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                <title>नहरों पर सोलर प्लांट के मामले में संभागीय आयुक्त को नोटिस </title>
                                    <description><![CDATA[अहमदाबाद में कुछ दूरी पर बनी नहरों पर बने कैनाल टॉप सोलर प्लांट की तरह कोटा में बह रही नहरों पर ऐसा होने से कई लाभ होंगे। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/notice-to-divisional-commissioner-regarding-solar-plant-on-canals/article-49352"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-06/court-hammer013.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। शहर की स्थाई लोक अदालत ने सोमवार को कोटा संभाग में नहरों पर सोलर प्लांट के मामले को लेकर संभागीय आयुक्त को नोटिस जारी कर 3 जुलाई 2023 तक जवाब तलब किया है । इस मामले में एडवोकेट लोकेश कुमार सैनी ने न्यायालय में एक जनहित याचिका दायर करते हुए बताया कि कोटा सहित हाडोती की कृषि के लिए जीवनदायिनी दाएं और बाएं मुख्य नहरो में विगत वर्षों में कई दुखद घटनाएं हुई है ।गुजरात के अहमदाबाद में कुछ दूरी पर बनी नहरों पर बने कैनाल टॉप सोलर प्लांट की तरह कोटा में बह रही नहरों पर ऐसा होने से कई लाभ होंगे।  इससे दुर्घटनाओं व आत्महत्या पर रोक लगेगी।  पानी का वाष्पीकरण भी रुकेगा साथ ही बिजली का उत्पादन भी होगा । इससे लोगों को रोजगार मिलेगा। याचिका में बताया  कि असुरक्षित नहरों  पर पूर्ण सुरक्षित लोहे की बार , जालियां व रेलिंग बनवाई जानी चाहिए।  सन 2019 से लेकर अब तक इन नहरों में 95 घटनाएं हुई हैं जिसमें से 30 से अधिक लाशें निकाली गई । वर्ष 2021 में 150 घटनाएं हुई।  विगत 4 वर्षों में डूबने से 250 से अधिक घटनाएं हुई हैं ।एक किलोमीटर तक की नहर को ढक कर इस तरह का प्लांट लगने से 25000 लोगों को बिजली की आपूर्ति होगी व परंपरागत ऊर्जा स्रोत पर दबाव कम होगा कोयला और पानी की बचत होगी । बायीं मुख्य नहर की कुल क्षमता 1500 क्यूसेक की है इसका क्षेत्रफल 111 किलोमीटर में फैला हुआ है जिससे एक लाख 20000 हेक्टेयर खेत में सिंचाई होती है । दोनों नहरों से हाडोती के 15 उपखंड सिंचित होते हैं लेकिन अनदेखी के कारण आज यह समस्या उत्पन्न हो रही है।इस मामले में सुनवाई करते हुए न्यायालय ने संभागीय आयुक्त से जवाब तलब किया है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 19 Jun 2023 16:17:40 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[kota]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>बीजेपी की राष्ट्रीय पदाधिकारियों की बैठक: परिवारवाद पर पीएम मोदी का निशाना, कहा, 'सरकारों पर जनता का भरोसा 2014 के बाद कायम हुआ, भाजपाइयों को थकने का हक नहीं है, अगले 25 साल का लक्ष्य तय करें'</title>
                                    <description><![CDATA[केंद्र सरकार के 8 साल पूरे, घर - घर जाए, हर नागरिक को भाजपा में अपना प्रतिबिम्ब दिखना चाहिए: मोदी]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/jaipur-news--bjp-s-national-office-bearers-meeting--people-s-trust-in-governments-has-been-established-after-2014--bjp-has-no-right-to-be-tired--set-a-target-for-the-next-25-years--modi/article-10083"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-05/modi4.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। राजस्थान में 2023 में होने वाले विधानसभा चुनावों से पहले सियासी दंगल में राजनीतिक पार्टियों ने अपनी ताकत दिखाना शुरू कर दिया है।  कांग्रेस के चिंतन शिविर के बाद अब बीजेपी राष्ट्रीय पदाधिकारियों की बैठक के माध्यम से पार्टी कार्यकर्ता से लेकर राजस्थान की जनता को साधने में जुटी है।  </p>
<p>भारतीय जनता पार्टी की जयपुर में शुक्रवार को शुरू हुई राष्ट्रीय पदाधिकारी की बैठक के उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा है कि देश में 2014 से पहले जनता की वही स्थिति थी, जैसी किसी गंभीर बीमारी से ग्रसित व्यक्ति की हुआ करती थी। वह बीमारी को अपनी नियति मान लेता था। लेकिन 2014 में भाजपा की सरकार आने के बाद जनता का सरकारों पर भरोसा बढ़ा है और अपनी आकांक्षाओं और उम्मीदों को पूरा करने का विश्वास आया है। उन्होंने कहा कि भाजपा की वर्तमान में 18 प्रदेशों में सरकार है। 400 से ज्यादा सांसद और 13 सौ से ज्यादा विधायक है लेकिन हमें रुकना नहीं है थमना नहीं है। भाजपा के कार्यकर्ताओं को उन सभी सपनों को पूरा करना है जो हमारे पूर्व नेताओं ने देखा था। भाजपा को अगले 25 सालों का लक्ष्य तय करना है। इसके अनुरूप ही आगे काम करना है। देश की जनता को भाजपा से बड़ी उम्मीदें हैं। इसलिए हमें काम करना अनिवार्य हो जाता है।</p>
<p><span style="background-color:#ffcc99;color:#ff6600;"><strong> भाजपा की केंद्र सरकार को 8 साल पूरे</strong> </span></p>
<p>उन्होंने कहा कि भाजपा की केंद्र सरकार को 8 साल पूरे होने वाले हैं। इस तरह के चुनाव में भाजपा बूथ स्तर पर घर-घर जाती है । उसी तरह से भाजपाइयों को घर-घर जाकर केंद्र सरकार की योजनाओं और कामों को हर नागरिक तक पहुंचाना है। हर नागरिक को उसका फायदा देना है। हमारा लक्ष्य है कि केंद्र की योजनाओं के लाभार्थी शत प्रतिशत हो हर व्यक्ति को उसका लाभ मिले। उन्होंने कांग्रेस का नाम लिए बगैर कहा कि देश में भाजपाई है। जिसने राजनीति को विकासमुखी बनाया है। देश को समाज में जहर घोलने वाली ,तनाव पैदा करने वाली, जनता को भटकाने वाली, पार्टियों को भी विकास की राजनीति करने पर मजबूर कर दिया है। हमें इनका आगे भी मुकाबला करना है। ताकि देश में विकास की राजनीति हो। देश में वंशवाद और परिवारवाद की राजनीति ने भयंकर नुकसान पहुंचाया है। परिवारबाद की पार्टियां परिवार से शुरू होती है और उनके सभी लक्ष्य परिवार तक ही सीमित रहते हैं। लेकिन भाजपा को देश को इस राजनीति से मुक्त करवाना है।</p>
