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                <title>DRDO - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <description>DRDO RSS Feed</description>
                
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                <title>डीआरडीओ ने किया टारा का सफल परीक्षण : भारत की पहली स्वदेशी ग्लाइड हथियार प्रणाली, कम लागत वाली अत्याधुनिक प्रणालियों का उपयोग करने वाला पहला ग्लाइड हथियार</title>
                                    <description><![CDATA[डीआरडीओ और भारतीय वायु सेना ने ओडिशा तट पर भारत की पहली स्वदेशी ग्लाइड हथियार प्रणाली ‘टारा’ का सफल परीक्षण किया। यह मॉड्यूलर किट बिना मार्गदर्शन वाले वारहेड को सटीक निर्देशित हथियार में बदलती है। कम लागत वाली यह तकनीक जमीन पर दुश्मन के ठिकानों को अधिक सटीकता से निशाना बनाने में सक्षम है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने इसे बड़ी उपलब्धि बताया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/drdo-successfully-test-fires-tara-indias-first-indigenous-glide-weapon/article-153100"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-05/1111200-x-600-px)-(11)1.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) और भारतीय वायु सेना ने पहली स्वदेशी ग्लाइड हथियार प्रणाली टैक्टिकल एडवांस्ड रेंज ऑगमेंटेशन (टारा) का सफल परीक्षण किया है। रक्षा मंत्रालय ने शुक्रवार को बताया कि यह परीक्षण गुरुवार को ओडिशा तट के पास किया गया । टारा, एक मॉड्यूलर रेंज एक्सटेंशन किट है, जो भारत की पहली स्वदेशी ग्लाइड हथियार प्रणाली है, जो बिना मार्गदर्शन वाले वारहेड को सटीक निर्देशित हथियार में परिवर्तित करती है।</p>
<p>टारा को हैदराबाद स्थित रिसर्च सेंटर इमारत  तथा डीआरडीओ की अन्य प्रयोगशालाओं द्वारा डिजाइन और विकसित किया गया है, ताकि कम लागत वाले हथियार की मारक क्षमता और सटीकता बढ़ाकर भूमि आधारित लक्ष्यों को निष्क्रिय किया जा सके। यह कम लागत वाली अत्याधुनिक प्रणालियों का उपयोग करने वाला पहला ग्लाइड हथियार है। इस किट का विकास डेवलपमेंट कम प्रोडक्शन पार्टनर्स (डीसीपीपी) और अन्य भारतीय उद्योगों के सहयोग से किया गया है, जिन्होंने उत्पादन गतिविधियां भी शुरू कर दी हैं।</p>
<p>रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने डीआरडीओ, भारतीय वायु सेना, डीसीपीपी और उद्योग जगत को इस पहले उड़ान परीक्षण की सफलता पर बधाई दी तथा इसे भारत की स्वदेशी रक्षा क्षमताओं को आगे बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया। रक्षा अनुसंधान एवं विकास विभाग के सचिव तथा डीआरडीओ के अध्यक्ष डॉ. समीर वी. कामत ने भी इस सफल उड़ान परीक्षण से जुड़े सभी दलों को बधाई दी है।</p>
<p> </p>
<p> </p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 08 May 2026 14:15:40 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>रक्षा बल विजन-2047 में रासायनिक: जैविक और परमाणु खतरों को गंभीर चुनौती बताया; भविष्य के युद्धों के प्रति भारत बना रहा रणनीति, नए खतरों से निपटने के लिए एकीकृत सुरक्षा प्रणाली तैयार करने का खाका बनाया</title>
                                    <description><![CDATA[बदलते वैश्विक युद्ध तंत्र को देखते हुए भारत ने विज़न-2047 के तहत सीबीआरएन (CBRN) खतरों से निपटने की रणनीति बनाई है। इसके तहत परमाणु, रासायनिक और जैविक हमलों से बचाव के लिए एकीकृत सुरक्षा प्रणाली और आधुनिक डिटेक्शन सिस्टम तैनात किए जाएंगे। तीनों सेनाओं के बीच समन्वय और स्वदेशी तकनीक के माध्यम से सामूहिक विनाश के खतरों को विफल किया जाएगा।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/in-the-defense-force-vision-2047-chemical-biological-and-nuclear-threats/article-146547"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/rajnath-singh-3.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में चल रहे युद्ध ने दुनिया भर के रणनीतिक विशेषज्ञों को युद्ध के तौर तरीकों पर सोचने के लिए मजबूर कर दिया है। बदलते वैश्विक हालात और भविष्य के युद्ध के खतरों को देखते हुए भारत ने सुरक्षा रणनीति को और मजबूत बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। हाल में पेश रक्षा बल विजन-2047 दस्तावेज में रासायनिक, जैविक, रेडियोलॉजिकल और परमाणु यानी सीबीआरएन खतरों को गंभीर चुनौती बताया गया है। इस दस्तावेज में ऐसे हमलों से बचाव के लिए आधुनिक और एकीकृत सुरक्षा प्रणाली तैयार करने का खाका पेश किया गया है।</p>
