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                <title>डोनाल्ड ट्रंप - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <description>डोनाल्ड ट्रंप RSS Feed</description>
                
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                <title>अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने ग्रीनलैंड पर कब्जा करने की अपील दोहराई, यूरोपीय संघ ने जताई आ​पत्ति</title>
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                        <![CDATA[अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर ग्रीनलैंड पर कब्जे की मांग दोहराई है। उन्होंने इसे राष्ट्रीय सुरक्षा से जोड़ा। डेनमार्क और यूरोपीय संघ ने इस बयान पर कड़ी आपत्ति जताई है।]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/us-president-trump-reiterates-appeal-to-occupy-greenland-european-union/article-136881"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-10/donald-trump5.png" alt=""></a><br /><p>वॉशिंगटन। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोमवार को एक बार फिर ग्रीनलैंड पर कब्जा करने की अपनी अपील दोहराई, जिससे डेनमार्क और यूरोपीय संघ की ओर से कड़ी आपत्ति दर्ज की गई। अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा, हमें राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए ग्रीनलैंड की जरूरत है, खनिजों के लिए नहीं। अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने फ्लोरिडा के पाम बीच में अपने मार-ए-लागो रिसॉर्ट में संवाददाताओं से कहा, वे कहते हैं कि डेनमार्क इसका मालिक है। </p>
<p>डेनमार्क ने इस पर कोई पैसा खर्च नहीं किया है और न ही कोई सैन्य सुरक्षा प्रदान की है। डेनमार्क ग्रीनलैंड की रक्षा के लिए कानूनी रूप से जिम्मेदार है और द्वीप से संबंधित सैन्य क्षमताएं बनाए रखता है।</p>
<p>रविवार को अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने लुइसियाना के गवर्नर जेफ लैंड्री को ग्रीनलैंड के लिए विशेष दूत नियुक्त करने की घोषणा की थी। ट्रंप ने कहा, हमें ग्रीनलैंड हासिल करना ही होगा और वह (लैंड्री) इस अभियान का नेतृत्व करना चाहते थे।</p>]]>
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                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/world/us-president-trump-reiterates-appeal-to-occupy-greenland-european-union/article-136881</link>
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                <pubDate>Tue, 23 Dec 2025 12:56:49 +0530</pubDate>
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                        <![CDATA[Jaipur NM]]>
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            <item>
                <title>आखिरकार मिल ही गई जेफरी एपस्टीन यौन शोषण की गायब हुई 16 फाइलें, फिर हुईं अपलोड, व्हाइट हाउस ने किया चौकाने वाला खुलासा</title>