<p><strong> विकास की राजनीति पर जोर</strong></p>
<p>जिन लोगों ने कभी राजनीति करने की सोची भी नहीं है, उन लोगों को राजनीति में आगे लाना है। भाजपा के देश में रिकॉर्ड सदस्य हैं, लेकिन हमें हर नागरिक तक पहुंचना है। देश को जातिवाद, क्षेत्रवाद, भेदभाव, भाई-भतीजावाद, तुष्टिकरण के बाहर निकालना है। समाज को तोड़कर राजनीति करने वालों को विकास की राजनीति पर ही लाने पर मजबूर करना है । उन्होंने कहा कि भाजपा के नेताओं को अपनी पुरानी नीतियों सोचों को लगातार बरकरार रखना है और उन पर ही आगे बढ़ना है ।  जब भाजपा को कोई नहीं जानता था तब भी हमारे नेता पार्टी की नीतियों पर टिके रहे ।</p>
<p><strong>देश की राजनीति में कोई शॉर्टकट नहीं अपनाना</strong></p>
<p>राष्ट्रबाद, राष्ट्र हित और राष्ट्र निर्माण का लक्ष्य लेकर आगे बढ़ते रहे।  तब भी इस तरह के लोग भाजपा को चुनौती नहीं दे पाते थे। हमें देश की राजनीति में कोई शॉर्टकट नहीं अपनाना है। वंशवाद की राजनीति करने वाले, समाज मे जहर घोलने वाले, भाषावाद से लोगों को भटकाने वाले लोगों से सतर्क रहना है। उनके जाल में भाजपाइयों को नहीं फसना है। देश में ज्यादा से ज्यादा लोगों को भाजपा से जोड़ना है। हमें रुकना नहीं है। हर वोटर और नागरिक भाजपा को अपना माने और भाजपा में अपना प्रतिबिंब देखें । हर व्यक्ति को भाजपा में अपना सपना नजर आए इस लक्ष्य के साथ आगे बढ़ना है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 20 May 2022 12:05:26 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>स्वास्थ्य दिवस पर आइए जानें कैसी है हेल्थ सिस्टम की सेहत</title>
                                    <description><![CDATA[अभी कुल 52 हजार डॉक्टर, सात सरकारी मेडिकल कॉलेजों में ही सालाना 1.76 करोड़ मरीज ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/jaipur--news--on-health-day--let-s-know-how-is-the-health-of-the-health-system-lack-of-20-thousand-doctors-in-the-state--16-thousand-government-doctors-are-treating-9-crores/article-7512"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-04/health.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:left;"> जयपुर। राजस्थान की वर्तमान आबादी तकरीबन 7.25 करोड़ है। इनके स्वास्थ्य को ठीक रखने का जिम्मा प्रदेश के सरकारी और प्राइवेट मिलाकर करीब 52 हजार डॉक्टरों (राजस्थान मेडिकल काउंसिल में रजिस्टर्ड) पर है। आदर्श स्वास्थ्य सेवाओं के लिए अभी भी 20 हजार और डॉक्टरों की जरूरत है, क्योंकि विश्व स्वास्थ्य संगठन मानता है कि बेहतर हेल्थ मैनजमेंट को प्रति एक हजार की आबादी पर एक डॉक्टर होना चाहिए। राजस्थान में 1538 की आबादी पर एक डॉक्टर है। प्रदेश का बड़ा तबका सरकारी अस्पतालों पर ही निर्भर है। हालांकि प्रदेश में सरकारी स्वास्थ्य और मेडिकल शिक्षा महकमे में तीन हजार से ज्यादा डॉक्टरों के पद खाली पड़े हैं। यदि पूरे पद भी भर दिए जाएं तब भी बड़ी संख्या में और डॉक्टर चाहिए, क्योंकि सरकार के सात मेडिकल कॉलेज और 2863 अस्पतालों में करीब 16 हजार ही डॉक्टर हैं। इन्होंने बीते साल करीब 9 करोड़ बीमार होकर आने वाले लोगों यानी आबादी से 1.75 करोड़ से अधिक लोगों का इलाज किया। आंकड़े चिंता में इसलिए डालते हैं कि गंभीर मरीजों के इलाज के लिए बने सरकार के सातों मेडिकल कॉलेजों में केवल 3169 ही बड़े डॉक्टर (मेडिकल टीचर्स) हैं। बीते साल इन अस्पतालों में इलाज को 1.76 करोड़ से अधिक मरीज पहुंचे थे। इनमें भी सर्जरी के एक्सपर्ट तकरीबन 10 फीसदी ही हैं, जिन्होंने 4.38 लाख ऑपरेशन कर मरीजों को नई जिंदगी दी। <br /><br /><span style="background-color:#ffff99;color:#ff0000;"><strong>विश्व स्वास्थ्य दिवस </strong></span><br /><span style="background-color:#ffff99;color:#ff0000;"><strong>प्रदेश में अभी 1349 मरीजों पर एक डॉक्टर</strong></span><br /><span style="background-color:#ffff99;color:#ff0000;"><strong>5 साल में WHO के मुताबिक होंगे डॉक्टर</strong></span></p>
<table style="width:778px;">
<tbody>
<tr>
<td style="text-align:center;width:773px;" colspan="2"><span style="background-color:#cc99ff;color:#000080;"><strong>सरकार की मुफ्त इलाज और नीरोगी राजस्थान की मुहिम</strong></span></td>
</tr>
<tr>
<td style="width:35.9px;"><strong>.</strong></td>
<td style="width:737.1px;"> सरकारी अस्पतालों में मरीजों का भार कम करने और प्राइवेट अस्पताल की मुफ्त सेवाओं को चिंरजीवी बीमा से 1.33 करोड़ परिवार बीमित हैं। ये 10 लाख तक का इलाज पर 714 करोड़ रुपए बीमा राशि से हुए।</td>
</tr>
<tr>
<td style="width:35.9px;"><strong>.</strong></td>
<td style="width:737.1px;">सभी सरकारी अस्पतालों में इलाज पूरी तरह फ्री कर दिया गया है। अस्पतालों में इस साल 150 से अधिक जांचें हुई, जिनमें 10 हजार तक की मुफ्त जांचें।</td>
</tr>
<tr>
<td style="width:35.9px;"><strong>.</strong></td>
<td style="width:737.1px;"> अस्पताल में मौजूदा 969 मुफ्त दवाओं के अतिरिक्त बाहर से महंगी दवा आने का खर्चा भी सरकार उठा रही।</td>
</tr>
<tr>
<td style="width:35.9px;"><strong>.</strong></td>
<td style="width:737.1px;">अब तक 30 जिलों में केन्द्र की मदद से 23 मेडिकल कॉलेज मंजूर।</td>
</tr>
<tr>
<td style="width:35.9px;"><strong>.</strong></td>
<td style="width:737.1px;"> डॉक्टरों की उपलब्धता के लिए प्राइवेट मेडिकल कॉलेज की जल्द नीति आएगी।</td>
</tr>
<tr>
<td style="width:35.9px;"><strong>.</strong></td>
<td style="width:737.1px;">राइट टू हेल्थ कानून लागू होने जा रहा है।</td>
</tr>
<tr>
<td style="width:35.9px;"><strong>.</strong></td>
<td style="width:737.1px;">कुल बजट का सात फीसदी हेल्थ पर खर्च, एनएचएम के तहत 4358.78 करोड़ रुपए केन्द्र दे रहा।</td>
