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                <title>states - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <title>पीएमएवाई-यू में राजस्थान दूसरे राज्यों से पिछड़ा, एमपी, हरियाणा, बिहार से ज्यादा बेघर आबादी</title>
                                    <description><![CDATA[रिपोर्ट के अनुसार 2011 की जनगणना के अनुसार राजस्थान में बेघर आबादी गुजरात, बिहार, एमपी, हरियाणा जैसे राज्यों से अभी अधिक है अर्थात राजस्थान में बेघर आबादी का आंकड़ा 1. 81 लाख से अधिक हैं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/lags-behind-other-states-in-pmay-u-mp-haryana-has/article-99156"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-12/6622-copy71.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। प्रधानमंत्री आवास योजना-शहरी (पीएमएवाई-यू) की क्रियान्विति में राजस्थान की प्रोगे्रस दूसरे राज्यों की तुलना में काफी धीमी रही है। योजना के तहत राजस्थान में वर्ष 2023-24 में 47 हजार आवास स्वीकृत किए गए, लेकिन निर्माण केवल 37 हजार आवासों का ही हो सका। केन्द्रीय शहरी कार्य मंत्रालय की रिपोर्ट के अनुसार 2011 की जनगणना के अनुसार राजस्थान में बेघर आबादी गुजरात, बिहार, एमपी, हरियाणा जैसे राज्यों से अभी अधिक है अर्थात राजस्थान में बेघर आबादी का आंकड़ा 1. 81 लाख से अधिक हैं।</p>
<p><strong>कब शुरू हुई योजना</strong><br />केन्द्र ने देशभर के शहरी क्षेत्रों में पक्के आवास मुहैया करवाने के लिए 25 जून 2015 को प्रधानमंत्री आवास योजना शहरी का शुभारंभ किया। इस योजना के तहत देशभर में 2 दिसंबर 2024 तक 118.64 लाख आवास स्वीकृत किए गए हैं। इनमें 114.23 लाख आवासों की नींव रखी जा चुकी है, जबकि 88.32 लाख आवास पूरे हो चुके हैं।</p>
<p><strong>हर साल स्वीकृति आवासों का निर्माण नहीं हो सका</strong><br />राज्य में पीएमएवाई यू के तहत केन्द्र सरकार की ओर से आवास स्वीकृत किए गए, लेकिन राज्य की संबंधित एजेंसियों की ढिलाई के कारण आवासोंं का निर्माण नहीं हो सका। मौटे तौर पर केन्द्र सरकार ने 2022-23 में 93,943 आवास स्वीकृत किए, लेकिन इनमें से 60,856 आवासों का ही निर्माण हो सका। 2023-24 में 47,019 आवास स्वीकृत किए, लेकिन इनमें से निर्माण 37,016 आवास ही निर्मित हो सके। चालू वित्तीय वर्ष 2024-25 में 37,063 आवासों का निर्माण किया गया है।</p>
<p>केन्द्र से स्वीकृत स्कीमों के तहत आवासों का निर्माण हो रहा है, फिलहाल आवासों के निर्माण में देरी वाली स्थिति नहीं हैं।<br /><strong>प्रदीप गर्ग, परियोजना निदेशक (आवासन), रूडसिको</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 31 Dec 2024 14:15:50 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>आखिर कब बनेगा ये चंबल पुल ? स्टीमर से नदी कर रहे पार </title>
                                    <description><![CDATA[चौमहला सीतामऊ मार्ग पर राजस्थान मध्यप्रदेश की सीमा को जोड़ने वाली चंबल नदी पर टूटा हाई लेबल पुल पांच साल बाद भी नहीं बना जिससे मध्यप्रदेश व राजस्थान के लोगो को काफी परेशानी हो रही है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jhalawar/when-will-this-chambal-bridge-be-built--crossing-the-river-by-steamer/article-64883"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-12/akhir-kab-banega-ye-chambal-pool-stemar-se-nadi-kar-rahe-par-...jhalawar,chomela-23.12.2023.jpg" alt=""></a><br /><p> <br />चौमहला। राजस्थान मध्यप्रदेश दोनो राज्यों में एक ही पार्टी की सरकार बनने के बाद क्षेत्र के वासिंदो को राजस्थान मध्यप्रदेश को जोड़ने वाली चंबल नदी पर पुल बनने की आस बंधी है,इस नदी पर बना पुल सितंबर 2019 में नदी में आई बाढ़ में बह गया था। चौमहला सीतामऊ मार्ग पर राजस्थान मध्यप्रदेश की सीमा को जोड़ने वाली चंबल नदी पर टूटा हाई लेबल पुल पांच साल बाद भी नहीं बना जिससे मध्यप्रदेश व राजस्थान के लोगो को काफी परेशानी हो रही है। पुल का निर्माण मध्यप्रदेश सेतु निगम द्वारा किया जाना है। वर्ष 2019 में चंबल नदी में आई बाढ़ से  मंदसौर जिले को राजस्थान को जोड़ने वाला नदी पर बना पुल बह गया था तब से अब तक पुल का निर्माण शुरू नही हुआ। राजस्थान मध्यप्रदेश की सीमा पर स्थित इस पुल को बनाने के लिए नदी के दोनो ओर बसे लोगो द्वारा लगातार जनप्रतिनिधियों से मांग की जाती रही। यह पुल राजस्थान मध्यप्रदेश के काफी बड़े हिस्से को जोड़ता है मंदसौर जिले को राजस्थान के झालावाड़ जिले से सीधे जोड़ने वाला पुल व्यवसायिक दृष्टि से काफी महत्वपूर्ण है।</p>
<p><strong>लम्बा चक्कर लगाना पड़ रहा</strong><br />चौमहला क्षेत्र से मंदसौर जाने के लिए लोगों को 50 से 60 किमी का अतिरिक्त चक्कर लगाना पड़ रहा है, अभी वाहन चालक सुवासरा या आलोट होकर मंदसौर जा रहे है जिससे उनका काफी समय व ईधन बर्बाद हो रहा है। नदी के दोनो छोर पर बसे लोग 60 किमी लम्बा फेरा बचाने के लिए सुबह से शाम तक चलने वाले स्टीमर से नदी पार करते है,नदी पर दो स्टीमर चलते है जिससे करीब 400 ग्रामीण प्रतिदिन आवागमन करते है,जिसमे बड़ी संख्या में बाइक सवार होते है,स्टीमर चालक 40 रु प्रति बाइक,10 रु प्रति व्यक्ति किराया लेते है। दोनो राज्यों में एक साथ विधान सभा के चुनाव हुए चुनाव में यह मुद्दा दोनों राज्यों के लोगों ने उठाया। केबिनेट मंत्री हरदीप सिंह डंक ने अपने संबोधन में सरकार बनते ही पुल को प्राथमिकता से बनवाने का वादा किया था। हरदीप सिंह डंक समीप मध्यप्रदेश के सुवासरा से तीसरी बार विधायक चुने गए अब दोनों राज्यों में सरकार एक ही पार्टी की सरकार बनने के बाद क्षेत्र के वासिंदे उत्साहित है तथा  उन्हें उम्मीद है अब पुल बन जायेगा।</p>