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                        <![CDATA[वॉशिंगटन में अमेरिकी न्याय विभाग ने पुष्टि की कि जेफरी एपस्टीन यौन शोषण केस की 16 फाइलें, जिनमें तस्वीरें और दस्तावेज़ शामिल थे, फिर से साइट पर अपलोड कर दी गई हैं। फाइलें पीड़ितों की पहचान छिपाने के लिए अस्थायी रूप से हटाई गई थीं।]]>
                    </description>
                
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/jeffrey-epstein-finally-found-16-missing-files-of-sexual-abuse/article-136783"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-12/jafri-estin-16-files.png" alt=""></a><br /><p>वॉशिंगटन। अमेरिका की राजनीति में रविवार को काफी उथल पुथल रही, क्योंकि बहुचर्चित जेफरी एपस्टीन यौन शोषण केस की जो 16 फाईल गुम हो गई थी वो आखिरकार ए​क दिन वाद वापस से साइट पर अपलोड हो गई है। अमेरिकी सरकार ने इस बात की पुष्टि की। बता दें कि जैसे ही अमेरिका की जनता को इन फाइलों के गुम होने की खबर मिली तो विरोध भड़क उठा था, जिसे शांत करने के लिए डीओजे यानी अमेरिकी न्याय विभाग ने इन सभी फाइलों को जारी करते हुए उनके गायब होने का कारण भी बताया।</p>
<p><strong>जानें क्या है फाइलों में </strong></p>
<p>बता दें कि इस 16 फाईलों में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की 2 तस्वीरों के साथ एक डॉक्यूमेंट भी था। इन तस्वीरों में से एक तस्वीर में दिखाई दे रहा है कि ट्रंप महिलाओं के एक ग्रुप के साथ खड़े हैं, जबकि दूसरी तस्वीर में वो अपनी पत्नी मेलानिया, एपस्टीन और उसके  सहयोगी घिसलेन मैक्सवेल के साथ दिखाई दे रहे हैं। इसके साथ ही बता दें कि इन तस्वीरों में बिल क्लिंटन और पोप जॉन पॉल द्वितीय की थी तस्वीरें है।</p>
<p>इन 16 फाइलों के गायब होने का कारण बताते हुए डीओजे ने कहा कि दरअसल इन फाइलों को पीड़िताओं की पहचान उजागर नहीं हो इसके लिए गायब किया गया था बाकी ओर कोई मकसद नहीं था, लेकिन आज उनको फिर से बहाल कर दिया गया है। बता दें कि ये फाइलें शुक्रवार तक वेबसाइट पर उपलब्ध थीं, लेकिन शनिवार को बिना किसी आधिकारिक नोटिस, स्पष्टीकरण या सार्वजनिक घोषणा के एक्सेस से बाहर हो गईं। इस अचानक हुई कार्रवाई ने न सिर्फ सोशल मीडिया पर अटकलों को जन्म दिया, बल्कि एपस्टीन केस में वर्षों से चली आ रही पारदर्शिता की कमी पर भी नए सिरे से बहस छेड़ दी।</p>
<p><strong>क्या-क्या हुआ था गायब?</strong></p>
<p>AP के मुताबिक, जो दस्तावेज़ गायब हुए हैं, उनमें सिर्फ टेक्स्ट फाइलें ही नहीं, बल्कि कई अहम तस्वीरें और इमेज भी शामिल थीं। इनमें कुछ आर्टवर्क की तस्वीरें थीं, जिनमें नग्न महिलाओं को दर्शाया गया था। इसके अलावा एक तस्वीर ऐसी थी जिसमें एक क्रेडेंज़ा (फर्नीचर) और उसके दराजों के भीतर रखी तस्वीरें दिखाई दे रही थीं। इन्हीं दराजों की एक तस्वीर में डोनाल्ड ट्रंप की एक फोटो भी शामिल थी, जिसमें वह जेफरी एपस्टीन, अपनी पत्नी मेलानिया ट्रंप और एपस्टीन की लंबे समय से सहयोगी और बाद में दोषी ठहराई गई घिसलेन मैक्सवेल के साथ नजर आ रहे थे। हालांकि, इस बात का कोई संकेत नहीं है कि इन तस्वीरों का किसी आपराधिक मामले में सीधा इस्तेमाल हुआ हो, लेकिन इनका अचानक गायब होना कई सवाल खड़े करता है।</p>]]>