</tr>
</tbody>
</table>
<table style="width:778px;">
<tbody>
<tr style="height:41px;">
<td style="height:41px;width:774px;" colspan="2"><span style="background-color:#ffff99;color:#ff0000;"><strong>बीते साल कितने मरीजों का इलाज हुआ</strong></span></td>
</tr>
<tr style="height:41px;">
<td style="height:41px;width:774px;" colspan="2"><span style="background-color:#ffff99;color:#ff0000;"><strong>सात सरकारी मेडिकल कॉलेजों में</strong></span></td>
</tr>
<tr style="height:41.5px;">
<td style="height:41.5px;width:58.7px;"><strong>.</strong></td>
<td style="height:41.5px;width:715.3px;"> 1,76,42,822 मरीज ओपीडी में</td>
</tr>
<tr style="height:41px;">
<td style="height:41px;width:58.7px;"><strong>.</strong></td>
<td style="height:41px;width:715.3px;">1,31,67,576 मरीज भर्ती हुए</td>
</tr>
<tr style="height:41px;">
<td style="height:41px;width:58.7px;"><strong>.</strong></td>
<td style="height:41px;width:715.3px;"> 4,38,915 ऑपरेशन हुए।</td>
</tr>
<tr style="height:41px;">
<td style="height:41px;width:58.7px;" colspan="2"><span style="background-color:#cc99ff;color:#000080;"><strong>8 राजसैम व सोसायटी मेडिकल कॉलेज में 90 लाख मरीज</strong></span></td>
</tr>
<tr style="height:41px;">
<td style="height:41px;width:58.7px;" colspan="2"><span style="background-color:#ccffff;color:#993300;"><strong>2863 अस्पताल</strong></span></td>
</tr>
<tr style="height:41px;">
<td style="height:41px;width:58.7px;"><strong>.</strong></td>
<td style="height:41px;width:715.3px;">ओपीडी में 6.45 करोड़</td>
</tr>
<tr style="height:41px;">
<td style="height:41px;width:58.7px;"><strong>.</strong></td>
<td style="height:41px;width:715.3px;">भर्ती हुए 70 लाख</td>
</tr>
</tbody>
</table>
<p style="text-align:left;"> </p>
<p style="text-align:left;">824 डॉक्टरों की जल्द भर्ती कर रहे हैं। जिलों में अस्थायी आधार पर डॉक्टर रखने के आदेश हाल ही में दिए हैं। वहीं एक हजार अधिशेष डॉक्टरों को भी जिन जगह डॉक्टर नहीं है, वहां भेजा जा रहा है।  राजमैस के तहत संचालित मेडिकल कॉलेज में मेडिकल टीचर्स की अस्थाई भर्ती की रियायत दी है।  अस्पतालों में पूरी तरह से इलाज फ्री कर दिया गया है। चिरंजीवी से प्राइवेट की भी सेवाएं 1.33 करोड़ परिवार ले सकते हैं। ऐसी योजनाएं लाएं है कि हेल्थ पर जनता की जेब अब ढीली नहीं होगी। - <strong>परसादी लाल मीणा, चिकित्सा मंत्री, राजस्थान    </strong></p>
<table style="width:708px;">
<tbody>
<tr style="height:41px;">
<td style="text-align:center;height:41px;width:703px;" colspan="3"><span style="background-color:#ffcc99;color:#ff6600;"><strong>हमारा हेल्थ सिस्टम</strong></span></td>
</tr>
<tr style="height:41px;">
<td style="height:41px;width:112.1px;" rowspan="4">
<p style="text-align:left;"><span style="background-color:#ccffcc;color:#008000;"><strong>इलाज की क्षमता</strong></span></p>
<p style="text-align:left;"><strong>मेडिकल कॉलेज में भर्ती की क्षमता 24,517, अन्य सरकारी अस्पतालों में 60 हजार</strong></p>
</td>
<td style="height:41px;width:550.9px;" colspan="2">
<p><span style="background-color:#ffff99;color:#ff0000;"><strong>16 मेडिकल कॉलेज व अस्पताल में</strong></span></p>
<p><strong>01. सात सरकारी मेडिकल कॉलेज , झालावाड़ में सोसायटी द्वारा संचालित,  7 राजसैम से जिलों में संचालित, 1 अलवर में ईएसआई संचालित</strong></p>
</td>
</tr>
<tr style="height:41.5667px;">
<td style="height:41.5667px;width:550.9px;" colspan="2">
<p><span style="background-color:#ffff99;color:#ff0000;"><strong>2863 अस्पताल</strong></span></p>
<p><strong>02. 29 जिला,32 सब डिविजनल, 649सीएचसी, 2153 पीएचसी, (13779 सब सेंटर अलग)</strong></p>
</td>
</tr>
<tr style="height:41px;">
<td style="height:41px;width:550.9px;" colspan="2">
<p><span style="background-color:#ffff99;color:#ff0000;"><strong>डॉक्टर</strong></span></p>
<p><strong>03. 12500 चिकित्सा विभाग,  3169 मेडिकल कॉलेज टीचर्स,  805 सीनियर रेजीडेंट्स डॉक्टर <br /></strong></p>
</td>
</tr>
<tr style="height:41px;">
<td style="height:41px;width:550.9px;" colspan="2">
<p style="text-align:left;"><span style="background-color:#ffff99;color:#ff0000;"><strong>रिक्त पद </strong></span></p>
<p style="text-align:left;"><strong>04. 633 मेडिकल टीचर्स, 2500 डॉक्टर,  30हजार पैरामेडिकल स्टाफ, 66 हजार नर्सिंग व पैरामेडिकल स्टाफ, 52 हजार आशा सहयोगिनियां</strong></p>
</td>
</tr>
</tbody>
</table>
<table style="width:602px;">
<tbody>
<tr>
<td style="text-align:left;width:600px;" colspan="2"><span style="background-color:#ffcc99;color:#ff6600;"><strong> नि: शुल्क दवा और जांच</strong></span></td>
</tr>
<tr>
<td style="width:54.3333px;"> </td>
<td style="width:545.667px;">4 हजार निशुल्क दवा वितरण केंद्र: 8.58 करोड़ मरीजों को दी मुफ्त दवा, 760 करोड़ रुपए खर्च।</td>
</tr>
<tr>
<td style="width:54.3333px;"> </td>
<td style="width:545.667px;">3 हजार से ज्यादा अस्पताल: 4.4 करोड़ जांचे हुई, 100 से ज्यादा मुफ्त जांच,  150.34 करोड़ खर्च।</td>
</tr>
<tr>
<td style="width:54.3333px;"> </td>
<td style="width:545.667px;">अब मंहगी एमआरआई, सीटी स्कैन,  डायलिसिस सहित सभी फ्री होंगे।</td>
</tr>
<tr>
<td style="width:54.3333px;"> </td>