<p>इसका उद्देश्य भविष्य में किसी भी बड़े हमले की स्थिति में सेना और सुरक्षा एजेंसियों की प्रतिक्रिया को तेज और प्रभावी बनाना है। विजन दस्तावेज के अनुसार अब युद्ध केवल पारंपरिक हथियारों तक सीमित नहीं रह गया है। आधुनिक समय में सामूहिक विनाश के हथियारों का खतरा तेजी से बढ़ रहा है। खासकर जैविक खतरों को बड़ी चुनौती माना गया है क्योंकि ये अक्सर अदृश्य तरीके से फैलते हैं और इन्हें पहचानना मुश्किल होता है। इसलिए इन खतरों की पहचान, रोकथाम और त्वरित प्रतिक्रिया के लिए नई तकनीकों और व्यवस्थाओं को विकसित करने की जरूरत बताई गई है।</p>
<p><strong>रासायनिक और जैविक खतरों से निपटने का फार्मूला</strong></p>
<p>इस समय सेना के पास कोर ऑफ इंजीनियर्स के तहत विशेष दस्ता है जो रासायनिक और जैविक खतरों से निपटने का काम करता है। इसके अलावा राष्ट्रीय आपदा मोचन बल यानी एनडीआरएफ की टीमें नागरिक सुरक्षा के लिए तैनात रहती हैं। रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन यानी डीआरडीओ भी इन खतरों से बचाव के लिए नई तकनीक और उपकरण विकसित कर रहा है। पिछले वर्ष सेना ने 223 आॅटोमैटिक केमिकल एजेंट डिटेक्शन एंड अलार्म सिस्टम खरीदे हैं। यह सिस्टम वास्तविक समय में खतरनाक रसायनों का पता लगाने में सक्षम है। इसके अलावा स्वदेशी मोबाइल डिकंटेमिनेशन सिस्टम भी तैयार किए गए हैं। इन उपकरणों का इस्तेमाल किसी रासायनिक या जैविक हमले के बाद प्रभावित इलाके को सुरक्षित बनाने के लिए किया जाएगा।</p>
<p><strong>सभी एजेंसियां मिलकर तेजी से कार्रवाई करेंगी</strong></p>
<p>रक्षा बल विजन-2047 का मुख्य उद्देश्य अलग-अलग एजेंसियों के बीच समन्वय को बेहतर बनाना है। फिलहाल कई एजेंसियां अलग-अलग उपकरण और प्रक्रियाओं के साथ काम करती हैं। इससे संकट के समय प्रतिक्रिया में देरी हो सकती है। नई योजना के तहत एकीकृत सुरक्षा प्रणाली तैयार की जाएगी ताकि हमले की स्थिति में सभी एजेंसियां मिलकर तेजी से कार्रवाई कर सकें।</p>
<p><strong>सुरक्षा उपकरणों की खरीद को मानकीकृत करेंगे</strong></p>
<p>नई नीति के तहत तीनों सेनाओं के लिए सुरक्षा उपकरणों की खरीद को मानकीकृत किया जाएगा। यानी एक ही तकनीकी मानकों वाले उपकरण खरीदे जाएंगे। इसके साथ ही प्रशिक्षण प्रक्रिया को भी एक समान बनाया जाएगा। इससे हमले की स्थिति में हर यूनिट की प्रतिक्रिया सटीक और समन्वित होगी।</p>
<p><strong>घायल सैनिकों के प्रबंधन के लिए क्या योजना है?</strong></p>
<p>विजन-2047 में हताहत प्रबंधन की नीति भी तैयार करने की बात कही गई है। इसके तहत हमले की स्थिति में घायल सैनिकों के उपचार और उनके शरीर से विकिरण या रासायनिक प्रभाव हटाने की प्रक्रिया को मानकीकृत किया जाएगा। इससे संकट के समय उपचार तेज और प्रभावी हो सकेगा और सैनिकों की सुरक्षा बेहतर होगी। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 15 Mar 2026 11:15:24 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>डीआरडीओ की मैन-पोर्टेबल एंटी टैंक मिसाइल का सफल परीक्षण , आत्मनिर्भर भारत की दिशा में मिली बड़ी सफलता</title>
                                    <description><![CDATA[डीआरडीओ ने स्वदेशी मैन-पोर्टेबल टैंक रोधी गाइडेड मिसाइल का सफल उड़ान परीक्षण किया, जो दिन-रात गतिमान लक्ष्यों को भेदने में सक्षम है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/drdo-successfully-tests-portable-anti-tank-missile-a-big-success-in/article-139363"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-01/drdo.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) ने गतिमान लक्ष्य को निशाना बनाने में सक्षम 'मैन पोर्टेबल' टैंक रोधी गाइडेड मिसाइल का सफल उड़ान परीक्षण किया है। रक्षा मंत्रालय ने सोमवार को बताया कि इस मिसाइल का परीक्षण रविवार को महाराष्ट्र की अहिल्या नगर स्थित केके रेंज में किया गया। परीक्षण डीआरडीओ की रक्षा अनुसंधान एवं विकास प्रयोगशाला, हैदराबाद ने किया। </p>
<p>देश में ही विकसित इस मिसाइल में अत्याधुनिक स्वदेशी तकनीकों का इस्तेमाल किया गया है जिनमें इमेजिंग इंफ्रारेड (आईआईआर) होडमिंग सीकर, पूर्णत: विद्युत आधारित नियंत्रण एक्ट्यूशन प्रणाली, फायर कंट्रोल सिस्टम, टैंडम वारहेड, प्रणोदन प्रणाली तथा उच्च प्रदर्शन दृष्टि प्रणाली शामिल हैं। इन प्रणालियों का विकास डीआरडीओ की सहयोगी प्रयोगशालाओं द्वारा किया गया है। </p>