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                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/world/jeffrey-epstein-finally-found-16-missing-files-of-sexual-abuse/article-136783</link>
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                <pubDate>Mon, 22 Dec 2025 13:20:36 +0530</pubDate>
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                        <![CDATA[Jaipur NM]]>
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            <item>
                <title>भारत-अमेरिका व्यापार डील फिर फिसल रही, यूएस ट्रेड चीफ ने दिल्ली को चेताया</title>
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                        <![CDATA[वॉशिंगटन में अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि जेमिसन ग्रीर ने यूरोपीय यूनियन और भारत की आलोचना की। उन्होंने कहा कि भारत के साथ शुरू हुई वार्ता अब तक समझौते तक नहीं पहुंची है, जबकि ईयू के नियम अमेरिकी कंपनियों के लिए भेदभावपूर्ण हैं।]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/india-us-trade-deal-slipping-again-us-trade-chief-warns-delhi/article-136748"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-12/us-trade-deal.png" alt=""></a><br /><p>वॉशिंगटन। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के टॉप व्यापार अधिकारी ने अमेरिका के दो बड़े पार्टनर यूरोपीय यूनियन और भारत की आलोचना की है। जिसके बाद सवाल उठ रहे हैं कि क्या इस साल अब भारत और अमेरिका के बीच व्यापार डील नहीं हो पाएगी? अमेरिका के व्यापार प्रतिनिधि जेमिसन ग्रीर ने कहा कि उन्होंने गुरुवार को यूरोपीयन यूनियन के ट्रेड कमिश्नर मारोस सेफकोविक के साथ अमेरिकी टेक कंपनियों पर ईयू के रेगुलेशन पर चर्चा की। इसके बाद उन्होंने इस बारे में गंभीर चिंताएं जताईं कि ये उपाय अमेरिकी कंपनियों के साथ भेदभावपूर्ण हैं।</p>
<p>उन्होंने यह भी कहा कि इस साल की शुरूआत में भारत के साथ शुरू हुई बातचीत अभी तक किसी समझौते पर नहीं पहुंची है। उन्होंने कहा कि इस बीच अमेरिका ने मलेशिया से लेकर स्विट्जरलैंड तक कई अन्य पार्टनर्स के साथ डील पूरी कर ली हैं। ग्रीर ने शुक्रवार को ब्लूमबर्ग टेलीविजन को दिए एक इंटरव्यू में कहा, मुझे इस बात पर हैरानी नहीं हुई कि यह कहां ज्यादा मुश्किल रहा है। ईयू के मामले में उन्होंने नॉन-टैरिफ बाधाओं पर जोर दिया जिसमें अमेरिकी खेती शामिल नहीं है। यूरोपीय यूनियन के नियम अमेरिका के इंडस्ट्रियल एक्सपोर्ट को सीमित करते हैं।</p>
<p><strong>भारत पर भड़के अमेरिका के ट्रेड अधिकारी</strong></p>
<p>यूरोपीय संघ को लेकर ग्रीर का आरोप है कि वह अमेरिकी कंपनियों, खासकर टेक कंपनियों के खिलाफ भेदभावपूर्ण नीतियां अपना रहा है। उन्होंने ईयू के ट्रेड कमिश्नर मारोश शेफचोविच से बातचीत के बाद कहा कि यूरोप द्वारा बनाए गए डिजिटल नियम, अमेरिकी कंपनियों को ही निशाना बनाते हैं। ग्रीर का दावा है कि ईयू के नए डिजिटल टैक्स और रेगुलेटरी फ्रेमवर्क में ऐसे नियम हैं, जो सिर्फ अमेरिकी कंपनियों पर ही लागू होते दिखते हैं, जिनमें गूगल, मेटा और अमेजन जैसी दिग्गज टेक कंपनियां शामिल हैं। अमेरिका का कहना है कि ये नियम इनोवेशन को धीमा करते हैं और अमेरिकी कंपनियों से अतिरिक्त टैरिफ वसूलने का जरिया हैं। इसको लेकर अमेरिका ने चेतावनी दी है कि अगर अमेरिकी टेक कंपनियों पर टैक्स लगाने की कोशिशें जारी रहती हैं, तो अमेरिका जवाबी कार्रवाई कर सकता है।</p>
