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                <title>30 साल पुरानी एक मात्र मशीन पर धुलाई का जिम्मा, जानें पूरा मामला </title>
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                        <![CDATA[एमबीएस अस्पताल प्रशासन की  लापरवाही से लॉन्ड्री मशीन हुई नाकारा।]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/a-single-30-year-old-machine-is-responsible-for-laundry/article-143783"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-02/12200-x-600-px)-(2)9.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। लाखों की मशीनरी भी प्रशासनिक लापरवाही के चलते किस तरह कण्डम हो जाती है इसकी बानगी कोटा के एमबीएस अस्पताल के लॉन्ड्री सेक्शन में देखने को मिली । बेपरवाही का आलम यह है कि अस्पताल में मरीजों की चादरें, कंबल और अन्य कपड़ों की धुलाई अभी भी लगभग 25 वर्ष पुरानी मशीनों से की जा रही है, जिससे काम की रफ्तार और गुणवत्ता दोनों प्रभावित हो रही हैं। अस्पताल से आए दिन दाग लगे चद्दरों की शिकायतें भी कितनी  बार परिजनों द्वारा सामने आती रहती है । लॉन्ड्री सेक्शन के प्रभारी ने बताया कि यहां पर सोमवार और गुरुवार को ही कपड़े लिए और दिए जाते हैं, क्योंकि पुरानी मशीनें होने के कारण लगातार धुलाई का काम चल रहा है। इसी वजह से पूरे सप्ताह में नियमित और समय पर कपड़ों की आपूर्ति करना चुनौतीपूर्ण हो गया है।</p>
<p><strong>मात्र 70 हजार की दरकार</strong><br />जानकारी के अनुसार वर्ष 2020 में अस्पताल प्रशासन को एक आधुनिक कपड़ा धुलाई मशीन स्थापित की गई थी, जिसे एक आॅयल कम्पनी के सहयोग से उपलब्ध कराया गया था। यह मशीन अत्याधुनिक तकनीक से लैस थी । पारम्परिक ब्लीच,सोडा व सर्फ के प्रयोग से कपडो व त्वचा को भी परेशानी होती है जबकि नई मशीन व उन्नत कैमिकल से अधिक मात्रा में साफ-सफाई सुनिश्चित करने में सक्षम थी । यहां काम करने वाले लोगों ने बताया कि इसको देखने के लिए इंजीनियर भी आए थे जिन्होने 70 हजार खर्चा  बताया था । कार्मिकों ने बताया कि नई लगाई गई मशीन को पहले तो करीब दो सालों तक चालू ही नहीं किया गया। 2022-23 में मशीन को चालू किया गया तब काम में थोड़ा आराम और सुधार आया था लेकिन पिछले करीब 14 माह से भी अधिक का समय गुजर गया लेकिन मशीन चालू नहीं हो पायी है।</p>
<p><strong>बेड़शीट सहित ओटी ड्रेस की धुलाई</strong><br />परिसर में स्थापित इस धुलाई केन्द्र पर रोजाना करीब 600 बेडशीट के अलावा आई ओटी, जनरल व न्यूरो आॅपरेशन थियेटर के भी कपडे़ आते है। यहां पर पुराने समय की धुलाई करने वाली दो मशीनें है इनमें से एक तो पूरी तरह गल चुकी है जबकि दूसरी को  किसी तरह जुगाड़ करके चलाया जा रहा है जो भी बंद हो जाए अस्पताल में भारी परेशानी पैदा हो सकती है।</p>
<p><strong>इनका कहना है </strong><br />मशीन की कम्पनी का पता कराया है, मशीन की मरम्मत के लिए आवश्यक पत्रावलियां तैयार की जा चुकी है, विशेषज्ञों के अनुसार करीब 70-80 हजार का खर्च आने का एस्टीमेट है। इसको चालू करवाया जाएगा।<br /><strong>- डॉ. कर्नेश गोयल, उपाधीक्षक एमबीएस असपताल </strong></p>]]>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 19 Feb 2026 14:46:44 +0530</pubDate>
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                <title>असर खबर का - कब्जे वाले पुराने विद्यालय भवन की हुई जांच ,आमली गांव पहुंचे शिक्षा विभाग के अधिकारी</title>
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                        <![CDATA[उच्चाधिकारियों को भेजी रिपोर्ट।]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/impact-of-the-news--investigation-of-the-occupied-old-school-building/article-128724"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-10/111-(2)8.png" alt=""></a><br /><p>कुंदनपुर। ग्राम पंचायत मंडाप के अंतर्गत आमली गांव स्थित पुराने सरकारी विद्यालय भवन पर प्रभावशाली लोगों द्वारा कब्जे की शिकायत पर शिक्षा विभाग हरकत में आ गया। मंगलवार को विभागीय टीम गांव पहुंची और मौके का निरीक्षण कर ग्रामीणों व प्रधानाध्यापक से जानकारी ली। गौरतलब है कि 03 अक्टूबर को दैनिक नवज्योति मे आमली में पुराने विद्यालय भवन पर लोगों का कब्जा शीर्षक से खबर प्रकाशित हुई थी। इसके बाद विभाग ने तुरंत जांच शुरू की। उल्लेखनीय है कि बुधवार को आमली में आयोजित ग्रामीण चौपाल व जन संवाद के दौरान ग्रामीणों ने ऊर्जा मंत्री हीरालाल नागर को ज्ञापन सौंपकर 40 साल से चले आ रहे अतिक्रमण को हटाने की मांग की थी। मंत्री ने ग्रामीणों को भवन को कब्जामुक्त कराने का आश्वासन भी दिया था।</p>
<p>विद्यालय के सामने की भूमि आबादी क्षेत्र में आती है। खसरा नंबर 164, रकबा 1.24 हेक्टेयर राजस्व रिकॉर्ड में ग्राम पंचायत मंडाप के नाम दर्ज है। यदि विवाद होता है तो उसकी कार्रवाई ग्राम पंचायत स्तर पर की जाएगी।<br /><strong>-महेन्द्र सैनी, पटवारी</strong></p>
<p><strong>जांच दल की कार्रवाई</strong><br />सांगोद एसीबीईओ पुरुषोत्तम मेघवाल के निर्देश पर उप प्राचार्य महावीर मीणा, वरिष्ठ अध्यापक जमनालाल और कनिष्ठ सहायक सुनीता देवी की टीम आमली पहुंची। टीम ने भवन का अवलोकन कर प्रधानाध्यापक से चर्चा की और ग्रामीणों के बयान भी दर्ज किए। इसके बाद पूरी रिपोर्ट तैयार कर उच्चाधिकारियों को भेज दी गई है। अधिकारियों ने कहा कि जो भी निर्देश मिलेंगे, उनकी पालना की जाएगी।</p>]]>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 04 Oct 2025 15:50:55 +0530</pubDate>