<p>मिसाइल का सीकर दिन और रात दोनों समय युद्ध संचालन में सक्षम है। इसका मुखास्त्र आधुनिक मुख्य युद्धक टैंकों को नष्ट करने में सक्षम है। भारत डायनेमिक्स लिमिटेड और भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड इस हथियार प्रणाली के विकास एवं उत्पादन भागीदार हैं। इस मिसाइल को ट्राइपॉड या सैन्य वाहन लॉन्चर से प्रक्षेपित किया जा सकता है।</p>
<p>रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने इस सफल परीक्षण के लिए डीआरडीओ, विकास एवं उत्पादन भागीदारों तथा उद्योग जगत को बधाई दी और इसे आत्मनिर्भर भारत की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया। टीम को बधाई देते हुए रक्षा अनुसंधान एवं विकास विभाग के सचिव तथा डीआरडीओ के अध्यक्ष डॉ. समीर वी. कामत ने कहा कि परीक्षण लक्ष्य को सफलतापूर्वक भेदा गया है, जिससे यह हथियार प्रणाली भारतीय सेना में शामिल किये जाने के लिए तैयार है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 12 Jan 2026 18:40:46 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>भारत की समुद्री सीमा को अभेद्य बनाने की मुकम्मल तैयारी </title>
                                    <description><![CDATA[डीआरडीओ ने समुद्री सुरक्षा में बड़ी उपलब्धि हासिल करते हुए नई पीढ़ी के मैन-पोर्टेबल ऑटोनोमस अंडरवॉटर व्हीकल्स विकसित किए हैं। ये सिस्टम रियल-टाइम में बारूदी सुरंग जैसे खतरों का पता लगाते हैं। डीप लर्निंग एल्गोरिद्म लक्ष्य पहचान को सरल बनाते हैं और हालिया ट्रायल में तकनीक सफल रही।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/drdo-made-complete-preparations-to-make-indias-maritime-border-impenetrable/article-132570"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-11/india-1.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। डीआरडीओ ने भारत की समुद्री सीमा को अभेद्य बनाने की मुकम्मल तैयारी कर ली है। अब किसी भी शत्रु के लिए समुंदर के रास्ते भारत पर हमला करना या समुद्र में भारत के हितों को नुकसान पहुंचाना नामुमकिन होगा।  समुद्र के भीतर बारूदी सुरंग जैसा कोई खतरा होगा तो इसका तुरंत पता लगाया जा सकता है। डीआरडीओ ने समुद्री सुरक्षा के क्षेत्र में एक बड़ी सफलता हासिल करते हुए नई पीढ़ी के मैन-पोर्टेबल ऑटोनॉमस अंडरवॉटर व्हीकल्स(एमपीएयूवी) विकसित किए हैं। रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन डीआरडीओ  ने रीयल टाइम बारूदी सुरंग जैसी चीजों का पता लगाने के लिए एमपी-एयूवी डेवलप किए हैं। एयीवीएस में लगे साइड स्कैनर और अंडरवॉटर कैमरे रियल-टाइम में माइंस जैसी खतरनाक चीजों की पहचान करते हैं। अंडरवॉटर एकॉस्टिक कम्युनिकेशन सिस्टम इन्हें मिशन के दौरान आपस में डेटा शेयर करने में सक्षम बनाता है।</p>
<p><strong>स्वतंत्र रूप से पहचानेगा लक्ष्यों को</strong></p>
<p>रक्षा मंत्रालय ने इसकी जानकारी दी। मंत्रालय ने बताया कि एमपी-एयूवी के डीप लर्निंग आधारित एल्गोरिद्म इस सिस्टम को स्वायत्त रूप से अलग-अलग तरह के लक्ष्यों को पहचानने में सक्षम बनाते हैं। जिससे ऑपरेटर पर काम का बोझ और मिशन को पूरा करने में लगने वाला समय काफी कम हो जाता है। मंत्रालय के मुताबिक, एमपी-एयूवी का निर्माण डीआरडीओ की विशाखापत्तनम स्थित नौसेना विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी प्रयोगशाला (एनएसटीएल) ने किया है।  रक्षा मंत्रालय के मुताबिक इस सिस्टम में मजबूत अंडरवॉटर ध्वनिक संचार तकनीक भी जोड़ी गई है। इससे ये एयूवी आपस में डेटा साझा कर सकता है।</p>
<p><strong>ट्रायल में सफल रही तकनीक</strong></p>
<p>ट्रायल में यह तकनीक सफल साबित हुई है। हार्बर में हाल ही में फील्ड ट्रायल्स संपन्न किए गए हैं। ट्रायल में सिस्टम के प्रमुख तकनीकी पैरामीटर और मिशन उद्देश्यों का सफल सत्यापन हुआ। रक्षा अनुसंधान एवं विकास विभाग के सचिव और डीआरडीओ के चेयरमैन डॉ. समीर वी. कामत ने पूरी टीम को इस उपलब्धि पर बधाई दी है। उन्होंने कहा कि एमपी-एयूवी का विकास स्मार्ट, नेटवर्क-सक्षम और त्वरित प्रतिक्रिया देने वाली माइन काउंटरमेजर क्षमता की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है। यह सिस्टम नौसेना को कम जोखिम और कम लॉजिस्टिक आवश्यकता के साथ उन्नत माइन वॉरफेयर समाधान प्रदान करेगी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 16 Nov 2025 11:06:26 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title> गणतंत्र दिवस पर डीआरडीओ ने परेड में प्रदर्शित की रक्षा प्रणालियों की झांकी </title>