<p><strong>अब तक कोई ठोस समझौता नहीं हो सका</strong></p>
<p>ग्रीर की बातों से पता चलता है कि भारत को लेकर भी तस्वीर ज्यादा सकारात्मक नहीं हैं। ग्रीर ने कहा कि भारत के साथ बातचीत इस साल की शुरूआत में शुरू हुई थी, लेकिन अब तक कोई ठोस समझौता नहीं हो सका है। उनकी यह टिप्पणी ऐसे समय आई है जब राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और पीएम नरेंद्र मोदी के बीच हाल ही में फोन पर बातचीत हुई थी। अगस्त में भारत पर 50% टैरिफ लगाने के बाद दोनों नेताओं के बीच यह चौथी बातचीत थी, जिसे रिश्तों को फिर से पटरी पर लाने की कोशिशों के तौर पर देखा जा रहा है।</p>]]>
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                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 22 Dec 2025 11:46:15 +0530</pubDate>
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                        <![CDATA[Jaipur NM]]>
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                <title>एपस्टीन फाइल्स विवाद: अमेरिकी न्याय विभाग की वेबसाइट से दस्तावेज़ गायब, ट्रंप की तस्वीर हटने से मचा सियासी और कानूनी भूचाल</title>
                                    <description>
                        <![CDATA[दोषी सेक्स अपराधी जेफरी एपस्टीन से जुड़े दस्तावेज़ एक बार फिर अमेरिकी राजनीति, न्याय व्यवस्था और सत्ता के गलियारों में हलचल मचा रहे हैं। एसोसिएटेड प्रेस (AP) की एक विस्तृत समीक्षा के अनुसार, अमेरिकी न्याय विभाग (US Department of Justice – DOJ) की सार्वजनिक वेबसाइट से कम से कम]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/epstein-files-controversy-documents-missing-from-us-justice-departments-website/article-136671"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-12/the-epstin-fies.png" alt=""></a><br /><p>वॉशिंगटन। दोषी सेक्स अपराधी जेफरी एपस्टीन से जुड़े दस्तावेज़ एक बार फिर अमेरिकी राजनीति, न्याय व्यवस्था और सत्ता के गलियारों में हलचल मचा रहे हैं। एसोसिएटेड प्रेस (AP) की एक विस्तृत समीक्षा के अनुसार, अमेरिकी न्याय विभाग (US Department of Justice – DOJ) की सार्वजनिक वेबसाइट से कम से कम 16 ऐसे दस्तावेज़ रहस्यमय ढंग से गायब हो गए, जो एपस्टीन केस से जुड़े थे। इन दस्तावेज़ों में एक ऐसी इमेज भी शामिल थी, जिसमें पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप दिखाई दे रहे थे।</p>
<p>ये फाइलें शुक्रवार तक वेबसाइट पर उपलब्ध थीं, लेकिन शनिवार को बिना किसी आधिकारिक नोटिस, स्पष्टीकरण या सार्वजनिक घोषणा के एक्सेस से बाहर हो गईं। इस अचानक हुई कार्रवाई ने न सिर्फ सोशल मीडिया पर अटकलों को जन्म दिया, बल्कि एपस्टीन केस में वर्षों से चली आ रही पारदर्शिता की कमी पर भी नए सिरे से बहस छेड़ दी।</p>
