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                <title>कोटा स्टोन स्लरी नाले में बहा रहे लोग, तालाब हो रहा है बर्बाद</title>
                                    <description><![CDATA[प्रशासन को इस मामले में तुरंत कार्यवाही करनी चाहिए और इसको बंद करवाना चाहिए।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jhalawar/people-are-dumping-kota-stone-slurry-in-the-drain--the-pond-is-getting-ruined/article-88389"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-08/pze-(1)8.png" alt=""></a><br /><p>झालावाड़। झालावाड़ शहर के पांच तालाबों में से एक नया तालाब में इन दिनों प्रतिबंधित कोटा स्टोन स्लरी जमकर डाली जा रही है, जिससे तालाब लगातार बर्बाद होता जा रहा है। झालावाड़ के मिनी सचिवालय के ठीक पीछे कोटा स्टोन स्लरी के अवैध डंपिंग यार्ड से बड़ी मात्रा में स्लरी के बहकर नए तालाब में पहुंचने का मामला सामने आया है। स्लरी के तालाब में पहुंचने से तालाब का प्रदूषित होना तो निश्चित है, किंतु बड़े मजे की बात यह है कि मिनी सचिवालय के पीछे हो रहे इस मामले को लेकर अभी तक प्रशासनिक तौर पर कोई सजगता नहीं दिखाई गई है, जबकि कोटा स्टोन स्लरी को यहां वहां फेंके जाना नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल द्वारा प्रतिबंधित किया गया है।</p>
<p><strong>यह है मामला</strong><br />झालावाड़ के कोटा रोड को काटता हुआ एक नाला गुजरता है जो रायपुर क्षेत्र पहाड़ी के पानी को झालावाड़ के नया तालाब में पहुंचाता है। यही नए तालाब का एक मुख्य नाला है, जिससे तालाब में पानी की बड़ी आवक होती है। यह नाला झालावाड़ के मिनी सचिवालय के पीछे स्थिति सबसे पुराने औद्योगिक क्षेत्र के पिछवाड़े से होकर गुजरता है, यहां पर अज्ञात लोगों द्वारा कोटा स्टोन स्लरी डालने के लिए अपनी इच्छा से अवैध डम्पिंगर्ड यार्ड बना दिया गया है, जिसमें बड़ी मात्रा में गीली कोटा स्टोन स्लरी फेंकी जा रही है, वहीं इसके अतिरिक्त इस डंपिंग यार्ड के विपरीत दिशा में सड़क के दूसरी तरफ भी अवैध रूप से कोटा स्टोन की स्लरी फेंकी जा रही है। नया तालाब तक पानी ले जाने वाला नाला इन दोनों अवैध डंपिंग यार्ड से गुजरता है तथा यहां डाली जा रही स्लरी  लगातार बहकर इस नाले में जाती रहती है और जब यहां बरसाती पानी की बड़ी मात्रा में आवक होती है तो उसके तेज बहाव के साथ यह स्लरी बहना शुरू करती है, जो बड़ी मात्रा में नए तालाब में पहुंच रही है। एक अनुमान के मुताबिक लगभग 200 टैंकर से अधिक स्लरी इन दोनों जगहों पर अवैध रूप से डाली जा रही है जो बहकर सीधे नए तालाब में पहुंच रही है और उस को प्रदूषित कर रही है।</p>
<p><strong>यह हैं कानून कायदे</strong><br />राष्ट्रीय हरित आयोग यानी नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल ने कोटा स्टोन की स्लरी को बेहद हानिकारक और घातक माना है क्योंकि यह जमीन पर एक वाटर प्रूफिंग कंपाउंड की तरह काम करती है तथा जहां यह जमीन पर फैलती है। वहां जमीन खराब हो जाती है। इसके अतिरिक्त यह सूखी स्लरी हवा में उड़कर श्वास रोगों का कारण बनती है, ऐसे में हरित आयोग द्वारा इसको यहां वहां फेंके जाने पर कड़ाई से रोक लगा दी गई है तथा इसको इधर-उधर फेंके जाने पर कड़े जुर्माने और सजा का प्रावधान भी है। इसी के चलते प्रत्येक कोटा स्टोन औद्योगिक क्षेत्र को जिला प्रशासन द्वारा इसे डालने के लिए सुरक्षित डंपिंग यार्ड आवंटित किया जाता है जिसमें पुरानी बंद हुई खदान है, प्रमुख रूप से शामिल हैं, लेकिन स्लरी का परिवहन करने वाले लोगों द्वारा ट्रांसपोर्टेशन का खर्च बचाने के खातिर इसको अपनी मर्जी से यहां वहां डाल दिया जाता है और यह शहर के जल स्रोतों के लिए खतरा बन रही है। पर्यावरण प्रेमी कहते हैं कि यहां पर स्लरी पानी के साथ खूब बहकर आ रही है जिस पर सभी लोगों की नजर पड़ती है, क्योंकि मुख्य मार्ग के समीप ही स्लरी का ढेर लगा है, और यहीं से नाला निकलता है। ऐसे में इस विकट समस्या की तरफ प्रशासन द्वारा ध्यान नहीं दिया जाना बड़े ही आश्चर्य की बात है। प्रशासन को इस मामले में तुरंत कार्यवाही करनी चाहिए और इसको बंद करवाना चाहिए, तथा स्लरी यहां डालने वालों के विरुद्ध कड़ी कार्यवाही अमल में लाई जानी चाहिए, वरना 1 दिन धीरे-धीरे इस नए तालाब का अस्तित्व समाप्त हो जाएगा और यहां का जलीय वातावरण तो अभी भी खराब होने लगा है।</p>
