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                <title>Astronomical event - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <description>Astronomical event RSS Feed</description>
                
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                <title>धार्मिक मान्यता: भारत में आज लगेगा साल का पहला चंद्र ग्रहण; पुराणों में ग्रहण केवल खगोलीय घटना नहीं, अत्यंत महत्वपूर्ण आध्यात्मिक एवं धार्मिक क्षण</title>
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                        <![CDATA[सनातन परंपरा में चंद्र ग्रहण को मात्र खगोलीय घटना नहीं, बल्कि आध्यात्मिक शुद्धिकरण का समय माना गया है। ज्योतिषाचार्य के अनुसार, समुद्र मंथन की कथा से जुड़े राहु-केतु द्वारा चंद्रमा को ग्रसने के कारण यह काल अशुभ होता है। मंगलवार को सूतक लगते ही मंदिरों के कपाट बंद कर दिए गए और सभी शुभ कार्य स्थगित रहे।]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/the-first-lunar-eclipse-of-the-year-will-take-place/article-145197"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/chandra-grahan-2026.png" alt=""></a><br /><p>भदोही। हिंदू धर्म और पौराणिक मान्यताओं में चंद्र ग्रहण को केवल एक खगोलीय घटना नहीं, बल्कि अत्यंत महत्वपूर्ण आध्यात्मिक एवं धार्मिक क्षण माना गया है। सनातन परंपरा में राहु और केतु द्वारा सूर्य या चंद्रमा को ग्रसने की घटना को अशुभ संकेत के रूप में देखा जाता है। </p>
<p>पौराणिक ग्रंथों, विशेषकर मत्स्य पुराण में वर्णित कथा के अनुसार समुद्र मंथन से निकले अमृत के वितरण के समय भगवान विष्णु ने मोहिनी रूप धारण कर देवताओं को अमृत पिलाया। इस दौरान असुर स्वरभानु देवताओं के बीच बैठकर अमृतपान करने लगा। सूर्य और चंद्रमा ने उसकी पहचान कर ली और विष्णु को सूचित किया। इसके बाद विष्णु ने सुदर्शन चक्र से उसका मस्तक अलग कर दिया। अमृतपान कर लेने के कारण वह अमर हो गया। ज्योतिषाचार्य पंडित मिथिलेश उपाध्याय के अनुसार उसका सिर ‘राहु’ और धड़ ‘केतु’ कहलाया।</p>
<p>मान्यता है कि सूर्य और चंद्रमा द्वारा भेद खोले जाने से क्रोधित राहु समय-समय पर सूर्य व चंद्रमा को ग्रसता है, जिसे सूर्य या चंद्र ग्रहण कहा जाता है। ज्योतिष शास्त्र में ग्रहण काल को अशुभ माना जाता है। इस अवधि में सूर्य और चंद्र, जिन्हें आत्मा और ऊर्जा का प्रतीक माना गया है, पीड़ित अवस्था में होते हैं।</p>
<p>धार्मिक परंपराओं के अनुसार ग्रहण प्रारंभ होने से लगभग 12 घंटे पूर्व ‘सूतक’ लग जाता है। सूतक काल में मंदिरों के कपाट बंद कर दिए जाते हैं और शुभ कार्य स्थगित कर दिए जाते हैं। धार्मिक अनुष्ठानों की दृष्टि से ग्रहण काल को विशेष एवं निर्णायक समय माना गया है। मंगलवार को सूतक लगने के कारण चंद्र ग्रहण से लगभग 12 घंटे पूर्व छह बजकर 20 मिनट पर ही मंदिरों के द्वार बंद कर दिए गए।</p>]]>
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                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 03 Mar 2026 14:14:28 +0530</pubDate>
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                        <![CDATA[Jaipur NM]]>
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                <title>होली पर लगने जा रहा साल का पहला चंद्र ग्रहण : भारत के अलावा इन देशों में दिखेगा असर, पढ़े क्या होता है ग्रहण</title>