<p><strong>क्या-क्या हुआ गायब?</strong></p>
<p>AP के मुताबिक, जो दस्तावेज़ गायब हुए हैं, उनमें सिर्फ टेक्स्ट फाइलें ही नहीं, बल्कि कई अहम तस्वीरें और इमेज भी शामिल थीं। इनमें कुछ आर्टवर्क की तस्वीरें थीं, जिनमें नग्न महिलाओं को दर्शाया गया था। इसके अलावा एक तस्वीर ऐसी थी जिसमें एक क्रेडेंज़ा (फर्नीचर) और उसके दराजों के भीतर रखी तस्वीरें दिखाई दे रही थीं। इन्हीं दराजों की एक तस्वीर में डोनाल्ड ट्रंप की एक फोटो भी शामिल थी, जिसमें वह जेफरी एपस्टीन, अपनी पत्नी मेलानिया ट्रंप और एपस्टीन की लंबे समय से सहयोगी और बाद में दोषी ठहराई गई घिसलेन मैक्सवेल के साथ नजर आ रहे थे। हालांकि, इस बात का कोई संकेत नहीं है कि इन तस्वीरों का किसी आपराधिक मामले में सीधा इस्तेमाल हुआ हो, लेकिन इनका अचानक गायब होना कई सवाल खड़े करता है।</p>
<p><strong>न्याय विभाग की चुप्पी</strong></p>
<p>सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि अमेरिकी न्याय विभाग ने इन फाइलों के हटने पर कोई स्पष्ट जवाब नहीं दिया। यह भी साफ नहीं किया गया कि ये दस्तावेज़ जानबूझकर हटाए गए या किसी तकनीकी गलती के चलते वेबसाइट से गायब हुए। AP ने जब इस बारे में सवाल पूछे, तो न्याय विभाग के प्रवक्ता ने टिप्पणी के अनुरोध पर तुरंत कोई प्रतिक्रिया नहीं दी। इस चुप्पी ने संदेह को और गहरा कर दिया है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि जब मामला इतना संवेदनशील हो और उसमें प्रभावशाली लोगों के नाम या तस्वीरें जुड़ी हों, तो पारदर्शिता की कमी अपने आप में एक बड़ा मुद्दा बन जाती है।</p>
<p><strong>ऑनलाइन अटकलें और राजनीतिक प्रतिक्रिया</strong></p>
<p>दस्तावेज़ों के अचानक गायब होने के बाद सोशल मीडिया पर अटकलों की बाढ़ आ गई। कई यूज़र्स ने सवाल उठाया कि आखिर क्या छिपाया जा रहा है और किसके हित में यह कदम उठाया गया। हाउस ओवरसाइट कमेटी के डेमोक्रेटिक सदस्यों ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म (पूर्व में ट्विटर) पर एक पोस्ट में इन गायब इमेज की ओर इशारा करते हुए लिखा, “और क्या छिपाया जा रहा है? हमें अमेरिकी जनता के लिए ट्रांसपेरेंसी चाहिए।” इस बयान ने मामले को और राजनीतिक रंग दे दिया और कांग्रेस में न्याय विभाग की भूमिका पर सवाल उठने लगे।</p>
<p><strong>पारदर्शिता पर पहले से ही सवाल</strong></p>
<p>यह घटना ऐसे समय पर सामने आई है, जब अमेरिकी न्याय विभाग पहले से ही एपस्टीन से जुड़े दस्तावेज़ों के बड़े पैमाने पर जारी करने को लेकर आलोचनाओं का सामना कर रहा है। हाल ही में जारी किए गए हजारों पन्नों के रिकॉर्ड्स से यह उम्मीद की जा रही थी कि एपस्टीन के अपराधों, उसके प्रभावशाली लोगों से संबंधों और सरकारी फैसलों पर नई रोशनी पड़ेगी। लेकिन आलोचकों का कहना है कि इन दस्तावेज़ों से बहुत कम नई जानकारी सामने आई है। कई बेहद अहम और लंबे समय से प्रतीक्षित रिकॉर्ड अब भी सार्वजनिक नहीं किए गए हैं।</p>
<p><strong>कौन-से अहम रिकॉर्ड अब भी गायब हैं?</strong></p>
<p>गायब या जारी न किए गए दस्तावेज़ों में शामिल हैं:</p>