<p><strong>व्यापार व्यवसाय प्रभावित</strong><br />पुल के टूटने से दोनों ओर का व्यापार व्यवसाय प्रभावित हो रहा है व्यापार संगठनों द्वारा कई बार सरकार को पुल के बारे में अवगत कराया गया। मार्च में मध्य प्रदेश शासन ने बजट में नए ब्रिज के लिए 18.94 करोड़ रुपए की मंजूरी दी थी लेकिन एसओआर के कारण एक माह में ब्रिज की लागत 15 से 20 फीसदी अधिक होने के साथ करीब 23 करोड़ रुपए पहुंच गई। ऐसे में अधिकारियों ने वापस रिवाइज एस्टीमेट की प्रशासकीय स्वीकृति के लिए फाइल शासन को भेज दी। जैसे ही नई स्वीकृति मिली, सेतु विकास विभाग ने टेंडर प्रक्रिया शुरू कर दी थी। लेकिन नवम्बर से अप्रेल तक तीन बार टेंडर निकाले पहले  दो बार मे किसी ठेकेदार ने रुचि नही दिखाई तीसरी बार एक ठेकेदार ने कॉपी डाली लेकिन वह क्वालीफाई नही कर पाया ,चौथी , पांचवी बार भी टेंडर स्वीकृत नहीं हुए अब छटी बार 15 दिसंबर 023को टेंडर निकाले गए है।</p>
<p><strong>पुल एक नजर में</strong><br />2019 सितंबर में बाढ़ के दौरान बह गया।<br />2021 फरवरी में सेतु विकास विभाग ने नए ब्रिज का प्रस्ताव भेजा<br />9 मार्च 2021 को बजट में 18.94 रुपए करोड़ की मंजूरी मिली<br />23 करोड़ तक पहुंची एसओआर के बाद लागत।<br />18.60 करोड़ पर निविदा आमंत्रित की नई स्वीकृति के बाद।<br />330 मीटर लंबाई का बनना है ब्रिज है।<br />12 मीटर रहेगी ब्रिज की चौड़ाई।</p>
<p>चंबल का पुल टूट जाने से आवागमन में परेशानी हो रही है, पुल का निर्माण शीघ्र होना चाहिए।  यह कम दूरी का मार्ग है लेकिन पुल टूटने से लोगो को लम्बा फेरा लगाना पड़ रहा है। <br /><strong>-  राघेवंद्र सिंह झाला, सरपंच कुंडला</strong><br /> <br />चंबल  नदी पर बना पुल टूटने के बाद लोगों को परेशानी हो रही है।  इस क्षेत्र के मरीज इलाज के लिए मंदसौर उदयपुर जाते है लेकिन पुल टूटने के बाद उन्हें लंबी दूरी तय करके जाना पड़ रहा है पुल शीघ्र बनाना चाहिए। <br /><strong> - प्रेमलता भंडारी, सरपंच ग्राम पंचायत कोलवी उर्फ मंडी राजेंद्रपुर चौमहला</strong></p>
<p>चंबल नदी पर पुल का निर्माण शीघ्र होना चाहिए, क्षेत्र के लोगों को आवागमन में परेशानी हो रही है। व्यापार व्यवसाय भी प्रभावित हो रहा है। <br /><strong>-अरविंद जैन, अध्यक्ष बर्तन व्यवसाय संघ</strong></p>
<p>चंबल पर पुल बने उसके लिए काफी समय से प्रयास कर रहे है पुल टूटने से लोगों को परेशानी हो रही है इस मार्ग पर आवागमन ठप्प है। <br /><strong> - नितेश जैन, युवा व्यवसाई</strong></p>
<p>चंबल नदी पर 18 करोड 60 लाख रु में पुल के लिए पांच बार टेंडर बुलाए गए अब तक एजेंसी तय नहीं हुई है अब छटी बार टेंडर बुलाए गए है कोन ठेकेदार कंपनी आगे आती है यह कुछ दिनों बात ही पता चलेगा।<br /><strong>- प्रवीन नरवरे एसडीओ, मध्यप्रदेश सेतु विभाग उज्जैन</strong></p>
<p>अभी लंबा चक्कर लगने से समय और धन बर्बाद हो रहा<br /> चंबल नदी पर 18 करोड़ 60लाख रु में पुल के लिए पांच बार टेंडर बुलाए गए अब तक एजेंसी तय नहीं हुई है अब छटी बार टेंडर बुलाए गए है कौन ठेकेदार कंपनी आगे आती है यह कुछ दिनों बात ही पता चलेगा।<br /><strong>- मुख्य अभियंता मध्यप्रदेश सेतु विभाग भोपाल</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>झालावाड़</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 23 Dec 2023 17:15:18 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[kota]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>तीन राज्यों में विधान परिषद की रिक्त सीटों के लिए चुनाव अगले माह</title>
                                    <description><![CDATA[आंध्र प्रदेश में 29 मार्च को रिक्त होने वाली सात सीटों तथा तेलंगाना में उसी दिन रिक्त होने वाली तीन सीटों के लिए के लिए द्विवार्षिक चुनाव 23 मार्च को कराए जायेंगे।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/election-for-vacant-seats-of-legislative-council-in-three-states/article-38507"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-02/chunaav.jpg" alt=""></a><br /><p>नयी दिल्ली। निर्वाचन आयोग ने आन्ध्र प्रदेश, तेलंगाना और बिहार में राज्य विधान परिषद की कुल 15 सीटों पर चुनाव एवं उपचुनाव के लिए द्विवार्षिक चुनाव 23 मार्च और 31 मार्च को कराये जाने की सोमवार को घोषणा की। आन्ध्र प्रदेश में सात, तेलंगाना में तीन और बिहार में चार सीटों के लिए द्विवार्षिक चुनाव तथा बिहार की एक सीट के लिए उपचुनाव कराए जायेंगे।   बिहार विधान परिषद में स्नातक और शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों की रिक्त हो रहीं दो-दो सीटों के लिए द्विवार्षिक चुनाव और सारण सीटों के लिए उपचुनाव 31 मार्च को चुनाव होगा। आंध्र प्रदेश में 29 मार्च को रिक्त होने वाली सात सीटों तथा तेलंगाना में उसी दिन रिक्त होने वाली तीन सीटों के लिए के लिए द्विवार्षिक चुनाव 23 मार्च को कराए जायेंगे।</p>
<p>निर्वाचन आयोग की सोमवार को जारी विज्ञप्ति के अनुसार, बिहार में विधान परिषद के पांच क्षेत्रों के चुनाव, उपचुनाव के लिए अधिसूचना छह मार्च को जारी की जाएगी। नामांकन पत्र 13 मार्च तक दाखिल किए जा सकेंगे। प्राप्त नामांकन पत्रों की जांच 14 मार्च को की जाएगी और 16 मार्च तक नाम वापस लिए जा सकेंगे। आवश्यकता पडऩे पर मतदान 31 मार्च को सुबह आठ बजे से शाम चार बजे तक कराया जाएगा। मतों की गिनती पांच अप्रैल को कराई जाएगी और पूरी प्रक्रिया 11 अप्रैल तक पूरी की जाएगी। बिहार में सारण और गया स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों तथा गया और कोशी शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों के प्रतिनिधियों सर्वश्री वीरेंद्र नारायण यादव, अवधेश नारायण सिंह, संजीवा श्याम सिंह और संजीव कुमार सिंह का कार्यकाल आठ मई को संपन्न हो रहा है।</p>