<p><strong>इनका कहना है</strong><br />मामले को दिखवाया है, इसमें डंपिंग यार्ड नहीं होने की बात सामने आई है, संबंधित विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि मामले का उचित हल निकालते हुए डंपिंग यार्ड की व्यवस्था कर की जाए, ताकि स्लरी इधर-उधर ना फेंके तथा तालाब में स्लरी डाले जाने के मामले को दिखाकर उचित कार्रवाई करेंगे। <br /><strong>- अजय सिंह राठौड़, जिला कलक्टर, झालावाड़।</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>झालावाड़</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 23 Aug 2024 14:50:49 +0530</pubDate>
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                <title>कानूनों का मसौदा तैयार करने में महारत होना जरूरी : शाह</title>
                                    <description><![CDATA[ केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा है कि विधायी दस्तावेजों का प्रारूप तैयार करने में विशेषज्ञता होना जरूरी है क्योंकि इस कार्य में महारत नहीं होने से न केवल कानून बल्कि पूरी लोकतांत्रिक व्यवस्था निर्बल होती है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/it-is-necessary-to-have-mastery-in-drafting-laws/article-45633"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-05/amit_shah-(3).jpg" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा है कि विधायी दस्तावेजों का प्रारूप तैयार करने में विशेषज्ञता होना जरूरी है क्योंकि इस कार्य में महारत नहीं होने से न केवल कानून बल्कि पूरी लोकतांत्रिक व्यवस्था निर्बल होती है। शाह ने सोमवार को यहां संसद, राज्य विधानसभाओं, विभिन्न मंत्रालयों और वैधानिक निकायों के केंद्र और राज्यों के अधिकारियों के लिए आयोजित विधायी प्रारूप सम्बन्धी प्रशिक्षण कार्यक्रम का उद्घाटन किया। इस अवसर पर लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला, केन्द्रीय मंत्री प्रल्हाद जोशी, अर्जुन राम मेघवाल और केन्द्रीय गृह सचिव सहित अनेक गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।</p>
<p>गृह मंत्री ने कहा , '' लेजिस्लेटिव ड्राफ्टिंग हमारे लोकतंत्र का बहुत महत्वपूर्ण अंग है और इसके बारे में जानकारी का अभाव ना केवल कानूनों और पूरी लोकतांत्रिक व्यवस्था को निर्बल करता है बल्कि ज्यूडिश्यिरी के कार्यों को भी प्रभावित करता है। लेजिस्लेटिव ड्राफ्टिंग किसी भी लोकतांत्रिक देश के लिए बहुत महत्वपूर्ण है इसलिए इसके स्किल में समयानुसार बदलाव, बढ़ोत्तरी और अधिक दक्षता होती रहनी चाहिए ।"</p>
<p>इस मौके पर शाह ने स्वतंत्रता सेनानी सुखदेव जी और पूर्व उपराष्ट्रपति भैरो सिंह शेखावत को उनकी पुण्य़तिथि पर श्रद्धांजलि दी। उन्होंने कहा कि दुनिया भारतीय लोकतंत्र को सबसे बड़े लोकतंत्र के रूप में जानती है। भारत के संविधान को दुनिया का सबसे परिपूर्ण संविधान माना जाता है और  संविधान निर्माताओं ने ना सिर्फ देश के परंपरागत लोकतांत्रिक संस्कारों को इसमें शामिल किया बल्कि इसे आज के समय की जरूरतों के अनुसार आधुनिक बनाने का प्रयास भी किया।</p>
<p>केन्द्रीय गृह मंत्री ने कहा कि लोकतंत्र के तीन मुख्य स्तंभ होते हैं- विधायिका, कार्यपालिका और न्यायपालिका और इन के आधार पर ही संविधान निर्माताओं ने पूरी लोकतांत्रिक शासन व्यवस्था को बनाने का काम किया। उन्होंने कहा कि इन तीनों व्यवस्थाओं के काम अच्छे से विभाजित किए गए हैं। शाह ने कहा कि विधायिका का काम है लोककल्याण और लोगों की समस्याओं पर विचार करना तथा कानूनी तरीके से उनका समाधान निकालना। उन्होंने कहा कि दुनियाभर में हर क्षेत्र में आ रहे बदलावों पर संसद में चर्चा करके उन बदलावों के अनुरूप नए कानून बनाकर या पुराने कानूनों में समय के अनुसार संशोधन करके उन्हें प्रासंगिक बनाना ही विधायिका का काम है। कानून की भावना के आधार पर इसपर अमल का काम कार्यपालिका करती है। उन्होंने कहा कि विवाद होने पर कानून की व्याख्या के लिए न्यायपालिका को  स्वतंत्र रूप से काम करने का अधिकार दिया गया है। उन्होंने कहा कि इन तीनों स्तंभों के बीच पूरी लोकतांत्रिक व्यवस्था को बांटने का काम संविधान निर्माताओं ने किया।</p>
<p>शाह ने कहा कि संसद और केन्द्रीय मंत्रिमंडल की राजनीतिक इच्छा को कानून के सांचे में ढालने का काम विधायी विभाग का होता है। उन्होंने कहा ,'' पॉलिटिकल विल, लोगों की समस्याओं के समाधान के रास्तों और देश की अलग-अलग जरूरतों को कानून स्वरूप देने का काम लेजिस्लेटिव विभाग का है और इसीलिए ड्राफ्टिंग बहुत महत्वपूर्ण है।  ड्राफ्टिंग जितनी अच्छी होगी, शिक्षा उतनी ही सरल हो जाएगी और एक्जयूटिव द्वारा गलती करने की संभावना उतनी ही कम हो जाएगी।  ड्राफ्टिंग में ग्रे एरिया छोडऩे से व्याख्या करते समय इसमें एन्क्रोचमेंट की संभावना रहेगी, और, अगर ड्राफ्टिंग  परिपूर्ण और स्पष्ट है तो इसकी व्याख्या भी स्पष्ट हो जाएगी।"</p>