<p>* एपस्टीन के पीड़ितों और सर्वाइवरों के साथ FBI के इंटरव्यू<br />* न्याय विभाग के आंतरिक मेमोरेंडम<br />* वे दस्तावेज़, जिनमें यह जांच की गई थी कि एपस्टीन सालों तक गंभीर फेडरल आरोपों से कैसे बचता रहा</p>
<p>इन रिकॉर्ड्स से यह समझने में मदद मिल सकती थी कि जांचकर्ताओं ने आरोपों का मूल्यांकन कैसे किया और आखिर 2008 में एपस्टीन को सिर्फ एक मामूली राज्य-स्तरीय वेश्यावृत्ति (प्रॉस्टिट्यूशन) के आरोप में दोषी क्यों ठहराया गया।</p>
<p><strong>बड़े नाम, लेकिन अधूरी तस्वीर</strong></p>
<p>कांग्रेस द्वारा हाल ही में पास किए गए एक कानून के तहत जिन खुलासों की उम्मीद की जा रही थी, उनमें एपस्टीन से जुड़े कई बड़े नामों का जिक्र बेहद सीमित है। ब्रिटेन के पूर्व प्रिंस एंड्रयू जैसे हाई-प्रोफाइल नामों का भी मुश्किल से ही उल्लेख मिलता है। AP के मुताबिक, इससे फिर वही सवाल उठते हैं—</p>
<p>किसकी जांच हुई?<br />किसकी नहीं हुई?<br />और क्या इन दस्तावेज़ों की रिलीज़ से वाकई सार्वजनिक जवाबदेही बढ़ी है?</p>
<p><strong>जो नई जानकारी सामने आई</strong></p>
<p>हालांकि आलोचनाओं के बीच कुछ नई जानकारियां भी सामने आई हैं। इनमें शामिल हैं:</p>
<p>2000 के दशक में न्याय विभाग द्वारा एपस्टीन के खिलाफ फेडरल जांच बंद करने के फैसले की नई डिटेल्स<br />1996 की एक पहले कभी न देखी गई शिकायत, जिसमें एपस्टीन पर बच्चों की तस्वीरें चुराने का आरोप लगाया गया था</p>
<p>इन खुलासों से यह संकेत मिलता है कि एपस्टीन के खिलाफ आरोप और शिकायतें दशकों पहले से मौजूद थीं, लेकिन फिर भी उसे लंबे समय तक सख्त कार्रवाई से बचाया गया।</p>
<p><strong>तस्वीरें ज्यादा, जवाब कम</strong></p>
<p>अब तक जारी किए गए रिकॉर्ड्स में एपस्टीन के न्यूयॉर्क और यूएस वर्जिन आइलैंड्स स्थित घरों की तस्वीरें बड़ी संख्या में हैं। इसके अलावा कई सेलिब्रिटी और राजनीतिक नेताओं के साथ उसकी तस्वीरें भी शामिल हैं। पूर्व राष्ट्रपति बिल क्लिंटन की कई पहले कभी न देखी गई तस्वीरें सामने आई हैं। वहीं, डोनाल्ड ट्रंप की तस्वीरें तुलनात्मक रूप से कम हैं। दोनों नेताओं ने एपस्टीन को जानने की बात स्वीकार की है, लेकिन किसी भी तरह की गलत गतिविधियों में शामिल होने से इनकार किया है। यह भी स्पष्ट किया गया है कि इन तस्वीरों का किसी आपराधिक मुकदमे में सीधा इस्तेमाल नहीं हुआ।</p>
<p><strong>देरी, बदलाव और सर्वाइवरों का गुस्सा</strong></p>
<p>कांग्रेस की ओर से पूरी जानकारी देने की जो समय-सीमा तय की गई थी, उसके बावजूद न्याय विभाग ने कहा कि रिकॉर्ड “रोलिंग बेसिस” पर जारी किए जाएंगे। विभाग का तर्क है कि सर्वाइवरों की पहचान और नाम हटाने के लिए अतिरिक्त समय की जरूरत है। हालांकि, यह स्पष्ट नहीं किया गया कि आगे और दस्तावेज़ कब जारी होंगे। इस अस्पष्टता ने कई कानून निर्माताओं और सर्वाइवरों को खारिज कर दिया है। मरीना लेसरडा, जिन्होंने आरोप लगाया है कि एपस्टीन ने 14 साल की उम्र में उनके साथ यौन शोषण किया था, ने कहा,“मुझे फिर से लगता है कि DOJ और जस्टिस सिस्टम हमें फेल कर रहा है।”</p>
<p><strong>एपस्टीन केस: एक संक्षिप्त पृष्ठभूमि</strong></p>