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                <title> गोपालपुरा माताजी मंदिर- लकवा पीड़ितों की आस्था का केंद्र, 400 साल से अधिक पुराना है चमत्कारी मंदिर  </title>
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                        <![CDATA[यहां नवरात्र के अलावा शनिवार व रविवार को श्रद्धालुओं का तांता।]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/gopalpura-mataji-temple---a-center-of-faith-for-those-suffering-from-paralysis--the-miraculous-temple-is-over-400-years-old/article-128300"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-09/copy-of-news-(1)45.png" alt=""></a><br /><p> मंडाना। मंडाना के पास गोपालपुरा गांव में स्थित गोपालपुरा माताजी मंदिर लगभग 400 साल पुराना रियासतकालीन मंदिर है, जो बीजासन माता और कंकाली माता के लिए प्रसिद्ध है। इस मंदिर को लकवा (पैरालिसिस) पीड़ितों की आस्था का केंद्र माना जाता है। मंडाना कस्बे से 7 किमी दूर नेशनल हाइवे 52 से 250 मीटर दूर गोपालपुरा गांव मे स्थित है मां राजराजेश्वरी बिजासन माता का चमत्कारी मन्दिर मान्यता है कि है कि लोग यहां रोते रोते आते है व हंसते हंसते जाते है। माँ का ऐसा अद्धभुत चमत्कार है की यहाँ लकवा पैरालाइज अन्य बीमारियां से पीड़ित मरीज ठीक हो जाते है। नवरात्रा के अलावा हर शनिवार व रविवार को श्रद्धालु आते है। </p>
<p><strong> मान्यताएं और महत्व</strong><br />मान्यता है कि शनिवार और रविवार को यहां दर्शन करने से लकवाग्रस्त मरीजों को राहत मिलती है। मरीज माता की परिक्रमा करते हैं और पाठ (मंत्रोच्चार) करते हैं, जिससे स्वास्थ्य में सुधार होने की बात कही जाती है।  भक्त इसे चमत्कारिक स्थल मानते हैं, जहाँ मनोकामनाएं पूरी होती हैं।</p>
<p><strong> मंदिर की विशेषताएँ</strong><br />मंदिर में दो प्रतिमाएँ है। मंदिर में बीजासन माता और कंकाली माता की प्रतिमाएं विराजमान हैं। अखंड हवन भक्तों के सहयोग से यहाँ 24 घंटे अखंड हवन प्रज्वलित रहता है।  रियासतकालीन विरासत यह मंदिर लगभग 400 वर्ष पुराना है और उस समय की स्थापत्य कला की झलक दिखाता है</p>
<p><strong> सेवाएं और सुविधाएं</strong><br /> भंडारा नवरात्र के दौरान प्रतिदिन भंडारे का आयोजन होता है, जिसमें एक हजार से अधिक भक्त प्रसादी ग्रहण करते हैं। प्रतिदिन सुबह 4 बजे मंगला आरती और शाम 7 बजे शयन आरती होती है।  धर्मशाला भक्तों के ठहरने की सुविधा भी उपलब्ध है, जहां लोग 9 दिन तक रहकर आरती और पूजा में भाग लेते हैं। नवरात्र और अन्य पर्वों पर मंदिर परिसर में हजारों की संख्या में भक्त पहुँचते हैं। दूर-दराज से आने वाले लकवा पीड़ित यहाँ दर्शन कर अपनी बीमारी से राहत पाने की आशा रखते हैं।  </p>]]>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
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                <pubDate>Tue, 30 Sep 2025 14:43:51 +0530</pubDate>
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                <title>800 साल से भी अधिक पुराना है कोटा का आशापुरा माता मंदिर, दशहरा मेले की शुरूआत होती है मंदिर की पूजा से</title>
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                        <![CDATA[कोटा के दशहरा मैदान के पास स्थित यह मंदिर केवल एक धार्मिक स्थल ही नहीं, बल्कि इतिहास, परंपरा और लोकमान्यताओं का संगम है।]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/the-ashapura-mata-temple-in-kota-is-over-800-years-old/article-127651"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-09/11-(1)20.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। नवरात्रि का पर्व शुरू होते ही कोटा शहर भक्ति और आस्था में सराबोर हो उठता है। हर गली-मोहल्ले में देवी के जयकारे गूंजने लगते हैं, माता की चौकियां सजती हैं और भक्तजन व्रत-उपवास रखते हुए माता की साधना में लीन हो जाते हैं। ऐसे पावन अवसर पर कोटा का आशापुरा माता मंदिर श्रद्धालुओं की आस्था का सबसे बड़ा केंद्र बन जाता है। कोटा के दशहरा मैदान के पास स्थित यह मंदिर केवल एक धार्मिक स्थल ही नहीं, बल्कि इतिहास, परंपरा और लोकमान्यताओं का संगम है। माना जाता है कि यह मंदिर करीब 800 साल से भी अधिक पुराना है। इसकी स्थापना रियासतकाल में हुई है। आज यह मंदिर केवल स्थानीय ही नहीं, बल्कि राजस्थान भर के श्रद्धालुओं के लिए आकर्षण का केंद्र बन चुका है। दशहरा और नवरात्र के दिनों में यहां देशभर से भक्त पहुंचते हैं। वर्तमान में भी मंदिर का रख-रखाव और पूजा-पाठ परंपरागत रीति-रिवाजों के अनुसार ही किया जाता है। यह आशापुरा माता हाड़ौती व चौहानों की कुलदेवी है। इसके लिए अन्य समाज में भी माता की आस्था है तथा कई जने कुलदेवी मानते है।</p>