<p>केन्द्रीय गृह मंत्री ने कहा कि सरकार का सबसे शक्तिशाली अंग संसद है और इसकी ताकत कानून है। उन्होंने कहा कि विधायी प्रारूप तैयार करना किसी भी देश को अच्छे तरीके से चलाने की सबसे महत्वपूर्ण विधा है। संसद और लोगों की इच्छा को कानून में बदलते समय बहुत सारी बातों का ध्यान रखना होता है, जैसे, संविधान, लोगों के रीति-रिवाज, संस्कृति, ऐतिहासिक विरासत, शासन व्यवस्था की संरचना, समाज की प्रकृति, देश के सामाजिक-आर्थिक विकास और अंतर्राष्ट्रीय संधियां। उन्होंने कहा कि विधायी प्रारूप तैयार करना कोई विज्ञान या कला नहीं है, बल्कि एक कौशल है जिसे भावनाओं को ध्यान में रखते हुए लागू करना है, विवादास्पद चीजों को कम करने पर ध्यान देते हुए कानून को पूरी तरह स्पष्ट होना चाहिए। </p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 15 May 2023 17:00:43 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>नकल रोकने के लिए सख्त कानून : संपत्ति जब्त, दस साल की सजा</title>
                                    <description><![CDATA[उच्च शिक्षा राज्यमंत्री राजेन्द्र यादव ने गुरुवार को विधानसभा में राजस्थान सार्वजनिक परीक्षा (भर्ती में अनुचित साधनों की रोकथाम के अध्युपाय) विधेयक 2022 पुर:स्थापित किया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/strict-laws-to-stop-copying--property-confiscated--ten-years-in-prison--bill-introduced-in-the-assembly-to-prevent-paper-leaks-in-other-exams-including-reet/article-4961"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-02/reet-exam.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। रीट सहित अन्य परीक्षाओं में पेपर लीक के बाद हुए विवादों के बाद राज्य सरकार ने नए कानून का प्रारूप तैयार किया है। इस कानून में नकल रोकने क लिए नकल गिरोह की संपत्ति जब्त कर नीलाम करने के साथ ही अपराध साबित होने पर दस साल जी सजा और दस लाख का जुर्माना प्रस्तावित किया गया है।</p>
<p><br />उच्च शिक्षा राज्यमंत्री राजेन्द्र यादव ने गुरुवार को विधानसभा में राजस्थान सार्वजनिक परीक्षा (भर्ती में अनुचित साधनों की रोकथाम के अध्युपाय) विधेयक 2022 पुर:स्थापित किया। अब इसे चर्चा के बाद पारित किया जा सकेगा। इस बिल में स्कूल, कॉलेज, यूनिवर्सिटी से लेकर सरकारी नौकरियों के लिए होने वाली भर्तियों में नकल, पेपर लीक  गिरोह के खिलाफ कडेÞ प्रावधान किए गए है। इसमें परीक्षा में नकल करने वाले स्टूडेंट्स और प्रतियोगी भी लंबे समय तक परीक्षाओं में शामिल नहीं हो सकेंगे। स्कूल कॉलेज की परीक्षाओं में नकल करने पर एक साल तक परीक्षा देने पर रोक का प्रावधान किया है। प्रतियोगी परीक्षाओं में नकल करने वाला अभ्यर्थी लंबे समय तक कोई परीक्षा नहीं दे पाएगा। अभी केवल नकल में शामिल परीक्षार्थियों का रिजल्ट रोकने और परीक्षा से बाहर करने के प्रावधान है, लेकिन अब नए कानून में सख्त प्रावधान किए गए है। इसके साथ ही सदन में राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय जोधपुर संशोधन विधेयक 2022 और गुरुकुल विश्वविद्यालय सीकर विधेयक 2022 सदन में पुर:स्थापित किया गया।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 25 Feb 2022 11:47:04 +0530</pubDate>
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                <title>अंग्रेजी हुक्मरानों के यूनिवर्सिटी में लागू कानून बदलेंगे, कॉमन एक्ट ड्राफ्ट सालभर से तैयार, बिल का इंतजार</title>
