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                <title>singing - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <title>स्वर माधुरी के अन्तिम मेगा ऑडिशन में जयपुर की 125 प्रतिभाओं ने दिखाया हुनर</title>
                                    <description><![CDATA[ 28 दिसंबर को स्वर माधुरी का होगा मेगा फाइनल और ग्रांड फिनाले, पार्श्व गायिका जसपिंदर नरुला और पं. विश्व मोहन भट्ट स्वर शिरोमणि को सम्मानित किया जाएगा। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/125-talents-from-jaipur-showed-their-skills-in-the-last/article-98030"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-12/5554-(3)6.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। 28 दिसंबर को स्वर माधुरी का होगा मेगा फाइनल और ग्रांड फिनाले, पार्श्व गायिका जसपिंदर नरुला और पं. विश्व मोहन भट्ट स्वर शिरोमणि को सम्मानित किया जाएगा। राजस्थान जयपुर सहित प्रदेश के अनेक शहरों में आयोजित की जा रही देश की सबसे बड़ी ऑफ लाइन अखिल भारतीय संगीत प्रतियोगिता स्वर माधुरी का जयपुर के जवाहर कला केन्द्र में जयपुर रीजन का अन्तिम मेगा ऑडिशन आयोजित किया गया है।</p>
<p> दिनभर चली प्रतियोगिताओं में मरु कोकिला सीमा मिश्रा ने लोक संगीत और सुगम संगीत तथा डॉ. उमा विजय ने शास्त्रीय संगीत वर्ग में कुल 125 प्रतिभाओं के हुनर की परख की। देश के पहले सबसे बड़े ऑफ लाइन टेलेंट हंट का आयोजन राजस्थान की लता कही जाने वाली राजस्थानी लोक गायिका सीमा मिश्रा द्वारा स्थापित सीमा मिश्रा राजस्थान लोक संगीत- कला अकादमी जिसका मुख्य उद्देश्य राजस्थानी लोक संगीत- कला, संस्कृति एवं साहित्य के संरक्षण संवर्धन एवं सृजन का है।</p>
<p>संपर्क क्रांति परिवार के राष्ट्रीय अध्यक्ष शिव विनायक शर्मा ने बताया कि आज हुए जयपुर रीजन के ऑडिशन तथा इससे पूर्व देश के विभिन्न शहरों में आयोजित ऑडिशन्स में 3500 से भी अधिक प्रतिभाओं ने अपने हुनर का प्रदर्शन किया। इन ऑडिशन्स में से चयनित प्रतिभाओं का 21 और 22 दिसम्बर को राजस्थान इंटरनेशन सेन्टर में मेगा ऑडिशन होगा, जिनमें से चयनित प्रतिभाएं 24 और 25 दिसम्बर को यहीं पर आयोजित सेमिफाइनल राउंड में अपने हुनर का प्रदर्शन करेंगी और 26 दिसंबर को फाइनल होगा। अन्तिम चरण का मेगा टेलेंट हंट और ग्रांड फिनाले 28 दिसंबर को शाम 5.00 बजे से महाराणा प्रताप ऑडिटोरियम में आयोजित किया जाएगा। इस मौके पर फिल्म प्यार तो होना ही था के लिए फिल्मफेयर अवार्ड और स्क्रीन अवार्ड प्राप्त पार्श्व गायिका जसपिंदर नरूला और पद्मभूषण पं. विश्व मोहन भट्ट निर्णायक के रूप में मौजूद रहेंगे। </p>
<p><strong>इन श्रेणियों में आयोजित होगी प्रतियोगिता :</strong></p>
<p>इस प्रतियोगिता का मुख्य उद्देश्य स्वर साधकों के इस महाकुंभ में स्वर मंथन से स्वर शिरोमणि की खोज करना है। यह टेलेंट हंट ’शास्त्रीय संगीत, लोक संगीत, तथा सुगम संगीत के अनरिकॉर्डेड  एवं रिकॉर्डेड’ श्रेणियों में आयोजित की जा रहा है। </p>
<p><strong>अब तक यहां आयोजित हुए ऑडिशन : </strong></p>