<td style="width:545.667px;">डॉक्टर की जरूरत जल्द पूरी होने की आस, अभी 4200 डॉक्टर बन रहे है, जल्द 7000 तक मिलने लगेंगे।</td>
</tr>
<tr>
<td style="width:54.3333px;"> </td>
<td style="width:545.667px;">3 साल पहले 8 मेडिकल कॉलेज:  जयपुर, जोधपुर, बीकानेर, उदयपुर, अजमेर, कोटा, झालावाड़ और जयपुर में आरयूएचएस थे, कुल सीटें 1900।</td>
</tr>
<tr>
<td style="width:54.3333px;"> </td>
<td style="width:545.667px;">अब नए 7 नए मेडिकल कॉलेज और शुरू: भरतपुर, भीलवाड़ा, चूरू, डूंगरपुर, पाली, बाड़मेर, सीकर कुल सीटें 980।</td>
</tr>
<tr>
<td style="width:54.3333px;"> </td>
<td style="width:545.667px;">
<p style="text-align:left;">नए प्रस्तावित कॉलेज: 15 को मंजूरी, 2023 तक शुरू होंगे।</p>
<p style="text-align:left;">तीन जिलों में जंहा और कॉलेज की कवायद: राजसमंद, जालौर, प्रतापगढ़।</p>
</td>
</tr>
</tbody>
</table>
<p style="text-align:left;"> </p>
<p style="text-align:left;"> </p>
<p> </p>
<p style="text-align:left;"><strong> </strong></p>
<p style="text-align:left;"><strong> </strong></p>
<p style="text-align:left;"><strong> </strong></p>
<p style="text-align:left;"><strong> </strong></p>
<p style="text-align:left;"><strong> </strong></p>
<p style="text-align:left;"><strong> </strong></p>
<p style="text-align:left;"><strong> </strong></p>
<p> </p>
<p style="text-align:left;"> </p>
<p style="text-align:left;"><strong> </strong>     <br />    <br />   <br />    <br />   <br />    <br />    <br /><br /></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>स्वास्थ्य</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 07 Apr 2022 10:33:40 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Administrator]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>ऐतिहासिक फैसला</title>
                                    <description><![CDATA[हिजाब न तो इस्लाम धर्म का अनिवार्य अंग है और न ही इसके न पहनने से किसी प्रकार के धार्मिक अधिकार का हनन होता है: HC]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/opinion/sectarian--historic-verdict--karnataka-high-court--while-dismissing-five-petitions-seeking-permission-to-wear-the-hijab-in-the-classroom--has-ruled-that-the-hijab-is-neither-a-mandatory-part-of-islam-nor-does-its-non-wearing-violate-any-religious-right/article-6303"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-03/hijab.jpg" alt=""></a><br /><p>कर्नाटक हाई कोर्ट ने कक्षा में हिजाब पहनने की अनुमति देने की अपील करने वाली पांच याचिकाओं को खारिज करते हुए फैसला दिया है कि हिजाब न तो इस्लाम धर्म का अनिवार्य अंग है और न ही इसके न पहनने से किसी प्रकार के धार्मिक अधिकार का हनन होता है। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि हिजाब न पहनने से निजता व शिक्षा के मूल अधिकार का हनन नहीं होता है। तीन न्यायाधीशों की पीठ ने कहा कि स्कूल वर्दी का नियम एक उचित पाबंदी है और संवैधानिक रूप से मान्य है। वर्दी के मामले में छात्राओं की आपत्ति उचित नहीं है। वास्तव में यह ऐसा रूढिवादीता फैसला है, जिसका मुस्लिम समाज के प्रगतिशील तबके को स्वागत करना चाहिए। यह एक ऐसा फैसला भी है, जिसके बाद हिजाब विवाद यहीं समाप्त हो जाना चाहिए, लेकिन लगता है ऐसा नहीं होगा क्योंकि याचिका दायर करने वाली छात्राओं के वकील ने कहा है कि मामले को सुप्रीम कोर्ट लेकर जाएंगे। दरअसल, कर्नाटक स्थित उड्डी के दो सरकारी प्री-यूनिवर्सिटी कॉलेजों की कुछ छात्राओं ने कॉलेज प्रबंधन द्वारा कक्षाओं में हिजाब पहनने पर रोक लगाने के खिलाफ अदालत में याचिका दायर की थी। इससे पहले फरवरी के मध्य में हिजाब विवाद को लेकर कर्नाटक में फिर पूरे देश में विवाद खड़ा हो गया। जब इस मामले का विरोध हुआ तो कुछ छात्र भगवा शॉल डालकर प्रदर्शन करने लगे। इस दौरान पांच राज्यों में हो रहे विधानसभा चुनावों में भी इस मुद्दे को लेकर राजनीति गर्म रही। तब इस विवाद के मूल में राजनीतिक निहितार्थ की बात कही गई। इसे लेकर मामले की सुनवाई कर रही पीठ ने भी कहा कि अकादमिक सत्र के बीच में अचानक यह मुद्दा क्यों उठा? लगता है कि इसके पीछे किसी का हाथ है। निस्संदेह, अशांति पैदा करने व सद्भाव को प्रभावित करने के लिए ऐसा किया गया। इस विवाद को लेकर आंदोलन में जगह-जगह पथराव, तोड़फोड़ की घटनाएं शुरू हो गईं। स्कूल-कॉलेज बंद तक करने की नौबत आ गई। धार्मिक स्वतंत्रता व निजता के अधिकार को लेकर बहस शुरू हो गई। लेकिन अंतत: अदालत ने इस सबसे इनकार कर दिया। लेकिन हिजाब की रस्म को जिस तरह मजहबी-चोला पहनाकर इस्लाम के मुल्ला व फतवा जारी करने वालों ने मुस्लिम महिलाओं के साथ न्याय नहीं किया। जबकि आज महिलाओं को सशक्त बनाने की जरूरत है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>ओपिनियन</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 17 Mar 2022 13:03:58 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Administrator]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>आवारा कुत्तों को खिलाने के अधिकार पर हाई कोर्ट के फैसले पर 'सुप्रीम' रोक</title>