                                    <description><![CDATA[सभी यूनिवर्सिटीज में एक जैसे होंगे नियम-कायदे, समितियां और शक्तियां,प्रोफेशनल यूनिवर्सिटीज में कुलपति उसी फील्ड के एक्सपर्ट होंगे]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/%E0%A4%85%E0%A4%82%E0%A4%97%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A5%87%E0%A4%9C%E0%A5%80-%E0%A4%B9%E0%A5%81%E0%A4%95%E0%A5%8D%E0%A4%AE%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%A8%E0%A5%8B%E0%A4%82-%E0%A4%95%E0%A5%87-%E0%A4%AF%E0%A5%82%E0%A4%A8%E0%A4%BF%E0%A4%B5%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%B8%E0%A4%BF%E0%A4%9F%E0%A5%80-%E0%A4%AE%E0%A5%87%E0%A4%82-%E0%A4%B2%E0%A4%BE%E0%A4%97%E0%A5%82-%E0%A4%95%E0%A4%BE%E0%A4%A8%E0%A5%82%E0%A4%A8-%E0%A4%AC%E0%A4%A6%E0%A4%B2%E0%A5%87%E0%A4%82%E0%A4%97%E0%A5%87--%E0%A4%95%E0%A5%89%E0%A4%AE%E0%A4%A8-%E0%A4%8F%E0%A4%95%E0%A5%8D%E0%A4%9F-%E0%A4%A1%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%AB%E0%A5%8D%E0%A4%9F-%E0%A4%B8%E0%A4%BE%E0%A4%B2%E0%A4%AD%E0%A4%B0-%E0%A4%B8%E0%A5%87-%E0%A4%A4%E0%A5%88%E0%A4%AF%E0%A4%BE%E0%A4%B0--%E0%A4%AC%E0%A4%BF%E0%A4%B2-%E0%A4%95%E0%A4%BE-%E0%A4%87%E0%A4%82%E0%A4%A4%E0%A4%9C%E0%A4%BE%E0%A4%B0/article-4410"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-02/ru_new.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। राजस्थान में अब सभी यूनिवर्सिटीज में एक जैसे नियम-कायदों से संचालन के लिए कॉमन एक्ट की कवायद को जल्द अमलीजामा पहनाए जाने की उम्मीद है। अभी सभी यूनिवर्सिटीज एक्ट में कई अलग-अलग नियम-कायदे हैं।<br />इनमें से ज्यादातर एक्ट राजस्थान यूनिवर्सिटीज के स्थापना के वक्त अंग्रेजी हुक्मरानों के जनवरी 1947 में बनाएं कानून ही शामिल हैं। यूनिवर्सिटीज में चल रहे कानूनों को बदलने की कवायद गहलोत सरकार ने दो साल पहले शुरू की थी। सभी यूनिवर्सिटीज में एक जैसा कानून, शक्तियां, सरकारी हस्तक्षेप इत्यादि स्पष्टत: तय करने के लिए कॉमन एक्ट तैयार करने के लिए जोधपुर की जयनारायण व्यास यूनिवर्सिटी के कुलपति पीसी त्रिवेद्वी की अध्यक्षता में कमेटी का गठन किया था। कमेठी ने एक साल पहले ही एक्ट का ड्राफ्ट तैयार कर उच्च शिक्षा विभाग को सौंप दिया है। लेकिन इसे कानूनी अमलीजामा पहनाकर बिल का रुप दिया जाना बाकी है। विधानसभा का सत्र शुरू हो चुका है। उच्च शिक्षा विभाग ने इसे अभी बिल में तब्दील नहीं किया है। ऐसे में इस सत्र में इसके आने की गुजाइंश कम ही है। इसे वैधानिक मंजूरी मिले तो सभी यूनिवर्सिटीज के वर्तमान में लागू आदिम कानून विलोपित हो जाएंगे और समान कानून संहिता का तय फाूर्मला लागू हो जाएगा। प्रोफेशनल यूनिवर्सिटीज में यूजीसी की गाइडलान के साथ ही उसी फील्ड से जुड़े शिक्षक या व्यक्ति को कुलपति बनाए जाने का बड़ा फैसला भी ड्राफ्ट में शामिल है। ऐसा हुआ तो प्रदेश की मेडिकल, पत्रकारिता, कृषि, विधि इत्यादि विषयों की यूनिवर्सिटीज में उसी फील्ड के एक्सपर्ट ही कुलपति बन सकेंगे। <br /><br /><strong>महाराष्ट्र-केरल में पहले से लागू है कॉमन एक्ट</strong><br />महाराष्ट्र और केरल राज्य में यूनिवर्सिटीज के लिए पहले से कॉमन एक्ट बनाकर लागू कर चुके हैं। इसी की तर्ज पर राजस्थान में ड्राफ्ट तैयार किया गया है। जिसमें वर्तमान परिदृश्य के मुताबिक यूनिवर्सिटीज के एक्ट में रिफॉर्म करने, उसमें फेरबदल करने, शैक्षणिक गुणवत्ता को बेहतर बनाने, प्रबन्धन ढांचे में बदलाव को फोकस कर तैयार किया गया है। <br /><br />ड्राफ्ट पर अधिकारियों से चर्चा हुई है। जल्द इसे बिल में तब्दील करने के लिए फिर से बैठक करूंगा। प्रयास रहेगा कि इसी सत्र में इस पारित कराके लागू किया जाए। - <strong>राजेन्द्र यादव, उच्च शिक्षा राज्यमंत्री</strong><br /><br /><strong>ड्राफ्ट में ये सिफारिशें</strong><br /> प्रो वाइस चांसलर का पद सृजित हो, कुलपति की यूजीसी की तय गाइडलाइन के  अनुरूप यूनिवर्सिटी के ही सीनियर प्रोफेसर की नियुक्ति इस पद पर की जाए। <br /> सभी यूनिवर्सिटी में एक जैसी प्रबन्धन बॉडी और उनकी शक्तियां-कार्यप्रणाली हो। अभी यूनिवर्सिटीज में बोर्ड आॅफ मैनजमेंट, सिंडीकेट, सीनेट, एक्ज्यूक्टिव कमेटी, एकडेमिक काउंसिल इत्यादि अपने-अपने एक्ट के मुताबिक है। <br /> यूनिवर्सिटीज में न्यूनतम तय शैक्षणिक विभाग होना अनिवार्य होगा , टीचर्स की संख्या भी तय होगी। <br /> टीचर्स के पद तय करने और भर्ती के लिए सरकार की अनुमति लेने की जरुरत ना पड़े।  <br /> प्रबन्धन बॉडी में सरकारी अफसरों का हस्तक्षेप घटे, कहीं दो तो कहीं पांच सचिव स्तर के अफसर सदस्य। एक ही सचिव को शामिल करने का प्रस्ताव। <br /> हर विभाग में स्थाई फैकल्टी जरुरी होगी। अभी कई यूनिवर्सिटीज में ऐसे विभाग, जिन्हें खुले दो दशक से ज्यादा लेकिन स्थाई टीचर्स भी नहीं। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>शिक्षा जगत</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 12 Feb 2022 17:36:48 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Administrator]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>कृषि कानूनों पर कांग्रेस का संसद भवन परिसर में प्रदर्शन, दोनों सदनों में किसान वापसी बिल पास</title>