<p>जयपुर ऑडिशन से पूर्व अब तक दिल्ली, पंजाब, हरियाणा, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, झारखंड, बिहार, छत्तीसगढ़, उड़ीसा, असम ,मध्य प्रदेश, सहित राजस्थान के अजमेर, भीलवाड़ा, उदयपुर, सीकर, झुंझुनू ,गंगानगर, बीकानेर, सरदारशहर में ऑडिशन आयोजित कर अगले चरण के लिए प्रतिभाओं का चयन किया जा चुका है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 18 Dec 2024 17:44:22 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>स्वर कोकिला लता मंगेशकर का जयपुर से रहा है विशेष रिश्ता : व्रत में ना गाने का नियम भी तोड़ा था राजस्थान की जनता की भलाई के लिए</title>
                                    <description><![CDATA[1987 में अकाल पीड़ितों की सहायता के लिए दिया था एसएमएस स्टेडियम में कार्यक्रम :एक करोड़ एक लाख का चेक भेट किया था मुख्यमंत्री को]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/%E0%A4%B8%E0%A5%8D%E0%A4%B5%E0%A4%B0-%E0%A4%95%E0%A5%8B%E0%A4%95%E0%A4%BF%E0%A4%B2%E0%A4%BE-%E0%A4%B2%E0%A4%A4%E0%A4%BE-%E0%A4%AE%E0%A4%82%E0%A4%97%E0%A5%87%E0%A4%B6%E0%A4%95%E0%A4%B0-%E0%A4%95%E0%A4%BE-%E0%A4%9C%E0%A4%AF%E0%A4%AA%E0%A5%81%E0%A4%B0-%E0%A4%B8%E0%A5%87-%E0%A4%B0%E0%A4%B9%E0%A4%BE-%E0%A4%B9%E0%A5%88-%E0%A4%B5%E0%A4%BF%E0%A4%B6%E0%A5%87%E0%A4%B7-%E0%A4%B0%E0%A4%BF%E0%A4%B6%E0%A5%8D%E0%A4%A4%E0%A4%BE---%E0%A4%B5%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A4%A4-%E0%A4%AE%E0%A5%87%E0%A4%82-%E0%A4%A8%E0%A4%BE-%E0%A4%97%E0%A4%BE%E0%A4%A8%E0%A5%87-%E0%A4%95%E0%A4%BE-%E0%A4%A8%E0%A4%BF%E0%A4%AF%E0%A4%AE-%E0%A4%AD%E0%A5%80-%E0%A4%A4%E0%A5%8B%E0%A4%A1%E0%A4%BC%E0%A4%BE-%E0%A4%A5%E0%A4%BE-%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%9C%E0%A4%B8%E0%A5%8D%E0%A4%A5%E0%A4%BE%E0%A4%A8-%E0%A4%95%E0%A5%80-%E0%A4%9C%E0%A4%A8%E0%A4%A4%E0%A4%BE-%E0%A4%95%E0%A5%80-%E0%A4%AD%E0%A4%B2%E0%A4%BE%E0%A4%88-%E0%A4%95%E0%A5%87-%E0%A4%B2%E0%A4%BF%E0%A4%8F/article-4300"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-02/lata_haridev-jodhi.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। स्वर कोकिला भारत रत्न लता मंगेशकर के निधन से पूरा देश स्तब्ध एवं शोक में है लेकिन राजस्थान के लोगों को उनके निधन से सदमा और पीड़ा बेहद है कारण की राजस्थान खासकर जयपुर से उनका विशेष रिश्ता रहा है। 1987 में जब राजस्थान में भीषण अकाल पड़ा और तत्कालीन सरकार के पास अकाल का मुकाबला करने के लिए रूपयों की कमी महसूस हुई तो सरकार के मुख्यमंत्री हरिदेव जोशी ने सुर संगम संस्था के अध्यक्ष के सी मालू से स्वर कोकिला का जयपुर में अकाल पीड़ितों की सहायता के लिए चैरिटी कार्यक्रम कराने के लिए आमंत्रित करने को कहा। उस समय लता दीदी फिल्मों के गानों को लेकर बेहद व्यस्त थी लेकिन जब राजस्थान सरकार और के सी मालू ने उन्हें राजस्थान में भीषण अकाल के बारे में बताया तो वे तुरंत जयपुर में आने और अकाल पीड़ित राजस्थान की जनता के लिए अपने गीतो का कार्यक्रम देने के लिए राजी हो गई। लता दीदी अपने वायदे के मुताबिक जयपुर पहुंची और एसएमएस स्टेडियम में चालीस हजार