                                    <description><![CDATA[उच्चतम न्यायालय ने दिल्ली उच्च न्यायालय उस आदेश के अमल पर रोक लगा दिया है जिसमें सामुदायिक कुत्तों को खाने का अधिकार है और नागरिकों को उन्हें खिलाने का अधिकार है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/supreme-stay-on-high-court-s-decision-on-right-to-feed-stray-dogs/article-5555"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-03/supreme-court.jpg" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। उच्चतम न्यायालय ने दिल्ली उच्च न्यायालय उस आदेश के अमल पर रोक लगा दिया है जिसमें सामुदायिक कुत्तों को खाने का अधिकार है और नागरिकों को उन्हें खिलाने का अधिकार है। न्यायमूर्ति विनीत सरन और न्यायमूर्ति अनिरुद्ध बोस की शीर्ष अदालत की पीठ ने शुक्रवार को स्वयंसेवी संस्था'ह्यूमन फाउंडेशन फॉर पीपल एंड एनिमल' की विशेष अनुमति याचिका पर दिल्ली सरकार और एनिमल वेलफेयर बोर्ड ऑफ इंडिया तथा अन्य को को नोटिस जारी जवाब तलब किया है।<br /><br />दिल्ली उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति जे आर मिधा की एकल पीठ ने पिछले वर्ष जून के अपने फैसले में कहा था कि आवारा कुत्ते एक समुदाय के जीव हैं। उन्हें भोजन का अधिकार है। आम लोगों को उन्हें एक तय स्थान पर खिलाने का अधिकार है। आवारा कुत्तों को खाने का स्थान नगर निगम या रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशन के विचार विमर्श के आधार पर  तय किए जाएंगे।<br /><br />'ह्यूमन फाउंडेशन फॉर पीपल एंड एनिमल्स' ने उच्च न्यायालय के ऐसे फैसले को उच्चतम न्यायालय में चुनौती दी है। याचिकाकर्ता में कहा गया है कि दिल्ली उच्च न्यायालय का यह फैसला उच्चतम न्यायालय के 2015 के एक फैसले  के उलट है। फैसले के खिलाफ अपील दायरकर्ता के वकील निर्निमेश दुबे ने दलील देते हुए कहा कि दिल्ली उच्च न्यायालय के फैसले के कारण लोगों की जान के लिए खतरनाक साबित हो रहे आवारा कुत्तों को भी नहीं पकड़ा जा सकता। याचिका में कहा गया है कि उच्च न्यायालय के फैसले से आवारा कुत्तों की संख्या में तेज वृद्धि होगी जिससे लोगों की जान को खतरा बढ़ गया है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 05 Mar 2022 19:03:31 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Administrator]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>पति की खानदानी प्रॉपर्टी में पत्नी को कितना हक</title>
                                    <description><![CDATA[ तलाक का समय किसी भी कपल के लिए कई तरह के टेंशन वाला होता है,पति-पत्नी न केवल एक दूसरे से कानूनी लड़ाई लड़ रहे होते हैं, बल्कि मानसिक और भावनात्मक तौर पर भी उनके लिए यह मुश्किल समय होता है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/opinion/how-much-right-does-the-wife-have-in-her-husband-s-family-property/article-5335"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-03/property.jpg" alt=""></a><br /><p><span style="background-color:#ffff99;color:#000080;"><strong>पति की खानदानी प्रॉपर्टी में पत्नी को कितना हक</strong></span><br />कानूनी रूप से महिलाओं को अपने पति की प्रॉपर्टी पर कई तरह के अधिकार मिले हैं, लेकिन इसके लिए कई बातों को ध्यान में रखना होता है। एक महिला बेटी या बहू होने के अलावा एक पत्नी भी होती है, सामाजिक तौर पर आप महिलाओं को मिलने वाले अधिकार के लिए अपने विचार रख सकते हैं, उसपर बहस कर सकते हैं, लेकिन कानूनी तौर पर महिलाओं को कई तरह के अधिकार मिले हैं, बहुत कम लोगों को इन अधिकारों के बारे में पता होता है।<br /><br /><span style="background-color:#ffff99;color:#000080;"><strong>प्रॉपर्टी से जुड़े अधिकार</strong></span><br />कानूनी रूप से केवली पहली पत्नी ही नहीं बल्कि दूसरी पत्नी को भी कई तरह के अधिकार मिलते हैं, हालांकि,इसके लिए कुछ शर्तों को भी पूरा करना होता है। तलाक का समय किसी भी कपल के लिए कई तरह के टेंशन वाला होता है,पति-पत्नी न केवल एक दूसरे से कानूनी लड़ाई लड़ रहे होते हैं, बल्कि मानसिक और भावनात्मक तौर पर भी उनके लिए यह मुश्किल समय होता है।</p>
<p><br /><span style="background-color:#ffff99;color:#000080;"><strong> पति के नाम प्रॉपर्टी  </strong></span><br />अगर पति-पत्नी के आपसी सहमति से तलाक होता है और प्रॉपर्टी पर पति का नाम है तो पत्नी को हिस्सेदारी नहीं मिल सकती है, मान लीजिए पत्नी उस घर में रह रही है, जिसे पति ने खरीदा है और यह उनके नाम पर है तो तलाक के बाद पत्नी इस प्रॉपर्टी पर दावा नहीं कर सकती है, भारतीय कानून के तहत प्रॉपर्टी पर उन्हीं का अधिकार होता है, जिसके नाम पर प्रॉपर्टी रजिस्टर्ड है, इस तरह के मामले में पत्नी अपने पूर्व पति से मेंटेनेंस की मांग कर सकती है ,लेकिन प्रॉपर्टी में कानूनी रूप से दावा नहीं कर सकती है।</p>
<p><span style="background-color:#ffff99;color:#000080;"><strong>मालिकाना हक</strong></span>  <br />आज के दौर में अधिकतर कपल्स दोनों के नाम पर प्रॉपर्टी रजिस्टर कराते हैं,इस तरह की प्रॉपर्टी पर मालिकाना हक पति-पत्नी दोनों के पास होता है, तलाक के बाद दोनों को अपनी-अपनी हिस्सेदारी पर कानूनी दावा करने का अधिकार है, हालांकि इस दावे के लिए जरूरी है कि पत्नी यह दिखाए कि उन्होंने प्रॉपर्टी की खरीदारी में योगदान दिया है, अगर पत्नी ने प्रॉपर्टी खरीदने में योगदान नहीं दिया है लेकिन इसके बाद भी प्रॉपर्टी उनके नाम भी रजिस्टर्ड है तो संभव है कि वो इसपर दावा न कर सकें। ज्वाइंटली मालिकाना वाली प्रॉपर्टी में पत्नी उतनी हिस्सेदारी की ही मांग कर सकती है, जितने के लिए उन्होंने खरीदारी में योगदान दिया है,ऐसे में जरूरी है कि महिलाएं भी इस तरह की प्रॉपर्टी को लेकर अपना डॉक्युमेंट्स दुरुस्त करें,अगर कपल्स चाहें तो शांतिपूर्वक अपने स्तर पर इसे लेकर समझौता कर सकते हैं,जो कोई भी प्रॉपर्टी अपने पास रखना चाहता है वो दूसरे व्यक्ति की हिस्सेदारी को खरीद सकता है।</p>
<p><br /><span style="background-color:#ffff99;color:#000080;"><strong>अगर कपल्स अलग हो  </strong></span><br />यह ध्यान देना है कि जब तक कोर्ट ने पति-पत्नी के बीच तलाक पर मुहर नहीं लगाया है, तब तक दोनों के बीच कानूनी रिश्ता कायम रहता है कोर्ट का फैसला आने तक पति की प्रॉपर्टी पर पत्नी का ही हक होता है,ऐसी भी स्थिति हो सकती है कि इस दौरान पति किसी और महिला के साथ रहने लग रहा या उनसे शादी कर ले, इस स्थिति में महिला के पास पहली पत्नी और उनके बच्चों को इस प्रॉपर्टी पर पूरा हक होगा।</p>