                                    <description><![CDATA[प्रदर्शनकारियों में पार्टी के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी और राज्य सभा और लोक सभा के बहुत से सदस्य शामिल थे।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/%E0%A4%95%E0%A5%83%E0%A4%B7%E0%A4%BF-%E0%A4%95%E0%A4%BE%E0%A4%A8%E0%A5%82%E0%A4%A8%E0%A5%8B%E0%A4%82-%E0%A4%AA%E0%A4%B0-%E0%A4%95%E0%A4%BE%E0%A4%82%E0%A4%97%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A5%87%E0%A4%B8-%E0%A4%95%E0%A4%BE-%E0%A4%B8%E0%A4%82%E0%A4%B8%E0%A4%A6-%E0%A4%AD%E0%A4%B5%E0%A4%A8-%E0%A4%AA%E0%A4%B0%E0%A4%BF%E0%A4%B8%E0%A4%B0-%E0%A4%AE%E0%A5%87%E0%A4%82-%E0%A4%AA%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A4%A6%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%B6%E0%A4%A8--%E0%A4%A6%E0%A5%8B%E0%A4%A8%E0%A5%8B%E0%A4%82-%E0%A4%B8%E0%A4%A6%E0%A4%A8%E0%A5%8B%E0%A4%82-%E0%A4%AE%E0%A5%87%E0%A4%82-%E0%A4%95%E0%A4%BF%E0%A4%B8%E0%A4%BE%E0%A4%A8-%E0%A4%B5%E0%A4%BE%E0%A4%AA%E0%A4%B8%E0%A5%80-%E0%A4%AC%E0%A4%BF%E0%A4%B2-%E0%A4%AA%E0%A4%BE%E0%A4%B8/article-2822"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2021-11/35.jpg" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। संसद को दोनों सदनों में कृषि वापसी बिल पास हो गया है। हालांकि सदन शुरू होने से पहले कांग्रेस  अध्यक्ष सोनिया गांधी के नेतृत्व में पार्टी के सांसदों ने विवादास्पद कृषि कानूनों के खिलाफ  सोमवार को संसद भवन परिसर में प्रदर्शन किया। परिसर में लगी महात्मा गांधी की प्रतिमा के समक्ष एकत्रित कांग्रेसी सदस्य एक बड़ा बैनर फैलाए हुए थे जिसमें अंग्रेजी में लिखा था -हम काले कृषि कानूनों को वापस लेने की मांग करते हैं। प्रदर्शनकारियों में पार्टी के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी और राज्य सभा और लोक सभा के बहुत से सदस्य शामिल थे। वे सरकार विरोधी नारे लगा रहे  थे। गौरतलब है कि तीनों विवादास्पद कृषि कानूनों को सरकार वापस लेने की घोषणा कर चुकी है। <br /> <br />  </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 29 Nov 2021 14:51:35 +0530</pubDate>
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                <title>संसद के शीतकालीन सत्र का पहला दिन : विपक्ष का हंगामा : तीनों कृषि कानूनों को वापस लेने वाला विधेयक लोकसभा से पारित</title>
                                    <description><![CDATA[सदन की हंगामेदार शुरूआत]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/%E0%A4%B8%E0%A4%82%E0%A4%B8%E0%A4%A6-%E0%A4%95%E0%A5%87-%E0%A4%B6%E0%A5%80%E0%A4%A4%E0%A4%95%E0%A4%BE%E0%A4%B2%E0%A5%80%E0%A4%A8-%E0%A4%B8%E0%A4%A4%E0%A5%8D%E0%A4%B0-%E0%A4%95%E0%A4%BE-%E0%A4%AA%E0%A4%B9%E0%A4%B2%E0%A4%BE-%E0%A4%A6%E0%A4%BF%E0%A4%A8---%E0%A4%B5%E0%A4%BF%E0%A4%AA%E0%A4%95%E0%A5%8D%E0%A4%B7-%E0%A4%95%E0%A4%BE-%E0%A4%B9%E0%A4%82%E0%A4%97%E0%A4%BE%E0%A4%AE%E0%A4%BE---%E0%A4%A4%E0%A5%80%E0%A4%A8%E0%A5%8B%E0%A4%82-%E0%A4%95%E0%A5%83%E0%A4%B7%E0%A4%BF-%E0%A4%95%E0%A4%BE%E0%A4%A8%E0%A5%82%E0%A4%A8%E0%A5%8B%E0%A4%82-%E0%A4%95%E0%A5%8B-%E0%A4%B5%E0%A4%BE%E0%A4%AA%E0%A4%B8-%E0%A4%B2%E0%A5%87%E0%A4%A8%E0%A5%87-%E0%A4%B5%E0%A4%BE%E0%A4%B2%E0%A4%BE-%E0%A4%B5%E0%A4%BF%E0%A4%A7%E0%A5%87%E0%A4%AF%E0%A4%95-%E0%A4%B2%E0%A5%8B%E0%A4%95%E0%A4%B8%E0%A4%AD%E0%A4%BE-%E0%A4%B8%E0%A5%87-%E0%A4%AA%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A4%BF%E0%A4%A4/article-2818"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2021-11/loksabha.jpg" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। संसद के शीतकालीन सत्र के पहले दिन विपक्ष के हंगामे के बीच आनन फानन में तीनों विवादास्पद कृषि कानूनों को वापस लेने संबंधी विधेयक को बिना बहस के पारित किया गया और इसके बाद सदन की कार्यवाही दोपहर दो बजे तक के लिए स्थगित कर दी गई।