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                        <![CDATA[आगामी 3 मार्च को वर्ष का पहला पूर्ण चंद्र ग्रहण होगा, जिसे 'रेड मून' के रूप में देखा जाएगा। उज्जैन की जीवाजी वेधशाला के अनुसार, यह ग्रहण 3 घंटे 28 मिनट तक रहेगा। भारत के पूर्वी हिस्सों में यह दृश्य होगा, हालांकि उज्जैन में सूर्यास्त और चंद्रोदय के समय के कारण इसे स्पष्ट देखना चुनौतीपूर्ण होगा।]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/the-first-lunar-eclipse-of-the-year-is-going-to/article-145062"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/chandra-grahan--2026.png" alt=""></a><br /><p>उज्जैन। खगोलीय घटना के तहत 3 मार्च को होने वाला इस वर्ष का पहला पूर्ण चंद्र ग्रहण भारत में दिखाई देगा। उज्जैन स्थित वेधशाला ने इसको लेकर विज्ञाप्ति जारी की है। जिसमें चन्द्र ग्रहण के बारे में जानकारी दी गई है। उज्जैन स्थित शासकीय जीवाजी वेधशाला के अधीक्षक डॉ. राजेंद्र प्रकाश गुप्त ने जारी विज्ञप्ति में बताया कि चंद्र ग्रहण की स्थिति में पृथ्वी सूर्य और चंद्रमा के मध्य सीधी रेखा में आ जाती है। पूर्ण चंद्र ग्रहण की अवस्था में पृथ्वी की छाया से चंद्रमा का पूरा भाग ढक जाता है, जिससे सूर्य का प्रकाश चंद्रमा तक नहीं पहुंच पाता और पूर्ण ग्रहण दिखाई देता है। इस दौरान चंद्रमा ताम्रवर्ण का प्रतीत होता है, जिसे सामान्यत: रेड मून कहा जाता है।</p>
<p>उन्होंने बताया कि 3 मार्च पूर्णिमा के दिन पूर्ण चंद्र ग्रहण दोपहर 3 बजकर 19 मिनट 7 सेकंड पर प्रारंभ होगा। ग्रहण का मध्यकाल शाम 5 बजकर 03 मिनट 7 सेकंड पर रहेगा तथा मोक्ष सायंकाल 6 बजकर 47 मिनट 6 सेकंड पर होगा। इस प्रकार ग्रहण की कुल अवधि 3 घंटे 28 मिनट रहेगी। ग्रहण का प्रतिशत 155.5 होने के कारण चंद्रमा पूर्ण ग्रहण की स्थिति में रहेगा।</p>
<p>उन्होंने बताया कि यह ग्रहण भारत के पूर्वी भाग, जहां सूर्यास्त शीघ्र होता है, वहां देखा जा सकेगा। इसके अलावा पूर्वी एशिया, ऑस्ट्रेलिया, प्रशांत महासागर क्षेत्र तथा अमेरिका में भी यह नजर आएगा। डॉ. गुप्त ने बताया कि उज्जैन में ग्रहण के प्रारंभ के समय धूप रहेगी और सूर्यास्त सायं 6 बजकर 31 मिनट पर होगा। सैद्धांतिक रूप से यह ग्रहण भारत में दृश्य रहेगा, लेकिन उज्जैन में सूर्यास्त के समय पूर्व दिशा में पूर्णिमा का चंद्रमा आंशिक ग्रहण लगी हुई स्थिति में उदित होगा। ग्रहण की समाप्ति का समय 6 बजकर 45 मिनट 6 सेकंड बताया गया है।</p>
<p>उन्होंने स्पष्ट किया कि उज्जैन में सूर्यास्त के बाद केवल लगभग 17 मिनट तक ही ग्रहण की स्थिति रहेगी। जब तक चंद्रमा क्षितिज से पर्याप्त ऊपर आकर स्पष्ट रूप से दिखाई देने की स्थिति में पहुंचेगा, तब तक ग्रहण समाप्त हो चुका होगा। इस कारण उज्जैन में इसे नग्न आंखों से देख पाना संभव नहीं होगा। उन्होंने यह भी बताया कि टेलिस्कोप से ग्रहण देखने के लिए चंद्रमा का पर्याप्त ऊंचाई पर आना आवश्यक है, ङ्क्षकतु उसके पहले ही ग्रहण समाप्त हो जाएगा। इसलिए टेलिस्कोप से भी ग्रहण का अवलोकन संभव नहीं हो सकेगा।</p>]]>
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                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 01 Mar 2026 18:00:02 +0530</pubDate>
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                <title>100 साल बाद इस दिन लगेगा सदी का सबसे लंबा सूर्यग्रहण, 6 मिनट 23 सेकंड तक धरती पर होगा अंधेरा</title>