<p><strong>आशापुरा मंदिर के दर्शन से होती हैं दशहरा मेले की शुरूआत</strong><br />कोटा का दशहरा मेला आज विश्व प्रसिद्ध है, लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि इसकी शुरूआत भी इसी मंदिर से होती है। परंपरा के अनुसार, दशहरे के शुभारंभ से पूर्व राजपरिवार के सदस्य यहां विशेष पूजा-अर्चना करते हैं। जब तक माता की आराधना पूरी नहीं हो जाती, तब तक मेले के कार्यक्रमों की शुरूआत नहीं होती। नगर निगम के अधिकारी, जनप्रतिनिधि और बड़ी संख्या में श्रद्धालु इस पूजा में शामिल होते हैं। इसके बाद ही दशहरा मैदान का विशाल आयोजन प्रारंभ होता है। कोटा का यह मंदिर एक ऐसा स्थल है, जहां राजपरिवार और आमजन दोनों समान रूप से श्रद्धा अर्पित करते हैं। दशहरा मेला हो या नवरात्र, दोनों अवसरों पर यहां की भव्यता देखते ही बनती है। यहां पूजा-अर्चना के बाद प्रसाद वितरण की परंपरा है, जिसे ग्रहण करने के लिए भक्त उत्सुक रहते हैं।</p>
<p><strong>समाधि और चमत्कारी किंवदंतियां</strong><br />मंदिर परिसर में स्थित सिद्धयोगी महाराज की समाधि स्थित है यह भी श्रद्धालुओं के लिए आस्था का केंद्र है। भक्त मानते हैं कि यहां समाधि से निकलने वाली ऊर्जा हर व्यक्ति का कल्याण करती है। कहा जाता है कि जो भी यहां सच्चे मन से मनोकामना मांगता है, माता उसकी हर इच्छा पूर्ण करती हैं। यही कारण है कि मंदिर का नाम आशापुरा पड़ा  जो सबकी आशा पूरी करती हैं।</p>
<p><strong>आशापुरा से बनीं आशापाला</strong><br />मंदिर के पुजारी सिद्धनाथ योगी बताते हैं कि यहां आने वाले भक्त खाली हाथ नहीं लौटते। माता हर मनोकामना को पूर्ण करती हैं। यही कारण है कि माता का नाम आशापुरा पड़ा। लाखों लोगों की आस्था से जुड़ा यह मंदिर आज भी उसी महिमा और चमत्कार से परिपूर्ण है, जैसे सदियों पहले हुआ करता था। मंदिर में आने वाले श्रद्धालुओं ने बताया कि  माता आशापुरा का प्राकट्य एक अशोक वृक्ष से हुआ था। इसी कारण इस मंदिर को लंबे समय तक आशापाला मंदिर के नाम से भी जाना जाता रहा। समय के साथ जब भक्तों ने महसूस किया कि माता उनकी हर मनोकामना पूरी करती हैं, तब यह मंदिर आशापुरा माता मंदिर कहलाने लगा। </p>
<p><strong>नवरात्र के दिन होते हैं विशेष कार्यक्रम</strong><br />- भजन संध्या और जागरण आयोजित होते हैं।<br />- भक्तों द्वारा सुंदरकांड पाठ और माता की चौकी सजाई जाती है।<br />- बड़ी संख्या में महिलाएं गरबा और डांडिया खेलकर माता का आह्वान करती हैं।</p>
<p><strong>नवरात्र में उमड़ती है आस्था की गंगा</strong><br />- नवरात्रि आते ही इस मंदिर की रौनक देखते ही बनती है। सुबह से ही श्रद्धालुओं की लंबी कतारें लग जाती हैं।<br />- सुबह 5 बजे मंदिर खुलता है और दोपहर 12.30 बजे तक दर्शन होते हैं।<br />- शाम को 4 बजे मंदिर पुन: खुलता है और रात 10 बजे तक दर्शनार्थियों की भीड़ रहती है।<br />- नवरात्रि में मंदिर पूरे दिन खुला रहता है ताकि कोई भी भक्त दर्शन से वंचित न रह जाए। अष्टमी के दिन यहां श्रद्धालुओं की संख्या बड़ी संख्या में पहुंचते है। अष्टमी के दिन मंदिर में खड़े होने के लिए भी जगह नहीं मिलती।</p>]]>
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                <pubDate>Tue, 23 Sep 2025 14:26:05 +0530</pubDate>
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                <title>चार सौ साल पुराना गणेश मंदिर आस्था और रहस्य का है अनोखा संगम</title>
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                        <![CDATA[रियासतकालीन तालाब किनारे बने चबूतरे से जुड़ी है प्राचीन परंपरा]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/the-four-hundred-year-old-ganesh-temple-is-a-unique-confluence-of-faith-and-mystery/article-125789"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-09/(630-x-400-px)-(5)2.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। शहर के हृदय स्थल पर, पुरानी सब्जी मंडी स्थित विशाल पीपल के पेड़ के नीचे विराजमान हैं श्री खड़े गणेश। यह सिर्फ एक मंदिर नहीं, बल्कि सदियों पुरानी आस्था, परंपरा और अध्यात्म का संगम है। श्रद्धालुओं का कहना है कि पहले यहां सब्जी मंडी लगती थी। अब वर्तमान में पुरानी सब्जी के नाम से ही इस जगह को जानते है। सड़क के दोनों तरफ बाजार स्थित है। रियासतकालीन समय में यहां एक तालाब हुआ करता था। उसी तालाब किनारे बने चबूतरे पर खड़े गणेशजी स्थापित थे। पहले यहां उनके साथ रिद्धी सिद्धी विराजमान नहीं थी। लेकिन वर्तमान में पूजा-अर्चना के साथ उनके साथ रिद्धी-सिद्धी को भी विराजमान करवाया। इस दौरान हवन भी हुए, प्राण-प्रतिष्ठा भी करवाई। स्थानीय श्रद्धालुओं और पुजारियों के अनुसार यह मंदिर लगभग चार सौ साल से भी अधिक पुराना है। खास बात यह है कि गणेशजी यहां खड़े रूप में विराजमान हैं और उनकी सूंड बांयी ओर है। मंदिर की प्राचीनता और रहस्य ने ही इसे आज एक अनूठे तांत्रिक गणेश मंदिर के रूप में पहचान दी है। मंदिर के पास राजा-कृष्ण का मंदिर, भैरूजी का मंदिर, माता का मंदिर भी मौजूद है। श्रद्धालुओं के अनुसार भैरूजी की मूर्ति प्राचीन बावड़ी से मिली थी। इस कारण इन्हें बावड़ी वाले भैरूजी भी कहते हैं।</p>