<br /> <br /> एक बार के स्थगन के बाद सदन की कार्यवाही 12 बजे शुरु हुई तो अध्यक्ष ओम बिरला ने सर्वप्रथम पश्चिम बंगाल के आसनसोल से निर्वाचित बाबुल सुप्रियो के त्यागपत्र देने और उसे 22 अक्टूबर से स्वीकार किये जाने की सूचना दी और यह भी कहा कि उन्हें कुछ विषयों पर स्थगन प्रस्ताव मिले हैं जिन्हें अनुमति प्रदान नहीं की गयी है। इसके बाद विपक्षी सदस्यों का हंगामा शुरू हो गया और वे आसन के इर्दगिर्द जमा हो गये और नारेबाजी करने लगे।<br /> <br /> आवश्यक दस्तावेज सदन के पटल पर रखवाने के बाद  बिरला ने कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री नरेन्द्र सिंह तोमर का नाम पुकारा जिन्होंने तीनों विवादास्पद कृषि कानूनों - कृषि उपज व्यापार एवं वाणिज्य (संवर्धन और सरलीकरण) अधिनियम 2020, कृषक (सशक्तीकरण एवं संरक्षण) कीमत आश्वासन और कृषि सेवा पर करार अधिनियम 2020 तथा आवश्यक वस्तु (संशोधन) अधिनियम 2020 को निरस्त करने वाले कृषि कानून निरसन विधेयक 2021 को पेश किया। <br /> <br /> विपक्ष द्वारा बिना चर्चा किये विधेयक को पारित कराने पर शोर शराबा होने पर अध्यक्ष ने कहा कि वह विधेयक पर चर्चा कराने के पक्षधर हैं लेकिन इतने शोरशराबे एवं हंगामे में चर्चा नहीं हो सकती है। यदि सदस्य चर्चा चाहते हैं तो वे अपने अपने स्थान पर जायें। लेकिन इसका कोई असर नहीं हुआ। <br /> <br /> मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस के नेता अधीररंजन चौधरी ने कहा कि आज (सोमवार को) यहां सदन के नियम कायदों की धज्जियां उड़ायी जा रहीं हैं। उन्होंने कहा कि पहले भी कानूनों के निरसन के लिए लाये गये विधेयकों पर चर्चा होती रही है। उन्होंने कहा कि छह साल में 14 कानून निरस्त करने के लिए विधेयक लाये गये लेकिन अब उन पर चर्चा नहीं करायी जा रही है। <br /> <br /> इस पर अध्यक्ष ने कहा कि सदन के हालात चर्चा के लिए बनाये बिना ऐसा करना संभव नहीं है। उन्होंने तोमर द्वारा प्रस्तुत विधेयक को ध्वनिमत से पारित कराया और सदन की कार्यवाही दोपहर दो बजे तक स्थगित करने की घोषणा कर दी।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 29 Nov 2021 13:13:13 +0530</pubDate>
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                <title>केंद्रीय कैबिनेट ने कृषि कानून प्रस्ताव को वापस लेने की दी मंजूरी,  शीतकालीन सत्र के पहले सप्ताह में ही वापस लिये जायेंगे तीनों कृषि कानून : ठाकुर</title>
                                    <description><![CDATA[संसदीय नियमों और प्रक्रिया के तहत पहले सप्ताह में ही प्राथमिकता के आधार पर यह प्रक्रिया शुरू कर दी जायेगी।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/%E0%A4%95%E0%A5%87%E0%A4%82%E0%A4%A6%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A5%80%E0%A4%AF-%E0%A4%95%E0%A5%88%E0%A4%AC%E0%A4%BF%E0%A4%A8%E0%A5%87%E0%A4%9F-%E0%A4%A8%E0%A5%87-%E0%A4%95%E0%A5%83%E0%A4%B7%E0%A4%BF-%E0%A4%95%E0%A4%BE%E0%A4%A8%E0%A5%82%E0%A4%A8-%E0%A4%AA%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A4%B8%E0%A5%8D%E0%A4%A4%E0%A4%BE%E0%A4%B5-%E0%A4%95%E0%A5%8B-%E0%A4%B5%E0%A4%BE%E0%A4%AA%E0%A4%B8-%E0%A4%B2%E0%A5%87%E0%A4%A8%E0%A5%87-%E0%A4%95%E0%A5%80-%E0%A4%A6%E0%A5%80-%E0%A4%AE%E0%A4%82%E0%A4%9C%E0%A5%82%E0%A4%B0%E0%A5%80---%E0%A4%B6%E0%A5%80%E0%A4%A4%E0%A4%95%E0%A4%BE%E0%A4%B2%E0%A5%80%E0%A4%A8-%E0%A4%B8%E0%A4%A4%E0%A5%8D%E0%A4%B0-%E0%A4%95%E0%A5%87-%E0%A4%AA%E0%A4%B9%E0%A4%B2%E0%A5%87-%E0%A4%B8%E0%A4%AA%E0%A5%8D%E0%A4%A4%E0%A4%BE%E0%A4%B9-%E0%A4%AE%E0%A5%87%E0%A4%82-%E0%A4%B9%E0%A5%80-%E0%A4%B5%E0%A4%BE%E0%A4%AA%E0%A4%B8-%E0%A4%B2%E0%A4%BF%E0%A4%AF%E0%A5%87-%E0%A4%9C%E0%A4%BE%E0%A4%AF%E0%A5%87%E0%A4%82%E0%A4%97%E0%A5%87-%E0%A4%A4%E0%A5%80%E0%A4%A8%E0%A5%8B%E0%A4%82-%E0%A4%95%E0%A5%83%E0%A4%B7%E0%A4%BF-%E0%A4%95%E0%A4%BE%E0%A4%A8%E0%A5%82%E0%A4%A8---%E0%A4%A0%E0%A4%BE%E0%A4%95%E0%A5%81%E0%A4%B0/article-2697"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2021-11/anurag-thakur-2.jpg" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली।  केन्द्रीय मंत्रिमंडल ने तीनों विवादास्पद कृषि कानूनों को वासस लेने के निर्णय को आज मंजूरी दे दी और सरकार संसद के शीतकालीन सत्र में इन कानूनों को प्राथमिकता के आधार पर वापस लेने की प्रक्रिया पहले सप्ताह में ही शुरू कर देगी। सूचना एवं प्रसारण मंत्री अनुराग ठाकुर ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में बुधवार को यहां हुई मंत्रिमंडल की बैठक में लिये गये फैसलों की जानकारी देते हुए संवाददाता सम्मेलन में कहा कि सरकार ने इन कानूनों को वापस लेने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। प्रधानमंत्री द्वारा गत शुक्रवार को इस संबंध में की गयी घोषणा के बाद मंत्रिमंडल की पहली ही बैठक में इस निर्णय को मंजूरी दे दी गयी है।</p>