<p>सारण शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र के प्रतिनिधि केदारनाथ पांडे का कार्यकाल 16 नवंबर 2026 तक था, लेकिन उनके निधन के कारण यह सीट 24 अक्टूबर 2022 से रिक्त है। आयोग ने चार सीटों के द्विवार्षिक चुनाव के साथ इस रिक्त सीट का उपचुनाव कराने का निर्णय किया है। आंध्र प्रदेश और तेलंगाना की क्रमश: सात और तीन सीटों के लिए द्विवार्षिक चुनाव के लिए अधिसूचना छह मार्च को जारी की जाएगी। नामांकन 13 मार्च तक जारी रहेंगे। नामांकन पत्रों की जांच 14 मार्च को होगी और नामांकन वापसी की अंतिम तिथि 16 मार्च रखी गई है। इन दोनों राज्यों में मतदान 23 मार्च को सुबह नौ से शाम चार बजे तक होंगे। वोटों की गिनती भी इसी दिन होगी और चुनाव प्रक्रिया 25 मार्च तक संपन्न करा दी जाएगी।</p>
<p> </p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 27 Feb 2023 16:28:51 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>  गोदाम खाली, दूसरे राज्यों से मंगा रहे गेहूं</title>
                                    <description><![CDATA[कोटा संभाग में इस बार सरकारी केन्द्रों पर गेहूं की खरीद नहीं हो पाई। इस कारण यहां के गोदाम खाली रहे। अब एफसीआई के अधिकारी दूसरे राज्यों से गेहूं मंगा रहे हैं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/godown-empty--wheat-is-being-ordered-from-other-states/article-11556"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-06/truck.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। डीसीएम रोड  स्थित एफसीआई के गोदाम खाली होने के कारण अधिकारियों को चिंता हो रही है। कोटा संभाग में इस बार सरकारी केन्द्रों पर गेहूं की खरीद नहीं हो पाई। इस कारण यहां के गोदाम खाली रहे। अब एफसीआई के अधिकारी दूसरे राज्यों से गेहूं मंगा रहे हैं। मंगलवार को गोदाम के बाहर ट्रको की कतार लगी हुई थी। ट्रक चालक अपनी बारी का इंतजार कर रहे थे।<br /><br />इस साल मार्च माह की शुरुआत में मंडी में गेहूं की आवक शुरू हो गई थी। इस दौरान गेहूं के दामों में काफी उछाल आ गया था। इस कारण अधिकांश किसानों ने अपना गेहूं बाजार में ही बेचा। कोटा संभाग के किसी भी एफसीआई के केंद्र पर गेहूं बेचने के लिए एक भी किसान नहीं पहुंचा। खरीद अवधि के दौरान सारे केंद्र खाली पड़े रहे। गेहूं की खरीद नहीं होने पर इस बार गोदाम खाली ही रह गए। अब एफसीआई को हरियाणा, पंजाब से गेहूं मंगवाना पड़ रहा है। रोजाना काफी संख्या में ट्रक इन राज्यों से गेहूं लाकर कोटा पहुंच रहे हैं। इस समय गोदामों के बाहर ट्रकों की लाइन लगी हुई है। गोदामों के बनने के बाद गेहूं का आवंटन राज्य सरकार को किया जाएगा। जहां से यह राशन के माध्यम से बेचा जाएगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 07 Jun 2022 18:32:01 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[kota]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>महंगाई का ठीकरा राज्यों पर फोड़ रहे पीएम: डोटासरा</title>
                                    <description><![CDATA[भाजपा शासन में 300 से अधिक मंदिर टूटे: डोटासरा]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/jaipur-news--pm-modi-blaming-states-for-inflation--dotasara/article-8800"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-04/1d1.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। महंगाई के मुद्दे पर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने एक बार फिर से पीएम मोदी और केंद्र सरकार पर निशाना साधा है। पार्टी मुख्यालय पर मीडिया से बात करते हुए डोटासरा ने कहा कि पीएम नरेंद्र मोदी ने कल विभिन्न राज्यों के मुख्यमंत्रियों से स्टेट वेट कम करने को कहा है। मोदी महंगाई का ठीकरा राज्यों के सिर पर फोड़ना चाहते हैं। मोदी ऐसा पहली बार नहीं कर रहे, कोरोना काल में भी उन्होंने राज्यों को अपने हाल पर छोड़ दिया था। पेट्रोल डीजल पर बोलने से पहले उनको एक्साइज ड्यूटी पर सोचना चाहिए था, तो उन्हें अपनी नाकामी का ठीकरा दूसरों पर नहीं फोड़ना पड़ता। राजस्थान सरकार ने तो 20 जनवरी को ही वेट कम कर दिया था। मोदी ने देश में महंगाई कम करने, किसानों की आमदनी दुगने करने और ईआरसीपी को राष्ट्रीय परियोजना का दर्जा देने का वादा किया था, लेकिन इन वादों को आज तक नहीं निभाया। ईआरसीपी पर जल शक्ति मंत्री गजेंद्र शेखावत जो राजस्थान के रहने वाले हैं, मीटिंग लेने आए हुए हैं लेकिन राजस्थान की जनता के जख्मों पर नमक छिड़कने का काम कर रहे हैं। प्रदेश के 13 जिले परियोजना के इंतजार में बैठे हैं और वह खुद होटल में मिनरल वाटर पी रहे हैं।<br />बीजेपी के आरोप पत्र पर पलटवार करते हुए डोटासरा ने कहा कि भाजपा ने आरोप पत्र को लेकर की गई प्रेस कॉन्फ्रेंस में नेता प्रतिपक्ष गुलाबचंद कटारिया को जिस तरह नजरअंदाज किया, उससे पता चलता है कि बीजेपी में सब कुछ सही नहीं है। भाजपा तो धर्म के नाम पर वोट लेने के लिए केवल ध्रुवीकरण के प्रयासों में जुटी हुई है। आरएसएस एक दीमक की तरह है जो देश में जहर घोलने का काम कर रही है। भाजपा नेता मुझे और मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को टारगेट बना रहे हैं। राजस्थान में कानून व्यवस्था पूरी तरह ठीक है।</p>
<p><strong>भाजपा शासन में 300 से अधिक मंदिर टूटे</strong><br />राजगढ़ घटना पर जारी विवाद को लेकर डोटासरा ने कहा कि जब भाजपा शासन में 300 से अधिक मंदिर टूटे थे, तब घनश्याम तिवाड़ी ने अपनी ही सरकार पर आरोप लगाए थे। राजगढ़ मुद्दे पर भाजपा नेता लोगों को भ्रमित करने का काम कर रहे हैं, जबकि जनता को भी पता है, कि वहां भाजपा का बोर्ड है। मूर्ति पूजा के विरोधी आर्य समाज से आने वाले भाजपा सांसद सुमेधानंद अलवर की राजनीति में कूद पड़े हैं। सांसद किरोड़ी लाल मीणा के आरोपों पर कहा कि किरोड़ी डबल एजेंडे पर काम करते हुए वसुंधरा के नेतृत्व को चुनौती देने और मोदी अमित शाह एजेंडे पर काम कर रहे हैं। किरोड़ी की बातों को उनकी पार्टी ही गंभीरता से नहीं लेती। कांग्रेस चिंतन शिविर की तैयारियों पर डोटासरा ने कहा कि शिविर की तैयारियों में संगठन जुटा हुआ है। शिविर में होने वाले मंथन से बहुत कुछ बाहर निकल कर आएगा। हम चाहते हैं कि राहुल गांधी को अध्यक्ष की जिम्मेदारी सौंपी जाए क्योंकि,वह एक ऐसे नेता है जो मोदी सरकार से मुकाबला कर सकते हैं।</p>