<p><strong>तंत्र साधना का केंद्र रहा है गणेश मंदिर</strong><br />मुख्य पुजारी लोकेश गौतम बताते हैं कि उनके दादाजी प्रभूलाल जी इस मंदिर के प्रमुख पुजारी थे और वर्षों तक इसकी देखरेख उन्होंने ही की। उन्होंने बताया कि  यह मंदिर तांत्रिक परंपराओं से जुड़ा है। पहले यहां तांत्रिक क्रियाएं की जाती थीं। समय बदला, परंपराएं बदलीं, लेकिन गणेशजी की महिमा और श्रद्धा आज भी वैसी ही है।श्रद्धालुओं ने बताया कि किंवदती के अनुसार रियासतकाल में जब कोटा दरबार तंत्र साधना और आध्यात्मिक अनुष्ठानों का बड़ा केंद्र था, उस समय खड़े गणेश मंदिर साधकों की साधना स्थली रहा। धीरे-धीरे यहां भक्ति और पूजा-अर्चना का रंग गहराता गया और आज यह हर वर्ग के श्रद्धालुओं का प्रमुख केंद्र है।</p>
<p><strong>खड़े गणेश का लोकजीवन में महत्व</strong><br />हाड़ौती शहर में होने वाले बड़े आयोजनों, शादियों, व्यापारिक शुभारंभ और यहां तक कि छात्रों की परीक्षा से पहले भी लोग खड़े गणेश के दर्शन करने पहुंचते हैं। आस्था है कि गणेशजी की बांयी सूंड समृद्धि और शुभता का प्रतीक है। स्थानीय बुजुर्ग बताते हैं कि जब भी कोई नई शुरूआत करनी होती है, सबसे पहले खड़े गणेश को याद किया जाता है। इस परंपरा ने मंदिर को केवल धार्मिक ही नहीं, सामाजिक जीवन का भी केंद्र बना दिया है। श्रद्धालु गिरीराज ने बताया कि मंदिर में धार्मिक कार्यक्रम होते रहते हैं।  चार सौ साल से अधिक पुराने इस मंदिर ने कोटा की सांस्कृतिक और धार्मिक धारा को न केवल संजोया है, बल्कि आस्था का एक अटूट केंद्र भी बना हुआ है।</p>
<p><strong>चार सौ से अधिक श्रद्धालु रोजाना लगाते हैं धोक</strong><br />मुख्य सड़क पर स्थित होने के कारण यहां आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या रोजाना चार से पांच सौ तक पहुंच जाती है। गिरीराज प्रसाद, जो वर्षों से यहां रह रहे है, उन्होंने बताया कि हमारे हर शुभ कार्य की शुरूआत खड़े गणेशजी को धोक लगाकर ही होती है। यहां आकर मन को शांति और ऊर्जा मिलती है। स्थानीय लोगों में आज भी विश्वास है कि गणेशजी को सच्चे मन से स्मरण करने पर सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। यही कारण है कि गणेश चतुर्थी हो या सामान्य बुधवार, मंदिर में श्रद्धालुओं की भीड़ लगी रहती है।</p>
<p><strong>गणेश चतुर्थी पर दस दिन का उत्सव</strong><br />गणेश चतुर्थी के दिन मंदिर का नजारा बिल्कुल अलग होता है। सुबह से ही भक्तों की भीड़ उमड़ पड़ती है। खास शृंगार किया जाता है और दिनभर विशेष अनुष्ठान चलते हैं।-गणेश चतुर्थी से लेकर दस दिनों तक प्रतिदिन अलग-अलग भोग अर्पित किए जाते हैं।-भोग के बाद प्रसाद वितरण की परंपरा है, जिसमें दूर-दराज से आए श्रद्धालु भी शामिल होते हैं।-गणेशजी के शृंगार में साढ़े पांच घंटे से भी अधिक समय लगता है। फूलों, वस्त्रों और गहनों से गणेशजी को सजाया जाता है।</p>
<p><strong>मंदिर के समय और व्यवस्थाएं</strong><br />- गणेश चतुर्थी पर होते हैं भव्य कार्यक्रम<br />- बुधवार को पूरे दिन मंदिर खुला रहता है<br />- सामान्य दिनों में  सुबह 7 से 10 बजे तक और शाम 5 से 11 बजे तक दर्शन<br />- मंदिर प्रबंधन श्रद्धालुओं की सुविधा का विशेष ध्यान रखता है।<br />- पीढ़ी दर-पीढ़ी हो रही है मंदिर की पूजा</p>
<p><strong>पीपल के नीचे खड़े गणेश</strong><br />मंदिर की सबसे बड़ी विशेषता है पीपल के पेड़ के नीचे विराजमान है। माना जाता है कि पीपल स्वयं देववृक्ष है और इसके नीचे गणेशजी की उपस्थिति आस्था को कई गुना बढ़ा देती है। शुरूआत में गणेशजी अकेले विराजमान थे। समय के साथ रिद्धि-सिद्धि को भी उनके साथ विराजमान किया गया। मंदिर के संरक्षक लालचंद प्रजापत हैं उनके अनुसार मंदिर के विकास में श्रद्धालुओं का सहयोग लगातार मिलता रहता है।</p>]]>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 04 Sep 2025 15:00:06 +0530</pubDate>
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                <title>रूसी वैज्ञानिकों को मिला 50,000 साल पुराना शिशु मैमथ का अवशेष, नाम दिया गया ‘याना’</title>
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                        <![CDATA[रूस के वैज्ञानिकों ने गर्मियों में साइबेरिया के सुदूर याकुतिया क्षेत्र में बर्फ पिघलने के दौरान 50,000 साल पुराने मैमथ शिशु के अवशेषों का पता लगाया है]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/russian-scientists-found-the-remains-of-a-50000-year-old-baby-mammoth/article-98618"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-12/5554-(3)16.png" alt=""></a><br /><p>मॉस्को। रूस के वैज्ञानिकों ने गर्मियों में साइबेरिया के सुदूर याकुतिया क्षेत्र में बर्फ पिघलने के दौरान 50,000 साल पुराने मैमथ शिशु के अवशेषों का पता लगाया है। विश्व के सबसे अच्छी तरह से संरक्षित विशाल अवशेष ‘याना’ का नाम उस नदी बेसिन के नाम पर रखा गया है जहां उसे खोजा गया है। ‘याना’ का वजन 100 किलोग्राम (15वें 10 एलबी) से अधिक है और वह 120 सेमी (4 फीट) ऊंचा और 200 सेमी लंबा है और अनुमान है कि जब वह मरी तो वह केवल एक वर्ष की थी। इससे पहले, वैश्विक स्तर पर केवल छह ऐसी खोज की गई थीं, जिसमें रूस में पांच और कनाडा में एक शामिल है। रिपोर्टों के अनुसार, स्थानीय लोगों ने याना की खोज बटागाइका क्रेटर में की, जो विश्व का सबसे बड़ा पर्माफ्रॉस्ट (स्थाई रूप से जमी हुई जमीन) गड्ढ़ा है।</p>