                                    <description><![CDATA[इस झांकी में डीआरडीओ में महिलाओं की भागीदारी को प्रमुखता से प्रदर्शित किया गया। प्रसिद्ध वैज्ञानिक  सुनीता देवी जेना दस्ते की कमांडर रहीं। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/drdo-displayed-tableau-of-defense-systems-in-the-parade/article-68234"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-01/photo-(12).png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। कर्तव्य पथ पर 75 वें गणतंत्र दिवस पर आयोजित परेड के दौरान रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) की ओर से विकसित कई महत्वपूर्ण प्रणालियों तथा प्रौद्योगिकियों को प्रदर्शित किया गया। डीआरडीओ की महिला वैज्ञानिकों का आत्मनिर्भरता के प्रवर्तक के रूप में रक्षा अनुसंधान के प्रमुख क्षेत्रों में बहुमूल्य योगदान रहा है। डीआरडीओ की इस वर्ष की झांकी 'पृथ्वी, वायु, समुद्र, साइबर और अंतरिक्ष जैसे पांचों आयामों में रक्षा कवच प्रदान करके राष्ट्र की सुरक्षा करने में महिला शक्ति विषय पर आधारित रही। </p>
<p>इस झांकी में डीआरडीओ में महिलाओं की भागीदारी को प्रमुखता से प्रदर्शित किया गया। प्रसिद्ध वैज्ञानिक  सुनीता देवी जेना दस्ते की कमांडर रहीं। झांकी में मैन पोर्टेबल एंटी-टैंक गाइडेड मिसाइल(एमपीएटीजीएम), एंटी-सैटेलाइट (एएसएटी) मिसाइल, और अग्नि-5, सतह से सतह पर मार करने वाली बैलिस्टिक मिसाइल, बहुत कम दूरी की वायु रक्षा प्रणाली (वीएसएचओआरएडीएस), नौसेना एंटी-शिपमिसाइल शॉर्ट रेंज (एनएएसएम-एसआर), एंटी-टैंक गाइडेड मिसाइल हेलिना, क्विक रिएक्शन सरफेस-टू-एयर मिसाइल (क्यूआरएसएएम), एस्ट्रा, लाइट कॉम्बैट एयरक्राफ्ट तेजस, उत्तम एक्टिव इलेक्ट्रॉनिकली स्कैन्ड ऐरे रडार (एईएसएआर), एडवांस्ड इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर सिस्टम शक्ति, साइबर सुरक्षा प्रणालियां, कमांड कंट्रोल सिस्टम और सेमी कंडक्टर फैब्रिकेशन सुविधा का प्रदर्शन किया गया। </p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 26 Jan 2024 15:27:37 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>डीआरडीओ ने सतह से हवा में मार करने वाली छोटी दूरी की मिसाइल का किया सफल परीक्षण</title>
                                    <description><![CDATA[रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) और नौसेना ने सतह से हवा में मार करने वाली छोटी दूरी की वर्टिकल लांच मिसाइल का सफल परीक्षण किया है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/drdo-successfully-test-of-small-missile/article-12949"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-06/trrtr-copy.jpg" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) और नौसेना ने सतह से हवा में मार करने वाली छोटी दूरी की वर्टिकल लांच मिसाइल का सफल परीक्षण किया है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने मिसाइल के सफल परीक्षण पर डीआरडीओ और नौसेना तथा उद्योग जगत को बधाई देते हुए कहा कि इससे नौसेना के युद्धपोतों की हवाई खतरों से निपटने में मारक क्षमता बढ़ेगी।</p>
<p>यह परीक्षण नौसेना के युद्धपोत द्वारा ओडिशा स्थित चांदीपुर परीक्षण रेंज से किया गया। परीक्षण के दौरान हवा में तेज गति से आ रहे लक्ष्य पर निशाना साधा गया जो पूरी तरह सटीक रहा। डीआरडीओ और नौसेना के अधिकारी मिशन पर निरंतर नजर रखे हुए थे, जिसने अपने सभी उद्देश्यों को पूरा किया। <br /><br /></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 24 Jun 2022 15:06:03 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>डीआरडीओ ने रॉकेट लांचर पिनाका का किया सफल परीक्षण</title>
                                    <description><![CDATA[डीआरडीओ ने पोकरण फील्ड फायरिंग रेंज में पिनाका के नए अपग्रेड वर्जन पिनाका-ईआर (विस्तारित रेंज) का सफल परीक्षण किया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/%E0%A4%A1%E0%A5%80%E0%A4%86%E0%A4%B0%E0%A4%A1%E0%A5%80%E0%A4%93-%E0%A4%A8%E0%A5%87-%E0%A4%B0%E0%A5%89%E0%A4%95%E0%A5%87%E0%A4%9F-%E0%A4%B2%E0%A4%BE%E0%A4%82%E0%A4%9A%E0%A4%B0-%E0%A4%AA%E0%A4%BF%E0%A4%A8%E0%A4%BE%E0%A4%95%E0%A4%BE-%E0%A4%95%E0%A4%BE-%E0%A4%95%E0%A4%BF%E0%A4%AF%E0%A4%BE-%E0%A4%B8%E0%A4%AB%E0%A4%B2-%E0%A4%AA%E0%A4%B0%E0%A5%80%E0%A4%95%E0%A5%8D%E0%A4%B7%E0%A4%A3/article-3073"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2021-12/4654654654659.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। डीआरडीओ ने पोकरण फील्ड फायरिंग रेंज में पिनाका के नए अपग्रेड वर्जन पिनाका-ईआर (विस्तारित रेंज) का सफल परीक्षण किया। चीन और पाकिस्तान से चल रहे तनाव को देखते हुए यह परीक्षण किया गया। पिनाका मार्क-1 का उन्नत संस्करण है। इस परीक्षण को सफलतापूर्वक करने के बाद यह स्वदेशी मल्टी बैरल रॉकेट लांचर और अधिक मजबूत व नई सुविधाओं से लैस है।</p>