<p><strong>डोटासरा ने छत्तीसगढ़ पीसीसी चीफ का स्वागत किया</strong><br />जयपुर: छत्तीसगढ़ पीसीसी चीफ मोहन मरकाम गुरुवार को पीसीसी मुख्यालय पहुंचे। पीसीसी चीफ गोविंद सिंह डोटासरा ने उनका स्वागत किया। इस अवसर पर पीसीसी पदाधिकारियों ने मरकाम की अगुवाई की। गौरतलब है कि मरकाम निजी यात्रा पर जयपुर आए हुए हैं। इसी बीच पीसीसी पहुंचकर डोटासरा और पदाधिकारियों से मुलाकात करते हुए संगठन की विषयों पर चर्चा की।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 28 Apr 2022 16:46:14 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>जिन राज्यों में भाजपा की सरकारें हैं वहां रामनवमी पर दंगे भड़के: गहलोत</title>
                                    <description><![CDATA[गहलोत ने बीजेपी पर साधा निशाना]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/jaipur-news--riots-broke-out-on-ram-navami-in-the-states-where-there-are-bjp-governments--in-rajasthan--all-the-communities-together-celebrated-the-festival-of-ram-navami--gehlot-targeted-bjp/article-7859"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-04/ashok02.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने बीजेपी पर निशाना साधते हुए कहा कि जिन राज्यों में भाजपा की सरकारें हैं वहां रामनवमी पर दंगे भड़के। राजस्थान में सभी समुदायों ने साथ मिलकर रामनवमी का त्यौहार मनाया एवं रामनवमी के जुलूसों का हिन्दू, मुस्लिम, सिख समेत तमाम धर्मों, वर्गों के लोगों ने स्वागत किया। भाजपा को राजस्थान के लोगों की एकता एवं सौहार्दपूर्ण माहौल से ही परेशानी है। ये अफसोस कर रहे हैं कि प्रदेश में रामनवमी का त्यौहार शांतिपूर्ण ढंग से कैसे मन गया।</p>
<p><br />भाजपा के नेतागण लगातार प्रयास कर रहे हैं कि कैसे प्रदेश में सांप्रदायिक माहौल बनाया जाए। इसलिए कभी ये करौली में जाकर भ्रामक बातें करते हैं तो कभी राज्यपाल महोदय को ज्ञापन सौंपते हैं जिससे तनाव बना रहे। परन्तु प्रदेश सरकार ने प्रशासन को चाक चौबंद रहने के निर्देश दिए हैं जिससे कोई भी अप्रिय घटना ना हो सके। कोई भी व्यक्ति यदि राजस्थान की शांति व्यवस्था को भंग करने का प्रयास करेगा तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी चाहे वो किसी भी पार्टी या वर्ग से संबंध रखता हो।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 13 Apr 2022 16:34:41 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Administrator]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>पूर्वोत्तर ... 370 की राह!</title>
                                    <description><![CDATA[प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पूर्वोत्तर के राज्यों को लेकर एक साहसिक निर्णय कर डाला। उन्होंने साठ के दशक से लागू सशस्त्र बल विशेष अधिकार अधिनियम (अफस्पा) के दायरे को कम कर दिया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/india-gate/modi-took-decision-about-the-states-of-northeast/article-7304"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-04/4954654.jpg" alt=""></a><br /><p>प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पूर्वोत्तर के राज्यों को लेकर एक साहसिक निर्णय कर डाला। उन्होंने साठ के दशक से लागू सशस्त्र बल विशेष अधिकार अधिनियम (अफस्पा) के दायरे को कम कर दिया। यह एक बहुप्रतिक्षित निर्णय। जिसके लिए इस क्षेत्र के नागरिकों की लंबे समय से मांग थी। यह कदम वैसा ही। जैसे अगस्त 2019 में केन्द्र ने जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद- 370 को खत्म किया। लेकिन इसके मायने बिल्कुल साफ। अफस्पा को सिमित करने का मतलब पूर्वोत्तर में शांति स्थापित हो रही। यानी जो क्षेत्र दशकों तक अलगाववाद एवं उग्रवाद के लिए जाना जाता रहा। वहां सरकार उसे काबू करने में सफल। यह मोदी सरकार के लिए भी एक उपलब्धि। पूर्वोत्तर के राज्य वैसे भी बाकी देश से एक तरह से कटा हुआ ही महसूस करते रहे। पीएम मोदी ने पद संभालने के बाद इसमें बदलाव किए। अपने हर मंत्री को वहां जाकर समस्याओं को समझने की मानो ड्यूटी ही लगा दी। फिर वहां के ढांचागत क्षेत्र पर गौर किया। परिणाम सामने।</p>
<p><strong>मुलाकातों का दौर!</strong><br />वसुंधरा राजे का दिल्ली में पीएम मोदी समेत अन्य वरिष्ठ पार्टी नेताओं से मुलाकातों का दौर। इस बीच, पार्टी अध्यक्ष जेपी नड्डा का प्रदेश में दौरा भी हो गया। यह अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव की तैयारियों का संकेत। इस बीच, नेतृत्व स्पष्ट संकेत दे रहा। इस बार सीएम फेस को चुनाव से पहले आगे नहीं किया जाएगा। सो, राजे की नई दिल्ली में सक्रियता का यही बड़ा कारण। राजे समर्थक मांग कर रहे। उन्हें मुख्यमंत्री पद का प्रत्याशी घोषित किया जाए। लेकिन आलाकमान अपनी तरह से सोच रहा। संकेतों की मानें तो राजस्थान को लेकर फैसला गुजरात विधानसभा चुनाव बाद। तब तक सभी संभावितों की महत्वाकांक्षाएं भी सामने आ जाएंगी। आलाकमान यह देख, सुन रहा। लेकिन अंतिम निर्णय पार्टी का ससंदीय बार्ड करेगा। यह प्रदेश अध्यक्ष सतीश पूनिया कई बार कह चुके। फिर गफलत किस बात की? लेकिन यही राजनीति। लोकतंत्र में सभी को अपनी इच्छा जाहिर करने का हक। अब किसी को दिक्कत हो रही तो यह उसकी बला से!</p>
<p><strong>टॉप गियर में डिप्लोमेसी!</strong><br />भारत की डिप्लोमेसी इन दिनों मानो टॉप गियर में। रूसी और अमरीकी अधिकारी भारत आ रहे। नेपाली पीएम भी भारत दौरे पर। तो श्रीलंका की ऐन वक्त पर भारत ने ही मदद की। वहीं, पाक पीएम भारत की विदेश नीति की सराहना कर चुके। इस बीच, रूस-यूक्रेन युद्ध जारी। रूस ने तो झगड़ा सुलझाने के लिए भी भारत से आग्रह भी कर डाला। तो अमरीका, यूरोप एवं नाटो तरह-तरह से भारत को रूस से दूर रहने के लिए अनुनय-विनय कर रहे। साथ में चेतावनी भी। लेकिन इन दिनों भारत का अपना सुर ताल। यहां तक कि ओआईसी के सम्मेलन से चीनी विदेश मंत्री बिन बुलाए अचानक भारत आ पहुंचे। उनसे भारत की ओर से दो टूक। बहुत हुआ। सीमा से सेना की तादात कम करें। तभी तनाव कम होने की उम्मीद करें। पीएम मोदी भारत को मैन्यूफेक्चरिंग हब बनाने पर आमादा। आबादी के लिहाज से दुनिया के लिए भारत बहुत बड़ा बाजार। इससे कौन इनकार करेगा। असल में, यही भारत की ताकत भी।</p>