<p>उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री ने कृषक उपज व्यापार और वाणिज्य (संवर्धन और सरलीकरण) अधिनियम -2020, कृषक (सशक्तीकरण व संरक्षण) कीमत आश्वासन और कृषि सेवा पर करार अधिनियम 2020 और आवश्यक वस्तुएं संशोधन अधिनियम 2020 इन तीनों कानूनों को वापस लेने की घोषणा करते समय सरकार का रूख विस्तार से रखा था और कहा था कि संसद के शीतकालीन सत्र में इसकी संवैधानिक प्रक्रिया पूरी कर ली जायेगी। एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि  संसदीय नियमों और प्रक्रिया के तहत पहले सप्ताह में ही प्राथमिकता के आधार पर यह प्रक्रिया शुरू कर दी जायेगी। <br /> <br /> उल्लेखनिय है कि मोदी ने गत शुक्रवार को गुरू नानक देव जी के प्रकाश पर्व पर राष्ट्र के नाम संबोधन में तीनों विवादास्पद कानूनों को वापस लेने की घोषणा की थी। उन्होंने कहा था कि संसद के शीतकालीन सत्र में इससे संबंधित संवैधानिक प्रक्रिया पूरी कर ली जायेगी।  साथ ही उन्होंने इन कानूनों का विरोध करने के लिए दिल्ली की सीमाओं पर आंदोलन कर रहे किसानों से अपने-अपने घरों और खेतों में वापस लौटने की अपील भी की थी।<br /> <br /> गौरतलब है कि इसी साल जनवरी में उच्चतम न्यायालय ने केंद्र और आंदोलनकारियों के बीच बातचीत की प्रक्रिया को सुविधाजनक बनाने के लिए अगले आदेश तक इन कानूनों के कार्यान्वयन पर रोक लगा दी थी। न्यायालय ने भी (एजेंसी) करने के लिए एक समिति का गठन किया था। हालांकि, किसान संघों के नेताओं ने समिति का बहिष्कार किया।</p>]]></content:encoded>
                
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                <title>CM गहलोत का तंज : तीनों काले कृषि कानूनों की वापसी की घोषणा लोकतंत्र की जीत एवं मोदी सरकार के अहंकार की हार</title>
                                    <description><![CDATA[ पिछले एक साल से आंदोलनरत किसानों के धैर्य की जीत : गहलोत]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/cm-%E0%A4%97%E0%A4%B9%E0%A4%B2%E0%A5%8B%E0%A4%A4-%E0%A4%95%E0%A4%BE-%E0%A4%A4%E0%A4%82%E0%A4%9C---%E0%A4%A4%E0%A5%80%E0%A4%A8%E0%A5%8B%E0%A4%82-%E0%A4%95%E0%A4%BE%E0%A4%B2%E0%A5%87-%E0%A4%95%E0%A5%83%E0%A4%B7%E0%A4%BF-%E0%A4%95%E0%A4%BE%E0%A4%A8%E0%A5%82%E0%A4%A8%E0%A5%8B%E0%A4%82-%E0%A4%95%E0%A5%80-%E0%A4%B5%E0%A4%BE%E0%A4%AA%E0%A4%B8%E0%A5%80-%E0%A4%95%E0%A5%80-%E0%A4%98%E0%A5%8B%E0%A4%B7%E0%A4%A3%E0%A4%BE-%E0%A4%B2%E0%A5%8B%E0%A4%95%E0%A4%A4%E0%A4%82%E0%A4%A4%E0%A5%8D%E0%A4%B0-%E0%A4%95%E0%A5%80-%E0%A4%9C%E0%A5%80%E0%A4%A4-%E0%A4%8F%E0%A4%B5%E0%A4%82-%E0%A4%AE%E0%A5%8B%E0%A4%A6%E0%A5%80-%E0%A4%B8%E0%A4%B0%E0%A4%95%E0%A4%BE%E0%A4%B0-%E0%A4%95%E0%A5%87-%E0%A4%85%E0%A4%B9%E0%A4%82%E0%A4%95%E0%A4%BE%E0%A4%B0-%E0%A4%95%E0%A5%80-%E0%A4%B9%E0%A4%BE%E0%A4%B0/article-2526"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2021-11/gehlot-modi1.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>जयपुर</strong>। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने कहा है कि तीनों काले कृषि कानूनों की वापसी की घोषणा लोकतंत्र की जीत एवं मोदी सरकार के अहंकार की हार है। यह पिछले एक साल से आंदोलनरत किसानों के धैर्य की जीत है। देश कभी नहीं भूल सकता कि मोदी सरकार की अदूरदर्शिता एवं अभिमान के कारण सैकड़ों किसानों को अपनी जान गंवानी पड़ी है।<br /><br />गहलोत ने कहा कि मैं किसान आंदोलन में शहादत देने वाले सभी किसानों को नमन करता हूं। यह उनके बलिदान की जीत है। गहलोत लगातार किसानों की मांग को पूरा करने के लिए कई बार प्रधानमंत्री और गृह एवं कृषि मंत्री को पत्र लिखकर कृषि कानूनों को वापस लेनी की मांग उठाई थी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
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                <title>PM मोदी का बड़ा ऐलान : तीन कृषि कानून होंगे वापस</title>