<p>डीआरडीओ ने इसे पुणे आयुध अनुसंधान एवं विकास प्रतिष्ठान (एआरडीई) व हाई एनर्जी मैटेरियल रिसर्च लैबोरेटरी के साथ मिलकर बनाया है। इसके साथ ही इस तकनीक को भारतीय उद्योग क्षेत्र को हस्तांतरित कर दिया है। अपग्रेड होने के बाद पिनाका-ईआर अब 44 सैकंड में 72 रॉकेट चला सकता है। <br />  </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 11 Dec 2021 16:09:16 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Administrator]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>नई पीढ़ी की आकाश एनजी मिसाइल का सफल परीक्षण, खराब मौसम के बीच लक्ष्य पर सटीक निशाना</title>
                                    <description><![CDATA[रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) ने शुक्रवार को एकीकृत परीक्षण रेंज से नई पीढ़ी की आकाश (आकाश-एनजी) मिसाइल का सफल उड़ान परीक्षण किया। खराब मौसम के बीच मिसाइल का परीक्षण किया गया है और इसने सभी प्रकार के मौसम में मिसाइल की क्षमता को साबित कर दिया है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/%E0%A4%A8%E0%A4%88-%E0%A4%AA%E0%A5%80%E0%A4%A2%E0%A4%BC%E0%A5%80-%E0%A4%95%E0%A5%80-%E0%A4%86%E0%A4%95%E0%A4%BE%E0%A4%B6-%E0%A4%8F%E0%A4%A8%E0%A4%9C%E0%A5%80-%E0%A4%AE%E0%A4%BF%E0%A4%B8%E0%A4%BE%E0%A4%87%E0%A4%B2-%E0%A4%95%E0%A4%BE-%E0%A4%B8%E0%A4%AB%E0%A4%B2-%E0%A4%AA%E0%A4%B0%E0%A5%80%E0%A4%95%E0%A5%8D%E0%A4%B7%E0%A4%A3--%E0%A4%96%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%AC-%E0%A4%AE%E0%A5%8C%E0%A4%B8%E0%A4%AE-%E0%A4%95%E0%A5%87-%E0%A4%AC%E0%A5%80%E0%A4%9A-%E0%A4%B2%E0%A4%95%E0%A5%8D%E0%A4%B7%E0%A5%8D%E0%A4%AF-%E0%A4%AA%E0%A4%B0-%E0%A4%B8%E0%A4%9F%E0%A5%80%E0%A4%95-%E0%A4%A8%E0%A4%BF%E0%A4%B6%E0%A4%BE%E0%A4%A8%E0%A4%BE/article-1253"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2021-07/e6-n4r5uyae41nu.png" alt=""></a><br /><p>बालासोर। रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) ने शुक्रवार को एकीकृत परीक्षण रेंज से नई पीढ़ी की आकाश (आकाश-एनजी) मिसाइल का सफल उड़ान परीक्षण किया। पिछले तीन दिनों के दौरान दूसरी बार ओडिशा तट से यह परीक्षण किया गया है। इससे पहले 21 जुलाई को इस मिसाइल का सफलतापूर्वक उड़ान परीक्षण किया गया। यह परीक्षण 11.45 बजे उच्च गति वाले मानवरहित हवाई लक्ष्य को निशाना बनाते हुए किया गया और मिसाइल ने अपने लक्ष्य को बखूबी भेद दिया।<br /> <br /> इस परीक्षण से मिसाइल की संपूर्ण हथियार प्रणाली की कार्यप्रणाली को मान्यता मिल गई है और उन्होंने ठीक प्रकार से कार्य किया है। इनमें स्वदेशी रूप से विकसित आरएफ सीकर, लॉन्चर, बहुमुखी राडार और कमान, नियंत्रण एवं संचार प्रणाली शामिल हैं। डीआरडीओ सूत्रों ने कहा कि खराब मौसम के बीच मिसाइल का परीक्षण किया गया है और इसने सभी प्रकार के मौसम में मिसाइल की क्षमता को साबित कर दिया है। भारतीय वायु सेना के अधिकारियों की टीम ने भी इस परीक्षण को देखा।<br /> <br /> रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने मात्र तीन दिनों के भीतर इसके दूसरे सफल परीक्षण के लिए डीआरडीओ, भारतीय वायु सेना और रक्षा उपक्रम को बधाई दी है। उन्होंने कहा कि अत्याधुनिक स्वेदशी प्रौद्योगिकी से बनी यह मिसाइल भारत वायु सेना की मारक क्षमता में कईं गुना इजाफा करेगी। रक्षा शोध एवं विकास विभाग के सचिव और डीआरडीओ के अध्यक्ष डॉ. जी सतीश रेड्डी ने इस परीक्षण के लिए संबंधित टीमों को बधाई देते हुए कहा कि यह मिसाइल तेज रफ्तार वाली आक्रामक वस्तुओं का पीछा कर उन्हें नष्ट करने में सक्षम है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 23 Jul 2021 17:56:44 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Administrator]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>फायर एंड फॉरगेट मैन पोर्टेबल एंटी टैंक गाइडेड मिसाइल का सफल परीक्षण, लक्ष्य पर साधा सटीक निशाना</title>