<p><strong>तैयारी 2024 की!</strong><br />उत्तर प्रदेश में भले ही विधानसभा चुनाव निपटकर नई सरकार का गठन हो गया हो। लेकिन भाजपा ने आम चुनाव 2024 की तैयारी शुरू भी कर दी। भाजपा का टारगेट 80 में से 75 सीटों का। सो, बसपा के बजाए अब फोकस सपा पर। इस बार सपा की सीटें ढाई गुना हो गईं। भाजपा भी चुनावी आंकड़ों को खंगाल रही। इसीलिए शिवपाल यादव के बागी तेवर अखिलेश यादव को परेशान कर रहे। राज्यसभा की होने वाली 11 सीटों के चुनाव पर इसका असर संभव। बसपा का 13 फीसदी वोट अभी भी मायावती के साथ। जबकि भाजपा का थोड़ा बढ़ा। वह कहां से प्लस हुआ। यह देखने वाली बात। सो, सपा के यादव वोट बैंक में सेंध की अभी से भाजपा द्वारा कोशिश। अखिलेश अपनी ही बिरादरी के नेताओं को भाजपा का समर्थन करने के आरोप में सपा से निकाल रहे। यह भाजपा के सफल होने का संकेत। चर्चा यहां तक। कहीं, शिवपाल उपचुनाव वाली आजमगढ़ सीट से ही सपा के खिलाफ न उतर जाएं!</p>
<p><strong>फिर खटपट की आशंका?</strong><br />राजस्थान कांग्रेस में फिर से खटपट की आशंका। आखिर खाली हो रही राज्यसभा की चार में से तीन सीटें पार्टी के खाते में जाने की उम्मीद। इनमें से एक सीट सचिन पायलट अपने समर्थक के लिए मांग रहे। जिस पर सीएम गहलोत कतई राजी नहीं। हालांकि राजनीतिक नियुक्तियों में पायलट समर्थक कुछ नेता कुर्सी पा गए। लेकिन अब पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव परिणाम, खासकर यूपी के बाद हालात बदले हुए। कांग्रेस नेतृत्व कमजोर नजर आ रहा। राजस्थान एवं छत्तीसगढ़ में अच्छी खासी खटपट हो चुकी। जिसे मुश्किल से संभाला गया। वहीं, महाराष्ट्र में दो दर्जन कांग्रेस विधायक सोनिया गांधी से मिलने का समय मांग रहे। वहां, एमवीए सरकार में सब कुछ ठीक नहीं चल रहा। शिवसेना एवं एनसपी के नेता केन्द्रीय एजेंसिंयों के रडार पर। भाजपा हमलावर। कांग्रेस यह सब चुपचाप देख रही। ऐसे में यदि राजस्थान में कुछ भी हुआ। तो पार्टी का नुकसान होना संभव। जबकि यूपी में भाजपा की वापसी से कई के अरमान ठंडे बस्ते में चले गए।</p>
<p><strong>शतकवीर भाजपा!</strong><br />तो उच्च सदन में भाजपा सांसदों का आंकड़ा सौ तक पहुंच गया। करीब तीन दशक बाद राज्यसभा में यह स्थिति बनी। साल 1989 में कांग्रेस के 108 सांसद हुआ करते थे। उसके बाद से उसका ग्राफ गिरना शुरू हुआ। तो अब 33 के आसपास आ गई। जबकि भाजपा के 2014 में 55 सांसद थे। जो अब सौ से पार हो गए। असल में, विपक्ष, खासतौर से कांग्रेस इससे काफी असहज। क्योंकि अनुच्छेद-370 और राम मंदिर पर कोर्ट का निर्णय। काशी विश्वनाथ धाम का पुनर्निमाण। सरकार सीएए तक आ गई। अब आगे कॉमन सिविल कोड की संभावना। जिसे कांग्रेस के लिए रोक पाना मुश्किल। साल के अंत तक एनडीए एवं यूपीए के आंकड़ों में बदलाव संभव। हां, क्षेत्रीय दल ज्यादा ताकतवर होंगे। लेकिन कांग्रेस के और नीचे जाने की संभावना। वहीं, क्षेत्रीय दल भाजपा का कितना विरोध कर पाएंगे? इसमें संदेह! क्योंकि कई बार क्षत्रपों ने सरकार का साथ दिया। ऐसे में कांग्रेस का हर वक्त विपक्ष के नाम पर यह दल साथ देंगे?</p>
<p><strong>- दिल्ली डेस्क</strong><br /><br /><br /><br /></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>इंडिया गेट</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 04 Apr 2022 11:48:06 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>पर्यावरण चिंतन: कृषि प्रधान राज्यों में भूजल प्रदूषण की समस्या</title>
                                    <description><![CDATA[भूमि की सतह से प्रदूषित सामग्री मिट्टी के माध्यम से आगे बढ़ सकती है और भूजल में घुल सकती है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/opinion/environmental-contemplation--the-problem-of-groundwater-pollution-in-agrarian-states/article-6772"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-03/pollution.jpg" alt=""></a><br /><p>जल प्रदूषित तब होता है जब मानव निर्मित उत्पाद जैसे गैसोलीन, तेल, सड़क लवण और रसायन भूजल में मिल जाते हैं और इसे मानव उपयोग के लिए असुरक्षित और अनुपयुक्त बना देते हैं। भूमि की सतह से प्रदूषित सामग्री मिट्टी के माध्यम से आगे बढ़ सकती है और भूजल में घुल सकती है।  उदाहरण के लिए, कीटनाशक और उर्वरक समय के साथ भूजल आपूर्ति में अपना रास्ता बना लेते हैं जैसा कि भारत के कई कृषि प्रधान राज्यों में देखा गया है।</p>
<p><br />डीडीटी, बीएचसी, कार्बामेट, एंडोसल्फान आदि भारत में उपयोग किए जाने वाले सबसे आम कीटनाशक हैं। लेकिन, कीटनाशक और उर्वरक प्रदूषण के लिए भूजल की भेद्यता मिट्टी की बनावट, उर्वरक और कीटनाशक के उपयोग के पैटर्न, उनके क्षरण उत्पादों और मिट्टी में कुल कार्बनिक पदार्थों द्वारा नियंत्रित होती है। जल संसाधन मंत्रालय द्वारा किए गए एक हालिया अध्ययन के विश्लेषण से पता चलता है कि भूमिगत जल के प्रदूषण के मामले में हरियाणा शीर्ष पर है, पंजाब में नाइट्रेट, कैडमियम और क्रोमियम की मात्रा सबसे अधिक है। सिंचाई के उद्देश्य से भूजल के अंधाधुंध दोहन से पंजाब, हरियाणा के कुछ हिस्सों में लवणता की समस्या पैदा हो गई है। भूजल स्तर में गिरावट से यूरेनियम संदूषण बढ़ गया है। भूजल तालिका में गिरावट ऑक्सीकरण की स्थिति को प्रेरित करती है। नतीजतन, उथले भूजल में यूरेनियम संवर्धन बढ़ जाता है। सेंटर फॉर साइंस एंड एनवायरनमेंट द्वारा गुजरात, आंध्र प्रदेश और हरियाणा में आठ स्थानों से किए गए एक हालिया सर्वेक्षण में सीसा, कैडमियम, जस्ता और पारा जैसी भारी धातुओं के निशान मिले हैं।</p>