                                    <description><![CDATA[तीनों कानूनों को रद्द करने की प्रक्रिया संसद के इसी सत्र में की जाएगी।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/pm-%E0%A4%AE%E0%A5%8B%E0%A4%A6%E0%A5%80-%E0%A4%95%E0%A4%BE-%E0%A4%AC%E0%A4%A1%E0%A4%BC%E0%A4%BE-%E0%A4%90%E0%A4%B2%E0%A4%BE%E0%A4%A8---%E0%A4%A4%E0%A5%80%E0%A4%A8-%E0%A4%95%E0%A5%83%E0%A4%B7%E0%A4%BF-%E0%A4%95%E0%A4%BE%E0%A4%A8%E0%A5%82%E0%A4%A8-%E0%A4%B9%E0%A5%8B%E0%A4%82%E0%A4%97%E0%A5%87-%E0%A4%B5%E0%A4%BE%E0%A4%AA%E0%A4%B8/article-2522"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2021-11/modi191121.jpg" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को तीनों विवादास्पद कृषि कानूनों को रद्द करने की घोषणा की और न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) तथा शून्य बजट खेती पर सिफारिश के लिए बहुपक्षीय समिति बनाने का भी ऐलान किया। <br /> <br /> मोदी ने देव दीपावली और गुरु नानक देव जी के प्रकाश पर्व के मौके पर राष्ट्र को संबोधित करते हुए शुक्रवार को कहा कि वह नेक नीयत से किसानों की भलाई के लिए ये तीनों कृषि कानून लाए थे। इसके लिए लंबे समय से मांग हो रही थी। उन्होंने कहा कि कुछ किसान, भले ही उनकी संख्या कम हो, उन्होंने इसका विरोध किया। संभवत: यह हमारी तपस्या की कमी थी कि हम उन्हें इन तीनों कानूनों के बारे में समझा नहीं सके। <br /> <br />  मोदी ने कहा कि इन तीनों कानूनों को रद्द करने की प्रक्रिया संसद के इसी सत्र में की जाएगी। संसद का सत्र 29 नवंबर से शुरू हो रहा है। उन्होंने किसानों से आंदोलन छोड़ कर अपने-अपने घर वापस जाने की अपील की। <br /> <br /> प्रधानमंत्री ने कहा कि एमएसपी पर चुनाव के लिए समिति में केंद्र सरकार के प्रतिनिधियों के अलावा राज्य सरकारों, किसान संगठनों, कृषि विशेषज्ञ तथा कृषि अर्थशास्त्री रखे जाएंगे। उन्होंने कहा कि मैं किसानों और ग्रामीण लोगों के लिए पहले से अधिक मेहनत के साथ काम करता रहूंगा।</p>
<p>गौरतलब है कि कृषि मंडी व्यवस्था में सुधार, अनुबंध की खेती में किसानों के हितों की रक्षा के उपाय पर केंद्रीय तीनों कृषि कानूनों को लेकर कई किसान संगठन दिल्ली की सीमाओं पर मोर्चाबंदी किये हैं और उनके आंदोलन का करीब एक साल होने वाला है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 19 Nov 2021 10:45:23 +0530</pubDate>
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                <title>यूपीए के समय का सूचना का अधिकार अधिनियम सबसे महत्वपूर्ण कानूनों में से एक है : CM गहलोत</title>
                                    <description><![CDATA[सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 आज ही के दिन लागू हुआ।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/%E0%A4%AF%E0%A5%82%E0%A4%AA%E0%A5%80%E0%A4%8F-%E0%A4%95%E0%A5%87-%E0%A4%B8%E0%A4%AE%E0%A4%AF-%E0%A4%95%E0%A4%BE-%E0%A4%B8%E0%A5%82%E0%A4%9A%E0%A4%A8%E0%A4%BE-%E0%A4%95%E0%A4%BE-%E0%A4%85%E0%A4%A7%E0%A4%BF%E0%A4%95%E0%A4%BE%E0%A4%B0-%E0%A4%85%E0%A4%A7%E0%A4%BF%E0%A4%A8%E0%A4%BF%E0%A4%AF%E0%A4%AE-%E0%A4%B8%E0%A4%AC%E0%A4%B8%E0%A5%87-%E0%A4%AE%E0%A4%B9%E0%A4%A4%E0%A5%8D%E0%A4%B5%E0%A4%AA%E0%A5%82%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%A3-%E0%A4%95%E0%A4%BE%E0%A4%A8%E0%A5%82%E0%A4%A8%E0%A5%8B%E0%A4%82-%E0%A4%AE%E0%A5%87%E0%A4%82-%E0%A4%B8%E0%A5%87-%E0%A4%8F%E0%A4%95-%E0%A4%B9%E0%A5%88---cm-%E0%A4%97%E0%A4%B9%E0%A4%B2%E0%A5%8B%E0%A4%A4/article-1605"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2021-10/ashok_gehlot_630x4002.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने कहा कि सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 आज ही के दिन लागू हुआ, जो ऐतिहासिक दिन है। अब हमारा फोकस इसे मजबूत करने पर होना चाहिए। गहलोत ने सोशल मीडिया के जरिए कहा कि इस दिन ऐतिहासिक सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 लागू हुआ, हमारा ध्यान अधिनियम को मजबूत करने पर होना चाहिए। यह यूपीए के समय का सबसे महत्वपूर्ण कानूनों में से एक है, जो नागरिकों को पहले की तरह सशक्त बनाता है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 12 Oct 2021 14:33:43 +0530</pubDate>
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