                                    <description><![CDATA[आत्मनिर्भर भारत को बढ़ावा देने और भारतीय सेना को मजबूत करने के लिए रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) ने बुधवार को स्वदेशी रूप से विकसित कम वजन वाली फायर एंड फॉरगेट मैन-पोर्टेबल एंटी-टैंक गाइडेड मिसाइल का सफलतापूर्वक परीक्षण किया। मिसाइल को थर्मल साइट के साथ एकीकृत मानव-पोर्टेबल लॉन्चर से लॉन्च किया गया था।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/%E0%A4%AB%E0%A4%BE%E0%A4%AF%E0%A4%B0-%E0%A4%8F%E0%A4%82%E0%A4%A1-%E0%A4%AB%E0%A5%89%E0%A4%B0%E0%A4%97%E0%A5%87%E0%A4%9F-%E0%A4%AE%E0%A5%88%E0%A4%A8-%E0%A4%AA%E0%A5%8B%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%9F%E0%A5%87%E0%A4%AC%E0%A4%B2-%E0%A4%8F%E0%A4%82%E0%A4%9F%E0%A5%80-%E0%A4%9F%E0%A5%88%E0%A4%82%E0%A4%95-%E0%A4%97%E0%A4%BE%E0%A4%87%E0%A4%A1%E0%A5%87%E0%A4%A1-%E0%A4%AE%E0%A4%BF%E0%A4%B8%E0%A4%BE%E0%A4%87%E0%A4%B2-%E0%A4%95%E0%A4%BE-%E0%A4%B8%E0%A4%AB%E0%A4%B2-%E0%A4%AA%E0%A4%B0%E0%A5%80%E0%A4%95%E0%A5%8D%E0%A4%B7%E0%A4%A3--%E0%A4%B2%E0%A4%95%E0%A5%8D%E0%A4%B7%E0%A5%8D%E0%A4%AF-%E0%A4%AA%E0%A4%B0-%E0%A4%B8%E0%A4%BE%E0%A4%A7%E0%A4%BE-%E0%A4%B8%E0%A4%9F%E0%A5%80%E0%A4%95-%E0%A4%A8%E0%A4%BF%E0%A4%B6%E0%A4%BE%E0%A4%A8%E0%A4%BE/article-1221"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2021-07/e60hhkpuuaatqbi.jpg" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। आत्मनिर्भर भारत को बढ़ावा देने और भारतीय सेना को मजबूत करने के लिए रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) ने बुधवार को स्वदेशी रूप से विकसित कम वजन वाली फायर एंड फॉरगेट मैन-पोर्टेबल एंटी-टैंक गाइडेड मिसाइल (MPATGM) का सफलतापूर्वक परीक्षण किया। मिसाइल को थर्मल साइट के साथ एकीकृत मानव-पोर्टेबल लॉन्चर से लॉन्च किया गया था और लक्ष्य एक टैंक की कॉपी की तरह था। मिसाइल ने सीधे हमले मोड में लक्ष्य को मारा और इसे सटीक रूप से नष्ट कर दिया। परीक्षण ने न्यूनतम सीमा को सफलतापूर्वक सत्यापित किया है।<br /> <br /> डीआरडीओ ने बताया कि मिशन के सभी उद्देश्यों को पूरा किया गया। मिसाइल (मैन-पोर्टेबल एंटी-टैंक गाइडेड मिसाइल) का अधिकतम सीमा तक सफलतापूर्वक उड़ान परीक्षण किया जा चुका है। मिसाइल को उन्नत एवियोनिक्स के साथ अत्याधुनिक लघु इन्फ्रारेड इमेजिंग सीकर के साथ शामिल किया गया है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 21 Jul 2021 17:55:11 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>DRDO द्वारा तैयार शॉर्ट स्पैन ब्रिजिंग सिस्टम सेना में शामिल, नहरों-नदियों को पार करने में होगी आसानी</title>
                                    <description><![CDATA[रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) द्वारा विकसित शॉर्ट स्पैन ब्रिज प्रणाली पर आधारित 12 छोटे रेडीमेड ब्रिज यानी तैयार पुल सेना में शामिल हो गए। सेना प्रमुख जनरल मनोज मुकुंद नरवणे ने शुक्रवार को दिल्ली कैंट में एक कार्यक्रम में 12 छोटे ब्रिज को सेना में विधिवत रूप से शामिल किया। इस मौके पर डीआरडीओ के अध्यक्ष डॉ. जी सतीश रेड्डी भी मौजूद थे।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/drdo-%E0%A4%A6%E0%A5%8D%E0%A4%B5%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A4%BE-%E0%A4%A4%E0%A5%88%E0%A4%AF%E0%A4%BE%E0%A4%B0-%E0%A4%B6%E0%A5%89%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%9F-%E0%A4%B8%E0%A5%8D%E0%A4%AA%E0%A5%88%E0%A4%A8-%E0%A4%AC%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A4%BF%E0%A4%9C%E0%A4%BF%E0%A4%82%E0%A4%97-%E0%A4%B8%E0%A4%BF%E0%A4%B8%E0%A5%8D%E0%A4%9F%E0%A4%AE-%E0%A4%B8%E0%A5%87%E0%A4%A8%E0%A4%BE-%E0%A4%AE%E0%A5%87%E0%A4%82-%E0%A4%B6%E0%A4%BE%E0%A4%AE%E0%A4%BF%E0%A4%B2--%E0%A4%A8%E0%A4%B9%E0%A4%B0%E0%A5%8B%E0%A4%82-%E0%A4%A8%E0%A4%A6%E0%A4%BF%E0%A4%AF%E0%A5%8B%E0%A4%82-%E0%A4%95%E0%A5%8B-%E0%A4%AA%E0%A4%BE%E0%A4%B0-%E0%A4%95%E0%A4%B0%E0%A4%A8%E0%A5%87-%E0%A4%AE%E0%A5%87%E0%A4%82-%E0%A4%B9%E0%A5%8B%E0%A4%97%E0%A5%80-%E0%A4%86%E0%A4%B8%E0%A4%BE%E0%A4%A8%E0%A5%80/article-980"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2021-07/e5q6r2dx0aylpwa.jpg" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) द्वारा विकसित शॉर्ट स्पैन ब्रिज प्रणाली पर आधारित 12 छोटे रेडीमेड ब्रिज यानी तैयार पुल सेना में शामिल हो गए। सेना प्रमुख जनरल मनोज मुकुंद नरवणे ने शुक्रवार को दिल्ली कैंट में एक कार्यक्रम में 12 छोटे ब्रिज को सेना में विधिवत रूप से शामिल किया। इस मौके पर डीआरडीओ के अध्यक्ष डॉ. जी सतीश रेड्डी भी मौजूद थे। सेनाध्यक्ष ने बताया कि आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य की तरफ यह सफल कदम है। इसको बनाने वाले मैं सभी लोगों की सरहाना करता हूं। इसके सेना में शामिल होने से सेना की ताक़त बढ़ेगी।