<p><br />लुधियाना शहर में इसके पीने के पानी का एकमात्र स्रोत उथला जलभृत प्रदूषित है जो 1300 उद्योगों से अपशिष्ट प्राप्त करता है। पश्चिम बंगाल के दो करोड़ लोगों के लिए आर्सेनिक संदूषण दुनिया में अब तक का सबसे बड़ा सामूहिक विषाक्तता का मामला है। भूजल प्रदूषण के सार्वजनिक स्वास्थ्य परिणामों का कोई अनुमान नहीं है क्योंकि इसमें पद्धतिगत जटिलताएं और रसद संबंधी समस्याएं शामिल हैं। कीटनाशक जहरीले या कैंसरकारी होते हैं। आमतौर पर, कीटनाशक लीवर और तंत्रिका तंत्र को नुकसान पहुंचाते हैं। लीवर में ट्यूमर बनने का मुख्य कारण है।</p>
<p><br />प्रदूषण या गुणवत्ता में गिरावट के कारण पानी की उपलब्धता में कमी हो सकती है। अतिदोहन के कारण होने वाली कमी की तुलना में इस कमी की भरपाई होना कहीं ज्यादा मुश्किल है। कृषि व अन्य क्षेत्रों के अकेन्द्रित प्रदूषण स्रोत एवं केन्द्रित प्रदूषण स्रोत मिलकर एक प्रमुख जल प्रबंधन चुनौती प्रस्तुत करते हैं। हालांकि गुणवत्ता की सभी समस्याएं मानव जन्य नहीं हैं। इसका सबसे अच्छा उदाहरण बांग्लादेश एवं पश्चिम बंगाल में भूजल से पैदा होने वाली व्यापक आर्सेनिक विषाक्तता है। गंगा-मेघना- ब्रह्मपुत्र नदी तंत्र के जलोढ़ डेल्टाई अवसाद से प्राप्त भूजल में आर्सेनिक प्राकृतिक रूप से पाया जाता है। इस क्षेत्र का तकरीबन 75000 वर्ग कि.मी. भूभाग उच्च आर्सेनिक सान्द्रता वाले भूजल से प्रभावित माना जाता है।</p>
<p><br />भूजल से संबंद्ध उभरती व्यापक समस्याओं के बावजूद यह अभी भी निश्चित नहीं है कि भूजल उत्खनन और प्रदूषण की समस्या कितनी विस्तृत है। ऐसे ब्लॉकों की संख्या से सम्बंधित सरकारी आंकड़े गुमराह करने वाले हो सकते हैं जहां पानी का दोहन उसके पुनर्भरण के बराबर है या उससे भी ज्यादा हो रहा है। ऐसा इसलिए कि सरकार द्वारा प्रकाशित दोहन और पुनर्भरण के आकलनों की विश्वसनीयता संदेह के घेरे में है। भूजल की गुणवत्ता में गिरावट को रोकने और ठीक करने के उपायों को विकसित करने की दिशा में पहला कदम जल गुणवत्ता निगरानी के माध्यम से वास्तविक स्रोत/कारण, प्रकार और प्रदूषण के स्तर को समझने के लिए विश्वसनीय और सटीक जानकारी उत्पन्न करना है। हालांकि, देश में कुछ अवलोकन स्टेशन हैं जो पानी की गुणवत्ता के लिए सभी आवश्यक मानकों को कवर करते हैं और मगर इनके  प्राप्त आंकड़े पानी की गुणवत्ता की स्थिति पर निर्णायक नहीं हैं। महंगी जल प्रौद्योगिकियां: डब्ल्यूक्यूएम में महंगे और परिष्कृत उपकरण शामिल होते हैं जिन्हें संचालित करना और बनाए रखना मुश्किल होता है और डेटा एकत्र करने, विश्लेषण और प्रबंधन में पर्याप्त विशेषज्ञता की आवश्यकता होती है। चूंकि भारत में जल प्रौद्योगिकी अभी भी उन्नत नहीं है, इसलिए इस बात की बहुत संभावना है कि उपलब्ध डेटा कम विश्वसनीय हो। इनकी मौजूदा कार्यप्रणाली प्रदूषण के विभिन्न स्रोतों की पहचान करने के लिए अपर्याप्त है। पानी की गुणवत्ता पर डेटा के साथ पानी की आपूर्ति पर डेटा का एकीकरण, जो विभिन्न सामाजिक, आर्थिक और पर्यावरणीय उद्देश्यों को पूरा करने के लिए पानी की उपलब्धता के आकलन के दृष्टिकोण से बहुत महत्वपूर्ण है, शायद ही कभी किया जाता है। पीने के पानी और कृषि के लिए भूजल पर निर्भर रहने वाले लाखों लोगों की आजीविका वर्तमान में खतरे में है और यह स्थिति और खराब हो जाएगी यदि सतत अभ्यास जारी रहे। उत्तर-पश्चिम भारत में जलोढ़ भारत-गंगा के मैदान विशेष रूप से अत्यधिक दूषित हैं, विशेष रूप से पंजाब और हरियाणा में कृषि प्रधान ‘‘ब्रेडबास्केट’’ क्षेत्रों में। लंबे समय के लिए, नीतियों को  जल आपूर्ति और प्रदूषण नियंत्रण से संबंधित लाइन एजेंसियों की वैज्ञानिक क्षमताओं के निर्माण पर ध्यान केंद्रित करने की आवश्यकता है।<br /><strong>-सत्यवान 'सौरभ'</strong><br /><strong>(ये लेखक के अपने विचार हैं)</strong><br /><br />अतिदोहन के कारण होने वाली कमी की तुलना में इस कमी की भरपाई होना कहीं ज्यादा मुश्किल है। कृषि व अन्य क्षेत्रों के अकेन्द्रित प्रदूषण स्रोत एवं केन्द्रित प्रदूषण स्रोत मिलकर एक प्रमुख जल प्रबंधन चुनौती प्रस्तुत करते हैं। हालांकि गुणवत्ता की सभी समस्याएं मानव जन्य नहीं हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>ओपिनियन</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/opinion/environmental-contemplation--the-problem-of-groundwater-pollution-in-agrarian-states/article-6772</link>
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                <pubDate>Sat, 26 Mar 2022 15:49:14 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Administrator]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>यूपी सहित चार राज्यों में जीत पर जयपुर भाजपा ऑफिस में बुलडोजर पर जश्न</title>
                                    <description><![CDATA[ भारतीय जनता पार्टी के पांच राज्यों में से चार राज्यों में चुनाव में जीत की ओर अग्रसर होने के बाद भाजपा के कार्यकर्ता जयपुर प्रदेश भाजपा कार्यालय पहुंच गए और जमकर जीत का जश्न मनाया ।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/celebration-on-bulldozer-in-jaipur-bjp-office-on-victory-in-four-states-including-up/article-5867"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-03/bjp-j.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। भारतीय जनता पार्टी के पांच राज्यों में से चार राज्यों में चुनाव में जीत की ओर अग्रसर होने के बाद भाजपा के कार्यकर्ता जयपुर प्रदेश भाजपा कार्यालय पहुंच गए और जमकर जीत का जश्न मनाया । यूपी में सीएम योगी आदित्यनाथ को वहां के लोग बुलडोजर के नाम से जानते हैं, इसलिए भाजपा ऑफिस पर भाजपा कार्यकर्ता दो बुलडोजर लेकर भी पहुंच गए और बुलडोजर पर चढ़कर जश्न मनाया। भाजपा की प्रदेश अध्यक्ष सतीश पूनिया सहित भाजपा के अन्य प्रदेश पदाधिकारी व नेता जश्न में कार्यकर्ताओं के साथ शामिल हुए। भाजपाइयों ने ढोल नगाड़ों की थाप पर जमकर मोदी मोदी के नारे भी लगाए</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 10 Mar 2022 14:18:16 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Administrator]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>चार राज्यों में बीजेपी और 1 में आप, कांग्रेस का सूपड़ा साफ</title>