<p>जेफरी एपस्टीन पर 2019 में फेडरल प्रॉसिक्यूटर्स ने सेक्स ट्रैफिकिंग के गंभीर आरोप लगाए थे। लेकिन ट्रायल शुरू होने से पहले ही न्यूयॉर्क की जेल में उनकी मौत हो गई, जिसे आधिकारिक तौर पर आत्महत्या बताया गया। अब तक जो दस्तावेज़ जारी हुए हैं, वे न्याय विभाग के पास मौजूद कुल रिकॉर्ड्स का सिर्फ एक छोटा हिस्सा हैं।</p>
<p><strong>रिकॉर्ड्स का विशाल दायरा</strong></p>
<p>डिप्टी अटॉर्नी जनरल टॉड ब्लैंच के अनुसार, अकेले मैनहट्टन प्रॉसिक्यूटर ऑफिस ने एपस्टीन और घिसलेन मैक्सवेल की जांच से जुड़े 3.6 मिलियन से अधिक रिकॉर्ड इकट्ठा किए हैं। इनमें से कई FBI मटीरियल की प्रतियां हैं। फिलहाल जो कुछ भी सार्वजनिक किया गया है, वह पहले से ही कोर्ट फाइलिंग, कांग्रेसनल डिस्क्लोज़र या फ्रीडम ऑफ इंफॉर्मेशन रिक्वेस्ट (FOIA) के जरिए उपलब्ध था। नया यह है कि इन्हें एक सर्च करने योग्य प्लेटफॉर्म पर इकट्ठा किया गया है।</p>
<p><strong>भारी सेंसरशिप और ब्लैकआउट</strong></p>
<p>नए जारी किए गए कई रिकॉर्ड्स बुरी तरह से एडिट किए गए हैं। कई जगह संदर्भ (कॉन्टेक्स्ट) हटा दिया गया है। “ग्रैंड जूरी-NY” नाम का एक 119 पन्नों का दस्तावेज़ पूरी तरह से ब्लैक आउट कर दिया गया था, जिससे उसमें मौजूद जानकारी जनता के लिए पूरी तरह अपठनीय हो गई।</p>
<p><strong>ग्रैंड जूरी ट्रांसक्रिप्ट: सबसे अहम खुलासा</strong></p>
<p>सबसे महत्वपूर्ण दस्तावेज़ों में ग्रैंड जूरी ट्रांसक्रिप्ट शामिल हैं। इनसे पता चलता है कि 2007 की शुरुआत में ही फेडरल प्रॉसिक्यूटर्स के पास एपस्टीन के खिलाफ एक मजबूत केस मौजूद था। FBI एजेंट्स ने उन लड़कियों और युवतियों के इंटरव्यू के बारे में गवाही दी, जिन्होंने कहा कि उन्हें एपस्टीन के लिए सेक्स एक्ट करने के बदले पैसे दिए गए। इनमें एक 14 साल की नौवीं कक्षा की छात्रा भी शामिल थी। एक गवाह ने बताया कि मसाज के दौरान विरोध करने पर उसके साथ शारीरिक हमला किया गया। एक अन्य गवाह ने कहा कि एपस्टीन ने उसे 16 साल की उम्र में काम पर रखा और बाद में दूसरी लड़कियों को भर्ती करने के लिए पैसे दिए। उसने गवाही में कहा, “हर लड़की के लिए जिसे मैं उसके पास लाती थी, वह मुझे 200 डॉलर देता था।”</p>
<p><strong>अलेक्जेंडर अकोस्टा का बयान</strong></p>
<p>दस्तावेज़ों में अमेरिकी अटॉर्नी अलेक्जेंडर अकोस्टा के साथ न्याय विभाग का एक इंटरव्यू भी शामिल है। अकोस्टा ने इस केस की निगरानी की थी और बाद में ट्रंप के पहले कार्यकाल में श्रम सचिव बने। उन्होंने कहा कि उस समय जूरी की सोच और सेक्स ट्रैफिकिंग व वेश्यावृत्ति के मामलों के बीच की रेखा धुंधली थी। मैं यह नहीं कह रहा कि यह सही सोच थी, उन्होंने स्वीकार किया और जोड़ा कि पीड़ितों के प्रति रवैया अब काफी बदल चुका है।</p>
<p><strong>सर्वाइवरों की प्रतिक्रिया: जीत भी, त्रासदी भी</strong></p>
<p>एपस्टीन पर आरोप लगाने वाली मारिया फार्मर की वकील जेनिफर फ्रीमैन ने कहा कि इन खुलासों ने उनके क्लाइंट को एक साथ सही साबित होने और टूट जाने जैसा महसूस कराया है। उन्होंने कहा, यह एक जीत और एक त्रासदी दोनों है। ऐसा लगता है कि सरकार ने बिल्कुल कुछ नहीं किया। अगर उन्होंने थोड़ी सी भी जांच की होती, तो कई भयानक चीजें रोकी जा सकती थीं।</p>