<p><strong>मैमथ लगभग पूरी तरह से गल चुका था  </strong>: लेजरेव मैमथ संग्रहालय प्रयोगशाला के प्रमुख ने कहा कि स्थानीय निवासी सही समय पर सही जगह पहुंचे थे। मैक्सिम चेरपासोव ने कहा कि उन्होंने देखा कि मैमथ लगभग पूरी तरह से गल चुका था और मैमथ को सतह से उठाने के लिए एक अस्थायी स्ट्रेचर का उपयोग करने का फैसला किया।</p>
<p><strong>सिर पूरी तरह सुरक्षित</strong><br /> रिपोर्ट में कहा गया कि एक नियम के रूप में, सूंड सबसे पहले गलता है, जिन्हें प्राय: आधुनिक शिकारी या पक्षी खा जाते हैं लेकिन भले ही आगे के अंग पहले ही खाए जा चुके हों, सिर उल्लेखनीय रूप से ठीक प्रकार से संरक्षित है। संग्रहालय के एक शोधकर्ता, गैवरिल नोवगोरोडोव ने कहा कि मैमथ शायद एक दलदल में फंस गया था और इस प्रकार हजारों वर्षों तक संरक्षित था।</p>
<p><strong>नॉर्थ-ईस्टर्न फेडरल यूनिवर्सिटी में किया जा रहा अध्ययन</strong><br />याना के बारे में अध्ययन इस क्षेत्र की राजधानी याकुत्स्क में नॉर्थ-ईस्टर्न फेडरल यूनिवर्सिटी में किया जा रहा है। रिपोर्ट के अनुसार, वैज्ञानिक अब इसकी पुष्टि करने के लिए परीक्षण कर रहे हैं कि उसकी मौत कब हुई। रूस के विशाल पर्माफ्रॉस्ट में पिछले माह, इसी क्षेत्र में वैज्ञानिकों ने एक कृपाण-दांतेदार बिल्ली के आंशिक, ममीकृत शरीर के अवशेष पाए थे, जिसे लगभग 32,000 वर्ष पुराना माना जा रहा है।</p>]]>
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                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 25 Dec 2024 11:26:04 +0530</pubDate>
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                <title>बुढ़ापे में हैल्दी रहना है तो 40 वर्ष में ही हो जाएं सतर्क</title>
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                        <![CDATA[दिन में कई बार छोटे छोटे मील लें, जिन्हें आसानी से पचाया जा सके। भले पहले कभी आप फल न खाते रहे हों, लेकिन अब मीठा खाना कम करें और अपने खानपान में फल शामिल करें। ]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/if-you-want-to-stay-healthy-in-old-age-then/article-32029"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-12/h122.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। ज्यादातर लोगों को 50 की उम्र के बाद भूख कम लगने लगती है। उन्हें खाने को चबाने और निगलने में भी कठिनाई होने लगती है। शरीर में कई पुराने रोग और मानसिक परेशानियां उभर आती हैं, जिस कारण बहुत तेजी से स्वास्थ्य गिरने लगता है। इसी समय हमें बहुत सजगता से ध्यान देने की जरूरत होती है। अगर 50 के बाद आप भी इन्हीं परेशानियों से गुजर रहे हैं तो अपने खानपान पर ध्यान दें। एक बार में बहुत कुछ खाने की कोशिश न करें। दिन में कई बार छोटे छोटे मील लें, जिन्हें आसानी से पचाया जा सके। भले पहले कभी आप फल न खाते रहे हों, लेकिन अब मीठा खाना कम करें और अपने खानपान में फल शामिल करें। </p>
<p>हर दिन कुछ साबुत अनाज जरूर खाएं और शारीरिक रूप से सक्रिय रहें। इस उम्र में किसी न किसी तरीके से अपने खानपान में अदरक, लहसुन, प्याज, मेथी, बादाम, अखरोट, नारियल पानी, जीरा जैसी चीजें शामिल करें। ये शरीर को बहुत फायदा पहुंचाती हैं। 50 के बाद की उम्र में सिर्फ शारीरिक समस्याएं ही नहीं होतीं,मानसिक और भावनात्मक बदलाव भी शरीर को झेलने पड़ते हैं। इसलिए नियमित सक्रियता और पोषक तत्वों का सेवन निरंतर बहुत जरूरी होता है। क्योंकि इस उम्र में अगर आपको खाने की खुश्बू लुभाती है। कुछ चीजों के नाम लेते ही आपके मुंह में  पानी आ जाता है तो समझिये आप स्वस्थ हैं, आपका शरीर बहुत अच्छी तरह से रिस्पोंस कर रहा। लेकिन अगर आपकी किसी खाने में रूचि नहीं बनती, कोई चीज आपको लुभाती नहीं है तो दिक्कत है। अगर आपके दांत सलामत हैं और भुट्टा चबा सकते हैं या भेलपुरी खाना स्वादिष्ट लगता है तो इन चीजों को जरूर खाएं। ये चीजें जहां आपकी पाचनशक्ति को सक्रिय रखती हैं, वहीं पूरे शरीर में ऊर्जा के समुचित संचार को भी सुनिश्चित करेंगी। बहुत तला भुना और बहुत पारंपरिक मेन कोर्स खाने से बचें। गरिष्ठ भोजन भी परेशान करता है। अगर आपने 40 साल तक खाने पर बहुत ध्यान नहीं दिया, तो चलेगा। लेकिन अगर 50 के बाद आप खाने को लेकर लापरवाह हैं तो आपका लंबे समय तक स्वस्थ और सक्रिय रहना मुश्किल हो जायेगा। </p>]]>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>स्वास्थ्य</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 11 Dec 2022 11:54:50 +0530</pubDate>
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                <title>चार साल की मासूम से दुष्कर्म का प्रयास मां की सजगता से टला</title>