                                    <description><![CDATA[बीजेपी यूपी, उत्तराखंड, गोवा और मणिपुर में सत्ता पर काबिज होते दिख रही है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/bjp-in-four-states-and-aap-in-one--congress-clean/article-5849"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-03/05.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। पांच राज्यों के चुनाव परिणाम के दिन बीजेपी के तमाम नेता और कार्यकर्ताओं में खुशी का माहौल है। दरअसल उत्तर प्रदेश, पंजाब, उत्तराखंड, मणिपुर और गोवा में विधानसभा चुनाव के नतीजे सबके सामने है। रूझानों के अनुसार बीजेपी (BJP) एक बार फिर यूपी, उत्तराखंड, गोवा और मणिपुर में सत्ता पर काबिज होते दिख रही है। यानी साफ लफ्जों में कहा जा सकता है कि चार राज्यों में बीजेपी सरकार बना रही है। जबकि पंजाब में बड़े धमाके के साथ आम आदमी पार्टी (AAP) सरकार बनाने जा रही है।  पंजाब में आप को स्पष्ट बहुमत मिल गया है। वहीं उत्तर प्रदेश में बीजेपी को भी स्पष्ट बहुमत मिल गया है।  रूझान नतीजों में तब्दील होते है तो योगी एक बार फिर पूर्ण बहुमत से सरकार बनाएंगे।  <br /><br /> उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव की मतगणना के शुरुआती रुझानों में भाजपा बढ़त बनाए हुए है। प्रदेश विधानसभा की 403 में से 260 से ज्यादा सीटों पर भाजपा आगे चल रही है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ गोरखपुर सदर सीट से और सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव करहल सीट से तथा उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य सिराथू सीट से आगे चल रहे हैं। सपा के नेता मोहम्मद आजम खान रामपुर विधानसभा सीट से आगे चल रहे हैं।<br /><br />बात पंजाब की करे तो, पंजाब विधानसभा चुनाव के नतीजे साफ है। पंजाब में आप 80 से ज्यादा सीटें लाकर सरकार बनाती नजर आ रही है। नतीजों से पहले ही आम आदमी पार्टी के मुख्यालय में जश्न शुरू हो गया है। पंजाब में आम आदमी पार्टी को बंपर जीत मिलती दिख रही है, तो अब चरणजीत सिंह चन्नी अपना इस्तीफा जल्द ही सौंप सकते हैं। खबर है कि चरणजीत सिंह चन्नी राज्यपाल से मुलाकात कर अपना इस्तीफा सौंप सकते है।<br /><br />वहीं उत्तराखंड में विधानसभा चुनाव के लिए वोटों की गिनती जारी है। रुझानों में बीजेपी ने बहुमत हासिल कर लिया है। लेकिन मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी अपनी खटीमा सीट से पीछे चल रहे हैं। वे इस सीट से 2 बार के विधायक हैं। वहीं, कांग्रेस के सीएम चेहरा हरीश रावत भी लाल कुआं सीट से पीछे चल रहे हैं।<br /><br />गोवा की 40 और मणिपुर की 60 सीटों के लिए मतगणना चल रही है. मणिपुर और गोवा में भाजपा बहुमत के करीब जाती दिखाई दे रही है। गोवा में 18 सीटों पर जीत के रुझान से बीजेपी आगे चल रही है। जबकि कांग्रेस को गोवा में 11 सीटों पर बढ़त का रुझान आ रहा है।  जबकि टीएमसी 4 और आप 2 और अन्य 5 रूझानों में बढ़त बनाए हुए है। इसी प्रकार मणिपुर में बीजेपी 31, कांग्रेस 07 और अन्य 22 रूझान आ रहे है। <br /><br /></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 10 Mar 2022 12:32:28 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Administrator]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>चुनाव परिणाम से पहले कांग्रेस-बीजेपी के बयान: प्रताप सिंह दावा -पांच राज्यों में एग्जिट पोल के विपरीत आएंगे परिणाम, जबकि अरुण सिंह का कहना - पांच में से चार राज्यों में प्रचंड बहुमत से बनेगी भाजपा सरकार</title>
                                    <description><![CDATA[10 मार्च बुधवार को पांच राज्यों के चुनाव परिणामों का इंतजार खत्म होने जा रहा है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/congress-bjp-statements-on-election-results--pratap-singh-claims---exit-polls-in-five-states-will-have-opposite-results--while-arun-singh-says---bjp-government-will-be-formed-with-a-thumping-majority-in-four-out-of-five-states/article-5786"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-03/pratap-singh-khachariyawas1.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। 10 मार्च बुधवार को पांच राज्यों के चुनाव परिणामों का इंतजार खत्म होने जा रहा है। तमाम राजनीतिक पार्टियां एग्जिट पोल के बाद अपने-अपने स्तर पर जीत के दावें कर रही है। हालांकि पांच राज्यों के चुनाव परिणामों में मुख्य फोकस यूपी और पंजाब चुनाव परिणामों पर नजर आ रहा है। राजस्थान में भी मार्च में पांच राज्यों के चुनाव परिणामों से पहले बयानों की गर्मी महसूस की जा सकती है। जहां कांग्रेसी नेता और गहलोत सरकार में मंत्री प्रताप सिंह परिणाम एग्जिट पोल के विपरित बता रहे है, वहीं बीजेपी राजस्थान के प्रभारी  अरुण सिंह पांच में से चार राज्यों में प्रचंड बहुमत से सरकार बनाने का दावा कर रहे है। हालांकि स ये तो चुनाव परिणाम के बाद ही तय होगा कि परिणाम एग्जिट पोल के विपरित जाते है या फिर बीजेपी के दावे सच साबित होते है।<br /><br /><br /><strong>पांच राज्यों में एग्जिट पोल के विपरीत आएंगे परिणाम,जनता भाजपा को सिखाएगी सबक: खाचरियावास</strong><br /> केबिनेट मंत्री प्रताप सिंह खाचरियावास ने कहा कि पांचों राज्यों में एग्जिट पोल के विपरीत परिणाम आएंगे और भाजपा जनता को सबक सिखाएगी। वहीं, दिव्या मदेरणा के विधानसभा में मंत्री के खिलाफ दिए बयान पर खाचरियावास ने समर्थन किया है। खाचरियावास के अनुसार 5 राज्यों के चुनाव परिणाम गुरुवार को आएंगे। विधानसभा के बाहर मीडिया से बात करते हुए उन्होंने कहा कि जनता ने अपने मताधिकार के जरिए तय कर लिया है की किसकी सरकार बनेगी और इसका खुलासा चुनाव परिणाम सामने आने के बाद हो जाएगा। चुनाव से हटकर बात करें तो सदन में कांग्रेस विधायक दिव्या मदेरणा की ओर से अपनी ही सरकार के जलदाय मंत्री को रबर स्टैंप बताने और अधिकारियों के खिलाफ मुखर होने के मामले में खाचरियावास ने मदेरणा का समर्थन किया। खाचरियावास से कहा कि दिव्या मदेरणा जनता की आवाज सदन में उठाती है और यदि अधिकारियों के कारण किसी काम में कोई कमी रह गई है तो उसे दुरुस्त करवाने के लिए आवाज उठाना सही है। अधिकारियों को समझ लेना चाहिए कि विधायक और जनप्रतिनिधियों की बात सुने, क्योंकि वह जनता की बात कहते हैं और जनता के लिए लड़ते हैं।</p>