दर्शकों से भी अधिक लोगों की मौजूदगी में अपने गीतों की प्रस्तुति दी। कार्यक्रम में शामिल होने के लिए स्वयं मुख्यमंत्री हरिदेव जोशी ने टिकट खरीदकर एक उदाहरण भी पेश किया। फिल्म वितरक राज बंसल भी उस कार्यक्रम में बतौर वोलेंटियर व्यवस्था बनाने में शामिल थे। वे बताते है कि लता दीदी ने अपने कार्यक्रम की शुरुआत ऐ मेरे वतन के लोगों से जैसे ही की तो पूरा एसएमएस स्टेडियम उनके स्वागत में खड़ा हो गया और तालियों की करतल ध्वनि से स्टेडियम गूंज उठा। लता मंगेशकर ने 26 बेहद सुरीले गीत गाएं और राजस्थान की जनता का दिल जीत लिया।</p>
<p> </p>
<p>उन्होंने कार्यक्रम का समापन अजीब दास्तां है ये, कहा शुरू कहा खत्म से किया, जबकि आएगा आने वाला और मेरा साया साथ होगा जैसे सदाबहार नगमे भी गाए। उनके साथ मोहमद अजीज एवं उनकी बहन उषा मंगेशकर ने भी गीतों में उनका साथ दिया। लता दीदी ने जनता की डिमांड पर राजस्थानी भाषा में थांये काजलिया गीत नितिन मुकेश के साथ युगल रूप में सुनाया। और  वापस जयपुर आने का वायदा भी किया। उस कार्यक्रम से प्राप्त एक करोड़ एक लाख का चेक लता दीदी ने मुख्यमंत्री हरिदेव जोशी को अकाल पीड़ितों की सहायता के लिए भेट किया। बंसल बताते है कि उन दिनों लोग सिगरेट खुले आम पिया करते थे स्टेडियम में उस कार्यक्रम के दौरान जब लोग सिगरेट पी रहे थे तो उस धुआं से लता दीदी सहज होकर गा नही पा रही थी जब उन्होंने सिगरेट ना पीने की अपील जनता से की तो सभी ने अपनी सिगरेटे बुझा दी। बंसल कहते है की उस दिन लता दीदी का व्रत था वे अमूमन व्रत के दिन गीत नहीं गाती थी लेकिन राजस्थान की अकाल पीड़ित जनता की भलाई के लिए ना केवल उन्होंने अपना नियम तोड़ा बल्कि जयपुर की उस तारीख को इतिहास में दर्ज कर दिया।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>मूवी-मस्ती</category>
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                <pubDate>Sun, 06 Feb 2022 12:03:48 +0530</pubDate>
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                <title>रावण से भी भारी कोरोना : प्रभु राम की बाट जोह रहे हैं अब रामलीला मंच</title>
                                    <description><![CDATA[सूने मंच बिना यशगान, कौनसी दिशा में गए मेरे भगवान]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%B5%E0%A4%A3-%E0%A4%B8%E0%A5%87-%E0%A4%AD%E0%A5%80-%E0%A4%AD%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A5%80-%E0%A4%95%E0%A5%8B%E0%A4%B0%E0%A5%8B%E0%A4%A8%E0%A4%BE---%E0%A4%AA%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A4%AD%E0%A5%81-%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%AE-%E0%A4%95%E0%A5%80-%E0%A4%AC%E0%A4%BE%E0%A4%9F-%E0%A4%9C%E0%A5%8B%E0%A4%B9-%E0%A4%B0%E0%A4%B9%E0%A5%87-%E0%A4%B9%E0%A5%88%E0%A4%82-%E0%A4%85%E0%A4%AC-%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%AE%E0%A4%B2%E0%A5%80%E0%A4%B2%E0%A4%BE-%E0%A4%AE%E0%A4%82%E0%A4%9A/article-1600"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2021-10/ravan-ramleela-maidan.jpg" alt=""></a><br /><p><strong> जयपुर</strong>। बोलो ए जमीं, बोलो आसमान, कोई तो जवाब दो खोलो ए जुबान, कौनसी दिशा में गए मेरे भगवान... राष्ट्र कवि प्रदीप की यह गीत रचना कोरोना के कारण सूने पड़े रामलीला मंचोंं पर सटीक बैठती है। वाकई कोरोना अब रावण से भी भारी हो गया है, जिसके कारण त्योहारों के साथ अब प्राचीनकाल से चली आ रही रामलीला जैसी परंपराओं पर भी विराम लग गया है। जयपुर में आजादी के बाद से ही भगवान राम की लीलाएं अनवरत रूप से मंचित होती आई हैं, लेकिन विगत दो साल से ये कोरोना की भेंट चढ़ी हुई हैं। बिना भगवान राम के यशगान के रामलीला मैदान सूने पड़े हैं। यूं देश आजाद होने के साथ ही जयपुर में कई जगह रामलीलाओं का मंचन होने लगा था, लेकिन सबसे बड़ा मंच न्यू गेट स्थित रामलीला मैदान था। यहां रामलीला की शुरुआत आज से करीब 70 साल पहले सोहनमल हरिश्चन्द्र ओसवाल जैन परिवार ने की थी। वे भगवान राम के अनन्य भक्त थे। उनकी इस परम्परा को उनके पौत्र सुरेन्द्र गोलछा आज भी निभा रहे हैं, लेकिन कोरोना गाइडलाइन के चलते पिछले दो साल से रामलीला मंचन नहीं हुआ। इस आयोजन के लिए उन्होंने गोलछा चेरिटेबल ट्रस्ट के बैनर तले रामलीला महोत्सव समिति का गठन भी कर रखा है। इसके महामंत्री प्रवीण बड़े भैया का कहना है कि न्यू गेट रामलीला मैदान में रामलीला के लिए मथुरा-वृंदावन से मंडलियां बुलाई जाती हैं। करीब दो दशक पहले तक इस रामलीला के प्रति दर्शकों का काफी क्रेज हुआ करता था। इसे देखने शहर के दूरदराज इलाकों से लोग परिवार समेत आते थे। दिल्ली की तरह जयपुर में भी रामलीला मैदान है।</p>
<p><br /> <span style="background-color:#ffff99;"><span style="color:#ff00ff;"><strong>महिला कलाकार भी आने लगीं</strong></span></span><br /> आदर्श नगर राम मंदिर भी दूसरी बड़ी रामलीला के रूप में जाना जाता है। यहां भी रामलीला करीब छह दशक से हो रही है। इस मंच पर जयपुर के ही कलाकार रामलीला के विभिन्न पात्रों को निभाते थे, लेकिन सबकी व्यस्तताएं बढ़ने के कारण यहां भी बाहर से मंडलियां बुलाई जाने लगी। आदर्श नगर राम मंदिर प्रन्यास के सचिव इन्द्र कुमार चड्ढ़ा ने बताया कि दो साल से कोरोना के चलते रामलीला मंचन नहीं हो रहा है। शहर में होने वाली अन्य लीलाओं में महिला पात्रों को पुुरुष ही निभाते हैं, लेकिन प्रन्यास ने समय के साथ इसमें बदलाव कर महिला कलाकारों को भी बुलाना प्रारंभ किया है, जिनके अभिनय को काफी सराहा गया।</p>
<p><br /> <span style="background-color:#ffff99;"><span style="color:#ff00ff;"><strong>यहां भी होती हैं रामलीलाएं </strong></span></span><br /> जवाहर नगर रामलीला समिति की ओर से भी पिछले चार दशक से जवाहर नगर रामलीला मैदान में रामलीला का मंचन किया जा रहा है। समिति के महासचिव गोपी किशन माछर ने बताया कि इस मंच पर भी मथुरा आदि से कलाकार बुलाए जाते हैं, लेकिन इस बार रामलीला नहीं की जा रही है। इसी तरह शास्त्री नगर हाऊसिंग बोर्ड, अम्बाबाड़ी नया खेड़ा और सांगानेर सहित विभिन्न क्षेत्रों में रामलीलाएं होती रही हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 12 Oct 2021 12:43:07 +0530</pubDate>
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