<br /> <br /> डीआरडीओ चीफ डॉ. जी सतीश रेड्डी ने कहा कि हमने ये सिस्टम विकसित किया था। बेंगलुरु के पास कोलार में इसका ट्रायल चल रहा है। भारत इलेक्ट्रॉनिक्स को टेक्नोलॉजी ट्रांसफर किया है। इनपुट के बारे में सशस्त्र बलों से अभी चर्चा चल रही है। कई प्राइवेट कंपनियों को भी टेक्नोलॉजी ट्रांसफर किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि इन पुलों की मदद से सेना को अब छोटी नहरों और नदियों को पार करने में मुश्किल नहीं होगी। 10 से 12 मीटर लंबे ये पुल विशेष रूप से देश की पश्चिमी सीमा पर अत्यधिक कारगर साबित होंगे। <br /> <br /> उन्होंने बताया कि करीब चार मीटर चौड़े इन ब्रिजों को सड़क मार्ग से तुरंत एक स्थान से दूसरे स्थान पर ले जाया जा सकता है इससे सैनिकों की तुरंत तैनाती में काफी मदद मिलेगी। डीआरडीओ की पुणे स्थित अनुसंधान एवं विकास प्रतिष्ठान प्रयोगशाला ने इन पुलों को लार्सन एंड ट्यूब्रो के साथ मिलकर बनाया है। भारतीय सेना के इंजीनियर-इन-चीफ लेफ्टिनेंट जनरल हरपाल सिंह ने कहा कि हमारे पास पहले फिक्स्ड स्पैन के ब्रिजेस होते थे और जो 10-30 मीटर के इंटरमीडिएट गैप होते थे, उसको हम ब्रिज नहीं कर पाते थे। इसलिए ये पूरा ब्रिज सिस्टम बनाया गया और अब हम 5-75 मीटर तक की नहरों को ब्रिज कर सकते हैं। उधर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने डीआरडीओ, सेना और उद्योग जगत को इसके लिए बधाई दी है। उन्होंने कहा कि इस उपलब्धि से आत्मनिर्भर भारत अभियान को बढ़ावा मिलेगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 02 Jul 2021 16:54:32 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Administrator]]></dc:creator>
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                <title>जम्मू: इंटरनेशनल बॉर्डर पर अरनिया सेक्टर में फिर दिखा ड्रोन, BSF की फायरिंग के बाद हुआ गायब</title>
                                    <description><![CDATA[जम्मू-कश्मीर में अंतरराष्ट्रीय सीमा पर अरनिया सेक्टर में एक बार फिर ड्रोन दिखा है। यह पाकिस्तानी ड्रोन तड़के 4.25 बजे अंतरराष्ट्रीय सीमा में घुसने की कोशिश कर रहा था, लेकिन सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) के जवानों की फायरिंग के बाद यह वापस चला गया। बीएसएफ का कहना है कि यह बॉर्डर पर निगरानी के लिए भेजा गया था।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/%E0%A4%9C%E0%A4%AE%E0%A5%8D%E0%A4%AE%E0%A5%82--%E0%A4%87%E0%A4%82%E0%A4%9F%E0%A4%B0%E0%A4%A8%E0%A5%87%E0%A4%B6%E0%A4%A8%E0%A4%B2-%E0%A4%AC%E0%A5%89%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%A1%E0%A4%B0-%E0%A4%AA%E0%A4%B0-%E0%A4%85%E0%A4%B0%E0%A4%A8%E0%A4%BF%E0%A4%AF%E0%A4%BE-%E0%A4%B8%E0%A5%87%E0%A4%95%E0%A5%8D%E0%A4%9F%E0%A4%B0-%E0%A4%AE%E0%A5%87%E0%A4%82-%E0%A4%AB%E0%A4%BF%E0%A4%B0-%E0%A4%A6%E0%A4%BF%E0%A4%96%E0%A4%BE-%E0%A4%A1%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A5%8B%E0%A4%A8--bsf-%E0%A4%95%E0%A5%80-%E0%A4%AB%E0%A4%BE%E0%A4%AF%E0%A4%B0%E0%A4%BF%E0%A4%82%E0%A4%97-%E0%A4%95%E0%A5%87-%E0%A4%AC%E0%A4%BE%E0%A4%A6-%E0%A4%B9%E0%A5%81%E0%A4%86-%E0%A4%97%E0%A4%BE%E0%A4%AF%E0%A4%AC/article-970"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2021-06/dron-630x400.jpg" alt=""></a><br /><p>जम्मू। जम्मू-कश्मीर में अंतरराष्ट्रीय सीमा पर अरनिया सेक्टर में एक बार फिर ड्रोन दिखा है। यह पाकिस्तानी ड्रोन तड़के 4.25 बजे अंतरराष्ट्रीय सीमा में घुसने की कोशिश कर रहा था, लेकिन सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) के जवानों की फायरिंग के बाद यह वापस चला गया। बीएसएफ का कहना है कि यह बॉर्डर पर निगरानी के लिए भेजा गया था। बीएसएफ के प्रवक्ता ने बताया कि सीमा सुरक्षा बल के जवानों ने आज सुबह लगभग 4:25 बजे पाकिस्तानी हेक्साकॉप्टर पर फायरिंग की, जो अरनिया सेक्टर में अंतरराष्ट्रीय सीमा को पार करने की कोशिश कर रहा था। फायरिंग से हेक्साकॉप्टर तुरंत वापस चला गया। उन्होंने कहा कि हमारे जवान अलर्ट हैं और किसी भी चुनौती का जवाब देने के लिए तैयार हैं।