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                        <![CDATA[ करधनी इलाके में 22 साल के युवक ने उसी मकान में मां-पिता के साथ किराए से रह रही चार साल की मासूम के साथ दुष्कर्म का प्रयास किया। मां की सजगता से अनहोनी घटना टल गई। ]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/attempt-to-rape-a-four-year-old-innocent-was-averted-by-the--alertness-of-the-mother/article-12687"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-06/rapee-1.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>जयपुर।</strong> करधनी इलाके में 22 साल के युवक ने उसी मकान में मां-पिता के साथ किराए से रह रही चार साल की मासूम के साथ दुष्कर्म का प्रयास किया। मां की सजगता से अनहोनी घटना टल गई। मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी युवक को पकड़कर पुलिस के हवाले कर दिया। पुलिस ने सोमवार को उन्नाव (यूपी) निवासी मुकेश को गिरफ्तार कर पूछताछ शुरू कर दी है। पुलिस के अनुसार रविवार शाम को छुट्टी होने पर बच्ची के माता-पिता घर पर थे। शाम करीब पांच बजे आरोपी परिजनों से नजर बचाकर बच्ची को छत पर ले गया और उसके साथ दुष्कर्म का प्रयास किया। इसी बीच मां बच्ची को तलाश हुए छत पर पहुंच गई। आरोपी की करतूत देख मां चिल्लाई तो पिता भी छत पर पहुंच गए। उसके बाद कॉलोनी के अन्य लोग भी आ गए। लोगों ने उसे पकड़कर पुलिस को सौंप दिया। थाना प्रभारी बीएल मीणा ने बताया कि आरोपी मुकेश बहन के घर में रहकर मजदूरी करता है। बच्ची के माता-पिता भी वहां किराए पर रहते हैं। शाम को काफी देर तक बच्ची नहीं दिखी तो मां तलाश करती हुई छत पर जा रही थी। इस दौरान जीने में मुकेश उनकी बेटी के साथ दुष्कर्म करने का प्रयास कर रहा था।</p>
<p><br /><strong>दुष्कर्म का आरोपी गिरफ्तार</strong></p>
<p>सुभाष चौक थाना पुलिस ने सोमवार को दुष्कर्म के आरोपी को गिरफ्तार किया है। थानाप्रभारी जयप्रकाश पूनिया ने बताया कि गत सात जून 2022 को एक पीड़िता ने निरंजन मंडल उर्फ  राजू के खिलाफ  उसके घर पर जबरदस्ती दुष्कर्म करने के संबंध में रिपोर्ट दर्ज कराई थी। रिपोर्ट पर पुलिस ने जांच कर आरोपी निरंजन मंडल निवासी कोतवाली को गिरफ्तार किया है।</p>]]>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 21 Jun 2022 13:26:44 +0530</pubDate>
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                <title>13 वर्षीय बालिका का अपहरण</title>
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                        <![CDATA[शहर के बडियाल रोड स्थित विश्वकर्मा मंदिर के पास रिहायशी कॉलोनी से रविवार दोपहर अज्ञात अपहरणकर्ता एक 13 वर्षीय बालिका का अपहरण कर ले गए। बालिका समीप की दुकान पर कुरकुरे लेने के लिए घर से निकली थी। इस मामले में बालिका के पिता ने अज्ञात अपहरणकर्ताओं के खिलाफ मुदकमा दर्ज करवाया है। ]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/dausa/13-year-old-girl-kidnapped/article-12640"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-06/tt6.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>बांदीकुई।</strong> शहर के बडियाल रोड स्थित विश्वकर्मा मंदिर के पास रिहायशी कॉलोनी से रविवार दोपहर अज्ञात अपहरणकर्ता एक 13 वर्षीय बालिका का अपहरण कर ले गए। बालिका समीप की दुकान पर कुरकुरे लेने के लिए घर से निकली थी। इस मामले में बालिका के पिता ने अज्ञात अपहरणकर्ताओं के खिलाफ मुदकमा दर्ज करवाया है। बालिका के अपहरण की सूचना मिलते ही पुलिस पूरी तरह से मुस्तैद हो गई। समाचार लिखे जाने तक पुलिस दल बालिका की तलाश में जुटी हुई थी।  पुलिस थाने में दी गई प्राथमिकी में बालिका के पिता सुरेन्द्र कुमार जांगिड़ ने बताया कि उसकी पुत्री कृतिका रविवार दोपहर करीब साढ़े 12 बजे घर से कुरकुरे लेने गई थी। जब वो घर नहीं लौटी तो उसकी आसपास तलाश की गई किन्तु उसका पता नहीं चला। बताया जाता है कि बालिका कक्षा आठवीं में अध्ययनरत है। उसने घटना के वक्त नीले रंग की जींस व टीशर्ट तथा हाथ में तांबे का कड़ा पहन रखा था।</p>
<p><br />पांच मिनट में हो गया अपहरण : बताया जाता है कि कृतिका दोपहर खाना खाने के बाद साढे 12 बजे कुरकुरे लेने गई थी। वो पांच मिनट तक घर नहीं लोटी तो परिजनों ने उसकी तलाश की, किन्तु उसका कोई सुराग नहीं लगा। घटना के बाद जांच में सामने आया कि बालिका के मकान से आगे तीसरे मकान में रहने वाली एक महिला ने बालिका के चीखने की आवाज सुनी थी। किन्तु महिला उस आवाज को नजरअंदाज कर गई।</p>]]>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>दौसा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 20 Jun 2022 14:30:13 +0530</pubDate>
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                <title>30 साल में बूढ़ा हो जाएगा भारत, अभी युवा है देश </title>
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                        <![CDATA[दुनिया के ज्यादातर देशों में जनसंख्या वृद्धि की रफ्तार 2035 तक घटने लगेगी। ज्यादातर देशों में फर्टिलिटी रेट रीप्लेसमेंट लेवल के नीचे है। भारत की बात करें तो 2050 तक भारत की आबादी में बूढ़ों की तादाद बढ़ जाएगी और सदी के अंत तक जनसंख्या घट जाएगी। ]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/india-will-be-old-in-30-years-the-country-is/article-11441"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-06/61.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>नई दिल्ली।</strong> दुनिया के ज्यादातर देशों में जनसंख्या वृद्धि की रफ्तार 2035 तक घटने लगेगी। ज्यादातर देशों में फर्टिलिटी रेट रीप्लेसमेंट लेवल के नीचे है। भारत की बात करें तो 2050 तक भारत की आबादी में बूढ़ों की तादाद बढ़ जाएगी और सदी के अंत तक जनसंख्या घट जाएगी। यूएन वर्ल्ड पॉपुलेशन प्रॉस्पेक्ट्स का विश्लेषण करने पर सामने आई यह तस्वीर।</p>
<p><strong>2050 तक बूढ़ा हो जाएगा भारत</strong></p>