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                        <![CDATA[दुनिया 2 अगस्त 2027 को 21वीं सदी के सबसे लंबे पूर्ण सूर्यग्रहण का साक्षी बनेगी। यह दुर्लभ घटना 6 मिनट 23 सेकंड तक चलेगी, जिसमें चंद्रमा सूर्य को पूरी तरह ढक देगा। वैज्ञानिकों के अनुसार ऐसा लम्बा ग्रहण 100 साल में दोबारा देखना संभव नहीं होगा।]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/after-100-years-the-longest-solar-eclipse-of-the-century/article-133774"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-11/surya.png" alt=""></a><br /><p>वॉशिंगटन। साल 2027 में एक दुनिया एक दुर्लभ पूर्ण सूर्यग्रहण का दीदार करने जा रही है, जिसे 21वीं सदी की होने वाली सबसे महत्वपूर्ण घटनाओं में से एक कहा जा रहा है। खगोल वैज्ञानिकों और अंतरिक्ष में दिलचस्पी रखने वालों ने अभी से ही इस तारीख की तैयारियां शुरू कर दी हैं। खगोलविदों का कहना है कि 2 अगस्त 2027 को अंतरिक्ष में पूर्ण सूर्यग्रहण का नजारा होगा। वैसे तो पूर्ण सूर्यग्रहण हर साल या फिर साल के अंतराल पर होता रहता है लेकिन अगस्त 2027 में होने वाला ग्रहण अपनी लंबी अवधि के लिए बहुत खास हो गया है। यह खगोलविदों को ब्रह्मांड के रहस्यों को जानने के लिए एक मौका होगा।</p>
<p><strong>2027 में होगी यह घटना</strong></p>
<p>2 अगस्त 2027 का सूर्यग्रहण ऐसी घटना होगी जिसे पीढ़ियां याद रखेंगी। यह 21वें सदी का सबसे लंबा पूर्ण सूर्यग्रहण होगा। नासा के अनुसार, इस दौरान प्रभावित इलाके 6 मिनट 23 सेकंड के लिए गहरे अंधेरे में डूब जाएंगे। इतने समय तक चंद्रमा सूर्य के कोरोना को पूरी तरह ढके रहेगा। वैज्ञानिकों का कहना है कि, इतना लंबा पूर्ण सूर्यगर्हण पिछली सदी में नहीं देखा गया था और इसे अगले 100 साल तक देखना संभव नहीं होगा।</p>
<p>पूर्ण सूर्यग्रहण के दौरान सूर्य का कोरोना छिप जाने से दिन में शाम जैसा नजारा होगा। इस दौरान तापमान 5 से 10 डिग्री गिर सकता है। हवा की दिशा बदल सकती है। यह सूर्यग्रहण खगोलविदों के लिए अंतरिक्ष के रहस्यों को समझने का दुर्लभ अवसर भी होगा। आमतौर पर पूर्ण सूर्यग्रहण 3 मिनट से भी कम के होते हैं। ऐसे अगस्त 2027 में होने वाले ग्रहण की लंबी अवधि खगोलविदों को अंतरिण को देखने का दुर्लभ मौका देगा। स्पेस डॉटकॉम की रिपोर्ट के अनुसार, साल 2114 तक इस लंबाई का पूर्ण सूर्यग्रहण नहीं देखा जा सकेगा।</p>
<p><strong>आखिर क्यों हो रहा लंबा सूर्यग्रहण?</strong></p>
<p>सूर्यग्रहण एक खगोलीय घटना है, जो सूर्य, चंद्रहणा और पृथ्वी के क्रमश: एक सीध में होने के चलते होती है। इस दौरान चंद्रमा सूर्य के सामने आकार उसके प्रकाश में बाधा डालता है, जिसके परिणामस्वरूप धरती पर अंधेरा होने लगता है। 2 अगस्त 2027 को पृथ्वी सूर्य से अपने सबसे दूर बिंदु पर होगी। </p>
<p>इसके चलते सूर्य आकाश में छोटा नजर आएगा। लेकिन उसी समय चंद्रमा अपने परिक्रमा पथ पर बढ़ते हुए पृथ्वी के सबसे निकटतम बिंदु पर होगा, जिससे यह आकार में बड़ा दिखाई देगा। यह दुर्लभ संयोजन सूर्य के प्रकाश को अधिक समय तक रोकेगा, जो इस ग्रहण को लंबा बना देगा।</p>]]>
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                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 27 Nov 2025 14:24:52 +0530</pubDate>
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