<p><strong>पांच में से चार राज्यों में प्रचंड बहुमत से बनेगी भाजपा सरकार: अरुण सिंह</strong><br />वहीं भाजपा के प्रदेश प्रभारी अरुण सिंह ने अपने जयपुर दौरे के दौरान मीडिया से बातचीत में कहा है कि देश के 5 राज्यों में हुए चुनाव में से चार राज्यों में भारतीय जनता पार्टी प्रचंड बहुमत के साथ सरकार बना रही है । उन्होंने कहा कि यूपी में 300 से ज्यादा सीटों पर भाजपा जीत रही है । वहीं उत्तराखंड गोवा और मणिपुर में भी भाजपा राज आ रहा है। हालांकि उन्होंने पंजाब चुनाव में भाजपा की एक तरह से हार होने के संकेत दे दिए हैं। पंजाब को लेकर केवल इतना कहा कि भाजपा वहां बढ़ोतरी कर रही है। अरुण सिंह बुधवार को भाजपा के विधानसभा चुनाव प्रवासी सदस्यों की बैठक लेने जयपुर आए हुए हैं। इस बैठक में यूपी सहित अन्य राज्यों में राजस्थान से गए भाजपा कार्यकर्ताओं और नेताओं से फीडबैक लेकर रिपोर्ट तैयार की जा रही है कि इन पांच राज्यों में भाजपा की क्या स्थिति रहेगी ।यह रिपोर्ट बुधवार शाम को ही केंद्रीय आलाकमान को भेजी जाएगी ।बैठक में भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष सतीश पूनिया और संगठन महामंत्री चंद्रशेखर भी मौजूद थे।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 09 Mar 2022 16:12:32 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Administrator]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>5 राज्यों के चुनाव</title>
                                    <description><![CDATA[उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के सातवें चरण के मतदान के बाद पांच राज्यों के चुनावों की मतदान प्रक्रिया समाप्त हो गई और पूरे देश को 10 मार्च का इंतजार है, जब चुनावी नतीजे सामने आ जाएंगे। जिन राज्यों में चुनाव सम्पन्न हुए हैं, उनमें उत्तर प्रदेश, उत्तराखण्ड, पंजाब, गोवा और मणिपुर शामिल हैं। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/opinion/voting-end-to-election-of-5-states/article-5675"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-03/up02-copy.jpg" alt=""></a><br /><p>उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के सातवें चरण के मतदान के बाद पांच राज्यों के चुनावों की मतदान प्रक्रिया समाप्त हो गई और पूरे देश को 10 मार्च का इंतजार है, जब चुनावी नतीजे सामने आ जाएंगे। जिन राज्यों में चुनाव सम्पन्न हुए हैं, उनमें उत्तर प्रदेश, उत्तराखण्ड, पंजाब, गोवा और मणिपुर शामिल हैं। अपवाद स्वरूप एक-दो राज्यों को छोड़कर चुनाव शांतिपूर्ण ढंग से सम्पन्न हुए और इस बार मतदान के दौरान किसी भी प्रकार की गड़बड़ी की भी खबर नहीं मिली। इसका श्रेय चुनाव आयोग को दिया जा सकता है। हालांकि किसी भी छोटे-बड़े राज्य का चुनाव वहां की जनता के लिए महत्वपूर्ण होता है परन्तु राजनीतिक दृष्टि से देखा जाए तो उत्तर प्रदेश जैसे सबसे बड़े राज्य के चुनाव विशेष महत्व रखते हैं, क्योंकि इसी राज्य की मार्फत देश की सत्ता हाथ लगने की डोर बंधी मानी जाती है। इसकी मुख्य वजह यह है कि यह एक अकेला राज्य है जहां सर्वाधिक लोकसभा की 80 सीटें हैं। पूरे चुनावी जंग में इस राज्य का राजनीतिक माहौल भी काफी दिलचस्प बना रहा और कुछ ऐसे चुनावी मुद्दे भी उठाए गए जो इससे पहले दिखाई नहीं पड़ते थे। जैसे कि गांवों और गरीबों की समस्याओं का खुलकर सतह पर आना और इसके लिए कल्याणकारी राज का व्यावहारिक स्वरूप।</p>
<p>देश की मोदी सरकार ने पिछले कुछ सालों में गरीबों के लिए ईंधन, गैस के सिलेण्डर से लेकर स्वास्थ्य सुविधा की आयुष्मान भारत योजना और आवास योजना चलाई उसका असर इस चुनाव में बार-बार देखने-सुनने को मिला। मुफ्त अनाज योजना का मुद्दा भी चर्चित बना रहा। विपक्षी दलों के पास इसका कोई जवाब नहीं था तो उन्होंने मतदाताओं को लुभाने के लिए कई बड़ी-बड़ी घोषणाएं कर दीं। घोषणाओं के मामले में भाजपा भी पीछे नहीं रही। जहां तक उत्तर प्रदेश का सवाल है तो इस राज्य की चुनावी राजनीति अन्य राज्यों के मुकाबले बिल्कुल अलग है। पश्चिमी और पूर्वी इलाकों में धरातली हकीकत पूरी तरह अलग है। पश्चिम में जहां जातिगत व सामुदायिक गठजोड़ों के सहारे हारजीत का फैसला होता है वहीं पूर्वी इलाकों में जातिगत गठजोड़ का सीधा रिश्ता गरीबी से रहता है। यही वजह है विपक्षी दलों ने महंगाई व बेरोजगारी को प्रमुख मुद्दा बनाया। दरअसल, उत्तर प्रदेश के चुनाव में कानून व्यवस्था का मुद्दा काफी बड़ा रहा। मुख्यमंत्री योगी ने इस मुद्दे को पकड़े रखा और मुख्य विपक्षी दल सपा को कठघरे में खड़ा करते रहे। बहरहाल चुनाव प्रक्रिया पूरी होने के साथ ही कुछ टीवी चैनलों ने एक्जिट पोलों का प्रसारण शुरू कर दिया। सालों से ऐसा चला आ रहा है, लेकिन अधिकांशत: एक्जिट पोलों का अनुमान गलत साबित होते ही देखा गया है। हालांकि ये अनुमान कुछ उत्सुकता अवश्य पैदा करते हैं, लेकिन वास्तविक नतीजे तो 10 मार्च को ही मिलेंगे।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>ओपिनियन</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 08 Mar 2022 12:02:47 +0530</pubDate>
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