<p>2050 आते-आते भारत की आबादी बूढ़ी होने लगेगी। जनसंख्या में 40 साल से ऊपर के लोगों की तादाद सबसे ज्यादा होगी। उस वक्त तक भारत में 40-44 उम्र वर्ग के लोग सबसे ज्यादा होंगे।</p>
<p><strong>अगले 30 साल में पीक पर होगी दुनिया की आबादी</strong></p>
<p>संयुक्त राष्ट्र के अनुमान के मुताबिक 2054 के आस-पास दुनिया की आबादी चरम पर पहुंच जाएगी। उस वक्त दुनिया की जनसंख्या 8.9 अरब तक पहुंच जाएगी। हालांकि, कई एक्सर्ट्स का मानना है कि जनसंख्या का चरम 2054 से पहले भी आ सकता है। हालांकि, इस सदी के उत्तरार्ध में दुनिया की आबादी घटनी शुरू हो जाएगी।</p>
<p><strong>भारत एक जवान देश</strong></p>
<p>फिलहाल भारत एक जवान देश है। देश की कुल आबादी में आधे से ज्यादा लोगों की उम्र 40 से कम है। देश में 2020 में 10 से 14 उम्र वर्ग के लोगों की तादाद सबसे ज्यादा थी।</p>
<p><strong>2100 तक आबादी में बुजुर्गों की संख्या होगी ज्यादा</strong></p>
<p><br />मौजूदा सदी के अंत तक भारत की कुल आबादी आज के मुकाबले करीब एक तिहाई घट जाएगी। उस वक्त देश में सबसे ज्यादा तादाद उनकी होगी जो 60 साल से 64 एज ग्रुप के होंगे।मौजूदा सदी के अंत तक भारत की कुल आबादी आज के मुकाबले करीब एक तिहाई घट जाएगी। उस वक्त देश में सबसे ज्यादा तादाद उनकी होगी जो 60 साल से 64 एज ग्रुप के होंगे।</p>
<p><strong>आबादी तो घटेगी लेकिन लोगों की उम्र बढ़ जाएगी</strong></p>
<p><span style="color:#000000;background-color:#ffcc00;"><strong>यूएन वर्ल्ड पॉपुलेशन प्रॉस्पेक्ट्स का विश्लेषण</strong></span><br />सदी के अंत तक दुनिया की जनसंख्या भले ही आज के मुकाबले कम हो जाएगी, लेकिन लोग ज्यादा दिनों तक जिएंगे। 2100 तक लाइफ एक्सपेक्टेंसी यानी जीवन प्रत्याशा 80 साल से ज्यादा पहुंच जाएगी। अभी ग्लोबल लाइफ एक्सपेक्टेंसी 73 वर्ष है जो 2100 तक बढ़कर 81.7 साल हो जाएगी। इसका मतलब ये हुआ कि सदी के अंत तक लोग रिटायरमेंट के बाद 20 साल और जिएंगे। इस वजह से सरकारें रिटायरमेंट की उम्र को 60 साल से ऊपर कर सकती हैं ताकि लोग ज्यादा उम्र तक काम कर सकें।</p>]]>
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                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 06 Jun 2022 14:33:37 +0530</pubDate>
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                <title>एमबीएस व जेके लोन मेंं बिजली के पैनल पुराने, सिर्फ लाइनें नई</title>
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                        <![CDATA[संभाग के सबसे बड़े एमबीएस व जेके लोन अस्पतालों में भी बिजली का सिस्टम तो पुराना है, लेकिन लाइनें कुछ समय पहले ही बदली गई हैं। हालांकि दोनों ही अस्पताल में बिजली के खुले पैनल बॉक्स में तार झूल रहे हैं। जिनसे कभी भी कोई हादसा हो सकता है। ]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/electric-panels-old-in-mbs-and-jk-lone-only-lines-new/article-8711"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-04/4545645465.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा।  न्यू मेडिकल कॉलेज अस्पताल में दो दिन पहले  केबल जलने से अचानक गुल हुई बिजली से कई मरीजों का जीवन संकट में पड़ गया था। उसी तरह संभाग के सबसे बड़े एमबीएस व जेके लोन अस्पतालों में भी बिजली का सिस्टम तो पुराना है, लेकिन लाइनें कुछ समय पहले ही बदली गई हैं। हालांकि दोनों ही अस्पताल में बिजली के खुले पैनल बॉक्स में तार झूल रहे हैं। जिनसे कभी भी कोई हादसा हो सकता है। न्यू मेडिकल कॉलेज अस्पताल को बने हुए अधिक समय नहीं हुआ है। उसकी बिजली की केबल ही पुरानी होने से जल गई। जिससे वहां का पूरा बिजली सिस्टम ही गड़बड़ा गया था। जबकि एमबीएस व जेके लोन अस्पताल तो काफी पुराने हैं। यहां के बिजली सिस्टम तो मेडिकल कॉलेज अस्पताल से भी पुराने लगे हुए हैं। उनमें भी कभी भी इसी तरह का हादसा हो सकता है। जिससे यहां एमबीएस में 750 से अधिक और जेके लोन में महिलाओं व बच्चों के जीवन पर भी संकट मंडरा सकता है। <br /><br />दोनों ही अस्पतालों में जिनमें से सबसे अधिक जेके लोन अस्पताल में पूर्व में कई बार बिजली के पैनल बॉक्स में शॉर्ट सर्किट से आग लग चुकी है। उससे महिला व शिशु वार्ड में हड़कम्प मच गया था। हालांकि दोनों ही अस्पतालों में नए ओपीडी ब्लॉक बनने से उनमें बिजली की केबल लाइनों को बदला जा चुका है। लेकिन सिस्टम अभी भी पुराना ही लगा हुआ है। जिससे कभी भी हादसा होने का खतरा बना हुआ है। एमबीएस अस्पाल के नाक, कान व गला, अस्थि रोग, सर्जिकल वार्ड समेत कई अन्य स्थानों पर पैनल बॉक्स खुले पड़े हैं। जिन पर बिजली के तारों का झुंड लटका हुआ है। ऐसे में गर्मी के मौसम में कभी भी शॉर्ट सर्किट होने व लोड अधिक होने से फाल्ट होने पर खतरा बना हुआ है। इसी तरह से जेके लोन अस्पताल में भी ऊपर गायनी वार्ड समेत कई वार्डों के बाहर व गैलेरी में पैनल बॉक्स पर बिजली के तार खुले में झूल रहे हैं।  <br /><br /><strong>इनका कहना है</strong> <br />एमबीएस अस्पताल में बिजली का सिस्टम तो पुराना है। लेकिन केबल नई बदली गई हैं। इसके लिए सार्वजनिक निर्माण विभाग के विद्युत खंड को दो बार में करीब 8 लाख रुपए एडवांस  जमा करवाए हुए हैं। उनसे लाइनों को बदला गया है। जो पैनल बॉक्स खुले हैं व तार लटके हुए है उन्हें सही किया जा रहा है। गर्मी का मौसम है लोड अधिक होने पर कभी भी फाल्ट होने के खतरे से इनकार नहीं किया जा सकता। लेकिन किसी तरह की समस्या नहीं होगी। <br /><strong>-डॉ. नवीन सक्सेना, अधीक्षक एमबीएस अस्पताल</strong><br /><br />जे.