<p><br /><span style="background-color:#ffff99;color:#000080;"><strong>पति की प्रॉपर्टी पर</strong> </span> <br />पति की प्रॉपर्टी पर महिला के पास बराबर का हक होता है ,अगर पति ने अपने वसीयत में इस प्रॉपर्टी पर से पत्नी का नाम हटा दिया है तो पत्नी का कोई हक नहीं बनेगा, इसके सिवाय पति की खानदानी प्रॉपर्टी पर पत्नी का हक होगा, पत्नी के पास अधिकार होगा कि वो अपने ससुराल में रहे।</p>
<p><br /> <span style="background-color:#ffff99;color:#000080;"><strong>दूसरी पत्नी का अधिकार</strong></span> <br />अगर कोई व्यक्ति अपनी पहली पत्नी से कानूनी रूप से अलग हुए बिना ही दूसरी शादी कर लेता है तो दूसरी पत्नी और उससे होने वाले बच्चे के अधिकार सीमित हो जाते हैं,कानूनी रूप से तलाक पूरा होने तक पहली पत्नी का ही अधिकार होता है, हिन्दू विवाह अधिनियम 1955 के तहत कोई व्यक्ति एक समय में एक से अधिक विवाह नहीं कर सकता है।</p>
<p><br /><span style="background-color:#ffff99;color:#000080;"><strong>पहली पत्नी की मृत्यु</strong></span></p>
<p>अगर पहली पत्नी की मृत्यु हो जाती है या तलाक के बाद कोई व्यक्ति दूसरी शादी कर लेता है तो दूसरी पत्नी को सभी तरह के अधिकार मिलते हैं, इसमें पति के प्रॉपर्टी पर अधिकार भी शामिल है, ऐसी स्थिति में दूसरी पत्नी को अपने पति की खानदानी प्रॉपर्टी पर भी अधिकार होगा,इस प्रकार किसी व्यक्ति के दूसरी पत्नी का कानूनी अधिकार इस बात पर निर्भर करता है कि उनकी शादी कानूनी रूप से वैध है या नहीं। इस प्रकार भारत में कानूनी रूप से पति की प्रॉपर्टी पर पत्नी का अधिकार कई तरह की बातों पर निर्भर करता है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>ओपिनियन</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 02 Mar 2022 14:46:10 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Administrator]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>स्कूल-कॉलेजों के विवादास्पद मुद्दों में राजनीतिक हस्तक्षेप कितना सही?</title>
                                    <description><![CDATA[ किसी भी शिक्षण संस्थान में जब धार्मिक और राजनीतिक मुद्दों की घुसपैठ होने लगती है तो वह अपने उद्देश्य शिक्षा से भटकने लगते हैं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/opinion/how-right-is-the-political-interference-in-the-controversial-issues-of-schools-and-colleges/article-5168"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-02/school_college_politics.gif" alt=""></a><br /><p>पिछले कुछ वर्षों में देश के शिक्षण संस्थान नकारात्मक खबरों की वजह से चर्चा का विषय बन रहे हैं। किसी भी शिक्षण संस्थान में जब धार्मिक और राजनीतिक मुद्दों की घुसपैठ होने लगती है तो वह अपने उद्देश्य शिक्षा से भटकने लगते हैं। देश के शिक्षण संस्थानों में भविष्य तैयार होता है। यहां विवादों की कोई जगह नहीं होनी चाहिए। जिस प्रकार का वातावरण विद्यार्थियों को शिक्षण संस्थानों में मिलेगा उनकी विचाराधारा और नजरिया वैसा ही बनता चला जाएगा। किसी भी स्कूल-कॉलेज-विश्वविद्यालय के नियम और अनुशासन होते हैं। यदि वहां कोई भी इश्यू उठता है तो वह उनका आंतरिक मामला होता है और उसे अकेडमिक इश्यू की तरह देखा जाना चाहिए ना कि राजनीतिक दृष्टि से। शिक्षण संस्थानों की नींव अनुशासन होती है। यहां विद्यार्थियों को विकसित सोच वाला व्यक्तित्व प्रदान किया जाता है। विद्यार्थी शिक्षा प्राप्ति के उद्देश्य से यहां प्रवेश करते हैं। इन संस्थानों में विद्यार्थी निरंतर सीखने की अवस्था से गुजर रहे होते हैं। उनका लक्ष्य शिक्षा प्राप्त करना होना चाहिए। जब भी किसी स्कूल-कॉलेज या विश्वविद्यालय में संवेदनशील मुद्दें उठते हैं तो वहां के शिक्षक अपने विद्यार्थियों की समस्या का समाधान करने में सक्षम होते हैं। शिक्षक, अपने विद्यार्थी को बेहतर समझते हैं और उनकी समस्याओं को आसानी से समझकर सुलझा सकते हैं, बिना किसी बाहरी हस्तक्षेप के। वैसे भी गुरु यानी शिक्षक को भगवान से ऊंचा दर्जा दिया गया है। वह विद्यार्थियों का मार्ग प्रशस्त करते हैं। उन्हें अंधेरे से उजाले की ओर शिक्षा के माध्यम से लेकर जाते हैं। तभी कहा गया है-‘गुरु गोविंद दोऊ खडेÞ काके लागूं पाए, बलिहारी गुरु आपणे गोविंद दियो बताय।’ इसलिए अकेडमिक इश्यू को राजनीतिक रंग देने के बजाय शिक्षण संस्थानों व उनके शिक्षकों को यह पावर दी जानी चाहिए कि किसी भी तरह का संवेदनशील मुद्दा यदि उनके संस्थान में उठता है तो वह उसे अपने स्तर पर सुलझाए ना कि उसमें राजनीतिक दखलंदाजी हो। इसके लिए एक कमेटी गठित की जा सकती है जिसमें उस शिक्षण संस्थान के ही सदस्य हों। वह चर्चा करके स्थानीय स्तर पर ही समाधान निकालने का प्रयास करें। जिससे विद्यार्थियों की पढ़ाई भी प्रभावित ना हो। यह उनका आंतरिक मामला ही रहे, राजनीतिक मुद्दा नहीं बनने पाए। यदि फिर भी नहीं सुलझा पाते हैं तो कोर्ट फैसला करें। क्योंकि जब संवेदनशील मुद्दे शिक्षण संस्थानों में उठते हैं वह राजनीतिक गलियारों या देश में सुर्खियां बनते हैं। तब भी कोर्ट की शरण ली जाती है। स्कूल स्तर के लिए शिक्षा बोर्ड, कॉलेज के लिए विश्वविद्यालय और विश्वविद्यालय के लिए यूजीसी को फैसला करना चाहिए। यदि कमेटी स्कूल, कॉलेज व विश्वविद्यालय स्तर पर बनेगी तो इस तरह के मुद्दे परिसर के अंदर ही रहेंगे, कैम्पस से बाहर नहीं आएंगे। इससे ना तो राजनीतिक हस्तक्षेप होगा और ना ही देश में तनाव का माहौल बन सकेगा।</p>
<p><span style="background-color:#ffff99;color:#ff0000;"><strong>नरेन्द्र चौधरी</strong></span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>ओपिनियन</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 28 Feb 2022 11:48:54 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Administrator]]></dc:creator>
