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%AE-%E0%A4%95%E0%A5%80-%E0%A4%AC%E0%A4%BE%E0%A4%9F-%E0%A4%9C%E0%A5%8B%E0%A4%B9-%E0%A4%B0%E0%A4%B9%E0%A5%87-%E0%A4%B9%E0%A5%88%E0%A4%82-%E0%A4%85%E0%A4%AC-%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%AE%E0%A4%B2%E0%A5%80%E0%A4%B2%E0%A4%BE-%E0%A4%AE%E0%A4%82%E0%A4%9A/article-1600"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2021-10/ravan-ramleela-maidan.jpg" alt=""></a><br /><p><strong> जयपुर</strong>। बोलो ए जमीं, बोलो आसमान, कोई तो जवाब दो खोलो ए जुबान, कौनसी दिशा में गए मेरे भगवान... राष्ट्र कवि प्रदीप की यह गीत रचना कोरोना के कारण सूने पड़े रामलीला मंचोंं पर सटीक बैठती है। वाकई कोरोना अब रावण से भी भारी हो गया है, जिसके कारण त्योहारों के साथ अब प्राचीनकाल से चली आ रही रामलीला जैसी परंपराओं पर भी विराम लग गया है। जयपुर में आजादी के बाद से ही भगवान राम की लीलाएं अनवरत रूप से मंचित होती आई हैं, लेकिन विगत दो साल से ये कोरोना की भेंट चढ़ी हुई हैं। बिना भगवान राम के यशगान के रामलीला मैदान सूने पड़े हैं। यूं देश आजाद होने के साथ ही जयपुर में कई जगह रामलीलाओं का मंचन होने लगा था, लेकिन सबसे बड़ा मंच न्यू गेट स्थित रामलीला मैदान था। यहां रामलीला की शुरुआत आज से करीब 70 साल पहले सोहनमल हरिश्चन्द्र ओसवाल जैन परिवार ने की थी। वे भगवान राम के अनन्य भक्त थे। उनकी इस परम्परा को उनके पौत्र सुरेन्द्र गोलछा आज भी निभा रहे हैं, लेकिन कोरोना गाइडलाइन के चलते पिछले दो साल से रामलीला मंचन नहीं हुआ। इस आयोजन के लिए उन्होंने गोलछा चेरिटेबल ट्रस्ट के बैनर तले रामलीला महोत्सव समिति का गठन भी कर रखा है। इसके महामंत्री प्रवीण बड़े भैया का कहना है कि न्यू गेट रामलीला मैदान में रामलीला के लिए मथुरा-वृंदावन से मंडलियां बुलाई जाती हैं। करीब दो दशक पहले तक इस रामलीला के प्रति दर्शकों का काफी क्रेज हुआ करता था। इसे देखने शहर के दूरदराज इलाकों से लोग परिवार समेत आते थे। दिल्ली की तरह जयपुर में भी रामलीला मैदान है।</p>
<p><br /> <span style="background-color:#ffff99;"><span style="color:#ff00ff;"><strong>महिला कलाकार भी आने लगीं</strong></span></span><br /> आदर्श नगर राम मंदिर भी दूसरी बड़ी रामलीला के रूप में जाना जाता है। यहां भी रामलीला करीब छह दशक से हो रही है। इस मंच पर जयपुर के ही कलाकार रामलीला के विभिन्न पात्रों को निभाते थे, लेकिन सबकी व्यस्तताएं बढ़ने के कारण यहां भी बाहर से मंडलियां बुलाई जाने लगी। आदर्श नगर राम मंदिर प्रन्यास के सचिव इन्द्र कुमार चड्ढ़ा ने बताया कि दो साल से कोरोना के चलते रामलीला मंचन नहीं हो रहा है। शहर में होने वाली अन्य लीलाओं में महिला पात्रों को पुुरुष ही निभाते हैं, लेकिन प्रन्यास ने समय के साथ इसमें बदलाव कर महिला कलाकारों को भी बुलाना प्रारंभ किया है, जिनके अभिनय को काफी सराहा गया।</p>
<p><br /> <span style="background-color:#ffff99;"><span style="color:#ff00ff;"><strong>यहां भी होती हैं रामलीलाएं </strong></span></span><br /> जवाहर नगर रामलीला समिति की ओर से भी पिछले चार दशक से जवाहर नगर रामलीला मैदान में रामलीला का मंचन किया जा रहा है। समिति के महासचिव गोपी किशन माछर ने बताया कि इस मंच पर भी मथुरा आदि से कलाकार बुलाए जाते हैं, लेकिन इस बार रामलीला नहीं की जा रही है। इसी तरह शास्त्री नगर हाऊसिंग बोर्ड, अम्बाबाड़ी नया खेड़ा और सांगानेर सहित विभिन्न क्षेत्रों में रामलीलाएं होती रही हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 12 Oct 2021 12:43:07 +0530</pubDate>
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