<br /> <br /> बता दें कि पिछले 5-6 दिनों से जम्मू में संदिग्ध ड्रोन दिखने की घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं। इसकी शुरुआत सबसे पहले शनिवार-रविवार की रात को हुई थी, जब जम्मू एयरफोर्स स्टेशन पर ड्रोन से विस्फोटक गिराए गए थे। इसमें एयरफोर्स के 2 जवानों को हल्की चोटें आई और एक बिल्डिंग की छत को नुकसान हुआ। इसके बाद रविवार-सोमवार की रात को भी जम्मू के कालूचक मिलिट्री बेस पर ड्रोन नजर आया। फिर सोमवार देर रात सुंजवान मिलिट्री स्टेशन के पास संदिग्ध ड्रोन दिखा।<br /> <br /> लगातार हो रही ड्रोन एक्टिविटी के बाद सरकार और सुरक्षा एजेंसियां सतर्क हो गई है और काउंटर ड्रोन पॉलिसी बनाने पर काम शुरू कर दिया है। इस बीच डीआरडीओ के एंटी-ड्रोन सिस्टम की चर्चा जारी है। इस एंटी-ड्रोन सिस्टम पर पिछले तीन साल से काम चल रहा है। डीआरडीओ के मुताबिक, यह सिस्टम तीन किलोमीटर के दायरे में आने वाले छोटे ड्रोन का पता लगाकर उसे जाम कर देता है। इसके साथ ही यह सिस्टम 1 से 2.5 किलोमीटर के दायरे में आए ड्रोन को अपनी लेजर बीम से निशाना बनाते हुए उसे नीचे गिरा देता है। अगले 6 महीनों में एंटी ड्रोन सिस्टम सेना को मिल सकता है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 02 Jul 2021 16:25:55 +0530</pubDate>
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                <title>अग्नि सीरीज की न्यू जनरेशन एडवांस मिसाइल 'अग्नि पी' का सफल परीक्षण, 2000 किमी तक करेगी मार</title>
                                    <description><![CDATA[डीआरडीओ ने सोमवार को परमाणु क्षमता से लैस अगली पीढ़ी की मिसाइल अग्नि पी का सफल परीक्षण किया है। ओडिशा के बालासोर में डॉक्टर एपीजे अब्दुल कलाम द्वीप में सुबह 10 बजकर 55 मिनट पर यह परीक्षण किया गया। मिसाइल ने परीक्षण के दौरान अपने सभी उद्देश्य पूरे किए और इसका निशाना सटीक रहा।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/%E0%A4%85%E0%A4%97%E0%A5%8D%E0%A4%A8%E0%A4%BF-%E0%A4%B8%E0%A5%80%E0%A4%B0%E0%A5%80%E0%A4%9C-%E0%A4%95%E0%A5%80-%E0%A4%A8%E0%A5%8D%E0%A4%AF%E0%A5%82-%E0%A4%9C%E0%A4%A8%E0%A4%B0%E0%A5%87%E0%A4%B6%E0%A4%A8-%E0%A4%8F%E0%A4%A1%E0%A4%B5%E0%A4%BE%E0%A4%82%E0%A4%B8-%E0%A4%AE%E0%A4%BF%E0%A4%B8%E0%A4%BE%E0%A4%87%E0%A4%B2--%E0%A4%85%E0%A4%97%E0%A5%8D%E0%A4%A8%E0%A4%BF-%E0%A4%AA%E0%A5%80--%E0%A4%95%E0%A4%BE-%E0%A4%B8%E0%A4%AB%E0%A4%B2-%E0%A4%AA%E0%A4%B0%E0%A5%80%E0%A4%95%E0%A5%8D%E0%A4%B7%E0%A4%A3--2000-%E0%A4%95%E0%A4%BF%E0%A4%AE%E0%A5%80-%E0%A4%A4%E0%A4%95-%E0%A4%95%E0%A4%B0%E0%A5%87%E0%A4%97%E0%A5%80-%E0%A4%AE%E0%A4%BE%E0%A4%B0/article-916"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2021-06/e485v9xucaasasg.jpg" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (डीआरडीओ) ने परमाणु क्षमता से लैस अगली पीढ़ी की मिसाइल अग्नि पी का सफल परीक्षण किया है। ओडिशा के बालासोर में डॉक्टर एपीजे अब्दुल कलाम द्वीप में सोमवार को सुबह 10 बजकर 55 मिनट पर यह परीक्षण किया गया। मिसाइल के दागे जाने के बाद इस पर विभिन्न स्टेशनों और रडार से नजर रखी गई। मिसाइल ने परीक्षण के दौरान अपने सभी उद्देश्य पूरे किए और इसका निशाना सटीक रहा। अग्नि प्राइम मिसाइल अग्नि श्रेणी की अगली पीढ़ी की उन्नत मिसाइल है, जो 1000 से 2000 किलोमीटर की दूरी तक मार करने में सक्षम है। इस मिसाइल में 1000 किलोग्राम भार के परमाणु बम ले जाने की क्षमता है।<br /> <br /> दो चरणों वाली और ठोस ईंधन वाली मिसाइल को उन्नत रिंग-लेजर गायरोस्कोप पर आधारित नेविगेशन सिस्टम द्वारा निर्देशित किया जाएगा। दोनों चरणों में समग्र रॉकेट मोटर्स हैं और वे मार्गदर्शन प्रणाली से लैस हैं। इस मिसाइल का प्रक्षेपण सड़क और रेल मोबाइल लॉन्चर्स के जरिए किया जा सकेगा। नई तकनीकों के एकीकरण के कारण इसका वजन पिछले संस्करण की तुलना में कम है। भारत पिछले तीन दशकों के दौरान अग्नि रेंज की 5 मिसाइलें विकसित कर चुका है। अग्नि प्राइम इसी अग्नि रेंज की नई और आधुनिक मिसाइल है। डीआरडीओ के अधिकारियों के मुताबिक पूर्वी तट पर पोजिशन्ड विभिन्न राडार और टेलिमेट्री स्टेशनों से मिसाइल को मॉनिटर किया गया। इसके प्रक्षेपण पर नजर रखी गई और इसने मिशन के सभी उद्देश्यों को पूरा किया।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 28 Jun 2021 17:51:57 +0530</pubDate>
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