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                <title>बच्चों के लिए कौनसा मास्क है सही</title>
                                    <description><![CDATA[कोरोना से पहले वाली लाइफ में वापस लौटने के लिए सुरक्षा का ध्यान रखना जरूरी है ऐसे में छोटों की सुरक्षा को सुनिश्चित करना भी आपका काम है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/which-mask-is-right-for-children/article-4523"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-02/mask_new.jpg" alt=""></a><br /><p>कोरोना संक्रमितों की संख्या में गिरावट के बाद से स्कूलों के खुलने लगे हैं। कोरोना से पहले वाली लाइफ में वापस लौटने के लिए सुरक्षा का ध्यान रखना जरूरी है ऐसे में छोटों की सुरक्षा को सुनिश्चित करना भी आपका काम है। विशेषज्ञों का कहना है कि एक बार जब बच्चे फिजिकली स्कूलों में जाना शुरू करते हैं तो बच्चों के मास्क को अपग्रेड करना और भी ज्यादा जरूरी  हो जाता है क्योंकि वे अचानक जर्म्स और कई तरह के पैथोजन्स और माइक्रोब्स के संपर्क में आ जाते हैं। स्कूलों  फिर से शुरू हो गए हैं तो ऐसे में बच्चों को सोशल डिस्टेंसिंग जैसे नियमों का पालन करने के बारे में भी बताया जाना चाहिए। बच्चे पिछले दो सालों से घरों के अंदर वातावरण में बंद थे, जिससे उनके कोरोना वायरस के संपर्क में आने की संभावना काफी कम हो गई है। लेकिन जो हमने नहीं सोचा होगा वह यह है कि इस आइसोलेशन ने उनकी नेचुरल इम्यूनिटी को कम कर दिया है और एंटीबॉडी और उन्हें रोगाणुओं के संपर्क में कमी के कारण अन्य बीमारियों के लिए जयादा संवेदनशील बना दिया अब स्कूल फिर से खुलने के साथ, हमारे बच्चे क्लास में वापस जाएंगे, जो कीटाणुओं के लिए प्रजनन स्थल हैं,खासकर वेंटिलेशन की कमी के कारण। </p>
<p><strong><br />क्या है एक्सपर्ट की राय</strong><br /> मास्क बच्चों के लिए सबसे अच्छे हैं क्योंकि ये कोविड के साथ-साथ अन्य वायरस के खिलाफ भी बहुत इफेक्टिव हैं।  एक अध्ययन द्वारा इस दावे की पुष्टि की गई है, जिसमें कहा गया है कि अच्छी तरह से फिट होने वाले मास्क कोरोना से संक्रमण के जोखिम को 0.1 प्रतिशत तक कम कर देते हैं। बच्चों के लिए मास्क जो अच्छी तरह से फिट, सांस लेने योग्य, दोबारा इस्तेमाल किए और धोए जा सकते हैं।</p>
<p><br /><strong>कैसे चुनें सही मास्क </strong><br />एन95 मास्क जो हाई वायरल फिल्ट्रेशन  और पार्टिकुलेट फिल्ट्रेशन देते हैं, मास्क पहनने वालों में कॉन्फिडेंस पैदा करते हैं। इसी के साथ आरामदायक मास्क यह सुनिश्चित करता है कि बच्चे सांस ले सकें, मास्क खरीदने से पहले हमेशा रेलिवेंट टेस्ट रिपोर्ट और सर्टिफिकेशन मांगे ताकि आप अपने बच्चों को कॉन्फिडेंस और मन की शांति के साथ स्कूल भेज सकें।</p>
<p><br /><strong>सर्जिकल या कपड़े का  </strong><br />एक्सपर्ट की मानें तो 3.प्लाई और सर्जिकल मास्क के मामले में इन मास्क के अंदर रखा पोलिमर को फिल्टर के रूप में काम करता है, जो माइक्रोब्स को मास्क में एंटर करने या बाहर निकलने से रोकता है। हालांकि 3.प्लाई और सर्जिकल मास्क के किनारे आपकी नाक या मुंह के चारों ओर सील नहीं बनाते हैं, जिससे सांस लेने पर वायरस और एरोसोल आपके एयर पैसेज में एंटर कर जाते हैं। इसके अलावा ये मास्क किसी भी तरह की सुरक्षा देने के लिए प्रमाणित नहीं हैं।</p>
<p><br /><strong>कपड़े के मास्क में </strong><br />ढीले बने हुए कपड़े के मास्क कम से कम सुरक्षा प्रदान करते हैं क्योंकि वे श्वास पर कोई प्रोटेक्शन नहीं करते हैं। एक अध्ययन में पाया गया कि कपड़े के मास्क की फिल्ट्रेशन एफिशियंसी कम होती है।</p>
<p><br /><strong>8 घंटे में खत्म क्षमता </strong><br />एन95 मेडिकल या डिस्पोजेबल मास्क के मामले में इन मास्क पर इलेक्ट्रोस्टेटिक चार्ज 8 घंटे के अंदर खत्म हो जाता है, जिसके बाद मास्क अपनी फिल्ट्रेशन कैपिसिटी खो देते हैं। यह मास्क केवल स्वास्थ्य और फ्रंटलाइन वर्कर्स के लिए है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 16 Feb 2022 12:23:16 +0530</pubDate>
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                <title>सरकार को उत्सव मनाने का अधिकार नहीं अपने किए वादे पूरे नहीं किए: पूनिया</title>
                                    <description><![CDATA[गहलोत सरकार के 3साल पूरे होने पर बीजेपी प्रदेशाध्यक्ष सतीश पूनिया ने कसा तंज]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/61bc5cad7b896/article-3298"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2021-12/gehlot_puniya.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। सरकार के 3 साल पूरे होने पर भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष सतीश पूनिया ने मीडिया से बातचीत में कहा है कि राजस्थान की सरकार को 3 साल पूरे होने पर उत्सव मनाने का कोई अधिकार नहीं है । उन्होंने कहा कि सरकार ने 3 साल में अपने किए वादे की पूरे नहीं किए कांग्रेस के चुनावी घोषणा पत्र में और राहुल गांधी ने 10 दिन में किसानों की कर्ज माफी की घोषणा की थी। लेकिन आज तक किसानों को इसका इंतजार है। वहीं प्रदेश में सरकारी भर्तियां अटकी हुई है, युवाओं को रोजगार देने का वादा भी पूरी तरह से विफल रहा है। राजस्थान बेरोजगारी हिसाब से देश में शीर्ष पर है। प्रदेश में बेरोजगारों को भत्ता देने का वादा भी झूठा ही साबित हुआ। प्रदेश में 30लाख बेरोजगार हैं। जिनमें से केवल डेढ़ लाख लोगों को बेरोजगारी भत्ता दिया गया है। प्रदेश में कानून व्यवस्था की भी दयनीय स्थिति है। राजस्थान अपराधों की राजधानी बन गया है। सरकार 3 साल तक आपसी अंतर कलह में फंसी रही और इसके चलते जनता के  गवर्नेंस के काम नही हुए। सरकार 40 दिन तक बाड़े बंदी में रही।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 17 Dec 2021 16:14:06 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Administrator]]></dc:creator>