<p> </p>]]>
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                <pubDate>Sun, 21 Dec 2025 12:04:19 +0530</pubDate>
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                <title>कौन है रहमानुल्लाह लकनवाल? अफगानिस्तान में अमेरिकी सैनिकों के साथ करता था काम, व्हाइट हाउस के बाहर की थी फायरिंग</title>
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                        <![CDATA[अमेरिका के वाशिंगटन डीसी में व्हाइट हाउस के पास बुधवार को हुई गोलीबारी में दो सुरक्षा प्रहरी और एक व्यक्ति गंभीर रूप से घायल हो गए। फारागट स्क्वायर के पास हुई इस घटना में आरोपी 29 वर्षीय अफगान नागरिक रहमानुल्लाह लाकनवाल को गिरफ्तार किया गया। एफबीआई मामले की जांच कर रही है।]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/who-is-rahmanullah-lakanwal-he-worked-with-american-soldiers-in/article-133794"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-11/us1.png" alt=""></a><br /><p>अमेरिका। अमेरिका के वाशिंगटन डीसी में बुधवार को व्हाइट हाउस के पास हुई गोलीबारी में दो सुरक्षा प्रहरी गंभीर रूप से घायल हो गए। इस घटना में नेशनल गार्ड के जवानों के साथ एक और व्यक्ति के गंभीर रूप से घायल होने की सूचना है। यह घटना वाशिंगटन डीसी के भीड़भाड़ वाले इलाके, फारागट स्क्वायर के पास हुई, जिससे इलाके में अफरा तफरी मच गई। इस गोलीबारी के मामले में एक हमलावर को गिरफ्तार किया गया है। </p>
<p>अधिकारियों के अनुसार, आरोपी ने सुरक्षा प्रहरियों पर गोलियां चलाईं, जिसके बाद पास में मौजूद नेशनल गार्ड के दूसरे जवानों ने उसे पकड़ लिया, जिन्होंने गोलियों की आवाज सुनी थी। संदिग्ध की पहचान 29 वर्षीय अफगान नागरिक रहमानुल्लाह लाकनवाल की पहचान संदिग्ध के रूप में हुई है।</p>
<p><strong>मूलरूप से अफगान का रहने वाला रहमानुल्लाह लकनवाल</strong></p>
<p>पुलिस ने जानकारी देते हुए बताया है कि, आरोपी साल 2021 में बाइडन प्रशासन की नीति के तहत अमेरिका में आया था। एफबीआई प्रमख काश पटेल ने भी घटनास्थल की जांच के बाद मीडिया से बातचीत करते हुए बताया है कि, आरोपी का क्या फायरिंग के पीछे क्या मकसद था फिलहाल इसके बारे में जांच जारी हैं। इसके अलावा एफबीआई ने आरोपी की पहचान आतंकी के रूप में की है, जिसकी सोशल मीडिया पर एक तस्वीर भी वायरल हो रही है। इस गोलीबारी के बारे में डीसी के मेयर म्यूरिल बाउजर ने बताया कि, आरोपी ने यह टार्गेटेड अटैक किया था. इसके आगे पुलिस ने जानकारी देते हुए बताया कि, रहमानुल्लाह काफी समय से वाशिंगटन में ही रह रहा था और अफगानिस्तान में अमेरिकी सैनिकों के साथ काम करता था। इतना ही नहीं, आरोपी ने करीब 10 साल से अफगान सेना में किया और कंधार के हवाई अड्डे पर तैनात रहा। फिलहाल, इस मामले में आगे जांच जारी है और आरोपी की अन्य जानकारियां भी निकाली जा रही है। </p>]]>
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                <pubDate>Thu, 27 Nov 2025 13:20:02 +0530</pubDate>
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