के. लोन अस्पताल में नए ओपीडी ब्लॉक का काम चल रहा है। उसके साथ ही वर्तमान अस्पताल के पूरे बिजली सिस्टम को बदला जा चुका है। सभी लाइनें नई और पाइपों के जरिये पैक कर दी गई हैं। जिससे किसी तरह का खतरा नहीं है। वहीं अस्पताल में 500-500 केवी के दो नए ट्रांसफार्मर लगाए गए हैं। साथ ही 600 केवी का एक नया डीबी सेट लगाया है। जिसे शीघ्र ही चालू कर दिया जाएगा। जिससे लाइट जाने पर  बैकअप तैयार रहे और किसी तरह की मरीजों को परेशानी नहीं हो। हालांकि गर्मी में लोड अधिक होने व शॉर्ट सर्किट से फाल्ट होने से इनकार नहीं किया जा सकता लेकिन उससे किसी तरह का कोई नुकसान नहीं होगा।  <br /><strong>-डॉ. एचएल मीना, अधीक्षक जेके लोन अस्पताल  </strong><br /><br /></p>]]>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 27 Apr 2022 14:12:04 +0530</pubDate>
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                <title>विश्व मलेरिया दिवस आज: हजारों साल पुराना दंश, लाखों मौत, अब घट रहे केस, 5 साल में केवल 1 मौत</title>
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                        <![CDATA[मादा एनाफिलीज मच्छर के शरीर में रहने वाले पैरासाइट से होने वाली मलेरिया बीमारी का पता 1880 में लगा, लेकिन वैज्ञानिक इसका दंश दुनिया में 2500 ईसा पूर्व यानी करीब 4 हजार 500 साल से पुराना मानते हैं। ]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/health-news--jaipur-news--world-malaria-day-today--thousands-of-years-old-bite--lakhs-of-deaths--now-cases-are-decreasing--only-1-death-in-5-years/article-8531"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-04/4654544651.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। मादा एनाफिलीज मच्छर के शरीर में रहने वाले पैरासाइट से होने वाली मलेरिया बीमारी का पता 1880 में लगा, लेकिन वैज्ञानिक इसका दंश दुनिया में 2500 ईसा पूर्व यानी करीब 4 हजार 500 साल से पुराना मानते हैं। पांच साल पहले तक भारत में 20 लाख से अधिक लोग साल में इसके शिकार हो रहे थे। डारेक्ट्रेट ऑफ नेशनल वैक्टर बोर्न डिजीज कन्ट्रोल प्रोग्राम के डेटा के अनुसार राहत यह है कि इसके बाद से मलेरिया कम होता जा रहा है। देश में बीते साल केवल 1.58 लाख केस आए। मौतें केवल 80 ही हुई। प्रदेश में यह है कि 871 लोगों को बीमार किया। मौतें तो पांच साल में केवल एक ही हुई है। दुनिया में 4 लाख लोगों की जान अभी भी इससे जा रही है। मलेरिया की खोज के 141 साल बाद पिछले साल इसकी पहली वैक्सीन मोक्सक्यूरिस नाम से आई है। इम्यूनिटी, पैरासाइट की पूरा होता जीवन-चक्र, बारिश के मौसम में सावधानियां, साफ-सफाई, बेहतर ड्रेनेज सिस्टम से इसे हराने वाले दुनिया के 100 से अधिक देशों की तरह उम्मीद है कि भारत भी इससे जल्द मुक्त होगा।</p>
<p><strong>जानलेवा रूप कम, इसलिए मौतें भी कम</strong><br />एसएमएस अस्पताल के मेडिसिन विभाग के सीनियर प्रोफेसर डॉ. सीएल नवल ने बताया कि प्लाज्मोडियम वाइवेक्स, प्लाज्मोडियम फेलसिफेरम और प्लाज्मोडियम मलेरी पैरासाइट मच्छर के शरीर में रहते हैं। मच्छर के काटने से हम संक्रमित होते हैं। जानलेवा पैरासाइट प्लाज्मोडियम फैलसिफेरम होता है। राहत यह है कि मच्छरों में इसकी संख्या घट रही है। केवल 5 फीसदी मरीज ही अब इससे संक्रमित हो रहे हैं। बाकी 95 फीसदी भारत में प्लाज्मोडियम वाइवैक्स के केस आ रहे हैं। इसके चलते मौतें लगातार कम हो रही है।</p>
<p><strong>मलेरिया पर फैक्ट फाइल</strong><br />- राजस्थान में 83 हजार पर एक व्यक्ति को मलेरिया हुआ।  भारत में अब मलेरिया के 1 हजार आबादी पर 1 से कम केस आ रहे हैं, जबकि देश में 2001 में प्रति हजार 2 केस आया करते थे। प्रदेश में यह आंकड़ा 5 केस प्रति हजार था, लेकिन 2021 में 83237 लोगों पर केवल एक व्यक्ति ही शिकार हुआ। <br />- आजादी के वक्त 75 लाख लोग संक्रमित हुए थे। मलेरिया से 1947 में 75 लाख लोग संक्रमित हुए थे। तब जनसंख्या 33 करोड़ थी। अब 135 करोड़ आबादी पर केवल मात्र 1.58 लाख ही संक्रमित हुए। <br />- अमेरिका के दो राज्य 1962 में ही मलेरिया मुक्त हुए, अब पड़ोसी चीन भी। दुनिया में सबसे पहले अमेरिका के दो स्टेट ग्रेनेडा, सेंट ल्यूसिया 1962 में मलेरिया मुक्त हुए थे। इसके बाद 100 से अधिक देश मलेरिया मुक्त हो चुके। पिछले साल चीन को भी डब्ल्यूएचओ ने मलेरिया मुक्त घोषित किया है। <br />- बीते साल सबसे ज्यादा  केस व मौतें छत्तीसगढ़ में हुई। देश में बीते साल सबसे ज्यादा केस 92455 और सबसे ज्यादा 34 मौतें छत्तीसगढ़ में हुई। राजस्थान समेत 27 राज्यों में कोई मौत नहीं हुई। <br /><br /></p>]]>
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                                                            <category>स्वास्थ्य</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 25 Apr 2022 10:50:12 +0530</pubDate>
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