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                <title>कार्यकर्ताओं ने रैली सफल बनाई, उनका नियुक्ति का हक और मान सम्मान जल्द मिलेगा:डोटासरा</title>
                                    <description><![CDATA[संगठन के जरिए कार्यकर्ताओं के काम होंगे:डोटासरा]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/%E0%A4%95%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%AF%E0%A4%95%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%A4%E0%A4%BE%E0%A4%93%E0%A4%82-%E0%A4%A8%E0%A5%87-%E0%A4%B0%E0%A5%88%E0%A4%B2%E0%A5%80-%E0%A4%B8%E0%A4%AB%E0%A4%B2-%E0%A4%AC%E0%A4%A8%E0%A4%BE%E0%A4%88--%E0%A4%89%E0%A4%A8%E0%A4%95%E0%A4%BE-%E0%A4%A8%E0%A4%BF%E0%A4%AF%E0%A5%81%E0%A4%95%E0%A5%8D%E0%A4%A4%E0%A4%BF-%E0%A4%95%E0%A4%BE-%E0%A4%B9%E0%A4%95-%E0%A4%94%E0%A4%B0-%E0%A4%AE%E0%A4%BE%E0%A4%A8-%E0%A4%B8%E0%A4%AE%E0%A5%8D%E0%A4%AE%E0%A4%BE%E0%A4%A8-%E0%A4%9C%E0%A4%B2%E0%A5%8D%E0%A4%A6-%E0%A4%AE%E0%A4%BF%E0%A4%B2%E0%A5%87%E0%A4%97%E0%A4%BE-%E0%A4%A1%E0%A5%8B%E0%A4%9F%E0%A4%BE%E0%A4%B8%E0%A4%B0%E0%A4%BE/article-3288"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2021-12/dotasra1.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। कांग्रेस संगठन विस्तार और राजनीतिक नियुक्तियों के सवाल पर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने कहा कि कांग्रेस के कार्यकर्ताओं ने राष्ट्रव्यापी रैली को महारैली बनाकर सफल आयोजन कराया इसलिए कांग्रेस कार्यकर्ताओं का नियुक्तियां पाने का हक बनता है कार्यकर्ताओं को जल्द ही नियुक्तियां देकर उनका मान सम्मान रखा जाएगा।</p>
<p><br /> पीसीसी में मीडिया से बात करते हुए डोटासरा ने कहा कि राजनीतिक नियुक्तियां जल्द होंगी। राष्ट्रव्यापी रैली महासफल हुई है। अब कार्यकर्ताओं का हक बनता है, जो भी उनका मान सम्मान है उनका व्यक्तिगत काम हो उस पर सरकार प्राथमिकता के साथ काम करेगी। डोटासरा ने कहा कि संगठन का विस्तार भी जल्द होगा। ब्लॉक अध्यक्ष, जिला अध्यक्ष और नगर निगम और नगर परिषद में नेता प्रतिपक्ष बनाने का काम भी जल्द शुरू होगा। विधानसभा चुनाव को देखते हुए वोटिंग लिस्ट लिस्ट का काम भी जल्द शुरू किया जाएगा। कार्यकर्ताओं को वैचारिक रूप से प्रशिक्षण देने के लिए तीन दिवसीय प्रशिक्षण शिविर का भी आयोजन होगा। सत्ता और संगठन मिलकर कार्यकर्ताओं के मान सम्मान के लिए काम करेगा।</p>
<p><br /> <strong>संगठन के जरिए कार्यकर्ताओं के काम होंगे:</strong><br /> सरकार के 3 साल पूरे होने पर डोटासरा ने कहा कि जनता ने जिस उम्मीद और आशा के साथ कांग्रेस की सरकार को चुना था। सरकार उस पर खरी उतरी है। तीन साल में उल्लेखनीय काम हुए हैं। पीसीसी में फिर से मंत्री दरबार शुरू हुआ, जिसमें कांग्रेस कार्यकर्ताओं के साथ आमजन की समस्याओं का भी निस्तारण किया जाएगा। मंत्री दरबार में आने वाली समस्याओं की प्रभावी मॉनिटरिंग की जाएगी। मंत्री जब अगली बार जन सुनवाई के लिए आएगा तो पूर्व में प्राप्त हुई शिकायतों के निस्तारण की रिपोर्ट भी पेश करनी होगी।</p>
<p><br /> डोटासरा ने भाजपा पर भी हमला बोलते हुए कहा कि भाजपा के नेताओं में अनुशासन की कमीहर।एक दूसरे को नीचा दिखाने में व्यस्त हैं। भाजपा के नेता मुख्यमंत्री बनने के लिए एक दूसरे को नीचा दिखाने का काम कर रहे हैं। भाजपा विपक्ष की भूमिका निभाने में पूरी तरीके से नाकाम रही है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 17 Dec 2021 12:49:06 +0530</pubDate>
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                <title>यूपीए के समय का सूचना का अधिकार अधिनियम सबसे महत्वपूर्ण कानूनों में से एक है : CM गहलोत</title>
                                    <description><![CDATA[सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 आज ही के दिन लागू हुआ।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/%E0%A4%AF%E0%A5%82%E0%A4%AA%E0%A5%80%E0%A4%8F-%E0%A4%95%E0%A5%87-%E0%A4%B8%E0%A4%AE%E0%A4%AF-%E0%A4%95%E0%A4%BE-%E0%A4%B8%E0%A5%82%E0%A4%9A%E0%A4%A8%E0%A4%BE-%E0%A4%95%E0%A4%BE-%E0%A4%85%E0%A4%A7%E0%A4%BF%E0%A4%95%E0%A4%BE%E0%A4%B0-%E0%A4%85%E0%A4%A7%E0%A4%BF%E0%A4%A8%E0%A4%BF%E0%A4%AF%E0%A4%AE-%E0%A4%B8%E0%A4%AC%E0%A4%B8%E0%A5%87-%E0%A4%AE%E0%A4%B9%E0%A4%A4%E0%A5%8D%E0%A4%B5%E0%A4%AA%E0%A5%82%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%A3-%E0%A4%95%E0%A4%BE%E0%A4%A8%E0%A5%82%E0%A4%A8%E0%A5%8B%E0%A4%82-%E0%A4%AE%E0%A5%87%E0%A4%82-%E0%A4%B8%E0%A5%87-%E0%A4%8F%E0%A4%95-%E0%A4%B9%E0%A5%88---cm-%E0%A4%97%E0%A4%B9%E0%A4%B2%E0%A5%8B%E0%A4%A4/article-1605"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2021-10/ashok_gehlot_630x4002.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने कहा कि सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 आज ही के दिन लागू हुआ, जो ऐतिहासिक दिन है। अब हमारा फोकस इसे मजबूत करने पर होना चाहिए। गहलोत ने सोशल मीडिया के जरिए कहा कि इस दिन ऐतिहासिक सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 लागू हुआ, हमारा ध्यान अधिनियम को मजबूत करने पर होना चाहिए। यह यूपीए के समय का सबसे महत्वपूर्ण कानूनों में से एक है, जो नागरिकों को पहले की तरह सशक्त बनाता है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 12 Oct 2021 14:33:43 +0530</pubDate>
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